Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Apr 25 - मैंने आपकी Biography पढ़ी,सभी बातें कपोल कल्पना नज़र आती हैं! कृपया बताने का कष्ट करेंगे?
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- 0:06दीन दयाल शंकर बाबा जी प्रणब। मैं आपके आश्रम में आया था, वहाँ
- 0:31से एक किताब खरीदी। आश्रम वालों ने कोई धन नहीं
- 0:44मांगा। वह किताब मुझे निशुल्क ही प्राप्त
- 0:48हुई आपकी बायोप्राक्षी मैंने वो पढ़ी बाबा।
- 1:09और आपको कोई परेशानी न हो। एक बात कहूं, मैंने पांच चार को
- 1:23नहीं पढ़े थे, जहाँ आपकी ट्रेन की इंसिडेंट की घटना आई।
- 1:37मैंने यहाँ लाकर पुस्तक को बंद कर दिया और एक तरफ फेंक दिया बाबा ये
- 1:56कौन है जिसने लिखी किताब? और यह लिखने वाला रमेश कौन कौन
- 2:12उल्लू का पट्ठा है जिसने ये किताब लिखी।
- 2:25सभी बातें कपोल काल्पनिक नजर आती है।
- 2:36कृपया बताने का कष्ट करेंगे हाँ। पुत्र वह उल्लू का पट्ठा मैं और
- 2:57ये किताब लिखी नहीं गई। बोली गई है और मैंने ही खोली तो
- 3:13वह उल्लू का पट्ठा मैं हूँ। चिंता मत लेना पुत्र, मैंने जैसा
- 3:35गधा अनुभव किया वह बोला अच्छा है। के आश्रम वालों ने आप आपको
- 3:50निशुल्क यह किताब देखी। अब आप इसको मज़े से जला सकते हो,
- 4:05बहाल सकते हो। गंगा में बहाव के गंदे नाले में
- 4:11बहाव लेकिन वो उनमें। मेरी ही बोली गई जीवन की वो तमाम
- 4:31घटनाएं इसको किताब का रूप दे दिया गया।
- 4:42उनकी कोई गलती नहीं। मेरा अनुभव जैसा मैंने देखा और
- 5:02पुत्र तुमने कहा कि ट्रेन की इंसिडेंट।
- 5:09एक व्यक्ति को निचले पायदान से उठा के प्लेटफार्म में भटक देना
- 5:16क्या ऐसा होता है? क्या यह है मूर्खता और मूर्खता की
- 5:23बातें नहीं हैं? हाँ, बिल्कुल।
- 5:29बड़ी मूर्तापूर्ण है 1982 83 की बात है, 83 से भी बात की होगी।
- 5:47शायद मैंने कुछ सिद्धियां की? श्मशान में बैठकर और उनका
- 6:01प्रदर्शन किया करता था। अज्ञानी व्यक्ति प्रदर्शन ही किया
- 6:07करता है। कोई आइसक्रीम मांगता सर्दी में
- 6:20परी शक्ति कोई कहता नोटों की बारिश करवा दो, कोई कहता बाबू
- 6:39काजूगरा कोई कहता मेरे पुत्र नहीं।
- 6:52कोई कुछ कहता, कोई कुछ कहता और मैंने जो सिद्धियां कर रखी थीं,
- 7:04उनसे मैं उनको यह चमत्कार दिखला दी थी।
- 7:14ये कलाएँ हैं। लेकिन कुछ लोग हाथ की सफाई को
- 7:21कलाओं का नाम दे देते हैं। तुमने पुत्र आगे बंद कर दिया,
- 7:30अच्छा हुआ। मैंने आश्रम से पूछा यहाँ कोई इस
- 7:50नाम का व्यक्ति किताब ले के बाबा पता नहीं कौन ले जाता है, हम कौन
- 7:56सा नाम पूछते हैं, निशुल्क बढ़ती है।
- 8:04कोई श्रद्धापूर्वक दे जाए इंकार नहीं करता है।
- 8:11सिर्फ कुछ नहीं, मैं नहीं करता। और अच्छा किया कि तुमने कुछ मुवजा
- 8:28नहीं दिया, भली भाई अन्यथा मुश्किल हो जाता।
- 8:45तुमने कहा कि टीन की इंसिडेंट आते ही मैंने बंद कर दिया, झुंझलाया
- 8:52और फेंक दिया, किताब अच्छा किया। अब इसको नाले में पटक को गंदे
- 8:59में। मुफ्त की चीज़ ऐसे ही लगा करती
- 9:12है। एक व्यक्ति चौराहे में खड़ा तेल
- 9:21बांट रहा था, सरसों का ड्रम भरा हुआ था।
- 9:30वहाँ से कोई आप जैसा गुजरा हो कहाँ ये क्या हुआ यहाँ तेल बढ़
- 9:40रहा है क्या कीमत है भाई? कोई कीमत नहीं निशुल्क है।
- 9:51अब उस विचारे के पास कोई बर्तन नहीं।
- 9:55उसको क्या पता ऐसा हो रहा है चौराहे में खड़ा यका यक के सामने
- 10:03आके। और पूरा ड्रम भरा 200 लीटर का
- 10:12कहता है भाई मेरे पास कोई बर्तन तो है नहीं, वो बांटने वाला कहने
- 10:20लगा, अरे वो रख। अगर बर्तन ही होता तो सबसे पहले
- 10:28हम घर पे ना बिच जाते थे तो उसने सोचा मुफ्त बढ़ रहा है और तो कोई
- 10:45बात नहीं ना का लिफाफा है। ना कोई बर्तन है भोलाएं कमंडल भी
- 10:54तो नहीं है और कहते हैं अगर सरकार मुफ्त का कुछ भी बांटे तो ले लेना
- 11:08चाहिए। अर्जा क्या है तू सुन कहा मेरे
- 11:15पास और तो कुछ नहीं जी उती है उसने की जूती उतारी और जूती उतार
- 11:27के उसने बोला अरे भाई, बर्तन तो कोई है नहीं।
- 11:31किसी को कर दे, ज्योति को कर दे तिल्ली वाली ज्योति मेरे पिताजी
- 11:39कहा करते थे के कुण्डी वाली मूंछें और तिल्ली वाली ज्योति
- 11:47कुण्डी वाली। ये बदमाश लोगों की निशानी है।
- 11:51पुत्र अन्यथा मत लेना, बाद को कुण्डी वाली मूंछें और कुण्डी
- 12:02वाली ज्योति उसमें का बड़े काम आ जाती है।
- 12:07उसने कहा भाई इस समय डाल दो, सरकार मुफ्त बाँट रही है तो उस
- 12:18भाई ने सारी जूती भर दी, अरे वो डाल दे भाई अभी गुंजाइश है नाकों
- 12:26नाक भर दिया। वह लेके चला अब जूती थोड़ा सा हील
- 12:34था। उसमें अब लंगड़ा की चली लंगड़ा की
- 12:41चली है ध्यान जूती में पड़े तेल की तरफ।
- 12:50बिखर न जाए कैंडल न जाए सारा ध्यान उधर हो गया लकड़ा के चलने
- 13:01लगा डच, डच। और ध्यान तो युति के अंदर तेल में
- 13:12था, वह इम्बैलेंस होने के कारण वह
- 13:27कृपया जुति भी गिर गई, वह भी गिर गया।
- 13:38हाथ में फ्रेक्चर आ गया। सड़क पे और भी बंद करके आ थोड़ा
- 13:45सा और भी नुकसान हुआ चोट फिट आई, लोगों ने उठाया उसे देख।
- 13:53ये क्या? अरे जूती में तेल जल्दी से डॉक्टर
- 13:59के पास ले के गए उठा के भले आदमी भी संसार में होते हैं।
- 14:15डॉक्टर ने पूछा क्या हुआ, कुछ हो गया?
- 14:20हाथ नहीं हिल रहा। अरे भाई फ्रैक्चर है तो क्या कर
- 14:29रहा था? कहते डॉक्टर साहब क्या बताऊँ?
- 14:35मुफ्त वालों का यही हाल होता है। तुम्हारी बात तुम्हें समझ गया,
- 14:47पुत्र इसलिए फेंक दी। कि तुम्हें नहीं हुआ और जीतने भी
- 15:03ये नास्तिक हैं? कटाक्ष करते हैं, नहीं होता ऐसा
- 15:12इसका मतलब ये नहीं कि नहीं होता। मार्कर्स कहता भगवान नहीं होता
- 15:23प्यार, वह कहता कोई अक्शैन कार्यक्षन नहीं होता, बस मैं भूतस
- 15:30से देहस्य पुनर आगमनम कुतह। याची वेद सुखी जी वेद परिणमकृत व
- 15:42ग्रितम्पी नृत्य। थोड़ा बोलने में चोक हो जाती है
- 15:55पुत्र बस तुम्हारे साथ ऐसा नहीं हुआ होगा, ये पक्का है और जितना
- 16:08भी नास्तिक वाद है। उनके साथ ये हुआ नहीं कि आपको मूल
- 16:17बेसिक रूट बता देता हूँ। जिनके साथ जो हुआ नहीं वो होता
- 16:25नहीं। ये सिद्धांत है उनका।
- 16:31एनलाइटनमेंट हुआ नहीं तो होता नहीं, मैंने कहा फिर रामकृष्णा
- 16:39परमहंस को मिर्गी का तो। एक्टिंग फैक्ट तो वो करता नहीं
- 16:49था। सिधरा सा आदमी गदाधर बड़ा प्यारा
- 16:53व्यक्तित्व था और फिर एक्टर तो फीस लेते हैं।
- 17:08भागो तो सप्ताह की कथा कहने वालों की तरह उनके मकान में जाओ।
- 17:16बकायदा फिर से की होगी इतनी लगेंगी भाई।
- 17:24इतने दिन का होगा ये एक्टर, लोग हैं पहला सूत्र लिख लीजिए जो भी
- 17:44व्यक्ति कहता है। अपना अनुभव कहता है।
- 17:52दूसरी का अनुभव वह कह ही नहीं पाता।
- 17:57ये पहला सबक आज तुम्हारे साथ जो हुआ नहीं।
- 18:07वो होता नहीं, यह बेसिक मान्यता है और तुम तुम्हारी मान्यताओं के
- 18:21सिर पे जीते आओ। वह उल्लू का पट्टा नहीं, मेरा
- 18:40पुत्र मेरे पास है तथा पापा। परमात्मा की डेफिनिशन कैसे करूँ?
- 18:56मैंने कपुत्र हू कैनट डू फाइन? अनेबल टु डिफाइन जिसकी कोई
- 19:15परिभाषा नहीं जो परिभाषित किया नहीं जा सकता।
- 19:24तुम बाबा पापा। क्या तुमने देखा नहीं, मैंने कहा
- 19:30नहीं और बेटा तुम भी उसे देखने की चेष्टा मत करना अन्यथा हर कमेंट
- 19:50करते थे। बाबा एक बार कह दो, विष्णु जी
- 19:59होते हैं तुम्हारी मान्यताओं को। भोजन देने वाला व्यक्ति तुम्हारे
- 20:10लिए कुछ हो जाता है तो तुमने ठीक किया और अगर कहीं तुमने सारी
- 20:25पुस्तक पढ़ ली है भाई कपूर ही कपूर है।
- 20:34एस्टर ट्रैवलिंग और मैं जाने क्या कुछ कबाड़ा?
- 20:40जो तुम्हारे साथ हुआ वो सब इसमें भरा पूरा?
- 20:49तो तुम निश्चय ही इंटला के हाथ में अमिता मेरा बोबरा बोल देते
- 20:55हैं, उल्लू के पाठ हैं ये सब क्या क्यूँ बकवास लगा रखी है?
- 21:04मैं कह रहा था 8283 के करीब 84। तब तक मुझे वो घटना न घटी थी
- 21:16जीसको मैंने एनलाइटनमेंट के रूप में आपसे साझा किया, तब तक मैं
- 21:26ख्याति ही चाहता था। और जो व्यक्ति कुछ चाहता है वह
- 21:33ज्ञान नहीं है कुछ भी चाहता है और अगर तुम अभी परमात्मा को चाहते
- 21:45हो। तो समझ लो अभी परमात्मा मिलान मैं
- 21:53अक्षर कहा करता हूँ जो कुंभ स्नान जाती है।
- 22:03उन्होंने पाप किया होता है, जानें अनजान उनके भीतर बड़ा भारी होता
- 22:10है तो फिर आपके महापुरुषों ने आपको रास्ता से खिला दिया जाओ,
- 22:18पापों को दो दो गंगा तैयार। आपके पापों को समझ लो, फिर चाहे
- 22:27वहाँ मर ही जाओ तो कोई बात नहीं। पुत्र मुक्ति मिल जाएगी और मोक्ष
- 22:34जी तो चाहेंगे। आदमी को जीवन की अंतिम पराकाष्ठा
- 22:40मिल गई। और क्या चाहिए व्यक्ति को
- 22:57तुम्हें चमत्कार दिखाता? इसमें ज़रा भी हाथ की सफाई नहीं
- 23:02थी, इसलिए मैं कह दूँ चमत्कार दो तरह एक हाथ की सफाई।
- 23:14दिमागी कॉन्सन्ट्रेशन और एक साधना के द्वारा कमाई गई सच मैंने शमशान
- 23:26साधना की। जिसका वर्णन इसी बायोग्राफी में
- 23:30आएगा और सात सुखिस्म की मैंने सिद्धियां की।
- 23:41तो मैं लोगों को दिखाता क्या? पर्पस।
- 23:49मान सम्मान एकत्रित करण और कुछ चम्मचकार दिखलाने वालों के मन
- 23:59में, जबकि वह गहरे नहीं गए होते। लेकिन अगर किसी दिन जाएंगे तो
- 24:07पाएंगे कि वह सिर्फ मान प्रतिष्ठा पाने के लिए एक उपद्रव था।
- 24:18इसके अलावा कुछ न था हजारों की। तादाद में लोग चमत्कार देखे जाते
- 24:27हैं लेकिन फिर दूसरे नए लोग आ जाते हैं।
- 24:35बाबा हम तो नहीं मानते, कैसे मानोगे हमें भी देखना।
- 24:44ऐसा करो, बाबा मूँगफली दे दो पता काजू रख देंगे, जो अक्सर आम बात
- 24:51होगी, मूँगफली मूँगफली दे देता ये लो भाई।
- 25:03देखिए मैंने पहले आपसे बता कि धोखा मत खा जा बड़े थोखे।
- 25:13हैं बड़े थोखे हैं इस प्यार में। बाबूजी धीरे चलना प्यार में ज़रा
- 25:29संभलना ओह बड़े धोखे हैं बड़े धोखे हैं इस प्यार में।
- 25:41बाबू ही धीरे छल हाँ, धोखे हैं बहुत वो ही व्यक्ति धन को कमाने
- 25:55के लिए मान प्रतिष्ठा को कमाने के लिए हाथ की सफाई भी दिखा सकता है।
- 26:02और कोई सुहानी शायद ऐसी ईमानदार जादू पर माइग्रेटर आपको बड़ी सफाई
- 26:14से बोल देती है नहीं। यह सिद्धि नहीं, यह एक कला है जो
- 26:27हमने सीखी जब की सुहानी सा चाहती तो बाबा बाबा ईश्वर बन सकती थी।
- 26:37क्या डिश है? कोई अर्जुन बस कुछ सिरफिरों का
- 26:46संग चाहिए, कुछ लफ्ज़ ही चाहिए और कुछ।
- 26:59सत्ता का साथ चाहिए। लोग तो पागल हैं ही, पहले से ही
- 27:08पागल हैं तो हमें बनाना नहीं पड़ेगा, ये मैं जानता हूँ पक्की
- 27:13कारण। फिर लोग मेरे पास आते, मैं थक
- 27:23गया, बाबा कहते यही ऐसे ही गुजार दोगे टिक जाओ टिक जाओ मैं गौशाला
- 27:42रोज़ जाता हूँ मंदिर। नहर के किनारे घूमता शंकर मंदिर
- 27:51में बैठते हैं। छोटा सा मंदिर दर्शन का मिलता है।
- 27:58अक्सर लोग मुझे पागल भी कहते हैं। आज भी नहीं असामत कर।
- 28:08थोड़ा ज्यादा हूँ। आज पहले का मतलब और कोई पता नहीं
- 28:18यह पागलपन बढ़ता ही चला जा है। हमें भी दिखाओ हमें तो ऐसा करो
- 28:36जहाज का पुर्जा अरे राम, मेरे बाप ने कभी जहाज नहीं देखा, तू जहाज
- 28:46का पुर्जा मांगता है। फिर 1 दिन बैठा एकांत में समझ आई
- 29:01संख्या खत्म नहीं होगी इसलिए तुम्हारे द्वंद नहीं मिटते
- 29:09क्योंकि तुम अपनी आँखों से देखना चाहते हो ये कैसे हो सकता?
- 29:15और जो जादूगर होता है वह तुम्हें सम्मोहित कर लेता।
- 29:22फिर वहाँ दो ऑप्शन हैं। एक कहे कि हमारे पास तो हनुमान जी
- 29:27हैं। मैंने हनुमान जी से पूछा आप जाते
- 29:32हो बागेश्वर धाम तो मैं उसके बाप का गोला रखूं मैं क्यूँ जाऊंगा
- 29:41भला? बस बस बाबा गुस्सा मत हो।
- 29:48तुम्हारी घोषणा से डर बड़ा लगता है।
- 30:00जो आपके साथ हुआ नहीं वह होता नहीं।
- 30:04पहला सब आपका फिर तो जिंदगी जीना भी दूभर हो गया।
- 30:11लोग आते हैं, लोग आते हैं। और बिना पूछे मेरे कमरे में आ
- 30:18जाते हैं। अविवाहित था, खुद से आके बिना
- 30:27पूछे बलव जगा देते। बाबा आज क्या आया, क्या नंबर
- 30:41निकला सट्टे का अच्छा सोये पड़े हो क्या?
- 30:52ओह, हो हो चलो उठ ही गए तो बताओ ना थोड़ी खबर ले दो इधर उधर से
- 31:04मैंने कहा आप जैसा ही मूर्ख मैं बिक रहा हूँ सन्तों को अपने से
- 31:13ऊपर मत समझना। कोई वक्त था जब उन्होंने भी
- 31:21इन्हीं गली कूचों में ये धूल फांकी थी।
- 31:28आज कोई नए नहीं हो गए हैं। ये ठीक।
- 31:34के रत्न ना कर किसी भी वक्त वाल्मीकि हो सकता है।
- 31:39ऋषि अंगुली माल करीब 1000 लोगों का हत्यारा किसी वक्त ब्राह्मण हो
- 31:50सकता है। कौन जाने?
- 31:54नगरी मौख द्वार किस घड़ी उसकी रहमत रहम करीम की रहमत बरस जाए
- 32:06कोई नहीं जानता और देखिए। करवध्य प्रार्थना करता हूँ, कमेंट
- 32:16मत किया कीजिए, अपना चैन खोल लीजिए, भगवान हो गए हों।
- 32:34तो श्याम मानो की तरह अच्छे व्यूस में लेंगे तो अपना चैनल खोल लो।
- 32:53जो नहीं हुआ वो होता नहीं। ये पहला शर्म का चुका है।
- 32:59और ध्यान रखना, सारी दुनिया इसी सिद्धांत के ऊपर चल रही है।
- 33:12मैंने पहले भी कहा, कर्मविधान कुछ नहीं होता जहाँ।
- 33:18कर्ज उठाव और घी पी रही हो और वह ऐसा अब उसकी व्याख्या कर रहा हूँ।
- 33:34पुत्र ने पूछा, बेटा? इस नॉट ओनली अननोन वह सिर्फ ऐसा
- 33:41नहीं कि अज्ञात है। बट ऑल्सो अननोन एबल वह ऐसा कि कभी
- 33:49जाना भी न जा सकेगा और मैं आँखों में आंसू आ जाते हैं।
- 34:01हृदय द्रवित हो जाता है। तुम नास्तिकता की अग्नि में कब तक
- 34:09जलते होगे? चलो सुहाना भरम तो टूटा जाना के
- 34:40होश में क्या है। कहते हैं जीसको प्यार दुनिया क्या
- 34:54चीज़ ये क्या बला है दिल ने क्या? बेवफा तेरे प्यार में।
- 35:21क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे प्यार में?
- 35:42यही कहो प्यार दिल ने क्या न सहा बेवफ़ा तेरे प्यार में।
- 35:59वह सिर्फ अज्ञात ही नहीं वह अज्ञात है।
- 36:02बेटा जाना नहीं जा सकता, फिर बाबा अगर जाना नहीं जा सकता जी इतनी
- 36:14साधना है। इतने गुरु क्यों?
- 36:21क्या कोई नहीं जानता? नहीं पुत्र, कोई नहीं जानता अच्छा
- 36:32तो बड़ा भ्रम टूटा है। कोई नहीं जान सकता।
- 36:39नहीं नहीं किसी ने नहीं जाना पक्का इसलिए आज इतने बाबा हैं,
- 36:51निश्चिंत रहें। ये चैनल चलाने वाला है।
- 36:57मैं किसी के कारोबार में व्यवधान बनने वाला नहीं हूँ।
- 37:02थोड़े से लोग मुझे सुनते हैं। रसाता रसोवैसा।
- 37:14तुम्हें जहाँ रस आता है वहाँ तुम जाते हो, कोई मांस की दुकान पे
- 37:24जाता कोई अणिकागणिका के पास जाता बात रसती है।
- 37:34और पाखंडी, नकली शाधूजन अच्छी तरह से जानते हैं आइंस्टीन ने क्या
- 37:47कहा कि वह जाना नहीं जा सकता। बाबाओं की भीड़ लग गया तो फिर
- 37:57अपूर्ण भी बेरोजगारी है। यही धंधा बढ़िया रहेगा।
- 38:05बाबत की सप्ताह की कथा कौन है? रामायण का पाठ रखवालो जाना तो जा
- 38:14नहीं सकता, पोल तो कभी खुलेगी नहीं, पर यही मज़ा है।
- 38:22अध्यात्म में कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक बन सकता है।
- 38:28कोई भी आचार बस आईएएस की कुर्सी लाख बीमार के लिए अब और कुछ भी
- 38:39बोलें स्वीकार क्यों? क्योंकि वह जाना नहीं जा सकता।
- 38:48और पक्का मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूँ, वह जाना नहीं जा सकता
- 38:54या आसमान में धरते हुए भूखंड जिन्हें आवारा एस्ट्रॉयड कहते
- 39:01हैं, वैज्ञानिक इनका तुम एक ज़रा भी नहीं बना सकते।
- 39:07पृथ्वी से बड़े बड़े एस्ट्रॉयड इस यूनिवर्स में आवारा ढूंढ़ते हैं।
- 39:15घूमते हैं तो फिर नकली संतों की भीड़ लगेंगी।
- 39:25तुम धोखा खाओ क्या? यहाँ धोखे यहाँ धोखे हैं हर राह
- 39:37में बाबू जी ढेरे सर ना प्यार में ज़रा संभलना।
- 39:46बड़े धोखे हैं बड़े धोखे हैं इस प्यार में बाबू जी धीरे चार प्यार
- 39:58में ज़रा संभलना। ये मनीष कहते हैं कि बाबा रो रहे
- 40:07हैं, फिर क्या करें? सूक्ष्म शरीर तो जानते हैं हम
- 40:15हैं, लेकिन वह जो आनंद की प्रतिमूर्ति है।
- 40:26अगर वो जाना नहीं जा सकता तो फिर क्या करे?
- 40:34बड़ा मुश्किल में मिला है। घबराओ ना पोत ठहर।
- 40:45अभी ट्रेलर चल रहा है जल्दी ही फ़िल्म शुरू हो जाए।
- 40:58चमत्कारों के लिए मैंने हाथ जोड़ दिए बहुत से लोग आज जीवित हैं,
- 41:13लेकिन उन चमत्कारों में आनंद न था, मान सम्मान था लोगों ने।
- 41:21दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं। मान्यता बढ़ गई, नाम हो गया लेकिन
- 41:30नाम होने से आनंद मिल जाए। इसका क्या संबंध है?
- 41:36शांति मिल जाए, इसका क्या संबंध है?
- 41:41लोग तुम्हारे नाम का स्मरण करने लगे, गुणगान करने लगे।
- 41:46इससे आपको क्या फायदा है? तो फिर क्या किया जा रहा है कि वो
- 42:01सच्चिहारा हुई है? कि वो कूड़ा है तो ठे पार हुक्म
- 42:08रजाई चलाना। नानक लिखिया ना
- 42:22कैसे फर्क किया जाए और फिर जब भीड़ हो भेड़ों की।
- 42:33तो, हम तो अक्सर जहाँ भीड़ ज्यादा होती है वहीं जाते हैं, आप भी
- 42:38देखना जीस दुकान पर भीड़ ज्यादा होती है आप वहाँ जाओ पता है यहाँ
- 42:44राशि जाता है। लेकिन फिर भी जाते हो क्यों जाते
- 42:52हो? आपके भीतर मान्यता है इतने लोग
- 42:55कोई बादल थोड़ी? है।
- 43:01ढंग भी यहीं से खरीदने के बाद ठीक लगेगा।
- 43:04बेईमानी नहीं होगी, गच्चा नहीं। बस इसके पीछे यही दरक है कि वह
- 43:17सजियारा होइया कि वह पूरा तोपते बाहर हुक्म रह जाए।
- 43:24चलाना नानक लिखिया न? तो फिर उस सांची तक कैसे पहुंचा
- 43:30जाए? वह नहीं जाना जा सकता।
- 43:41बिलकुल नॉट ओनली अननोन मटल शो अननोनबल अज्ञात ही नहीं है,
- 43:51अज्ञवे है। ठेका करें, शराब का न पता चले कौन
- 43:58से ब्रांडी की है, कौन सी फैक्टरी में बनी इसका केमिकल एनालिसिस
- 44:06क्या है? तो भी क्या तुम पीना छोड़ सकते
- 44:12हो? क्योंकि तुम जानते हो कि इसको
- 44:23पीने से किसी भी फैक्टरी की बनाओ, नाभा की फैक्टरी का बनाओ या किसी
- 44:29फैक्टरी का बनाओ। हमारे पंजाब में कहावत है नभ्य
- 44:35दीय बांध बोतलें तेनु पीण के नसीब बवालें खुश मत हुआ करो।
- 44:42ये जरूरी होता है जब गहरे प्रसंग चल रहे हो।
- 44:51तो थोड़ा सा खुशनुमा माहौल भी अच्छा रहता है।
- 44:56न पे दीये बंद बोतलें तनुपीण दे नसीब बाले जिनका अच्छा नसीब होगा
- 45:03न वे की बनी हुई शराब वही पे। तो क्या किया जाए?
- 45:14फिर बाबा हम तो गिर गए, वो होता तो है ना?
- 45:23हाँ ये मैं गारंटी देता हूँ, वह जाना नहीं जा सकता, वह जाना नहीं
- 45:31गया। लेकिन वो होता है तो यहीं टिक
- 45:38जाओगे। चलो ठीक जाओ, कहीं बैठे के जाओ
- 45:48मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा मैं राधा स्वामी का शिष्य हूँ।
- 45:55मैंने कहा फिट टिके रहो बाबा आपकी दीक्षा ले लो, मैंने कहा भाई यहाँ
- 46:01तो जीतने स्टूडेंट्स चाहिए, हाउसफुल है वहाँ हाउस खुला है।
- 46:17जहाँ गुंजाइश वह होता है इस चीज़ का हम ऑथेंटिसिटी करते हैं,
- 46:34प्रमाणिकता देते हैं। छबी संतो ने कहा और कोई संत पागल
- 46:41थोड़ी आपके तथा कचित लेक्चरर 40 मिनट का 30 मिनट का प्रवचन दे के
- 46:53महीने का मुआवजा ले लेते हैं। और रिटायर होने के बाद पेंशन ले
- 47:01लेते हैं तो फिर ये उल्लू का पठ्ठा क्यों बोल रहा है?
- 47:07क्यों वक्त बर्बाद किया? और अभी तो उल्लू का पट्ठा नहीं
- 47:16उल्लू के पट्ठे के आगे भी पट्ठा है।
- 47:21पर हसा मत, उससे आगे भी पट्ठा है छोटे छोटे पट्ठे और है।
- 47:27ये गद्दियों की बात है। भाई ट्रांसफर होती रहेंगी लेकिन
- 47:34मेरी बात आज गौर से सुन लेना सुनने योग्य है।
- 47:41पूछ ही लिया या तो फिर पूछते ही ना या पूछ लिया तो फिर पूरा सुनना
- 47:52भाई। वैसे अगर आप भागना चाहो तो भाग
- 48:00सकते हो, मैं डिक्टेटर नहीं हूँ, इतनी बात समझ लेना बड़ा अहिंसक
- 48:06हूँ मेमनी की तरह निर्दोष। कबीर कहते हैं, मैं प्रमाणिकता
- 48:25पेश करता हूँ, मैं स्टेम्प लगाता हूँ, मैं उसे जानता हूँ।
- 48:33शास्त्रों में उसकी प्रमाणिकता नहीं मिलेंगे।
- 48:37क्योंकि शास्त्र मूक है और शास्त्र तो कोई बदल ही सकता है।
- 48:43लफ्बाजी जब चाहे बदल दो उसके अर्थ होते जाते हैं लेकिन गुरु तो
- 48:52समक्ष जिंदा है और जब तक वो जिंदा है।
- 48:57तब तक उसका लाभ ले लेना चाहिए। कोई बुराइ नहीं, कुछ गसेगा नहीं,
- 49:07वह आपसे मांगता कुछ नहीं, हम उस मेंदारी की तरह हैं।
- 49:15जो डुगडुगी बजाते हैं कुछ दे जाए तो भला ना दे जाए तो भला हम
- 49:27डुगडुगी बजाते ही रहे। क्या किया जाए?
- 49:36इस वीर भड़के में भरा पड़ा है। यूट्यूब भाई यूट्यूब का तो
- 49:40कारोबार है और गला हुआ। अगर यूट्यूब न होता तो आप भी मेरे
- 49:48इन वचनों को आज कैसे सुनते? तुम कहते कागज़ की लेखी और मैं
- 50:01कहता आंखें कबीर आपको निश्चिंत करते हैं कि वह है तुम कहते हो
- 50:11फिर बोलो कैसा है, क्या है? वो कहते जूं गूंगा गुड़ खाये के
- 50:20कहें कौन मुख स्वाद जैसे गूंगा, गुड़ के खाले स्वाद तो होता है,
- 50:29होता है तुमने गुड़ खाया होगा। क्यों भाई होता है जो गूंगा गुड़
- 50:40खायेगा कहे कौन मुख स्वाद, लेकिन तुम कहो स्वाद बताओ।
- 50:50कबीर कहते हैं, भाई स्वाद तो गूंगा नहीं बता सकते क्योंकि जीवा
- 50:54नहीं है। एक दो जीबों लक होईं त लक होईं लक
- 51:0220 लक लक बेड़ा आँखें ते एक नाम जगदीश एक राह पति पवड़या चड़िये
- 51:11होई 21 सुन गल्ला दरबार की। त गीता आईरिस नानक नदी पर ये ते
- 51:20गुड़ी गोडाथिस संतों को बोलते देखकर चैनल पर।
- 51:33नकली बाबाओं की भीड़ लग सकती है और मैं कहता हूँ भाई बेरोजगारी
- 51:39हैं, मुझे कहते हैं बाबा सरकार से कहो तुम्हें रोजगार दे दे घर बार
- 51:49का खर्चा चलाने के लिए। कुछ प्रबंध कर दे।
- 51:55सरकार तो नहीं करती फिर क्या? मैंने कहा बाबा देखो वो जाना नहीं
- 52:01जा सकता तो जी आपको एक। एक फॉर्मूला दे चला।
- 52:18इसलिए आज बाबाओं की भीड़ है और मेरे बोलने के बाद कुछ ज्यादा ही
- 52:23हो गई। जब मुझे मूड सा व्यक्ति कोई शान
- 52:30नहीं, कोई शकल नहीं। गाना तो कोई भी गा सकता है।
- 52:40मोहम्मद रफ़ी लता मंगेशकर क्या वो एनलाइटन थे?
- 52:50नहीं थे ना तो आवाज़ में दम हूँ मैं बात हो गया।
- 53:00तो बाबाओं की भीड़ इसलिए चलता है लेकिन इनकी आवाज़ में दम जो है
- 53:13आनंद का जादू नहीं। अब फिर पूछा इसने तो फिर बाबा
- 53:21करें, हम क्या क्या किया जाए? सुन गल्ला दरबार की कीटा आई रीस
- 53:38जब मेरे चैनल को कंट्रोलर कहते हैं, बाबा आपके चैनल से कंटेंट
- 53:43चुरा लिए जाते हैं। मैंने कब बला बेचारों का पेट भर
- 53:50जाए। और एक तो ऐसे मेरे भक्त थे।
- 53:55मेरी दीक्षा यहाँ से ले गए और मेरे प्रवचन खुद बोलने लगे।
- 54:02हूबहू शेम मैंने उन्हें भी कुछ नहीं कहा।
- 54:10एक चुटकुला जाता है संपत सरल जी सुनाया करते हैं प्यारे व्यक्ति
- 54:20एक व्यक्ति बोला के स्वतंत्रता संग्राम के।
- 54:31आयोजन में किसी प्रकार का बापू का योगदान नहीं था तो हम कुछ नहीं
- 54:43बोले। हम चुप रहे हैं, हमने समझा अपने
- 54:51बापू की बात करता हूँ। जिसे हम बापू कहते हैं उसकी बात
- 55:01नहीं करता होगा तो इसलिए मैं चुप रहा, कुछ नहीं, नो रिएक्शन।
- 55:11अब हम मुख्य प्रश्न की। अंतिम पड़ाव में आ जाएं।
- 55:22इस बात का जवाब भगवान श्री कृष्ण देते हैं।
- 55:25बड़े अद्भुत व्यक्ति हैं। ऐसे ही नहीं उनकी पूजा होती है।
- 55:34बड़े भ्रम थोड़े और बड़ी राहत दिखाई मानवता को, लेकिन मानवता ने
- 55:45आज भगवान कृष्ण को भी बिगाड़ दी। अर्थ के अनर्थ करते है लड्डू को
- 55:53पार। ना कुछ खाता ना कुछ बोलता जब की
- 56:03तुम खलाते हो ना कोई काम करता। ना ही सोता, ना ही जागता, एकदम
- 56:19बुद्धू मेरी तरह उर्लू का पट्ठा लड्डू को पार मेरे चाचा मेरे पास
- 56:32आके गलरी में था मैं। मस्ती में था, 10:00 बज गए थे, वो
- 56:38तो ब्रह्म मुहूर्त में 3:40 पर जागने वाले 10:00 बजे मेरे पास
- 56:45आये। चलो मेरे साथ बहुत हैं अयोध्या
- 56:50चलाओ पुत्र। मैं फिर वापस सुनाऊंगा, तो मेरी
- 56:58वसीयत है कि जब मैं प्राण का भगवान राम की सरयू नदी में मुझे
- 57:04बहा देना, बस। कोई जन्म जाए, कोई मर जाए मुझे
- 57:13सोचना मत देना ठीक मैंने कहा मुझे कहते हैं आप नहाये ही नहीं हैं
- 57:24अभी, मैंने कहा नहीं। मैं तो मौज से ही नाता हूँ और कई
- 57:29बार तो नहीं बनाता। अच्छा हाँ अरे फिर इसका मतलब मुझे
- 57:39स्नान करना पड़ेगा तो मैं क्यों चाचा मुझे मतलब मेरे ठाकुर जी?
- 57:49मेरे ठाकुर जी का पवित्र हो गए मैंने क्या चर्चा वो ठाकुर जी,
- 57:56क्या जो अपवित्रता को पवित्रता में ना बदल दे, जो खुद ही अपवित्र
- 58:03हो जाए? वह है ठाकुर।
- 58:07समझदार हो, मैनेजर रहे हो। पंजाब नेशनल बैंक दिल्ली में है।
- 58:19इतने मूड तुम होगे, मैं कल्पना भी नहीं कर सकता।
- 58:28मेरे न नहाने से तुम्हारे ठाकुर जीके अपवित्र होने का क्या संबंध
- 58:36है? नहीं मुझे स्नान करना होगा।
- 58:41देखिए। अंधभक्तों को मैं ज्यादा समझाता
- 58:46हूँ क्यों? क्योंकि समझ होती है ना समझ समझ
- 58:59का थोड़ा सा मात्र हो तो समझाऊं। समझ ही नहीं होती तो इनको मैं
- 59:08तीसरे तल पे रखता हूँ दो तलवार बताऊँगा आज अष्टया से मुझे फ़ोन
- 59:21आया महेंद्र सिंह। बाबा तुम घड़ी मत देखा करो, एक
- 59:29घंटा हो गया, हम तो बाबा 5 घंटे भी सोने गए तो ठीक कोई बात नहीं
- 59:40और बोल देता हूँ। जल्द भी वक्त तो हो गया लेकिन
- 59:48घबराओ मत आज और बोलूँगा अभी कहानी बीच में चचा जान चले गए सरयू नदी
- 1:00:01के किनारे कुटिया डाल के। चाची जी को भी साथ लगे।
- 1:00:08उनको तो सात जन्मों का संघ है। दूसरा विवाह था सुबह ब्रह्ममूत्र
- 1:00:19में स्नान ध्यान किया और राम राम अपना।
- 1:00:27मैंने कहा चाचा अयोध्या जाओगे, क्या यहाँ नहीं मिल सकता?
- 1:00:38त्रिमूर्ति नगर में बढ़िया घर है और अच्छा पेंशन होता है।
- 1:00:45और दोनों बच्चे वेल सेटल्ड है। दो बेटे भी कैसा नहीं हो सकता?
- 1:00:53घर पे ही बैठ के तुम बच्चों के संग रहो वृद्ध व्यक्ति के पास।
- 1:01:04अगर शक्ति नहीं होती तो अनुभव तो होता है और अनुभव बड़ा कीमती होता
- 1:01:09है। इन बातों को ज्यादा बढ़ाऊंगा
- 1:01:14नहीं, जल्दी समाप्त करने की चेष्टा करूँगा।
- 1:01:26कहते नहीं मिल सकता मिलेगा। वहीं भगवान राम के सरजू नदी के
- 1:01:30कनाले ठीक यही पूछा यशोधरा ने। बुद्ध से मुझे एक बात बताऊँ तुम
- 1:01:46भागे क्यों मैं क्षत्रानी थी बड़ा अपमान किया तुमने भाग के घर से।
- 1:01:58मैं अपने आपको कोसने लगी कहीं यशोधरा तुम्हारे भीतर ही कोई कमी
- 1:02:08रह गई होगी इतने साल तड़पी आत्मघलानी में।
- 1:02:16कहाँ कमी रह गई, कहाँ गड़बड़ हो गई जो तुम मुझे छोड़ के भाग गए?
- 1:02:21आंधी रात को छोटा बच्चा 6 दिन का सात अंक और भगोड़ों की तरह भागे
- 1:02:34और रात्रि को भागे। तो बुद्ध कहता है, यशोध रे अगर
- 1:02:41तुम्हें बता के जाता हूँ तो बताओ क्या तुम मुझे भागने देते?
- 1:02:49तो ये सोच रह चूके हो क्या? कोई बात नहीं?
- 1:02:56तो फिर मुझे एक बात का और जवाब दे दो कि जो तुमने वहाँ जाकर पाया
- 1:03:03बहुत गया वो यहाँ महलों के भीतर नहीं मिल सकता।
- 1:03:10आलीशान महलों में पूर्ण सुख सुविधाओं से युक्त।
- 1:03:17वो तो कहते हैं, बिल्कुल मिल सकता था कैसे कहूँ वह जरे जरे में
- 1:03:23व्याप्त ये तो तुम ठीक कहती हो यहाँ मिल सकता था फिर क्यों भाग्य
- 1:03:32ये शोध? मैं अज्ञानी था, बड़े ईमानदार
- 1:03:39हैं, बहुत तब मैं अज्ञानी था, मुझे पता नहीं था घर में बैठकर भी
- 1:03:48मिल सकता है, मैं जा रहा था। कहानी बताई आपको रुड़की से आगे
- 1:03:56लश्कर से हनुमान जी कहने लगे वापस हो जाओ तुम्हें वही मिल जाएगा घर
- 1:04:08पे जाओ। तुम्हारी भीतर की प्यास बताती है
- 1:04:14कि तुम्हें घर बैठे मिल जाये। बाद में पता चला वो हनुमान जी एक
- 1:04:24प्रकार से उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया।
- 1:04:33असंत पुरुषों का आशीर्वाद बड़ा महत्त्व रखता है।
- 1:04:39लेकिन मैं नहीं मुड़ा तो फिर बोले वापस तो जाना ही होगा पुत्र मैं
- 1:04:46मात्र। 21 वर्ष का मासूम चेहरा टीटी का
- 1:05:04रूप धरती आए लंबे ऊंचे कथ लाओ के कुछ नहीं क्यों नहीं है, भाग किया
- 1:05:14है या नहीं पूछ किया है। अजीब लोग हैं ऐसे भोले बच्चों को
- 1:05:20भगा देते हैं घर साधू बनने के लिए हरिद्वार, हरिद्वार में तो चोर
- 1:05:30बैठे हैं। अरे बाबा क्या बात करते हैं, मैं
- 1:05:37तो संत बनने आया तुम घर जाओगे यहाँ सब चोर हैं संतो के वेश में।
- 1:05:53भेड़िया वस्त्र डाले बैठा है, तुम जाओ घर में जाएगा और तुम्हें जाना
- 1:06:04ही होगा और वही हुआ मुझे वापस आना पड़ा।
- 1:06:11आँखों के सामने इतनी बड़ी रेलगाड़ी गुजर गई, मुझे नजर नहीं
- 1:06:16आई, कृष्ण देते हैं जवाब फिर क्या करें, वह जाना जाता नहीं जाना जा
- 1:06:33सकता नहीं। अगये है अज्ञात्री है, अब यहाँ पर
- 1:06:42थोड़ा रुक जाए। तेरे मेरे बीच में अब दो सदियों
- 1:06:56के। फासले हैं, ओह तेरे मेरे दिल के
- 1:07:05बीच अब तो सदियों के फासले। हैं।
- 1:07:14यकीन होगा किसे कि हम तुम इकरा संग चले।
- 1:07:25हैं होना। था।
- 1:07:30और क्या? बेवफा तेरे प्यार में।
- 1:07:51क्या से क्या हो गया बेवफा? आखिर में यह संसार बेवफा ही
- 1:08:09निकलेगा। कितना भी।
- 1:08:17तुम ईमानदार मानो इस बेवफाई को इतनी वफा से निभाएगा बड़ी वफा से
- 1:08:29निभाई हमने तेरी थोड़ी सी बेवफाई। थोड़ी सी बेवफाई बड़ी वफा से
- 1:08:40निभाता है सनसान कृष्ण कहते हैं, वह पिया जा सकता
- 1:08:58है। लेकिन कैसे करें?
- 1:09:07फासला के वो सच्ची आरा हुई है के वो कूड़ा है खुद है पार फासला
- 1:09:15कैसे करें नकली हो रसी बाबा तुम भी तो नकली हो सकते हो।
- 1:09:22बिल्कुल बटक मत जाना भटके तो अटके तो कृष्ण कहते हैं बड़ा सुन्दर।
- 1:09:46असली संत कौन नकली संत को इसी बात का जवाब सोहल में अध्याय में
- 1:09:52भगवान कृष्ण देते हैं, प्रखंड भी आएँगे, सच्चे संत भी आएँगे।
- 1:10:02लेकिन तुम अर्जुन कैसे पहचान करो? सोर में अध्याय का शब्द अमानितुम
- 1:10:13दंभितुम हिंसा, शांतिराज्यमं, आचार्यउपासनम, शौचम, स्तिरम आदम
- 1:10:24बने ग्रह। अगर ये लक्षण ना आए तो कृष्ण कहते
- 1:10:32हैं कि जान लेना यह पखंडी है। कौन कौन से लक्षण अमानित्व मान
- 1:10:42सम्मान की जिज्ञासा न करें। जिसने वो तज छोड़ी, दम भी तुम दम
- 1:10:51बना दिखा अहिंसा, अहिंसा को। कोई जीव हत्या ना करे, कोई मारकाट
- 1:11:05ना करे शान्ति राज़ शिवम पूछा है दंभ, दंभ कहते है दिखावे को
- 1:11:17बनावटी दिखावा सर्प टोपी रख ली कष्ट।
- 1:11:23मेकअप कर लिया। अच्छी सी मालाएँ डालें।
- 1:11:27भाई काहे मेकअप करते हो, दूर से ही समझा मैं मामला गड़बड़ है।
- 1:11:42जिसने खोज लिया जीसको मिल गया। अब देखना कभी अल्बर्ट आइंस्टीन को
- 1:11:48देखना बिखरे बाल मिलेंगे बुले शाह को देखना बिखरे बिखरे से।
- 1:12:01जैसे बालों में कंगना की और मुदुतों से अल्बर्ट आइंस्टीन और
- 1:12:10तुम्हें ऐसा सिद्धांत दे के इस इक्वल टु एम सी।
- 1:12:19अहिंसा मार्क का है शांतिराज मन शांत मन ठहर जाएगा।
- 1:12:40आज जब मन, वचन और कर्म से एकरसता, सरलता जैसा मन, वैसा वचन और वैसा
- 1:12:52ही कर्म। इनमें फर्क नहीं होना चाहिए।
- 1:12:59जैसा तुम्हारा मन, वैसा ही तुम्हारा वचन और वैसा ही तुम्हारा
- 1:13:03कर्म आचार्य उपासना में। इसके दो अर्थ लिए जा सकते हैं सत
- 1:13:13पुरुषों के संग बैठा रहे या अपने ही भीतर उस आचार्य के पास चला
- 1:13:20जाए, कुछ भी रख लो शौचम शुद्ध होगा, शुद्ध का मतलब निर्मल होगा।
- 1:13:33कबीर कहते हैं, कबीरा मन निर्मल वयो, निर्मल, बड़ा प्यारा, इसका
- 1:13:43तुम्हारा मन निर्मल नहीं जो पदार्थों की कामना करता है।
- 1:13:51पदार्थों में सब कुछ आ गया। वह मध्य युद्ध मन है जो पदार्थों
- 1:14:01की कामना करता है तो कबीर कहते हैं निर्मल हो जाओ, कामना ना करो।
- 1:14:09सहजता से जो मिले मिलेगा मिलेगा तो ठीक नहीं मिलेगा।
- 1:14:15तो ठीक अगर ऐसा तुम्हारा मन दृढ़ता को पकड़ ले तो ये लक्षण
- 1:14:24है। कृष्ण कहता।
- 1:14:29स्वचम स्थैर्यम ये बड़ा शानदार शब्द है।
- 1:14:36स्थैर्यम स्थिर रहे मुझे लोग कह देते हैं।
- 1:14:47अभी कल ही प्रश्न आया, आपके पास इतनी शक्तियां अनुभूतियाँ इतने
- 1:14:59गहरे सतर्क उनकी व्याख्या करते हो, बाबा जस्ती नहीं, आप अपने
- 1:15:05पुत्र की मृत्यु को थ्रू नहीं हो सकते।
- 1:15:11मैंने कहा बात ये नहीं है। मृत्यु तो किसी भी व्यक्ति की
- 1:15:16किसी समय भी हो जाती है। अब इस बात को ध्यान से समझना ये
- 1:15:21अर्क है अध्यात्म का। बात ये नहीं कि किसी ने छीन लिया।
- 1:15:28तुमसे जो गया वो तुम्हारा पुत्र था या पड़ोसी, इससे भी कुछ लेना
- 1:15:39देना। बात ये है कि जिसके जाने से।
- 1:15:45तुम्हारा मन कपा अगर तुम्हारे घर की कुछ चीजें चोरी हो गई तो
- 1:15:55तुम्हारे भीतर ज़रा भी हलचल हो तो फिर तुम्हारा था।
- 1:16:03अगर भीतर हलचल हुई तो वह पीटी हुई, छाती पीटने लगे, रौनेक से
- 1:16:08दाने लगे सवाल घटनाओं का नहीं है। सवाल घटनाओं से उपजी हुई
- 1:16:18स्थितियों का है बहुत गहरी बात है।
- 1:16:22घटनाओं का सवाल नहीं, वो तो कुछ भी भेजे जाए।
- 1:16:26व्यक्ति खुद भी मर जाता है क्या बीता, क्या हुआ, क्या घटना घटी,
- 1:16:36कौन क्या दे गया, कौन क्या ले गया ये बात तो नहीं है।
- 1:16:43अब इस बात को आप ढंग से समझ लेंगे तो आपको अध्यात्म में किसी और
- 1:16:49प्रकार की बात समझने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 1:16:52स्थैर्यम स्थिरता। बातों के जंजाल में अपने आपको
- 1:16:59उलझाने की चेष्टा न करो तुम उलझोगे संत को तो मिल गया, संत का
- 1:17:08मन ठहर गया, वह रस भी रहा है। संसपयो मानसरोवर।
- 1:17:35हमसपयो मानसरोवर तालितलैया। मन मस्त हुआ हाँ फिर क्यों बोला?
- 1:17:58मन मस्त हुआ तो क्यों बोला? अभी।
- 1:18:08कबीर के शब्दों का घर्रास से निकाला जाए अगर हंस ने मानसरोवर
- 1:18:18पा लिया तो ताल करियों में वह डोलफोन वह नहीं भागेगा कुंभ के
- 1:18:27मेलों में। नहीं भागेगा मंदिरों मस्ज़िदों
- 1:18:30गुरुद्वारों में मस्ज़िदों में बात सुरक्षा की है।
- 1:18:38जिसका मन ठहर गया, उसका व्यवहार ठहर गया।
- 1:18:47जिसका कुछ ना रहा सब तेरा हो गया यही बाबा नानक कहते है।
- 1:18:571313 और वास्तव में बात यही है। तुम कितना ही चिल्लाते रहो मौत
- 1:19:06तुम्हें आईना दिखला देती है तुम्हारा कुछ न धन न गद्दियाँ न
- 1:19:18मान सम्मान कुछ भी तो तुम्हारा नहीं।
- 1:19:24यहाँ तक कि ये सर्विस है तुम्हारा नहीं यह भी तुम्हारा साथ छोड़
- 1:19:29देता है। बात ये है कि तुम किसी के जाने से
- 1:19:37कितना बिलखते हो, चिल्लाते हो, छाती पीटते हो।
- 1:19:41रोते हुए अश्क आँखों में ये लक्षण देखना कृष्ण कहते हैं धैर्य जीसको
- 1:19:55स्थिरता आ गई फिर उसका लोभ खत्म हो गया।
- 1:20:06बुध छोड़ देते हैं राजमहल, जिनको आप पाना चाहते हो, तुमने सारी
- 1:20:14जिंदगी गवां दी, इन गद्दियों को पानी मिला, कुछ नहीं मिला, नाक कट
- 1:20:22गया। तो तुम कह सकते हो सब कुछ मिल गया
- 1:20:25मेरा कुछ नहीं क्योंकि हम भी राजा रहे हैं, लेकिन नहीं पाया जाता।
- 1:20:32हम जानते हैं ना लोभ होगा, ना लोभ होगा तुम्हारा कुछ छिन जाएगा।
- 1:20:45इस शरीर को कोई गोली मार जाए मर जाए।
- 1:20:53मैं कहेगा तू बच ले, मुझे ही दे दे मैं खुद मर जाता हूँ तू भाग और
- 1:21:01थोड़ी देर में खबर मिल जाएगी। कि वह व्यक्ति एकॉमेटेड सुसाइड
- 1:21:09आमूल चूल परिवर्तन न हो तो समझो तुम उस स्तर पे जिसे ज्ञान करते
- 1:21:17हैं नहीं गठबंधन कृष्ण तुम्हें इस दुविधा से बखूबी निकाल लेती है।
- 1:21:25कृष्ण कहते हैं बस इन चीजों को संभाल ले, ये देख ले, अगर ये मिल
- 1:21:31गई तो समझो यह व्यक्ति प्रबुद्ध है।
- 1:21:42कोरे लफ्जों की लफ्ज़जी को घुमाफरा के अन्य अन्य ढंगों से इन
- 1:21:51सर लोगों की तरह अचार लोगों की तरह घुमाफरा के कह देना ज्ञानी का
- 1:21:58लक्षण। बल्कि ज्ञानी तो पा के मुँह खो
- 1:22:06जाता है चुप हो जाता है को मिल गया मुँह खोके बैठ गया बहुत
- 1:22:12महीनों तक बोला नहीं राजा तक खबर लग गई भनक लग जाती।
- 1:22:19राजा ने कहा उससे पूछो क्या मिला, राजा खुद गया ना उसे तुम्हें क्या
- 1:22:26मिला? नहीं बोल रहा नंगी तलवार उसके हाथ
- 1:22:32में लेकिन कोई समझदार रहा हो? कि नहीं ये डराए नहीं जा सकते।
- 1:22:47कोई सिक्का ऐसा नहीं कोई करेंसी ऐसी नहीं जो इन्हें खरीद सके।
- 1:22:53इन्होंने कुछ और पा दिया है मटेरियल जो धातुओं से परे आता है।
- 1:23:04संसार से परे आता है। लेकिन फिर उसने पाबंदी लगा दी है।
- 1:23:11से उठा बड़ा तंग करते हैं ये लोग। कभी किसी को भेज दिया, कभी किसी
- 1:23:19को सिपहसलार को, मुख्य सेवादार को ये मंत्री संत्री बहुत आये, बताओ
- 1:23:25राज्य क्या घटा? वो न बहुत चुप हो जाते।
- 1:23:341 दिन आंधी रात को फैसला किया निकल जाऊं यहाँ से राजा बहुत तंग
- 1:23:39करता है, पता भी नहीं लगना चाहिए कि किसी को कुछ घट गया, फूल खिल
- 1:23:50गया कभी बताता है। उसकी सुगंध बिखरा करती है और
- 1:23:57राहगीर की नसक उठें खिल जाती हैं। बस वही है सूचना कि फूल खिल के
- 1:24:05वहाँ से जो गुजरता मस्ती के आलम में मदहोश को जाती हूँ कुछ तो है।
- 1:24:13ये कहाँ से आ रही है सुगंधी यह ठहराव किसको घटा यह कौन बैठा मेरी
- 1:24:25बगल में जहाँ से मैं गुजरा और उस मदहोशी में मैं खुद भी हो गया।
- 1:24:37ति दोनी मैनू आंखो राँझा हिरन खे कोई रांझण रांझण कर दी उनमें आपकी
- 1:24:47रांझण हुई। मुझे हिरन कहे, कोई बदलाव हो जाता
- 1:24:59है। मैं राज़ ही हो गई जीस दिन तुम
- 1:25:05खुद राम हो जाओगे वह राम रोम रोम में समा जाएगा।
- 1:25:13अस्तित्व में राम ही नजर आएगा। त्र, श्रीदास ने कहा सियाराम में
- 1:25:23सब जग जानी कर्म प्रणाम जोर जुगबान।
- 1:25:37जीसको कण कण में परमात्मा है भाई वर्ता वह राम राम करना छोड़ देगा
- 1:25:44जीवा अच्छे पक जाएगी तालों से तुम तो जबरदस्ती खेतड़ी मुद्रा लगा के
- 1:25:50जीवा को ठहराते हो, नकली ड्रामे बंद करो।
- 1:25:57असल में होने दो वो जो घटना घटती है फिर तालु से जीवन लग ही जाएगा।
- 1:26:07तुम बोलना चाहोगे ना बोल पाओगे? तो सभी को आदेश था बॉर्डर को
- 1:26:14क्रॉस न किया जाए। लउसे के द्वारा पकड़ लेना उसको और
- 1:26:21अगर जाना चाहे तो उससे ये कहना तुम्हें क्या मिला लिख के बता दो
- 1:26:25एक प्रसिद्ध व्यक्ति है सबको एक कर्म।
- 1:26:30ब्रेक वाटर से गुजरे लाओ से तो पहचान में आ गया ऐसे व्यक्ति
- 1:26:33पहचान में आ जाया करते हैं। रुक जाओ राजा का हुक्म है प्रभु
- 1:26:41पांव के हाथ में पर थोड़ा सा ही है, देखे जाओ क्या मिला?
- 1:26:52बस ये थोड़ी सी बात बताछो राजा का हुक्म है।
- 1:26:57आपके भी सेवक है। आपमें कोई सुगंधी नजर आती है या
- 1:27:03मदहोशी काल? न जीते हैं।
- 1:27:10ये तनहाई का आलम और उस पर आ गम। ये तन्हाई का आलम और उस पर आप का
- 1:27:33गम न जीते हैं न मरते। बताओ क्या करें हम अकेले चले आओ
- 1:27:56जहाँ हो कहाँ? आवाज दें तुमको कहाँ हो?
- 1:28:12अकेले हैं ठहरा। तो लाउसे ने पर्ची ली, कलम ली उस
- 1:28:27पे लिखा जहाँ जाकर व्यक्ति चुप हो जाता है, बस यही मिला है और कुछ
- 1:28:37मन ठहर जाता है। हंसा पायो, मानसरोवर ताल तलैया
- 1:28:48क्यों धुलें हीरो? पायो गांठ गठयायो बार बार बाको
- 1:28:57क्यों खोल लें? ये लक्षण बताएंगे तुम्हें ठग
- 1:29:06व्यक्ति से ओह प्रबुद्ध व्यक्ति से अगर ये लक्षण नहीं तो कृष्ण
- 1:29:14कहते हैं और फूल कैसा? इसमें सुगंधा न हो।
- 1:29:23फिर तो फूल बनावटी होगा, किसी फैक्टरी में बनाया गया होगा, वह
- 1:29:30सुगंध नहीं भी करेगा। ये प्लास्टिक के फूल होंगे।
- 1:29:37धरती का गर्भ फाड़ कर आया हुआ गुलाब नहीं है, मोतियाँ नहीं
- 1:29:44चमेली नहीं है, गेंदा का नहीं है ये नकली होगा तुम्हारी फैक्टरीज़
- 1:29:51में बनाया होगा ब्रेस्ट के हैं। तो कृष्ण कहते हैं गौरव कृष्ण के
- 1:30:00पास हर बात का जुबाब है। इस बात का जवाब कृष्ण देते हैं।
- 1:30:13शांति राष्ट्र। आचार्यों, उपासनम्, सौक्षम, सेरम,
- 1:30:19आत्माम, सौम, सूचिता बाहर भीतर से समान इसको सूचिता कहते हैं जैसा
- 1:30:28बाहर वैसा भी। ऐसा नहीं बाहर से कुछ बोले भीतर
- 1:30:34से पूछो तो तुम अपना ही नुकसान करोगे, जलते रहोगे आग में और ऐसी
- 1:30:44डिक्टेट शिप का का फायदा जो तुम्हारी रातों की नींद।
- 1:30:55कोई फायदा नहीं। वो काँटी हैं फूलने, जो सुगन्ती
- 1:31:02नहीं बिखेरते, जो गांव बिखेरते हैं स्थेरियम।
- 1:31:12किसी भी बड़े से बड़े फायदे में झूमेगा।
- 1:31:15नहीं, अकेला नुकसान नहीं, फायदे में भी वो खुश नहीं, ना शोक, ना
- 1:31:25हर्ष और बड़े से बड़ा शोक लग जाए तो शोक नहीं होगा उसमें।
- 1:31:33एक शब्द अंग्रेजी का है एक शब्द चुन तू शोक ना कर जिनके लिए शोक
- 1:31:41करता है वो शोक करने के योग्य है। तू सती प्रज्ञा हो जा, ठहर जा।
- 1:31:53इस धैर्य में आत्मा बिन्निग्रह बस स्वयं का बिन्निग्रह हो जाता है,
- 1:32:00दर्शन हो जाता है, निग्रह हो जाता है, स्वयं का दर्शन तुम्हारी सब।
- 1:32:09बाधाओं को मान्यताओं को समाप्त कर देगा तोड़ दोगे तुम सब कल्पनाओं
- 1:32:20की मूर्तियों को फेंक दोगे तुम इन लड्डू को बालों को।
- 1:32:27जो तुम्हारी जीवन को नरक बना देते हैं।
- 1:32:33अभी कल मेरी भांजी का एक कमेंट आया, पागल मैं भी था ऐसा नहीं कि
- 1:32:44मेरी भांजी। छठी भांजा उसका कमेंट है।
- 1:32:52मामा अगर ठाकुर जी को नजर लग जाए तो क्या करना चाहिए?
- 1:33:01मैंने माथे पे पहले तो माथा फोड़ा।
- 1:33:07अरे, तू किस कुल में पैदा हो क्या?
- 1:33:15फिर मैंने जवाब दिया पुत्री जीसको नजर लग जाए वो ठाकुर होता है।
- 1:33:27जो सारे शिनसार की नजर को हार लें वह ठाकुर होता है।
- 1:33:35ठाकुर को नजर लग जाए तो वो ठाकुर में।
- 1:33:44वह फिर तुम्हारा भ्रम है, तुम्हारी कल्पना है तुम्हारा
- 1:33:48स्वप्न है और इसके अलावा कुछ भी नहीं और इन मान्यताओं में उलझकर
- 1:33:54तुम क्या पाओगे सिर्फ बंधन। इनसे तुम डरोगे मुझे लोग कह देते
- 1:34:05हैं आप कहते हो के लड्डू गोपाल को चला के मारो, ये तुम्हें दंड देगा
- 1:34:11मैं कहा मेरे पास भेज देने से राम खोर को मैं निपटूंगा उससे मैंने
- 1:34:21कहा आई ऍम रेस्पोंसिबल फॉर मी। माइ वर्क्स तुम इस हरामी को मेरे
- 1:34:30पास भेज दो गर्दन उड़ा देते हैं उस माता की जीस माता को सारी उम्र
- 1:34:39जा रखी है जिसके द्वारा सबिकल्प समाधि में पहुंचे रामकृष्णा
- 1:34:44पर्पस। और तुम अभी भी लड्डू के पालम में
- 1:34:48उलझे उलझे रहो किसी का क्या रोके पल पल बीता जाए घनी गई थोड़ी रही
- 1:34:58ता भी बीती जाए एक पलक के कारण। काहे कलंक लगा है, ज्यादा बीत गई,
- 1:35:12थोड़ी रह गई बस एक पल बाकी है, सुबह होने को है जल्दी ही
- 1:35:20तुम्हारा भ्रम हट जाएगा। कृष्ण की इन बातों को लक्षण के
- 1:35:26रूप में ले लू, कहीं ये दौड़ता तो नहीं?
- 1:35:33कहीं ये ऑनलाइन व्यापार तो नहीं कर रहा कहीं ये अध्यात्म के
- 1:35:40प्रचार की आड़ में? धन का एकाग्र तो नहीं कर रहा?
- 1:35:45कहीं कोई मान सम्मान, कोई उपाधि, कोई फॉलोवर की संख्या बढ़ाना
- 1:35:51वगैरह वगैरह। ये सब सांसारिक चीजें हैं, इनका
- 1:35:57उपार्जन तो नहीं कर रहा? और जो इतना है जो कहता है कि
- 1:36:05मैंने अगर ये बोल दिया तो ये मुझे मार देंगे इसका तुम शरीर हुआ
- 1:36:10विवाद तुम्हें कहाँ वो मिला जीसको नयनम से धनति शस्त्राणी नयनम दहती
- 1:36:19पांव का आग नहीं जलाती, शस्त्र नहीं हूँ काटता तो तुम्हें
- 1:36:24मारेंगे कैसे? कृष्ण कहते हैं, मारने का कोई
- 1:36:27उपाय है और उसी कृष्ण के ऊपर व्याख्या करते हैं।
- 1:36:32मैं बड़ा हैरान हूँ। कमाल है ऐसे दोगले लोगों से बचना
- 1:36:41यही पहचान है जो मैंने बताया जीवन में उतरेगी ये बात ठहर जाएगा वो
- 1:36:48व्यक्ति सब वासना ही खत्म सब स्वाद इंद्रियों के समाप्त।
- 1:36:57कहीं भटकेगा नहीं। कहीं दौड़ेगा नहीं की हिल स्टेशन
- 1:37:01पे नहीं जाएगा बस घर बैठेगा कुआं कभी जाता है प्यासे के पास जीसको
- 1:37:09जरूरत है आ जाओ भाई पानी उपलब्ध है।
- 1:37:14अंजलि बांधो और पीलो पुत्र तुम्हें मेरी अभी जरूरत नहीं है
- 1:37:33तुम्हें भीतर से। आग लगी होगी।
- 1:37:41संसार और जो तुम्हारे साथ नहीं हुआ वो होता ही नहीं।
- 1:37:50पहला शब्द मेरा नोट कर लेना। और इसको मापदंड बना लेना, जिसके
- 1:37:58साथ जो हुआ नहीं वह होता नहीं। जो ऐसा कहता है वह मूर्ख है।
- 1:38:05परमात्मा की इस सर्जना का कोई अंतर नहीं है और ध्यान रखना दो
- 1:38:13बातें होती हैं। आज थोड़ा लंबा प्रवचन कर दो बार
- 1:38:17में सुन लेना कल महेंद्र सिंह राष्ट्रीय से कह रहे थे बाबा आप
- 1:38:23दो बार में सुन लेंगे, तीन बार में सुन फिर चाहे दो 4 दिन ना
- 1:38:29बोलो किसी को सुनते जा। एक होती है समझ जो आप कहते हैं
- 1:38:39बाबा समझ नहीं आया वो काम है, बुद्धि का एक होता है, रहस्य
- 1:38:50रहस्यम हो। और तुमने उस रहस्य में प्रवेश
- 1:38:55करना है। रहस्य बड़ा आनंद से भरा पड़ा है
- 1:39:02वो तो मगन कर देता है, आपको नचा देता है मीरा उस रहस्य को पीकर ही
- 1:39:08नाचती है। यद्यपि तुम्हें पता नहीं ये भाव
- 1:39:12बंग माई जो इसने किसी से सीखी नहीं।
- 1:39:17ये अपने आप कैसे बन जाती हैं? ये उस भीतर के रस का कमाल है जिसे
- 1:39:23रहस्य कहते हैं। रहस्य से ही रस बना है।
- 1:39:34बुध ही समझती है और संसार समझ में आता है।
- 1:39:39ये दो चीजें बाइफरकेट कर दो दो चीजें हैं।
- 1:39:46एक संसार एक परमात्मा संसार समझ में आता है, आ सकता है आज नहीं
- 1:39:53आया कल आ जायेगा, लेकिन उसमें सुख होता है।
- 1:39:59अगर सुख चाहिए तो संसार में रुक जाना अगर सुख से तुम।
- 1:40:05तृप्त नहीं हुए योग के तृप्त होता नहीं है तृप्त कहाँ होंगे जाके
- 1:40:11आनंद मय आनंद कहाँ है, रहस्यमय रहस्य कब आएगा समझ को छोड़कर समझ
- 1:40:19कहाँ से आती है बुद्धि से? समझ लेना ये कड़ी है।
- 1:40:25पूरी बुद्धि संसार को समझती है, परमात्मा को नहीं, वो तो समझ में
- 1:40:34आता है। वह तो उस प्याली की तरह है जिसमें
- 1:40:37समुद्र नहीं है। बुद्धि समझ से परे जाती ही नहीं।
- 1:40:43फिर क्या करें? रहस्यमय जाने के लिए इस बुद्धि को
- 1:40:45छोड़ समझ को छोड़े बिना कोई रहस्यमय प्रवेश नहीं करेगा और मैं
- 1:40:51जो बोला आज उस पर उंगलियां उठनी कमेंट करने स्वभाविक है।
- 1:41:00इसलिए बहुत से लोगों ने कमेंट किया।
- 1:41:05मैंने कहा भाई देखो तुम सुनो तो चाहो लेकिन कमेंट ना करो क्योंकि
- 1:41:11मुझे ऐसा लगता है कि तुम पहुँच गए हो, यद्यपि मैं जानता हूँ कि तुम
- 1:41:17मोर हो। जो बाइफरकेशन करता है कि ये बाबा
- 1:41:22ये तो ठीक है आपकी बात लेकिन ये ठीक नहीं।
- 1:41:26ऐसा बुद्धि का काम है भाई वाइफफरकेशन करना।
- 1:41:31फिर आपने समझ से मुझे समझने की चिष्टा की जो कि इट इज़
- 1:41:36इम्पॉसिबल, नेक्स्ट टू इम्पॉसिबल कभी नहीं हो सकेगा और ये काम करना
- 1:41:41भी मत। समझदार लोगों अगर मुझे तक पहुंचना
- 1:41:48है तो समझ को त्याग दो। समझ बुद्धि का काम है और बुद्धि
- 1:41:55संसार को समझ सकती है, लेकिन उससे पार एक और भी अस्तित्व है जीसको
- 1:42:04हम सर्जक कहते हैं, ये तो सजना भी।
- 1:42:09ये तो तुम आज नहीं कल खोज सकते हो, रोज़ खोजें बढ़ती जाएंगी आज
- 1:42:14एआई आया कल रोबोट सब कुछ करने लगेगा, अब घर पे बैठे होंगे।
- 1:42:28जल्दी ही ऐसा वक्त आने वाला है। किसी तरह से समझ लो एक सृजना करने
- 1:42:39वाला सर्जक और एक सर्जना। जीसको सर्जिक ने सृजन किया इसको
- 1:42:51ऐसा कह रहे हो? एक संसार और एक परमात्मा संसार को
- 1:43:00बुद्धि समझ सकती है, बस इसी इसी पर भाषा में नहीं हडप करती।
- 1:43:09रहस्य को बुद्धि नहीं समझ सकती वो समझ में आता है अब कितनी बार सीधी
- 1:43:16सी व्याख्या में करता हूँ लेकिन क्या करूँ?
- 1:43:18फिर तुम कहते हो बाबा समझे नहीं आया नहीं आएगा भाई समझ में आया या
- 1:43:24तो ये रास्ता छोड़ दो। या फिर वो पीलो शाहिद शराब पीने
- 1:43:33पे मस्जिद में बैठकर या वो जगह बता जहाँ खुदा का घर न हो?
- 1:43:44तुम अगर कमेंट करते हो तो कमेंट करने वाला ज्यादा समझदार होता है,
- 1:43:49जिसके ऊपर कमेंट किया जाता है। ये समझना और अपना आत्मनिरीक्षण
- 1:43:56करना यही बात भगवान कृष्ण ने आखिर कही आत्म विनिग रहा तुम देखना।
- 1:44:03कि क्या तुम इस स्थल पर आ गए कि तुम काँट शॉट करो, मेन मेक करो
- 1:44:14तुम कुछ फ़ासला करो क्या अच्छा क्या गलत क्या ठीक क्या पुण्य
- 1:44:20क्या पाप। अगर पहुँच गए हो तो ठीक फिर उसके
- 1:44:28लक्षण है आनंद, खुमारी और कुछ भी हो जाए, उजड़ जाए संसार तुम्हारा
- 1:44:37चेहरे पर शिकरने आएगा। सब मिल जाए।
- 1:44:42संसार न तुम्हें चेहरे पर हर्ष की एक लहर न दौड़ेगी।
- 1:44:48अगर तुम उस स्तर पर आ गए हो तो समझो तुमने रहस्य में प्रवेश
- 1:44:53किया। अगर तुम अभी कंपते हो मुझे कोई
- 1:44:58मार नहीं, ये बोल दूंगा तो वो मुझे मार देंगे, तुम मर सकते हो
- 1:45:07अभी लिव इन में रहो बंधन न बनाओ। तुम बंधन में हो सकते हो गीता पर
- 1:45:19प्रवचन करने वाले आचार्यों इस बकवास को जितनी जल्दी बंद कर दो
- 1:45:26उतना ही पुण्य है। क्योंकि तुम्हें जो हुआ नहीं वो
- 1:45:32होता नहीं। बस सीधा सा समझलो और जो हुआ नहीं
- 1:45:39वो होता नहीं और जो होता नहीं वहाँ तुम जाते नहीं वहाँ पहुंचोगे
- 1:45:44कैसे मार्कर्स कभी आस्तिक हो जाएगा इसकी संभावना कभी मत करना।
- 1:45:53आंशिक संभावना भी मत करना और किसी से ले के मुकर जाएगा नहीं मैंने
- 1:46:06लेनी है। और उसकी बेइज्जती करेगा।
- 1:46:10थाना पुलिस स्टेशन कोर्ट्स में गड़ीसेगा तो फिर वह चार बाग का
- 1:46:17दूसरा रूप है। ऋणम कृतवा गर्तं विवेक यदा जीवित
- 1:46:22सुखी जीवित वस्तु में अपने सुख के साधन खोजलो।
- 1:46:28दूसरे से कर्ज ले लो और घी गिरो भस्मभूतस्य देह से पुनर आगमनम
- 1:46:37कुत्ता यह शरीर मर जाएगा भस्म हो जाएगा।
- 1:46:44न कुछ देने वाला, न कुछ लेने वाला, कभी वापस आते देखा नहीं
- 1:46:48आता, लेकिन इस मूर्ख को नहीं पता चरवाक आज मेरे सामने नहीं है के
- 1:46:57मूर्ख उस रूप में कभी कोई आता। भगवान कृष्ण ने कहा मैं आता हूँ
- 1:47:03यदा यदा ही धर्म से गला निर्भवती भारत अबुधानम अधर्मस्य तदात्मनम
- 1:47:10सज्जा में हम प्रित्राणय साधु न विनाशाय से दुष्टताम धर्म
- 1:47:16संस्थापना अर्थाय। संभवामी युगे युगे।
- 1:47:20लेकिन समझना वो युग युग में आता है, अवतरण होता है, लेकिन उस रूप
- 1:47:28में कभी नहीं आएगा। तुम तरसते रहोगे और इसी कारण से
- 1:47:33इसी ढंग से वोडा तुम समझ नहीं पाए वो क्या करे?
- 1:47:39युग युग में मैं अतर होगा, कभी किसी नाम से आऊंगा, कभी किसी नाम
- 1:47:45से आऊंगा, लेकिन मोर मुकुट धक के अगर मैं आ जाऊं तो मेरे जूते मार
- 1:47:50नाउ, बिलकुल जूते मार वो नकल होगी मेरी कोई।
- 1:47:57ये तुम्हें अगाहा कर गए हैं कृष्ण अगर बुद्ध भी तुम्हें उसी रूप में
- 1:48:03आज मिल जाये तो समझना कोई नकलची ही बनता है।
- 1:48:07कृष्ण कभी भी उस रूप में वैजयंतीमाला।
- 1:48:16और मोर मुकुट धारण करके वंसरी हाथ में लिए नहीं आएँगे, कभी नहीं
- 1:48:21आएँगे। अगर कोई आ जाए तो ये नकल ओके नकल
- 1:48:29चलूँगा, वह तुम्हें मूर्ख बनाता, खुद मूर्ख होगा, उसका कोई निहित
- 1:48:35स्वास्थ्य होगा। तो आचार्यों, समझदारों बस थोड़ी
- 1:48:50सी आखिरी आदम पे निक रहा भीतर जाके देखो क्या वास्तु में जो तुम
- 1:48:57बोल रहे हो? देर इस सम ऑथेंटिसिटी क्या इसमें
- 1:49:05कुछ प्रमाणिकता है या के बुद्धि के लेवल से बोल रहे हो?
- 1:49:09अगर तो बुद्धि के लेवल से बोल रहे हो तो मैंने पहले बता दिया ये
- 1:49:12संसार की परिभाषा बुद्धि जीसको खोज ले।
- 1:49:18वह समझ में आ जाता है और वह संसार होता है बुद्धि जीसको खोज ना पाए
- 1:49:27और बुद्धि से परे हो जाए और जुत में आनंद में डुबो दे और समझ को
- 1:49:34छोड़कर जहाँ जाना पड़े। वह रहस्य है वो तुम हो ये दो
- 1:49:42पहचान मैंने तुम्हें बता दी जो समझ में आ जाए वो परमात्मा में।
- 1:49:54पर वह दुखी रहेगा। व्यक्ति जो समझ में आ जायेगा कभी
- 1:49:57सुखी नहीं होगा, जीने की कलाएं लिखता रहेगा, किताबें दिखेगा
- 1:50:04लेकिन जीने की राह उसे खुद भी नहीं पता होगा।
- 1:50:12जो पहुँच जाता है समझ से पार हो जाता है, समझ को छोड़ देता है
- 1:50:21बुद्धि को छोड़ देता है, अपने भीतर उतर जाता है और फिर फिर जाता
- 1:50:27है उस मानसरोवर में जहाँ रस ही रस है।
- 1:50:32जब तक तुम ताल तल्लियों में डोंट रहे हो, परिभाषाएं गढ़ रहे हो
- 1:50:37रहस्य की, तब तक तुम मुर्ख हो, तुमने उस रस को पिया कह कभी नाचे
- 1:50:48अभिनय किया होगा नाचने का वो तो। एक्टर भी पैसा लेके नाच लेते हैं
- 1:50:57लेकिन मीरा का नाच कुछ अलग बात कहता है।
- 1:51:03वो तुम्हें कहता है कि नाच में रस है।
- 1:51:12जब तुम उस तल पे पहुँच जाओगे तो तुम रस से पूर्ण हो जाओगे रसो
- 1:51:19वैसा उपनिषद का ये शुद्ध बस तुम रस रूप हो गए।
- 1:51:28लेकिन बुद्धि के तल पे कभी रस रूप नहीं होते।
- 1:51:31बुद्धि के तल पर तुम दुगले होते हो ये ठीक बाबा और जगत बाबा अगर
- 1:51:37ऐसा तुम रह गए तो फिर तुमने उस रस को किया नहीं।
- 1:51:41तुमने समझ से काम दिया, तुम बाबा को सुने नहीं।
- 1:51:46महावीर कहते हैं, श्रावक बनो सम्य के श्रवण सम्य के श्रवण का अर्थ
- 1:51:53यही के बुद्धि को छोड़ के सुनो। वह समझ में नहीं आता ये समझ के
- 1:52:00चलो और बुद्धि को खुले छोड़ दो और बुद्धि को भीतर।
- 1:52:06गुम हो जाने दो, उस रस धार में जीसको हम आनंद का सागर कहते हैं
- 1:52:14तुम्हारे अस्तित्व में आनंद होगा, कुंवारी होगी मस्ती होगी, तुम
- 1:52:21झूमोगे नाच होगा। जहाँ वो आ जाता मौसम से पार है
- 1:52:35उसको पिया जाता समझा नहीं उसमें उतरो।
- 1:52:42और बुद्धि को समझ को छोड़ दो संसार समझ में आएगा और आज नहीं कल
- 1:52:51शायद तुम समझ भी जाओ, लेकिन वह जो समझ से पार है वह तो कभी भी।
- 1:52:59समझ में नहीं आएगा। सदा ही अनसुलझा रहस्य रह जाएगा और
- 1:53:03उसे ही रहस्य कहते हैं। कबीर दाल तड़ैया डोलना बंद कर
- 1:53:11देगा, कुछ कमाना जोड़ना बंद कर देगा, ये लक्षण पहचानो।
- 1:53:17तुम नकली और असली की पहचान को बाखूबी कर सको, कै।
- 1:53:25राधे राधे श्याम मिलादे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:53:44गोपाल हर मेरी नैया पार लगा दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे
- 1:54:04श्याम मिलान श्याम मिलान। गोविंदा गोपाल हर राधे राधे
- 1:54:18श्यामिला दे गोविंदा गोपाल हर। मेरी नैया पार लगा दे गोविंदागो
- 1:54:36पाल हरे राधे राधे श्याम मिलाले। गोविंदा गोपाल हर।
- 1:54:57धन्यवाद।