Latest / Baba ji Vijay Vats / 23 Feb 26 - परमात्मा और उसकी लीला का रहस्य!! मृत्यु के बाद की प्रक्रिया और मोह तोड़ने का अनूठा विज्ञान
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- 0:17शबनम यूएसए बाबा आपने कहा यह सब उसके लिए लाये?
- 0:36आपके समझाने का ढंग सरलीकृत व्याख्या उदाहरण परिपूष्ठ करती कि
- 0:50आपकी कथन सर्वता सत्य। लेकिन मैं एक प्रश्न पूछना
- 0:59चाहूंगा, कृपया ब्लॉक मत कर दें कि परमात्मा जो खेलता है।
- 1:17क्या वह ईमानदारी से खेलता है या बेईमानी से खेलता है?
- 1:24लजवाब प्रश्न है पुत्र, ये सब खेल है पुषा पुत्री?
- 1:37फिर खेल को ईमानदारी से खेलता है कि वे ईमान से खेलता है उत्तरी आज
- 1:49तक का सबसे शानदार सवाल है। जब कोई दूसरा हुई ना तो बेईमानी
- 2:06करेगा। कैसे तुम कल्पना करो कि तुम लूटो,
- 2:15खेल रहे हो, कैरम खेल रहे हो? इधर भी तुम हो उधर भी तुम हो चहुं
- 2:28और तुम ही खेल रहे हो और तुम वो कोली उठाते हो दाने झटकते हो घरा
- 2:38देते हो आ जाते हैं छः आ जाता है एक।
- 2:45मुझे ये बताओ उस वक्त तुम क्या करोगे क्योंकि चारों तरफ तुम बैठी
- 2:58हो, बेटा। तुम उत्तर देने से तो चूक जाती हो
- 3:09कि तुम अपने आप को एक तरफ़ा समझ लेती हो जहाँ बैठी हो लेकिन
- 3:13परमात्मा एक जगह पे नहीं है, चारों ओर वही खेल रहा है तो वही
- 3:21मने कैसे करेगा जिसके हिस्से में छे आएगा?
- 3:25उसके हिस्से में छह आएगा, जिसके हिस्से में एक आएगा एक आएगा जो
- 3:29पहले पहुंचेगा पहले पहुंचेगा क्योंकि दूसरा जनक कोई नहीं है।
- 3:42तुम आराम से शांत क्षणों में इस प्रश्न को अपने ऊपर इम्प्लिमेंट
- 3:47करके देखना तुम पाओगी कि बेमानी किस्से करनी है क्यों करनी है और
- 3:57फिर हारोगे भी तो तुम हारोगे। जीतोगे तो भी तुम जीतोगे, अब इसको
- 4:10मैं तुम्हें उदाहरणों से समझता हूँ।
- 4:17पिछले जन्म में मैं गाँधी। मेरी वजह से लीडरशिप से
- 4:29अहिंसात्मक प्रयोग सफल रहा। यह भी उसका खेल था।
- 4:42उसने मुझे ऐसा ही खिलाना था और गाँधी अंतिम क्षण में इस बात की
- 4:52थोड़ी सी झलक पा चूके थे कि करने वाला मैं नहीं हूँ।
- 4:57यह कोई और सत्ता हिला रही है मुझे।
- 5:03गाँधी ने अंतिम वक्त में सतोरे के वो झलकें देखनी थी जो अज्ञात हाथ
- 5:10कठपुतलियों को निशाते हैं बड़े अफसोस की वार्ता है।
- 5:19हम गुथियों को शार्प करने के बजाय गुथियों की दिशा में देते हैं।
- 5:33कल ही मैं एक बहस सुन रहा था। गाँधी जी जब मरने लगे उन्होंने हे
- 5:41राम नहीं कहा। मैंने कहा फिर क्या हो गया?
- 5:46नहीं कहा तो नहीं कहा होगा, वैसे तो कहा है तीन बार ही कहा है।
- 5:59लेकिन नहीं कहा होगा चलो हम मान लेते हैं लेकिन क्या हीराम नहीं
- 6:04कहने से गॉड से फांसी से बच पाए गॉड से का तो फांसी लगी है।
- 6:15गोडसे को उसके किए हुए कर्मों का जो परमात्मा नहीं कराई, लीला के
- 6:22रूप में उसे लटकाया कि नहीं लटकाया और अगर गोडसे किसी तरह बच
- 6:31जाते तो ध्यान रखना। कर्म हमारे भीतर फीड होते है।
- 6:41इतना ईमानदार सिस्टम है उसका भीतर का इकोसिस्टम सुपर सेंसिटिव
- 6:48कंप्यूटर है। हमारे भीतर हम सोचते हैं, हम कहते
- 6:55हैं हम करते हैं। मनसा बाचा कर्मणा तीनों चीजें
- 7:01एक्यूरेट रिकॉर्ड होते हैं। इसलिए मैं कहता हूँ ये सीजेआई की
- 7:09कुर्सी पर बैठने वाले लोग काबिल तो होते हैं।
- 7:18लेकिन अंधे होते हैं ठीक किया, समझदार लोगों की बनावट थी जो
- 7:27न्याय की देवी की आँखों पर पट्टी थी, लेकिन उसका अर्थ गलत ले लिया
- 7:33जाता है। अगर तुम बच भी गए तो तुम्हारी
- 7:47ज़िन्दगी सारी ज़िन्दगी भर बचते बचाते रहोगे वो भी क्या खा के
- 7:53ज़िन्दगी हो? प्राइम मिनिस्टर अपनी छाती छुड़ी
- 8:02रखकर उसे दंड मिला है। 40 लोगों की कतार में बंधन के बीच
- 8:10में चलना और प्रोटोकोल का पालन करना।
- 8:16यह सबसे बड़ा बनता है। हम तो आजाद घूमते है जब चाहे उठे
- 8:24गौशाला चले गए, जब चाहे उठे नहर के किनारे टहलने लगे जब चाहे
- 8:30बाजार निकल गए जब चाहे कहीं चले गए।
- 8:40प्रोटोकोल क्या है इसको मनेजमेंट का रूप दे देते हो, लेकिन यह
- 8:49वास्तव में एक बंधन है। 40 लोग आपके आपके ऊपर खड़े।
- 9:00तुम बंदे हुए हो एक ज़िन्दगी को बचाने की इतनी बड़ी कीमत आजादी के
- 9:10आजादी की कीमत पर तुम प्राइम मिनिस्टर बनते हो।
- 9:15तुम अपनी इच्छा से कहीं क्या नहीं सकते?
- 9:21तुम्हें प्रोटोकोल का सारा स्केडुयूल निभाना पड़ता है।
- 9:31यह भी क्या जिंदगी हुई, यह तो गुलामी हो गया।
- 9:39कबीर बैठे अपने शिष्यों को समझा रहे थे, सामने से एक सेठ गाय गाय
- 9:49बनती हुई थी, उसको लेकर जा रहा था हाथ में रस्सा।
- 9:56शिष्यों से पूछने लगे शिष्य ज़रा देखो तो समय यह गायबंधी कि यह सेठ
- 10:10बंद? तो शिष्यों ने गौर से कबीर की तरफ
- 10:15देखा कि ठीक ठाक तो है हम अक्सर ऐसे ही देखते हैं।
- 10:20संतों की तरफ ठीक ठाक तो है, कोई पागलपन का दौरा वगैरह तो नहीं पड़
- 10:28गया? अब साफ दिखता है कि गाय के गले
- 10:34में बंधन है और उसका मालिक के हाथ में रस्सा है तो बंधी तो गाय ही
- 10:45हो गई। जिसकी आँखें हैं वो साफ देख सकता
- 10:49है लेकिन नहीं यहाँ आँखों वाले भी अंधे होते हैं।
- 10:56शिष्य बोलिक वीर जी यह तो साफ देख रहा है कि गाय बोलती है कृत्याछक।
- 11:06चलो मेरे साथ तो उसने पास जाके बागीद गंभीर बड़े प्रसिद्ध हुआ
- 11:17करते थे। अपने जमाने में सेठ ने कहा कि
- 11:20थोड़ा सा रस्सा देना, मेरे को रस्सा खुद पकड़ लिया और गाय को
- 11:26डरा के भगा दिया। गाय तो भागना चाहती थी जैसे तुम
- 11:35चाहते हो भागना लेकिन ये साउथ सात राउंड की तुम्हारी सेफ्टी काश ये
- 11:45ना होते। और तुम मरने से डरते हो क्यों
- 11:55तुम्हे पता है, कैनेडा का राष्ट्रपति ट्रूडो साइकिल पर जाता
- 12:01था और कोई शिफ्ट ही नहीं होती थी उसके आस पास।
- 12:05क्योंकि जब जिंदगी में दुश्मनी पाली ना तो उसको किस्से खतरा है।
- 12:13जब उसने किसी को खतरा दिया ही ना हो तो उसके लिए कौन खतरा बनेगा?
- 12:22अब्बू शिंजय बोल रहे हैं। भाषण दे रहे हैं।
- 12:26पीछे से कोई गोली मार देता है। निश्चित ही कोई उसका बिगाड़ा होगा
- 12:31अन्यथा कौन किसी को गोली मारता है?
- 12:36जापान के प्राइम मिनिस्टर की बात है।
- 12:44तो गाय तो भागना ही चाहती थी। देखिए पशु तक भी स्वतंत्र रहना
- 12:53चाहते हैं। तुम मानव होकर भी परतंत्र हो रहे
- 13:00हो। तुमने चाही थी आजादी, मिल गई
- 13:07गुलामी ये हमारी बदनसीबी जो नहीं। तो और क्या है है ये हमारी
- 13:32बदनसीबी? जो नहीं तो और क्या है के उसी के
- 13:46हो गए हम जो न हो सका। हमरा राहगर्दिशों में हरदम।
- 14:06मेरे। इश्क का सितारा।
- 14:13कभी ठग मगाई कश्ती कभी खो गया, किनारा रह गए दिशाओं में हरदम।
- 14:34पशु भी स्वतंत्र होना चाहता है। इंसान तो परम स्वतंत्रता के लिए
- 14:40ही आया, कहाँ उलझ गए हो? तुम सिर्फ तुम्हें सच्चा गुरु ने
- 14:52मिला। सब पाखंडी, खुद बंधे हुए किसी
- 14:58वासना में, किसी लोभ में, काम में, क्रोध, अहंकार में मधु,
- 15:04मत्सर में, विषयों में सब बंधे हुए हैं।
- 15:11कौन बताएगा? कि तुम यहाँ आजाद होने के लिए आए
- 15:16हो और जो बताएगा कि तुम आजाद होने के लिए आए मुक्त होने के लिए आए,
- 15:27वह खुद ही तुम्हें पांच नाम दे के बांध लेगा।
- 15:32आजादी का मतलब है आजादी किसी भी शब्द से भी आजादी बंधन चाहे रस्से
- 15:46का हो, चाहे जंजीरों का हो और जंजीरें चाहे।
- 15:50लोहे की हो, चाहे सोने की हो, ज़ंजीरें ज़ंजीरें हो, तुम बड़े
- 15:58प्यारे प्यारे नाम देते हैं ये लो पांच नाम ले लो, मुक्त हो जाओगे,
- 16:08तुम सभी नासमझ लो। भला नाम लेने से कभी कोई मुक्त
- 16:15हुआ है? अरे जो बंधन है वो खोलने से मुक्त
- 16:22होता है, पहले ये देखो बंधन क्या है?
- 16:27बंधन रस्से का है, रस्से को खोल दो, सीधी सी बात है लेकिन गुरूओं
- 16:34ने उलझा दिया और उलझा क्यों दिया? ये खुद ही उलझे हुए हैं।
- 16:40इनके गुरू उलझे हुए थे उनके गुरू उलझे हुए थे।
- 16:44सब एक नंबर के गुलाम। गुलामी आगे आगे बढ़ती गई।
- 16:52यह एक रोग की तरह गुलामी ने गुलाम पैदा करने शुरू कर दिए और आज तुम
- 17:00गुलामी के आलम में जी रहे हो। संख्या कितनी भी बढ़ा लो।
- 17:05लेकिन वह संख्या गुलामों की होगी। आजाद व्यक्ति को तुमने कभी देखा
- 17:12ही नहीं। आजाद व्यक्ति जो स्वतंत्रता की
- 17:17पलांघें बढ़ता है, उस मधोसी का आजम तुमने कभी चखा ही नहीं?
- 17:25उस दायरे में तुम कभी गए ही नहीं तो गाय भाग गए वो सेठ पीछे पीछे
- 17:42कबीर कहता है शिशु कौन बंधा है? गाय तो भागने जाती है।
- 17:50बंदा है सेठ के मैं शाम को दूध, मेरे बच्चे, शाम को दूध, मेरा
- 17:56परिवार शाम को दूध कहाँ से पिएगा, बंदा कौन था सेठ देख कौन रहा था?
- 18:07गाय हर चीज़ जो देखी जाती है वो सत्य हो जरूर नहीं है।
- 18:15कई बार कई बार बंधन गहरे होते हैं।
- 18:19इन आँखों से नहीं दिखाई पड़ते, चर्म चक्षुओं से नहीं दिखाई
- 18:23पड़ते। देववय चक्षुओं से दिखाई पड़ते।
- 18:29और तुम्हारे भी तरह ऐसे ही शक्षु हैं दीप वे शक्षु जिन से देखकर
- 18:37तुमने अपनी गुलामी को तोड़ना है, हाँ, तो मैं तुम्हारी गुलामी
- 18:42तोड़ता हूँ। और तुम में जब भूरे भूरे गालियां
- 18:49निकालते हो, मेरे भतीजे का अक्सीडेंट हो गया था किसी ने बजाज
- 19:02स्कूटर होता था, उस वक्त उसके बीच में मार दिया।
- 19:06माथे में चोट आई। खून बहने लगा।
- 19:11पास ही ही डॉक्टर था। डॉक्टर सादीलाल पुरी अब तो
- 19:15स्वर्गवास हो गए। हाँ सभी स्वर्ग में जाते हैं,
- 19:25यहीं रह जाते हैं भाई स्वर्ग कोई है ही नहीं रहेंगे कहाँ?
- 19:30ना ही कोई नर्क है यहीं फिर रहे हैं सब भी देखिये तुम्हारे आशुतोष
- 19:34भी यहीं हैं, बांधे रखो तुम उनका मुँह तोड़ने नहीं दोगे।
- 19:42उनके शरीर के साथ बंधन है, बेचारा मुक्त हुआ नहीं।
- 19:48किस जन्म का बदला ले रहे हो? तुम माँ बाप को फूंक आते हो उसके
- 19:56बाद गुरु की मौत के बाद कितने ही शिष्यों ने अपने माँ, बाप, बहन,
- 20:02भाई को खोया होगा? उसको कभी शीशे के अंदर नहीं रखा।
- 20:09लेकिन अपने गुरु को किस जमाने के कर्मों का तुम फल दे रहे हो, उसको
- 20:16शीशे में क्यों लटका के रखा हुआ है, तोड़ो उसका मुँह इसलिए जब
- 20:25तुम। देव जिक्षो को पा जाओगे तो तुम
- 20:30देखोगे। अधिकतर हमारे आस पास मुसलमानी
- 20:40रोही होंगी या ईसाईयत के रोहे होंगे।
- 20:44क्यों शरीर का मुँह बना रहा? बहुत देर लग जाता है, शरीर से
- 20:52मुँह तोड़ते तोड़ते इसलिए जैन धर्म सबसे शानदार धर्म है।
- 20:56रस्म जो था बस 1 दिन जलाये अगले दिन राख ठंडी हो गई, तीसरे दिन
- 21:06फूल चुग लिए। चौथे दिन भोग डाल दिया।
- 21:13चार दिनों के बाद तुम्हारी तरफ से तुम नफर फंड हुए और वह आत्मा भी
- 21:23देखेगी, ये तो भूल गए। फिर उसे याद आएगा जनम मरण का खेल
- 21:41है सब। ये सपना बिसरा दे जन्म मरण का मेल
- 22:01है सपना। ये सपना बिसरा गए कोई न संग मरे
- 22:21मनरे। तू काहे ना धीरधर ये निरमोहि मोह
- 22:39न जाने। जिनका मोप कर मन रे।
- 22:54फिर समझती हूँ, उसे यह तो शरीरों के संबंध थे।
- 23:03शरीर गया तो उसे याद आता है। प्रथम बार हिंदू धर्म में बड़ी
- 23:09रस्म थी, कपाल को फोड़ देना, आग लगा देना और वो भी अपने पुत्र के
- 23:17द्वारा। वो सूत हैं देखो जिसे मैंने इतना
- 23:23प्यार देके पाला छू छू मेरे छू छू और यही मेरे लट्ठमार बहुत सी
- 23:34चेस्टाइम की हिंदू धर्म ने सनातन धर्म में हिंदू धर्म तो बिगडाई
- 23:39लोग। ये सारे कर्मकाठ इसीलिए किए गए कि
- 23:48व्यक्ति की आत्मा दूसरी से बाहर चली गई।
- 23:53अगर 70 साल जीया तो 70 साल का मुँह है और 1 अप्रैल में तो
- 23:59छूटेगा ही। और कितने साल हम साथ रहे तो फिर
- 24:06इन क्रियाएं के द्वारा उस आत्मा का मुँह तोड़ने की कोशिश की गई
- 24:13जला दिया गया। कपाल तोड़ दिया गया।
- 24:26ऐसी ऐसी क्रियाएं कि हमने बेदर्दों जैसी बाप सोचता होंगे ये
- 24:35कैसा बेटा? अरे इतना बेदर्द कपाल टूट रहा है
- 24:47जिसने कभी जरूरत ही नहीं की थी देखने की।
- 24:51आज वो सिर्फ उड़ रहा है। आज वो आग लगा रहा है, मेरे अपने
- 25:02और थोड़ी देर का सपना है, आग धो धो करके जलेगी और सब एक एक तनखा
- 25:09देके वापस घर चले जाएंगे और कहीं के मुहूते को भोग के आए स्नान
- 25:15करना। एक पल भर में तुम त्याज्य हो जाते
- 25:20हो, एक पल भर में तुम इंसान से भूत हो जाते हो, ये है तुम्हारी
- 25:27वास्तविकता तो इन। वास्तविकता को कल्पनाओं को जो
- 25:36तुमने वास्तविकताएं समझनी हैं, इनको तोड़ने के लिए सनातन ने
- 25:40प्रयास किया। जल्दी विदा कर दो जल्दी इसकी कोई
- 25:46भी चीज़ को कपड़े लत्ते दान कर दो सारे।
- 25:52इस चारपाई पे सोता था बिस्तरा वगैरह सब उठा दो कलू भी न रहे,
- 25:58कोई शेष कोई याद बाकी न रहे। बड़ी बेदर्दी से काम लेना पड़ता
- 26:05है फिर कहीं आदमी का। मोह टूट पाता है और प्रकृति का ये
- 26:15असुर है। जब तक आत्मा अपना मोह न तोड़ेगी
- 26:19तब तक प्रकृति उसको अगला गर्भ मुहिया न कराएगी।
- 26:25हाँ, इसको आप सर्किट में चलो प्रकृति तब तक।
- 26:31तुम्हें अगला घर को उपलब्ध नहीं कराती, जब तक के दे ही का मोह
- 26:38नहीं टूट जाता है और इसलिए मुसलमान तुम्हें आसपास फिरेंगे,
- 26:44देखेंगे तुम्हें दिखेंगे सब ईसाई लोग, इन इन परंपराएं गलत बना लो।
- 26:54चटपट होना चाहिए था। उसके शरीर के मरते ही उसके शरीर
- 26:58की सारी कलूज मटा दो कलूज मटा दो मेरे पुत्र का निधन हुआ।
- 27:16पर मैं सभी वास्तविकता से वाकफ था।
- 27:19मुझे लोग बेदर्दी भी कह देते हैं। मैं अपने पुत्र के अर्थी के साथ
- 27:25शमशान में नहीं गया। क्यों?
- 27:30यह भी एक मुँह तोड़ने का ढंग था? यह कैसा?
- 27:36पिता? मुझे आग देने के लिए भी नहीं आया।
- 27:42छोटे भाई ने आग दी, पिता से मोह टूट गया और माता पिता से ही मोह
- 27:49ज्यादा होता। ना तो शमशान के बाहर बैठ जाती है।
- 27:56मैं गया ही नहीं जिससे इसका मौके जल्दी टूट जाए क्योंकि फिर से मैं
- 28:09इसी घर में उसे लाना चाहता था और ये जरूरी था।
- 28:13एक कवायद करना फिर अंतिम अरदास हुई।
- 28:1913 दिनों के बाद सब लोग आए थे। शर्मा जी को जाकर मुख दिखाएंगे कि
- 28:28हम आपके दुख में सांझे हैं। लेकिन मैं गया ही नहीं हूँ, लोग
- 28:36कहें हम आये थे, आप मिले नहीं, मैं कोई जवाब न देता, लेकिन यह
- 28:47मेरे भीतर की प्रोसेसिंग थी उस आत्मा के लिए।
- 28:52जो चली गई है जो मेरे से ये कैसा बात न तो अर्थी की संख्या न अंतिम
- 29:01अरदास में आए जवानी भर के लोग आए, बाहर से लोग आ गए, पिता जी ने
- 29:09जन्म दिया पुन आया। यह एक प्रोसेसिंग मैं जमाने की
- 29:15फिक्र नहीं किया करता। मैं सत्य की फिक्र किया करता हूँ
- 29:24और वो ही बच्चा। फिर आज मैं अपने पौत्र के रूप
- 29:28में। यहाँ अब दर्द है, मोह टूटा अन्यथा
- 29:36मोह बहुत दूरी से टूटता लेकिन ततक्षण मोह टूटा।
- 29:46हम तो रोते हैं, चिल्लाते हैं, बेलखते हैं, मैंने ऐसा कुछ नहीं
- 29:50किया, एक आंसू मेरे नहीं आया। आत्मा अलगाव फील करे, आत्मा लगाव
- 29:59फील न करे। आत्मा के मोह के तोड़ने का ये एक
- 30:06ढंग निराला है यद्यपि, लेकिन अनूठा है।
- 30:17पुत्र की शादी हुई, मैं शादी में गया पूछ रहा हूँ।
- 30:30पुत्र के साथ सर कहने लगे कि आपके पिता नहीं आए?
- 30:39पुत्र ने जो भी जवाब दिया खैर मुझे नहीं पता लेकिन बस इतना सा
- 30:44ही तो वो कभी जाय नहीं कर सकता सर मुझे कोई कह देता अगर तुम्हारी
- 30:50तुम नहीं किसीकेगी तुम्हारी कौन आएगा?
- 30:55मैंने कहा मैं मैं कब इन्वैट करता हूँ किसी को मत आये आत्मा से
- 31:03बेलगाव दिखाने की प्रक्रिया तो आत्मा भी अपने मुँह को छोड़ देती
- 31:10है छोड़ो। ये भी कैसा अगली यात्रा शुरू कर
- 31:15देते हैं और जल्दी से प्रकृति उसे दूसरा गर्भ उपलब्ध करवा देती है।
- 31:22ये भीतर के मेकेनिज्म है। परमात्मा खेल खेलता है।
- 31:31बड़ी ईमानदारी खेलता है चहु कुटों से वो खेलता है और खुद ही खेलता
- 31:38है क्योंकि वह अकेला है एकोंका बस वह ही है।
- 31:55यह तुम जानोगे तब जब तुम उस तल पर पहुँच जाओगे, उससे पहले तो सिर्फ
- 32:00मान सकते हो तुम मेरी आवाज़ का रस देखकर मेरी आनंद से भरी हुई अरे
- 32:10सीधी बातों को सुनकर। मेरे दो तल हैं।
- 32:20वैसे तो मेरे अनेक तल हैं, मैं कहीं भी खड़ा हो जाऊं लेकिन दो तल
- 32:24हैं दो छोरों की तरह, एक तल, मेरा ये जहाँ राम किशन कहते हैं माँ।
- 32:32केशव चन्द्र को ठीक कर दे मैं तेरा छेहने का प्रशाद भर दूंगा और
- 32:41एक तल वो जहाँ जाकर वो विशाल और विराट हो जाते हैं और कहते हैं जो
- 32:48राम और जो कृष्ण। दोनों का संयोग रामकृष्णा मैं हूँ
- 32:55अहिम्ब्रह्मास्म ये दो तल है लेकिन एक ही व्यक्ति के दो तल है।
- 33:04यह शरीर तो एक ढांचा है। इसके भीतर चेतना की तल जब सहस्त्र
- 33:10में आ जाता है तो अपनी अपनी सीमित शक्ति में केंद्रित हो जाता है और
- 33:18जब अपने तल से भीतर नीचे उतरता है तो अपनी सीमित कान्शस्नस में।
- 33:25ठहर जाता है ये दो तल तुम अपनी सीमित कॉन्शसनेस में ठहरे हो, ये
- 33:39सिर्फ तुम भिखारियों की तरह त्रितरों की तरह विखमंगों की तरह
- 33:43भिक्षा मात्रो पात्र उठाए हुए मांग रहे हो।
- 33:49प्रेमिका प्रेमी से प्रेमी प्रेमिका से प्रेमिका मांग रहा है
- 33:57है दोनों के पास नहीं। प्रेम कोई ऐसी चीज़ नहीं जो बांटी
- 34:05जा सके जो ट्रांसफर की जा सके। प्रेम वो चीज़ है जो पी जाती है
- 34:12और प्रेमी पी सकता है। हो सकता है प्रेमी का ना पीए और
- 34:16प्रेमी का पी सकती है। हो सकता है प्रेमी ना पीए।
- 34:22फिर राँजा के अंदर हीर ने पी लिया।
- 34:25राजा नहीं पी पाया। लैला मजनू के अंदर मजनू ने पी
- 34:31लिया लैला नहीं पी पाई। तेदो नी मिनु अखो रंझा तेदो नी
- 34:47मिनु अखो रंझा हिर न खे को रांझण रांझण कर दी मेहता अबे रांझण होय।
- 34:59मैं ही रांझा हो गईं फ़ासला मिट गया, एक हो गया दैत्य समाप्त, हुआ
- 35:11अद्वैत लेकिन मजनू। रात की अंधेरी अमावस्या की रातों
- 35:24में थपेड़ों को गले से लगातार रोता हूँ सोच लैला तुम कहाँ हो
- 35:37लैला? और राजा कहते हैं इसे पकड़ के
- 35:44लेके आओ कौन है ये मेरी नींदें खराब करता है मुझे भी मेरी मासूम
- 35:48का याद आ जाती है ये रोना बड़ा भयंकर है योगी आदित्यनाथ की तरह
- 35:54कभी रोते हुए देखना इससे बैठा रोना मैंने कभी किसी का देखा ही।
- 36:02गोर से देखना तुम जब ये रोता हूँ ना तो इसको गोर से देखना बिल्कुल
- 36:13ऐसे ही रोता था समझ में तो राजा ने कैसे पकड़ के लेके आओ पकड़ के
- 36:20लेके। हाँ, बोल क्या तकलीफ है कौन है ये
- 36:26लैला बता दिया क्या लैला बुला ली गई राजा था।
- 36:39राजा ने लैला की तरफ देखा कुछ खास तो न था काली कलूटी कोई नैन नक्ष
- 36:46भी नहीं इतने कोई आँखों में चमक धमक में नहीं थे लेकिन दिल क्या
- 36:54करें जब किसी को? किसी से प्यार हो जा।
- 37:09कहते रे काली कलूटी है, मैंने देख ली मैं पारखी हूँ।
- 37:15अरे तेरे को सच बताता हूँ मैंने कितनी छोकरिया उठा ली आस पास से
- 37:21सभी कंडोम में मैं ही हूँ तुम ऐसा मत करो जो ठीक लगती है, मैं कह
- 37:31देता हूँ ऑर्डर कर देता हूँ लाओ इसको उठा लो।
- 37:36इतनी लड़कियां ऐसी थोड़े गायब होती हैं।
- 37:45इन्हीं को एपिस्टीन कार्ड में ले जाया जाता है।
- 37:50यही तुम्हारी बेटियां हैं, यही तुम्हारी बहनें यही तुम्हारी।
- 37:58रिश्तेदार है तो राजा ने ऊपर से नीचे तक देखा ये है लैला लैला को
- 38:12घर भेज दिया था मजनू को बुलाया गया।
- 38:19कहते रे मजनूं तेरा दिमाग ठीक है कहते जी हाँ कहते रे लड़की मैंने
- 38:27बनाई थी रैला अरे ये कोई लड़की है तुझे लड़की का तुझे लड़की को
- 38:34देखने का तरीका ही नहीं। हम उस्ताद हैं मास्टर मास्टर्स,
- 38:41हमसे पूछो वो मत ऐसा करो अरे कुछ भी तो नहीं।
- 38:53उसका एक दाँत तो बाहर हुआ आया हुआ है, तुमने ढूंढी भी तो डूबा भी तो
- 39:00की तो डूबा। छोड़ दे।
- 39:07मैंने बोला की स्पेशल देखा उसे नहीं है कुछ वो तो देख नहीं होगी
- 39:12मैंने तू रो ही जाता है इतनी बुरी तरीके से।
- 39:20और मुझे तुम पे तरस आता है, देखो मैंने एक से एक सुंदर लड़कियां
- 39:24यहाँ से उठा लीं, आसपास ही छोड़ी ही नहीं कोई सब एक जगह पे टप्पू
- 39:32पे इकट्ठे कर रही हूँ मैं तेरे पिता ऐसा तह ले तू ऐसा कर।
- 39:39तुम मेरे हरम में चला जाओ, वह जो लड़की तेरे को अच्छी लगे, छोटी
- 39:45बड़ी कुछ जो चाहे चुन ले, चाहे मेरी महारानी ही चुन ले, कोई बात
- 39:50नहीं मुझे तुम पर सरस हुआ जाता है जो रोता हुआ ना मुझसे देखा नहीं
- 39:56जाता। भजन कहता ठीक है, ओह रानियाँ तो
- 40:15बहुत थीं, लड़कियाँ बहुत थीं, राजकुमारियाँ बहुत थीं, उठा लीं,
- 40:20राजा था भाई कुछ भी करे। टेक्स्ट लगाए, घटाए बढ़ाए,
- 40:26तुम्हें गुमराह करे, कुछ भी करे राजा है, कोई एक्टिंग फेक्टिंग
- 40:40फेक्टिंग करे तुम्हें मन नहीं होगा।
- 40:43बस जब मैंने कह दिया तुम्हें मन नहीं होगा।
- 40:48लोगों ने प्रांत में फोल्डिंग लोगों ने मोबाइल फोड़ लिए।
- 40:53लोगों ने चकली विलेन फोड़ लिए। कोरोना को भगाने के लिए हालांकि
- 41:00किसी साइंटिस्ट ने ये कहानी थी, लेकिन फिर भी हमारे शहंशाह ही
- 41:06आलम। से ज्यादा बढ़िया साइंटिस्ट और
- 41:09कौन है जमाने में तो लोगों ने पता नहीं क्या क्या नुकसान कर लिया।
- 41:17अपने लोगों ने टेलीविज़न उठाकर भटक दिया।
- 41:21ये ले अगर कुछ फोड़ने तोड़ने से करो ना भागता है तो हम अपना फोड़
- 41:25देते हैं सब कुछ। एक एक करके सभी लड़कियों को देखा।
- 41:36सभी को हरम में 2 घंटे लग गए। इतनी लड़कियां उठाई होती बरी पड़ी
- 41:40थी। बस ये नहीं पता आपने घर वाली उसने
- 41:51छोड़ी कर रखी आ गया है राजा के पास राजा बोला
- 42:06बोर। कौन सी लड़की ठीक लगी उसको भेज
- 42:11देता हूँ अभी भेज देता हूँ यहाँ फेरे वेरे कुछ नहीं होते ये सब
- 42:18दुकानदारियां हैं 5510 ₹10,00,000 फेरों के ले लेते हैं कभी गणेश
- 42:23आया तुम्हें पता है गणेश का बार कितना?
- 42:281200 क्विंटल बार है उसका और तुम छोटी सी पटड़ी रख देते हो इतनी सी
- 42:36और गणेश जी का वहन करते हो वकृतुंडे माहकाय सूर्यकोटि
- 42:40समप्रभा निर्भय घनम कुरुम। लेकिन गणेश मत आयो मत आयो, शंकर
- 42:55आग लग जाती है। तुम किसको बुद्धू बना रहे हो?
- 43:06सभी को बुलाते हैं। आता वाता कुछ भी नहीं बस सिर्फ इस
- 43:13लोभी, लालची पंडित की निगाहें तुम्हारी दक्षिणा मेरा बेटा मुझसे
- 43:26कहने लगा पापा ये पंडित बार बार कह रहा था।
- 43:35कि गऊ दान का संकल्प, गऊ दान का संकल्प तो मैं तो ज्ञानी तो मेरा
- 43:39छोटा भाई हो गया था, मैंने कहा भाई तू फिर ये करवा दे, कोई बात
- 43:49नहीं मैं करवाता। और तू एक्सपीरियंस्ड भी है?
- 43:55उसने बच्चों की शादी कर रखी है तो उसने फिर ये करवा दिया और बार बार
- 44:03के गौदान का संकल्प। और व्हाई ₹10 रह सकते?
- 44:09मैंने कहा, ₹10 में गाय आती है, लेकिन लोभी गुरु लालची ठेला दोनों
- 44:17नर्क में ठेलुम ठेला आगे उसको भी पता है कैसी?
- 44:23कहु ये सब बहाने है पाखंड। ₹10 रख देता, दूसरे भाई भी थे।
- 44:32चाचा जीके भी थे, वो भी अपनी तरफ से रखते थे।
- 44:38जानते सब हैं कि ₹10 में गऊ नहीं आती।
- 44:42खैर ये गऊ की बात मैं आपको बाद में अलग से बताऊँगा।
- 44:46गऊ दान का संकल्प ब्राह्मण को क्यों दिया जाता था?
- 44:54असल में ये उन लोगों के लिए था। जिनके पास जिनके बच्चों के पास
- 45:03दूध पीने को गऊ का दूध पीने को नहीं था, उन बच्चों के लिए यह गऊ
- 45:11दान दिया जाता था इस गऊ के पीछे तो बड़े बड़े संग्राम हुए गुरु
- 45:19द्रौण। और ध्रुप्रदा महाराज का गऊ के
- 45:24पीछे ही करे शिवा दुश्मनी पड़ी बता दो चलो गुरु द्रोण बेचारे
- 45:37गरीब थे, उसका पुत्र था स्वत्था में।
- 45:42शस्त्र विद्या सीखाता था, अन्नपूर्ण था, ईमानदार व्यक्ति
- 45:47था, दानव वगैरह तब होता नहीं था और होता था तो ब्राह्मण मांगते
- 45:55नहीं थे तो शस्त्र विद्या सिखाते। और राजबुल के घरानी से सारी
- 46:03सामग्रियां आ जाती है तो मैं थोड़ा समय बता दू लोगों को शायद
- 46:09पता न हो जब सीता वाल्मीकि आश्रम में रुकी हुई थी।
- 46:16तो सारा सामान सामग्री वाल्मीकि आश्रम में अयोध्या से भगवान राम
- 46:22भेजते थे, भगवान राम अपने ही बच्चों के लिए और वहाँ आश्रम में
- 46:34पलने वाले बच्चे बच्चियों के लिए और गुरु वाल्मीकि के लिए?
- 46:39माता के लिए भेजते थे खर्चा, सब देते थे भगवान राम भाई बात तो
- 46:49निष्ठुरता की होती है खर्चा अयोध्या से जाता था सारा सामान सब
- 46:57मटेरियल खाने पीने का सब। और जब लवणा सुर को मारने गए
- 47:02शत्रुघण उस वक्त शत्रुघण वाल्मीकि के आश्रम में ही रुके थे,
- 47:11इत्तेफाकन पर रुके हुए थे और उसी रात सीता ने दो पुत्रों को जन्म
- 47:17दिया लगभग। और शत्रुगण ने लभनाशुर को मारकर
- 47:22उसके राज्य को आधिपति में लेकर जब वापस गए अयोध्या तो भगवान राम को
- 47:30यह बताया कि सीता ने दो पुत्र को जन्म दिया है।
- 47:37खुशी तो हुई होगी तो जैन ब्राह्मणों के पास उनके बच्चों के
- 47:52लिए दूध नहीं होता था और बच्चों के लिए ही नहीं, बूढ़ों के लिए भी
- 47:58सभी उम्र के लोगों के लिए गऊ का दूध।
- 48:03सर्वोत्तम आहार है। मुझे 14 वर्ष हो गया।
- 48:1024 मई को 14 वर्ष हो जाएंगे। शायद जहाँ तक मेरा अस्टिमेट है
- 48:16गिना विना तो मैं नहीं करता। और बहुत बड़े बड़े डॉक्टर मेरे
- 48:31पास आते हैं। मेरे सी से भईया मुझे कहती चलेगा
- 48:34नहीं बाबा शरीर को संभालो, बस ये 1 साल डेढ़ साल इससे ज्यादा नहीं
- 48:44चलेगा। लेकिन आज 14 सालों हो गए और मैं
- 48:49बोल रहा हूँ वो भी जानते हैं। परिवार भी जानता है।
- 48:55परिवार तो किसी दुविधा में है कि इसको शक्ति कहाँ से मिलती है।
- 49:07तो खुदा की बातें खुदा ही जानें। लाखों ही पंडित करोड़ों ही सेन
- 49:18शरीर के तंतुओं को अगर गउ का दूध मिलता रहे।
- 49:25सर्व हितकारी है और सिर्फ गऊ का दूत देखिये।
- 49:30मैं अपने जीवन पर साक्षात प्रैक्टिकल बताया करता हूँ,
- 49:34दूसरों का अनुभव नहीं, मेरा खुद का अनुभव 14 वर्ष से जीवित हूँ और
- 49:40कुछ खाता नहीं। यह कोई अजूबा नहीं है।
- 49:48गऊ का दूध अमृत है इसीलिए गऊ को बचाना प्रथम नैतिक कर्तव्य था।
- 49:58राजा का जो न इंद्रा ने माना न किसी भी राजा ने माना।
- 50:07आज विश्व का दो नंबर का या एक नंबर का गोमांस का निर्यातक है।
- 50:13भारत तो मोशों की बातें मानते हो, वह तो अव्वल दर्जे का मूर्खता।
- 50:24सिर्फ एनलाइटन था, अपने आप को जानता था, बाकी तो कुछ नहीं जानता
- 50:28था। लोक सूचनाओं में, व्यावहारिक जीवन
- 50:35में उसे कुछ भी तो पता नहीं था। व्यावहारिक जीवन में उसका अनुदमन
- 50:42मत करना छूट जाओगे। उसी की तरह तुम्हें जहर का
- 50:45इन्जेक्शन लगवा के मरना पड़ेगा। अंतिम वेला कितनी कष्टकारी थी,
- 50:50उसकी तुम्हें पता है। उसने डॉक्टर से कहा कि मुझे जहर
- 50:55का इन्जेक्शन लगा दो, मैं तड़प रहा हूँ, कोई क्या करे ऐसे वक्त।
- 51:05तो ओशो की बातों को सांसारिक रूप में अगर बोले तो मत सुना करो,
- 51:13उन्हें कुछ नहीं पता, वो सिर्फ माँ की जगह पाई जो जानता है।
- 51:22देखो इस्तेमाल कर रहा हूँ, मैंने पिया है खुद के अनुभव से मैं बता
- 51:26रहा हूँ और ओशो एनलाइटन थे, खुद को जानते थे, परमात्मा को नहीं
- 51:35जानते थे, बुद्धि की तरह थे, बिल्कुल।
- 51:38इसलिए तुम औषों को किसी जगह पे कहते हुए भी पाओगे कि मैं अपने
- 51:42आपको बुध के करीब पाता हूँ ठीक भी है ईमानदार लेकिन मसखरा मजाजी
- 51:51बहुत उनकी बातों को इतनी गंभीरता से मत लिया करो।
- 52:01गऊ का दूध अमृत है, रसायन है, द्रोण गए, राजा ध्रुपद के पास
- 52:07बचपन में इकट्ठे पड़ते थे। जैसे कृष्ण और सुदाम एक ही आश्रम
- 52:14में थे। बच्चे तो बच्चे होते है, बच्चों
- 52:27का मन शीघ्र ही मिल जाता है, शीघ्र ही द्वेष कर लेता है, कोमल
- 52:33होते है स्वभाव जब बड़े हुए तो ध्रुपद तो राजा बन गया।
- 52:41और द्रोण गुरुगन क्या अब उसके घर भीष्म क्षमा करना, उसके घर
- 52:48अश्वथम्मा के पीने के लिए दूध नहीं था?
- 52:53अश्वथम्मा के पिता जी, मैं दूध दो मेरे को।
- 52:59गुरु द्रोण ने पूछा सोचा कि ध्रुपद मेरा बचपन का मित्र है,
- 53:06जैसे सुदामा ने वसुंधरा ने कह दिया सुदामा से कि जाओ, मांग लो
- 53:13द्वारकाधीश। तो वैसे ही द्रवण भी चल पड़े।
- 53:21ध्रुपद के पास जाकर मांगा हे मित्र मेरे बच्चे दूध के बिना
- 53:29भूखे हैं दूध आपको पता है परमबल शादी होता है, दूध जीवन है और गाय
- 53:36का दूध। अगर कहीं राठी गाय का दूध तुम्हें
- 53:41मिल जाए इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ गउ की रक्षा सर्वोपरि है।
- 53:49इन मूर्खों की बातों में मत आना गउ रक्षा।
- 53:58हम जिसे सुपर पावर कहते हैं 16 कला संपूर या 64 कलाएं सम्पूर्ण
- 54:05संसार वो गो पालक थे, उनका नाम ही गोपाल रखा गया।
- 54:12गौओं को। पहली बात तो गऊ के आस पास 10 मीटर
- 54:19के घेरे में कुछ ऐसी रेंजेस प्रवाहित होती हैं।
- 54:24वहाँ बैठने से तुम्हें बड़ी शांति मिलेंगे, वहाँ कलह नहीं होगा।
- 54:30जीस घर में गऊ बंदी होगी। उसके आस पास के लोग आपस में
- 54:36लड़ेंगे नहीं। धैर्यवान में गऊ के शरीर में कहाँ
- 54:45इतनी देवता, 33,00,00,000 देवता बस ये सिर्फ सिम्बोलिक
- 54:49रेप्रज़ेन्टेशन्स थे। गौ के शरीर से वो तरंगें निकलती
- 54:59हैं, आसानी जो तरंगों को आपका शरीर आपका दिमाग पी जाता है और
- 55:07शांत हो जाता है जब दिमाग शांत होगा।
- 55:11तो सब शांत हो जायेगा। तुम्हारे दिमाग के अशांत होने से
- 55:15व्यवस्थाएँ बिगड़ती हैं। ये जो राजा लोग है ना ये दिमाग से
- 55:21अशांत होते हैं, इसीलिए व्यवस्थाएँ गड़बड़ हो जाती है।
- 55:26फिर के भागते हैं। शायद इकट्ठा करने में कुछ मिल
- 55:31जाए। शायद एपिस्ट्रीन कांड में कुछ मिल
- 55:34जाए। शायद मानसी सोनी में कुछ मिल जाए,
- 55:39लेकिन नहीं कहीं नहीं मिलेगा। ध्रुव ने कहा, भाई वो बच्चे की
- 55:48बातें थी, मैं गाय नहीं तुम्हें दे सकता।
- 55:54मेरे पास बहुत महत्वपूर्ण गाय हैं, कामधेनु गाय हैं मेरे पास।
- 56:05निराश होकर वापस लौट गए। गुरु द्रोण वहीं से दोनों की
- 56:09दुश्मनी बढ़ गई। इसलिए गुरु द्रोण गौरव के खेमे
- 56:15में थे और ध्रुपद सारी व्यवस्था करते थे खाने पीने की।
- 56:23पांडवों की तरफ से क्योंकि द्रौपदी उनकी पुत्री थी, एक एक
- 56:34राणी को देखा, मजनू गया राजा ने पूछा बोल कौन सी लड़की पसंद है?
- 56:42किसको भेजू? मजनू खामोश मजनू कहता किसी को भी
- 56:55इनमें लैला तो कोई है ही नहीं, उसने माथा पिट लिया अजीब बुद्धू
- 57:03से पागल पागलपुल से। सामना हुआ है।
- 57:13इसे इतनी सुंदर लड़कियां भी समझनी आती हैं जो कहते लैला तो है ही
- 57:18नहीं। मजनूं ने स्वाद भी लिया था।
- 57:26जो कोई व्यक्ति भीतर जाकर ही पी सकता है, बाहर की चमड़ी दमड़ी में
- 57:32नहीं होता, बाहर की फूफा में नहीं होता बाहर की 10 बार साड़ियां
- 57:38बदलोगे नहीं होता कुछ? तुम्हारे भीतर ईर्ष्या की तंगें
- 57:44बह रही हैं, नफरत की आग जल रही है, तुम लोगों को डाका मार के
- 57:48पैसे इकट्ठा कर रहे हो तुम्हें बदमाए लग रही हैं तुम साड़ियां 20
- 57:53बदल लो 100 बदल लो तुम्हारे मनुष्य को शांति नहीं पड़ेगी।
- 58:03हाँ, बिल्कुल, मैं नीता अम्बानी की बात करता हूँ, बिल्कुल मैं
- 58:11मिस्टर मोदी की बात करता हूँ। छह बार सूट बदलो, 20 बार सूट बदलो
- 58:16जब भीतर आग जल रही है तो सूट बदलने से शांति कैसी होगी?
- 58:21तो बाहर का मघौटा है। मैं राम जी का रोल करता था बाहर
- 58:24आके नलकी के ऊपर पोछ लेता था अपना सारा, मैं
- 58:38कहता मैं लैला तो कोई है ही नहीं, कहता रे मूर्ख ये लैला तो मैंने
- 58:45देखी है कर बुलाके। मजनू ने क्योंकि उसको लैला की
- 58:55मौजूदगी में अपने अंतःस्थल के दर्शन हो गए थे, जिससे प्यारा और
- 59:00कुछ भी नहीं जान लैला की मौजूदगी में मैंने समझाया था आपको
- 59:07विज्ञान। जिसकी मौजूदगी में आपको अपने भीतर
- 59:12का अहसास हो जाए। आप समितियों के इसके कारण हुआ ये
- 59:16है, इसमें है, किसी को श्याम बाबा में हो जाता है, किसी को
- 59:22मेहंदीपुर में हो जाता है, किसी को सालासर धाम में हो जाता है।
- 59:28कल ही मुझे कोई कहने लगा माता शीरा वाली तब यहाँ पहाड़ों पे
- 59:34नहीं रही। मैंने कहा वो थी कब, वो तो यहाँ
- 59:40से भाग गए, मैंने कहा यहाँ थी कब वो बताओ थी ही नहीं।
- 59:47तुम व्यर्थ में चिल्लाए जाते हो? राजा कहता मैंने देखी है लैला ओह
- 59:58काली कलूटी कुछ भी नहीं है उसमें मजनू कहता राजन।
- 1:00:05लैला को देखने के लिए मजनू की आँखें चाहिए राजा की नैनों से
- 1:00:16लैला निहारी नहीं जाती लैला निहारी जाती है मजनू की आँखों से।
- 1:00:24अतः तुम मुझे जाने दो, मेरे हाल में रहम करम जीस को यही नहीं पता
- 1:00:37ये जो मैं लोगों की बददुआ लेकर पैसा इकट्ठा कर रहा हूँ, वो मेरे
- 1:00:42संग नहीं जाएगा लेकिन ये बददुआ मेरे संग जाएंगी।
- 1:00:47ऐसा घाटे का सीधा कौन करेगा? मूर्ख ही तो करेगा।
- 1:00:52इसलिए मैं राजनीतिक लोगों को बुर्ख करता हूँ।
- 1:00:57ये सीधा सीधा कारण आपको पता है। उषा है भगवान जब खेलता है,
- 1:01:03ईमानदारी से खेलता है बेईमानी से। जब दूसरा कोई है ही नहीं लेकिन
- 1:01:09फिर भी वो ईमानदारी से खेलता है। देखिये उसकी लीला थी।
- 1:01:16गाँधी के रूप में उसने कुछ भी किया, कुछ भी किया, कम से कम माफी
- 1:01:23तो नहीं मांगी। देखिए बड़ी ऑपोजिट टु धारणी और
- 1:01:33इनको पता ही नहीं कि हम झूठ भी कैसे कैसे फैला रहे हैं।
- 1:01:39क्यों नहीं फांसी रुक्वा जब रुकवा सकते थे अरे भाई।
- 1:01:45फांसी चढ़ने वाला व्यक्ति जब कहे के नहीं नहीं आप कौन होते हो?
- 1:01:50आप जाओ, बेइज्जती कर दे उस व्यक्ति की, हम तो आई नी मेरा।
- 1:02:02रंग दे बसंती, चौ रंग दे बसंती, रंग दे बसंती।
- 1:02:22माय नेम मेरा रंग दे बसंती छोड़ तुम क्यों?
- 1:02:31की बात करते हो अरे भाई कितने पैगाम गए वो कहते नहीं सभी वादित
- 1:02:39थे। सर फरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल
- 1:02:43में है। देखना है ज़ोर कितना बाजुए का दिल
- 1:02:48में तुम कायरों सी बातें तो करते हो के तुम मरने से डरते हो।
- 1:02:59और एक तरफ है जो कहता है कि माफी क्या हम तो माफी मांगने की बजाय
- 1:03:07अगर ये वैसे भी हमको छोड़ दें तो भी नहीं बा मुसकर वक्त आया है
- 1:03:13शहादत का शहीदों की चेताओं पर रखेंगे हर वर्ष में।
- 1:03:20वतन पे मिटने वालों का यही वाक्य निशांत होगा भगत सिंह कह तो तुम
- 1:03:32बात ही न हो तुम पगला गई हो, क्या हमें शोक है?
- 1:03:41हमारे शोक को हमसे मत छीना। हम लटके जाना चाहते हैं और तुम
- 1:03:47कहते हो क्यों नहीं करवाए? और फिर भाई वो कहते तुम माफी की
- 1:03:52बात करते हो, हम तो अगर वैसे भी छोड़ देंगे, ये तो भी नहीं
- 1:03:56जाएंगे। हम कहेंगे भाई लटकाओ और अगर ना
- 1:04:00लटकाएं तो बाहर जाके और मारेंगे। इतनी जरूरत कौन करेगा?
- 1:04:07तो उन्हें लटकाना ही पड़ा। तुम इतिहास को अपने हिसाब से गढ़
- 1:04:12लेते हो। भगत सिंह की मनोदशा किसने जानी?
- 1:04:16वह सूरमा है भाई सत्य में सूरमा है।
- 1:04:22तुम उसको कम आंक रहे हो। तुम उसकी शहीदी को कम करके आंक
- 1:04:26रहे हो। तुम उसकी बेइज्जती कर रहे हो।
- 1:04:28बेइज्जती करनी है तो सब्र की करो। एक व्यक्ति माफी मांगने की बात से
- 1:04:38कहता है कि तुम बात ही मत करो। ये वैसे भी छोड़ देंगे तो भी हम
- 1:04:43नहीं जाने वाले और ये हमें धक्के देके बाहर निकाल देंगे तो हम बाहर
- 1:04:48जा के फिर ये ही मार देंगे। किसी को आखिर में इनको हमें हैंग
- 1:04:53करना ही होगा। अब ये उनकी बातें सुन लो ये
- 1:04:57तुम्हारे प्रचारों की बातें। दो ₹2 के कमेंट, जो व्हाट्सएप पे
- 1:05:01होते हैं एक तरफ दूसरा बंदा है जो कहता है कि देखो मैं तुम्हारे कहे
- 1:05:12अनुसार। हिंदू राष्ट्र नहीं बनने दूंगा
- 1:05:16स्वाधीन भारत नहीं होने दूंगा तुम्हारे चरण चूमता हूँ वो कहते
- 1:05:22हैं ठीक हम खुशी से फिर तुम्हें ₹60 भी देंगे।
- 1:05:27वो कहते हैं, हम आपके पास तो कुत्तों की तरह काम करेंगे।
- 1:05:31और बिलकुल पालतू कुत्तों की तरह सब्र करने सारी उम्र निभाई।
- 1:05:38वास्तव में निभाना हो तो सब्र कर जैसा ही निभाना बड़ा प्यारा
- 1:05:44निभाया उस व्यक्ति ने अंत दत्त उसने सुभाष चंद्र बोस की आजाद
- 1:05:49हिंद फौज में किसी हिंदू को? दाखिला नहीं इंडिया ने दिया।
- 1:05:55ज़रा देखो लाल किले के अंदर जब आजाद हिंद फौज के सिपाहियों का
- 1:06:04केस चल रहा था, ज़रा बताइए मुझे कौन था?
- 1:06:11बैरिस्टर बनकर अगुवाई करने के बाद मुद्दतों के बाद जवाहरलाल ने वो
- 1:06:17काला चोगा बहना सबका मुद्दतों के बाद इतने जेलों में ही सड़ते रहे
- 1:06:25काला चोगा बहन के जवाहरलाल उतरे बहस करने के लिए बड़े शानदार
- 1:06:30वक्ता थे। और जीत रहे आजाद हिंद फौज के
- 1:06:36सिपहसालारों को आजाद करने में ज़रा खंगादिये इतिहास को कौन सा
- 1:06:48बहस करने वाला लॉ? जवाहर लाल नेहरू और वो जीता भी और
- 1:06:57सभी मुक्त कर दिए गए। तुम अगर ये कहते हो तुम
- 1:07:02पार्शियल्टी क्रिएट करते हो। किसी एक व्यक्ति के कारण न तो कभी
- 1:07:09आजादी मिली। अकेला चना बाढ़ नहीं फोड़ सकता,
- 1:07:16ना ही मिल सकती है। अब मुझे भी मैं भी आपसे कहता हूँ
- 1:07:20मेरे संग चलो भाई, मुझे आपकी आवश्यकता है।
- 1:07:25जीस प्रकार? गाँधी को जरूरत थी सारे देश उसने
- 1:07:29इकट्ठा कर दिया। वैसे मैं सारे देश से कहता हूँ
- 1:07:32इकट्ठे हो जा तो ये जो ढोल पीटने वाले हैं, ले दी हमें आजादी, बिना
- 1:07:39खड़क बिना ढाल। ये सब दो ₹2 के कमेंट वाले हैं।
- 1:07:45गाँधी ने कब कहा कि मैंने आजादी ले दी?
- 1:07:50अगर आजादी लेने का दम भरता तो निश्चित रूप से वह उसका काला चोगा
- 1:07:55पड़ा था। भाई वह अपना चोगा पहन लेता, वैसे
- 1:08:02भी सेठ था। मुख्यमंत्री का बेटा था,
- 1:08:06मुख्यमंत्री का पोता था, उत्तम चंद जी दीवान थे और करमचंद गाँधी
- 1:08:15भी दीवान थे। छोटी पोस्ट नहीं होती है,
- 1:08:19मुख्यमंत्री के समान पोस्ट होती है।
- 1:08:23वो गरीब का बच्चा नहीं था, ना गाँधी, ना जवाहर।
- 1:08:30फिर उन्होंने भीख नहीं मांगी। उन्होंने त्याग कर दिया अपने
- 1:08:36सुखसाधनों का और तुम गाली निकालते रहो।
- 1:08:39क्या फर्क पड़ता है तुम्हारी गाली निकालने से?
- 1:08:41इतिहास थोड़ी बदलेगा। परमात्मा खेल खेलता है तुझे खेल,
- 1:08:50क्योंकि जब मैं अपने विराट में उतरता हूँ तो मैं जाता हूँ देखता
- 1:08:58हूँ कि सब लीला मेरी। और जब मैं अपने न्यूनतम छोर में आ
- 1:09:05जाता हूँ जिसे मैं शरीर कहता हूँ, तो मैं जानता हूँ कि मैं सिर्फ
- 1:09:12शरीर और मन हूँ भावनाओं हूँ, यह मेरे ही दो रूप हैं।
- 1:09:22तुम में और मेरे में इतनी भिन्नता है कि तुमने एक रूप देखा कि मैं
- 1:09:27शरीर हूँ मन हूँ तब ना मैंने दोनों रूप देख लिए और अपनी मर्जी
- 1:09:33से जब चाहूँ मैं विराट में चला जाऊं और जब चाहूँ।
- 1:09:37मैं अपने शुद्ध रूप में आ जाऊं, यह मेरी मर्जी है और यही मेरी
- 1:09:41आजादी है तो आपने पूछा पुत्र वह ईमानदारी शिखिलता के बेईमानी से
- 1:09:52नहीं, बिल्कुल ईमानदारी शिखिलता। बेईमानी बैठी करेगा।
- 1:10:01फिर सर दूसरा कोई है ही नहीं। कौन रोकेगा उसको?
- 1:10:08वह खेल खेलता है। नानक विकसेकर दी चार और वह
- 1:10:14प्रसन्न होता है उसका बनाया हुआ बंदा सीता के बिछो में हाय सीते,
- 1:10:23हे सीते हाय सीते, हे सीते और वह बनाने वाला।
- 1:10:31अंतिम छोर पे अपने बराट में बैठा हुआ है, देखो मेरे लीला किसी का
- 1:10:39यहाँ कुछ नहीं जाता। भवानी को शक हो गया।
- 1:10:49भगवान शंकर से बोले भगवान जीसको तुम सुबह उठ के प्रातः स्मरणीय
- 1:10:58कहते हो भगवान श्रीराम, मुझे तो आज शक हो गया एक मामूली सी औरत के
- 1:11:06बिछो में ऐसे रो रहा है फूट फूट के।
- 1:11:12ऐसा तो कोई बंदा भी नहीं रोता आम यार मुझे तो शक हो गया तो शंकर
- 1:11:23हँसे, कहती देवी फिर तुम क्या चाहती?
- 1:11:28मैं परीक्षा लेना चाहती हूँ तो जाओ परीक्षा ले लो, कौन रोकता है?
- 1:11:36लेकिन ध्यान रखना अगर तुम परीक्षा में असफल हो गए तो तुम मेरी
- 1:11:43अर्धांगणी नहीं रहोगे। मैं तुम्हें त्याग दूंगा, तुम
- 1:11:52दत्त क्षण मेरी माता हो जाओगे, लेकिन दांव पे लगाया भवानी ने
- 1:12:04ओमानी। कहती मैं जाउंगी यह तो भ्रम में
- 1:12:09मिटाउंगी तो रोते हुए कलखते हुए हे सीते, हे गोदावरी, तुने कहीं
- 1:12:18मेरी प्यारी सीता को देखा है? हे भंगरो तुम हरेक फूलों के ऊपर।
- 1:12:24खिलखिलाते रहते हो तुमने मेरे फूल जैसी सीता को कहीं देखा है हे
- 1:12:32हौआ, तुम किधर से भी आ रही हो क्या तुम वहाँ से मेरी सीता को छू
- 1:12:39के आई हो? तुम्हें पता है वो किधर गई है?
- 1:12:46ऐसे बाबरी बाबरी सी बातें करते हैं, किसी व्यक्ति का भी वहक जाना
- 1:13:03बिल्कुल। संभव है उमा भी बैठ गई जा कर बैठ
- 1:13:15गई, सीता का रूप भर लिया हाँ, सीते हे सीते।
- 1:13:24मेरी प्रिया सीते, ज़रा आवाज़ लगाओ।
- 1:13:40आवाज़ देखे हमें तुम बोला मोहब्बत में चुना।
- 1:13:57न हमको सताओ आवाज देख के हमें तुम बुलाओ।
- 1:14:14मोहब्बत में तू ना ना हमको सता आवाज देखे।
- 1:14:30अभी तो मेरी ज़िन्दगी है परेशान, अभी तो मेरी ज़िन्दगी है परेशान।
- 1:14:50कहीं मर के खाक भी हो न परेशान दिए की तरह दिए की तरह।
- 1:15:07से। न हमको जला दिए की तरह से, न हमको
- 1:15:22जला मोहब्बत में। सीता करो, धर के बैठ के ओम तो राम
- 1:15:45दूर से आते हैं। लक्ष्मण कहते हैं भईया बा विबो
- 1:15:50बैठ राम देखते हैं। बहुत सी बातें अंतर्दृष्टि से
- 1:16:04देखी जाती हैं, सो अब गुण भी होंगे राम में जब वो इस तल पर आए
- 1:16:14होंगे जिसे हम शरीर भावना। और विचार कहते हैं और बहुत
- 1:16:22विरय्यता भी आई होगी जब अपने उस सबरूप में गए होंगे जिसे मैं कहता
- 1:16:28हूँ विराट विशाल तो राम ने देखा है सीता।
- 1:16:40सीता के रूप में बैठी है, लेकिन कहाँ छिपता है दिव्य शक्षु से
- 1:16:48जाके उनके पांव पकड़ लिए माता अकेली मेरे भगवान कहाँ हैं?
- 1:17:12उमा की आँखें डब डबाई उमा ने प्रणाम किया और लुफ्तों के
- 1:17:28लक्ष्मी बोले प्रभु ये क्या माज रहा है?
- 1:17:33राम हसन वह पार्वती थी भैया और उससे बात शंकर ने पार्वती को
- 1:17:52त्याग दिया पत्नी। पाम छू लिए आज से तू मेरी माता
- 1:17:59तुझे कहा था तू मत जा शत श्यन अपना लखोव, तेई क न चल ले नार तू
- 1:18:08अपनी ही श्यनप वर्ती। तो इसलिए दंड तो तुम्हें कुछ नहीं
- 1:18:13है? बस आज से तू मेरी मदद परमात्मा
- 1:18:22खेल खेलता है और खेल का मतलब आप पे खेले खेल खिलाड़ी आप पे खेलण
- 1:18:30हारा हो। बेईमानी करेगा किस्से एकोंका
- 1:18:37सतनाम कर्तापुरक निर्भय, अकाल मूरत, अजूनी सैपम गुरप्रसाद।
- 1:18:50एक अकेला ही है वो निर्भय है, निर्भय क्योंकि वह दूसरे का होता
- 1:18:56है, वैर दूसरे से होता है जब वो है ही नहीं, दूसरा तो किस्से बह
- 1:19:02करेगा, किस्से बह खाएगा वह ही है। इसलिए बाबा नाक ने सबसे पहले शब्द
- 1:19:11रस रूप में कहे एक ओंकार लेकिन तुम वहाँ समझे नहीं।
- 1:19:16फिर बाबा ने व्याख्या करनी शुरू कर दी और व्याख्या इतनी की कि
- 1:19:20पूरी जपजी बोल दे गई। काश तुम पहला शब्द समझ लेते।
- 1:19:34खेलता है, ईमानदारी से खेल खेलता है।
- 1:19:37पिछले जनम में उसने गाँधी के रूप में खेल खेला है।
- 1:19:41ये सब उसकी कृपा थी, उसका खेल था लेकिन ईमानदारी से उसने फंस दिया।
- 1:19:51मैंने भारतवासियों की जंजीरों को काटा, उसने मेरी जंजीरों को काट
- 1:19:56दिया इस जन्म में क्योंकि वह बड़ा ईमानदार है, वह खेल भी खेलता है
- 1:20:06तो पूरी ईमानदारी से खेलता है। इसमें ज़रा भी बेईमानी नहीं होती
- 1:20:11क्योंकि बेईमानी करेगा किस्से और आखर मैं मुझे भी समझाया कि मैं
- 1:20:21हूँ ही नहीं या फिर मैं हूँ तो विराट हूँ।
- 1:20:28इन दोनों में से कुछ भी समझ लो जब तुम ऐसा समझ जाओगे, एक तल पे तुम
- 1:20:34नहीं हो जाओगे तो ततक्षम तुम दूसरे तल पर विराट हो जाओगे।
- 1:20:40जब बूंद बूंद की तरह खत्म हो जाती है तो समुद्र की तरह व्याठ हो
- 1:20:44जाती है। इसे तुम किसी भी तरह से शब्दों
- 1:20:48में डाल लो तुम्हारी मर्जी तो गउ के दूध के बारे में पूछा यह जवाब
- 1:20:56तो मैंने पुत्री को मदद दे दिया। वह खेलता है पूरी ईमानदारी से
- 1:21:01खेलता है। क्योंकि किसके साथ खेलें?
- 1:21:03अब भी खेले खेल खिलाड़ी अब भी खेलना हरा हो गउ के दूध में।
- 1:21:11इसीलिए ब्राह्मण को गउ दी जाती थी।
- 1:21:15यह गुरु द्रोण से परंपरा चली कि एक राजा ने ब्राह्मण द्रोण को।
- 1:21:24गउ देने से मना कर दिया पश्चातब स्वरूप उसके बाद सभी ने विवाह
- 1:21:30शादी में गउ दान का संकल्प किया और गउ दान करना सबसे बड़ा दान है।
- 1:21:37गउ रक्षा करना सबसे बड़ा रक्षा है।
- 1:21:43जीस देश में जीस, गऊ प्रधान देश में गोपाल के देश में गऊ हत्या
- 1:21:54होते हो यहाँ के बूचड़खानी तो मैं उनके मालियों के नाम बता दूँ।
- 1:22:00तो तुम्हें शर्म आई? एक को छोड़कर?
- 1:22:03बाकी सभी हिंदू भारत में लगभग 4000 बूचड़ खाने अवथोराइज्ड हैं
- 1:22:16ऑथोराइज्ड। जाने जिनको मोदी सरकार ने मंजूरी
- 1:22:24दे रखी है कि तुम कतल कर सकते हो, गायिका और 25,000 से भीग ज्यादा।
- 1:22:36कतिल खाने हैं, जो अवैध रूप से चल रहे हैं।
- 1:22:41इतनी मात्रा में यहाँ बूझड़ खाने हैं क्या यह गो प्रधान देश है?
- 1:22:50क्या यह कृष्ण के वेला का देश है? क्या गहुओं को जीने का अधिकार
- 1:22:56नहीं है? अपना पूरा जीवन?
- 1:22:59क्या तुम्हारे वृद्धों को मार देना चाहिए?
- 1:23:02बिल्कुल उसी तरह जैसे गउओं को कतल खानों में मार दिया जाता है।
- 1:23:08क्या यह गोपाल के देश का प्रतिनिधित्व करता हुआ?
- 1:23:14मोदी का देश है, फिर ठीक करते हैं, जो डिमॅंड करते हैं।
- 1:23:24शंकराचार्य अभी मुक्ति स्मरणंद बिल्कुल सही करते हैं, मैं उस पर
- 1:23:31स्टेम्प लगाता हूँ। तुम कहते हो गऊ मैं कहता हूँ किसी
- 1:23:36कीट पतंगे का भी कतल नहीं होना चाहिए।
- 1:23:42हमारी कीड़ियां मर जाती हैं क्योंकि वह बिचारे आटे खाने आते
- 1:23:46हैं, आटा, दाल, चावल खाने आते हैं, उनको कोई पता नहीं निर्बोध
- 1:23:52है। तो मर जाती हैं तो हमने क्या
- 1:23:55किया? कीड़ों के भवन के ऊपर घर के ऊपर
- 1:24:01हम तिल, चावल, शकर डालते हैं, बैलेंस करने के लिए गौओं को चारा
- 1:24:08डालते हैं, गौशालाएं चलाती हैं। क्योंकि बहुत से लोग आवारा घुमों
- 1:24:18को जब वो गाय नहीं दे देती, दूध नहीं देती तो उनको सड़कों पर छोड़
- 1:24:26देते हैं। आजकल तो लोगों ने अपने माँ बापों
- 1:24:31को भी घर से बाहर करना शुरू कर दिया है।
- 1:24:38ऐसे मुल्क में हमसे तो डेन्मार्क अच्छा है।
- 1:24:45नॉर्वे अच्छा है, फिनलेंड अच्छा है।
- 1:24:49शेख का गणराज्य अच्छा है। नास्तिक मुल्क अच्छे इतने कतर
- 1:24:59खाने तो वहाँ नहीं और हैं भी नास्तिक देखो।
- 1:25:07तुम कहाँ से अपने आप को अस्थि कराते हो, इसलिए तुम दुखी हो
- 1:25:13इसलिए दर दर मारे फिरते हो, भटकते हो दुजयानु दुख देवें, आप चाहे
- 1:25:22सुखनू लग दानी, फलका दे। जड़ों सड़े रूखनू जो पेड़ जड़ से
- 1:25:30सड़ जाए, वह कभी फलता फूलता नहीं। तुमने गऊ को मारकर या जीव हत्या
- 1:25:40करके अपनी जड़ों को काट दिया, फूंक दिया।
- 1:25:44अब तुम आशा मत करो, जो लोग खाते हैं सुखित विभिन्न मेरे पास इस
- 1:25:57देश से जीतने लोग आते हैं। विदेशों से गने लोग आते हैं, आ
- 1:26:02नहीं सकते। लेकिन फ़ोन पे बातचीत कर सकती
- 1:26:08हैं। साल में एकाध बार आ जाते हैं, वो
- 1:26:13तुमसे ज्यादा बेहतर इमोशन रखते हैं।
- 1:26:18दया के मामले में तुम तो बड़े निष्ठुर लगते हो, उनके मामले में
- 1:26:23उनके बजाय। प्रसंग लंबा हो जाएगा।
- 1:26:26ब्राह्मणों को गौदा नहीं करो, वो तो पहले ही पेट फुलाए बैठे हैं,
- 1:26:32जैसे दो 2 साल के बचे हैं उनके पेट में।
- 1:26:39अरे पेट भरो को और क्या भरना है ये मीठी खीर खा खा के?
- 1:26:45शुगर की बीमारियों से मरते हैं मीठी खीर खा खाते इन शरीर का
- 1:26:51इंजेक्शन ले के रोटी खानी पड़ती है।
- 1:26:54ये हाल है उनका तो गौ दान कैसे करना चाहिए जहाँ।
- 1:27:09अनाथ बच्चे छोटे बच्चे पर वर्ष की जरूरत है।
- 1:27:14उनका कोई देख रेख वाला नहीं है। अनाथ आश्रमों में गऊ को दान करें
- 1:27:21वृद्ध आश्रम वृद्ध हो गए गऊ का दूध उनके लिए सर्वोच्च हितकार्य
- 1:27:28उनको पोषण की बड़ी जरूरत है और गऊ के दूध से बढ़िया तुम्हारे साथ
- 1:27:33छोड़ो, मैं नहीं मानता इनको मैं अपने वैज्ञानिक जीवन की फिलोसोफी
- 1:27:40को मानता हूँ। तुम्हारी किताब में क्या लिखा है
- 1:27:43मुझे कोई? अगर तुम्हारी किताब में लिखा और
- 1:27:47मेरे अनुभव से मेल खा गया तो मैं बोल दूंगा नहीं, मेल खाया तो मैं
- 1:27:52विरुद्ध हुई बोलेंगे जो मैंने अनुभव किया मैं वही बोलेंगे।
- 1:27:59मुझे लोग कहते की तुम डेढ़ साल से ज्यादा जी नहीं सको करो।
- 1:28:02डॉक्टर थे बहुत बड़े बड़े। फिर कहाँ गई तुम्हारी विज्ञान?
- 1:28:12मैं कोई अनशन किये बैठा हूँ यहाँ कि 13 साल हो गए इतने दिन हो गए
- 1:28:16नहीं नहीं मैंने स्वेच्छा से त्याग किया है।
- 1:28:18अपने शरीर को फिट फार रखने के लिए अपने भीतर की यात्रा की थी।
- 1:28:24ताकि मैं उस आनंद को बड़े मुँह से आनंद से पीपु रसपु छोटे बच्चे
- 1:28:32जहाँ पर अनाथ आश्रम अबोध बच्चे करते है, उन संस्थाओं को दान करो
- 1:28:39जहाँ वृद्धाश्रम है उनको गऊ दान करो।
- 1:28:46जहाँ छोटे छोटे बच्चे हैं पाठशालाओं में छोटे बच्चों की
- 1:28:50पाठशालाएं, वहाँ जब दोपहरी का भोजन दिया जाता है, एक एक ग्लास
- 1:28:56दूध भी दे दो बच्चों को पाठशालाओं को दान करो।
- 1:29:02और व्यवस्था करो कि हर बच्चे को दूध मिल जाना चाहिए।
- 1:29:07कुपोषण के शिकार हैं। हमारे अधिकतम बच्चे और दूध सबसे
- 1:29:15बढ़िया पोषक पदार्थ है। ब्राह्मणों को फेरों के वक्त
- 1:29:24संकल्प लेके जब कोई ₹10 की गाय तो आती है, यह तो एक मजाक है, उनके
- 1:29:31लिए भी ठगी है। आपके लिए भी मजाक है जैसा वो ठगी
- 1:29:34मारते हैं, आप वैसे ही मजाक कर देते हो ये लो।
- 1:29:37गौधान हो गया तो जानते तुम भी हो जानते वो भी लेकिन फिर इन
- 1:29:49परंपराओं को तोड़ क्यों नहीं देते?
- 1:29:54तोड़ दो इनको। जिंदगी के आयने को तोड़ दो।
- 1:30:11है ना मान्यता को तोड़ दो? कोई फेरे फेरे की जरूरत नहीं है।
- 1:30:15कोई भगवान नहीं उतर के साक्षी होता, समझ लेना।
- 1:30:18मेरी बात को अगर भगवान उतर के साक्षी हो जाता तो भगवान दंड
- 1:30:25देता। फिर तुम न्यायालय के अंदर धक्के न
- 1:30:28खाते, कोई भगवान भगवान। अति साक्षी नहीं होता तुम्हारे ना
- 1:30:34कोई गणेश उत्तरता है ना कोई शंकर उतरते हैं जब तुम्हारे फेरे हुए
- 1:30:38होते हैं शंकर तो मेरे से बात कर रहे होते हैं गणेश जीके पास तो
- 1:30:44मैं बैठा होता हूँ कहाँ आएँगे उतर के और उनको बैठाने के लिए जगह है
- 1:30:50तुम्हारे पास। ज़िन्दगी के आयने को, तोड़ दो
- 1:31:04ज़िन्दगी के। इन सभी मान्यताओं को तोड़ दो।
- 1:31:10ये व्यर्थ की बोझ है। तुम्हारे सिर के ऊपर क्यों नहीं
- 1:31:13फेंक देते? इन गंध के टोकरों को निरबोज हो
- 1:31:17जाओगे और प्रथम बार तुम पाओगे खम् बहुत हल्के हो गए।
- 1:31:22इनमें अब कुछ भी। नजर आता ने कोई सागर दिल को
- 1:31:40बहलाता ने। बखुदी में भी करा कोई सागर।
- 1:32:03दिल को बहलाता नहीं। धन्यवाद।