Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Aug 25 - जैसा सोचोगे वैसा बन जाओगे! संकल्प को गहरा कैसे करें? बुद्ध से आगे का सफर क्यों मुश्किल है?
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- 0:01प्रणाम बाबा जी अनु प्रज्ञा बी के मुझे रात को स्वप्न आया इसलिए
- 0:27प्रश्न पूछने आपके पास चले जाए। ब्रह्माकुमारी धर्म से रिलेटेड
- 0:34हूँ। स्वप्न आया और ये स्वप्न मैंने
- 0:40कभी सोचा भी नहीं था मुझे घोड़े पे स्वर आप नजर आए।
- 0:53रात ने कहा कि मैं कल किया बता रहा हूँ मेरी शरण में आजाओ तो बाप
- 1:09से पूछने ही लगी हूँ। कि आप वाकई कलकी अवतार हैं या
- 1:16मेरा सौपन्न जोक है। हमारे धर्म में सिखाया जाता है कि
- 1:36जैसा आप सोचोगे वैसा हो जाओगे। इसलिए सुबह उठ के शंकर को करना
- 1:47पड़ा। मुहूर्त में जब मुरली लगती हो।
- 2:00केह परम पिता परमार्थ है, शिव स्वरूप मेरी ये कामना पूरी करते
- 2:11है मैं ये हो जाऊं पर हमारा धर्म कहता है कि तुम वहीं हो जाओगी।
- 2:21मेरे इन दो प्रश्नों का जवाब दे दीजिए करपा करपा मैंने ये प्रश्न
- 2:33इसीलिए नहीं उठाया, ये है प्रश्न। तुम्हारा क्या करेगा?
- 2:51तुम पर इसका क्या असर होगा? बहुत दिनों से ये प्रश्न आया हुआ
- 2:57है। सोचा किसी दिन पूर्व।
- 3:05आज वो दिन आ गया क्योंकि मेरा ग्रंथ पूर्ण होने को है।
- 3:19बाबा ने हुकम दे दिया है शिव बाबा ने।
- 3:32और बोलना अब किसके लिए बोलूं? सब बोल दिया गया और ये नहीं बोल
- 3:46दिया गया। वह बोला जावे नहीं हो सके हम मोर
- 3:53प्रश्न पे आ जाए ऐसे सुपन मत लिया करो मेरे बच्चों से।
- 4:05भीड़ पहले ही नहीं संभल। मैं इतने बड़े जमावड़े को कैसे
- 4:17संभाल पाऊँ? ऐसे सपन देखना बंद करो, सत्य है
- 4:30या असत्य है। इन पचड़ों में मत पड़ो, इनको
- 4:38छोड़ो। दूसरे प्रश्न पे आ जाओ ये कारण का
- 4:52पश्न है मनुष्य में जो सोचेंगे हमारा धर्म कहता है कि वही हो
- 5:05जाओ। तुमने शब्द सुना होगा नीम हकीम
- 5:14खतराईजा आधा सत्य असत्य से भी ज्यादा भिनकर प्रणाम लेके आता है
- 5:24और यह आधा सत्य है। आज कल लोग रहस्य के प्रश्न बहुत
- 5:34कम पूछते हैं। मैंने इसीलिए प्रश्नों को जल्दी
- 5:39उठा लिया। ये प्रश्न और रहस्य से संबद्ध आप
- 5:50गौर से सुनिए, मैं अपने भीतर उतरूंगा शंक संग तुम भी चलते आना।
- 5:59सबसे पहले हम समुद्र के ऊपरी सतह पे बैठे होते हैं।
- 6:09और समुद्र की ऊपरी सतह है, जैसे कि हमारी बुद्धि है उससे भी पहले
- 6:22ही। जब तुम समुद्र की सतह पर नहीं
- 6:25बैठे तब तुम समुद्र के किनारे पर बैठे लहरों को देख रहे हो।
- 6:34यह वो क्षण है जब तुम समुद्र में उतरने का साहस नहीं किए।
- 6:42फिर किसी तरह साहस व डोला। फिर तुम समुद्र की सतह पर आए।
- 6:52ये कान जोखिम भरा है, लेकिन फिर भी तुमने जोखिम लिया।
- 7:02समुद्र की सतहों पे बैठ गए ऊपर, लेकिन अभी ऊपर पर मैं यही बता दूँ
- 7:13हीरे मोती दोहरा जितना खजाना है वह समुद्र के अंतरतम गहनतम।
- 7:21तलों से मिलेगा उससे पहले नहीं मिलेगा तुम्हारे धर्म का ज्ञान
- 7:35सत्य ही ज्ञान है वैसे ठीक है शुरूआत के लिए अच्छा है।
- 7:45ज्ञान है स्वत ही ऊपर ऊपर का ज्ञान है जैसे बुद्धि का ज्ञान
- 7:53होता है। हम जो सोचेंगे वह हो जाएंगे।
- 8:041 दिन जैसे हम समुद्र के ऊप पर सतह के ऊपर बैठ गए हों।
- 8:19यह सोचने से कुछ नहीं होगा, ना हीरे मिलेंगे, ना मोती, ना माणिक,
- 8:29ना कीमती लाल बुद्धि से किया गया विचार।
- 8:39फलीभूत नहीं होता है। इसलिए जीतने बुद्धिवादी लोग हैं।
- 8:47वे सर लोग हैं, आचार्य लोग हैं या बुद्धि से काम लेके कोई निष्कर्ष
- 8:53निकालने वाले। चार वाक हैं, मार्क से हैं या नीच
- 8:58से हैं ये सब बुद्धिवादी लोग हैं मैं बफरा बूडन डरा गयो किनारे बैठ
- 9:10पहले तुम किनारे पे बैठे थे। और पुत्री दो बातें संत एक तो
- 9:19विचार, एक संकल्प और तुम्हारा धर्म कहता है कि सुबह उठ के विचार
- 9:25करो, तुम जो बनना चाहते हो वह विचार करो, 1 दिन तुम हो जाओगे।
- 9:35बात बिलकुल ठीक है, ऊपर के दल से बिलकुल ठीक है, लेकिन शब्द बोला
- 9:44गया 1 दिन आज ही नहीं यह दिन क्यों मांगेगा?
- 9:55क्योंकि मात्र विचार करने से कुछ विचार सत्य ही तल पर समुद्र के
- 10:10ऊपर बैठना उसके बराबर होता है। वह लहरें हैं, इच्छा कोरे हैं।
- 10:22तुम्हे हिलाएंगे तुम्हे डुलाएंगे तुम डरो फिर, यह विचार की वर्षा
- 10:34है। रोज़ यही से रटते रहे।
- 10:43सुबह उठे ना ब्रह्मवेला में जो भी कुछ तुम बनना चाहते हो तो तुम
- 10:54धीरे धीरे विचार को संकल्प में बदलने के योग्य हो।
- 11:02जैसे जैसे गहरे उतरे विचार के संकल्प का घनत्व बदलता जाएगा,
- 11:14बढ़ता जाएगा और संकल्प के साथ आई भी शर्तें।
- 11:26संकल्प के साथ आएगा। प्रेम विचारों के साथ प्रेम में
- 11:34होता है जब तक तुम समुद्र के ऊपरी सतह ही तलों पे बैठे हो तुम्हारे
- 11:48दोहराने से कुछ भी नहीं होगा। सारी दुनिया सारे धन विचार करती
- 12:00रहती है, फला मर जाए फला डूब जाए फले का नुकसान हो जाए होता है
- 12:08किसी को। किसी का कुछ भी नहीं।
- 12:14मैंने देखी ऐसी स्त्रियाँ जो सारे जन ऐसा ही कुछ बोलती रहती है
- 12:20पड़ोसियों के लिए सामने वालों के लिए इधर उधर वालों के लिए।
- 12:28अच्छा शुभ शुभ बोलती हैं। यहाँ तक की ऐसी स्त्रियाँ देखी जो
- 12:34अपने घर वालों के लिए भी बुरा बोलती हैं लेकिन मज़े की बात ये
- 12:43है की बुरा उनका होता है। वो चाहती हैं।
- 12:51जिसके लिए कर्वा का व्रत रखती है। दीर्घायु के रिंग की वह मर जाए।
- 12:57लेकिन मर्थन है क्यों? क्योंकि यह विचार संकल्प नहीं था
- 13:07और अगर संकल्प था तो ज्यादा गहरा नहीं था।
- 13:12ऊपरी ऊपरी सप्ताह का विचार था, किसी बात से दुखित हुई होगी तो
- 13:17बोलती हो, संघ संग चलते रहना। मैं पहले भी बोल रहा था, बहुत ही
- 13:31विचार कुछ नहीं कर सकते। थोथे विचार तुम्हारे ब्रेन को
- 13:36परेशान कर सकते हैं और ऐसे प्रश्न मेरे पास रोज़ जाते हैं।
- 13:41बाबा मन व्रत हम करते हैं, तंग करे काज जब तुम उपरी सतह पे
- 13:50बैठोगे। तो समुद्र के भीतर तो लहरें
- 13:54उठेंगी और ज्वार भाटा की वक्त तो लहरें बहुत ऊंची ऊंची उठती है।
- 14:00तुम तो बहुत हिलोगे तुम्हारे तो प्राण इधर चंद्रमा पूरा हुआ कि
- 14:07इधर तुम हिलने लग गए, लहरें भी उठेंगी।
- 14:12कई कई 100 मीटर ऊपर उठेंगे। तुम थर्रा जाओ और तुम भागोगे,
- 14:22लेकिन भागने का कोई स्थान नहीं ऊपरी ऊपरी थलों के विचार निर्भर
- 14:33होते हैं। उनमें घणत्व नहीं होता, उनमें बल
- 14:42नहीं होता, उनमें शक्ति नहीं होती और उनमें प्रेम नहीं होता।
- 14:49इस प्रेम शब्द को थोड़ा सा गोलाकार ले लो।
- 14:58प्रेम एक बहुत वृहद ताकत है जो काम बल के द्वारा नहीं होता।
- 15:09जो काम तानाशाही के द्वारा नहीं होता, ये तानाशाह कान खोल के
- 15:13सुनने। वही काम प्रेम से हो जाता है।
- 15:21काश ये तानाशाह परमात्मा की सृष्टि के इस विधान को जान पाते
- 15:29हैं। फिर दुनिया में तानाशाह पैदा ही
- 15:35नहीं होता। मैंने ऐसे संत देखे जो बियाबान
- 15:44जंगल में घने वृक्षों के बीच कुठिया डाल के खेले बैठे और उनके
- 15:54कुठियों के बाहर। खूंखार जानवर बैठे मानव की उनकी
- 16:03रक्षा करें ये बल किसका था? अहिंसा का बल था प्रेम का वल।
- 16:17संग संग चलते जाना मैं फिर बोल रहा हूँ जैसे जैसे आप विचार से
- 16:24नीचे उतरोगे। तो संकल्प घना होता जाएगा, प्रेम
- 16:33भी घना होता जाएगा। प्रेम के संग संग अहिंसा भी गहरी
- 16:37होती जाएगी। मैं ठहर तो जाता हूँ तो ये शब्द
- 16:52आपके भीतर बोल तो मैं एक्सप्रेस की रफ्तार से भी बोल सकता हूँ,
- 17:02लेकिन मैं तुम्हें समझाना चाहता हूँ कि मेरे शब्द तुम्हारे
- 17:07प्राणों की। खुशबू, बंजार
- 17:20अगर कोई व्यक्ति महज विचार करेगा तो विचार तो सारे दिन ये पुरुष और
- 17:25स्त्रियाँ करते है। राजनीतिक लोग सदा विचार करते है
- 17:29उनका प्रसिद्ध थी भर जाये सिंघाशीन खाली हो जाये और हम से।
- 17:36जो हमारी जगह लेने को फिर रहा है वह किसी दुर्घटना का शिकार हो जाए
- 17:42और हम अपनी गद्दी पर बनें कौन नहीं सोचता लेकिन पूरा होता है
- 17:49नहीं होता। पूरा करने के लिए झूठ कफर तूफान
- 17:571000 तरह के पापड़ बोने पड़ता है, पूरा फिर भी नहीं होता है जैसे
- 18:05जैसे तुम गहरे उतरोगे अहिंसा की प्रवृत्ति बढ़ेगी।
- 18:13करुणा बढ़ेगी, प्रेम बढ़ेगा और संकल्प बढ़ेगा।
- 18:23ध्यान ध्यान से सुनते रहना, संग संग चलते रहना, तुम भी वहीं पहुँच
- 18:29जाओगी। संकल्प करते रहना, संकल्प करते
- 18:48रहना मैं ये हो जाऊं मैं ये हो जाऊं मैं ये हो जाऊं मैं ये हो
- 18:56जाऊं ब्रम्हंड तुम्हारी सब। इच्छाओं को रिकॉर्ड करते है और
- 19:06भ्रमण कहीं दूर ऊपर आसमान में सचखंड में नहीं बैठा है।
- 19:13भ्रमण तुम्हारे बाहर भीतर हर कण में भ्रमण ही मौजूद है उसका
- 19:20कनेक्शन। जैसे हमारे शरीर का कनेक्शन होता
- 19:24है। आपसुर ऐसे ही सारे प्रमंड का
- 19:31गूंथा हुआ कनेक्शन तुम मुझे मत सोचना अंगूठे के चोट लगी।
- 19:43तुम आह भरते हो, ठीक निकल जाती हो क्या हुआ?
- 19:46जख्मी तो अंगूठा हुआ लेकिन सारा शरीर शोक मनाता है।
- 19:59ऐसे ही भ्रमण है सारा गुस्सा हुआ उसकी रचना ही।
- 20:04ऐसी जब मैं कहता हूँ दो नहीं जब संत कहते हैं अद्वैत है जब ऋषि
- 20:18कहते हैं अहम् ब्रह्मास्त्र। एको ब्रह्मा द्वितीय और नास्ती तो
- 20:26उन सब का अर्थ यही है कि यह है सारा कुछ गुंसा हुआ एक है समझाए
- 20:34जैसे ये शरीर एक है सुई कहीं भी चुभेगी पता रखेगा आपको?
- 20:51चोट लगी ऊँगली में, बड़ी ऊँगली में लगी छोटी में लगी, हाथ में
- 20:55लगी सिर में लगी लेकिन पता लगेगा सारे शरीर को मांसाहारी करने वाले
- 21:03लोग मुझसे पूछ लेते। मैं उनसे यही कहता हूँ कि एक गहरा
- 21:10विज्ञान है, तुम समझ में सब एक मायने में मुर्गा भी हमारे से
- 21:16उसका अस्तित्व हमारे से जुड़ा हुआ है।
- 21:19जब तुम मुर्गे को काटते हो तो तुम समझने न कि तुम अपने को ही काटते
- 21:23हो जैसे तुम अपना। हाथ काटना शुरू कर दो।
- 21:31अपने शरीर का कोई अंग काटना शुरू कर दो, ये बिलकुल वैसा है।
- 21:39तुम उसे ऐसे सवाल मत पूछा करो। दूध पीना चाहिए कि नहीं पीना
- 21:42चाहिए? बहुत से लोग इन बकवासों में उलझा
- 21:45रहते हैं। और बाकी तो बातें छोड़ो, तथाकथित
- 21:50ज्ञानी लोग जो खुद को प्रबुद्ध कहते हैं वो भी इस बात पे विचार
- 21:55करते हैं कि दूध नहीं पीना चाहिए और पीना चाहिए।
- 22:00पुरुषों जैसे लोग कहते हैं कि दूध तो बछड़े के लिए होता है।
- 22:05फिर तुम अपने घर वालियों का दूध क्यों नहीं?
- 22:08बछड़े को पीला देते? इस तर्क तो ठीक है लेकिन मैं ये
- 22:14कहता हूँ जो गाय 50 किलो दूध देती है क्या बछड़ा 50 किलो दूध पी
- 22:19जायेगा तो उस समय सबकी बोलती बंद हो जाती है।
- 22:28जब गाय और ऐसी गायें हैं जब 50 किलो दूध देते है तो बछड़ा 50
- 22:36किलो बछड़ा दो किलो दूध पी सकता है।
- 22:43और सच पूछो तो पहले दिनों में दूध नहीं पी सकता।
- 22:46बछड़ा बछड़े को खील खील कहते हैं हमारी भाषा उसे भीतर से प्रकृति
- 22:56ऐसा दूध बेचती है जो शोपाच्य होता है।
- 23:01अगर दूध बेचना शुरू कर दे। तो वह बछड़ा पचा नहीं पाएगा।
- 23:05बीमार हो जाए वह मर जाए इसलिए पहले पहले दिनों में नव ब्याही गउ
- 23:16यभैंस यह देखी खीर। उस खिल के भीतर कुछ ऐसे कंटेंट
- 23:25होते हैं जो कि उस छोटे बछड़े को वह दूध आजम में आ जाता है।
- 23:33फिर कुछ दिनों के बाद धीरे धीरे प्रकृति जानती है प्रकृति तुमसे
- 23:39ज्यादा जिम्मेदार है। तुम कितना ही अपने आप को समझदार
- 23:44मानो, लेकिन प्रकृति आपसे ज्यादा समझदार है।
- 23:49तुम उसकी समझदारी को इन्वेंट करने में लगे हुए हो।
- 23:52अभी जिन्हें इन्वेंशन कहते हैं साइंटिस्ट, यह प्रकृति की समझदारी
- 23:58की खोज है। इसके अलावा और कुछ नहीं।
- 24:09तो ऐसे लोग जिन्होंने फिलॉसफी के अंदर झक मारी, जो लाख किताबें फट
- 24:14गए। हमको ऐसी बात करने शोभना देता है।
- 24:27यह है व्यर्थ की बकवास बछड़े के लिए तुम बछड़े का दूध खुद।
- 24:39छीन लेते हो भाई तुमने गाये वो देखे होंगे जब आप भर दूध देती हो,
- 24:46शायद तब आविष्कार न हुआ हो। जब वो शो बोल रहे थे गाय तो गाय
- 24:5340 किलो, 50 किलो दूध देने वाली गाय मैंने देखी।
- 24:58और ऐसे बछड़े देखे हैं जो मुँह फेर लेते हैं, ना ही अब नहीं पिया
- 25:03जाता। बाकी दोस्त का क्या करो तो मैंने
- 25:11कहा प्रबुद्ध व्यक्ति को। भगवान कृष्ण ने बहुत बदिया शब्दा
- 25:19है, प्रबुद्ध व्यक्ति को अपना शब्द और आचरण ऐसा रखना चाहिए,
- 25:31क्योंकि वह अनु करणीय हो। लोग उसके पीछे चल सके।
- 25:43कृष्ण का एक शब्द जो व्यक्ति उस स्तर पे पहुँच गया, बिलकुल उसके
- 25:52लिए पाप और पुण्य खत्म हो गया। बिना शक।
- 25:55लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी के लिए पापगुण खत्म हो गया।
- 26:00उसे अनुकरणीय आचरण करना चाहिए। अब तुम कृष्ण के उदाहरण दोगे,
- 26:09लेकिन कृष्ण ने तुम्हें यह नहीं पता कि 10,100?
- 26:15राजपुत्रियां ये राजवध हुए राजरानी नक्का सुर ने आसपास से
- 26:24उठाई थी नक्का सुर का वध कर दिया। तो बेचारी स्त्री ने बोला कि
- 26:35प्रभु आपने तो एक ढंग से पाप भी कर दिया कैसे?
- 26:45अब दो दो टूक का भोजन हमें नहीं मिलेगा, हम भूखों से मर जाएंगे।
- 26:53तो कृष्ण बोले कोई बात नहीं, मैं राजा हूँ, तुम्हारे लिए सारी
- 26:57व्यवस्था कर दूंगा रहने खाने पीने की सब व्यवस्था कर दूंगा, मैं
- 27:02जानता हूँ समाज तुम्हें नहीं अपनाएगा, घरवाले भी तुम्हें नहीं
- 27:05अपनाएंगे और उसने सब की व्यवस्था कर दी।
- 27:12इसलिए मैं कृष्ण से बड़ा समाज सुधार तुम कभी बने नहीं सको।
- 27:2010,100 राजपुत्रियां को सम्मान से रखना और उनकी हर सहूलियत का ख्याल
- 27:29रखना। ये होती है समाज से तुम भले ही
- 27:41इसको किसी और रूप में देख सकते हो स्वतंत्र तुम पर कोई पाबन्दी
- 27:48नहीं। ऐसी ऐसी बातों को आचरण में ले आए
- 28:02होशो खुद के आचरण में मैंने कभी नहीं कहा।
- 28:07वह प्रबुद्ध नहीं है, बिल्कुल कभी नहीं कहा, लेकिन प्रभुद्ध होने के
- 28:14बाद। अगर तुम संसार में या तो या तो
- 28:17टपक जाओ। राहुल की तरह जैसे बुद्ध के बेटे
- 28:22राहुल पहुंचते ही टपक गए। चलो या तो वैसे ही टपक जाओ अगर
- 28:33तुमने संसार में आकर कोई थोड़ा सा प्रवचन करना है।
- 28:39तो तुम्हें समाज के अनुरूप को व्यवस्थाएँ भी बनानी होंगी, जो
- 28:45समाज के लिए शुभ हो, गदर न मची जाए, अफरातफरी न फैल जाए।
- 28:54यही तो कृष्ण का। वर्ण शंकर लोग पैदा होंगे।
- 29:04इसका अर्थ क्या था पता ही नहीं चलेगा।
- 29:08कौन भाई, कौन बहन या मर्यादाएं हैं सर अगर तुम्हारे भाई बहन।
- 29:1820 साल के लिए जुदा हो जाए तो तुम भूल जाओगे, पता ही नहीं लगेगा।
- 29:24तुम भाई बहन भी शादी करवा सकते हो क्योंकि किसी को पता ही है।
- 29:28याद रखती है खोपड़े खोपड़े को तुमने दूर कर दिया और जैसे ही
- 29:37तुम। डीएनए चेक करोगे तो पाओगे डीएनए
- 29:40तो ये गहरी बात है भीतर उतरते जाओगे विचारों की तरह से जैसे
- 29:49समुद्र की लहरों के ऊपर बैठा हुआ व्यक्ति धीरे धीरे भीतर से सीखना
- 29:53शुरू हो जाता है। और भीतर जाने से बढ़ेगा प्रेम,
- 30:03भीतर जाने से बढ़ेगा संकल्प, भीतर जाने से बढ़ेगा आपका बर्थ।
- 30:21जितना जितना भीतर गए, संतोष भी वैसा ही गहरा प्रगाढ़ होगा जितना
- 30:30गहरा व्यक्ति उतना गहरा संकल्प। और उसका संकल्प उतना ही कारगर
- 30:42होगा। वह बुरा सोचेगा, बुरा हो जाएगा,
- 30:47अच्छा सोचेगा अच्छा, इसलिए कभी भी अकारण।
- 30:57आकार किसी व्यक्ति को बुरा भरा नहीं करना चाहिए अगर कोई ऐसा वैसा
- 31:10व्यक्ति छुपा बैठा हो सकता है। हो सकता है कोई व्यक्ति उस स्थान
- 31:15पे पहुंचेगा और मौन हो गया। वो 35 साल में मौन नहीं रहा।
- 31:26फिर अगर उसको तुमने कुछ कह दिया वो पति ली मान देगा।
- 31:36उससे आशीर्वाद लेने की चेष्टा करना, उसको गाली निकाल के तुम
- 31:44महानतम नहीं हो जाओगे? शिशु पाल ने ये काम किया था कृष्ण
- 31:55के लिए और 100 दो समाज थे उसके लिकन बैटलन क्योंकि वह अपनी से
- 32:05बनाना चाहता था। सारे दरबार में युधिष्ठिर का
- 32:08रायतिल का होने वाला था राज्याभिषेक।
- 32:12कृष्ण अगर पूजा में सुन लिए गए शिशुपाल कहने लगा ये ये बदमाश, ये
- 32:21लफंगा, ये लच्चा ये दूसरे को औरतों को भगाने वाला यह चोर माखन
- 32:28चोर है। यह नगण्य के कपड़े चुराने है।
- 32:35मेरा व्यक्ति यह एक गवाला किसको? अगर पूजा ये राजाओं का काम है
- 32:43भाई, वह तो जल उठा। लेकिन कृष्ण मन्द मन्द मुस्कुरा
- 32:53रहे सहज कृष्ण सदा ही सहज रहते हैं, अपने भीतर के तल पे रहते हैं
- 33:00और हमारे भीतर का तल सदा ही सहज है, संतुलित है।
- 33:09जैसे ही शो पूरा हुआ गहनाती भी गए बीच बीच में, लेकिन शिशु बाल के
- 33:17सिर पे काल बोल रहा था, मैं बोलता ही चला।
- 33:26और कृष्ण का बस अब इसके बाद मत बोलना।
- 33:29यह अंतिम वारणिक थी, चेतावनी थी शिशुपाल नहीं है, रुको खैर, तुम
- 33:39जैसे ही चक्र कहते हो। वे चीत तो कुछ और थी लेकिन समझ
- 33:43लेना के अपने सुदर्शन चक्र से उसका गला घटती विची तो संगरणी जो
- 33:5064 कलाएं उसने अपने गुरु के संदीप पानी के आश्रम में सीखी थीं,
- 33:57उनमें एक सांगारणी कृत भी थे। वह संगारणीय कृपया बड़ी आसानी से
- 34:04बाध कर सकती है। श्याम मानव जैसे लोग इस वीडियो को
- 34:14मत सुनें, ना ही कोई कमेंट करें क्योंकि वह जानते नहीं।
- 34:20कमेंट करना उनके अधिकारिक क्षेत्र में आता है।
- 34:24ये बिल्कुल वैसे ही हैं जैसे मार्कस था जैसे चारवाक था जैसे
- 34:31निश्चित था। इन लोगों का अंत कैसा होगा?
- 34:37बिल्कुल नित से जैसा होगा 11 वर्ष तक नित से पागलपन के कगार में
- 34:44चिल्लाते रहे मैं, जो कहता था व्हाट इस डैड?
- 34:52उसके इतिहास को पढ़िए उसके अंतिम दिनों को पढ़िए तुम्हें तरसा 11
- 35:00वर्षों तक वह पागल हो कैमरा मैं टकरे मारता रातों रातों के
- 35:05चिल्लाता मैं तुम्हें कहता हूँ। चाहे श्याम मानव हो, वह चाहे
- 35:16प्रेमानंद हो, चाहे बागेश्वर धाम हो, ऐसे पाखंड करके, सर्कस करके
- 35:24और जो तुम जानते नहीं उनका प्रचार प्रसार करके ये जो तुम अर्जित
- 35:29करोगे। यह तुम भी जानते हो और सभी जानते
- 35:33हो यह संघ नहीं जाएगा यह संघ जाएगा वह दिखता नहीं बस यह यह
- 35:40मूर्खता है और जो दिखता नहीं उसे तुम मानते हो अगर तुम्हें दिख
- 35:47जाता वो पुण्य जो तुम्हारे संघ जाएगा।
- 35:50तो पाप कोई न करता, मैं सदा ही निवेदन करता हूँ, क्या तुम रुक
- 35:58जाओ? क्यों करते हो?
- 36:00ऐसी बातें लक्षण नहीं आ रहे। पर भगवान कृष्ण कहते हैं कि लक्षण
- 36:11मस्ट लक्षण ही तो बताएंगे तुम 10 रोटी खा जाओगे।
- 36:21ये लक्षण ही तो था कि भूख लगी थी तुम दो ग्लास पानी, चार ग्लास
- 36:25पानी पी जाओगे, लक्षण ही तो था कि प्यास लड़की थी।
- 36:32और तृप्त हो जाओगे, चेहरे पर नूर आ जाएगा, लक्षण ही तो है के तृप्त
- 36:36हो गए तो अपने भीतर उतरते चले जाओ, भीतर उतरते चले जाओ, संकल्प
- 36:43गहरा होता जाएगा, संकल्प गहरा होता जाएगा।
- 36:51विचार से कुछ विचार मात्र विचार दो तरीकों से चीजों को पाया जा
- 37:02सकता है। एक परिश्रम, मेहनत, क्रोध, संसार
- 37:15जो भी कुछ बनना है, डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बना है, राजनीतिज्ञ
- 37:22बना है, शिक्षक बना है, वैज्ञानिक बना है।
- 37:26तुमने क्या बनना है? खिलाड़ी बनना है वैसा प्रयास कर,
- 37:32परिश्रम करने से कर्थ करत अभ्यास के जड़मती होत सजान रसरी आवत
- 37:40जागते सिर पर बढ़ते निशान एक तरीका जी।
- 37:48दुए आई अचीव दी बॉल तुम्हें तुम्हारी मंजिल मिल जाएगी दूसरा
- 37:55रास्ता है अपने भीतर उतर के संकल्प को बनाओ।
- 38:02यह जो वीके का रास्ता आपने बताया पुत्रिक यह संकल्प को बनाने का
- 38:06रास्ता है। जैसे जैसे भीतर जाओगे, शब्द खो
- 38:13जाएंगे, मौन आ जाएगा, फिर मौन गहरा होगा, गहरा होगा, गहरा होगा।
- 38:24एक तल ऐसा आए जहाँ तुम जो विचार कर रही थी क्योंकि तुम अभी लहरों
- 38:33पे नहीं बैठे हो, तुम समुद्र के गहरे में उतरना शुरू हो गए हो एक
- 38:39तल ऐसा आएगा। जो तुम खोपड़ी के तल पर बैठे सोच
- 38:45रहे थे अगर तुम वो उस तल पर जाकर सोच लिया तो तुरंत वो तुम्हारा
- 38:50काम स्वतः हो जाएगा उस स्थल पर संकल्प के कारण अब इसको टिक कर लो
- 38:57आप। काट दो तरीकों से हो सकती है एक
- 39:09तरीका है बिना कुछ जाने वह तो बकवास होती है काटनी होती है।
- 39:23नीम हकीम खतरा एग्जाम तुम जानते वानते कुछ नहीं मैं तुमने कुछ
- 39:29सीखा? कहीं से कहीं से किसी यूनिवर्सिटी
- 39:34से वैसे ही डिग्री कागज की रैली होगी।
- 39:38लेकिन तुम्हारे भीतर ज्ञान नहीं है उसे नीम हकीम कहते हैं, ना
- 39:43सॉल्ट का नाम जानता हूँ, ना सॉल्ट की गुण का नाम जानता हूँ ना उसके
- 39:50आगे वो क्रिया कैसे करेगा उसको जानता हूँ।
- 39:55बस ये नीम हकीम है। किसे आता जाता कुछ नहीं।
- 40:02महज इसके पास कागज़ डगरी और शाम मानव जैसे लोग ऐसे लोग है तार्किक
- 40:14है। बुद्धि काम करती है।
- 40:20एक तर्क और भी होता है वो तर्क होता है, कबीर के जल में पाथर
- 40:29पूजा हर मिलें तो मैं पूजू पहाड़। तुम आए तो बड़े मज़े से बात कह
- 40:36देते हो। लेकिन जीस वेला में कबीर ने यह
- 40:43शब्द कहा था। उस वक्त प्रखंड का बड़ा दबदबा था।
- 40:48मूर्ति पूजा का बड़ा दबदबा था। मूर्ति को ही भगवान समझा जाता था।
- 40:55शब्द की घड़ी में बोले गए मायने रखते हैं।
- 41:01आज उत्तर कोरिया में तुम जो बोल सकते हो उससे ज्यादा नहीं बोल
- 41:10सकते। लेकिन अमेरिका में आज तुम कुछ भी
- 41:15बोल सकते हो, हिंदुस्तान में कुछ चीजें आज बैन होने शुरू होते हैं।
- 41:21कुछ मीडिया पे दबाव है, कुछ मीडिया खरीद लिया गया है।
- 41:27कुछ मीडिया आज भी स्वतंत्र है। और आने वाली पीढ़ियां उन्हें ही
- 41:37मान्यता देने वाली देना भी चाहिए। वो योग्य भी है क्योंकि उन्होंने
- 41:45उन खतरों के अंदर। भारत की लाज बचाई रखी जब एक
- 41:53मीडिया भी चुका था आज तुम गाँधी हो, गाली निकाल लेते हो लेकिन
- 42:00क्या हुआ था संवरकर अगर साथ मिल जाते?
- 42:05तो क्या आज सबरकर को जबरदस्त ही तुम्हें मान दिलवाना पड़ता है?
- 42:13गाँधी ने तो मान मांगा नहीं, गाँधी को तो स्वतः ही मान मिल
- 42:18गया। विदेशों तक में उसकी मूर्तियां
- 42:22लगी। साउथ अफ्रीका उसका अपना जन्म
- 42:24स्थान नहीं था। लेकिन वहाँ भी जाकर क्रांति
- 42:28कराये। नेरसन मंडेला के गुरु थे जो
- 42:34राष्ट्रपति बने। बाद में उसने मांगा नहीं मान मिल
- 42:38गया, मान मिला करता है मांगा नहीं जाता।
- 42:44या कोई भिक्षा पात्र में मांगने जैसी चीज़ नहीं।
- 42:48तुम्हारे कर्मों से दुनिया तुम्हें सम्मानित कर ही देगी।
- 42:54अपने गहरे गहरे उतरते जानो जैसे जैसे गहरे उतरोगे संकल्प वगैरह
- 43:00होते। संकल्प विचार का ही घणिभूत रूप
- 43:04है। मैं तुम्हें बताता हूँ, वही धूप
- 43:07होती है जो घणिभूत होके कन्डेन्स होके आग बन जाती है समझाती है, वो
- 43:16ही धूप होती है वो ही विचार होता है।
- 43:20क्योंकि शक्ति वही होती है एनर्जी इस दी सेम उसको घनिभूत करके उत्तर
- 43:27लंच कॉन्वेक्स रेंज के द्वारा उसको एक बिंदु पर अटका दिया जाता
- 43:31है और वह आग लगा देती है, कागज को जला देती है।
- 43:37बस इसे ही संकल्प कहते हैं, तो मैं उदाहरण के रूप में बता रहा
- 43:41हूँ धूम तो बिखरी पड़ी है सब तो विचार ही विचार हैं तुम्हारे
- 43:52संकल्प के नाम पे तुम शून्य। इसलिए तुम्हारी कोई इच्छा पूरी
- 43:57होती नहीं, तुम काम भी बाहर करते हो, परिश्रम भी करते हो लेकिन फल
- 44:03नहीं आता और मनचाहा फल तो कभी भी नहीं आता।
- 44:12ये तो खोपड़ी का दर्द था यहाँ जो मांगते हो वो ना पूरा होता।
- 44:17एक और तल आएगा। भीतर संकल्प गहरा प्रगाढ़ गहरा हो
- 44:20जाएगा। ध्यान रखना मैं दो तरफ़ चल रहा
- 44:23हूँ। प्रगाढ़ संकल्प के भीतर एक तल ऐसा
- 44:30आएगा जहाँ तुम जो सोचोगे वो हो जाएगा।
- 44:36वहाँ क्या विशेषता है? वहाँ संकल्प घनी बहुत होकर धूप की
- 44:42तरह कन्डेन्स हो गया है और उसने जला दिया है यह बोतल है सारी।
- 44:54थ्योरी यह है प्रैक्टिकल मैंने बता दिया, अगर तुम ऊपर बैठे बैठे,
- 45:01दोहराते ही रहोगे मात्र अपने गहरे में उतर के संकल्प को गहराने की
- 45:07चेष्टा न करोगे तो तुम आज नहीं कल नहीं 1000 साल बाद नहीं कुछ नहीं
- 45:13मिलेगा। तुम्हें अपने भीतर जाना होगा
- 45:23प्रविष्ट करना होगा, गहरे गहरे उतरना होगा, सारी धूप को समेटना
- 45:29होगा और एक बिंदु पे लगाना होगा। उस बिंदु का नाम है जंक्चर फन।
- 45:39संदिग्ध क्षेत्र वहाँ पर जाकर तुम जो मांगोगे बाबा कहते हैं जो
- 45:46मांगू ठाकुर अपने सोई सोई तेवर उस स्थान पर गया हुआ व्यक्ति।
- 45:55जो कुछ बाहर की तमन्नाएँ हैं, वो अगर मांग लेगा तब तक क्षण पूरी हो
- 46:03जाएंगे। मैंने किसी व्यक्ति को यह
- 46:10फार्मूला सुझा दिया था। वह व्यक्ति।
- 46:14मेरे सांनिध्य में मेरी देख रेख में साधना करता था और 1 दिन उस
- 46:22स्थल के गिरी पहुँच गया और वह व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकता था मजेस
- 46:29लेकिन वहाँ जाकर पूछना नहीं पड़ता ध्यान रखना।
- 46:33वहाँ जाकर खुद ही महसूस हो जाएगा तुम्हें आई कैन डू एनीथिंग
- 46:38व्हाटएवर आई वांट? मैं जो भी कुछ चाहता हूँ, वह हो
- 46:42जाएगा। यह वो तल है।
- 46:48यही विवेकानंद इसी तल पर आए थे। तो उसने व्यक्ति ने क्या सोचा?
- 46:54उसका कोई दुश्मन था, उस घर में तीन प्राणी थे, वह मर जाए वह मर
- 47:00गए, मुझे नहीं पता उसका क्या हुआ क्योंकि मैं 14 साल से भीतर बैठा
- 47:09हूँ तेरा वर्ष। लेकिन मुझे इतना पता है वो मरेगा
- 47:13जब सड़ सड़ के मरेगा क्योंकि मैं फर्क जानता हूँ अच्छे से तुम जैसा
- 47:27कर्म करते हो मैं जानता हूँ तुमने बीज बोया क्या है?
- 47:34ये आम है या बबूल है? इसलिए भगवान कृष्ण कहते हैं देखो
- 47:38फल मैं जानता हूँ और कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति फल जानता है
- 47:44कर्मनेवाद का रस्ते तुम कर्म करो फलद तुम्हें मैंने ही देना है।
- 47:52सही पूछो तो फर्ज तुम्हारे कर्म नहीं देना है, कर्म ही तो एक्शन
- 47:56ही तो रिएक्शन बनेगा तो जैसा कर्म किया उसने तीन व्यक्तियों को मार
- 48:06दिया, उस तट पर मार सकते हो? यहाँ भी तो मार सकते हो संसार में
- 48:11तुम कतल नहीं कर सकते हो बताओ संसार में भी तो कतल कर सकते हो
- 48:18तलवार उठा लो और तीन आदमी को मार दो मर गए लेकिन बात तो आगे की है
- 48:26जब तुम्हें लोहे की सीखों के पीछे से झांकना पड़ेगा।
- 48:29वही तो मुश्किल लगता है। वही तो लोग जब तथा कथित गुरु जो
- 48:40अपनी पूजा कराते हैं, दुष्कर्म करते हैं तो उन्हें सजाएं होती
- 48:47हैं। आजीवन।
- 48:49कारावास तुम मरोगे, जेल में मरोगे, लेकिन फरोल पे आ जाते हैं।
- 48:53खैर, ये राजनीतिक मुद्दा है, इसके आगे नहीं चंपा, हम अपने ढंग पे
- 49:01चले उतर जाओ, भीतर उतर जाओ उस स्थल पर आ गए एक एक तो।
- 49:08ढंग ये है ये ढंग निंदा का भी है अपने भीतर जाके उस तल पे पहुँच के
- 49:22उस तल को पार करके बुद्ध का तल आएगा बुद्ध के दल से अथक कृष्ण का
- 49:27तला। समझाने के लिए कह रहा हूँ कृष्ण
- 49:33के तल पर अगर यह व्यक्ति बुद्ध को बुधु कह दे, मूर्ख कह दे तो
- 49:41अतिशोकति नहीं, यह सत्य है। मेरे पास ऐसे कमेंट्स हैं।
- 49:49महान पुरुषों की आप निंदा करते हो, निंदा नहीं ये सत्या और
- 49:56तुम्हें निंदा लगती है क्योंकि तुम उस मुकाम पे पहुंचे तुम्हारी
- 50:03मजबूरी है मेरा दर्शन। तुम निन्दा कह लो, तुम मेरा दर्शन
- 50:11कह लो, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
- 50:16बुद्ध के तल पर आना जरूरी है। मैंने 1000 बार बोला लेकिन बुद्ध
- 50:21के तल से आगे भी जाना होता है। वो रहस्य का तल?
- 50:24ये शब्द रहस्य केन्द्र जो इस बिटिया ने प्रश्न पूछा यह प्रश्न
- 50:31रहस्य से संमंधित है बुद्ध के तल पर आने वाला व्यक्ति?
- 50:43अपने नैया की पतवार अपने हाथ में रखेगा, यह लक्षण है वह कहेगा
- 50:50अपदीपो भवा अपने नाव की पतवार अपने हाथ में रख, यह बुद्ध का
- 50:57लक्षण है और बुद्ध का सहारा दृष्टिकोण इसी शब्द पे।
- 51:02टिका हुआ है वह कहे का दूसरे के हाथों में पतवार मत दे अपना
- 51:08मार्गदर्शक, खुद बन अपना रहा खुद तलाश यह रास्ता ठीक है, यहाँ तक
- 51:14तो आना ही होता है फिर चाहे इस पर रुक जाओ चाहे उससे आगे मंजिलें और
- 51:21भी हैं। वसल की राहत के सिवा यहाँ मंजल
- 51:29रुक नहीं जाती। मंजल आगे और भी है और आगे ज्यादा
- 51:33बड़ी मंजल है क्यों? क्योंकि उससे पहले था डर?
- 51:40बुद्ध से पहले लगता है डर अब इस बात को थोड़ा कोर्ट बुद्ध के पहले
- 51:48डर के कारण तुम बाहर भाग जाते थे तो मर ना जाए कभी लेकिन बुद्ध के
- 51:54तन पे तुम मर गए। तो अगला कल मैं और मुश्किल क्यों
- 51:59बताता हूँ? कब सुनिए उसका उत्तर सुनिए उसका
- 52:06कल मैं इसलिए ज्यादा मुश्किल बताता हूँ के डर को तो तुम किसी
- 52:11तरह किसी तरह किसी तरह लांघ लोगे। गुरु साहस देगा खुद।
- 52:16खुद साहस पैदा कर लोगे, लेकिन उसके आगे आएगा रस रस की खमारी को
- 52:32तुम चाहते हुए भी छोड़ न पाओगे। यह तो तुम्हें लपेट लेगा चहुँ और
- 52:40से तूफान की तरह, इसको छोड़ना बहुत मुश्किल है।
- 52:46बुध के तल के जाने से पहले तो तुम आसानी से छोड़ सकते हो क्योंकि कप
- 52:51रहे थे, डर रहे थे, तुम्हारा मन भी जाता था।
- 52:55कि छोड़ ही क्यों न दें, यह भी कोई जीवन है?
- 53:00यह भी कोई तप मार्ग है तुम्हारा वैसे भी भागने को दिल करता है,
- 53:05मरने को दिल नहीं करता है। ये तो गुरु है तुम्हें किसी न
- 53:09किसी तरह ले जाता है। तुम तो भागने को सदा ही तैयार,
- 53:17लेकिन जैसे ही बुद्ध के तल पर आए, उससे आगे छोड़ना बहुत मुश्किल हो
- 53:21जाता है। उससे पहले तो तुम्हारा मन ही कहता
- 53:25है बाहर निकलो ना, क्यों पचड़े में पड़े कहाँ पर मातम वर्मात्मा
- 53:29कुछ नहीं होता भाई। अगर होता तो ये बलात्कार होते,
- 53:34अगर होता तो हत्या कतल गारे तो होता ये बेईमानी है, तूफान होते
- 53:39ये झूठ कफर होते नहीं होते बस तुमने अपने आप ही डेफिनिशन बना ली
- 53:45परमात्मा परमात्मा से पूछा कभी? ये शव मानव वर्ग खुद ही अपने
- 53:52डेफिनिशन बना देते है। पर मैं इन्हीं लोगों को कहता हूँ
- 54:00कि देखो तुम तुम्हारी खोपड़ी से तर्क करते हो ठीक है, लेकिन तुम
- 54:07तुम्हारी खोपड़ी से अंधविश्वास को।
- 54:15काटो वह श्रद्धा तो तुमसे कटेगी ही नहीं, तुम कितनी देर से ट्राई
- 54:21कर रहे हो? श्रद्धा कटी एक भी व्यक्ति घटा
- 54:28बड़े। तुम कोशिश करते जाओ, लेकिन
- 54:35श्रद्धा श्रद्धा लोगों को भागने नहीं देते।
- 54:39श्रद्धा वो सूत्र है जो माला के मनको को सूत्र में प्रोए रखता है।
- 54:45तुम लाख कोशिश करो, काटो। समझाओ नहीं, समझेंगे ये तर्कशील
- 54:51सोसाइटी वाले लोग मेरे यहाँ कृषि क्षेत्रशील सोसाइटी में चला गया।
- 54:59सब में इन स्थितियों में उलझा हुआ आसन उलझ नहीं होता है।
- 55:03और क्या होता है? धन वैसे कमा लो या धन वैसे कमा
- 55:07लो। बात तो यह है कि तंत तंत नहीं रस
- 55:13नहीं है धन असली बात सीखने वाली यह तुम सिद्धियों से धन कुमाओ तुम
- 55:19परिश्रम से धन कुमाओ। ये दोनों मायने नहीं रखते।
- 55:23मायने ये रखता है कि धन में कुछ है।
- 55:27धन के प्रयोग से धन के भोग से क्या तुम उस रस को पा जाओगे?
- 55:32बस यही मसला आके खत्म होता है, क्या वो रस है?
- 55:39तो इसका जवाब तुम्हें कोई ना परमानंद दे पाएगा, ना बागीश्वर दे
- 55:48पाएगा ना कोई और कथावाचक दे पाएगा।
- 55:53रस है वो कहेंगे है। हला शास्त्र में लिखा।
- 56:00भागवत में लिखा हर वंश में लिखा उस उपरीषद् में लिखा यही तो
- 56:05आचार्य कर लेकिन मैं कहता हूँ तुमने देखा यह बहुत सी अफवाहें।
- 56:21जब हम उनकी गहराई में जाते हैं तो बात ये है कि मैंने तो उससे सुना
- 56:28था, मैंने तो उससे सुना था, मैंने तो उससे सुना था और आखिर में टाई,
- 56:33टाई फिश, ये किसी के मन की शरारत थे।
- 56:40यह कुछ कहा सुना गलत गया, देखा देखा, किसी ने नहीं, मैंने इस
- 56:47शास्त्र में पढ़ा है, इसलिए कबीर कहते हैं देखो लेखा लिखी देखा
- 56:54देखी, फिर तुम विश्वास मत। अगर तुमने तर्क ही करना है खंडन
- 57:01ही करना है, तो पहले जाओ खोजो और अगर तुम खोजने लग गए श्याम मानव
- 57:11जी। तो तार्किक का भस्मी भूत हो
- 57:16जाएगी। तुमने खोजा ही भी नहीं, बस यही
- 57:21दुविधा है, खोजा गांव तर्क करना आसान है, मार्गसुगम है तर्क
- 57:30खोपड़ी बच जाती है, तुम्हारा अहंकार बच जाता है।
- 57:38खोजने में अंकार को विलीन करना पड़ता है और वो तुम विलीन करना
- 57:42नहीं चाहते। तुम बने रहना चाहते हो, लेकिन
- 57:47बनेगा आदमी कब तक 100 वर्ष तक बन जायेगा, 200 वर्ष तक बन जायेगा।
- 57:53आखिर मृत्यु कब आएगी तुम्हारे पाखंड?
- 57:56यहाँ खंड खंड होकर मैं तुम्हारे पाखंडों को कहता हूँ, तुम्हारे
- 58:01तर्कों को मैं पाखंड कहता हूँ क्यों?
- 58:03क्योंकि ये अनुभव की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
- 58:14और हमारे जैसे अनुभवी लोग तुम्हारी बातों को बिल्कुल पाखंड
- 58:20लगेंगे क्या बुद्धि के तर्क से निकला हुआ कभी रस होता है तर्क
- 58:30होता है? नीरस तर्क होता है और तुम बात कर
- 58:37रहे हो तो उस रस की जीस रस में मधुर इस रस प्याले को भी कर मीरा
- 58:44पैर में गुंगुरू बांध लेती है। कृष्ण रास रचाने लग जाते हैं नीती
- 58:51पर। महावीर और बुद्ध शिलावत बैठ जाते
- 58:56हैं, तुम बात उनकी कर रहे हो, तर्क करने से पहले मैं तुम्हें से
- 59:04पूछता हूँ कि तुमने खोजा इतना तो मुझे पता है तो तुम ईमान पर?
- 59:13ज़ोर तो नहीं पर लोग है बेईमान, हम भी तो नहीं हमने तो खोजा यही
- 59:27फर्क। न तुम बेवफा हो, न हम बेवफा।
- 59:52न तुम बेवफा हो, न हम बेवफा मगर क्या करे अपनी राह है?
- 1:00:12जुदा है न तुम बेवफा हो न बेवफा। तुमने सोचा नहीं हमने सोचा राहु
- 1:00:42का फर्क है गलत तुम भी नहीं और गलत हम भी तो नहीं हो रहे?
- 1:00:51क्या कहोगे कबीर को? मैं कहता आँखों तक इसलिए मैं
- 1:00:59तुमसे कहता हूँ जितना जीवन व्यर्थ कर दिया कर दिया।
- 1:01:04मुझे पता है तुम संभलोगे ना बहुत से लोग हैं जो डेरों में 4040 साल
- 1:01:10से बैठे हैं। वे कहते बेबानी नहीं करते बाबा हम
- 1:01:15सच बताते हैं कि हम अगर हमने राह बदली अब तो मरेंगे, जियेंगे यहीं
- 1:01:23जियेंगे और मरना जीना यहीं चाहिए क्योंकि अब तुम जहाँ जाओगे वहाँ
- 1:01:29तुम्हें जो ब्लैकबोर्ड पे दिखा उसको मिटाने में बहुत साल लग
- 1:01:32जाएंगे। तब तुम बने रहो, तार्किक हो,
- 1:01:36तार्किक बने रहो, लेकिन एक बात ध्यान में रखना, वह जो वेला रस को
- 1:01:42पीने में बिताई जा सकती थी, वह वेदा खंडन मंडल में बीत जाएगी।
- 1:01:51सृष्टि पे आने का यह मन्तव्य कतई नहीं था बस इतना ही कौन सा वह
- 1:02:01वेला जो रसबान करने में मीरा ने गुजार दिया?
- 1:02:07वह वेला तुम रस को जिसने खोजा नहीं?
- 1:02:11वह रस को नकारने में बिता देगा। इतना ही फर्क है, करते रहो, कुछ
- 1:02:27लगाते रहो। ऐप्स कौन रोकता है?
- 1:02:36लेकिन बात तो ये है वक्त अपने खराब कर रहे हो।
- 1:02:42मैं तुमसे कहता हूँ तुम कथावाचक करने में जो वक्त खराब कर रहे हो
- 1:02:47अगर तुम्हारे पास पर्याप्त धन हो गया, लूट लिया इतना।
- 1:02:51तो आराम से कहीं बैठ जाओ, कहीं विदेश में निकल जाओ, वहाँ झोपड़ी
- 1:02:56बना लेना निश्चित ही मैं स्टेम्प लगाता हूँ कि परमात्मा है और मुझे
- 1:03:09तुम कहाँ बैठे हो ये पता नहीं। यह बात कहने में मुझे मिलेगा कुछ
- 1:03:19और तुम भी जानते हो अच्छी तरह से कि मुझे मिलेगा कुछ नहीं, लेकिन
- 1:03:25मुझे एक संतोष मिलेगा कि कम से कम मैंने गुमराहनी की।
- 1:03:33ये बहुत बड़ा संतोष है, मैं जो जानता था जैसा जानता था स्पष्ट
- 1:03:38होना निर्मल रूप से आपके सामने आईने की त्रिश कर दिया, यह मेरी
- 1:03:46खुशी का सबब है तुम जीस खुशी की तलाश में भर रहे हो।
- 1:03:54मानव वो आपको मिले नहीं। आप चाहे ये सोच हो कि हमें मिल
- 1:03:58गई, लेकिन मिली नहीं। मैं ये जानता हूँ अन्यथा तुम खंडन
- 1:04:04करते सिर्फ उसका और बाकी का वक्त तुम जख न मारते।
- 1:04:10बाकी का वक्त उस रस को पीते। हम भी तो गुजार रहे हैं भक्त
- 1:04:15चौबीसो घंटे में मात्र कभी कभी एक 2 घंटे हम दीक्षा में गुजारते
- 1:04:21हैं, बाकी चौबीसो घंटे क्या होता है?
- 1:04:27सदा दिवाली सादकी और आठों पहर आनंद।
- 1:04:33हमारी दिवाली सदा ये तुम्हारे 1 दिन आई हमारी होली सदा ये
- 1:04:38तुम्हारी 1 दिन आई हमारा आठों बहर आनंद में भी जाता है तुम्हारा एक
- 1:04:46दो घड़ी। नींद में बीत जाती है, उससे तुम
- 1:04:49बड़ा हो जाते हो, तुम मान कमा लेते हो, तुम नाम कमा लेते हो
- 1:04:55लेकिन बड़ा महंगा दाम है। ये उस रस की कीमत इतनी सी नहीं
- 1:05:02होती जितनी तुम्हें मिल रही है रस की कीमत।
- 1:05:07बहुत विराट होती है, उस विराट के बराबर होती है ऐसा समझलो निश्चित
- 1:05:16है। उसके आकार, प्रकार विराटता को
- 1:05:18देखकर तुम्हारा मन ऐसे नहीं तो वैसे ही तर करेगा इतने बड़े विराट
- 1:05:24का मालिक बनाने वाला। कोई कैसे हो सकता है?
- 1:05:29लेकिन फिर भी हमने देखा है इस चीज़ से ही बात हम कह सकते हैं।
- 1:05:44हमने देखा है। तुम सच्च हो, तुमने देखा पर हमने
- 1:05:55देखा उसके लक्षण ठहरा। एक व्यक्ति 13 वर्ष घर से बाहर ना
- 1:06:07निकले। उसकी कोई टाँगड़ी वांहड़ी वो टूटी
- 1:06:10नहीं सब सही सलाम सारे बुर्जे सही हैं मेरे परसों सारे शस्त्र सही
- 1:06:22हैं मेरे? दांत हैं खा सकता हूँ क्यों नहीं
- 1:06:29खाता क्या पेट नहीं बचाता? मैंने कहा मेरे सारे शस्त्र सही
- 1:06:35हैं, सही रक्त बनता है, सही रक्त बनता है सब बनता है सब कुछ।
- 1:06:42फिर बाहर बस यही लक्षण है उस रस के जब रस तुम्हें अपने भीतर से
- 1:06:51मिल जाएगा, तुम मूवी देखने क्यों जाओ जब रस तुम्हें तुम्हारे भीतर
- 1:06:58से मिल जाएगा तुम स्वादिष्ट पदार्थों को खाने।
- 1:07:01बाजार में किसी रेहड़ी के ऊपर कुपड़े मिले, किसी दुकान के ऊपर
- 1:07:07कोई चटपटी चरपरी चीज़ खाते क्यों मरे?
- 1:07:16इसलिए साफ है कि मिलान है गहरे गहरे गहरे गहरे उतरते जाओगे।
- 1:07:25तो संकल्प गहरा होता जाएगा। लेकिन तुम्हें ये सिखाए तुम बस
- 1:07:33ऐसा ही करते रहोगे और कभी पर न सको।
- 1:07:42इसलिए मैं अक्सर बोल देता हूँ कि बी के धर्म में आज तो अच्छा है,
- 1:07:49अंजाम खुदा जाने खुदा जाने का मंत्र मिलेगा नहीं, क्योंकि सिर्फ
- 1:07:58अगर तुम अटके ही रहे। वहीं जो कल एक देवी का मेरे पास
- 1:08:03कमेंट आया कि मेरे घर वाले को आपने उतार दिया, आप कहते हो शराब
- 1:08:09पी लेना चाहिए, पता चले कि नशा भी होता है, खंवारी चढ़ती है तभी
- 1:08:16परमखमारी की तरफ। खोज बढ़ेगी ना खोज का तुमने
- 1:08:26शुरुआत सूत्र नहीं पिया तो बड़े आनंद का तुम रस जान के सिखाओगे के
- 1:08:33होता है के नहीं होता है? तुम कहोगे रस ही नहीं होता है,
- 1:08:37बात खत्म हो गई। मैंने तो ये कहा था मैंने ये
- 1:08:42थोड़ा कहा था की पीते ही रहना, पीते रहना नहीं भाई एक पौड़ी के
- 1:08:49ऊपर सीढ़ी के ऊपर पांव रख दिया, वो छोड़ भी देना दूसरी भी है,
- 1:08:53तीसरी भी है चौथी। आखिरी पौड़ी तक, जब तक तुम छत पर
- 1:08:58न पहुँच जाओ, ये सारी सीढ़ियों उसके लिए बनाई हैं छत पर जाने के
- 1:09:03लिए। चरै वैती।
- 1:09:16छोड़ते जाओ, सीढ़ियों नापते जाओ और 1 दिन मंजिल पे पहुँच जाओगे छत
- 1:09:23पे पहुँच जाओ तन।