Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Feb 26 - बाबाजी ब्रेसलेट और रत्न क्यों पहनते हैं? रत्नो और ब्रेसलेट का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व
Transcript
- 0:17पूज्य बाबा जीके श्री शरणों में प्रणब आपके श्री वचनों से कई लोग
- 0:29लाभान्वित हो रहे हैं, जो लोग प्रवचन सुनते हैं।
- 0:37उनके द्वारा मुझसे कुछ प्रश्न पूछा गया है जिसका वास्तविक जवाब
- 0:47दे पाने में मैं असमर्थ हूँ अतः आपसे ही पूछ कर।
- 0:55जान लेना उचित लगा? प्रश्नकर्ता ने आपके हाथों में
- 1:04बंधे ब्रेसलेट का फोटो भेजकर मुझसे जानना चाहा था कि यह क्या
- 1:14और कौन कौन सा रत्न? है और ऐसा क्या आप मेरे लिए बनवा
- 1:22सकते हैं? बात हास्य पद अवश्य है, पर इसकी
- 1:30आवश्यकता ही क्यों है, यह प्रश्न बनता है।
- 1:37जिज्ञासा इस बात की है कि आप केवल्य पद प्राप्त चेतना के
- 1:46स्वरूप है, फिर भी आपकी कलाई में रक्षा कवच उंगलियों में विविध।
- 1:54रत्नों की अंगूठियां दृष्टिकोचर होती हैं, जो कि रक्षा के लिए
- 2:03नकारात्मक रंगों को रोकने हेतु व अन्य लाभ हेतु प्रयुक्त होती हैं।
- 2:11तो क्या? परम क्षेत्र में स्थित संत को भी
- 2:17नकारात्मकता से बचना और विविध लाभ हेतु रत्न ब्रेसलेट माला की
- 2:26आवश्यकता पड़ती है। कबीर नन।
- 2:32दादू पल्टू रामकृष्णा इत्यादि संतो के विषय में ऐसी बातें तो
- 2:39देखने को नहीं मिलती मैंने जिज्ञासु को अपनी समझ अनुसार जवाब
- 2:47तो दिया। कि बाबा जी की क्रियाएं को समझ
- 2:51पाना हम साधारण लोक के वश में नहीं है और वो स्वयं उनकी
- 2:58अमृतवाणी ही हमारा रक्षा कवच है। क्या इस विषय पर कुछ प्रकाश
- 3:05डालेंगे बाबा जी? के पर्व चैत्र में स्थित श्रद्धा
- 3:10आनंद रसपान करने वाले संतों को भी क्या इसकी आवश्यकता पड़ती है?
- 3:17आपका शिष्य श्रीधर गोराहा बिलासपुर छत्तीसगढ़।
- 3:29सोचता हूँ अपने घर को देखकर सोचता हूँ अपने घर को देख कर हो ना हो।
- 3:43ये है मेरा देखा हूँ सोचता हूँ अपने घर को देख कर हो न हो ये है
- 4:05मेरा। देखा हुआ सोचता हूँ क्या ये
- 4:19प्रश्न उस व्यक्ति ने पूछा है जो छह वर्षों से लगातार मुझे सुन रहा
- 4:25है? और क्या उन तमन्नाओं का क्या हुआ
- 4:41जो आप अपने अंतश में पड़े हुए हैं?
- 4:45अमृत समुद्र का पान कर नहीं चले। यही चीजें अटकाव बना और हम छोटे
- 4:58छोटे अटकावों में उलझ जाते हैं, इसलिए मैंने कल ही।
- 5:10500 लोग चहे थे। ज्यादा क्या कारण है?
- 5:20मैं ये ब्रेसलेट वगेरह क्यों पहुंचता हूँ पहनता हूँ पहली बात
- 5:26तो मैंने छुपाई नहीं कभी। अब ये दखाई से दिखते भी नहीं है।
- 5:33ये पैसे और भी है और एक नहीं और भी बहुत कुछ।
- 5:50ऐसा मैं क्यों करता हूँ? आपको जानकर बड़ी है, आपके लिए सोच
- 6:10में मत पड़ जानो और आत्म गलाने भी मत पालो।
- 6:18ये प्रश्न बिलकुल ऐसा है जैसे भगवान कृष्ण से कोई पूछे कि आप
- 6:28खाना क्यों खाते हैं? क्या आप जैसे भागवत पुरुषों को भी
- 6:39खाना खाने की आवश्यकता होती है? कोई राम से पूछें कि आप भोजन की
- 6:50थाली पर क्यों? बैठ जाते हैं।
- 6:55रामकृष्णा प्रमुख से कुछ सभी संतो महात्माओं से कुछ का भोजन क्यों
- 7:05करते? लेकिन ये कुछ अटपटा सा लगता है,
- 7:15बात वही है। भोजन शरीर की रक्षा के लिए होता
- 7:22है और शरीर की रक्षा राम इसलिए करते हैं।
- 7:29कृष्ण इसलिए करते हैं कि मैं दैनिक कर्तव्यों का निर्वहन अच्छी
- 7:34तरह से कर सकूँ। और जितना व्यक्ति के पास दायित्व
- 7:43ज्यादा हो, उतना ही अधिकार के साथ साथ कर्तव्य भी संग संग चलता है।
- 7:58मेरा फर्ज भी है कि मैं इस शरीर को यथा संभव बचाए।
- 8:14यह प्रश्न पूछना कोई औचित्य नहीं रखता है, क्यों?
- 8:27क्योंकि शरीर को चलने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है और आपको पता
- 8:34है क्योंकि व्यक्ति अपने हिसाब से उदाहरणों को चुन लेता है।
- 8:51लेकिन मैं तुमसे पूछुंगा क्या कृष्ण रत्न नहीं पहनते?
- 9:00क्या राम रत्न नहीं पहनते? शायद आपको पता?
- 9:11राम भी रत्न पहनते हैं। कृष्ण भी रत्न पहनते हैं और आपको
- 9:17शायद ये ना पता हो के 24 के 24 तीर्थंकर।
- 9:26वो राजा तो थे सभी रतन पहनते थे सभी और शायद आपको ये भी ना पता हो
- 9:39कि बुद्ध भी रत्न? तब रतन पहनने की परभाषा कुछ हो।
- 9:53जैन धर्म एस्ट्रोलॉजिकल व्यवस्था को ज्यादा अच्छी तरह से समझता है।
- 10:06इसलिए सभी राजाओं ने उनके शरीर की रचनाओं के मुताबिक अलग अलग
- 10:14स्टोन्स पहने। जैसे डॉक्टर कहता है कि आप में डे
- 10:22थ्री की कमी। बी 12 की कमी आयरन की कमी
- 10:30कैल्शियम की कमी डिहाइड्रेशन हो गया है, ग्लूकोज़ देना पड़ेगा,
- 10:40इंट्रा बिज़नेस लेना पड़ेगा। तो क्या आप पूछते हैं मैं
- 10:51हॉस्पिटल में दाखिल था, बोतल लग रही थी ऐट डेक्स्ट्रॉस की नॉर्मल
- 11:01सेलाइन की। किसी ने नहीं पूछा ये बाबा ये
- 11:05आपको क्या जरूरत है जरूर, लेकिन ये बात आपने कभी नहीं पूछी।
- 11:20के रत्न पहनते हुए भी महावीर भिक्षा अपनी शर्तों पे क्यों लेते
- 11:32हैं उनके पास? बिक्षा देने के लिए उनके ही
- 11:45स्थानक में सैकड़ों टिफिन आ जाते और धन्य भागे।
- 11:53समझते हैं कि बाबा प्रभु गुरुदेव। हमारे भोजन को ग्रहण कीजिये सब
- 12:05मौजूद है लेकिन वो कहते हैं मैं ज़िन्दगी को अपने ढंग से चु।
- 12:20बुद्ध के पास सब कुछ है। आज राजा लोग संहार कर रहे हैं,
- 12:31अपने विरोधियो का इन गद्दियो के लिए और छुपाती भी हैं।
- 12:40और छुपाने के लिए महंगा महंगा मीडिया भी इस्तेमाल करते हैं,
- 12:50लेकिन बुद्ध है के चोरी छुपे अपने ही राज्य को छोड़कर रात को चेतक
- 12:56से कहते हैं चल जल्दी करो, घोड़ा बांध लो।
- 13:04क्या हुआ? ऐसे प्रश्न एक ऐसा व्यक्ति जो
- 13:20समझदार अस्तित्व रखता है? ऐसे प्रश्न पूछेगा।
- 13:35ऐसे व्यक्ति से उम्मीद नहीं की जा सकती।
- 13:39बाकी लोगों से उम्मीद की जा सकती है।
- 13:44आपने कभी पूछा शंकर भगवान के? रुद्राक्ष क्यों होते हैं,
- 13:48रुद्राक्ष क्यों होते हैं? वही काम है ना?
- 13:51रत्नों का है रुद्राक्ष नेगेटिव एन आर सी को खत्म रत्न भी नेगेटिव
- 14:01एन आर सी को खत्म कर और ध्यान रखना।
- 14:07जैसे पिता अगर खाना खाये तो पुत्र कहें पिताजी आप खाना नहीं नहीं,
- 14:19रोने की बात है तो पिता कहेगा पुत्र।
- 14:25फिर तुम पलोगे कैसे अगर मैं खाना तो तुम्हारा पालन पोषण कौन करेगा
- 14:42आज? धरती पर ऐसा विनाशकारी अस्तित्व
- 14:52माहौल बन गया और चारों तरफ लाशानी रंगों से भरा हुआ।
- 15:08और यह वो ही व्यक्ति बोल रहा है जो त्रिवेणी संगम पर अपना शरीर
- 15:20त्यागना चला था, जो आठ बार पहले मर चुका है।
- 15:28जो नहर में गिर गया, जो 30 फुट गहरी थी।
- 15:32और क्यों भी नहीं की प्रत्यक्षदर्शी तुम्हारे सामने आ
- 15:36चूके हैं। यह कोई कसौटी नहीं है।
- 15:48कसने की जी विष्णु देखनी है। तो व्यक्ति के कर्मों से थे मौत
- 16:03के मुँह में पड़ा है तैरना तन गिर गया है कमजोर है भोजन खाता।
- 16:15मात्र इकाई था। दूध ले के तीन बार किस लिए तरंगें
- 16:26वे शाक्त न हो जाएं और इन्हीं तरंगों का पान आपने करना।
- 16:32आपने ही नहीं करना आने वाली न जाने कितनी पीढ़ियों ने करना तो
- 16:45क्या मुझे भोजन खाना शुरू कर देना चाहिए?
- 16:49लोग तो ऐसा ही कहते हैं। मेरे अपने ही घर वालों ने बड़ा
- 16:53विरोध। आज भी 12 वर्ष 14 वर्ष बीतने के
- 17:02बाद मेरे ही घर के परिवार के लोग कह देते हैं हमें आग की तरफ देख
- 17:13कर दिमाग पर बोझ पड़ा। अब भी 14 वर्षों से सही चल रहा
- 17:22है, लेकिन यह बोझ रखने की प्राणी आदत है।
- 17:32बोझ न करेंगे तो जीवन कैसे चलेगा? लेकिन जीवन तो फिर भी चल रहा है
- 17:40और बड़े मज़े से चल रहा है। मैंने जीस काम के लिए बाबा जी की
- 17:55कृपा से बोलना शुरू किया। अपनी इच्छा से तो बोलना मैंने
- 17:59शुरू किया। जिसने संसार को बनाया उसे संसार
- 18:07का फिक्र है। उसने जगाया वो कल बड़ी बात थी,
- 18:16जिसने बनाई सृजना। वो ही चला रहा, उसको फिकर था तो
- 18:23उसने काउट बोल तो जीस मंतव्य से मैंने बोलना शुरू किया था।
- 18:38अटक के ना वहीं पे आके छः वर्ष बाद।
- 18:48अब इस प्रश्न से कोई क्या संक्षेप है आपके भीतर?
- 18:52मुँह मुक्षा कितनी है छोटी छोटी बातों में?
- 19:04परमात्मा की उस चरम उत्कर्ष की इच्छा रखने वाले लोग छोटी छोटी
- 19:11बातों में खुद भी उलझे हुए हैं और चेष्टा करते हैं।
- 19:15मुझे भी उलझा ये बात अलग है कि मैं।
- 19:26मैंने मूछें कटवाली और किसी को मूछों के साथ बाबा मूछें कटवाली
- 19:40मैंने कहा। ये आपने केस कतल क्यों करवा लिया?
- 19:53अब मैं इन बातों का जवाब क्या तुम तो समझदार?
- 20:07अच्छा होता किसी अच्छे से प्रश्न पर आप भी डुबकियां लगाते।
- 20:16उस आनंद में प्रेम और सुनने वाले भी जीस नियत से आए थे, श्रद्धा से
- 20:22आए थे, वो भी उसमें डुबकियां लगाते।
- 20:38अपने अंतः समय कैसे जाएं, बार बार कहता हूँ?
- 20:44प्रश्न तो यही बनता है पुष्य और बाकी मैंने वस्त्र सफेद क्यों
- 20:53पहनता हूँ? स्नान क्यों करता खाना क्यों नहीं
- 21:04खाता? बाहर क्यों नहीं जाता?
- 21:09घूम फिर आया करो। थोड़ी सी उम्र बढ़ जाती है।
- 21:18इन प्रश्नों का कोई सबब है क्या? क्या तुम मुझसे ये अपेक्षा रखोगे
- 21:33कि मैं शरीर को बचाना चाहूंगा? क्या महावीर से तुम ये अपेक्षा
- 21:39रखोगे कि वह शरीर को बचाना चाहेगा?
- 21:45जबकि जीव वैष्णव समाप्त हो गई। क्या बुद्ध से अपेक्षा रखोगे?
- 21:54के इतनी शानदार जंदगानी को छोड़कर वह क्यों भागा?
- 22:00क्या था ऐसा सब कुछ दिखता है। देखने वालों को फिर भी छोड़कर
- 22:11क्यों चला गया? बुद्ध के जीवन को ठीक से देखा जाए
- 22:19तो बुद्ध के जीवन को जीने के लिए लोग तरसते हैं और तरसते नहीं
- 22:29कत्लोगारत पे उतर जाते। और एक बुद्ध है, सुंदर पत्नी है,
- 22:40यशोधरा जैसे सुंदर सवस्थ बच्चा है और आप ही जैसे।
- 22:51इतना है बड़ी समय दास दासियां हैं।
- 23:01ये सारा मात्र से सब चीजें हजर हो जाती हैं, लेकिन फिर कोई काम ना
- 23:08करें। कि यह आपके पास सब कुछ था।
- 23:17रसगुल्ला, गुलाब जामुन पकोड़ा, चाउमीन चुग्गा आपने खाया तुमने?
- 23:29बचकाना सी बातें लगती हैं क्या ऐसा नहीं हो सकता कि बुद्धि की
- 23:45अपज्ञता को जानते हुए ऐसे प्रश्न न किए जाएं?
- 23:54बुद्धि अल्पज्ञ है और गागर में सागर समाता, और जब गागर में सागर
- 24:04समाता? तो गागर में सागर समा जाए?
- 24:10ऐसी जिद किसी सिख को परेशानी नहीं हुई।
- 24:20हालांकि पापा नानक कहते हैं, उनके तो धर्म में ये प्रसार है और मैं
- 24:29बाबा नानक का जपजी साहब का। अक्सर ही जकर करता हूँ, मुझे बड़ी
- 24:34प्यारी लगती है, लेकिन बाबा नान क्यूँ कहते हैं?
- 24:42मैं ये भी जानता हूँ प्रसंग को ज्यादा खींचूंगा नहीं और भी।
- 24:57सीधा सीधा सा जवाब है, मैं सॉलिड भोजन कोई नहीं करता और इस शरीर को
- 25:08बचाने के लिए नेगेटिव एनर्जी से। शरीर है भाई आग जलाएगी इसको और
- 25:22तुम्हारी गलती क्या है? मैं ये भी जानता हूँ तुम्हारी
- 25:27गलती ये है कि तुम मेरे उस भीतरी तत्व को जो गलता नहीं जलता, नहीं
- 25:34भीगता नहीं, सूखता, नहीं कटता उसको तुमने उसके डेफिनिशन को
- 25:48तुमने शरीर पे डाल लिया है। तुम कहते हो जब ये कटता नहीं, ये
- 25:55मरता नहीं, ये गलता नहीं, ये सूखता नहीं।
- 26:03फिर इसको बचाने की चेष्टा क्यों? प्रश्न ठीक नहीं है।
- 26:14और मैं ये भी जानता हूँ कि ठीक क्यों नहीं है क्योंकि अभी तक
- 26:18आपने उस शाश्वत के दर्शन नहीं किये हैं।
- 26:22नैनम क्षदन तीर्षास्त्रण वह तो वाकई नहीं जलता।
- 26:29उसको तो किसी प्रकार के ब्रेसलेट्स की जरूरत नहीं है।
- 26:35उसको कोई सुरक्षा कवच नहीं चाहिए। हमारा दिमाग तो रात भर सो कर
- 26:49परेशान हो सकता है। कुछ भविष्य की बातें सोचकर
- 26:56व्यक्ति परेशान हो जाता है, लेकिन मैंने बहुत बार कहा यह परेशानी उस
- 27:04तत्व तक नहीं पहुंचते इसलिए दो ही रास्ते हैं।
- 27:15या तो इस परेशानी का हल कर लो जो तुम्हारे दिमाग में चल रहा है।
- 27:21फिर संसारी का श्रम करना पड़ेगा, फिर संसारी का श्रम करने के लिए।
- 27:31बावनान कहते हैं पापा बाज न होवे कट्ठी मोया संग न जावे अगर ये
- 27:40नहीं करना है भीतर के उस आंत्रिक रस का आनंद लेना।
- 27:48वह मार्ग अलग है, फिर तो बेहतर उतरों और भीतर उतरने के लिए ध्यान
- 27:56रखना एक छोटी सी कहानी से तुम समझ जाओगी।
- 28:07विश्वामित्र अपने भीतर उतरना चाहते थे उस अंतरंग तल तक जहाँ पर
- 28:15कोई भी ऋषि अंत तक जा सकता है, उससे आगे नहीं वहाँ पहुंचने की
- 28:24चेष्टा कर रहे थे। और उन दिनों में इन चीजों का नाम
- 28:29था यज। याने के अपने आप को स्वाहा कर दे
- 28:41आज यज का मतलब और कुछ हो गया है। यज्ञ की अग्नि का मतलब अपने
- 28:50अहंकार को ईगो को इलूशन को स्वाहा कर देना।
- 28:56वर्ष में भूत कर देना जीरो पर। फिर विश्वामित्र जैसे इतने भली
- 29:07व्यक्ति को जो स्वर्ग का निर्माण स्वयं कर सकता है।
- 29:12इतिहास में सिर्फ एक ही ऐसा रिसीव हुआ जिसने स्वर्ग का निर्माण
- 29:20स्वयं कर लिया। जो निर्माता बन गया, जो सृजन हारा
- 29:25बन गया एक और एक मात्र लेकिन संसार की रचना करने के बावजूद वह
- 29:34अपने भीतरी दलों से अछूता है। और राक्षस से परेशान करते हैं,
- 29:42तड़का है, खर है, दूषण है, मारीच है वो उसके जज में खलल डालते हैं
- 29:58यह जो सब आपको दिखाए जाते हैं। खून का घड़ा हड्डियों माँ से टपका
- 30:06दिया। यह कुछ नहीं किसी अन्य तरीकों से
- 30:17उसको भीतर जाने से रोकना यह है हवन में।
- 30:29मेरे पास फ़ोन आ जाते हैं, लोगों के नए लोग मुझे सुना अच्छा फ़ोन
- 30:40नंबर दिया ही होता है। और प्रत्येक व्यक्ति समझता है कि
- 30:48हमारा ही कैसा होगा। फ़ोन लगा देते हैं।
- 30:56अक्सर मैं फ़ोन नहीं कई बार ज्यादा मदहोश के आलम में उठा ले।
- 31:04पता ही नहीं। आनंद को भी रहा फ़ोन आ गया, मैंने
- 31:11उठा दो चार क्षण बात की तो मैं कह के कि आप ऐसा करो, मैसेज कर दो।
- 31:28फ़ोन को काट देता हूँ और अंगूठा लगा देता हूँ, इस सब बेचारे को
- 31:39पता नहीं। लेकिन जिन्हें पता है उन्हें मैं
- 31:44समझा। जो व्यक्ति अपने अंतश में जाता है
- 31:51उसकी अंतश की यात्रा को रोकना सो हत्याओं के बराबर का पाप।
- 32:00जैसी सो हत्याएं कर दी। आपने वैसे ही किसी ऋषि को अपने
- 32:07अंतर का अमृत पीने में बाधा डालने वाले का परिणाम होता है, उसके
- 32:14बराबर का दंड मिलता है। व्यक्ति।
- 32:24इसलिए कभी भी ऐसे व्यक्ति को क्योंकि अभी आपकी उम्र ज्यादा
- 32:29नहीं है, हम तो गए बीते हैं। लेकिन तुम्हें समझा रहा हूँ ताकि
- 32:38पता चले कि अगर कोई व्यक्ति मस्त है और यह मस्ती बड़े जीवनों की
- 32:49मेहनत के बाद बटकन के बाद मिलती है।
- 32:55कितनी मशक्कत की होगी? इस व्यक्ति ने अपने अपने ही अंत
- 33:00स्थल में उतर और आप अगर जैसे हम अक्सर कह देते हैं आपने सुना होगा
- 33:09कि सोए हुए व्यक्ति को जगाना पाप। और मात्र सोया है अभी व्यक्ति और
- 33:20रोज़ सोता है बस बिलकुल ऐसा है वो व्यक्ति अपने अंत में जाकर।
- 33:30उन्होंने उस अमृत रस को किया नहीं इसलिए वो व्याख्यान नहीं कर पाए
- 33:36तो मैं व्याख्यान किया देता हूँ। जो अपने अमृत के रस को पी रहा
- 33:43उसको डिस्टर्ब मत कर अगर आपको कोई समस्या है।
- 33:51तो मैसेज कर दो आपके पास ऑप्शन है जब भी वो जगेगा, मैं आपका मैसेज
- 34:05पढ़ लेगा, आपको जवाब देगा। आप देखो ये मैसेज ये।
- 34:10जीस मैसेज का मैं जवाब दे रहा हूँ ये मैसेज ही तो आया मेरे पास
- 34:15प्रश्न के रूप में लेकिन जब मैंने देखा और जब वातावरण अनुकूल हुआ,
- 34:24प्रश्नों की जरूरत पड़ी व्यर्थ प्रश्न तो बहुत है।
- 34:33लेकिन सार्थक प्रश्न मैंने उठाये इसकी जरूरत है ऐसे ही आनंद पीने
- 34:45वाले व्यक्तियों को। संत को ऋषि को आनंद पीने में खलल
- 34:54नहीं डालना चाहिए। इसीलिए उन लोगों को राक्षस कहा
- 34:58गया। हड्डियों गिरा देते थे, माँ
- 35:03समुद्र गिरा देते थे। मवाद करा देते थे।
- 35:10हर प्रकार से वह अंत समय ना जा पाए।
- 35:15कोशिश करते थे उनको क्या मिलता था उनको कुछ भी नहीं मिलता।
- 35:28कुछ लोग दूसरों को तंग करने में सुखद अनुभव करते हैं और वो अक्सर
- 35:36राजनीति में चले जाते हैं क्योंकि राजनीति से बढ़िया मार्ग।
- 35:43दूसरों को दुःखी करने का और कोई है ही नहीं।
- 35:51सारा बल सारी शक्ति, सारा धन, सारी पद्मियां उसके हाथ में हैं,
- 35:58लेकिन वह भूल जाता है कि यह अस्थाई है स्थाई।
- 36:09कभी भी एक व्यक्ति को जब वह आनंद को पीरा, मैं अपने फ़ोन को अक्सर
- 36:22ही साइलेंट में रख। अगर कोई फ़ोन कर भी रहा उसे पता
- 36:33नहीं है तो वह भूलकर भी यह पाप ना कर सके।
- 36:39मेरी पूरी कोशिश रहती है और अगर किसी ने एक बार ये गलती की आगे से
- 36:45ना करे इसलिए मैं उसे ब्लॉक कर देता हूँ।
- 36:48मंशा अच्छी है, जीसको ब्लॉक किया। वो किस प्रारूप में से देखता है,
- 36:57यह उसकी मनोदशा है। यह मेरी समस्या नहीं है।
- 37:04मैंने तो उपकार किया था। कल को इन्शाअल्लाह यह भी पहुंचे।
- 37:17फिर इसको पता चलेगा कि यह। जो हमें उपदेश दिया गया, यह कितना
- 37:28कीमती था और कितना सार्थक था तो आपने पूछा अच्छा हुआ, पूछ लिया।
- 37:40किसी शेख को पूछना चाहिए था यह प्रश्न लेकिन आपने पूछ लिया अच्छा
- 37:52किया, कोई ना कोई तो पूछ ही लेता, अन्यथा यह प्रश्न कुंवारा ही रह
- 37:58जाता। आज इस प्रश्न को मैं सुहागन किया
- 38:03दे रहा हूँ इसका जवाब दे रहा हूँ। शरीर की रक्षा करने मुझे आवश्यक
- 38:23नहीं। बिल्कुल ऐसा ही जैसा पिता को
- 38:28बच्चे को पालन पोषण करने के लिए उन सब चीजों को सुरक्षित रखना
- 38:33होता है। इन चीजों की आवश्यकता है कि सारे
- 38:39मेरे ऑपरेटित हैं हथियार। जिनसे मैंने आपको बताना है भीतरी
- 38:51सत्य और यह शुक्र है कि अभी तक यह तंत्र से ही काम कर रहा है।
- 39:11मुझे अक्सर कह देते और मैंने बोला भी बहुत बार है लेकिन आज क्योंकि
- 39:20किसी जिज्ञासु व्यक्ति ने प्रश्न पूछा है, ऐसे तो मैं कह देता हूँ
- 39:25देखो मेरे दिमाग में फर्क है भाई। अमृतसर से पागल खाने से बात किया
- 39:35मेरे एयरबैग में दो ईंटें हैं। पूरी पूरी बबरा फोड़ दूंगा।
- 39:41सुनाई है ना बात तो उसकी स्वास्थ्य रुक जाती है।
- 39:48पूछा बहुत लोगों ने मुझे यह एक विज्ञान और इस विज्ञान में अगर
- 39:59मैं पढ़ तो उस विज्ञान से तुम चूक जाओगे।
- 40:09और मास्टर को टीचर को देखना होता है कि ज्यादा जरूरी काम है क्या?
- 40:17अगर कोई तुम्हारे सामने बच्चा आग में गिर गया और तुम खाना खा रहे
- 40:22हो तो तुम खाना फौरन छोड़ दोगे क्यों?
- 40:28बच्चे को आग में से निकालना ज्यादा जरूरी है।
- 40:32अगर कोई डॉक्टर किसी पेशेंट को देख रहा है और दो पेशेंट बैठे और
- 40:39एक पेशेंट के इन्जेक्शन रिएक्शन कर गया तो वह 99 को छोड़ देगा।
- 40:47जिसके रिएक्शन हुआ उसके पास पहुंचेगा, उसका इलाज करेगा लाओ
- 40:56भाई डेकड्रोन लाओ एवर लाओ, डेक सोनाफर्टी लाओ सभी ऐंटी अलर्जिक।
- 41:05बीपी कम हो गया। मैं फेन्टिन वगैरह लेके आऊं बीपी
- 41:09चेक करेगा, सब देखेगा, लेकिन बाकी 99 में पेरेंट्स को छोड़ देगा।
- 41:16ज्यादा जरूरी क्या है जो मैंने बोल दिया शुरू के अध्याय से लेके।
- 41:24करीब 6 साल होने को आए। मैंने जो जरूरी था वो पहले बोला
- 41:35और स्टेप ब्य स्टेप लगातार मैं चलता रहा जो चीज़ कल बोलने वाली
- 41:42है। वो मैंने 2 साल पहले नहीं बोले।
- 41:47मैं जानता हूँ सिलेबस को कवर कैसे किया जाता है क्योंकि मैं लाखों
- 41:53बार वहाँ पर गया हूँ और आया जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले।
- 42:03दिल के आईने में थी तस्वीरें यार मेरा रोज़ का काम है और रोज़ का
- 42:11काम हजारों बार मैं आता हूँ जाता हूँ मेरे लिए यह राजमार्ग है
- 42:19राजपथ है। कोई मुश्किलात नहीं होती।
- 42:24अब तो मैं आँखें बंद करके भी जाता हूँ, इसलिए जो ज्यादा जरूरी था।
- 42:33पहले बोला अगर यह प्रश्न पहले आता तो मैं टाल के आऊं।
- 42:42ऐन वक्त पर आया। जब पहले अध्यात्म का ग्रंथ समाप्त
- 42:48हुआ फिर रहस्य का ग्रंथ समाप्त हुआ।
- 42:51अब लीला का ग्रंथ समाप्त होने जा रहा है।
- 42:56लीला समाप्ति की ओर। शायद बस थोड़ी सी वीडियो और और
- 43:07मैं आपको अंतिम प्रणाम कह दूँ फिर उसके बाद।
- 43:19अगर कुछ स्वच्छ बचे फिर आप लाइव ऑफ प्रवचन सुनिएगा उसके लिए
- 43:26व्यवस्था कर रहे हैं श्रद्धालुगण मुझे तो पता ही नहीं।
- 43:33क्या बना, कहाँ तक बना? खुद ही श्रद्धालुगण या अपने
- 43:40मिस्त्री मेरे पास वीडियो भेज देते हैं?
- 43:45मैं समझ जाता हूँ कि इतना बन गया भाई।
- 43:51अभी दो चार महीने में छत खड़ी हो जाए, आप आराम से वहाँ बैठकर मेरा
- 44:03पर्वचन सुन पाओगे लाइव उससे और कुछ ज्यादा फर्क पड़ने को नहीं
- 44:10है। यही आवाज़ रहेंगी आनंद सिंह
- 44:20खुमारी में भीगी हुई ध्यान रखना जीस व्रक्ति से प्रश्न पूछा गया
- 44:36है उसे मैं बखूबी जंग। घट घट के अन्तश की जा भले बोरे के
- 44:46बीच किस वृत्ति से ये प्रश्न पूछा गया, मैं बखुबी जानता हूँ, मेरा
- 44:56कुछ नहीं बिगड़ न झटकों। जुल्फ से पानी न झटकों हो जुल्फ
- 45:12से पानी, ये बहुत ही टूट जाएंगे। ना झटकों जल से पानी यह मोती टूट
- 45:32जाएंगे, तुम्हारा कुछ ना बिगड़ेगा।
- 45:40मगर दिल टूट जाएंगे न झटकों जुल्फ से पानी आज तुमने जिग्रह किया उस
- 45:57मित्र के चैन को। मैं व्याख्या ही ना करूँ, इतना
- 46:02वक्त खराब हो जाए, कल को कोई और करेगा।
- 46:08फिर ऐसे ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे जो मुझको बाहर की बाहर रखेंगे।
- 46:16और मैं इस चीज़ को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकता।
- 46:22बहुत बोला हूँ, आप उनको सुना करो लगता है पुरानी वीडियो आपने ठीक
- 46:33से सुनी। अन्यथा आज यह इतना घटिया प्रश्न
- 46:44कैसे आता है तुम? नेगेटिविटी फैलाने वाले प्रश्नों
- 46:55को किस मूर्ख ने कहा कि तुम पूछ लो।
- 47:04कल को फिर तुम ये भी पूछो के बाबा तुम मांस क्यों नहीं खाते, उससे
- 47:17उम्र बढ़ती है, रोटी क्यों नहीं खाते?
- 47:24शरीर के भीतर अगर एक भी विटामिन मिनेरल या प्रोटीन कार्वाह है, जो
- 47:32फैक्ट वगैरह की कमी हो जाए तो शरीर दुर्बन हो जाता है।
- 47:41लेकिन मेरी व्यथा सुन। मैंने शरीर से अब कोई काम लेना,
- 47:49मेरी इन्द्रियां मेरे लिए बेकार होगा।
- 47:54इन्द्रियों से सुख मिलता है, निश्चित मिलता है लेकिन मुझे।
- 48:01वो सुख मिल गया जो इंद्रीया तीर्थ होके मिलता है इंद्रीया तीर्थ सुख
- 48:11पाने के बाद ये ब्रेसलेट आपको क्या तकलीफ देते हैं।
- 48:27मेरा कोई पता नहीं, मैं आंधी, मूंछ मुढ़ा के भी आ सकता हूँ।
- 48:33कैसा लगूंगा? फिर तुम तो इस पर भी प्रश्न खड़ा
- 48:39करो बाबा आंधी मूंछ भाई मूंछ ही तो कटवाई है क्या खास बात?
- 48:47या कोई प्रश्न पूछने का है कोई दम, कोई कसम इस प्रश्न में नहीं
- 48:58ज्यादा अच्छा होता कि यह वक्त? ये तो प्रश्न ही ना पूछते हैं मैं
- 49:07अंतः की खुमारी में खोया रहता या फिर कोई ऐसा प्रश्न पूछते जिसे
- 49:14सुनकर सुनने वाले श्रावक भी निहाल हो जाते और आपको भी बड़ा आनंद
- 49:20आता? यह बार बार क्यों चूक चूक जाते
- 49:28हो? कमी कहाँ क्या मेरे में कमी है?
- 49:41क्या मैं सरलीकृत भाषा में आपको समझा नहीं पाया?
- 49:46क्या कोई अन्य ग्रंथ आपको ज्यादा सरलीकृत भाषा में समझा सकेगा?
- 49:51हाँ हैं ऐसे ग्रंथ राधे राधे करते रहो, राम राम करते रहो।
- 50:01पांच ये नाम जपते रहो, सरली कृत है जितना हो हो नहीं हो तो छोड़
- 50:08दो लेकिन ये मार्ग नहीं है, ये भटकनें हैं।
- 50:18बटनों का अनुभव भी ले लेना चाहिए क्योंकि ये भी सहायक है।
- 50:27आज अगर बटनों का तुम्हें पता चल गया कि इनसे नहीं मिलता तो यह भी
- 50:36एक अनुभव बड़ा प्यारा है। ये भी करके देखो राम राम गायत्री
- 50:51मंत्र राधे राधे शब्दों में जो चीज़ जाती है वो भी करके देखो
- 50:59क्या मिलता है? नहीं, मैं तुम्हें उस तल पे ले
- 51:04जाना चाहता हूँ बो आ रहे हैं साँसों ज़रा आहिस्ता चल बो आ रहे
- 51:19हैं। साँसों ज़रा आहिस्ता चलो दिल की
- 51:26धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ती है।
- 51:32जहाँ तुम्हें ऐसा लगने लगा है उस पर मौन।
- 51:40जहाँ अमृत की बरसात दिन भर रात चौबीसों घंटे होती है,
- 51:56क्या तुम वहाँ जाना नहीं चाहती नहीं ऐसी बात और देखो शायद बोला
- 52:09तो पहले। सभी सन्तों ने हैं, लेकिन अपने
- 52:13अपने ढंग से बोला और आप समझ नहीं पाए, आज मैं थोड़ा सरलीकृत करता
- 52:18हूँ। मैंने आपसे पहले कहा लेकिन स्टेप
- 52:24ब्य स्टेप चलता हूँ कि पहले पेट को भर।
- 52:35फिर इस मार्ग पे चल पढ़ो लेकिन मैं तुमसे इतना कह मैं ये चाहता
- 52:47हूँ कि पेट जितना भरा जाता है उतना तो भर लो, आधा भरा जाता आधा
- 52:52भर लो, कोई बात नहीं। बुद्ध ने यही सोचकर घर त्याग दिया
- 52:56था। जितना मिलेगा, खा लेंगे बाकी फाका
- 53:00रख लेंगे और यह भी एक बड़ा साहस है और उस व्यक्ति के लिए तो बड़ा
- 53:09साहस है जिसके पास इतना कीमती साजो सामान।
- 53:18धन वैभव राज्य दरबार गद्दी अकेला वारिस पत्नी है, बच्चा है, पिता
- 53:26है वो सब छोड़ के जाना कितना मुश्किल है?
- 53:36लेकिन फिर भी ऐसा क्या था जिसने उसके लिए इन सबको लात मार दी?
- 53:48घोर अंधेरे में जो गुणों भी टमटमाता हुआ दिखता है।
- 53:57दिन के उजाले में जुगनों की टमटमाहत नजर नहीं जो व्यक्ति
- 54:08अमीरी को भौंक गया और अमीरी उसे काली राँस की तरह लगने लगी।
- 54:19उसके भीतर से एक पुकार उठेगी। पेट तो भर गया लेकिन न जाने
- 54:28तृप्ति नहीं हुई। बड़ी से बड़ी गद्दी तो हथिया ली।
- 54:37अब हमारे तो यहाँ राष्ट्रपति अमेरिका ही सबसे बड़ी से बड़ी
- 54:41करती है तो पूछेगा ट्रंप से जब ये रिटायर हो जाएं के राज़ तो होगा
- 54:55रफते भी मिले। निश्चित वह 100% कहेगा नहीं,
- 55:07लेकिन उसका संस्कार है। उसने इस ढंग से सोचना शुरू कर
- 55:13दिया। वो कहेगा अगर तीसरी बार भी मुझे
- 55:16मौका मिल जाए। तो मैं कोशिश करूँगा, शायद तीसरी
- 55:20बार तृप्ति मिल जाए, वो ही है चाल बेढंकी जो पहले थी वो अब भी है इन
- 55:28संस्कारों से बचना। मैं ये बात इसलिए नहीं कहता की
- 55:42अगर सभी मांगने चल पड़े तो फिर इन्हें देगा वो नहीं यह।
- 56:00पथ कारगर नहीं है, वास्तविकता से दूर है, इसलिए मैं कहता हूँ धन के
- 56:10पीछे भी मत लगना, इतना भी मत जोड़ लेना क्योंकि धन वालों को तृप्ति
- 56:17कभी हुई नहीं। इतना सा जोड़ लेना सायम इतना
- 56:25दीजिए जा मैं कुटम सुमा मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जात।
- 56:40साधु की फिक्र भी करते हैं कभी यानी कोई व्यक्ति संसार से व्रक्त
- 56:48हो के आ जाए बुद्ध जैसा कोई व्यक्ति महावीर जैसा कोई व्रत 24
- 56:55तीर्थंकरों जैसा कोई व्यक्ति। शंकर जैसा कोई व्यक्ति जो जो
- 57:06लक्ष्मी को इशारों पर न जा सकता है के ऐसा करो महालक्ष्मी।
- 57:17इस विधवा ब्राह्मणी के घर पे तीन प्रहर वर्ष आओ स्वर्ण मुद्राएं से
- 57:27कोई बहुत मुश्किल मामला है। लेकिन तुम्हारी तो जीभें लपलपा
- 57:36लगती हैं। मेरे पास कल ही एक व्यक्ति आ गया
- 57:43बाबा शराब नहीं छोड़ते। मैंने कहा तुम्हें मैं एक बात
- 57:53कहता हूँ, देखो मैं तो रोटी भी हैं।
- 57:57तुमसे शराब नहीं छूटती, मैंने खाना ही बंद कर दिया।
- 58:04तुम मेरे से ही प्रेरणा ले लो। लेकिन फिर भी आप चले भी जाओगे
- 58:21यहाँ से हो के यहाँ की शीतल झोंके की हवाओं का आनंद भी तुम्हें
- 58:27मिलेगा या लेकिन फिर संसार के थपेड़ों में और चौंक गए।
- 58:37और जैसे बड़े बड़े गर्म हैं, लुए हैं।
- 58:40इनके भीतर सर्दी है जो नमोनिया कर देती है।
- 58:52मैं तुमसे यही कहूंगा ये भगवा रंग और हरे रंगों में मत पड़ो।
- 59:02ये तुम्हें भेद बुद्धियों में ले जाएगा।
- 59:05तुम्हारा कोई भी प्रश्न भेद बुद्धियों से आया हुआ प्रश्न होता
- 59:12है। मैं जानता हूँ जिसका समाधान हो
- 59:19गया सभी। समस्याओं का उसे समाधि करते हैं
- 59:26और ततक्षण उसकी भेद बुद्धि समाप्त हो जाती है।
- 59:30एकों का एक ही है, फिर कहें तुम गेरवा।
- 59:37भगवा, हरा, लाल, पीला इन रंगों में उलझते हैं।
- 59:44रंग तो एक ही है उसी से सतरंगी पैदा होती है।
- 59:55क्यों नहीं तुम एक ही रंग हो जाते?
- 1:00:01ये प्रश्न मैं जानता हूँ, यह एक घंटा व्यर्थ हो जाएगा यह भी मैं
- 1:00:08जानता हूँ, लेकिन मैं ये भी जानता हूँ कि अब लीला समाप्त होने को
- 1:00:14है। तो फिर चलो एक घंटा इस पर भी खराब
- 1:00:24कर लिया जाए। है खराब, इसमें कोई शक तुम्हारी
- 1:00:31मन की संशय कुछ लोगों के मिटेंगे, कुछ के नहीं भी मिटेंगे।
- 1:00:40कोई बड़ी बात मैं शरीर को बचाना क्यों चाहता हूँ?
- 1:00:44बस यही मतलब है आप तो मैंने जवाब दे दिया जैसे आप कृष्णा से
- 1:00:51पूछोगे, आप खाना क्यों खत्म, वो कहेंगे शरीर को बचाने के लिए शरीर
- 1:00:57को जरूरत है। राम से पूछो की आप धनुष क्यों
- 1:01:03रखते हैं? क्या कार हो, कहीं कहीं नहीं
- 1:01:09दुष्टों का नाश करने के? और तुम्हें इतना तो विलंब है नहीं
- 1:01:18कि ये है क्या क्या अभी तो तुमने मैंने क्या कुछ डाल रखा है अगर वो
- 1:01:27सब कुछ मैं तुम्हें दाखला दूँ की देखो ये कुछ है, तो तुम शायद।
- 1:01:36मुझे पागल खाने में बंद करो कोई बड़ी बात क्योंकि यह भी कोई
- 1:01:46हरकतें बंदा किया करता है छबरा फिर तुम दो चिर्त्य हो एक व्यक्ति
- 1:01:53इतने गहरे। रसातल में उतरकर हमारी समस्याओं
- 1:01:58को गुंडों को खोलता है, वह पागल तो नहीं होना चाहिए फिर यह ऐसी
- 1:02:07वेष मुँह सा बनाता है संकर जैसी। बना उस अत्रकाल लग गया।
- 1:02:17उस त्रिलोकी नाथ के पास वस्त्रों की कमी है जो बागंभर खोल बैठे
- 1:02:26ठंडी में बैठा है। कोई ऊनी वस्त्रों की कमी है, जो
- 1:02:29शरीर पर बसम लगा लेता है। कि सर्दी भीतर प्रवेश ना करें।
- 1:02:35कोई कारण तो होगा ही इसमें फिर क्या शंकर से मैं पूछूं कि आप
- 1:02:42क्यों लगाते हैं? हम्म, मैं जानता हूँ और क्यों
- 1:02:47लगाते हैं? मैं ऐसी दृष्टता नहीं कर रहा।
- 1:02:53और फिर अगर उन्हें भी पता हो तो भी नहीं पूछूँगा निजी जिंदगी है
- 1:03:01और निजी जिंदगी में वो क्या करते हैं?
- 1:03:05इससे मुझे क्या लेना है? अंत में मैं बात करूँगा फिकर करो
- 1:03:13तुम कैसे पहुँचो अपने अंत स्तर में यह असली रोग और अहंकार का यह
- 1:03:24रोग है कि वह अपने आपको गलाना चाहता नहीं किसी भी कीमत पर।
- 1:03:33राज़ गद्दी के ऊपर बैठे हुए लोग बढ़िया से बढ़िया फेबिकोल ढूंढ़ते
- 1:03:41हैं कि अच्छी सी फेबिकोल दे दे भाई के 100 लोग भी उठाने।
- 1:03:48उखाड़ने लगे तो उखड़े ना मैं, तुमसे कहता हूँ, रो गया है सली
- 1:04:01व्हाटस दी एक्चुअल डिश इस रोगी तो हो तुम सवस्थ तो नहीं होवे?
- 1:04:11सवस्थ उस दिन हो जाओगे जीस दिन स्वयं में सिद्ध हो स्वयं में
- 1:04:19सिद्ध हुआ व्यक्ति ही सवस्थ होता है।
- 1:04:27फिर क्या? अब इन बातों का जवाब भी मुझे देना
- 1:04:31होगा हाँ। जितना हो सके मैं कोशिश करूँगा वह
- 1:04:39अंदाज प्रेम पुरो को वह अंदाज दल को वह अंदाज हास्यप।
- 1:04:52लेकिन जवाब अवश्य दूंगा ताकि तुम तुम्हारे प्रश्नों का जवाब पा
- 1:04:58सको। तुम्हारा अंतिम गंतव्य है।
- 1:05:09उस रस को जीसको मैंने पी लिया। छूटती नहीं है।
- 1:05:17काफी रमों को लगी हुई और अब मैं चाहता हुआ भी उसे छोड़ नहीं।
- 1:05:29संसार का सब सुख इसलिए व्यर्थ हो गया कि संसार के किसी भी सुख में
- 1:05:44तिल भर के बराबर भी सुख नहीं। सात स्वर्ग अप वर्ग सुखधार या
- 1:05:51तुला एक अंग। तुलना ताही सकल मिली जो सुकला व
- 1:06:00सता शंक। इसलिए संसार के भोग मिले भोग ने
- 1:06:07छोड़ दिया। स्वादिष्ट भोजन मैं इसीलिए नहीं
- 1:06:12करता धृष्ट भी होता है और जब पर्व स्वाद मिल गया तो मैं चाट पकोड़े
- 1:06:21क्या खाऊ अगर अभी भी चाट पकोड़े खा रहा हूँ जी लपलप हो रही है
- 1:06:28इमली खटाई। तो इसका मतलब तुमने अभी परम स्वाद
- 1:06:35चखा, मुझे कोई कहने लगा। ओशो तो बड़ा चाट पकोड़ा खाते थे।
- 1:06:50मैंने कहा भाई वो स्वतंत्र है, कुछ भी खा ले, कौन रोक सकता है?
- 1:06:57उन्हें कोई जानबूझकर कहला भी नहीं सकता, मुझे कोई जानबूझकर तो नहीं
- 1:07:04कराएगा। नहीं खाना ही पड़ेगा नहीं, मैं
- 1:07:11खुद मौख तैयार हूँ तो अगर तुम जबरदस्ती कुछ खिलाओगे तो यह भी
- 1:07:20हिंसा है। अगर तुम जबरदस्ती भूखा रहोगे तो
- 1:07:24ये भी शरीर के साथ एक हिंसा है, लेकिन मैंने एकता दर्द में बढ़ा
- 1:07:28लिया। मैं जानता हूँ कि शरीर दूसरा है
- 1:07:36तो शरीर को भी सुरक्षित रखना मेरा दायित्व है।
- 1:07:42जीस घर में आप रहते हो वहाँ बुहारी जाड़ी नहीं देते क्या वहाँ
- 1:07:49साफ सफाई, पोछा वगैरह नहीं देते? क्या वहाँ कली?
- 1:07:55रंग रोगन नहीं करवातें क्या? उसकी देखरेख, मरम्मत वगैरह नहीं
- 1:08:01कराती। क्या?
- 1:08:04क्यों? क्योंकि तुम इस घर में बैठे हो तो
- 1:08:10इसको सुरक्षित रखना भी तुम्हारा दायित्व है अगर तुम इसको सुरक्षित
- 1:08:17न रख सके। तो यह भरभरा कर घर जाएगा और भरभरा
- 1:08:23कर घर जाएगा, ऐसी मेरी कामना तो है, लेकिन क्या करू तुम्हीं की ही
- 1:08:37तो कामना नहीं। काश तुम्हारी कामना भर जाए और मैं
- 1:08:47देखूं कि तुम में वक्त से पैदा हो गए, तुमने मुख मोड़ लिया कि मैं
- 1:08:54ना बोलूं तो तुम पाओगे मैं। मुझे बोलने की ना तो हॉबी है, ना
- 1:09:09बिमारी है, मैं बोलता हूँ बड़ी मुस्कलाद से बोलता हूँ, बोलने का
- 1:09:23मन नहीं करता। लेकिन क्या करूँ?
- 1:09:30बोलना पड़ता है पिता कितना भी थक हो यह सोचकर के बच्चे छोटे हैं।
- 1:09:46कैसे पलेंगे ये कैसे चलेगा घर अगर मैं भी बिस्तर में पड़ा रहा हूँ
- 1:09:54काम धंधा ना किया तो यह परिवार कैसे पलेगा जैसे पिता को फिकर
- 1:10:01होता है बच्चों का। ऐसा ही मुझे आपका फिक्र है।
- 1:10:14मेरे सब प्रयास के बावजूद भी अगर ये देह छूट गई फिर तो मैं लाचार
- 1:10:22हूँ, लेकिन जहाँ तक मैं इसको ज्यादा खेंच सकता हूँ।
- 1:10:30मैं खींचूंगा कर रहा हूँ कोशिश और यह तुम्हारा सौभाग्य होना चाहिए
- 1:10:42दुर्भाग्य नहीं। तुम्हें मुझे और ईश न देनी पैदा
- 1:11:00करनी चाहिए केजी भी ईश न पैदा। कच्चे धागे से मैंने बांध तो लिया
- 1:11:13है और मैंने बोला भी बहुत बार देखिये मुझे लोग कह देते हैं बाबा
- 1:11:23यह भी कोई ज़िन्दगी। कहीं जाना नहीं, कहीं आना नहीं
- 1:11:32संसार कितना रंग रंगीला है, कोई फ़िल्म मूवी नहीं देखते, कोई
- 1:11:40भल्ला पकौड़ा चाट मसाला नहीं खाते।
- 1:11:47कोई पिज्जा मिग्गा नहीं खाता, यह भी कोई ज़िन्दगी है तो मैं चुप हो
- 1:11:55जाऊ क्यों? क्योंकि यह मेरी बात के उस तल को
- 1:12:04समझ ना पाएंगे बच्चे? चुप रह जाना ज्यादा बेहतर जवाब है
- 1:12:17तुमने प्रश्न तो बहुत बढ़िया पूछा।
- 1:12:23बहुत से लोगों का यह प्रश्न होगा। लेकिन शायद डरते हो के पूछ लिया
- 1:12:31तो बाबा ब्लॉक कर दे और ब्लॉक करने से उन्हें कोई परेशानी ही
- 1:12:35नहीं होती ब्लॉक करने से सिर्फ तुम तुम्हारी मूर्खताओं को
- 1:12:42व्हाट्सएप पे प्रकट नहीं कर सकते बस।
- 1:12:45और तुम्हारे सभी सवाल मूर्खताओं से भरे हुए हैं, तो मैं तुम्हें
- 1:12:54आजाद कर देता हूँ तुम सुनते तो सदा ही रहो।
- 1:13:08सुनने का अधिकार तो मैं चाहूँ तो भी यूट्यूब मुझे नहीं देता।
- 1:13:15के सुनने का अधिकार भी मैं छीनू और अगर यूट्यूब मुझे अधिकार देता
- 1:13:20भी हो तो भी मैं सुनने का अधिकार बिल्कुल नहीं छीनूंगा क्योंकि
- 1:13:25मेरी भीतर की कामना है। हे ईश, सब सुखी।
- 1:13:33कोई न हो तो का सर्वे भवन्तु सुख सर्वे सन्तु निरामया सर्वे भद्रा
- 1:13:46ने पश्न माँ कश्चित दुख। इसलिए मैं कभी तुमसे यह अधिकार न
- 1:13:55छीनू बस क्योंकि तुम्हें प्रश्न पूछना आता नहीं है, इसलिए मैं
- 1:14:05कहूँगा काहे? अपना वक्त खराब करे और लोगों का
- 1:14:16भी इस वक्त में गहरे जश्न में डूबा जा सकता था।
- 1:14:25इस वक्त में होली दिवाली मन सकती थी और ऐसे व्यक्ति से ऐसे प्रश्न
- 1:14:32पूछने, समय की बर्बादी के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होता।
- 1:14:39मैंने जो बोला। बोल दिया है।
- 1:14:46करीब करीब जो बोलना है वह मैंने बोलकर चैनल कंट्रोलर को दे दिया।
- 1:14:57अगर मैं ना ही रहूँ तो भी वह लाइव कर देगा।
- 1:15:06अंतिम लीला का जय बोलकर मैं समापन कर चुका हूँ, लेकिन बहुत से लोग
- 1:15:19हैं जो मेरे बोलने से। हतोत्साहित भी हुए हैं।
- 1:15:30कुछ के मन दुखे भी हैं क्योंकि भीतर भीतर की इच्छा।
- 1:15:41किसी को ऊपर उठना नहीं देना चाहते।
- 1:15:45ऐसे भी हैं मेरे दुश्मन, लेकिन घबराओ मत।
- 1:15:52दुश्मनों से भी कहूंगा कि 1 दिन आएगा वो वेला।
- 1:16:02जब तुम भी मुस्कुराओगे जदो मेरी यार थी जदो मेरी यार थी।
- 1:16:19उठा के चलन गए मेरे यार सब हम, हम आके चलन गए।
- 1:16:40जग मेरी और छी उठा के चल मेरे यार फिर।
- 1:16:56सब हो माँ के चलण वे जदों मेरी यार थी।
- 1:17:13चलेंगे मेरे नल दुश्मन भी मेरे चलेंगे, मेरे नल।
- 1:17:37दुश्मन भी मेरे चलेंगे, मेरे नल दुश्मन भी मेरे।
- 1:17:55ए वखरी एगल ये बात अलग है ए वखरी एगल मुस्कुरा के चलणेंगे।
- 1:18:13देखा हमको दुख दिया था आज मर गया मेरे यार सब हूँ वो माँ के चलने
- 1:18:27गए। जदो मेरी यार थी उठा के चलन ले
- 1:18:43मेरे यार सब। ओमा के चलणेंगे जो तो मेरी आर जी
- 1:19:08धन्यवाद।