Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Jan 26 - अल्फा, बीटा, डेल्टा वेव्स: समाधि तक कैसे पहुँचें? बीपी, हार्ट अटैक से बचने का फार्मूला !!
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- 0:14पूज्य और देव के शिव शरण में प्रणब एक प्रश्न?
- 0:22आपने आज के प्रवचन में अल्फा, बीटा, गामा, थेटा, डेल्टा वेब्स
- 0:29के विषय में गहरी और दुर्लभ जानकारियां प्रदान की।
- 0:35मैं बीपी की दवाइयां लेता रहा हूँ और डॉक्टर बताते थे।
- 0:41कि ये बीटा ब्लॉगर्स मेडिसिन है। आज समझाया कि ये बीटा यानी 13 से
- 0:5630 साइकल्स पर सेकंड। वेव्स को कम करने में मदद करती
- 1:06हैं बाबाजी का हम ऐसा कर सकते हैं जिससे कि बेटा वेव्स में सुधार हो
- 1:15और हमारा बीपी नियंत्रित रह सके। ज्यादा बीपी रहने से।
- 1:23या फ्लक्चूएट होते रहने से क्रिया युग में कठिनाई हो सकती है।
- 1:29आपने कहा था बीपी 110 70। ऐसे लोग ध्यान के गहरे तल में
- 1:36पहुँच सकते हैं। तो क्या?
- 1:42जो बीपी को गोलियां खाकर अपने को ठीक रखें अथवा जिनका नॉर्मल बीपी
- 1:50130, 40 या 8590 डाइस्टोलिक और सिस्टोलिक रहता हो।
- 2:00नहीं क्रिया योग ध्यान में सफल नहीं हो पाएंगे।
- 2:05इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समझदार जानने का अभिलाष है।
- 2:09कोई उपाय हो तो अवश्य बताएगा आपका शिष्य श्रीधर हो रहा बिलासपुर
- 2:19छत्तीसगढ़। शब्दों का प्रयोग तो आप भी करते
- 2:27हो बाबा जब बजन गाते हो आइए आज इस प्रसंग पे ही।
- 2:39वीडियो शुरू करें अल्फ़ा वेव का मतलब आठ से 12 हर्ट्ज़, आठ से 12
- 2:52साइकिल पर सेकंड। अल्फा बीफ जीस ब्रेन के भीतर से
- 3:04निकलते है। वह शांत होता है लेकिन ध्यान रखना
- 3:17काम नेस का मतलब। आनंद तो होना नहीं होता, मैं जीस
- 3:25आनंद की बात करता हूँ, वह ना तो अल्फा में होता है, ना थिएटर में
- 3:36होता है। थोड़ा थोड़ा रस डेल्टा में आना
- 3:40शुरू हो जाता है। इसे फिर सुनिए जीस रस की मैं बात
- 3:49करता हूँ न तो। अल्फा में होता है।
- 3:55इसलिए अल्फा से बोलने वाले शांत स्वभाव के लोगों को आप रस से
- 4:01युक्त नहीं पाओगे। जैसे मैंने आपको धारण दी अल्फा
- 4:08वेव से युक्त विकास दीविकृत सुंदर का उदाहरण।
- 4:20अगर इससे बिकम स्पीड की वेव्स ब्रेन निकाले?
- 4:28ये एक मेजरमेंट है। वेव एक मेजरमेंट है।
- 4:34टु मेज़र दी क्वांटिटी ऑफ। बेब्स अगर डेल्टा निकलती है पॉइंट
- 4:51फाइव से लेकर चार हर्ट्स तक और डेल्टा।
- 5:01उसके बाद आती है थेटा फिर अल्फा, फिर बेटा फिर गामा, अल्फा, बीटा,
- 5:09गामा, डेल्टा और थेटा जैसे जैसे आप अल्फा से नीचे जाओगे तो आयेगी
- 5:18थेटा। फीठा से नीचे जाओगे तो आयेगी।
- 5:22डेल्टा डेल्टा ही वो तरंग है जो आपको आनंद का वो रस पिलाना शुरू
- 5:32हो जाता है और उसे चक्करों के हिसाब से बोलो।
- 5:40तो यह आगे चक्कर के आस पास शुरू हो जाता है जी विशुद्ध ही चक्कर
- 5:47में जी ठीठा होता है। विशुद्धि चक्कर से आगे जाकर आज्ञा
- 6:00चक्कर में मिक्सेशन होता है। यानी आधा आज्ञाचक्र थीटा में आता
- 6:10नहीं और आधा आज्ञाचक्र। डेल्टा मैप उसके आगे आएगा सहस्रफ
- 6:19वह है पूरा का पूरा डेल्टा में डेल्टा वेव इसे फिर समझे अल्फा
- 6:29पूरा का पूरा। और विशुद्धि चक्र पूरा का पूरा
- 6:41आज्ञा चक्र आधा, आधा और सहस्रार पूरा पूरा।
- 6:531000 और पूरा पूरा डेल्टा वेव्स आद्य चक्र आधा आधा डेल्टा।
- 7:07और थेटा और विश्वयुद्ध चक्र अल्फा शुद्ध अल्फा अल्फा थेटा डेल्टा
- 7:22ठीक उसके नीचे आ जायेगा बेटा और गामा।
- 7:29यह तेज है गामा से परे जाके जो व्यक्ति पागलपन की स्थिति में आ
- 7:36जाएगा। अब सुनिए इसका आसान तरीका मैं
- 7:43क्यों कहता हूँ? वीडियो सुनें और मैं कहता हूँ
- 7:47बड़े शांत जब आप सोने जा रहे हो जी जी, तब आप मेरे वीडियो को सुनो
- 7:56क्या होता है वीडियो? उसमें जो आवाज की ये तरंगें हैं
- 8:04क्योंकि मैं डेल्टा में से निकला हूँ।
- 8:08डेल्टा में से अभी अभी आया हुआ है।
- 8:10व्यक्ति और सदर डेल्टा में ही रहता हूँ तो मेरे बोलने के साथ ही
- 8:18यह डेल्टा लिवर के आ जायेगा और यह लाखों सालों तक।
- 8:26इस आवाज में बना रहेगा। अगर इसको आपने यथा ऐसे ही सुना
- 8:38जान के ना इसको अगर आपने डाउंलोड करके सुना।
- 8:52तो इसकी डेल्टा तरंगें करीब करीब मर जाएंगे या बहुत कम रह जाएंगे।
- 8:59जैसे गायत्री में मैंने आपको कहा कि सीधे सीधे सुन लो, अगर सुन लो
- 9:03तो अन्यथा इसकी डेल्टा मर जाएंगे। गहरे शब्द हैं आराम से सुन आम जो
- 9:18दिमाग से काम लेते हैं लोग वो ठहरी हुई बुद्धि होती है जैसे
- 9:23आचार्य प्रशांत ठहरी बुद्धि है, तार्किक है।
- 9:31शब्दों का घणत्व है। भक का बल बहुत ज्यादा है।
- 9:38न्यूरॉन जो भरे पड़े हैं बाहर का ज्ञान एकत्रित करना हो तो इनके
- 9:45पास चले जाना है अगर थोड़ा। रस भी चाहिए हल्का थोड़ा अल्फा के
- 9:59साथ थीटा भी आ जाए। थोड़ा सा तो विकास भी गिरती ठीक
- 10:05रहेगा और अगर उलझन हो संसार में तो खांसर बहुत बढ़िया।
- 10:14वह तो गांव में ये तो वन्दे भारत हैं एक्सप्रेस बात कम समझाया कि
- 10:26नहीं यार ये ज्यादा इस तकिया कलाम को हटाओ।
- 10:41थोड़ा जागरूकता से बोला, प्रोक आंसर देखो तकिया कलाम आपकी जागृति
- 10:52में बाधा बनते हैं। तुम बेहोशी में बोलते हो, सिर्फ
- 10:57एक टेप को चला देते हो। वह रोटेट करती है और इतनी तेज
- 11:07गामा वेव्स इससे आगे मैं कुछ नहीं कहूंगा क्योंकि फिर आपकी दुकान कर
- 11:15के सॉरी। अगर ठीक से अगर आपने देखो मैं तो
- 11:24इनको जानता भी नहीं बेचार हूँ, मैंने इनसे कोई नहीं खाई है और
- 11:29रिश्वत वगैरह मेरे चलती बनी है। ठीक से अगर समझ के आंतरिक कोनों
- 11:38में ले जाना चाहते हो बात तो विकास दिव्य कीर्ति को सुनो बेस्ट
- 11:43आज की अगर थोड़ा सा तार्किक वे से चाहते हो तो अचार्य प्रसन को
- 11:55सुनो। मैं क्यों कहता हूँ मेरी वीडियो
- 12:01को सर? इसमें आपको बहुत गहरा रस्त्र तू
- 12:08तो मिलेगा इसमें आपको? न्यूरोस में इकट्ठी की हुई
- 12:21जानकारियां भी मिलेंगे। लेकिन कमाल की बात यह है
- 12:25जानकारियां डेल्टा वेव से लेबडतेबड के आयी होंगी।
- 12:31वो ही वो ही बात बोले विकास। दी विकेट तो वही बात बोलूं मैं
- 12:38जानकारी वही है लेकिन फर्क क्या पड़ गया?
- 12:45फर्क पड़ गया कि उस जानकारी को मैं जब बोलता हूँ तो मेरे भीतर से
- 12:52आई हुई वो डेल्टा की तरंग है। जानकारियां पी जाती हैं और वह
- 13:00जानकारीयों के शब्द गायत्री मंत्र तो वो ही है लेकिन डिबोट बढ़ गया
- 13:07है भीतर से इनको कम मत होने देना। तो एक तरफ अगर मुझे सुनना पड़े और
- 13:15एक तरफ अगर विकास की विकृति को सुनना पड़े तो मुझे सुनते सुनते।
- 13:20आप अपने भीतर उतर जाओगे, यह भीतर का उदाहरण बड़ा शानदार है।
- 13:27कमाल। यही फर्क है।
- 13:34आप कहते हो शब्द तो आप भी प्रयोग करते हो भजन में तो शब्द हम भी
- 13:41प्रयोग करते हैं। वहगुरु में राधे में गोविंदा।
- 13:49फर्क क्या है सुन? आप कहते हो, वे गुरु, वे गुरु।
- 14:05हवा है गुरु हवा है, गुरु हवा है गुरु।
- 15:05राधे राधे राधे श्याम मिला दे राधे राधे श्याम मिला दे।
- 15:24गोविंदा, गोपाल हरि राधे राधे श्याम मिलादे मेरी नैैया पार लगा
- 15:40दे। गोविंदा गोपाल हरी राधे, राधे शाम
- 15:51मिला दे राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा।
- 16:00गोपाल गोविंदा गोपाल हरि राध राध शाम मिलाद।
- 16:27शब्द मेरे भी वो है लेकिन ये शब्द नहीं है।
- 16:40यही हम गलती करते हैं। शब्द और धुन में जमीन और सुमन का
- 16:46फर्क है। भीतर से आती हुई आनंद की नाक की
- 16:54आवाज आवाज नहीं। दैट स नोट साउंड वे कॉल आईटी
- 17:03अनस्तकिक साउंड अन आह आह आवाज आह त।
- 17:19और बहुत से धर्म जैसे आज भी के ओम बोलना से खाते है और टकराह से जी
- 17:27बात आलू से टकरा जायेगा और अगर डेल्टा वेव से युक्त न हुआ।
- 17:35ओम बेकार हो गया। डेल्टा वेव से युक्त ओम कहाँ है?
- 17:42आपके अंत में गूंज रहा है हर वक्त बाजे नाद अनेक आशंका केतते गावण आ
- 17:50रहे। मस्जिद खोलो, बलेशा कहते हैं
- 18:04मस्जिद खोलो जीवडा डरिया वहाँ कोई आवाज नहीं थी, ऐसी आनंद की कोई
- 18:11आवाज मस्जिद में नहीं थी। मस्जिद को नु जोड़ा डर या जा
- 18:19ठाकुर दे डेरे वढे जत्थे वरदे नाद 1000 इश्क दी नमी नमी बाबा कहाँ
- 18:31बजता है ये संगीत हजारों तरह के नाथ?
- 18:35इकट्ठे होकर ओंकार की ध्वनि है समा जाते हैं।
- 18:40वो नाद कहाँ है जो यह आपको अनकनाद सुनाई पड़ता है?
- 18:47इसका उदगम सथल जो है जहाँ से ये नाद उगता है।
- 18:52ओंकार का नाद वहाँ है से ही। सुनता है आपको 1000 से या कानों
- 18:59से कानों से सुनता क्योंकि श्रवण यंत्र यहीं है लेकिन ये धागा है
- 19:07जो मूलाधार से उठता है। 1000 में जाता है मूलाधार से उठी
- 19:13हुई आवाज ओंकार का नाक सहस्त्र में गूंजती है।
- 19:16आपको प्रतीत पड़ती है कि दायें कान से सुन रहा है, बाएं कान से
- 19:21सुन रहा है। यद्यपि ये कान से नहीं सुन रहा,
- 19:24कान को तो बंद भी कर दो फिर भी सुनेगा।
- 19:29फिर ये कहाँ हो रहा है? ये हो रहा है हमारे नाभी क्षेत्र
- 19:33के पास। मूलाधार के पास कुंडलनी के पास
- 19:41यहाँ से उदगम स्रोत है उसका और एक धागा एक रज्जु के साथ बंधा हुआ है
- 19:51जाता है सहस्रार में। सहस्रार में प्रगति करना होता है
- 19:57इसका क्योंकि उद्गम स्थल में कोई ऐसा यंत्र नहीं है जो इसको पकड़
- 20:04सके लेकिन सहस्रार में ऐसा यंत्र है जो इस आवाज को पकड़ ले।
- 20:12तो एक रज्जु के साथ जहाँ से ये उद्गम होता है ओमकार का नाम ये
- 20:20बनता हुआ है उद्गम स्थल से जो नाभि के केंद्र के पास सहसरार तक
- 20:28यह एक धागा जाता है। इस धागे के भीतर से जैसे हमारी
- 20:34इलेक्ट्रिक तार जाती है, ऐसा ही समझो।
- 20:41इसके बीच में से वो आवाज़ निकल के आती है और सहसरार में गूंजते है
- 20:46तो आपको ऐसे लगता है जैसे दायें कान में बाएं कान में नहीं या कान
- 20:51में नहीं होती। कान तो श्रवण यंत्र है इसलिए यहाँ
- 20:54तुम सुन सकते हो इसे लेकिन हो रही है ये गगन मंडल में गगन मंडल
- 21:01सहस्त्रस ये ब्रेन का बिलकुल बीच का हिस्सा तालुआ जिसे कहते थे हम।
- 21:11उसमें इसका प्रवृत्ति करना हो रहा है।
- 21:20अल्फा तिलता डेल्टा अगर आप अल्फा में सारे दिन रह लो, तो क्या बात
- 21:30है जीने का मज़ा है। अल्फा से ऊपर अगर आप बेटा में चले
- 21:37गए और गामा में चले गए तो समझो आप बहर्मुखी हो गए।
- 21:43अब थोड़ा सा बहर्मुखी और अंतर्मुखी का फर्क समझा दू आपको
- 21:48वेब्स के हिसाब से जैसे जैसे आप बाहर जाओगे।
- 21:55वैसे वैसे आपकी अल्फा तरंगें टूटेंगे, ज्यादा सर्कल तेजी से
- 22:01घूमेगा और अल्फा रेंज विल कॉनवर्ट इन टु बेटा तेजी से।
- 22:1413 से 30 बेटा और फिर आप ज्यादा बाहर हो गए, आपने अपनी चेतना को
- 22:25दन में लगा दिया, गद्दी में लगा दिया?
- 22:31पुरस्कार पाने में लगा दिया। नोबेल जीतना है हमने आपका एम है
- 22:40नोबेल जीतना है इस एम ने लाखों घर बर्बाद कर दिए करोड़ों अरबों जमीं
- 22:48खा। गई।
- 22:51आसमान कैसे कैसे जमाने में मार जमा कैसे कै।
- 23:10जमीं खा गए आसमान कैसे कैसे जैसे जैसे आप।
- 23:21बाहर जाते जाओगे बेहर मुखी हो ना अल्फा की यात्रा है।
- 23:30बेटा और गामा ये तरंगें बदलती जाएँगी, सर्कल तेजी से घूमता
- 23:36जाएगा। मैं क्यूँ कहता हूँ ठहरों सर्कल
- 23:41को कम करो, साइकल की गति को घटाओ? वेव से के साइकिल की गति को बताओ
- 23:53अल्फा बीटा बीटा में चले जाते हो 13 से 30 गामा में चले जाते हो,
- 24:0430 से 100 और 100 के ऊपर भी हो सकता है।
- 24:12जैसे ही तुमने अपनी चेतना को किसी बाहरी लक्ष्य की ओर मोड़ दिया,
- 24:20मैंने तो आई ए एस बनना है मैंने तो आई पीएस बनना है तो आप उसके
- 24:27लिए मेहनत करना शुरू कर देंगे। मैंने तो एमडी करनी है मैंने तो
- 24:31एमएस करना है ये जरूरी भी है आवश्यकता है ऐसे लोगों की क्योंकि
- 24:41अगर सारे ही डेल्टा के भीतर प्रवेश करके बैठ गए तो संसार को
- 24:45दिक्कत नहीं है। दिक्कत आज है।
- 24:49दिक्कत आज है इन गामा बहुत तीव्र प्रगति से घूमती हुई गामा वेव्स
- 24:57को जो कहते हैं हत्यारु बेंजवाला को भी इसके प्रेसिडेंट को उठा लो,
- 25:04रशिया के प्रेसिडेंट को उठा लो। इंडिया के प्रेसिडेंट के प्राइम
- 25:08मिनिस्टर को उठा दो। यह गामा रेज का तीव्रतम स्वरूप
- 25:15है। जैसे जैसे आप बाहर की पदार्थों
- 25:21में अपनी चेतना को इन्वेस्ट करोगे तैसे तैसे तुम्हारी।
- 25:26गामा वेब से प्रगाढ़ होती जायेंगे और गामा वेब से दुख देती है।
- 25:34दुख का कारण है गामा वेब की अति अति का हितम है एक्सेस आपको खुद
- 25:43भी नहीं पता चलेगा। बस इतना पता चलेगा कि मैं शांत
- 25:48क्यों नहीं हूँ इसका सीधा सा उत्तर मैं देता हूँ कि आप बेहर
- 25:57मुखी ज्यादा हो। किसी लक्ष्य के साथ ही चिपट गए।
- 26:04वो लक्ष्य चाहे कोई भी हो वो लक्ष्य चाहे गद्दी, धन मानसन्न,
- 26:13जमीन जायदाद, पन बढ़िया सा बंगला, अच्छी सी कार्य लेकिन कबीर को तो
- 26:19ये सब कुछ नहीं चाहिए। और कबीर के भीतर से जो निकलती है
- 26:28डेल्टा रेंज वह परिणाम है बाहर से तुम अपनी चेतना को खेचो।
- 26:41और अंतर्मुखी हो जाओ, भीतर चलो जितना बाहर जाओगे आप जितना बाहर
- 26:51चिपकाहट करोगे आप चेतना आपकी पदार्थों में चिपक जाएगी।
- 26:57इसी को मोह कहते हैं। ये मेरा बेटा है, ये मेरा बेटा
- 27:01है। ये सब गामा रेंज के कारण होता है।
- 27:08गामा रेंज बड़ी चेपू है, अगर इनको इनके स्वार्थों की पूर्ति कर दी
- 27:18जाए। आप जैसे ट्रंप है वेन्ज़ुएला के
- 27:25राष्ट्रपति को कोई भी बहाना कर देगा, आप तो महात्मा गाँधी के ऊपर
- 27:31भी देशद्रोह का मुकदमा लर्ज कर सकते हो, कोई मुश्किल आती है।
- 27:38महात्मा गाँधी के बुत के भीतर जब रंग डाला जाता और गोली मारी जाती
- 27:45वो कब के मर गए? 48 के मरे हुए हैं उसमें से लहू
- 27:48निकलता आप नाचते हो, यह कल्पना है महात्मा गाँधी आपने 48 में मार
- 27:56दिए। आज उसके बूथ के ऊपर गोली मार रहे
- 28:00हो तो यह विकृत मानसिकता का परिणाम अब काबिल हो गया।
- 28:06किसी न किसी तल पर आपके मानसिक जहर मुड़ेल दिया गया है।
- 28:13विविषाग्रंथि के भीतर। भला ऐसे पागलपन के काम कौन करता
- 28:21है? जो आपने मार दिया हो उसके भूत में
- 28:28खून भरकर गोली चलाते हो और खून निकलता है और आप खूब उछलते हो,
- 28:33नाचते हो, गाते हो? लड्डुओं का प्रसाद बांटते हो क्या
- 28:39हो गया? यह पागलपन है।
- 28:46आप का ही बनाया हुआ बुद्ध आप का ही डाला हुआ कौन आप की ही मारी
- 28:51हुई गोली? और आप समझती हो के गाँधी को मार
- 28:55दी गाँधी को तो भाई कब कब कब मार दिया आपने?
- 29:02अब जो काम कर रहे हो या पागलपन, इसलिए मैं कहता हूँ हिंदू कभी
- 29:08नहीं पहुंचेगा। क्यों?
- 29:11क्योंकि हिंदू कल्पना में जीता है और कल्पना में जीने का अर्थ
- 29:16स्वप्न में जीना और स्वप्न में जो व्यक्ति जीता वह सत्य तक नहीं
- 29:22पहुँच पायेगा। आनंद मिलता है सत्य में जाकर।
- 29:28अब खोए हुए हैं कल्पना में इसलिए मैं बेबाक कहता हूँ, हिंदू कभी
- 29:34नहीं पहुँच पाएगा ला के जन्म ले ले क्यों वह कल्पना में से अगर
- 29:45आपको रस चाहिए? तो या तो उस रस में भीतर उतर जाओ,
- 29:51अंतर्मुखी हो, अंतश में चले जाओ, अंतश में चले जाओ और अंतश में
- 30:01गहरे गहरे उतरते चले जाओ जैसे आपरात्रि को क्षति तक पहुँच जाते
- 30:07हो। वैसे ही दिन में आप उसी तल पे
- 30:12पहुँच जाओ जहाँ रात्रि में सोते वक्त पहुंचे थे।
- 30:17बिलकुल वही तल है जहाँ आप शुशु में गए थे और आपको बड़ा मज़ा आया
- 30:24था। जागते जागते उसी तल पे पहुँच जाओ
- 30:32कैसे पहुंचे अपनी गामा रेंज को पीटा में बदलो बेटा को अल्फा में
- 30:40बदलो अल्फा को थीटा में बदलो, थीटा को डेल्टा में बदलो।
- 30:48यह लगातार बदलाव कैसा होगा? अपने आप को ओपेन छोड़ दो, आपने
- 30:55देखा होगा आप अगर ऐसा ऐसा हाथ करके परमात्मा का शुक्रिया करो।
- 31:08वाहे गुरु, वाहे गुरु। ये धन्यवाद।
- 31:19उसका मुश्किलात तब पैदा होती है जब आप भावनाओं को।
- 31:29आनंद के रस को शब्दों में डाल देते हैं, यह है गलत प्रोसेसर।
- 31:42राधे राधे का रेपुटेशन मत करो मैं कहता हूँ राधे राधे आनंद से गायन
- 31:48भी कर सकते हो आप? जब आप मेरी वीडियो को सुनोगे
- 31:54शब्दों को जी। लेकिन क्योंकि बोलने वाला उस तल
- 32:03से आया है जहाँ डेल्टा वेब्स है। अभी अभी ताजा, ताजा जैसे कोई नहा
- 32:10के आया हो, अभी नहाने का पानी सुखा भी न हो सर इससे।
- 32:20कितना तरोता जाए उसके शरीर से उठती हुई अद्भुत सुगंध तुम्हें
- 32:32मदहूसी में ले जाएगी। यहाँ तुम्हें भी अपने अंत में ले
- 32:36जाएगी। इसलिए अक्सर मुझे लोग कहते हैं
- 32:41बाबा हमने शराब छोड़ दी, गांजा छोड़ दिया, मर जोना छोड़ दिया,
- 32:49लेकिन आपकी तलब वीडियो की ऐसी छूटती नहीं है काफी मुँह को लगी
- 32:57हुई। यह जाती नहीं अगर आपकी क्या है
- 33:04इसमें इसका तलबगार अगर एक बार व्यक्ति हो जाए।
- 33:14अगर जाने अनजाने तुम कहीं उस तल पे उतर जाओ, फिर ना सकोगे।
- 33:19इसलिए उसे पॉइंट ऑफ नो रिटर्न कहते हैं।
- 33:22वहाँ से ना सकोगे पॉइंट ऑफ नो रिटर्न वहाँ से वापस आता ही नहीं
- 33:28बंदा खो जाता। इसलिए जब मैं बोलता हूँ तो उस तल
- 33:38पर ले जाने की बात करता हूँ, बस मैं तुम्हें उस तल पर जाकर छोड़
- 33:43दूंगा, फिर आप वापस नहीं आ। पाओगे हो?
- 33:51हजूर, तुमको सितारों के ले चलो, दिल झुम जा है ऐसी।
- 34:11बाहरों में ले चलूँ हाँ आओ हजूर, तुम।
- 34:25सीधा से पहना याद रखना। जीस व्यक्ति की आवाज़ आपको
- 34:32अंतरमुखी कर दे। वह डेल्टा रेंज से युक्त है।
- 34:36डेल्टा वेब से जीस व्यक्ति की आवाज़ आपको बाहर मुखी कर दे।
- 34:45वह गामा तीव्र गामा रेंज से युक्त है।
- 34:48राजनीतिज्ञों के भाषण में आप यही अगर आप लगातार सोओ या आपके सिर
- 34:57में दर्द हो जायेगा, घर जाकर ठीक से सो नहीं सकोगे या खुद ही नहीं
- 35:03सो सकते। इनका सोना मुर्चा जैसा है।
- 35:10ये एनर्जीलेसनेस हो जाते हैं, सारे दिन बोलते हैं, 2020 सभाएं
- 35:15करते हैं। एनर्जीलेसनेस हो के ये बेहोशी के
- 35:19आलम में हो जाते हैं और समते हैं कि हम बड़ी मस्ती में सोये ये
- 35:25मस्ती नहीं थी, ये मुर्छा थी। अब इसकी शुरुआत करें।
- 35:42जैसे ही आपने मेरी आवाज़ को सुना, वीडियो को सुन एक हल्की सी मस्ती
- 35:50सा जाए और कई बार आपका मन करेगा। अगर आपने क्रिया किया तो भी आपके
- 35:58भीतर डेल्टा वेव्स पैदा होने शुरू हो जाती है।
- 36:02आपका कनेक्शन डेल्टा वेव्स से लग जाता है इसलिए आपको हल्का सर्वर
- 36:09आता है। धीरे धीरे पहले अल्फ़ा।
- 36:16फिर थिरटा फिर तुम डेल्टा में जाती हो और फिर आप को ऐसा लगता है
- 36:24जैसे नींद आएगा उस वक्त मैं कहता हूँ बड़ा शानदार लम्हा है वो चुप
- 36:33मत जाना। सो जाना।
- 36:35यह योग मित्र है। इसको योगी लोग तरसते हैं।
- 36:41अगर मेरी आवाज सुनकर आपको या क्रिया योग कर कर आपको नींद आ
- 36:48जाती है। बहुत ही झपकियां आती हैं मेरी
- 36:50आवाज सुनकर। मेरी आवाज़ आपको लोरी की तरह लगती
- 36:56है। बहुत से व्यक्ति मेरी वीडियो को
- 37:001010 बार में सुनना पड़ता है पता ही नहीं लगता कहाँ चूक गई।
- 37:09कब नींद आ गई? बहुत से लोग मेरी वीडियो को नींद
- 37:12के लिए इस्तेमाल करते हैं। पक्षियों में क्या है?
- 37:19ये ये डेल्टा रेंज है डेल्टा बीप्स है जो कोई दवाई आपके भीतर
- 37:24पैदा न कर सके। तो प्रश्न है श्रीधर का तो इसको
- 37:32हम से उठाएं? अगर हृदय की धड़कन ज्यादा बढ़ती
- 37:38है तो डॉक्टर आपको देंगे। मेटाप्रलोल या इसी फैमिली से
- 37:56रिलेटेड आप देखो के पीछे होगा लॉस एलओएल वो एटिनोलोल हो
- 38:04प्रोप्रोनोलोल हो मेटाप्रलोल हो एलओएल ये एक फैमिली है।
- 38:11इस फैमिली से कनेक्टेड सारी तो इसे बेटा ब्लॉकर्स कहते हैं।
- 38:19यानी कि बेटा रेंज बेटा वेव्स को यह कम कर देती है।
- 38:29बेटा वेव ज्यादा गति से चलता है, बेटा वेव्स को कम कर देती है।
- 38:38अब समझना बात को यह सीधे दिमाग में नहीं जाती है।
- 38:44ये दो यंत्र। हम इस बात को गंभीरता से समझ लेना
- 38:50शायद कोई बात में आये ना आये पता नहीं।
- 38:56हार्ट शरीर में ब्रेन भी शरीर में लेकिन फिर भी दोनों अलग है।
- 39:06आपका ब्रेन डेड हो जाए, आपका हार्ट धड़कता रह सकता है, ब्रेन
- 39:14डेड की अवस्था में हार्ट धड़कता रह सकता है कोमा में, आपको पता
- 39:21नहीं आप कहाँ जाते हो आपका हार्ट धड़क रहा है?
- 39:26कोमा से बाहर आया जा सकता है लेकिन ब्रेन डेड से बाहर नहीं आ
- 39:34जा सकता। ब्रेन डेड जो हो गया इसलिए मैंने
- 39:38उस दिन कहा कि आशुतोष को जो व्यक्ति होश में लेके आएगा वह
- 39:44मेरा सिर काट ले। इससे ज्यादा और व्यक्ति क्या है?
- 39:49क्या कह सकता है? लेने को कुछ नहीं है मेरे पास
- 39:53मेरी जान ले लो आशुतोष को तुम जी बंदे दो क्यों?
- 40:00मैं क्यों कहता हूँ ये मैं अच्छी तरह से जानता हूँ।
- 40:04इसका ब्रेन ट्रेड है। यह आना तो चाहता है।
- 40:10यह मेरे प्रवचन सुन रहा है और मुझे बीसवें बारिस ने प्रार्थना
- 40:16कर दी दो तीन बार मैंने वीडियो बैठा दी लेकिन भक्त हैं के मानते।
- 40:23दिल है की मानता नहीं है की मानता नहीं मुश्किल बढ़ी है।
- 40:43रस में मोहब्बत जे जानता ही न हो दिल है किमानता न।
- 41:01हम्म क्या है दिव्य जागृति संस्थान में कुछ भी तो नहीं ये
- 41:11मरा हुआ इंसान और ऐसा ही न्याय करने वाले लोग गद्दी पे बैठे।
- 41:25डॉक्टर से पूछो कैन ही रिटर्न आना भी चाहे तो नहीं आ सकता।
- 41:36आप ईशा से पहले की शताब्दियों में जी रहे हो?
- 41:44आप वनमानुष से भी गए गुजर रहे हो बुद्धि नाम की कोई चीज़ तुम्हारे
- 41:51भीतर नहीं है। ये तो मैं थोड़ी सी आपकी शान रखने
- 41:57के लिए मंदबुद्धि कह देता हूँ यद्यपि।
- 42:02तो बुद्धि मंद भी नहीं है। बुद्धि है ही नहीं गोबर भरा अरे
- 42:10तुम अगर आशुतोष के सही भक्त हो तो डॉक्टर्स के पास जाओ, पूछो ही
- 42:19ब्रेन डेड। कैन ही रिटर्न भूकेगा नो नॉट एट
- 42:25ऑल कभी नहीं और कभी उठेगा भी नहीं।
- 42:31आज उठता है तीन महीने में उठता है साल में उठता है कभी ऐसा हुआ है
- 42:37कभी ज़िन्दगी में ऐसा हुआ है? धरती पैसा कभी हुआ है ये धरती का
- 42:46नियम कायदा कानून तोड़ देगा। क्यों तड़ पा रहे है उसको?
- 42:53पहला गुरु है जीसको शिष्य ने। पहला गुरु है जो लाचार मोहो इसका
- 43:04नहीं टूटा इस नॉट एनलाइटन पर्सन फुल फुल लिया एनलाइटन नहीं है।
- 43:12इसका पूरा मुँह टूटा निबंधा हुआ है।
- 43:14अब ना ये जन्म ले सकता है, ना इसके शरीर को जलाते हैं लेकिन हम
- 43:22लोग क्या कर सकते हैं, सिर्फ बोल सकते हैं।
- 43:26कितनी बार बोला है? नहीं सुनते तो ठीक हमारा कोई
- 43:31निहित स्वार्थ नहीं। अगर फिर भी आप आशुतोष का ध्यान कर
- 43:37सकते हो, फिर भी आशुतोष से जिंदा होगा, ऐसी कल्पना तुम कर सकते हो,
- 43:43लेकिन होगा नहीं। कभी यही कल्पना है तुम्हारे भीतर
- 43:47से भी के भीतर। मुश्किल बड़ी है।
- 43:57रस्मे मोहब्बत ये जानता ही नहीं। वो दिल है की मानता नहीं तो इसे
- 44:21शरीर से। शुरू करना ये हार्ट बेटा ब्लॉकर्स
- 44:29दिमाग में है, बेटा। लेकिन शुरू करना पड़ेगा शरीर तुम
- 44:37सभी जो मुझे सुन रहे हो मेरे से दीक्षित हो या कभी मेरे पास आए
- 44:44हो, तुम मुझे पाओगे, मैं 45 डिग्री पे लेटा रहता हूँ हर वक्त
- 44:5045 डिग्री पे। आप मेरा आसन देखना लेटने का हर
- 44:56वक्त उसी आसन पे है उसी आसन पे पाओगे आप क्या कारण है वह आसन
- 45:03सबसे ज्यादा रेस्ट फुल आसन है। उस आसन में आपका हार्ट पूरे
- 45:12विश्राम में होता है। आप कभी आके देखना?
- 45:18बहुत से लोगों ने मुझे इस अवस्था में ही पाया।
- 45:23जब मैं आया तो यह सोचा समझा बताया हुआ।
- 45:31खोजा हुआ बहुत इन्वेंशन के बाद हमारे रिश्वों की इन्वेंशन है।
- 45:37भगवान शिव का बताएं और अगर कोई व्यक्ति हार्ट अटैक के क्रिप हो व
- 45:4345 डिग्री के ऊपर ऐसे जैसे मैं बैठता हूँ, ऐसे हो जाए।
- 45:48उसको हार्ट अटैक नहीं होगा तो बेटा ब्लॉकर्स?
- 45:58यह आपकी हृदय की गति को मंद करता है, हृदय से शुरू होता है ना के
- 46:05ब्रेन से। आप में जो तनाव है, जो चिंता है,
- 46:10जो भय है, जो उत्तेजना है जो क्रोध करते हो एडर्नलिन हार्मोन
- 46:16के कारण या कट्टी सर समझ लो इन हार्मोन के कारण।
- 46:28आप में तनाव आता है, चिड़चिड़ापन आता है, आप क्रोध करते हो, आप
- 46:37तनाव युक्त हो जाते हो, भय मानते हो, कांपते हो सारा शरीर कंपनी।
- 46:45चिंता होती है। अवसाद होता है, प्रायश्चित होता
- 46:48है। बिना किसी बात की आने वाली भविष्य
- 46:56की कल्पना करके चिंताएं पैदा करते हो, आप कहीं ऐसा न हो जाए कहीं
- 47:03ऐसा न हो जाए। इरादे बांधता हूँ, छोड़ता हूँ,
- 47:09इरादे बांधता हूँ, सोचता हूँ, छोड़ देता हूँ, कहीं ऐसा न हो जाए
- 47:19कहीं ऐसा न हो जाए। यह काँपते हुए चित्त की निशानी
- 47:25है, जिसे कृष्ण सश्यात्मा कहते हैं और कृष्ण कहते हैं, सश्यात्मा
- 47:32विनय शक्ति उसका विनाश हो जाता है क्योंकि वह ऐसा फैसला कर नहीं
- 47:38सकता। अगर तुम डिसीजन मेकर नहीं हो,
- 47:44क्विक के लिए डिसीजन मेकर तो तुम शिक्षाग्रस्त हो तो शरीर से शुरू
- 47:59करना होगा। इस आसन में बैठो जब भी कभी धन में
- 48:07विश्राम करना। जब आप पूरे लेट जाते हो और जब आप
- 48:15बैठ जाते हो, इन दोनों के मध्य में जो आसन होता है, वह आसन होता
- 48:20है जिसे जिसमें मैं लेटता हूँ, उसमें परम विसरम होता है।
- 48:27आपके शरीर के हार्ट में जो गति आती है खून की वह बड़ी शानदार
- 48:34होती है। सारे शरीर को खून मिलेगा,
- 48:40पर्याप्त मात्रा में कोई अवधान न होगा इसमें।
- 48:46व्यवधान न होगा। इसमें तो क्रिया योग करने में यह
- 48:55आसन बाधा नहीं बनता है। 110 70 का हम बीपी।
- 49:03कैसे करें पहली बात जो व्यक्ति। कोई शर्ट ले रहा है बेटा ब्लॉकर्स
- 49:16लोल फैम्ली से मेटाफोर लोल। बहुत सी नई नई खोजा हो रही है।
- 49:29उसके अंदर वह हार्ट को आराम देता है, शरीर से शुरू करना है, आप लेट
- 49:39जाओ। ऐसे ही आसन में जैसे अब भी मैं
- 49:41इसी आसन में बैठा हूँ। मैं प्रवचन भी इसी आसन में करता
- 49:45हूँ। सब स्मूथ है, आराम से घटित हो रहा
- 49:59है। सब तो उस दवाई को छोड़ें अगर आपके
- 50:14बीपी है। आप कोई भी साथ ले रहे हो, अमलउद
- 50:19पिन ले रहे हो, टनल वगैरह ले रहे हो आप बेटा ब्लॉकर्स उसको चालू
- 50:26रखो, उसको अगर एकदम से छोड़ दोगे इट्स ए डेंजरस फार यू।
- 50:38उसको नियमित लेते रहो। नियमित एक वक्त सुबह अगर आपने चाय
- 50:48पी के बीपी की गोली खानी है तो सुबह चाय पी के बीपी की गोली खा
- 50:52लो, कोई हर नहीं। आधा घंटा विश्राम करो।
- 51:03यह उन लोगों के लिए है जो दवाइयों पर डिपेंड है।
- 51:06किसी कारण से उम्र का इसमें कोई मतलब नहीं है।
- 51:16क्रिया युग करो, क्रियायुग ही भौकुंजी है।
- 51:22श्वास को लंबे खेचना नाक से खेचना श्वास को मुख से छोड़ देना, सारे
- 51:29श्वास को हाथ की आवाज़ से छोड़ देना।
- 51:36यह चोट टकरेगा दो चक्करों पे मैंने आपको बहुत बार बताया सहसरार
- 51:40मूलाधार कुंडलनी को जागृत करेगा और कुंडलनी के और सहसरार के बीच
- 51:49में जो रास्ता है उसमें अगर कोई अवरोध है उस वादा को हटा देगा।
- 51:56ये चक्र अब तक विज्ञान खोज नहीं सका।
- 51:59सहस्त्र विज्ञान खोज नहीं सका कुंडलिनी विज्ञान खोज नहीं सका बस
- 52:13सिर्फ मानता है क्योंकि मानना पड़ता है।
- 52:20विज्ञान किसी भी चीज़ को इंकार नहीं करता।
- 52:24वो कहता है इट में ऑर में नॉट बी पॉसिबल ऐसे बोलता है विज्ञान इट
- 52:31में ऑर में नॉट बी पॉसिबल? तो खोज करेंगे अगर पाएंगे सही है
- 52:39तो कहेंगे सही है अन्यथा इंकार नहीं करेंगे।
- 52:45उसकी सृजना बड़ी शानदार है। तुम एक कनका नहीं बना सकते अरे का
- 52:52और उसने विशाल। ब्राह्मण खड़े करते हैं और
- 52:58ब्राह्मण ऐसे है कि फैलते ही चले जा रहे हैं।
- 53:03तुम भी ब्राह्मण की तरह फैलने शुरू हो जाओ, बिस्तरित हो जाओ,
- 53:09अपने आप को संकीर्ण मत छोड़ो। इसलिए संकीर्ण मन का व्यक्ति कभी
- 53:14पहुँच नहीं सकता। कंजूस संकीर्ण मानसिक सवाल
- 53:22व्यक्ति नहीं पहुँच सकती क्यों? क्योंकि आप का स्वभाव जो वास्तव
- 53:29में आप हो। वह बड़ा विराट है, वह विस्तरित
- 53:34है, वह अनंत तक विस्तार है। उसका ना ओर ना चोर, ना मध्य ना
- 53:42आदि, ना अंत इतना विस्तरित है और लगातार विस्तरित होता ही चला जा
- 53:49रहा है। तो कंजूस व्यक्ति कभी नहीं
- 53:57पहुंचेगा इसलिए संतों ने कहा दान करो दान करने में तुम खोलते हो,
- 54:08यह एक साइंटिफिक मेथैड था दान करो।
- 54:15कोई गरीब देखते हो, सर्दी बहुत ज्यादा है, उसको कंबल दे दो, कोई
- 54:21भूखा है उसे खाना खिला दो कैलोरीज चाहिए शरीर को गर्म रखने के लिए?
- 54:34जरूरतमंद को उसकी जरूरत का सामान दे दो, लेकिन याद रखो वह सुबह
- 54:43अखबार में नहीं आना चाहिए। हंसो मत कि साहेब ने ऐसी सिकी में
- 54:51कॉल दी। साहेब ने बिहार के अंदर
- 54:551,25,00,000 स्त्रियों के खाते में 10,000 डाल दिए।
- 55:01यह साहब का निहित स्वार्थ है, प्रचार मत कहो।
- 55:15हमारे पूर्वजों ने कहा था कि अगर तुम्हारा दाय हाथ दान करें तो
- 55:19बाएं को पता ना तुम दान भी नहीं करते क्योंकि दान तो अपनी कमाई
- 55:28में से होता है। तुम्हारे बाप ने कुछ नहीं कमाया
- 55:31तुमने कुछ नहीं। कमाया हो तो पता बेच रहे हो, बस
- 55:38हिमालय बेच दिया, यह संस्थान बेच दिया, वह संस्थान बेच दिया और
- 55:49सिर्फ बेचते नहीं हो खरीदते भी हो इलेक्शन कमीशन खरीद लिया।
- 55:57नए पालिका खरीद ली, वह जज खरीद लिया, वह जज खरीद लिया।
- 56:01यह व्यापारियों का काम है। खरीदना और बेचन सन्तों का काम
- 56:07नहीं है। फिर तुमसे एक बात कहता हूँ, तुम
- 56:20कहते हो विकास अरे? जो घर का विकास नहीं कर सका, घर
- 56:27को छोड़ कर भाग गया जो घर में विकास नहीं कर सका।
- 56:35वो तुम्हारा क्या खाक विकास करेगा?
- 56:40जो घर से भाग गया और आकर अपनी छाती का नाप बताना शुरू कर दिया।
- 56:47वह का खाक विकास करेगा, उससे विकास की उम्मीद मत रखो।
- 56:54जहाँ विकास करना चाहिए था वहाँ विकास नहीं किया और फिर कमाल की
- 57:02बात है, समझने वालों की भी कमाल है माशाअल्लाह।
- 57:13अगर विकास पैदा नहीं हुआ तो फिर आपदा को अवसर बना दिया।
- 57:18मैंने देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया आह क्या बात है ऐसा है
- 57:26तुम्हारी तो बातें ही निराली है। मैं तो होश करने वाली हूँ।
- 57:45एक बात को ध्यान में रखना गामा रेन से युक्त व्यक्ति बहर्मुखी
- 57:52होता है और बहर्मुखी व्यक्ति दुखी होता है।
- 57:57अब हम रस पे आ जाए इसका नीच उठ निकालने पे आ जाए।
- 58:04गामा रेन से भरपूर होता है, जो बाहर मुखी होता है उसकी चपकाहटें
- 58:10बहुत जगह पे होती हैं। अंतरमुखी होना इतना सहज नहीं,
- 58:19उसके लिए क्रियाएं करो। जो व्यक्ति डेल्टा रेंज से युक्त
- 58:25है उसके प्रवचन सुनो। उसकी आवाज में आप एक जादू का वो
- 58:35जादू डेल्टा रेंज का है डेल्टा वेव्स का है।
- 58:41वो मिठास है वो आपको मोर लेगी इसलिए मोहन कहते हैं कृष्ण को वह
- 58:50मोर लेता है, खुद भी सर गयो। मोरी रे कर गयो मन्नू की चो।
- 59:17बांसुरी वारा सुध बिसरा गयो मोरी रे।
- 59:36सुध बिसरा गयो मो रे ओह काला इक बा सूरी वाला।
- 59:56इसकी पहचान क्या है? ऐसा व्यक्ति जब बोलेंगे आप मुक्त
- 1:00:00हो जाओगे। राजनीतिक जब बोलेंगे आपको निद्रा
- 1:00:07आएगी, आप बेहोश हो जाओगे, मुर्छा हो जाओगे, 2 घंटे राजनीतिक को सुन
- 1:00:11लो, बेहोश हो जाओगे। 2 घंटे संत को सुन लो, अपने भीतर
- 1:00:18उतर जाओगे, आनंदित हो जाओगे यही पहचान।
- 1:00:32इसलिए राजनीतिक सभाओं में जाना, ये इकट्ठे करने की नियत से जो
- 1:00:38तम्बू गाड़े बैठे हैं, इनको भी शांति नहीं है।
- 1:00:44समझें ना? शांति उसे मिलती है जो तृप्त होता
- 1:00:50है। और तृप्ति का कोई मेज़रमेंट बाहर
- 1:00:56से नहीं होता। आपके पास चक्रवर्ती सम्राट का
- 1:01:04खिताब भी हो सकता है। चक्रवर्ती सम्राट भी हो सकते हो
- 1:01:07तुम? और मन तुम्हारा अभी भी अतृप्त रह
- 1:01:13सकता है। तृप्ति का पैमाना तो तुम्हें
- 1:01:21अनुभव से पता चलेगा और तुम्हारे पास कुछ भी नहीं हो सकता।
- 1:01:26लेकिन तुम्हारा मनुष्य तृप्त हो सकता है।
- 1:01:32कबीर का मन तृप्त है यद्यपि उसके पास कोई हीरे जवाहरात नहीं है, बस
- 1:01:39ये है तृप्ति ही हीरे जवाहरातों से ज्यादा मूल्यवान है।
- 1:01:44अगर आप कोई ब्लड प्रेशर के लिए दवाई ले रहे हो और लोजार्टन वगैरह
- 1:01:50एम्बलॉडीपिन वगैरह या कोई भी शर्ट बेटा ब्लॉकर से ले रहे हो, किसी
- 1:01:59भी फैमिली का। तो उसको बंद मत करना।
- 1:02:06ये सीधे आपके इस इंस्ट्रूमेंट पे प्रभाव डालेगा।
- 1:02:09हार्ट हमने अगर ब्रेन के भीतर में एड्रनेलिन और कॉटी सिल्क की
- 1:02:18मात्रा को घटाना है तो सीधे सीधे। एड्रनलिन और कार्टीसोल पे काम
- 1:02:25नहीं किया जा सकता, काम किया जा सकता है इसी यंत्र पर शरीर पे तो
- 1:02:34खून को पंप कौन करता है? हार्ट तो हमें शरीर से शुरू करना
- 1:02:41होगा। आप जो भी हर्ट ले रहे हो बेटा
- 1:02:48ब्लॉकर से ले रहे हो। हार्ट गति को नियंत्रित करने के
- 1:02:53लिए उस दवाई को लेने के बाद आप आधा घंटा आराम से।
- 1:03:01इस 45 डिग्री जैसे मैं कहता हूँ 45 डिग्री के ऊपर लेट जाओ, आराम
- 1:03:08से लेट जाओ, शरीर को ढीला छोड़ दो, रिलैक्स छोड़ दो 45 डिग्री।
- 1:03:15मैंने आपको बताया कि जब आप लेटे होते हो पीठ के बल।
- 1:03:22और जब आप बैठे होते हो चौकड़ी मार्ग इन दोनों के बीच की जो
- 1:03:28अवस्था है वो 45 डिग्री है। अर्ध लेटा हुआ व्यक्ति ना वो पूरी
- 1:03:37तरह से लेटा है ना वो पूरी तरह से बैठा है।
- 1:03:41इस अवस्था में बैठ जाओ। यह सर्वोत्तम आसन है और ध्यान
- 1:03:49रखना बहुत से ऐसे प्रश्न आए क्या हम शीष, शासन वगैरह करें या न
- 1:03:55करें? दिमाग तेज हो जाता है।
- 1:03:58ब्लड प्रेशर में भूलकर भी आप हाई ब्लड प्रेशर में शीशा से मत कर
- 1:04:03लेना हेमरेज हो जाएगा ब्रेन हेमरेज, गलती मत खा जाना ये पहले
- 1:04:12से ही ब्लड हार्ट। इतना तेजी से प्रवाहित कर रहा है।
- 1:04:20हाई ब्लड प्रेशर में ना श्रवण आसन करना, ना शीष आसन करना, ना ही
- 1:04:30चक्रासन करना कोई आसन न करो, जिससे।
- 1:04:36फिर नीचे जाए फिर ऊपर आए 45 डिग्री पे मैं बैठता हूँ फिर आधा
- 1:04:43ऊपर होता है सिर को कोशिश करना। तकिया नीचे रखो अगर आपको।
- 1:04:53कोई रीड की हड्डी की प्रॉब्लम है, मड़की की प्रॉब्लम है, उन बातों
- 1:04:57को छोड़कर वे समस्याएं और हैं। अगर आपको मन का वगैरह की कोई
- 1:05:03प्रॉब्लम नहीं है, तो आप 45 डिग्री पर लेटो आराम से इन
- 1:05:18दवाइयों को मत छोड़ें। शरीर कितने दिन का मेहमान है, कोई
- 1:05:25150 साल ज्यादा नहीं होता, इसको सहजता से चलाते रहो और ये खोजें।
- 1:05:36जो साइंटिस्टों ने वैज्ञानिक ने राते राते जाग के आपके लिए यह भी
- 1:05:41परमात्मा के ही थे। इनकी मेहनत को बेकार मत होने दो।
- 1:05:48इन दवाइयों का उपयोग करके अगर आपका बीपी नॉर्मल रहता है, 120 80
- 1:05:54भी रहता है। वो भी ठीक है, अपने आप ही घटा
- 1:06:03लेगा डेल्टा। इसमें अल्फ़ा रेंज निकलेगी,
- 1:06:09अल्फ़ा वेव्स निकलेगी 120 80 में। आप सहसता में हो के इसको नॉर्मल
- 1:06:16बीपी कहते हैं डॉक्टर्स लोग लेकिन अगर 70110 हो तो क्या बात है
- 1:06:26आध्यात्मिकता के लिए कह रहा हूँ संसार के लिए नहीं, संसार के लिए
- 1:06:30तो 120 80 चलेगा। मैं तो 85125 ही चलता है।
- 1:06:42ऊपर वाला थोड़ा सा ज्यादा भी हो जाए तो चलेगा, 130 तक भी चलेगा,
- 1:06:48लेकिन ज्यादा चिंता नहीं करना है आपको?
- 1:06:52चिंता से एडेनोलिन फिर ज्यादा होता है घाटिसल बढ़ता है, तो आपने
- 1:06:58सीधे सीधे शरीर से शुरू करना है। शरीर को आराम की अवस्था में ले
- 1:07:06आओ, आधा घंटा आप लेटो और सारे दिन में जब भी विश्राम के।
- 1:07:10लम्हे आपको मिले आप इसीया से में लेटो, खाना खा जाओ, इसीया से में
- 1:07:14लेटो, सीधे मटल सीधा मत लेटो, 45 डिग्री पे लेटो, सारा शरीर ठीक से
- 1:07:23वर्क करेगा नक्से शिखा तक। बिल्कुल सीधा मत लेटो, उससे
- 1:07:31ज्यादा बढ़िया है इस आसन में लेट जाना।
- 1:07:3345 डिग्री में अगर कहीं आपको आशंका हो के हार्ट अटैक होने जा
- 1:07:39रहा है, पेन बहुत घना है तो 45 डिग्री में तुरंत हो जाओ।
- 1:07:49गहरे श्वास लो इसलिए मैं कहता हूँ एक शब्द है बी योगी राम राम जपले
- 1:08:00अभी फिर भी तो राम राम होती है तो अभिक्र्य योग कर लो, लंबे सांस ले
- 1:08:06लो, लंबे सांस छोड़ दो। बाद में भी तो जब तकलीफ आएगी फिर
- 1:08:12लंबे साँस लोगे बीच बीच में आप दुकान पे बैठे हो, कंप्यूटर चला
- 1:08:22रहे हो, जैसे ही याद आये तुम्हें लम्बा साँस कहें तो।
- 1:08:29और लगातार पांच चार सांस लंबे खेचो दिन में किसी को पता नहीं
- 1:08:35चलेगा आपके सांस के खींचने और आराम से छोड़ दो मुँह से फिर आवाज
- 1:08:41मत करो, आराम से छोड़ दो। कंप्यूटर चला रहे हो, ऑफिस में
- 1:08:46बैठे हो, बहुत से लोग बैठे हैं, कोई बात नहीं।
- 1:08:49लम्बा सांस खींचो, आराम से छोड़ दो, उस सांस को आवाज ना पता चले
- 1:08:59क्योंकि सांस ले रहा है, कोई क्रिया योग कर रहा है।
- 1:09:02ये भी क्रिया योग? लम्बा सांस लेना और छोड़ देना,
- 1:09:08यही तो तुम भूल गए हो कोई 2 मिनट में एक श्वास लेने का फॉर्मूला
- 1:09:15वगैरह पागलपन मत करना, ये कुछ नहीं होता है।
- 1:09:21इनसे डेल्टा रेंज नहीं निकलते। और हमने डेल्टा को पडूस करना है।
- 1:09:32आमतौर से व्यक्ति के भीतर जो ज्यादा गर्मजोशी वाला व्यक्ति है,
- 1:09:41उसमें गामा निकलेंगे। गामा से बीटा निकलेंगे, बीटा से
- 1:09:47अल्फा निकलेंगे। अल्फा से थीटा निकलेंगे, थीटा से
- 1:09:51बिलकुल गहरे में आ जाओगे तो डेल्टा निकलेंगे।
- 1:09:55डेल्टा में साइकिल आधे से लेके चार तक होता है।
- 1:10:02लेकिन आधे से नीचे कैसे जाना है? वो थोड़ा सा मसला गुरु के साहित्य
- 1:10:08में करो। यहीं जरूरत पड़ती है गुरु की
- 1:10:16सिर्फ गुरु इन्हीं लम्हों के लिए बनाया जाता है।
- 1:10:20वहाँ कोई शास्त्र काम न पड़ेगा वहाँ कोई तुम्हारी गीता वहाँ कोई
- 1:10:28तुम्हारी अष्टावक्र गीता, उपनिषद, वेद काम न पड़ेगा, जीवंत गुरु काम
- 1:10:37पड़ेगा। जीवंत गुरु तुम्हें दिखेगा अच्छी
- 1:10:43तरह से हमारे ओरा को देखेगा, वह मास्टर है इन चीजों का और तुरंत
- 1:10:52वैसा ही उपचार तुम्हें बता देगा। इसलिए मैं कहता हूँ।
- 1:10:58पत्थरों में टक्करें मारने की बजाय ये शेरां वाली है, गधे वाली
- 1:11:04है, कुमारांवाड़ी है इनके भीतर वक्त खराब करने के बजाय चोले को
- 1:11:09खराब मत करो? बड़ी मुश्किल से मनुष्य का जुमा
- 1:11:13मिलता है। तुम पागलपन में उलझ गए हो, मैं
- 1:11:18विशेषता हिंदू धर्म तो विशेषता उलझ गया, आज सभी धर्मों में ऐसा
- 1:11:22है। सभी धर्मों ने अपने मूल स्वरूपों
- 1:11:27को उद्यम स्वरूपों को समाप्त कर दिया।
- 1:11:31सभी धर्म विकृत हो गए हैं। अपने मूल स्रोत से हट गए।
- 1:11:40सिकद्रम में रुमाले चढ़े सिकद्रम में पाठ्यक्रम, पाठ्य का महत्त्व
- 1:11:46पता नहीं लोग कॉम्पिटिशन में लग गए।
- 1:11:52मैं तो 28 मिनट में पूरी जब भी पढ़ लेता हूँ वो कहता है मैं तो
- 1:11:56पूरे 18 मिनट में पढ़ लेता हूँ भाई तुम तो 8 मिनट में पढ़ लोगे
- 1:12:04लेकिन बात तो ये है कि जब एक शब्द को मैं व्यख्यात करता हूँ और तीन।
- 1:12:11पीरियड ले लेता हूँ तीन पीरियड्स एक ओंकार सत्य नाम कर्तापुरक इन
- 1:12:18नौ शब्दों को विख्यात करने के लिए कितनी वीडियो बोल देता हूँ?
- 1:12:26क्यों इनको पीना है? यह है रस है।
- 1:12:32ये शब्द नहीं है, ये रस है, मैं कहता हूँ जप मत करो, रिपीट मत
- 1:12:42करो, रिपीट करने से कुछ नहीं होगा इससे अच्छा तो तुम भजन गा लो ना
- 1:12:48चलो। ज्यादा अच्छा है कि तुम हल्का
- 1:12:57संगीत सुन लो, वह तुम्हारी रेंज को हल्के हल्के घटाएगा।
- 1:13:04जब भी ऐसा लगे कि गामा रेंज ज्यादा हो गई।
- 1:13:12गामा रेंज। जैसे खान सर में गामा रेंज।
- 1:13:17इनको चाहिए कि अपनी रेंज को थोड़ी सी घटाएं, अपनी वेव्स को थोड़ा कम
- 1:13:24करें। गामा से अल्फा तक लेके आए।
- 1:13:31अल्फा से नीचे अगर जा सके तो ज्यादा बढ़िया है।
- 1:13:36इनको क्रिया योग करना चाहिए, फिर पाएंगे।
- 1:13:42अपने भीतर बहुत फर्क आ जाएगा, बदलाव आ जाएगा।
- 1:13:47ट्रांसफॉर्मेशन का। तो पूछा है कि हम 110 70 कैसे
- 1:13:57लेके आएं? 110 70 ऐसे लेके आओ आप अगर आप
- 1:14:02दवाई लेते हो, कोई भी ब्लड प्रेशर की दवाई लेते हो या बेटा ब्लॉकर्स
- 1:14:10लेते हो, वो लेना शुरू। हार्ट गति अगर बढ़े तो आप दवाई
- 1:14:19लो। हार्ट गति अगर नॉर्मल से बहुत
- 1:14:25ज्यादा हो गई है, 72 होती है नॉर्मल 72 से 70।
- 1:14:316560 कोई बात नहीं चलेगा, ज्यादा बढ़िया है और अगर 72 से ऊपर 100
- 1:14:44तक हो गया कोई बात नहीं चलेगा, लेकिन 150, 130।
- 1:14:50140 120 ये ज्यादा है तो तुरंत बेटा ब्लॉक कर लो डॉक्टर के पास
- 1:15:02और ये यंत्र को बचाना हमारा कर्तव्य अगर ये यंत्र बचेगा।
- 1:15:09तो हम अपने आखिरी अंजाम मंजिल तक पहुँचेंगे हमारी आखिरी मंजिल है
- 1:15:16रास बांध करना, उस अमृत को पी लेना जो ईश्वर ने हमारे लिए बनाया
- 1:15:23है, गधा इसको नहीं पी सकता। बिल्ली इसको नहीं पी सकते।
- 1:15:30शेर इसको नहीं पी सकते। एक मनुष्य का ही चूल्हा है जो
- 1:15:35इसको पी सकता है और आप पत्थरों में टक्कर मार रहे हो।
- 1:15:41आप शेरों के ऊपर पत्थर की मूर्ति के ऊपर।
- 1:15:47मूर्ति को बैठाकर उसकी पूजा करने में आज नहीं कल हिंदू रोज़ पागल
- 1:15:57होता चला गया और आज अपनी पागलपन की एक्स्ट्रीम पर आ गया।
- 1:16:04बस अब एक झटका। वह पागल हो जाएगा।
- 1:16:13मैं एक चुटकुला सुनाया चुटकुला नहीं सच्चाई है बजरंगबली की बात
- 1:16:22मैंने कहा बजरंगबली। जब आते हैं तो मैं कहता हूँ अपना
- 1:16:25गोठ न उधर रख दो, खाता पीता तो कुछ है नहीं तो टिशू दुखते हैं तो
- 1:16:35बजरंगबली थोड़े से अच्छे से दबा देते हैं तो मैं कहता हूँ मेरा
- 1:16:40भाई थोड़ा सा पांव दबा के जाना। ऐसे में।
- 1:16:44ठीक बाबा तो घोड़ना उधर रख दो, उधर रख देते तो बड़े लोगों का
- 1:16:50ऐतराज हुआ। मैंने कहा भाई तुम्हें क्यों
- 1:16:52अतराज़ हो? तुम बजरंगबली हो क्या कहता है?
- 1:16:55नहीं, वो हमारा ईस्ट है। मैं कहा फिर अपने ईस्ट से पूछ लो
- 1:16:59कि वो जाके बाबा के पाम दबा के आता है कि नहीं?
- 1:17:05अब यहाँ मुश्किल खड़ी होती है। बजरंगबली के भक्तों ने बजरंगबली
- 1:17:09के भी देखा है। अब क्या करें बिचारे फंस गए ना तो
- 1:17:16बजरंगबली से पूछ सकते हैं। ना ही मेरी बातों पे यकीन होता
- 1:17:23है। इसे कहते हैं और इनका विनाश
- 1:17:27अवश्यम भाभी है ओके ना तो मेरी बात पे यकीन है ये कुछ खतरा नहीं
- 1:17:36पीता नहीं आता नहीं जाता। इसके डोले भी नहीं है, इसके मसल
- 1:17:40भी नहीं। यही कहता है क्या बजरंगबली को मैं
- 1:17:44कहता हूँ थोड़ा दबा के जाना भाई क्या बड़ा सेवक व्यक्ति है ऐसा
- 1:17:50सेवक देवता आपने कभी देखा कभी नहीं देखा देवता से दही रोग जला
- 1:17:56जमाते हैं। देवता श्रद्धा ही अवतार घोषित
- 1:18:00होने की सुअवसर की तलाश में रहते हैं कि कब सुअवसर मिल जाए।
- 1:18:09राम मेरे से छोटे हो जाएं। राम की ऊँगली पकड़कर मैं चलूं,
- 1:18:14चलो तो मैं रामलीला के दरबार में छोड़ के आऊँ?
- 1:18:18लोगों की कामना है। ये नहीं ऐसे दाल नहीं गलेगी भाई
- 1:18:27तुम्हें अपने भीतर जाना पड़ेगा, यही है एक रास्ता मुश्किल है
- 1:18:33क्योंकि जो तुमने। किया वो तुम्हारे भीतर है, वो
- 1:18:38तुम्हे याद आएगा, भीतर जाओगे, रिकॉर्डर पड़ा है, फिर याद आएगा
- 1:18:42किस किस को हमने सताया, किस किस को हमने तकलीफ दी, क्या कुछ नहीं
- 1:18:48किया क्या क्या ना सहे। हमने सितम आपकी खाते क्या क्या न
- 1:19:04सहे हमने जुलम आपकी खाते। ये जान भी जाएगी सनम आपकी खातिर
- 1:19:23ये जान भी जाएगी सनम आपकी खात। ये जान भी जाएगी सनम आपकी खातिर
- 1:19:37ट्रंप को आप नोबेल दे दो, शांति का चुप करके बैठ जाएगा हल मुझसे
- 1:19:45पूछ लिया करो ऐसे चुटकी मैं हल दे दूंगा।
- 1:19:51ट्रंप को नोबेल दे दो, शांति का ये उपद्रव करना छोड़ देगा
- 1:19:56वेन्ज़ुएला के राष्ट्रपति को छोड़ दो, भीतर से यही तमन्ना है इसको
- 1:20:06नोबेल दे दो यदि कोई काम नहीं करता है शांति वाले।
- 1:20:10काम तो तानाशाह हूँ जैसे और तानाशाही भी विकृत मानसिकता वाला
- 1:20:14तानाशाह मैंने पहले दिन ही कहा था इस आदमी की तस्वीर को देख कर या
- 1:20:19तो ये जेल से भाग्य आया है मेरे शब्दों को रिकॉलेक्ट करना या जेल
- 1:20:26में जाने की। तैयारी कर रहा है।
- 1:20:28जेल में जाने की तैयारी कर रहा है।
- 1:20:32विकृत मानसिकता के लोग हैं, असल में प्रयोजन कुछ और है।
- 1:20:38यह शांति का नोबेल चाहता है। इसको दे दो ये घर बैठ जाएगा।
- 1:20:42आराम से ऐसे होती हैं समस्याएं हल क्यों धरती को मारने पे तुले हो
- 1:20:49क्या है? नोबेल देने वालों का क्या बिगड़
- 1:20:51जाएगा एक पागल को दे दो क्या खास बात है नोबेल का कुछ नहीं घटेगा,
- 1:20:58दुनिया से बच जाएगी, थोड़ा सा मुझसे पूछ लिया करो भाई।
- 1:21:03इनका इलाज बड़ा शुभम है। और एक जेब कतरा भर रहा है।
- 1:21:08हमारे हिंदुस्तान में, बंदर के हाथ में हमने उस तरह पकड़ा दिया
- 1:21:14है। ये जेब में ही काटे और क्या
- 1:21:19करेगा? तो इसको आप अवतार घोषित कर दो,
- 1:21:26यही तमन्ना है इसकी मैंने इनके भीतर जाके इनके अनकॉन्शियस
- 1:21:31कलेक्टिव में जाके देख लिया है। ये अवतार घोषित होना चाहते हैं
- 1:21:36इनकी इच्छा को पूरी कर दो की भाई आप ही हो अवतार मुझे कोई जरूरत
- 1:21:41नहीं है अवतार घोषित होने की। मेरी कोई तमन्ना बाकी नहीं रही,
- 1:21:46यहाँ तक कि जीने की कोई तमन्ना बाकी नहीं, जिनकी तमन्ना है उनको
- 1:21:54घोषित कर दो ये दुनिया बच जाएगी विनाश से।
- 1:22:02सच पूछो तो इनका मानसिक उपचार होना चाहिए।
- 1:22:08ये सैकड़ों जिकरी विकृत मानसिकता वाले लोग हैं।
- 1:22:13इनको सैक्री के पास ले के जाऊ की अच्छे से मेरे जैसे सैक्री के
- 1:22:17पास। अपने भीतर जाके देखे गए इनका असली
- 1:22:20रोग क्या है? असली रोग कुछ और हुआ करते हैं,
- 1:22:23तुम्हें नहीं पता यहाँ घरों में पड़े कपड़े आग लग जाते हैं, घरों
- 1:22:29में पड़े नोट फुक जाते हैं, लोग मेरे पास आते हैं, यहाँ लोगों में
- 1:22:36भूत प्रेत आ जाते हैं। सारी उम्र तंग करते हैं, क्या
- 1:22:43किया जाए? ये खुद ऑटो हिपनोटिक लोग हैं ये
- 1:22:51खुद ही इन्होंने अपने आप को ऑटो हिपनोटाइज़ कर लिया।
- 1:22:56और उसी के गर्त में दलदल में फंसे हुए लोग जिंदगी को खत्म कर देंगे
- 1:23:02तो बंदर के हाथ में आपने उस तरह दे दिया और जो जेल जाने का
- 1:23:09काबिलियत रखता था, व्यक्ति उसके हाथ में आपने परमाणु बम दे दिया।
- 1:23:17और ऐसा मूर्ख लो तो तुम जैसा क्या करना है तुमने?
- 1:23:21यूक्रेन बेचारा है, छोटा सा मुल्क है, इसको आजादी से जीनो जियो और
- 1:23:26जीने दो। यही सिद्धांत है हमारा मुख्य
- 1:23:30द्वार का। जियो और जीने दो और अगर कोई छोटे
- 1:23:36छोटे सर्टिफिकेट्स लेकर उपद्रव छोड़ देता है तो उसको
- 1:23:42सर्टिफिकेट्स दे दो क्या हर्ज़ा इसको भारत रत्न दे दो, देखो ना
- 1:23:48बैठ गए ना लाल कृष्ण। भारत रत्न मिल का बस ठीक है, दैट
- 1:23:53एस ऑल ऐसे ही जो अवतार घोषित होना चाहता है आप मूल चीजों को गहरे
- 1:24:02में जाकर परखा करो। इनकी वास्तविक वसना क्या है?
- 1:24:06ये होती तो वासना है। अब कोई व्यक्ति अवतार घोषित होना
- 1:24:11चाहता है, हो सकता नहीं क्योंकि अवतार घोषित होना कोई खला जी का
- 1:24:16बढ़त थोड़ी अपने भीतर जाकर अपने अहं को आग लगानी होती है।
- 1:24:21यहाँ तो अहंम को बढ़ावा दिया जाता है।
- 1:24:24यहाँ तो कहते हैं मैं हूँ तो मुमकिन है और पल का भरोसा कोई न।
- 1:24:30ऐसी तेरी जान होय बनते देया मिट्टी देया पुतला तू कदा करे मान
- 1:24:36होय पल दा भरोसा कोई ना ऐसी तेरी जान होय उड़ जान प्राण तेरे।
- 1:24:47फिर क्यों नहीं बोल दा होमे वाली कुंजियाँ?
- 1:24:56तू फिर क्यों निकाल दा? होमे वाली गुंजिया तू फिर क्यों
- 1:25:09निकालदा किथे तेरी आँखड़ा के किथे अभिमान?
- 1:25:17ओय, पलदा भरोसा। कोई ना ऐसी तेरी जान ओए मिट्टी दे
- 1:25:29आ को तू बंदे आ। बेशक वासना को पूरी कर दो।
- 1:25:44ये टिक के घर पे बैठ जाएंगे और वासना इनकी बड़ी छोटी सी हैं।
- 1:25:54मुश्किल से मुश्किल काम है अपने अंत में उतर जाना।
- 1:25:57वह तो बड़ा मुश्किल है। उसमें तो श्रम की आहूत देनी होती
- 1:26:03है। वहाँ परवाने की तरह जलना होता है।
- 1:26:08क्षमा के भीतर आहू तो होना होता है, ये तो ये नहीं कर सकते।
- 1:26:17इन्होंने उल्टा मेथड चुन लिया है। के सत्य को कल्पना की तरह दिखा दो
- 1:26:28तो ये तो नहीं माने की तुम ही मान जाओ तुम कह दो ठीक है बे बन गया,
- 1:26:33एम्स बन गया, अच्छे दिन आ गए। अरे भाई अरे प्या बढ़ रहा है देखो
- 1:26:48कल 58 था आज 90 से ऊपर अरे प्या बढ़ा फिर डर पड़ा अरे प्या बढ़ा
- 1:26:56फिर। इनकी वासनाओं को पूरी करता हूँ।
- 1:27:08एक सही मार्ग है वासनाओं को खत्म करने का।
- 1:27:11वो वासनाएं खत्म होती है। वासनाएं दुष्टपूर है, बुरी तो
- 1:27:18नहीं की जा सकती। लेकिन वास नहीं इनकी अधूरी रह
- 1:27:25जाएंगे। ये भटकते फिर रहे इनको सर्टिफिकेट
- 1:27:28दे दो इनकी पूजा करो इनके जीते जी मंत्र बना दो स्टेडियम का नाम रख
- 1:27:38दिया मंत्र का नाम एक मूर्ति लगा दो उसमें।
- 1:27:43पूजा कर लिया करो इनके सामने छाती 56 से बढ़कर अभी है नहीं वैसे 143
- 1:27:51वहाँ भी झूठ बोल दिया यह समझते हैं झूठ से चाहे झूठ बोलने से
- 1:27:59सत्य हो जाएगा। यही गफलत है, यही गलतफहमी है।
- 1:28:04झूठ बोलने से कभी 43 शप्पन हुआ करती है।
- 1:28:07क्या शरीर से शुरू करना होगा क्रिया योग करो, मेरी आवाज सुनो।
- 1:28:30इस आवाज में डेल्टा रंगों से युक्त वो वेब आपको ग्रसित कर
- 1:28:37लेंगे। आप भीतर जाओगे और भीतर जाना शुरू
- 1:28:41है। अगर भटकना चाहते हो, दुखी होना
- 1:28:46चाहते हो तो बादल बाहर जाओ। अगर आनंद का रस पीना चाहते हो तो
- 1:28:51अपने अंत में उतर जाओ अंत में उतरने का ये डांग है क्रिया योग
- 1:28:57करो ना कुछ करने में बैठ जाओ कुछ ना करो, ना जाप, ना तपन पाठ ना
- 1:29:03पूजन, किसी प्रकार का कोई अनुष्ठान मत करो।
- 1:29:08यह पागल बना है न गायत्रीय अनुष्ठान करो, कोई अनुष्ठान मत
- 1:29:20करो, अनुष्ठान करना है तो ये करो कि आप अपने भीतर उतरो।
- 1:29:31कुछ न करो कुछ न करने में तुम अपने भीतर जाओगे, पकड़ हटा दो,
- 1:29:38तुम अपने भीतर चले जाओगे, लोग मुझसे पूछ लेते हैं अपने भीतर
- 1:29:42कैसे जाए? मैं 1000 बार आपको बता चुका हूँ
- 1:29:44लो फिर बता देता हूँ, ये देखो हमारी चेतना हमने ऐसे उजा रखी है।
- 1:29:51हमने पदार्थों में ऐसे ऐसे चिपकाट कर रखी है यह चेतना, यह चेतना
- 1:30:03हमने पदार्थों से इस चेतना को उलझा लिया है।
- 1:30:09यह चेतना अपने अंतः में कैसी जाएगी?
- 1:30:12चिपकाहटी हैं ये उंगलियों ने पकड़ रखा है, इनको तो उंगलियों की पकड़
- 1:30:18को हटा दो। यह चेतना स्वयं में लुढ़क जाएगी।
- 1:30:24एक यह कह गई। आपने चिपकाटे हटाई, बाहर से चेतना
- 1:30:34को भीतर बैठा चुंबक जैसे ग्रेविटेशन ने इसको खींच लिया,
- 1:30:41वैसे ही हमारे भीतर एक बहुत बड़ा चुंबक बैठा विराजमान।
- 1:30:48जैसे ही आप अपनी पकड़ को छोड़ोगे बाहर से वह चुंबक आपको जल्द से
- 1:30:54खेंचलेगा क्षण भी नहीं लगेगा। तो अगर तुम अभी तक खींचे नहीं गए
- 1:31:00तो एक ही कारण है महज कि तुमने अपनी चबकाहटों को छोड़ा नहीं।
- 1:31:08बस सिर्फ एक है, कहीं ना कहीं चुपकाहट आपकी बनी हुई है उसे देखो
- 1:31:15चुपकाहट कहाँ है तुम्हें कोई ना कोई मिल जाएगा ऐसा मोह का केंद्र
- 1:31:22जहाँ से। छूटती नहीं है का फिर मुँह को लगी
- 1:31:27हुई है वहाँ से हटा लो अपनी चेतना और तुम पाओगे तुम्हारी चेतना
- 1:31:37तुम्हारी बूंद उस समुद्र में दम से घर गई।
- 1:31:43और तुम पाओगे, मैं बूंद से सागर हो गया, तुम उसे ऐसे न ढूंढ पाओगे
- 1:32:00तुम उसमें मर्ज हो जाओ बाहर से सारी।
- 1:32:06चेतना की चपकाहटों को छोड़ दो ये फॉर्मूला है साइंटिफिक फॉर्मूलेशन
- 1:32:17अपनी चपकाहटों को जैसे ही तुम हटाओगे वह चेतना जो तुमने पकड़
- 1:32:24रखी। उसको चुम्बक खींच लेगा।
- 1:32:28यही फ़ॉर्मूला है, बड़ा सिंपल फ़ॉर्मूला है।
- 1:32:32एक बात तो ये है कि तुमने चिपकाटे ऐसे बना रखे हैं।
- 1:32:37किसी ने लड्डू गोपाल में चिपकाटे बना रखे हैं, किसी ने शेरावाली
- 1:32:41में, किसी में। प्रत्येक व्यक्ति ने प्रत्येक
- 1:32:51धर्म ने अपनी चेतना को किसी न किसी चपकाहट से जोड़ लिया है।
- 1:33:01यही कारण है कि प्रत्येक व्यक्ति धरती का आज दुखी है।
- 1:33:09वह बेहर्मुखी हो जाता है। इन चिपकाहटों के कारण अगर तुम इन
- 1:33:16चपकाहटों को छोड़ दो उसी क्षण वह भीतर बैठा चुम्बक तुम्हें खींच
- 1:33:23लेगा अपनी तरफ। जैसे ग्रैविटेशन फोर्स चीजों को
- 1:33:28खेंच लेता है, वैसे ही तुम्हारी चेतना को, परम चेतना का वो स्वरूप
- 1:33:36सागर बूंद को खेंच लेता है। तुम ज़रा छोड़ के देखो, अपने आप
- 1:33:44को संतो ने बड़ी कोशिश की है अलग अलग से प्रयास किए तुम्हें ढंग
- 1:33:52दिए तुम अपने आप को उसके हाथों में छोड़ दो, यह भी एक फॉर्मूला
- 1:33:58था बस छोड़ दो। धन छोड़ दो, पकड़ छोड़ दो, कुछ
- 1:34:06अर्न करने की युक्ति छोड़ दो, तुम छोड़ दो क्योंकि पकड़ रखी है
- 1:34:12तुमने सारे संसार की ऑब्जेक्ट्स यही आपके दुख का कारण है बाबा नान
- 1:34:19कहते हैं। जैसा वह करता है उसके करने पे
- 1:34:27छोड़ दो, ना उसे कहते हैं जो करता है ठीक करता है तुम्हारे भले के
- 1:34:33लिए करता है सब तुम्हें छोड़ने के लिए कह रहे हैं डाइरेक्टली
- 1:34:37इनडैरेक्टली। पकड़ को छोड़ दो कोई कहता है दान
- 1:34:42करो, पैसे को छोड़ दो कोई कहता है मत उलझो इकट्ठा मत करो अपरिग्रह
- 1:34:54कोई कहता भोग को छोड़ दो, कोई कहता अभिमान को छोड़ दो।
- 1:35:01लेकिन मूल सूत्र ये है कि तुम छोड़ न सीख जाओ, छोड़ न छिपकाहट
- 1:35:07को हटा देना है। जैसे ही आप छोड़ोगे मुट्ठी खुल गई
- 1:35:14वो जो पकड़ रखी है चेतना। उसको खेंच लेगा।
- 1:35:18भीतर बैठा हुआ चुम्बक, वह पोषण ऑफ लव तुम लव हो बूंद प्यार की बूंद
- 1:35:29हो तुम और वह प्यार का सागर है तुम ज़रा अपने आप को छोड़ो।
- 1:35:37तुमने बांध रखा है तुम पाओगे कि तुम लुढ़क गए एक पल में लुढ़क गए,
- 1:35:44अगले क्षण भी स्वादिष्ट हो सकते हो तुम और इसके लिए तुम अगर आज तक
- 1:35:50नहीं पहुंचे जन्मो पे जन्म तुम खराब कर रहे हो तो तुम ही
- 1:35:54जिम्मेदार हो। अभी छोड़ दो, आज ही छोड़ दो, छोड़
- 1:36:01दो बस यही सूत्र है,