Latest / Baba ji Vijay Vats / 27/5/26 - उस परमात्मा का हुक्म संत पकड़ लेता है, पर आम इंसान क्यों नहीं? क्या है भीतरी कारण?
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- 0:11डॉक्टर सपना, एमडी, एनेस्थीसिया लॉजिस्ट, न्यू यॉर्क।
- 0:28आपकी वाइफ रोसी मैं पड़ी बाबा हैरानीजनक मैं केएनसी से की
- 0:40डॉक्टर हूँ जहाँ। आपने कहा मैं आंख बंद करके घर से
- 0:53गऊशाला मंदिर तक करीब एक डेढ़ किलोमीटर पर जाता है और इलाका
- 1:03भीड़बाद बना है। व्हीकल्स चलते हैं।
- 1:08भारी भी हल्के में लोग चलते हैं, रक्षा भी चलता, टेम्पो भी चलता और
- 1:16आपके आँखें बंद होती हैं। मेक एनास्टसियालोजिस्ट हूँ हार्ट
- 1:31कैन बी पॉसिबल? सुंदर है स्वाद यह कोई रहस्य नहीं
- 1:50है, पुत्र तुम्हारा स्वाद बिलकुल वैज्ञानिक है।
- 2:04यह ब्राह्मण सृजना के प्रतीक कण को हर क्षण अपनी इच्छा के अनुसार
- 2:18गतिमान रखता है। यह ब्राह्मण प्रत्येक कण को अपनी
- 2:35सृजना के प्रत्येक कण को हरक्षण अपनी इच्छा के मुताबिक चलाता है।
- 2:49एक एक शब्द को ध्यान से सुन लेना पुत्री न जाने तुमने ये प्रश्न
- 2:57क्यों पूछ लिया? प्रत्येक जड़ और चेतन के लिए
- 3:12ब्राह्मण का मालिक प्रतिक्षण अपना आदेश वितरित करता है।
- 3:30प्रकृति तो मान लेती है सूरज, चाँद, तारे, पेड़, पौधे, धरती,
- 3:41ग्रह आकाश, नक्षत्रिय व्यवस्था चुपचाप मान लेती।
- 3:52इसलिए इतनी शांत है परमात्मा के घर से आया हुआ आदेश प्रतिक्षण यह
- 4:05आदेश आता है। और प्रति कण के प्रति आता है।
- 4:10हर एक कण को अलग से यह आदेश भेजा जाता है परमात्मा की तरफ से।
- 4:26जिसने यह सृजना की है जहाँ तक समझा है सृष्टि का मालिक फिर
- 4:39द्वार से समझा रहा हूँ क्योंकि बड़ा टेढ़ा सवाल है।
- 4:43सृष्टि का मालक जाने के सृजन हारा अपनी ही बनाए हुए प्रत्येक कण को
- 4:52प्रतिक्षण अपनी इच्छा को। भेज रहा है।
- 5:07सारे ब्रह्मांड में सारी एडजिस्टेंस में उसकी इच्छा क्या
- 5:16है वह भेज रहा है प्रतिपल। और मैंने बहुत बार अपने प्रवचनों
- 5:30में कहा वह संदेश तुम तक भी आते है, फिर क्यों उसे कोई संत पकड़
- 5:39लेता है? और साधारण जन नहीं पकड़ पाता, आज
- 5:49नहीं पकड़ पाता। कोई क्षण था जब संत दूर जंगलों
- 5:57में सन्नाटे में बैठा है की झोपड़ी के अंदर।
- 6:02बड़ी मस्ती के आलम में उसका प्रत्येक हुक्म रिसीव करता था,
- 6:13एक्सेप्ट करता था, भू क्षण चले गए।
- 6:21वह वेल ही चले गए, वेला बदला और ध्यान रखना जूं ही तुम एक्सेप्टेड
- 6:32हुए उसके सिग्नल के तुम ही तुम ठहर के आओगे।
- 6:42क्योंकि दौड़ते तोड़ते प्रॉपर्टी सिग्नल पूरे पूरे असब के नहीं
- 6:48होते हैं, धीरे धीरे अभ्यास होना शुरू हो जाता है।
- 6:56फिर वह दौड़ते हुए भी उसके सिग्नल्स को पकड़ सकता है, तो मैं
- 7:06घर से चलता था। आँखें बंद हो तो लोग देखते इसकी
- 7:15आँखें लेकिन ये चला जा रहा है सही।
- 7:19टकरा नहीं रहा। बस आती है उस तरफ उठ जाता, कोई
- 7:26गाड़ी आती, कार आती, कोई रिक्शावाला आता, कोई आदमी आता तो
- 7:32साइड से बच के निकल जाता। देखता तो है नहीं, बाकी बड़ा
- 7:37अजूबा था। बहुत से लोगों ने मुझे इस
- 7:41संस्कृति में देखा बिना आँखें खोले।
- 7:53फिर मुझे कुछ लोगों ने कहा ये क्या है?
- 8:05मैं कैसे बताता कि कोई अदृश्य शक्ति मुझे मार्गदर्शन करती है और
- 8:15यूँ कहिए कि कठपुतली की तरह संदेह हो जाती है और मैं वैसा ही नाचता
- 8:21हूँ और यह मेरे वश में। तो फिर जब ज्यादा लोगों को पता
- 8:31लगा तो मैं कालिया निकल के आया साइड वाली जो साइड से भी आँखें ना
- 8:39दिखे फिर मैं मज़े से आँखें बंद करके चलता हूँ।
- 8:45क्योंकि आदेश तो उसका स्वयं ही घूमा लेता है।
- 8:49मेरी आँखों की जरूरत है वे न पग चले सुने वे न कान यह किसी स्थिति
- 9:07में बोले गए शब्द। अब पुत्री तुम आराम से समझ सकती
- 9:20हो, मैं तुम्हारे तुम्हारी ही भाषा में एनेस्थीसियालोजिस्ट की
- 9:27भाषा में समझा देता हूँ, साधारण त्याग हमारी काँटा जुड़ता है।
- 9:37दर्द होता है लेकिन जब तुम इंजेक्शन लगा देती हो हमारी पीठ
- 9:47की उस फ्लूइड के अंदर एल थ्री एल फ़ोर।
- 9:54या एल फ़ोर एल फाइव हॉलीवुड के अंदर जब तुम वह दवा लगा देते हो
- 10:04जिसे जिसे हम एनेस्थीसिया कहते हैं हमारे सारे शरीर में।
- 10:15नक्से शिखा तक नर्व्स का जाल बिका हुआ है।
- 10:23पूरे शरीर में नसों का जाल बिछा हुआ है।
- 10:33और इनके भीतर से सोडियम चैनल्स के द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान
- 10:42होता है। बावों में कांटा चूका।
- 10:48नस के भीतर सोडियम चैनल से उन्होंने उसे तदक्षण ब्रेन के पास
- 10:56से सिग्नल वेजा के काँटा छोड़ा है तो ब्रेन तदक्षण।
- 11:07रिस्पांस करता है कैटलपों को और हम काम हटा लेते हैं।
- 11:15ये काम इतने क्विकली होता है कि हमें शायद समझ बात नहीं आता है।
- 11:24ये सारी व्यवस्था तुम जानते हो। काँटा छूभा नस के भीतर जो सोडियम
- 11:38चैनल था उनके द्वारा वह सिग्नल गया।
- 11:41ब्रेन को एक काँटा छूभा है और ब्रेन ने फौरन संदेश मैसेज
- 11:49प्रसारित किया। रिस्पांस किया।
- 11:51क्या डालो पाप को पाप को हटा लिया गया?
- 11:57यह इतनी त्वरित प्रक्रिया थी कि हमें बाद में समझाता है कि क्या
- 12:05हुआ ऐसे ही भ्रमण का मालिक। प्रतिक जर्रे को प्रतिकक्षण अपना
- 12:24संदेश भेजता है जैसा वो चाहता है और उसके चलने से ही।
- 12:30सूरज ठहरा हुआ है उसके चढ़ने से ही धरती घूम रही है।
- 12:37अपनी धुरी के ऋतिकर और सूरज के अर्तिगर्स उसी के चाहने से ही
- 12:44चंद्रमा और सभी ग्रह तारे नक्षत्र अपनी अपनी कक्षाओं में।
- 12:49घूम रहे हैं और टकराते में किसी से भला इतनी अजीब व्यवस्था को
- 12:59देखकर भी तुम्हारे भीतर किसी एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी पावर की लहर
- 13:07नहीं रोकती? तुम्हें डाउट नहीं लगता क्रियेट
- 13:12नहीं होता डाउट तुम्हें कुछ संवेदना नहीं महसूस होती कि कोई
- 13:20है जो संदेश को प्रसारित कर रहा है, तुम तो डॉक्टर हो।
- 13:30संत को यह सिग्नल पकड़ में आता है।
- 13:34बड़े आराम से मेरे को सिग्नल पकड़ में आता है, मैं आँख बंद करके
- 13:43आराम से गुजर जाता हूँ। और आरंभ से वापस भी आ जाता।
- 13:49आंख न खोलता हूँ तुम्हारे लिए बड़ी अजीब सी प्रक्रिया है, लेकिन
- 14:00मैंने पुत्री तुम्हें साइंटिफिकली एनेस्थीसिया अलोजिकी।
- 14:06हिसाब से समझा दिया। अब संत तू इसको पकड़ लेता है, तुम
- 14:16उसके आदेश को क्यों नहीं पकड़ पाते?
- 14:19यही सवाल है तुम्हारा? जैसे पुत्री, काँटा चूभा और
- 14:36तुम्हारी नब्ज में सोडियम के जो कणक थे, उन्होंने आगे भेज दिया
- 14:46संदेश। लेकिन ज़रा सोचो जब तुम
- 14:51एनेस्थीसिया देती हो एल थ्री एल फोर में जे एल फोर एल फाइव में
- 14:58फ्लूड में सीधे सीधे तुम दवा इन्सर्ट करती हो?
- 15:08इस संदेश को की कांटा छूभा है, ब्रेन तक पहुंचाने के लिए या
- 15:16ब्रेन का आदेश वापस आने के लिए एक ही चीज़ की जरूरत होती है वो होते
- 15:22हैं सोडियम आइंस। ठीक अगर सोडियम आयन है ना तो यह
- 15:33सारा चैनल टूट जाएगा अवरुद्ध हो जाएगा।
- 15:37फिर ना तो पांव में कांटाजुबा यह सन्देश जाएगा।
- 15:43ब्रेन के पास ना ही ब्रेन वापसी संकेत भेजेगा के पांव खैर, चलो,
- 15:50यह सभी सोडियम आइन्स के कारण बिजली के प्रवाह के कारण।
- 16:02अक्शॅन कनेक्शन होता है। अगर हम सोडियम चैनल को बंद कर दें
- 16:09तो और तुम्हारा ये एनेस्थीसिया का जो सलूट है एपिडुरल देते हो तो।
- 16:24केरेब्रोस्पिनल फ्लूइड में जब हम बाहर से एनेस्थेटिक यह दवा
- 16:33इंजेक्ट करते हैं तो सोडियम आयरन का संपर्क टूट जाता है।
- 16:41जैसे हम बिजली की तार को कहीं से थोड़ा तोड़ दे और रूद्र कर दे,
- 16:48सारे घर की रोशनाई रुक जाएगी और तार कितनी है?
- 16:55बिल्कुल छोटी सी। थोड़ी सी धरा और सारा सिस्टम काम
- 17:06करना रुक जाएगा। बस यही सिस्टम है, तुम तो जानती
- 17:10हो, लेकिन लोगों के लिए और जो मेरे लिसनर हैं, उनके लिए बोल रहा
- 17:16हूँ। ताकि उनको इस वैज्ञानिक के संबंध
- 17:21का पता चल जाए तो कैरेप्रो स्पाइनल फ्लूइड में जब हम कोई
- 17:30लीडो केन वगैरह फ्लूइड को इंजेक्ट करते है सीधा।
- 17:38द्रव्य में या बाहरी हिस्से में एल थ्री एल फोर में या एल फोर एल
- 17:45फाइव में तो वह क्या करता है? सोडियम आयरन के बिना ये सारा काम
- 17:52नहीं होता। सोडियम आयरन्स की गति को अवगत कर
- 17:59देता है। जैसे हमने तार तोड़ दी।
- 18:04बीच में से जब सोडियम आयरन्स की तार टूटी, ब्रेक हुई थोड़ी सी तो
- 18:15सिग्नल। हमारे ब्रेन तक नहीं पहुंचता और
- 18:20सिग्नल ब्रेन तक नहीं पहुंचता तो ब्रेन वापसी सिग्नल नहीं देता।
- 18:28प्रतिक्रिया नहीं करता यह साइंटिफिक प्रोसेसर मैंने तुम्हें
- 18:33बताई जो हमारे एनेस्थीसिया की। अहंकार ऐसा ही एनसिफिया है।
- 18:46तुम्हारा भ्रम ऐसा ही एनसिफिया है।
- 18:54जो परमात्मा के भेजे गए आदेश को अवरुद्ध कर देता है, रोक देता है।
- 19:06वो तुम्हारे ब्रेन तक पहुंचने नहीं देता।
- 19:11और जब कोई संदेश परमात्मा से आया हुआ तुम्हारा अहंकार, इगो,
- 19:19इल्यूसन ब्रेन तक नहीं पहुंचने देगा, जिसने रिसीव करना है और
- 19:26सारे शरीर को उसने आज्ञा देनी है। तो सिग्नल रास्ते में अवरुद्ध हो
- 19:32गया। रोका किसने तुम्हारे इल्यूज़न ने
- 19:38तुम्हारे ब्राह्मण ने तुम्हारी मान्य ताओं ने तुम्हारी थोपे हुए
- 19:47विश्वास होने। ये तुम्हारे इल्यूज़न या भ्रम
- 19:55जिनको संत की भाषा में अज्ञान कहते है, यह ब्राह्मण के द्वारा
- 20:03परमात्मा के द्वारा भेजे गए संदेश को रोकने का काम करता है।
- 20:11सोडियम आयरन्स के भीतर इसने लूडो कैंट ठोक दिया।
- 20:21सारा करंट का फ्लू रुका गया तो भला तुम्हारा ब्रेन उस सिग्नल को?
- 20:32रिसीव कैसे कर पाएगा? ये है साइंटिफिकल व्यवस्था बड़े
- 20:39आसान ढंग से तुम्हें बताई तो इसका मुख्य कारण क्या होगा?
- 20:46तुम्हारे दर्द को रोकने का मुख्य कारण तो हो गया?
- 20:50कि तुमने स्पाइनल फ्लूइड के अंदर लीडो गेन इंजेक्ट कर दिया।
- 20:57वो बाहरी त्वचा में किया कि सीधा सीधा फ्लूइड में इंजेक्ट कर दिया।
- 21:05यहाँ क्या है यहाँ परमात्मा का आदेश तो हर वक्त आ रहा है।
- 21:09हर फल, हर कड़ी अब देखिए तुम बड़ी बड़ी यूनिवर्सिटी से क्या कैटेगरी
- 21:17लेके आते हो और तुम वो बात नहीं बोल सकते।
- 21:22मुझे रोज़ कहते हैं मेरे शिष्य के बाप आप तो पड़े हो नहीं, यह बातें
- 21:27आप कैसे बोल देते हो? मैंने कहा जब मैं सोडियम आयरन्स
- 21:35को आने जाने की गति को अवरुद्ध नहीं करता, ये मेरे हाथ में है।
- 21:42मैं जब चाहूँ परमात्मा के द्वारा आए हुए आदेशों को रोक लूँ।
- 21:49इसे ही मैं कल को बदलना कहता हूँ। परमात्मा के द्वारा आये हुए
- 21:56आदेशों को मैं रोकने में सामर्थ्य रखता हूँ।
- 22:01मेरे लिए बाएं हाथ का खेल है। मैंने सोडियम आयरन के भीतर बहती
- 22:08हुई वो विद्युत की धारा को रोक देना है मैं इस हुनर में दक्ष
- 22:22धीरे धीरे हो गया अब मैं जब कहूँ क्षणभर में।
- 22:28नक से शिखा तक अपनी तल बदल सकता हूँ।
- 22:32क्षीण भार में संकल्प लेते ही यह साइंटिफिक प्रक्रिया है।
- 22:44परमात्मा एक बहुत बड़ा साइंटिस्ट है, बहुत बड़ा साइंटिस्ट का मतलब।
- 22:51ही कैनट बी मेजर्ड उसका प्रसार मापा नहीं जा सकता।
- 23:00इतना विशाल समझ है उसमें यह शब्द नहीं है।
- 23:13कि एक एक जर्रे को अपने ही बनाए हुए एक एक जर्रे को हर क्षण उसके
- 23:23अनुरूप। वह अपनी इच्छा को प्रेषित करता
- 23:29है। अब हिसाब लगाइए तो हमारी बुद्धि
- 23:34जवाब देनी है कितने कण तो इस धरती के ऊपर और 3,00,000 धरतियाँ समा
- 23:45सकती हैं सूरज में? और 3000 धरतियाँ समा सकती हैं
- 23:51बृहस्पति गृह में फिर तो मुख्य मुख्य मैंने दो बताए जो ब्रम्हंड
- 24:01के हिसाब से अति सूक्ष्म में। फिर तुम इस सारे ब्रम्हंड में
- 24:10औकात क्या रखते हो? जब तक तुम्हें पता नहीं चलेगा कि
- 24:16तुम्हारी औकात क्या है, तब तक तुम्हारा अंकार नहीं मटेगा।
- 24:22अभी तुम अपने आप को बहुत ऊंची गद्दी पर बैठे समय क्यों सब कुछ
- 24:27तो है धन है, लोग मान सम्मान देते हैं, पदार्थ हैं, सुख सुविधाएं
- 24:39हैं, फॉलोअर्स हैं, सब कुछ हैं, सुख की सारी सुविधा की सारी
- 24:45सामग्री है। लेकिन बस तुमने अपना आपा नहीं
- 24:51देखा और नानक किसी शब्द को कह देते हैं कि कह नानक बिन आपा
- 24:59छीने, मिटे न भ्रम की गाय तुम्हें जब पता चलता है।
- 25:05कि मैं हूँ ही नहीं तो तुम्हारे भ्रम की इकाई मच जाती है और अंत
- 25:16में मूर्ति बंद हो जाती है। संत की जीस संत ने कभी अपने आप को
- 25:24कहा था? अरे मेरे कैसा कौन?
- 25:28जब वह संसारिक हुआ करता था, तब उसने पूंछ लगा ली थी।
- 25:38भूतपूर्व प्राइम मिनिस्टर भूत हो गया लेकिन प्राइम मिनिस्टर अभी
- 25:43याद है? तुम अपने आप को बड़ा विशाल समझ
- 25:54रहे हो और यह भ्रम है। नानक कहते हैं, तुम जब तक तुम्हें
- 25:59पता नहीं चलता कि तुम्हारी औकात कुछ है ही नहीं।
- 26:06यू अरे जस्ट ए नेगलिजबल प्रॉडक्ट? इतने शुद्र हो तुम इतने शुद्र हो,
- 26:14तुम के नेगलिजबल हो यानी कि तुम्हें कहा जा सकता है कि तुम हो
- 26:19ही नहीं तो ये केन औषधियाँ जैसे लीडो किंग।
- 26:28लिग्नोकिन वगैरह ये जब हम इंजेक करते हैं उस के अंदर तो सोडियम
- 26:38चैनल्स को यह रोक देते हैं, सूचनाओं का आदान प्रदान करने के
- 26:46लिए। फिर शरीर को काटे जाओ, पीटे जाओ,
- 26:51पांव अलग कर दो, कोई सामान निकाल के भीतर से बाहर निकाल दो, कोई
- 26:56पता नहीं लगता और तुम जागते हुए रहते हो जैसे यह काम करता है।
- 27:08कि उस करंट को चलने से प्रवाह को रोक देता है।
- 27:13ऐसे ही तुम्हारा अहंकार अहंकार ही झूठ है।
- 27:24पतंजलि ने बुधने। महावीर ने सबसे पहले बात कही।
- 27:30अष्टांग योग में यम के पहला शब्द है सत्य करम 22 तुम चलोगे तो पहले
- 27:44तुम्हें सच्चा होना पड़ेगा। अगर कोई आदमी झूठ बोलता है तो
- 27:53पहला ही स्टेप उसने गलत उठा लिया। उसका पहला ही स्टेप मार्ग गलत है
- 28:03तो फिर मंजिल भी गलत होगा। वह कभी आनंद का रस नहीं पा सकेगा।
- 28:10वह जो टूटी हुई तार है जो सोडियम आयन के जरिए सूचनाओं का आदान
- 28:17प्रदान करती है, वो टूट गई तार को जोड़ने के लिए।
- 28:24सत्य की जरूरत है अपने प्रति सच्चे बनो सबसे पहले जैसे तुम हो
- 28:35वैसे ही बाहर हो जाओ। आज दुनिया क्यों दुखी है?
- 28:43पतंजलि का बुद्ध का, महावीर का सत्य अहिंसा से ब्रह्मचर्य प्रिय,
- 28:50प्रथम मूल जो शुरुआत है वह स्टेप गलत उठा लिया है, सच्चे नहीं है,
- 29:01पति के आगे तुम्हारा चेहरा कुछ और होता है।
- 29:03पत्नी के आगे तुम्हारा चेहरा कुछ और होता है माँ के आगे कुछ और
- 29:09पिता के आगे कुछ और टीचर के आगे कुछ और दोस्त के आगे कुछ और जनता
- 29:16के आगे कुछ और और होते तुम कुछ और।
- 29:23तुमने अपने इतने ही रूप बना लिए हैं कि तुम्हें बहुरुपिया कहा जाए
- 29:30तो कुछ गलत नहीं है। तुम बहुत वृहद बहुरुपिये हो,
- 29:35तुम्हारे इतने रूप हैं तुम इतने मल्टीडायमेंशनल हो।
- 29:43तुम इतने टूटे हुए हो तो ज़रा सोचो अगर तार टूट जाए, कई जगहों
- 29:49से तो सूचनाओं का आदान प्रदान होगा।
- 29:53कैसे परमात्मा तो हर पल, हर कण को, हर मूवमेंट में?
- 30:01सूचनाएं भेजता है कि ऐसा करो, ऐसा करो, प्रकृति चुपचाप सुनती है और
- 30:08मानती है अगर एक पल के लिए भी प्रकृति सुनना बंद कर दे।
- 30:15पेड़ पौधे भी सुनते हैं। चाँद तारिक भी सुनते हैं।
- 30:19ग्रहण नक्षत्र भी सुनते हैं पूरा भ्रमण सुनता है एक आदमी के सिवा
- 30:27और अकेला आदमी ही बेचैन है तुमने कभी किसी पशु को बेचैन देखा है,
- 30:37थपेड़ों को बेचैन देखा तुमने? पेड़ अपनी मस्ती में जी रहे हैं,
- 30:47उन्हें कोई जल्दबाजी नहीं कि हम कब बड़े हो जाएं, कब फल लग जाएं,
- 30:55कब फल पक जाएं, कब हम फल को खा? लेकिन मनुष्य को बड़ी जल्दी है।
- 31:04अब मैं बोलता हूँ तुम सुनते हो, वो चाहे राजनीतिक चैन हो या चाहे
- 31:13मैं आध्यात्मिक चैनल पे बोलता हूँ।
- 31:17तो बहुत से कमेंट मुझे आ जाते हैं।
- 31:19बाबा आज मैंने एनलाइटनमेंट में बोला तो मैं भी एनलाइटनमेंट होना
- 31:26चाहता हूँ, जल्दी करो और अगर मैं कहूं कि हिंदुस्तान को ऐसा ऐसा
- 31:36करने से ऐसा बन जायेगा। तुम कहो तो फिर फिर देर क्या है?
- 31:41जल्दी करो बाबा अब इंतजार नहीं होता, बस यही इंतजार नहीं होता यो
- 31:47यही तुम सोडियम आयन की जो तार है उसको तोड़ देते।
- 31:55संवाद आगे नहीं चले गए थे। तुम्हारी ये जल्द आवाज है के अभी
- 32:10अभी अब पता चल गया है तो वो जल्दी से अभी पहुँच जाए।
- 32:18अब पता चल गया है तो जल्दी से गोल्डन स्पैरो बन जाए।
- 32:24यह जल्दबाजी हेतु में देरी करवा देती है।
- 32:32बड़ी उलटी बात है, संत की बातें उलटी होती है क्योंकि संत जहाँ
- 32:42पहुंचता है। वह जाकर उल्टा पाता है।
- 32:46मैं जिसे अपना माना था वह मैं नहीं, मैं कुछ और हूँ उसके
- 32:55अतिरिक्त जो जो भी मैंने माना था। धन मैं हूँ परिवार में हूँ, पुत्र
- 33:03में हूँ पुत्री में हूँ, पत्नी में हूँ पति मैं हूँ बॉस में हूँ,
- 33:10ऑफिसर में हूँ मैं नौकर हूँ, मैं राजा हूँ, मैं गुलाम हूँ ये सब जो
- 33:18मैंने अपने आप को माना था। वो गलत निकला जब तुमने सत्य को
- 33:26पाया और तुम पाओगे। जो भी तुमने सोचा था, वो आमूलचूल
- 33:39गलत था। ठीक नहीं था।
- 33:44तुम बिना पहुंचे जल्दी करते हो और यह जल्दी ही तुम्हें मार देंगे,
- 33:56तुम पहुंचने से चूक जाओगे। सबसे पहले जल्दी का मतलब है भागना
- 34:06और तुम्हारे गुरु तुम्हें जल्दबाजी में धकेल देता है।
- 34:11जल्दी करो, जल्दी से माला कर 214,00,00,000 जाप कर दो तुम
- 34:18जितनी जल्दी करोगे। उतनी देरी को जाये और जितनी जल्दी
- 34:25को त्यागोगे धैर्य रखोगे, उतनी ही जल्दी पहुँच गया होगा।
- 34:33ये उल्टा मसला है कुछ। अगर तुम इतनी तसल्ली रख सको, इतना
- 34:39धैर्य रख सको कि वह जब मिलेगा, मिल जाएगा, नहीं मिलेगा तो नहीं
- 34:44मिलेगा, कोई बात नहीं स्वीकार है, यह स्वीकार का आलम तुम्हें इससे
- 34:52क्षण भी पहुंचा सकता है। हमारी जान ले लेगा।
- 35:04यानी ची। जाएंगे तुम्हारा कुछ ना बिगड़े गा
- 35:49मगर। दिल टूट जाएंगे मझट को जुल्फ से
- 35:59पानी हमारी जान ले लेगा ये नीची आँख का
- 36:15जादू चलो अच्छा हुआ मरकर जहाँ से छूट जाएंगे।
- 36:25यह नीची आँख का जादू यानी मर मिटना नानक नीमी नानका मिठत नीमी
- 36:33नानका गुण चंगियांग तथ व्हेन डाउन डाउन टु अर्थ झुक जाना।
- 36:45जय की जादू है तुम अकड़ के खड़े रहते हो तुम गर्दन में गुल्ला
- 36:52फंसा लेते हो स्टील को इसलिए तो हम दुख पाते हो।
- 37:03संत तुम्हें बड़ा आसान तरीका बताता है और संत जितना आसान तरीका
- 37:07बताता है उतना ही असंत तुम्हें उलझाता है।
- 37:13कॉम्प्लिकेशन से खड़ी करता है। ये कर लो वो कर लो, ऐसा कर लो,
- 37:19वैसा कर लो और तुम्हारी अंकांक्षाएं बहुत हैं।
- 37:26अभी मेरे पास आ जाते हैं कॉमेंट्स बाबा ये मास्टर जी बोल रहे हैं ये
- 37:34बापू जी बोल रहे हैं क्या मैं इनको सुन लिया करो, मैंने कहा
- 37:38तुम? तुम मेरी बंदुआ गुराम हो क्या तुम
- 37:45जैसे कैसे सुन सकते हो मुझसे क्यों पूछ रही हो जैसे जीस तरह
- 37:56जिसके पास जिसकी बात सुनकर तुम। शुरू आ गया।
- 38:06उस आनंद के क्षणों में तुम अपने ही अंतःस्थ में उतरे बस समझ लो वो
- 38:14ही स्थान है तुम्हारा। जहाँ तुम्हारा भटक न छूट जाए,
- 38:23तुम्हारे प्रश्नों के जवाब मिले ऐसा नहीं है।
- 38:27वर्ण तुम्हारे मनुष्य को तृप्ति मिले।
- 38:33प्रश्नों का जवाब तो कोई सर भी दे सकता है।
- 38:38कोई आचार्य नहीं दे सकता है, लेकिन मनुष्य की तृपते ही यह कोई
- 38:45संत देगा, तुम्हें बातों में उलझाने वाले बहुत मिलेगा।
- 38:54मुझे बाबा कहने लगे। ये देख रहे हो औरत सामने नाम भूल
- 38:59गया मैं उसका सोहेल सोहेल नाम की कोई है?
- 39:05लाखों लोग उसको देख रहे हैं और लाखों लोग वो देख रहे हैं जो अभी
- 39:13पहुंचे नहीं। मज़ा तो तब है अगर कोई पहुंचा हो
- 39:18व्यक्ति से देखे क्योंकि उसने ध्यान दिया वह ऐसे ही व्यक्ति को
- 39:27सुनेगा जो उसके सम्कक्ष हो गया। जो आनंद को उपलब्ध हो गया वो मेरे
- 39:35पास लोग क्लिप भेज देते हैं। ये देखो बाबा एक आदमी के अंदर 25
- 39:41शुरू हुई थी। मैंने कहा तू सिल्वर कोड कितनी
- 39:46थी? बिना सिल्वर कोड के तो वो जा ही
- 39:49नहीं सकता घर पे। तो इसको पता है खुद को इसके भीतर
- 39:56कितनी रूह है और अगर गौर से देखा जाए तो तुम्हारे भीतर से हर पल
- 40:03हजारों रूहें गुजरती हैं क्योंकि उनके लिए तुम्हारा शरीर वादा
- 40:07नहीं। ऐसे मूर्खों ने इस स्वर्णिम धरा
- 40:15को नर्क बना दिया है। काहे को चंद सिक्कों के कारण?
- 40:27ये चांदी के सिक्के ये डॉलर इन्हें ही दुख दे जाते हैं
- 40:37क्योंकि जो वक्त आपा छीने में लगाया जा सकता था, वह दूसरे को
- 40:44कमाने में लगा देते। फिर धोखा किसे मिला?
- 40:49दूसरे को धोखा देने से पहले खुद धोखा खाना होता है।
- 40:55मैंने पहले पे बताया, शेक्सपियर कहता है कि किसी की गलती पर नाराज
- 41:01होना तो मारी मुड़ता है। क्योंकि गलती उसकी मूर्खता उसने
- 41:09की और आग की भट्ठी में जल तुम रहे क्रोध, एक आग की भट्ठी तो विलियम
- 41:17शेक्सपियर बिलकुल ठीक कहते हैं। गलती उसने की।
- 41:24तो वही परिणाम को भुगते हैं और बुद्धि से अच्छी तरह इम्प्लिमेंट
- 41:28करते हैं। बुध के ऊपर कोई थूक जाता है, कोई
- 41:31गाली निकालता है, बुध शांत रहते हैं।
- 41:36बुध अपना मुक्का उठाते हैं, पूछ लेते हैं कुछ और भी पूछना है
- 41:42बनते। यह तो मैं समझ गया तुम कुछ ऐसा
- 41:45कहना चाहते हो दर्दीला जो शब्दों में नहीं आया तुमने थूक कर मेरे
- 41:51पे बता दिया कुछ और भी कहना चाहते हो?
- 42:00हमारी जादू।
- 42:27चलो क्या हुआ अमर कर यहाँ से छूट जाएंगे चलो क्या हुआ अमर कर।
- 42:46जहाँ से छूट जाएंगे। काश तुम इन शब्दों को हृदय के
- 42:54भीतर उतार सकते हो, जिसने मृत्यु को शहर से स्वीकार कर लिया चलो
- 43:02अच्छा हुआ मरकर जहाँ से छूट जाएंगे।
- 43:06वह शासी हुआ, वह पा जाएगा जिसने कहा कि नहीं।
- 43:13अभी अच्छा ऐसा भी होता है कि तुम सड़क के ऊपर हाथ रख दो।
- 43:18अगर मैं पहुँच जाउंगी तो फिर जल्दी करो, फिर देर का है, वो कभी
- 43:24नहीं। बड़े ठहराव की अपेक्षा होती है।
- 43:32जरूरत होती है यहाँ तुम इतने ठहरे होते हो कि पानी झील सा मन हो,
- 43:41कोई तरंग न हो। ठहरा हुआ पानी तुम्हारे ठहराव से
- 43:52ही चीजें भीतर उतरेंगी। अन्यथा लहरों में ही गुम होती
- 43:58फिरेंगी तुम्हारी जल्दबाजी तुम्हें ले बैठेगी और तुम अगर आज
- 44:09तक नहीं पहुँच पाए तो तुम ये जाप कर लो।
- 44:13ये पाठ कर लो अखंड पाठ साहब का पाठ कर लो ये लो दुर्गा सप्तसती।
- 44:20ये लो हनुमान चली सब पढ़ लो ये रामायण का पाठ करवा लो ये
- 44:26सत्यनारायण की कथा कर लो सब पानी में झंझोर है जो रेत बैठ गया था
- 44:35नीचे। वह तुम्हारी खंगालने के कारण फिर
- 44:39ऊपर आ जाएगा। तुम झुक गए जीस दिन तुम इसके शब्द
- 44:48जो मैंने आकर में बोला उसे स्वीकार कर लोगे।
- 44:56चलो वे झाबुआ मर कर जाएंगे। मृत्यु को भी तुम पूर्ण हृदय से
- 45:14अंतस्तर से स्वीकृति। कर लो।
- 45:17बिना किसी शिकायत के तो बस समझो तुम्हे किसी और साधना की आवश्यकता
- 45:23नहीं और वैसे भी किसी प्रकार की साधना की आवश्यकता कहाँ होती?
- 45:32अपने पास ही तो आना। अपने पास आने के लिए किसी यात्रा
- 45:39की और वाहन की आवश्यकता पड़ेगी। क्या जब तुम सोए बड़े होते हो तो
- 45:46सपन में कहीं दूर चले जाते हो हज़ारों मील तो।
- 45:55और झटपटाते हो कि मैं अज्ञात मुल्क में आ गया, अज्ञात मुल्क
- 46:01में आ गई। अब मैं कैसे घर लौटूं, मुझे
- 46:04दुरुस्त नहीं पता, लेकिन मुझे बताएगा।
- 46:13अकस्मात किसी ने झंझट दिया तुम्हारी आँख खुल गई तुमने पाया
- 46:19कि मैं तो बिस्तर पे हूँ, फिर तुम बिस्तर पर किसी वाहन के द्वारा
- 46:26पहुंचे नहीं कैसे पहुंचे? जागने से पहुंचे बस जाग जाओ, बी
- 46:39अवेर यह सपना है तुम्हारा भटकना एक सपना।
- 46:50और ये गुरु लोग तुम्हें भटकते हुए को और भटका देते हैं।
- 46:57फिर तुम कुछ करने लगते हो और तुम कुछ भी करने लगो, तुम्हें सिखाया
- 47:05गया है, जयकारा लगा दो। जी, वह पवित्र होगी जी, वह कभी
- 47:11पवित्र नहीं हो सकती। मास का लोथड़ा कभी पवित्र होता
- 47:14है। तुम्हें कहा जाता है, सिखाया जाता
- 47:21है कि राम राम करों, यह वाणी पवित्र हो जाएगी।
- 47:31यह जीवा पवित्र हो जाएगी, भगवान राम के नाम से नहीं, यही भगाने के
- 47:39थ्री कहें इन गुरुओं के और समझले न ये जालसाजी है, अब व्यापार शुरू
- 47:44हो गया दे। आर।
- 47:50ये व्यापारी है तुम्हारे कान में नाम बता देते हैं फुस फसा के फिर
- 47:58क्यों कहते हैं आगे मत बताना कोई बात है ना कुछ छुपाया है, ना कुछ
- 48:05राज़ है ना? कोई व्यापार का सूत्र है ना कि
- 48:09तुमने ही बता दिया फिर हमारे पास कौन आएगा?
- 48:14फिर दमाचौकड़ी माल ठप लेकिन बताने वाले तो बता ही दिया करते हैं
- 48:23ज्योत निरंजन ओमम का। रणों का सोहम सतनाम क्या हो गया
- 48:31शब्द हैं जब वो जब तो ही चले जाओ, लेकिन दूसरी तरफ कबीर करते हैं।
- 48:43भलो भयो, हरी भी सरो सर से टली भला ये तो एक भला था कौन याद रखे
- 48:52इस नाम को हमने सच्चे नाम में जाना है जहाँ सच्चे खंड ये कहते
- 49:00हैं लेकिन ये तो मरने के बाद कहते हैं।
- 49:04मैं तुम्हें जीते जी स्वर्ग दिखाना चाहती हूँ और जिसने भी
- 49:10पाया वह अमीर हुआ तो जीते जी हुआ मरकर भी कभी कोई अमीर होता है जो
- 49:17प्रसिद्ध हुआ वह जीते जी हुआ जिसने कोई खोज की।
- 49:21वो जीते जी की जो सुखद अवस्था में पहुंचा वह जीते जी पहुंचा किसी
- 49:27उद्यान में उसने खुशबू किसी मोतिया की, किसी गुलाब की, किसी
- 49:36चमेली की, किसी गेंदा की। रात की रानी की खुशबू ली तो कभी
- 49:42मुर्दे ने खुशबू ली। ये सभी आनंद की अवस्थाएं जीते जी
- 49:50प्राप्त होती हैं। मर कर तो सब इन्द्रियां बेकार हो
- 49:55जाती हैं, व्यर्थ हो जाती हैं और तुम फूंक देते हो।
- 49:59तुम कहती हो बस व्यर्थ हो गया, देखिए कितना अमूल्य शरिक था कोटी
- 50:05बदले जाए? इसको फूंकने के लिए लकड़ियों की
- 50:12जरूरत होती है। ये नाम वाम के चक्कर में मत पड़ना
- 50:24तुमने महापुरुषों के शब्दों का अर्थ गलत कर लिया।
- 50:29ये महापुरुषों की गलती नहीं है। मैं तुम्हें रोज़ समझता हूँ।
- 50:35बाबा ने खुद कहा जितना कितना तेता नाम?
- 50:39जितना पसारा है उसको मैं नाम कहता हूँ बिन नामी नाहीं को ठानु नाम
- 50:46के बिना कोई जगह है ऐसी ही इस प्रेसेंट ऑफ़ रुपये हर ज़रा ज़रा
- 50:53इस ब्राह्मण का इस अस्तित्व का। ज़रा ज़रा नाम है बिन नामी का ही
- 51:03कहाँ हो कोठाओ कहाँ कोई भी जगह नहीं जहाँ नाम न हो और तुम झबते
- 51:10रहते हो और तुम्हारे गुरु तुम्हें कहते हैं चलो मुन्ना भाई कहते हो
- 51:15बाबा। इन्हें भी पता है इनसे नहीं हो
- 51:18पाएगा। इसलिए तो बताते हैं पता है इनका
- 51:23कुछ नहीं बनेगा, ये कहेंगे बाबा नाम नहीं जब होता है अरे बड़े
- 51:29प्रसन्न होंगे अभी तो हमें तो पता ही था।
- 51:35कि 1 दिन तुम थक जाओगे और थक जाओगे तो सो जाओगे एनर्जी
- 51:40लेस्सनेस हो फिर ये कहते हैं नहीं कैसा?
- 51:46ये तो जब नहीं पड़ेगा देखो फिर भवसागर से पार भी तो होना ही है।
- 51:51देखो फिर सत्यकंठ भी जाना है ना नहीं।
- 51:55ऐसे सच फेंट को लात मारते हैं ना जो मरने के बाद मिलता है ऐसे
- 52:00अमीरी को भी लात मार देना जो मरने के बाद मिलती है ऐसे सुखों को भी
- 52:05लात मार देना जो मरने के बाद मिलती है मरने के बाद तुम्हे
- 52:09स्वर्ग क्या करना होता है कौन जाएगा स्वर्ग में तुम ही ना रहे
- 52:14तो स्वर्ग का क्या मतलब? स्वर्ग देखना है, तुझे तेज़ी चलो
- 52:18मेरे संग तुझे एक चीन है, जो सर्जन हरा अपने प्रत्येक अंग में
- 52:30प्रसारित करता है अपने आदेश को। गलती तुम्हारी?
- 52:39मैंने कहा ये सारी सृष्टि आमूल चूल गुत्थी हुई है।
- 52:45आपस में अगर तुमने कोई धागा तोड़ दिया बीच में तो माला टूट जाएगी
- 52:52और करंट। पास ऑन नहीं हो सकते।
- 52:57मरने के उपरांत तुम्हें चाहे रस के भीतर डुबो दिया जाए, तुम्हें
- 53:07पता ही नहीं चला। बात तो है कि जीते जी कैसे तुम सच
- 53:13गण तक पहुँच जाओ, इन लोगों ने तुम्हें बहुत मूर्ख बना लिया, तुम
- 53:18इनसे कहना कि क्षमा महाराज हम तो चले अपने देश, तुम लोगों को
- 53:27बटकाते रहो। मर कर जो चीज़ मिलेंगे ये कहने
- 53:36वाले लोगों को त्याग दो, तुम अभी प्रमाण मानते हो।
- 53:43परमात्मा कहाँ है? तो फिर?
- 53:48मरकर आनंद देने वाले गुरु कहेंगे मरकर मिलेगा, फिर तुमने प्रमाण
- 53:55कहा मांगा, मरकर प्रमाण मांगने वाला ही नहीं रहेगा आनंद कौन लेगा
- 54:02मर्कर कोई तो होना चाहिए, तुम तो गए।
- 54:09तो आनंद लेने वाला गया। इसलिए कबीर कहते हैं बहुत अच्छा
- 54:17हुआ प्रभु वक्त फिर ही तुमने चेता दिया भलो भयो हरि भी सरो सर से।
- 54:25ये तरसे भी घर गई, माला गिर गई, नाम बिसर गया।
- 54:31नाम बिसर ही जाए तो अच्छा है उस घड़ी तुम धन्यवाद ही हो जाओगे जीस
- 54:37घड़ी नाम बिसर जाए। वह घड़ी शुभ घड़ी हो, जीस घड़ी
- 54:51परमात्मा का नाम बिसर जाएगा। क्यों यह एक झूठ है के परमात्मा
- 54:56का भी कोई नाम होता है उस अनामी का उस अलख का जो देखा नहीं जा
- 55:02सकता। उस अवाख्यात का कोई व्याख्या हो
- 55:06सकता है। क्या वह अनामी है?
- 55:09वह अलग है तुमने उसको नाम नकली नकली दे दिए और नकली नकली कागज़
- 55:16की नामी तुम्हें कहीं नहीं दूसरे किनारे पे पहुंचाती।
- 55:21और नकली नकली जहाजों पर तुम कहीं विदेश की यात्रा नहीं कर सकते।
- 55:25कागदी जहाजों पर तुम विदेश जा सकते हो।
- 55:29क्या बस ये काबिदी नाम है? इनको छोड़ दो परमात्मा का आदेश
- 55:37आएगा। जब तुम्हारे ये भ्रम टूट जाएंगे,
- 55:44फिर तार जुड़ जाएगी और तार जुड़ जाएगी तो करेंट सजा से है।
- 55:51हैलो हो रहा है बस ये दो तारों के टूटने से विखंडन होने से करेंट
- 55:58पास नहीं हो रहा घर में। बिजली घर से आ रहा है, तुम्हारे
- 56:07ट्रांसफार्मर तक आ रहा है ट्रांसफार्मर से आगे तुम्हारे घर
- 56:13तक भी आ रहा है तुम्हारे घर तक आते आते कहीं कोई तार टूट गई है,
- 56:20उस तार को देखो कहाँ से टूटी है। उसको जोड़ लो कैसे जुड़ेंगे ठहराव
- 56:27से जुड़ेंगे तारों का टूटना मतलब तारों का बिलगाव होना कुछ तो दरार
- 56:36पड़ती है ना दिनों में जब तार टूटती है।
- 56:41तो जो दरार पड़ती है वे लगाव होने की अलग अलग होने की वह दरार ही
- 56:49तुम्हारे करंट के फलों को रोकती है तो परमात्मा के आदेशों से अगर
- 56:55तुम चूक जाती हो तो कोई हैरानी की बात नहीं है।
- 56:58इट्स ए साइंटिफिक प्रोसेसर। तो तारों को +2 तो उड़ा किसने था?
- 57:05अहंकार ने मान्यताओं ने इन मान्यताओं को हटा दो तार, जुड़
- 57:10जाएगी फलो तो पहले से ही शुरू यही तो कहते हैं अष्टावक्र।
- 57:18हो ही भाई तुम हो ही परमात्मा तुम्हें बनना थोड़ी है ये तार के
- 57:25बीच में से तुमने जो गैप डाल दिया, जो सोडियम आइंज़ तुमने खत्म
- 57:30कर दिए, थोड़ा उनको तार को जोड़ लो।
- 57:35इसे ही कहते हैं शब्द सुवती का मिलान।
- 57:39इस टूटी हुई तार के गैप को हटा दो।
- 57:43यह जुड़ जाए, फिक्स हो जाए, एक हो जाए जैसे पहले यह पार्शियल्टी
- 57:48खत्म करो इसलिए मैं कहता हूँ भेद फैलाने वालों को त्याग दो वो भेद
- 57:54जाए हिंदू, मुस्लिम कहो। वो वेद जाए, ब्राह्मण शूद्र का
- 57:58हो, ये भेद ही तुम्हें जीने नहीं देता।
- 58:01यह भेद ही तुम्हें आनंद से वंचित रखता है।
- 58:05इस भेद को ही अलग कर दो। तुम यूनाइट हो जाओ तुम इस भेद को
- 58:12खत्म करके इस तार को +2 कैसे जुड़ेगी?
- 58:18बिन आपा छीने मटे न भ्रम की काई अबा कैसे चिन्ह तुम होगी तुम सारा
- 58:30कुछ बाहर से तोड़कर फिर वहीं आज। अंत वहीं आ जाता हूँ सारी शक्ति
- 58:38को बाहर जो तुमने इन्वेस्ट कर रखा सबको बाहर से वापस बुला लो आ जाओ
- 58:46मरते हुए भी तो तुम अपनी सारी शक्ति को एकत्रित करते हो।
- 58:53और पोटली बांध कर अगले घर की तैयारी में चले जाते हो, छोड़
- 58:57देते हो, जम्प कर जाते हो इस घर से बाहर तो फिर जीते जी हो जाओ सब
- 59:05शक्तियां को जो क्लीनिंगनेस में लगी हैं और रिश्तों में लगी हैं।
- 59:13वो पद्बियों में लगी हैं। वो धन के अंबारों में मान
- 59:17प्रतिष्ठानों से गद्दियों से जुड़ी हैं, उन सब को तोड़ के एक
- 59:23जगह पर सारी शक्ति को एकत्रित कर दो।
- 59:26यह है फर्स्ट स्टेप लेकिन वहीं मत बने रहना।
- 59:31वहीं बने रहने से इस विपश्यना ने न जाने कितने पागल करते हैं।
- 59:37तुमने छलांग लेनी ना सीखी, तुम वहीं इतना अटक करते करते और पागल
- 59:45हो जाओगे, 1 दिन तुम्हारी नींदें खो जाएंगी जो परमात्मा की दातें
- 59:50थीं। नींद से बड़ी कोई दांत होती है तो
- 59:56सारी शक्ति को इकट्ठा करके यूनाइटेड करके अपने ही अंत में
- 1:00:02उतर जाओ तो पाओगे तत्व हँसी क्षेत के तू तू ही तो है परमात्मा।
- 1:00:10यह स्वेत के तू तू ही तो है प्रमाणु और कोई दूसरा नहीं है हम
- 1:00:18ब्रह्मास्त्र यह जाना जाता है बोला नहीं जाता तुम इसको दोहरा
- 1:00:22रहे हो काशी के तट पर हाथ में माला लिए तुम जब रहे हो।
- 1:00:45ये कल्पना है? जैसे तुम प्लिस्टिक के फूल को देख
- 1:00:50कर कहो आह कैसी खुशबू आ रही है ये पृष्ठी का फूल है, इसमें खुशबू
- 1:00:56नहीं आती, असली फूल धरती की छती फट के आता है वो धरती के गर्भ में
- 1:01:05से आता है। वो असली सुगंत को बिखेरता है।
- 1:01:11यह माला सी जपने वाला मंत्र नहीं लेकिन तुम्हारे गुरुओं ने तुम्हें
- 1:01:19एक संस्कार दे दिया कि जप हो, जप हो कैसे जप मुझे नहीं पता।
- 1:01:31शिवो हम शिवो हम शिवो हम यह जानने की बात दोहरानी की बात नॉट टू
- 1:01:39रिपीट, बट यू नो तुम रिपीट करते हो, जबकि तुमने जानना है।
- 1:01:48कि तुम वो तत्व हो जो शिव हो, जो टूटते नहीं, जो मरते नहीं, जो
- 1:01:51गलते नहीं, जो काटते नहीं, जो उड़ते नहीं नैनम छिदंती शस्त्राणी
- 1:01:59नैनम दाहती पांव का नैनम। जैसे जब्बा ध्रुव ने जैसे जब्बा
- 1:02:16प्रहलाद वैसे अगर तुम जपना सीख जाओ, शब्दों के साथ न चिपटो उसके
- 1:02:27होने में एक हो जाओ। इस टूटी हुई तार को जोड़ लो तो
- 1:02:36तुम पाओगे। यह करंट का फलों निरंतर रहा है।
- 1:02:48ऐसे ऐसे। नाम जब वो जी ऐसी ऐसी ध्रुव पहला
- 1:03:07जब वो हर जैसे। ध्रुव प्रहला जप्यो हर जय।
- 1:03:21आग से तप तो होता हुआ खंबा देखा, प्रहलाद और उसके ऊपर चकती हुई
- 1:03:27टीढ़ी देखी? और भूकंप था।
- 1:03:30केस जगते हुए खम्भे को आगोश में ले ले डरता था।
- 1:03:38यह तो जल रहा है, मैं चिपक जाऊंगा, लेकिन जब उसने देखा एक
- 1:03:45छोटी सी कीड़ी चल रही है नरसिंहा अवतार।
- 1:03:50तो उसको विश्वास हुआ कि जब यह कीड़ी नहीं हुई जलती तो मैं कैसे
- 1:03:56चलूँगा। बस ऐसा दृढ़ विश्वास हो जाए और वह
- 1:04:00होगा देख कर मानकर अगर ऐसे तुम जपने में समर्थ हो जाओ।
- 1:04:08तो बात बन गई, फिर दुख, दर्द, तकलीफ, कष्ट, क्रैश, चिंता,
- 1:04:18चिंतनाएँ सब का और तुम वही हो जाओगे जो वास्तव में हो अभी तो
- 1:04:26तुम कल्पना में हो जो भी। धन्यवाद।