Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Sep 25 - क्रिया योग के बाद ध्यान में क्या करना चाहिए? अनहद नाद तक और बाद का सफर!
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- 0:06बीना रानी बाबा जी, आपने सभी धर्मों के बारे में बताया।
- 0:19अब हम चाहेंगे कि आप अपने धर्म के बारे में भी कुछ विस्तृत चर्चा कर
- 0:26ले। आपकी बड़ी मेहरबानी होगी।
- 0:37बीना रानी पुत्र। आपके सारे धर्म मृत्यु उन्मुखी है
- 0:55शब्दों को ध्यान से सुनें आपके सारे धर्म।
- 1:02मृत्यु उन्मुखी हैं मेरा धर्म जीवन उन्मुखी मृत्यु उन्मुखी नहीं
- 1:15है और देखिये जब मैं कहता हूँ सारे धर्म।
- 1:21मृत्यु उन्नमुखी है या संस्थाएँ या आध्यात्मिक केंद्र?
- 1:28तो मैं किसी को स्क्वेयर नहीं करता किसी धर्म को मैं स्क्वेयर
- 1:33नहीं करता सभी को। एक झाड़ू से पूछ लेता हूँ कैसे
- 1:50मृत्यु उन्मुखी कैसे? आइए शुरू करते हैं।
- 1:59हिंदू धर्म कहता तुम यहाँ कर्म करो, उन्हीं करोगे फल मिलेगा,
- 2:09स्वर्ग में पाप करोगे, फल मिलेगा स्वर्ग में।
- 2:16यानी के मरने के बाद तो मृत्यु उन्नुमुखी हुआ कि नहीं हुआ?
- 2:30इस्लाम कहता है कि तुम कर्म करो, खुदा आएगा कयामत की राह तुम्हें
- 2:39उठायेगा। और तुम्हारे कामों का लेखा जोखा
- 2:44करेगा। कब मृत्यु के बाद ऐसा ही भी ऐसा
- 2:55ही करता है? मृत्यु के बाद लेखा जोखा होगा।
- 3:04सभी धर्म ऐसा करते हैं लेकिन सत्य ऐसा नहीं है।
- 3:12ये सभी धर्म मान्यताओं पे आधारित मृत्यु उन्मुखी है।
- 3:26मेरा धर्म जीवन मुखी है, मान्यताओं पे आधारित नहीं है,
- 3:33सत्य पे आधारित है जो सत्य है। आपके पास बुद्धि है हृदय आप इनके
- 3:46तराजू पे तोल के देख लेना, ज़रा देखो उन्हें तुमने यहाँ
- 4:01किया। अगर पुण्य का फल स्वर्ग में मिलता
- 4:06है तो यहाँ जो लोग स्वर्ग भोग रहे हैं वो किसका फल चक्र फिर सुन लो
- 4:19अगर पुण्य का फल स्वर्ग होता है, सुख होता है?
- 4:26तो जो लोग यहाँ सुख भोग रहे हैं वो किन कर्मों की वजह से भोग रहे
- 4:32हैं? यहाँ लोग सुख भोग रहे हैं।
- 4:39संत कहता मैं परम सुख। कोई यहाँ स्वर्ग थोड़ी भूलोक है,
- 4:51यहाँ और संत यहीं सुखी तुम्हारा सिद्धांत कर्मों का ये कहता।
- 5:08के कर्म अब करो पुण्य करो, पाप करो, भोगों के स्वर्ग में मैं इस
- 5:20कर्म की फिलॉसफी को बदलना चाहता हूँ।
- 5:30अगर कोई पुण्य कर्म करेगा, कोई दान करेगा, कोई सहायता करेगा,
- 5:34दूसरे कोई किसी की मदद करेगा, गिरे हुए को उठायेगा, किसी की
- 5:48आत्मा को ठंडक देगा। वह पुण्य कर्म उसने अब किया
- 5:57बोगेगा स्वर्ग में मैं प्रत्यक्ष रूप से जी नहीं कह रहा कि स्वर्ग
- 6:06नहीं है, मैं अप्रत्यक्ष रूप से कह रहा हूँ कि स्वर्ग नहीं है।
- 6:19क्योंकि अगर अच्छे कर्मों का फल स्वर्ग में भोग जागता है तो हम
- 6:25यहाँ सुखी क्यों हैं? मैं यहाँ सुखी क्यों मुझे +2 मैं
- 6:32किसी पे बात नहीं रखता, मैं अपने पे बात रखता हूँ।
- 6:38किसी की बात कहने का मतलब भी क्या है?
- 6:44चोट मेरी लगी, दर्द किसी को क्यों होगा और चोट मेरे लगी।
- 6:53दर्द नरक में क्यों होगा? भूलोक में मेरा चूकना टूट गया।
- 7:02दर्द भूलोक में हुआ। ये नरक लोक में हुआ।
- 7:09फिर वो कौन से कर्म है जो नरक लोक में भागे जाएंगे?
- 7:13चूकना टूटा। भूलोक में भुगत लिया।
- 7:19नरक में भोगना क्या वाकिर है अच्छे करम की है यहीं तुमने
- 7:30ज़िन्दगी सुखद गुजार ली। फिर स्वर्ग में घूमने को रह के और
- 7:40फिर जो स्वर्ग में भोगोगे भोग के न कर्मों का प्रणाम।
- 7:52स्वर्ग में भोगने को रेह किया जाता है।
- 7:57चोट लगी तो दर्द, यही हुआ फूल शृंघा तो खुशबू यही आई गटर के
- 8:08समीप खड़े हुए तो दुर्गंध यही आई। पेट दर्द हुआ तो दर्द यहीं आया,
- 8:19वो लोग पे आया, फुटवेयर का इंजेक्शन देना पड़ा, बस को पेन
- 8:22देना पड़ा, देख लो फिनिक देना पड़ा।
- 8:30जब दर्द यहाँ उपचार यहाँ भोगना यहाँ तो नरक कहाँ आ गया अगर किसी
- 8:39व्यक्ति के पास मेरी इन बातों का जवाब हो अवश्य कमेंट बॉक्स में
- 8:47कमेंट बॉक्स खुला। तुमने पुण्य किया, अब फल मिलेगा
- 8:58स्वर्ग में यानी मर जाने के बाद, इसलिए धर्म को मैं मृत्यु
- 9:05उन्न्मुखी कहता हूँ। अब देखिये ये चालाकियां है, ये
- 9:16पाखण्ड है, ये शरारतें है। तुम्हारी बुद्धि के साथ एक ऐसा
- 9:24खिलवाड़ हो रहा है। जो तुम्हें भी नहीं पता और शायद
- 9:32जो तुम्हारी बुद्धि के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उन्हें भी न
- 9:36पता होगा कि वो खिलवाड़ कर रहे हैं।
- 9:39उनके गुरबों ने उनके साथ खिलवाड़ किया होगा, वे भोग्त भोग ही रहे
- 9:45होंगे। जरूरी नहीं के वो ही दोषी हैं
- 9:50मात्र अकेले वो भी भुगत भोगी रहे होंगे।
- 10:02पुण्य अब किया तो हम देखते हैं, अभी हम सुखी होते हैं।
- 10:10बाहर तप्त गर्मी के लुएं सहते हैं, तो यहाँ दुखी होते हैं नरक
- 10:15में और यहाँ एयर कंडीशन की ठंडी हवाओं में लुत्फ लेते हैं तो हम
- 10:23सुखी यहाँ होते हैं। यह स्वर्ग में फिर स्वर्ग और नरक
- 10:29की जरूरत क्या रह जाती है? स्वर्ग और नरक बनाने की आवश्यकता
- 10:38क्या है, जब फल ही भूख पर किए हुए कर्मों का फल भूख पर ही भोगना
- 10:50पड़ता है? तो स्वर्ग और नरक की निर्मित
- 10:54व्यर्थ हो जाती है। ये तो थी कर्म व्यवस्था की बात तो
- 11:02मैं ये कहता हूँ कर्मों का फल यही तुम करते हो, यही भोगना पड़ता है,
- 11:09तुम्हारे सामने आ जाता है। और बाकी सब मान्यता है।
- 11:15तुम कहते हो गंगा स्नान गंगा में गोता लगाने से बाप धुल जाते हैं।
- 11:20मैंने ऐसे लोग देखे हैं। गंगा स्नान के फौरन बाद
- 11:24हॉस्पिटलैज़ हो जाते हैं और फिर ऐसे होते हैं हॉस्पिटलैज़।
- 11:32कि देह त्याग देते है प्राणांत हो जाते है इतना दुख हो के मरते है
- 11:42वो लोग, फिर गंगा ने तुम्हारा कौन सा पाप उठाया?
- 11:50और बहुत से लोग गंगा स्नान करके तीर्थ स्नान करके आ जाते हैं।
- 11:55मैंने सारी उम्र दुखड़े भौंकते देखे तो गंगा ने तुम्हारा फ़ोन सब
- 12:01पाप उठा लिया। ध्यान से समझना ये सब मान्यताएँ
- 12:10हैं तुम्हारी। तुम चाहो तो इन्हें बनाए रख सकते
- 12:16हो। ये बोझ की तरह तुम्हारे सिर पर
- 12:22बैठी रहेंगी और तुम चाहो तो इनसे आजाद हो सकते हो, इसी को मुक्ति
- 12:29कहते हैं। ये जो मान्यताएँ तुमने थोप ली।
- 12:33कर्म के नाम पर धर्म के नाम पर मुक्ति के नाम पर यह मान्यता ही
- 12:39तुम्हारे ऊपर बोझ है। तुम इनसे कभी आजाद नहीं हो पाते।
- 12:45धर्म बड़ा प्यारा नाम है। धर्म तुमको आजाद होने नहीं देता।
- 12:55अब देखो तुम पांच नाम यहाँ जपोगे कोई व्यक्ति इसको व्यक्तिगत
- 13:06अक्षित के रूप में मत ले। पांच नाम तुम यहाँ झपोगे, राधे,
- 13:13राधे, तुम यहाँ झपोगे राम राम, तुम यहाँ झपोगे सभी के अपने नाम
- 13:18चाहे अल्लाह है चाहे गॉड है। मुक्ति का आनंद होगे तुम सच गंड
- 13:35में यानी मरने का तो इन चाल बाजों ने इन धोखे बाजों ने इन पाखंडियों
- 13:45ने इन लोभियों ने इन लाली छिओने इन ठगो ने।
- 13:50धोखेबाजों में तुम गौर से देखना जीतने धर्मों में इन लोगों ने
- 13:58बातें बनाई, सत्य बनाई। अपने हिसाब से वह सब मृत्यु के
- 14:04बाद के थे। यहाँ शराब त्याग दो जन्नत में
- 14:16तुम्हें शराब के ही झरने मिलेंगे, यहाँ भोग त्याग दो जन्नत में
- 14:24तुम्हें कुरे मिलेंगे। यह मृत्यु उन्मुखी धर्म में और
- 14:37मृत्यु के बाद ईमानदारी से सूचना किसने कुछ देखा तुम्हें एक बात
- 14:45बता दूँ? आज बेरोजगारी है, भुखमरी है,
- 14:52लालसा बढ़ गई है, जीने का स्टैंडर्ड बढ़ गया है।
- 14:56हर चीज़ महंगी है और तुम्हारी वासनाएँ घनी हो गई तो जरूरतें
- 15:02तुम्हारी ज्यादा हो गई हैं। कमाई कम है तो फिर तुम क्या
- 15:06करोगे? फिर तुम यही कहोगे जब मैं मर गई,
- 15:13मर के वहाँ पहुंची कोई अक्षमात्र ऐसा काम हो जाता है कभी डॉक्टरों
- 15:21को भी पता नहीं लगता इज़ दैट। आर अलाइव वह डिक्लेर कर देता है
- 15:29जद्द पे वो मरा नहीं होता तो ऐसे लोग जीवत होते हैं और जीवत होते
- 15:35क्या हैं? जीवत ही हो जाते हैं बहाना मिल
- 15:42गया, बढ़िया। वो ऐसी ऐसी बाते कही है कि बीके
- 15:50थे। देख के मेरा शरीर सुन्न हो गया सर
- 15:56दिमाग पर जैसे किसी ने हदौड़ा मार दिया।
- 15:59अरे ये क्या बात कर रही है ऐसे? लेकिन किस के लिए कुछ व्यूस के
- 16:08लिए कुछ व्यूस के लिए कुछ फेम के लिए और फिर इनका धंदा ही बन गया?
- 16:27लोगों का अपना को टेस्ट करो, तुम्हें पता चल जाएगा कितने सच
- 16:36हैं ये जो पास्ट लाइव्रेरेशन कराते हैं।
- 16:42पिछले जन्म में जाने हे धन्यवाद। पापी पेट का स्वाद है, फिर क्या
- 16:58करेंगे? अपनी जरूरतें भी कम नहीं होती।
- 17:02लिविंग का स्टैन्डर्ड भी उतना ही रखना।
- 17:08खाना पीना भी वही मसालेदार चटपटी चटपटी बहुगुणा भी वैसे ही शानो
- 17:19सोको से उन महलो में रुकना। उन होटल में रुकना जो महंगे से
- 17:24महंगे तो जरूरतें बढ़ गयी। तुम्हारी बेरोजगारी और महंगाई तो
- 17:33फिर बंदा करेगा तो क्या करेगा? ये ही कुछ तो करेगा जो तुम कर रहे
- 17:39हो। झूठ बोलेंगे बीके की तरह मैं मरी
- 17:47तो मर के वहाँ गई, बड़े बड़े दांतों वाले मिल गए, बड़े बड़े
- 17:52सींगो वाले मिल गए। हाँ हाँ।
- 18:01तुम डर जाते हो तुम देखना ऐसे सर्कसों को कितने लोग देखते हैं
- 18:15तो मैं तुम्हें एक बात कहता हूँ कि तुम्हारे धर्म हैं मृत्यु
- 18:21उन्मुखी। और मैं तुम्हें बनाना चाहता हूँ
- 18:29जीवन उन्मुख मैं तुम्हें तुम यहीं पर करो, पांच नाम जपने से तुम
- 18:42सचिव खंड में जाओगे। मरने के बाद वह भी गुरु ले के
- 18:45जाएगा। और पता नहीं, वो भी जिससे तुमने
- 18:48नाम दान लिया है, वो ही ले के जाएगा कि उससे अगला ले के जाएगा,
- 18:54ये भी पता नहीं है, क्योंकि गद्दियाँ आगे से आगे ही चलती
- 18:57रहेंगी। तो जीस गुरु से नाम लिया वो चला
- 19:04गया तो चलो। अगला गुरु आके तुम्हारी ऊँगली
- 19:07पकड़ लेगा, सच एक अंडर ले जायेगा रस रूप में तुम्हें एक बात बताता
- 19:18हूँ जो धर्म तुमसे कहे की मृत्यु के बाद मिले मृत्यु के बाद मिले
- 19:27का विषय है मुक्ति है। चाहे सत्यगंठ है, चाहे सतलोक है,
- 19:36चाहे जन्नत है, हुरे हैं, शराब है जो धर्म तुम्हें ये कहता है कि
- 19:45मृत्यु के बाद मिलेगा। और मृत्यु के बाद किसी ने कुछ
- 19:50देखा। मृत्यु के बाद किसी ने कुछ नहीं
- 19:57देखा। मैं बात करता हूँ टना टन तुम्हें
- 20:07लड़ जाए तो उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं सत्य बोलेंगे,
- 20:16मैं तुम्हें जीवन का रस पीना सखाता हूँ और जीवन का रस,
- 20:24तुम्हारी मान्यताओं मैं। जीवन का रस तुम ही हो, खुद कोई
- 20:34दूसरा तुम्हें जीवन का रस नहीं दे पाएगा।
- 20:38कितना ही भिक्षा पात्र उठा के एक दूसरे से प्रेम मांगते रहे हो।
- 20:44प्रेम मिल भी जाए तो वो बे शर्त नहीं होगा, बा शर्त होगा फिर वो
- 20:51बदले में तुमसे प्रेम मांगेगा। तुम दोनों ही बिकमोंगे हो।
- 20:57दोनों ही एक दूसरे के आगे भिक्षा पत्र फैलाए प्रेम की मांग कर रहे
- 21:02हो। मैं तुमसे नहीं कहता हूँ मृत्यु
- 21:04के बाद मिलेगा जो कहते हैं मृत्यु के बाद मिलेगा, मैं उन्हें जालबाज
- 21:15कहता हूँ धोखेबाज कहता हूँ पाखंडी कहता हूँ।
- 21:23कुराह पर पड़े हुए लोग कहता हूँ तुम्हें बरमाने वाले लोग कहता हूँ
- 21:30वह सचखंड हो, वह सतलोक हो, वह जन्नत की हो रहे हो, वह जन्नत की
- 21:35शराब हो या मुक्ति हो या स्वर्क हो या नरक हो।
- 21:44ये बहुत शुरू से ठगी का एक बहुत बड़ा डंक बना आ रहा है।
- 21:52वक़्त आ गया है अब इसको तोड़ दिया जाए।
- 21:58यह वक्त नहीं आया कि 500 के नोट से महात्मा गाँधी के तस्वीर हटा
- 22:04दी जाए। वो तो तुमने लगाई, महात्मा गाँधी
- 22:07ने नहीं कहा उसको तो हटा दो वक्त आ गया है कि तुम्हारी वो धर्म जो
- 22:16कहते हैं मृत्यु के बाद तुम्हें? सत लोग लेके जाएंगे सचखंड लेके
- 22:21जाएंगे या मुक्ति मिलेंगे या तुम स्वर्ग में जाओगे या तुम नरक में
- 22:26जाओगे या तुम्हे उसकी दरगाह मिलेंगे मृत्यु के बाद।
- 22:37जब मृत्यु के बाद खुदा आएगा कयामत की रात और तुमसे तुम्हारा हिसाब
- 22:44लेगा और हिसाब लेने के बाद तुम्हारा हिसाब करके तुम्हें वैसा
- 22:54ही फल दे देना। रस रूप में बात कहूँ तो जो भी
- 23:01धर्म तुम्हें ये कहे, अब इसको लिख लेना।
- 23:04इसकी इस वीडियो को आप सेपरेट ही रख लेना डाउनलोड करके जो धर्म
- 23:12तुम्हें कहता है कि मृत्यु के बाद मिलेगा।
- 23:18उस धर्म के ऊपर लिख देना पाखंड बस सुनो, रसगुल्ला खाया क्या बात
- 23:32मुँह में पानी आ गया। वो स्वर्ग में बैठा होगा की यहाँ
- 23:40बैठा होगा, जहर खाया जहाँ मरोगे, नरक में मरोगे।
- 23:55महात्मा गाँधी को एक गोली लगी थी। यहाँ मरे के ऊपर जाके कहीं मरे सब
- 24:10यहीं होता है और ये जो तुम्हें भविष्य के सपने दिखाते हैं ये
- 24:18तुम्हें। मृत्यु उन्मुखी तो बनाती है लेकिन
- 24:23ये भी याद रखना मृत्यु भविष्य की चीज़ है।
- 24:28ये तुम्हें भविष्य उन्मुखी भी बनाते हैं।
- 24:34धर्म दो चीजों से चलता है पाखंड। दो चीजों से चलता है एक तो
- 24:44तुम्हें डराव दिया जाए, एक तुम्हें लोक दे दिया जाए बहुत बार
- 24:51कहा, मैं मृत्यु के बाद। खाने को हालांकि मुँह नहीं होता,
- 25:02लेकिन मैं वो वीडियो देख रहा था। एक देवी की 2022 मिनट की सर्कस
- 25:07थी। बाबा मुझे मारेंगे।
- 25:11अरे भाई किसको मारेगा? तुम्हारी देह तो है ही नहीं, जो
- 25:14बैठ जाती है, सूक्ष्मता को मारेंगे।
- 25:20सूक्ष्म देह को मार पड़ती है ना वो कहता तुझे खाने को नहीं देंगे,
- 25:29भूखा रखेंगे जो देह भूखा रहती थी भूख से व्याकुल होती थी वो देह तो
- 25:36यहाँ। हमने आग लगा दी या दफन कर दी, ये
- 25:41जो सूक्ष्म देय है ये तो इसको तो भूख लगती ही नहीं।
- 25:49ज़रा देखो, इसके भीतर कोई डाइजेस्टिव सिस्टम है।
- 25:56कोई ओस्सो फिगर, कोई स्टमक, कोई स्माइल, इंटेस्टाइन कोई लार्ज
- 26:01इंटेस्टाइन, कोई लिवर, कोई बाइल, कोई पैंक्रीआस, कोई सारा
- 26:09डाइजेस्टिव सिस्टम, गैस्ट्रो इंटेस्टिनल सिस्टम, जीआइ टी
- 26:14सिस्टम जैसे कहते हैं वो है। तो हमने सारा यहाँ आग लगा दिया।
- 26:23भूख लगती थी, पेट में तेजाब बनता था, ना तो वो पेट रहा ना वो तेजाब
- 26:34और हार्मोन्स। और जुइसेस बनाने वाली वो फैक्टरी
- 26:39जिसे हम लिवर कहते हैं, वो भी नहीं रही तो फिर भूख लगेंगी।
- 26:47किसे तो ये देवी? वैसे तो उसकी बातों से ही लगता था
- 26:55कि सरेआम पाखंड कर रही है। पापी पेट का सवाल कहाँ लेकर जाएगी
- 27:05मुझे पता बस नाम बना रखा है नाम लोग पागल है।
- 27:15और जीस चीज़ के पीछे पागल है, वो मैं बहुत वीडियो में बता चुका हूँ
- 27:19तुम्हें चाहिए रस आनंद और वह तुम्हारे पास है किसी से मत
- 27:25मांगना कोई तुम्हें दे भी नहीं सकेगा बस तुम्हारी ये मान्यता कि
- 27:32कोई हमें दे देगा। यही तो मैं बट्टिका ना कोई
- 27:40जीतेन्द्र आया, ना कोई धर्मेन्द्र आया, ना कोई जीतेन्द्र आया, कोई
- 27:43नहीं आया और कोई नहीं गया लेकिन इसको सब दिखा।
- 27:54और किसी को कुछ नहीं दिखा जैसे कि इसके ही दिव्य चिक्षू खुल गए।
- 28:10इन पास्ट लाइफ रिजरेक्शन करने वालों को इनका निहित स्वार्थ कुछ
- 28:19और है, जो मरकर मरने के बाद नरक चले गए।
- 28:26वहाँ सिंहासन पर। कोई पोत ही खोले बैठा था, अरे भाई
- 28:29पोत ही की आज कहाँ जरूरत है? आज तो कंप्यूटर ही हो गया।
- 28:33बैंकरों तक में पोतियाँ खत्म हो गई, हो गई ना तो ऊपर अभी वो ही
- 28:41सिस्टम चल रहा है क्या? अभी तुम्हारे कंधों पर चित्रगुप्त
- 28:48बैठे हैं, दायें कंधे पर पुण्य लिख रहा है, बाएं कंधे पर पाप लिख
- 28:54रहा है, अभी वो ही सिस्टम शुरू है, तुम मॉडर्न हो गए, परमात्मा
- 28:59अभी बुरा नहीं है, तुमने तकनीक से निकाल ली।
- 29:04अब परमात्मा से नहीं खोजी गई तकनीक से अजीब वो लोग बनाते हो
- 29:10भाई 13 घंटे पांच नाम हम अब जबेंगे सचखंड में जाएंगे मौत के
- 29:23बाद और उस मौत के बाद तुम्हें बता दूँ।
- 29:27मरने से 3 घंटे पहले प्रकृति तुम्हें बहुत स्ट्रांग
- 29:33एनेस्थीसिया दे देती है, उस एनेस्थीसिया में तुम बडबडाते भी
- 29:39हो लेकिन वो बेहोशी में बडबडाते हो तुम्हें दिखता दिखता कुछ नहीं।
- 29:45वो तुम्हारी ही कल्पना के भीतर जो चीजें होती हैं वो ही तुम्हारे
- 29:49दिमाग में चेतन में आ जाती हैं। कोई गुरु नहीं आता हाथ पकड़ने के
- 29:55लिए और हाथ कहाँ लेके जाएगा पकड़ के वो तो यहीं छोड़ जाओगे तुम वो
- 30:03तो यहाँ के लोग। मेरे मरने के बाद ये दफन कर
- 30:08देंगे, जला देंगे कौन गुरु आएगा और हम के पास कौन आएगा, जिनके
- 30:18गुरु नहीं होंगे? जिन्होंने गुर नहीं बनाया, नानक
- 30:24ने नहीं बनाया, कबीर ने नहीं बनाया तो कौन लेने आया, कौन लेने
- 30:31आया? वह सत लोग नहीं गए।
- 30:33क्या? मरने के बाद कोई सत लोग नहीं
- 30:39पहुंचता। मरने के बाद कोई सच खंड नहीं
- 30:44पहुँचता। मरने के बाद कोई मुक्त नहीं होता।
- 30:48मरने के बाद कोई स्वर्ग नरक नहीं जाता।
- 30:50मरने के बाद किसी को शराब के डरने और किसी को अप्सराय नहीं मिलती
- 31:01बुरे नहीं मिलते। धनता बहुत पुराना है, लेकिन अब
- 31:08जागने की जरूरत है। किसी ने नहीं जगाया तो चलो अब मैं
- 31:17जगा देता हूँ। मेरा धर्म जीवन उन्मुखी है, मैं
- 31:26कहता हूँ बिल्कुल मत मानो प्रकृति तुम्हें बेहोश कर देती है बड़ा
- 31:32जबरदस्त सारे शरीर का। सर्जरी करेगा और ज़रा भी तू क्या
- 31:51कहते है की मृत्यु में? लाख लाख बिच्छू एक बार डस रहे
- 31:57हैं। इतना दर्द होता है नहीं, प्रकृति
- 32:02बड़ी समझदार है, प्रकृति गलती खाती है पहले से ही तुम्हें जो
- 32:08तुमने अभी खोजा नहीं है स्ट्रोंग, मैं डॉक्टर से कहूंगा कि मृत्यु
- 32:14की अवस्था में। उसके खून की जांच जरूर किया करें
- 32:19या उसके लंग्स को किस टाइप का एनेस्थीसिया देती है।
- 32:26प्रकृति में जो ज़रा भी पसंद नहीं लगता।
- 32:32सब कुछ इकट्ठा कर देती है। तुम्हारा सारी उम्र का और एक
- 32:36पोटली में बांध देती है और चलो छलांग लगा दो मान्यताओं पे
- 32:50तुम्हारे धर्म आधारित हैं, लेकिन मेरा धर्म?
- 32:57मान्यता पर आधारित है। मेरा धर्म तो सत्य पर आधारित है,
- 33:02चुटकी भरूंगा मैं अब दर्द होगा नरक में जाकर क्योंकि बुरी चीजों
- 33:11का प्रभाव तो नरक में ही होता है। फूलों के उद्यान में बैठूंगा मैं
- 33:17अब सुगंध आएगी मुझे स्वर्ग में जा क्योंकि अच्छी चीजों का भुगतान तो
- 33:24स्वर्ग में होता है बहुत हो गया इन लोभियों पखंडियों लालचियों।
- 33:36इन्होंने तुम्हारा ध्यान भटकाया और और तरफ ये तुमसे भी बड़े
- 33:48राजनीति के निकले। अच्छे दिन आएँगे।
- 33:531012 साल की बात है, ये तो जोगों से काम चल रहा है इनका।
- 34:00पर वही दो बातें या भय है या लोभ है, दर्द खाओ या लोभ दिखाओ तुम मर
- 34:12के देय तो यहाँ रह गई, खायेगा कोण बे?
- 34:18और ये लिखा है शास्त्रों में जीसको खाने के लिए न्योता दो ना
- 34:24वो पंडित जी होने जाने मुझे बहुत जगह ब्लावे आ जाते बचपन में
- 34:33ब्राह्मण कबूत्र। पंडित जी श्राद्ध खारोगे मैंने
- 34:40कहा देखो भाई मेरे घर में है, अब यह पाखंड मैं करूँगा नहीं, न ही
- 34:45इन सब पाखंडों को तोल दूंगा, न ही हवा दूंगा, ऐसा कुछ होता नहीं।
- 34:53तो मेरी बात से थोड़ी उनको संजू भी आती है।
- 34:56थोड़े से वो डटते भी तो बाबा अगर ना खिलाया तो ये मुझे मारेंगे।
- 35:03बस ये वही बात है जो देवी कर रही थी, वो मुझे खाने को नहीं देता
- 35:09था। बाबा कौन बाबा उसका नाम नहीं
- 35:11लिया? उस बाबा का नाम भी तो ले देती कौन
- 35:15है वो बाबा हम सुलट ले उस बाबा से जाके तुम नाम तो ले दो, अब बता दो
- 35:25हम उस बाबा से सुलट लेते है जाकर कौन बाबा है जो तुम्हे मरता है?
- 35:31कौन है जो बोतल में बंद किये? ये अब न चलेंगी देवी बरसों बरसों
- 35:43झुकों झुकों तक तुम्हारे ये पाखंड चल गए, अब नहीं चल?
- 35:52धर्म सत्य से संबंधित होना चाहिए। मान्यताओं से फिर समझ लो फिर समझ
- 35:58लो और फिर समझ लो धर्म सत्य से संबंधित होना चाहिए।
- 36:04नक्की मान्यताओं से और सत्यखंड सतलोक स्वर्ग?
- 36:10नर्क होरे शराब निर्वाण मुक्ति गति पितर भूत प्रेत ये तुम्हारी
- 36:25मान्यताएँ हैं। उसका नाम भूल गया।
- 36:31मैं यहाँ एक जेन्न निकालने में एक स्पेशलिस्ट मैंने उसे पत्र लिखा
- 36:39भाई एक आध जेन्न कोई मेरे पास भी भेज दो।
- 36:47उसका जवाब नहीं आया। मैंने बड़े पत्र लिखे और मैंने
- 36:50वीडियो भी बनाई। देखो कुछ थोड़ा सा उम्र का भी
- 36:58तकाजा है 74 में मैं लग गया हूँ नहीं याद रहता कई बार।
- 37:06वैसे या दस्त को तेज उसका नाम नहीं मुझे याद आ रहा है बस वो
- 37:12बसंड हुआ बड़े खा खा के झूठ बोलेंगे अच्छा खायेगा तो भोसंड ही
- 37:25होगा और क्या होगा? सब तो बोलने वाला तो मेरा बेचारा
- 37:30कुछ भी 300 ग्राम दूध पीता हूँ ये मेरे जबड़े तो बैठेंगे ना भाई?
- 37:51तुम क्या हँसते हो तुम्हें क्या मिल गया दिल लगाया दिलगी मैं दिल
- 37:57गया दिल लगाने का नतीजा मिल गया आगे आगे थी सवारी मेरे यार की
- 38:04पीछे पीछे मैं और मेरा दिल गया तुम क्या हँसते हो तुम्हें क्या
- 38:09मिल गया? मैं तो रोता हूँ कि मेरा दिल गया
- 38:20धर्म सत्य से संबंधित होना चाहिए। ये मान्यताओं से संबंधित नहीं
- 38:26होना चाहिए। न्यूटन के कर्मविधान में क्या
- 38:38लिखा है? और तुम रोज़ पढ़ते हो न्यूट्रिन
- 38:42ककर हम बहुत ही थी अब रिएक्शन देर इस एन इक्वल एंड अपोज़िट रिएक्शन
- 38:49थोड़ा सोर्स जोड़ दूँ। ऐट दी सेम टाइम।
- 38:57दीवाल में मारोगे तुम गेंद ततक क्षण प्रतिक्रिया होगी न के सच
- 39:04चकन्द्रमा ततक क्षण प्रतिक्रिया हो अगर तुम्हें दान देते वक्त
- 39:17सुकून नहीं मिला। अरे, इन शब्दों को ठीक से संत ततक
- 39:26क्षण फल मिलता है तुम्हारे क ततक क्षण ऐट दी सेम टाइम किसी गरीब की
- 39:35किसी जरूरतमंद की। किसी असहाय की किसी गिर्भ व्यक्ति
- 39:40को उठाकर चला देने की खुशी तुम्हें स्वर्ग में मिलती है, तुम
- 39:50देखोगे भीतर झांकन थोड़ा सा तुम्हारा हृदय गध गध हो गया, यही
- 39:56तो पुरस्कार है परमा। तुमने अच्छा किया तुमने किसी गुरु
- 40:04को उठाया पुण्यकर्म किया तुम थोड़ा सा झांक के देखना तुम्हारे
- 40:13सारे रोम रोम में ठंडक पड़ जाएगी, तुम्हे बड़ी खुशी मिलेंगे।
- 40:20ये सुकून किसी मूल्य पे नहीं मिल सकता था।
- 40:24इस सुकून को तरसते फिरता है लोग। इसलिए संतों ने कहा दान देता हूँ,
- 40:30जरूरतमंद को जो पहले से भरे हुए हैं।
- 40:35उस पंडित जी महाराज की मैं कथा सुनाया करता हूँ, श्राद्ध पे किसी
- 40:43ने बुला लिया था और ज्यादा खा लिया था और पेट के पर हाथ मार रहा
- 40:48था बगीच जीके कमरे में दुष्ट ने बहुत खिला दिया।
- 40:52पेट दर्द कर रहा है। मैंने कहा पंडित जी क्यों गाली
- 40:57निकाल जाओ उसको अरे दुष्ट ने बहुत करा दिया पंडित जी मैं नहीं खाता
- 41:06था, खिला दिया एक पूड़ा और खा लो, अब श्रद्धा है भाई।
- 41:12अपने बुजुर्गों को खिलाना है तो मैंने कहा तुम ना खाते मैं क्या
- 41:18करू दुष्ट कहता खाओ, खाना ही पड़ेगा चलो अब तो खाये पेट में
- 41:27दर्द है, बगीची से का थोड़ा चूरन दे दो।
- 41:32उसने चूरन दे दिया, मुझे कागज़ में रख थोड़ा सा पानी ले यार
- 41:37मैंने कहा पंडित जी ऐसा करो, ये चूरन खा लो और पानी भर लो ठीक हो
- 41:45जाएगा। पंडित जी बोले, देवता जी अगर इतनी
- 41:56ही जगह होती तो एक कूड़ा ही और निकाल लेता हूँ।
- 42:01ऐसे लोगों को हम श्राद्ध में इन्वैट करते हैं मान्यताओं को।
- 42:07पूरी करने के लिए बस बह नहीं रहता।
- 42:10मन में मान्यताएँ विहीन धर्म पृथ्वी पर पैदा करना होगा।
- 42:26ये गाँधी गोंदी की तस्वीर छोड़ो यह तो हटा दो लगाई गाँधी कह के गए
- 42:31कि मेरी तस्वीर लगा दो। कब तक बकवास करते रहोगे ना?
- 42:38गाँधी कह के गए कि मुझे राष्ट्रपिता की उपाधि दे देना।
- 42:42कह के गए थे ना गाँधी ये कह के गए के मुझे महात्मा कह देना ये सब
- 42:49तुम्हारी फालतू की बातें हैं राज़ करने के लिए।
- 42:53कुछ नहीं। गाँधी कह के गए, गाँधी ने कुछ
- 42:55नहीं मांगा और कहने की क्या जरूरत थी भाई?
- 42:59पटेल ने कहा जवाहरलाल ने कहा कि पैंट कोट तुम्हारा पड़ा है,
- 43:04वैरिस्टर सब पड़ा है, टाइल लगा लो और बैठ जाओ, अच्छे पड़े लिखो
- 43:11वैरिस्टर हो। तुम्हारा हक बनता है।
- 43:15पहला, गाँधी ने कहा, देखो मैंने इसलिए काम नहीं किया।
- 43:27मैंने निष्काम कर्म किया है। गद्दी पर तुम बैठो, ये हमें अच्छी
- 43:38नहीं लगती, राज़ तुम करो, जितना हो सका उतना हमने काम कर दिया,
- 43:46अच्छा किया तो ठीक गलत किया तो गालियां निकाल देना।
- 43:51तुम निकाल रहे हो तो बहुत अच्छा कर रहे हो कुछ गलती किया होगा
- 43:55तुम्हारी बढ़िया तुड़वा अब उससे कोई सवाल पूछते हो एक गुलाम
- 44:04व्यक्ति से सवाल पूछते हो के तुमने भगत सिंह की?
- 44:10फांसी क्यों नहीं रखवाई? अरे भाई गुलाम है वो तो खुद 9
- 44:14अगस्त 1942 को कुछ इंडिया मूवमेंट चलाया गया और धर लिए सब अंग्रेजों
- 44:22ने सब जेल में बंद कर दिए। सिर्फ एक बौने कद के रह गए लाल
- 44:26बहादुर शास्त्र। उस बेचारे ने सारा कुछ संभालना और
- 44:33तुम गुलाम से कहते हो कि इसको याद कर तुम तथ्यगत बात नहीं कहते जो
- 44:42खुद गुलाम है। गुलाम देश में है प्रयास कर रहा
- 44:47है। के आजाद हो जाए, वह जिद कैसे कर
- 44:50सकता है? बताओ लेकिन ये तुम्हारे राज़ करने
- 44:55के तरीके हैं तो ठीक है, तरीके चलाते रहो लेकिन एक बात तुम्हें
- 45:02बता दूँ, गाँधी तो आज मौज करे। भटक रहे हो तो तुम भटक रहे हो वो
- 45:08सब अब तुम्हारी पूर्जा करने का अर्थ भी क्या है?
- 45:17जब वो खुद तो भटकते फिर रहे है तुम मंदिर बना दो तुम पूजा कर दो,
- 45:22तुम आरती उतार दो, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 45:27गाँधी तो आजाना तुम्हे गाँधी तो मौज कर रहे है, फिर थोड़ी सी एक
- 45:34वो बिटिया बोल रही थी मैं शोभ करम अपने हाथ से करती हूँ मका बेटी
- 45:38कोई बात नहीं अभी गाँधी जिंदा है, आजा।
- 45:49ऐसे ऐसे मूर्ख लोग बैठे हैं हिंदुस्तान किधर जा रहा है?
- 45:56विश्व गुरु होने का स्वप्न एन्जॉय, तुम्हारे कर्म क्या हैं
- 46:06तुम्हें सुधारना होगा। हमारे बराबर का मुल्क नास्तिक है।
- 46:13वहाँ धर्म है ही नहीं और 18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और
- 46:19हम चार के ऊपर अटके पड़े हैं और आबादी बढ़ती है।
- 46:25सारी चीन से ज्यादा हो गए। कहीं कोई गड़बड़ है न भाई तो क्या
- 46:31उस गड़बड़ को को देखेगा नहीं क्या उसको ठीक नहीं करोगे?
- 46:36मैं ठीक ही करने मान्यता मुक्त धर्म।
- 46:48फिर सुन लो बहुत बार बोल दिया मान्यता मुक्त धर्म जो कहता है
- 46:54मृत्यु के बाद मिलेगा सच्च खंड जब तुम बेहोश होगे, ऐनेस्थीसिया दे
- 47:00दिया होगा, तब गुरु आएगा, ऊँगली पकड़ेगा और तुम्हें सच्च खंड ले
- 47:04जाएगा। सतलोक लेके जाएगा, मुक्ति
- 47:11मिलेंगे, बाद में निर्वाण मिलेगा, बाद में स्वर्ग मिलेगा, अनर्प
- 47:15मिलेगा बाद में। और वहाँ तो चलो वहाँ यहाँ
- 47:20प्रताड़ित हो रहे हैं बोतलों में जिन भूत प्रेत कैद हो रहे हैं मैं
- 47:30इस देवी से कहता हूँ पांच चार भूत मेरे पास भेज दिया आपको रोज़।
- 47:38देख मैं तमाशा दिखाता हूँ, इनको कुछ शर्म करो और तो बाल भी सफेद
- 47:45आगे अब तुम समय इससे ज्यादा क्या बोलूं?
- 47:53नारी हो मात्री समान हो पुत्री समान ऐसी झूठ बोलती, पाखंड करती
- 48:04माँ नेताओं के ऊपर बोलती तुम्हें कुछ तो संकोच होना चाहिए।
- 48:12और फिर तुम गुरबाणी को मानती हो, जो कि गुरबाणी के अंदर बाबा साहब
- 48:17कहते हैं कि भाई भूत प्रेत नहीं होता, तुम्हारी मान्यता तुम्हारी
- 48:21वह की तरकीब है और मैंने भी बहुत बार बोला है।
- 48:30ये भूत प्रेत किसी का कुछ बिगाड़ नहीं सकते।
- 48:33बस ये ऐसा ही है जैसे बहुत देर से न आया।
- 48:36वह व्यक्ति शरीर में बदबू होती है, तुम्हारे पास से गुजर जाती
- 48:40है, तुम्हारा बिगाड़ तो कुछ नहीं सकती लेकिन तुम्हारे नासा पुटों
- 48:44को दुर्गन्ध जरूर दी जाती है। बस इत्ता से नुकसान होता है और
- 48:50तुम्हारा नुकसान कुछ नहीं कर सकती है।
- 48:59मान्यता मुक्त धर्म आराम से बैठ जाना अपने कमरे में जब क्रिया योग
- 49:08करके ध्यान में बैठो न कुछ करने में और कुछ पल तुम्हें मिल जाए तो
- 49:14सोचना। कि कर्म तुमने आज किया बाठे तुमने
- 49:24आज ईंटों के बनाए और मालिक तुम्हें कहते हैं कि सच खंड में
- 49:31जाके साफ करें। पैसे मिलेंगे।
- 49:35सच में कैसा लगेगा तुम्हें अजीब भक्त लोग हैं, मैं नहीं कहता ये
- 49:44बात मैं कहता हूँ अभी मिलेगा क्यों?
- 49:49क्योंकि मैंने जाना है जिन्होंने नहीं जाना।
- 49:54वह तुम्हें सच गढ़ दिखायेंगे, वह तुम्हें सतलोक दिखायेंगे, नर्क
- 49:59स्वर्ग दिखायेंगे मैंने यही नरक जाना मैंने यही स्वर्ग जाना और
- 50:05मैंने यही मुक्ति जानी यही निर्वाण जाना यही आनंद का राशि
- 50:10जाना। यही तर्क जाना यही तर्क के पार
- 50:14जाना यही मन जाना और यही मन से परे जाना मैंने सब यही सीखा।
- 50:21कुछ भी ऐसा नहीं है जो भू से परे। भू से परे हैं।
- 50:30ग्रह नक्षत्र तुम कहो की हम फ्लॉ किताब में लिखा देते हैं, किताब
- 50:39भी तो तुम्हारे ही जैसे लोग ने लिखी मान्यताओं से ग्रस्त थे, वो
- 50:46बहु बिचारे और लिख भी जा सकते थे। अगर आज तुम किताब लिखोगे तो क्या
- 50:50लिखोगे? होशों के बारे में किताब लिखी
- 50:55उनके भक्तों ने कि जब उनका जन्म हुआ तो कौन सी नदी बहती उनके पास
- 51:00से वाकई के चरणों से उनके गए। अब ये मान्यता धीरे धीरे बड़ी
- 51:06होकर पता नहीं कहाँ चली जाए। मैं तुम्हें मान्यताओं से मुक्त
- 51:13धर्म देता हूँ आज अगर तुम्हें कोई कहे भूत प्रेत पिशाच होता है तो
- 51:24उनको दिखाओ दिखाओ। तुमने कोई कहे कि पिछला जन्म पास
- 51:33लाइफ रिग्रेशन तो से कुछ दिखाओ, वो जो दिखाएंगे वो तुम्हें चेतन
- 51:42अचेतन का पाठ दिखाएंगे जो मैं रोज़ तुम्हें कहता हूँ कैसे जाना
- 51:46है? चेतन को पार करना, हृदय को पार
- 51:49करना, अचेतन में जाना और सामूहिक अचेतन में जाना उसके बाद सामूहिक
- 52:05चेतन में जाना कलेक्टिव अनकॉन्शियस।
- 52:12फिर कलेक्टिव कॉन्शस, पहले कॉन्शस, फिर सब कॉन्शस, फिर
- 52:19अनकॉन्शस, फिर कलेक्टिव अनकॉन्शस और फिर कलेक्टिव कॉन्शस ये।
- 52:32मैं नहीं कहता कि पिछला जन्म नहीं, लेकिन पिछला जन्म अतिगोपनीय
- 52:38होता है, पर महात्मा बड़ा समझदार है, उसने तुम्हारे पिछले जन्मों
- 52:46की चाबी तुम्हारे पास ही रिज़र्व रखी हुई है।
- 52:51यू कैन ओपेन दी डोर ओनली यू कैन ओपेन दी डोर वो चाबी तुम्हारे पास
- 52:58हो और तुम इस दरवाजे को खोल सकते हो।
- 53:01लॉकर को तुम खोल सकते हो, दूसरा कोई नहीं खोल सकता।
- 53:07यह जो पास्ट लाइफ रिग्रेशन है, यह पिछले जन्म की बात नहीं होती, इसी
- 53:12जन्म की बात होती है जब तुमने कुछ गलत कर दिया, इस जन्म में उसका
- 53:18इफेक्ट तो तुम्हें मिलेगा भाई बस ये इसी जन्म में किया हुआ
- 53:24तुम्हारा जो अचेतन भरा हुआ है। उससे ही निपट लो।
- 53:30इसी जन्म के किये हुए कर्म है उसमें पिछले जन्म के कर्म तो मैं
- 53:38जान पाऊँगा पिछले जन्म के कर्म तो पिछले जन्म की चाबी तुम्हारे पास।
- 53:47और तो मैं एक बात और बताता हूँ, कुछ लक्षण भी होते हैं।
- 53:56अब ध्यान से समझ में जब मुझे मेरे भाई के दर्शन हुए।
- 54:06मेरा बड़ा भाई 1980 में 1979 में उसने शादी की और कह के शादी की के
- 54:121 साल का मेरा कष्ट 18 जून 1979 का उसका शादी और 18 जून 1980 की
- 54:22उसकी डेथ मेरे बायोग्राफी पढ़ना। सही सर, मुझे पता चला आज रात ये
- 54:31गया रात को मेरा बड़ा भाई जगाने आ गया, मैं सम पहले सम जगा था, यह
- 54:39खबर सुनाएगा वो सुना दी। उसके बाद 2 दिन बाद जब मेरे पास
- 54:45आया तो मुझे जो रंग जो रूप यह प्रत्यक्ष दर्शन आए, ऐसे कहते हैं
- 54:51प्रत्यक्ष दर्शन मैं मुन्केर नहीं हूँ विश्वास क्यों?
- 54:57क्योंकि मैं मान्यताओं के आधार पर कोई फैसला नहीं करता।
- 55:03मैं कहता आँखें दिख और सारा बेरबा बायोग्राफी में पढ़ना, एक भी शब्द
- 55:12उसमें गलत है जो भी कुछ लिखा गया। उसमें बत्ती नहीं है।
- 55:20कुछ 31 रूप होगा एक कम बेशक लिख दिया हो ज्यादा भूल क्या होगा
- 55:32वहीं सुर को गले लगाना आफ्टर एनलाइटनमेंट।
- 55:37सभी जगह परमात्मा नजर आना। परमहंस की वो अवस्था सभी ब्यब्रफी
- 55:42परना जो मैं सीखाता हूँ तुम्हें ध्यान रखना किसी सच खंड में
- 55:51तुम्हें आनंद नहीं मिलेगा जाके क्योंकि ये सच खंड दिखाते हैं
- 55:55बाहर योजनो दूर। मैं सच खंड बताता हूँ तुम्हें जो
- 56:00मैंने देखा वहाँ रस बड़ा है, वहाँ अमृत बरसता है उस खंड की वाणिज्य
- 56:10में बताई। उस खंड में उतरना होता है।
- 56:15बाजे नाद नेका शंखा कहते बाबन हारे कहते राग परिसों के कहते
- 56:21गाबन हारे मैं उस सच खंड की बात करता हूँ, कहीं और नहीं सच खंड की
- 56:28बात करता हूँ, कोई ये भौगोलिक स्थान नहीं है।
- 56:32न स्वर्ग, न नर्क, न सचखंड, न सतलोक, कोई भौगोलिक संस्थान नहीं
- 56:40है। यह तुम्हारे ही भीतर है।
- 56:50इसको भीतर ही खोजना फिर फिर बता दूँ मान्यताओं से मुक्त सत्य मेरा
- 57:04धर्म अपने भीतरों से। क्रिया योग करो, देखो रुथुपात
- 57:11जैसे जैसे तुम डीप ऑक्सीजनेटेड होगे, तुम्हें अजीब सा रस आएगा,
- 57:17मदहोष्टि सी आएगी तुम करो सारी दुनिया को करना चाहिए।
- 57:22यह तो शरीर के लिए है इसमें। किसी प्रकार का मेरा इसमें कुछ
- 57:34निहित स्वार्थ नहीं है। तुम्हें सुख मिलेगा तुम्हें
- 57:38मदहोशी आये तुम इसको करो ध्यान के अवस्था में जाओ, कुछ गुंजार ना
- 57:45करो, खाली बैठ जाओ। बस अपने भीतर उतरने शुरू हो जाओ
- 57:50और 1 दिन तुम बाजे नाद अनेक आशंका, मस्जिद कोरो जोड़ा डरया
- 57:58बोले जा ठाकुर, दे ढेरे, बढ़िया। जी थे वैद्यनाथ 1000 इश्क दी नमी
- 58:10बहार मैं उसकी बात करता हूँ, मैं मृत्यु के बाद मिलने वाली किसी
- 58:16चीज़ की इंकार करता हूँ यही मिलेगा अभी मिलेगा।
- 58:24और वो तुम्हें भविष्यगामी बनाते हैं, वो तुम्हें अतीत कामी बनाते
- 58:28हैं, मैं तुम्हें वर्तमान कामी बनाता हूँ इसी क्षण में ठहर जाओ
- 58:34इसी पल में ठहर जाओ मान्यताओं से युक्त है तुम्हारा मन।
- 58:43कि ऐसा लगता कि मन से ही मान्यता बनी है।
- 58:49ये लाला फालना वाले पीर तुम्हारे ये मलेर कोटला वाले मरकरी भी
- 58:54पड़ते हैं ये गयूं गयूं कितनी बरस हो गए यहीं भटकते पड़ते हैं।
- 59:05क्या इन्होंने कोई ठगी मारी थी? मने तारे, तारे, गुरु सिख मने
- 59:10नानक, पवई ना बिख भिक्षा के लिए भोंकते फरते है।
- 59:15जन्म नहीं मिल रहा है। इन्हें तो बुरे ही किया।
- 59:20जो अब तक तुम्हारे लालना फलना वाले ये भक्त भर रहे हैं तो
- 59:29इन्होंने कुछ बुरा ही किया होगा जो इनको प्रकृति जन्म नहीं दे रहे
- 59:38और फिर। ये मांगते हैं क्या ये पशु की बलि
- 59:43मांगते हैं? तुम बेचारे छोटे छोटे निर्दोष
- 59:47मेमनों को चढ़ाते थे। उनका क्या कसूर है खुशी तुम्हारे
- 59:51हुई शादी तुम्हारे हुई बच्चा तुम्हारे हुआ बेटा तुम्हारे हुआ
- 59:56गर्दन तुम बच्चे के मेमने की काट देते।
- 59:59तुम सोक कहाँ से पाओगे, यह सारा जगत यूनिवर्स एकमुश्त है।
- 1:00:07गोता हुआ है आपस में इंटरमिंगर्ड है यहाँ एक रंग दुखती है हमारे
- 1:00:16शरीर के तहत। तो नींद सारी रात नहीं आती, ये
- 1:00:27सारा जहान तुम्हें पता नहीं लगता इसलिए आज संसार में सुख है?
- 1:00:34दुख क्यों जगह जगह जगह जगह निर्दोषों का?
- 1:00:42वो चाहे आदमी हो, चाहे पशु हो, उनका कसूर क्या है?
- 1:00:47कसूर यह कि बोल नहीं सकते बेचारा, लेकिन एक बात ध्यान में रखना ये
- 1:00:54सारा संसार अस्तित्व इंटरमिंगल्ड और जीस ईश्वर की मैं बात करता
- 1:01:02हूँ। यह मान्यता बड़ा ईश्वर नहीं, यह
- 1:01:06तो मैंने खुद देखा है। मैं कहता हूँ मैंने खुद पिया,
- 1:01:15मैंने खुद इसमें अटकलियाँ लगाईं। मैं खुद इसके आनंद में झुमा इसके
- 1:01:22मस्ती में सरब और 14 वर्ष से 13 वर्ष से एक स्थान पे बैठा हूँ कुछ
- 1:01:27तो पिया ही होगा ना भाई मेरे सारे अंग सलामत हैं ऐसा नहीं मैं चल
- 1:01:33नहीं सकता ऐसा नहीं मैं टुंडा पांगा लूँगा।
- 1:01:39सब ठीक है, ऐसा नहीं मेरे कुछ पछता नहीं, लेकिन मैं कोई स्वाद
- 1:01:46नहीं लेता क्यों? क्योंकि स्वाद मुझे ऐसा मिल गया।
- 1:01:52जीस स्वाद को लेने के बाद तुम्हारे संसारिक स्वाद फीके
- 1:01:56पड़ते हैं। मुझे वो परम स्वाद मिल गया और
- 1:02:01निश्चित रूप से जो अभी यशो कहते हैं ना मैं ज्यादा मसाले वाले
- 1:02:10पकोड़े खाता था, सीधा सा उन्हें परम स्वाद अभी नहीं मिला।
- 1:02:17ये लक्षण ही तो बताते हैं, लिबरल सेक्स ये क्या होता है ओसो को मैं
- 1:02:28ऐसे ही गलत नहीं कहता एनलाइटन मानता हूँ लेकिन चरित्रहीनता भी
- 1:02:33साथ में। इसलिए तो बुरी तरह पिट गया गया
- 1:02:39था। पूर्व से पश्चिम में पूर्व को
- 1:02:42फैलाने के लिए पश्चिम से ले आया पूर्व में पश्चिम की चरित्रहीनता
- 1:02:50क्या अच्छा काम किया? और वहाँ ठहर नहीं रहा।
- 1:02:55ऐसा कोई काम नहीं किया, उन्होंने देश निकाल दिया।
- 1:02:58यह कोई अच्छी बात है, किसी व्यक्ति को देश निकाला दे दिया
- 1:03:04जाए, यह सम्मान की बात है। भक्तों के लिए करीब 30 के करीब
- 1:03:11मुल्कों ने उनका बैन कर दिया कि जहाज नहीं उतरने देंगे।
- 1:03:15क्यों डरते थे उससे नहीं, वो चरित्रहीन थी।
- 1:03:21मैंने बहुत बार कहा है मैं इन लोगों को कृष्णमूर्ति और वसु इनको
- 1:03:32मुक्त कहता हूँ। एनलाइटन कहता हूँ बदमाश एनलाइटन
- 1:03:36कहता हूँ या बदमाश? चरित्रहीन व्यक्ति अगर
- 1:03:43एनलाइटनमेंट की बात करेगा तो सुनेगा कौन?
- 1:03:47लेकिन हैं वो तो और फिर वो क्या करें?
- 1:03:50मेरे पास जैसे जैसे कमेंट आते हैं, मैं आपको बता नहीं सकता।
- 1:03:56ऐसे ऐसे कमेंट आते हैं और एक नहीं हज़ारों की तादाद लोगों ने घरों
- 1:04:02में आश्रम खोल रखे हैं और लिब्रल सेक्स।
- 1:04:08उनसे पैसे बटोर लेते हैं कि तुम यहाँ पर बना लो, अपने दैहिक शोषण
- 1:04:14करते हैं और इतना शोषण करते हैं के उनके अंक फैल हो जाते हैं।
- 1:04:18शोषण करने पड़े, अब मैं तुम्हें क्या बात बताऊँ, बहुत कुछ जानता
- 1:04:24हूँ। लेकिन सब ये बात आपको क्या बताऊँ?
- 1:04:29समझदार हुआ भगवान कृष्ण ने एक बात कही है अनुकरणीय मैं भी ये बात
- 1:04:38कहता हूँ संत को अगर कुछ मिल गया है हीरो पायो गांठ गछर।
- 1:04:46जो गूंगा गुड़ खाये के कहे कौन स्वाद तो तुम्हें कुछ मिल गया है
- 1:04:52तो चरित्र हीन का ताका तो प्रगट न करो, तुमने क्या सिखाया?
- 1:05:00लोगों को कोई एक व्यक्ति है। एक व्यक्ति कोई है।
- 1:05:05दुनिया में कितने शिष्य हैं? जो ओशो की पद्धतियों को इस्तेमाल
- 1:05:12करके एक व्यक्ति मुक्त हो गया? उसकी मान्यता टूट गई हैं।
- 1:05:20कोई है ऐसा एक व्यक्ति? एक व्यक्ति मिल जायेगा।
- 1:05:25आपको नहीं मिलेगा मिलेगा और चरित्रहीन मिलेगा और उसकी
- 1:05:32चरित्रहीनता दिखाती है। इस नॉट ए एनलाइटन क्योंकि जो
- 1:05:41खुशबू तुम इस दुर्गंध से मुक्त न कर सकी वो खाक खुशबू होती।
- 1:05:50जो तुम्हें छोटे भोगों से मुक्त नहीं कर सका वो बड़ा भोग तुमने
- 1:05:54भोग लिया कौन ऐतबार करेगा तुम्हारी बातों से नहीं, नहीं।
- 1:06:06ऐसे बातों से कितने बार तुम लोगों को बहकाओ कही सिर्फ दिमागों को
- 1:06:11तुम अपने तर्क के द्वारा क्योंकि फिलस्पी पढ़ो एमए फिलस्पी पीएचडी
- 1:06:16फिलस्पी तो बाहर की खाल तो निकाल ही लेगा और तुम क्योंकि बुद्धि से
- 1:06:21सुनते हो और एक व्यक्ति को। इसलिए तुम्हारी बुद्धि प्रभावित
- 1:06:25होगी। निश्चित रूप से तुम कहोगे ऐसा
- 1:06:27व्यक्ति कोई हुआ ही नहीं, बिलकुल नहीं हुआ लेकिन ऐसा तेज तर्रार
- 1:06:32तार्किक नहीं हुआ। ऐसा तेज तर्रार तार्किक।
- 1:06:41ट्रांसफर मिशन क्या हुआ तुम्हारे में?
- 1:06:43बताओ तुम से अच्छे तो वो जो सुबह शाम कोठों पे जाते हैं, तुमने
- 1:06:55एनलाइटनमेंट की ऐसी बदनामी करा दी इन दो लोगों ने?
- 1:07:01खैर वो तो फिर भी ढके रह गए कृष्णमूर्ति उसका तो जिससे लव
- 1:07:08अफेयर था, उसकी बेटी ने जो किताब लिखी उसे पता लगा उसने तीन गर्भ
- 1:07:12करा दिए और फिर तीन हत्याएं हो गईं।
- 1:07:16वो कैसे बोलेंगे ये व्यक्ति? कि मांसाहारी पाप ना करो किसी की
- 1:07:27हत्या फिर जब ऐसे ऐसे संत पैदा होने शुरू हो गए तो कौन राह
- 1:07:36दिखायेगा तुमको? तो लक्षण आते हैं, लक्षण आते हैं
- 1:07:46अभी तुमने अगर छोटे स्वादों को छोड़ा नहीं, अभी जीवा का टेस्ट
- 1:07:52तुमने छोड़ा नहीं इंद्रियों का टेस्ट तुमने छोड़ा नहीं तो उसका
- 1:07:55मतलब साफ है। कि तुम्हें इंद्रियों से पार का
- 1:07:58टेस्ट भी आया है। अभी तुम भले पकोड़े खाके जीवा को
- 1:08:07तृप्त कर रहे हो, इसका मतलब तुम्हारी इंद्रियां तुम्हारे वश
- 1:08:11में नहीं, तुम इंद्र बने नहीं और क्या कहूं तुम्हें?
- 1:08:19कोई सच कंठ का धराशक दिलाता है कोई स्वर्ग का, कोई नरक का, कोई
- 1:08:26यवरों का, कोई शराबों का, लेकिन मिलेंगे मृत्यु के बाद कमाल के
- 1:08:32बाद। आपने कहा चाटना है?
- 1:08:36वस्तु के बाद मैं तुम्हें कहता हूँ अभी यहीं उतरो यहीं मिलेगा
- 1:08:40आपको इसी जन्म में अगर तुम पा गए हो तो वो सत्य धर्म है तो मैं
- 1:08:46कहता हूँ मान्यता मुक्त सत्य, मान्यता मुक्त सत्य।
- 1:08:54सभी मान्यता को तुम बेहतर उतरों पाओगे बिल्कुल पाओगे तुम कहते
- 1:09:01कागज़ की लिखी और मैं स्टेम्प लगाता हूँ तुम्हें मैं कहता आँखें
- 1:09:07दिख तुम अपनी बेहतर उतरों तोड़ दो इन मान्यता को।
- 1:09:13अगर कोई तुम्हारा पित्तर कोई भूत, कोई प्रेत, कोई जिन कोई पीर खीर
- 1:09:20तुम्हें तंग करता है मेरे पास मैं निपटा लूँगा मेरे पास सब उपाय है
- 1:09:26ये बिल्कुल मैं ओपेन उदघोषणा करता हूँ तुम्हें।
- 1:09:33अगर कोई भी तुम्हें तंग करता है अभी साथ होने वाले तुम चाह करो,
- 1:09:39मैं कोई डिक्टेटर नहीं हूँ, मैं सिर्फ तुम्हें बात समझा सकता हूँ,
- 1:09:45जो सत्य है उसे तुम समझ जाओ तो ठीक।
- 1:09:50जकड़े रहो तो तुम्हारे लिए ज़ंजीर बन जाएगी तुम्हारे बच्चों के लिए
- 1:09:53भी ज़ंजीर बन जाएगी तो मैं कहता हूँ तुम ही क्यों नहीं तोड़ सकते
- 1:09:57जब हैं ही नहीं प्रकृति हर आत्मा को नया जीवन भुगतान करने के लिए
- 1:10:05दे देती है जो बच जाते हैं। वह किसी कारणवश बचाते हैं।
- 1:10:11बुद्ध जैसे लोग या कुछ ऐसे लोग जो किसी कारणवश से यहाँ जान बूझ कर
- 1:10:17वो किसी का नुकसान नहीं करते, नुकसान कर भी नहीं सकते।
- 1:10:23तुम डरो मत इनसे ये है ही नहीं ऐसे ये कर भी नहीं सकते नुकसान।
- 1:10:29और फिर मैं इस बात की जिम्मेवारी तुम्हें और तुम्हें अगर कोई पीर
- 1:10:33पगमपर किसी को तंग करता है मेरे पास कोई भूत प्रेत पिशाच चंडाल,
- 1:10:43कोई यक्षणी, कोई दक्षिणी, कोई कुछ वार ताली, कोई कुछ।
- 1:10:47कोई अप्सरा, कोई पिशाचणी, कोई पिशाच तुम्हें तंग करता है ये
- 1:10:54तुम्हारे सभी मान्यताएँ तो मेरे पास हो गयी तू मेरे पास सब का
- 1:10:59इलाज है, मेरे पास सभी के बूते हैं।
- 1:11:08तुम बेधड़क हो जाओ मान्यता मुक्त धर्म जो अभी करोगे अभी मिलेगा,
- 1:11:16देखो तुम कोहड़ी मरोगे ना, अपने कहीं भी लघु निकलेगा, ये है सत्य।
- 1:11:25जो तुम्हें कहे कोहाड़ी तुम मारोगे यहाँ दर्द होगा नर्क में,
- 1:11:29जाके तू ये झूठ मत मान तब करो तुम यहाँ पांच नाम जब वो तुम यहाँ
- 1:11:35सचखंड गुरु आएगा आखिर में बिल्कुल मत मानना ये झूठ है और है भी झूठ,
- 1:11:41ऐसा नहीं मैं किसी को। अगर सत्य होता तो मैं सत्य बोले
- 1:11:45मैं अर्थी का समझ कोई अर्थ नहीं था क्योंकि मैं तो सारी धरती को
- 1:11:51शिक्षित दे भी नहीं सकता, मैं तो जीतने व्यक्तियों को संभाल सकता
- 1:11:55हूँ। जितनी क्लास को कोई टीचर संभाल
- 1:11:58सकता है, मैं तो उतने ही लोग रखे हुए है।
- 1:12:00बाकी बेंड हैं। सबयाना तो बहुत चाहते हैं।
- 1:12:04लेकिन तुम्हें बता रहा हूँ कि तुम इन होने वाली मृत्यु के बाद होने
- 1:12:13वाले पुरस्कार वो चाहे निर्वाण है, वो मुक्ति है वो चाहे खुदा
- 1:12:19आएगा, तुम्हारा हिसाब करेगा या जन्नत में।
- 1:12:23हुरे मिलेंगे, शराब मिलेंगे या सच कांड मिलेगा या सतरोग मिलेगा और
- 1:12:28मृत्यु के बाद मिलेगा। उसके वो है ही नहीं, इनका धोखा है
- 1:12:35और अभी रहना भविष्य में मत अटकना, सच कांड भविष्य है जो तुम्हें पता
- 1:12:41नहीं। भविष्य एक धोखा है भविष्य एक
- 1:12:48इल्यूज़न है भविष्य होता नहीं जब भी कोई वक्त आता है वर्तमान बन के
- 1:12:54आता है मेरा धर्म है। मान्यता मुक्त धर्म मान्यताएँ
- 1:13:06जहाँ टूट जाती हैं सभी वहाँ आता है तुम्हारा धर्म, वो है तुम्हारा
- 1:13:13स्वभाव वहाँ पहुँचो अब पहुँच सकते हो खोजो मत कहीं।
- 1:13:35का है रे बन को जन शायद सर्बगयापी सदा।
- 1:13:55अले प आ सर्ब व्यापी सदा अले प तोह संग सम?
- 1:14:14तोहे संग समां काहे रे काहे रे बन खो जनजा।
- 1:14:35काहे रे वन को जन जाए यही मिलेगा इसी धरा पे मिलेगा तुम्हारे भीतर
- 1:14:52मिलेगा। कस्तूरी कुंडल वसह बृग डूडा वन
- 1:14:57माँ बन में न मिले ऐसे घट में पीवे हैं सत्यकण्ड में पीवे नहीं
- 1:15:04हैं मूर्ख जाने में जो तुम्हें कहते हैं सत्यकण्ड में वो मूर्ख
- 1:15:09है धन्यवाद।