Latest / Baba ji Vijay Vats / 26 Apr 25-अगर कोई धमकी दे जाए, वो भी विराट, तो व्यक्ति क्या करे?Enlightenment से पहले और बाद की घटनायें! Be Non Reactive.
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- 0:32राजीव कुमार, बाबा जी, प्रणव। जीवन में अगर।
- 0:51कोई धमकी दी जाए और धमकी भी बड़ी विराट।
- 1:04तो व्यक्ति क्या करे? मुकाबला करे या फिर चुप हो जाए,
- 1:20यह समर्पण करते तीन ही रस्ते हैं। ज़िन्दगी जीने के तीन दल हैं और
- 1:47उन तलों को तुम ठीक से समझा लेना पुत्र की तुम कौन से पर।
- 2:07पहली जहाँ व्यक्ति को अपना साक्ष्य नहीं पता होता, यह पहला
- 2:19स्टेप है। वो अवस्था जब तुम्हें अपने साक्षी
- 2:27का पता नहीं होता, एक दूसरी अवस्था है, तुम अभ्यास करते हो?
- 2:46होश में चलते हो, होश में खाते हो, होश में नहाते हो, जहाँ तक हो
- 2:57सके तुम होश को साधने की चेष्टा करते हो।
- 3:04और 1 दिन परिणाम आपके सामने आता है।
- 3:07सहज, हल्की, हल्की सी झलकें साक्षी की आपके सामने आती हैं।
- 3:16पता चलता है कि दो तल हैं, एक नहीं।
- 3:21उससे पहले एक तल होता है। बस उससे पहले तो वह जो भी नाम है
- 3:28आपका नाम राजीव है, उससे पहले राजीव होता है और कुछ नहीं होता
- 3:36है। ये नाम लोगों ने दिया होता है
- 3:38तुम्हारे माँ बाप। राजीव जब तक राजीव रहेगा तब तक वह
- 3:51साक्षी नहीं होगा। यह कोमन तल है।
- 3:59व्यक्ति का आमतौर से 99% व्यक्ति। इस स्तर पे होते हैं छोड़ो बेकार
- 4:13की बात कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना।
- 4:36छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीत न जाए रहना बस वो चारवाक
- 4:48पंथी। हैं।
- 4:53यदा जीवित, सुखी जीवित प्रणमकृतवा ग्रितम पीवित कर्ज उठा लो घी पी
- 5:02लो बस में बुध सौदे से पुनर आगमन कुतह दोनों मर जाती हैं।
- 5:13न ऋण लेने वाला, न ऋण देने वाला, कभी किसी ने बहम होने के बाद वापस
- 5:19आते हुए देखा है। ये चारवाँ वादी होते हैं अभी तुम
- 5:27क्या हो इसका फैसला मैं नहीं कर सकता क्योंकि तुम?
- 5:33बेहतर जानते हो कुछ रीत जगत की ऐसी है कुछ रीत जगत की ऐसी है हर
- 5:51एक सुबह की शाम। हुई कुछ रीत जगत की ऐसी है।
- 6:00हर एक सुबह की शाम हुई तू कौन है तेरा नाम है क्या?
- 6:10तू कौन है तेरा नाम है क्या? सीता भी यहाँ बदनाम हुई।
- 6:18छोड़ो बेकार की बात है। छोड़ो बेकार की बातों में कहीं भी
- 6:26न जाए रहना कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना।
- 6:45प्रश्न बड़ा शानदार है, क्या करना चाहिए?
- 6:52मुझसे मत पूछो सारा सूत्र मैं तुम्हें समझा देता हूँ।
- 7:00परते परते खोल देता हूँ उसकी फैसला तुम करोगे?
- 7:08बहुत पुरानी बात है जब मेरे बड़े भाई की मृत्यु हुई।
- 7:20तो सुरेश कुछ कुछ लोगों के पैसे इकट्ठे करके एक कमेटियां चला करती
- 7:26थी। आज तो पता नहीं चलती होंगी तो
- 7:33उसकी अचानक मृत्यु के बाद। लोगों में हड़कंप मच गया।
- 7:39दो 250 मेंबर थे सबकी निगाहें मेरी।
- 7:47और थी। मैंने देखा कुछ लोग मेरे पास आए।
- 7:58मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि आप चिंता मत करो, मैं चलाऊंगा।
- 8:03इनको लोग आश्वस्त हुए, मैंने उनकी संभाली और मैं उसको संपूर्ण करने
- 8:19जा रहा था। मेरे ही भाई का एक मित्र यहाँ के
- 8:28पूरा ट्रांसपोर्ट। जिसकी बड़ी तारीफ किया करता था
- 8:38मेरा बुढ़ापा। वो अच्छा खासा पैसा लोगों का
- 8:49ब्याज पर ले। क्या शायद मुझे सुनने वाले ये
- 8:56कमेटियों का हिसाब तब जानते होंगे?
- 8:59आजकल सब जगह चलते हैं। मुझे संभालनी पड़ी उसी एक बड़े
- 9:12ट्रांसपोर्टर ने उस वक्त तो बहुत करीब करीब गरीबी के हालत में वह
- 9:21डूज रहा था, बीमार था। गरीबी की हालत में जो रात एक बार
- 9:36फिर वक्त खराब आया इस कहानी। को।
- 9:43ध्यान से सुन बहुत कुछ ये तुम्हारी ज़िन्दगी के साथ संबंधित
- 9:51बातें हैं पूछा है अगर। कोई धमकी दे जाए तो क्या करें?
- 10:11मैं जो चला रहा था उसमें से भी कुछ लोग बेईमान हो गए और सबसे
- 10:15ज्यादा पैसा उसे ट्रांसपोर्टर ने रख लिया।
- 10:18मेरा तो फैसला ये हुआ। हम सभी मेंबर इकट्ठे हुए।
- 10:37क्या किया जाए बताओ जैसे आप कहोगे मैं वैसे ही कर दूंगा।
- 10:50पिताजी जीवन थे तब। यह बात 82 के के झुके हैं।
- 10:56उस वक्त तीन चार रोग कुछ ऐसे थे जो रथ गए।
- 11:05पैसे एक स्वामी थे वो सो के माला डाले रखते थे।
- 11:14रोज़ शाम को शराब। पीते हैं यही कुछ सिखाया होगा
- 11:19उसने ओशो यहाँ चूक हो गया है, मैं बहुत बार करती हूँ।
- 11:29एक बुध पुरुष। कैसे एक छोटी सी गलती से एक महान
- 11:38परंपरा का है आबू नहीं बन सकता है अगर छोटी सी गलती उससे न हुई
- 11:44होती। यद्यपि एक मामले में वो ठीक था।
- 11:50लेकिन परिभाषित ठीक नहीं कर पाए। ओशन कल को छू लिया था, जहाँ पता
- 11:57चल गया मैं हूँ कौन ओह एमआइ और ये घटना उनकी तब हुई।
- 12:11मैं थोड़ा सा बता दूँ। इन बातों को बड़े ध्यान से सुनना
- 12:16क्योंकि ये प्रसंग बड़े कीमती हैं।
- 12:19बा मुश्किल आपने सवाल किया ओशो जा रहे थे अपने नाना।
- 12:34के पास पले। ओशो?
- 12:39मैं जब खंगाल रहा था, उनकी बात से उन्होंने बताया कि जहाँ
- 12:44एनलाइटनमेंट का मुझे झटका लगा, ऐसा ही होता है जीस दुख से आप
- 12:54डृत्य हो। इस बात को हृदय में प्रवेश कर
- 13:01देने, देना, रोकना मत। महावीर ने कहा कि सच्चे श्रावक
- 13:09बनो, इसका अर्थ यह है कि जीसको सुनना चाहते हो?
- 13:14जीसको सुनना चाहते हो दबा कोई नहीं उसको जब सुनने लगो तो खोल
- 13:22देना अपने दिमाग को और प्रविष्ट हो जाने देना उसकी कही हुई बातों
- 13:28को रोकना मत सेंसर मत कर देना बातों को।
- 13:33यही था सम्यक श्रवण। जब आउट ऑफ कंट्रोल हो गई बात
- 13:53पिताजी ने मुझे कहा किस झगड़े को न बैठती।
- 14:00मैंने कहा ठीक है, मैंने सभी मेंबरों से राय की क्या किया जाए?
- 14:13लोग रहम दिल भी हैं। और हमारे शहर के लोग तो विशेष तौर
- 14:23से रहम दिल हैं, लेकिन याद रखना। लंका के अंदर।
- 14:41रावण जैसे अनकारी। भी होता है।
- 14:46और विभीषण जैसे देशद्रोही भी होते हैं।
- 14:51विभीषण को मैं कोई बहुत अच्छा भाई नहीं समझता।
- 14:57जो विपत्ति काल के अंदर। अपने सगे भाई कैक्सी के बेटे थे।
- 15:07तीनों सगे भाई को छोड़कर चला जाए विरोधी की शरण में।
- 15:21वो भाई कहाँ से रह गया? सच पूछूं तो भाई वो होता है।
- 15:27जो बराबर की बह होती विपरीत परिस्थितियों में विशेष तौर से
- 15:37उसके साथ। खड़े रहना उन्नत है, भाई का
- 15:42दायित्व है। रावण अहंकारी था, निश्चित बेदों
- 15:56का ज्ञान था, लेकिन बिल्कुल ऐसा ही जैसा आपके पास।
- 16:01सर लोगों के पास आचार्य प्रशांत के पास है चिपका हट नहीं मिटी,
- 16:15धरती का सारा ज्ञान एकत्रित कर लिया।
- 16:20पूछ लो इनसे। लेकिन आज तो एआई चल पड़ा।
- 16:26ज्यादा बेहतर तरीके से बता देगा। बिल्कुल बेचारा ग्रीडलेसनेस में
- 16:32कोई लोग नहीं उसे और ऐसा शानदार स्पीक जवाब देगा कि तुम्हारे
- 16:38आचार्य ये जवाब नहीं दे सकते। कुलवक्त आएगा जब ये तथा कथित
- 16:53महारत ही विद्वान जिनके न्यूरोस भरे पड़े हैं।
- 16:57सभी जानकारीयों। से।
- 17:07रोबोट के आगे बेकार हो जाएंगे, हाथ पर हाथ धर कर बैठेंगे, क्या
- 17:14करेगा कोई खेती? रिपोर्ट करेगा, व्यापार रिपोर्ट
- 17:19करेगा एक व्यक्ति होगा मालिक काउंटर पर बैठा होगा।
- 17:26सब मैनेज वो ही करेगा, बैठकर काम करेंगे रोबोट ये वक्त शीघ्र ही
- 17:33आने वाला है। रावण अहंकारी था, बिलकुल बिलाशक
- 17:49अहंकारी था तो उसने बदला लेने की ठंड।
- 17:54लेकिन कसूर किसका था? अब इन ज्यादा गहराइयों में हम ना
- 17:58जाए कसूर शृप्न का का नहीं। शृप्न का विधवा थी शृप्न खा का
- 18:12पति विद्युत जीवा। नागलोक का राजा था, स्वप्नखा
- 18:21सुन्दर थी, रूपवती थी। इसका नाम बिगाड़ ले गया।
- 18:28सही सही नाम था इसका स्वरूप नखा। अच्छे रूप रंग वाली नैन नक्श वाली
- 18:35सर रुप नखा नैन नक्श। वाली प्रति सुंदर लड़की थी।
- 18:42ब्राह्मण पुत्री थी राजा की बहन। थी।
- 18:54ऋषियों की संतान थी, पलास्ती की पोती थी।
- 19:08बिसर्भा की बेटी थी तो सभी ऋषि थे।
- 19:16मामूली खानदान नहीं था रावण का और शुल्क?
- 19:21निवासी उसके पति का कतल रोष में आकर विद्युत जीवा उसका नाम था।
- 19:31नागलोक का निवासी था। चुलबुली सी चुलबुली अशोक नका कुछ
- 19:42फॉर्वर्ड थी ज्यादा। टहलती चहलकदमी करती है राम और
- 19:56रक्षण तो अपूर्व सुंदर थे। उनका लाभन्य शब्दों में वरन नहीं
- 20:06किया जा सकता। इसलिए उन्हें अवतरण कहते हैं।
- 20:12अवतार वह अवतरित हुए किसी माँ की कोख से पैदा हुए होंगे ऐसा लगता
- 20:17नहीं इतना अपूर्व लावण्या सुंदरता की मूर्तियां चारों भाई।
- 20:29यह जज जी की करामात। थी अब ये बात।
- 20:34बड़ी लंबी हो जाए। जज जी की करामात थी क्योंकि संतान
- 20:43नहीं होती थी। दशरथ क्या?
- 20:50और विश्वामित्र ने यह सुझाव दिया कि राजा सरंगी ऋषि को बुलाओ।
- 21:07अपुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ करेंगे और आपकी संतान पैदा हो जाएगी और
- 21:15इतनी सुंदर संतान और योग्य वाले शाली संतान पैदा होगी।
- 21:23धीरज से युक्त। जो यज्जन से पैदा होता है, बड़ा
- 21:30धैर्यवान होता है। ये गहरी बातें हैं फिर कभी
- 21:34बताऊँगा इस पर संग मर जाएगा आज का।
- 21:39वीडियो इतनी लंबी हो जाती है। और आ तो बा मुझ कर।
- 21:433035 40 मिनट के देख पाते हैं मैं रोज़।
- 21:47कहता हूँ। आपसे लेकिन सुनने वाले तो इस
- 21:55वीडियो को चार चार बार भी सुनते हैं तभी खोपड़े से हृदय में और
- 22:03हृदय से अस्तित्व में प्रवेश करते हैं शब्द।
- 22:08और फिर ढलते हैं आपके जीवन पद्धति में पुत्र हुए चार अतीम सुन्दर
- 22:23थे, इधर शृपनखा भी कम सुन्दर। अपने ही क्षेत्र में गोदावरी नदी
- 22:34के किनारे एक बड़ा सुंदर बाघ वह मन जज गया।
- 22:42सीता का स्वामी यहाँ बना ले कुटीर।
- 22:46ठीक बना लेते हैं भैया। राम, लक्ष्मण और वहाँ के कुछ।
- 23:12जज करवाया गया। और अग्नि देव ने प्रसनो के दशरथ
- 23:21को एक दिव्य पायश याने के मिष्ठान खीर।
- 23:32खीर का एक स्वर्ण कलश दिया तेरा नियम में बांटता हूँ सुमित्रा
- 23:41थोड़ा सा ज्यादा खा गई और कौशल्या और के के ने ठीक ठीक खाया।
- 23:50कौशल्या और के के के एक एक पुत्र हुआ और सुमित्रा के दो पुत्र हुए
- 23:59लक्ष्मण और शत्रु दोनों सगे भाई थे राम कौशल्या।
- 24:08और भरत के के एक विशेष सिद्धि होती है जिसके द्वारा उसको पहले
- 24:22सिद्ध करके उसको पुत्रृष्ठि यज्ञ ही कहते हैं।
- 24:33वह कहीं भी ऐसी जगह पर जहाँ मूर्ति तफान किए जाते हैं।
- 24:38कब्रिस्तान में भी हो सकता है शमशान।
- 24:40में भी हो सकता है। जगह पर होनी चाहिए जहाँ।
- 24:47बस। वैराग्य ही वैराग्य ऐसे स्थान पर
- 24:52वो यज्ञ सफल हो जाता है तो इसके लिए शमशान या कब्रिस्तान है।
- 24:58ठीक है क्योंकि सभी वहाँ कोई असता तो है नहीं।
- 25:01सभी रोते। हैं।
- 25:03सभी की भावनाओं में शुद्ध ज्वाला होती है।
- 25:09वहाँ विचार बड़े शोभ होते हैं वहाँ पता लगता है आदमी को कुछ
- 25:16क्षणों के लिए कीनेश्वर है सब लेकिन फिर संसार की जब हवा।
- 25:24चलती है तो भूल जाता है वो। मैंने भी इसे आजमाया है, बहुत बार
- 25:35उसमें है किसी के संतान नहीं होती थी मैं ये बना के दे देता खाओ
- 25:40भाई। यहाँ एक बात और बता दूँ।
- 25:51शास्त्रों में लिखा है कि तीनों रानियों ने खा लिया लेकिन बात
- 25:56समझे न, ये दशरथ ने भी खाया। बराबर दोनों को जोड़ों को खाना
- 26:06पड़ता है, कुछ ऐसा है ईश्वर की सृष्टि में, तुम सब कुछ जान गए यह
- 26:16कभी? समझे न मत था अगर ऐसा समझा तो
- 26:22तुमसे बड़ा मूर्ख कोई। एथेंस में लोग कहते हैं कि
- 26:27सुक्रात महान है सब जानता है, ज्ञानी है और लोग जाते हैं
- 26:33सुक्रात के पास सुना है तुम बहुत बड़े ज्ञानी हो सुक्रात कहता है।
- 26:40न। क्षमा करो, जब से जाना है।
- 26:48तब से ये भी जाना है कि मुझसे बड़ा अज्ञानी हुई।
- 26:53मैं कुछ नहीं जानता। फलों से लदा हुआ वृक्ष झोक जाया
- 27:00करता है और जमीन से लग जाया करता है डाउन टु वर्क।
- 27:07इस चीज़ का यही मतलब। होता है।
- 27:15बड़े बड़ाई न करें, बड़े न बोलें बोल रहमान हीरा कब कह लाख टका है
- 27:27मोल? राम और लक्ष्मण कटे हैं।
- 27:39सुपनखा मोहित हो गई विधवा है सुपनखा।
- 27:52राम से प्रस्ताव प्रोपोज, आज तुझे हमारे वैलेंटाइन डेज के अंदर जो
- 27:59आता है प्रोपोज डे भी आता है। एक प्रेमी प्रेमिका को प्रोपोज
- 28:05करता है। उस वक्त प्रेमिका ने प्रेमी को
- 28:10प्रोपोज। कर दिया क्या खास बात?
- 28:13दिल मिलेंगे बात हराम में ज्यादा लवण्य था शोर्य था तो श्री राम के
- 28:22पास चली गई पर ये शोरे। हाँ, समझ आई।
- 28:40थू से प्रेम कर बोल तो राम जी बोले देखो ऐसा है।
- 28:50हम मजाक की मूड में, वो भी। थे।
- 28:53वो जानते न थे ये रावण की बहना है।
- 28:56संत थे रूपवती। थे।
- 29:00नाग लोक के राजा ने भी लव मैरिज इसीलिए की थी लेकिन ये परंपरा के
- 29:06वृद्ध था इसलिए रावण अंगारी था। उसने विद्युत जीवा को सिर धर से
- 29:13अलग कर दिया। अपने ही दरबार में बला के और
- 29:17देखते ही देखते सुप्रंका के सामने उसके पति का वध हो।
- 29:22गया। तो उसने तर्क दिया राम जी ने।
- 29:35तो देखो प्रिय मेरे साथ तो मेरी वारिया है, ये देखो सामने बैठी
- 29:45रूपवती तो सीता भी बहुत थी। तो ऐसा करो, मेरा छोटा भाई है,
- 29:54उसके साथ कोई नहीं है। अकेला है अब जंगल में भी थोड़ा सा
- 30:02कुछ चार्मिंग मसाला चाहिए ना? बोर हो जाते हैं सारा दिन बैठे।
- 30:10बैठे। 14 साल कटने को हैं 13 साल बीते
- 30:16चौदहवीं शुरू हो गया बस सीता कहती है 13 साल बड़े हँसी को सिर से
- 30:23बीत गए ये गोदावरी का तट, यह चमकते हुए सितारे।
- 30:32ये ढलता हुआ सूरज ये उगता हुआ सूरज ये पंचवटी इतनी सुंदर वाटिका
- 30:42लहराते हुए फूल खिलती हुई कलियाँ खुशबू बिखेरते हुए।
- 30:47ये पुष्प? यहाँ चहलकदमी करते हुए छोटे छोटे
- 30:54प्यारे जानवर हिरण बड़े सुंदर लगते हैं।
- 31:01मेरा बड़ा जी करता है जहाँ पर रहने को ऐसा ही एक वर्ष और बीत
- 31:06जाएगा। लेकिन आगे क्या?
- 31:21क्या होगा कौन से पल? में।
- 31:27क्या होगा कौन से पल में कोई जाने न कोहरे ताल मिले नदी के जल में?
- 31:46नदी मिले, सागर में सागर मिले कौन से जल में कोई जाने न ओह रे ताल
- 32:01मिले नदी के जल में। सूरज को धरती ढूंढे धरती को
- 32:15चंद्रमा, धरती को चंद्रमा। पानी में शिप जैसे प्यासी, हर
- 32:34आत्मा, प्यासी हर आत्मा। उम्मीदवारें बोंद छुपी किस बादल
- 32:53में कोई जाने न कोहरे ताल। मिले।
- 33:03नदी के जल में नदी मिले, सागर में सागर मिले।
- 33:13कौन से जल में कोई जाने न। ओह रे ताल मिले नदी के जल में
- 33:25अनजाने होठों पर ये पहचान गीत हैं पहचान गीत हैं।
- 33:40अनजाने होठों पर यह पहचानेगीत हैं, पहचानेगीत हैं कल तक जो थी
- 33:56बेगाने। जन्मो के मित हैं, जन्मो के मित
- 34:05हैं, उम्मीदवारें। क्या होगा कोन से पल में, क्या
- 34:22होगा कोन से पल में कोई जाने न और ता।
- 34:33मिले नदी के जल में नदी मिले सागर में सागर मिले कान से जल में।
- 34:52कोई जाने ना अरे ताल मिले नदी के जल।
- 35:07तो राम जी कहते हैं ये मेरा छोटा भाई है, अकेला है, मजाक के मूड
- 35:14में थे। दोनों ही सुन्दर थे तो स्वरुप ना।
- 35:24खा उसकी ओर चली गई। प्यार की पींगें बड़ानी शुरू की
- 35:30थोड़ा ज्यादा फरक। पड़ते।
- 35:36कोशिश की? जफ्फी वफी डालेंगे दिखने वर्ती
- 35:41जेपी और ऊपर से करोधी आँखें लाल कर अरे अरे तू ऐसा कर रहा है उनके
- 35:51पास? पर सबसे पहले तू उसी के पास गई थी
- 35:58स्वप्न का बोल है तू उसी के पास जा मैं तो जत्ती सत्ती व्यक्ति
- 36:07वैसे शादीशुदा हूँ। मैं तो इनका सेव कौन तो नौकरानी
- 36:18बन के रहेंगी? वह।
- 36:21पटरानी बन के रहेंगी तो उसकी तो घरवाली उसके साथ।
- 36:28तो फिर क्या है? राजा महाराजा मेरे बाप ने तीन
- 36:33शादियों में करते नहीं, ज्यादा शादियां करते हैं तो हमारे कुलों
- 36:42में तो। चलता है।
- 36:45352। 353 राणियों थीं दशरथ शायद आपको न
- 36:55बताओ। दशरथ के 353 राणियों थीं।
- 37:06विधिवत तीन राणियों थीं। कृष्ण के विधिवत आठ राणीय थे और
- 37:14दो नंबर में जिन्हें आश्रय दिया गया वो पत्नी के रूप में ही रहना
- 37:23शुरू हो गए। वो 16,000।
- 37:25103 तबका समाज ये आज्ञा देता था। वक्त वक्त की बात है।
- 37:37मैंने कहा समाज के साथ तालमेल करके चलो तो लेकिन समाज की मूल
- 37:43मान्यताओं को मत माना। अब देखो आज अगर आप दूसरी शादी
- 37:47करोगे तो ये समाज वृद्ध नहीं है। ये कानून वृद्ध है, कानून अड़
- 37:54जाएगा कानून में आप फसोगे कानून का उल्लंघन मत करो।
- 38:02समाज का उल्लंघन कर दो। समाज को लॉन्च हो समाज हैं नहीं,
- 38:09सामाजिक मूर्खता का दूसरा नाम है। कैसे बचा रे इधर से उधर इधर से
- 38:19उधर दोनों दक्ष थे प्रवीण थे। राज़ पुत्र थे।
- 38:25वैसे तो ये भी राजा के पुत्र थे। ऋषि पुत्री भी थे वशिष्ट की क्षमा
- 38:33करना वि शरभा की पुत्री और पुस्त की पोती और पुस्त बहुत बड़े ऋषि।
- 38:45यह पुलस्थ ऋषि सप्तशियों में से पुलस्थ ऋषि भी एक है तरह इतनी
- 38:55महानता थी रामे के दादा में। यश रूप निकाह के भी दादा थे
- 39:10बिसर्बा इनका पुत्र था और बिसर्बा के पुत्र।
- 39:14ये तीन थे कुंभकर्ण, विभीषण और छोटा मोटा परिवार नहीं था।
- 39:22ये। बड़ा वृहद परिवार था।
- 39:24अब देखिए सात ऋषियों में वार्ड के टॉप सात ऋषियों में इनके दादा का
- 39:31नाम आता है। इतना महान परिवार था यह।
- 39:39खैर। जब सीता से छेड़छाड़ शुरू की तो
- 39:48राम ने कहा, जल्दी से धीरज नहीं खाते थे, लेकिन जब सीता से छीना
- 39:56झपटी ज़ोर आजमाई शुरू कर दी। उसके बाल नोच लिए तो राम ने कहा
- 40:05लक्ष्मण को कैसा करो इसे सब कर सका।
- 40:10तुम कहानी है इसके अर्थ क्या हैं? बड़े गहरे हैं फिर कभी।
- 40:28नाक काट। दी है।
- 40:32भाई की नाक कट गई बहन। की नाक कट गई, लेकिन।
- 40:40गुस्से में आ गया रावण रावण बिल्कुल ठीक था।
- 40:46किसी के आगे अपने प्रेम का इजहार करना इतना भी तो गलत नहीं होता।
- 40:55वॉर्म। करके यहाँ नहीं देते।
- 40:57और अन्य बहुत कुछ होता है। राम के पास क्या नहीं था?
- 41:07तो इस मायने में अगर देखा जाए तो रावण क्योंकि अहंकारी था इसलिए
- 41:12उसने बदला लिया। अहंकारी न होता तो बदला न लेता और
- 41:16मुझे एक प्रश्न आज पूछा है किसी ने?
- 41:23क्या पुत्र की हत्या हुई? आपने बदला क्यों लिया?
- 41:29अब इस जब आपको अच्छी तरह से सुन लिया।
- 41:34जीसको उस निर्णायक शक्ति का दर्शन नहीं हुआ।
- 41:39शब्दों को अच्छी तरह से उतार लेना जीसको उस वृहद निर्णायक शक्ति का
- 41:47अभ्यास नहीं हुआ, दर्शन नहीं हुआ। वह व्यक्ति खुद बदला लेगा और उसे
- 41:53ही अंगारी कहते। हैं।
- 41:58जीस संत को उस वृहद विराट जिसने सृजन किया।
- 42:04सब व्यक्ति तो एक जरिया भी नहीं बना।
- 42:07सकता। जो नहीं जानता वह बदला लेता है इस
- 42:16बात को हृदय में बसा लेना। संत पुरुष कभी बदला नहीं लेता,
- 42:22क्यों नहीं लेता, उसके पीछे ठोस कारण है।
- 42:25बेसिक बैकग्राउंड क्या है उसको एक अन्य निर्णायक शक्ति का पता चल
- 42:33जाता है, साफ साफ मान के नहीं। किसी के कहे से नहीं, किसी
- 42:40शास्त्र में लिखे से नहीं और शास्त्र में लिखे से तो कोई मानता
- 42:44भी नहीं। ऊपर ऊपर से थोपता है।
- 42:48हृदय से नहीं मानेगा थोपेगा फिर वो आचरण बन जाएगा।
- 42:55आपकी आत्मा में व्यवहार बनकर नहीं आएगा।
- 43:01समझे बात को तुम समझा मनीष संत अगर संत है, क्रोध भी आएगा।
- 43:17राम को भी क्रोध आया जब इतनी मेहनत करने के बाद समुद्र ने
- 43:23रास्ता नहीं दिया, जो बदला लेता है उसको उस विराट का दर्शन नहीं
- 43:33हुआ या पक्का जाण? तुम चारों वेद पढ़ लो।
- 43:40सारी दुनिया का ज्ञान इकट्ठा कर लो सारी वोकबुलरी तुम्हारे पास
- 43:45होगी, दक्षता होगी बोलने की लेकिन अनुभव न होगा।
- 43:50और वोकबुलरी। तो किताबों में भरी पड़ी सारा
- 43:58ज्ञान दुनिया भर का जो तुम नहीं जानते तुम्हारे सारे सर और आचार्य
- 44:04और सारी किताबें शास्त्र मिलके इकट्ठा एक शास्त्र नहीं बता सकता,
- 44:09वह अकेला एआई बता दे। लेकिन एआई में अब ये बात ध्यान से
- 44:21सम्मेलन सुनने वाली बात एआई में इतना ज्ञान होने के बावजूद भी वो
- 44:30नहीं कहता संस्था में सहयोग करो। मेरे हाथ मजबूत करो, संस्था के
- 44:38हाथ मजबूत करो, इन्हें लकवा हो गया और धन दोगे तो इसके हाथ मजबूत
- 44:50होंगे। एआई तुमसे कभी नहीं गया।
- 44:56पी से टेको तमाशा देखो नहीं कहेगा।
- 45:01यह ज्ञान मुफ्त में बांटता है क्योंकि ज्ञान है और जो निस्वार्थ
- 45:11से दान बांटा जाता है। वही ज्ञान होता।
- 45:13है। बाकी तो पेड़ होते हैं लगा लो।
- 45:19विपश्यना मुझे आते हैं, लोग विपश्यना कर रहा हूँ, करलो।
- 45:25आपका जीवन स्वातंत्र्य है, मैं बात नहीं बनूँगा, तुम्हारा मन
- 45:30करता है। विपश्यना तुम्हारा मन करता है।
- 45:34कुछ न करो तो फिर ले के इतनी समझ ली ना कि जो परिणाम आएगा उसका
- 45:42दायित्व भी तुम्हारे ऊपर। होगा।
- 45:44क्यों? क्योंकि साधना कुछ न करने में जो
- 45:53परिणाम आएगा। उसके भी जिम्मेदार तुम और
- 45:57विपश्यना करने में मनापान करने में जो परिणाम आएगा, उसके भी
- 46:02जिम्मेदार किसी पर दोष मत देना मेरे पास।
- 46:08लोग आ जाते हैं बाबा अभी तक नहीं उतरा वो गीता।
- 46:16मैंने कहा भाई देखिए धैर्य से बड़े जन्मों से तुम दूर निकल।
- 46:21गए हो? और जो बहुत दूर निकल जाता है फिर
- 46:27वो धीरे धीरे वापस आता है। वक्त तो लग जाएगा।
- 46:31लेकिन धीरज रखना संतोनी से लेकर। है।
- 46:34धीरज बनाए रखना, इसको तोड़ना। पड़ता है।
- 46:41बहुत से मेरे पास लोग आ जाते हैं, कमेंट आ जाते हैं, मैं कितनी बार
- 46:48बोलूं? सारी संसार को तुम्हें सुना नहीं
- 46:50सकती। की भी यहाँ रात की पी हुई सारे
- 46:58दिन की पी हुई बामुष्कर 4:00 बजे से बाद ही टूटती है।
- 47:04कई बार तो तब भी नहीं। टूटती।
- 47:07बला लेता है कुणाल। लेकिन वो लोग कहते हैं, बाबा
- 47:15प्यारे तो बड़े लग रहे। थे।
- 47:18शीतल आपका अंगूठा भी नीला पांव का अंगूठा टसी मशीन हुआ।
- 47:27इतनी सफलता? बुद्ध में इतनी ही सिथलता थी और
- 47:32बुद्धों में इतनी ही सिथलता होती है जस्ट लाइक ए डेड पॉटी लेकिन
- 47:46आपका पांव। नहीं।
- 47:49तो जब मैं दीक्षा। देता हूँ थोड़ी सी बात साफ करो।
- 47:53दीक्षा देता हूँ तो वे जो तीन 4 घंटे होते।
- 47:57हैं। कैसे होती है दीक्षा?
- 48:02तो साहब को? समझा दूँ थोड़े से अच्छा लोग तो
- 48:11आप बैठे होते हो कहीं बैठे हो आश्रम में कहीं बैठे हो ऊपर नीचे,
- 48:19किसी कमरे में बाहर लॉन में क्या क्या है मेरे?
- 48:25पास। तो मैं अपने अस्तित्व को बढ़ाता
- 48:29हूँ क्योंकि मैंने वो जान दिया है जो उस दिन घटना घटी।
- 48:37वह मेरे लिए सहज हो गई। वह मैं जब चाहे अपने आपको उस
- 48:42स्तर। पर ले जाऊं।
- 48:44अब मैं उसका मोहताज ना रहा। अब वो स्थिति मेरी मुद्दाज़ होगी
- 48:51मैं जब चाहूँ चलाऊ लगा लूँ जब चाहूँ महाराज, इसलिए मैंने कहा
- 48:56संत रोज़ तल बदलता है हर पल तल। बदलता।
- 49:00है। पहले पल मैं कहूंगा।
- 49:05कि वह बोलता है इस औज़ार के जरिए और प्रतिक्षण अगले पल मैं यह भी
- 49:12कह सकता हूँ कि मेरी इस सृष्टि में से तुम एक ज़रा नहीं ले जा।
- 49:17सकते? तुम चौंकना मत, तुम विश्लेषण मत
- 49:21करना, तुम बुद्धि से सुनते हो। बुद्धि लड़ाओगे लेकिन बुद्धि असफल
- 49:26हो जाएगी क्यों? क्योंकि तुमने जाना नहीं।
- 49:30एक ही जुबान से वो शब्द कहे गए थे के इस इन्स्ट्रुमेंट के जरिए वह
- 49:37बोलता है तो वह। बोलता है और।
- 49:41एक ही जवान ने प्रशिक्षण अगली बार कहा।
- 49:44कि मेरी सृष्टि से तुम चाहते हुए भी एक कण नहीं ले जा सकोगे।
- 49:53ये पक्का है क्योंकि सारी सृष्टि मैं हूँ, सारी सृष्टि में मैं
- 49:58हूँ। जेता केता केता नाम बिन नामी
- 50:06नाहीं कोठा। हर जगह में ही मौजूद हूँ मैं ही
- 50:14मैं हूँ अहम् ब्रह्मास्मा। तत्व और मशीष्वेतिथों अहेम
- 50:26ब्रह्मस्मा अनुल हक मैं ही खुद खुदा हूँ जिन्होंने बोला अनुभव से
- 50:35बोला और। अनुभव से न बोला होता।
- 50:42तो हाथ कट जाते, पांव कट जाते, शीश कट जाता वो कंपते कंपे कंपा
- 50:49तो शरीर गुरुतेक बहादर जाकर आसन बिछाकर बैठ रहे।
- 50:57तुम धर्म परिवर्तन की बात करते हो?
- 51:02लो मैं प्रतिनिधि हूँ, इनका नहीं धर्म बदलूंगा, धर्म कभी बदलने
- 51:09जैसी चीज़ है, तुम डांट दो, जो दे सकते हो शेष धड़ से रखा आगे हम
- 51:23मैं इनका प्रतिनिधि हूँ। अहिंकारी औरंगजेब ने अपने
- 51:32सिपहसालारों को कह के नंगी तेज तीखे तलवार से भरपूर वार किया या
- 51:39लाद ने? भरपूरवा सिंह देव जी महाराज?
- 51:47करो तेर बहादुर जी महाराज का शीष अलग हो के।
- 52:06कम पे डरे नहीं डरे खुद चल के आ। गया।
- 52:15तुम सातवें दरवाजे छेडते भरते हो, कोई घटना थोड़ी सी घट जाती है,
- 52:20तुम विदेशों में निकल जाते हो। असम मूर्छित हो पहला तल?
- 52:42उस पहले तल पर मैं होता हूँ लेकिन मूर्छित होता हूँ।
- 52:48इसलिए व्यक्ति मैं को कृत्रिम रूप से बढ़ाना चाहता।
- 52:55है। वह में जो स्वाभाविक रूप से बढ़ता
- 52:58है अंत वह गतवा वह अस्तित्व हो जाता है उसके फैलाव सच में वह
- 53:07कृत्रिम रूप से जादि फूल जैसे हम कहलाते हैं फैक्टरी के बनाए हुए।
- 53:13वह कृत्रिम रूप से मैं को बढ़ाना शुरू करता है, मैं हूँ तो मुमकिन
- 53:17है, यह कृत्रिम रूप से मैं को बढ़ाने का प्रयास है, इस मूर्ख को
- 53:24ये नहीं पता इस स्थल पर जो व्यक्ति है उसे मैं मूर्ख कहता
- 53:28हूँ इस मूर्ख को ये नहीं पता। एक कीत्रंम रूप से तुम बढ़ भी
- 53:35जाओगे तो 1 दिन तो ये ज़िन्दगी फना है घर जाओगे क्या फायदा?
- 53:45अगर विराट होना है, फैलाव करना है तो एक तल है अपने भीतर उतरो।
- 53:51वह तुम्हारा विराट असीम हो जाएगा और वह कभी मिटेगा नहीं और भरपूर
- 53:56लज्जित भी आएगी, आनंद भी आएगा यह तुम्हारे अहंकार को रस आएगा जो कि
- 54:06बेरसा होगा पहले तल पे। यह अपने आपको बढ़ाने की चेष्टा
- 54:14है। मैं साम्राज्य बढ़ा दूँ झूठ जाट
- 54:18बोल के चार लंगोट पीछे लगा के पैसे पैसे देके ड्रा के पीछे लग
- 54:30जाएंगे भाई। लेकिन तब तक जब तक जिंदगानी है
- 54:37श्रद्धा के लिए, तुम उस अस्तित्व में अपना विराट नहीं।
- 54:42बिखेर सकोगे यह है कृत्रिम। इसको कृत्रिममय कहते हैं।
- 54:54एक तल पहले तल पे यह है दूसरे तल पे वो आएगा क्या आएगा जब तुम्हें
- 55:01अपना साक्षी भी नज़र आएगा दूसरा तल?
- 55:04है। इसके लिए तुम्हें साक्षी के साधना
- 55:10करने होंगे। चलते हो, देखो कौन चलता है, बैठते
- 55:17हो देखो अचानक रुक जाओ, खाना खाते हो, देखो अचानक रुक जाओ, देखोगे
- 55:24कौन खा रहा? है।
- 55:27सारी प्रोसेसिंग तुम्हें नजर आएगी।
- 55:29दांत चबा रहे हैं जीवा उलट पुलट कर रही है खाने को और गले से नीचे
- 55:37उतर रहा है तुम्हारे हाथ बुरकी बुरकी तोड़ रहे हैं बॉडी बॉडी खा
- 55:42रहे हैं सारे कुछ होता देखोगे जंत्रवत और तुम साक्षी हो।
- 55:51तुम इसमें विलीन नहीं होते, तुम बराबर साक्षी बने रहते हो।
- 55:56जद हुई तुम्हारी शक्ति से ही ये यंत्र चलता है।
- 56:00तुम्हारी मौजूदगी में ये यंत्र चलता है लेकिन ये खर्च नहीं होता।
- 56:05अब ये बड़ी तुम्हें नई चीज़ लगेंगी।
- 56:10चेतना की मौजूदगी में ये यंत्र चलता है, लेकिन चेतना ज़रा भी
- 56:15नहीं घटती। जैसे कैटेलिटिक एजेंट की मौजूदगी
- 56:20में केमिकल रिएक्शन्स होती है और कैटेलिटिक एजेंट ज़रा भी नहीं
- 56:24घटता। उसका कोई योगदान भी नहीं था।
- 56:26बस उसकी मौजूदगी में ये घटनाएं घट जाती हैं।
- 56:32आज साइंस ने तरक्की कर ली तो हमारे पास तुम्हें बताने के
- 56:37उदाहरण हो गए। अगर साइंस तरक्की न करती यहाँ पर
- 56:41तो हम कोई और उदाहरण लेते उस वक्त के हिसाब।
- 56:44से। वेब पार्टिकल ड्वालिटी इसे
- 56:53क्विंटम यंत्रिकी कहते है। क्विंटम थ्योरी कितना रहस्य की
- 57:01बात? है।
- 57:02वैज्ञानिक के चरित्र। होंगे तो और क्या होंगे?
- 57:07जब तक क्वांटम की खोज नहीं हुई थी तब तक आदमी एक तरफा था।
- 57:12ही कैन बी डिफाइन्ड। लेकिन जैसे ही इसका पता लगा
- 57:19क्वांटम का। की कमाल वह पार्टिकल भी है और वह
- 57:24तरंगवी डैडटी एक ही वक्त में ये कैसे हो सकता?
- 57:29है। तो विज्ञान की डिफाइन करने की
- 57:33धुरी धर्म से गिर पड़ी ताश के पत्तों की तरह।
- 57:40उसके सारे हिसाब किताब थरथरा गए। कैसे डिफाइन करें?
- 57:49संत लाखों करोड़ों साल पहले डिफाइन करके वह?
- 57:56नहीं जाना जा सकता। मूर्ख हैं, उसे जानने की चेष्टा
- 58:02करते हैं। अब इस तरंग और कण इसकी ड्वेलिटी
- 58:12सिस्टम को जब देखा उन्होंने तो हैरान क्यों की?
- 58:15इसको क्या कहें? इसको पार्टी करते हैं या वेब अभी?
- 58:25कुछ नहीं हुआ है। हमारे पंजाबी के कहते हैं अभी शेर
- 58:30में से एक पूर्ण भी नहीं करती। लेकिन वो भी कुछ कम कहता है।
- 58:36अभी भ्रमण में से एक कण का कुछ अंश भी नहीं खोजा गया।
- 58:42और तुम कभी खोज भी नहीं। पाओगे, अंत में तुम हाथों को खड़ा
- 58:47कर दोगे, तुम कहोगे हम लाचार हुआ है।
- 58:49हेल्पलेस उस स्तर। पर।
- 58:55जब तुम हेल्पलेस हो जाते हो, अब समझे न बात को जब तुम हेल्पलेस हो
- 59:01जाते हो त्रौपदी की तरह तो हृदय से पुकार उठती है, वह पुकार होती
- 59:09है फरियाद तुम फरियाद में? और शुक्राणी में कल मैंने
- 59:18शुक्राणी की बात की थी। वाह हे गुरु उसकी दात जब तुम
- 59:23साक्षात बरसती हुए देखते हो और अरदास तुम तो सुनते हो मांगने का
- 59:30नंबर। दास?
- 59:31नहीं सक्त हृदय? इतना तब था।
- 59:37प्राण निकल निकल जाते हैं। उस स्थिति में हेल्पलेस द्रोपदी
- 59:45ने सबसे पहले। कृष्ण को नहीं बुलाया।
- 59:49अपनी सबसे बहुमूल्य। मलकियत को सबसे पहले दांव पे नहीं
- 59:54लगाना होता। पहले देखो अपने पतियों को, फिर
- 1:00:00देखो भीष्म को, फिर द्रोण को देखो फिर तातिश्री को देखो धृतराष्ट्र
- 1:00:08को, फिर अन्य अन्य को देखो। फिर विद्रुर को देखो, लेकिन सब ने
- 1:00:14गर्द ने नीचे कर ली जब देखती रही एंड शी वास् हेल्पलेस टोटली ऐट
- 1:00:27दट, पॉइंट ऐट दट जंक्चर वॅन ऑफ हेल्पलेस असमर्थता के इस बिंदु को
- 1:00:36आकर वो जो शब्द निकलेंगे वो बहुत ही फरियाद।
- 1:00:40था। तुम जो फरियाद करते हो।
- 1:00:48इस शादी की फरियाद है। इनमें थोड़ा सा भाव होता।
- 1:00:51है। साईं वैसाडी फरियाद तेरे कहीं ये
- 1:01:02थोड़ा सा भाव। होगा।
- 1:01:04लेकिन अंतरात्मा? के।
- 1:01:07हेल्पलेस अवस्था में उठी हुई पुकार नहीं होगी।
- 1:01:10सब पता लगेगा गायकी से पता चल जाता।
- 1:01:16तो उस शिक्षण में द्रोपदी बोली तुम कहाँ गए महाराज, तुम कहाँ गए
- 1:01:25महाराज? लाज गई मोरे दुःखारो द्वारका नाथ
- 1:01:38शरण में तूरे। यह पुकार थी जो सच्चे हृदय में
- 1:01:45अंतिम वेला में आई। पूर्ण हेल्पलेस अवस्था में अगर
- 1:01:54तुम ऐसे ही हेल्पलेस हो जाओ, देखिये पहले संसार में देखना।
- 1:01:58होगा और। द्रौपदी इतनी समझदार थी, उसे
- 1:02:03कृष्णा कहते थे कृष्ण। और वासुदेव को कृष्ण, कृष्ण और
- 1:02:16द्रोपदी को कृष्ण कृष्णा कृष्ण के राखी बांधते थे बंधन।
- 1:02:26सब से आखिर में पुकार की तुम तो सबसे पहले परमात्मा को गुहार लगा
- 1:02:35दो ये हेल्पलेस नहीं होती गुहार तो तुम लगा दो तुम्हारी फरियादें
- 1:02:39ऐसी होती हैं जो प्रथम बार में तुम कहते हो हनुमान जी?
- 1:02:47मेरी रक्षा करो अब तुम हेल्पलेस तो भी होवे भी नहीं, बस एक नित्य
- 1:02:55नियम बन गया नित्य नियम तुम करते हो जब जी पढ़ लेते हो वो पढ़ लेते
- 1:03:00हो सुखमणी कर रिया, बस क्या करते हो?
- 1:03:05बायामासा पर लिया वो करते, वो करते यह कुछ करते हो, नृत्य नियम
- 1:03:08करते हो और इससे तुम संतुष्ट हो जाते हो।
- 1:03:11नहीं कुछ नहीं होगा इससे और देखो कुछ हुआ मैंने लोग 6060 सालों से
- 1:03:17ये नृत्य नियम करते हुए देखे हैं और मैंने पूछा कितने साल 60 साल
- 1:03:22हो गए कोई बदलाव? नहीं कोई बदलाव बदलाव तो होया ही
- 1:03:26नहीं करता, बदलाव होता है 100 डिग्री पे 100 डिग्री पे बदलाव
- 1:03:37होता है। सो डिग्री पे वैपोरेशन होती है
- 1:03:45पानी तरल से वासु बन जाता है होता कब है हेल्पलेस अवस्था में
- 1:03:54द्रोपदी की तरह जब तुम हेल्पलेस हो जाओ की पुकार करोगे?
- 1:04:00पहली ही अवस्था तुम बिल्कुल मूर्छित हो तुम्हें ये है कि बस
- 1:04:03मैं हूँ और मैं जितना बढ़ा लूँगा अपने आप को मैं जितनी संपत्ति को
- 1:04:08बढ़ा लूँगा, जीतने गुणगान करवा लूँगा वो मेरा ये नहीं पता होता
- 1:04:14तुम इतने मुर्ख होते हो। कि मेरा गुणगान किया हुआ मेरे साथ
- 1:04:18नहीं जाएगा और जो मेरा गुणगान कर रहे हैं, वह भी नहीं बचेंगे।
- 1:04:23वह भी तो हित हो जाएंगे तो गुणगान ये व्यर्थ हैं, ये सार्थक नहीं
- 1:04:31हैं। बस तब व्यक्ति मूर्छित होता है।
- 1:04:34पहले तक। वह अगर अपने आप को बढ़ायेगा भी तो
- 1:04:39अहंकार को बढ़ायेगा, अहंकार को इतना फैलाना चाहेगा और अहंकार को
- 1:04:44जितना हो सके, उतना बढ़ाने की चेष्टा करेगा।
- 1:04:47विश्व शुरू होने की चेष्टा करेगा। लेकिन विशुगुरु हो भी जाती थे।
- 1:04:56हम कभी आज विशुगुरु अमेरिका बनने की चेष्टा करता है, विशुगुरु बनने
- 1:05:03की होड़ लगी रहती है और ये सब मैं के टकराव हैं चाइना का, अमेरिका
- 1:05:09का इधर ट्रंप मूर्ख है इधर जिनपिंग मूर्ख।
- 1:05:13वो कहता मैं वो कहता मैं है कोई भी नहीं है वो जिसने दोनों को
- 1:05:22बनाया, दूसरे तक जब तुम्हें साक्ष ही नजर आता है तो दो तल हो जाते
- 1:05:29हैं, थोड़ा सा अन्कार। कम होता है।
- 1:05:33है भाई दूसरा है देखने वाला और फिर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे
- 1:05:40धीरे। जैसे ही तुम बाहर से शक्ति को
- 1:05:43खींच के अपने भीतर और घनी और घनी और घनी भीतर अंदर ही चले जाओगे
- 1:05:49अपने और बिलकुल आखिरी पड़ाव पे पहुंचोगे।
- 1:05:57बुद्धि से पूरे नीचे उतर गए हृदय में और हृदय से पूरे नीचे उतर गए
- 1:06:03उस जंक्चर पॉन्ट जंक्चर पॉन्ट से बिलकुल नीचे तुम खींच लिए जाओगे।
- 1:06:12वहाँ तुम स्वतंत्र हो अब वहाँ मालिक बैठा।
- 1:06:20है, जिसने सृजना की ये सारी बातें अनुभव से बोली हुई हैं।
- 1:06:28किसी शास्त्र मेहनत मिलेंगे। अब शास्त्र बन जाये पात।
- 1:06:35में। धीरे धीरे लोग बोलते गए मैं अकेला
- 1:06:39ही चलाता हूँ। जानिबे मंजिल मकर लोग साथ आते गए
- 1:06:44और कारोबार बनता क्या? अब तुम जोड़ लोगे, मैंने बोला तो
- 1:06:51ये नया अध्याय जुड़ जाएगा जंक्चर पॉइंट इससे पहले किसी ने बोला
- 1:06:56मैंने सारा खंगाल लिया, बाबा से पूछ लिया बाबा कहते नहीं किसने
- 1:07:00बोला? तुम बोलो ये चीज़?
- 1:07:07बना चले जाओगे जो तमन्ना थी पहले तल पर विराट होने की मेरा अंकार
- 1:07:16चक्रवर्ती सम्राट हो जाऊं इस धरती का सारा मालिक मैं बन जाऊं फिर
- 1:07:20तुम इस धरती के नहीं इस यूनिवर्स के ही मालिक हो जाते हो कितनी?
- 1:07:27विशाल विराट कृपा होती है उसकी विराट की।
- 1:07:33कि तुम ही बराट हो जाते हो और फिर आगे क्या होता?
- 1:07:36है। आगे होता है कि तुम ही बराट हो
- 1:07:41जाते हो, तुम ही परमात्मा हो जाती हो वहाँ जाके उदघोष करता है।
- 1:07:45कोई मंसूर अन्नर हक कोई ऋषि एम आत्मा ब्रह्मा नाम बहुत सी जो
- 1:07:58चाहे करो, कोई बात नहीं, नामों से कोई फर्क नहीं।
- 1:08:01पड़ता। मतलब यह है कि तुम ही तुम रहते हो
- 1:08:04एक रहते हो। पहले भी तुम एक रहने की चेष्टा
- 1:08:08करते थे, लेकिन दूसरा था अब भी तुम हो, लेकिन दूसरा नहीं है जब
- 1:08:15मैं शातबहारी नहीं। अब मैं हूँ अब हरी है मैं ना अब।
- 1:08:24हरी है सिर्फ। जब मैं था तब हरी नहीं था, लेकिन
- 1:08:29मैं था और तू था मैं के साथ समझ लेना अब बात को जब मैं था तब हरी
- 1:08:36तो नहीं था, लेकिन मैं के साथ तू था ट्रम्प है जिनपिंग है।
- 1:08:45एक ऐसा मुकाम आएगा जब तुम क्रॉस करोगे जब हरि ही रह जाएगा प्रेम
- 1:08:53गली अति सांकरी ता में दो न समाई दो नींद दो जड़ हैं कला की।
- 1:09:01दो जड़ हैं, द्वैत की दो जड़ हैं परेशानी की दुख की, तुम्हारी
- 1:09:06रातों की नींदें हराम होती है तुम दुख और दर्द से अपनी ज़िन्दगी को
- 1:09:12कांटो से भर देते हो। ये दो का ही कारनामा है जो तुम आज
- 1:09:19इतने दुखी हो। तुम एक और नहीं हो सकते जीस तरह
- 1:09:24से तुम एक होना चाहते हो वैसे गवार नहीं धरती को क्योंकि और
- 1:09:29बहुत से हैं तुम पहले तल से एक होना चाहते हो वो कभी होगा नहीं,
- 1:09:36तुम्हें तीसरे तल से ही एक होना पड़ेगा।
- 1:09:39बस सिर्फ यही व्यवस्था है। ईश्वर के विधान के अंदर एकत्री का
- 1:09:45जो शुद्ध तरीका और जौ सही है वह दुखदा ई तरीका पहले वाला लाखों की
- 1:09:51गर्दने काटोगे सिकंदर की तरह, लेकिन खुद कुछ कर जाओगे।
- 1:09:58छोटी सी उम्र में चले गए सिकंदर 32 साल के छोटी छोटी उम्र में चले
- 1:10:08जाते। हैं तो।
- 1:10:12एक होने का तल परमानेंट और सही सत्य।
- 1:10:20और ऑथेंटिक प्रामाणिक वो है जो तुम सत्य में एक हो जाओगे और फिर
- 1:10:25से तुम दो न हो सकोगे बहुत सामान्य समुद्र में बस फिर समुद्र
- 1:10:35से वार में आती। बुद्धियों पर जीने वाले मुझे पूछ
- 1:10:41लेते बाबा ऐसा नहीं होता फिर फिर से बूंदो उड़ के बाहर आ जाओ फिर
- 1:10:49फिर से जीवन का कहीं ऐसा तो नहीं होगा, सारा परिश्रम व्यर्थ हो
- 1:10:53जाएगा ये बुद्धियों के सवाल है, उस स्थान पर जाकर देखो।
- 1:11:00तो पता चल जाएगा ऐसा कभी नहीं होता तो है व्यक्ति जो हमारा
- 1:11:07ट्रांसपोर्टर तो मैं उसके पास गया।
- 1:11:13ये फैसला हुआ है। फिर तेरी तरफ इतना रुपया आया।
- 1:11:19थोड़े शब्दों में खत्म कर दो, तेरी तरफ 1,00,000 क्या सी 1000
- 1:11:24बनता है उस वक्त की बात है क्या? सी 82 में बाई की मृत्यु हो गई
- 1:11:31थी, 80 में मैं ही संभाल रहा। था।
- 1:11:35खट खटाता गया, खट खटाता गया आखिर में नहीं संभाल पाया।
- 1:11:38मैं दुनियादारी की इतनी हिसाब से नहीं थी वो कहता पंडित जी ऐसा करो
- 1:11:46एक तो मेरी दुकान ले लो ठीक चलो एक व्यक्ति को दुकान दे दी 19 से
- 1:11:52यार काट दो। 1,62,000 ठीक है, देखेंगे फिर बाद
- 1:12:01में जब उसकी धर्म इतनी बड़ी परमात्मा को मानने वाली सूत्र वह।
- 1:12:12गुरु? मानने वाली, डरने वाली गरीबी का
- 1:12:16वक्त था, छोटे से घर में रहते थे। कॉलोनी के अंदर उस देवी ने मुझे
- 1:12:24कहा पंडित जी हम इस वक्त थोड़े हालात खस्ता है।
- 1:12:32तुम परमात्मा का नाम लेते हो, सुबह शाम मंदिर में जाते हो, वहीं
- 1:12:37बैठे रहते हो तुम हमारे लिए फरियाद करते हो, हमारे में
- 1:12:42हरियाली आ जाए, अब तो मुझे पता नहीं देखिए वह दैवी है कि नहीं है
- 1:12:48क्योंकि मैं तो भीतर बैठा हूँ तेरा वर्ष।
- 1:12:52लेकिन 13 वर्ष पहले वह थी, मैं जानता हूँ और मुझे पता चला कि वह।
- 1:13:00ट्रांसपोर्टर है। उसकी मृत्यु हो गई।
- 1:13:07क्या हुआ मैंने उससे पैसा मांगना छोड़ दिया।
- 1:13:09दमके की बात करता हूँ आपके प्रश्न का जवाब आखिर में जीता हूँ तो
- 1:13:18उसने मुझे एक तरफ बुला के एक शब्द काढ़ा उसके बेटे की मंगनी थी।
- 1:13:30तो वह मुझे कहने लगा देखो अगर तुमने ज्यादा तिड फिड की तो मेरे
- 1:13:35पास जो बस है, एक ही बस थी तुम अगर नहीं जो मैं पैसा दूंगा वो ले
- 1:13:45लेना नहीं लोगे। तो मैं ₹10,000 ड्राइवर को दे
- 1:13:50दूंगा तुम्हें वो बस के नीचे दे देगा नाम नहीं बताया सत्य घटना है
- 1:14:02सारा शहर। है।
- 1:14:04बच्चे बच्चे से यू कैन कन्फर्म। मुझे लोग कहते कि तुमने मांगे,
- 1:14:14मुझे वो सीन याद आया था, ये मांगे तो ये ₹10,000 ड्राइवर को दे देगा
- 1:14:23और विजय कुमार जी तेरा पिटड़ा इंतजार है।
- 1:14:28और बाबा कहते हैं तेरे से कराना बहुत कुछ है तो मैं हरि हर जबता
- 1:14:39हूँ और मैं उसके पास ही नहीं जाता हूँ।
- 1:14:431 दिन मैंने सारे उसके वरुण नोट लिए बिल्कुल खाली।
- 1:14:47बिल्कुल ब्लैंक उसके घर जाके वापस कराया जेले भाई अपने पर नोट से
- 1:14:52मेल है, ठीक है देख ले गेन ली कहता पंडित जी, इतना तो आपके ऊपर
- 1:15:02यकीन है, ठीक ही होंगे, बस ठीक होंगे।
- 1:15:06लेकिन अगर गलत भी होंगे तो तो तुम जानते हो ₹10,000 ड्राइवर को डर
- 1:15:15दी हर हर कर दी। देखिए सत्य और तांत्रिक एनलाइटन
- 1:15:20हुआ नहीं था, शरीर था पंडित जी। विजय कुमार शर्मा तो विजय कुमार
- 1:15:31शर्मा कब था? अरे भाई इसका क्या है?
- 1:15:34बस भी है, ड्राइवर भी है और मैं तो रोज़ आता जाता हूँ।
- 1:15:40इसकी बस में भी आती है। कहीं पतिडा ने निकाल दिया।
- 1:15:44और मैं तो फिर आँखें बंद करके आता।
- 1:15:46जाता हूँ। उस पे भरोसा तो था लेकिन इतना तो
- 1:15:52न था बस एक छोटी सी घटना ट्रेन की हुई थी लेकिन उसमें पुख्ता सबूत
- 1:15:59नहीं था कि कौन है ये थोड़ी सी गड़बड़ी रह जाती है।
- 1:16:04तुम कितना ही मान लो, कितना ही विश्वास कर लो तुम्हारी श्रद्धा,
- 1:16:09फिर भी भीतर थोड़ी सी मुझे लोग कहते हैं चमत्कार दिखाओ उनको
- 1:16:13मैंने चमत्कार दिखा दिया, लेकिन आज वही डाक के तीन बार उनका संदेह
- 1:16:20नहीं मिटा के हम हैं कौन संदेह मिटेगा कैसे?
- 1:16:24वो मैंने जो तुम्हें बताया वैसे ज्ञान के बिना संत ही नहीं मिलता
- 1:16:28मिटता। मैंने कहा ये तो बड़ी अजीब सी बात
- 1:16:34है तुमने पूछा राजीव कि अगर कोई धमकी देते?
- 1:16:42देखिए इनमें से कौन सा तरा मैंने उससे नहीं मांगा, उसने पता नहीं
- 1:16:50कैसे मैं घर के आगे खड़ा होता था। वह टाटा सुंग पर जाता हूँ।
- 1:16:56उसकी धर्मपत्नी जो कि अत्यंत शील स्वभाव के थे।
- 1:17:01पॉज़ लेडी। और साथ में होती कहती पंडित जी
- 1:17:08तुम फरियाद करो, हम तुम्हारी झोली भर देंगे, लेकिन उसने भी झोली
- 1:17:13नहीं भरी। पता नहीं भूल गए पता नहीं हरियाली
- 1:17:19कुछ ज्यादा हो गई। समय से बाहर पास से जाते, ब्रेक
- 1:17:28मार लेते, मुझे बुलाते, मैं नहीं जाते मुझे वो 10,000 ज्यादा आया
- 1:17:34था, 10,000 वो ड्राइवर। और वो गाड़ी का नंबर नहीं बताऊँगा
- 1:17:41मुझे आज भी। याद है।
- 1:17:42मेरे हृदय प्रियंका की तरह तो मुझे बुलाते, मैं नहीं जाता।
- 1:17:53मैं भीतर से रह के ऐसा कायराना होता है।
- 1:18:03छोड़ो बेकार की बातें कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना
- 1:18:15छोड़ो बेकार की बातों में। कहीं बीत न जाई रहना।
- 1:18:21अब आगे चलें। तीसरे पायदान पर जब पहुंचा तो
- 1:18:28शरीर में हूँ। ये समाप्त हो गया और पूरी तरह से
- 1:18:32समाप्त हो गया और ये पता चला कि मैं हूँ और सिर्फ आत्मा नहीं हूँ।
- 1:18:40मैं विराट हूँ। वे उस रात 28 अक्तूबर की रात शरद
- 1:18:45पूर्णमा की रात जब घटना घटी में विराट हो गया।
- 1:18:49देखिए एक एक पल की कीमत होती है किसी पल पर पिछले जन्म में कोई
- 1:18:56जुआरी भी था। कोई बलात्कारी पिता, कोई राजा
- 1:19:00पिता, कोई दरिद्र पिता कंगाल पिता वह तुम्हीं थे और किसी पल पर वो
- 1:19:08क्षण आया कि तुम विराट। हो गए।
- 1:19:12यह वक्त वक्त की बात है। रिथिन फिर उसके बाद बाय बाय, मैं
- 1:19:25भीतर बैठ के रस को पीने लगा हूँ, फिर इस रस में किसको क्या याद आता
- 1:19:30है? क्या लेना क्या देना?
- 1:19:34न क चूले ना? ना कछु देना, ना कछु लेना, ना कछु
- 1:19:53देना। कबीरा मगन कबीरी में मन्नू
- 1:20:04ढोलग्यो मेरो रो फकीरी में। फकीरी में मन्नू, लाग्यो, मेरे
- 1:20:19और। बस उस अंतर्राश को पीने लगा, फिर
- 1:20:28कुछ न रहो। कुछ लेना नहीं, किसी से कुछ देना
- 1:20:33नहीं, किसी को जहाँ पर आकर सर्व स्वीकार हो जाता।
- 1:20:42है। चारवाक की ये बात यहाँ आकर ठीक
- 1:20:50बैठती है और चारवाक यहाँ पहुंचे नहीं थे।
- 1:20:54उसने तर्क दिया और तर्क के पीछे उसने जो सबूत दिया उदाहरण दिया।
- 1:21:01उसे पता चल गया कि पहुंचे तो नहीं, यहाँ भी वो स्थिति होती है
- 1:21:05ना कुछ दूना, ना कुछू लेना। भस्मभूत से देहज से पुनर आगमनम
- 1:21:11कुत्ता। किसका देना, किसका देना?
- 1:21:15दोनों समाप्त में क्या समाप्त हुआ?
- 1:21:21सारा जहाँ समाप्त। हो गया।
- 1:21:26तुम क्या मिटते हो? दूसरे सभी मिट जाते हैं तुम्हारे
- 1:21:32लिए। बस तुम ही रह जाते हो या कहो के
- 1:21:37कहरि रह जाता है शब्दों की बात है शब्दों में मत उलझा करो, कुछ सीख
- 1:21:45ले लो, बहुत बोल चुका। है।
- 1:21:50तो थ्रेटेन कर दिया। पहला दल समझाया मैं दूसरे दल पे
- 1:22:00था, साक्षी पुरुष हो गया था। ट्रेन इंसिडेंट हो चुकी थी।
- 1:22:10पहले मंदिर जाना शुरू हो गया। था।
- 1:22:15शंकर भगवान आना शुरू हो गए थे, दृष्टा उत्पन्न हो गया।
- 1:22:18था। क्रय योगकर्ता दृष्टा उत्पन्न हो
- 1:22:22गया और मंदिर में बैठता। बस अपने काम से कम लोग मुझे पागल
- 1:22:26कहने लगे थे। सर्दी में कंबल की मड़ासी मारी और
- 1:22:32चलो मंदिर। कहाँ जाना घर कहाँ जाना, दुकान
- 1:22:38कहाँ जाना, मंदिर ये अपना रूटीन हो गया था, यही अपना ठिकाना था,
- 1:22:49तीसरे तल पे लेना देना धमकी। मरण जीवन सभ्यता फिर खुद मरे के
- 1:23:01पुत्र मरे घर के लोग आज भी कह देते हैं क्या हुआ तुम अपने
- 1:23:09प्यारे पुत्र के सबसे प्रिय वो था पहला प्रिय होता है।
- 1:23:15ये नेचुरल। है।
- 1:23:19प्रिय बहुत चल आ गया। प्रिय तो सभी होते हैं, बराबर
- 1:23:25होते हैं लेकिन देखो लोग कह देते हैं ये पांचों उँगलियाँ बराबर
- 1:23:29होती हैं नहीं बराबर होती। हैं।
- 1:23:31कहाँ बराबर होती हैं देखो ये मोटी है।
- 1:23:35ये ये सबसे बड़ी ये छोटी है है तो पांच उंगलियां तो बराबर हैं लेकिन
- 1:23:42बराबर कहाँ है? ये ये छोटी वाली है, ये प्यारी तो
- 1:23:47हो गयी है, छोटे वाली प्यारी है। लेकिन सबसे ज्यादा प्यार कैसे
- 1:23:53होगा इसके बिना काम नहीं चलेगा। यही है सब जिसे कृपया भी गिना
- 1:23:59जायेगा, लिखा भी जायेगा, तुम अवसर भी बन जाओगे सब जाओगे पहला पहला
- 1:24:08ये है। इसको हम ऐसा भी कर सकते हैं।
- 1:24:14तो तुम मत अब देखो तुम तीसरे तल पे हो कि पहले पे हो कि दूसरे पे
- 1:24:24हो अब फैसला तुम करोगे थ्रेटन किसने किया क्या किया?
- 1:24:30ये मैं इसकी विश्लेषण करता पूछता, किसने क्या धमकी दी?
- 1:24:36वो कोई तत्व नहीं रखता था। मैं गहराई में उतर के आप सब को
- 1:24:39समझा देना चाहता था कि सब की जिंदगी में ऐसे पड़ा हुआ कोई
- 1:24:46तुम्हें धमकी से चाहता है। तो क्या करे?
- 1:24:52देखो तुम किस पड़ाव बस उस पड़ाव के अनुसार ही तुम्हें चलना पड़ा।
- 1:25:01पड़ेगा। यू अरे बैन्ड बाउन्डेड।
- 1:25:14अगर तुम किसी बड़े अफसर के पास खड़े हो तो तुम व्यासी नहीं डील
- 1:25:18कर सकते, जैसे अपने नौकर के सामने।
- 1:25:20खड़े हो। वहाँ तुम्हारी साथी थोड़ी सी बढ़
- 1:25:23जाती है। बॉस के आगे तुम्हारी साथी पीछे के
- 1:25:27जाती है। अलग अलग व्यवहार होते हैं।
- 1:25:31अब तीनों में से तुम देखो पहली स्टेज के तुम बिल्कुल मूर्छित हो।
- 1:25:36दूसरी स्टेज में तुम्हें साक्षी पता चल गया है, लेकिन फिर भी भ्रम
- 1:25:40तो नहीं गया। एक पता चला कि कोई है, देखने वाला
- 1:25:46और कोई है जिसे मैं देख रहा हूँ। लेकिन भ्रम टूटता है।
- 1:25:50तीसरे तल पे तीसरे तल पे भ्रम टूटता है और भ्रम के साथ साथ भय
- 1:25:57टूटता है। ये अनवार्य इलेक्शन है।
- 1:26:03अगर भय न टूटे तो फिर भ्रम भी नहीं।
- 1:26:06टूटा? भय टूट गया।
- 1:26:11अगर भ्रम टूट गया, भ्रम टूट गया कि मैं शरीर नहीं हूँ, फिर कोई
- 1:26:16मार जाए? एकाध समय महात्मा गाँधी के आखिर
- 1:26:20में आखिरी जीवन के आखिरी पलों में भ्रम टूट गया।
- 1:26:27तुम एक छोटी सी बात बता दो। आखिरी पल में बिल्कुल आखिरी मिलन
- 1:26:32था। पटेल का पटेल काफी देर बैठे।
- 1:26:36रहे। समझाते रहे बापू सेफ्टी दे रहे
- 1:26:42यहाँ तैनात कर देता हूँ। सब कुछ उनके हाथ में था।
- 1:26:48सारी सेना यहाँ तैनात कर देता हूँ।
- 1:26:52मुझे एक खबर मिली है तुमको मार देंगे बोलो तुम बापू जद न करो।
- 1:27:09लेकिन बापू ने कहा, वेलब तुम फिकर न करो।
- 1:27:20इससे आगे और मैंने करना क्या? है।
- 1:27:22बस अब मैं मरने के लिए ही हूँ और लोग कह देते हैं मुस्लिम पक्ष
- 1:27:32लेते थे। गाँधी अब तुम्हें एक आखिरी बात
- 1:27:36बता दूँ, तुम समझ जाओगे। जो व्यक्ति जिंदगी भर सोचता है,
- 1:27:42वह आखिरी एक क्षण में जो आखिरी कुछ क्षणों में उसका प्रकट हुआ हो
- 1:27:47जाता। है।
- 1:27:49अब थोड़ी सी तो मैं उदाहरण दूंगा जब।
- 1:27:55गोली लगी पहली। तो उन्होंने कहा हे राम दूसरी
- 1:28:03लगी। उन्होंने कहा, हे राम दूसरी बार
- 1:28:09तीसरी लगी उन्होंने। कहा, हे राम।
- 1:28:15अगर मुसलमान का पक्ष लिए होते तो अल्लाह भी तो कभी आता कुकी अल्लाह
- 1:28:23वेतर था ही वो थोपा हुआ था। सिर्फ एक यूनिफिकेशन के लिए एक
- 1:28:29अड्जस्टमेंट के लिए बेहतर नहीं था।
- 1:28:33अल्लाह? जब गोली लगी तो राम बाहर आया
- 1:28:37पलानी है, ये क्या सबूत है? इस बात का?
- 1:28:41मरते वक्त व्यक्ति अंत मति सौगति कहें अंत में व्यक्ति गलत नहीं हो
- 1:28:49सकता। अंत में बिलकुल साक्षात इसीलिए।
- 1:28:54कोर्ट से भी परमाणु मानती हैं कि मरता हुआ व्यक्ति जो लिखा जाएगा
- 1:28:59कांत के ऊपर भी दीवार के ऊपर भी वह सत्य होगा क्योंकि मरने वाला
- 1:29:04व्यक्ति झूठ नहीं हुआ और ये सच है, सच ही बाहर आता है।
- 1:29:11तीन गोलियां लगीं और तीनों बार राम ही बाहर आया।
- 1:29:15अल्लाह नहीं आया तुमने मुस्लिम पक्ष से कैसे कह सकते?
- 1:29:21हो? यह बिल्कुल प्राणों का अंतरिम
- 1:29:25सत्य अल्लाह तो था ही न? बस सिर्फ बोलने में आता था।
- 1:29:33एक समझौते की तरह के मुसलमान भी बिदके ना और हिंदू भी बिदके ना
- 1:29:38लेकिन हिंदू भी तक जाते हैं। मुसलमान काबू ना आए मुसलमान तो
- 1:29:46विद्रोही ही। और हिंदू उलट हो गए, विद्रोही हो
- 1:29:53गए तो गाँधी आखिर में अकेले हो गए जब आज़ादी का जश्न मैं बन रहा था।
- 1:30:05जिसके लिए उन्होंने पूरे प्रणों की आहुति दे दी।
- 1:30:101947 की 14 अगस्त की रात और पश्चिम बंगाल में नौकरी में पांव
- 1:30:18पैदा चढ़ रहे थे। अकेले उनके साथ कोई नहीं था।
- 1:30:31नहीं रोमत वो असहाय महसूस कर रहे थे अपने आप को।
- 1:30:47सब कुछ करके भी। कुछ हाथ न आया पूरा भारत वर्ष
- 1:30:59जिसके साथ गंदे से कांड हमला किया जाता था।
- 1:31:03हर आंदोलन के अंदर आज क्या था? आजादी मिल गई थी।
- 1:31:12कल तो सब थे कारवाँ के साथ साथ कल तो सब थे।
- 1:31:28कारवां के साथ सा आज कोई राह दिखलाता नहीं।
- 1:31:47कोई सागर दिल को बहलाता नहीं। आज अकेले चले जाए बंगाल में नौ
- 1:32:02अखली में खाली जमीन सुनी सुनी राहें।
- 1:32:06उनके साथ कोई नहीं। वहीं पैदल मार्च किसी भी
- 1:32:14सत्याग्रह में 35,000 किलोमीटर चले।
- 1:32:18गाँधी सारी उम्र में इस उम्र में ये चार हड्डियों का एक पुतला।
- 1:32:2635,000 किलोमीटर चला देश के कोने कोने में उनके पांवों की सुगन्ती
- 1:32:33आज हुई है तुम कहते क्या किया कुछ नहीं किया तुम्हारे लिए कुछ नहीं
- 1:32:42किया तुम्हारे लिए कुछ किया होता तो तुम मारते ही क्या?
- 1:32:46और ध्यान रखना, मैं तुम्हें सदा कहता हूँ।
- 1:32:51अगर कहीं गाँधी को जीवन मिल जाता 1 मिनट के लिए तो सबसे पहला आदेश
- 1:32:57पटेल को यही करता है कि देखिए ये बच्चा गुमराह हो।
- 1:33:01गया। खुद हुआ या किसी ने किया ये
- 1:33:05छोड़ो। लेकिन इसको आप दंड मत देना।
- 1:33:13मेरे साथ बड़ी घटनाएं घटने मारने आ गए तो मैंने कहा तू क्यों मरता
- 1:33:18है? मूर्ख ले मुझे दे दे मैं खुद ही
- 1:33:21मार लेता हूँ मारना चाहता है मुझे।
- 1:33:24मैं ही मर जाऊंगा। अरे तू क्यों लटकेगा मूर्ख, किसने
- 1:33:29भेजा है तुझे? पापा में गिड़गिड़ाने लगा हर होने
- 1:33:36लगा गाँधी की अहिंसा सारा संसार। याद रखें ये होती है अहिंसा लेकिन
- 1:33:51मजाक उड़ाने वाली थी इसका भी मजाक उड़ा देते हैं ले दी हमें आजादी
- 1:33:56बिना खड़क बिना ढाल तो बताओ कब खड़क उठाई, कब ढाल कब बंदूक उठाई
- 1:34:04यही तो। कॉन्फ्लिक्ट था सावरकर और गाँधी
- 1:34:08के बीच में जैसे आपको एक छोटी सी बात समझा दो लंबी हो गई है।
- 1:34:15वीडियो मेरे दृष्टि में डेढ़ घंटे से ऊपर हो।
- 1:34:24अगर ईमानदारी से कहें तो हिंदुस्तान को आजाद करने के
- 1:34:31आंदोलन में सबसे पहले कुदे सावरकर।
- 1:34:35बिल्कुल न्यायपूर्ण। जो बात है वो आप से बताता हूँ।
- 1:34:42उन्होंने शुरू किया करीब 1900 में इसके आसपास एकाध साल पहले बाद
- 1:34:54में। और 1906 सात में अब अक्चवल फिगर
- 1:35:00मुझे याद नहीं थोड़ा सा इधर उधर हो सकता है तुम्हारे इतिहास के
- 1:35:03हिसाब से, लेकिन मैं अपनी स्मृति के हिसाब से बोल रहा हूँ तो उससे
- 1:35:11पहले अक्सर गाँधी जी और सावरकर। दोनों पढ़ाई कर रहे थे।
- 1:35:18वरीष्ठ दोनों इंग्लैंड में थे और अक्सर दोनों में प्रेम था।
- 1:35:26वैसे प्रेम था लेकिन मतभेद था, बुद्धि अलग थी और अगर साबरकर
- 1:35:33गाँधी की बात को मान लेते हैं। अगर गाँधी सावरकर की बात को मान
- 1:35:39लेते तो आजादी नहीं मिलती अगर सावरकर गाँधी की बात को मान लेते,
- 1:35:52सावरकर गाँधी की बात को मान लेते तो हिंदू राष्ट्रगं।
- 1:35:56जाता उसी को। क्या था मतभेद?
- 1:36:04मतभेद ये था के सावरकर कहते थे के हथियारों से युक्त क्रांति होनी
- 1:36:12चाहिए ये कल्पना। के तल पर खड़ा हुआ साबरकर
- 1:36:20इमेजिनेशन था। सिर्फ आज तुम सोच सकते हो कि तुम
- 1:36:26हथियारों से फौज से लड़ सकते हो। आज आज फौज किसके पास है सरकार के
- 1:36:32पास? अगर तुम यह कहो ना सरकार से हम
- 1:36:35लड़ लेंगे, हथियारबंद होकर लड़ लेंगे।
- 1:36:39तो कितने वर्षों से यह नक्सली है कोशिश कर रहे हैं?
- 1:36:45खुद ही मारे जाते हैं, आखिर में हथियार फेंक देते हैं, फिर फिर
- 1:36:50शुरू कर देते हैं। तो साबरकर मांसाहारी भी थे, शराब
- 1:36:55वगैरह भी जैन टैंक की शराब पीते थे।
- 1:36:58वो मोहन और साबरकर दोनों दोस्त भी थे।
- 1:37:08एक ही स्थान पर यूके में पढ़ते थे।
- 1:37:12और अक्सर मिलते हैं कभी गाँधी, कभी साबरकर एक दूसरे के पास चले
- 1:37:18जाते हैं, बातें होतीं और हिंदुस्तान की आजादी की बातें।
- 1:37:21होतीं। देशप्रेम भी सबर्क लेकिन आखिर में
- 1:37:27असमर्थ हो गया। वह व्यक्ति सदा ही असमर्थ होगा,
- 1:37:38वह व्यक्ति सदा ही असमर्थ होगा जो व्यक्ति इतनी विशाल ताकत के सामने
- 1:37:47हथियारों से युद्ध करना चाहेगा। गाँधी अच्छी तरह से जानते हैं।
- 1:37:55गाँधी धरातल पर खड़े हुए व्यक्ति हैं।
- 1:38:00गाँधी जानते हैं जो हमारे शासक एवं वो कितने शक्तिमान?
- 1:38:05हैं। जॉर्ज पंचम दो तिहाई पृथ्वी का
- 1:38:09काबिज है सब सेना, उसकी सब क्षेत्र, उसके सभी कुछ उसका है,
- 1:38:18उससे हम हथियारमंद लड़ाई कैसे लड़ पाएंगे?
- 1:38:22वो शमिता है धरा के ऊपर खड़े हुए हैं डाउन टु अर्थ।
- 1:38:27इतने डाउन टु अर्थ कि पूरा अच्छी तरह से समझे लेकिन साबर का डाउन
- 1:38:33टु अर्थ नहीं है। ये कमी सबसे भारी है।
- 1:38:36वो कहते हैं नहीं नहीं हमें इससे शस्त्र विद्रोह करना पड़ेगा।
- 1:38:41बस इसी बात के ऊपर। दोनों के विचार और मत भिन्न थे,
- 1:38:48हृदय भिन्न नहीं थे, प्रेम था और ये इंग्लैंड में बातें करते
- 1:38:55हिंदुस्तान से पार वैसे था तो वो भी ये भी इंग्लैंड और वो भी
- 1:38:59इंग्लैंड तो वहाँ मिलते आप उसमें बात करते?
- 1:39:05कैसे मिलेंगे आज़ादी? घंटों बात करते सावरकर कहते मोहन
- 1:39:11तुम्हारा हिसाब ठीक है नहीं, ये तो हमेशा से उठाना पड़ेगा और सदा
- 1:39:17ही मोहन कहते नहीं, नहीं विनायक ऐसा नहीं होगा।
- 1:39:30उस 87 लड़ोगे उस जार्ज पंचम से लड़ोगे जिसके पास इतनी महान
- 1:39:37स्मरता है सब शस्त्र उसके पास तुम एक छोटी सी बंदूक लेके लड़ोगे
- 1:39:44उससे? ये समझ नहीं आई।
- 1:39:47सबर के एक आखिरी वक्त तक यह बात समझ नहीं आई और समझदार थे।
- 1:39:52गाँधी तो ले गए तो ये अहिंसा का ही प्रताप था शांत मन का
- 1:40:00लार्मरनेस ऑफ़ माइंड ये काम कर के।
- 1:40:05अहिंसक थे तो मिल गई आज़ादी हिंसक हो के देख लिया माने नहीं वो
- 1:40:12उन्होंने क्या किया यहाँ पर जैक्सन नाम के एक व्यक्ति जो
- 1:40:23अधिकारी थे नासिक के। उनकी हत्या करा दी।
- 1:40:27किसी के द्वारा खुद नहीं करते थे वो किसी के द्वारा ही कराते।
- 1:40:32थे। खैर, अब मैं ज्यादा परदे ना
- 1:40:37खोलूं, बस वो पीछे रहते थे परदे के, लेकिन पकड़ लिए गए।
- 1:40:44क्योंकि जिसने हमारा वहाँ से सुराग मिल गया कि यह सावरकर ने
- 1:40:49किया है सारा सावरकर। को पकड़ लिया गया।
- 1:40:551910 में ₹1900 लगे थे, 10 साल पहले आए थे।
- 1:41:04तो स्वतंत्रता में पहले कूदे देशभक्त थे, उनकी देशभक्ति पर
- 1:41:09ज़रा भी संदेह ने किया सचेत, लेकिन क्या हुआ?
- 1:41:141910 में इंग्लैंड से गिरफ्तार किए गए सावरकर?
- 1:41:20वहाँ से लाया गया बेड़ियां डला के।
- 1:41:23और। काला पानी और डबल जेल हुई।
- 1:41:29दो उम्र के दिन न्यायाधीश ने पाया कि इसने डबल।
- 1:41:38कतल किया है के हिसाब से न्याय के हिसाब से गाँधी ने संदेश भेजा
- 1:41:45जाके देखो गुल खिला गया ना तुम्हारा हिंसा मैं तुम्हें कब से
- 1:41:49कहता था अहिंसक गाँधी को आखिर में जब पता चला।
- 1:41:58वो साबरकर को बागडोर संभाल देते, लेकिन जब देखा के काला पानी हो
- 1:42:05गया, अब तो कोई भी न रहा। अब तो जाना पड़ेगा तो वो वहाँ से
- 1:42:12आए दक्षिण अफ्रीका में बड़ा अच्छा काम कर रहे थे।
- 1:42:15बड़ी अच्छी प्रैक्टिस थी। उनका नाम था अच्छे वकीलों में बहस
- 1:42:21बहुत अच्छी कर लेते थे। वो बाद के दिनों में चढ़ाई पूरी
- 1:42:25थी लेकिन अपना सारा कारोबार समेट के कस्तूरबा को यहाँ लेकर आ गया।
- 1:42:30वहाँ भी उन्होंने बड़े उपद्रव किए।
- 1:42:35बहुत ना बराबरी के कारनामे थे। वहाँ कुछ गलत प्रस्ताव पेश किए,
- 1:42:43कुछ गलत गलत बिल पास किए। गाँधी ने विरोध किया वहाँ से काफी
- 1:42:49कुछ निपटा किया, इसलिए मैं कहता हूँ दक्षिण अफ्रीका रोक बहुत
- 1:42:53रोया। नेलसन मंडेला उनकी मृत्यु पर
- 1:42:59यद्यपि जेल में था बहुत हुआ। गाँधी ने कहा कि देखो तुम्हारी
- 1:43:11हिंसा गुलकला की मैंने तुम्हें यही तो कहा।
- 1:43:14था। कि इस इतने पावरफुल व्यक्ति को
- 1:43:21शहशस्त्र नहीं मारा जा सकता। नहीं ललकारा जा सकता इनको तो किसी
- 1:43:27नीती के अधीन करना पड़ेगा सर और नीती तुम जानते नहीं नीती मैं
- 1:43:34जानता। हूँ बस वो मैं करूँगा।
- 1:43:38मर तो जाना है लेकिन उनकी गोली से नहीं मरना मर तो जाना है लेकिन
- 1:43:44इनकी गोली से नहीं मरना खुद मर जाना है तो उन्होंने उपवास किया
- 1:43:52नहीं, मैं नहीं जाऊंगा, मैंने अनशन कर दिया, मैं मर जाऊंगा।
- 1:43:57बस ये इनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं था।
- 1:44:03गाँधी जीके इस नए शस्त्र का कोई जवाब नहीं था।
- 1:44:07उनके पास ये अजीब सा शस्त्र निकाला था उसने बिल्कुल नया आज तो
- 1:44:12तुम लॉक करते हो आज डले वाले बैठे हैं अमर जाऊंगा सरकारी।
- 1:44:19बाजित हो गई मर जाओ, पता है क्या हो जाएगा?
- 1:44:28उस वक्त बिल्कुल नहीं थी ये पुलिस तो चल गई, सिक्का नया था, ये खोज
- 1:44:36थी गाँधी की। नहीं मरेंगे ये लोग दो तिहाई धरती
- 1:44:41जिनके हिस्से में है, उनको हम कैसे शस्त्रों से मारेंगे?
- 1:44:46वह पावरफुल हैं, हम पावरलेस हैं और हमारी ज़रा भी नहीं चलती।
- 1:44:51वहाँ तो एक मक्खी भी एक मच्छर भी पर नहीं मार सकता।
- 1:44:57हम उनको कैसे मारेंगे? लेकिन ये बात पता नहीं क्यों सब
- 1:45:02के दिमाग में आई है। आखिर में जेल चले गए।
- 1:45:09क्या करें? कुछ नहीं हुआ।
- 1:45:14गाँधी जी को जब खबर मिली के साबरकर को कालापानी की सजा हो गई
- 1:45:19है तो उन्होंने कहा और नहीं बचा आपको अब जाना पड़ेगा।
- 1:45:27वहाँ से आए 15 में गाँधी जी आए और उससे 15 साल पहले सावरकर ने
- 1:45:32प्रयास शुरू कर दिए। उनको हम देशद्रोही नहीं।
- 1:45:35कह सकते। भीतर से फिर भी ज्वाला थी, लेकिन
- 1:45:44बदल गए। थे।
- 1:45:46वो भय के कारण बदल गए थे। क्या करें?
- 1:45:50अब कालापानी के भीतर तो जीना भी वहाँ तो सब ठीक नहीं।
- 1:46:00बड़ा मुश्किल है जीवन सबर्क। ने अपनी जिंदगी को कठिनता से
- 1:46:09जीया, कठिनता से जीया गाँधी बेखौफ़ सुनते रहे।
- 1:46:19वह व्यक्ति बेवकूफ ही होगा जिसने खुद कोई गुनाह नहीं।
- 1:46:23किया। ये गाँधी अच्छी तरह से जानते थे,
- 1:46:26बस यही चीज़ उनसे ये काम करवा के कि तुम मरो न किसी से तो मरो खुद
- 1:46:36मरो लेकिन उनकी गोली से नहीं। खुद अपने अनशन से मरो।
- 1:46:41ये नई तकनीक आई थी, उनकी उनकी खोज थी और बड़ी कामयाब हुई और आज तो
- 1:46:48दुनिया में से मान लिया जाता। है।
- 1:46:53जो गाँधी की जान आई 2015 में। और क्षमा करना 1915 में और सावरकर
- 1:47:0115 साल पहले ही लग गए थे। हम ना ये नहीं कह सकते कि
- 1:47:05देशप्रेमी नहीं थे। अगर ईमानदारी से उन्होंने पहला
- 1:47:09प्रयास। किया।
- 1:47:11लेकिन क्या करें जब कोई ये हो जाए?
- 1:47:15दो उम्र के बिलकुल सावरकर ने मरवाया हरजक्षन को सबूत हो गया,
- 1:47:25सब हो गया। मारने वाले सब ज़बूत मिल गए और
- 1:47:30किया भी था उन्होंने। गाँधी ने आकर अपनी नई पॉलिसी
- 1:47:40शुरू। किया।
- 1:47:42चल लेकिन जो दो तिहाई सत्ता का धरती का मालिक गाँधी को मार नहीं
- 1:47:52सका, बेगाना नहीं मार सका। अपनों ने मार दिया गाँधी की
- 1:48:01अहिंसा कभी नहीं मरेगी अहिंसक व्यक्ति कभी नहीं मरता, अहिंसा
- 1:48:07सदा ही अमर रहेंगी, बशर्ते की तुम मन को कोल रखना सीख जाओ।
- 1:48:15मन को कूल रखना सीख जाओ से मैं रोज़ कहता हूँ डोन्ट बी रिऐक्टिव
- 1:48:22बी नॉन रिऐक्टिव रिएक्शन जस्ट कोई रिएक्शन न करो तुम अपनी शांति भंग
- 1:48:30न करो। शांत हो के घर जाके सोचो आराम से
- 1:48:35सोचो मुझे क्या करना चाहिए? इन पर हल निकलेगा क्योंकि शांत
- 1:48:40अवस्था में भीतर का वो परमात्मा तुम्हें बताता है।
- 1:48:45व्हाट यू अरे टु डू? इस परिस्थिति में विकट परिस्थिति
- 1:48:49में तुम्हें क्या करना चाहिए? इस बात का जिक्र गाँधी ने बहुत
- 1:48:57वार किया है। जब मैं थक जाता हूँ, हार जाता
- 1:49:01हूँ, कोई रास्ता नहीं मिलता, अकेला हूँ।
- 1:49:06अपने आप को दीनहीन महसूस करता हूँ, तब मैं एकांत में बैठ जाता
- 1:49:10हूँ और गीता का कोई न कोई शब्द मेरी गुत्थी को सुलझा देता है।
- 1:49:16गीता में हर चीज़ का हर समस्या का अनिवार्य है।
- 1:49:21गाँधी गीता के पुजारी थे, अपने साथ रखते।
- 1:49:29मुसलमान पक्षीय थे, मुसलमान का पक्ष लेते थे।
- 1:49:33बिल्कुल गलत। उनकी बुद्धि पक्ष लेती होगी
- 1:49:38क्योंकि न्यायकारिता की तरह देखते।
- 1:49:40थे। और तुम मात्र 45 55,00,00,000 के
- 1:49:45पीछे। एक व्यक्ति को।
- 1:49:48मार देते हो घटियों से। कोई ज्यादा बढ़िया ये कोई रिवेंज
- 1:49:55नहीं था। और सच पूछो तो ये एक पुरस्कार हो
- 1:50:01गया एक आखिरी बात समझ लेना। जो इस तरह पे चलेगा तुम्हें कह
- 1:50:09रहा हूँ अगर कोई थ्रेटन कर जाए तो तो तुम कुछ न कहना, एक बार तो
- 1:50:22तुम्हें मानना पड़ेगा। और तुम्हें ये पॉलिसी को अपनाना
- 1:50:26पड़ेगा। मेंटली दिमाग से बुद्धि से फिर
- 1:50:30धीरे धीरे तुम्हारे भीतर शांति उमड़ती जाएगी और 1 दिन तुम उस
- 1:50:34मुकाम पे पहुँच सकते हो जहाँ नॉन रिएक्टिवनेस स्थिति प्रज्ञा बैठा।
- 1:50:41है। भगवान कृष्ण कहते हैं, वहाँ जीस
- 1:50:47दिन तुम पहुँच गए, वहाँ कोई धमकी दे जाए, कोई बात नहीं, कोई मार
- 1:50:55जाए, कोई बात नहीं। कोई जी वंते जाए तो भी ठीक।
- 1:51:00जीवन शील ले जाए हर ले जाए तो कोई बात नहीं।
- 1:51:06नो रिएक्शन नो पॉज़िटिव नो नेगेटिव।
- 1:51:12आखिर में ये आता है। राधे राधे।
- 1:51:21श्याम मिला दे श्याम, मिला दे गोविंदा गोपाल।
- 1:51:38राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा गोपाल हर मेरी नैया पार लगा दे।
- 1:51:57गोबिंदा गो पाल हरे राधे राधे शाम मिला दे गोबिंदा गोपाल हरे राधे
- 1:52:14राधे। श्याम मिला दे गोबिंदा गोकाल हरे
- 1:52:23मेरी नैय्या पार लगा दे गोबिंदा गोपाल हरे राधे राधे श्याम बिता
- 1:52:35दे। गोविंदा गोपाल हरे ओम।
- 1:52:53हेवराट। तेरी शरणों में कोटी कोटी प्रणाम
- 1:52:58स्वीकार कर। धन्यवाद।