Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 Jul 25 - सूक्षम जगत से कुछ प्रश्न! सूत्रों से भरी हुई आत्मबोध की गूढ़ बातें! Full Practical.
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- 0:05निकुंज रतन प्रणाम बाबा जी, एक कहावत है पंजाबियों में।
- 0:23शेर के मारे हुए पे गीदड़ कलोल करते हैं निकुंज रतन शेर के मारे
- 0:40हुए पर। गीदड़ कलोल करते हैं।
- 0:45हावड़ा सुंदर है उतना ही मज़ाकिया भी।
- 1:02समझिए कष्ट क्या है? मारा कृष्ण और कृष्ण की गीताओं का
- 1:17300 टीकाएं हो गई। ये गेंदों का कलोल था और नरंतर
- 1:32टीकाएं आज भी जारी हैं। अपनेअपने ढंग से जैसा उनकी बुद्धि
- 1:41के समझ में आया। लेकिन किसी ने अपने भीतर के उस
- 1:48स्तर पर जीस स्तर से गीता बोली गई वहाँ से जाकर और बाहर आकर बोलने
- 1:57की चेष्टा नहीं की। हमारा कृष्ण ने शिकार कृष्ण खलोहल
- 2:12जीतेड़ करते हैं, ठिकाएँ की लोकमान्य तिलक के फला ढीकान।
- 2:22और आचार्य कर रहे हैं आज गीता के रंग हो, आचार्य का संग हो मिल जाओ
- 2:3150,000 पागल हो गए। शिकार किया।
- 2:43अष्टवक्र में शिकार किया उपनिषद के ऋषियों ने वेदों के रिक्ष्यों
- 2:53में और शब्द ऐसे। के शब्दों की बनावट बदल दी जाए।
- 3:06इन शब्दों का ठहराव बदल दिया जाए तो अर्थ बदल जाते हैं और उन्हीं
- 3:15शब्दों के बल बूते हुए वो लोग। प्रशंसा अर्जित कर रहे हैं।
- 3:24देखिए मैं समझाता हूँ आपको अष्टवकर गीता का अर्थ क्या है?
- 3:31उपनिषद का अर्थ क्या है? भेदों का अर्थ क्या है?
- 3:40छोड़िए जीसको पता है वह खुद की बात करे।
- 3:47कहा गीता में से शब्द उठाए जा सकते हैं।
- 3:57लेकिन उसकी रस्म में कमी नहीं होगी।
- 4:05व्याख्यानित करेगा वो अपने ढंग से जैसा उसने जाना।
- 4:11सभी गीत परमात्मा के गीत हैं। ओह गायें हो, अष्टावक करने और
- 4:18गायें हो, कृष्ण ने लावजे ने, चंगस्य ने यशस्त्र ने बुद्ध ने,
- 4:31महावीर ने, मेरा ने राबिया ने। गाय किसी ने भी गीत परमात्मा के
- 4:48और कीमत तो गीत की है, किसने गाया?
- 4:55इसकी कीमत नहीं होनी चाहिए। सुरीला गाया बे सुरा गाया सुर ताल
- 5:05में गाया कौन से राग से गाया, किस धुन में गाया?
- 5:16इसका कोई बहुत महत्त्व होता भी नहीं और होना भी नहीं चाहिए।
- 5:25बस गीत गाया मूल्य उस गीत का है, मूल्य गीता का है।
- 5:36जो गीत प्रशोटित हुआ था कृष्ण के अधरणों से जो गीत झरना बन के फूटा
- 5:46था कृष्ण के लगों से और जिसका कारण बना था अर्जुन।
- 5:59कारण भी तो चाहिए बिना कारण के कृष्ण जैसी मौन सागर जैसी झील में
- 6:13अगर कोई कंकड़ी नहीं फेंकेगा। तो तरंगें उठेंगी कैसे?
- 6:23प्रश्न पूछने वाला आधा अधिकारी है उसके जवाब का?
- 6:30क्योंकि एक तरफ से कंकड़ी फेंकी गई।
- 6:35इसलिए मैं सदा ही आभार करता हूँ जिसने प्रश्न किया होता है और
- 6:43जिसका प्रश्न प्रश्न ही नहीं होता, मैं है जो बुद्धि की
- 6:47खुजलाहट होती है उसे लताड़ भी डालता हूँ।
- 6:55जिसने प्रश्न किया आधा अधिकारी वही है क्योंकि उसने उगलवाया संत
- 7:06से उगलवाना कोई सहज बात नहीं होती।
- 7:11मौन झील कैसे तरंग उत्पन्न करे यह कोई आशा थोड़ी है।
- 7:18वह अपनी मस्ती में रंगा हुआ आनंद से आच्छादित मस्ती और खुमारी के।
- 7:32सुगंधों के बगीचों में टहलता हुआ। जब तक तुम उसका ध्यान न भटकाओगे,
- 7:45तब तक वो तुम्हारे सम्मुख नहीं हो सकेगा।
- 7:48क्या उसकी भी दुविधा है? तो तुम्हारी दुविधा को दूर करने
- 7:54के लिए उसे थोड़ा जगाना होगा अन्यथा वह अपनी मस्ती में सुरूर
- 8:03को पीता जाएगा। उसे तुम्हारे प्रश्नों का कोई
- 8:09ख्याल नहीं। तो आधा क्रेडिट उसका जिसने
- 8:16कंकरिया फेंकी और बाकी तो कृष्ण कर लेंगे गीत गाया, कृष्ण गीत
- 8:28गाया स्टॉप करने किसका? किते संत हुए नामदेव हुआ और राज़
- 9:02करते हैं, कलोल करते हैं कौन गिरधर इन व्याख्या करने वाले
- 9:13लोगों को? गीदड़ कहा गया है।
- 9:21इस महावरे के अंदर शेर के मार्गों पे गीदड़ कलोल करते हैं और फिर
- 9:31तुम इस भ्रम में न रहना। कि जिसने परमात्मा का गाया हुआ
- 9:39गीत जो कृष्ण के अधरों से फूटा वो चोरी कर लिया जिसने चोरी कर लिया।
- 9:52अगर वो सच में पहुंचा उस तल पे पहुंचा जीस तल पर जाकर उसके अधरों
- 10:02से गीत फुस फुसाया उसने बुध बताया उसने।
- 10:13वह खुद भी खुशनसीब है क्योंकि उस घड़ी उसने दो काम किये हैं।
- 10:23ईश्वर का रस तो वो हर वक्त पी रहा है।
- 10:29दूसरा उसने उस रस को लुटाया, उनको लुटाया जिनको जरूरत थी जो विरह की
- 10:40अग्नि में जल रहे हैं संसार जिनके लिए।
- 10:44दुख के सिवा और कुछ नहीं है। उनके लिए कृष्ण ही कारगार है।
- 10:59गीत किसने भी गाया होगा अगर तुमने उसके गीत को गाना हो?
- 11:09अलफ़ाज़ कोई भी ले लेना, ध्यान से सुन ताज और सुर कोई भी ले ना राग
- 11:25कोई भी। ले लेना, लेकिन जब तुम उसके गीतों
- 11:31को उगाओ तो तुम्हारे हृदय की तृप्त हो जाना चाहिए।
- 11:37परमात्मा के गीत सदा ही तृप्तिदायक होते हैं।
- 11:44और परमात्मा का गीत अगर तुम्हें तृप्ति न दे तो समझ लेना कि ये
- 11:50गीत परमात्मा का है नहीं। ये गीत भी संसार का है जैसे एक
- 11:57शब्द में बहुत सी बातों में कह गया हूँ।
- 12:01खंगालने से भीतर जाके तुम खुद ही कंगालो जो ईश्वर का गीत तुम्हे
- 12:08तृप्ति न दे सीधे सीधे समझ लेना वो गीत ईश्वर का गीत है।
- 12:20जीस तल से बोला गया वह तल ईश्वर का है नहीं, बस तृप्ति ही है।
- 12:31मेज़रमेंट तृप्ति ही है पहमाना शब्द चाहे कोई भी हो।
- 12:40अल्फाशा चाहे कोई भी हो भाषा चाहे कोई भी हो बात तो तरफ़ दी।
- 12:46क्या है राहत? तुम कोई भी चुन लो बात तुम्हारे
- 12:59दुख के मठ। एक तो अर्थ ही है हाँ अगर दुखियों
- 13:09में डालो तो फिर उस गीत गाने से कोई फायदा नहीं तुमने एक गीत
- 13:17गाया। बहुत देर तक एक छोटा सा गीत
- 13:22तुम्हें सुखों पर दान करता है और दूसरा परमात्मा के गाय की शेर के
- 13:37मरे हुए शिकार के ऊपर गीदड़ का रोल करते हैं।
- 13:47शेर के मारे हुए शिकार पर गीदड़ कलोल करते हैं।
- 13:56इसका दूसरा अर्थ ये है कि सृजना सृष्टि बनाई पर मौत।
- 14:05और परमात्मा निर्लिप्त है, आलेप है सर्वव्यापी सदा अलेप तोहे संग
- 14:19समय। कौन सा कण ऐसा जिसमें ऊपर वर्धगार
- 14:30है? बिन नावें नाहीं को ठान उसके बिना
- 14:44कोई स्थान नहीं इस रचना में लेकिन तुम्हारी गुत्थी प्रतिघात करेगी
- 14:55दिखाएगी नहीं दिखाओ। किस ईश्वर ने बनाया दिखाओ, जिसकी
- 15:03सृष्टि का ही और श्योर नहीं, जिसकी सृष्टि का ही एक्यूरेट माफ़
- 15:10नहीं? उसके बनाने वाले का एक्यूरेट माफ़
- 15:13तुम कैसे खोज पाओगे? निश्चित ही वह उससे महान होगा,
- 15:20निश्चित ही वह उससे बड़ा होगा। ह्यूज होगा, विराट होगा, विशाल
- 15:28होगा जिसकी बनाई संरचना का ओर छोर ही तुम नहीं माप सके आज तक।
- 15:37तो जिसने बनाई उसका और शोर कैसे? लेकिन तुम्हारे सवाल बड़े बच्चे
- 15:46कहानी होते हैं इसलिए ये सवाल मार्क से पूछने वाला नहीं है।
- 15:57चारवाक नीचे से पूछने वाला नहीं है, परमात्मा है कि नहीं है, ये
- 16:03सवाल बुद्धि से भी पूछने वाला नहीं है, ये सवाल पूछने वाला है
- 16:12कृष्ण से यह सवाल पूछो तो कबीर से पूछो।
- 16:25बुद्ध मनुष्य के दुख तक ही सीमित रह जाते हैं।
- 16:30जिसके कारण उन्होंने घर बार त्यागा, सिंहासन राज़ त्यागा,
- 16:35हीरे, ज्वारत, मोती, पुत्र पत्नी त्यागी और फिर भी चैन न मिला।
- 16:44जब था तो त्याग तो सुखोना तो निश्चित ही वह सांसारिक दुख के
- 16:52कारण खोजता होगा, जो सांसारिक दुख से त्रस्त है।
- 17:01और उसे लगा कि सिंहासन दुख देते हैं।
- 17:05पुत्र पत्नी दुख देती है तो भाग्य इंसान तो अभी इन चीजों को ढूँढता
- 17:16है तुम भिक्षा पत्र लिए करते हो हमें कोई?
- 17:22पीएम बना दे, सीएम बना दे, छोटा मोटा संत्रिय बना दे, लेकिन बुद्ध
- 17:30भरे पूरे साम्राज्य को छोड़ देते हैं।
- 17:33कोई कमी नहीं है। निश्चित ही उन्होंने पाया कि
- 17:37भागों में सुख है। फिर सुख कहाँ है?
- 17:46साफ सी बात है कि वो सुख का स्रोत खोजेंगे तो उन्होंने पाया कि सुख
- 17:53का स्रोत निर अहंकार था में है, नवदा है सर।
- 18:01स्वयं को जान लेना दुखों का कार्य है, स्वयं को जान लेना दुखों का
- 18:09विनाश है और जब उन्होंने स्वयं को जाना, उन्होंने छोड़ दिया सब कुछ
- 18:16बस इससे आगे और कोई मंजिल नहीं होती।
- 18:20न कोई मार्ग होता है, न कोई मंजिल शेष है।
- 18:25मिल गया जो चाहता था जिसके लिए घर बार साम्राज्य छोड़ा था वो मिल
- 18:31गया मैं कौन हूँ का जवाब मिल गया, लेकिन मैं हूँ का कोई जवाब।
- 18:41रास्ता रास्ते का पड़ा है। ये अवश्यम भाभी हमें कह दो पर
- 18:52इसके बिना रास्ता भी नहीं है, लेकिन इट्स?
- 18:59ओनली, इट्स नॉट सफीशियंट सिर्फ यही प्राप्त है उनके तर्क में
- 19:15बड़ी सुंदरता है उनके चेहरे का लावन्या मुस्कुराता हुआ।
- 19:21अस्तित्व का कण कण उनका शरीर का बाकमार है, आनंद है, गहरा आनंद
- 19:32है, लेकिन अभी पूर्ण नहीं हुआ है बहुत से भक्तों को।
- 19:41मेरे प्रवचनों से चोट लग जाती है और कई बार जगम इतना गहरा हो जाता
- 19:47है। वो कभी लौट के आते नहीं, ये उनकी
- 19:58मुसीब है। अगर बुद्ध ने यहाँ पर आकर बस कर
- 20:07दिया अगर तुम थोड़ा खाके आधा पेट खा के उठ जाओ लंगर में से
- 20:16तुम्हारी आदत है तो ठीक है उठ सकते हो।
- 20:22लेकिन अगर कोई कहेगा तो मैं पूरा तृप्त होकर ही उठूंगा।
- 20:29उसके बाद ही कुछ अलग है या गवल कहते हैं।
- 20:35मैं ऐसा नहीं उठने वाला। ठीक मैंने जान लिया अपने आप को।
- 20:42पर्याप्त है, संसार के दुखों के लिए पर्याप्त है क्योंकि यही तो
- 20:48कारण था दुखों का मेन काज़ तो यही था मेन ऐलूजन तो यही था कि मैं
- 20:54हूँ कौन? इसलिए सभी संतों ने इस बात पर
- 20:58ज़ोर दिया। कि नो डायसेल्फ अपने आप को जन्म
- 21:04रेमेम्बेर हूँ आर यू याद करो तुम कौन हो हूँ एमआइ मैं कौन हूँ,
- 21:13लेकिन यहाँ तक तो आ जाओ बड़ा सीन। पथ है और बड़ी हसीन मंजिल है।
- 21:26जलते हुए दुखों से आग से छुटकारा पालु है फिर तुम केंद्र पर आ गए।
- 21:38शफीर पे होती हुई घटनाएँ तुम पर असर नहीं करते परी जी पे क्या हो
- 21:46रहा है मैं तुम पर असर नहीं करता परी जी पे जश्न मनाए जा रहे हैं।
- 21:56परिधि पे दुख और तकलीफ है, दर्द है, पीड़ा है, रोग है कोई कुछ छीन
- 22:06के ले गया कोई कुछ दे गया परिधि पे क्या घटित हो रहा है।
- 22:19तुम मुझसे ज़रा भी प्रभावित नहीं होते हैं, न कोई आग तुम्हारे तक
- 22:27पहुँच सकती है, परिधि को जलाती है, परिधि पे आग है।
- 22:35लेकिन उसका शेख उसका ताप हिट तुम तक नहीं आता क्योंकि तुम मुझसे
- 22:44बहुत दूर बैठे हो तो तुम्हारा दुख तुम्हारा तकलीफ तुम्हारे जो
- 22:53मुरझाए चेहरे। इसका इलाज है बुद्ध सिर्फ बुद्ध
- 23:07तुम वहाँ जाकर तृप्त हो जाओगे जहाँ दुख नहीं जहाँ शांति है।
- 23:16जहाँ अभाव नहीं, पीड़ा नहीं रोक रही, कष्ट रही क्लेशिया ये सब कुछ
- 23:24द्वंद्व भी तो नहीं हुआ? वह शांति है, ठहराव है, परम शांति
- 23:29है। मेरी बात को समझ लेना 99 पैंठ 99%
- 23:39लोगों के लिए यहाँ ठहरना ही अच्छा है।
- 23:50मैंने बोला 99.99% लोगों के लिए? बुद्ध के इस स्थान पर जंग इस
- 24:00प्वाइंट में पहुंचना शुभ है, क्योंकि यहाँ तुम्हें कोई अभाव न
- 24:06रहेगा, कोई पीड़ा नहीं होगी, कोई दर्द नहीं होगा, कोई रोग नहीं
- 24:13होगा, कोई शोक नहीं होगा, धैर्य ही धैर्य हो पायेगा।
- 24:19आनंद का सरोत फूटेगा? और तुम नहाओगे मल मल नहाओगे
- 24:28मिलाशक मैंने पहले भी कहा। लेकिन जहाँ तक मार्ग है, यहाँ से
- 24:37शुरू होता है रहस्य का मार्ग रहस्य का मार्ग परम रास से भरा
- 24:55हुआ है। अगर तुम यहाँ तक पहुँच गए, तो
- 25:04ध्यान रखना अगर रुक जाओगे थोड़ा अगर बुद्ध की तरह तुम रस को पीकर
- 25:11उठ गए, बस इट्स सुफ्फिसिएंट फर्म है पर्याप्त है मेरे लिए।
- 25:20तो फिर तुम प्रचारित करना शुरू कर दोगे और वो ठीक भी होगा, क्योंकि
- 25:26100 में से अगर करीब 99 व्यक्तियों के दुःख दूर होते हैं
- 25:32तो फिर तुमने दुःख का इलाज ढूंढ लिया।
- 25:38दूसरे शब्द का थोड़ा सार्थक कर दूँ, फिर मैं भूल जाया करता हूँ,
- 25:46कुछ उम्र का तकाजा है, कुछ छूटती नहीं है, काफी मुँह को लगी हुई।
- 25:58अब तक उतरती नहीं तो गड़बड़ा जाता हूँ कभी कभी कहानी बीच में छोड़
- 26:09देता हूँ ये मेरा कसूर है मेरे पीने का कसूर है?
- 26:21मैं रात को कई बार ज्यादा पी लेता हूँ, देर तक खिचड़ी रहती है, उस
- 26:28अवस्था में नहीं याद रहता, कनेक्शन को अधूरा छोड़कर कई बार
- 26:34कहानी अधूरी छोड़ देता हूँ। लोग कहते हैं बाबा कहानी तो बुरी
- 26:38नहीं है। बहुत सी कहानियाँ अधूरी मिलेंगी
- 26:41आपको मेरे प्रमोशन में कारण क्या है?
- 26:46उम्र का तगजा भूल भी गया होगा और कुछ मस्ती का ऐलान।
- 26:59यह तनहाई का आलम और उस पर आप कगम यह तनहाई खा।
- 27:18आलम और उस पर आप कदम जीते हैं, नम्रते।
- 27:34बताओ क्या कर हम अकेले चले आओ? जहाँ हो कहाँ आवाज दे तुमको कहाँ
- 28:06हो? अकेले ही मेरी मजबूरी भी हो सकती
- 28:16है। बुध का मार्ग अल्टीमेट है
- 28:24तुम्हारे लिए। अल्टीमेट है, लेकिन पूर्ण नहीं
- 28:33है। मैं तुम्हें पीड़ाग्रस्त व्यक्ति
- 28:39से यज्ञ बल को कृष्ण तक ले जाना चाहती हूँ।
- 28:49मैं तुम्हें सांसारिक व्यक्ति से उपनिषद और गीता तक ले जाना चाहती
- 28:53हूँ, लेकिन यह कोई मुकाम नहीं इस। इस लिहाज से बहुत मुझे पर्याप्त
- 29:13दिखाई पड़ते हैं जो तुम्हें मर्ज है जीस रोग के तुम मरीज हो।
- 29:21उसका पर्याप्त इलाज बुद्ध के पास है, ज़रा भी कम नहीं, लेकिन पूर्ण
- 29:30सवस्थ होने के बाद यहाँ तक अगर तुम आ जाओगे बुद्धमुरख नहीं।
- 29:41बड़े समझदार बुध कहते हैं मिल गया, मिल गया बहराज मिल गया जो
- 29:54दुख नाशक है, दर्दर्ता नाशक है। प्रभाव ग्रस्त लोगों के लिए वरदान
- 30:01है पीड़ाग्रस्त लोगों के लिए रोगग्रस्त लोगों के लिए पीड़ाहरण
- 30:11और रोगहरण और वास्तव में ही यह औषधि परम औषधि है।
- 30:22मैं तुमसे ये कहता हूँ कि बुद्ध पूर्ण है, यज्ञ वल्क कृष्ण
- 30:31परिपूर्ण है, लेकिन तुम पूर्ण ही हो जाना इतना काफी है।
- 30:39काफी है क्योंकि जो कृष्ण के चेहरे पर है शांति और आनंद का
- 30:51लिवास तुम पाओगे बुद्ध के चेहरे पर।
- 30:56वही रिवर्स का ज़रा भी कम कुछ फर्क अगर भीतर का हो तो उससे
- 31:06तुमने लेना देना क्या है? बुध तक पहुँचना अनिवार्य भी है और
- 31:13बुध तक पहुँचना तुम्हारी मंजिल भी है।
- 31:18यहाँ से कोई भी संत गुजर के ही जाना पड़ता है।
- 31:23सबको और फिर याग बल को हूँ या कृष्ण हूँ या अष्टावक्र हूँ।
- 31:37अब थोड़ी सी इसकी डेफिनिशन और फिर हम ओम शांति करेंगे।
- 31:49शेर के मारों पर गीदड़ गलोल करते हैं।
- 31:56इस सृजना को बनाया परमात्मा ने। वह नजर नहीं आता नजर तो तुम्हें
- 32:00प्रकृति का वह सूक्ष्म अंश भी नजर नहीं आता एटम और अभी क्या?
- 32:08क्या छिपा उसकी सृजना में, ये तुम?
- 32:15करोडवां अरबवां खरबवां हिस्सा भी नहीं जान सकते तुम जानते कितना हो
- 32:25जिसके बलबूते पे तुम अहंकार में आसमान को छू लेते?
- 32:37तुम जानती ही कितना और वह अधना सा व्यक्ति कहता है परमात्मा है,
- 32:50लेकिन जीस दल से बोलते हैं, मार्क स्वर नीचे।
- 32:54वह व्यंग्यात्मक नम्बर है जीस ढंग से बोलते जीस स्तर से बोलते बुद्ध
- 33:02वह व्यंज्यात्मक वह सार्थक है बुद्ध कहते हैं तुम वहाँ जाकर
- 33:10शांत और आनन्दित हो जाओगे यही तुम्हारा।
- 33:14तड़प भी है यही तुम चाहते हो तुम्हारी मंजिल यही तो है लेकिन
- 33:24जो आगे अग्रवाल ने कहा या कृष्ण ने कहा वह एक तरह का तुम्हारे लिए
- 33:31वर्ती है। तुम कोशिश भी मत करना तुम मैं
- 33:36चीज़ यहाँ तक आ जाना और यहाँ तक तो सभी को आना ही पड़ता है।
- 33:40नानक हो, कबीर हो, कोई भी संत हो या ग्वर्क हो, कृष्ण हो, मेरा सभी
- 33:49को आना पड़ता है यहाँ तक का। यह एक ऐसा जंक्चर प्वाइंट है हमने
- 34:00देखा जंक्शन होता है न जंक्शन जंक्शन पर आकर तुम्हें एक बार
- 34:06रुकना पड़ता है, फिर वहाँ से तुम। पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण जहाँ
- 34:11जाना चाहते हो वहाँ से गाड़ियां मिल जाती हैं तुम्हें जंक्शन पे
- 34:16आके संध्या क्षेत्र पे संधि क्षेत्र पे आके तुम जिधर भी
- 34:24निकलना चाहो उधर जा सकते हो। लेकिन जंक्शन पॉइंट पे तो आना ही
- 34:29पड़ेगा। एक बार बुध तक आना जरूरी है,
- 34:35लाजिम है हम थोड़ी सी डेफिनिशन कर लें इसकी।
- 34:48शेर के शिकारों पर गीदड़ का रोल करते हैं ये पंजाबी की कहावत है
- 34:56पंजाबी लोग इसे अच्छी तरह से ही समते हैं।
- 35:03ये सरजना बनाई। और तुम्हारे भेजे में यह बात आती
- 35:12है, यह सृजना ही इतनी विराट है, तुम्हारा तर्क बड़े साथ समझ में
- 35:18आने लायक भी है? तुम कहते हो जो खुद ही इतना बराट
- 35:24है सृजन ये सृष्टि ही इतनी बराट है तो उसको बनाने वाला कितना बराट
- 35:30होगा? यहाँ तो मुझे ले जाते हो।
- 35:36बात ठीक भी है। आई स्ट्रीम कहते हैं इस नॉट ओनली
- 35:42अन्नोन बट ऑल्सो अनोनो एबल वह सिर्फ अज्ञात ही नहीं है कि अभी
- 35:51तक खोजा नहीं गया। ऐसा नहीं है, वह कभी खोजा ही नहीं
- 35:57जा सकेगा। बट ऑल्सो अननो एबल वह अज्ञेव ही
- 36:02है। वह कभी खोजा जा भी नहीं सकेगा और
- 36:11उस परमात्मा के बारे में तुम दावे करते हो।
- 36:17हद की बात तो सब होती है कि तुम उस विराट को मेरे चाचा जी की तरह
- 36:25स्टील के छोटे से ठाकुर जी में बदल देते हो।
- 36:30ये मूडताओं का अंत किसे ही मूड आत्मा कहते हैं।
- 36:40अवजानंती माँ मूढ़ा मानवी तन्मश्रितम् चम् भावं जानन्तो मं
- 36:49भूत महेश्वरम् जो विराट को क्षुद्र में।
- 36:55समाहित कर ले। भगवान कृष्ण कहते हैं, नव अध्याय
- 37:02का ग्यारहवां शुरू जो विराट को क्षुद्र में समाहित मान ले, वह
- 37:13मूढ़ है। और तुम उस विराट को एक छोटे से
- 37:21लड्डू गोपाल में ठाकुर में मूर्ति में डाल लेते हो।
- 37:33तो कृष्ण किस को मूड कह रहे है? कृष्ण तो मैं ही मूड कर मेरे चाचा
- 37:41जान जैसे लोग जो भगवान को जेब में रखते हैं बात हँसी की है।
- 37:51हमारे जब यहाँ पंजाब में प्रकाश सिंह बादल चीफ मिनिस्टर होते थे
- 37:56तो सभी की जेब में चीफ मिनिस्टर जेब में हुआ करते थे।
- 38:03किसी से पंगा लेना आसान नहीं था, क्योंकि सभी की जेब में बादल हैं।
- 38:09प्राइम मिनिस्टर। चीफ मिनिस्टर या कोई भी मंत्री
- 38:14डिस्कस संगीत साथी हो, वो उसकी जेब में होता है, फिर उससे लोग
- 38:19डरते हैं। तुमने किसी सीएम को पीएम को
- 38:24मिनिस्टर को जेब में नहीं रखा। तुमने तो उस महा में हिम परम पिता
- 38:29परमात्मा परम तत्व को जेब में रख लिया ठाकुर जिसकी शरण में बैठनी
- 38:35योग्यता मानव ठाकुर तुम सर नहीं आए हो।
- 38:45जिसकी शरणागति होने से तुम उस आनंद को प्राप्त हो जाते हो।
- 38:50वो तुम्हारी जेब में इतना शुद्ध कर लिया तुमने उसकी विराटता को,
- 38:56बस इसे ही भगवान कृष्ण मोरू कहते हैं।
- 39:07मैं रोज़ कहता हूँ, ग्रंथों की मूर्छा को छोड़ो, मूर्तियों की
- 39:12मूर्छा को छोड़ो, वह इतना सुदृढ़ नहीं है, तुम्हारे शब्दों की सीमा
- 39:20में बंद सकें। तुम्हारी मूर्तियों की सीमाओं में
- 39:24वो आ सके। उसका आकार देखो, उसका प्रकार देखो
- 39:30थोड़ी रात की अमावस्या की रात को उसका विस्तार देखो।
- 39:37वो कितना विराट है? क्या तुम्हारे ठाकुर की मूर्ति
- 39:41में समज आएगा? तू जो नहीं सोचता बुद्धि सोचने के
- 39:47लिए है, इतना तो बुद्धि भी समझ सकती है और जहाँ तक बुद्धि समझ
- 39:52सकती है, वहाँ तक तो बुद्धि से काम लो ना जहाँ बुद्धि हथियार
- 39:59छोड़। दे मेरी समस्या से बाहर हुआ वहाँ
- 40:06काम करता है विवेक फिर बुद्धि का रस से छोड़ देना, विवेक के रस पर
- 40:13आरोप हो जाना और कोई वक्त ऐसा ही का विवेक भी हार जाएगा।
- 40:19फिर विवेक का रथ छोड़ देना फिर तुम स्वयं के रथ पे चले जाना फिर
- 40:25एक ही सूत्र है जहाँ आनंद है, जहाँ रस है, वहीं तुम्हारी मंजिल
- 40:30है, इसे फिर समझ लो। जीस परमात्मा के विराट हाथों ने
- 40:43इतने विराट संरचना को जन्म दिया और तुम कहते हो परमात्मा है नहीं
- 40:54ठीक है कहना भी चाहिए क्योंकि तुमने तो प्रकृति के ही अभी नियम
- 40:59कानून कायदे खोजें। अच्छे न लगोगे, उसके विस्तार तक
- 41:08जाने का रास्ता कुछ अलग है तो रास्ता क्या है?
- 41:18शेर के मारने पर गीदड़ का रोल करते हैं।
- 41:22गीदड़ कौन अहंकार गीदड़ गीदड़ नाचता फिरता है मैंने शिकार किया
- 41:34श्रेय लेने में जो आगे वह गीदड़। शिकार उसने नहीं किया था शिकार
- 41:42किया होता है। शेयर ने यह सरजिना बनाई हरमा
- 41:51श्रेय कौन ले रहा सेहरा कौन बांध रहा सेहरा बांध रहा अहंकार मैं
- 41:58ईगो। इगोइस्टिक प्रश्न सदा कहा करता है
- 42:04मैंने बनाई सृजना हिरण्य के शब्द भी तो यही कहा करते हैं मैं ही तो
- 42:08हूँ भगवान अरे प्रहलाद तो मेरा बेटा है, तू नारायण नारायण करने
- 42:17का जाप करने का छोड़ दे। तो मेरा नाम जप हिरण्य कश्यप,
- 42:23हिरण्य कश्यप कहा कर और सभी मूड यही कहते हैं कि तू मेरा नाम जप
- 42:32कर तू उस परमात्मा का नाम न जप और यही अहंकार का हक।
- 42:41हिरण्यकश्यप का मतलब अहंकार होता है शेर के हमारे हुंहों पे गीदड़
- 42:49करोल करते हैं सृष्टि तो भाई परमात्मा अहंकार कहता मैंने बनाई।
- 42:59बड़ा गहरा सूत्र हैं। एक कहावत बन गया धीरे धीरे और इस
- 43:06कहावत का अर्थ नहीं पता किसको अच्छा किया तुमने पूछ लिया शेर के
- 43:15बारे में गीदड़ का रोल करते हैं नाचते।
- 43:19हाथ ऊपर उठा उठा के नाचते, लेकिन गीदड़ ने मारा मारा शेर ने सृष्टि
- 43:33बनाई ईश्वर ने और अभी तो तुम? ईश्वर की बनाई सृष्टि को खंगाल
- 43:40नहीं सके। मैंने कहा अरब मा खरब मा हिस्सा
- 43:44असंख्यवा हिस्सा भी तुम अभी कहाँ खोज पाए हो?
- 43:54जब अन्कार टूट जाता है तो ऐसे वक्तव्य सामने आते हैं जैसे आखिरी
- 44:01वक्त में एल न्यूटन के हृदय से निकले।
- 44:15हार जाता है, थक जाता है, टूट जाता है अन्हकार सरईगर्क न्यूटन
- 44:27मरते हुए कहते हैं, नहीं मैं भीषण बताओ न नहीं।
- 44:32अंत में याद आती है बंदे होश में आता है बंदा ठोकरें खाने के बाद
- 44:42रंग अलाती है हिना पत्थर प्रेगिश आने के बाद।
- 44:52अंत में मरता हो कहता है नो नो वेशम पितामह मैं कहाँ आई हैव
- 44:58कलेक्टेड ऑन यूर फ़्यू फेवर ऑन दी शी शोर व्हाई लोस एंड ऑफ नॉर्थ
- 45:04स्टिल में अनक्स प्रोजेक्ट बहुत से समुद्रों में से एक समुद्र के
- 45:10किनारे पर खड़ा हुआ। रेत में से मैं थोड़े से
- 45:14कंकड़पत्थर तलाश लिया हूँ, वाइल दी ओशन्स ऑफ नॉलेज स्टिल रिमैन अन
- 45:20एक्सप्लॉडेड? जबकि इतने समुद्र अभी बाकी हैं,
- 45:27जिनका कोई अता पता ही नहीं लगा है अभी।
- 45:30कितने हैं? उसकी गिनती भी तो नहीं हो सकी।
- 45:35स्टिल रिमैन अनएक्सप्लॉटेड अभी कोई पता नहीं वो कितने हैं और तो
- 45:44मैंने क्या खोजें की उसके लिए मुझे विषों पे दामा का दर्जा
- 45:47देना। तो गीदड़ का रोल करते हैं।
- 45:53वो कहते हैं, हमने किया श्रेय बोल लेते हैं और ऐसे ही बहुत सी गीदड़
- 45:57तुम सभी गीदड़ हो। जो काम किये नहीं होते वो हमने
- 46:03किया झंडा उठा लेते हो हमने किया। लेकिन ये पंच महाभौतिक शरीर
- 46:16तुम्हें मान्यता दे देंगे। क्या वो परमात्मा भी तुम्हें
- 46:20मान्यता देगा? बहुत परमात्मा जिसे मान्यता देता
- 46:26है उसके लक्षण सुन। संसार तो तुम्हें मान्यता दे
- 46:31देगा। कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन
- 46:35परमात्मा जिसे मान्यता देता है उसे कुछ लक्षण देता है।
- 46:39संग में वह पहचान लेना ये गुरु बेबी पहचान है, वह शांत होगा।
- 46:48वह भागदौड़ नहीं करेगा, वह ठहरा हुआ होगा, झील की तरफ मौन होगा
- 46:59अनंत अनंत मौन के गहरे मौन के भीतर।
- 47:07आनंद से झूमता हुआ रसपान करता हुआ मिलेगा।
- 47:10हर वक्त वो और वह नमन करता हुआ मिलेगा।
- 47:26मिठत नीमी नान का गुण चंगिया। वह आसमान की तरफ ऊँचा नहीं मुँह
- 47:35करेगा वह धरती की तरफ इसलिए हमने शब्द बताए डाउन टु अर्थ धरती की
- 47:42तरफ झुकेगा। जो पेड़ फलों से लग जाता है वो
- 47:47धरती की तरफ झुक जाया करता है डाउन टु वर्क।
- 47:56ये उसकी शलागा के गीत गाथा मिलेगा।
- 48:04इसलिए जिन्होंने परमात्मा को देखा कबीर जैसे लोग कहते हैं, मैंने
- 48:09देखा जिन्होंने प्रकृति को देखा महज।
- 48:14वो कहेंगे नहीं परमात्मा है नहीं, प्रकृति ही है, लास्ट और
- 48:21सुफिसिएंट दोनों ठीक है। दोनों आनंद से भरे हैं, दोनों दुख
- 48:30दरिद्र से। कष्ट पीड़ा से रोगों से मुक्त
- 48:34हैं। दोनों केन्द्र पर आते हैं, कोई
- 48:40फर्क नहीं है याद वर्ग में और बुद्ध में इस सतल पर है दोनों को
- 48:46आना पड़ता है आगे का तल तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण है।
- 48:53आगे का तल और उसकी यात्रा तुम्हारी यात्रा भी नहीं है आगे
- 48:58की यात्रा परमात्मा की यात्रा है, और आगे का तल रहस्य का तल है आगे
- 49:05की यात्रा रहस्य की यात्रा है, लेकिन वहाँ भी बड़े हीरे पड़े हैं
- 49:10सच पूछो। तो ज्यादा कीमती हीरे वहीं पड़े
- 49:18सफीशियंट है बुद्ध की पड़ाव तक आ जाना मंजिल ना कम होगा मैं।
- 49:30लेकिन उससे आगे भी राहतें और भी हैं बसल की राहत के सिवा और भी गम
- 49:42है। जमाने में मोहब्बत के सिवा मुकाम
- 49:47और भी है। लेकिन यहाँ आकर तुम निश्चिंत हो
- 49:51जाओगे बस फिर तुम कोई शिकायत नहीं करोगे, फिर तुम लोगों के दुख
- 49:58वृद्र, अभाव, कष्ट, पीड़ा, रोग इनको समाप्त करने में।
- 50:10झूठ जाना, बुद्ध की तरह लोगों की मूड, मान्यताओं को तोड़ने में लग
- 50:16जाना, ये मूडताएं उन्हें दुख देती हैं।
- 50:23और दुख जिसका भी हर लिया जाए शुभ है उससे आगे यहाँ आकर सफिशिएंट
- 50:38है। ये बिल्कुल वैसा है जैसे तुमने
- 50:41पेट भर खाना खा लिया। उसके आगे गुंजाइश न बची, लेकिन
- 50:49उसके आगे रास्ता है परमात्मा ने। इस दृष्टि को बनाया जाने वाले
- 50:58कबीर कहते हैं, मैं कहता आंखन देख।
- 51:03तुम कहते कागज़ की लेखी कृष्ण कहते हैं अनन्या चिंतन तो मान ये
- 51:13जनाब रूप बास्ते। कृष्ण कहते हैं, सर्वधर्माण पर
- 51:19तच्च माँ बेकम शर्म प्रच तुम श्रेणियों में विभक्त मत हो जाओ,
- 51:33इस्लाम कहता है, ला इलाहा इलल्लाह।
- 51:40वह परमात्मा ही पूजा के योग्य है, वह एक ही है, उसकी कोई मूर्ति
- 51:47नहीं है और सभी मूर्तियां उसकी, क्योंकि वही तो है, उसके सिवा कोई
- 51:55पूजा के योग्य नहीं। ल इलाहा इलल्ला।
- 52:05मोहम्मद मोहम्मददुर रसूल अल्लाह और मैंने पैगम्बर भेजा है, जो
- 52:14पैसेंजर हैं, मेरी खबर देते हैं तो एक अर्थ में कबीर भी पैगम्बर
- 52:20है, हजरत ही पैगम्बर नहीं अकेले। जो भी खबर देता है सब पैगम्बर है
- 52:28खबर देने वाला दूध पैगम्बर मैसेंजर जो उसकी खबर देता है वो
- 52:35मैसेंजर। कुरान कहती है कि वही पूजा की
- 52:45योग्य है और ऐसा कहते है प्रेम ही परमात्मा है, ठीक है क्योंकि वहाँ
- 52:52जाओगे, कोई लक्षण ब्यान करता है, कोई उसका मापदंड गहन करता है।
- 53:01लक्षण यह है कि प्रेम स्वरुप है वो माक दंड उसका ये मेज़रमेंट
- 53:07उसका ये एक सर्व व्यापक है, जीसको परमात्मा नियामत देता है, उसके
- 53:19लक्षण बता रहा हूँ। है, खुशहाल होगा, अनंतित होगा दुख
- 53:27और धीरे धीरे से परे होगा रोक होंगे लेकिन उसे नहीं होंगे कोई
- 53:36आग वहाँ तक नहीं पहुंचेगी ये समझ लेना बात को।
- 53:42तुम समझने में एक कोताही कर जाते हो।
- 53:46शरीर तो उसका भी जलेगा। शरीर तो कृष्ण का भी जल रहा है।
- 53:56लेकिन कोई आग कृष्ण के वास्तविक स्वरूप को छू न सकी।
- 54:01नैनब दाहती बाबा बाढ़ तो आएगी, तूफान तो आएगा, लेकिन कृष्ण के
- 54:09मुकाम तक अस्तित्व तक होने तक नहीं पहुंचेगा।
- 54:14नए सैन्य मुगले धन क्या बोल रहे है?
- 54:16सोचती मारु ता नैनाम से धन तीर्षास्त्रण तुम्हारा आइटम तो
- 54:26चलेगा आइटम तो बम भी चलेगा और भी कल को कुछ और बना लोगे वो भी
- 54:32चलेगा। लेकिन वह जलेगा जो जलने योग्य है।
- 54:38जो जलने योग्य ही नहीं है वो नहीं जलेगा और कृष्ण कहते हैं और सभी
- 54:44संत कहते हैं मैं भी कहता हूँ तुम नहीं चलोगे, मैं ना मरूँ मरहसन
- 54:50सारा ऊपर का खोज मर जाएगा। मोहे मिला जलावन हारा मुझे वो
- 54:57तत्व मिल गया जो सिर्फ जीवन है, जिसका कोई भी अंश मर्तन जो मात्र
- 55:07जीवन है और अपने जीवन की। खुशबू से आलाधित है, नाच रहा है,
- 55:14मस्त है, मस्ती में है, खुमारी में है, पूछा है आज का मुरल क्या
- 55:25है? तो मेरा यहाँ कुछ नहीं।
- 55:30अगर तुम प्रकृति तक ही सीमित रहते हो तो मानव की सब कुछ प्रकृति का
- 55:35है। अगर तुम प्रकृति से आगे बुद्धि से
- 55:39आगे जग, बल और कृष्ण तक पहुँच गए तो सब कुछ सब कुछ परमात्मा का है।
- 55:48तुम्हारा यहाँ कुछ भी नहीं है चाहे तो वो प्रकृति का है और चाहे
- 55:56तो वो परमात्मा का है लेकिन तुम्हारा कुछ नहीं।
- 56:02यही है आज का मुर सा। तो शेर के मारे पर गीदड़ कलोल न
- 56:11करें जो प्रकृति को मानते हैं प्रकृति ने मारा ये शिकार जो
- 56:21ईश्वर को मानते हैं ईश्वर ने मारा ये शिकार, लेकिन तुमने नहीं मारा?
- 56:27तुम अपने मैं को भूल जाना तुम अपने मैं को खो देना, मैं को उसके
- 56:32चरणों में अर्पित कर देना तो आओ हम थोड़े से सूक्ष्म प्रश्नों को
- 56:41उठा लें सूक्ष्म जगत में। सदा ही शिकायत रहती है मुझसे कि
- 56:50आप हमारे प्रश्नों को विशेषता नहीं लेते हैं, कोई बात नहीं कुछ।
- 57:05नाम क्या है? आपका कब मरे थे?
- 57:11पूछा है एक बिमारी है जिसमें व्यक्ति खड़ा हो जाता है और बैठना
- 57:16पड़ जाता है। बड़े चुटेले अंदाज में प्रश्न
- 57:22पूछा है राजपाल। एक बिमारी है जिसमें व्यक्ति खड़ा
- 57:31हो जाता है और बैठना भूल जाता है। वो बिमारी है पुत्र घमंडा।
- 57:44घमंड अहंकार उसकी मैं रोज़ बात करता हूँ घमंड ऐसी बिमारी एक बार
- 57:54लग जाए, लगती नहीं है का फिर छूटती नहीं है।
- 58:00का? फिर मुँह को लगे।
- 58:06यह ऐसी बिमारी कि एक बार लग जाए आदमी खड़ा हो जाए तो बैठने में हो
- 58:09जाता है और किन को होता है ये राजनीतिकों को होता है।
- 58:17राजनीति किस लिए अपनी कुर्सी के साथ चिम्मटना चाहते हैं, मर
- 58:21जाएंगे, उठेंगे और बैठ गए तो उठेंगे नहीं।
- 58:32तुमने पूछा एक बार खड़ा हो गया, वह तो बैठना भूल जाता है।
- 58:37यहाँ ऐसी हमारी राजनीतिक जो बैठ गया कुर्सी पे वो उठना भूल जाते
- 58:42हैं, इसलिए राजनीतिज्ञों को गद्दी से उठाना नहीं पड़ता।
- 58:53गद्दी से उखाड़ना पड़ता है। वो चिपटे हुए हैं फेविकोल से आरल
- 59:00डाइट्स से उन्हें उखाड़ना पड़ता है उठाना नहीं पड़ता यह बिमारी
- 59:08राजनीति मैं रोज़ बोलता हूँ इस बिमारी के बारे में।
- 59:15अहंकार वास्तव में इल्युसन अहंकार वास्तव में एक बिमारी और ला इलाज
- 59:22बिमारी नहीं कोई एक ही व्यक्ति होगा वह होता है संत, जो इस
- 59:27बिमारी का इलाज जानता है और तुम जब भी इस बिमारी से ग्रसित हो
- 59:33जाओ। और हो ही पता है मुझे क्योंकि
- 59:37जिसने शरीर ग्रहण किया वह इस बिमारी से पीड़ित है और सभी ने तो
- 59:44शरीर ग्रहण किया। तुम भी तो शरीर ग्रहण करने के लिए
- 59:48ही सूक्ष्म रोग में चक्कर लगा रहे हो।
- 59:58ये वास्तव में कोई बिमारी नहीं है, लेकिन वास्तव में बिमारी है
- 1:00:02अभी और प्रत्येक मनुष्य को यह बिमारी है छूटती नहीं है काफी
- 1:00:10मुँह को लगी। एक बार अहंकार का बिमारी लग जाए
- 1:00:16और छोटा जाना बड़ा मुश्किल होता है।
- 1:00:17पता नहीं इसमें क्या रस है, जैसे कुत्ते की हड्डी का स्वार्थ,
- 1:00:25कुत्ता, हड्डी को चूजता है, उसके मंसूबों में से खून आता है।
- 1:00:29खून बड़ा। नमकीन होता है, मीठा बड़ा बढ़िया
- 1:00:32लगता है। खून का अंदाज ही निराला है, टेस्ट
- 1:00:36ही निराला है। जीस के मुँह को लग गया वो उतरता
- 1:00:41नहीं, फिर चाहे पशु मारना पड़े, चाहे बंदा मारना पड़े और अक्सर ये
- 1:00:48राजनीतिकों को होता है। ऐसा कोई बिमारी सच में नहीं होता
- 1:00:57है पुत्र, लेकिन इस बिमारी की तो मैं रोज़ बात करता हूँ और जिसे
- 1:01:03मैं इलूशन कह देता हूँ, भ्रम कह देता हूँ, आज थोड़ा शुरू और बदल
- 1:01:07देता हूँ, मैं बिमारी कह देता हूँ।
- 1:01:10यह एक बिमारी है, अहंकारिक बिमारी है, घमंड एक बिमारी है, तुम लाख
- 1:01:19का हो नहीं, हम तो गर्व करते हैं, वो एक घमंड ही है, गर्व नहीं नाम
- 1:01:25बदल लिया है लबा दा बदल लिया है, गर्व नहीं है, घमंड है।
- 1:01:36ठीक है, तो हम फिर आज गुरु कराएं। एक छोटा सा भजन।