Latest / Baba ji Vijay Vats / “जिसने पा लिया, वह मौन हो गया”: अतृप्त इच्छाओं के कोलाहल से मुक्ति पाने का मार्ग!
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- 0:10बाबा जी, प्रणब, कौशिल्या देवी लौसी का प्रसिद्ध वचन जिसने पा
- 0:28लिया वह मौन हो गया। इसका गहरा रहस्यत्मक अर्थ गहरा
- 0:42बाबा जिसने पा लिया वह मौन हो गया क्योंकि वह परम मून के पास
- 0:58पहुंचे। परमोन के पास पहुँचकर जैसे तुम
- 1:08फूल के करीब पहुँचो सुगंधा आना स्वभाविक है।
- 1:16क्योंकि फूल के पास सुगंध होती है, परमात्मा के पास शोर नहीं
- 1:28परमात्मा पर मौन में जिसने पा लिया।
- 1:35वह मौन हो गया, पर मौन के पास पहुँच कर तुम मौन ही तो हो जाओगे,
- 1:49शोर में पहुँच कर जैसे तुम कान बंद कर लेते हो।
- 1:56बहुत ज्यादा ज्यादा देसी बल हो, तुम तुम्हें शोर सुहाटन, लेकिन
- 2:10शांति कितनी भी गहरी हो। वह तुम्हें इरिटेट नहीं करते।
- 2:20कोलाहल अगर बहुत ज्यादा हो तो तुम्हें इरिटेशन होगी।
- 2:30तुम गानों को बंद कर रहो। तुम कहोगी यह शोर मुझे अच्छा नहीं
- 2:37लगता सुहाटन लेकिन परमात्मा के पास इतनी शांति है इतना परमून है?
- 2:52और उस पर मोहन के पास जाकर ज़रा भी तकलीफ नहीं मची।
- 2:58एक तरफ अति का शोर मैं तुमसे सहन नहीं होता और जब अपने अंत में
- 3:07जाओगे। तो अति की शांति, अति का शोर और
- 3:14उसको तुम आराम से बर्दाश्त करोगे बल्कि प्रसन्न भी हो।
- 3:26जो उसके पास पहुँच गया वह पर मौन है।
- 3:34पर मौन के पास पहुँच कर तो मौन हो जाओ जैसे तुमने देखा आइस फैक्टरी
- 3:43के अंदर जाके बाहर कितनी भी गर्मी पड़ रही हो।
- 3:52जब तुम आइस फैक्टरी के मित्र प्रवेश करोगे तो तुम्हें ठंडी
- 3:59रहेंगी। क्यों यहाँ टेम्परेचर शून्य से कम
- 4:06है? -4 डिग्री के ऊपर बर्फ़ जमती है
- 4:18और तुम उस स्थल पे पहुँच गए जहाँ टेम्परेचर माइनस में है, तो
- 4:27निश्चित ही बाहर कितनी भी गर्मी हो।
- 4:30आग पढ़ रहे हो तुम्हें ठंडक लगी बस ऐसा ही है, बाहर कष्ट हैं कलश।
- 4:49चिंताएं हैं चिंता की अग्नि है चित्ता है जलाती है बाहर सूरज की
- 5:01तपता है सूरज अपने चर्म उत्कर्ष पे।
- 5:07दोपहरी की वेला है रेगिस्तान में तुम उछलते हो बालू भी गर्म है आग
- 5:15उगल रहा है उगल रहा है उससे उसके ऊपर तुम्हें चला नहीं जाता और तुम
- 5:24कोई वृक्ष की छैयां ढूँढ़ते हो। जैसी संगता वैसी रंगत अगर संसार
- 5:48के तापेड़ों में चलो गए, तो साँझ ढलते ढलते।
- 5:57कितनी छपते पड़ेंगी तुम दिल दिमाग तुम्हारा, जलने लगेगा कभी प्यास
- 6:13लगेंगी, कभी छाया ढूंढोगे। पांव धरती के ऊपर बालू उबल रहा
- 6:25है, ऊपर दुपहरी का सूरज आग उगल रहा है।
- 6:37क्या होगे कहाँ संसार का स्वभाव ऐसा ही?
- 6:49और तुम्हारे अंतः का स्वभाव भी ऐसा है अब तुम बाहर जाओगे तो
- 7:02लोगों के थपेड़े खाओगे और अब तुम भीतर आओगे तो ठंडी ठंडी आइस।
- 7:12ठंडी ठंडी आई -4 डिग्री बस ऐसा ही तो हो थोड़ा सा बाहर आये बुद्धि
- 7:25के तल्प वहाँ तो आ गए। वासनाओं की आग, त्रिक्षणाओं की
- 7:34आग, अतिरिक्त इच्छाओं की आग, तुम कुछ और बनना चाहते थे, प्रकृति ने
- 7:46तुम्हें कुछ और बना दिया। इसका आक्रोश दिल जलता है।
- 7:57मैं क्यों नहीं उत्तीर्ण हो पाया? मैं क्यों नहीं उत्तीर्ण हो पाई
- 8:05यह दर्द? तुम्हें सताता है लहू लुहान हो गए
- 8:10तुम कांटे छिदते हैं तमन्नाएं तुम्हारी टूटती हैं लेकिन ध्यान
- 8:24रखना, पुत्र। अगर चले हो गुलाब के फूल तोड़ तो
- 8:36कांटे भी हैं, उन कांटों में भी हाथ जा सकता है संसार ऐसा ही।
- 8:53फूल की महक लेने चली हो, फूल को तोड़ने चली हो तो इतना प्यारा फूल
- 9:04प्रकृति ने उसकी सेफ्टी के लिए कांटे लगा दी।
- 9:12उसका भी अपना जीवन है, ये तुमने कभी सोचा नहीं?
- 9:23उसने भी जीना है और उसकी जंदगानी चाहे एक ही दिन की हो।
- 9:29लेकिन यह 1 दिन की ही जिंदगानी सुफ्फिसिएंट है उसके लिए तुम अगर
- 9:37उससे 1 दिन की जिंदगानी भी छीन लोगे तो उसका सब कुछ छीन गया और
- 9:44तुम्हें कुछ मिला नहीं। इसलिए प्रकृति उसके आस पास कांटे
- 9:49लगा देती है। तो यहाँ तुम्हारे हाथों में कांटे
- 9:56भी छुपेंगे और अगर किसी तरह तुम्हें गुलाब का वो फूल हासिल भी
- 10:06हो गया। तो भी पाप तुम्हारी शर्म मटा
- 10:11जाएगा क्योंकि तुमने हस्ती खेलती जिंदगानी एक ही तो दिन के लिए
- 10:18बेचारा खेला तुमने हस्ती खेलती जिंदगानी।
- 10:25को नेस्तनाबूद कर दिया और तुम्हें पता भी नहीं होगा कि फूल को
- 10:34तोड़ना जुर्म होता है। मना नहीं होता है, जुर्म होता है,
- 10:41पार्क होता है क्योंकि वह भी एक जन।
- 10:49तुम जिंदगी में बहुत से ऐसे कर्म कर लेते हो जिससे किसी का जीवन
- 10:59चला जाता है अपनी जीव के स्वाद के लिए।
- 11:10तुम बकरों की बलि दे देते हो, मेमनों की बलि देते थे, मुर्गे की
- 11:18बलि दे देते हो अपनी जीव के स्वाद के लिए।
- 11:29तुम ये नहीं देखते, तुम्हारे कोई चुटकी भरे तो दर्द होगा और तुम
- 11:39दूसरे की गर्दन के ऊपर कलमा पड़ो और दर्द उसे भी होगा क्योंकि भीतर
- 11:47की। पर नाली तो वही है, लेकिन तुम फिर
- 11:54भी करते हो और करती भी हो और तुम तुम्हारे दिमाग के ऊपर कोई किसी
- 12:05तरह का। प्रायश्चित का भाव भी नहीं होता
- 12:11कि हाँ, मैंने गलत कर दिया। मैंने एक हस्ती खिलती जंदगानी दो
- 12:211 दिन के लिए मिली थी उसे और काफी थी।
- 12:26तुम्हारे लिए तो 100 साल की ज़िन्दगी भी काफी नहीं होती, तुम
- 12:32तो कहते हो थोड़ा और छी लूँ लेकिन गुलाब कभी नहीं चाहता थोड़ा और छी
- 12:42लूँ बस गुलाब ये चाहता है। कि मैं जितना जीवन मिला, 1 दिन के
- 12:48लिए जीरो और बड़ी प्रखरता से जीता है, बड़ा नाचता है।
- 13:00इन बर्फीली सजाओं में और माह का बरसाता है।
- 13:07तुम्हारे लिए एकन तुम उसका बात कर देते हो और तुम सोचते भी नहीं कि
- 13:23हम कैसे कैसे पाप कर देते हैं। कोई तुझसे फूलों की बलि नहीं
- 13:38होता, फूल जहाँ खिलते हैं वहीं खेले रहने में तुम्हें क्या तकलीफ
- 13:46है प्रभु के चरणों में पहले से ही हैं वो।
- 13:52कोई मिट्टी की मूर्ति के ऊपर अगर पुष्प अर्पित कर दोगे उससे कोई
- 13:56फर्क नहीं वरना तुमने उसके उसके मूल उदगम से तोड़ लिया और पत्थर
- 14:04की मूर्ति के ऊपर चढ़ा दिया। मैं यहाँ रोज़ कहता हूँ शीशों को।
- 14:11के फूल तोड़ के मत लाया करो एक पूरी ज़िन्दगी तोड़ कर तुम मेरे
- 14:18पांव में रख देते हो। मुझे दुख होता है लेकिन फिर भी ले
- 14:25के आते हो अजब वो मुड़ता है। किसी की जिंदगी बर्बाद करना और
- 14:41तुम्हारे ऊपर ज़रा भी उसका अगम नहीं ना ही तुम प्रयासित करते हो
- 14:49लेकिन एक बात तो मैं समझाती। कुछ चीजें यहीं लोग तुम्हें लुटा
- 14:57देते हैं जो तुम करते हो एक्शन रिएक्शन के रूप में लेकिन सभी
- 15:04चीजें तुम यहाँ भुगत नहीं पाते। कभी तुम इतना बड़ा अवकार कर देते
- 15:11हो। कि उस उपकार का कोई मूड नहीं
- 15:14होता। आदमी नहीं चुका सकता फिर उसकी
- 15:19दरगाह चुकाते वह सब चुकता कर देता है।
- 15:26ये सब कभी तुम इतना बड़ा पाप कर देते हो।
- 15:31कि हमारे न्यायालय के पास सबूत नहीं होता और वो सबूतों के अभाव
- 15:37में तुम्हें बरी कर देता है। तो फिर लेखा जोखा उसके दरबार में
- 15:49होता है। असर तो लेखा जोखा उसके दरबार में
- 15:52होता है। चंगियाइयां बुर्यांयां वाछ
- 15:59तरमहदुर चंगियाइयां बुर्यां वाछ तरमहदुर।
- 16:10कर्मी आपको अपनी के निर्णय कर कोई जल्दी कोई देरी प्रोसेसिंग के
- 16:19हिसाब से हर बीज फलता है और तुम्हें उसका फल मिलता है जरूरी
- 16:28नहीं है। कि तुम्हारी यहाँ की आदालते या
- 16:32तुम्हारी यहाँ के लोग ही तुम्हें उसका फल अवश्य यह जो जन्मजात कष्ट
- 16:44को साथ लेकर बच्चे जान जाते हैं। तुम इसकी कभी विश्लेषण नहीं कर
- 16:54सकोगे। इसका विश्लेषण तो सिर्फ संत ही कर
- 17:01सकता है जो अपने पिछले जन्मों में झांक लेता है।
- 17:09वह फिर रोश नहीं करता, वह शोक नहीं करता।
- 17:15वह कहता है ठीक है, इसने कुछ किया था।
- 17:21प्रकृति मूर्ख नहीं बड़ी समझता है।
- 17:25ऐसी शानदार संग रचना उसने बनाई कि वैज्ञानिक देखकर हैरान है।
- 17:36इतनी बारीकी से गढ़ा उसने हर चीज़ को कायनात की रग रग में उसने ऐसा
- 17:44धागा पिरोया। कि वैज्ञानिक हैरान हैं, ऐसी
- 17:51शानदार संरक्षण मनुष्य नहीं बना सकता, लेकिन वह बनाने वाले ने बना
- 18:00लिया। तुम तो खोज भी नहीं सकते जीसको वह
- 18:03बना देता है। चाँद, तारे सूरज जलता हुआ सूरज
- 18:101,00,00,000 डिग्री सेल्सियस तापमान है उसकी इन्नर सर्फेस का
- 18:17ज़रा देखिए वो हाथ कैसे होंगे जिन्होंने स्टीक स्थान पर उसे।
- 18:28प्रतिष्ठित किया वो जले नहीं होंगे।
- 18:35इसलिए कृष्ण कहते हैं, नैनम दहती पांव का आग जला नहीं सकती।
- 18:45वह वही शक्ति है जिसे आग जला नहीं सकती।
- 18:50वो जलता हुआ सूरज सही स्थान पर 15,60,00,000 माइल्स आवे।
- 19:02फ्रम अर्थ बिलकुल एक्यूरेट दूरी है।
- 19:09अगर थोड़ा करीब हो जाए तो मुश्किल हो जाए।
- 19:13अगर थोड़ा दूर हो जाए तो मुश्किल हो जाए।
- 19:17लेकिन उसकी जो। धरती की प्रणाली बनाई वो अंडाकार
- 19:23बनाई ऋतु में बदलतीं थोड़ा नजदीक भी आता है सूरज थोड़ा दूर भी जाता
- 19:30है सूरज लेकिन यह सब उसकी संरचना है ताकि तुम छः ऋतुओं का आनंद उठा
- 19:37सको। तुम्हारे आनंद के लिए परमात्मा ने
- 19:40क्या कुछ नहीं किया लेकिन फिर भी तुम कमी निकाल देते।
- 19:56तुम कुछ न कुछ कमी निकालते रहते हो जैसे कि तुम उससे ज्यादा
- 20:01समयदार। मेरी एक बात को लिख लेना हृदय पटर
- 20:11अगर तुम्हारी साथ जिंदगी में कुछ अनहोनी हो जाए यानी तुम्हारी
- 20:17अपेक्षाओं से विरुद्ध हो जाए। तो उसे तत क्षण स्वीकार कर लेना,
- 20:24क्योंकि जिसने ऐसा किया वो तुमसे ज्यादा बुद्धिमान है।
- 20:30उसने तुम्हारा भला सोचा अगर वो भला न सोचता तो फिर तुम्हारे
- 20:37हिसाब से करता। तुम सदा ही ये कहते हो कि मेरे
- 20:42हिसाब से हो जाए, तुम्हें पता नहीं अगर तुम्हारे हिसाब से
- 20:48परमात्मा सब कुछ करने लगी तो तुम्हारी जनदगानी उबलता हुआ नर्क
- 20:53हो जाएगी, क्योंकि तुम्हारी बुद्धि की औकात कितनी है?
- 21:02तुम्हारे हाथ कितने हैं? और उसके वृहद हाथ देखो जिसने
- 21:101,00,00,000 सेल्सियस का सूरज। सही जगह के ऊपर बिना किसी लैंडर
- 21:19के प्रतिस्थापित कर तुम ज्यादा अपने आप को समझदार समझता हो नहीं,
- 21:30यही मैं तुमसे कहता हूँ। वह जो करता है उसे स्वीकार कर
- 21:37लें, क्योंकि वह कभी भी तुम्हारे बुरे के लिए नहीं करता।
- 21:46भला पिता अपने बच्चे के लिए कभी बुरा सोचेगा, माँ बाप अपने बच्चे
- 21:53की रक्षा करेंगे। बुरे के लिए कभी सोचा है किसी माँ
- 21:58बाप ने नहीं सोचा तो तुम उसके ऊपर आक्षेप लगाकर उसकी तोहिन करते हो।
- 22:09तुम यह जताते हो कि तुम ज्यादा समीदार हो।
- 22:13तुम्हारे माता पिता से यही तुम्हारी मोड़ता है और यही संत
- 22:21कहते हैं कि जो वह करता है उसे स्वीकार कर ले, क्योंकि वह ज्यादा
- 22:30बुद्धिमान है। तुमने जिसे खोजा नहीं उसने वह बना
- 22:38दिया, तुम अपनी औकात तो देखो तुम उसके किए के ऊपर गलतियाँ मत
- 22:49निकालो। उससे बढ़िया चित्रकार और कोई नहीं
- 22:59इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ तुम्हें अच्छा लगे या बुरा लगे अपनी परवाह
- 23:07छोड़कर जो हो गया। उसे सहज मन से पूर्ण स्वीकृति से
- 23:18स्वीकार कर ले। फ्रम दी इन्नर फ़ॉर ऑफ इनर हार्ट
- 23:24तशरीम कर ले। उसे इसमें तेरा भला है क्योंकि
- 23:31उसने जो किया है। तुम्हारे वाले के लिए किया है।
- 23:37तुम जो करोगे उससे तुम्हारा हित नहीं होगा, तुम्हारे करने से
- 23:42तुम्हारा अहित ही होगा। तुम्हारी बुद्धि की क्षमता कितनी
- 23:50और तुम उस महत? एक्सिस्टेंस को वह न दे रहे,
- 23:58शिकायत कर रहे के प्रभु ये तो तुने ठीक नहीं की भरा तुम ज्यादा
- 24:06समयदार हो नहीं, संत सदा यही कहते हैं।
- 24:13शिकायत मत करना क्योंकि तुम्हारी शिकायत कोई मायने नहीं रखती।
- 24:19तुम्हारी शिकायत तुम्हारे ही विपरीत पड़े।
- 24:23अगर परमात्मा तुम्हारी शिकायत को कहीं सुन लें तो तुम्हारा जीवन न
- 24:28रखा हो जायेगा। वह समयदार है, वह तुम्हारी
- 24:34शिकायतों को सुनता नहीं। वह तुम्हारी अरदासों को भी नहीं
- 24:38सुनता। तुम्हारी गलतफहमियाँ हैं अगर
- 24:43तुम्हारी अरदासों को परमात्मा सुन ले तो तुम कुम्भी पाक नर्क में
- 24:48पाओगे अपने आप को क्योंकि तुम्हारी अर्धासें ही ऐसी।
- 25:01नेपाल में सातवीं शताब्दी से 605 से लेकर 621 तक शायद जहाँ तक मेरी
- 25:09स्मृति काम करती, एक महासमन्त थे। शिवदेव नामक राजा के।
- 25:19शिवदेव अक्सर बीमार रहा करता था। कामकाज सारा मेरा नाम उस जीवन में
- 25:28अशोभार बन था। सारा कामकाज में देखा करता था तो
- 25:36मेरे कामकाज से प्रसन्न होकर शिवदेव कहने लगे।
- 25:40मैं बीमार ही रहता हूँ, तुम बढ़िया से समय रहते हो, इसलिए तुम
- 25:49ही शासन व्यवस्था समय लो मुझे। अर्थ इजाजत दो कि मैं सन्नस्त हो
- 26:07जाऊं तो मैंने कहा ठीक आपकी मर्ज़ी बैठे रहोगे तो अभी मैं
- 26:14चलाऊंगा। संन्य सो जाओगे तो फिर मैं चलूँगा
- 26:21605 से पहले भी मैं चलाता था, लेकिन शिवदेव अक्सर बीमार रहे थे।
- 26:29उन्हें फेफड़ों की तकलीफ थी। उनको स्वास्थ्य ठीक नहीं आते थे।
- 26:37ठीक से चल फिर नहीं सकते थे। बोलते हुए तो हंसते थे तो शिवदेव
- 26:47ने महम सामंत से मुझे राजा घोषित कर दिया।
- 26:52राजगद्दी के ऊपर तिलक थी 605 से 621 तक जहाँ तक मेरी स्मृति काम
- 27:04करती, 1617 वर्ष मैंने नेपाल पे राज़ की।
- 27:14और यह राज़ उस वक्त का गोल्डन स्पैरो माना जाता है।
- 27:20स्वर्णिम काल क्योंकि ऐसी शानदार व्यवस्था थी।
- 27:30उस संयोजक ने शुरू से ही मेरे भीतर ऐसा यंत्र नहीं डाला जो लोभ
- 27:41का यंत्र होता है। लोभ मैंने कभी नहीं किया।
- 27:46अपने अगर मैं 15 जन्म भी देख तो लोभ नहीं, मैंने ज्यादा किया
- 27:52थोड़ा बहुत बस जीवन को चलन नहीं दे और यूं ही कोई एकदम से व्यक्ति
- 28:03उस परमरास के पास नहीं पहुँचता। मुद्दतें लग जाती हैं।
- 28:08धीरे धीरे धीरे धीरे चेतना का विकास होता है।
- 28:14ऐसे बहुत से जनमों में लगातार लोभहीनता की अवस्था में मैं राजा
- 28:21भी बना गरीबीवीआई बैरिस्टर होते हुए पिछले जन्म में मेरे पिता और
- 28:36मेरे दादा दोनों ही दीवान थे अंग्रेजों के राज़।
- 28:42और दीवान का पद मुख्यमंत्री के पर प्रबंध है।
- 28:48लेकिन फिर भी करुणा थी बैरिस्टर का, वो काला कोट पैंट उतार दिया,
- 29:01टाई उतार दी, मोजा उतार दिया। निकल पड़ा।
- 29:05एक धोती में लंगोट में समझता हूँ सर्दी की ठंडी रातों में मैं वो
- 29:14ही पहने पहने घूमता हूँ, इसीलिए नहीं के लोग मुझे सम्मान है।
- 29:26सलमान की कामना कभी नहीं की। ये बहुत सी चीजें हैं जो व्यक्ति
- 29:32को उस परमरस तक पहुंचाती है। यक्ष्ना कोई एक दम से उस परमरस को
- 29:39चखता नहीं, मुझे रोज़ छोड़ना जाती है, मैसेज आ जाती है बाबा।
- 29:46अपने चरणों में कब लाओगे? बस यही तुम्हारी कवच मैं तुम्हें
- 29:54कहता हूँ जब घटना होगी हो जाएगी तुम धीरज मत गंवा देना, धीरज
- 30:02गंवाया तो चौंक जाओ क्या? और उसके आने का इंतजार भी मत खो
- 30:10देना, इंतजार भी बराबर रखना। 1 दिन वह आए और धीरज भी मत गंवाना
- 30:18के वह आया क्यों नहीं अगर यह दो तुम्हारे में काबिलियत हैं?
- 30:24तो एक ना 1 दिन वह आएगा वह परमरस का बैला बरसेगा तो 1605 से 1601
- 30:41क्षमा करना 605 से 621 तक। हालांकि मैं लक्ष्मी वंश का नहीं
- 30:51और शिवदत्त लक्ष्मी वंश के थे फिर भी उन्होंने मुझे राजगति दी थी।
- 31:01राजा भी था, उसके बाद अनेको जनम मैंने देखा।
- 31:06लेकिन उन जन्मों में मैंने लोग की ज़रा भी तमन्ना नहीं ज़रा देखिए
- 31:13अपने आपको उस स्थिति में लाकर समझिए, तुम्हें गद्दी मिल सकती
- 31:20है। तुम्हारी जय जयकार है हर तरफ।
- 31:27और तुम अपना कोट पैंट डालकर गद्दी पर बैठ सकते हो।
- 31:31महात्मा गाँधी के कर सकते थे और अभी इतने बूढ़े भी नहीं हुए थे,
- 31:40आराम से बैठ सकते थे। जो व्यक्ति 1,00,000 किलोमीटर तक
- 31:44पैदल चल सकता है, वह बैठ तो सकता ही है, लेकिन फिर भी लोभ न होने
- 31:53के कारण साबरमती ही अच्छा लगा। लोगों की बातों को कभी हृदय में
- 32:05मत लेके आना कानों में तो आएँगे सोने का तुम्हें लेकिन हृदय में
- 32:12मत उतारना यही भगवान शंकर का नीलकंठ होना तुम्हें समझता है।
- 32:20के लोगों ने तो बहुत कुछ तुम कितना ही कर तुम्हारे कानो में से
- 32:27तुम्हारे भीतर बस गले तक ही रह जाए नीलकंठ हो जाओ जहर जो बोला
- 32:34लोगों ने वह तुम्हारे गले तक रह जाए हृदय में ना उतरे।
- 32:41और हृदय में उतर गया तो तुम दूषित हो जाओगे तो गाँधी भी रहा, आज भी
- 32:50हूँ लोभ की तो आज भी चरानी जो कर रहे हैं ये जहाँ बैठा हूँ।
- 32:58नहीं मेरे पास तो ₹1 भी नहीं थे ये सब आपने बनाया सब आपने बनाया
- 33:09अपने लिए बनाया और मैं अच्छी तरह से जानता हूँ ना मैं लेके जाऊंगा
- 33:15ना मेरे। पहले बुजुर्ग कुछ लेके गए और नहीं
- 33:20मेरे बाद वाले कुछ लेके जाएंगे सब खाली हाथ सब खाली हाथ जाएंगे
- 33:27बखूबी मैं जानता हूँ तुम्हारे अंतस को एक रस की जरूरत है।
- 33:36बस इसी रस की खोज में वह दर दर भटकता है।
- 33:43वासना के हर द्वार दरवाजे वो खटकाता है भोगता है, लेकिन मिलता
- 33:50नहीं। तुमने वासनाओं के कौन से दरवाजे
- 33:55नहीं खटखटाए, बताओ लेकिन कहीं कुछ पाया, धन के अम्बार लगा दिया,
- 34:04सोने के अम्बार लगा दिए, राजा भी बने, चक्रवर्ती राजा भी बने।
- 34:11छोटे देश के भी बने बड़े देश के भी बने लेकिन कभी वो रसपिया
- 34:20गद्दियों में वो रस होता है। लोग तुम्हारे चरण धो धो के पानी
- 34:25पी लेंगे उससे तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 34:31तुम्हें मान सम्मान देंगे, उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हें,
- 34:40तुम गद्दी नसीन हो जाओ, लेकिन जब उतरोगे तो पाओगे, हाथ मलते रह
- 34:48जाओ, कुछ नहीं होगा। यहाँ कुछ मिलता है भी नहीं।
- 34:56यहाँ मिलता है सिर्फ भ्रम और भ्रम के सपने, जो सदा ही टूटते आए हैं,
- 35:04सभी के टूटते आए हैं, सभी के टूटते रहे हैं।
- 35:09और सभी के टूट जाएंगे ये महज तुम्हारे ख्यालात की अगर मैं इस
- 35:19संसार से चला गया तो फिर कौन करे तुम गलती में हो वो वृहद हाथ
- 35:26जिन्होंने संग रचना की? वह सब संभाल रहा।
- 35:33यद्यपि तुम एक्स्ट्रा संभालने की थी स्टमिशन तुमने हो के तो भी वो
- 35:41बखूबी संभालेगा और तुमसे बढ़िया संभालेंगा।
- 35:47कोई भी तेरी राह ना देखे नैन बिछाये ना कोई कोई भी तेरी राह ना
- 36:04देखे। नैन बीजाये ना कोई दर्द से तेरे
- 36:15कोई ना तड़पा दर्द से तेरे कोई ना तड़पा।
- 36:25आँख किसी की ना रोई आँख किसी की, ना रोई, कहे किसको तू मेरा
- 36:41मुसाफिर? जाएगा कहाँ वहाँ कौन है तेरा
- 36:52मुसाफिर जाएगा कहाँ दम ले ले दो घड़ी।
- 37:02छिया आएगा कहाँ वहाँ कौन है तेरा मुसाफिर, तुने तो सबको?
- 37:19राह दिखाई तू अपनी मंजिल क्यों भुला तुने तो सबको राह बताई तुने
- 37:35तो सबको। राह बताई तू अपनी मंजिल क्यों
- 37:44भूला सुलझा के राजा औरों की उलझन सुलझा के राजा।
- 37:56औरों की उलझन क्यों? कच्चे धागों में झूला क्यों कच्चे
- 38:05धागों में झूला क्यों नाचे सफेरा मुसाफिर?
- 38:16जाएगा कहाँ वह कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहाँ दम ले ले दो
- 38:30घड़ी ये छिया। पायेगा का?
- 38:39कहते हैं ज्ञानी दुनिया है फानी कहते हैं ज्ञानी दुनिया है फानी।
- 38:52पानी पे लिखी लिखाई है सबको देखी है सबकी जानी है सबकी देखी है
- 39:07सबकी जानी है सबकी देखी। है सबकी जानी हाथ किसी के न आई
- 39:21हाथ किसी के न आई तेरा, न मेरा कुछ गिरा न मेरा।
- 39:33मुसाफिर जाएगा कहाँ दम ले ले दो घड़ी ये छिंया पायेगा कहाँ वहाँ
- 39:49कौन है तेरा? मुसाफिर जाएगा कहाँ बीत गए दिन
- 40:00प्यारी के पलछन बीत गए दिन प्यारी के पलछन।
- 40:09सपना बनी वराते भूल गए, वो भूल गए, वो भूल गए वो तू भी भुला दे।
- 40:26प्यार की वो मुलाकातें, प्यारी की वो मुलाकातें, सब दूर अँधेरा, सब
- 40:40दूर अँधेरा मुसाफिर। जाएगा कहाँ बल दम ले ले दो घड़ी
- 40:53ये छिंया आएगा कहाँ वहाँ कौन है तेरा मुसाफिर?
- 41:05जाएगा। कहा ये तुम्हारा भ्रम है कि मैं
- 41:13चला जाऊंगा, तो फिर कौन होगा? यही तो भ्रम और एक मात्र भ्रम मैं
- 41:22हूँ तो हूँ। तुम्हें पता नहीं तू चला जाएगा तो
- 41:29तेरे से अच्छा आएगा, तू ही तो है जड़ दुखों की जड़ अकेला अकेला भोग
- 41:39ले दूसरों को काहे तम करता है? कोई भी तेरी कोई भी तेरी राह ना
- 41:55देखे, नैन भी छाये न कोई। तुझे भ्रम है सब अगर मैं चला
- 42:05जाऊंगा तो नैन बचाकर लोग फल की झुकाकर तेरा इंतजार करेंगे।
- 42:11नहीं नहीं, तू गलती में है, बल्कि तेरा होना ही।
- 42:21इस धारा पर कष्टकारी है, तेरे लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी।
- 42:29महात्मा बुद्ध ने कहा महात्मा बुद्ध का नाम तथ आगत रखा है।
- 42:38यानी पता ही नहीं चला उस व्यक्ति का।
- 42:42वह कब आया और कब चलाता? लेकिन लोग यहाँ आते हैं जो दिखाते
- 42:51हैं कि मैं हूँ। आज ऐसे ही लोगों का जमावड़ा है।
- 43:00जो अपने आप को दिखाना चाहते हैं कि मैं हूँ और सब वक्त के
- 43:05गर्दोगुबार में ढक जाएं, बिखर जाएंगे सिकंदर की तरह उनकी रेत की
- 43:18माटी के ऊपर तुम चलोगे। पांव से लटते हुए उसके शरीर की
- 43:22मर्जी और उसे पता भी न चलेगा वो कहाँ दफन है बहुत प्यारी कविता
- 43:33मुझे सदा याद आती है लेट में लाइव ऑन सीन अन्नोन।
- 43:40यह कोई पहुंचा हुआ खिलाड़ी लगता है।
- 43:45ऐसे शब्द उसी व्यक्ति के अंत से आया करते है।
- 43:51लेट मी लाइव ऑन सेन अननोन एंड अनले मेंट लेट मी डार्क।
- 44:00यहाँ तो राधे माँ कहती है कि मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे
- 44:04क्रिमिनेशन में मेरे अंतिम अरदास में 2,00,000 लोग।
- 44:162,00,000 लोगों के लिए इच्छा है मरने के बाद मूर्ख ऐसी इच्छा कर
- 44:27सकते हैं और मूर्ख ऐसी इच्छा तुम्हें दिखा सकते हैं मरने के
- 44:33बाद सच। मरने के बाद स्वर्ग मरने के बाद
- 44:40नरक ये मूर्खों की प्लानिंग है। योजनाएं हैं तुम्हें लूटने की,
- 44:48मरने के बाद कुछ नहीं। मरने के बाद तो अगला जन्म होता
- 44:53है, ना कोई सच खड्ड होता है, ना कोई सतलोक होता है।
- 44:59अगर इनकी बातों में खो गए तो तुम सदा के लिए खो जाओगे, तुम उस अवसर
- 45:06का इंतजार करना। जब कोई जीवित गुरु तुम्हारे सारे
- 45:09भ्रम तोड़ने के लिए आ जाए तो तुम उपस्थित हो जाना, अपने भ्रमों को
- 45:15तुड़वाने के लिए वह गन उठायेगा, तुम सिर नीचा कर देना वह तुम्हारा
- 45:21सिर तोड़ देगा तुम कहना बहुत अच्छा हुआ।
- 45:28सच्चे शिष्य की यही निशानी वो कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
- 45:39हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम तुम आह भी न।
- 45:47और सच्चा गुरु तुम्हारे हित के लिए गान उठाता उन्हें तुम से कोई
- 45:53वैर नहीं को तुम्हारी मान्यताओं को जो तुम्हें दुख का कारण बताती
- 45:59हैं, बनाती हैं उनको छोड़ते हैं तुम्हारे दुखों के लबादे को हटाते
- 46:05हैं क्या बुरा करते हैं। कुछ भी तो बुरा नहीं करते।
- 46:13सही बात तो ये है तो वो तुम्हें बुलाते भी नहीं तुम ही ढूंढ डाँट
- 46:20के उन्हें ढूंढ लेते हो और उनके पास शत हो।
- 46:26फिर कौन कहता है तुम अगर तुम इस अल्लवादे को जो तुम्हें दुख देता
- 46:33है इसे हटाने को मंशा नहीं है तुम्हारी अभी और दुख भोगने की
- 46:40इच्छा है तुम्हारी तुम मज़े से दुख होगा।
- 46:48गुरु नहीं कहता कि मैं तुम्हारे दुःख दूर कर दूंगा, मेरे पास खाओ
- 46:53नहीं तुम अगर दुखी हो कुआ कभी बुलाते है किसी को कि आखिर पानी
- 47:01पीलो नहीं कुआ। ये कहता है कि अगर तुम्हें प्यास
- 47:08लग गई तो मेरे पास पानी उपलब्धता है।
- 47:11बस इससे ज्यादा और कुछ और कुआं अपने स्थान से टस से मस नहीं
- 47:16होता। तुम ही अपने स्थान से चलकर कुआं
- 47:19के पास चल के अपनी प्यास सोचा। इतना भी लोभ अगर गुरू में हो के
- 47:27मेरे पास शीशों की कथा हो तो यह लोभ तो बहुत बड़ा है।
- 47:35यह लोग तो तुम्हारे गुरुत्त्व की अनंत कर देगा फिर तुम गुरु कहने
- 47:40के होके। गुरु कभी नहीं चाहेगा कि मेरे पास
- 47:47बहुत लंबी कतार वरना गुरु यही चाहेगा।
- 47:54मेरे पास जो भी आए वो प्यासा न जाए।
- 47:59लेकिन जो कोई नहीं आए उन्हें बनाएगा नहीं।
- 48:03उसे प्यास लगी नहीं और उसके आने का कोई फायदा भी नहीं क्योंकि
- 48:07जीसको प्यास लगी ही नहीं, उसको तुम पानी ऑफर करोगे, वह पी नहीं
- 48:13पाएगा, वह वैसे ही रखा रहेगा। तुम देखो घरों में जाते।
- 48:17सबसे पहले तुम्हें पानी की सौगात मिलती है ऑफर होता है और तुम बहुत
- 48:22जगह से पानी पी के आए हो। तुम कहते हो नहीं पानी नहीं
- 48:26पीऊंगा मैं तो चाय भी पानी सब कुछ पी के आया हूँ, ज़रा देखो जब
- 48:33तुम्हारी तमन्ना ही नहीं। तो तुम्हें पानी ऑफर करने का
- 48:37औचित्य क्या? गुरु कभी भी कभी भी देखिए कबीर
- 48:45कबीर की बात आज तुम सब करते हो, लेकिन उसके पास मुश्किल से 2030
- 48:52लोग आते थे, सुन नहीं कर दिया। इत्ते से ही होते थे और कित्ते से
- 49:02होते थे। नानक के पास कोई ज्यादा नहीं होते
- 49:06थे, बस एक मर्दा ना उनके साथ रहता था और जहाँ जाते वहाँ थोड़े थोड़े
- 49:13लोगों से जाके मिलते थे। ऐसा ही बुद्ध महावीर है क्या?
- 49:18कुछ ज्यादा लंबी कतारें 20501000 लोग साथ चलते मैं अकेला ही चला था
- 49:30जानबे मंजिल मगर मैं अकेला ही चला था जानबे मंजिल मगर।
- 49:39रोक साथ आते थे और कार्यवां बनता थे।
- 49:45उसने भी किसी को नहीं पका रहा था। सार्थनाथ का पहला प्रवचन उन्होंने
- 49:50पांच आदमी को किया। महावीर भी कुछ ज्यादा इकट्ठा नहीं
- 49:58किया था। लोग साथ साथ ए और कारवां बनता
- 50:05गया, जो कतार को ढूंढ़ता करे, जो भीड़ को ढूंढ़ता करे वो गुरु नहीं
- 50:14ये लक्षण गुरु जानता है। जब वह मिलेगा अकेलापन में मिलेगा,
- 50:22क्या वह की प्राप्ति केवल होने में मिलती है केवल की प्राप्ति
- 50:28केवल होने में मिलती है, तुम ही रह जाओ एक वह भीड़ में कभी नहीं
- 50:37मिलता। इसलिए भीड़ इकट्ठा करना तो भीड़
- 50:42इकट्ठा करने का कुछ मनसा और होता है।
- 50:47यह राजनीतिकों का डंक भीड़ इकट्ठा करेंगे तो राजा वश में रहेगा।
- 50:58भीड़ इकट्ठा करेंगे तो कल तो लोग आरती करके जेल हो जाएगी।
- 51:03पैरोल और पैरोल मिल जाएगा और थोड़ा बहुत रेशम चिढ़ा के बरी भी
- 51:10हो जा बस यही है कोई तमन्ना? वह सनाउ का समूह भरे हुए हैं।
- 51:19लोग संत कहलाने के हकदार नहीं संत कहलाने का हकदार आदमी नहीं बताया
- 51:32करता कौन है? यह अपने भीतर से आया करता है।
- 51:36जो संत हो गया वह आनंद की खुमार में अकेला बैठेगा।
- 51:46वह शिष्यों की कतार लेकर जाने की इच्छा नहीं करेगा।
- 51:50यद्यपि शिष्य से चले बात अलग इच्छा नहीं होगी, उसकी अकेला भी
- 51:56रह जाए तो कोई बात नहीं। ऐसा ही बुद्ध के साथ हुआ।
- 52:04अंगली मार एक आदमी की जरूरत थी उसे बाली लेने की वह आदमी को
- 52:11मारता, सिर काटता उसकी ऊँगली काटता।
- 52:14और गले में डाल देता। 999 उंगलियां हो गई थीं 1000 की,
- 52:20उसने सौगंध खाई थी, एक बाकी था, लोगों को पता था लोगों ने उस
- 52:28रस्ते से आना जाना बंद और भी कोई जाता तो उसे रोकते देखो भाई, उधर
- 52:33मत जाओ। वहाँ अगली माल है और उसको एक आदमी
- 52:37की जरूरत है कभी आखिरी व्यक्ति तुम ही न बन जाओ इत्तेफ़ाकन बुद्ध
- 52:46भी वहाँ से गुजरा तो वहाँ के लोगों ने बताया।
- 52:54बनते उधर से मत जाओ, इधर रास्ता है, थोड़ा दूरी से पड़ेगा, लेकिन
- 53:01इधर से जाओ क्यों कई इधर बड़ा खूंखार?
- 53:11हत्यारा रहता है अच्छा उसको एक व्यक्ति की जरूरत है।
- 53:18वो आदमी को मार देता है, वो आदमी को मार कर उसकी अंगुली काट लेता
- 53:24है, उसके पास कापा है एक। और गले में डाल लेता एक व्यक्ति
- 53:33की जरूरत है, उधर मत जाओ प्रभु तब उसने कहा फिर तो मेरी जरूरत है
- 53:44उससे अगर ऐसा है तो फिर तो मेरी जरूरत है उससे।
- 53:51फिर तो मुझे अवश्य ही जाना होगा और देखिए 50,000 की भीड़ में से
- 53:57एक व्यक्ति भी साथ नहीं चला। शिशु ने बहुत रोका लेकिन तथागत ने
- 54:05कहा, आप मुझे जाने दो। मेरी जरूरत है उससे मेरी ही जरूरत
- 54:15है और कोई और कोई उसको बदल भी नहीं पाएगा ही।
- 54:21वहाँ से ट्रांसफर में कर इनर ट्रांसफर में और कोई कर भी नहीं
- 54:27पाएगा। तो मुझे ही जाने दो तुम यहाँ और
- 54:33कोई पीछे आया भी नहीं, सब ने माथा पीट लिया, जान लिया क्या भैया बाप
- 54:41से नहीं आया गए? बुध तो गए तथा आदत जैसे आए थे
- 54:47वैसे ही गए। लेकिन बुद्ध तो सही सलामत लौटे और
- 54:55अगली माल ब्राह्मण हो गया। अगली माल पुराण रूप से स्वाम हो
- 55:01गया। यह अजूबा कैसे घटित हो?
- 55:09ने कहा, फिर तो मेरी जरूरत है, मुझे लोग कहते हैं यहाँ हत्यारे
- 55:15बैठे हैं, गद्दी नहीं, किसी को बोलने नहीं देते।
- 55:21मैंने कहा फिर तो मेरे बोलने की आवश्यकता है।
- 55:28अगर किसी को बोलने नहीं देते, जेलों में डाल देते, मार देते,
- 55:33कत्ल करवा देते, यह मैतशा है। ये अमित अजीत है।
- 55:47ये नरेंद्र मोदी है, ये हरदी पूरी है, ये मरवा देते हैं लोगों को और
- 55:56किसी को बोलने नहीं देते और सब डर रहे हैं तो मैंने कहा फिर मेरी
- 56:02आवश्यकता है। मैं जद भी भीतर बैठा हूँ, लेकिन
- 56:06मेरी आवाज़ जहाँ तक मुझसे पहुंचाई गयी मैं पहुंचाऊंगा।
- 56:11बाकी तुम अपना काम करो, बाकी दायित्व तुम भी न मानो मेरी आवाज़
- 56:18को सारे हिंदुस्तान में फिराक। यह है दायित्व आपका क्योंकि मैं
- 56:25तो एक स्थान पे बैठा हूँ और जो व्यक्ति अपने अंत में उतर जाएगा
- 56:30वह स्तिथि प्रज्ञा हो जाएगा। वह शिथिल हो जाएगा।
- 56:34अमानित्वं दंभित्वं हिंसा शांतिराजम आचार्य उपाससनम धैर्यम।
- 56:43शीघ्र हो जायेगा आत्म विग्रह आत्म विग्रह अपने आप में विनग्रह अपने
- 57:02आप का निग्रहण करेगा देखेगा मैं हूँ कौन?
- 57:07हर पल देखेगा तो फिर मैं बोल रहा, लेकिन बड़े बड़े आचार्य जो बड़े
- 57:16बड़े प्रदेश देते थे, उनकी भर्ती जैसे बल हो गए जहाँ समझती है।
- 57:27कमपन छूटा अगर मैं बोला तो मुझे मार दे अरे भाई नहीं बोला तो क्या
- 57:34मौत नहीं मार देगी और कोई भरोसा है अगले को उड़ जान प्राण तेरे।
- 57:49हुड जान प्राण तेरे फिर क्या नी बोल दा फिर तू बोलने के योग्य भी
- 58:02नहीं रहेगा। उड़ जान प्राण तेरे फिर क्यों
- 58:11नहीं बोल दा हो में भरी गुंजिया तू फिर क्यों नहीं?
- 58:23खोल दा फिर क्यों नहीं कहता, क्या मैं हूँ, फिर क्यों नहीं कहता?
- 58:33अब जरूरत है तुम्हारी? अब काम नहीं आया तो आजादी मिल गई
- 58:39तो साबर का करना क्या? फिर गप्पे हाकते हो, गप्पे हाकते
- 58:46रहा। जरूर ताज है तुम्हारी और सुर में
- 58:50वो ही जो आज मैदानी जंग में उतरेंगे कित्थे तेरी कित्थे तेरी
- 58:59आँख कूड़ा। ते किथे अभिमान होय किथे तेरी
- 59:10आगणाँ ते किथे अभिमान होय। फलदा भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान
- 59:26होए मिट्टी दे आ बंदे आ कौन है जहाँ पर जो हमारे रहेगा?
- 59:37ये जो हत्यारे हैं, कतलोगार करते हैं।
- 59:40क्या ये वचन 5,00,00,000 6,00,00,000 लोगों का हत्यारा माव
- 59:47से तुंगा आज कहाँ कहाँ है मसूदनी हिटलर?
- 59:57स्टालिन कहाँ है? अगर तुम भी कोई पांच
- 1:00:07710,00,00,000 लोग मार दोगे तो मर दो, तुम भी जाओ क्योंकि तुम्हें
- 1:00:14कोई मारेगा नहीं। तो मौत तो मारते कहाँ?
- 1:00:21गुमराहि के आलम में खोए फुरते यहाँ सदा रहना तेरा नसीब नहीं
- 1:00:35कहाँ गुमराहि के आलम में खोए फुरते।
- 1:00:40यहाँ सदा रहना तेरा नसीब नहीं है, कौन रहा है?
- 1:00:461 दिन चला ही जाता है और यही मृत्यु न होती तो तुम शायद मृत्यु
- 1:00:54को भीख में मांगते। बेला शक अगर लाख साल की तुम्हारी
- 1:01:00उम्र हो जाएगी और इंशाअल्लाह खैर करे वैज्ञानिक एक खोज कर लेंगे,
- 1:01:07तो तुम लाख साल तो कहीं मरोगे, तो तुम देखना दुकानों के ऊपर बोर्ड
- 1:01:12रखेंगे। यहाँ पर आसानी से मृत्यु दी जाती
- 1:01:16है। बस सिर्फ 100 साल में 50 तुम मरने
- 1:01:21के लिए तरसोगे मेरी भविष्यवाणी नोट कर लेना क्योंकि जीवन में कुछ
- 1:01:27है नहीं, यही तो बुद्धों का नतीजा है संसार दुख है।
- 1:01:41जीवन में दुखों के सिवा और कुछ और।
- 1:01:44तुम इस दुख को लाख साल का करना चाहते हो नहीं, तुम नहीं जियोगे
- 1:01:51अगर लाख साल का तुम्हें ऑपर्चुनिटी भी मिल जाए तो परमा तो
- 1:01:58बड़ा समझदार है तुम्हें लाख साल। जलाता भी है, लेकिन वह समझदार से
- 1:02:03पड़ी गुत्थी कहाँ से लेता है? वह तुम्हें लाख साल जला भी देता
- 1:02:08है, लेकिन कष्टों में 100 साल, 50 साल 60 साल ताकि तुम्हारी जीव ही
- 1:02:16न बनी रहे। मरने की तमन्ना नो।
- 1:02:21और अगर यहाँ के साथ तुम्हें लाख साल की जिंदगी दे दी जाए तो मेरी
- 1:02:25ये बात आज रिकॉर्डेड भी है और नोट कर ले तुम मृत्यु की भी कोई है जो
- 1:02:35मुझे मार सके? तुम कहाँ फिरते हो?
- 1:02:40कहाँ किस किस आलम में गुम हो गए? तुम अवश्य तुम किसी पागल की शैतान
- 1:02:49की पैदाइश अभी कल मुझे कोई कहने लगा।
- 1:03:00कि भारतवर्ष की दुर्दशा का कारण कौन है?
- 1:03:03सर मैं हंसा, मैंने कहा मुझसे पूछते हो क्या तुम्हारी आँखें
- 1:03:11नहीं हैं? क्या तुम्हारे दिमाग में ये है?
- 1:03:15लेकिन मंद है, आप बता दो, मैंने कहा सबसे पहले सी जे आई।
- 1:03:31हिंदुस्तान की दुर्दशा का कारण सीजेआई जो वक्त वक्त पे मौजूद कोई
- 1:03:40अच्छा भी होता है तो सिर्फ दो फैसले अच्छे दे देता उसके बाद।
- 1:03:50पहले कर देता है हराम फिर हलाल डरने गया जाता है।
- 1:03:57फिर ला इला हाँ इलल्ला मोहम्मद और रसूल अल्लाह फिर हल्लाह ना?
- 1:04:12सीजेआई सबसे पहले गुनाहगार और दूसरा हमारा सारा प्रशासनिक
- 1:04:25ढांचा। सारी लोकसभा के सदस्य जिम्मेदार।
- 1:04:37कोई एक वरला उठकर चिल्लाएगा तो उससे कोई फर्क नहीं होता है।
- 1:04:44हाँ चिल्लाने वाले लोग भी हैं, लेकिन वह एक हाथ हैं और याद रखना।
- 1:04:51कभी भीड़ नहीं जीता करती। एक व्यक्ति जीता करता है, कभी
- 1:04:58भीड़ नहीं जीतती। तुम्हें ये अजूबा लगेगा क्योंकि
- 1:05:03एक व्यक्ति के साथ सत्य की ताकत होती है।
- 1:05:07भीड़ के साथ दुष्कता की ताकत होती है।
- 1:05:11और दुष्टता की ताकत सदैव राजा में तब्दील हो जाती है।
- 1:05:17सत्य की ताकत सदा विजय में तब्दील हो जाती है।
- 1:05:25दूसरा, यह हमारा सार नीती का ढांच सारी पार्लियामेंट एक नहीं सर,
- 1:05:36क्योंकि कोई तो उठे कोई तो कहे नहीं मंजूर हमें बाज आए इस बाहुब
- 1:05:45से उठा ले पान। लेकिन सब कायरों की औलाद कहे।
- 1:05:58कौन कौन कहे के रानी अगा का ग हमारे पंजाबी में किसी में जरूरत?
- 1:06:11कायर कायरों के आगे जो करें साहस इनमें है।
- 1:06:19बस सिर्फ शब्द बोलते हैं। साहस और शब्द में बड़ा फर्क शब्द
- 1:06:28तो कोई भी बोल देगा। तोला भर की जुबान तो कोई भी हिला
- 1:06:33दे, लेकिन साहस तो बहुत अलग सी चीज़ है।
- 1:06:37वहाँ तो सिर काट कर हथेली पे रखना होता है जो कि असंभव है।
- 1:06:45नेक्स्ट? तो मैं निकाह तुम मुझसे पूछते हो
- 1:06:55जिम्मेदार कौन जिम्मेदार यही बाकी तो सभी जनता और अगर आज थोड़ा जग
- 1:07:04जाए दुनिया। और मंदभक्ति का ये पर्दा हट जाए
- 1:07:14तो ये पाएंगे मंदभक्त वैसे थोड़ी है 17% 83% तीक्षण बुद्धि है।
- 1:07:24लेकिन वह मंदबुद्धि के संग बैठकर यथासंगत तथा रंगत कौन बोले कौन
- 1:07:31बोले कि रानी अगर टक किसी को तो उठना ही होगा।
- 1:07:45बुध कहते हैं अगर ऐसा तो फिर मुझे जान।
- 1:07:49क्यों? क्योंकि बुद्ध अपना आपा देख ले,
- 1:07:54बुद्ध जानते हैं कि मृत्यु नाम की कोई चीज़ नहीं होती।
- 1:07:59सिर कट जाएगा। तेग बहादुर जानते थे, इसलिए तो
- 1:08:02यहाँ से चल के दिल्ली गए, जानते थे कि सिर काट लेगा।
- 1:08:11और यह भी जानते थे कि सिर मैं नहीं, बस यही बात बनती यह भी
- 1:08:19जानते थे कि राजा की तलवार बड़ी लंबी है और नंगी है।
- 1:08:24दायर, बड़ी तेज। और यह भी जानते थे कि मेरी गर्दन
- 1:08:30काट लेंगे, लेकिन यह भी जानते थे कि गर्दन काट लेंगे, मुझे नहीं
- 1:08:37काट पाएंगे। इसलिए तो मंसूर सामने अड़ के खड़ा
- 1:08:41हो जाता है कि काट मुझ तू देखते हैं कि तू मुझे काट पाएगा?
- 1:08:48इसलिए तो ईशा अड़ जाती है। तू चढ़ा मुझे सूली पर हाथ और पांव
- 1:08:55में कीलन ठोंक देखते हैं, तू मुझे मार पाएगा और आखिरी शब्द ऐसा
- 1:09:04बोलते हैं ओह गॉड। फॉर गीव देम बिकॉज़ दे डोन्ट नो
- 1:09:10वर्क दे डन? यही करुणा की प्रमाणिकता
- 1:09:17प्रमाणिकता डंडप के पलों के ऊपर सर्दी के मौसम में गर्म रजाइयां
- 1:09:25लेकर नहीं बोली जाती। और तो तूफानों की ठंड किया आग में
- 1:09:32ही गूंजा करती अगर जग गया ये जगह तो हुआ है बस थोड़ी सी चिंगारी
- 1:09:43तुम्हें नहीं पता। तुम्हारे ही टैक्स से सब चलता है,
- 1:09:49ये न्यायपालिका उजड़ जाएंगे, ये चुनाव आयोग उजड़ जाएंगे।
- 1:09:54न पारदिया में रहेंगी, न असेंबलीस रहेंगी, न फौज को क्या देंगे,
- 1:09:59कहाँ से देंगे? इनके बाप की जायदाद है इनके बाप
- 1:10:03तो चाय भेजते रहे। और आज तक इनकी इतनी हिम्मत नहीं
- 1:10:07पड़ी। जवाहरलाल को गाली निकालने वाले जो
- 1:10:1330,000 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने प्यारे भारत को दान कर गए,
- 1:10:19उसके ही पौत्र से। एक छोटा सा मकान जो किराये पे था
- 1:10:23वो छीन लिया क्या श्रद्धा के लिए बने रहेंगे?
- 1:10:30कहीं ऐसा तो नहीं? बिल्कुल ऐसा ही होगा तुम्हारी
- 1:10:34कब्रों पर नूर खान की तरह जूते पड़ेंगे क्योंकि जीते जी तो।
- 1:10:40तुमने मौका नहीं दिया जीते जी तो तुम्हारी सेवेन लेयर्स प्रोटेक्शन
- 1:10:49लेकिन मर कर तो कोई प्रोटेक्शन नहीं होगी।
- 1:10:51मर कर तो जैसे नूर खाना जूतियां खाता है ऐसे ही तुम भी जूतियां
- 1:10:56खाओ। जिम्मेदार हूँ।
- 1:11:04सबसे पहले सीजीआई क्योंकि सीजीआई ने बड़ा समझ कर मैं सलाम करता हूँ
- 1:11:12बाबा साहब अंबेडकर का जिसने एक शानदार हथियार।
- 1:11:20सुप्रीम कोर्ट के हाथ में दे दिया 142 संविधान की 142 अनुच्छेद,
- 1:11:36उसको कहते हैं कंप्लीट जस्टिस। ज़रा देखो मान्यवर पंडित पंडित
- 1:11:48जी, पंडित जी और पूरा मान्यवर पंडित जी।
- 1:11:55जब 27,00,000 लोगों ने गुहार लगाई कि हम चिंता हैं और हमारे नाम कट
- 1:12:02गए हैं, ज्ञानी इस कुमार ने काट दिए हैं।
- 1:12:06पहले राजीव कुमार भी अलग अलग तरीकों का इस्तेमाल करते थे।
- 1:12:14और चुनाव अभी हुए नहीं। एंड यू हॅव दी पावर टु कैंसिल दी
- 1:12:21इलेक्शंस? तो अगर नहीं तुम ये अपनी पावर का
- 1:12:27इस्तेमाल करते तो फिर चोर कौन हुआ?
- 1:12:32पंडित जी? और अब जो इतनी जल्दी दिखाते हो,
- 1:12:39यह नाटक क्या हमें समझ नहीं आता क्या यह नाटक अच्छी तरह समझते हैं
- 1:12:49हम? क्या हुआ अगर तुम्हारे जैसे
- 1:12:57बिरयानी नहीं खाते तो? लेकिन नाटक तो अच्छी तरह से समझते
- 1:13:03हैं क्या हुआ? हम इजरायली नहीं खाते मशरूम तो
- 1:13:09नाटक तो बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि तुम खेल रहे हो।
- 1:13:14तुम्हारी कल्पनाओं को तो अच्छी तरह से भाप लेते हैं हम, लेकिन
- 1:13:22मुझे ऐसा लगता है कि सभी के भीतर कल्पना की तो बहुत सी पुर्जे फिट
- 1:13:33करते हैं। शर्म का पुर्ज़ा सबके भीतर से
- 1:13:35निकाल दिया गया। यह गद्दी को वरदान है।
- 1:13:39क्या ऐसा की जो इस गद्दी पर बैठ गया?
- 1:13:43उसका शर्म का पुर्जा अभी अभी 2014 से शुरू हुआ है।
- 1:13:49शर्म का पुर्जा निकाल लिया और दूसरा पुर्जा डाल दिया।
- 1:13:56बस कल्पना ही कल्पना, वो देखो बाहर है होती है खेजा तुम कहते हो
- 1:14:14खेजा है, पागल हो है अरे अंधे हो आँखें दे के आओ।
- 1:14:22फिर चंद्रचूड़ पूछते हैं कि इतिहास मेरे बारे में क्या
- 1:14:26दिखेगा? तुम्हारी आत्मा ने बता तो दिया
- 1:14:29तुम्हें, अन्यथा ऐसा कोई कहता है तुम्हारी आत्मा ने पहले आगाह कर
- 1:14:35दिया यू आर डूइंग दी रॉन्ग? इसीलिए तो कहते हैं कि आने वाला
- 1:14:44इतिहास मेरे बारे में कल और अगले ही दिन गणेश पूजा के वक्त महान
- 1:14:52योग प्रधानमंत्री जी आपके घर पे दिखाई पड़ती है।
- 1:14:58अभी कहते पंजाब जीतना है, मैंने कहा जीत लो, जब मुहिम पे चले हो
- 1:15:06तो पंजाब भी जीत लो, पाकिस्तान भी जीत लो कौन रोकता है?
- 1:15:13लेकिन एक बार ख्याल रखना मोदी जी। 750 किसान लेके आना हमारे मैं
- 1:15:22पंजाब से बोल रहा हूँ 750 किसान लेके आना हमारे जो आपने मार दिए
- 1:15:33मैंने मार दिए खुद मरे। इनका दिमाग खराब था, घर में बैठे
- 1:15:40थे आपने तीन कार्य कानून किसने बनाए?
- 1:15:44जीस जीस ने उसके ऊपर दस्तखत किए, वो गुनहगार उन सबको हम एक एक करके
- 1:15:53घसीटते। तुमने साइन किये तो यह मेरे पास
- 1:15:58हो, वो निशांत ही हम सब करेंगे सब यहाँ पर रिकॉल कर और फिर एक एक को
- 1:16:10बुलाएंगे कि 750 किसान दोनों में। तुम कहोगे मावजा ले लो, हम कहेंगे
- 1:16:17नहीं हम ही किसान से महात्मा बुद्ध के भाई देव व्रत ने जाते
- 1:16:27हुए पंछी को तीर मारा फट फड़ाता हुआ नीचे करके।
- 1:16:34अब कोई कसूर तो था नहीं उसका, लेकिन वह तो तीरंदाजी सीख रहा था
- 1:16:42और साहब राजनीति सीख रहे थे। ये राजनीति सीख रहे थे कि दुष्ट
- 1:16:49नीती सीख रहे थे। दुष्ट नीती सीख रहे थे।
- 1:16:57कहते क्या मेरे कारण मर गया? मलिक कहते हैं, और किसके कारण मर
- 1:17:01गया? तीन काले कानून किसने पास किये?
- 1:17:05वो तो सबने सामूहिक पास किये और इनके हित के लिए थे, हित के लिए
- 1:17:10थे। तो ये क्यों आके बैठे?
- 1:17:12इन्हें ज्यादा पता है कि आपको पता है तुम्हारी चुटकी भर ली जाए तो
- 1:17:17तुम कहते हो दर्द होता है। तुम्हें ज्यादा पता है के भरने
- 1:17:21वाले को ज्यादा पता है मूर्ख बनाने की चेष्टा न करो।
- 1:17:27सब कुछ अडानी, अंबानी को सौंप जाओगे।
- 1:17:32तो 146,00,00,000 जनता है उनसे छीनने के लिए याद रखो मेरी बात को
- 1:17:39जब ये अपने रबाब के अंदर आ गए। जब ये अपने शबाब के अंदर आ गए तो
- 1:17:47बोटी बोटी नहीं छोड़ेंगे इनकी। निस्तनाबूद करने के वंश समझाती
- 1:17:54है, कहाँ की बात करते हो तुम अभी तो नई नई आज़ादी पाई शुक्र है
- 1:18:01तुमने अभी से लिया अन्यथा शायद तब तक लहू ठंडा हो जाता।
- 1:18:10तुम्हें बा मुसकर गद्दी मिली थी और तुम्हें गद्दी का इस्तेमाल से
- 1:18:17ही ढंग से कर सब कुछ तो ठीक चल रहा था।
- 1:18:22अभी कल मैथिली कह रही थी कहाँ फंस गई सब कुछ तो ठीक चल रहा था।
- 1:18:27मैंने कहा फिर पंगा तुमने दिया है, लोक अप्रसिद्ध गायिका थी,
- 1:18:35सारे वैड के अंदर नाम पर इतनी शानदार आवाज़ है, बस बोलने में
- 1:18:41तोतली है थोड़ी और तो कोई खराबी है नहीं।
- 1:18:57तो भाई बिलकुल आना मोस्ट वेलकम हमारी अतिथि हो तुम अतिथि देवो
- 1:19:03भवः यह पंजाब की धरती है हमारे लिए अतिथि भगवान आओ लेकिन हमारे
- 1:19:12750 किसान विज्ञान किसान। माप जन तो वह कहने लगा बुद्ध कहने
- 1:19:22लगा ये पंछी तुमने मार दिया और कहते मैंने मैंने थोड़ी मारा, तीर
- 1:19:28ने मारा और कहते फिर अब इसको जिंदा करो, जिंदा कैसे कर दूँ?
- 1:19:36जैसे मारा, यह तो असंभव है। फिर मारक वो देव व्रत प्रथम वार
- 1:19:45लाचार हुआ। उसका मुँह खुला कर खुला है कि
- 1:19:50मेरा ही भाई ऐसा भी बोल सकता है। हाँ, बिल्कुल बोल सकता है।
- 1:19:56अगर कोई गद्दार हो जाए तो रावण को छोड़कर विभीषण छोड़ दिया करता है।
- 1:20:02लंकाकार साम्राज्य और उसी की विनाश के बीज बोया करता है।
- 1:20:15अगर रावण मरा तो विभीषण के कारण मरा अन्यथा कोई माई का लाल नहीं
- 1:20:21था जो रावण को मरवा सकता चाहे राम कितना भी बनी थी।
- 1:20:27विभीषण के कारण रावण मरा, वहीं से चला लंका।
- 1:20:34घर का भेदी लंका ढाय किसी की औकात नहीं किसी में जागती जमीर नहीं जो
- 1:20:42उठ के गए हम तो चले लेकिन किसी ने नहीं।
- 1:20:50एक चुनाव आयोग में एक व्यक्ति देखो याद रहेंगे।
- 1:20:54सद एक व्यक्ति ने रिसाइन के दे दिया नो माई कॉन्शस डज़ नॉट अलाउ
- 1:21:06और उसने हसे पा दे दिया। तीन में से एक था।
- 1:21:12राजीव के वक्त की बात सब दुनिया देखती है।
- 1:21:17जनता सब देखती वह व्यक्ति इतिहास के पन्नों में अमर रह, तुम चाहे
- 1:21:27कोई बहाना बना लो। लेकिन जो बनि की वेदी पर चढ़ गए
- 1:21:31हमारे राष्ट्रपति धनकड़ वो सदा याद रहेंगे?
- 1:21:36उनकी कोई तबियत खराब नहीं थी, वो सांड की तरह फिरते लेकिन तुमने
- 1:21:42डरा कर, धमका कर, कुछ कर कर ईडी भेज के वो भेज के हाँ।
- 1:21:48अरे जिसने कमाया होगा, वो डरेगा और मैं तुमसे पूछता हूँ, मैं ईडी
- 1:21:56वालों से पूछता हूँ, अरे विपक्ष में इतना भरा पड़ा है 17,000
- 1:22:02करोड़ तुमने फ़ौरन वहाँ चले जाना था और प्रधानमंत्री बोल रहे हैं?
- 1:22:08तुम गए वहाँ नहीं गए शुभेंदु अधिकारी ने ₹5,00,000 सरेआम
- 1:22:16रिश्वत लेता हुआ कैमरे के ऊपर अब भी दिखाया और बीजेपी ने अपने ही
- 1:22:22प्रचार तंत्र पर उसे प्रकाशित किया।
- 1:22:27और आज वह स्वर्ण इन पश्चिमी बंगाल क्या तुमने उसके घर की तलाशी ली?
- 1:22:36वह अगर मुख्यमंत्री है तो मुख्यमंत्री तो केजरीवाल ही था।
- 1:22:48वो दूसरों का कुत्ता, कुत्ता तुम्हारा कुत्ता डोगी ख्याल रखो
- 1:22:57ईडी वालो सबसे पहले लपेट में तुम ही आने वाले हो और अगर टाँगे
- 1:23:04जाओगे मेरी बात समझना। या तुम मुझे टाँग दे, कोई बात
- 1:23:10नहीं जब से जाना है मरने का नाम है ज़िन्दगी सर पे कफन बांधे का
- 1:23:20दिल को ढूंढ़ते या फिर अगर हम बच गए तो फिर याद रखना।
- 1:23:26यू विल बी दी फर्स्ट टू एम सबसे पहले तुम्हें टान देंगे और हम सब
- 1:23:34हमारे पास नंबर नोट है। कौन है यह अजय पार सब जिसने जाकर
- 1:23:41चुनाव में 80 धांधली की ऐसा बोला जाता है?
- 1:23:46जैसे तुम बोले, हाँ, अब मैं तुम्हें क्या कहूँ, मेरा पेट।
- 1:24:03डायलॉग बोल दूँ? कोई आकिस्म जलाये क्यों है
- 1:24:26फातिहाय यहाँ? कोई किसम जलाये क्यों कोई चार फूल
- 1:24:47चढ़ाई क्यों? मैं वो वे कसी की मजाक हूँ।
- 1:25:05ना किसी की आंख का नो ना किसी के दिल का करा जो किसी।
- 1:25:51धन्यवाद।