Latest / Baba ji Vijay Vats / 4 Oct 25 - आप शिष्यों को प्रताड़ित क्यों करते हो? जबकि दूसरे गुरु बड़ा स्नेहपूर्ण व्यवहार करते हैं!
Transcript
- 0:11रमेश कुमार बाबा आप अपने शिष्यों को इतना प्रताड़ित क्यों करते
- 0:21हैं? जबकि दूसरे गुरु?
- 0:28शिष्यों से बड़ा सिंह पूर्ण व्यवहार करते हैं।
- 0:38बड़ा मजेदार सवाल है, मैं शिष्यों को प्रताड़ित नहीं करता।
- 0:55जो शिष्य के नाम पे झूठा शिक्षा जाता है, उसे प्रताड़ित और
- 1:08क्योंकि मुझे तुम्हारी फिक्र है, मुझे तुम्हारी चिंता है।
- 1:17कैसे तुम पार कर जाओ इन बाधाओं को और लबालब भरे हुए समर्थ कुंड में
- 1:25स्नान कर लो। आज कल ये खो गया है हमारे जमाने
- 1:39में। टीचर भी ऐसा ही करते थे, डंडों से
- 1:44पीटते थे, माँ बाप भी ऐसा करते थे और गुरु तो बहुत करते थे।
- 2:01वो सही भी थे। माँ बाप तो चाहे ऐसा न करें, आपका
- 2:15खरीदा हुआ गुरु भी ऐसा न करें, क्योंकि वह तो अपनी पगार ले लेता
- 2:20है। और उसका काम है आपके नूरोंस भरना
- 2:28नहीं भरोगे तो उसका कोई कसूर नहीं पढ़ लिख जाओगे, राज़ करोगे नहीं
- 2:43पढ़ोगे उसका क्या बिगड़ता है? उसने कोई ठेका थोड़ा ले रखा है,
- 2:46लेकिन मैंने ठेका ले रखा है। मुसीबत यह है जब तुम मेरे पास आते
- 2:56हो, गड़बड़ी करते हो और क्योंकि मैं तुम्हें वचन दे चुका हूँ।
- 3:10इसलिए मैंने आपके हर हालात का जायजा लेना है, मेरा काम है, आपके
- 3:21अहंकार को तोड़ना है, गुरु का काम भी यही होता है।
- 3:28गुरु का काम आपको पलूसन नहीं होता, उससे आपका अहंकार बढ़ेगा।
- 3:37मैं सदा ही वो काम करूँगा जिससे आपका अहंकार टूटे है।
- 3:44बड़े बड़े अंकार को लिए तो आपको जनम जन्मा बीत गए।
- 3:52आपके भीतर शांति नहीं है, आपका कोई कहना संतुष्ट नहीं हुआ।
- 4:01किसी कोने में अमृत नहीं बरसो कितने जन्मो से तुम इस शृंकार को
- 4:09लिए, फिर? अम्मा मुश्किल तुम्हें गुरु मिलता
- 4:15है और गुरु भी अगर चिकनी चपड़ी कहने वाला मिल जाए तो फिर
- 4:22तुम्हारा अहंकार बढ़ जाएगा। गुरु भी अगर तुम्हारी महिमा मंडन
- 4:29करना शुरू कर दे तो फिर वो गुरु नहीं है सुन के लेना।
- 4:36तुम पहले से ही अहंकार के रोग से ग्रस्त तो भरे पड़े और इसीलिए ही
- 4:43तुम मुक्त नहीं हो। तुम मोह का भ्रम छोड़ ही नहीं
- 4:50सकते। मैं शरीर हूँ, मेरा ये नाम है
- 4:55मेरा, ये नाम है मेरे माँ बाप ये हैं मेरा परिचय ये है तुम परिचय
- 5:00को अपना होना समझ ले जाओ। परिचय तुम्हारा परिचय अलग है।
- 5:11तुम अलग हो और सच्चा गुरु तुम्हारे परिचय को तो होता है।
- 5:22तुम कहते हो मेरा नाम ये मेरे पिता माता का नाम ये।
- 5:27हमारी रेजीडेंसी है, हम उस देश के वासी हैं जिससे देश में गंगा बहती
- 5:36है। इन सब बातों से तुम्हारा अंकार
- 5:39करता हूँ। अगर गुरु हमारे अहंकार का पोषण
- 5:54करना शुरू कर दे तो फिर तो वो भांडों वाली बात होगी जैसे भांड।
- 6:03पुराने जमाने में राजाओं के रखे होते थे।
- 6:06महिमामंडन करने के लिए जैसे ही कोई बाहर का अतिथि आता, उसके
- 6:14सामने वंशावली का गान करते हैं। केन के वंश में ऐसे ऐसे सूर्य भी।
- 6:25राजा अक्सर अहंकारी होते है, अहंकार ही होते है।
- 6:30जिसके पास अहंकार नहीं वह राज़ करेगा कि ये बड़ी उलटी बात है
- 6:39जिसके पास अहंकार नहीं। वह शांत हो गया, तृप्त हो गया,
- 6:45उसकी आग बूझ गई, वह क्यों बुखेड़ा छेड़ेगा, क्यों गधों की तरफ भारत
- 6:53ढोएगा देश का? तुम पहले से ही भरकर और ऊपर से
- 7:10गुरु की तुम्हारी चिकन चिपड़ी सनाना शुरू कर दे तो क्या
- 7:17तुम्हारा अंग का टूटेगा? लेकिन गुरु की?
- 7:24गुरु की ड्यूटी है, कर्तव्य है तुम्हारा अहंकार जो झूठा है तुमने
- 7:30बनाया है उसको तोड़ देना और यह टूटेगा गुरु लगेगा या कटु व्यवहार
- 7:42है? बहुत से लोग छोड़ देते हैं।
- 7:49बहुत से लोग चले जाते हैं। मेरे के शिष्य ने दूसरे शिष्य को
- 7:56पूछ लिया, अब क्या बात बाबा के पास नहीं जाते तो उसका सुख उसका
- 8:03उत्तर सुन के आप हैरान हो जाते? उसने कहा कौन बेइज्जती करवाए?
- 8:12मतलब से तो है कि तुम अहंकार को तोड़ना नहीं चाहिए।
- 8:18तुम चाहते हो अहंकार को बढ़ाना, फिर संसार में ही क्यों नहीं बने
- 8:22रहते? धन कमाओ, पदवी कमाओ, मान सम्मान
- 8:29लोग तुम्हारे पांव चुमे गए पांव धो धो के पिया कर रहे हैं लेकिन
- 8:33ये होगा नकली नकली अंकार बढ़ाना हो तो दुनिया में दुनिया के हिसाब
- 8:44से। अपनी लकीर को बड़ी करना सीखो,
- 8:49तुम्हारा अहंकार बढ़ेगा, तुम्हारी जयजकार होगी, जयजकार होगी,
- 9:01तुम्हारे अहंकार को मज़ा आएगा। अहंकार को जयजकार में ही रस होता
- 9:08है। इसलिए तुम गद्दियाँ तलाशते हो,
- 9:12इसलिए तुम धनपति एक नंबर का होना चाहते हो।
- 9:15धनपति छोड़ो तुम रेसलर भी एक नंबर का होना चाहते हो।
- 9:22पहलवान भी एक नंबर तुम एक नंबर होना चाहते हो, अपने बच्चों को भी
- 9:26ये। बिमारी शौक के जाना चाहते हो कि
- 9:29देखो दो नंबर पे मत आ जाना सदा एक नंबर ही बने रहना तो आने वाले
- 9:38पुश्तों को तुम्हारी या दी हुई सौगात?
- 9:44आगे आगे बढ़ती रहती है और अहंकार कभी टूटता नहीं।
- 9:49ऐसा जन्म जन्म से होता आया है। एक यह भी कारण है हमारे ना
- 9:54पहुंचने का जब तक कॉम्पिटिशन रहेगा तुम्हारे मन में।
- 10:02जब तक तुम कंपॅरिज़न करते रहोगे अपने आपको दूसरों से, तब तक
- 10:10तुम्हारा अंक गटेगा नहीं पड़ेगा। गुरु होता किसलिए और मेरे पास तुम
- 10:20तब है ना? जब मैं तुम्हें कहूं कि ये लो तबा
- 10:29और तवे के ऊपर से इसके पिछले भाग में से खालक निकालो और मुँह को मर
- 10:37लो और बाजार में निकालो। जो घर बार अपने चले हमारे साथ जब
- 10:46ऐसी हिम्मत आजाये तो शिष्य बनने के लिए मेरे पास आना नहीं तो मत
- 10:50आना। ये बड़ा साहसी कलम है।
- 11:00अगर तुमने यह सोचा कि मैं तुम्हें अधीन मांग लूँगा, मैं तुम्हें
- 11:08पुरस्कृत करूँगा तो तुम गलत, फिर तुम मेरे पास मत आना क्योंकि
- 11:16तुम्हें वो पर्व स्वाद ना मिल पाएगा।
- 11:21जो मैंने चखा और जो मैं जहाँ तुम्हें पहुंचाना चाहता हूँ ये
- 11:28कैसे मिल जाए इसका अता पता इसका और छोर इसका ठोर ठिकाना।
- 11:38इसकी विधि इसका मार्ग मैं ही जानता हूँ तुमने ज़रा सी कर बढ़
- 11:46के तुमने आड़े हाथ सुनो और मैं कोई व्यापारी थोड़ी।
- 11:57ना मैंने संख्या बढ़ानी है, ना मैंने तुम्हारे से चरण पुजवाने
- 12:02हैं ना मैंने तुमसे कोई डेरे की रोगियों बनवानी है, ना संगत की
- 12:09सेवा करवानी है। कुछ भी तो काम नहीं लेना।
- 12:14मैंने मुझे कोई काम नहीं। तब से कोई काम नहीं लेना है तो
- 12:22समझो बात को अंकार जब तक नहीं टूटेगा तुम्हारे भीतर वो मीठा रस
- 12:27का स्वाद नहीं आ पाएगा और अंकार चाहता है कि मैं कभी ना टूटू।
- 12:36तो कैसे होगा मसला हल? अगर मैंने चार शब्द कह दिए
- 12:47तुम्हारे सारी उम्र वो रड़कते रहे, अगर ऐसी वृत्ति है।
- 12:57तो किसने बुलाया आपको? मैं तो नहीं बुलाती, आप ही गुहार
- 13:07लगाते हो? बाबा दुखी हैं बाबा उस आनंद के रस
- 13:13की एक बूंद भी अभी तक नहीं की। हम कितने अभागे हैं आप थोड़ा सा
- 13:24समय पे अगर तो चाहिए मान सन्मान, पांव धो धो के लोकप्रिय या कार्य
- 13:34करें। रोड शो निकालें, फूल बरसाएं,
- 13:40अखबार हुए आपको ना मिले, फिर तो संसार के पदार्थों को कमाने में
- 13:53लग जाना, फिर यहाँ आने की जल्दी मत करना, बिल्कुल मत आना।
- 14:01या किसी ऐसे गुरु के पास चले जाना बहुत से गुरु बैठे हैं जो
- 14:08तुम्हारे अहंकार को परुसेंगे पोषण देंगे और पलूस पुलुस के तुमसे काम
- 14:16ये लो डेरे की रोगियों बनाओ, ये लो सेवा कर लो।
- 14:20और तुम्हें भी बड़ा मज़ा आता है कि गुरु तुम्हें इतना अधीमान दे
- 14:26रहा है, ये अहंकार को मज़ा आता है, इससे अहंकार बढ़ता है, ध्यान
- 14:33रखना सेवा का मंडली से भी मैं कहता हूँ अगर सेवा करने के बाद
- 14:38तुम्हारा अहंकार बढ़ता है। तो आगे से बताना।
- 14:43फिर तो मैं भी आपके लिए जहर का पहला बन जाऊंगा।
- 14:49अगर सेवा करने के बाद आपके भीतर नम्रता आ जाती है, मिठास आता है,
- 14:54आनंद आ जाता है तो फिर जरूर आना। अगर सेवा करते वक्त तो तुम्हारे
- 15:02मन में ये बात आ जाये अगर मैं ना होता तो ये काम ना चलता तो फिर
- 15:11कहीं आप गलती खा गए, गच्चा खा गए। फिर आगे से एक काम करना, आगे से
- 15:19मत आना, सेवा जिसने करवानी है, जिसे करवानी है करवा लेगा।
- 15:32तुम कष्ट मत कर और जो दीक्षा लेने आता है, अगर वो कहता है कि बाबा
- 15:40आप हमारे। बड़े तीखे, तेज तर्रार शब्दों का
- 15:45प्रयोग करते हो। यही तो मेरा धंधा है।
- 15:50पुरानी जरजर हुई इमारतों को छैनी हथौड़ी से और न टूटेंगे तो घणों
- 15:56का इस्तेमाल करूँगा और डांस से इसको घेर दूंगा।
- 16:01जड़ल तक इसको हिला दूंगा, नई नींव खो दूंगा, नई संरचना होगी और नए
- 16:10महल उसाले जाएंगे। उसमें अमृत वर्षा का है।
- 16:21इसलिए ऐसे व्यक्ति को द्विज कहा गया।
- 16:24तुम्हारा जन्म दूसरी बार फिर होगा।
- 16:26एक बार तो माँ के गर्व से हो गया एक बार गुरु के सांनिध्य में तुम
- 16:32द्विज बन जाओगे, दूसरा जन्म होगा। बच्चों ने पूछा बेटा?
- 16:42आप बड़े कटु शब्दों का इस्तेमाल करते हो, मुझे कटु शब्दों का
- 16:53इस्तेमाल करने की हैबिट नहीं है। नहीं ये मेरा शोक है इट इस नॉट
- 17:00मैं हार्वे। मैं किसी कारण से करता हूँ इसका
- 17:08कारण है तुम्हारे उस रोग को काट देना जो तुम्हें दुखी करता है तंग
- 17:14करता है जैसे सर्जन काट देता है तुम्हारे।
- 17:20कैंसराइटिस के बड़े हुए टिश्यू को बाहर निकाल देता है सड़े गला
- 17:24टिश्यू ऐसे ही अहंकार तुम्हारा सड़ा गला टिश्यू यह जब तक बना
- 17:31रहेगा तुम दर्द से करते रहो के सारी रात नींद नहीं आएगी।
- 17:38और फिर रोओगे चलाओगे कहोगे बाबा दुखी हूँ तो बाबा तुम्हारा सर्जरी
- 17:47करेगा और सर्जरी करते वो गला हुआ अंगर निकाल देगा और तुम अमृत मैं
- 17:55हो जाओगे। यह लबादा था तुम्हारे सर और लबादे
- 18:03को काट फेंकेंगे इस लबादे को तुम बचाना चाहते हो पर गुरु जानता है
- 18:11कि यही तो रोग है दुर्गंध। अन्यथा तुम तो सुगंधि के भाग हो,
- 18:18तुम्हारे भीतर तो सुगंधि के कमल खेलते हैं, बस एक ही रोग तुम्हारे
- 18:25ऊपर नगाब की तरह उड़ा हुआ है, वो उड़ा हुआ है दुर्गंध अंकार के
- 18:32दुर्गंध। ये कैंसरराइटिस का पूरा इसके भीतर
- 18:37जम हुई। मवाद की दुर्गंध तुम्हें सताती
- 18:40रहती है और वो दुर्गंध जब तुम सूंघ नहीं सकते, तुम्हें दुर्गंध
- 18:47आती है, कह आती है, बोर हो जाते हैं।
- 18:53तो फिर तुम चिल्लाते हो बाबा कोई उपाय करो ना सच्चा गुरु ऐसा उपाय
- 19:07अगर तुम्हें कुछ ऐसा लगता है। कि मैं तेज तर्रार बातें करके
- 19:16तुम्हारे अंकार को ठेस पहुंचाता हूँ तो यह मेरा धंधा है भाई।
- 19:23जैसे सर्जन का धंधा होता है। तुम्हारे व्यर्थ के बड़े हुए
- 19:27अंगों को काट के बाहर फेंक देना जो गल चूके हैं, जिनका कोई फंक्शन
- 19:31न रहा हो तभी तो तुम्हारा रोग खत्म होगा, अन्यथा तुम रोगमुक्त
- 19:41हो। और फिर दोनों एक्शन तुम्हारे पास
- 19:47है। ना तो तुम बुलाए गए हो और ना ही
- 19:51तुम्हें जाने से कोई रोकता है। कितने चले गए, कितने उन गुरुओं की
- 19:57शरण में बैठ गए जो उनको पलूस रहे? लोरी सुला रहे हैं जो उनके गुणों
- 20:07की व्याख्या कर रहे हैं, गुणगान कर रहे हैं।
- 20:10वंशावली का बस ये गुरु नहीं है, ये भाँट है।
- 20:20और बांटों से कभी तुम्हें तुम्हारा ज्ञान हो जाएगा कि वो
- 20:27अरे यू ये अपेक्षा मत कर बांटों को खुद ही पता है कि वो कौन है
- 20:36बड़ा सीधा समझला है। सर्जरी का दर्द सहना पड़ेगा जो
- 20:46अहंकार तुम्हें तुम्हारी जिंदगी को नर्क बनाता है, दर्द मैं बना
- 20:54देता है। रातों की नींद हराम जिनका चयन
- 20:59हराओ ना सुख से बैठ सकते हो ना शांति की छाया जहाँ जाते हो वहाँ
- 21:11गंदगी फैलातें हो अहंकार। मैं मैं इसे मैं को ही काटना है
- 21:22और उस काटने का फॉर्मूला गुरु अच्छी तरह से जानता है, फिर मैं
- 21:27जो कर रहा हूँ अपने ढंग से बिल्कुल सही कर रहा हूँ।
- 21:35बस अब बात तो तुम्हारी तुम अपने रोग की निवृत्ति के लिए आए ही
- 21:41नहीं होंगे, अगर तुम्हें मेरी बातें जोबती गुरू गुरू बाघरे गुरु
- 21:49करे योर्दास। अगर गुरु बाठे भी मरना शुरू कर दे
- 21:59तो समझे ना ये भी कोई तकनीक होगी ये भी कोई प्रोसेसिंग?
- 22:10गुरु जब भेजे नर्क में तुम्हें लगे कि नर्क है अपने अहंकार को
- 22:15खोना जब तुम खोओगे सर्जरी होगी, दर्द होगा चिल्लाओगे तो सर की रखी
- 22:29वाश। इस दर्द के तूफान में से निकलते
- 22:35ही स्वर्ग के साम्राज्य में प्रवेश कर पाऊंगा।
- 22:51जिसने नरक का वो कठिन छोर नहीं देखा।
- 22:59वह स्वर्ग का साम्राज्य भी ना तो पुत्र ये तुम्हारा रोग है और
- 23:09ध्यान रखना जीसको भी मेरी बातें लड़ जाती हूँ, वो सभी सुन ले।
- 23:19इसलिए मैं थोड़ी सी फलोवर रखता हूँ, ये नहीं चुनें और उनमें से
- 23:25कुछ ऐसे निकल जाते हैं ये धोखा देते हैं, उनको भी नहीं पता होता
- 23:32मैं भी कहीं चुप जाता हूँ शिष्य को।
- 23:39प्रचुर मात्रा में सबर रखना पड़ेगा।
- 23:43वो मेरे सबर का इम्तिहान लेते हैं, वो मेरे सबर का इम्तिहान
- 23:51लेते हैं, बेचारे हैं, मालूम नहीं।
- 23:59कि मुर्दों के पास सबर ही तो होता है, वे चाह रहे हैं।
- 24:08मालूम नहीं कि मुर्दों के पास सबर ही तो होता है, अगर मेरे द्वार पे
- 24:14आए। तो इतना सबर ले के आना बहुत जगह
- 24:20काम आएगा, धीरज में काम आएगा, पहुंचने में देरी हो जाएगी तो तुम
- 24:26जल्दबाजी मत करना। बाबा पहुंचे अभी सर्जरी हो रही
- 24:31है, वक्त लगेगा। सब्र इतना हो कि मुर्दे की तरह
- 24:41मुर्दे में बड़ा सब्र होता है। अहंकारी में सब्र ही तो नहीं होता
- 24:47है। मुर्दे में सब्र ही तो होता है।
- 24:52वो मेरे सब्र का इम्तिहान लेते हैं।
- 24:56बेचारे हैं। मालूम नहीं कि मुर्दे में सब्र ही
- 25:00तो होता है ऐसा बन के आना मेरे पास अगर आओ तो।
- 25:11अनीसा किसने पीले चावल भेजे हैं? तुने ऐसा कुछ है?
- 25:18मैं तो पागलपन नहीं करता हूँ। कौन अपने मधुर रस का प्यारा छोड़
- 25:24कर आपसे जगाई मारेगा? मैं भी उस परम प्याले को छोड़ कर
- 25:36बाहर आऊंगा। जाम को आधा जाम पी लिया होगा और
- 25:44आधा शेष रहा होगा उसको छोड़ के आऊंगा।
- 25:52कि कोई आया है, चलो पहले उसका कष्ट निवारण कर दे और जब्त में
- 26:05थोड़ी सी शराब पिलाऊंगा। तब तुम्हें पता चलेगा कि उस रोग
- 26:17के बदले उसकी कीमत चुका के तुमने सदा के लिए एक अमृत पाली और।
- 26:27कुछ भी लादे शाकिया धो कुट पीला दे शाकिआ पाकी मेरे
- 26:57करोड़ों धो कुट पीला दे शाकि। अगर वह अमृत पीने की तमन्ना है,
- 27:15उस लोग की शराब पीने की तमन्ना है तो आ जाना, लेकिन ये प्रश्न कहीं
- 27:26गहरे अंत में आया, तुमने मुझे ठीक से सुना।
- 27:36और अगर तुम्हें बार बार फिर भी ऐसा लगे तो फिर तुम जैसे ही यहाँ
- 27:42बैठे या जैसे तुम यहाँ से चले गए बराबर ही होगा तुम यहाँ से कुछ
- 27:47नहीं लेके जाओ तुम यहाँ से कुछ तभी लेके जाओगे।
- 27:57अगर तुम शांत अपने घर में कोने में बैठकर अपने भीतर उतर के
- 28:01आनंदित हो जाओ, तब तुमने मुझे कुछ जानो, मेरा स्वाद तुमने कुछ रखा,
- 28:10तुम अपने भीतर उतरे। मैं सिर्फ कारण बनता हूँ।
- 28:19मैं सिर्फ कारण बनता हूँ और तुम उस कारण के जरिए मध्या कांड करते
- 28:25हो जो मध्य तुम खुद हो। जो समुद्र तुम खुद हो मध्य के
- 28:35शराब के सम्रथ मैं उसको पीने का मात्र कारण हूँ और अगर तुम्हें
- 28:46कुछ ऐसा लगे हमें मिला तो खुश है। तो फिर यहाँ से दौड़ जाना तो जैसे
- 28:58ऐसा नहीं कहा कि मेरे प्रभु के राज्य में कुछ थोड़े से लोग
- 29:02प्रवेश करेंगे जो मासूम हो गए बच्चों की तरह इनोसेंट जस्ट लाइक
- 29:10के चार। वैसा ही मैं जानता हूँ।
- 29:17मेरे पास कुछ गणित के लोग ही बचे रहेंगे, बहू तेरे तो इसी रोग के
- 29:28कारण चले जाएंगे। कौन बेइज्जती करवाए?
- 29:37सीधी सीधी बात तुम्हें बताती है, भीखा अमीर था, बड़ा उसका अपेक्षा
- 29:51चलता था बाजार में वैसे गणपति सेठ था।
- 30:00और तुम्हें पता है जो सेठ बनते हैं वो ठुग्गी ठुग्गी मारकी बनते
- 30:04हैं पप्पा भाजन होवे, इकट्ठी मोया, संग न जात।
- 30:21इधर से भी इकट्ठा कर लिया, उधर से भी जेब काट ली, उधर से भी खीसरा
- 30:26काट लिया। हक भराया नान का उस सुवर उस गाह
- 30:35है। लेकिन भीतर से अंत में से एक
- 30:45आवाज़ उठी थी, आवाज़ उठी की सारी उम्र बीत गई, वो शांत एक बात कह
- 30:55करते है शराब का नसम। सारी।
- 31:03उम्र गँवा ले तू ज़िन्दगी ये कुछ ना जहाँ विच खटिया, सारी उम्र
- 31:16गँवा ले तू। जिंदड़ी है कुछ न जहाँ विच खटिया।
- 31:23सारी उम्र की है हे ज़िंदड़ी है तुने संसार में कुछ कमाया है बस
- 31:34क्या है कि? पैसा दे ला इनकी खनखना क्या यही
- 31:41कुछ होता है? नहीं फिर इनमे तो रस नहीं कोई
- 31:49भीतर से यह बात उभरी एक कोने से। और यह आवाज उस आत्मा की थी जो
- 32:03प्यासी है, जो पानी वांका है एक कहावत है कि मक्का के भीतर एक
- 32:11पत्थर रखा। मैं पानी मांगता, जीस दिन उसको
- 32:15किसी ने पानी बना दिया वह शिवलिंग है लेकिन यह कहानी है लिखी
- 32:26तुम्हारे शास्त्रों में है लेकिन कहानी है तुम्हारा भीतर भी उस
- 32:31पानी को। तुम भी भीतर से असंतुष्ट प्रत्येक
- 32:44की आत्मा भीतर से उसी पानी की तलाश में है, और यह एक प्रतीक था।
- 32:53कि जीस दिन किसी ने पानी पिला दिया उस दिन ये बोलना बंद कर देगा
- 33:07जैसे आनंद को पी के उसको बोलना ना मुमकिन हो जाता है।
- 33:16जौं गूंका गुड़ खाई के कहें कौन मुख स्वाद जब भीतर से आवाज़ आई तो
- 33:30पास के थोड़ी सी दूर पे ग्राम के अंदर कुठिया बना के शांत महूर में
- 33:36गुरु बैठ। गुरु के पास चले गए तो संत कबीर
- 33:47के पास चले गए। पास ही की कुटिया में बैठे थे संत
- 33:54कबीर, बड़े रहस्यमयी संत। उन्होंने बीखा को देखा, वह बीखा
- 34:05को जानता था, बीखा केंद्र का आज मैं आपकी शरण में किसी ने भीतर से
- 34:17पुकारा जिंदड़ी बीत गई। वह रस जिसकी बात संत करते वो नहीं
- 34:28मिला, सुख मिला, स्वाद मिला, सुख के साधन मिले, आराम के साधन मिले,
- 34:3665 का मिला, परिवार मिला, पुत्र, पुत्र आदि मिले।
- 34:41सब मिला लेकिन वहरह से जिसकी बात संत करता है वह नहीं मिला तो कबीर
- 34:51जानते थे कि अमीर बनता है। सारे बाजार में इसका पैसा चलता है
- 34:57और भीखा भी। बड़े शानदार संत हुए बात की।
- 35:07खुद कबीर ने ये बात कही अपने मुख से सीखा भाई अन्य भाई जो गुरु कया
- 35:14सोई करे दिखा औरों से अलग है गुरु ने जो कह दिया शब्द शप अक्षरश।
- 35:26उसका कार्य किया वह ठीक अगर तुम भी सच्चे संत बनना चाहते हो तो
- 35:40सच्चे शिष्य भी बनना, ये दोनों पैरेलल।
- 35:49सच्चे संत बनना चाहती हो तो सबसे पहले बाबा ने कहा शिष्य बना सिख
- 35:59तो कबीर कहने लगे तुम ऐसा करो, अच्छे शानदार कपड़े पहन रखे।
- 36:09बढ़िया बाल वगैरह बहा रखे। खुशबूदार सेंटर लगा रखा है और संत
- 36:17व्यक्ति की कमजोरी को पहचान जाता है।
- 36:23कबीर कहने लगे तुम बाहर जाओ। सिर के ऊपर थोड़ा सा रेट्स फेंक
- 36:27लो मुँह के पर रेत मर लो, कोई आस पास कॉलस हो जाए तो कॉलस मर लो बे
- 36:38तरतीब के हो जाओ बे ढंग के हो जाओ।
- 36:43आधा मुँह काला कर लो आधा मुँह वैसे ही रहने दो, अब बाजार में
- 36:49चक्कर काट के आ जाओ। अगर मेरा शिष्य बनना है तो यह
- 36:54शर्त है देखें। गुर को ऐसे काम करने का क्योंकि
- 37:10जीस अहंकार को तोड़ना है। वह पलूसने से सहजे सहजे नहीं
- 37:17टूटे। उसको कुछ ऊंट पटांग काम सूखने
- 37:22होंगे, जिससे लोग असहाय हो। और उनका गुमान टूटे और मैं शरीर
- 37:30हूँ। आखिर में तो यह भाव टूटता अगर ये
- 37:35भाव ना टूटा तो गुरु का फॉर्मूला र सुना है तभी का ना वही किया।
- 37:44जो कभी रेत की ढेरी से रेत उठाए, ऊपर पटक लिया, सारे कपड़े खराब हो
- 37:52गए। बालों के भीतर मुँह के ऊपर कालस
- 37:56पड़ी थी वह मर लिया मुँह एक तरफ से ही काला कर लिया।
- 38:03एक तरफ से रेत फेंक लिया, पागलों की तरह हो गया, बाल बिखर गए और
- 38:10बाजार में निकला अस्त व्यस्त कपड़े कुछ न बोलें लोग उसको देख
- 38:19के हँसे। कौन भीखा है?
- 38:23और दाढ़ी मारे जो अहंकार खुद अपसेट है, दूसरे व्यक्ति को अपसेट
- 38:38देख कर हंसता है जबकि उसे पता नहीं तुम भी ऐसे ही पागल हो।
- 38:46यह तो दिखावा कर रहा है। लेकिन तुमने तो दिखावा भी नहीं,
- 38:53तुम तो अपने आप को सर कहते हो, तुम तो अपने आप को अचार कहते हो,
- 39:01तुम तो पैर बजवाने में व्यस्त हो। हम तो नारे लगवाने में व्यस्त हो
- 39:12सुबह निकला था सारे बाजार, गली गली, कोने कोने सब छान मरे घूम के
- 39:22आना है सारा शहर। पर बड़ी मुश्किल बात है।
- 39:31थक गया, सांझ हो गई और लोगों ने जैसे ही भीखा को देखा, सभी गरजदार
- 39:40थे। भीखा।
- 39:43तो खूब ज़ोर से ताली बिजाई हाथ पे हाथ रख खूब वहाँ से अट्टहास करके
- 39:51और कहते चलो इसके कार्य से तो पीछा छूटा, यह तो अब ना मांगेगा।
- 40:02पहले रोज़ कहता था मेरा ऋण वापस कर अब दंग नहीं करे गया।
- 40:10काम से बड़ा जश्न मना उस टाइम काशी नगरी में।
- 40:24और सांझ डले थका हारा दिन भर का भूखा कबीर के पास आया तब तक निधार
- 40:32हो गया था, कबीर के पांव में गिर गया हाल बेहाल देखकर कबीर को बड़ा
- 40:37तरस आया, कबीर ने कहा तुम ऐसे करो।
- 40:42नहा लो नहा के खाना, खालो और विशंक
- 41:00आज वो ज़माना न रहा क्योंकि आज वो गुरु नहर है जो आपके अज्ञान के
- 41:09मूल तत्व को पहचानते हैं। कि आप दुखी हो किसलिए?
- 41:17नौ गृणा देते हैं कि तुम धन का अभाव है, इसलिए धन कमाओ लोग
- 41:24बेइज्जती करते हैं, सम्मान नहीं देते इसलिए सम्मान कमाओ।
- 41:29ओहदा नहीं है। ओहदा कमाओ डिग्री कमाओ कोई बड़े
- 41:33कोलेक्टर लग जाओ। उनको खुद ही पता नहीं कि इसका
- 41:37असली रोग है। असली रोग हमेशा जड़ों में छुपा
- 41:41होता है और जड़ें छिपी होती हैं। जड़े धरती के बहुत भीतर गहरी हो,
- 41:50तुम उनको कोई विरला ही जान सकता है।
- 41:57तुम्हारा पी रोग है गहरा रोग, अहंकार।
- 42:06एक इल्ल्यूज़न जिसने तुम्हारा जीवन जीना महाल कर रखा है, वह
- 42:13इल्ल्यूज़न गलत, बस इसको तोड़ें कैसे?
- 42:19बहुत पुराना रोग है जीस दिन यह टूट जाए।
- 42:24और खुद से न टूटेगा। इसलिए संतों ने कहा गुर होना
- 42:29आवश्यक है। अहंकार खुद से टूट जाए, यह करीब
- 42:38के नामुमकिन सा लगता है। गुरु भी टूट जाए अगर गुरु के
- 42:48सान्निध्य में भी टूट जाए तो भी भले ही गुरु के सान्निध्य में भी
- 42:55हम बने रहते हैं, हमारा अहंकार टूटने की बजाय टस्से मस नहीं
- 43:01होता। हम भाग जाते हैं वहाँ से।
- 43:05और बल्कि गुरु को ही बलपरा के नसों को ऐसा सब कुछ करके भी सब
- 43:21बजाओ गए। लेकिन एक चीज़ है मेहरूम हो जाओ
- 43:35मेहरूम किसी से हो जाओगे रस आनंद शांति से।
- 43:43उस ठंड से शीतलता से उस प्रेम से गुरु के बिना टूटना करीब करीब
- 43:59असम्भव है। गुरु के सांनिध्य में भी टूट जाए
- 44:06तो भला है। और गुरु का बस यही प्रयोजन है कि
- 44:12किसी न किसी तरह तुम्हारा जहाँ इल्यूज़न खत्म हो जाए, भ्रम टूट
- 44:18जाए और भ्रम टूटेगा, देखने से मानने से देखने से टूटेगा मानने
- 44:27से शुरुआत होगी भला? और तुम चर पड़ोगे उस डगर पे और
- 44:33धीरे धीरे धीरे धीरे छैनी हथौड़ी अपना काम करेगी और 1 दिन मूर्ति
- 44:38बन जाएगी। तो अगर गुरु ऐसा बोलता है।
- 44:49गुर गू के गुर भंवरे गुरु के रे जोता गुरु को पता है तुम्हारी रोग
- 44:53क्या है। डॉक्टर कहें के इंजेक्शन लगेगा
- 44:59सर्जन कहें के उपरेठ होगा तो सर्जन तुम्हारी बिमारी को जानता
- 45:05है। गुरु भी तुम्हारी गहरी बिमारी को
- 45:10जानता है। जद भी जब बाहर से दिखती नहीं,
- 45:13इसकी जड़ें गहरी हैं। पातान।
- 45:27भी का निहाल हो गया। उसने सब लोगों के पैसे छोड़ दिए
- 45:36लेकिन इसके बदले में वो धन पा लिया जीसको मीरा कहती है राम धन
- 45:45पायो। जीसको मलूका कहते हैं।
- 45:54कागा सब कुछ खायो। किचन चुन।
- 46:07खाइयो औ म काग सबचन खाइयो किचन चुन।
- 46:24खयो मा दो। नैना मत।
- 46:33खयो मुहर्रम दरस की। आ आ का ग सब तनखाई कह तू मलोकरा?
- 47:07छोड़ दे पराईया कहते मलूकरा छाड़ दे पराईया।
- 47:27रामधनु पईक शिर्का किसर जाइए। सरण जाइए जीना बंधु जीना ना मेरी
- 47:56सुध लीजिए। मेरी सुध लीजिए देना बंधु देना
- 48:12नाम मेरी सुध। जी मेरे सुध ली जी है।
- 48:34मेरे। सुध ले जी है।
- 48:41देना बंद हो। देना ना मेरी सोच।
- 48:49लीजिए मेरी सोच लीजिए। एसएस याचिक बनना होगा।
- 49:09उसके द्वार और ध्यान रखना कुछ मांगना नहीं बस।
- 49:21सिर्फ पुकार की मेरी ओर निहारले थोड़ा सा सच्चा साहब ये नजर करें
- 49:28ठिकाबोहन से कर सुध लो मेरी मलूकदास कहते हैं, मुझे कुछ नहीं
- 49:36चाहिए, सिर्फ मेरी सुध लो। नजर भर के देख लो मेरी तरफ बस
- 49:50तुमने जो देखा है ऐसी नजर भर के तो मैं निहाल हो जाऊंगा।
- 49:58फिर मैंने सभी तीर्थ स्नान कर लिया, उससे पहले तो सभी तीर्थ
- 50:03स्नान किये। बेकार सच्चा तीर्थ स्थान यही कि
- 50:09तुम नजर भर के नजर की मेरे ऊपर देख।
- 50:23सब न जियाँ का एक दाता सो मैं भीषर न जाई सभी जगत का पालन करने
- 50:33वाला बनाने वाला चलाने वाला वह मुझे कहीं भीषर न जाए।
- 50:42भगत को फिक्र होता है, कहे दाता चाहे सब छीन ले लेकिन अपनी नजर ना
- 50:54छीन लेना। मुझे बिसरा मत देना, अपनी नजर के
- 51:05छाये में रखना यही मधु। काकी शरण जाई है, बस वह अंतिम
- 51:29शरण, उसके बाद कोई शरण नहीं धन की शरण आरजे गद्दियों की शरण आरजे
- 51:41मान सम्मान की शरण। पुत्रपुत्राति परिवार जन आरजी
- 51:51स्थाई नहीं, स्थाई शरण तो कहते राम रामधन पाई के फिर काकी शरण
- 52:01चली। अगर गुरु तुम्हारे रोग को काटकर
- 52:09तुम्हें सवस्थ ना कर दे सवस्थ यानी सवस्थ तुम अपने में स्थित हो
- 52:15जाओ, रोग कट जाए। यह सजन तुम्हारे रोग को काट के
- 52:23बाहर फेंक देता है और तुम सवस्थ हो जाते हो यानी स्वस्थित हो जाते
- 52:29हो, स्वयं में स्थित हो जाते हो, अपने होने में स्थित हो जाते हो
- 52:34और वह बड़ा मजेदार है बस अगर यह मिल गया।
- 52:40तो सारा जहाँ मिल गया तुम जो मिल गए हो तो जहाँ मिल गया एक भटके
- 52:58हुए, राही को कारवां। तुम जब मिल गए हो तो जहान मिल
- 53:09गया। एक भटके हुए राही को कारवान मिल
- 53:15गया। धन्यवाद।