Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Jun 25 - आर्थिक तंगी बहुत है, घर जमीन सब कुछ बिक गया है। क़र्ज़ा बहुत है। नौकरी लगती नहीं, कोई रास्ता बताइए।
Transcript
- 0:02बाबा जी प्रणब मैं हरियाणा से हूँ, उम्र है।
- 0:1119। वर्ष आपसे दीक्षित हूँ परेशान।
- 0:19कुछ समझ नहीं आता क्या करूँ? जीवन में एक तरफ संसार की जरूरतें
- 0:28हैं, दूसरी तरफ परमात्मा की कशिश है।
- 0:38समझ नहीं आ रहा क्या करूँ कहाँ जाऊं?
- 0:45पढ़ाई करू तो पढ़ा नहीं जाता। साथ में डर लगता है कि कहीं
- 0:56मस्तिष्क के नुरों। सूचनाओं से भर न जाए और मेरी
- 1:02मुक्ति में बादाना उत्पन्न हो जाए।
- 1:06मोबाइल देखता हूँ तो शंका बनी रहती है।
- 1:10छः 7 घंटे मोबाइल जानकारियां। इकट्ठी न हो जाएं।
- 1:20हम आधा प्रश्न लेंगे आधा प्रश्न बाद में ले लेते है तुमने पुत्र
- 1:35जिन रस्सियों से तुम लिपटे पड़े थे।
- 1:39उन्हीं रस्सियों को खोलकर तुमने फंदा लगा लिया ये समझ लो पहले तो
- 1:46रस्सियां तुम्हारे हाथों पांव को हिलने में दिक्कत देती थी, अब ये
- 1:52रस्सी तुम्हारी जान ही ले लेगी। ध्यान से समझो मैंने क्या बोला और
- 2:00तुमने क्या समझा? अगर मैं कुछ पढ़ता हूँ तो डर लगता
- 2:11है, मस्तिष्क के नूरांझ न भर जाए और मुक्ति में बाधा नौटमन हो जाए
- 2:21तो फिर? मेरे शब्दों ने अमृत का काम नहीं
- 2:26किया, विश का काम किया तुम शब्दों से बंध गए पुत्र अभी तुम्हारी
- 2:36उम्र ही क्या है? 19 वर्ष।
- 2:41और तुम जैसे बच्चे शब्दों में भ्रमित हो जाते हैं।
- 2:48इसलिए तथाकथित धर्मों ने जो उपाय की है, के बच्चे को जन्मजात
- 2:56संस्कार दे दो। क्योंकि वह बच्चा अभी कच्चा।
- 3:02है और इन्होंने तुम्हारे प्राण ले लिए हैं।
- 3:10मदरसा में गुरुकुलों में सबके अपने अपने स्थान हैं।
- 3:17वो चर्च हूँ, गुरुद्वारा हूँ। इससे पहले के बच्चा सोचने के
- 3:25योग्य हो, सोचने की शक्ति उसमें पैदा हो जाए।
- 3:32उसको पहले से ही बांध लो, उसके न्यूरोस में फिट कर दो।
- 3:39फिर बच्चा कहीं नहीं जाएगा, बेफिक्र हो जाओ, फिर वो लाट उठा
- 3:45लेगा, हिन्दू मुसलमान करेगा, सिख, ईसाई करेगा।
- 3:51यह गणित है मनोविज्ञान का। और डायमंड कट्स, डायमंड हीरा ही
- 4:00हीरे को काटता है। लोहा ही लोहे को।
- 4:04काटता है। मेरे शब्दों को तुमने गलत से समझ
- 4:11लिया। मैं तुम्हें कहता हूँ चुप हो जाओ,
- 4:25जाने के बोलो मत बोलो मत कहने के लिए मुझे बोलना पड़ता है।
- 4:36इसका अर्थ क्या है? बोलो मत, यह समझाया नहीं जा सकता
- 4:43इशारा कर सकता हूँ मैं ऐसे कह सकता हूँ शायद तुम समझो हो ना,
- 4:48समझो पढ़ाई करने से डरता हूँ। कहीं नरोज न बढ़ जाए मेरी मुक्ति
- 5:02में बाधा। उत्पन्न हो जाए।
- 5:12पुत्र, मेरे काम, मेरे शब्द तुम्हें जलाने की बजाय तुम्हारा
- 5:19गाद कर गया। अमृत की बजाय विश बन गए।
- 5:30अब तुम डरने लगे। पहले तुम सूचनाओं को इकट्ठे करने
- 5:35की चेष्टा करते थे, अब तुम चेष्टा करने लगे कि कैसे इन सूचनाओं को
- 5:41मिटा दूँ, लेकिन चेष्टाएँ बराबर? जारी है।
- 5:46मैं तुम्हें कहता हूँ चिश्ता से मुक्त हो जाओ प्रयास को बंद कर दो
- 5:54एफर्ट्स को बंद कर दो यही मुश्किल है।
- 6:06मैंने तुम्हें कहा तुमने अब तक न्यूरोस को भर लिया है और ये
- 6:15न्यूरोस तुम्हारे काम पड़े या नहीं पड़े, यह सूचनाएं तुम्हें
- 6:21मुक्त करा पाई या नहीं करा पाई यह देखो।
- 6:25अभी तो तुम भरे ही नहीं हो, पहले भरो खुद को इनको सूचनाओं से भरो
- 6:35निर्वांश को फिर देखो कि क्या तुम सूचनाओं से मुक्त।
- 6:43हुए। सूचनाएं इकट्ठी करके तुम आया सो
- 6:47अपने सर तो बन गए, कॉम्पिटिशन लड़ा, जीत गए, लेकिन क्या वो
- 6:55कुर्सी के लेने के बाद तुमने बंधा हुआ महसूस नहीं किया?
- 7:03अपने आप? कुर्सी कोई भी मिल जाए आयुष।
- 7:10की हो पीएम के हो सीएम के हो एमपी के हो सभी के अपने अपने अधिकार
- 7:20भी? होते हैं और।
- 7:21सभी के अपने अपने कर्तव्य भी होते हैं।
- 7:25और वो कर्तव्य ही तुम्हारे बंधन होते हैं लेकिन तुम कहाँ और ले गए
- 7:35पुत्र? मैंने तुम्हें कब कब कहा था कि
- 7:39तुम सूचनाओं को इकट्ठी न करो, ये भी तो?
- 7:44सूचना ही है। कोई ऐसा महान पुरुष हुआ है?
- 7:51गीता अष्टावक्र गीता उपनिषद, जिन्होंने शब्दों के परे जाके
- 7:57बोला कोई ऐसा गुरु ग्रंथ साह? श्री गुरुगन साहब के 1430 पन्ने
- 8:07हैं तुम्हें सूचनाएं हित हो देते हैं।
- 8:15गीता के 700 श्लोक तुम्हें सूचनाएं हित हो देते हैं।
- 8:20सारे उपनिश्चित सूचनाएं ही तो देते हैं।
- 8:24चारों रेत सूचनाएं ही तो देते हैं वाइबल कुरान तुम्हें क्या देते
- 8:32हैं, सूचनाएं ही तो देते हैं। लेकिन तुम्हारे धार्मिक लोग बड़े
- 8:40मूर्ख हैं। वो कहेंगे इन सूचनाओं को इकट्ठा
- 8:46कर लो जो हमारी गीता में लिखे हमारे कुरान पुराण में लिखे ये
- 8:54सूचनाएं इकट्ठी कर लो। बाहर की सूचनाएं इकट्ठी न करो वे
- 9:00तुम्हारे लिए। मुक्ति में बाधा भी नहीं, फिर तुम
- 9:04तत्व को समझेंगे नहीं। बुद्ध मैं तुम्हें सूचनाओं से
- 9:09मुक्त करना नहीं चाहता। मैं तुम्हें सूचनाओं की व्यर्थता
- 9:15महसूस कराना चाहता हूँ और मेरे इन शब्दों को आप सर्कल में ले लो।
- 9:24मैं तुम्हें सूचनाओं से मुक्त करवाना नहीं चाहता, सूचना इकट्ठी
- 9:30करो, खूब करो, मज़े लो। लेकिन जीस दिन तुम्हें सूचनाएं
- 9:37व्यर्थ मालूम पड़ने लग जाएं। उस दिन से शुरू हुई मुक्ति की
- 9:43यात्रा, उससे पहले सूचनाएं तुम्हारे बंधन थी।
- 9:49तुम्हें पता नहीं था क्या? सोते हुए तुम्हें पता होता है कि
- 9:53तुम सोए हो ना? सच में बताऊँ।
- 9:58तुम गहन निद्रा में सोए पड़े हो, रात को रोज़ जाते हो निद्रा में।
- 10:04क्या सोए हुए तुम्हें पता होता है कि हम सोए हुए हैं?
- 10:10कब पता चलता है जब तुम जाग जाते हो तो पता चलता है।
- 10:14कि हम सोए हुए थे। सूचनाएं इकट्ठी करोगे, उसे लाभ
- 10:23उठाओगे, कॉम्पिटिशन लड़ोगे, जीत जाओगे, कुर्सियां पाओगे,
- 10:29कुर्सियां पाओगे, कुर्सियों से धन के अम्बार लगाओगे।
- 10:36बड़ी सी कारणों के टेप कमाते हुए महल अटारिया खड़ी करोगे तुम खुश
- 10:46हो। देख।
- 10:50देख के प्रसन्न हो जाओगे। उस किसान की भांति एक की फसलें
- 10:55उसके शरीर से ऊपर चली गईं। लेकिन अगर फल ना लगा हो, फल न लगा
- 11:06तो वह जो सारा। फसलों का मटेरियल है और पशुओं के।
- 11:11खाने के युग रह जाएगा, मनुष्य के खाने के युग नहीं होगा।
- 11:24मैं तुम्हें नहीं कहता कि सूचनाओं को इकट्ठा करना बंद कर दो।
- 11:33मैं तुम्हें उस तल पे ले जाना चाहता हूँ जहाँ सूचनाएं व्यर्थ हो
- 11:37जाती हैं। मैं नहीं कहता धन इकट्ठा न करो,
- 11:42मैं नहीं कहता श्रेय मत लो, मैं नहीं कहता तुम सलमान को इकट्ठा मत
- 11:49करो अगर कोई देता। है, तो ले लो।
- 11:57लेकिन मैं तुम्हें जो बात कहना चाहता हूँ, पुत्र को समझो तुमने
- 12:04तो उसी रस्सी से जिससे बंधे हुए थे, उनको खो लिया और उससे तुमने
- 12:11फंदा लगा लिया। गला घोंट।
- 12:12लिया। पहले जीवंत तो थे, कम से कम बंदे
- 12:17हुए थे। अब तो फंदा लगा के तुम मरने की
- 12:21चिष्ट हो जाओ तुमने मेरे शब्दों को गलत से ले।
- 12:27लिया तुम फिर समझो बेटा। सूचनाओं को इकट्ठे कर जहा से भी
- 12:40मिलती हैं, वो ठीक हैं, वो गलत हैं।
- 12:44कोई बात? नहीं चलेगा।
- 12:47मैं कहता हूँ तुम गलत हो। सूचनाएं ही इकट्ठे कर ये
- 12:50प्रेमानंद जी मार रहे हैं। कहते हैं राधे राधे करते रहो तुम
- 12:53ये ही कटरा करो, कोई बात नहीं। चलेगा ये भी चलेगा।
- 12:59और साइंस का सत्य अन्वेषण भी चलेगा।
- 13:02वह भी शब्द है तुम न्यूट्रिन के ला सीख जाओ, आइंस्टीन के ला सीख
- 13:09जाओ इज़ इक्वल टु एम के। तो?
- 13:18प्रेमानंद की राधे राधे रामानुज का राम, राम आइंस्टीन का इस इक्वल
- 13:27टु एम सिसका न्यूट्रॉन का लव ग्रैबिटेशन।
- 13:32सब सीख लो। मैं तुम्हें कहता हूँ सीख लो
- 13:41निहिसंकोच सीख लो और फिर उनसे तत्व निकालो, कुर्सियां पाओ
- 13:51कॉम्पिटिशन लड़ो, भागो, दौड़ो मैराथन के दौड़ो में शामिल हो।
- 13:58मैं तुम्हें किसी भी पुरुषार्थ से रोकता नहीं, पुत्र मेरी बात के
- 14:05गहरे रहस्य को खोजने का प्रयास करो, इसके भीतर रस क्या है, वह
- 14:14देखो। मैं तुम्हारी दूसरी समस्या पर भी
- 14:19आऊंगा, पहले तुम इस समस्या को। सोचो सूचनाओं को इकट्ठा करो।
- 14:32वो गलत है या ठीक है, इसकी तरफ ध्यान ही मत करो।
- 14:41और जब सूचनाएं तुम्हें गद्दियाँ दे दें, बड़ी गद्दियाँ दे दें और
- 14:46लाल सा उठे और बड़ी गद्दियाँ दे दें, धन के अंबार लग जाएं, सब कुछ
- 14:51हो तुम्हारे पास, उस क्षण में तुम पाओगे कुछ है।
- 15:04जो अभी भी अनमिला रह गया सब मिला, लेकिन कुछ अभी भी रह गया जो बिन
- 15:15मिला रह गया, वह क्या है? जब तुम इस स्थल पर आ जाओगे ना
- 15:26पुत्र तो मेरी वीडियो कहीं गयी नहीं, इनको खंगाल लेना बड़ी काम
- 15:33आएगी तुम्हारी मैं उन्हीं के लिए छोड़।
- 15:35के जा रहा। हूँ तुम्हारे लिए जब तुम परिपक्व
- 15:40हो जाओगे। और जब तुम कुर्सियां पालोगे जब
- 15:46तुम धान इकट्ठा कर लोगे, महल अड़ारियों के स्वामी हो जाओगे,
- 15:49जमीन जायदादों के मालिक हो जाओगे, तब तुम्हारी आत्मा को भीतर से
- 15:55लगेगा कुछ। है, जो अभी मिला नहीं।
- 15:59और सच पूछो तो वही कीमती है जो अभी तक मिला।
- 16:02नहीं। सब धन पाकर भी जो निर्धनता का
- 16:13अहसास करे। इसको फिर से समझ लो, सब धन पाकर
- 16:19भी जो निर्धनता का एहसास करे, वह ज्ञान ज्ञान की राह पे चल पड़ा
- 16:27महुमुक्षु पहले पातो लो, तुम तो पहले ही फिकरमंद हो गए।
- 16:41बाबा पढ़ाई करता हूँ तो निरौंज भर न जाए कहीं ये डर कहाँ से आया है
- 16:46तुम्हारे बितर? मेरे बच्चे तो डरा।
- 16:50नहीं है करते है। ये के सदुस्त हैं, तुम्हारे बितर
- 16:55बेक रख। दिया तुम्हारे ही मान।
- 17:03मन दुधारू तलवार है, जिधर जाता है उधर काटता है तो फिर तुम्हारे माँ
- 17:12ने ये रिसाल्ट निकाला कि हम इकट्ठा ही ना करें।
- 17:17मैंने जो बात कही उसे तुम फिर नहीं समझा।
- 17:23अब यहाँ अस्त्वक काम पड़े वो कहेंगे तुम इकट्ठा करो, तुम राजा
- 17:29जनक बन जाओ क्योंकि वो जानते हैं कि राजा जनक ही भोगों की व्यर्थता
- 17:36को समझ सकता है। जिसने बोगा ही न हो, जिसके हाथ
- 17:42में भिक्षा पत्र ही रह जाए, वह कहे कि मैंने ड्राई फ्रूट्स?
- 17:50का क्या कर दिया? यह कहाँ तक उचित है?
- 17:55भिक्षा? में सूखी रोटी मिली।
- 17:59भिक्षा में उसके देने वाले के मन मुताबिक भोजन मिला और फिर तुम कहो
- 18:08कि मैंने ड्राई फ्रूट्स का त्याग कर दिया।
- 18:13यह भाषा उचित है क्या? नहीं उचित?
- 18:16है। उचित भाषाजनक कह सकते हैं बुद्ध
- 18:21कह सकते। हैं।
- 18:23जैनियों। के 24 के 24 गुरु तीर्थों को 24
- 18:30के 24 मन्नू जी महाराज से जो पीढ़ी चली उसकी पांचवीं पीढ़ी जैन
- 18:41धर्म का पहले गुरु थे। ऋषभदेव वृषभदेव कह लो, ऋषभदेव कह
- 18:46लो। जैन धर्म के पहले गुरु थे।
- 18:52सिद्ध सी बात है कि सनातन धर्म पहले हुआ।
- 18:56उसकी पांच पीढ़ियाँ गुजर गईं तो वहाँ से पांचवीं पीढ़ी ऋषभदेव के
- 19:01रूप में जैनियों की प्रथम तीर्थंकर बने।
- 19:08वो सनातन धर्म की पहली पीढ़ी चलती है।
- 19:12मनू और शत्रु का से। मन शतरूपा की औलादें, उनकी
- 19:20पांचवीं पीढ़ी जैन धर्म के ऋषभदेव हो गए।
- 19:28और आगे चलकर तीसरी पीढ़ी बौद्ध धर्म के बुद्ध हो गए।
- 19:35चौथी बूढ़ी गुरु नानकदेव सिख तो इन चारों धर्मों का डीएनए समान ही
- 19:42है। इसे चारों को मैं सनातन कहता हूँ।
- 19:50ये शाखाएं हैं सनातन। सब की फिलॉसोफिकल मान्यताएँ कितनी
- 19:59ही डिफरेंट क्यों न हो, लेकिन हैं एक ही वृक्ष से उपजी हुई शाखाएं
- 20:10सनातन। वो हिंदू हो, उससे आगे जैन हो।
- 20:15दूसरी पीढ़ी, तीसरी पीढ़ी बुद्ध हो, चौथी पीढ़ी सेख।
- 20:20हो? ये मनुष्य ही चली, ये एक ही जड़
- 20:25की शक्मे इनकी जड़ एक है। मूल एक पत्ते अलग अलग दिशाओं में
- 20:36फैलते हैं, कोई पूर्व, कोई पश्चिम, कोई उत्तर, कोई दक्षिण
- 20:41लेकिन इनका मूल डीएनए एक और वो एक है सनातन जो सदा से है और इन
- 20:49चारों ने उसी की बात की। जो सदा से है आध सत्य जुगाध सच
- 20:55हैप्पी सच, नानक और सिम भी सच सभी तो उस नातन की बात करते हैं।
- 21:02छः 7 घंटे का मोबाइल न देखूं, कोई जानकारी न जुटाऊं ये तो पुत्र
- 21:09तुमने? अंधविश्वास कहाँ से पैदा कर रही
- 21:12है? मैं अंधविश्वास को तोड़ते तोड़ते
- 21:19तुम मुझे ही अंधविश्वासों में घसीटने लगे।
- 21:25अब ये न्यूरोज की सूचनाएं तुम्हारी मुक्ति में बाधा बनी
- 21:29हुई। ये तुम्हारे मन ने सोच लिया ये छः
- 21:357 घंटे मोबाइल का देखना तुम्हारी मुक्ति में बाधा बनेगी।
- 21:39ये तुम्हारे मन की कार्ड है इन्वेंशन।
- 21:44है। मैं तुम्हें ये नहीं।
- 21:47करता। मैं कहता हूँ छः 7 घंटे का मोबाइल
- 21:51देखो और देख कर तुम ये पाओ कि जो तुमने सूचनाएं ठीके है उसकी एवज
- 22:01में तुम्हें थकावट तो मिल गई। छः 7 घंटे तुम मोबाइल देखते हो,
- 22:07थक जाते हो सो जाते। हो?
- 22:12कोई कुछ भी दे, किस से फर्क नहीं पड़ता, कोई धार्मिक प्रवचन बाबा
- 22:18का सुन ले या कोई रील्स देख ले या कोई फ़िल्म देख ले, सब कोई फर्क
- 22:25नहीं। बात है कि तुम कुछ भी देखो, वह
- 22:34व्यर्थ है जो तुम देखते हो देखते देखते तुम उस स्तर पर आ जाओ जहाँ
- 22:41ये अहसास हो कि 7 घंटे मोबाइल तो देखा।
- 22:46टायर्डनेस के अलावा कुछ न। मिला।
- 22:52और जो मिला वह स्थायी नहीं था। थोड़ी देर के लिए हंस रही है तुम
- 22:58मनोरंजन कर लिया जैसे फ़िल्म को देख के आते हो जैसा दृश्य होता
- 23:05है। वैसा तुम पर प्रभाव हो जाता है।
- 23:09तुम हँसते हो, रोते हो, सहानुभूति करते हो, गुस्सा करते हो, उषा
- 23:14द्वेष करते हो, मोबाइल पे छः 7 घंटे बिताकर तुम ये जानो।
- 23:26कि इससे मिला क्या? इसको देखना बंद न करो।
- 23:32ऐसे साइंस नए नए आविष्कार करती रहेंगी।
- 23:36तुम किस किस से भागोगे, ये साइंस तो हमारे आराम का कार्य ही है।
- 23:44हमें पंखा भी देता, हमें एयर कंडीशन भी देता, हमें और सुविधाएं
- 23:49महिया कराता है। साइंस ही तो है ये और ये साइंस ही
- 23:53तो है। कि मैं यहाँ बोल रहा हूँ, तुम
- 23:55वहाँ सुन रहे हो नहीं इस विज्ञान को बुरा मत कहो।
- 24:06विज्ञान का दुरुपयोग बुरा है। जमाने थे, हमारे वक्त पंखे भी
- 24:16नहीं थे, हमारे वक्त पंखे भी नहीं थे।
- 24:21हमारे वक्त बिजली भी नहीं थी। हमारे शहर में पहली बिजली का
- 24:27कनेक्शन हमारे गुरुद्वारा साहब में लगा।
- 24:35उसके बाद शहर में घरों में लगनी शुरू हुई।
- 24:39सबसे पहले बिजली का कनेक्शन हमारे गुरुद्वारा साहब में।
- 24:42लगा। कभी थे जब पंखे नहीं होते थे,
- 24:50लाइट नहीं होती थी तो माता कहती शाम की आरती कर।
- 24:56लो। शाम की आरती बस यही होती थी
- 24:59अँधेरा हो गया अब ज्योति जला दो, अंधेरे में कुछ दिख नहीं सकेगा।
- 25:05किसने खाना भी खाना रह गया है, किसने पढ़ना भी है?
- 25:13इसलिए दीपक जला लो, वो दीपक तुम्हारी आरती का सबब बन गया है।
- 25:19तुम उलझ गए। उसमें आज बहुत से लोग हैं जो दीपक
- 25:22किए बिना खाना नहीं खाते। तुम उन मूड़ मान्यताओं में।
- 25:27बंध गए तुम भूल गए कि ये मान्यताएँ।
- 25:34कहाँ से शुरू हुई? हमारे वक्त में बिजली नहीं होती
- 25:39थी और माता हमें कहती बेटा संध्या वती कर लो।
- 25:47बती करते दीपक जला लेते, उसे रोशना ही हो जाती, तुमने देखा
- 25:58पहले के घरों में आले होते थे आले के छोटे छोटे।
- 26:03होल्स वो सिर्फ इसलिए होते थे कोई दीप रख दो, कोई सामान रख दो आज
- 26:11घरों में आले कहाँ मिलेंगे तुम्हे आज घरों में आले है ही नहीं, नए
- 26:16घरों में तुमने आले देखे थे, पुराने घरों में क्यों होते थे
- 26:22संध्या वत्ती को? सांझ होगी, सूर्य छिप जाएगा,
- 26:27रौशनी चली जाएगी, दीपक जला के रात देना और बहुत से लोग हैं।
- 26:32आज सब कुछ है, बिजली है, लाइट है, हजारों तरह के हैलोजन पम्प्स हैं
- 26:40लेकिन फिर भी दीपक कर रहे हैं। देसी घी का बहुत से लोग शंकर जी
- 26:46की आरती उतारते हैं। मैंने कहा क्या कर रहे हो पागलपण
- 26:56तुम्हारी मान्यताएँ तुम्हारे साथ गिसट के आज तक आ गई।
- 27:01विज्ञान ने कितनी भी तरक्की कर ली हो।
- 27:06हम उस वक्त के उपज है जब पंखा हाथ में लिए हुए है।
- 27:11हम पसीना सुखाते थे। यह पृथ्वी वैज्ञानिक के अनुसार
- 27:19करीब 4.5 अरब वर्ष प्राणी है। 4.54 अरब वर्ष प्राणी है।
- 27:30ये पृथ्वी तुम क्या समय के हो के परमात्मा ने उसके बाद कुछ तरमीन।
- 27:40की है नियमों में? ज़रा सोचो कुछ परिवर्तन किए हैं,
- 27:46अपनी सृजना में सृष्ट नहीं किया जैसी 4.5 अरब वर्ष पहले थी,
- 27:55पृथ्वी वैसी ही आज है। कोई परिवर्तन नहीं हुआ, कोई तनमीन
- 28:01नहीं। यानी जो एटम बम आज बनाया गया वो
- 28:08पहले भी बन सकता था। बिल्कुल बन सकता था बस तुम्हें
- 28:12यही बताना चाहता हूँ सैकड़ों। बार।
- 28:17ये धरतियाँ अनिष्ट हुईं। लेकिन तुम जानते नहीं इसका एक ही
- 28:26उपाय है कि तुम अपने उस जंक्चर प्वाइंट पे पहुँच गए पुराने
- 28:33जीवनों में जाकर इतने पुराने जीवन में चले जाओ।
- 28:39जब इस धरती का विनाश हुआ। इससे पहले की प्रलय हुई जिसे तुम
- 28:47प्रलय कहते हो तो इससे पहले की प्रलय हुई तो वैज्ञानिक कहते हैं।
- 28:57क्योंकि एक उल्का पिंड एस्ट्रोड जिसे कहते थे वो धरती से टकराये।
- 29:03बहुत आग बरसी वो जनसंख्या मारी गयी, थोड़े से लोग बचे, ऐसा ही आज
- 29:09भी होगा। परमात्मा के पास सबसे श्रेष्ठ
- 29:13उपाय यही है। बस ये उसके लिए।
- 29:19एटम का काम करता है। सीधा एटम को नहीं करा सकता यह एटम
- 29:26से भी ज्यादा खतरनाक। होता है।
- 29:33तो वैज्ञानिक कहते हैं कि मेक्सिको में।
- 29:39और मेक्सिको में गिरा और उसने क्या किया जो हमारी सबसे बड़ी
- 29:44प्रजाति होती थी उन्नत डायनासोर उसको समाप्त कर दिया।
- 29:51देखिये इस सारी मेरी बातों में। कृपा करके वैज्ञानिक दिमाग से
- 29:59कामना में, क्योंकि मैं उस तल पे जाकर एहसास किया जहाँ तल पर वक्त
- 30:09की परिभाषा और वक्त का चलना। उसमें।
- 30:14फर्क पड़ जाता है। समय की गति कहींकहीं धीमी हो जाती
- 30:21है, कहींकहीं तेज हो जाती है। तो मैं जब अपने पिछले जन्मों में
- 30:26गया तो मैं। ज्यादा से ज्यादा वहाँ तक पहुंचा
- 30:33जहाँ से मेरी यात्रा शुरू हुई। इसलिए मैं जान पाया कि कैसे कैसे
- 30:39ये इस सृजना का एनलाइटन चेतना का कान्शस्नस का विकास हुआ?
- 30:49कृष्ण के काल में है। बुध मैंने नहीं देखे महावीर मैंने
- 30:54नहीं देखे कृष्ण के काल में आया, राम जीके काल में आया कुछ
- 31:01स्मृतियां मेरे भीतर। अब भी है आज भी है।
- 31:07और इसकी हुहु काफी आपको। प्रमंड में तो मिल ही जाएगी आप आज
- 31:13तक जो भी शब्द बोले, जो भी शब्द बोले वह इस प्रमंड ने कबोलिया
- 31:21रिकॉर्ड कर रखा है। कोई भी कुछ शब्द बोला, कोई जीव
- 31:25जंतु भी चिल्लाता तो इसकी आवाज है।
- 31:30मैं क्यों रखता है इसका पता नहीं, लेकिन उसका रिकॉर्ड है इस चीज़ के
- 31:34पास जब मैं अपने पिछले जन्मों में उतरा उतरने की विधि में बहुत बार
- 31:42बता चुका। हूँ।
- 31:43अपने भीतर जाओ, जंक्चर पॉइंट पे पहुंचो, वहाँ से बड़ी शाखाएं
- 31:49मिलेंगी। आप जिधर जाना चाहते हो, उधर चले
- 31:51जाओ। पिछले जन्म में उतर जाओ, आगे की
- 31:55बातों को देख पाओ और हजारों हजारों किस्म की आपको यात्राएं
- 32:00मिलेंगी। आप जहाँ चाहो वहाँ जा सकते हो,
- 32:04लेकिन कबीर क्यों कहते हैं वहाँ पर्यटक मत जाना?
- 32:09वहाँ से सीधे मुक्ति के मार्ग में चले जाना अपने आप को जानना बस
- 32:15उलझे तो फिर फिर वो ही यात्राएं शुरू।
- 32:17हो गई। वहाँ से, तुम भटक सकते हो वहाँ से
- 32:21तुम मुक्त भी हो सकते हो अब जो तुम्हारी इच्छा पर निर्भर करता
- 32:26है। तो मैंने जब अपने पिछले जन्मों
- 32:33में जाकर देखा तो मैं कृष्ण जीके उसके बाद राम जीके राम जीके बाद
- 32:39कुछ ऐसे जन्म आए। फिर उसके बाद कुछ ऐसे जन्म आए कुछ
- 32:46ऐसे जन्म आए जहाँ समझ नहीं थी। निश्चित ही पशुओं के होंगे,
- 32:52वृक्षों के होंगे। फिर ऐसे जन्म आये जैसे पात्र
- 32:56क्यों सिर्फ सिर्फ एक एहसास दिखा किसने एहसास अनुभूति?
- 33:07जैसे कोई गुजर रहा है यहाँ से भागता हुआ ऐसा एहसास वो मुझे लगा
- 33:15जैसे पत्थर का युद्ध है। कोई दौड़ रहा है?
- 33:19इतनी सी, इतनी सी, हल्की सी कान्शस्नस उसमें होती है।
- 33:26उसके बाद। पेड़।
- 33:27पौधे जैसे कोई खा रहा है पत्ते, कोई बकरी होगी, कोई आरती होगा,
- 33:36उसके आगे कोई चल रहा है, कोई तैर रहा है, ये संकेत मिलते हैं सिर्फ
- 33:43उन संकेतों से तुम सोच सकते हो। अनुमान लगा सकते हैं सत्य ऋण नहीं
- 33:48किया जा सकता अनुमान ही मैं लगा रहा हूँ मेरी दृश्यता के लिए एक
- 33:53क्षमा करें जो मैं नहीं जाना आपको बदला दिया गलत भी हो सकता।
- 34:00हूँ। ऐसा मैंने देखा, भगवान राम मैंने
- 34:05देखा साक्षात्क है भगवान कृष्ण मैंने देखे, साक्षात्क जो मैंने
- 34:13जाना, बिलाशक कह दूंगा हूबहू मैंने देखे।
- 34:21उनकी कल्पना नहीं, उनकी वास्तविकता मैं आज भी कर दूंगा
- 34:25ऐसी आँखें, ऐसी ठोडी, ऐसी नाक, ऐसे कान, ऐसा रंग, रूप ऐसा कद,
- 34:32काठ ऐसा स्वभाव, ऐसी मदुर मुस्कान सब बता दूंगा तुम्हें जो जो मैंने
- 34:38अनुभव किया जो जो मैंने देख। और जो मैंने नहीं देखा, अनुमानतः
- 34:42मैं कह दूंगा, ये मेरा अनुमान शायद ऐसा हो सकता है और वैसे अगर
- 34:48देखा जाए तो वैज्ञानिक भी सिर्फ अनुमानतः कहते हैं।
- 34:54अनुमानतः यह सृष्टि। 4.54 बिलियन प्याज़ इतने साल
- 35:05पुरानी है चार पॉइंट चौपन अरब वर्ष परम अनुमानता पक्का वो भी
- 35:14नहीं कर सकते। बस पत्थरों को चट्टानों को उनको
- 35:22देख लिया। वैज्ञानिक विधि खोजी कार्बन
- 35:30डेटिंग उससे पता चलता है कि यह वस्तु कितनी प्राण है।
- 35:35क्रीब क्रीब अनुमान से कामयाब भी दिखी।
- 35:40विज्ञान की खोज है विज्ञान की खोजें काफी असरदार होती है इसलिए
- 35:48इन खोजों का लाभ उठा लेना मैं नहीं कहता।
- 35:54तुम इन सूचनाओं को इकट्ठी करनी बंद कर दो, मैं तुम्हें ये कहता
- 36:00हूँ कि सूचनाओं को इकट्ठी करके देखो, उससे जो मिलता है वो भी चखो
- 36:09इकट्ठा करो, इकट्ठा करके उसे भोगो।
- 36:16भोग के उसका रस निकाल फिर उस रस में से जो निकलेगा वो होगा निचोड़
- 36:27वो उपनिषदों में वर्णन किया। 1100 वैसा।
- 36:33अगर किसी ने रस नहीं निकाला, तो शब्दों की बकवास के अतिरिक्त और
- 36:41कुछ नहीं होगा जो आजकल के मैं रोज़ बोलता।
- 36:44हूँ अचारों में है, गुरुओं में है।
- 36:53ये है। बकवास?
- 36:56लेकिन तुम्हें पता लगनी चाहिए पहले इकट्ठी करो, इन्हें सुन सुन
- 37:02कर पाओ। इनमें से कुछ आनंद मिला।
- 37:12स्वाद मिला, कुछ शांति मिली। बस ये दो चीजें आपकी अंतरिम तलाश
- 37:21है, क्या शांति आनंद? अब ये खोज हमारी रेशम।
- 37:33के। संत कहते हैं तुम्हें सब मिल जाए,
- 37:41लेकिन अगर आनंद न मिले और शांति न मिले।
- 37:46आनंद आनंद की शांति ये एक ही चीज़ है जैसे आप और आपकी परछाई आपके
- 37:52बिना आपकी परछाई नहीं मिलेंगे। ऐसे ही आनंद की छाया है शांति
- 37:59शांति शांति करके शांति नहीं होगी, ओम शांति का जाप मत करो।
- 38:04इसका कोई फायदा नहीं है। जैसे ही आनंद आया, उसकी छाया की
- 38:08तरह शांति चली आई तो शांति, शांति का जप करना निरर्थक है।
- 38:16वक्त को खराब करना है, करना है तो करते रहो, मैं रोकता।
- 38:22भी किसी को। को जिसने भोगा नहीं, उसने रस से
- 38:29निकाला भी नहीं तो भोगने को मैं तुम्हें स्वतंत्र करता हूँ, तुम
- 38:34भोगो, इकट्ठा करो, शुभ नाम को बिलकुल इकट्ठा करो, लेकिन सब
- 38:41इकट्ठा करके उसका लाभ उठाओ। कॉम्पिटिशन लड़ो, बड़ी बड़ी
- 38:47पद्युए पाओ, पीएम बन जाओ। पीएम बनने के बाद भी तुम देखते
- 38:53हो। वैसे तो हाथ गंगन को आरसी का तीन
- 38:58तीन बार के प्राइम मिनिस्टर बने हुए आज भी टूटा हाथ में उठाई करते
- 39:02है। अबकी बार फिर मुझे वोट करना अबकी
- 39:06बार फिर मुझको सरकार दे दो ये क्या है?
- 39:12भूखे रह गया क्या ये इस रे भी मुझे ले लेने दो, चाहे वैज्ञानिक
- 39:17का ही क्यों ना हो ये इस रे भी मुझे ही ले लेने दो।
- 39:23चाहे यह कोच फैक्टरी में बना हुआ इंजन या डब्बा ना हो, झंडी में ही
- 39:31दिखाऊंगा। यह चीज़ इस बात का प्रत्यक्ष
- 39:38प्रमाण है कि सब भौंकती हुए भी ये।
- 39:42खाली हैं, पीते हैं, थोते हैं, बस यहीं से कुछ समझदार व्यक्ति
- 39:48अनुमान लगा लेंगे और एक कहावत आती है प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत
- 39:53नहीं होती। तुम पीएम बनना चाहते हो ना तो
- 39:59पीएम को देख लो। अभी वोट मांगता पड़ता है, हाथ में
- 40:04टूटा है, उसके लिए सैकड़ों आयोजन करेगा, चाणक्य बैठाए हुए हैं, यह
- 40:14शरारत कर दो, उधर यह शरारत कर दो, इसको खरीद लो, इसको दर्द खा लो।
- 40:18इसके पीछे आईडी लगा दो। ईडी लगा दो।
- 40:25ये क्या आयोजन हो रहे हैं? कुर्सी को पानी जाने कुर्सी में
- 40:31स्वाद नहीं यही आया ना तत्व रस यही निकला ना अभी भी जाल बिछा रहा
- 40:40है चाणक्य। अभी भी पीएम तृप्त नहीं हुआ, यह
- 40:47किस बात का इशारा है? यह किस बात की तरफ इशारा करता है?
- 40:59फिर जब ज्यादा पागल हो जाता है पीएम ज्यादा शक्तियां आ जाती हैं
- 41:03तो वो डिक्टेटर बन जाता है। फिर उच्चपदासीन हो के ये कहेंगे
- 41:11कि मुझे ही चुन लो सदा के लिए है रशिया के राष्ट्रपति पुतिन।
- 41:182036 तक के लिए वो। समझो।
- 41:23फिर भी अगर बने रहे तो उन्हें कौन हटाएगा?
- 41:28ये कहें के बस मैं ही नहीं। मैं यहाँ तक बात नहीं करता, मैं
- 41:35कहता हूँ उसके बाद भी। क्या इनके हास्य वो टूठा भिक्षा
- 41:42पात्र छिनेगा? नहीं छिनेगा तो कबीर कहते हैं,
- 41:48क्यों नहीं छिनेगा? कबीर देते हैं इसका जवाब
- 41:54अष्टावक्कर देते हैं इसका जवाब। संत देते हैं इसका जवाब तुम्हारी
- 42:00मूलताओं का जवाब संत देते हैं, जिन्हें मिल गया है, जिन्हें मिला
- 42:08ही नहीं, वो कैसे जवाब दे, आगे लोगों को डराएंगे डिकरेटर बनेंगे
- 42:14क्यों खुद डरते हैं? इन्होंने जाना कि मनुष्य डरता है,
- 42:21मनुष्य का मन डरता है और वह डराया भी जा सकता है।
- 42:27यह अनुभव ही नहीं आया कि हम डरते हैं तो दूसरों को डराया जा सकता
- 42:31है। जिसके पैर ना फटी विवाह, सो क्या
- 42:50जानें फिर पर। जिसके पैर न फटी विवाह, सो क्या
- 43:03जान पीर पर ये खुद डरे? तो इन्हें पता चला कि डर होता।
- 43:14है। दूसरों को भय दिखा के अपने वश में
- 43:18किया जा सकता है। सवाल यहाँ तक नहीं सवाल है कि
- 43:22दूसरों को भयद खिला के तुम राजगद्दी पर ले लोगे, मिला शक तुम
- 43:29एटम बम की धौंस भी दिखा दोगे? एक वो मोटू राम बैठे हैं।
- 43:33उत्तर कोरिया में बाकी सब डराते हैं वो तने डराते हैं न?
- 43:41ट्रंप डराते हैं, इसका तो चेहरा ही डरावना है।
- 43:45खैर न तो लगता ही पिशाच है। अगर किसी नहीं दिखा तो अमेरिका के
- 43:55राष्ट्रपति डोनाल्ड और ट्रंप को देखो या भूत अब इसको भगाओ कैसे
- 44:02भगाओ या पागल मुझसे बड़ा पागल है। सवाल ये है सब मिलने के बाद भी
- 44:16क्या तुम्हारा वृक्षापत्र छूटा तुमने?
- 44:21कितना ही भोग। लिया।
- 44:24बस यहीं आके स्थपक। कहते हैं।
- 44:29वो भोग ही क्या जिससे वैरागिना पैदा हो जाए?
- 44:33फिर तुमने प्रचुर मात्रा में ठीक से समय का भोग किया है, तो महावीर
- 44:39कहते हैं तुम समय का भोग कर लो, ठीक से भोग लो।
- 44:46तुमने ठीक से भोग नहीं तुम मूर्छित, मूर्छित से भोगते चले
- 44:50जाते, मूर्छित भोग से कोई प्रज्ञा उत्पन्न नहीं हो तुम भोगो, जाग के
- 44:59भोगो, फिर निकलेगा तत्व, फिर निकलेगा रस।
- 45:04और वह रस तुम्हारे भीतर तब्दीले लेके आएगा यही अस्तबक कहते हैं,
- 45:15डरो मत, सूचनाओं को इकट्ठा करो पुत्र।
- 45:25सूचनाओं को इकट्ठा करके कॉम्पिटिशन लगाओ।
- 45:28अभी तुम्हारी उम्र नहीं, जितनी परपक्व भाषा में तुमने बात करनी
- 45:32शुरू कर दी, ये बातें इतनी परपक्व हैं नहीं, तुमने इनका अनुभव नहीं
- 45:39किया अपने जीवन में, ये मैं नहीं बोली।
- 45:43और तुमने समृद्धि की तरह अपने नरोन्स में भर ली।
- 45:47यह भी नरोन्स को भरना हो गया मैं क्या कहना चाहता हूँ उसका थीम तो
- 45:53तुम समझे मैं कहता हूँ नरोन्स को भरना जीस दिन सार्थक न रहे व्यर्थ
- 46:02हो जाए। फिर मुक्ति की तरफ यात्रा शुरू
- 46:06होती है। तुमने ब्लैकबोर्ड पे गलत लिख
- 46:10दिया, सारा ब्लैकबोर्ड भर दिया, सारा ब्लैकबोर्ड भर दिया और कोई
- 46:15जगह नहीं बची और तुमने उसको दुबारा से पढ़ा।
- 46:20और पाया कि ये जो लिखा सब व्यर्थ है तुमने बहुत बार अपने ही लिखे
- 46:23हुए को मिटा दिया होगा, याद करो और फिर तुम मिटाने में लग गया
- 46:29सारा ब्लैकबोर्ड खाली कर दिया। ब्लैकबोर्ड फिर खाली हो।
- 46:34गया। बिलकुल ब्लैक पेपर की तरह है,
- 46:43व्हाइट पेपर की तरह है। तुम सूचनाओं को इकट्ठा करो, घबराओ
- 46:50मत डरो मत से जितनी हो सकें पूर्ण प्रज्ञा से, पूर्ण त्वरा से।
- 47:00इनको इकठ्ठा करो, ब्लैकबोर्ड। को भर लो, उस तल्क आ जाओ।
- 47:05सूचना इस समाहित होने से इंकार कर दिया और नहीं है जगाने न उस स्पेस
- 47:14फिर तुम्हारी आत्मा भीतर से डिमॅंड करेगी इन्हें मिटाओ ये दुख
- 47:19देते हैं। तकलीफ देते हैं।
- 47:21ये कांटे तुमने कहाँ से इकट्ठे कर लिया?
- 47:23सुख तो नहीं मिला, यह बकवास है, तुम लोगों को सम्मोहित कर सकते
- 47:29हो, प्रश्नों का जवाब दे, लेकिन प्रश्नों का जवाब देना ही
- 47:37पर्याप्त नहीं है आनंद के लिए। जीवन की गुंडों का सवाल हल होना
- 47:46चाहिए कब तुम्हारी सूचनाएं जो तुमने इकट्ठी की नीरांज में वो
- 47:55व्यर्थ से पहुँच जाएं तब यात्रा शुरू?
- 47:58होगी। अध्यात्म के।
- 48:00उससे पहले संसार की यात्रा है। ये तो पूरी करण तुम संसार की
- 48:07यात्रा पूरी करने से पहले अध्यात्म की यात्रा के बारे में
- 48:11सोचने लग गए। अब ये नई मुश्किल खड़ी हो गई।
- 48:17तुम कहते हो बाबा पढ़ता हूँ। तो डर लगता है न्यूरोन्स ना बढ़
- 48:22जाए, मेरी मुक्ति में बाधा ना बन जाए, नहीं बनेगी तुम बिलकुल
- 48:26बेफिक्र हो की न्यूरोन्स को इकट्ठा करो इन न्यूरोन्स को
- 48:31इकट्ठा करके बड़े विद्वान बन जाओ प्रवचन करो इन आइचार्यों की तरह
- 48:38डिमॅंड करो। संस्था को धन की जरूरत है।
- 48:43दंतो लोग दान देंगे तुम्हारी सब तकलीफें मर जाएगी अगला प्रश्न मैं
- 48:48लेता हूँ अब तुमने कहा मेरे और मेरे पिता जी वृद्ध हैं।
- 48:57मेरे पिताजी वृद्ध होने के कारण हमारी दोनों की निगाहें सिर्फ
- 49:01तुमपे हम कर्जदार हैं सब बिक गया घर, मकान, दुकान सब।
- 49:06बिक गया खेत? कल्याण सब बिक गया सिर्फ एक कार
- 49:09बेचू। उस पर भी लोन अभी नौकरी भी नहीं
- 49:14मिली। 2030 40,000 की नौकरी मिल जाएगी
- 49:17तो इतना कर्जा है कि उसको उतारेंगे।
- 49:19कैसे जाने भविष्य की डर किसको नहीं सताता सबको सताता।
- 49:26है, जिसके पास है उसको भी डर सीखाता है।
- 49:31उसको भी डर डराता है। जिसके पास नहीं है उसको भी डर ये
- 49:40डर काहे का है? कहीं ऐसा ना हो जाए कहीं ऐसा ना
- 49:44हो। जाए।
- 49:45जिसके पास है उसको डर है कि कहीं कोई चोरी ना करके ले जाए।
- 49:51रात को डाका नंबर। कभी चौकीदार मालिक ही ना बन जाए
- 49:57और ऐसा है मेरे इशारे को समझ लेना।
- 50:02जिन्हें जोड़ लिया वो चौकीदार रखता है, चौकीदार क्यों रखता है?
- 50:11कहीं चोरी ना हो जाए। लेकिन अगर चौकीदार ही ताला तोड़
- 50:17के मालिक बन जाए फिर कहो यथार्थ यही है कि चौकीदार मालिक है, आगे
- 50:24चले। चलो।
- 50:27समझ ले लेना मेरी बातों से थोड़े से इशारों में गुंडियां होती हैं।
- 50:32बड़े काम पड़ेंगे, तुम्हारे बड़ा कर्जा है, सब गिरवी रख दिया, बिक
- 50:42गया कार है उस पर भी लोन है, अब क्या करें बाबा?
- 50:48दो रास्ते हैं। एक चारवाक बन जाओ रिणम कर्त्व अगर
- 51:02तुम ले कर्ज उठा लिया, मुकर जाओ, घी पी लिया।
- 51:12अरे हंस क्यों रे? ये तरीका है भाई चार बार नहीं
- 51:15होता है हतो हो के तुम तो दाँत पाटे लेते हो बतीसी यह मनीष है,
- 51:23खास तौर से दांत पाटे ही रखते हैं।
- 51:30तुम कहते हो कर्ज है मेरे पिताजी और मेरे।
- 51:33दिमाग पर बोझ और सिर्फ आशा आपसे है, एक आशा आप जी से दो जी आशा
- 51:45छोड़ दे चाहिए भी ऐसे एक के ऊपर ही आशा रखो।
- 51:53दूसरे के ऊपर के आश्चर्य छोड़ता हूँ।
- 51:57ये शुद्ध प्रज्ञा का परिणाम है। हाथ भी हो जाएगा।
- 52:02पुत्र तुम चिंता मत करो। मुकर जाओ नहीं है हमारे पास ये
- 52:15कार है ले जाओ ऋण मुक्त कर दो हमें कम से कम चैन का खाना खावाओ
- 52:25दूसरा मार्कस नहीं देना ही नहीं हमें।
- 52:31है ही नहीं परमार्थ अरे मत रखो भाई, नात फिर पड़े रखते हो नहीं
- 52:38देना है नहीं होता है एनलाइटनमेंट नहीं होता है परमार्थ मुकर हो जाओ
- 52:47ये प्रमाण पत्र। ये होगा प्रमाण पत्र मेरे दस्त।
- 52:50की। भोंकते फिर अदालतें 20 साल से
- 52:53पहले न्याय नहीं देती, कम से कम लिखवालो अब बल्कि तो 40 साल
- 53:01व्यक्ति के गुजर जाने के बाद हमने फैसले आते देखे।
- 53:05आमतौर से। क्योंकि न्यायाधीश भी डरते हैं
- 53:10अगर मैंने अपने जीते जी फैसला कर दिया।
- 53:15तो? क्या होगा?
- 53:18प्रत्येक व्यक्ति जगमोहन सेना नहीं हुआ करता, जिसकी छाती 156
- 53:24इंच की होती। जोइन्द्रा को कहते हैं नीचे आ
- 53:28जाओगे तुम्हारा इलेक्शन कैंसिल किया जाता है तुमने सेना का उपयोग
- 53:37किया तुमने सरकारी तंत्र का उपयोग किया अपने इलेक्शन के लिए और आज
- 53:43तो सरेआम। सेना को लगाया जा रहा है और सतह
- 53:50है। संज्ञान लेने के लिए कोई भी
- 53:53ज्यूडिशियरी आगे नहीं आती। क्यों?
- 53:57इसलिए आगे नहीं आती? कहीं ऐसा न हो कहीं वैसा न हो,
- 54:03समझ नहीं आई। आगे ही ना?
- 54:05हाँ नमस्ते, लेकिन ये भय है सिर्फ तुम ही डरते हो ये मत समझ लेना
- 54:18थोड़ा छाती और फलाके देखो तुम देखोगे ये भाग जाएंगे तुम 100।
- 54:2552,00,00,000 हो कहाँ करते हो तुम?
- 54:34अरे चार चट भुजिया तुम्हारे काबू नहीं आते।
- 54:41चार हो 40 हो 40,000 हो या 40,00,000 हो 152,00,00,000 जनता
- 54:48के आगे तो कुछ भी नहीं नेगलिजबल हैं।
- 54:50ये कैसे राज़ कर रहे हो तुम? यह कोई तंत्र है?
- 55:00या कोई विधान है? एक व्यक्ति भूखा सड़ जाए एक
- 55:07व्यक्ति के खजानों में ट्रंकों में भरा रहे, मैं रोज़ बोलती हूँ,
- 55:12बैंकरों में जमा खेत खलिहान तुम्हारे रोज़ कुर्कियां होती
- 55:17हैं, गरीबों की कुर्कियां होती हैं।
- 55:22जब कोई तंत्र है। गलत है इस तंत्र को खत्म करता।
- 55:25है। पहला रिश्ता तुम यूनाइटेड हो जाओ,
- 55:36दुनिया के गरजदारों। तुम जो नहीं ठुड़को जाओ यही माँ
- 55:42किसने कहा था के सभी देवता थे, सभी संत थे जो तुम्हारी बड़ाई के
- 55:50लिए जीने के नियम बता दे। एक नियम चारवाक बताते हैं, नहीं
- 55:57है ना तुम्हारे पास तुम कर जाओ, कोई बात नहीं खा गए घी पी लिया
- 56:02ठीक कोई बात नहीं है नहीं तुम कर जाओ, जब होंगे तब वापस कर देना ये
- 56:09जीने के तरीके बता के गए हैं तुम जब कोई बुरे व्यक्ति नहीं।
- 56:14जीने का टीका बता गया चारवाक तुम देखो तुम्हारे साथ मैच कौन सा
- 56:19खाता है? दूसरा तरीका है मार्कस मार्कस
- 56:24कहता है तुम इकट्ठा हो। जाओ मज़दूरों इकट्ठा हो जाओ
- 56:32तुम्हारे पास खोने के लिए। लोहे की जंजीरों के सिवा कुछ भी
- 56:37तो नहीं है और पाने के लिए सोने की खदानें हैं।
- 56:45खोने के लिए लोहे की जंजीरों के सिवा कुछ भी तो नहीं है।
- 56:51और पाने के लिए सोने की खदानें। ये अजूबा नहीं, जो इन व्यवस्था को
- 56:59तुम बरसों बरसों तक झेल गए। यह पूँजीवादी व्यवस्था कब से चल
- 57:06रही है? चलनी चाहिए।
- 57:08मैं हमेशा एक प्लेनेट का जिक्र करता हूँ, वहाँ पूँजी ही है खत्म
- 57:12कर दिया। बड़े ही समझदार लोग।
- 57:15होंगे। और मैंने तुम्हे कहा परमात्मा
- 57:20व्यवस्था को वापस नहीं लेता। जो नियम कानून कायदे उसने बनाए वो
- 57:24बदलता नहीं, कभी तरमीम नहीं करता हूँ।
- 57:27मॉडिफिकेशन नहीं करता। हूँ।
- 57:32जो आज तुमने एटम बम्ब बनाया, वो लाखों साल पहले भी बन सकता था,
- 57:37क्योंकि यही थी तकनीक और यही रहेंगी आगे और तुम्हारे फरिश्ते
- 57:45को भी नहीं पता के धरती कितनी बार एटम बम्ब ने खत्म कर दी।
- 57:52मोहन जोदड़ो हड़प्पा जिसे सिंधु घाटी की सभ्यता कहते हो, एकदम से
- 58:00खाक हो गई खंडहर हो गए ऐसा शानदार व्यवस्थापित माहौल सिंधु घाटी।
- 58:11और पल भर में तम्बा हो गया। ऐसा क्या होगा?
- 58:14कोई एस्ट्रोइड हो सकता है। ज्यादा मुमकिन है ऐटम बम, ऐटम बम,
- 58:23इतनी शीघ्र तबाही और ऐसी तबाही ऐटम बम भी कर सकता है।
- 58:28जो दृश्य वहाँ पर देखे गए मोहनजोदड़ो में।
- 58:34हड़प्पा में और दृश्य यही बताते हैं, यहाँ एटोमिक एक्सप्लोजन हुआ
- 58:40होगा मार्कर्स कहते हैं कि तुम्हारा जिसने छीना है उसे तुम
- 58:48छीन लो। तुम्हारे पास खोने को लोहे की
- 58:53जंजीरों के सिवा कुछ भी नहीं पाने को स्वर्णिम संसार है।
- 58:58सारा तीसरा फार्मूला आता है बाबा नानक का।
- 59:12और ध्यान रखें। बाबा नानक सबसे बाद में आने वाले
- 59:18संत परिष्कृत रूप संतो का प्यूरीफाई बाबा क्या कहते हैं?
- 59:33बाबा कहते हैं जिन्होंने तुमसे छीना, उनसे छीना भी मत, किसी का
- 59:44मुकरो भी मत, किसी से बेईमानी भी ना करो।
- 59:55ठगी भी ना मारो, कुंड भी ना अपनाओ, मल भक भी ना खाओ तो क्या
- 1:00:05करे? बाबा का बड़ा अजीब फॉर्मूला है।
- 1:00:08इसको ध्यान से सुन लेना, इससे पहले तुने वीडियो ध्यान से सुनी
- 1:00:12हो कर ना सुनी हो। कोई बात नहीं चलेगा।
- 1:00:19बाबा संतत्व का परिष्कृत और सरल रूप है।
- 1:00:24इससे ज्यादा सरलता और किसी संत में नहीं।
- 1:00:31बाबा कहते हैं किसी समाज को बदलने की जरूरत नहीं, किसी नियम को
- 1:00:37बदलने की जरूरत नहीं, किसी सर्कमस्टैंस को बदलने की जरूरत
- 1:00:42नहीं, बाहरी आवरणों को मत बदलो। किस को बदलू?
- 1:00:58बाबा कहते हैं कृत करो अपनी मेहनत करो, सबसे पहले कृत करो, वर्ण
- 1:01:07छको। अगर तुम्हारे पास बच ही जाए।
- 1:01:12अपना घर का गुजर वैसा करके यही सभी संत करते रहे।
- 1:01:20कबीर भी यही करते रहे। हजरत मुहम्मद भी यही करते।
- 1:01:24रहे जो बच जाता शाम को बांटते थे। कृत कर सबसे पहला कर्म कर, मेहनत
- 1:01:34कर, वंड छक अपने परिवार का पोषण करके जो बच जाए उसे बांटते हैं।
- 1:01:49नाम जप। और उसके होने का आनंद उठा नाम
- 1:02:01बाबा कहते हैं, जो सब जगह मौजूद है उसे नाम कहते हैं।
- 1:02:05उसके होने का आनंद उठा। ज़िन्दगी का सारा तत्व इसमें आ
- 1:02:13गया, सारे इसमें गया, मौज उठा। मौज से जी अपने अंतः को रूपांतरण
- 1:02:26कर। जो होता है सहज स्वीकृत कर बाहरी
- 1:02:36अट्मोसफियर को मत बदल, मनः स्थिति को बदलो, मन को तैयार करो, सब कुछ
- 1:02:45जो होता। है।
- 1:02:47उसको स्वीकार करने के लिए। किरत कर पुरुषार्थकर मेहनत कर नाम
- 1:02:58जप, वंड छक जो बच जाए वह बांटते। और होने का लुत्फ।
- 1:03:09उठा। तुम जिंदगी में आए कितने साल की
- 1:03:13जिंदगी जीए, तुम कहोगे मैं 19 वर्ष की जिंदगी जीए तुम्हारे
- 1:03:19पिताजी। शायद 6070 के होंगे या कम ज्यादा
- 1:03:26हो। सच में पूछूं?
- 1:03:31उससे? उन्होंने कभी ज़िन्दगी का एक
- 1:03:34लम्हा चयन से गुज़ारा क्यों नहीं गुज़ारा कि तुम सर्कमस्टैंसेस से
- 1:03:42सदा लड़ते? रहे।
- 1:03:49सर्कमस्टैंसेस को अपने अनुकूल बनाने में जुटे रहे।
- 1:03:54बाबा जड़ को काटे बाबा कहते हैं, सर्कमस्टैंसेस को मत बदलो, गरीब
- 1:04:01हो, कोई बात नहीं। गर्त करो जब उससे तुम्हें मिले,
- 1:04:09उसका भरण पुषण करो, बच जाए पांडव आज पागलों की जमात इकट्ठी हो गई।
- 1:04:23कुछ लोगों के पास संसार का पैसा इकट्ठा कर रही है, बाकियों को
- 1:04:30भूखा मारने पर तुली है। यह व्यवस्था मानवता के ही नहीं,
- 1:04:38जीवों के भी विपरीत। है।
- 1:04:41अस्तित्व के भी विपरीत, अस्तित्व ने सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं दिया।
- 1:04:48अस्तित्व ने थोड़े से लोगों के लिए 10 5% लोगों के लिए नहीं दिया
- 1:04:55अस्तित्व में 100% जीवों के लिए दिया।
- 1:04:59और तुम सभी को खा जाते हो, मुर्गे तुम खा जाते हो बकरे तुम खा जाते
- 1:05:06हो सांप चूहे तुम खा जाते हो और गरीबों को तुम खा जाते हो।
- 1:05:17बना एक व्यक्ति सारे संसार की संपदा को इकट्ठे करके करेगा क्या
- 1:05:26तुम पागल? हुए हो क्या तुम्हारे दिमाग में
- 1:05:32कुछ फर्क तो नहीं हो गया है? अगर तुम अकेले ही रह जाओ संसार
- 1:05:39में तो ज़रा सोचोगे क्या करोगे दीवारों से टक्करें मारोगे?
- 1:05:47वृक्षों से टकरा टकरा के मर जाओगे क्योंकि कोई संगीत शास्त्री ना
- 1:05:53होगा। तुम्हारा साथ देने को एक व्यक्ति
- 1:06:05या कुछ एक व्यक्ति पांच चार 10,00,000 50,00,000 करोड़
- 1:06:12व्यक्ति अगर सारे संसार की संपदा को हड़पना चाहते हैं?
- 1:06:18तो ये पागल हो गए हैं तो मैं समझा दूँ मैं।
- 1:06:21बात। या तो इन पे नकेल कस लो की।
- 1:06:29बात। इन्हें रोको, इनका लूट लो।
- 1:06:41यह मार्क्स करता है। और अगर बाबा की बात मानने गुरु
- 1:06:50नानक देव की सबसे बाद में आई बाबा के बाद कोई शांत नहीं आया, मैं
- 1:06:55तुम्हें समझा। बाबा के बाद कोई संत नहीं आया।
- 1:07:00गुरु नानक के बाद आखिरी परिष्कृत रूप से बाबा नानक आए, उसके बाद
- 1:07:11जीतने भी आए। बाबा नानक की नकल करने वाले हैं।
- 1:07:15पांच नाम ले लो, जपते रहो गुरु धारण कर लो हम आखिर में तुम्हारी
- 1:07:23अंगुली पकड़ेंगे, सच ए कण ले जाएंगे कोहरे।
- 1:07:26बकवास? अपनी संख्या को बढ़ाना या अपनी
- 1:07:34संपदा को बढ़ाना एक ही प्रकार के कर्म हैं संचित निधि को बढ़ाना और
- 1:07:44चाहे धन हो, चाहे व्यक्ति हो, चाहे राजनीतिक पार्टी हो।
- 1:07:51चाहे धार्मिक संस्थान हो, तुम चाहते क्या हो मूर्खों की संख्या
- 1:07:57को इकट्ठा करके तुम चाहते क्या हो यही ना कि तुम्हारे विपरीत कोई
- 1:08:02बोलेंगे तो उसका मुँह तोड़ दोगे तोड़ दोगे लेकिन शक्ति को बदल
- 1:08:08पाओगे। सत्य को नहीं बुला तुम लाख इकट्ठा
- 1:08:16कर लो, दुनिया भर का इकट्ठा कर लो, मैंने उदाहरण दी, तुम्हारे
- 1:08:23पीएम आज भी टूटा उठाई करते। हैं।
- 1:08:27और बहुत से लोग कहते हैं ये तो मांगते हैं वोट।
- 1:08:30कि इन्हें आनंद आता है राज़ करने में।
- 1:08:33मैंने कहा नहीं आनंद आया हो तो भोजन का पैमाना क्या है?
- 1:08:40भोजन का लक्षण क्या है? भोजन का लक्षण है कि तरफ हो जाओ
- 1:08:45बस और जरूरत नहीं भाई तुम पंकज में बैठो।
- 1:08:50और तृप्त हो जाओ, उसके बाद कहो पूरी वाला आएगा, खिचौड़ी वाला
- 1:08:54आएगा सब्जी लेके आएगा, रायता लेके आएगा, 100 चीजों के हलवे प्रसाद
- 1:09:00लेके आएगा, तुम कहोगे नहीं बेनी और नहीं यह तपती के निशानी हैं।
- 1:09:07ओर मांगना तृप्ति की निशानी नहीं है।
- 1:09:11इन आखिरी पंक्तियों को ध्यान से सुन लेना चाहे पहले की वीडियो
- 1:09:16सुनी या नहीं सुनी कोई फर्क नहीं। इसमें सारा रस निकाल दिया गया।
- 1:09:27राज़ करने में तृप्ति मिलती है, आनंद आता है।
- 1:09:31अगर आनंद आता है तो मैं पूछता हूँ तृप्ति की निशानी क्या है?
- 1:09:36भोजन की निशानी क्या है? लड्डू वाला है कचोरी वाला ये
- 1:09:41रसगुल्ला वाला गुलाब जमने वाला तुमको नहीं भाई नहीं, वो कह गए एक
- 1:09:45बालू शाही तो खा लो। तुम कहो कि नहीं भाई कहाँ से कर
- 1:09:48लूँ और नहीं मन करता गल तक तो आ गया है।
- 1:09:53यह है तृप्ति के निशान? तुम उसे तृप्ति के निशान नहीं
- 1:10:00कहते हो, जिसका ठूठा अभी भरा है। तीन बार राज़ करो, पांच बार राज़
- 1:10:07करो, 20 बार राज़ करो, राज़ करते ही चले जाओ अभी 15 साल और राज़
- 1:10:12करेंगे मतलब इतने भूखे। 15 साल और पंगत में बैठेंगे,
- 1:10:18खाएंगे तप तो फिर भी नहीं होंगे। बींसवीं सदी शुरू हो रही।
- 1:10:30थी। ध्यान से समझना मेरी बात को 1999
- 1:10:35का आखिरी दिन 31 दिसंबर 31 दिसंबर 1999।
- 1:10:45रशिया के इतिहास का एक शानदार दिन बींसवीं सदी का आगाज़ की अंतिम
- 1:10:54रात पहली। रात।
- 1:10:5931 दिसंबर 1999। रशिया के राष्ट्रपति बोरिस सियासत
- 1:11:06से मेरे को याद है वो दिन बिल्कुल अच्छे भरे पदासीन मैं तुम्हें
- 1:11:16तृप्ति के निशानी बता रहा। हूँ।
- 1:11:22किसी ने तख्ता पलट नहीं किया। बोरिस यतसिन अर्ध रात्रि को घोषणा
- 1:11:30करते हैं कि मैं एस ए प्रेसिडेंट ऑफ रशिया रिसायें।
- 1:11:43मैं इस्तीफा देता हूँ। 31 दिसंबर 1999 की अर्ध रात्रि को
- 1:11:54बोरिस एल सिंह ने अपना पदभार छोड़ दिया।
- 1:11:57स्वते। ध्यान से सुनते हैं ना बात को, ये
- 1:12:02होती है तृप्ति की निशान तुम कहते हो 15 साल और राज़ करें तुम्हारी
- 1:12:12सोचने का ढंग। अलग है।
- 1:12:17मेरे सोचने का ढंग और मैं तरफ बड़े मज़े की बात है, तुम सामने
- 1:12:27बैठे चीज़ को नहीं देखते, मैं संतुष्ट हूँ मैं तरफ।
- 1:12:37वो इस यत से अर्धरात्रि को घोषणा करते हैं।
- 1:12:42रशिया के एस प्रेसिडेंट के रूप में मैं त्यागपुरा देता।
- 1:12:51हूँ ये निशानी होती। है।
- 1:12:55बस। और नहीं चाहिए।
- 1:13:00उसके बाद राष्ट्रपति आए आज व्लादिमीर पुतिन वो सुबह मुझे याद
- 1:13:08है जब हमें खबर मिली के रशिया में।
- 1:13:13कोई क्रांति नहीं है, कोई तक्शप रखता है।
- 1:13:16स्वेच्छा से बोरिसियल सिंह ने अपना पदभार छोड़ दिया।
- 1:13:20वे उसे बाहर लगने। लगा।
- 1:13:25तुम्हें अभी ये भार लग नहीं। रहा।
- 1:13:32तुम्हें अभी ये गहने लग रहे हैं जो शरीर को स्वभाव मान करते हैं।
- 1:13:37जीस दिन तुम्हें इसका। भार।
- 1:13:40पहने हुए गहनों का भार लगने लगा कि भार है तुम उतार दोगे।
- 1:13:51तुम कहते हो ये और वोट मांगते हैं 5 साल के लिए क्योंकि राज़ करने
- 1:13:57में सुख है तुम्हारा पैमाना अलग है मैं।
- 1:14:07कहता हूँ इसीलिए मांगते हैं फिर से 5 साल।
- 1:14:11क्योंकि राज़ करने में सुख नहीं वह भोजन ही क्या, जो तृप्ति ना गए
- 1:14:19कभी ऐसा हुआ कि तुम लंगर में गए और बैठे ही रहो बैठे ही रहो, कभी
- 1:14:28हुआ ऐसा तुम्हारे साथ कभी किसी के साथ हुआ?
- 1:14:31नहीं ना ही कभी होगा क्योंकि भोजन करने की एक लिमिटेशन होती है।
- 1:14:39कभी तो व्यक्ति तृप्त होगा ही नहीं भोजन।
- 1:14:45करने में तृप्ति होती है भूख की। मर जाती है भूख जिसकी भूख अभी
- 1:14:53जागृत रही, क्या वह तृप्त हुआ? मुझे सोच के बता देना जो अभी भी
- 1:15:02पंगत के अंदर लंगर में बैठा है। क्या वह भोजन से तृप्त हुआ?
- 1:15:10नहीं हुआ इसलिए और मांगता है तो अगर तुम्हारे प्राइम मिनिस्टर
- 1:15:16तुम्हारे अगर होम मिनिस्टर जीतने भी मिनिस्टर जीतने भी राज़ करने
- 1:15:20वाले लोकसभा में बैठे और तुम्हें मौका मांगते हैं तुमसे इसका अर्थ
- 1:15:27क्या? है।
- 1:15:29राज़ करने से सुख मिला या सुख नहीं मिला या ऐसा सुख मिला जो
- 1:15:37तृप्त नहीं कर पाया। तीसरी बात बिल्कुल ठीक है।
- 1:15:42सुख मिला, सुविधा मिली, 7 दिन मिले ऐसा सुख नहीं मिला।
- 1:15:48जिसे बाबा आनंद कहते। हैं।
- 1:15:54वह सुख जोतृप्त करते आत्मा के रोम, रम को शरीर के रोम रम को जब।
- 1:16:02डकार आ जाए तुमको, वह हे करो वह। देखो इसको जपना नहीं है, ऐसी
- 1:16:12स्थिति में ले आना है। फ़िल्म को बह के गुरु का जाप न
- 1:16:20करना है। तुम ऐसी स्थिति में अपने मन को ले
- 1:16:24आओ। जब तृप्ति के उस आलम में तुम्हारा
- 1:16:30रोवा रोवा पुकार जाए, वह वह एक गुरु इस आलम में लेके आना है खुद
- 1:16:39को। आएगा।
- 1:16:40कैसे सर्व स्वीकृति के द्वारा। जो होता है।
- 1:16:52उसको बर्दाश्त करने की क्षमता अपने आप में भीतर पैदा करो होता
- 1:16:59है तेरी रजा में होता है ठीक। होता है।
- 1:17:05और संत अखर में यही कहता है लावजे कहते हैं वह जो करता है ठीक करता
- 1:17:15है। और, भले के लिए करता।
- 1:17:19है। तुम्हारी अवश्वसनीय थोपड़ी इस बात
- 1:17:27को मानेगी इसलिए तुम दुखिया हो? क्योंकि जैसे ही तुमने इस बात को
- 1:17:36मानना शुरू कर दिया, जो करता ठीक करता, तुम्हारी ज़िन्दगी में
- 1:17:39चमत्कार गठित होने शुरू हो जाएंगे।
- 1:17:43तुम कहती चमत्कार दिखाओ, मैंने कहा तुम छोड़ो के दिखाओ, उसके ऊपर
- 1:17:47चमत्कार गठित होने शुरू हो जाएंगे।
- 1:17:52मेरे चमत्कारों से क्या होगा? तुम खुद के साथ ही चमत्कार करो।
- 1:18:01उसकी रज़ा में राजी रहता है, राजी यारदी राजी यारदी राजा।
- 1:18:18दे विचरण? रैना कोली छुपाएं कख नारवे कोली
- 1:18:29छुपाएं कख नारवे चाहे कुछ भी ना रहे, मेरे पास वैसे भी कुछ नहीं
- 1:18:37रहेगा। आखिरी 1 दिन आएगा।
- 1:18:40जैसे तुम भी नहीं होगे, तुम्हारा भी कोई नहीं होगा।
- 1:18:46क्यों ना मरने से पहले ही राजी हो जाओ, जो आखिर में होना है उसके
- 1:18:53लिए मृत्यु से पहले ही अपने आप को तैयार कर लो, राजी हो जाओ उस घटना
- 1:18:57के लिए। बस बाबत में यही बात समझाते।
- 1:19:01हैं। इसी बात का संदेश लेकर मैं ये आज
- 1:19:05की वीडियो प्रसारित कर रहा हूँ। हर हालत में हर परिस्थिति में
- 1:19:13उसकी रजा समझ कर स्वीकार कर रहा हूँ।
- 1:19:18ठीक तू जो करता, ठीक करता है? तो तुम्हारे ये ट्रिलियन डॉलर की
- 1:19:29मालिक बनने वाले मास्क तुम्हारी तरफ़ देखते रह जाएंगे।
- 1:19:35भौचक्के हक्के वक्के। क्या हुआ इस व्यक्ति को?
- 1:19:40अरे मैं तो मांगता ही रह गया, ये तो ठाठ से सो गया, ये तो वरांठे
- 1:19:47मर रहा है, हमें तो नींद नहीं आती।
- 1:19:53ये आखिरी। संतों का निष्कर्ष है जीने का ढंग
- 1:20:02चारबा करक से बताती है, मुकर जाओ, कर्ज ले लो, घी पी लो, वापस मत
- 1:20:11करो। अगर कोई वापस मांगे तो उल्टा उसके
- 1:20:16ऊपर खाना कचहरी करके उल्टा कहो, मैं नहीं लेनी है।
- 1:20:31मार्कस कहते हैं, इन्होंने तुम्हें लूटा है, इन्हें तुम रूठो
- 1:20:37लेकिन बाबा कहते हैं दोनों ही ठीक नहीं, दोनों ही मार्ग मूर्खों के
- 1:20:46मार्ग हैं। जो कहता है कर्मफल है नहीं विधान
- 1:20:56है नहीं, वह भी जानता नहीं जानता नहीं, इसलिए मानता नहीं उसका कसूर
- 1:21:04भी तो नहीं है। मार्क एस कहते हैं, गरीबों एक हो
- 1:21:09जाओ। खो जाओ, छीन लो क्रांति कर दो
- 1:21:18बिलकुल तुम बांट लो समाज को बिलकुल बराबर बांट दो लेकिन बाबा
- 1:21:25कहते हैं क्या बाँट पाओगे? फिर कल को फिर उत्पात मचेगा।
- 1:21:31तुम कहोगे वो तो तीन रोगियों खाता है, वह बीज खा जाता है, ये तो
- 1:21:38असमानता होगी, तुमने बखेड़ा करना ही करना है।
- 1:21:45किसी भी बात को तुम बखिड़े में परिवर्तित करने के माहिर हो दक्ष
- 1:21:50हो अगर सब संपत्ति को तुमने बांट। दिया।
- 1:21:57तो भी बिखेरा हो जाएगा तुमको भी वो तो तीन किलो दूध पी जाता है,
- 1:22:02हमसे तो पांव भी नहीं पचता। ये तो ईश्वर ये व्यवस्था है भाई
- 1:22:08इसको कैसे बदलोगे? तुम जिसे तुम कम्युनुजम कहते हो,
- 1:22:15समाजवाद कहते हो साम्यवाद कहते हो वो आयी ही नहीं, ऐसा नहीं की आएगा
- 1:22:21नहीं। तुम संपत्ति का बंटवारा बराबर से
- 1:22:23कर सकते हो। वो मैं क्या तुम कर दो कोई भूखा
- 1:22:27ना मरे और किसी के गोदाम में पड़ा ना सड़े, ऐसी अवस्था नहीं आनी
- 1:22:36चाहिए बिना अन्न के कोई मर जाए। और किसी के गोदाम में पड़ा सड़
- 1:22:41जाए, यह नहीं होना चाहिए, लेकिन ध्यान रखना समाजवाद नहीं आएगा।
- 1:22:50किसी का पेट दर्द करेगा, कोई कुराड़े मर के सोयेगा कितना ही
- 1:22:56बराबर में बांटते? समाजवाद आने को नहीं, तुम्हारी सब
- 1:23:02कोशिशों असफल हो जाएंगी। धन बराबर बांट दोगे।
- 1:23:10सुख और दुख बराबर कैसे बांटोगे ये तो परमात्मा के दिन?
- 1:23:17ज ना बांट पाओगे, संपत्ति को बांट दोगे, खुशादी को कैसे बांटोगे?
- 1:23:25एक व्यक्ति स्वाभाविक रूप से प्रसन्न रहता है।
- 1:23:29उसकी प्रसन्नता को कैसे बांटोगे? एक व्यक्ति स्वाभाविक रूप से दुखी
- 1:23:34होता है। उसके दुख को कैसे बांटोगे नहीं
- 1:23:40बांटोगे समाजवाद तुम भौतिक रूप से।
- 1:23:44कर सकते हो? ईश्वर्य रूप से समाजवाद आता ही
- 1:23:50नहीं, कभी आएगा भी नहीं। तुम लक्ष्येष्टा कर लेना।
- 1:23:55समाजवाद नहीं आएगा। हाँ, धन का बंटवारा बराबर कर
- 1:23:58दोगे, इसका बंटवारा करने के बजाय मैं तुम्हें एक और फॉर्मूला बता
- 1:24:03देता हूँ, जो उस ग्रह पे मैंने देखा वहाँ करेंसी ही नहीं है।
- 1:24:09सभी लोग अपनी दक्षता और कुशलता के आधार पर।
- 1:24:14काम करते हैं जो खेती करना जानता है।
- 1:24:16खेती करें जो इलाज करना जानता है वो डॉक्टरी करें निर्माण करना
- 1:24:23जानता है वो इंजीनियरिंग करें। जो प्लान्टेशन करना चाहता है, वो
- 1:24:29बीज हुआ है। जिसके पास जो कुशलता है वो वही
- 1:24:34काम करे और ईमानदारी से करे। जो स्वर्ग है पैसे का लेन देन ना
- 1:24:40कोई इकट्ठा ना करेगा, कोई बेईमानी ना करेगा।
- 1:24:44अगर मास्क को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनता है खुद।
- 1:24:51तो बन जाए क्या इस तरह से? लेकिन एक बात समझ लेना धन का
- 1:25:02मालिक हो सकता है। आनंद से चूक जाएगा आनंद का मालिक
- 1:25:08नहीं हो पाएगा एक जर्रा। सारे संसार की दौलत को कमा के भी
- 1:25:14एक जर्रा आनंद का नहीं खरीदा जा सकता।
- 1:25:26आखिर में। इसका रस रूप मोहब्बत के लिए कुछ
- 1:25:35खास दिल मकसूस होते हैं। मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल मकसूस
- 1:25:43होते हैं। ये वो नगमा है जो हर सास पे गाये
- 1:25:47नहीं जाता। तुम लाख मस्क बन जाओ, लाख सिकंदर
- 1:25:56बन जाओ सिकंदर से बड़ा तो मस्क है भी नहीं।
- 1:26:02सिकंदर ने करीब करीब आंधी दुनिया जीत ली वह मरा।
- 1:26:08तो कह के बड़ा मैं समझता था मैं अमर हो जाऊंगा, इतनी छोटी सी उम्र
- 1:26:15में चला हूँ, रुख से जहान हो रहा हूँ।
- 1:26:1932 वर्ष की उम्र में मुझको इसका अंदाजा नहीं था।
- 1:26:28मैं समझता था ज़िन्दगी लंबी है और ये धरती जीतने को छोटी है लेकिन
- 1:26:35हुआ उल्टा ज़िन्दगी छोटी। है।
- 1:26:41आज महसूस हो रहा है ज़िन्दगी छोटी।
- 1:26:48न तुम्हारे धन से मिलेगा, न तुम्हारी पधुई से मिलेगा, न
- 1:26:52तुम्हारी सूचनाओं के संग्रहण करने से मिलेगा, न तुम्हारी खेती और
- 1:26:58श्रेय। इकट्ठा मान सम्मान से नहीं
- 1:27:00मिलेगा। तुम्हारे किसी भी चीज़ की उपलब्धि
- 1:27:04से भौतिक इकट्ठे से तुम्हें नहीं मिलेगा।
- 1:27:13जिसके बाद संत करते। हैं।
- 1:27:18ये बोल नगमा है, जो हर साझ पे गाया नहीं जाता, वो पैदा कैसे
- 1:27:24होगा? पैसे से नहीं पैदा होगा।
- 1:27:30इसलिए पैसा तो बहुत लोग छोड़ के जनमनी हो गए, कुछ हो गए कुछ हो
- 1:27:35जाएंगे। पदवी से नहीं मिलता।
- 1:27:43मैंने अभी कहा आपको यज्ञ से ने राष्ट्रपति की गद्दी स्वच्छता से
- 1:27:49छोड़ दिया और बींसवीं सती का आगाज?
- 1:27:56व्लादिमीर पुतिन ने किया, जो आज तक रशिया के सिंहासन पर बैठे हैं।
- 1:28:00तृप्ति नहीं हुए होती हुए हैं। जीस दिन तृप्ति हो गई।
- 1:28:06उस दिन बारिश से यल सिंह की तरह रीसिग्नेशन कर देंगे किसी और को।
- 1:28:13बताना। मैं सटिस्फाई हुआ मैं तृप्त।
- 1:28:17हुआ। तुम कब कहते हो?
- 1:28:21मैं तृप्त हुआ बस इसका इंतजार करना और तुम तृप्त तब होगे।
- 1:28:32हमारी भाषा में तुम तब तृप्त होगे।
- 1:28:38जब तुम्हारा रोमा रोमा तृप्ति में डूब जाएगा आनंद भीतर के आनंद का
- 1:28:46सरोवर खुशी का सरोवर छलक जाएगा। तुम्हारी आवाज में तुम्हारी आँखों
- 1:28:51से तुम्हारे रोम रोम तुम्हारी मौजूदगी से।
- 1:28:57उजाड़ भी गुस्ताहा हो जाएंगे, कब्रिस्तान भी भागें, बाहर हो
- 1:29:05जाएंगे। ये वो नगमा है जो हर शास्त्र में
- 1:29:17गाया नहीं जाता तुम लाख। कोशिश कर लो करके देख इसलिए मैंने
- 1:29:26तुम्हे सारे फॉर्मूला बता दिया। है।
- 1:29:31पहले से लेके। आखिर तक, लेकिन मैं कहता हूँ तुम
- 1:29:36मुझे पूछो मैं तुम्हें कहता हूँ मैं आखिरी चीज़ को ही कहूंगा ही।
- 1:29:43पहली चीजों को मैं कहूंगा छोड़ दो बहुत चीज़ ना मिले ना मिले।
- 1:29:54कल का फेकर करना मूर्खता है, कौन जान है कल का सूरज निकले निकले न
- 1:30:03निकले तुम पक्का। कह सकते हो?
- 1:30:09कल काल का दूसरा नाम यही रावण ने मरते हुए कहा आज का काम कल पे मत
- 1:30:17छोड़ो लक्ष्मण ऐसा मैंने किया देखो मैं खाली हाथ चेरा।
- 1:30:31तुम आज में उतर जाओ जो मिलेगा अभी मिलेगा और बाहर के किसी पदार्थ से
- 1:30:41नहीं मिलेगा धन से गतियों से सम्मान से।
- 1:30:48नहीं मिलेगा मिलेगा तुम्हें अपने अंत से मिलेगा क्योंकि वह तैरती
- 1:30:56है ही तुम्हारे अंत से और जहाँ है वहीं से मिला करती है पानी चाहिए
- 1:31:03नदी के पास जाओ कुएं के पास। जाओ।
- 1:31:06या किसी पानी के स्रोत के पास जाओ।
- 1:31:11मरो से पानी की आशा करोगे, निराशा ही हाथ लगेंगी।
- 1:31:17यही है पैगाम हमारा बेटा तुम्हारा प्रश्न तो बहुत?
- 1:31:28बहुत व्यक्तियों का प्रश्न है। आंधी से ज्यादा दुनिया आज इसी
- 1:31:35कशमकशमी दुविधाओं में लिप्त। है।
- 1:31:40किसी के पास है और उसे पता नहीं कहाँ कर।
- 1:31:44सका। किसी के पास है ही नहीं, अभाव है
- 1:31:50दुनिया एक कशमकश में खींची जा रही है।
- 1:31:54करें तो क्या करें बस बाबा का यह उपाय?
- 1:31:57है। राजी है हम उसी में जिसमें तेरी
- 1:32:02रजा है। रहा जी हैं हम उसी में जिसमें
- 1:32:06तेरी सजा है अपनी तो यूँ भी वहवाह है और यूँ भी वहवाह।
- 1:32:12है धन्यवाद।