Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Dec 24 - शरीर के पार जाने की कला कथार्सिस का सही तरीका! आत्मज्ञान का रहस्य!
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- 0:15प्रणाम बाबा जी भगवान कृष्ण को भजयंतीमाला।
- 0:31ही क्यों छि रखते थे? भजयंती माला से क्यों इतना प्रेम
- 0:38था उनका ये भगवान कृष्ण से पूछा ये सवाल मुझसे पूछने जैसा नहीं।
- 0:58यही कह सकता हूँ जैसे मुझे श्रीदेवी अच्छी लगती है।
- 1:06हँसा मत करो इन मूर्खों को मैंने कितनी बार कहा है?
- 1:18कि मैं जब तक बैठा हूँ ऐसे प्रश्न मत किया करो जो बिल्कुल जिनका कोई
- 1:25अर्थ ही नहीं होता, कूड़े में घराने होते हैं, वह जयंती वाला
- 1:34सिक्क्यु प्रेम था। अगर मैं बता भी दूँ पहली बात तो
- 1:38मुझे पता नहीं प्रत्येक की पसंद होती है।
- 1:46कृष्ण भगवान की पसंद वैजयंती मरात है मेरी पसंदी श्रीदेवी और सच
- 1:59पूछूं तो तुम बता भी नहीं सकोगे अगर तुमसे पूछें कि तुम्हें
- 2:09तुम्हारी घरवाली कैसी अच्छी लगती है क्यों अच्छी लगती है तुम नहीं
- 2:12बता सकोगे। नाक अच्छा है कि आँख अच्छी है कि
- 2:18मुस्कराहट अच्छी है कि दांत अच्छी है कि बोलना अच्छा है, ठीक ठीक से
- 2:23तुम्हें मालूम नहीं और ये प्रश्न पूछने से तुम्हें तुम्हारा पता
- 2:30कैसे चल जायेगा। मैं इतना बोल रहा हूँ उसका एक
- 2:39मतलब है तुम्हें बतलाना तुम्हें उस मार्ग पे चलाना जहाँ जान सको
- 2:51हू आर यू नो दायसल। भजयंतीमाला को क्यों प्रेम था,
- 3:00कृष्ण को क्यों प्रेम था, इसको जानने से तुम अपने आप को जान
- 3:05पाओगे, फिर क्यों? ऐसे मूल प्रश्न क्या करते हो?
- 3:10प्रश्न पूछने से पहले? एक कसौटी का शिला करो के इस
- 3:18प्रश्न को पूछने से क्या मुझे मेरा पता चल जायेगा अन्यथा मत
- 3:28पूछो करो बेकार के सवाल हैं कूड़े में घराने योग्य हैं।
- 3:36तो इसे अपनी खोपड़ी में ही रखा करो, क्योंकि तुम्हारी खोपड़ी
- 3:39कूड़ाघर बन गई है मेरे से मत पूछा करो ये सवाल पूछ रहे हैं के नहीं?
- 4:01एक प्रश्न श्रद्धा, विश्वास और अनुभव इन तीनों में क्या फर्क है?
- 4:09बाबा आपकी 2000 के 2000 वीडियो हमने सुने हैं।
- 4:21लेकिन अभी तक हम पूर्ण रूप से यह फैसला नहीं कर सके कि इन तीनों
- 4:30में फर्क क्या है? श्रद्धा विश्वास अनुभव।
- 4:45तीसरा छोटा सा कमेंट मेरी बिटिया का है, बहना भी है, जिसका मैंने
- 4:56जिक्र किया। मंजू।
- 5:00कोटा से लिखते हैं कि सद्गुरु प्रणाम आपकी कृपा से मेरी बेटी
- 5:13बिल्कुल ठीक है। जब आपने कहा यह मानसिक है तो वह
- 5:20सोचने लगी। और आप पर विश्वास करना ही पड़ा।
- 5:30मन में स्वीकार कर लिया, स्वीकार करते ही वो ठीक हो गई।
- 5:36थोड़ा समझा दू या मैं फिर आगे चलूँगा।
- 5:40स्वीकार करना सभी रोगों की अचूक औषधि है।
- 5:48लिख लो मानसिक रोगों की अचूक औषधि है स्वीकार करना।
- 5:59बहुत गहरे में अगर स्वीकार भाव को ले जाओगे तो बड़े से बड़े शारीरिक
- 6:07रोग भी खत्म हो जाएंगे। मानसिक रोग तो खत्म हो ही जाएंगे।
- 6:14शारीरिक रोग भी खत्म हो सकते हैं। अगर तुम उनको पूर्ण भाव से
- 6:17स्वीकार कर लो। तुम स्वीकार नहीं करते तुम लड़ते
- 6:21रहते हो। इस लड़ने के कारण वह रोग ठीक नहीं
- 6:28हो पाता। जीस शक्ति ने उस रोग को क्यों
- 6:34करना था वह शक्ति? तुम्हारी लड़ाई झगड़े में भी जाती
- 6:39है। वह शक्ति तुम्हारे रोगों से
- 6:42तुम्हें निजात नहीं दिला पाती स्वीकार बड़ा अद्भुत मंत्र है
- 6:50स्वीकार करना सीख। आधे जब पता चला कि सब मन का खेल
- 7:03है, सारा सत्य सामने आ गया। आपका एक एक शब्द सत्य था।
- 7:23और वह ठीक हो गयी। शारीरिक रोग भी ठीक हो गया,
- 7:28मानसिक रोग भी ठीक हो गया। अब देखिये ये बिटिया 2 घंटे रोज़
- 7:38क्रिया योग करती है, समझने जैसी चीज़ है।
- 7:44मैं आपको भी समझा दूँ दुनिया में बहुत से लोग दुनिया के हर कोने
- 7:49में क्रिया योग कर रहे हैं और मैं तुम सभी क्रिया योग करने वालों को
- 7:58बतला दूँ कि क्रिया योग के करने से आपके भीतर की धूल।
- 8:04उड़ेगी उड़कर आएगी चेतन में चेतन में उस धूल को पकड़ना मत।
- 8:13अगर पकड़ोगे तो गड़बड़ हो जाता है वो वह भी होगा।
- 8:23झुंझलाट भी होगी, क्रोध भी होगा, सभी कुछ होगा जो दमन किया है
- 8:28तुमने, मैंने कल के वीडियो में बोला था कहाँ से चली गया था पत्थर
- 8:38से तुम इकट्ठा ही करते आ रहे हो? और आज मानस की उन्हीं में आके
- 8:46सारा भरा पड़ा है गले से भी ऊपर आ गया है सारा अचेतन मन तुम्हारा
- 8:55कूड़ा से भरा पड़ा है इसको कैथोसिस करके तुम।
- 9:02अब एक नई विपत्ति सामने लाने लगे, फर्श के ऊपर तुम झाड़ू जलाते हो,
- 9:11धूल उठती है, वो धूल ऊपर जाती है, चेतन मन में आती है तो उसको निकल
- 9:19जाने का। तुम उसके साथ ही चिपट जाते हो।
- 9:26यही प्रॉब्लम है तुम्हें सभी विकार तुम्हें ऐसे ही मारते हैं,
- 9:33विकार आते हैं तुम्हारे दिमाग में चेतन में और तुम उन विचारों के
- 9:38साथ ही चिपट जाते हो ये तुम्हारा अभ्यास हो चुका है।
- 9:43जिसे हमारे ऋषियों ने संस्कार कहा जब तुम क्रिया योग करते हो।
- 9:522 घंटे का क्रिया योग तुम्हारे को सब उखाड़ फेंकेगा।
- 10:02और वो कहाँ जाएगा क्षेत्र में आएगा क्षेत्र में क्षेत्र से उसे
- 10:09बाहर निकलने का बाहर निकलने का ढंग।
- 10:13मैंने बहुत बार बतला दिया है कि तुम साक्षी हो के बैठे रहो वह
- 10:18अपने आप। कैथोरसिस हो जाएगा, निकल जाएगा
- 10:23अभी कैथोरसिस की पूरी प्रोसेसर मेरे श्रोताओं को समझ में नहीं
- 10:28आई। कल भी एक कमेंट आया था बाबा ये
- 10:33कैथोरसिस हम सबको समझ नहीं आता। अब सारी बातों का खुलासा हो जाएगा
- 10:39इस बात में। तुमने क्रिया योग किया या नहीं।
- 10:46क्रिया योग किया धुल उठी। वो चेतन में आती हैं।
- 10:57क्षेत्र में आती किस लिए है? अब यह समझा दूँ तुम्हें क्षेत्र
- 11:03में आती है बाहर निकलने के लिए तुम्हारे भीतर जो दवा था वो काम
- 11:09था वो क्रोध था, लोभ था मोह अहंकार मधु मत सर, कुछ भी था।
- 11:15वह जब बाहर आता है, जब फल पक जाता है तो नीचे करता है और धरती उसे
- 11:25अपनाने से इंकार करता है तो क्या होगा ना तो वो पेड़ पे जा सकता
- 11:32है? जो फल पक के घर गया है धरती उसे
- 11:37अपनाने से इंकार कर दे तो वह ना तो टहनी से जाके जुड़ सकता है।
- 11:45धरती उसे स्वीकार नहीं कर पाती तो फिर क्या होगा?
- 11:50फिर वह फल पागल हो जाएगा। जाऊं तो जाऊं कहाँ?
- 11:56टहनी ने छोड़ दिया है क्योंकि मैं पक गया हूँ, पृथ्वी मुझे अपनाने
- 12:03से इंकार कर रही है तो मैं क्या करूँ, इस उधेड़बुन में वो पागल हो
- 12:10जाएगा। ऐसी ही तुम्हारी जलगानी है, मैं
- 12:15तुम्हें एक बात समझाता हूँ, क्रिया योग नहीं भी करते हो तो भी
- 12:19कथोरसिस भीतर से आता है वो कथोरसिस आता है तुम्हारे चेतन में
- 12:27ये सारा काम क्रोध, लोभ, मोह अंकार।
- 12:32ये भीतर से आई हुई ऊर्जा के तरंगें हैं।
- 12:41ये बाहर निकलने के लिए आई हैं। इन्हें कैसे और कहते हैं और जब ये
- 12:48बाहर निकलने के लिए आई हैं। जब तक मन में रहेंगे चेतन में, तब
- 12:54तक तुम भारी रहोगे और इनकी गिरफ्त में रहोगे।
- 12:59काम आया तुम उनकी गिरफ्त में रहोगे, तुम्हारे शरीर के अंगों पर
- 13:04तंग काम से ग्रस्त होकर फड़फड़ाने लगेंगे।
- 13:12और तुम काम से ग्रस्त हो जाओगे, तुम्हें कोई उपाय नहीं दिखता।
- 13:17आखिर में तुम भोग लेते हो, यही गलती खा जाते हो, मैं तुम्हें
- 13:23कितनी बार बताया है? शहर के भाव से भी काम आए।
- 13:30या क्रिया योग करके भी काम आए वह धूल है।
- 13:35मात्र ये सभी विकास जिन्हें कहते हो वो मात्र धूल है, क्रोध भी,
- 13:41लोह भी, मोह भी। इसको आने दो क्षेत्र में आया है।
- 13:48निकलने के लिए आया है निकलने के लिए आया है उसे ही मैं कहता हूँ
- 13:56तुम इसे रोक कर बाधा पैदा करते हो, तुम खुद ही अपने विनाश को
- 14:06बुलावा देते हो। हमारे पंजाबी में कहावत है हाँ
- 14:15बला दोपहर में कट जा इस बला को तुम अपने दिमाग में पाल लेते हो,
- 14:23चिपट जाते हो, उसे जाने नहीं देते हो।
- 14:28आई है वह निकलने के लिए वह व्रती वह ऊर्जा की तरहंग और तुम उसे
- 14:36पकड़ लेते हो और फिर तुम कहते हो की ये मुझे छोड़ती नहीं पकड़ा
- 14:42तुमने है उसे याद रखो। संसार ने कभी किसी को पकड़ा नहीं
- 14:53संसार की सुंदरता से मुग्ध होकर तुमने संसार को पकड़ा है।
- 14:59संसार कभी किसी को पकड़ता है। तो इसको छोड़ दो, यह निकलने के
- 15:06लिए आया है, इसको निकल जाने दो, कैसे निकलेगा तुम?
- 15:11कोई व्यवधान न खड़ा करो, तुम आराम से बैठे रहो, जैसे नींद की अवस्था
- 15:17में होते हो, वैसे ही तुम। आराम से अपने भीतर बैठे रहो
- 15:23साक्षी धीरे धीरे धीरे धीरे यह जो कूड़ा धूल उठा है, यह वातावरण में
- 15:34चला जाएगा निष्कासित हो जाएगा और तुम निर्भार हो जाओगे।
- 15:41थोड़ी ही देर में तुम पाओगे भक्त किसी के 10 मिनट भी लग सकते हैं
- 15:47और किसी का एक घंटा 2 घंटे भी लग सकते हैं।
- 15:52आराम कर लो इधर भोगना तो बड़ी डिराट शक्ति को क्षीण करना है।
- 16:03जब झाड़ू फेरते हो क्रय योग के मेरे पास बहुत से ऐसे प्रश्न आए
- 16:10हैं। सभी का जवाब मिला, झुला के दे रहा
- 16:12हूँ बाबा कैथो से समझने ये कैथो से तुम क्रय योग करते हो, जो
- 16:19रुकता है। नहीं भी करते हो तो भी धूल उठता
- 16:23रहता है। ध्यान रखना उसी को तुम कहती हो
- 16:27विकास जो सहज से धूल उठता है, क्रिया योग से थोड़ा ज्यादा उठता
- 16:32है। यह जल्दी अपने चेतन को खाली करने
- 16:37की प्रक्रिया है। क्रिया योग से तीव्र हो जाती है।
- 16:42प्रक्रिया निष्कासन की तो इसको निकल निकल जाने दो, इसको रोको मत,
- 16:53तुम इसको पकड़ लेते हो, जहर निकलने के लिए आया है।
- 16:58और फिर तुम चिल्लाते हो बाबा ये काम मुझे छोड़ता नहीं, नहीं ऐसा
- 17:02कैसे हो सकता है काम तुझे छोड़ता नहीं, तुम काम को पकड़े हुए हो,
- 17:08क्रोध मुझे छोड़ता नहीं, नहीं, तुम क्रोध को पकड़े हुए हो, सभी
- 17:14बेकार तुम्हें नहीं पकड़ते। तुम विचारों को पकड़ते हो, अब इस
- 17:20बात को कंठस्थ कर लो हृदयस्थ कर लो, लिख के रख लो कमरे में जब भी
- 17:29कभी काम आए, क्रोध आए, विकार आए उसको पढ़ लिया करो।
- 17:37यह कथोरशी से है, धूल है भीतर से उठी बिल्कुल व्यक्ति भ्रमचारी रह
- 17:44सकता है। बिल्कुल रह सकता है बिलासक
- 17:51तुम्हारे सभी डॉक्टर्स फ़ैल हो जाएंगे।
- 17:55बुद्ध 40 साल तक का घूमते फिरते हैं, व्याख्यान देते हैं एक गांव
- 18:03से दूसरे गांव 50,000 की फौज साथ है।
- 18:08आनंद सदा साथ रहता है चौबीसों घंटा।
- 18:14निरलिप्त बने रहते हैं निरलिप्त बड़ा प्यारा शब्द है अगर तुम
- 18:22निरलिप्त बन जाओ, लिप्त न हो इन विकारों के साथ तो विकार ये धूल
- 18:32है, ये निकल जाएगी। इसको निकल जाने को इसको तुम पकड़
- 18:40लेते हो। क्या हुआ इस बुढ़िया के?
- 18:45इसने धूल को पकड़ लिया, वो मृत्यु का भय था।
- 18:54वो किसी ऊर्जा का गलत प्रवाह था। बूटियां रोक लिया, रोक लिया तो
- 19:02इसने पकड़ लिया, ज़ोर से थाम लिया इसने और वही बात।
- 19:12चिल्लाने लगी, मुझे ये छोड़ नहीं रहा।
- 19:16अरे भाई तुम इसको छोड़ दो, यह तो जड़ है अचेतन है तुम चेतन हो,
- 19:27तुमने इसको पकड़ा है, तुम इसको छोड़ दो।
- 19:32और जैसे ही इसने छोड़ा निर्भर हो के बिल्कुल सीधी सी प्रक्रिया।
- 19:46इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ ये जो बाबा बागेश्वर एक ये और बैठा होता
- 19:52है। ये सांड सा बैठा होता है, उसका
- 19:57नाम नहीं। मेरे को पता क्या है, वो जिन्न
- 20:01निकालता रहता है। मैंने कभी एक आध मेरे पास भेज
- 20:04दिया हरामखोर। कितनी देर हो गयी मेरे को कहता
- 20:13हूँ एक ये मस्टंटा मेरे पास भी भेज दे तेरा वगैरह, लेकिन कोई हो
- 20:23तो भेजे ये पाखंड है। और व्यापार के ऊपर जब चोट आती है
- 20:31तो मेरे पास तो मैं बताता नहीं। मैं मेरे पास दिन में चार बार
- 20:36धमकी आती है, बाबा मार देंगे रे, मार दो के कहते ही रहोगे, आओगे
- 20:45तो। लेकिन मुझे पता है तुम कायर हो
- 20:55तुम मृत्यु से धरते हो, मेरी छाती खुली है तुम्हारी गोलियों के लिए
- 21:05मैं तो बाहर भी चला गया। तुमसे गोलियां सलीम हैं, इसमें
- 21:12मेरा किसी वक्त आपको पत्र में सारी बात व्याख्याय करके लिखूंगा।
- 21:26इस सब प्रतिकाल में आपका मेरे से बात कर लेना।
- 21:33जीवनदायिनी से दुआ और हम एक बहुत बड़ी मुसीबत से बच गए सभी
- 21:44समस्याओं का हल कर के धन्यवाद, तो बहुत छोटा शब्द है।
- 21:51जी वध गुरु की आवश्यकता क्यों है? ये मुझे आज समझाइए।
- 22:00मेरी भावनाओं को मैं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती।
- 22:05परमात्मा आपको लंबी इमरतें आपको स्वस्थ्य रखें।
- 22:14और आप सभी दुखी परिवारों की मदद करते रहे।
- 22:26न जाने कितने लोग जैसे हम तांत्रिकों के मंदिरों के सयानों
- 22:38के चक्कर में भटक गए थे। और कितना कुछ धन बर्बाद हो जाता
- 22:45है बर्बाद हो जाते हैं लोग, मैं तुमसे कहूंगा लूट जाना तुम्हारी
- 23:00इच्छा कौन रोकता है? कई व्यक्तियों को लूट जाने का
- 23:09मज़ा आता है। ढे लो जान लूटाने को जी चाहता।
- 23:25निगाहें मिलाने को जी चाहत हो तोहमत जिसे इश्क।
- 23:42कहती है दुनिया वो तो मत उठाने को जी चाहता किसी के मनाने में।
- 24:01लहसक छुपाई किसी के मनाने में लहसक चौपाई के फिर रूठ जाने को।
- 24:19फिर रूठ जाने को जी चाहता है अगर जी चाहता है लूट जाने का तो
- 24:28तुम्हारी मोर्च जाओ, इंसानों के पास जाओ।
- 24:40ये लुटेरे हैं पाखंडी तुम्हें चूस लेंगे तुम्हें कंगाल करते हैं जब
- 24:49जागू तभी सवेरा ये बिटिया है मेरी।
- 24:57बहन भी बनी हुई है। कोटा से है राजस्थान से ऐसे बहुत
- 25:05से पीड़ित मैं कहता हूँ सारी दुनिया पीड़ित है बहुत तो वैसे
- 25:12लगा देता हूँ मैं सारी दुनिया पीड़ित।
- 25:16जो अपने आप को समझदार समझते हैं वो ही पीड़ित हैं।
- 25:22प्रत्येक व्यक्ति कोई न कोई अवधारणाएं को दिल में संजोये हुए
- 25:28उससे चिपका हुआ है। यही कारण है।
- 25:34कि तुम उस खुशी के तल को छू नहीं पाते हो।
- 25:39इस चपकाहट से हटो तो वहाँ छलांग लगे छलांग लगाने को जी तो बहुत
- 25:46चाहता है तुम्हारा, लेकिन चपकाहट को छोड़ने का जी नहीं करता।
- 25:54और ये दोनों बातें औरत हैं चिपकाहट को छोड़ोगे तो छलांग
- 26:00रखेंगे कथारसिस क्या है, समझा गई होगी क्राय योग करते हो या नहीं
- 26:10भी करते हो हर वक्त। तुम्हारे भीतर के अचेतन मन
- 26:14क्योंकि भरे पड़े हैं, हर वक्त धूल ध्वंस उठती रहती है और धूल
- 26:22ध्वंस तुम्हारे चेतन में आती है। तुम कहते हो विकारो ने हमें घेर
- 26:27लिया ये सहज स्वभाविक। प्राकृतिक क्रिया ये निकलते ही
- 26:34रहेंगे कभी मृत्यु का गया आएगा कभी काम वासना आएगा, कभी क्रोध
- 26:39वासना आएगा, लोभ आएगा कब वो आएगा कभी अंक आएगा आएगा सहज गौरव मत हौ
- 26:49इज़ के एरर्स। यही एरर्स है।
- 26:53इनसे कहपना मत और प्रयाशित मत करना अगर हो जाये तो प्रयाशित
- 26:59करना उससे बड़ी बेवकूफ़ है भोगने से बड़ी बेवकूफ़ है भोगने के बाद
- 27:04प्रयाशित करना बहुत से क्रोधी लोग होते हैं, क्रोध करके पछताते हैं।
- 27:09मैंने क्यों किया? अब मत पछताओ कुछ नहीं होगा, अब तो
- 27:16तुमने तेर कमान से निकाल दिया काम रासनो को भोग लेते हैं, धड़क से
- 27:23गिर पड़ते हैं फिर पछताते हैं हाय मैं नहीं सकती क्यों खराब कर?
- 27:30मत पिस्ताना या फिर से निकल जाने देना रास्ता है भाई ऐसा नहीं है,
- 27:42ये बंद गली है, बंद गली नहीं है, ये चेतन मन रास्ता है।
- 27:49लेकिन इसको जाने का मौका भी तो दो इतना भरा पड़ा है कूड़ा इसको
- 27:57थोड़ा थोड़ा निकल जाने दिया करो निकलता रहेगा, तुम निर्भार रहोगे
- 28:03और ऐसे ही तुम मुक्त होगे। मैंने कल समझाया था।
- 28:07एक कण से चली थी यात्रा तुम्हारी दे ही।
- 28:12इसको भगवान कृष्ण कहते हैं, जिरणा अनन्याणी संयाति नवानी देवी एक कण
- 28:21से चली थी। जुड़ते, जुड़ते जुड़ते?
- 28:28लोग साथ आते गए और कारमा बनता गया।
- 28:33आज तुम देही बन गए हो और देही तुम्हारी जान का जंजाल बन गया है
- 28:39अब ये। कैथोरसेस होता है तो कैथोरसेस भी
- 28:43नहीं होने देता, पकड़ लेते हो उसको इसको छोड़ दो।
- 28:53निकलने का रास्ता है, दो रास्ते है या तो इंद्रियों के द्वारा वोक
- 28:57लो, नीचे से निकाल लो। अगर ओज में परिवर्तित करना चाहते
- 29:04हो तो इस व्रत को जो आ गया है चेतन में इसको किच्चर से सो जाने
- 29:12दो, निकल जाने दो, इसको भौग मत। बिना भोके निकल जाने का लेकिन
- 29:18तुम्हारा लोग काम करता है मेरे पास लोग आ जाते है बाबा जब काम आ
- 29:24ही जाता है तो आपसे क्या बताए? कैसी शर्म आप तो जान ही जाना है
- 29:32घट घट के अंतर की जानते है। तो फिर मन में आता है लोग खा जाते
- 29:38है मन क्या भोग ले थोड़ा सा आनंद ले ले बस ये लोग हो मत किया करो
- 29:47मैं तुम्हारी सभी शरारतों को जानता हूँ।
- 29:49इन शरारतों में से मैं निकला हूँ हसा मत करो।
- 29:56ये सब शरारतें मैंने कि इन गलियों से मैं इन रेतीले स्थानों से
- 30:04मैंने भी पांव लबेड़े हुए है दूध दूल्हा मैं भी हूँ मेरी ज़िन्दगी
- 30:13से कुछ सबक लोग। जैसे मैं कहता हूँ वैसे ही चलते
- 30:17चले जाओ, ये निकलेंगे इसको निकल जाने दो ये सब कुछ मुझे भी सताया
- 30:25था ओवरकम कैसे किया ऐसे आपको तरीका बदला रहा हूँ।
- 30:34मैं कोई शेवर थोड़ी लगाता हूँ, मैं तो ओपेन में बोलता हूँ कि
- 30:39किसी का भला हो जाए और आज किसी का भला ना हो तो छोड़ के जाऊंगा।
- 30:44ये सारा मसाला कभी किसी का भला हो जाए क्योंकि।
- 30:53ढंग तो यही रहेगा तुम्हारे विचारों को लगा देने का और इस ढंग
- 30:57को बताने वाले खो जाएंगे। भोगने वाले ही रह जाएंगे तो उस
- 31:03अंधकार के गहन अंधकार के क्षण में मेरी जे वीडियो उनके लिए।
- 31:13टिमटमाता हुआ दीवक बनेगा, राह दिखलाने वाला दीपक बनेगा, इसलिए
- 31:21छोड़ के जाऊंगा, बोलता हूँ जिन्होंने अब इसका फायदा उठा
- 31:24लिया। उठा लिया नहीं तो जो कभी किसी को
- 31:28जरूरत पड़ेगी अंधकार। गहन अंधकार अमावस्या की रातें भी
- 31:35आएंगी और उन अमावस्या की रातों में सिर्फ अमावस्या की रातों से
- 31:41नहीं चलेगा। अंधकार और भी गहरा होगा।
- 31:44काले मेघ बिछाएंगे। अमावस्या की रात को बिल्कुल
- 31:50अंधकार हो जाएगा। और हाथ को हाथ नहीं दिखेगा उस
- 31:57वेला में जब तुम्हें कुछ नहीं सूझेगा तुम्हें ये वीडियो
- 32:01मार्गदर्शन करें क्या अभी संकट काल में हम क्या करें तो इनको
- 32:08संजो के रखना, संभाल के रखना। अपने बच्चों को गिफ्ट में देना इन
- 32:14शब्दों को जब कभी चूक जाओ तो इनको सुन लेना इनमें तरीके हैं।
- 32:29इन मंत्रों से इन फ़ॉर्मूला से ध्यान रखना जब कोई मंत्र कहते है
- 32:34मंत्र का मतलब फ़ॉर्मूला होता है। इस फ़ॉर्मूला से इस ढंग से तुम
- 32:41मुक्त हो सकते हो। विचारों से अगर कोई कहे के
- 32:45विचारों से मुक्त नहीं हो सकते तो वह मुर्ख है।
- 32:51बस उसने कोशिश नहीं की या वो होना नहीं चाहता।
- 32:56बेकारों से मुक्त हुआ जा सकता है। बुद्ध कैसे मुक्त हो गया?
- 33:00क्रोध से थूक जाते, गालियां निकालते, बट्टे मारते नीचे मारते
- 33:06बुध कृष्ण। सभी कुछ है उनके संग क्या खुशी
- 33:18बताए, बहुत सी व्यशियों ने कोशिश की इसका चरित्र हण करते हैं लेकिन
- 33:27उन्होंने उनके पान छू लिए हैं माते, ऐसा मत करो।
- 33:37दुश्मनों की सचालें बेकार हो गईं तब आपके काम आएँगे।
- 33:44ये शब्द टेक्नोलॉजी ने बड़ा सुंदर फूल फैलाया है।
- 33:52ये संझोक के रखना अपने क्लाउड में आने वाली पीढ़ियों को काम आएगा।
- 34:06समझ आ गया अभी आपको कैथोडसिस कैसे होता है?
- 34:11सरल सा मेथड्स आप पहले भी समझाए, अगर फिर भी न समझाया हो तो फिर
- 34:17बोल दूंगा मुझे कोई आपत्ति नहीं है मेरा काम तो मैं समझाना
- 34:27तुम्हारा शोषण करना है। तुम्हें और उलझाना नहीं।
- 34:34तुम्हारी उलझू हुई गांठों को खोलना है?
- 34:39कोई चाहे खुलवा ले, कोई नहीं चाहे तो मौज करे, लेकिन कम से कम ऐसे
- 34:50प्रश्न मत पूछा करो। यह प्रश्न कैथोफिस का बंधन से
- 34:58मुक्त होने का तरीका है। इससे तुम जान सकोगे जब तुम हल्के
- 35:03हो जाओगे, सब साफ हो जायेगा। शीशे की तरह पारदर्शी
- 35:08ट्रांसपेरेंट। तुम आर पार देख सकोगे हूँ अरे यू
- 35:13लेकिन वो जो पहला सवाल भजयंती माला क्यों अच्छी लगती है?
- 35:20कृष्ण को ये कोई सवाल है? ये मत किया कोई अच्छे सवाल करो।
- 35:29जिससे तुम्हें मित्र का स्वाद चखने को मिला है।
- 35:33तुम कुछ पॉज़िटिव विधेयकी चीजें लेके जाओ जहाँ से जो तुम्हारे
- 35:38जीवन में ज़िन्दगी को जीने के काम आए अगर कोई है तो तुम्हें बतलाने
- 35:46वाला। तो उसका लाभ क्यों नहीं उठाते थे?
- 35:51क्यों भटके फिरते हो भटकने को? और जगह बहुत हैं वहाँ भटक मेरे
- 36:05पुत्र को जब मैंने शक्ति बात किया।
- 36:14उसने एक स्वाद किया सत्य एक देख लिया, पहुंचा नहीं, लेकिन देख
- 36:24लिया सटोरी के वो घटना सत्य एक तो दर्शन छः।
- 36:36सत्य एक है जो मैंने देखा तो ये दर्शन सिख न्याय, वैश्विक सांख्य,
- 36:46योग, मीमांसा और वेदांत। दर्शन छः क्यों?
- 36:52सत्य तो एक है देख लिया लेकिन ध्यान रखना गुरु नानक ने सतोरी की
- 37:03घटना साढ़े 17 साल की उम्र में पाई थी।
- 37:09और प्रबुद्ध हुए 36 साल की उम्र में जाकर संबोधित घटी।
- 37:1436 वर्ष में साढ़े 18 वर्ष यह सब कत्थक से सोने में निकल गए हैं।
- 37:26खाली होने में निकल गए इतने साल। इतने जन्मों का कूड़ा इकट्ठा किया
- 37:31तो हमें भी वक्त लगेगा। कितना लगेगा कोई नहीं जानता,
- 37:39लेकिन हाँ इतना विषय है, जिससे सटोरी की घटनाएं एक बार मिल गई।
- 37:47वह 1 दिन पहुंचेगा, जरूर वह 1 दिन मुक्त जरूर हो जायेगा।
- 37:53सतोरी की घटना मिलते ही स्टेम्प लग जाती है।
- 37:58लिबरेशन कि तुम खाली हो जाओगे, 1 दिन तुम्हारा।
- 38:05जिसे दे ही कहते हैं भगवान कृष्ण यह गल जाएगा, बिगड़ जाएगा, टूट
- 38:12जाएगा, वाष्प बन जाएगा यह सेतु टूट जाएगा, बीच का पुल टूट जाएगा।
- 38:24यह सेतु ही तुम्हें उलझा देता है। तो सत्य एक तो छः दर्शन को पहली
- 38:34बात तो छह तरीके हैं, उस सत्य तक पहुंचने के हैं, लेकिन ध्यान रखना
- 38:41तुम इनके अंदर ओरिज मत जाना। दर्शन का मतलब है मगज खपाई ये छः
- 38:54के छः दर्शन इनसे परमात्मा नहीं मिलता और जो दर्शन के ऊपर भी
- 39:01बोलते हैं वेदांत पे मीमानता पे न्याय पे वैशेषिक पे।
- 39:08वो तो और भी बड़े पागल है जिन्होंने खोजा हो वो बंद्राइन हो
- 39:15वो जेमनी हो वो कपिल हो उन्होंने सिर्फ मग्ज़।
- 39:25दर्शन का मतलब है जो दिमाग को खराब करता है।
- 39:32दर्शन का मतलब है जो बुद्धि से तर्क वितर्क में आ जाएगा।
- 39:44दर्शन का मतलब अनुभव नहीं है, ध्यान रखना एक प्रश्न आगे भी पढ़ा
- 39:48है, लेकिन मुझे लगता है मुश्किल है।
- 39:52वक्त फिर बीत जाता है। दर्शन का मतलब अनुभव नहीं है जिसे
- 40:01तुम दर्शन कहते हो फले से फेंको। है।
- 40:06शब्दों का जंजाल है जाल कैसे तुम शास्त्रार्थ से भी कह लेते हो
- 40:13क्योंकि शास्त्रों में कोरी बकवास है?
- 40:15शब्द तो बकवास ही हुआ करते हैं वे राम राम हो जराते हो।
- 40:23शब्दों में सत्य नहीं होता। सत्य जहाँ है वहाँ शब्द नहीं है
- 40:30वहाँ धुन है बड़ी प्यारी धुन है, शब्द नहीं है शब्द खो जाते हैं
- 40:38बहुत पहले ह्रदय से पार जैसे ही उतर हो गए।
- 40:43उसे जंक्चर पॉइंट पे जाओगे शब्द खो जाएंगे, उससे पहले हृदय से
- 40:49चलते ही शब्द खोना शुरू हो जाएंगे और जंक्चर पे पहुंचते ही शब्द
- 40:55बिल्कुल खत्म हो जाएंगे। दर्शन का मतलब मग्ज खपाई इसलिए
- 41:07परमात्मा को पाना है और तुम्हारे पास कितनी भी कीमती शास्त्र पड़ा
- 41:14है, कितना भी कीमती कहता हूँ मैं। उसको पहले गंगा में बहा देना, आग
- 41:23लगा देना नहीं, मन करता तो अलमारी में बंद कर देना उसमें है, कुछ
- 41:29नहीं निकलेगा, कुछ नहीं निकलेगा। क्या तुम्हारा ये दे ही और बढ़
- 41:38जाएगा थोड़ा सा? और देही को हमने वाष्प बनाना है
- 41:43देही को हमने बढ़ाना नहीं है देही को हमने और ज़्यादा मात्रा नहीं
- 41:52देनी है ये सभी तुम्हारी आस्थाएँ विश्वास सूचनाएं सूचनाओं को और
- 42:00बढ़ा लोगे तुम जानकारीयों को और इकट्ठा कर लोगे तो दे ही, ऐसे ही
- 42:06तो बढ़ा है तुम्हारा दे ही और बढ़ जाएगा सूक्षम शरीर और बढ़ जाएगा।
- 42:16और हमने है सूक्ष्म शरीर को खाली करना और फिर सूक्ष्म शरीर से
- 42:20निजात पाना। अभी तो सूक्ष्म शरीर तुम हो, तुम
- 42:27सर्दी हो, तुम सभी जानते हो। पानीपत की लड़ाई कब हुई?
- 42:33हालांकि एक मत नहीं। तुम्हें तो कबीर तक का पता नहीं
- 42:38है, बाकी तो छोड़ो कबीर छोड़ो अभी जो 10 मिनट पहले कोई वारदात हुई,
- 42:46उसका भी तुम ठीक ठीक अंदाजा नहीं लगा सकते।
- 42:51तुम किसी भी चीज़ को कन्फर्म करके नहीं कह सकते।
- 42:56लेकिन फिर भी उस इतिहास के साथ झपड़ जाते हो जिन्होंने राज़ करना
- 43:01होता है, वो तुम्हें इतिहास में ले जाते हैं।
- 43:09जो ईमानदार आदमी है वो इतिहास बनाता है मेरी इस बात को लिख
- 43:16लेना। कमरे में दीवारों पे चिपका लेना
- 43:24महान व्यक्ति इतिहास बनाया करते हैं और मूर्ख व्यक्ति इतिहास
- 43:30खंगाला करते हैं। अगर कोई इतिहास को खंगालना शुरू
- 43:36कर दे तो समझ लेना इसका कोई निहित स्वार्थ है, अन्यथा कोई इतिहास
- 43:42जैसी मुर्दा चीज़ को क्यों खंगालेगा औरों के घर के झगड़े न
- 43:48हक न छेड़तु? औरों के घर के झगड़े, ना हक ना
- 43:53छेड़ दो तुझको बिगाने का पड़ी अपनी ना भर दो जो खुशहाल करने के
- 44:02लिए आए थे देश को वो बात। पांच 400 साल पुरानी करते हैं।
- 44:14गद्दी मिल गई है, गद्दी से उतार दो, वो ही पुरानी बातों पे आ जाना
- 44:23रुपया क्यों करता है? महंगाई क्यों बढ़ती है?
- 44:31फिर ये जो आज कहते हैं महंगाई बढ़ती है, यह आँखें मूँद लेंगे।
- 44:38ये एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं।
- 44:41सभी हरामखोर हैं। मैं रोज़ कहता हूँ आपसे?
- 44:47ये तो कोई कभी ईमानदार आवे। ईश्वर खुद ही उतरे जैसे कृष्ण ने
- 44:55कहा पृतृ नायब साधु ना बिना शायद चैतुष् कृता धर्म संस्थापना
- 45:03अर्थाये संभवामी युग है। फिर उद्धार होगा नहीं।
- 45:11इन दुष्टों ने धरती को नर्क बना दी है।
- 45:14नर्क तो फिर भी अच्छा है। नर्क में बारूद वगैरह नहीं मिलता
- 45:19है। पंडितों से पूछ लो, मैंने तो कभी
- 45:23नहीं देखा। ये तो दर्शन करके आए हुए हैं ये
- 45:27तो कुम्भी पाक के अंदर भी गोता गुता लगा के आए हैं।
- 45:31अनिशा व्याख्यान क्यों करते हैं? देखो ना जो चीज़ देखी है ये
- 45:37कुम्भी पाक सड़ता हुआ मवाद। रूद्र ये मवाद में पड़े हुए कीड़े
- 45:51उसमें तुम्हें घरा दिया जाएगा। ये जो व्याख्या करते हैं ना या तो
- 45:58झूठ बोलते हैं, सुन जाओ मेरी बात। जैसे मैं इन किशोरियों के बारे
- 46:03में बोला करता हूँ, जब ये बात संभोग की करती हैं या इधर उधर की
- 46:08बातें करती हैं तो मैं इन्हें कहता हूँ, देखो या तो इनका
- 46:12करेक्टर ढीला है या ये झूठ बोलती हूँ?
- 46:17दोनों में से एक बात है। तो पंडितों के बारे में मैं यही
- 46:20कहता हूँ या तो ये झूठ बोलते हैं। अगर झूठ नहीं बोलते तो फिर ये उन
- 46:26कीड़ों में से निकल के आए हैं। कुम्भ भाग के पूरे पूरे दर्शन
- 46:30करके आए हैं। इतने योजन दूर है दूरी तक नाप के
- 46:34आए हैं तो अवश्य खूब बोते खा के आए होंगे।
- 46:39कड़ाहों में इनके पकौड़े भी भुने होंगे, अन्यथा कौन कौन बताता तो
- 46:48इन्होंने दर्शन किये होंगे तभी तो कोई बता पाता है।
- 46:54बाबा नानक कहते हैं कि दर्शन के बिना कैसे व्याख्यान करोगे?
- 46:58उतर गए हो मेरे मन का संसद है। उतर गए हो?
- 47:14उतर गया।
- 47:31उतर गए हो मेरे मन का संसा मन का संसा।
- 47:49उतर गए हो उतर गए हो, उतर गए हो मेरे मन का संसार।
- 48:10जब तेरा दर सन पाययो ठाकुर तुम सर नहीं आयो हो ठाकुर।
- 48:29तुम सरनाइया बिना दर्शन के अनुभव होता दर्शन ही अनुभव।
- 48:52और जो कहते हैं कि नर्क होता है, मैं उनसे बहुत कहता हूँ, नहीं
- 48:55होता भाई, मैंने खंगाल लिया है, सबसे नहीं बाबा होता है, होता है,
- 49:01होता है तो फिर तुमने चखा होगा भाई अपना अनुभव और अनुभव को तो
- 49:05मैं नकार नहीं हो सकता तो सिर मत ही आपका अनुभव।
- 49:09जब तुम कीड़ों मकोड़ों में गुजार के आए हो तो मैं क्यों जरक करूँ?
- 49:20अवश्य तुम अपना अनुभव कर रहे हो तो बोलो होगा क्या तुम्हारे लिए
- 49:26होगा मेरे लिए नहीं? दर्शन दिमाग की मगज खपाई दर्शन
- 49:42शास्त्रों में मत रचना अगर शास्त्रों में उलझ गए न खुदा ही
- 49:49मेला न वसाले सनम न इधर के रहे। ना कुछ नहीं मिलेगा वस्त्रों से
- 50:00पढ़ने से अच्छा काम धाम कर लेना कुछ चार पैसे जुड़ेंगे महंगाई का
- 50:05ज़माना है वस्त्रों को मत पढ़ना वक्त खराब।
- 50:14इनमें है अभी कुछ नहीं शब्दों में कुछ नहीं होता।
- 50:19जो है वो शब्दों के पार है शब्दों में ढूंढने का प्रयास मत करो।
- 50:31एक खट दर्शन खट दर्शन सब मगज खपाई वो बाद्राइन हो वो जेमीन हो वो
- 50:40कपिल हो, पतंजलि हो कुछ हो मगज खपाई।
- 50:51किसी में कुछ नहीं है। शब्दों में कुछ नहीं है।
- 50:54वो चले गए और जो वो लिख गए उनका सही अर्थ आप कर नहीं सकते।
- 51:04क्या बोल के गए पतंजलि? और तुम अर्थ क्या कर दोगे उसका
- 51:09तुम अर्थ के अनर्थ कर दोगे मत ढूंढो वस्त्रों में नहीं मिलेगा
- 51:17शब्दों में शब्दों से पार है, तुम्हारा अस्तित्व और तुम अपने
- 51:25अस्तित्व को ढूंढो। बस यही तुम्हारी जरूरत है, मैं
- 51:30रोज़ कहता हूँ अगर तुमने सारा सामान इकट्ठा कर लिया और जरूरत
- 51:40पूरी नहीं की इच्छाएं पूरी कर ली भोग भोग लिए।
- 51:47सुविधाओं के सुखों के साधन तुमने पैदा कर लिए जरूरत पूरी नहीं की।
- 51:55वो तुम्हारे से बड़ा महा मूड कोई नहीं, अपनी मूर्त को छोड़ो।
- 52:06बहुत ही जन्म बीते मेरे माथो ए जन्म तुम्हारे लेखे थोड़ा सा जन्म
- 52:13तो कुछ वर्ष तो उसके लेखे लगा दो परसों मेरे पास कृषि।
- 52:29एक सम्प्रदायिक है, सम्प्रदाय चलाते हैं हम बहुत से शिक्षा किसी
- 52:38से पता लग गया होगा कि बाबा माथे पर अंगूठा लगाते हैं और भगवान
- 52:47शंकर ने आशीर्वाद दे रखा है। कि बस आप कुछ ना करो, मुक्त हो
- 52:51जाओगे बिल्कुल ठीक है, मैंने कहा ठीक है तो बाबा ऐसा है, बोलो ये
- 53:02थोड़ा सा अंगूठा मेरे भी रहे बाबू क्यों?
- 53:09देखो क्या आपसे क्या झूठ बोल रहे है मिला तो कुछ है नहीं, फिर
- 53:13लोगों को क्यों मुर्खा बना रहे हो?
- 53:16क्या करें? बाबा धंधा है, पीढ़ियों से चला आ
- 53:19रहा है। ये गद्दी नशीन पीढ़ियों से चला आ
- 53:27रहा है। ये लालच, लोभ, ठुकराया भी नहीं
- 53:31जाता हम कोई बुद्ध थोड़ी हैं तो थोड़ा सा अंगूठा मेरे भी लगा देते
- 53:41आपको वरदान है बाबा का मुक्त हो जाएंगे, करते धरते तो हम वैसे भी
- 53:46कुछ नहीं करेंगे भी कुछ नहीं करा भी कुछ नहीं।
- 53:50मेला भी कुछ नहीं। सच बताता हूँ आपसे क्या झूठ बोल
- 53:55रहा हूँ मेरे चेहरे का रंगत देख लीजिए आपके आनंद की मिठास का कोई
- 54:02मुकाबला नहीं और तो मैं बोलता हूँ कहाँ कहाँ करता हूँ कृपा करता
- 54:10हूँ। मैं रात भर आ जाऊंगा, देखो लोगों
- 54:13से नज़र छुपा के आऊंगा, थोड़ा सा अंगूठा लगा दे, मेरे नैया पार हो
- 54:20जाएगा। इन मोडो के बारे में इन दुष्टों
- 54:28के बारे में मैं क्या करूँ? लोगों को देखते हैं।
- 54:34और बड़े चाव से सुन रहे हैं। लोग बड़े चाव से सुन रहे हैं।
- 54:45अंगूठा बाबा से लगवा लें। मुक्ति का स्टेम्प भेजा है।
- 54:57लोगों को भी बेवकूफ बनाते रहो। मैंने कहा अच्छा ऐसे करो, लोगों
- 55:02को बेवकूफ बनाना बंद करो, मैं अंगूठा लगा दूंगा बाबा ये तो बहुत
- 55:07मुश्किल शर्त है। थोड़ी सी आसान शर्त लगा दो।
- 55:11ऐसे ऐसे केस आ जाते हैं। मैं माथा पीट लेता हूँ, ये दिन भी
- 55:17देखने थे। डे ही बनने की प्रक्रिया मैंने कल
- 55:24आपको समझाई, जर्रे से शुरू हुई थी और आज दे ही तुम कहते हो मैं सारे
- 55:30संसार का। सर्वश्रेष्ठ मानव मैं सब पर राज़
- 55:35करने के योग्य हूँ। देखो तुम्हारा देही आज कितना
- 55:39विराट हो गया है देही को विराट मत करो देही को तो फना करना है देही
- 55:48को तो वाष्पी भूत करके। वातावरण में उड़ा देना है।
- 55:54विराट तुम हो, जैसे ही देही को तुम उड़ा दोगे, देही को विराट
- 56:04होने का गर्व है, देही विराट नहीं है।
- 56:11दे ही को भ्रम है कि मैं विराट हूँ एक दूसरे भी होते हैं,
- 56:20जिन्हें भ्रम नहीं होता है, जो वास्तव में विराट हो जाते हैं,
- 56:25अहंकारी को भी भ्रम होता है कि मैं विराट हूँ।
- 56:29मैं सारी दुनिया पे राज़ करने के योग्य हूँ मैं कभी मरूँगा नहीं
- 56:33सर्वशक्ति मानु सर्वव्यापक हूँ सर्व सर्वाज्ञ हूँ ये देह ही होता
- 56:44है देह ही यानी अहंकार। जिसे तुम सारी दुनिया आज मैं कहती
- 56:50है, मैं उसे दे ही कहता हूँ और कृष्ण ने इस इस शलोक को मैं इतना
- 57:00धीमान क्यों देता हूँ? इस श्लोक को इतना अधीमान सिर्फ इस
- 57:06दे ही के कारण देता हूँ एक शब्द में बस अगर ये तुम्हें समझा जाए
- 57:16तो बात बन गई, जर्रे से इकट्ठा हुआ आज दे ही बन गया।
- 57:23सर्वव्यापक बन गया, सर्वशक्तिमान बन गया, सर्वज्ञ बन गया।
- 57:27लेकिन यह है और जितना यह सर्वज्ञ बनने की चेष्टा करेगा,
- 57:33सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापक बनने की चेष्टा करेगा, विराट और वृहद
- 57:38बनने की चेष्टा करेगा। उतना ही तुम दुखी हो जाओगे।
- 57:44इसका विराट होना तुम्हारे लिए दुखदायक है।
- 57:50ये ज्यादा विराट हो जाएगा। तुम ज्यादा दुखी हो जाओगे, ये कम
- 57:55विराट रहेगा, धीरे धीरे कम होता जाएगा।
- 57:59तो तुम सुखी होते जाओगे, कम दुखी रहोगे और जीस दिन ये फना हो जाएगा
- 58:07उस दिन तुम सुखी हो जाओगे, मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा
- 58:16चाहे। कि दाना खाक में मिलकर गुलगुलजार
- 58:21होता है, अपनी हस्ती को मिटाना होता है और तुम्हारी हस्ती क्या
- 58:27है यह मैं जिसे भगवान कृष्ण दे ही कहते हैं, इसको मिटा दो।
- 58:36यह इकट्ठा हुआ है जन्मो जन्मो तक, और तुम्हें मानव का चोला इसीलिए
- 58:41दिया है कि तुम सारे जन्मो के भ्रम इस जन्म में तुम्हें बुद्धि
- 58:47दी है, तुम्हें सारी इन्द्रियां दी हैं, सूक्ष्म इन्द्रियां दी
- 58:53हैं। तुम इस बुद्धि से और बुद्धि के
- 58:59पार जाकर तुम्हें सभी तल दिए गए हैं।
- 59:02तुम इनको नापकर इनके भीतर उतरकर इस देही को खाक कर सकते हो, अपनी
- 59:10हस्ती को मिटा सकते हो, आज तुम्हारी हस्ती।
- 59:14या देही ही है? देही को ही तुम मैं कहते हो देही
- 59:19याने इलूशन? ये भ्रम है तुम्हें, मैं हूँ यहाँ
- 59:27तक ठीक है लेकिन मैं विराट हूँ ये कहते हैं।
- 59:37शास्त्रों से आये शब्दों से आये तो पाप है, अनुभव से आये तो सत्य
- 59:44है। अनुभव से तुम्हें पता चले कि मैं
- 59:48विराट हूँ, वह सत्य है। मैं सर्व व्यापक हूँ जब तुम फैल
- 59:56जाओगे में फैल जाओगे कण कण में तुम ही होगे उपनिषित की वो श्लोक
- 1:00:07ईशा वास में दम सर्वम यत किंच जगत है आम जगत।
- 1:00:12यह अनुभव से आया हुआ ऋषि के अनुभव से आया हुआ शलोक अगर अनुभव से
- 1:00:20आएगा मैं विराट हूँ, सर्व व्यापक हूँ सर्वज्ञ हूँ, तुम सब जानते
- 1:00:25हो। एक छोटा सा प्रश्न और कवर कर पूछा
- 1:00:32है कि आप कहते हो कि परमात्मा में गाइड करेगा?
- 1:00:38वह कैसे उस स्तर पर पहुँच जाऊं जिसे मैं जंक्चर पॉइंट कहता हूँ,
- 1:00:42उससे थोड़ा सा नीचे जाओगे, परमात्मा की आवाज तुम्हें स्पष्ट
- 1:00:46सुनाई पड़ेगी। यथापिंडे तथा प्रमंड सारा
- 1:00:54ब्राह्मण भीतर है और पिंड के इस क्षेत्र में जो इस जंक्चर पॉइंट
- 1:01:01से थोड़ा सा आगे निकलोगे, परमात्मा तुम्हें स्पष्ट गाइड
- 1:01:05करता हुआ नज़र आएगा वहाँ तुम्हारे सब।
- 1:01:09बहुत टूट जाएंगे। ब्रह्म टूट जाएंगे, कन्फ्यूजन मिट
- 1:01:13जाएंगे क्योंकि वह तुम्हें बताएगा कि वह ऐसा होगा और वो होगा उसी
- 1:01:22प्वाइंट पे जाकर लाउसे कहते हैं कि परमात्मा जो करता है ठीक करता
- 1:01:27है। और भले के लिए करता है, उसी
- 1:01:33प्वाइंट पे जाकर लाउसे को पता चलता है जब परमात्मा बताता है कि
- 1:01:38ये होगा और हो जाएगा तुम लाख टालने की कोशिश करो नहीं टलेगा।
- 1:01:49लेकिन तुम वहाँ जाते नहीं, इस डर के मारे नहीं अभी तो तुम्हें पता
- 1:01:56है अगर तुम्हें पता चल जाए कि ऐसा प्वाइंट है।
- 1:01:59जहाँ परमात्मा पल पल पर आदमी को बताता है कि ये होगा ये होगा ऐसे
- 1:02:04करो, ऐसा करो तो अगर व्यक्ति से उलट चले तो परमात्मा कहता है ऐसा
- 1:02:14होगा तो वैसा होगा अगर उलट चले। तो ऐसा ही होगा जैसे डॉक्टर कहेगा
- 1:02:23अगर तुम जहर पीओगे तो मर जाओगे, फिर भी तुम जहर पी लो तो क्या
- 1:02:29होगा? मरोगे?
- 1:02:32परमात्मा कहता है ऐसा चलोगे तो सही, मेरे विधान में होगा।
- 1:02:40नहीं चलोगे तो मत चलो तुम स्वतंत्र भी हो, यही गलत होता है।
- 1:02:49अभी मैंने जब 30 अप्रैल को में गिरा चूकना टूटा।
- 1:02:54उससे 10 दिन पहले मुझे बाबा बताके गए।
- 1:02:57विपत्ति काल शुरू हो गया, मार्ग दशा शुरू हो गई।
- 1:03:05बृहस्पति मेरा मार्ग है। मार्ग दशा शुरू हो गई।
- 1:03:11महादशा और इसमें विपत्ति काल शुरू हो गया है।
- 1:03:17लेकिन मुझे पता है संभलूंगा क्या खाक क्या खाक संभल लूँगा मैं
- 1:03:26संभलना भी चाहा तो नहीं संभल पाऊंगा, लेकिन मैं गिरा 10 दिन के
- 1:03:33बाद मैं गिरा, मुझे आगाह करने के बावजूद भी मैं गिरा।
- 1:03:40मैं आगाह हुआ ही नहीं, मैं जानता था यह होगा कोई फायदा नहीं।
- 1:03:48उस विराट से लड़ने का कोई फायदा नहीं।
- 1:03:51समर्पण कर दो, ये होगा तो होगा ठीक।
- 1:04:01जैसी तेरी मर्जी उसी में हमरा जी हमारी दोनों तरफ से बाबा है तुम
- 1:04:14जैसा चाहती हो वैसा करो। और वहाँ जाकर व्यक्ति देख लेता
- 1:04:20है। संसार में मेरा कुछ नहीं है, मेरा
- 1:04:23तो छोड़ो इस संसार में मैं ही नहीं हूँ।
- 1:04:27इस संसार में जो भी कुछ है, वो एक ही तत्व है, उस एक तत्व को नाम
- 1:04:33चाहिए, कुछ दे लो अल्लाह कह लो राम कह लो रहीम कह लो राधे कह लो।
- 1:04:38कृष्णा, कह लो राम कह लो नाम तुम्हारा भाषाएँ तुम्हारी, लेकिन
- 1:04:50अस्तित्व एक वह ही है वहाँ जाकर तुम समझ पाओगे।
- 1:04:58कि तुम हो नहीं, तुम्हारा होना एक छलावा है और तुम इस छलावे में
- 1:05:07अटके पड़े हो, वहाँ जाकर तुम्हें सब तुम्हारे खुल जाएंगे।
- 1:05:14पाखंड। सब गुथिया खुल जाएँगी, गांठें खुल
- 1:05:19जाएँगी, उससे थोड़ा आगे चलोगे, तुम्हें पता चल जायेगा।
- 1:05:23हू आर यू जो रमन कहते हैं नो दाय सैड रिमेम्बर योरसेल्फ गुरजियस
- 1:05:32कहते हैं, सारे संत कहते हैं, अपने आपको जान लो।
- 1:05:38यह जो मरेगा अब का देही मरेगा तो वास्तव जो तुम हो आत्मा उसका पता
- 1:05:46चलेगा। तो गोरख कहते हैं मरो मरो हे जो
- 1:05:52की मरो। मरो मरण है मीठा ये बड़ा प्यारा
- 1:05:56शब्द है अगर तुमने इस देही को गल जाने के उपाय ढूंढ लिए और ये गल
- 1:06:04गया तो तुम पाओगे जैसे जैसे ये गलेगा और भाप बनकर उड़ेगा वाष्प
- 1:06:10बनके वैसे वैसे तुम हल्का बन पाओगे अपने आप में।
- 1:06:15तुम्हे मज़ा आएगा जीने का, तुम कहोगे हाँ ये है जीना और ये गलत
- 1:06:22हो जाएगा। तुम भार मुक्त होते जाओगे, बंधन
- 1:06:26मुक्त भी होते जाओगे, भार मुक्त भी होते जाओगे जैसे जैसे गले जाओ
- 1:06:31वैसे वैसे तुम। निर्भार हो के और जीस दिन ये पूरा
- 1:06:36गल गया देहि रहा ही नहीं उस दिन तुम पाओगे एक ही तत्व बचा देहि
- 1:06:45विहीन देहविहि नहीं देहि विहीन। नई शब्द बोल रहा हूँ मैं तो हमारे
- 1:06:51शास्त्र में तुम्हें मिलेंगे नहीं कृष्ण ने देही बोला उसका अर्थ सही
- 1:06:58नहीं होगा जीस दिन तुम देहि विहीन हो जाओगे उस दिन तुम ये तीनो
- 1:07:06चीज़े है सर्वव्यापक सर्वशक्ति मनो र सर्वाग।
- 1:07:10तुम्हें सब कुछ पता होगा, तुम सब कुछ ठीक कर सकोगे।
- 1:07:20इसे लोग कह देते हैं जब आप उस स्थल पर जाते हो और आप सारे संसार
- 1:07:26को दुखी। से सुखी बना सकते हो तो क्यों
- 1:07:29नहीं बनाते? बड़ा सुंदर सवाल कर देते हैं और
- 1:07:34अपनी जान में वो बहुत बड़े हित चिंता का हैं।
- 1:07:38दुनिया के चाहे साँझ को एक मुर्गा लपेट का हो, बातें बड़ी प्यारी
- 1:07:46प्यारी करते हैं। जब आप वहाँ जाकर संसार को दुख और
- 1:07:52रोग मुक्त कर सकते हैं पर करते कौन हैं?
- 1:07:56बिलकुल कर सकता हूँ मैं झूठ नहीं बोलूँगा आई हैव कैपेसिटी टु डू
- 1:08:05लेकिन मैं करता क्यों नहीं? फिर मुझे जवाब दे दो परमात्मा सब
- 1:08:10कुछ कर सकता है वो करता क्यों नहीं, मैं तो उसकी संतान हूँ अभी
- 1:08:21तो ये घड़ा फूटा भी नहीं अभी तो मैं उसमें समाया भी नहीं वो जो
- 1:08:27कबीर जैसे नानक जैसे समा गए, वो क्यों?
- 1:08:30नहीं करते हो बताओ मैं मीरा हूँ, वह नानक, वह कबीर, वह कृष्ण, मैं
- 1:08:41रहा हूँ, वह क्यों नहीं करता वह मोहम्मद, वह क्यों नहीं करता, तुम
- 1:08:48मुझे कहते हो? तो मैं एक ही बात बता दो, फिर
- 1:09:03उसके बाद बताने का कुछ बाकी नहीं रहेगा या उसके लीला है अगर इस
- 1:09:12लीला में मैं मैं बदान डालूँगा। तो मजाक कर के हो जाएगा, खेल
- 1:09:20खेलने का कोई मज़ा नहीं आएगा। यह तभी तक खेल सुंदर लगता है जब
- 1:09:28तक ठरके रख रहे हैं और चीखें चिल्लाते निकलते हैं।
- 1:09:34जब तक तुम्हारे स्वर्ग भी हैं और तुम्हारे नरक भी हैं, प्रखंडी भी
- 1:09:40हैं, सत्यवादी भी हैं। सभी चेहरों से युक्त ये संसार
- 1:09:49परमात्मा की खेल है। और जैसे इस खेल से पर्दा उठ गया
- 1:09:58उस दिन तुम पाओगे के इतने जन्म तक व्यर्थ में है।
- 1:10:09पर्दा लेकर घूमते रहे। उसका खेल है, लेकिन वैज्ञानिक,
- 1:10:19बुद्धि, तर्क युक्त बुद्धि, दार्शनिक बुद्धि इस बात को
- 1:10:28स्वीकार नहीं करता। इसका प्रतिकार कर दिया।
- 1:10:32और प्रतिकार ही नहीं करेगी। इसके प्रतियोगी बनेंगे।
- 1:10:37इसका जवाब देंगे। फिर ये जो होता है ये कतल गारख ये
- 1:10:45सब ये सब तो वो दंड देता है भाई। वह खेलता है तो वो न्याय भी तो
- 1:10:52करता है मानवा वो खुद खेलता है लेकिन खुद के साथ भी तो न्याय
- 1:10:59करता है, अन्याय नहीं करता वो खुद के साथ शायद तुम्हारी जिंदगी में
- 1:11:07ऐसे क्षण आया हूँ। जब कोई ना हो खेलने वाला और तुम
- 1:11:12ही हो कोई लूडो खेलने लग गए। कोई कैरम खेलने लग गए मेरी जिंदगी
- 1:11:18में अशिक्षण आया दूसरा कोई नहीं मैं खुद से ही खेलने लगा।
- 1:11:26कैरम खेल रहा हूँ। इधर गट्टी आ गई, इधर रख दी, उधर
- 1:11:30गट्टी आ गई, उधर रख दी इतनी ईमानदारी से रख दी बेईमानी किसके
- 1:11:35साथ करू? खुद के साथ बेईमानी होती नहीं,
- 1:11:38दोनों तरफ मैं ही तो हूँ, कोई दूसरा है ही नहीं।
- 1:11:49तुम खेल खेलते हो रुपए जोड़तें हो मान सन्मान गदियाँ लेके जाते हो
- 1:11:55तुमने कभी सोचा क्यों जोड़तें हो ये खेल नहीं है खेल है।
- 1:12:06तो मैं खेला, कैरम खेला, लूडो खेला, आखिर में मैं ही जीता, मैं
- 1:12:12ही आरा तुम कभी खेल के देखना तुम जरूर तुम्हारी ज़िन्दगी में ये
- 1:12:16क्षण आ रहे हो। हमने फुर्सत के मराले बहुत देखे
- 1:12:23हैं। फुर्सत के मुकाम बहुत देखे हैं तो
- 1:12:28बहुत बार मैंने अकेले में कैरम खेला है, कैरम वो लूडो भी खेला
- 1:12:35है। ईमानदारी से खेला है क्योंकि
- 1:12:38बेमानी किसके साथ कर रहा है? जब मैं ही हूँ खेलने वाला तो
- 1:12:45बेईमान नहीं करूँ तो किसके साथ करूँ?
- 1:12:48बड़ी इमानदारी से खेला जब खेलने वाला मैं हूँ दोनों तरफ से इधर
- 1:12:53बैठ जाता फिर उधर बैठ जाता जाके फिर गिटकी को खिलाता और इमानदारी
- 1:12:58से जो भी। कोई काली आ गई, कोई सफेद आ गई,
- 1:13:01कोई लाल आ गई तो उसको रख लिया और बाद में हिसाब तब लगाया ये पास्ता
- 1:13:08जीत गया। ये पास्ता हार गया, हार भी मैं
- 1:13:10गया और जीत भी मैं गया ये खेल। ये जीवन का खेल है परमात्मा का
- 1:13:18तुमने कुछ बनाया नहीं, अगर बनाया हो तो बताओ तो तुम्हारे बाप ने
- 1:13:22कुछ बनाया, बता दो ये गंगा किनारे बैठे 100 पीढ़ियों का नाम ले
- 1:13:26देंगे। पण्डे इनसे पूछना 100 पीढ़ियों के
- 1:13:30नाम बना देंगे इनसे पूछना कि इन्होंने कुछ बनाया 100 पीढ़ियों
- 1:13:34ने। नहीं बनाया, किसी ने कुछ नहीं
- 1:13:37कमाया, सभी ने कमाया कमाया सब ने बनाया, किसी ने कुछ नहीं बनाने
- 1:13:44वाला वो एक है और आखिर में तुम्हें पता लगता है वो बनाने
- 1:13:50वाला मैं ही हूँ। कल ही मेरी किसी संत के साथ बात
- 1:13:57हो रही थी, मैं उससे बोला तुम कहीं भौंक लो, तुम कुछ प्रचार कर
- 1:14:06लो, गीता पे बोल लो पे बोल लो। अष्टावक्र पे बोल लो आखिर में
- 1:14:21मेरी शरण में आना पड़ेगा यू विल हैव टु कम टु सरेंडर मी इन दी
- 1:14:34लास्ट। कहीं फिर लो, कहीं वोक लो, आखिर
- 1:14:40में तुम्हें मुझे समर्पण करना ही पड़ेगा।
- 1:14:52श्री कृष्ण गोबिंद। हरे मुरा रे हनाथ नारायण वासुदेव
- 1:15:11श्री कृष्ण गोबिंद। हरे मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव,
- 1:15:26श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी। पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात
- 1:15:43स्वामी सखा हमारे। हिनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:15:59गोविंद हरे मुरारे। हेनाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:16:15गोविंद हरे मुरारी हेनाथ, नारायण वासुदेव।
- 1:16:30धन्यवाद।