Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Dec 25 - परमात्मा से बातचीत! परमात्मा की कचहरी में फाइल लग चुकी है! संत के अंतिम संस्कार का महत्व! Baba ji Vijay Vats Satsang
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- 0:10मार्कंडेय प्रसाद त्रिवेदी बाबा जी प्रणब बाबा जी आपने कहा था।
- 0:3125,00,00,000 वाली वीडियो प्रत्येक व्यक्ति को मिलेगा।
- 0:42उसका क्या हुआ? अभी पुत्र उसमें कुछ अड़चनें हैं।
- 0:57सबसे पहली अड़चन है, आपके शब्दों में तुम्हें जाने की चेष्टा
- 1:04करूँगा। हम जो।
- 1:07भाषा। रोग में लाते हैं परमात्मा से
- 1:12वार्तालाप में उसका तो आपको समझ में ही नहीं आएगा आपकी भाषा में,
- 1:22मैं। ऐसे बताना चाहूंगा कि फाइल
- 1:30सुप्रीम पावर के पास है, अप्रूवमेंट के लिए गई हुई है क्या
- 1:42फाइल गई हुई है? फाइल अभी गई है।
- 1:48हे प्रभु, हे मालिक पर्वतीगार सर्वांतर।
- 1:55या में मैंने आपके पास एक वेती भेजी है।
- 2:04कौंसिक क्षेत्र के जम्बो दुए पे भारत घंडे देखिए यहाँ के नाम कुछ
- 2:16अलग हैं। आप इलाहाबाद कर दो, आप प्रयागराज
- 2:20कर दो। लेकिन उसकी कचहरी का नाम नहीं
- 2:24बदलता है। जय जो छात्र दी आज्ञाथा जंबु
- 2:29द्वीप पे, भारत खंडे उसकी कचहरी में हमें।
- 2:48कन्वर्सेशन के लिए आपकी भाषा में बोल रहे हैं।
- 2:53हम जो परमात्मा से भाषा का इस्तेमाल करते हैं वो तो आप समझो
- 2:59भी नहीं पाओगे। तो वह फाइल प्रभु कृपा कीजिए, वह
- 3:11अंडर कंसेंट्रेशन्स क्योंकि सबसे प्रथम आपसे मैं कुछ कहूं।
- 3:24उससे पहले असली मालक मेरे शब्द सूखे चौक न जाना, असली मालक से
- 3:37पूछ लेना आवश्यक होता है। और असली मालिक का आपको कोई पता ही
- 3:43नहीं है, लेकिन मैं जानता हूँ क्योंकि वह उसने यही शरीर चुना।
- 4:00बोलने के लिए इसीलिए हम ऐसे संतों के पांव पूजते हैं कि धन्यवाद है।
- 4:12वह पंचतत्व का खंड जीस पर वह सच्चा मालिक प्रवेश किया।
- 4:24उस सच्चे मालिक के पास जंबित रूपे व्रत खंड है।
- 4:34इसका फाइल अप्रूवमेंट के लिए पहुंचा हुआ है शायद।
- 4:39आ जाएगा। मैं जल्दबाजी करता भी नहीं, उसका
- 4:47भी कारण जल्दबाजी करने से मेरे कुछ होता भी है।
- 4:55मधाई लाख भरा चाहे भी तो क्या होता है?
- 5:00होता है वही जो मंजूर है तुम्हारे लिए, लेकिन मेरे लिए यथार्थ।
- 5:16वह फाइल परमात्मा की कचहरी में पड़ी है और मैं कोई जल्दबाजी नहीं
- 5:23कर रहा हूँ। विशेषाधिकार के अधीन मैं उनसे
- 5:31प्रार्थना कर सकता हूँ। कि प्रमुख इस फाइल को प्राइऑरटी
- 5:36बेस पर अप्रूव कर दो। आपकी भाषा में बोल रहा हूँ बार
- 5:41बार कर मैं जो संवाद करता हूँ उस असली मालिक से।
- 5:52वो ये भाषा नहीं समझता सभी भाषाएँ वो, लेकिन हम आपसी कन्वर्सेशन
- 6:01किसी अन्य भाषा में करते है तो मार्कण्ड है पुत्र।
- 6:11हमारी बर्तखंड गंभीर दूर पे की फाइल सुप्रीमों के पास पड़ी है और
- 6:22मैंने अभी सुप्रीमों से यह विनती नहीं की कि इसके ऊपर आप हस्ताक्षर
- 6:30कर दो। मेरी विनती करते हैं सत्याक्षण वह
- 6:37मालिक असली मालिक हस्ताक्षर कर देगा एंड आई विल इम्प्लिमेंट दट
- 6:48थोड़ा सा विचार कर ले। आप पूछ सकते हैं कि क्या हम असली
- 6:59मालिक नहीं हैं नहीं सोच के देखें मालिकाना हक उसका होता है।
- 7:18जो सदा उसके संग्रह है तुमने जमीन जायदाद कमाई तुम्हारे नाम पर यहाँ
- 7:33के कागजों में होंगे। तो मालिकाना हग से लुप्त हो गए
- 7:42सभी भाषाओं का इस्तेमाल करो तुमने बिजाई बुवाई।
- 7:57शुरू कर दी। उसके मालिक तुम, लेकिन मैं
- 8:04तुम्हें कहता हूँ, यद्यपि वह तुम्हारे कागजों में तुम्हारे नाम
- 8:11बोलते हैं, तथापि, परमात्मा के कागजों में।
- 8:18तो खोज खबर ही नहीं है। ये किसकी है?
- 8:22परमात्मा के कागजों में उसकी बनाई हुई हर चीज़ उसकी है क्यों कि वह
- 8:32असली मालिक है। वह असली मालिक है क्योंकि उसने
- 8:39बनाया है उसने उत्पन्न किया है इसलिए मालिकाना हक सिर्फ उसका और
- 8:51उसका है। सच में मालिकाना हक तुम्हारा नहीं
- 8:58तो फिर हमारा क्या है बाबा आपका सिर्फ दावा है और दावे कभी किसी
- 9:08के रहे नहीं। बस इसी को सत्य ज्ञान कहते हैं।
- 9:20सिकंदर को सत्य ज्ञान नहीं था, लेकिन ये धरती ही ऐसी है।
- 9:27मैंने कहा। इस धरती के कण कण को झूम लेना
- 9:31चाहिए। इस धरती के कण कण का तिलक करना
- 9:36चाहिए। जैसे ही सिकंदर भारत में प्रवेश
- 9:41किया, उसके भीतर के जज्बात बदलने शुरू।
- 9:56और बड़ा भाग्यशाली ने कला, सिकंदर, सिकंदर ने करीब आंधी
- 10:05दुनिया। गीत लेत सोने का भंडार।
- 10:15सब उसका था लेकिन इस धरती को वरदान मिश्र लोग कह सकते हैं
- 10:24बाबा। और अमेरिका में आ जाओ यहाँ सिस्टम
- 10:27गड़बड़ा है अमेरिका की धरती वो धरती नहीं वहाँ खून सफ़ेद हो जाता
- 10:35है इसलिए हीन भागी है वो लोग क्या?
- 10:43जो यहाँ से वीज़ा लेके अमरीका चले गए और धन्य भागी है वो लोग जो
- 10:48अमेरिका ने ट्रंप ने वहाँ से हथकड़िया बेड़ियां डाल के
- 10:52हिंदुस्तान में वापस भेज दिया, क्योंकि ये धरती।
- 11:03बरदानी तो धरती है तो भर्त घंटे। जम्मू द्वीप इसकी फाइल परमार्थों
- 11:19के पास पेंडिंग पड़ी है। मैंने अपनी विनती दर्ज करवा दी है
- 11:26उसके राज्य में। अब मैं फिर से प्रयास करूँगा कि
- 11:40प्रभु इसे स्वीकार कर लीजिए। तो वह स्वीकार कर लेगा।
- 11:53स्वीकार करते ही खबर मेरे तक पहुँच जाएगी।
- 12:00अगला स्टेप तो मैं बाद में। उठा सकता हूँ।
- 12:07पहली इच्छा तो उसकी होगी ठीक और मैं आपको 100% ये कह कह सकता हूँ
- 12:24क्योंकि इस शरीर का उसने। अपने निवास के लिए स्थान चुना तो
- 12:32फिर अपनी ही बनाई हुई कृतियों में निवास करना।
- 12:38परमात्मा ने ऐसे ही तो नहीं चुना होगा।
- 12:50मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल महसूस होते हैं।
- 12:56ये वो नगमा है जो हरसाज पे गाया नहीं जाता।
- 13:03हजारों साल तक ये भारत भूमि गुलाम रहे।
- 13:13और 1000 साल बाद उसकी फरियाद सुन ली गई।
- 13:17बाबा आ गए, कल के रूप में आ गए, कल की अवतार जो होना था।
- 13:30हजारों साल नर की सपने बेनोरी पे रोती है भारत माता गुलामी की
- 13:38जिंजीरों में जकड़े जकड़े आंसू बहरी और देखो भारत भूमि के।
- 13:50जंपिंग द्वीप पे भारत खंडे ने कितना दुख सहा, कभी किसी के गुलाम
- 13:59हो गए, हम कभी किसी के गुलाम हो गए।
- 14:10बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा भर पैदा ऐसी संघ रचना बाबा
- 14:18की शरीर जैसी संघ रचना बड़ी मुश्किल से वह पैदा करता है तो
- 14:26आपको। मेरी बातों से समझा जाएगा कि संत
- 14:30की चरण दूली हम क्यों अच्छे से लगाते थे कि यह ऐसा यंत्र है?
- 14:41जीस में खुद मालिक को प्रवेश कर गया।
- 14:48इसलिए जब बुध चलते हैं, नंगे पांव होते हैं।
- 14:56जिन चीजों को तुम पाना चाहते हो उन चीजों को उन्होंने छोड़ दिया
- 15:02है, घर से निकले हैं। जिन सुरक्षाओं को तुम पाना चाहते
- 15:09हो वो सुरक्षाएं सब उन्होंने छोड़ दी हैं जिन 36 प्रकार के व्यंजनों
- 15:18का तुम भोग लगाना चाहते हो और मरे जा रहे हो अब वोद ने छोड़ दिया
- 15:25है। वह क्या है?
- 15:31इस ढांचे के भीतर उस सच्चे मालिक ने प्रवेश पा लिया और ये ढांचा और
- 15:44इस ढांचे से लगी हुई। प्रत्येक चीज़ छू गई और धन्य हो
- 15:52गया। लोग मेरे पास आ जाते हैं, मेरे
- 15:57नाखून ले जाते हैं, मेरे सिर के मेरे दाड़ी के बाल ले जाते हैं,
- 16:07मोहम्मद का एक बाल। आज भी संभाल के रखा हुआ है।
- 16:12बड़ा कीमती है सारी दुनिया की सम्पदा एक तरफ और पैगंबर का एक
- 16:28बार एक तरफ तोलन ता ही शकल मिली। जो सुकला व सत्य संघ का तो
- 16:37मोहम्मद के एक बाल का भार तुम्हारी सब सृष्टियों से बड़ा
- 16:42निकलेगा भारी निकलेगा लोग आ जाते हैं।
- 16:54मैं अब चलता नहीं तो कहते वाह आप चलते तो हैं नहीं, रस तो है नहीं
- 17:02तो अब थोड़ा सा मत्था लगा लेने दो, इंकार नहीं करता।
- 17:15लोग नाखून ले के जाते है कहते है कि नाखून जब काटा करो तो रख लिया
- 17:24करो मेरे अभी जो सर्दी के महीने में।
- 17:30टोपियां वगैरह मेरे धर्मपति ने सब धो के रखे थेवड़े एक जगह पे स्टोर
- 17:40पे रखे जब सर्दी आएगी तो यहाँ जो सेवक है उनको दे दी जाएगी।
- 17:48और सेवकों की तकदीर बदल जाएगी, क्योंकि यह वो है जिसने ढांचे के
- 17:59भीतर परमात्मा प्रवेश किया और वो ढांचा।
- 18:07कृतार्थ हो जाता है। मैं कृत कृत वह हूँ।
- 18:19तो आपने पूछा क्या हम सही मालक नहीं है?
- 18:22देखिए ना तुम्हें आँखें भी हैं भगवान।
- 18:29भला क्या मृत्यु तुम्हारा भ्रम सीन नहीं लेते तुमसे जब तुम्हारे
- 18:37ही घरवाले तुम्हारे शरीर के सारे जागते हैं टोपियां?
- 18:46गर्म कपड़े, सूट, वोट सब निकाल लेते हैं तो क्या तुम्हें समझ
- 18:52नहीं आती ये मेरा नहीं था। ये जो गोजी में पैसे होते हैं वो
- 19:00भी निकाल लेते हैं। अब तुम्हारी क्या काम है?
- 19:05कल तड़क जो तुम्हारी तरफ देखता था और तुम उसकी आँखें निकालने पर
- 19:11उतारू बजाते थे, आज वो ही तुम्हें उठाकर अगनी में फेंक देगा।
- 19:20और तुम्हारी आत्मा दूर खड़ी उसका धन्यवाद करेगा।
- 19:25शुक्र है तुने इस शरीर को अंतिम संस्कारित किया।
- 19:33यह अंतिम संस्कार और एक उपर्ण्य है, इसलिए संत के अंतिम संस्कार
- 19:39में। जो भाग लेता है वो कृतकृत हो जाता
- 19:43है इसलिए इतनी भीड़ होती है संत के अंतिम संस्कार में भाग लेने
- 19:55वाला। परमात्मा की निगाह में आ जाता है
- 20:02तो मैं तुम्हारे शब्दों में समझाने का यत्न कर रहा हूँ तो
- 20:10तुमने पूछा और तुम यही पूछ सकते हो क्योंकि इससे ज्यादा।
- 20:17अभी तुम पूछो भी नहीं सकते पुत्र मारकंडे भूखे को सोना दे दो, हीरा
- 20:29दे दो उसको फेंक के मारेगा। क्या करूँ इसको?
- 20:37ये भूख थोड़े मटाएगा सच में भूखा व्यक्ति ये कभी अपनी कविता कह रहा
- 20:49होता है चौदहवीं का चाँद हो या आफताब हो।
- 20:59जो भी हो, तुम खुदा की कसम लाजवाब कवि का पेट भरा है।
- 21:15यह ढांचा संतुष्ट है। जब ढांचा संतुष्ट होता है तो
- 21:22कविता जन्म लेती है। उस कविता को तुम बोल कर अपने आप
- 21:35को न जाने स्वयंभू परमात्मा घोषित कर देते।
- 21:49तो चौदहवीं के चाँद को देख कर वहाँ से निकलता हुआ भूखा व्यक्ति
- 21:55कहता है, आज आसमान में रोटी बड़ी तैर रही है से मिल जाए तो बात बन
- 22:07जाए। प्रत्येक की बात अलग तरह से बनती
- 22:20है। किसी की बात उसे उसका मनचाहा भर
- 22:35मिल जाए तो बात बन गयी। मन चाही पत्नी मिल जाए तो बात बन
- 22:41गई, नसीब खुल गए लेकिन नसीब कहा खुले नसीब उसके बोलते है और वो
- 22:53कभी वरला हजारों सालों में। एक बार उस ढांचे के भीतर परमात्मा
- 23:01अवतरित होता है। कितनी देर हो गई 2500 साल बाद
- 23:12तुम्हारे अवतारों में से? भर्त घंटे जंबुतुवे पे आज फिर एक
- 23:26ढांचे में परमात्मा ने फिर प्रवेश किया है।
- 23:33कितनी बूढ़ी और सोनी आँखें? इनको देखने के लिए तरस रही होती
- 23:40हैं और परमात्मा मालिक है। खुदा की बातें तो खुदा ही जानें
- 23:55लाखों ही पंडित करोड़ों हिंसा ने। तुमने पूछा पुत्र, क्या हम असली
- 24:08मालिक नहीं है अभी तुम समझ नहीं पायेगा बेटा असली मालिक तुम कैसे
- 24:16हो कितनी मशक्कत करके दिन भर रात में क्या कुछ नहीं करते।
- 24:24बाबा नानक ने कहा पापा बाज न भव इकट्ठे, मैं यहाँ से करना चाहता
- 24:30हूँ, पाप करते हो, झूठ बोलते हो, धर्म के नाम पर कसम उठाते हो, फिर
- 24:40कहीं जाकर ग्राहक से संतुष्ट होता है।
- 24:44मुझे सौगंध उठानी पड़ी तो मैं सौगंध खाके कहती हूँ देख अरे मुझे
- 24:55शर्म भी आई आवाज सर। जब मैं ये बात कह रहा था,
- 25:07ज़िन्दगी में प्रसन्न देशवासियों को संबोधित कर रहा था।
- 25:13मुझे शर्म आ रही थी क्या मुझे इन लोगों को प्रमाण देना होगा?
- 25:34तुम पुत्र, तुमने पूछा मैं जानता हूँ तुम को क्या ठंडी ठंडी रात
- 25:40है, ठंडी हवाएं बह रही है, मौसम सुहाना है।
- 25:54तुम आराम से अपने गर्म बिस्तर में बैठे रहना चाहते हो?
- 26:01कौन चाहता है? इन रजाइयों को छोड़ के ऑफिस में
- 26:05जाऊ। कौन चाहता है दुकान खोल?
- 26:13लेकिन क्या करे, मजबूरी है, दफ्तर भी जाना पड़ेगा और देखिए यहाँ
- 26:25छुट्टियाँ भी नहीं मिलती और यहाँ स्टाफ भी कम है।
- 26:36कमाल के पास है, स्टाफ भी कम है, छुट्टियाँ भी नहीं मिलती इसलिए
- 26:48मैंने तुमसे कहा मैं स्टाफ को तीन गुना कर दूंगा।
- 27:02जम्मू द्विवेय की फाइल व्रत कंडे की फाइल परमात्मा की दरगाह में
- 27:11पेंडिंग पड़ी है, बस मेरे हाथ जोड़ने की देरी है।
- 27:19और वह अपना स्टेम्प लगा देगा। ओके, वह मेरी बात को टहलता नहीं
- 27:25क्यों? क्योंकि अब मैं आपसे मखाति हूँ तब
- 27:36मुझे अपने। वो शीर्षस्थ स्थान से नीचे आना
- 27:42पड़ता है जहाँ तुम्हारे से संवाद किया जा सकता है।
- 27:50इसलिए कृष्ण अर्जुन से बात करते हुए अर्जुन के तिल थकते हैं फिर
- 27:54समझ पाता है वह। और बात तो बड़े कमाल की है।
- 28:08परमात्मा खुद उतरता है अर्जुन के तल तक ताकि अर्जुन समज जाए।
- 28:24पहली बाधा तो यह है असली मालक जो है ये समझ लो मेरी बातों से मैं
- 28:39नहीं कहता बुद्ध की तरह अपनी महलों को छोड़ दो।
- 28:45बाबा बड़े समझदार हैं। नानक, जो व्यापार के लिए पैसा
- 28:50देते और भूखों का पेट भराते, सही यज्ञ कर दिया उन्होंने यही यज्ञ।
- 29:08बिलकुल बैठे रहो मत छोड़ के जाओ बुद्ध की मजबूरी थी तो तुम्हे
- 29:16नहीं बतावे मैं जानता हूँ वक्त देश और काल।
- 29:27परिस्थितियां सब देखना पड़ता है। परमात्मा ने जीसको बदलना होता है,
- 29:40परिस्थितियां देश और काल देखता है।
- 29:49ज्यादा। ये ढांचे इस धरा पे ही क्यों
- 30:07प्रकट हुए? क्योंकि ये धरा पर भूमि है।
- 30:16आदिकाल से सनातन ऋषियों की धरती ये धरती।
- 30:24माँ उन ऋषियों के चरण धुलिया को पाकर पवित्र होंगे।
- 30:31और तुम इस धरती को माथे से लगा के पवित्र हो जाओगे वो कोई जूता नहीं
- 30:42पहनता। नंगे पान चलते थे, समझदार थे कल
- 30:52को हम तो चले जाएंगे लेकिन ये पामन धरती को कुछ तो देके जाए।
- 31:04तो वह अपनी शरण धुली ले गए, जो अनंत अनंत काल तक इस भूमि में ही
- 31:12लिपट झपट के रह जाएंगे। इसलिए इस भरत घंटे जम्ब दुबे के
- 31:24एक कण कण को पवित्र माना गया। यहाँ से लोग आते हैं मेरे पास
- 31:33बाबा विदेश से आए थोड़ी सी आस पास आपकी खेत खलिहान यहाँ की माटी मैं
- 31:44कहता हूँ भाई ये। बेक साइड पे खेत कल्याण है यहाँ
- 31:50से मुट्ठी भर के ले जाओ कोई रोकता नहीं कौन रोकता है नदी के भीतर से
- 31:57चोंच भर के ले जाए चिड़िया कोई जमींदार तुम्हें नहीं कहेगा इतने
- 32:04फिराक दिल हैं जमींदार? वो नहीं कहेगा मेरे खेत की माटी
- 32:10तुम उठा के ले गए, चिड़ी चोंच भर ले गई नदी ना फटे हो भला किसान का
- 32:19कुछ घटता है। क्या मुठ्ठे भर के ले जाते हैं जो
- 32:23समझदार है। उस दरव को चूमते हैं उसको सुबह उठ
- 32:33के माथे से लगाते हैं, बड़ी कैर्स से लगाते हैं, थोड़ा थोड़ा फिर
- 32:40पता नहीं कब जाना हो। तो तुम मजबूरी में गए हैं यहाँ से
- 32:46तो तुमने पूछा पुत्र पहली बाधा ये है सबसे पहले?
- 33:02किसी बाग में से कोई आम तोड़ना हो, गौर तोड़ना हो।
- 33:07माल्टा, संतरा तोड़ना हो तो मालिक की इजाजत लेनी होती तो सबसे पहले
- 33:16वो जो असली मालिक है। उसके दरबार में सारा काम सुचारु
- 33:26ढंग से होता है और संत सुचारु ढंग से ही करता है, करना पड़ता है।
- 33:35हम भी लिमिटेशंस के बीच में है। प्रश्न जो सही मालिक है हम तो
- 33:42जानते है लेकिन मूर्ख तो इसे नहीं नहीं जानता।
- 33:48मूर्ख तो कहता है तू इस बाड़ के इधर मसाजणा काट दूंगा वो मूर्खों
- 33:55की निशानी। अरे जब तू चला गया तेरी देह को तो
- 34:01फन कर दिया गया या आगन में जला दिया गया ये रोज़ हश्र होता है ना
- 34:09फिर वो उसका कमाया हुआ माल क्या उसके संग जाता है बहुत तुम्हें
- 34:15है। क्या तुम्हारी शर्तो को भी मोह है
- 34:19तुम्हारी मोहो तुम्हे है क्या तुम्हारे घर को भी मोह है?
- 34:27तुम यहाँ से समझ नहीं सकते घर तो कभी रोता नहीं क्योंकि घर जानता
- 34:34है। यह मेरा मालिक नहीं है।
- 34:36असली किसने तो मात्र मोहर लगाई थी, स्टेम्प लगाई थी कि मैं मालिक
- 34:43हूँ। कागजों में इसका नाम बोलता है, कल
- 34:47परसों पटवारी के कागजों में। कंप्यूटर में इसका नाम चढ़ जाएगा
- 34:58लेकिन मालिक तो वो भी ना रहेगा तो सबसे पहले असली मालिक से पूछना
- 35:08होता है तो आप पहली बात तो ये समझ लो।
- 35:12इसे प्रवचन की तरह ही ले लो। प्रश्न पूछने वाले मार्कंडेय
- 35:20पुत्र इसे प्रवचन की तरह ही ले लो, इससे सुंदर प्रवचन हो ही नहीं
- 35:24हो सकता। प्रवचन वह होता है जो सत्य हो।
- 35:31उसके एक एक अल्फाज़ की एक माटी का कण सत्य को परिभाषित करे वो होता
- 35:38है प्रवचन तो इस ढांचे से निकली हुई आवाज का एक एक अणु।
- 35:56सत्य है इसलिए कहते हैं साधू बोले शैल सब आप साधु का बोला वीरता न
- 36:04जाए अब कल परसों मैंने एक वीडियो डाला।
- 36:14वीडियो डालने से पहले मैं उसकी इजाज़त ले लेता हूँ।
- 36:17असली मालिक आपने देखा आपको मैं जब आपको प्रणाम करता हूँ तो आपको
- 36:23प्रणाम नहीं करता हूँ, आप अकेले नहीं हो।
- 36:31मैं समस्त ब्रहमंड को प्रणाम करता हूँ, उस अखंड अद्वितीय विकार
- 36:39विकार उस असीम सबको प्रणाम करता हूँ।
- 36:49सबसे मुखातिब हूँ अब हेतु हूँ जो चाहे सुन ले मुझे आगे और यहाँ वो
- 36:58रोह ही मुझे सुनते हैं जो तुम्हारे लिए पता नहीं तुम ना
- 37:04जाने कैसे जहाँ में खो गए। हम भरी दुनिया में तनहा हो गए
- 37:21इसलिए प्रणाम करता हूँ तुम्हें संत पहले प्रणाम करता है, सिर्फ
- 37:28तो मैं नहीं करता, समग्र वो करता है वो पहली बाधा यह है।
- 37:36जो सबसे पहले बाधा है असल मालिक से पूछ लेना।
- 37:41फिर आगे की कार्रवाई शुरू हो पाएगी तो वह फाइल पड़ी है और मुझे
- 37:50पता है। साधु बोले सहज स्वभाव।
- 37:56साधु का बोला गिरता न जाए तो कमेंट्स आ रहे थे तो मैंने इनका
- 38:04नाम बदल दिया। आप अंत भक्त कहते हो मैं कहता भी
- 38:09ना ये मत कहा करो, ये भी भगवान हैं, इन्हें मंदबुद्धि कहते हो?
- 38:18इनकी बुद्धि अनडेवलप है अभी पूर्ण विकसित नहीं हुई, इसीलिए इनको मंद
- 38:25बुद्धि कह दिया करो तो इन मंद बुद्धियों के बड़े।
- 38:36एक व्यक्ति दशा से कमेंट करें और जहाँ तक गाली भी निकाल तो मेरा
- 38:44शिष्य कहने लगा, बाबा जी व्यक्ति गाली निकालता है, मैं इसको गाली
- 38:49निकाल दू नहीं, नहीं, तू कुछ मत बोल क्योंकि अगर मैंने कुछ कह
- 38:55दिया। तो अनिष्ट हो जायेगा जब मैं जुबान
- 39:05को थामे बैठा हूँ मैं खेंचरी मुद्रा लगाये बैठा अब तुम्हे क्या
- 39:10आपत्ति हो रही है तुम क्यों इतना चपका हट से भरे हुए हो मेरे
- 39:15प्रति? यह ढांचा 1 दिन खंडा खंडा हो
- 39:19जायेगा तुम कुछ मत कहो जब उसने नो कमेंट कर लिया, मुझे बोला नो
- 39:28कमेंट हो गए। बाबा इतने बुरे बुरे कमेंट है,
- 39:33गंदे कमेंट है। मैंने कहा तू उसको कर लेंगे, जब
- 39:38ये थक जाएगा तो मैं डिलीट कर दूंगा क्योंकि कुंजी मेरे हाथ में
- 39:46वो थक गया, कोई कृष्ण वगैरह नाम शुरू था ये पता नहीं, ये नहीं पता
- 39:53फेक था क्या था मुझे नहीं पता। तब मैंने वो आइडी कर दिया।
- 40:03मैंने कहा बस हो गया ना, लास्ट हो गया तो पापा किसी और आइडी से करते
- 40:09करते कोई बात नहीं अगर यूट्यूब में भी पड़ा रहा कमेंट।
- 40:14तो भी अपूर्ण क्या बिगड़ता है सिर्फ दूसरों की श्रद्धा भगा न हो
- 40:20जाए। इस कारण से जहाँ तक मैं हो सकता
- 40:23हूँ बचा लेता हूँ। श्रद्धा का दुवार से उत्पन्न होना
- 40:29थोड़ा मुश्किल हो जाता है। तुमने अगर सब कुछ देखते हुए भी
- 40:38श्रद्धा पैदा हो गई, तुममें और फिर किसी व्यक्ति ने वो श्रद्धा
- 40:43विखंडित कर दी। किन्हीं कारणों से तो वह श्रद्धा
- 40:47दोबारा से उत्पन्न हो जाए। यह संभावना क्षीण हो जाती है।
- 40:52करीब करीब। इसलिए मैं कहता हूँ बहुत से लोग
- 40:56ऐसे हैं बाबा बेटी ना हो हमारे घरों में बेटियां बहुत हैं और
- 41:04मैंने चार वर्ष पहले कह दिया ठीक जा तू तेरे दो बेटे हो घर दो हो
- 41:08गए। लेकिन आज वो लोग नास्तिक है और
- 41:12मुझे हैरानी भी होती है। बीजी नास्तिक क्यों है?
- 41:19इनकी तो कोई बात पहली बात तो मैं जो कहता हूँ उस पर परमात्मा ही
- 41:24फूल चढ़ाता है। यह वो ढाँचा है साँचा है जीसको
- 41:37उसने योग्य समझा ये वो नगमा है जो हरसाज पे गाया नहीं जाता।
- 41:49उसी स्वर ने मुझे गाने से मना किया हुआ है, अभी मत गाओ, कोई
- 41:58होता होगा ऑपरेशन के साथ संबंध तो मैं गा नहीं रहा, मैं आपको गा के
- 42:04बताता हूँ। असल मालिक से पूछना सबसे पहला
- 42:13फर्स्ट स्टेप दूसरे पे आप कैसे छत पे चढ़ जाओगे?
- 42:17सीधा स्टेप ब्य स्टेप बाबा नानक ने 38 पोड़ियां पूरी।
- 42:25फिर आखिर में कहा आखिर में ने चोट रूप में कहा
- 42:43हम क्या है? जान लेते हैं जब आप वाणी रखोगे ना
- 42:47किसी। चाहे वो करपुट साल पहले हुआ हो,
- 42:52मैं वाणी का ढंग देख के बता दूंगा कि थिस पर्सन वास एल आइकॉन किसने
- 43:00वो मुकाम छोड़ दिया तो पहले आपको वो थोड़ा सा मूल समझाते हैं।
- 43:09जो तुम समझ नहीं पाए वो कहते पवन गुरु पानी पीता माता तरती, महत
- 43:20इनको बचा लेना। तीन चीजों को ये मैंने बनाई है और
- 43:26ये मूलभूत ढांचे का भरा रूप है। कच्चार इसके बिना सारा ढांचा जोड़
- 43:35ना पाएगा। पावन गुरु सबसे पहले सांस अगर ना
- 43:40देखो ना फांसी लगाने वाला क्या होता है?
- 43:43सांस नहीं होता उससे पानी पीता। फिर पानी के बिना आप कितने दिन
- 43:51झेलोगे, माता धरती महत फिर धरती के बिना कितने दिन झेलोगे आप तो
- 44:04यह आपको एक संदेश था आखिर में। अब जब जी का आखिरी आखिरी सीढ़ी आ
- 44:14गया था इसलिए बाबा बोलते हैं देखिए मैंने अपनी जब जी तो पूरी
- 44:21कर दी अब वो विशेष शीश। जो हम अंतिम चेतावनी के रूप में
- 44:28कहते हैं, लास्ट वारिंग, पवन, गुरु, पानी, पिता, माता, धरती,
- 44:35महत और हमने तीनों को भी उजाड़ लिया न पानी आज पीने के युग है।
- 44:42कहाँ है वो गंगा माता? जीस देश में गंगा बहती है, हम उस
- 44:51देश के वासी झूमलू, मैं उस युवा को जीस प्याय
- 45:05तेरा नाम। तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को
- 45:10सलाम, ये हवाएं मेरे वतन को छू के आईं।
- 45:18हवाओं के लिए कोई वाटर थोड़ी होता है, कोई वीज़ा लेके थोड़ी जाना
- 45:21होता है ये व्यवस्थाएँ तुम्हारी। पवन करो पानी पीता पानी के बिना
- 45:36तुम कहते हो हम रोक लेंगे पाकिस्तान का पानी क्यों रोपलोगे
- 45:41उनको भी तो जीवन का आधार चाहिए रेल मिल के बाँट लो बाँट के खा
- 45:49लो। माता धरती महत इसको बचा के रख खंड
- 46:09खंड मत होने देना यह जो आज अनपढ़ लोगों की जमात।
- 46:17हिंदू राष्ट्र की मांग कर रही है, इन्हें नहीं पता कल को दूसरे उठ
- 46:22जाएंगे। फिर तुम खंडे खंडे कर दिया ना और
- 46:27परमात्मा का है, तो देखो तुम बच्चे तो मेरे ही हो।
- 46:31क्यों बांटा तुमने? लकीरें क्यों खींची?
- 46:36यद्यपि हैं तो ये लकीरें कागज़ के कोरे कागज़ पर तुम्हारी की हुई
- 46:44नकाशियां रसिया और यूके कितनी देर से लड़ रहे हैं रसिया ने सोचा था।
- 46:53मेरे लिए बाहें हाथ का खेल 10 मिनट में जीत लूँगा और कितने वर्ष
- 47:00हो गए उसकी मर्जी के बिना कहाँ पता हिला और तुम तुम उसको जीतने
- 47:09की फिराक में हो। और उसको जीतने के लिए तुमने क्या
- 47:16क्या उपाय नहीं कर लिए? मंदिर में टलकड़ खाओ शंख बजाओ,
- 47:24आरती करो, पूजा करो छोड़ से उपचार पूजा करो, विधिवत पूजा करो, यज्ञ
- 47:30हवन करो। तीर्थ स्थान जाओ, मक्का मदीना
- 47:35जाओ, हज करके आओ ये सभी बंधन है तुम्हारी आँखों पे।
- 47:54तो संत कहता है देखो तुम तुमको किसी ने गुलाम नहीं बनाया, तुम
- 48:01खुद से गुलाम हुए हो, ये दीवारी माता की छाती पर किसने निकाली?
- 48:14उत्तर कोरिया धरती को लड़ाने वाला ये अमेरिका?
- 48:24इसके पास कुछ ज्यादा धन इकट्ठा हो गया है।
- 48:29मेरे मन में कई बार आया लेकिन फिर मैं नहीं बोलती तो उस मालिक से कह
- 48:37दूँ कि इसको तो पहले सबक सीखा दे। ये देखो दुनिया को कैसे लड़ा रहा
- 48:42है और खुशी, ये दुष्ट लोग हैं बस थोड़े से लोग।
- 48:50और जब मैं थोड़ा सा कह दूंगा परमात्मा को कि परमात्मा इन लोगों
- 48:55को उठा ले, धरती पे शांति आ जाएगी ना पुतिन हो ना ये 17 लोग हो
- 49:02व्यवस्था करने वाले तो धरती स्वर्ग तो है ही।
- 49:06आपको जानकर बड़ी हैरानी हो गयी। आठ अरब लोगों को 17 लोगों ने
- 49:14गुलाम बना रखा है। विडंबना है ये हमारे भाग्य की फिर
- 49:21तुम कहते हो परमात्मा ने ऐसा ही लिखा था।
- 49:25यानी आठ अरब लोग। सतारा।
- 49:28लोगों का गला नहीं दबा सकते, यही है ना
- 49:45वो दिल कहाँ सिला तेरी याद तू जो बोला।
- 49:59मुझे याद आने वाले कोई रास्ता बता दे वो दिल।
- 50:16कहाँ से? रहने दे मुझको अपनी चरणों की धूल
- 50:47बन कर रहने दे मुझको अपनी। चरणों की धूल बनकर घर ये न हो सके
- 51:11तो मुझे खाक में। मिला दे हो दे कहाँ से ला तेरे
- 51:29यार तू जो बोला मैं क्या कहूं? परमात्मा ने कहा गाने में लेकिन
- 51:39सर फूट फूट पढ़ते हैं मेरा दोस्त नहीं है बा बनाने गाते हैं मेरा
- 51:52नष्ट। चैतन्य नाश्ते एक तारा बजाते है।
- 52:01यह कोई सर्कस नहीं, यह भीतर का उठता हुआ आनंद का तूफान।
- 52:15हम लाख चाहे भी तो रोक न पाएंगे। पहला बैन तो ये बैरियर है।
- 52:29दूसरा बैरियर ये मैं बड़ा अहिंसा हूँ करुणा।
- 52:39आनंद के रथ से शराब और मैं किसी चीज़ को बदलना नहीं चाहता।
- 52:49इसको होने दो लेट सेट है अपन। और अगर आज मैं चाहूं है तो
- 53:02तुम्हारा सिस्टम जो तुमने बना लिया है और कहाँ इजाज़त करता है,
- 53:09क्या मैं चुनाव करा सकता हूँ आज और यहाँ तो।
- 53:15ईश्वर का तुम्हें कुछ पता ही नहीं, यहाँ तो जन्मजात बुद्ध पैदा
- 53:24होते हैं, बिना खोज किए रह देते हैं वो नहीं बिना खोज किए।
- 53:35ईश्वर ने क्या प्रबंध किया? संसार को चलाने के नियम क्या
- 53:43बनाए, कह देते हैं ऋण कृत व कृथम यदा जी वेत सुखी जी वेत वश में
- 53:51बोतश्य। पुनर आगमनम कुत्ता कर्ज ले लो, घी
- 54:03पी लो व्यक्ति मरने के बाद। जिसने कर्ज लिया दिया दोनों में
- 54:12से कोई बचता है और कभी कोई किसी से मांगने आया है।
- 54:16तर्क को जैसे की बात तो क्या ऐसा हो जाना चाहिए?
- 54:25चरवा की बात मान लेनी चाहिए। तुम्हारी इच्छा है मन बहुत से लोग
- 54:34माने बैठे हैं, देने होते हैं, अदालतों में दावे कर देते हैं,
- 54:44हमें लेने हैं, ये झूठ बोलता है। फिर किसका बिगाड़ते हैं, खुद का
- 54:50ही बिगाड़ लेते हैं। कोई किसी का कुछ नहीं बिगाड़
- 54:54सकता। जब कोई किसी का कुछ बिगाड़ता है
- 54:59तो वह खुद का ही बिगाड़ता है। तुम फर्ज करो।
- 55:06मैं भी तो इस प्रणाली के अंतर्गत ही शासन और समाज तुमने जो बनाई
- 55:14तुम्हारे संविधान के अनुसार ही चल रहा हूँ ना मुझे भी चलना पड़ता
- 55:20है। यह ढांचा भी आपके अनुरूप चलता है।
- 55:25ज़रा भी इधर उधर हो नहीं होता तो मैं अगर आज चाहूँ कि आज चुनाव
- 55:34मुझे परमात्मा कह दे, मैं परमात्मा से कह दू कि कृपया से
- 55:39अप्रूव़ करो। वह क्षण भर में स्टैम्पल लगा
- 55:42देगा। अब मेरी बात डाल लेगा, थोड़े को
- 55:47नहीं डालेगा। पुत्र को इतना तो यकीन होता ही है
- 55:53ना इसलिए तो इसने कहा मैं उसका प्यारा पुत्र हूँ।
- 56:04तो 100 साल की रोटी क्यों मांगो? अभी भूख लगी तो अभी के लिए ही
- 56:12मांगना उचित है। तो उसने कहा, ओह गॉड, हम हंगरी
- 56:17प्लीज़ प्रोवाइड मी लंच। दोपहर का भोजन दे दो, लेकिन तुम
- 56:25लोग पास से गुजरते हुए कहोगे एक तरफ तो तुम कहते हो प्यारा बाप है
- 56:33मेरा, मैं पुत्र हूँ और एक तरफ अभी भूख लगी अभी का खाना मांग रहे
- 56:38हो? गीता भाई शाम को अगर अभी इकट्ठा
- 56:43कर लूँगा, शाम को गल जाएगा, सड़ जाएगा, सूख जाएगा शाम को शाम की
- 56:48मांग लूँगा वो तुम्हारे प्रश्न बड़े अजीबो गरीब हैं, इसलिए मैं
- 56:55तुम लोगों को धन्य कहता हूँ। हाथ जोड़ दिया करता हूँ पहले हे
- 57:02महा कल्याणकारियों ये मेरे से पहले प्रभुद हुए प्रतिभाएं,
- 57:11गुणों, ही ऑलरेडी एनलाइटन पर्सन्स।
- 57:17मैं तुम्हें नमन करता हूँ, मेरी धृश्यता के लिए क्षमा करना, इसलिए
- 57:25मैं बोलना शुरू करता हूँ तो अगर मैं चाहूं तो क्या तुम्हारा सम भी
- 57:36था? क्या तुम्हारे लोग इजाज़त देंगे?
- 57:43मुझे अब देखिये एक वीडियो आज डालनी थी, मुझे मुझको शंका डाल
- 57:52दी। अमेरिका से एक फ़ोन आया रोहित के
- 57:54पास, रोहित ने मुझे फ़ोन कर दिया बाबा।
- 57:58ये वीडियो डाल दे 25,00,00,000 वाले अब देखो जब तुम शंका पैदा
- 58:06करोगे स्वभाव की शंका मेरे भीतर भी आ गई उसी का आदेश।
- 58:17उसी की बात मैंने आपसे कह दिया तो मुझे भी थोड़ा शक हुआ।
- 58:27वो कहते तैयार है बाबा सुबह हमारी दो वीडियो आती है।
- 58:33पांच पांच पे आध्यात्मिक और 10 पांच पे राजनीति।
- 58:39तो मैंने संपर्क किया सच्चे मालिक से, सच्चा मालिक, सच्चा सा सा
- 58:53सच्चा नाम पाखा पांव अपार। मुझे शर्म भी बड़ी आई है क्या
- 59:06पूछूं? उसे कह तो दिया उन्होंने पुत्र तू
- 59:09जैसा कह देगा मैं कर दूंगा, फिर भी पुत्र अविश्वास करे तो शर्म की
- 59:17बात ही है ना? लेकिन अमेरिका से फ़ोन आया रोहित
- 59:23के लिए। मुझे बहुत रोहित बहुत बार कह देते
- 59:26है। बाबू अपन तो गरीब हैं अपन तो बैंक
- 59:31का कर्जा हमने उतारा। हाँ बिल्कुल उतरा तो अपन कैसे बना
- 59:35लेगा आश्रम? मैंने कहा देखो अपन थोड़े ही
- 59:39बनाना है। ये तो उसने बनाना है, उसकी आगे
- 59:44खुद बनवा लेगा और देखलो बनवा के तैयार हो गया।
- 59:47हम बैठे भी है, बोल भी रहे है अभी पास थोड़ी सी पास मैंने कोई
- 59:54व्यंग्य में बात नहीं की थी ये मेरी खबर खुद रही है पास आके देख
- 1:00:00लो। यहाँ से 60 फूट आगे इसी लाइन में
- 1:00:04आश्रम से आगे अभी लेबर काम कर रही है।
- 1:00:11मिस्त्री मजदूर काम कर रही है, कब्र भी बनाइए वहाँ गरीब शायद छः।
- 1:00:22ये छह तरफ चार उनको पता है जिन्होंने बनाई वहाँ।
- 1:00:29जब इस शरीर के भीतर से चेतना का कनेक्शन काट लिया जाएगा तो यह
- 1:00:38शरीर। बहुत बहुमूल्य अमूल्य है,
- 1:00:46बहुमूल्य ना कहो अमूल्य कहो, इसका कोई मूल्य नहीं तो वहाँ दफन करके
- 1:00:51रख देना अपनी निगरानी में। क्योंकि यहाँ से निकलती हुई
- 1:00:59खुशबों जो मलों में उस चबा को जीस पे आए दीर हटाना तेरे दामन से जो
- 1:01:07आए उन हवाओं को सलाम तो यहाँ से उठेंगे तरंगे इसलिए मैंने कभी
- 1:01:15किसी वक्त कहा था। मेरी पुरानी वीडियो को सुनने वाले
- 1:01:20शायद मेंबर कर लें कि 1 दिन यह गीदड़बहार शहर तीर्थ हो जाएगा
- 1:01:31क्योंकि यहाँ उतरा है वह जो सच्चा साहेब है।
- 1:01:371 दिन घेतड़ वहाँ तीर्थ हो जाएगा और यहाँ आने वाला प्रत्येक
- 1:01:44व्यक्ति दंडता को प्राप्त होगा यहाँ लगेंगे मेले।
- 1:01:55जो सचमुच शहीद हुआ, जिसने खुदी को कुर्बान किया वो शहीद होता है
- 1:02:02शहीदों की चेताओं पे लगेंगे हर वर्ष मेले वतन पे मरने मिटने का,
- 1:02:10वतन पे मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।
- 1:02:17तो यहाँ एक व्यक्ति ने अपना में छोड़ा था उस पे उतरा था वो, इसलिए
- 1:02:25ये क्षेत्र तीर्थक्षेत्र बन गया अब जहाँ जहाँ मैं बैठा हूँ वो
- 1:02:31तीर्थ है। और वहाँ लाखों करोड़ों करोड़ों
- 1:02:35वर्षों तक तिरंगे एक बार छू दिया तो लाखों सालों तक वो तरंगे
- 1:02:44निकलती रहेंगी। वहाँ से ऐसी चार्जिंग है, उसमें
- 1:02:50तो कल मैं बोल रहा था। आपकी कबर खोदते क्या?
- 1:02:57मैंने कहा मैं खुद ही खुदवा रहा हूँ, भाई आके देख लो और सच में
- 1:03:02खुदवा रहा हूँ, क्योंकि कम से कम मैं तो मूर्ख नहीं हूँ।
- 1:03:11मैंने सत्य को सत्य की तरह जाना है।
- 1:03:151 दिन ये शरीर ढह जाएगा, स्कैटर हो जाएगा बिखर जाएगा खंड खंड हो
- 1:03:22जाएगा फिर इसको संभाल के रख लेना क्योंकि यह बड़ा कीमती है।
- 1:03:31इसका रोमा रोमा बड़ा कीमती है। दूसरा अगर मैं करवाना भी चाहूं तो
- 1:03:45कैसे करवा पाऊं? क्योंकि आपकी व्यवस्था तो ये है
- 1:03:51कि आपने ही चुनी है ये सरकार। तो वो पांच वर्ष के लिए सुनी है।
- 1:04:02उसको शायद मेरे ख्याल में साल भर हुआ है तो अभी 4 साल तक तो
- 1:04:08तुम्हारा हक्की नहीं ना बनता। और मैं जबरदस्ती करने वालों में
- 1:04:15से मैं नहीं हूँ बड़े क्षण क्षण चलने वाला व्यक्ति हूँ, हाँ तुम
- 1:04:21मुझसे ये पूछ सकते हो कि बाबा तब तक तुम रहो रहो ना रहो, विजय तो
- 1:04:28मैं भी नहीं कह सकता। भला ढांचा कैसे कह सकता है?
- 1:04:33तुम्हारी बनाई हुई इमारतें कह सकती हैं कि मुझे डा मत देना।
- 1:04:40मालिक, क्योंकि इमारतें इमारतों में प्रण नहीं होते।
- 1:04:48तुम जब चाहो उनके स्ट्रक्चर को बदल सकते हो।
- 1:04:54चाहे वो 10 साल प्राण हो, 20 साल प्राण हो डाल दो भाई आज पीसा आ
- 1:04:58गया और ज्यादा बढ़िया बंगला बना दो मेरे ताया जी का घर।
- 1:05:1140 फुट था ये 4072 मकान दो सड़कों पे बड़ी सड़कों पे लग रहा था तो
- 1:05:20भाई अलग हो गए दीवार निकल के बीच में 2072 के दो मकान हो गए तो
- 1:05:27पहले वाले मकान में बगल वाले में। मेरे साये जी रहते थे।
- 1:05:32उनका परिवार रहता था और इधर वाले मकान पे हम रहते थे।
- 1:05:41हमारा परिवार रहता था लेकिन भाई थे और भाई का आजकल तो भाई।
- 1:05:50राम, लक्ष्मण जैसे भाई तो है नहीं, आज तो मेरे पास यहाँ एक
- 1:05:59मेरे शिष्य अपनी पत्नी को साथ लेके बाबा।
- 1:06:08मेरी पत्नी गर्भवती है, दुआ करो पुत्री हो जाए, मैंने कहा पुत्री
- 1:06:20हो जाए नहीं तो पहला इंसान आया जिसने पुत्री मांगी।
- 1:06:27यहाँ तो जो आता है पुत्र मांगता है, चाहे तुम्हारा लहू ही पी जाए,
- 1:06:32हो मांगोगे तुम पुत्र हाँ देखो ना रोज़ कहते हैं बाबा क्यों बोलते
- 1:06:42हो आएगा तो मोदी है, मैंने कहा चलो फिर बोल तो लेने दो।
- 1:06:48आएगा तो मोदी ही तो ठीक है तो बोल तो लेना देना भाई मैं अपनी मनीषा
- 1:06:56पूरी कर लूँ तुम्हारे क्या लेता हूँ तुम मत सुनो लेकिन लोग घर पे
- 1:07:01सुनते है देख ये कुमारी की बात है।
- 1:07:04मैंने कहा नहीं तुम मुझे सुनो फिर भी तुम गुड्ढा क्यों निभाते हो
- 1:07:09भाई सब्सक्राइब कर लेते हो, सुनती तो देखें क्या करता है बाबा फिर
- 1:07:13कमेंट भी करते हो अरे भाई तुमसे पहले ना तो मैंने कहा तुम चैन को
- 1:07:19सब्सक्राइब करो ना मैंने कहा तुम सुनो।
- 1:07:22ना? मैंने कहा सुन के तुम फिर कमेंट
- 1:07:24करो, अगर इतने ही बुद्धिमान हो और ईमानदार हो तो अपना ही चैनल चला
- 1:07:30लो ना कुछ 10 लोगों को बदल गए भला हो जाएगा संसार का तुम।
- 1:07:42मेरे ही कमेंट में आके क्यों बोलती हो क्यों लगती हो तुम अपने
- 1:07:47ही चला लो कोई पैसा तो लगता ही नहीं।
- 1:07:50बिलकुल मुफ्त हो जाता है अकाउंट और अच्छा मिलता है और रोज़ी रोटी
- 1:07:55बढ़िया है चाहे मेरा कंटेंट ही चुरा लिया करो।
- 1:08:01वो बोल दिया करो तो आज बेरोजगारी का माहौल है तो मैं एक मशवरा दे
- 1:08:06रहा हूँ। बहुतों को पहले मशवरा दे चुका और
- 1:08:09मशवरा देने के बाद ही इतने चैनल खुले हैं के बाबा सच बोलते हैं
- 1:08:17हींग लगी ना पड़गड़ी रंग भी चोखा दे।
- 1:08:20तो अपूर्ण चैनल खोल देता है। जैसे चाहे बोल देता है और लोग तो
- 1:08:27फिर ऐसा है ही। लोग मान लेता है क्योंकि किसने
- 1:08:32देखा जंगल में मोर नाचा किसने देखा?
- 1:08:39मैंने देखा सिर्फ मैंने देखा लेकिन तुम कहोगे मैंने भी देखा,
- 1:08:45उसने तो कहा देखा बाबा ने नहीं देखा ये तो मैंने देखा तो भाई तुम
- 1:08:50कहते रहो मुझे अर्जुन थोड़ी क्या क्योंकि मैंने जंगल में मोर नाचा
- 1:08:56देखा। तो उसका आनंद भी तो मैं ही उठा
- 1:08:59रहा हूँ ना? अगर तुमने नहीं देखा और झूठ
- 1:09:02बोलोगे तो उसका आनंद तुम्हें नहीं ना आएगा तो मोर नाचा मैंने देखा
- 1:09:09हाँ और दूसरा अगर मैं चाहू भी। तो तुम दीवार बनकर खड़े हो जाओ,
- 1:09:20तुम कहोगे छातियों को चीर के जाओ ऐसी आगे थोड़े पर ध्यान देंगे।
- 1:09:25बाबा तुम्हे तो मैं तो भाई बड़ा अहिंसक व्यक्ति हूँ, पिछले जन्म
- 1:09:31में भी देखो गोली खा ली, गोली मारी नहीं किसी को ना?
- 1:09:36हाँ, तो ऐसा ही अहिंसक वारिसना आदतें जांदिया है पामे कटलो
- 1:09:43पोरियां पोरियां तो अगले जनम में कौन सा मैं बदल जाऊंगा, वैसे ही
- 1:09:48तो हूँ और ज्यादा ही हिंसक हो गया हूँ ज्यादा अहिंसक।
- 1:09:53आज तो मैं कहता हूँ तब तो फिर भी थोड़ा अड़ जाता था, आज तो मैं
- 1:09:58अड़ना भी बंद कर दिया। ये बस एक जगह पे बैठा हूँ, यहाँ
- 1:10:05तक कि अन भी मेरे लिए गैर जरूरी हो गया मैं कोई तुम पर उपकार नहीं
- 1:10:12करता भाई देखो। तुम कहो के बाबा रोज़ सुना देते
- 1:10:16हो नहीं नहीं कार्य कर अब बता रहे हो गैर जरूरी हो गया।
- 1:10:20भगवान राम के लिए ये इन्द्रियां गैर जरूरी हो गईं तो उन्होंने जज
- 1:10:25क्षमा दी गई, असलियत का भी बाद में बताऊँगा तो अभी आई ऍम नॉट इन
- 1:10:31मोड। तो अगर मैं बदलना भी चाहूं तो
- 1:10:46मेरे पुत्र अभी तो मैं बदलना पाऊंगा।
- 1:10:53वो धृष्टता मैं करूँगा बल प्रयोग कि मैं सख्त वर खिला दूंगा प्यार
- 1:11:02से पुचकार के तीखा अल्फाज़, ब्रो। सत्य को सत्य कह लूँगा सत्य को
- 1:11:15सत्य कहने में कितनी कड़वे शब्द प्रयोग और तुम चाहे अदालतों में
- 1:11:21मुझसे कितना ही झगड़ा झूठा कर लो। तो मैं तो बस यही कहने वाला हूँ
- 1:11:28भाई देखो मैं 13 साल से जेल में बैठा हूँ स्वेच्छा से तो अब
- 1:11:34परीक्षा से बैठ जाता हूँ बस इतना सही है ना एक मंजा मेरा यहाँ डाल
- 1:11:39दो अपूर्ण यहाँ बैठ जाएगा, रोटी मांगेगा न कुछ?
- 1:11:44बस चाय पीता है, तीन बार चाय दे दिया करो और वो भी नहीं दे ना तो
- 1:11:50कोई बात नहीं चलेगा। अपन जीतने लुढ़क जाए।
- 1:11:54उदय कबर होती हुई है। उदय बस बात खत्म है।
- 1:12:04तो अपूर्ण ऐसा है नहीं ना तानाशाह किसी को बदलना नहीं चाहता।
- 1:12:10हाँ तुम्हारे दुख को बदलना चाहता हूँ दुख को, सुख में और सुख को
- 1:12:18आनंद में यह तो मैं तेवर की इच्छा रखता हूँ।
- 1:12:22और इसी इच्छा के तीव्र प्रवाह के कारण मैं बना हुआ हूँ तुम्हारे
- 1:12:28भीतर अन्यथा मैं गंगा के उन लहरों में समा गया होता।
- 1:12:35तीन नदियां जहाँ मिलती त्रिवेणी संगम जहाँ होता।
- 1:12:40बस इसी भीतर से उठते हुए तूफान की इच्छाओं ने मुझे विभाषय कर दिया
- 1:12:46कि मैं गया नहीं। यद्यपि सीटें दो बार बुक हुई और
- 1:12:51मेरी टिकट जिसने बुक कराई उसका नाम तो नहीं बताऊँगा।
- 1:12:53मैं दो बार टिकट बुक कराई। मैंने प्रयागराज की।
- 1:13:01तुम कह देते मैं बदल जाता फिर उफान आता भीतर से फिर फिर मैं कह
- 1:13:07देता तू करा दे टिकट देखी जाएगी। फिर फिर उफान आता।
- 1:13:13फिर आखिर में जब छोटे बच्चे ने कहा नहीं जाना था।
- 1:13:22तो फिर मुझे रुकना पड़ा। बच्चे की आवाज़ परमात्मा की आवाज़
- 1:13:28सोती है निर्दोष्म। आभा तुम्हारी आवाज़ प्यारी बड़ी
- 1:13:38लगती है, मैं तो सुनता हूँ, रोज़ बैठा हूँ ये तो मैं नहीं कह सकता,
- 1:13:50उसका माल है और जोड़ दे, वो खंडा दे, वो मिटा दे।
- 1:13:57ओह बना दे तुम्हारे कागजों में इतिहास में दर्ज पड़ा रह जाएगा,
- 1:14:06लेकिन करोगे क्या उस नाम का जाओगे कहाँ?
- 1:14:14गीता नाम कमा के जाओगे यहाँ इतिहास में कैप्सूल दबा के जाओगे
- 1:14:21किसी को फुर्सत है वो कैप्सूल निकाल के, पढ़ने की सब भागे चले
- 1:14:27जा रहे हैं, ठहरने की फुर्सत भी नहीं है किसी को तुम कहते हो
- 1:14:33कैप्सूल दबा दो। इतिहास याद रखेगा किसको फुर्सत
- 1:14:38पड़ी है तुम्हारे पास फुर्सत है, तुम कहोगे ना आई ऐम बीज़ी नाउ।
- 1:14:47तुम कभी नॉन बिज़नेस में आते हो तो फिर जैसा तुमने पढ़ लिया।
- 1:14:54वैसे ही वो आने वाली पीढ़िया पढ़ लेंगी।
- 1:14:56किसको पढ़ा है? अरे यहाँ आए हो तो जियो और पियो
- 1:15:05हाँ ये आखिरी शब्द है मेरे जियो और जीने दो जियो।
- 1:15:14और प्यारे भर भर के पीयो एक ओशन ऑफ लव है और कहीं दूर नहीं।
- 1:15:23तीर्थ यात्रा मक्का, मतीना, गंगा सागर, हरिद्वार, प्रयागराज में
- 1:15:29नहीं। और तुम्हारे भीतर है, कहीं जाना
- 1:15:34नहीं होता। किसको पता चल जाता है इसलिए तो
- 1:15:39यहाँ एक ही जगह पे बैठा हूँ मैं मुझे पता है जब ज़रा गर्दन झोंका
- 1:15:46ही देख ले दिल के आईने में थी तस्वीरें यार।
- 1:15:59धन्यवाद।