Latest / Baba ji Vijay Vats / 19 Oct 25 - क्यों बनाई गई भगवान की मूर्तियां? जानिए इसके पीछे का रहस्य! समाधि का तत्त्व! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:04बाबा प्रणव प्रफुल्ल चंद्र आप नाम जप, मूर्ति पूजा का बड़ा विरोध
- 0:22करते हैं। लेकिन आखिर जिसने मूर्ति बनाई
- 0:35उसका रहस्य क्या है? क्यों बनाई गई मूर्तियाँ?
- 0:41कारण क्या था? क्योंकि रहस्य की बात है।
- 0:50रहस्य को आप बखूबी समझा देते हैं, कृपया हमें इस प्रश्न का जवाब
- 1:01दीजिए। संघ संघ इसके सूत्र भी ले चले
- 1:09तंत्र का शिव तंत्र सूत्र 11/183 अंतः से जैसे हो जाओ।
- 1:27अन्तश जैसे हो जा आइए हम गहरे में चलते हैं, मूर्तियां क्यों
- 1:42बनाएंगे? इस रहस्य से आज पर्दा उठाते हैं।
- 1:55जो जैसा बनना चाहता है उसकी मूर्ति लगा ले।
- 2:05बलशाली बनना चाहती हूँ अक्सर आपने देखा होगा पहलवान लोग हनुमान जी
- 2:14की पूजा करते हैं। बहादुर होने की चाहत रखने वाले
- 2:22लोग माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। धन, वैभव, संपत्ति युक्त होने
- 2:31वाले लोग वहाँ लक्ष्मणों की पूजा करते हैं, आनंद में रहना,
- 2:40समाधिष्ट रहना और ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले लोग।
- 2:51शिव की पूजा करते हैं एक शब्द को लिख लेना।
- 3:12विचार वस्तु में परिवर्तित हो जाते है विचार वस्तु में
- 3:23परिवर्तित हो जाते है, जिसकी फोटो लगाओगे।
- 3:31उसके चरित्र के बारे में विचार करो, वह विचार तुम्हारी बुद्धि से
- 3:37चलेगा गहरे अंत में उतरेगा और वह फल लाएगा।
- 3:51तुम वैसे ही हो जाओगे कैसा तुम होना चाहते हो, बलवान होना चाहते
- 4:03हो, ज्ञानवान होना चाहते हो, आनंदित और शांत होना चाहते हो?
- 4:10शक्ति संपन्न होना चाहते हो, धन और वैभव से युक्त होना चाहते हो,
- 4:15वैसी ही तस्वीर निकाल रहे हैं। बार बार तुम अपने इष्ट की तस्वीर
- 4:22को देखोगे इष्ट यानी आइकॉन। जैसा तुम होना चाहते हो उसको इष्ट
- 4:32कहते हैं, आहिष्ट का अर्थ है कि जैसा तुम होना नहीं चाहते, अगर
- 4:45क्रांतिकारी होना चाहते हो, शहीद होना चाहते हो तो भगत सिंह की
- 4:51फोटो लिखवा लेना। राजगुरु सप्लाई की फोटो लगा लेना
- 4:59न्याय, वेद और समय केदार होना चाहते हो तो डॉ।
- 5:04अंबेडकर की फोटो लगा लेना। कायर और भगोड़ा होना चाहते हो तो
- 5:15वीर सावरकर की फोटो लगा लेना। हत्यारे होना चाहते हो तो गोडसे
- 5:22की फोटो लगा लेना एक गोडसे की वक्त बहुत वक्त पहले की बात है।
- 5:34जब शुरू शुरू में ये दुष्प्रचार शुरू हुआ था तब मैं अपने कक्ष में
- 5:40नहीं बैठा था। बाहर घूमा, फिरा भी करता था, मुझे
- 5:48वो मिला कहता आओ, पास ही ये अपना घर है।
- 5:54वहाँ चले, थोड़ा जलपान हो जाए। मैं उसके घर गया तो वहाँ गोट से
- 6:03भी सो रखी थी, मैंने उसे प्रणाम किया।
- 6:11व्यक्ति के अंदर आप मुझे क्यों प्रणाम कर रहे हो?
- 6:16मैंने कहा बड़ा सुन्दर आइकॉन सुना आपने, हाँ मैं घुट से भक्त हूँ,
- 6:24इसलिए आपको प्रणाम करता हूँ। तुम गाँधी जैसे अहिंसक लोगों को
- 6:36मारना चाहते हो, हाँ, हम देश की सेवा करना चाहते हैं, ठीक है, तो
- 6:45क्या लुटकने को भी तैयार हो तो कांपा?
- 6:51उसकी माँ भी पास बैठी थी, वो भी कॉपी मेरा।
- 6:54बेटा क्यों लटके लटके मेरे दुश्मन लटके मेरे पड़ोस ही मेरा बेटा
- 7:02क्यों लटके है? तो मैंने कहा फिर इसे कहो के गोट
- 7:07से बनने की चेष्टा न करें। गोड से बढ़ना भी अपने आप में एक
- 7:14साहस का काम है, कायर का काम है लेकिन ये सब कर बढ़ना तो बिलकुल
- 7:21ही कायरता का काम है। गोड से बन जाना, सावरकर मत बनना।
- 7:28किसी के कंधे के ऊपर बंधक चला रख के खुद अपने आपको बचा लेना, सबर
- 7:36कर और खुद आहूत हो जाना अग्नि में मैं गोडसे को आज ही प्रणाम करता
- 7:46हूँ। कम से कम साहस तो था सत्य क्या
- 7:55था? असत्य क्या था इसको छोड़िए, जो
- 8:00उसने जाना जो उसने माना कि यह असत्य है।
- 8:05यह गलत है उसे मिटाने की, पर इतना साहस भी कोई कम नहीं है और मैं
- 8:14सदा से कहता हूँ। दुर्भाग्य है कि उसे सही गुरु
- 8:18नहीं मिला। अगर सही गुरु मिल जाए तो ऐसा साहस
- 8:24बड़े कम तरह लोगों में हो। बन जाना कोक से वास्तव में अगर
- 8:35देश से प्रेम है तो देश को आजाद कराने के लिए भगत सिंह बन जाना
- 8:41बिल्कुल बन जाना, लेकिन सागरकर मत बना दूसरों के आहूति देय।
- 8:49दूसरों का बलिदान दे, स्वयं को बचा ले गुस्सा भरकर और उसको वीर
- 8:55के खिताब से सुशोभित करते हैं उसके शिष्यगण अगर तुम कोढ़ से
- 9:05मरने को तैयार हो तो याद रखना। उसके फल भी भुगतने को पहले तैयार
- 9:13हो जाओ और थोड़ा माँ से पूछ लो पिता से पूछ लो माँ तो कहती लटके
- 9:19मेरे पलों से लटके मेरे दुश्मन मैं क्यों लटकूँ मेरा बेटा क्यों
- 9:26लटका? थोड़ा घर में राय मिश्रा कर रही
- 9:34हो। आइकॉन बनाने से पहले मूर्तियां
- 9:38क्यों बनाई गई? ताकि तुम वैसे ही हो सको, बराबर
- 9:47उसे निहारते रहोगे? घर से बाहर जाओगे।
- 9:52तुम शांति पुरुष होना चाहते हो बा बनाने की तस्वीर लगा लो, उसके
- 9:59बाणे में रहना चाहती हूँ बा बनाने की तस्वीर लगा लो, उसका दर्शन
- 10:05करके जाओगे, नमन करके जाओगे, माथा टेक के जाओगे।
- 10:11वह विचार आपके अचेतन में गुंज 1 दिन आप वैसा ही हो जाओगे।
- 10:17मंजू गुंजार करता है, बार बार दोहराता है, रेपेटिशन का यही अर्थ
- 10:24था मंत्र का यही अर्थ। बार बार गूंजा करोंगे बाबा जैसी
- 10:34शांति बाबा जैसा आनंद बाबा जैसी शीतलता बाबा जैसी डब्ल्यू टी।
- 10:46तो गुरु नानक की तस्वीर लगा देना, योद्धा बनना चाहते हो, गुरु
- 10:50गोविन्द सिंह की तस्वीर लगा देना बलिदानी होना चाहते हो।
- 10:55गुरु तेग बहादुर की गुरु अर्जुन ने इनकी तस्वीर लगा दिया।
- 11:01बहादुर होना चाहते हो, महाराणा प्रताप की शिवाजी मर टाँकी।
- 11:09और बहुत से वीर वृक्ष जन्म दिए इस धरते में, लेकिन नकली वीर मत
- 11:14बंजान सावरकर मत बंजन महाराणा प्रताप बंजन शिवाजी मरुटा बंजन।
- 11:26इनकी तस्वीर लगा लेना, इन्हें इश्क मान लेना, ये तुम्हारे आइकन
- 11:35हो गए, उन्होंने जो कुछ किया इनको इश्क मानते ही इनके भीतर वो
- 11:41चीज़ें उतरनी शुरू हो जाएगी आग के।
- 11:44रिपीट होंगे। यही मंत्र है अपने पहलवान को कसरत
- 11:53करते हो उनको देखना उनके घरों में, उनके फाड़ों में उनके गुरु
- 12:00की फोटो होती है गुरु हनुमान यह हनुमान पुरु श्रीराम के वक्त
- 12:08हनुमान एक गुरु हनुमान भी हो गए हैं।
- 12:14अखाड़ों में उनकी तस्वीर लगी होती है चंदगी राम मास्टर जी की तस्वीर
- 12:18लगी होती है। क्यों लगी होती है?
- 12:23वो वैसा होना चाहते हैं। जीवन का सवाल है इसका फैसला ऐसे
- 12:37किसी के कहने कहलाने सिखाने पड़ने फिरने इसे मत ले लेना ज़िन्दगी
- 12:43तुम्हारी है। तुम ही फैसला लेना कोई दूसरा
- 12:50फैसला ना ले, कोई खेद जुर्पों वाला फैसला ना ले, तुम फैसला ले
- 13:00लेना। मूर्ति इसलिए बनाई गई और तरह तरह
- 13:04की मूर्ति इसलिए बनाई गई। ऐसा नहीं कि ये होते ही हैं गधे
- 13:12की सवारी करने वाली श्वेतला माता इसका भी अवश्य प्रायः लोग तुम्हें
- 13:19गधे के ऊपर भी बिठा दें तो तुम गौरान्वित महसूस करो।
- 13:30हाँ, ये भी तो एक प्रकार की प्रभुता है लोगों ने छित्र गले
- 13:39में डाल दिया, तुम गर्दन ऊंची रखना।
- 13:45ये भी तो महत्त्व है। मूर्तियों का महत्त्व था।
- 13:51तुम कैसा बनना चाहते हो? इसलिए पहले जमाने में आजकल तो
- 13:58गर्भवती औरतें फ़ौरन फिल्मों देखने जाती हैं।
- 14:02पहले जमाने में जब स्त्री गर्भवती हो जाती।
- 14:09उनको कहानियों सुनाया करते थे। महापुरुषों की विषम पिदामों के
- 14:16त्यागियों की वीरों की गाथाएं सुनाया करते थे भगतों की।
- 14:23गाथमें सुनाया करते थे। बड़ा गहरा विज्ञान से पा था इसके
- 14:30भीतर होने वाला बच्चा इन सदगुणों से भरपूर और तुम जिसकी कहानी
- 14:42सुनोगे। मात्र तुम ही नहीं, सुनोगे दो जीव
- 14:46हैं, एक और भी जीव तुम्हारे भीतर पड़ रहा है, वह भी सुन रहा है तो
- 14:54वीरता की बातें सुनाओगे तो वह वीर उत्पन होगा।
- 14:58कायरो की बातें सुनाओगे तो कायरो उत्पन।
- 15:06ये सब विज्ञान दुर्भाग्य है हिंदुस्तान का भूल गए तुमने पूछा
- 15:17पुत्र कि मूर्तियाँ आखिर बनाई क्यों गईं?
- 15:20किसी ने तो बनाई होंगी और वो भी तो संत थे, वो भी तो ऋषि थे,
- 15:24बिल्कुल। लेकिन बाहर की बात है, संसार की
- 15:33बात है, तुम वीर बनना चाहते हो, रणधीर बनना चाहते हो, शांत बनना
- 15:43चाहते हो, संत बनना चाहते हो, तुम बलिदानी बनना चाहते हो।
- 15:49देश की सेवा करना चाहती हूँ वैसा ही आइकॉन चुन लेना मसलमैन होना
- 15:55चाहती हूँ वैसा ही आइकॉन चुन लेना, फिर गामा पहलवान की फोटो
- 16:01लगा ले गामा पहलवान ने। 1200 किलो भजन, पूरा ट्रक होते
- 16:07ट्रक। मिनी ट्रक टाटा का मीडियम ट्रक
- 16:13उसका वजन 1200 किलोमीटर है। अब उसको कंटेन्स कर लो तो ज़रा
- 16:18हिला के दिखाओ उसको और गामा पहलवान ने वह छाती तक उठा लिया
- 16:25था। और उसको काफी दूर तक लिए हुए
- 16:30फिरता रहा। काफी देरी तक और काफी दूरी तक
- 16:34लेके आओ उसे मूर्तियों का मतलब तुम ऐसा होना चाहते हो।
- 16:48जननी जनें तो भक्त जनें या दाता या सूप जननी जनम दे तो वक्त।
- 17:02सबसे पहले भक्त रखा गया। प्रेम से युक्त जननी जन तो भक्त
- 17:11जनि या दाता या दानी हरिश्चंद्र जैसा कर्ण जैसा या दाता या सूर्य।
- 17:22शोर वे साहसी साहस का मतलब साहस का मतलब तो साहस भी हो सकता है।
- 17:38यहाँ अर्थ तुम्हें थोड़ा अजीब लगेगा।
- 17:41मैं गुडसे को भी साहसी मानता हूँ, लेकिन बात तो ये है कि भटका हुआ,
- 17:49साहसी है। उसे मार्गदर्शक न मिला,
- 17:54मार्गदर्शक मिला तो उसका फायदा उठाने वाला मिला।
- 18:00उसको प्रबुद्ध करने वाला भी मिल सकता था, लेकिन गलत हाथों में पड़
- 18:07गया। लेकिन था साहस है।
- 18:10मैं उस वीर पुरुष को सदा ही प्रणाम करता हूँ उसकी वीरता को।
- 18:22या दाता या सूप दाता ₹20 मिले गुरु नानक देव को या सच्चा सूत
- 18:30रखा, रास्ते में भूखे संत मिल जाते।
- 18:40उनका पेट भर देता पिता कहते क्या सामान ले के आया है क्या सौदा ले
- 18:52के आया है, तो कहते पिता श्री। मैं सच्चा सुविधा करके अड़ा हूँ
- 19:02सारी कहानी बताती हूँ, पिता तो संसा रखते उन्होंने माथे पे हाथ
- 19:09मारा अरे रे रे रे रे सच्चा सौदा आज भी लोग करते हैं।
- 19:19तुम जमीनें दान कर देते हो और वो जमीनों का उपयोग करते हैं।
- 19:27गुफाओं के लिए आज सच्चे सौदे का ये मतलब बना लिया गया।
- 19:40मुझे लोग कहते हैं यह है साजिश है गवर्नमेंट मैंने कहा हो सकती है
- 19:48लेकिन क्या जज वही साजिश का शक हो जायेगा?
- 19:51जज तो न्यायमूर्ति है, वो तो वो तो सारे ग्रुप्स देखेगा।
- 19:58तुम बातों को टर्न देने में बड़े होशियार हो।
- 20:04यह तो सरकार की कुछ ऐसा भी हो सकता है कि जब जरूरत पड़ेगी इसको
- 20:11छोड़ तो उसको ताड़ दो भीतर। दिल के बहलाने को गाली भी ख्याल
- 20:22अच्छा है दान देने से पहले पात्र पपात्र को देख लेना।
- 20:32क्या मेरी जमीन को गुफाओं के लिए तो इस्तेमाल नहीं कर दिया जाएगा?
- 20:39क्या मेरी जमीन के ऊपर जो सामान उत्पन्न होगा, आलू उत्पन्न होगा,
- 20:43प्याज उत्पन्न होगी उसको हाथ लगा के ये गुमराह तो नहीं करेगा।
- 20:48एक एक आलू 1000 ₹1000 में बिकता सुना मैंने और वो वक्त मेरे पास
- 20:55आते है। हमने करी था क्या हो गया था भाई,
- 21:04यह व्यक्ति तो दुष्ट है यह व्यक्ति तो पापी है।
- 21:15हत्यारा है बलात्कारी? इस व्यक्ति ने हाथ लगा दिया और
- 21:21तुमने खा लिया। आज ऐसे ही व्यक्तियों की पूजा हो
- 21:29रही है। ज़माना ऐसा गया।
- 21:38कितने रोज़गार के मारे बेचारे लट्ठे खाते हैं पुरस्कार सरद
- 21:46रातों में बौछारें होती हैं, ठंडे पानी मेरे को शिष्य पूछ लेते हैं
- 21:54बाबा। वालंटियर रिटायरमेंट ले ले।
- 21:58मैंने कहा बिलकुल नहीं, क्यों? मैंने कहा ये बेचारे लटखारे हैं।
- 22:05हाँ, एक शर्त पर तुम ब्याज ले सकते हो कि मैं वालंटियर रिटायर
- 22:16होने को तैयार अगर मेरे स्थान पर। किसी सच्चे बेरोजगार को आप जगा
- 22:22देते, ऐसा नहीं जो तीन बार पहले से दो बार पहले से सरकारी नौकरी
- 22:29कर चुका, वह अब तीसरी बार सरकारी नौकरी कर रहा है।
- 22:36मूर्तियाँ क्यों बनाई गई? आइकॉन एस्टाबलिश करने के लिए हर
- 22:44वक्त तुम्हारी निगाह उस मूर्ति के ऊपर बनी रहे कि मैंने हनुमान जैसा
- 22:51बलशाली और त्याग की मूर्ति बनाना निष्काम सेवा करना।
- 22:59हनुमान जैसा निष्काम सेवक न धरती के ऊपर, कभी हुआ वो तो न भविष्य
- 23:04से और कभी होगा भी। जीस निष्काम भाव से हनुमान जी ने
- 23:13भगवान राम की सेवा की। वह एक उदाहरण मात्र है।
- 23:23उसके बराबर ही कोई दूसरा नहीं कर सकता।
- 23:36आइकॉन स्थापित करने के लिए मैं ठहर ठहर के बात इसलिए करता हूँ कि
- 23:44आपके हृदय में उतर चढ़ा है। जैसा बनना चाहते हो वैसा देवता
- 23:52छोड़ लेना, वैसा आइकॉन छोड़ लेना, क्योंकि विचार 1 दिन सत्य में
- 24:01परिवर्तित हो जाते हैं। इन विचारों को इन आइकॉन्स को माना
- 24:10हुआ मत मान लेना तुम 1 दिन होने ही वाले हो।
- 24:15मैंने बहुत बार भी आपको कहा है कि ब्राह्मण से ऐसी वैसी चीज़ मत
- 24:21मांग लेना। भ्रमण तुम्हें देर अवेर व महिया
- 24:25करा दे। एक ही सृष्टि का माल और तुम एक कण
- 24:31भी नहीं बना सकते। उसे इतना निर्बल और अन्यायकारी
- 24:36समझ रहे हो। क्या ये तुम्हारी एक ही इच्छा भी
- 24:39न पूरी करेगा? बिलकुल पूरी करेगा, लेकिन
- 24:44प्रोसेसिंग में वक्त लग जाएगा। तुमने बीज बो दिया, आज तुमने नफरत
- 24:51का बीज बो दिया, आज क्या कर रहे हैं?
- 25:02हमारी गल्तियों पर बैठने वाले क्या कर रहे हैं, हमारी पनेरी को
- 25:08क्या सीखा रहे हैं, इनके खुद के कोई इच्छा नहीं और हैं तो किसी
- 25:16बड़ी फजी पे। या बाहर फौरन में, ताकि यहाँ की
- 25:20तो छाया भी न पड़े और तुम्हारे बच्चों को क्या सिखारे हैं?
- 25:31नफरत देश, आगजनी। यह तो गुलवर्कर की पॉलिसी हो गई,
- 25:43इसको बड़े ध्यान से सुनना गरीबों तुम्हारे काम की बात है।
- 25:49दलितों तुम्हारे काम की बात महलाओ तुम्हारे काम की बात है।
- 26:00पहले ज्यादा संख्यक लोगों से इकट्ठा करके कुछ लोगों में दे दो।
- 26:12150 लोगों में बांट दो सारे हिंदुस्तान की मल्कीय को।
- 26:17यह गोलवर्कर का आंतरिक सिद्धांत है।
- 26:20मैं इसे जानता हूँ और यह वही गोलवर्कर है जब गोट से गाँधी को
- 26:31गोली मार देता है सबसे पहला बयान गोलवर्कर करता है।
- 26:39वी आर नॉट कन्सर्न्ड विथ गोडसे हमारा कोई संबंध नहीं है गोडसे के
- 26:45साथ गोडसे को तो हम जानते सबसे पहला व्यक्ति यही था।
- 26:55तो मैं कहता हूँ सभी को आइकॉन बना लेना, भगोड़ों को आइकॉन मत बना
- 27:00लेना, छाती तान के खड़ा हो जाए, मरो गोली मेरे सीने में उसे आइकॉन
- 27:08बना लेना, साहस भी तो होना चाहिए। मेरी इस कहानी को बड़े कोष से सुन
- 27:25करोड़ों लोगों का खून चूस के पैसा इकट्ठा करना और गणित गणित के
- 27:32लोगों में बाँट देना जो अपने हो। 1 दिन करोड़ों लोग कंगाल हो
- 27:42जाएंगे। आज 80,00,00,000 जनता पांच किलो
- 27:48अनाज की जीने लगी है, यह कोई गर्व की बात नहीं।
- 27:57ऐसे विश्व का योद्धा बनाओ। कैसे भूखों मार्क है और धीरे धीरे
- 28:11क्या होगा? कुछ लोग रह जाएंगे जिनके पास पैसा
- 28:14रह जाएगा। कुछ इनती गिनती के लोग।
- 28:20यही 20 50,00,000 1,00,00,000 उनके पास हिंदुस्तान की सारी
- 28:26संपत्ति हो गयी। अब सुनिए बात को अच्छी तरह से
- 28:29सुनिए और उसे बार बार सुनिए। फिर जब इनती गिनती चुनती के लोग
- 28:39रह जाएंगे, पैसे वाले और जागीरदार रहेंगे सारी धरती के मालिक ये तो
- 28:47उनके पास होगी तो बाकी सारे बेचारे हो जाएंगे।
- 28:59बाकी सारे बेचारे हो जाएंगे और जब इलेक्शन आएँगे तो इनसे कहेंगे लाओ
- 29:09जो हमने दिया उसको लाओ, हमने अब वोट लेना है।
- 29:14ऐसे लोकतंत्र भी बना रहेगा। पता भी ना चलेगा कि तानाशाही आ
- 29:21चुकी है। अघोषित तानाशाही कैसे होती है, यह
- 29:25तो मैं समझाता हूँ मिस्टर गोल वर्कर के साथ बड़े बुनियादी दिनों
- 29:33से जानते। पुरातन जन्म से जानता हूँ मैं
- 29:38मिस्टर गोल वर्कर क्या चाहते थे? यही जो आज हो रहा है समस्त जनता
- 29:50की जेबों में से पैसा निकालो, कुछ लोगों के रखो।
- 29:58और मैंने पहले का हिंदू धर्म एक दुख पढ़ा है, हिंदू धर्म एक
- 30:05कल्पना की तस्वीर बन गया है। तस्वीरें क्या लगाईं इसने?
- 30:13खुद ही कल्पनिक हो गया। तस्वीरों को हम मानते मानते
- 30:20अनुमान तो न हो पाया, तस्वीर ही हो गया।
- 30:27इसलिए मैं कहता हूँ मुस्लिम बहुत अच्छा है।
- 30:34क्योंकि कम से कम उसने तस्वीर नहीं बनाए।
- 30:40गलती वो भी खा गया। उसने अल्लाह को भी माना।
- 30:49ला इलाहा। हल्ला आगे का शब्द जो है मोहम्मद
- 30:59रसूल अल्लाह सिर्फ एक मोहम्मद हैं जो उसके रसूल हैं, नबी हैं यहाँ
- 31:06फिर यह धर्म भी गलती का है। ईश्वर एक है, क्या ये कहना
- 31:13सफीशियंट नहीं था? अल्लाह एक है और वो ही पूजनीय है
- 31:21और वही पूजने के योग्य है। क्या यह काफी न था, लेकिन आगे का
- 31:35शब्द मोहम्मद उर रसूलल्लाह इसने भी मूर्ति बना ली?
- 31:46माना मिट्टी कि नहीं बनाई, माना चित्र नहीं बनाई लेकिन नाम से बना
- 31:55लिया मोहम्मद अब ये ईश्वर को भूल जाएंगे।
- 32:02ईश्वर अल्लाह इसको भूल जाएंगे, मुहम्मद को याद रखेंगे क्या जरूरत
- 32:10है मुहम्मद के जब नानक कहते हैं, एक ओंकार?
- 32:20तो नानक इसलिए कहते हैं कि नानक की जरूरत खत्म हो जाए, अल्लाह ही
- 32:26तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो, वाहे गुरु ही तुम्हारे लिए सतनाम ही
- 32:32तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो। कृष्ण कहते हैं तू मेरे में सो
- 32:40जा, बड़े शानदार बात बोलते हैं लेकिन उस सतल से बोलते हैं जहाँ
- 32:47वो परमात्मा हैं और तुम कृष्ण से झपट का है।
- 32:55मौर्य मुकटधारी। उसकी पूजा करने लगाएं।
- 33:00कब कहा कृष्ण कृष्ण के शब्दों का अर्थ गलत ले लिया गया है।
- 33:16योग अक्षेमं वहाँ में हम। अनन्या चिंतितों मान यह जना
- 33:23परिभास्य तेशाम नित्य वक्ता नाम योग अक्षेमं महामय मैं करता हूँ
- 33:33उसकी जरूरतें पूरी, मैं भी बोलेंगे ये बात ध्यान रखना।
- 33:40लेकिन मेरे इस ढांचे से चिपट में छाप ये भूल गए।
- 33:44कृष्ण मैं तुम्हें याद करा देता हूँ कृष्ण जो बात भूल गए तो मैं
- 33:53याद करा देता हूँ, बिलकुल वही शब्द मैं बोलेंगे।
- 33:59जब कृष्ण ने पूछा क्योंकि उसी तल पे पहुँच गया और लोग मुझे पूछते
- 34:05हैं क्या ये संत लोग एक दूसरे की नकल करते हैं जो सेम शब्द बोलते
- 34:11हैं? क्या ये दोहराव नहीं है?
- 34:13नहीं यह सेम शब्द का प्रयोग करते हैं।
- 34:18क्योंकि सेम स्थान पे पहुँच गए हैं इन सब ने वही एक नजारा देखा
- 34:25तो आनंद को आनंद ही कहेंगे खुशबू को खुशबू कहेंगे।
- 34:32इन्होंने नकल नहीं की किसी ने भी, न नानक ने कबीर की, न कबीर ने
- 34:37शंकर के। न शंकर ने कृष्ण ये सभी उस एक
- 34:45स्थान को देख लिए और एक भाषा बोलते नजर आ रहे हैं, अलग अलग ढंग
- 34:55से प्रकट कर रहे हैं। लेकिन इशारा इनका एक ही है।
- 35:03बाबा नानक पंजाबी में बोलते हैं। गुरु मुख्य में एकंकार ऐसा इसे
- 35:13अलग ढंग से व्याख्या करते हैं। सिर्फ मैं ही उसका प्यारा पुत्र
- 35:20हूँ, एक कृष्ण की दूसरी भाषा है। जैसे कृष्ण कहता है मेरी शरण में
- 35:26आ जाओ अह हम तो आम सर्वाबा पे भयो, मोक्ष स्वामी माँ चुजा मैं
- 35:32तो मैं मुक्त कर दूंगा। ऐसे ही एक शर्त में कहते हैं मैं
- 35:37ही प्यारा पुत्र हूँ, ओनली दे विल एंटर इन मैं गॉड्स किंगडम विल बी
- 35:44इनोसेंट जस्ट लाइक ए चाय। मेरे परमात्मा के लक्ष्य में वही
- 35:50लोग प्रवेश पाएंगे। जो बच्चों के समान बच्चों की तरह
- 35:57मासूम इनोसेंट कहने का ढंग बदल गया।
- 36:05ऐसा अपने आप को उसका प्यारा पुत्र कहते हैं।
- 36:10कृष्ण अपने आप को। वो ही बतलाते हैं मैं वो ही हूँ
- 36:17लेकिन एक तल पर जाकर तुम यह समझोगे, ये दोनों बातें समय आवीर
- 36:23भी वो ही बोलते हैं। एक हिसाब से देखा जाए तो बुद्ध भी
- 36:30वो ही बोलते हैं। चाहे वहाँ नहीं पहुंचे, उसका
- 36:36दर्शन तो कर लिया ही होगा होगा श्वेत में इसलिए बोलता हूँ कि जो
- 36:43आत्मा बोध तक जाता है, उसके सामने के जीना सब पर नजर आता है और उसके
- 36:49पीछे सब परमात्मा झलकता है। अरे यू फ्लेक्शन ऑफ गॉड तुम इसे
- 36:57रिफ्लेक्शन ऑफ गॉड भी कह सकते हो। वैज्ञानिक मेरी भाषा को छितरा
- 37:02समझे उस जी ने से परते के पीछे। कोई दिखता है प्रेम की मूर्ति?
- 37:12वहाँ से झरझर आती हुई प्रेम के तरंगें साख दिखते हैं तो ऐसा कैसे
- 37:21हो सकता है? उन्होंने बहुत बार पहले भी कहा कि
- 37:25वो तो वहाँ पहुंचे तो नहीं। लेकिन देखा तो जरूर होगा कि कोई
- 37:32रहस्य है। सृजना को चलाने वाला कल ही मैं एक
- 37:36विकास से दिव्यकृति अगर सुनना है तो उस व्यक्ति को सुन लिया करो।
- 37:40अगर सारे लोगों में ही सुनना है आपने, मैं कहीं कहीं इसको
- 37:47कन्डेम्पी करूँगा। जहाँ सांचे में फिट नहीं होगा,
- 37:54लेकिन अगर सुनना ही है इस व्यक्ति को सुन लिया करो, यह सत्य के काफी
- 38:00करीब है। व्यक्ति की आवाज़।
- 38:10जैसे जैसे तुम तल बदलते हो, वैसे वैसे तुम्हारी आवाज़ में माधुरी
- 38:19आना शुरू हो जाती है, मैं भी आपको किसी वक्त तल्खी में नजर आऊंगा?
- 38:26बिल्कुल ऐसे ही जैसे राम तल्खी में ए समुद्र देख हमने 3 दिन से
- 38:35बिना कुछ खाये किये तेरी बड़ी मेहनत की तुने रास्ता नहीं दिया
- 38:41तो? परिणाम भक्त ये तल्खी है?
- 38:49और तल्खी के बिना छोटे भाई लक्ष्मण कहते हैं भैया राम कुछ
- 39:01लोग। दुष्टता की भाषा को समझते हैं।
- 39:07देखिये छोटा है लक्ष्मण बड़े भ्राता को समझा रहा है क्षमा
- 39:13कीजिये प्रभु मैं नाचिस आपका छोटा भैया।
- 39:25कुछ लोग होते हैं जो दुष्टता से ही काबू में आते हैं।
- 39:30अतः निकालो अपना अग्निवान और सारे समुद्र को सुखा जब उसने कहा।
- 39:44हे प्रेम की साक्षात वात्सल्य की साक्षात मूर्ति, मेरे बड़े भैया
- 39:49राम मेरी बात की तरफ गौर फरमाव कुछ लोग दुष्टता से समझ आते हैं।
- 40:00हमने मेहनत तो बहुत कर ली, देखिये 3 दिन से इसकी प्रार्थना कर रहे
- 40:04हैं, लेकिन कुछ नीचे स्वभाव के होते हैं।
- 40:10जब तक उनसे नीचता का बर्ताव न किया जाए वह काबू में आने को नहीं
- 40:16होते। मेरे इन शब्द का गहरी अर्थ ले
- 40:19लेना, मैं भी समझाऊंगा किसी वक्त नीचे व्यक्ति से निचतता की बात ही
- 40:25करनी होती है। मार देना इससे बड़ी निचता और क्या
- 40:32होगी? और भगवान राम भी निचता करते हैं।
- 40:36पहले नीचे वाली को मार के आते हैं और छुप के मार के आते हैं।
- 40:42हालांकि छुप के मारना कोई कृत्य है।
- 40:45कोई शब्द कृत्य नहीं है लेकिन छुप के मारते हैं क्योंकि नीचे
- 40:50व्यक्ति को अगर धोखे से भी मार दिया जाए तो भी कोई पाप नहीं है।
- 40:57न हन्नते अन्य माने शरीर अच्छी तरह से जानते हैं।
- 41:01कृष्ण और कृष्ण शिशु पालिका वध कर देते हैं।
- 41:06नहीं रुकेगा 100 बार इसने गाली निकाल दी और मैंने बुआ को वरदान
- 41:11दिया था 100 अपराध इसके क्षमा कर दूंगा मैं।
- 41:17लेकिन उससे आगे नहीं और चेताते रहते हैं।
- 41:21शिशु उपार 90 हो गए, शिशु पार 99 हो गए।
- 41:30अब देखिए मेरा वचन पूरा होने को है।
- 41:34लेकिन शिशु उपहार रुकता नहीं तो भगवान क्या कसें?
- 41:44वहीं व्यवहार करते हैं तुलसी दास लिखते हैं भला भलाई पे लहे नीच
- 41:50लहाइयां नीच सुदा सराई अमृता। गर्ल्स सारा यह महेश विष की
- 42:01सराहना है कि उसे मार दिया जाए और अमृत की सराहना है कि उसे अमृतत्व
- 42:08दे दिया जाए। उसका काम है नीच को निष्ठा से मार
- 42:16दो। और साधु को चरणों में बिछ जाओ,
- 42:25समर्पित हो जाओ, भगवान होना चाहते हो तो समर्पित हो जाओ।
- 42:35दुष्ट को मारना चाहते हो तो छुप के भी मारना पड़े।
- 42:45तुम निष्ठा की बात करते हो, कहने की बात करते हो, भगवान राम तो कर
- 42:49देते हैं, हमारे इष्ट भगवान राम कर देते हैं।
- 42:56उसका वंश नष्ट कर देते। एक लखपूत सवा लख नाति जिसके घर
- 43:05दिया न पाती, इतना विनाश कर दिया जनता पुत्र के समान ही होती।
- 43:16नाती जिसके घर दिया न पाती तो नीच के साथ निशिता का व्यवहार करना
- 43:27अवश्य हो जाता है। मैं कहता हूँ मेरे इन शब्दों को
- 43:33गार बार सुनना क्योंकि सब कुछ अपने भीतर जाकर नहीं मिला करता।
- 43:42बाहर कैसे व्यवहार करना है वो भी तो मैं सीखाता चलो जाता जाता और
- 43:47जैसे ही ऐसे मैं तलबद लूँगा। मेरी आवाज़ बदल जाएगी, बुद्धि में
- 43:56होऊंगा तो तल्खी आ जाएगी, तरक आ जाएगा, हृदय में होऊंगा तो प्रेम
- 44:02बरसेगा, वो बढ़ेगा, घृणा भी पढ़ सकती है।
- 44:07लेकिन जब मैं अपने अंत में उतर गया, वहाँ तो परम शांति है, मान
- 44:15है वहाँ तो बोल भी ना पाऊंगा। कुछ करना तो बहुत दूर की बात है,
- 44:22वहाँ तो बोल भी ना पाऊंगा। वहाँ तो परममान हो जाऊंगा तो
- 44:29लक्ष्मण कहते हैं हे भैया प्रार्थना तो बहुत कर ली, लेकिन
- 44:34कुछ नीच लोगों से नीचता का व्यवहार करना आवश्यक हो जाता है।
- 44:39अतः तुम अग्निपन को निकालो, भईया। और तब तक क्षण भगवान राम अग्निवान
- 44:46को अनकार लेते हैं और त्राहिमाम त्राहिमाम कह के समुद्र चरणों में
- 44:51कर जाता है तो कहानी है लेकिन आपको बहुत बड़ी सीज देखे जाती है।
- 45:01दुष्ट को क्षमा मत करना। क्योंकि दुष्ट को क्षमा करोगे तो
- 45:08उसकी दुष्टता की बढ़ जाएंगे, हिम्मत बढ़ जाएंगे अभी जूता
- 45:20प्रकरण कांडो। हमारे शीर जाए पर अबोध हैं, बुद्ध
- 45:30धर्म के अनुयायी हैं और बुद्ध धर्म बड़ा सहन शक्ति वाला धर्म है
- 45:37जूता उछाला। जज साहब ने माफ़ कर दिया, बस मैं
- 45:45किसी बात कहूंगा, न्याय नहीं किया इस कुर्सी पे बैठने वाला बुध न
- 45:55बनकर। मेरे इन शब्दों को नोट कर लेना,
- 45:59न्यायकारी बनें, अरे बहुत से शिष्य हैं, जो जज हैं उनसे मैं ये
- 46:07कहना चाहूंगा तुम अगर मेरा अनुसरण करते हो तो बाबा की बातों को हो
- 46:15जाना। बाबा के स्वभाव को भूल जाओ तुम
- 46:20न्यायविद हो जब कुर्सी पे बैठते हो न्याय करना, संविधान की रक्षा
- 46:26करना, मेरे शिशु तो घर पे आके व्यवहार करना, रस्ते में व्यवहार
- 46:33करना। मित्रों, प्रेमी जनों से व्यवहार
- 46:36करना और बात रख नया मूर्ति की कुर्सी के ऊपर बैठकर बुध मत हो
- 46:45जाना। बुध तो क्षमा ही करें।
- 46:49नए मूर्ति की कुर्सी के ऊपर बैठकर तुम न्याय करना।
- 46:54न्याय जो भी कुछ कहता है वो करना और जब तुम कुर्सी से बाहर आ जाओ
- 47:02सांजरे तुम घर पर थे, तुम बुद्ध हो जाना क्या तकलीफ है घर बार
- 47:12वालों से मिलने जुलने वालों से? मित्र प्रेमी बंधुओं से बुद्धि
- 47:17जैसा व्यवहार यथास्थिति, यथा वातावरण तुम व्यवहार करना, लेकिन
- 47:30यह गलत हुआ, मेरे दृष्ट। मुझे आपत्ति कोई नहीं आपत्ति है
- 47:38तो इतनी है कि समझा दूँ सी जे आई की कुर्सी पर बैठकर कोई व्यक्ति
- 47:45सर्वशक्तिमान यह सर्वज्ञ नहीं हो जाता।
- 47:49ये नहीं कि सब कुछ जानता है कई बार।
- 47:52सीजेआई को भी समझाना पड़ सकता है, क्योंकि संत से बड़ा सर्वज्ञ कोई
- 47:59तुम न्यायाधीश की कुर्सी में बैठे तो सबसे पहले शब्द तो तुमने ली
- 48:08संविधान को बचाने? सबसे पहले आपका फर्ज बनता है
- 48:16संविधान को बचाने और संविधान को बचाने का अर्थ क्या होता है?
- 48:19आप अच्छी तरह से न्याय कर जस्टिस लेकिन क्या आप निर्णय किया?
- 48:33न्याय किया या कुर्सी पर बैठ के बुद्धत्व का पालन किया मत भूलों
- 48:41के आप बौद्ध हैं बौद्ध नहीं हैं। और जब इस कुर्सी पर कोई बैठता है,
- 48:49ना बोध रहता है, ना हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई रहता है और
- 48:54अगर कुर्सी के ऊपर बैठ कर भी तुम बोध रह गए तो फिर तुमने कुर्सी के
- 48:59साथ भी पक्षपात किया, फिर तुमने कुर्सी के साथ भी न्याय नहीं
- 49:06किया? मैं इतना ही समझाना चाहूंगा
- 49:14क्योंकि तुम सूचनाओं को संविधान को क्षेत्र से जानते हो और मैं उस
- 49:20स्तर पर उतरा हुआ खिलाड़ी वहाँ की बात।
- 49:26जहाँ तक बहुत गए, मैं ही तुम तक पहुंचा सकता हूँ और कोई नहीं या
- 49:32वो पहुंचाएगा जो स्थल पर चले। खैर लक्ष्मण ने कहा, भईया अग्नि
- 49:41बाण उठा अग्नि बाण उठाया और साग के साथ।
- 49:45त्राहिमाम त्राहिमाम होने लगी, तुम ज़रा न्याय करो।
- 49:51अगर आप अपनी कुर्सी से ही न्याय नहीं कर पाते, अपने आप से ही
- 49:55न्याय नहीं कर पाते तो हमें क्या खा कि न्याय दोगे?
- 50:01फिर आप से न्याय की उम्मीद रखना वाजिब नहीं है।
- 50:06वे वाजिब है। आप चाहे किसी भी पदवी पर हो,
- 50:12लेकिन आपने अपना कर्तव्य का निर्वाहन नहीं किया।
- 50:19कर्तव्य का निर्वाणता संविधान की रक्षा और संविधान करता है न्याय।
- 50:24क्षमा नहीं करता, इसलिए मैं सदा ही कहता हूँ राष्ट्रपति जैसे पद
- 50:30राज्यपाल जैसे पद समाप्त कर देने चाहिए।
- 50:33यह बोझ हैं कैसे कोई मानव 1000 गलतियों का पुतला भगवान की तरह?
- 50:42निर्दोष और निर्मल हो सकता है यह भी तुम्हारी मान्यता है।
- 50:47किसी को राष्ट्रपति बना दिया जाए। क्या उसके भीतर की वह जो कमियां
- 50:53हैं, जो वासनाएँ हैं? जो इच्छाएं हैं, जो कल्पनाएँ हैं?
- 50:59क्या कुर्सी में बैठकर समाप्त हो जाएंगी?
- 51:01नहीं हो जाएंगी। इसलिए राज्यपाल और राष्ट्रपति की
- 51:05यह कुर्सियां समाप्त कर दी जाएं। गैर जरूरी हैं प्रधानमंत्री ही
- 51:12न्यायकारी हो, प्रधानमंत्री के हाथ में ही सब कुछ हो क्योंकि वह
- 51:18जनता का चुनना हुआ है। राष्ट्रपति जनता का चुना हुआ नहीं
- 51:23है। तुमने पूछा वीडियो बहुत लम्बी हो
- 51:30जाएगी। खैर मूर्तियाँ कब बनाई गई?
- 51:43मूर्तियों से तुम ये संदेश ले सको हमारा लक्ष्य क्या है, हमने कहाँ
- 51:53जाना है, कहाँ तक जाना है, किसने पहलवान बनना, किसने जज बनना?
- 52:02किसने आयुष बनना किसने आज भक्त बनना, किसने भक्त बनना, किसी ने
- 52:09सूर्य भी होना, किसी ने बलिष्ठ बनना, अपने अपने आइकॉन स्थापित कर
- 52:15लो और जिसने जो आइकॉन स्थापित कर लिया, वह उसी की मूर्ति निकाल
- 52:20लेता है। हम बहुत से घरों में संतों की
- 52:26फोटो लगाते हैं और जहाँ संतों की फोटो लगाई वहीं को गर्म करते हैं
- 52:33तो संतों का अपमान हो गया। मैं जब नहीं सता आपस में बैर रखूं
- 52:46जहाँ बाबा नानक की तस्वीर है, बौद्ध की तस्वीर है, जहाँ कबीर की
- 52:53तस्वीर है, रैदास की तस्वीर है। वहाँ तुम नफरत करना सिखाओगे, वहाँ
- 53:08तुम आग लगाना सिखाओगे, वहाँ तुम सरकारी प्रॉपर्टी नहीं है।
- 53:13ये जनता की प्रॉपर्टी है। पब्लिक प्रॉपर्टी।
- 53:18कैसे बस को फूंक दोगे, ट्रक को फूंक दोगे, गाड़ी को फूंक दोगे,
- 53:22तुम्हें पता है यह राजनीतिज्ञों के जेब से आई हुई बस नहीं है।
- 53:29यह जनता के कर से बनाई हुई या तुम अपनी ही संपत्ति को आग्रह कर रहे
- 53:34हो। यू आर कमैटिक सूइसाइड?
- 53:38तुम आत्महत्या कर रहे हो गुस्सा तुम्हें है सरकार के ऊपर आग लगा
- 53:48रहे हो, पब्लिक प्रॉपर्टी आइकॉन। मूर्तियाँ इसलिए बनाई गई थीं,
- 53:57इसका यह मतलब था तुम जैसा बनना चाहते हो को चुन लो।
- 54:02अपने दिमाग के हिसाब से, अपनी प्रज्ञा के हिसाब से, अपनी
- 54:06इच्छाओं के हिसाब से अपनी बात सुनाओ के हिसाब से उसकी ही मूर्ति
- 54:12लगा लो। बहुत से घरों में एक्टर
- 54:17एक्ट्रेसेस की फोटो होती है, वो वैसा ही बनना चाहती है तो कोई
- 54:24आपत्ति नहीं है। तुम जैसा होना चाहती हो, उसकी
- 54:27मूर्ति दिखा दो। मूर्तियाँ इसीलिए बनाई गई थीं
- 54:30प्रेरणा के लिए फॉर इंस्पिरेशन और ये तुम्हें लगातार इंस्पायर
- 54:36करेंगे घर से बाहर जाओगे, इनको देखकर जाओगे बाजार से लौट के आओगे
- 54:44प्रथम दर्शन इनके करोगे? रहस्य लोगों ने घर के बाहर चौखट
- 54:52के ऊपर अपने ईस्ट की तस्वीरें लगाई होती है।
- 54:55अच्छा घर से निकलो तो याद आए घर में प्रवेश करो तो याद है?
- 55:08याद आये तो मैं तुम्हारा लक्ष्य तुमने पहुंचना कहाँ है, तुम्हारा
- 55:15गोल क्या है, तुम्हारा लक्ष्य क्या है?
- 55:18इसलिए मूर्तियाँ बनाई गई थीं और यह भी ध्यान रहे मूर्तियाँ से चपट
- 55:23में। हनुमान जैसा बनना है, हनुमान से
- 55:27नहीं चिपटना, है, बस हनुमान आपके लिए आईकॉन होगा बुद्ध जैसा बनना
- 55:37है बुद्ध का स्वभाव अपना लो। बुद्ध के किए हुए कर्मों को याद
- 55:45करो, वैसे हो जाओ बुद्ध की मूर्ति से मत छिपो और बुद्ध की इसीलिए
- 55:52बुद्ध ने कहा मेरी मूर्ति मत बनाना, लेकिन जितनी मूर्तियां?
- 55:59भगवान बुद्ध और शंकर की बनी शिव की पिंडलियाँ उतनी कुछ भी नहीं
- 56:04बनी। शंकर का पिंड तो एक सिंबल था।
- 56:11चलेगा लेकिन बुद्ध की मूर्ति गलत जो मूर्ति पूजा के विरुद्ध है।
- 56:19उसकी मूर्ति को तुम बना रहे हो। 1 दिन पूजा भी करो, फिर बुद्ध का
- 56:25कथन विकृत हो गया। बुद्ध ने जो कहा उसे तुमने माना
- 56:29नहीं, आज यही समाप्त कर दें। बाकी।
- 56:37अगले प्रवचन में देखा जाए वह तंत्र का सूत्र?