Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Dec 25 - करतारपुर साहिब वापिस लाएंगे ! देश के बटवारे में कौन कौन जीमेवार है? Indra की हत्या का राज Baba Ji Vijay Vats
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- 0:11ज्योति प्रसाद वाजपेयी बाबा जी आपका राजनीतिक चैनल आध्यात्मिक
- 0:28चैनल से भी ज्यादा? शांति देता है।
- 0:38आपकी आवाज हमारी गांठों को खोल देती है और अब समझाया कि गांठ ही
- 0:48सिर्फ। आध्यात्मिक ही नहीं थी बल्कि
- 0:52राजनीतिक भी बहुत ज्यादा है। अब समझ में ये भी आया कि आपने
- 1:00राजनीति शुरू क्यों की? कृपया अगली वीडियो को विस्तार से
- 1:08कहने का कष्ट करें। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
- 1:22धर्मनिरपेक्ष का अर्थ नास्तक नहीं होता।
- 1:30धर्मनिरपेक्ष का अर्थ है कि सभी प्रकार के धर्म फले हुए हैं।
- 1:37इसकी आस्था जीस धर्म में है बाखुशी उस धर्म को स्वीकार करे।
- 1:46और उस धर्म की मान्यताओं के अनुसार कमेन्मेंट के हिसाब से
- 1:56उनका पालन करें तो धर्म निरपेक्षता का मतलब कोई एक धर्म।
- 2:06यह ऐसा नहीं होता कि परमात्मा नहीं है, नास्तिकता नहीं होती,
- 2:24सभी धर्मों का समूह है, कोई भी धर्म निवास कर सकता है और
- 2:29प्रत्येक धर्म। पूर्ण स्वतंत्रता से अपने अपने
- 2:35धर्म के नियमों को मानते हुए पूरी आज़ादी के साथ रहने का अधिकार
- 2:41रखेगा। हम जो काम करेंगे।
- 2:55दो धर्मों के लिए विशेष काम करेंगे वो काम सरकारों का होगा।
- 3:03हम पे छोड़ दो सिख धर्म का जो मूर्ख बनाया लोगों को।
- 3:18के विभाजन गाँधी जी ने करवाया जिससे लाखों लोग मारे गए एंड
- 3:24गांधीजी वादर इज़ बंसेबल पार्ट डिवाइडेशन।
- 3:32पहले मैंने आध्यात्मिक मान्यताएँ तोड़ी।
- 3:37अब और अध्यात्म तो बड़ा गहरा विषय है।
- 3:46अध्यात्म की मान्यताएँ तोड़ना सहज गम नहीं है।
- 3:53वही तोड़ सकेगा अध्यात्म की मान्यताओं को जो अपने आंतरिक से
- 3:58आंतरिक अंत स्थलों को छू गया हो, लेकिन मैंने धार्मिक मान्यताएँ
- 4:07थोड़ी और जीव भर के थोड़ी। मैंने किसी भी धर्म की अंधा
- 4:15मान्यता को बख्शा ही नहीं और अब मैं राजनीति में आया हूँ तो
- 4:23राजनीति में तो धर्म से भी कहीं ज्यादा अधिक।
- 4:28मान्यताएँ हैं। धर्म की मान्यताएँ पकड़ी नहीं जा
- 4:33सकती, लेकिन राजनीति की मान्यताएँ तो पकड़ी जा सकती हैं जो आपने
- 4:41देखा नहीं। जीस स्थल तक आप पहुंचे नहीं।
- 4:48उस स्थल का आप जिक्र कर रहे हो? अध्यात्म परमात्मा ऐसा है,
- 4:54परमात्मा की मूर्ति ऐसी है, परमात्मा क्रिया गुण है या अवगुण
- 4:58हैं। बहुत तरह के पाखंड रचित किये गए।
- 5:06क्योंकि उन्होंने वह तल देखा नहीं था।
- 5:10जैसे मन में भाया मन में आया बोल दिया तो उस बोलने के पीछे कोई
- 5:18निहेत स्वार्थ था, स्वार्थ, लोभ था स्वार्थ।
- 5:25गांव पूजना था, स्वार्थ गद्दियाँ इकट्ठा करना था या कोई भी हो,
- 5:35राजनीति में भी स्वार्थ है असल में ये सारे संसार में।
- 5:43निस्वार्थता तो कुछ इन्हें गुने चुने लोखी अध्यात्म मैं हूँ जब
- 5:54राजनीति में हूँ, राजनीति अध्यात्म से भी ज्यादा खतरनाक है।
- 6:03अध्यात्म की मान्यताएँ व्यक्ति अपने बेहतर जाके आनंद में डूब गए।
- 6:10आपको समझा सकेगा आप मानो या न मानो उसका कोई खुलासा गुरु आपको
- 6:20दिखा नहीं सकता कि ये देखो। ये है प्रमाण परमात्मा के होने
- 6:27का, वह तो अज्ञात है। अज्ञे है वो पथ ऐसे कि उनके बारे
- 6:39में व्याख्या ही नहीं हो सकती। विस्तार ही नहीं हो सकता ही।
- 6:46कैनट बी डिफाइन्ड। लेकिन राजनीति का तो दर्ज है
- 7:02राजनीतिक साहित्य? राजनीति की मान्यताएँ तोड़नी तो
- 7:06आसान ही पड़ी लेकिन राजनीति की मान्यताएँ हैं।
- 7:12बहुत ज्यादा। तो चलिए मेरा काम मान्यताओं को
- 7:18तोड़ना रह गया और आपको सही मार्ग दिखाना रह गया।
- 7:24और मैंने अज्ञात में जहाँ तक हो सका गहरे से गहरे तल नापे और आपको
- 7:31गहरे से गहरे तलों पे ले गया। अब राजनीति भी कोई कम मान्यताएँ
- 7:40नहीं रखता। दूर मान्यताएँ जो सही नहीं।
- 7:45वही जो आपने देखा नहीं वही जब आप जन्मे ही नहीं थे उनके बारे में
- 7:53कमेंट करना और ऐसे ऐसे कमेंट करना जैसे इंदिरा गाँधी के बारे में
- 8:03कमेंट। जवाहरलाल नेहरू के बारे में कमेंट
- 8:10यहाँ तक गाँधी के बारे में कमेंट मुसलमानों के बारे में कमेंट
- 8:17नहीं। एक नूरत है सब जा गुप जा कुण पले
- 8:22कुण मंदिर। सबसे पहले मैं बात बता दूँ।
- 8:25राजनीति की बात तो कर रहा हूँ लेकिन मेरे में भेदभाव का भूत
- 8:32नहीं है। भेदभाव से परे हो गए।
- 8:38ऋषियों की विचारधारा संघ लेके वसुधैव कुटुम्ब भूकंप मैं चाहता
- 8:45हूँ कि सारी वसुधा एक कुटुम्ब बन जाए।
- 8:50कोई आपत्ति किसी को नहीं होनी चाहिए।
- 8:55अगर एक वसुधा पूरी की पूरी वसुधा एक परिवार की भांति हो जाए, सब
- 9:02अपने अपने तरीके से एन्जॉय करें। अपनी अपनी मान्यताओं को मानें,
- 9:08कोई किसी में व्यवधान ना खड़ा करे, इससे किसी को क्या एतराज हो
- 9:12सकता है? कोई हिंदू है, कोई मुसलमान है,
- 9:17राजनीति में किसी की कोई मान्यता है, किसी की कोई मान्यता है,
- 9:27लेकिन छोटे छोटे बच्चे गाँधी के बारे में बोल रहे हैं।
- 9:35मैं पूछता हूँ कि क्या तुम उस वक्त थे जब गाँधी जी यह काम कर
- 9:40रहे थे? नहीं जी, मैं तो उसके 70 साल बाद
- 9:44जन्मा हूँ, मैं तो अभी जन्मा हूँ। गाँधी का जन्म तो 1800 उनहतर में
- 9:51हो गया था। आपका जन्म 70 साल बाद हुआ, 1940
- 10:02में हुआ। कितने साल के हो गए 85 साल का
- 10:08बुगा? अपनी बात कह रहा है ना?
- 10:13गाँधी से मिला बस सिर्फ सुनो, आज जो राजनीति के बारे में प्रचार कर
- 10:21रहे हैं, मैं तुम्हें एक बात समझा दूँ।
- 10:25साफ साफ। जो फेसबुक पे किसी ने लिख दिया
- 10:31कोई भी लिख सकता है फेसबुक पे तुम भी लिख सकते हो जो व्हाट्सएप पे
- 10:37लिख दिया कोई भी लिख सकता है व्हाट्सएप पे तुम भी लिख दो।
- 10:45लेकिन इतिहास क्या है? जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
- 10:51वो इतिहास जिन्होंने उन परों को अपनी नग्न आँखों से देखा है वो
- 10:57इतिहास है तुम उन पन्नों को कभी फ्लोरे नहीं हो खंगाले नहीं हो
- 11:05तुमने खंगाला व्हाट्सएप। तुमने खंगाला फेसबुक, तुमने
- 11:10खंगाले और मीडियास लेकिन मीडियास आजकल सत्य नहीं बकाऊ हो गए।
- 11:20इतिहास खंगालना पड़ेगा, इतिहास पढ़ना पड़ेगा।
- 11:27नेहरू के बारे में गाँधी के बारे में इंदिरा के बारे में किसी के
- 11:32बारे में किसी प्रकार की बात व्हाट्सएप पर लिख दी गई।
- 11:38वह सत्य मानने वाला मंदबुद्धि है, उसकी बुद्धि कमजोर है।
- 11:47क्योंकि वह सत्य की अंतर्तम गहराइयों में जाना नहीं चाहता।
- 11:51जो कुछ उसने पढ़ लिया व्हाट्सएप पे, वह ही उसके लिए सत्य है नहीं,
- 11:58ऐसा नहीं चलेगा। अध्यात्म में अपने अंत में उतरना
- 12:03होता है। राजनीति में इतिहास में उतरना
- 12:11होगा, इतिहास में पढ़ना होगा जाखड़ इतिहास में बहुत कुछ दर्ज
- 12:17है जिन चीजों पर आप। झगड़े कर रहे हो, लड़ाईयां कर रहे
- 12:25हो, बेबुनियादी डिस्कशन कर रहे हो।
- 12:31इतिहास को आपने कभी पढ़ा नहीं खंगाला नहीं, व्यर्थ के
- 12:38शास्त्रार्थ कर रहे हो। और उसमें कोई अर्थ नहीं।
- 12:44कौन क्या था, कैसा था? क्या तुमने अपनी आँखों से देखा?
- 12:50क्या तुम जानते हो कि ऐसा हुआ भी कि नहीं हुआ हूँ?
- 12:55वास् रेस्पोंसिबल फॉर पार्टीसिपेशन पार्टिशन।
- 13:04कौन जिम्मेदार था? चलो यह बात हम आगे करेंगे।
- 13:10आज के प्रवचन में सिख धर्म का हमारा एक तीर्थ वार।
- 13:22वो है करतारपुर साहब। आपको जानकर बड़ा आश्चर्य होगा
- 13:34गाँधी उस वक्त बहुत कलपे। के सिखों का ये धर्म स्थल सबसे
- 13:45बड़ा धर्म स्थल है। यहाँ बाबा नानक ने 18 वर्ष गुजारे
- 13:49हैं। 18 वर्ष तक बाबा नानक यहाँ पर रहे
- 13:56हैं। आखिरी 18 वर्षीय जीवन का 70 साल
- 14:02जी बाबा नानक 52 से लेकर 70 तक करतारपुर साहिब में ही रहे।
- 14:14यह सिख धर्म का सबसे बड़ा। पवित्र शटल है जहाँ उनका परमात्मा
- 14:23है एकंकार गर्त करो, नाम जपो, बंड सको इसका उपदेश देने वाला।
- 14:3618 वर्ष तक उस स्थान पर बैठा रहा और वो हमसे छीन लिया गया।
- 14:43पारटिशन के द्वारा पारटिशन किसने की?
- 14:48पहले तो ये समझ लेना जरूरी है। रेड क्लिफ नाम का एक अंग्रेज।
- 14:57लंदन से बुलाया गया जो कभी उससे पहले भारत नहीं आया था उसको
- 15:10जिम्मेदारी सौंपी गई के दो देशों का विभाजन होना है।
- 15:17तो आप विभाजन के लिए रेखा खींच दो?
- 15:23रेड क्लिफ नाम का व्यक्ति, उससे पहले भारत कभी आया ही नहीं था और
- 15:30जो आया ही नहीं। वह जाने का क्या?
- 15:38किस किस के बीच में विभाजन हो रहा है और उस देश के लोगों के रहने
- 15:45वाले नागरिक की मान्यताएँ कौन कौन से धर्म है जहाँ वह कुछ भी नहीं
- 15:51जानता था। इन सभी तथ्यों से अनजान अनभिज्ञ
- 15:57वह व्यक्ति बिल्कुल कोरा खा गई था, जिसने भारत का विभाजन किया।
- 16:05अब ये मीडिया बड़ा बेईमान है, ऐसा नहीं।
- 16:14कि जो सरकार की तारीफ करता है, वही बेईमान है।
- 16:19दूसरा मीडिया भी आज तो बेईमान होना शुरू हो गया।
- 16:23अभी सुबह मैंने एक कमेंट पढ़ा जो जिसके मन में आता है, लिख देता
- 16:29है। अपने सारे गर्दों को वार
- 16:33व्हाट्सएप या फेसबुक या इंस्टा पे निकाल देता है सत्य का उसे पता
- 16:40नहीं आने वाली पीढ़ियां कैसे गोमराही के आलम में खो जाएंगी,
- 16:46उसे कोई मतलब नहीं है। तो लिखा था कि पुतिन राजघाट पे
- 16:52गए। यहाँ जो भी कोई बाहरी देश का
- 16:56व्यक्ति आता है, गाँधी की पूजा सारे विश्व में होती है।
- 17:04गाँधी अहिंसा के पुजारी थे, सारे विश्व में उनका नाम दर्ज है।
- 17:10और उनके बहुत से शिष्य थे नेलसन मंडेला जिसने साउथ अफ्रीका पे
- 17:16राज़ किया। वह गाँधी जी का शिष्य था और भी
- 17:19बहुत से लोग बड़े बड़े लोग गाँधी जीके शिष्य थे।
- 17:24अहिंसावादिता में बड़ा उनका यकीन था।
- 17:32पुतिन जी यहाँ पर आए और वहाँ लिखी हुई बैटल वहाँ पर पड़ा हुआ
- 17:38रजिस्टर जहाँ अपने विचार लिखने होते है तो मैंने पढ़ा कमेंट कि
- 17:46पुतिन आए राजघाट पर पड़े हुए रजिस्टर में लिख के गए।
- 17:52कि भारत वो देश है जहाँ महात्मा गाँधी जैसे अहिंसा के पुजारी ने
- 18:00जन्म लिया महात्मा गाँधी का मैं। प्रशंसा करने वाला व्यक्ति वह
- 18:16मेरे लिए पूज्यनीय है और मैं उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि पेश
- 18:24करता हूँ। यह लिखकर गए।
- 18:31फैलाने वालों ने क्या फैला दिया? बात चाहे इधर से गलत हो, चाहे उधर
- 18:37से गलत हो, गलत बात तो गलत ही होती है।
- 18:41कहते पुतिन जी ने ये लिखा कि भारत हिंसा वादी देश है।
- 18:47महात्मा गाँधी। इसके आइकॉन थे।
- 18:50अहिंसा के सभी देशों ने इसको सराहा।
- 18:54इनकी नीतियों को सराहा। जीस तरह भारत ने आजादी ली है
- 18:59काबिले तारीफ से और उसने लिखा कि इस।
- 19:07गॉड से वादी सरकार को जितना जल्दी हो उतनी जल्दी उखाड़ फेंकें।
- 19:12विभिन्न बातों से व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वक्त भड़क जाएंगे।
- 19:22उन्हें पता नहीं पुतिन क्या लिखे गए हैं, वो रजिस्टर तो देखने से
- 19:25रहे। उनको दिखायेगा कौन उतन लिख के गए
- 19:33हैं ये के अहिंसावादी देश हम इनकी कदर करते हैं महात्मा गाँधी के अम
- 19:44पुजारी हैं? फैन हैं, फॉरवर्स हैं।
- 19:48हम समता और समानता में विश्वास रखते हैं।
- 19:54लिख के सिर्फ इतनी बात गए थे और सच्ची श्रद्धांजलि देकर गए थे।
- 19:58इतनी सी बात को बिगाड़ लिया गया दूसरे मीडिया ने जो अपने आपको
- 20:03शुद्ध मीडिया कहता है। उन्होंने लिखा कि पुतिन लिखे गए
- 20:09कि गोडसेवादी सरकार को जितनी जल्दी हो सके उखाड़ फेंको।
- 20:15गलती चाहे इधर से हो, द्वेष और नफरत की भावना।
- 20:19आग चाहे इधर से फैलाई जाए या उधर से फैलाई जाए।
- 20:24वह गलत है इसलिए पहली बात तो तुम्हें बता दूँ।
- 20:32राजनीति पर जो भी मेरा प्रवचन सुनते हैं।
- 20:38और व्हाट्सएप पे लिखी हुई किसी भी बात को शिकायत न करें, इतिहास की
- 20:42किताब में खंगालें, वहाँ से सत्य मिल जाएंगे इतिहास विद्वानों के
- 20:51द्वारा लिखा गया इतिहास उन व्यक्तियों के द्वारा लिखा गया।
- 20:55जो उस वक्त मौजूद थे अपनी आँखों से उन्हें सत्य को निहारा।
- 21:03आज जवाब मांगने वाले उस जवाब को मांगने के अधिकारी नहीं है।
- 21:11जवाब सिर्फ वही मांग सकता था तब। जब जवाहरलाल थे, जब इंदिरा थी, जब
- 21:23गाँधी थे, जब पटेल थे, जब सुभाष थे, आज तो सिर्फ कोरी कल्पना ही
- 21:31है तुम कुछ भी बना लो। लेकिन कुछ भी बनाने से तुम्हारी
- 21:36कल्पनाएं सत्य में परिवर्तित नहीं होती।
- 21:42इसलिए मैं इन मानवों को मिटाने आया।
- 21:47अध्यात्म की मान्यताएँ मैंने बटाई जी तोड़ के बटाई?
- 21:53शीश रहती भी मिटाता जाऊंगा। अगर कोई मुझे ध्यान में आएगी तो
- 21:59राजनीति की मान्यताएँ भी मिटाऊंगा मैं राजनीति करने नहीं आया हूँ,
- 22:04अब ये मेरे शब्द सर्कल में ले लो। मैं राजनीति नहीं करने आया हूँ।
- 22:12मैं राजनीति के गंध को प्रकट करने आया हूँ कि यह है गंदगी यह है
- 22:20शुद्ध गंदगी मैं कैसे कहता हूँ दुर्मान्यताओं को दुष्यमान्यताओं
- 22:28को मैं गंदगी कहता हूँ, जो सही नहीं है।
- 22:32फैला दिया गया है। किसी भी मीडिया के द्वारा गलत
- 22:36माध्यमों के द्वारा जो फैला दिया गया वह गंध है और इस गंध को साफ
- 22:43करने मैं आया हूँ। राजनीति में बड़ी गंदगी फैली है।
- 22:52पहले मैंने अध्यात्म की गंदगी को सर्वे किया।
- 22:59अब मैंने राजनीति की गंदगी को सर्वे करूँगा मैंने आपसे कुछ नहीं
- 23:07लेना। मैं आपसे पहले भी बोल चुका हूँ,
- 23:12मेरे बोलने का उद्देश्य मानव का हित है, आपका सुख है, आपका आराम
- 23:20है, चैन है, आनंद है, खुशी है। आप अभावग्रस्त न रहें, आपके पास
- 23:31सारे साधनों और आपके पास भीतर की खुशी भी हो, आप निहाल हो जाओगे,
- 23:40जब बाहर से देश संपन्न होगा। खाने को रोटी होगी, रहने को मकान
- 23:46होगा, पहनने को कपड़ा होगा, करने को कारोबार होगा, हाथ में पूंजी
- 23:54होगी। फिर आपको फिक्र नहीं करनी होगी कि
- 23:58मैंने लड़की की शादी करनी है। मैंने बेटे की पढ़ाई करनी है।
- 24:03मैंने अपने पेशेंट का इलाज करवाना है।
- 24:06ये सारी बातें सरकार और अध्यात्म मैंने राजनीति नहीं करनी है।
- 24:19मैंने शुद्धतम व्यक्ति मेरिट बेसिस पर खंगाले हैं, चुनी हैं।
- 24:25और वो आपकी कुर्सियों पे बढ़ा देंगे, राज़ करेगा।
- 24:31शुद्ध व्यक्ति प्योर इमप्योर व्यक्ति राज्य नहीं करेगा।
- 24:37उसकी जगह जहाँ बनती है वहीं उसको ले जाया जाएगा।
- 24:43वो चाहे फांसी का फंदा है। चाहे सलाखों की लोहे की सलाखें
- 24:51सबको उस उसकी जगह पे पहुंचा दिया जाएगा, बस यही हमारा उद्देश्य है।
- 25:01अगर किसी का कर्म। किसी ने ऐसे कुकर्म किए 10 पांच
- 25:10हत्याएं करके वो आज राजगद्दी पर बैठा है तो सत्य को खंगाला जाएगा
- 25:17और मुझे बताओ कि उसे दंड मिलना चाहिए या नहीं?
- 25:24बताओ मुझे जीस व्यक्ति ने कतल हत्या की है क्या वह हिंदुस्तान
- 25:33की गद्दी पर बैठने के योग्य है? आपकी आत्मा अगर कहे कि हाँ, बैठने
- 25:41के योग्य है तो बोल दो कि योग्य है और अगर आपकी आत्मा ये कहे कि
- 25:49नहीं योग्य तो कह दो कि नहीं योग्य फिर तो मैं ये भी पूछ सकता
- 25:53हूँ कि अगर आपकी कोई हत्या कर दे। तो क्या वह गुनाहगार है या की
- 25:59नहीं है? तो फिर अपने मामले में तो तुम ये
- 26:02कहोगे कि बिल्कुल गुनाहगार है वो तो फिर देश के साथ इसने का तारीख
- 26:10कौन मरा, उसका नाम क्या था, उसकी जाति क्या थी, उसका धर्म क्या था?
- 26:16यह बातें मायने नहीं रखती। इंसान मरा, व्यक्ति मरा जीसको
- 26:24जीने का अधिकार था, वह मरा किसने मारा?
- 26:29यही खंगाला जाएगा और जिसने मारा। उसको सजा दी जाएगी।
- 26:38जिसने जो घपला किया उसका बनता हुआ जो दंड है उसको महिया कराया
- 26:45जाएगा। हम आगाज कर रहे हैं।
- 26:49देखिये 100 वर्ष तक। एक ज़मात की उम्र होती है।
- 26:57करीब करीब 1020 साल ज्यादा भी हो सकती है।
- 27:051020 साल कम भी हो सकती है। सो साल कांग्रेस ने राज़ किया।
- 27:131885 में दिसंबर के महीने में कांग्रेस पार्टी का आगाज हुआ है।
- 27:20उसमें मुसलमान भी थे, उसमें सभी जातियों के लोग थे, सभी धर्मों के
- 27:24लोग थे। 1885 और आप देखिए, इतिहास गवाह
- 27:30है। 1985 में खत्म हो गया।
- 27:341984 में इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी, जो कि लोह महला मानी जाती
- 27:41थी। आयरन रेडी और उसके बाद कांग्रेस
- 27:46निरंतर गर्ग में ही जाती रही। 100 साल पूरे हो गए।
- 27:53100 साल भारतीय जनता पार्टी कहलो जनता पार्टी कहलो राष्ट्रीय
- 28:01स्वयंसेवक का कहलो 100 साल इन्हें भी हो गए 1800 25 में इनका आगाज
- 28:14हुआ 1925 में 100 साल हो गए, बस इतना ही होता है वक्त मैंने कहा
- 28:2310 5 साल ज्यादा या 10 5 साल का? उसके बाद किसी भी संस्था की गरावट
- 28:30शुरू हो जाती है। एक सेंचुरी का इतिहास होता है।
- 28:36यह नेचुरल है, प्राकृतिक है तो अब ऐसे लोग आ गए।
- 28:47जिन्हें कर्तव्यों से नहीं पैसे से प्रेम है, गद्दियों से प्रेम
- 28:53है, वे जा तो 1937 की बात करते हैं वंदे मातरम 1937 में ये नहीं
- 29:06थे। 1937 की बहस कर रहे हैं।
- 29:11बड़े तीखे अंदाज में यह 2047 में हम विकसित मल को हो जाएंगे।
- 29:25कहने का मतलब आपको वर्तमान में नहीं ले के आना चाहते हैं या तो
- 29:34अतीत की यादों में भटका देना चाहते हैं या भविष्य की कल्पनाओं
- 29:41में अटका देना चाहते हैं। और इन दोनों चीजों से ही कुछ नहीं
- 29:47मिला करता। आज भूख लगी तो आज ही रोटी चाहिए।
- 29:54आज सर्दी लग रही तो आज ही गर्म वस्त्र चाहिए।
- 30:00अभी नींद आ रही तो अभी बिछोना चाहिए।
- 30:08सोशल बात 50 साल बाद 20 साल बाद तुम बिछोना दोगे?
- 30:12उसका अर्थ के छलावा करने वाला राजनीतिज्ञ हमेशा आज की बात नहीं
- 30:24करता। या तो अतीत की बात करेगा या
- 30:27भविष्य की बात करेगा। 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियाँ
- 30:34काट दी गई। 2047 में हम विकसित मुल्क बन
- 30:43जाएंगे दोनों ही। अतीत या भविष्य की बातें हैं,
- 30:50दोनों ही वर्तमान की बातें नहीं हैं, कम से कम और सत्य होता है।
- 30:56वर्तमान में भूख लगती है, वर्तमान में पीड़ा होती है।
- 31:00वर्तमान में किसी डॉक्टर के पास चले जाओ, कहो कि पीड़ा हो रही है
- 31:06पेट में। वो कहे कि 2000 संताली में आपको
- 31:09पीड़ा से मुक्त कर देंगे, तो क्या तुम उसकी बात को मान लोगे?
- 31:18फिर तुम ये बात कैसे मान रहे हो कि 2047 में हम विकसित मुल्क बन
- 31:24जाएंगे और उस आदमी के द्वारा? जिसने जीतने वायदे किये वो सब
- 31:29झूठे किये, ना कोई रोजगार दिया 2,00,00,000 रोजगार 11 सालों में
- 31:3722,00,00,000 रोजगार हो जाते तो कोई व्यक्ति भूखा ना सोता, कोई
- 31:42बेरोजगार ना होता। फिर प्रदर्शन करता तो करता कौन
- 31:5115,00,000 दिए होते तो लोग अपना रोजगार खोल देते।
- 31:58भाई पकौड़ा तलने के लिए भी 20,000 की तो रेडी बनती है।
- 32:05बाकी समान और और सभी पकौड़े तलने लग गए तो फिर खाएगा कौन?
- 32:15खुद ही खाते रहो जो व्यक्ति तुम्हें अतीत में भरवाए।
- 32:25यह भविष्य के कल्पनाएं दिखाएं। वह झूठा है, यह पक्का पक्का मान्य
- 32:33प्लेन्स बनानी अलग बात होती है। कल्पनाओं का।
- 32:42जाल बछाना अलग बात होती है, मैं तुम्हें कहता हूँ, हम तुम्हें
- 32:48वर्तमान में लेके आएँगे। सत्य सदा ही वर्तमान में होता है।
- 32:56सत्य न तो अतीत की स्मृतियों में होता है।
- 32:59ना भविष्य के गर्त में पड़ा होता भूख अभी लगी तो अभी रोटी खानी
- 33:04पड़ेगी, प्यास अभी लगी तो अभी जल पीना पड़ेगा जब जरूरतें आज हैं,
- 33:17जब समस्याएं आज हैं तो हाल 47 में क्यों होगा भाई?
- 33:24जब जरूरतें आज हैं, समस्याएं आज हैं, तो इतिहास के खंडहरों में से
- 33:32क्या निकलेगा? सिर्फ तुम्हारे ध्यान के भटकाने
- 33:38के लिए ये सारे काम हो रहे हैं। और मैं तुम्हें याद करा दूँ कि
- 33:46कोई तुम्हें इतिहास के खंडहरों में उलझा दे या कोई तुम्हें
- 33:52भविष्य के काल्पनिक सपने दिखला दे देखिए 11 वर्ष पहले एक भविष्य का
- 33:57सपना दिखाया गया था ना क्या वो पूरा हुआ आज?
- 34:04ऐसे ही आप देखोगे 11 वर्ष पहले कहा अच्छे दिन आए आ गए नहीं आए
- 34:20भक्तों के लिए। मंद बुद्धियों के लिए आए, क्योंकि
- 34:25उनमें तो बुद्धि ही नहीं है, जीसको एनेस्थीसिया दे दिया गया हो
- 34:33उसको जैसे चाहे काट लो, पिट लो वह उफ़ नहीं करेगा।
- 34:39जीसको एनेस्थीसिया बेहोशी का इंजेक्शन दे दिया हो उसकी
- 34:44आंत्रडियां काट लो, कोई पैर काट लो, कोई हाथ काट लो, किसी चीज़ का
- 34:49ऑपरेशन कर लो, वह ठीक नहीं मारेगा, चिल्लाएगा नहीं उफ़ नहीं
- 34:53करेगा। बस ये मंदबुद्धि लोगों को
- 34:57एनेस्थीसिया दे दिया गया है। वो एनेस्थीसिया है धर्म का या
- 35:04विकास का तो ठीक कहा मार्क्स ने इस संबंध में के धर्म एक अफीम का
- 35:12निशा है। बिल्कुल नशा है इस नशे को बुलाते
- 35:19रहो। लोग आपस में लड़ लड़ के मरते
- 35:23रहेंगे, वो एयर कंडीशन्ड रूम में या जहाजों पर बैठ के विदेशों में
- 35:29निकल जाएंगे। फल तुम्हें भोगना पड़ेगा तो हम
- 35:38क्या करेंगे? जब देश का विभाजन हुआ तो भारत की
- 35:48भूमि। के बिल्कुल करीब पांच किलोमीटर
- 35:54दूर करीब तीन या पांच किलोमीटर दूर है अगर 10 किलोमीटर का एरिया
- 36:08भारत के पास और होता कोई किसी प्रकार की।
- 36:14सहमति करके 10 किलोमीटर एरिया और लिया जाता तो सिखों का सिख धर्म
- 36:23का महान तीर्थ बच जाता। आज ये महान तीर्थ हमारे पास नहीं
- 36:31है। आज पाकिस्तान के पास तो मैं सिख
- 36:38भाइयों से यह वायदा करता हूँ कि करतारपुर साहेब जहाँ बाबा के
- 36:48आखिरी वर्ष गुजरे। 18।
- 36:54और मैं आपको दे दूंगा टाक टेबल से कोई इंसान है, वो मुझे आता है,
- 37:06मैं गर्म दिमाग का व्यक्ति नहीं हूँ।
- 37:08गर्म दिमाग से कोई मसला हल पे नहीं होता।
- 37:13गर्म दिमाग से क्या साबरकर ने मसला हल कर दिया?
- 37:16नहीं हुआ हुआ तो शांत दिमाग से गर्म दिमाग वाले भी थे, उनका भी
- 37:24योगदान तो रहा लेकिन आखिर में उन्होंने तवज्जो तो।
- 37:30गाँधी जी को ही शांतिपूर्वक आपको करतारपुर साहिब दे दूंगा, आपको
- 37:40कोई वीजा, कोई परमिशन लेने की जरूरत नहीं है, वह आपके क्षेत्र
- 37:45में आ जाएगा। करतारपुर साहिब कॉरिडोर नहीं
- 37:50होगा। सारा इलाका ही तुम्हारा होगा।
- 37:55बहुत लोग पूछ लेते हैं क्या? जब क्षेत्र बंट रहे थे तो आप कहाँ
- 38:03थे? मैंने कहा आप ऐसा करो।
- 38:08अब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी को छोड़ दो।
- 38:13इंस्टा और फेसबुक को छोड़ दो लोग क्या कहते हैं संगीत क्या कहते
- 38:19हैं ये छोड़ दो तुम इतिहास में जाओ छोड़ो इतिहास को तुम चैट जी
- 38:27से पूछो। यह बिल्कुल आपको एक्यूरेट
- 38:32ईमानदारी के साथ निष्पक्ष जानकारी देगा पूछो सर्च मारो पूछो कि जब
- 38:42विभाजन हो रहा था। तो क्या उस विभाजन में कौन सा
- 38:47इलाका हिंदुस्तान में या कौन सा पाकिस्तान में जाए?
- 38:51क्या इसकी राय गाँधी जी से ली गई? पूछो ज़रा यह आपको सत्य बताएगा
- 39:02व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी तुम्हे सत्य नहीं।
- 39:06न फिर सब सत्य हो जाएगा, लेकिन यह सत्य बदलाएगा क्योंकि यह सारे
- 39:12इतिहास के रस को कंगार लेगा। यह झूठ का झूठ और पानी असत्य का
- 39:19सत्य कर देगा। सत्य और झूठ दोनों का।
- 39:25अलगाव कर देगा तो आप इससे तो पूछेंगे आप व्हाट्सएप पे चले जाते
- 39:35हो किसी से पूछ लेते हो कोई व्यक्ति मंच के ऊपर बैठकर कोई बात
- 39:41पूछता है। और ऐसी ऐसी बातें पूछता है जिन
- 39:45बातों के प्रभाव में आप आ जाते हो।
- 39:49अगर आपके पास दो भैस हैं तो कांग्रेस आ गई तो एक भैस या
- 39:55मुसलमान खोल के ले जाएंगे। ऐसे कैसे ले जाएंगे भाई?
- 39:59तो मिलिट्री किसलिए बैठी है? आप अपने दिमाग से सोचते नहीं
- 40:06क्यों नहीं सोचते क्योंकि मंद बुद्धि हो, समझदार व्यक्ति तो
- 40:10सोचते हैं, समझदार व्यक्ति सोचते हैं कि ऐसे कैसे ले जाए फिर इतने?
- 40:19फौज जो हमारे पास है, भारत विश्व की सर्वश्रेष्ठ फौज है।
- 40:27आपको पता होना चाहिए ऐसे कैसे पाकिस्तान ले जाएगा।
- 40:32आपके व्यंस खोल के आपके मंगलसूत्र ले जाएंगे।
- 40:37क्यों भाई ये डाकुओं का देश है क्या?
- 40:39मुसलमान हमारे यहाँ के रेजिडेंट हैं, ये कैसे ले जाएंगे?
- 40:47लेकिन अनोखे अनोखे तरह के डर पैदा किये जा रहे हैं।
- 40:51आज मैं इन भ्रांतियों को तोड़ने आया हूँ।
- 40:56बताएं मुझे कैसे भैस खोल के ले जाएंगे और किसकी भैस खोल के ले
- 41:00गए। किसका मंगल सूत्र ये ले गए बल्कि
- 41:03मंगल सूत्र तो जिन्होंने उजाड़ा उन चार व्यक्तियों को आप आज तक
- 41:08नहीं पेश कर सकते पहलगाम में 42 मंगल सूत्र को जिन्होंने।
- 41:1540 मंगल सूत्रों को जिन्होंने उजाड़ दिया, श्रद्धा के लिए विधवा
- 41:21कर दिया उन लोगों के पास आरडीएक्स कहाँ से आई?
- 41:25आपने आज तक इसके ऊपर परिणाम तो छोड़ो जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी
- 41:34ही नहीं बैठाई। जांच आयोग ही नहीं बैठाया तो फिर
- 41:38हम क्या कहेंगे? हम कहेंगे ये आपने करवाया जान बूझ
- 41:41के पहलगाम भी आपने जान बूझ के करवाया फिर तो वही बल मिलता है
- 41:50ना? कि देश में कोई खलबली है, कहीं
- 41:58कोई चुनाव तो नहीं है। फिर तो ये बात सत्य सिद्ध होती
- 42:04है। ना आप किसी भी बात का ना तो प्रेस
- 42:08कान्फरेन्स करते हैं ना ही किसी बात का कोई।
- 42:13जवाब देते हैं, ना ही कोई आयोग को बैठाते हैं।
- 42:18कैसे हुआ? फिर ऐसे देश कैसे चलेगा?
- 42:23संविधान को बदलने पर उतारो हो तुम नहीं यह इस नीयत से।
- 42:32बरिदानियों ने बरिदान किया भी नहीं, तुमने बलिदान किया नहीं
- 42:37इसलिए तुम्हें बलिदानियों की नीयत का भगा भी नहीं बलिदानि हमेशा
- 42:42चतिथ्य है हमारी पुश्ते आराम से नर बोझ बिना किसी भेदभाव के
- 42:48शांतिपूर्वक पर है, लेकिन आपने शांति भंग की आंख।
- 42:54गुनहगार हुआ। जब देश में कुछ होता है तो
- 43:01न्यायपालिका देखती है ना चोरी हुई किसी के कौन चोर है डाका हुआ,
- 43:05किसी के कौन डाके मारा, अपराध हुआ, हत्या हुई, किसने की?
- 43:14लेकिन इतने इतने लोग मर जाते हैं। 26 लोग मर गए जो बेचारे पहलगाम गए
- 43:23थे और आपके बुलवाने से गए थे। बाहर के चार लोग आते हैं, दना दन
- 43:29गोली चलाते हैं। घंटा डेढ़ घंटा रुकते हैं, आराम
- 43:33से फिर चले जाते हैं, आपकी पकड़ में नहीं आती और आप ही बुलाते हो
- 43:37भाई, अब तो कोई फिक्र ही नहीं है। अब तो कोई यहाँ पर खतरा ही नहीं
- 43:41है। यही बात सुनकर तो वो जाते हैं,
- 43:47फिर दंड किसको मिलना चाहिए? जिसने कहा।
- 43:50कि यह सेफ है। सारा इलाका उसको मिलना चाहिए या
- 43:54नेहरू को मिलना चाहिए। जॉब है ही नहीं, वगैरह।
- 44:01तीर्थयात्रियों को बुला लिया गया। कुंभ में रगड़े गए बहुत से लोग।
- 44:09और आपके मूर्ख गुरु कहते हैं कि वो तो मोक्ष को प्राप्त हो गए।
- 44:15वो गुरु हैं, गुरु बनने के योग्य हैं।
- 44:17वो नहीं मुझे ये कमेंट किया क्या नाम था उसका मूलचंद दानि?
- 44:29कि आप अशुद्ध भाषा का प्रयोग करते हैं।
- 44:33हम न तो आरएसएस के लोग है, न बीजेपी के, न कांग्रेस के।
- 44:36मैंने कहा मैं कौन सा किसी का क्रेटा हुआ गोला हूँ, बताओ मैंने
- 44:42किसका पक्षपात किया? मैंने सत्य बोला जो बोला अध्यात्म
- 44:46मैंने जो बोला वो सत्य बोला। और अब राजनीति में मैं जो बोल रहा
- 44:51हूँ, सत्य बोल रहा हूँ। मैं किसी पार्टी के साथ नहीं हूँ,
- 44:55लेकिन मैंने कहा अगर मुझे साथ देना पड़ा तो मैं साथ राहुल को
- 45:02दूंगा। अभी तो कमेंट्स आ रहे हैं कि बाबा
- 45:07हमें तो आप पर यकीन है, आप ही क्यों नहीं प्राइम मिनिस्टरशिप ले
- 45:12लेते? मैंने कहा देखो जब मैंने वायदा
- 45:16किया है, मैं सारा मैप रोड मैप में बनाऊंगा, नक्शा में बनाऊंगा।
- 45:24राज़ ये करेंगे राज़ मैं नहीं करूँगा।
- 45:28मैं सिर्फ दिशा निर्देश देने वाला व्यक्ति हूँ।
- 45:31जैसे अध्यात्म में दिशा निर्देश दिया चलोगे तो आप ही ना अपने अंत
- 45:36में जाने के लिए ऐसे ही दिशा निर्देश में दूंगा।
- 45:42समझदार है लोग ये पढ़े लिखे। इतनी बड़ी पद्मियों पे रहे हैं
- 45:52न्यायिक कुर्सी पे बैठे हैं ये रोक बुद्धू थोड़ी है कुछ मैं
- 46:00समझाऊंगा कुछ इनके पास समझ है। बढ़िया से चलेगा देश फिर सबसे
- 46:08बढ़िया देश तब चला करता है जब उस देश के मन में बेईमानी नहीं होती।
- 46:13देश चलाने वालों के मन में किसी को खौफ दिखाने का इरादा नहीं
- 46:20होता। किसी को खौफ जुदा करने की मंशा
- 46:26नहीं होती। किसी को अपने संगम मिलाने की मंशा
- 46:33नहीं होती। अगर आप स्वतंत्र हैं, निष्पक्ष
- 46:40हैं। तो मैं भी बिल्कुल निष्पक्ष हूँ।
- 46:44उस स्तर पर गया हुआ व्यक्ति सदा ही निष्पक्ष होता है।
- 46:48यद्यपि कृष्ण तुम्हें पांडवों का पक्ष लेते हुए दिखाई पड़ेंगे, वो
- 46:53बात न रखे, वो तुम्हारी दृष्टि का सवाल है, तुम्हारी दृष्टि पे एन
- 46:58की ही वैसी छिड़ी है उसमें मैं क्या करूँ?
- 47:03लेकिन मैं पक्ष हमेशा सत्यकाल हूँ अगर कोई साहसी है ईमानदार है, झूठ
- 47:10नहीं बोलता, तो वह मेरी योग्यतम श्रेणी में आता है क्या अपराध है
- 47:18अगर मैं बोल दूँ तो? लेकिन अगर आप मुझे वोट दोगे,
- 47:25इलेक्ट करोगे तो ये समझे ना कि तुम मुझे ही वोट दोगे, किसी अन्य
- 47:33को नहीं, मैं ही चलाऊंगा सारी व्यवस्था को।
- 47:39आप कैसे करोगे? जे अरे भाई तुम्हें क्या पता है
- 47:45मत पूछो मुझे सारी बातें खोलने वाली होती नहीं और मैं बताऊँगा भी
- 47:50नहीं बता भी दूंगा तो बहुत ऐसी अहम बातें होंगी जो मैं कतई नहीं
- 47:55बताऊँगा। तुम्हें लगेगा कि मैं बता गया,
- 47:59लेकिन बताऊँगा मैं फिर भी नहीं बोल पाती हूँ।
- 48:01सीक्रेट है टॉप सीक्रेट करतारपुर हमारे लिए तीर्थ है, सिख धर्म के
- 48:10लिए तीर्थ है, वो मैं हिंदुस्तान को सौंप दूंगा।
- 48:14भाई तुम्हारे इलाके में वृद्धि कर रहा हूँ तो सिख जनता, सिख धर्म
- 48:22जश्न मनाए। आज दिवाली है उनके लिए जब मैंने
- 48:25घोषणा की किसी ने तो की इससे पहले किसी ने की ही नहीं 10 किलोमीटर
- 48:32का एरिया। पाकिस्तान में जो आता है, वह मैं
- 48:39हिंदुस्तान में मिला लूँगा। जैसे भी मिला हूँ वह मैं जानता
- 48:44हूँ कैसे मिलाऊंगा तुम कहते हो गाँधी जी से सलाह ली गई तुम ज़रा
- 48:49थोड़ा चैर्थ जी से पूछो। गाँधी जी को तो वहाँ पर ठहरने भी
- 48:54नहीं दिया गया। रेड क्लिफ जो रेखा खींची गई वह
- 49:00बाहर से वो व्यक्ति बुलाया जो कभी भारत आया ही नहीं था।
- 49:04उसने रेखा खेची मूर्ख था वो बंदा। वो जानता नहीं था।
- 49:08हमारा नक्शा ही नहीं जानता था उसने जहाँ से दिल किया वहाँ से
- 49:12खींचती लकीर, अन्यथा हम लाहौर अपने बीच में रखते हैं और क्षेत्र
- 49:20से देने के लिए और बड़े साधन थे बराबरी के लिए।
- 49:28वह अपना लेते, लेकिन इन्होंने मुझे उस तंत्र में बैठाया ही
- 49:33नहीं। आप चाहो तो पूछ सकते हो आप चाहो
- 49:40तो पूछो, चेट जी से पूछो, ग्रोक से पूछो किसी अन्य।
- 49:45एआई से पूछो आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स से पूछो या तत्कालीन
- 49:50से पूछो क्या मुझे बुराया क्या नहीं?
- 49:53मुझे तो नोआखली में फिर रहा था मैं मुझे बिल्कुल नहीं पूछा
- 50:00इन्होंने कौन कौन थे? वो व्यक्ति जो नहीं पूछ रहे थे?
- 50:05यद्यपि मैं तुम मुझे कांग्रेस ही कहते हो नहीं, मैं कांग्रेस में
- 50:09नहीं था। थोड़ी देर के लिए मैं कांग्रेस
- 50:12में था, लेकिन फिर मैंने कांग्रेस का त्याग कर दिया था, क्योंकि
- 50:18कांग्रेस मुझे लगा कि ये पूँजीवादी व्यवस्था की तरफ जाएगी।
- 50:23यह जो लोग मेरे संग आ गए हैं, यह पूँजीवादी व्यवस्था को संभालेंगे
- 50:31को उत्साहित करेंगे। इसलिए मैंने कांग्रेस छोड़ दी थी
- 50:36और जीस वक्त देश का विभाजन हो रहा था।
- 50:39ये जो तुम लाखों कतलों का। दायित्व मेरे सर पे मट रहे हो मैं
- 50:44अहिंसावादी व्यक्ति हूँ, मुझे मारने की क्या जरूरत थी?
- 50:49फिर मैं खुद ही मर जाता, अगर ये पाप मैंने किया होता तो पुतिन ने
- 50:55लिखा है महात्मा गाँधी ने हमारे ग्रह पर शांति के कारण।
- 51:01में अहिंसा और सत्य के माध्यम से अमूल्य योगदान दिया है, जिसका
- 51:10प्रभाव आज भी महत्वपूर्ण है। महात्मा गाँधी ने एक नए, अधिक
- 51:18न्यायपूर्ण। और बहु ध्रुवीय विश्व अवस्था की
- 51:22ओर हमें मार्ग दिखाया जो अब आकार ले रही है समानता, पारस्परिक
- 51:33सम्मान और सहयोग के अपने उपदेशों में।
- 51:37आज भारत विश्व के लोगों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर
- 51:43इन्हीं सिद्धांतों और मूल्यों का बचाव करता है।
- 51:47रूस भी वही करता है। यह है कमेंट पुतिन का और देखिए
- 51:54क्या बताता है। चैट जी ये जो तुम कहते हो कि ये
- 52:02हमें करतारपुर क्यों नहीं दिया गया?
- 52:05अब चैट जी से पूछो करतारपुर साहब सिख इतिहास का सबसे पवित्र।
- 52:14और केंद्रीय स्थल माना जाता है यह हिंदुस्तान की इस तरफ से उस पार
- 52:23तक जब बाबा नानक हलज्योत रहे होते थे तो तुम अपनी नग्न आँखों से
- 52:30उन्हें देख सकते थे इतनी दूर। वो क्यों नहीं लिया गया?
- 52:36क्योंकि जीस व्यक्ति ने ये रेखा खींची।
- 52:41वो व्यक्ति भारत के नक्शे से अनजान था और उसमें गाँधी जी शमार
- 52:46नहीं थे। गाँधी जी ने बाद में कहा कर तो
- 52:50तुम अपनी मर्जी से लो। क्योंकि मैं अकेला पड़ गया हूँ।
- 52:56मेरी कोई नहीं चल रही लेकिन कल को ये मत कह देना कि गाँधी जीके होते
- 53:03हुए ये सब कुछ हुआ, ये शब्द सुन लो उनके।
- 53:11के कर तो तुम अपनी ही लो क्योंकि बुगेगी तो तुम्हारी जब वोटिंग
- 53:16तुम्हारी जाता है लेकिन कल को तुम ये मत कह देना कि गाँधी जी इस
- 53:25चीज़ में एन्टेंगल थे। गाँधी जी ने कहा पाकिस्तान मेरे
- 53:31लास्ट पे बनेगा, यह पूछो चटर्जी से पूछो से पूछो अन्य किसी
- 53:38आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स से पूछो इतिहास से पूछो व्हाट्सएप पे मत
- 53:43पूछो व्हाट्सएप पे तो मैं भी लिख सकता हूँ।
- 53:47फेसबुक पे तो मैं भी लिख सकता हूँ इंस्टा पे तो मैं भी लिख सकता हूँ
- 53:53लेकिन ए आई पे मैं नहीं लिख सकता ध्यान रखना ए आई तो सभी इतिहास को
- 54:00खंगालेगा सेकण्डों में सारा का सारा सार निकालेगा।
- 54:06और फिर तुम्हें सौंप देगा। ये लो सत्य एआई झूठ नहीं बोलेंगे
- 54:13एआई ना मेरा खरीददा हुआ ना तुम्हारा खरीद हुआ वो तो सत्य
- 54:17बताएगा सभी इतिहास की किताबों को खंगाल करे, एआई पे भरोसा करो
- 54:25व्हाट्सएप पे भरोसा न करो। और ए आई क्या बोल रहा है यह
- 54:29तुम्हें मैं सुनाता हूँ डेरा बाबा नानक वे खड़े हो के अपने खेतों
- 54:37में बाबा नानक को हल चलाते हुए तुम देख सकते हो इतनी दूर है।
- 54:45और गाँधी जी ने अगर कहा कि अगर तुम लेने ही चले थे तो रेडक्लिफ
- 54:53रेखा को थोड़ा सा और बढ़ा देते। आगे रेडक्लिफ को किसी की भावनाओं
- 55:00का क्या पता है? और बंटवारा करने वाले कौन थे?
- 55:04अब उनका नाम भी सुना आप भी देखिए, मैंने भी पूछा है चैत जी से क्या
- 55:11भारत का बंटवारा गाँधी जी से पूछकर हुआ था तो चैत जी जवाब देता
- 55:19है नहीं, बिलकुल नहीं। भारत का बंटवारा गाँधी जी से
- 55:25पूछकर नहीं होगा स्पष्ट और ऐतिहासिक तथ्य गाँधी जी बंटवारे
- 55:32के सिद्धांत के ही खिलाफ़ थे। गाँधी जीके शब्द मैं बहुत बार
- 55:41दोहरा चुका हूँ गाँधी जी ने कहा पाकिस्तान बनेगा, मेरे शब्द है
- 55:50मेरे अर्थी तुम व्यर्थ की बातों को।
- 55:57सबूत की तरह पेश करने चले हो। आखिर मैंने कहा इस कोर मस्क छुपाई
- 56:03से छुपता नहीं, तुम इतिहास की किताबें पढ़ नहीं सकते।
- 56:11कोई निगाह कमज़ोर हो गई या मंदबुद्धि हो गई?
- 56:17किताबें पढ़ने का चलन ही समाप्त होगा तो सेठ जी कहते हैं कि नहीं,
- 56:23गाँधी जी से तो पूछा ही नहीं क्या गाँधी जी ने शुरू से ही कहा ये
- 56:31चैट जी बोले? मेरे जीते जी भारत के दो टुकड़े
- 56:36नहीं होंगे आप ज़रा बोलो मैं अकेला और आप जीते तो गाँधी जी
- 56:46क्या करेंगे? उन्होंने जो करना था कर दिया।
- 56:50उनको तो इतना ही काम था बस कि आप आजादी ड्रग उनसे जो हुआ उन्होंने
- 56:57किया। तुम अगर कहो कि गांधीजी ने अकेले
- 57:01नहीं ये किया तो बिल्कुल गलत। गांधीजी ने कभी ये बात नहीं कही
- 57:06ये जो सफेद जुल्फों वाले। टल्ली पिट रहे हैं, ये गलत बोल
- 57:12रहे हैं। गाँधी ने ना कभी श्रेय लेने की
- 57:15चेष्टा की, ना कभी गद्दी लेने की चेष्टा की।
- 57:19यद्यपि श्रेय भी ले सकते थे, गद्दी भी ले सकते थे।
- 57:25इसलिए उनसे बंटवारे की सीएम क्षेत्रों या प्रक्रिया पर राय
- 57:32लेना संभव ही नहीं था। जब गाँधी जी से पूछा ही नहीं था
- 57:37रेड क्लिफ रेखा के बारे में जब गाँधी ने कहा, यह मुझे न्याय संगत
- 57:43लगता नहीं है। कम से कम सिखों को उनका धर्म
- 57:48क्षेत्र तो देते थे लेकिन वो ऐसे मूर्ख ने रेखा खेची थी और स्वीकार
- 57:56करने वाले कौन थे? अब मैं तुम्हें क्या बताऊँ
- 58:00स्वीकार करने वाले थे। जिन्नम।
- 58:03स्वीकार करने वाले थे। पटेल मैं कोई बुरे नहीं करूँगा,
- 58:08चाहे वो किसी पार्टी का हो स्वीकार करने वाले थे।
- 58:12जवाहरलाल ये तीन व्यक्ति थे जिन्होंने उस रेखा को स्वीकार
- 58:18किया मोहम्मद अली जिन्ना तुम गाँधी पे दोष करते हो देते रहो,
- 58:25कोई बात नहीं लेकिन गाँधी अगर कुछ बुरा किया होता तो आज अपने आंतरिक
- 58:32तल पे नहीं पहुंचता था। आपकी हाहू से मार देती लाखों
- 58:37लोगों का कातिल वह। जिसने बंटवारा करवाया तो ढूँढिया
- 58:43उस शैतान को जिसने बंटवारा कराया, तुम सिर्फ व्हाट्सएप को पढ़ते
- 58:50रहोगे और सत्य समझ कर गाँधी को गाली ही निकालते रहोगे, कभी
- 58:56तथ्यों से अवगत होने की तुम्हारी कोई?
- 58:58चेष्टा यह प्रयास नहीं रहेगा। गाँधी जी कहते हैं कि मैं बंटवारे
- 59:04के शख्स खराब हूँ, मेरे से बंटवारे की बात मत करो, बंटवारा
- 59:11होगा, मेरे शव के ऊपर होगा। तुम कैसे कहते हो?
- 59:17लाखों लोग मारे गए तुम ज़रा कोई तो सबूत खाओ, चट जी से पूछ कर मैं
- 59:23अभी बता रहा हूँ तुम ऐतिहासिक तथ्य निकाल लो की तुम कोई किताब
- 59:29इतिहास की निकाल लो भाई कोई तो प्रमाण दो व्हाट्सएप के सिवा।
- 59:34व्हाट्सएप पे तो मैं भी लिख सकता हूँ, कुछ भी लिख सकता हूँ लेकिन
- 59:38तुम ऐतिहासिक का प्रमाण तुम्हारे पास है नहीं, क्योंकि इतिहास में
- 59:42सत्य दर्द होता है और चैट जी सभी ऐतिहासिक तथ्यों की निचोड़ निकाल
- 59:49के आपको बताता है इसलिए तुम चैट जीके ऊपर।
- 59:55खंगाले से बचते हो तो यह सत्य को वेड़ देगा।
- 1:00:00इसलिए तुम बचते हो। लेकिन मैं जेट जीके ऊपर पूछा कि
- 1:00:05बताओ कौन जिम्मेदार क्या गाँधी से पूछकर हुआ कहता सवाल ही नहीं पैदा
- 1:00:10होता। गाँधी से बिल्कुल नहीं पूछा गया।
- 1:00:13जब गाँधी से पूछा ही नहीं गया तो लाइन कहाँ से खीची जाए, कौन से
- 1:00:19क्षेत्र आने चाहिए, कौन से नहीं आने चाहिए?
- 1:00:22इसपे सवाल ही नहीं पैदा होता जब वो कहते कि बंटवारा ही नहीं होगा,
- 1:00:28बंटवारा होगा मेरे शव के ऊपर। मेरी मृत काया के ऊपर होगा
- 1:00:37बंटवारा, लेकिन तुमने बंटवारा स्वीकार कर लिया तो तुम्हारी
- 1:00:41मर्जी इसमें अकेला गाँधी का कर सकता है दो मुट्ठी हड्डी उसके पास
- 1:00:48वो क्या कर सकता है? 9 से तो लड़ सकता है, अपनों से
- 1:00:53कैसे लड़ें? मुझे पूछ लेते हैं, तुमने पटेल को
- 1:00:57क्यों नहीं बताया? तुमने जवाहरलाल को क्यों नहीं
- 1:01:01बताया? भाई सारी कांग्रेस गाँधी के
- 1:01:04कंट्रोल में नहीं रही थी। आखिरी में आके।
- 1:01:09अकेले नवखली में या जहाँ आग लगी थी, विद्रोह की भेदभाव की द्वेष
- 1:01:17की, वहाँ गाँधी को भेज दिया गया। किस लिए भेज दिया गया कि ध्यान
- 1:01:23गाँधी का कन्वर्ट हो जाए, ये तुम्हें आज सत्य बता रहा हूँ मैं।
- 1:01:28ये कहता है बंटवारा नेहरू, पटेल, जिन्ना और माउंटबेटन के स्तर पर
- 1:01:36तय हुआ गाँधी तो दूर दूर तलक नहीं थे।
- 1:01:42200 किलोमीटर दूर बैठे थे गाँधी। जब आग लगी बंटवारे की हमारे
- 1:01:52पंजाबियों में कहावत है खाण पीनो बांदरी एक टम्बे खा नु रिच तो
- 1:01:59मुझे रिच समझ लिया गया। मुझे वहाँ जलती आग में निहत्था
- 1:02:06व्यक्ति अहिंसक व्यक्ति बेच दिया कि जा के शांति करवा के आओ।
- 1:02:14यह जिन्ना की क्या थी उसे पता था कि गाँधी सख्त वरखलाक है अगर हम
- 1:02:22गाँधी के सामने। बात करेंगे तो वो कहेंगे बिल्कुल
- 1:02:27बंटवारा नहीं और जवाहरलाल और पटेल उनकी आज्ञा से बाहर नहीं जाएंगे।
- 1:02:33इसीलिए गाँधी को यहाँ से हटा ही दो जिन्ना की प्राणी थी।
- 1:02:41जिंदा ने गाँधी को हटा दिया जाओ तुम नवाखली के भीतर बड़ी जबरदस्त
- 1:02:46हिंसा हो रही है वहाँ जाकर जाओ पंजाब में वहाँ हिंसा हो रही है
- 1:02:51वहाँ ठीक करो जाओ दिल्ली में वहाँ हिंसा हो रही है वहाँ जाके शांति
- 1:02:56का पैगाम दो और खुद बंटवारे में लग गए।
- 1:03:00ये था पुराना सर गाँधी को अंतिम वक्त में आके इन्होंने उपेक्षित
- 1:03:05कर दिया अब जाट जी क्या कहते हैं? ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड माउंटेन
- 1:03:14कांग्रेस के नेता नेहरू और पटेल? मुस्लिम लीग के जिन्ना इनके बीच
- 1:03:19समझौता हुआ, गाँधी जी इसमें शामिल नहीं थे, गाँधी जी बैठे थे।
- 1:03:26200 किलोमीटर दूर उनके फरीश्तों को भी नहीं पता था कि ये बंटवारा
- 1:03:33कर कैसे रहे? लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ कि तुम
- 1:03:37इतने भड़क क्यों गए? किस व्यक्ति ने यह आग लगाई?
- 1:03:46यह आग लगाई किसी फिर का भ्रष्ट व्यक्ति ने और फिर का भ्रष्ट
- 1:03:53व्यक्ति कौन था? जिन्ह?
- 1:03:57जिन्ना की बात में आ गए गाँधी और पटेल या उनकी बड़ी से बड़ी
- 1:04:03बेवकूफी थी, अन्यथा अगर अड़ जाते पटेल और नेहरू तो इस देश का
- 1:04:10विभाजन नहीं होता। विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराव
- 1:04:17मुस्लिम लीग को जिन्ना ने ज़ोर देकर कहा आग और पानी का मेल नहीं
- 1:04:24होता। इसलिए मुस्लिम और हिंदू इकट्ठे
- 1:04:28नहीं रह सकते। इधर, संवरकर ने कह दिया कि
- 1:04:31मुस्लिम और हिंदू इकट्ठे नहीं रह सकते।
- 1:04:34किसी भी कीमत पर इन दोनों का ही आपस में बातचीत चलता रहा।
- 1:04:42गाँधी जी तो बीच में लिए ही नहीं गए।
- 1:04:47और तुम सारा दोष गंद के मर देते हो चैट जी बिलकुल निष्पक्ष बात
- 1:04:57कहेगा। इसके शब्द सुनिए क्या कहते हैं?
- 1:05:03सेठ जी कहते हैं गाँधी जी को जानबूझकर हूबहू लफ्ज़ बा लफ्ज़
- 1:05:08बोल रहा हूँ मैं। गाँधी जी को जानबूझकर सीमा
- 1:05:13निर्धारण से अलग रखा गया जब देश बन रहा था।
- 1:05:22सीमा निर्धारण से जानबूझ कर अलग रखा गया।
- 1:05:26ये जानबूझकर किसने किया? धोखे में आ गए पटेल और नहर शरारत
- 1:05:35थी सारी चिन्ह की और मुस्लिम लेके आप फ्लोट लीजिए, आप खंगा लीजिए।
- 1:05:42में कोई मन घडंत बातें नहीं किया करता हूँ क्योंकि ब्रिटिश और
- 1:05:48कांग्रेस दोनों जानते थे। अब ये सुनिए क्योंकि ब्रिटिश और
- 1:05:55कांग्रेस जो समझौता कर रहे थे, जो रेड क्लिफ रेखा खेंच रहा था।
- 1:06:01वह बखूबी जानता था। इस व्यक्ति की मौजूदगी में रेखा
- 1:06:06नहीं खींच पाएगा। तुने चाल खेली वही रावण तेरी लंका
- 1:06:13को आग लग गई है ना? षड्यंत्र होता।
- 1:06:21तो षड्यंत्र रचा गया। नेहरू और पटेल को उनका दिमाग जैसे
- 1:06:30हरलिया मुस्लिम लिखने और इधर से सबर कर अड़ गए।
- 1:06:34वो कहते हाँ, हम तो इकट्ठे नहीं रह सकते।
- 1:06:38दोष सारा गाँधी के ऊपर गाँधी के रिश्तों को भी पता नहीं उसको भेज
- 1:06:44दिया कि जाओ वहाँ पर आग लगी है वहाँ शांति कराओ बापू आग के बिना
- 1:06:49कोई करा ही नहीं सकता के शब्द सुनिए क्योंकि ब्रिटिश और
- 1:06:53कांग्रेस दोनों जानते थे। कि वे बंटवारे का विरोध करेंगे।
- 1:07:00इसीलिए उन्हें उस समय दंगे रोकने और शांति छात्राओं में लगाया गया।
- 1:07:08गाँधी जी ने अंतिम समय तक कहा, मेरा नाम बंटवारे से मत जुड़िए।
- 1:07:15उन्होंने साफ कह दिया था कि वे इस निर्णय के पक्ष में नहीं हैं।
- 1:07:23इसे ज्यादा क्या लिखे? इसने तो सारे पन्ने इतिहास के
- 1:07:28कंगाल के ऊपर निचोड़ निकाल के आपको बताया है।
- 1:07:33रेड क्लिफ लाइंग। गाँधी जी की राय के बिना खींची गई
- 1:07:38सीमाएं एक ब्रिटिश जज सीरियल रेड क्लिफ ने स्वयं तय की गाँधी जी को
- 1:07:46इसमें कोई भूमिका नहीं दी गई। पूछा भी नहीं गई भूमिका तो वो दूर
- 1:07:51की बात है। निष्कर्ष।
- 1:07:54ये कहते साफ शब्दों में जवाब देता हूँ आपको भारत पाकिस्तान का
- 1:07:59बंटवारा गाँधी जी से नहीं तो पूछा गया अब ये मैं ये तो नहीं कि मैं
- 1:08:03अब मैं पढ़ रहा हूँ और जब तुम पढ़ने लगोगे तो ये मिट जाएगा।
- 1:08:07ऐसा कुछ नहीं है। यहाँ सौदा ही रहेगा ये भारत
- 1:08:11पाकिस्तान का बंटवारा। गाँधी जी से न तो पूछा गया था, न
- 1:08:16उनकी सहमति ली गई थी और न ही वे प्रक्रिया में शामिल थे।
- 1:08:23वरना जब बंटवारा हो रहा था तो उन सब ने षड्यंत्र रच के।
- 1:08:32गाँधी जी से कहा, देखिए आप अहिंसक अहिंसा के पुजारी हैं, आप जाइए
- 1:08:38फलां जगह आग लगी है। गांव बुझाइए नेहरू और पटेल कच्चा
- 1:08:44खा गए क्योंकि उनके ऊपर ही मान था।
- 1:08:52गाँधी को अपनों के ऊपर मान होता है।
- 1:08:58गाँधी जी से न तो पूछा गया और न उनकी सहमति दी गई और न ही वे
- 1:09:04प्रक्रिया में शामिल थे। अगर आप चाहें तो मैं ये भी बता
- 1:09:10सकता हूँ। कि गाँधी जी ने बंटवारे को रोकने
- 1:09:13के लिए कौन कौन से कदम उठाये थे? नेहरू और पटेल ने बंटवारे को
- 1:09:19क्यों स्वीकार किया? ये चैट जी कहता है कि पूछिए जनाब,
- 1:09:24अगर आप पूछना चाहते हो तो आज मैं इतिहास के पन्ने खंगाल ही दूँ।
- 1:09:30खोल ही दूँ। मैं एक भी हत्या का जिम्मेदार
- 1:09:36नहीं हूँ। पुत्रो अगर मैं जिम्मेदार होता तो
- 1:09:42परमात्मा मुझे इतने बड़े पुरस्कार से नवाजा।
- 1:09:47परमात्मा ने मुझे अपना अंतिम छोर दखा के मुझे अपने सर्वोच्च
- 1:09:53पुरस्कार से सम्मानित किया। उसका कारण यह है कि किसी की एक
- 1:09:59पेंशन भी गुण हो गई तो वह गाँधी जीके कारण नहीं हुई।
- 1:10:04तुम्हारे तो कट गए लोग। गाड़ियां भर भर के आईं और गईं।
- 1:10:09लेकिन तुम गाँधी जी पर मठ देते हो।
- 1:10:12किसके कारण क्योंकि तुम सत्य को जानते हो, किसी नए जानने वाले ने
- 1:10:19दुष्ट ने अपनी दुष्टता का परिचय देकर?
- 1:10:23आपके सोशल मीडिया पे ये सारी बातें डाल डालनी मैं कहता हूँ आप
- 1:10:28बिल्कुल विश्वास मत करो व्हाट्सएप पे क्योंकि व्हाट्सएप पे तो तुम
- 1:10:33भी लिख सकते हो लेकिन मुझे एक बात का जवाब दो क्या तुम चैट जी पर भी
- 1:10:39लिख सकते हो? क्या तुम ए आई पे भी लिख सकते हो?
- 1:10:43क्या तुम ग्रुप पे भी लिख सकते हो?
- 1:10:47लेकिन क्या तुम व्हाट्सएप पे लिख सकते हो?
- 1:10:50तुम कहोगे बिल्कुल लिख सकते हो क्या लिख सकते हो?
- 1:10:53तुम कहोगे जो भी चाहे वो लिख सकते है तो फिर किस से पूछना बाजू चैट
- 1:10:59जी से ए आई से पूछना बाजू। तो एआई तो फर्ज ये कह रहा है और
- 1:11:05मैं साक्षी हूँ मैं सौगंध खाता हूँ उस अपने ही अनंत स्वरूप के
- 1:11:12मैंने एक चिड़ी का एक कीड़ी भी नहीं मरने दिया।
- 1:11:18अगर मैं इन चीज़ का। दायित्व मेरे पास होता तो तुम्हें
- 1:11:25पता नहीं मैं कितना नरम दिल का इंसान हूँ।
- 1:11:31आई विल आई हैड कमिटेड सुसाइड? मैं खुद ही मर जाता।
- 1:11:38मेरे भीतर इतनी आग लग जाती कि इन लोगों का जिम्मेदार मैं हूँ नहीं,
- 1:11:47इसलिए स्पष्टतः मैंने कह दिया देखो बिल्कुल मेरे शव के ऊपर
- 1:11:55राष्ट्र के दो भाग होंगे। तुम जीस भी एआई से चाहो खंगालो
- 1:12:02जीस भी इतिहास के पन्नों को चाहो खंगालो पढ़ लो कोई भी पुस्तक किसी
- 1:12:09के द्वारा भी रचित हो, चाहे मेरे दुश्मन ने भी क्यों ना रच दी हो
- 1:12:13उसमें खंगालो। कहीं भी लिखा हो कि यह गाँधी जी
- 1:12:17ने बंटवारा कराया तो मैं जिम्मेदार हूँ।
- 1:12:22ऐसे ही किसी को बदनाम करना अच्छा नहीं होता।
- 1:12:27ये देखो ये जो मूर्ख मीडिया है ये सुबह से शाम तक।
- 1:12:33क्या कुछ नहीं कहता और अब तो हमारा जो असली वाला मीडिया कहते
- 1:12:37हो तुम वो भी झूठ बोलना शुरू हो गया है।
- 1:12:40बस कल को मोदी जी त्यागपत्र दे देंगे।
- 1:12:43आपको मैंने बताया पुतिन की बात पुतिन लिख के जाते हैं कि यह
- 1:12:48प्लेनेट के ऊपर ऐसा पहला व्यक्ति आया था।
- 1:12:52जिसने यहाँ अहिंसा की नींव रख दी, पक्की पक्की नींव रख दी और हम
- 1:12:58समानता की ओर चल रहे हैं। हम उनके बताए हुए मार्ग को अपना
- 1:13:03रहे हैं और ये कहते हैं कि वो तो लिख के गया कि ये गोड़ से वादी
- 1:13:09सरकार को उखाड़ने को। किसको किसके ऊपर विश्वास करोगे
- 1:13:13तुम? मैं ईमानदार व्यक्ति हूँ, मेरे
- 1:13:19ऊपर तुम्हें चाहो न चाहो विश्वास करना ही होगा।
- 1:13:25मैं तुम्हें आखिरी सबूत तो दिख रहा हूँ इसीलिए नहीं।
- 1:13:30कि तुम्हारे भ्रम मिट जाएं, नहीं इसीलिए कि सत्य प्रकट हो जाए।
- 1:13:35जो असत्य तुम्हारी विविषा ग्रंथि में ठूस दिया जाए वो तहस नहस हो
- 1:13:41जाए, वो जल जाए, भस्म हो जाए, सत्य प्रकट हो जाए, असत्य खो जाए।
- 1:13:49वासप बन कर उठ जाए वे पूरेठ हो जाए मैं आज एआई से प्रश्न
- 1:13:55तुम्हारे सामने तो पूछा जाके पाना फटी विवाइ?
- 1:14:09सो क्या जानें फिर पर जा के पैरिना फटी विवाई।
- 1:14:28सो क्या जानें फिर पराई, जिसके आपने इतना सुना मुझे उसके लिए मैं
- 1:14:48आपका आभार प्रकट करता हूँ धन्यवाद।