Latest / Baba ji Vijay Vats / 25 Mar 26 - निंदा vs आलोचना | ठहराव का महत्व: भीतर के निरंतर प्रवाह को कैसे महसूस करें?
Transcript
- 0:18नंदलाल शर्मा निंदा और आलोचना में क्या फर्क है?
- 0:33बाबा जी? इससे पहले एक छोटा सा प्रश्न आपने
- 0:55कहा एच टू वो पानी नहीं होता उससे प्यास नहीं बुझते क्या थोड़ा सा
- 1:05विस्तार करेंगे? इसमें विस्तार करने की कोई
- 1:12आवश्यकता है नहीं। हेच टू ओह पानी का फॉर्मूलेशन,
- 1:19आपको प्यास लगी? आप कागज के ऊपर हेच टू ओह।
- 1:27लिखकर उसको हलक से नीचे पुड़िया को उतार लो।
- 1:36क्या प्यास बूझ जाएगी? कागज पर पानी लेकर वाटर लिखकर?
- 1:44जल लेकर नील लेकर आब लिखकर उसकी पुड़िया बना के हलक के नीचे उतार
- 1:55लो तो क्या प्यास बूझ जाएंगे? बस ऐसे ही राम राम करने से प्यास।
- 2:06राम राम कहने से आनंद नहीं होता, नाम जप में आनंद नहीं होता, आनंद
- 2:16मिलता है उन फिजाओं में उतरकर जहाँ आनंद है।
- 2:26आइए दूसरा क्वेश्चन में निंदा और आलोचना में क्या फर्क है?
- 2:36मैं एक कहानी सुनाया करता हूँ राजा आज के।
- 2:47राजा आज भगवान राम के दादा प्रश्न बड़ा गहरा है पुत्र राजा आज भगवान
- 3:01राम के दादा? उनकी धर्मपत्नी एक अप्सरा थी
- 3:06इंदुमती राजा आज 1 दिन घोड़ों की टकसाल में खड़े थे।
- 3:24एक संत आज्ञा भिक्षाम दे। राजा आज गुस्सा थे।
- 3:36गुड़साल में रहने वाले सेवकों ने घोड़ों को नहलाया नहीं था ठीक से।
- 3:46तो उस गुस्से में उन्होंने घोड़ों की लीद उठाई और उस भिक्षुक के
- 3:57कमंडल में डाल दिया। वह बढ़ती गई और पहाड़ बन गए।
- 4:10फिर वह आज राजा आज संत के पास गए। पूछा कीजिए पहाड़ की सिर का?
- 4:23तो संत ने कहा हम भिक्षा मांगने गए थे, किसी राजा ने हमें घोड़े
- 4:30के लिए दे दी थी और क्योंकि दान दिन दुगनी रात चौगुनी फला करता
- 4:39है, आज यह पहाड़ बन गया। तो राजा ने कहा ये तो मैं नहीं
- 4:48किया था, अब इसका क्या होगा? तुम्हें खाना पड़ेगा यह मैं कैसे
- 4:58खाऊंगा जैसे दान किया था? अब कोई कहे कि मैं इस पाप का दंड
- 5:08फल कैसे भुगतु भाई जैसे पाप किया था, जितनी श्रद्धा से पाप किया
- 5:17था। जितनी श्रद्धा से एपिस्टीन कांड
- 5:24में बच्चों की छोटी छोटी बच्चियों की हत्या की गई थी, रेप किया गया
- 5:29था, उतनी ही मस्ती से भोग हो गई। यही मुश्किल है।
- 5:38हम जितनी श्रद्धा और प्यार से पाप करते हैं, भौग स्नेह का जब मेला
- 5:45होता है तो हम भाग खड़े होते हैं, फिर किसी संत की क्षण में जाते
- 5:51हैं, मंदिर मस्जिद में जाते हैं। वहाँ फरियाद करते हैं अल्लाह के
- 5:57दरगाह में लेकिन बुग से बिना पाप का नितारा होता है।
- 6:16तो राजा आज कोई एक फार्मूला बताया, तुम्हारा प्रश्न आएगा कि
- 6:28तुम एक्टिंग करो, वैसा को साथ ले। के।
- 6:31पानी में रंग डाल के शराब पीने की रघु कुल वंशी हो, लोग तुम्हें
- 6:42गालियां निकालेंगे और निंदा करने से वे सब खा लेंगे।
- 6:51अब यहाँ से तुम्हारा प्रश्न शुरू होता है पुत्र तुम कहते हो कि मैं
- 7:04मैं भी करता हूँ तो इस निंदा में? और उस निंदा में जो अयोध्या की
- 7:16प्रजा ने की बाबा क्या फर्क है यही समझा रहा हूँ।
- 7:25ध्यान से सुनियेगा बड़ी मुश्किल से प्रश्न।
- 7:31ये प्रश्न पूछ के तुमने बड़ा अधिकार किया है, क्योंकि हमारे तो
- 7:37हिंदुस्तान में शब्दों के अर्थ और शब्दों के पैमाने बदल लिए जाते
- 7:45हैं। संत की निंदा नहीं करनी चाहिए,
- 7:52पाप लगेगा नहीं। इसको फॉर्मूलेशन मत बना लेना एक
- 8:01शब्द आता है। आलोचना वह लोचन से बना।
- 8:07लोचन शब्द का अर्थ है आंख आंख आलोचन अपनी आँखों से देखा हुआ अगर
- 8:22तुम बोलते हो। वह निंदानी और तिवा आलोचना में
- 8:25होती है। जैसे कोई व्यक्ति मेरे सामने
- 8:30हत्या करता है और मैं कहूं अदालत में जाके कहाँ किसने हत्या की है?
- 8:38मेरे सामने मैं प्रत्यक्षदर्शी हूँ।
- 8:42तो वह निंदा नहीं हो गई, वह आलोचना वह सत्य के पक्ष में एक
- 8:51गवाही हो गई और यह शुभ होती है। यह अशुभ नहीं होती।
- 8:58निंदा क्या है? निंदा वह है जब राजा आज वैश्य को
- 9:07बैठा के पानी में रंग घोल के वह पी रहे थे और एक्टिंग कर रहे थे।
- 9:18वह गलत था। उन्होंने ठीक से जाना नहीं है कि
- 9:26यह राजा जो पी रहा है वह शराब नहीं है।
- 9:32वह रंग बोला पानी है। उन्होंने जाना ना था कि ये जो
- 9:38बैठी है पास में यह भी एक्टिंग कर रही है।
- 9:44स्त्री और इसका काम ही ये धंधा ये होता है जैसे ये एक्टर नहीं होता
- 9:53है। ये वैश्य ही तो होती है।
- 9:57बिक जाते हैं। एक्टिंग कर देंगे, इतने करोड़
- 10:00रुपए लेंगे नहीं नहीं, कोई बात नहीं वैसीन ही होते हैं, वैसी का
- 10:07मतलब जो बिक जाएगा देखिये वैसी शब्द से वैसी बना है।
- 10:18ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्रम नि कहते है वैश्य वैश्य से
- 10:25वैश्य यानी जो कारोबार करता है ये गाली नहीं है।
- 10:34वैश्य जब बिक जाए। वैश्य क्या करता है?
- 10:40एक शेर मूवी दे देता है कितने की ₹50, आप 50 दे देते हो, वह एक शेर
- 10:47मूवी दे देता है तो वैश्य का ओरिजिनेटेड प्वाइंट वैश्य है।
- 10:56वैश्य एक जाति है जो व्यापार करता है।
- 11:03वैश्य निंदनीय शब्द नहीं, वैश्य शुद्ध आर्थिक शब्द है, जो बिक
- 11:15जाए। हाँ, एक्टिंग कर दूंगा तुम्हारी
- 11:18शोले फ़िल्म में वह वैश्य हो गया। दो पैसे के बदले बिक गया वह वैश्य
- 11:28हो गया कोई तन तन बेच देती है वैश्य।
- 11:36वह भी वैश्य की श्रेणी में आ गई। जो ईमान बेच देती है वो भी वेश्या
- 11:47हो गई ये जो आज पत्रकार बिके हुए पत्रकार।
- 11:55इसलिए मैं इन्हें वैश्य कहता हूँ। क्यों?
- 12:01जो धन लेकर काम करता है। मैं शिक्षकों को भी वैश्य कहता
- 12:07हूँ। तुम बड़े हैरानी हो गए।
- 12:12ये बढ़ाने वाले शिक्षक के वैष्णेय होते हैं क्योंकि ये पगार रहता है
- 12:19बस सिर्फ एक संत ही वैष्णेय होता है।
- 12:23संत आपसे कुछ पगार नहीं होता, हमारी श्रद्धा होती है।
- 12:31तो उसके गांव में ढेक रख लो। अन्य तवक्तों में जागते हुए कहता
- 12:35है नहीं हमारी फीस चका के जाओ पता नहीं कौन कौन सुनेंगे इस वीडियो
- 12:41को, क्या मैं उनसे पगार करूँगा? संत वैष्ण संत प्रोपकारी।
- 12:51और यह प्रूफकार उसकी मजबूरी है। गगर कितनी भर गई है गगर या वह
- 12:58छलके की छलके की अगर वह बांटेगा नहीं तो वह छलक तो जाएगी ही।
- 13:08इससे अच्छा तो बांटी ही थी तो वह व्यख्या थी, उसका काम था ये
- 13:19एक्टिंग पर तो वह उसको आगोश में ले लेती शोमी चाटी कर लेती।
- 13:30लेकिन यह एक्टिंग थी जैसे फिल्मों में तुम्हारी अमिताभ बच्चन वगैरह
- 13:35नहीं करते हैं। ये वैश्य ही होती हैं।
- 13:37सब जो प्राइस से बिक जाए वह वैश्य तुम मुझे ₹1,00,00,000 दे दो कि
- 13:45ये लो करोड़ रुपए अब बोलो ऐसे नहीं बोलेंगे मैं।
- 13:52मेरा धंधा नहीं है मैं जब चाहे यहाँ लोग मेरे पास आ जाते हैं।
- 14:02बड़ी दूर से आए बाबा चौबीसों घंटे छत्तीसों घंटे।
- 14:10एक बार दर्शन ही तो करने हैं क्या बिगड़ता है तो मैं मना कर देता
- 14:16हूँ क्योंकि इतनी पी रखी है इतनी मदहोशी का आलम है।
- 14:29फिर तुम कुछ पूछे भी न रह नहीं सकते।
- 14:34तुम आते हो सिर्फ दर्शन कर रहे की नहीं तुम्हारे परोजन कुछ हो रहा
- 14:40है अगर सिर्फ तुम यहाँ आकर। वातावरण का मज़ा ले लो एक 2 मिनट
- 14:50ठहर जाओ तो वह एक 2 मिनट का ठहराव तुम्हारे भीतर निरंतर प्रवाह पैदा
- 14:59करेगा। प्रवाह किसका ठहराव का।
- 15:06यहाँ से सबक सीख जाओ, ठहरने का एका दर्शन करो तो बिलकुल ठीक,
- 15:14लेकिन कई बार तुम्हें इतनी गहरी आनंद की अनुमति है तो तुम्हें
- 15:23बच्चे मना कर देते होंगे। बिला शक।
- 15:27यह उनका भी कसूर नहीं। यह मेरा भी कसूर नहीं।
- 15:33यह उस मदहोश का कसूर है जो मेरे ऊपर छल का यह उस समुद्र का कसूर
- 15:42है जो मेरे ऊपर। उतर गया।
- 15:49उस आलम में मैं कोई जवाब ही नहीं देता तो वहाँ के लोगों ने कहा देख
- 15:59राजा का दिमाग खराब हुआ, हमें तो पता नहीं।
- 16:06कि यह ऐसा था। हम तो इसको रघुकुल का वंशज मान
- 16:15रहे थे। राजा दिलीप पदाधीची कैसे कैसे लोग
- 16:21हुए ऐसे रघुवंश हुए? आज इसने सब ख्याति धूल धू सर्च कर
- 16:28दी। शराब तो पी रहा है, वैश्य को तो
- 16:34आगोश में ले रहा है, चुम्मी चाटी कर रहा है, पता जी संत है।
- 16:41यह राजा है तो थोड़ी सी बात और यहाँ कह दो, संत राजा के समान ही
- 16:50होना चाहिए। संत राजा के समान ही होना चाहिए
- 16:58और सच्चा सच्चा। एक्टिंग में नहीं, वो ही राज्य
- 17:05करने के योग है। जनक जैसे लोग ही राज्य करने के
- 17:09योग है। इसलिए जनकों की 19 पीढ़ियां और
- 17:14सभी के सभी ऐसे ही थे। वह जहाँ से गुजरता रहता उसका लोग
- 17:25गालियां निकाल के लोगों ने दरवाजे बंद कर दिए।
- 17:28थू थू करने लगे। बहुत गालियां मिले हैं।
- 17:41आपने पूछा बाबा वह गोबर कम क्यों हो गया?
- 17:45वह लीद कम क्यों हो गई? क्योंकि वह निंदा थी, आलोचना नहीं
- 17:52थी। उन्होंने जाना नहीं कि यह शराब
- 17:58नहीं यह पानी है रंग बोल दिया। यह वैसा नहीं, यह सिर्फ एक्टिंग
- 18:05करने के लिए लाई गई है। राजा ने ₹2050 दे दिया होगा।
- 18:16आलोचना वह होती है जब राजा को। नग्न हालत में किसी स्त्री के साथ
- 18:29अंतरंग क्षणों में देखा जाए तुम्हारे लोचनों के द्वारा फिर
- 18:36तुम कह सकते हो यह राजा वैश्य व्रत करता है।
- 18:43अन्यता नहीं कर सकता आलोचन और निंदा का फर्क, समझाए निंदा लोचन
- 18:55के बिना सुनी सुनाई कहीं कहाई। इसलिए मैं इन।
- 19:03धर्म के प्रचारकों को भी वैसा कहता, ग्रंथ कोई लिखा गया होगा
- 19:12जिसने परमात्मा को देख लिया होगा, वह है तो मार्कस के पीछे लग के।
- 19:23अगर कह देते हो कि वह नहीं है तो यह सिर्फ इसी बात का सबूत है कि
- 19:29तुम अंधे हो लोचन नहीं है। तुम्हारे पास वैसे ही ईमानदार हो,
- 19:39ये ठीक है इसलिए मैं। इन आचार्यों को इन सारे लोगों को
- 19:49सुसभ्य भाषा में ईमानदार कहता है। कम से कम अगर जानते नहीं तो फिर
- 20:02कह देते हैं कि हमने होता नहीं। बस ये कहने का डंक अल्प है, ये
- 20:10कहते हैं कि देखो होगा, जिसमें देखा होगा उसके लिए होगा।
- 20:15कबीर ने देखा, कबीर ने स्टैम्प लगा दिया।
- 20:19हमने देखा नहीं। लेकिन ये कहते हैं कि एनलाइटनमेंट
- 20:26होता है ना ये गलत हो गई ना ये कह दें कि देखो जिसके हुआ भाई उसको
- 20:35एनलाइटनमेंट होती होगी, हमें तो हुआ नहीं लेकिन यहाँ अगर ये कहने
- 20:41शुरू कर दें। तो इनकी दुकानदारी खत्म है और
- 20:46इसीलिए तो इस्तीफा देख आईएस से यहाँ आए थे।
- 20:50इतर संभावनाओं ज्यादा हैं और भीतर वासनाएं ज्यादा थी।
- 21:00तो आय की कुर्सी वासनाओं को ना पूरा कर सकेगी तो वासनाओं को पूरा
- 21:06कर सके कि लोक आगे पाप छूएं, संस्था बनाएं, ज्यादा से ज्यादा
- 21:12दान करें। बस ये तो सिर्फ एक बहाना है।
- 21:17क्या हम रोजगार देते हैं? सत्य तो ये है कि तुमने अपनी
- 21:23वासनाओं को पूरा कराना है तो दंदे वाज वैश्य से वैश्य बना इस बात को
- 21:37समझ लेना, इसलिए अगर मैं इनको वैश्य कहता हूँ तो ये कोई गाली ही
- 21:43नहीं है। वैश्य का मतलब जो वैश्य जैसा काम
- 21:47कर बिक जाए, पैसे पे बिक जाए, संत बिकता नहीं, संत बिखरता है, फूल
- 22:01को तुम वैश्य कैसे कहोगे? फूल सुगंध बिखेरता है और तुमसे
- 22:09कुछ लेता है तुमसे कुछ मानता नहीं वे शर्त लुटाता है अपनी सुगंध को
- 22:20तो मुख्य प्रश्न तुम्हारा है, पुत्र।
- 22:25नंदलाल के अयोध्या वासियों ने जो कहा, वह तो उन्होंने लीद खाली और
- 22:40आप जो कहते हैं? तो आपने लीद नहीं खाई?
- 22:46ये हमारी तो गुंडी फंस गयी। अब इसको निकालिए बिलकुल पुत्र।
- 22:52अगर ये गुंडी मैंने फसाई है तो मैं ही निकाल लूँगा तो तुम्हें
- 23:00समझा गया होगा। जो आलोचन तुमने अगर देखा हो, तो
- 23:09शराब असली है, वह शराब तुमसे मंगाई होती ठीक है और तुमने वैश्य
- 23:18को कोठे से तुम ले के आए होते? तो तुमने आलोचना की आलोचना सही
- 23:29है? ये वैसा भी सही है?
- 23:30ये शराब भी सही है, लेकिन तुमने इसकी जांच परख नहीं किया।
- 23:39कि यह तो पानी में घुला हुआ रंग है।
- 23:42जीसको राजा शराब की तरह धखला रहा है और यह तो वेश्या खरीदी गई
- 23:51वेश्या यौन संतुष्टि के लिए नहीं। वारण एक्टिंग करने के लिए फ़िल्म
- 23:59के ऐक्टर्स इसलिए इनको अभिनेता मत कहा करो, इनको वैश्य कहा करो जो
- 24:10पैसे ले के पढ़ाता है, लेक्चरर है, प्रोफेसर है, टीचर है,
- 24:14अध्यापक है। यूनिवर्सिटी में पढ़ाता है,
- 24:18चांसलर है, सब वैश्य हैं पीएम वैश्य, सीएम, वैश्य राष्ट्रपति
- 24:25वैश्य सीजेआई वैश्य क्यों? वैश्य है, धंधा है, बिकते हैं
- 24:39पैसे पर कोई शरीर बेच देता है, कोई अपनी प्रतिभा बेच देता है,
- 24:55कोई सूचनाएं बेच देता है। कोई जो बड़ा सुना शास्त्र वो बेच
- 25:03देता है लेकिन ध्यान रखना एक ही व्यक्ति वैसा नहीं होता क्योंकि
- 25:12वह किसी शास्त्र को बोलता है। वह मात्र वरमात्र अपने अनुभव को
- 25:19बोलता है। कबीर वैसा नहीं होता, कबीर तो
- 25:25सिर्फ बरसता है, बादलों की तरह बादलों ने तुमसे कभी कुछ मांगा?
- 25:33सिर्फ तुम्हारे अतिरिक्त खेतों को सींच गया और फसलें हरी भरी हो गईं
- 25:44पर एवज़ में बादलों ने तुमसे कुछ मांगा नहीं मांगा।
- 25:53चलती गर्म लोगों को ठंडक में बदल दिया।
- 25:59तुम्हारी फसली हरी भरी हो गयी बेजानपुर हो गए लेकिन मेघों ने
- 26:06बादलों ने कभी तुमसे कुछ मांगा। कुछ नहीं मांगा।
- 26:14इसलिए मेघा बरसते हैं और कुछ मांगते नहीं बहुत शांत है।
- 26:28और उनकी मजबूरी है, भर जाती हैं। इतनी पानी से के भार सहन नहीं
- 26:36होता, रुक नहीं सकते आसमान पे कोई अवलंबन नहीं रहता तो बरसना ही
- 26:44पड़ता है। संत को भी बरसना पड़ता है।
- 26:50क्या करें मजबूरियां संत तुम्हें बोलेंगे नहीं तो जहाँ विश्राम
- 27:00करेगा बैठेगा, विश्राम करेगा वहाँ बिखरता ही रहेगा।
- 27:09और पीने वाला कोई ना होगा तो यह छतें यह दीवारें, यह फर्श या पड़ा
- 27:16हुआ सामान यह सोख लेगा उन्हें इसलिए संत मर जाता है।
- 27:25और तुम उसके शरीर के साथ लगी या आस पास पड़ी चीजों को इकट्ठा कर
- 27:30लेते हो क्या कारण रहा होगा? जब अकेला बैठा संत तो संत तो
- 27:40चौबीसों घंटे आनंद को बिखेरता है। बिखरता है सब वस्तुएं जो वहाँ
- 27:48पड़ीं तो सब इस आनंद में नहा गई। भला मेगा बरसेगा तो कोई
- 28:01पार्शियल्टी थोड़ी करेगा। तो चादर को भी नहला देगा, वो आपके
- 28:05गद्दों को भी नहला देगा। वो आपकी पड़ी चेयर को भी नहला
- 28:09देगा। अयोध्या वासियों ने जो किया वो
- 28:21निंदा किया, उन्हें पता नहीं था यह पानी पी रहा है।
- 28:30उन्हें पता नहीं था। ये वैसा शरीर की तृप्ति के लिए
- 28:34नहीं लाई गई। यह किन्हीं अन्य कारणों से लाई
- 28:40गई। इसलिए अयोध्या वासियों ने गाली
- 28:48निकाली, थूका। दरवाजे बंद कर दिए।
- 28:55हमारे बच्चों को खराब करेगा ये राजा, क्या संस्कार पड़ेंगे ऐसा
- 29:00दृश्य? और उसे बिल्कुल भी शर्मनाई यह थी
- 29:10निंदा तुम कहते हो फिर बाबा तुम तो सभी को लेते हो।
- 29:18मैंने तुम्हें एक शब्द और भी कहा था, मैंने तुम्हें ये कहा था कोई
- 29:23भी शब्द बोलने से पहले मैं तीन जगहों से पूछ लेता हूँ, फिर मेरी
- 29:32जिम्मेदारी खत्म, मैं निंदा नहीं करता।
- 29:35निंदा करना चाहता भी और निंदा करनी मेरी जरूरत बनी।
- 29:41मैंने जो अमृत का रस भी लिया उसमें इतना संतुष्ट और रफ्त हूँ
- 29:47कि निंदा की जरूरत नहीं, जगह भी नहीं सब भर गया हूँ।
- 29:51रोम रोम भर गया। निंदा कहाँ समाई।
- 29:59मैं तीन जगह से कन्फर्म करता हूँ, अपने भीतर कोलेक्टिव अनकॉन्शियस
- 30:06माइंड से, वह जो विशाल सुपर सेंसिटिव कंप्यूटर के भीतर फीड
- 30:12है। हमारे भ्रमंड में वहाँ जाके
- 30:15खंगालता हूँ और जब दोनों घटनाएं मिल जाती हैं, फिर मैं तीसरे बाबा
- 30:20से पूछता हूँ, बाबा जब स्टेम्प लगा देते हैं तो ओके मैं फिर
- 30:27बोलता हूँ, राइट निंदा नहीं होते पुत्र।
- 30:31वह आलोचना होती है। मैंने खुद देखा पहले अपने अंतः
- 30:36में जाके देखा। उसके कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में
- 30:43उतर के देखा ठीक फिर भ्रमण भी रिकॉर्ड रखता है।
- 30:49भगवान कृष्ण ने जो गीता बोली वो आज रिकॉर्डेड है मैंने बहुत बार
- 30:53सुनी है वही भगवान कृष्ण अर्जुन को उपदेश करते वह गीता उनके मुख
- 31:02से कैसी निकली होगी? वह मैंने खुद ही सुनी।
- 31:07वह बिलकुल ऐसी थी जैसे तुम किसी डेटा को कॉम्प्रेस कर देते हो।
- 31:15इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ कि वे सिर्फ सात मिनटों में बोलेंगे।
- 31:18यार, थोड़ा सा मसला गहरा है, तुम्हें समझी शायद न आए?
- 31:25लेकिन गीता पूरी सासु स्लोकी बोला ऐसा ही बोला और कॉम्प्रेस कर दिया
- 31:31गया। 7 मिनट में जब खोलेंगे तो गीता
- 31:37ऐसे ही निकलेगी। वहाँ से मैंने देखा।
- 31:45फिर तीसरे मैंने बाबा से पूछा, बाबा शंकर फर्स्ट एनलाइटन पर्सन
- 31:54ऑफ दिसार्थ इस धरती का सबसे पहला जाग्रत व्यक्ति?
- 32:04तीन जगहों से यश करा के फिर मैं बोलता हूँ निंदा की कोई गुंजाइश
- 32:09नहीं रहती और मैं बिल्कुल ऑथेंटिसिटी से बोलता हूँ अगर मैं
- 32:14कहता हूँ कि इस व्यक्ति ने कतल किया तो किया और ध्यान रखना।
- 32:23सिर्फ मेरी खोपड़ियाँ नहीं बोलती मैं खोपड़ी खुजलाने के लिए बोलता
- 32:28नहीं इतना वक्त किसके पास है भला? उसी वक्त में मैं उस रस को पीता
- 32:38हूँ। मूवी देखने तो वही व्यक्ति जाएगा
- 32:42ना। जिसके भीतर रस पीने को है नहीं,
- 32:47जिसके भीतर रस उमड़ गया, वह आप मूवीज़ में नहीं पाओगे, इसलिए तुम
- 32:56मुझको कभी सड़कों पे नहीं देखोगे। इसलिए तुम मुझे कभी स्वादिष्ट
- 33:02पदार्थों का स्वाद लेते हुए नहीं देखोगे क्यों क्या जरूरत है बना
- 33:14कभी कोई हमारी पंजाबी में कहावत है।
- 33:20देख जट्ट दी, अकल गई मज्ज, बेच के कोड़े लई दुग्ध पिणों ग्या ते ले
- 33:30दे चकणी हुई देखो कहता किसान की अकल चली गई।
- 33:38भैस बेच दी और घोड़ी ले दी। बाल बच्चे दूध पीने से पे जायज
- 33:45हुए और घोड़े की लीद उठानी पड़ गई या मूर्खता की भासियां अगर मैं
- 33:53तुम्हें कभी? मूवी के भीतर दिखूं तो बस एक ही
- 34:01मतलब है यह मन यह पी नहीं है। इसने वह शराब जो कभी उतरते हैं।
- 34:18तुम स्वयं की कहानी देखो लाजवाब है प्रत्येक व्यक्ति की जीवन गाथा
- 34:24अपने आप में लाजवाब है। तुम्हारी ज़िन्दगी की गाथा लाजवाब
- 34:33है। तुम इसे देखते हो?
- 34:37तुम लोगों की जीवन गाथाओं को देखते हो, जो झूठी हैं।
- 34:41कल्पनाएं और न जाने कल्पनाओं का स्वाद तुम्हें किसने डाल दिया?
- 34:50तुमने भगवानों को भी कल्पनाएं बना दी?
- 34:55तुमने परमात्मा की शक्ति को भी दुर्गा, रूपा, लक्ष्मी, रूपा,
- 35:04काली, रूपा, किस किस रूप में डाल दिया तुमने?
- 35:11यह तुम्हारे मन की शरारत है। शरारत के सिवा कुछ बने एक को
- 35:19समरीय नान का जो जद थलरे असम आए जो हर कोने में, हर झरे में।
- 35:29हर स्थान पर मौजूद है जेता किता तेता नाम बिना नामे नाहीं कोठा
- 35:40कौन सी ऐसी जगह है जहाँ वह नहीं है?
- 35:46अगर बाबा कहते हैं? अजूनी तो इसका मतलब वह सूअर में
- 35:53भी है, सूअर की जोनी भी उसके बिना नहीं मैंने एनलाइटनमेंट के बाद 3
- 36:03दिन ऐसे बताए। और उनकी समृद्धि नहीं मैंने सुर
- 36:08से गले में यह प्रेम राष्ट्र था प्रेम से भीगा हुआ अंतःकरण,
- 36:23हजारों हजारों जन्मों से प्यासी आत्मा।
- 36:30आज तृप्त हो गई थी उस मेघ के बरसे।
- 36:38से धरती को चंद्रमा। धरती को चन्द्रमा, सूरज को धरती
- 36:56तरसे, धरती को चन्द्रमा। धरती को चरमा, पानी में शिप जैसे
- 37:17पानी में शिप जैसे प्यास सीहर। आत्मा प्यासी हर आत्मा
- 37:33उम्मीदवारें पानी में सिर्फ जैसे। प्यार की हर आत्मा भोंध छिपे किस
- 37:51बादल में भोंध छिपे किस बादल में कोई जाने न?
- 38:02बूंदी छिपी के पागल में कोई जाने ना आरे ताल मिले।
- 38:12नदी के जल में नदी मिले सागर में। सागर मिले कौन से जल में कोई जाने
- 38:27न ओहोरे ताल मिले नदी के जल में अनजाने।
- 38:37होठों पर ये हे जाने गीत हैं हे जाने गीत हैं कल तक जो थे वे
- 38:53गाने। जन्मो के मीत हैं, जन्मो के मीत
- 39:06हैं, उम्मीदवारें क्या होगा कौन से पल में?
- 39:16क्या होगा कौन से पल में कोई जाने न क्या होगा कौन से पल में कोई
- 39:29जाने न ओहरे साल मिले। नदी के जल में नदी मिले, सागर में
- 39:41सागर मिले कौन से जल में कोई जाने ना और ताल मिले नदी के जल में।
- 39:59आलोचन, मैं वो निंदा नहीं करता जो राजा आज की निंदा की थी
- 40:10योग्यवासियों ने। अगर मैं निंदा करूँगा तो मैं इन
- 40:21पापियों के पापों को अपने ऊपर ले लूँगा, मैं इन पापियों के पापों
- 40:31को अपने ऊपर नहीं लेता। मैं इन दुनिया को गुमराह करने
- 40:37वाले चंद सिक्कों की खातिर इनके पास अपने ऊपर नहीं लेता है बड़ा
- 40:48सस्ता है। और राजा आज जब मूल बच गया तो वह
- 41:00संत कहने लगा यह दो राजन तुम्हें खाना पड़ेगा तो राजा आज बोले
- 41:09प्रभु। मैं इस लीध को कैसे खाऊं?
- 41:15अगर ना पता होता कि ये लीध है तो खा लेता शायद लेकिन अब मुझे पता
- 41:23है मैं नहीं तो दान की है। कोई उपाय बता दो प्रभु जब इतना
- 41:31पहाड़ आपने गायब कर दिया तो राजा की बिनती पर वह संत कहने लगे,
- 41:42देखो यहाँ से 1012 किलोमीटर दूर। बिल्कुल उजाड़ी में एक संत बैठे।
- 41:53वह कभी बोलते नहीं, बस नए के बराबर बोलते हैं।
- 42:00उनके पास जाकर अपने राजा की ये सारी बातें।
- 42:09ये रघुवंश से है, शराब पीता है, वैश्य भर्ती करता है और यहाँ तक
- 42:16अपनी जनता को ही गंदे संस्कार देता है।
- 42:24आप कुछ कीजिए, प्रभु, आप सब कुछ कर सकते हैं और एक बात तो मैं
- 42:30कहता हूँ संत सब कुछ कर सकता है उस पर जाकर संत को जब पता होता
- 42:41है। कि अब अगर जीस स्थल पर बैठा मैं
- 42:46कुछ कह दूंगा तो वह प्रकृति मान लेगी।
- 42:49तुरंत तो वह इतना समझदार होता है कि विनाश न हो जाए।
- 42:56वह उस स्थल को छोड़ देता है। उस तल को छोड़कर ऊपर वाले तलों पे
- 43:06आ जाता है जहाँ कहने से कुछ नहीं बिगड़ता, किसी का न किसी का कुछ
- 43:10संवरता है। आज एक बहुत ही गोपनीय बात आपको
- 43:17बताता है। साधु भोले सहज स्वभाव साधु का
- 43:26भोला वर्धा न जा ये बात बिल्कुल ठीक है।
- 43:35मैंने ये भी बताया हुआ है। कि हम खोपड़ी से लेकर अपने
- 43:41अस्तित्व तक रोज़ तन बदलते हैं, उसका कारण क्या है?
- 43:49किसी व्यक्ति ने आके कह दिया कि मैं इस रोग से पीड़ित हूँ।
- 43:58मुझे ये तकलीफ है, मुझे दुख है पहली बात तो उसे एंटरेंस नहीं
- 44:03मिलती बड़े समझदार हैं हमारे देख रेख करने वाले जानते हैं फिर किसी
- 44:14तरह अगर वो आ भी गया संगत के साथ साथ।
- 44:22तो जहाँ हमने देखा कि उसने कुछ ऐसा मांग लिया हो जो विधि के
- 44:30विधान से परे हैं और अगर यहाँ से मैंने कुछ बोल दिया समझना बात
- 44:38बहुत गहरी। तो वह सही हो जाएगा और विधि का
- 44:43अभियान टूट जाएगा। पुरुष के दोषी हम होंगे तो संत
- 44:51क्या करता है? संत अपना तलब बदलता है उस तल से।
- 44:59हट जाता है। ऊपर वाले कल पे आ जाता है फिर वो
- 45:05कह देता है ठीक जाओ हो जाए लेकिन फिर होता है इसलिये शब्द बोला
- 45:19गया। सच्चा साहब जे नजर करें जे शब्द
- 45:26मुझे बहुत लोग पूछ लेते हैं, जे शब्द क्यों का, क्या कभी ऐसा भी
- 45:31होता है के संत नजर कर दे? तो कागो हंस करे और काग का काला
- 45:43रंग सफेद में परिवर्तित हो जाए। हंस बन जाए तो इस जे की समझ नहीं
- 45:49बाबा लो आज मैं तुम्हें जे समझा देता हूँ ये जे क्या है मैंने
- 45:57आपको बताया। कि जिनको आप विकार कहते हो वे सब
- 46:03ऊर्जा के स्वरूप है। हो चाहे काम हो, क्रोध हो, लोभ
- 46:09हो, मोह, अहंकार, मधु, मत्सर्क, बैह ऊर्जा के रूप।
- 46:19जब ये अपने ओरिजिनल प्वाइंट से ओरिजिनेटिंग प्वाइंट से ऊपर उठते
- 46:24हैं तो संत उसी वक्त जान लेता है क्योंकि संत जागृत है और व्यय है।
- 46:35जब क्रोध उठा उसे या जब किसी ने बाहर से कुछ ऐसा मांग लिया हो जो
- 46:46अभी उसके मुकद्दर में नहीं है अभी अभी बीज बोया है।
- 46:51आम की गुठली अभी बोई है, अंकुरित भी नहीं हुई।
- 46:58और वो बच्चा कहता है कि यह कल को फल देने लगेगा।
- 47:08कोई भी चीज़ संत की पंच से बाहर नहीं होते हैं।
- 47:13संत झूठ भी नहीं बोलता। संत उसतल को छोड़ देता है जहाँ पर
- 47:20बातें सही होती हैं जीसको बाबा नानक ने कहा जो मालूम ठाकुर अपने
- 47:28थे सोई सोई देवे। संत उस तल को छोड़ देता है, उस तल
- 47:38से पूरे ऊपर उठ जाता है। यहाँ तुम सारे दिन कहते रहते हो,
- 47:45एक दूसरों को गाली निकालते रहते हो, इसका ऐसा हो जाए, इसका ऐसा हो
- 47:50जाए होता, किसी का कुछ नहीं कारण क्या?
- 47:53कारण है कि तुम उस तल पर नहीं पहुंचे।
- 47:56जंक्चर पैंट से थोड़ा नीचे जहाँ जो बोल दिया जाएगा वह हो जाएगा तो
- 48:09संत ऊपर उठ जाता है उस पैंट से फिर वह जो बोलेंगे भाई उसे पता है
- 48:16कि नहीं होगा। लेकिन सिर्फ सामने वाले की तसल्ली
- 48:22हो जाएगी और सामने वाला सिर्फ तसल्ली ही जाता है।
- 48:27उसको तो भेद वगैरह का अनुमान होता ही नहीं, लेकिन उसे इतना भी नहीं
- 48:33पता होता कि वक्त? से पहले कोई चीज़ प्रोसेसिंग से
- 48:41पहले कोई चीज़ फलीभूत हुआ नहीं, लेकिन संत फंसता नहीं है कभी वह
- 48:52संत ही क्या जो फंस जाए। संत के पास बहुत सी राहें हैं,
- 49:01इसलिए वह सर्वश्य है, सर्वज्ञ है, सर्वशक्तिमान है, सर्वव्यपक है।
- 49:09वह जो चाहे कर सकता है, बिल्कुल, लेकिन।
- 49:15उस सतर्क पर जा कर और उस सतर्क पर जाकर अगर कुछ कोई ऐसा मांग लेता
- 49:24है जो विधि के विधान में अड़चन बनता है और वह वाजिद होता है कि
- 49:32नहीं? मुझे तो वरदान दो तो संत मजबूरी
- 49:40में अपना कल बदलता है। इसके कथनी भी रह जाए और विधि का
- 49:50विधान भी न बदले। दोनों के बीच में संत सस्ता का भी
- 49:57संत के पास उपजेशनल वे हैं। ये तो बड़ा ऊपर उठ जाता है जहाँ
- 50:05पर कही गई बातें सत्य नहीं होती या होती हैं तो।
- 50:12कुछ देर बाद सत्य होती है, तृतीय क्षण नहीं होती।
- 50:23राजा आज वहाँ पहुंचे। अकेला बैठा था मेरे जनधन कोयल की
- 50:35कोह कोह। पंछी गीत गा रहे थे एकांत एकांत
- 50:42का आनंद अपना ही आनंद होता है, काश तुमने कभी उठा लिया होता
- 50:50तुमने भीड़ का आनंद भीड़ का शोर शराबा देखा है।
- 50:56उससे उत्तेजनाएं पैदा होती हैं। तुम उसी में सुखी हो।
- 51:01इसलिए तो ये राजनीतिक लोग पार्टी बाजी करते हैं।
- 51:05आज फला व्यक्ति उस पार्टी को छूट के तरह गया।
- 51:08हमारी संख्या बढ़ गई। संख्याएँ बढ़ने से उत्तेजनाएँ
- 51:12बढ़ती। और तुम उत्तेजना को बढ़ाना ही
- 51:17आनंद को बढ़ाना समझ लेते हो। परमात्मा के इस सृजना में शानदार
- 51:26सृजना में खलल नहीं डाली जा सकती। इसको बदला नहीं जा सकता।
- 51:39वहाँ जाकर राजा जी ने परिणाम किया पर मौन की अवस्था में बैठा संत
- 51:46तुम सवस्थ हो गए कि यह जहाँ अकेला बैठा है।
- 51:54इसका मन परचावा कैसे होता होगा? कोई मूवी नहीं देखता है, कोई
- 52:01स्वादिष्ट भोजन नहीं खाता। बुद्धराज घराने के मालिक हैं,
- 52:08भिक्षा पत्र लेकर चल पड़ते हैं। पता नहीं कौन क्या देगा?
- 52:14कोई गालियां भी दे सकता है। कोई रूखी सुखी भी दे सकता है।
- 52:18कोई हलवा पूरी भी दे सकता है। पता नहीं क्या होगा कौन से पल में
- 52:28कोई जाने ना? तो जो मिलता है उसे खा लेता है।
- 52:37वह जो टाइम टेबल बना सकता था मैंने ब्रेकफास्ट में ये लेना है
- 52:48मैंने। लंच में ये लेना दोपहर में ये और
- 52:54डिन्नर में ये और रात को सोते वक्त है।
- 52:57वह व्यक्ति सब सब प्रथाओं को तोड़ देता है।
- 53:03वह कहता है कोई लंच नहीं, कोई ब्रेकफास्ट नहीं है।
- 53:07कोई डिनर नहीं जब वह जो देगा वह स्वीकार है तो राजा आज पहुंचते
- 53:22हैं बाहर मस्ती में बैठा है। तो दिल परचावा कहाँ से होता है?
- 53:32तुम सोचते होगे कोई बात नहीं तुम्हें इसका राज़ समझू दिल
- 53:45परचावा वह करता है जिसके दिल होता है।
- 53:50जिसका मन ही अमन में ही चला गया। उसका तो रोमा रोमा शांत हो गया।
- 53:59उसका तो रोमा रोमा ठहराव में आ गया।
- 54:01जब तक मन है तब तक दौड़ है। मन गया तो दौड़ गई, दौड़ गई संशय
- 54:10मिटा वस्तु ठोर के ठोर तो यह भी प्रश्न था किसी का के एकांत में
- 54:21बहा जहाँ छिड़ी परिंदा। ही होता है, जंगली जानवर होते
- 54:26हैं, साँप होते हैं, भक्षु होते हैं, वह ये लोग बैठकर परम
- 54:31आनंददायी अवस्था में कैसे इनका मन बहलता होगा?
- 54:37क्या पक्षों की चहचहाहट नहीं, क्या वृक्षों का मौन नहीं?
- 54:44क्या ये लहराती है हवाएं नहीं इनका मन बहलता है क्योंकि इनके मन
- 54:53ही नहीं होता ये अमन की अवस्था में पहुँच जाती है, एम् मन अमन
- 55:00शब्द बड़ा सुंदर है है उर्दू का। अमन है, चैन है, शांति है, सुकून
- 55:07है यानी वहाँ मन नहीं, मन ही सब व्याधियों का, उत्पत्तियों का जड़
- 55:13है, उपाधियों का व्याधियों का जड़ है।
- 55:19जब मन नहीं तो भेद नहीं। यह जो तुम्हारे संस्थाएँ हैं,
- 55:31आर्य से जैसी यह मन को दृढ़ कर देती हैं, विवशता ग्रंथी को दृढ़
- 55:40कर लेती हैं। और संत के पास जाओगे तो वह
- 55:44तुम्हें मन विहीन कर देगा। बस दोनों का यही फर्क है।
- 55:50वहाँ जाकर तुम कटर हो जाओगे और दुख हो पाओगे क्योंकि मन?
- 56:01भेद पैदा करता है और भेद नफरत पैदा करते हैं, नफरत ज्वाला पैदा
- 56:09करती है और ज्वाला आग कभी ठंडी नहीं होती।
- 56:14आग गर्म होती है, आग दुख देती है, जलाती है।
- 56:20बस ये तुम्हे आग पैदा करना सखाते हो अभी हमारे एनएसए साहब ने कह
- 56:25दिया था जवानों अपने भीतर आग पैदा करो।
- 56:30खैर, ये राजनीतिक लोग हैं, इन्होंने नहीं जाने कितने कतल किए
- 56:36हैं। नहीं, नहीं, मैं कोई चीज़ ऐसे
- 56:42नहीं बोला करता हूँ नहीं जाने कितने कतल किये, इन लोगों ने
- 56:50कितने प्लान बनाए? इन लोगों ने नेशन सिक्योरिटी
- 56:54एडवाइजर ये कहते हैं आग पैदा करो। क्या अपने ही देश में तुम आग से
- 57:05जला दोगे? इस देश को यह बुद्धों का देश यह
- 57:12गाँधी का देश है। यह शांति प्रिय का देश है या ये
- 57:19बल्क का देश है? यह देश है, महावीर का देश है।
- 57:26क्या तुम आग से जला देना चाहते हो?
- 57:29इसको तो अगर ऐसा है तो अपने बच्चों को यहाँ बुलाओ।
- 57:39अगर कहीं हुकूमत मेरे वश में आ गई तो मैं जो राजनीति में होगा ये
- 57:53शर्त रखूँगा कि उनका एक बच्चा मिलिट्री में हो।
- 58:02और आरएसएस के लोग विचारे कितनी देर से देशप्रेम की भक्ति कर रहे
- 58:08हैं? नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि।
- 58:20कितनी देर से बिचारे तड़प रहे हैं इनके बाप?
- 58:25दादू ने स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया।
- 58:30प्रयास स्वरूप ये योगदान देने के लिए आतुर हैं।
- 58:35हाथ में हर वक्त लट्ठ रखते हैं। तो चिंता मत करो पुत्रो 25,00,000
- 58:44लोगों को मैं अग्रणी पंकृति में रखूँगा आरएसएस के नौजवान अगर तुम।
- 58:56छुप गए तो घरों के इन ट्रंकों में तुम्हारे पड़े हुए ये हाफ इवेंट
- 59:05गवाह ही देंगी कि तुम इसके में ब्रान हो, नहीं, नहीं गंगा में मत
- 59:12करा देना, इनको ये काम क्या? तो हम तुम्हें पहचान ही रहेंगे।
- 59:23तो अजित डोभा जी मैं तुमसे कहता हूँ, वैसे तो तुम मुर्ख हो अन्यथा
- 59:32कोई व्यक्ति। ऐसी पार्शलिटीज़ में परतन अगर
- 59:40नौजवानों में आग ही डालनी है तो ये यहाँ आए किस लिए हैं जलने के
- 59:47लिए धरती के पहले से ही तुम्हारी? सरकार ने इतने दंड दे दिए हैं।
- 59:56इन्हें बेरोजगारी से ये जल रहे हैं।
- 1:00:02महंगाई से ये जल रहे हैं और तुम्हारी फैलाई हुई आग से ये जल
- 1:00:09रहे हैं। एक बात का शांति से मुझे जवाब
- 1:00:15देना। मेरे हिंदुस्तान का एक भी नागरिक
- 1:00:20अगर मेरी इस बात का जवाब दे दे तो मैं उसके पैर चूमूंगा जब से मोदी
- 1:00:28जी ने सत्ता संभाली है। 1 दिन भी ऐसा निकला जो चैन का हो
- 1:00:40क्योंकि ये मन पैदा करते हैं, अमन पैदा नहीं करते हैं, जो अमन पैदा
- 1:00:46करता उसको तो इन्होंने मन मोहन मोहन कह के भगा दिया।
- 1:00:52जो मन पैदा करता उनको रख दिया। मन ही उत्पाद की जड़ और यह लोग
- 1:01:02राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग तुम्हें मन पैदा करते हैं।
- 1:01:09संत तुम्हें मन से अमन की तरफ की यात्रा।
- 1:01:15संत का मुकाम है, तुम्हें मन से अमन में कैसे ले जाए और इनका
- 1:01:23मुकाम है कि तुम्हारी अच्छी भरी शांति जिंदगी को अमन की जिंदगी को
- 1:01:30मन में कैसे धकेल दे? और पुत्र फिर भी अगर किसी को इतनी
- 1:01:36देशभक्ति है वैसे तो देशभक्ति के लिए हमने जवान रख छोड़े।
- 1:01:44इनकी जरूरत नहीं है। कोई ये तो जानबूझकर।
- 1:01:49मान ना मान मैं तेरा मेहमान ये शाखाएं क्यों रख रही हैं भाई
- 1:01:55किस्से डर रहे तुम्हें या किसी दिन दंगा फसाद करवाना चाहती हो इस
- 1:02:05संदेश में? बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए तो क्या
- 1:02:13तुम्हें हमारे जवानों पर यकीन नहीं है जो तुम अलग से अपनी आर्मी
- 1:02:18बनाते हो? फिर डीकार है तुम पर आज करने
- 1:02:24वालों पर? अगर तुम्हें तुम्हारे जवानों पर
- 1:02:28यकीन नहीं तो यह हमारे जवानों का सरेआम तुम उनकी बहादुरी के ऊपर
- 1:02:45लांछन लगा रहे हो। बताओ इन्होंने कौन सा युद्ध हारा
- 1:02:50आज तक? कोई युद्ध नहीं आ रहा, हर युद्ध
- 1:02:57गीता 1982 का युद्ध हम हार है, बिलकुल ठीक है, लेकिन तब हम नए नए
- 1:03:08आज़ाद हुए थे। और जो नया नया व्यक्ति अलग होता
- 1:03:14है, वह तो कोली चम्मच, गलास, थाली, प्रण, चकला, बेलन, चमटा सब
- 1:03:22उसको नया लाना पड़ता है। अभी तो हम इन समस्याओं से जूझ रहे
- 1:03:26थे और वाघरा डैम बन रहा था। लेकिन माउस से तुमने जब देखा
- 1:03:35भाखड़ा तो उससे ज़रा नहीं जा। उसने कहा है या हिंदुस्तान तो
- 1:03:46हमारे से आगे निकल जायेगा। इसलिए उसने झलसे बलसे हिंदी, चीनी
- 1:03:54भाई भाई का नारा देख हमारे ऊपर आक्रमण किया था।
- 1:03:58लोग अगर जानते हुए भी अनजान कर दें तो बात अलग है।
- 1:04:06हमने खुद हिंदी चीनी भाई भाई के नारे लगाए।
- 1:04:10यह हमारी पीठ में छूरा घोंपा गया था।
- 1:04:12वो हार नहीं था। गुरु गोबिंद सिंह की पीठ में एक
- 1:04:17पठान ने सुरा घोंप दिया। क्या कर सकता है यह?
- 1:04:24तो सरह सरह बेईमानी? धोखा तो राजा आज जाते हैं, वह अमन
- 1:04:41की स्थिति में बैठा है और तुम्हें समझाती ना अमन उसका मन कैसे बहलता
- 1:04:47है क्योंकि वह उसके पास मन नहीं होता।
- 1:04:53उसका मन होता है तो शुद्ध व्यवस्था होता है, मन का मालिक
- 1:04:58होता है, मन को कहता है तू बैठ जा जब तेरी जरूरत पड़ेगी, मैं उठा
- 1:05:02दूंगा, वह मन का मालिक हो जाता है।
- 1:05:09फिर वह अपने अन्तश में उतर के अपना अन्तश का स्वाद चखता है।
- 1:05:14फिर उसको शोर शराबा, कोलाहल, भीड़ भाड़ अच्छा नहीं लगता इसलिए तुम
- 1:05:23जब वाहन जाते हो। तो तुम हर वक्त वहाँ जाने की
- 1:05:30इच्छा ही करते रहते हो। अभी कल ही लोग मुझे मिल के गए अभी
- 1:05:36से आने शुरू हो जाएंगे। बाबा अब कब लोगे?
- 1:05:40अरे भाई कल तो हो के गए हो और बाबा फिर आने को जी करता है।
- 1:05:47कोई बात नहीं भुला लेंगे। कहरो अभी कतार गहरी है, इनको भी
- 1:05:55एक बार आ लेंगे दो, मेरा भी कोई भरोसा नहीं है।
- 1:06:05तो फिर लगा बोलने गुरुदेव मस्तक नवालिया दंडवत हो गया।
- 1:06:14हम जनता अयोध्या की बड़े दुखी हैं।
- 1:06:19हमारा राजा यकसा पागल हो गया है अकशमात।
- 1:06:29जो हम गधियों पर बैठाते हैं। इनके समय समय पर मेंटल चेक होने
- 1:06:33हैं। कहीं इन्हें शीजोफ्रेनिया तो नहीं
- 1:06:37होगा क्योंकि अक्सर शक्ति का वरदज्ञ?
- 1:06:46दिमागों को खराब कर सकता है। शीजोफ्रेनिया रोग से ग्रसित हो
- 1:06:51सकता है व्यक्ति ये चलते चलते ही तू सही बीमार नहीं होता।
- 1:06:55तुम कहती हो, अब गोटे काम नहीं करते, कल तक दौड़ लगा रहे थे।
- 1:06:59ऐसे ही क्या दिमाग ही चलते चलते खराब नहीं हो सकता?
- 1:07:03तो इनका मानसिक परीक्षण होना चाहिए।
- 1:07:08वक्त वक्त क्योंकि अक्सर सत्ता देय मार्गों को खराब करती है
- 1:07:18अमेरिका समितार्थ पहले वहाँ भी यही कानून था।
- 1:07:24तो चार बार जब डी रोजवेल्ट बनी फ्रेंकलिन डी रोजवेल्ट तो
- 1:07:35उन्होंने कहा कि यह तो भला आदमी था जब उसकी मृत्यु हुई।
- 1:07:42वह अपाहिज सा व्हील चेयर पे बैठा रहता है तो जब दूसरे ने आके ओपेन
- 1:07:50हैमर ने आके हेटम बम करा दिया फैटमैन ए लिटिल बॉय।
- 1:08:02और लाखों लोग मारे गए। उस में सुभाष चंद्र बोस भी थे।
- 1:08:06नागासाकी में तो उन्हें नहीं सोचा यह तो काम गलत है।
- 1:08:16ये तो संविधान में ही संशोधन करना होगा।
- 1:08:19फिर भी चुक रहे वो। अब देखो दूसरी बार आया ट्रंप दो
- 1:08:26बार भी नहीं मैंने पहले ही कहा था एक बार सिर्फ एक बार राज़ करने का
- 1:08:33मौका एक बार मिले और वह 4 साल हो। 5 साल नहीं 4 साल।
- 1:08:40मैं आपको साइंटिफिक व्याख्या करके बोल रहा हूँ।
- 1:08:43हमारे मनुष्य के 4 साल से ज्यादा मौका नहीं मिले, व्यक्ति को एक
- 1:08:51बार मौका मिले फिर वह कुछ कर गुजरेगा देश के लिए।
- 1:08:59जो आग दबी पड़ी थी वर्षों की उस आग को वह बदल देगा संसाधनों में
- 1:09:13तो तुम जो कहते हो के आग जलाओ बच्चों को जवानों।
- 1:09:20तुम्हारे दिल में आग जलनी चाहिए, यह बुद्ध का देश बुद्ध कहते हैं,
- 1:09:25अपने दिल में शांति जगाओ, अपने दिल में शांति जगाओ, नमन जगाओ।
- 1:09:37नमन जगाओ, समर्पण जगाओ बुद्धं शरणं गच्छा मी संगम शरणं गच्छा
- 1:09:48नमो अरिहंत नमो सिद्धा। नमो आर्यनम नमो उबजायो नमन करते
- 1:09:55जाओ, नमन करते जाओ। यानी आग को बजाते जाओ, आग जलने मत
- 1:10:00दो और ये एनएसए साहब हमारे युथ को कहते हैं और युथ ही होती है।
- 1:10:06बदलने वाली के बच्चों को तुम आग जलाओ, क्या फूंकना चाहते हो?
- 1:10:13उनको तो अपने बच्चों को पहले फूंको बराबर उनको?
- 1:10:19तुम अपने बच्चों को बिना किसी योग्यता के बीसीसीआई का चेयरमैन
- 1:10:24बना देते हो और दूसरों पर पीएनबी रखना हो तो उसकी इंटरव्यू लेते
- 1:10:31हो, तुम उसको रिजेक्ट कर देते हो। यह कितनी देर तक चलेगा?
- 1:10:42नहीं मेरे देशवासियों तुम जाओ, तुम्हारा हक छीना जा रहा है
- 1:10:50तुम्हें सिर्फ। इतनी सी कैलोरीज मिल रही है कि
- 1:10:57तुम चल सको, बात कर सको लेकिन विद्रोह ना कर सको।
- 1:11:02इतनी शक्ति अगर तुम्हें दे दी जाएगी कि तुम विद्रोह कर सको तो
- 1:11:07इतनी शक्ति तो पांच किलो अनाज में होती नहीं।
- 1:11:14तुम अपना हक मांगो, हकू का मांगो। मैंने यह सृष्टि का एक एक पदार्थ
- 1:11:23सबके लिए सामूहिक बनाया है और सिर्फ।
- 1:11:29आदमी के लिए नहीं, बतखों के लिए कबुए के लिए भी उतना कोयल सभ्य
- 1:11:37संसाधन अडानी, अंबानी के नहीं, अडानी, अंबानी अगर देशप्रेम करते
- 1:11:44हैं तो वो काम करें, उनको सेवा। देश सेवा के लिए पारितोषक दिया
- 1:11:50जाएगा। भारत रत्न या अन्य अन्य लेके तो
- 1:11:58वो कुछ जाएंगे भी नहीं और भ्रम हम नहीं पैदा होने देंगे।
- 1:12:04सच में ये कुछ नहीं लेके जाने। कौन ले के गया है आज तक बताओ भ्रम
- 1:12:11हम पैदा नहीं होने देंगे। तुम्हारे भ्रम के कारण करोड़ों
- 1:12:16लोग हर वर्ष भूख से मर जाते हैं। इज़रायल के नेतन याहू के पागलपन
- 1:12:26के कारण गाज़ा में कितने लोग मारे गए?
- 1:12:29कितने बच्चे मारे गए? उनको जीने का अधिकार नहीं था।
- 1:12:34इन लोगों को युद्ध अपराधी घोषित करके।
- 1:12:42वहाँ की मिलिट्री को गिरफ्तार कर लेना चाहिए।
- 1:12:46वहाँ की जनता वहाँ का आवाम उठे उठ कर इसको पकड़ें मिलिट्री को सौंप
- 1:12:58दे और मिलिट्री इसको। न्यायपालिका को सुनते हैं, इनको
- 1:13:06युद्ध अपराधी घोषित करके बताओ ईरान की गलती क्या थी?
- 1:13:11तुमने युद्ध क्यों खेला? अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।
- 1:13:21इनके पास कोई जवाब नहीं है ना ट्रंप के पास व्हेन ज्वाजों के
- 1:13:25राष्ट्रपति को क्यों उठा लिया गया, क्योंकि वह कमजोर थे।
- 1:13:30गाजा में बच्चों को क्यों मारेगा? क्योंकि वह कमजोर थे?
- 1:13:34ईरान में छोटी छोटी बच्चों के ऊपर भाग क्यों कराएगा?
- 1:13:37क्योंकि वह कमजोर थे? इसका मतलब कमजोर कोई यहाँ जीने का
- 1:13:43हक नहीं है, ना ही गलत हो तुम यहाँ तो महावीरों का देश है भाई
- 1:13:54यहाँ तो चींटी को भी जीने का अधिकार है।
- 1:13:59मेरे पास रोज़ प्रश्न आते हैं बाबा हमारी रसोई में चींटियाँ मर
- 1:14:04जाती हैं, अब इनको अफ़सोस होता है तो ही पूछते हैं और तुमने छोटे
- 1:14:15छोटे बच्चों को जो पढ़ने गए थे बेचारे?
- 1:14:18उन बच्चियों को मार दिया, 180 बच्चियों को तुमने मार दिया।
- 1:14:25इब सारे कतलो गारत का इलज़ाम किसके सर लगाओगे?
- 1:14:32किसी के सर तो लगाओगे। क्योंकि स्वतः सेवा मरे नहीं, कोई
- 1:14:40बाढ़ नहीं आई, कोई तूफान नहीं आया कोई ओरे नहीं करे कोई भूकंप नहीं
- 1:14:45आया यह गॉड मेड नहीं थी आपदा यह मेन मेड थी फिर किसका था?
- 1:14:56यह जिम्मा यह जिम्मा तय करना होगा।
- 1:15:02कौन है वो दुष्ट जो इस संसार में शांति स्थापित नहीं करना चाहता और
- 1:15:13देखो मज़े की बात है। मेरे पास जो जहाँ आ जाता है वो
- 1:15:17कहता है हमें शांति चाहिए, सभी को शांति चाहिए शांति के पुजारी ने
- 1:15:30और हत्याएं करते हैं। और इनका मुख्य कारण मैंने तुम्हें
- 1:15:37बता दिया ये दो लोग इनको पकड़ो, ये मुझे उठा सकते हैं आप और मुझे
- 1:15:47कोई डर नहीं है। बिलकुल उठा लिया जैसे।
- 1:15:54बेंजेवाला के राष्ट्रपति को उठा लिया क्या वैसे किसी को भी उठा
- 1:16:02सकते हैं क्या? क्योंकि ताकतवर है किसी लिए साँप
- 1:16:08के दांत निकाल दो। फिर जहर तो उसमें रहेगा, लेकिन वो
- 1:16:17डस न पायेगा। सांप के दांत निकाल दो, पकड़ो
- 1:16:26नेतन्याहू। पकड़ो डोनाल्ड ट्रंप को क्या यहाँ
- 1:16:32दूसरी पार्टी नहीं है? इसको वोट मत करना आपके इसको समय
- 1:16:40से पहले उखाड़ देना। यह दुष्ट है, यह दरिंदा है, मैंने
- 1:16:44पहले दिन निकाला था मेरी प्रणीत रिकॉर्डिंग्स को निकालो।
- 1:16:50पहली दफा जब इसको बताया, मुझे इसकी फोटो दिखा के बाबा देखना
- 1:16:56ज़रा इसका हो रहा। मैंने कहा ये व्यक्ति या तो जेल
- 1:16:59से निकल के है या कुछ ऐसा अपराध करेगा कि जेल में चला जाएगा।
- 1:17:05अब यह अपराध इसका जेल में जाने के लिए नहीं।
- 1:17:09अपितु टांगने के लिए है प्रार्थ इसको टांग दिया जाना चाहिए।
- 1:17:16इच्छा थी नैतन याहू की लेकिन बल नहीं था।
- 1:17:21बल न होता तो नैतन याहू कुछ न कर पाता तो बल किसने दिया?
- 1:17:27असली अपराधी वह है। ट्रंप इसको पकड़ लो, इसकी जनता
- 1:17:34इसको पकड़ ले। ऐसे लुच्चे गुंडे, हत्यारे, कमीने
- 1:17:39लोग अगर राजगद्दी पर बैठेंगे तो शांति की कहाँ से तुम उम्मीद रखते
- 1:17:44हो इनको पकड़ लो। और न्यायाधीशों के सामने पेश करो।
- 1:17:52इनको सभी चीजों के तथ्यों को खंगाल के अपराधी तो यह है
- 1:18:03ब्रह्मात्मा ने तो बम नहीं भरा है।
- 1:18:07बम तो इनमें से गिराया, किसी ने अमेरिका ने गिराया नितिन याहू ने
- 1:18:12गिराया तो इनके आप जो कुकर्म किए हैं, वो धाराएं आप इनपे लगाओ और
- 1:18:20इनको दंडित करो। तो तुम कहोगे जी 1000 1000 बार
- 1:18:25टांगने के जोकें हर चौराहे पे टांगने के जोकें मरने के उपरांत
- 1:18:30भी इनको टांगों सब चरहों में ऐसे ही जनता सुधरेगी अन्यथा नहीं।
- 1:18:39मैं एनसीसी के। टेम्पो में जाया करता, वहाँ एक
- 1:18:44कौवे को मार के लटका दिया जाता है।
- 1:18:48वहाँ नॉन वेज और वेज दोनों तरह के खाने मिलते थे तो मैंने पूछा
- 1:18:55सूबेदार से सूबेदार हुआ करता कि यह कहाँ आपने क्यों मार दिया?
- 1:19:02कहते एक अकां के मरने से हजारों काम यहाँ आएँगे नहीं हाँ डर पैदा
- 1:19:10हो जाएगा मरने का जब तुम चौराहे गली गली तुम तो फांसी भी लगाते हो
- 1:19:17तो अँधेरी कोठरी में लगाते हो नहीं।
- 1:19:21इससे जनता को सबक कैसे मिलेंगे? अगर यही इस बच्ची के जो अपराधी थे
- 1:19:30चार जिनको फांसी की सजा मिली, चौराहे पर लटकाए होते, हर चौराहे
- 1:19:36पर लटकाए होते तो तुम देखते अपराध।
- 1:19:4010% रह जाते हो। 90% खत्म हो जाते है।
- 1:19:46अब तुम दंड देते हो। लोगों को पता ही नहीं चलता और जब
- 1:19:51तक लोगों को पता नहीं चलता। जब तक ना मानु गुरु को कह नहीं जब
- 1:19:58तक ना देखूंगा अपने नैनो से देखते वो इसलिए प्रार्थना के राजा बड़े
- 1:20:04समझदार थे, जीसको काटना फोड़ना होता, लोगों को इकट्ठा कर लेते आओ
- 1:20:11भाई पर वो तो अपराध नहीं करते थे। दंड मिलना चाहिए, सामूहिक
- 1:20:20पारितोषिक मिलना चाहिए सामूहिक सबके सामने ताकि अच्छा कर्म करने
- 1:20:29वाले भी। उनके भीतर भी भावना जगे, अच्छा
- 1:20:33करेंगे तो हम इनाम पाएंगे, बुरा करेंगे तो हमें दंड मिलेगा।
- 1:20:41तो उसके पास गए, कहने लगे राजा ऐसे करता है, शराब पीता है,
- 1:20:47रघुकुल का वंश है। वेश्यावृत्ति करता है।
- 1:20:57हम तंग आ गए। आप ही कुछ करो, आप ही परमात्मा की
- 1:21:02दरगाह में जा सकते हो, आप परमात्मा से बिनती कर दो।
- 1:21:09कि इसका दिमाग ठीक कर दे। वह सुनता रहा, सुनता रहा, सुनता
- 1:21:17रहा, शांत मन को आप वाइब्रेटेड नहीं कर सकते।
- 1:21:25वह शांति रह। जो अपने भीतर के अस्तित्व की
- 1:21:31शांति का रस पी लिए है, उसको तुम उत्तेजित नहीं कर सकते।
- 1:21:36कितना भी कर लो कि उसने आंत्रिक रस पी लिया है ना वो मरे।
- 1:21:47न ठगे जाह जिनके राम बसे मन में उनके ऊपर कोई भी तुम्हारी ऊर्जा
- 1:21:56का विकृत रूप प्रभाव नहीं डालता तो सारी बातें जो तुम कहते हो के।
- 1:22:08निंदा निंदा की। संत ने सारी बातें बड़ी शांति से
- 1:22:18सुन तो वह व्यक्ति राजा। राजा आज था खुद वह हाथ जोड़ के
- 1:22:29पूछा प्रभु अब कुछ बोलिए, कुछ इंतजाम कीजिए, संत ने मुँह खोला
- 1:22:40है संत के दराजन। वह लीद तो तुम्हें ही खानी
- 1:22:47पड़ेगी? मैं तो नहीं खाऊंगा क्योंकि मैं
- 1:22:56जानता हूँ कि वह शराब शराब नहीं थे।
- 1:23:01मैं जानता हूँ कि वह वैसा वैसा है।
- 1:23:09वह तुम्हारा हित साधने के लिए तुम पैसे दे कर लेके आए थे, वह तो
- 1:23:19तुम्हें ही खाना पड़ेगा। ये है फर्क।
- 1:23:24निंदा में और आलोचना में संत ने निंदा नहीं की।
- 1:23:30संत ने आलोचना की, संत ने देखा आँखें खोल के संत के भाषा के और
- 1:23:37अगर मैं कह रहा हूँ कि इन लोगों ने अपराध किए हैं।
- 1:23:43इतने किये हैं कि ये हजारों बार टांग नहीं होगे हैं तो मैं निंदा
- 1:23:48नहीं कर रहा हूँ, आलोचना कर रहा हूँ, मैं जानता हूँ निंदा संत कर
- 1:23:56ही नहीं सकता चाहता हूँ अभी नहीं कर।
- 1:24:03और जो निंदा करता है वह संत होता नहीं।
- 1:24:08संत तो निंदा को अपने पास से बिठा लेता है कि अगर कहीं मेरे से
- 1:24:13क्रियाकलाप में कोई त्रुटि रह गई हो तो वो यह बतला दें निंदा कनी
- 1:24:19रह राखी, आँगन कुटी छवाय। बिन साबुन वारी बिना सगल मैल धुल
- 1:24:26जाए। निंदा और आलोचना में ये फर्क है।
- 1:24:35मुझे कोई पाप लगता नहीं क्योंकि मैं निंदा करता हूँ, मैं आलोचना
- 1:24:41करता हूँ। अगर मैं कहता हूँ कि ये डेरे वाले
- 1:24:45पांच नाम देते से परमात्मा नहीं मिलता तो मैं बिलकुल एम शोर 100%
- 1:24:54और मैं तानाशाह भी नहीं हूँ कि तुम्हारे अंगूठा दे दूँ कि नहीं,
- 1:24:57नहीं जाप मत करो, नहीं तुम करो, मज़े से करो।
- 1:25:04ओके, मैं इतना समूह संवारू मैं कैसे इतना समूह यह लोग ही संभाल
- 1:25:20सकते हैं? तुम कहती हो बाबा?
- 1:25:26देश का राजकाज तुम संभालो भाई देखो ये काम गधों का होता है जो
- 1:25:36बड़े गधे वो बड़े देश का बार उठा लेते हैं।
- 1:25:40अमेरिका को जो छोटे गधे। वो छोटे देशों का भार उठा रहे थे।
- 1:25:50हैं गधे जिसने वो मदमस्ती का आरंभ पे लिया उसके आगे तुम्हारे सभी।
- 1:26:03सुख साधन तुम्हारे सभी संगीत तुम्हारे सभी जिन्हें तुम सुख
- 1:26:11कहते हो, आनंद कहते हो, रस कहते हो, सब बेकार हो जाते हैं।
- 1:26:19उसने असली असली पी लिया। तुमने नकली नकली बना लिया तुमने
- 1:26:25तो भगवान भी नकली बना ली, लेकिन संत बनाता कृष्ण है संत अपने भीतर
- 1:26:35उतरता है, ओरिजिनलिटी में उतरता है ऑथेंटिसिटी में उतरता है जहाँ।
- 1:26:42उसका खुद का निवास है। खुद का मुकाम उस अपने ही मुकाम
- 1:26:47में उतर जाता है। वहाँ रसीरत है जैसे बागों में
- 1:26:54बाहर ही बाहर होते हैं और गटरों के अंदर दुर्गंध ही दुर्गंध।
- 1:27:02होती है। बस तुम सिर्फ स्थान बदल लो।
- 1:27:08कैसे संत स्थान बदल लेता है। संत स्थान बदलने में माहिर है, वह
- 1:27:16इतनी बार अपनी गैर बदलता है कि तुम सोच भी नहीं सकते।
- 1:27:21कब क्या क्या करना है वह आराम से घर बदल लेता है और वह अभ्यस्त हो
- 1:27:27गया एक अभ्यस्त ड्राइवर की तरह उसे पता है ये ढांचा कैसे चलना
- 1:27:34है। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरार।
- 1:28:18श्री कृष्ण गोगन हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:28:35ऋतुमात स्वामी सखा हमार ऋतुमात स्वामी सखा हमार हे नाथ नारा।
- 1:28:55यन वासुदेव, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:29:12मुरारी रीनाथ। नारायण वासुदेव पितमात, स्वामी
- 1:29:25सखाम। स्वामी सखा हमार।
- 1:29:51पितमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव के कृष्ण गोविंद
- 1:30:04हरे मुरारी हे नाथ नारायण? वासु रे।
- 1:30:20धन्यवाद।