Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 Aug 25 - क्या आशुतोष के शव का DNA टेस्ट होना चाहिए? दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के पीछे का रहस्य!
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- 0:10प्रिय से बताओ, आज थोड़े से स्वाद हम सूक्ष्म जग से लेंगे।
- 0:32चरण स्पर्श प्रभुदेवा आपने वायदा किया था कि जब आप अपने शास्त्र को
- 0:41सम्पूर्ण करेंगे, हमारे कुछ प्रश्नों के जवाब देके जाने पे।
- 0:50जब आपकी बूँद समुद्र में घिरेगी, उससे पहले हमारे प्रश्नों का जवाब
- 0:58आप देके जाएंगे। हाँ कह थे पूछने का, पूछने का।
- 1:12वैसे तो आपने हमारे सभी प्रश्नों के जवाब दे दिए लेकिन आपकी जिंदगी
- 1:21से संबंधित कुछ प्रश्न मैं पूछना चाहता हूँ जो तीख हैं?
- 1:30बिल्कुल पूछिएगा और ध्यान रखना सवाल तीखे ही होने चाहिए तभी जवाब
- 1:41देने का मज़ा आता है हल्के सवाल मत पूछना।
- 1:50नाम क्या है? सुनील दत्त वो जो ऐक्टर थे न चलिए
- 2:03आपकी सूक्ष्म आवाज की तरह। पंखे के शोर में दब जाते हैं।
- 2:08मैं पंखा बंद कर कुछ आप संस्थान के वास्ते कहते हैं कि दान होते
- 2:20हैं, फिर आप खुद दान क्यों लेते हैं?
- 2:32सवाल इतना तीखा नहीं। सवाल इससे भी तीखा करो, इसका जवाब
- 2:41सुनिए, मैं मांगता नहीं, बिना मांगे आप दे जाते।
- 2:58थोड़ा थोड़ा हम्म आप स्वीकार क्यों करते हो?
- 3:03खेती का प्रश्न इसे ऐसे समझो कि जैसे प्रेमी या प्रेम का
- 3:14वैलेंटाइन डे के ऊपर। किसी को फूल का उपहार करता है उस
- 3:28फूल की कोई कीमत नहीं प्रेमी भी जानता है प्रेमिका भी जानता है।
- 3:37यहीं चलते चलते राह में किसी रोज़ गार्डन से सड़क के किनारे कोई फुल
- 3:48टोट लिया होगा और प्रेमिका को या प्रेमी को?
- 3:56आप वो फूल भेंट करते हैं ज़रा सोचो फूल की कुछ कीमत नहीं प्रेमी
- 4:10भी जानता प्रेम का कोई कीमत नहीं है जगह जगह लगे हुए पेड़ कहीं से
- 4:15तो। अगर प्रेमिका या प्रेमी उस फूल को
- 4:21झटक दे तो तुम्हारी हृदय से क्या कुछ?
- 4:37है। फूल नहीं।
- 4:45मेरा दिल है फूल तुम्हें भेजा है खत।
- 4:54में खत में फूल भेजा है ये फूल नहीं मेरा दिल।
- 5:04तो एक सिंपल है, लेकिन उस हृदय का क्या होगा जो तुम तोड़ दोगे?
- 5:19मैंने कई बार स्वीकार नहीं किया है और मुझे उसकी तिक्षणता झेलनी
- 5:33पड़ी। क्योंकि वो श्रद्धा के फूल क्या
- 5:49इंकार कर देना चाहिए नहीं इंकार नहीं कर देना चल रहा है।
- 5:58ये सवाल कल के मैं मांगू तो गलत है?
- 6:09आप ले जाओ और मैं स्वीकार ना करूँ तो यह भी गलत है, दोनों ही गलत
- 6:16है, इसलिए मांगता में हूँ नहीं स्वीकार मैं कर लेता हूँ।
- 6:26आप जानते हो मेरी जरूरतें कितनी? बाकी लोग तो शंकित होते होंगे,
- 6:34शायद भीतर बैठा अनशन वालों की तरह।
- 6:41अड़ंग सड़ंग खा लिया हो और बाहर लिख दिया हो अनशन का 100 चोदवा
- 6:46दिन और सब खाते हैं ये बस बाहर लिखा होता है पोख हड़ताल बहुत से
- 6:58लोग ऐसे होते हैं। गाँधी जी का अंश में बड़ा साफ
- 7:01सुथरा था, वो खाते नहीं थे तो खाते नहीं थे और फिर दुनिया से
- 7:12छुपा लेंगे। ये सूक्ष्म का प्रश्न है, आप तो
- 7:15सता ही मेरे। अब सब जानते हैं क्या खाता हूँ जब
- 7:24बाहर जाता हूँ घूमने नहीं जाता हूँ मेरे चरित्र के बारे में
- 7:29ब्रह्मचर्य के बारे में सब जानते हैं तुम से कैसे हो।
- 7:37तुमसे छुपा भी ना सकेगा और तुमसे छुपाना चाहूंगा भी नहीं मैं
- 7:43छुपाने को कुछ है भी नहीं तो मेरी जरूरतें बहुत कम है, आप जानते हो?
- 7:56परिवार के रूते बच्चे खो दो, अपना काम करके पूरी कर लेते हैं लेकिन
- 8:04जो वो आश्रम का काम करते हैं, उसके लिए थोड़े बहुत मेरे पास आ
- 8:08जाते हैं ना उन्हें दे देता हूँ क्या बुराइ?
- 8:17फिर अगर तुम कल कोई ये भी प्रश्न उठा सकते हो के बाबा वो आपके
- 8:24सनिध्य में रहते हैं, हमको अपने सनिध्य में रखलो ये कोई सवाल
- 8:30नहीं। वह मेरा अंश है, मैंने उसे जाम
- 8:34दिया है, मेरा दायित्व है और उनका क्या किया जाए?
- 8:42बहुत से शिष्य से जो सिर्फ नाम लिख के भेजें हैं, यह बच्चों को
- 8:48दे दीजिये। यह कुणाल को दे दीजिए, फिर मैं
- 8:53क्या करू? क्या मुझे अब उल्लंघन करना चाहिए,
- 9:04उनके हजदा का नहीं? और वो सारे दिन तरंगों को पीते
- 9:10हैं। आप यहाँ पर आते हो आपको कुछ नहीं
- 9:15करना पड़ता। आपको सब कुछ तैयार मिलता है और
- 9:19दीक्षा से पहले जो तैयारियां होती हैं वो आपको पता नहीं कितनी
- 9:22मुश्किल होती है। ये तैयारियां सब बच्चे करते हैं।
- 9:29जो मेरे आस पास 2400 घंटे रहते हैं उनका दायित्व भी है और उनका
- 9:36अधिकार भी है। मांगता हूँ, मैं स्वीकार करता
- 9:47हूँ। बच जाता है तो बच्चों को दे देता
- 9:53हूँ। इसमें गलत क्या है?
- 10:00अभी आमने सामने सवाल हो रहे हैं। आप लिख के तो कुछ बता नहीं रहा?
- 10:05आपकी सीधी रेंज मेरे साथ टकराती है और मैं सीधा जवाब आपसे लेता
- 10:09हूँ और बीच में ये सुनने वाले हमारे दोनों की गुफ्त गुण सुन रहे
- 10:21सुनील दत्त जी। अब कब मरे थे?
- 10:32जैसे चार डार्विन मरे थे, उसके 7 साल बाद मरे थे।
- 10:39ठीक है? तो मेरे ख्याल में चार्ल्स
- 10:44डार्विन मरे थे। 1882 में मेरा ख्याल है, जहाँ तक
- 10:48मेरी याद तो 7 साल बाद आप मरे तो 1899 में मरे पिछले जनम में तब
- 11:00मैं 20 वर्ष का था। ठीकषण स्वीकार क्यों करती हो?
- 11:17आपको बता दिया क्या गुजरे किये अगर मैं तुम्हारे प्रेम से दिया
- 11:26हुआ तोहफा झटक दूँ? वो तोहफा तो कोई कीमत का है नहीं,
- 11:33मैं जानता हूँ, लेकिन उस तोहफे के भीतर जो तुम्हारा दिल है और दिल
- 11:41को तोड़ना मुझे गवार है। एक छोटी सी कहानी सुना दो मुझे
- 11:49याद आ गया प्रसंग गाँधी जीके जीवन से संबंधित बड़ा हल्ला गुल्ला
- 12:01किया। उन्होंने पेंसिल गुम हो गई पेंसिल
- 12:04ढूँढो कहाँ है? पेंसिल गुम हो गई।
- 12:08बच्चे ने उपहार में दी थी बड़े प्रेमपूर्वक बच्चे ने उपहार में
- 12:11दी थी पेंसिल गुम हो गई कौन ले गया ढूंढो?
- 12:20सारी फौज लगा दी गई। उस पेंशन उस पेंशन को ढूंढने में
- 12:27फौज यानी उनके स्वयं से देख सारी फौज लग गई और बा मुसकर साँझ तक उस
- 12:37पेंशन को ढूंढा क्या और पेंशन क्या थी?
- 12:4431 पेंशन 31 छोटी ऊँगली का आधार, 31 ही पेंशन गाँधी से आकर पूछा
- 12:59गया ये पेंशन तो नहीं थी कहीं? तो गाँधी जी ने वो पेंसिल जड़ पर
- 13:09हृदय सरकार कहते हाँ यही कहते बाबू ये छोटी सी पेंसिल, इतने हाय
- 13:23हुला किये हो इसके लिए? तो गाँधी मुस्कुराए, कहते नहीं,
- 13:32तुम इसकी कीमत नहीं जानते, यह किसी बच्चे का मासूम दिल है इसके
- 13:42भीतर। माँ सुमी की तरंगें छिपी पड़ी
- 13:46हैं। जो आपको दिखाई मुझे दिखाई, इतना
- 13:54हो हल्ला तो मैंने कम मचाया। यद्यपि मेरा हृदय तो बड़ा दुखी
- 13:58था। बड़े प्रेम से उस छोटे से बच्चे न
- 14:02जाने। अपनी ही लखाई पढ़ाई के लिए उसके
- 14:08काम आती होगी और मुझे वेट कर गया था।
- 14:14ये होती है प्रेम की कीमत प्रेम की कीमत डोलरों में नहीं होती।
- 14:27प्रेम की कीमत होती है ना डाला ना सोना, ना हाथी ना गुड़।
- 14:37कोई कीमत नहीं होती वह अनमोल होता है।
- 14:45और कुछ अनिल चौहान कॉल तो जाइए, मैं रिसीव कर रहा हूँ, मैं दिव्य
- 14:59ज्योति जागृत से ऐसा डी जे जे एस आशुतोष जी महाराज कब वापस
- 15:11लौटेंगे, ये तुम्हारी पास करते है।
- 15:21ये आशुतोष जी महाराज बैठे हैं और आशुतोष शांभरी ये भी तुम्हारे पास
- 15:26है, इनसे पूछ लो रोज़ सुनते हैं मुझसे क्या पूछते हो?
- 15:34इनसे पूछते हो भगत इनका इंतजार कर?
- 15:42ये कहते हैं हमें जनम दिलाओ पीछे जो कुछ छोड़ के आए कूड़ा कचरा सब
- 15:51पता है। साहब के बारे में मैं क्या बोलूं?
- 16:01ये भी सत्यपाल जीके शिक्षा वहाँ से कुछ खास सीखा वगैरह नहीं।
- 16:11कुछ लोग सामने सुन रहे है। कुछ नहीं सीखा इन्होंने इसलिए
- 16:24कालोल कर रहे थे और सिर में से निकल गए।
- 16:33अब इनकी पार्थिव दे शिष्यों ने मैं तो कभी ज्ञान हूँ क्योंकि
- 16:42जीतने साल से मैं बंद कमरे में बैठा हूँ।
- 16:46उतने साल से इन्होंने श्री त्याग रखा उससे पहले का त्याग रखा है।
- 16:53कितने वर्ष हो गए? 11 वर्ष 11 नौ वर्ष हो गए चलो।
- 17:0711 पूरे हो गए जनवरी 2014 हाँ 29 जनवरी 29 जनवरी 2014 में इन्होंने
- 17:19रात्रि को ये पंगा खाना कर रहे थे तो कपाल से निकल गए।
- 17:30पता है नहीं तो सतपाल जी गुरु ने महाराज ने इन्होंने अपने आश्रम
- 17:39में से इनके चरित्र पर संदेह डालते हुए।
- 17:46निष्कर्षित कर दिया से निकाल दिया इन की वैगम सतपाल जी महाराज शायद
- 17:55आज भी जीवित होंगे। मुझे पता नहीं है इतनी जानकारी
- 17:59मुझे नहीं होती। आप जानते ही हैं मैं इस संसार
- 18:03में। उसके बाद ये नूर महल में आ गए।
- 18:11डेरा जमालिया समाधि तक में जाना जानते नहीं थे।
- 18:22और भक्त के तीक समति से वापस आएँगे।
- 18:24कभी ऐसा कांड डूबा है धरती धरती पे धरती पे लाखों लाखों करोड़ों
- 18:37करोड़ों वर्षों में कभी ऐसा कांड डूबा है।
- 18:43ये जो अदालतें माननीय अदालतें फैसला देती हैं, उन्हें इतिहास की
- 18:49जानकारी होनी चाहिए कि इतिहास में ऐसा कोई गांठ?
- 19:00श्रद्धा के कारणों में विश्वास के कारणों में जब न्याय की पकड़ फंस
- 19:14जाती है तो न्याय को जीत न चाहिए, जबकि न्याय हार जाता है।
- 19:22तुम आस्था को प्रमुख रख रखो, रखना भी चाहिए।
- 19:28लेकिन मुझे इस बात का जवाब दे और डालते हैं।
- 19:30इस बात का जवाब दें, सह विनम्र पूछ रहा हूँ।
- 19:33करोड़ों वर्षों के इतिहास में कभी ऐसा हुआ एक घटना आती है सिर्फ।
- 19:40और वो घटनाती है। छह महीने के शंकर ने श्री छोड़ा
- 19:48श्री छोड़ना एक कला है। मैंने पहले ही बताया अक्सर कृष्ण
- 19:54जी महाराज श्री छोड़ देते थे। और शरीर छोड़कर अपने आप को
- 20:02बहुगुणित कर लेते थे। अब समझिये इस बात को संदीप वाणी
- 20:08आश्रम में कृष्ण जी ने 64 कलाएं साध की थीं।
- 20:14उन 64 कलाओं में एक कला है शरीर को छोड़ देना और उन्हें मल्टीप्ल
- 20:22कर देना, बहु गुणित कर देना यह कला शरीर से छोड़ना एक कला है।
- 20:34और कृष्ण जी इसको अच्छी तरह से साध लिए थे और कृष्ण जी ने 64
- 20:40कलाएं मात्र 64 दिनों में से की थी।
- 20:44इतनी सी कीमत है तो शरीर को छोड़ना भी अच्छी तरह से जानते
- 20:52नहीं थे। हाँ जी विद्या है।
- 21:0264 कलाओं में एक कला है, सिद्धियां अलग है, कलाएं अलग है
- 21:10सिद्धियों के बारे में पूछो की कभी बात में अभी कलाओं पे।
- 21:16यह 64 कलाओं में से एक कला है, अपने शरीर को छोड़ देना और
- 21:23बहुगुणित हो जाना निधि वन के भीतर प्रत्येक गोभी का के साथ एक
- 21:30आकर्षण का होना इस कला का उपयोग। प्रत्येक गोपी के साथ एक कृष्ण
- 21:39थे। कैसे हुआ कृष्ण?
- 21:47वहाँ अच्छे ही हैं कृष्ण मस्त कहीं बैठी।
- 21:54अपने सूक्ष्म को छोड़ दिया। उन्होंने सूक्ष्म बिल्कुल फूल
- 21:59जैसा ही होता है और सूक्ष्म को उन्होंने जितनी गोपियाँ थी, उतने
- 22:07बातों में बाँट दी। प्रत्येक गोपिका को लगा कि कृष्ण
- 22:11तो हमारे साथ। जब के वो था कृष्ण की परछाई, ये
- 22:17बिलकुल ऐसा है जैसे 1000 घड़े रख दिए जाए, 100 घड़े रख दिए जाए और
- 22:24उनके भीतर पानी भर दिया जाए और सूरज की रिफ्लेक्शन जीस, घड़े में
- 22:30देखोगे, उसी में नजर आए। समझाती 64 घड़े बरती जाएं 100
- 22:40घड़े बरती जाए सबको पानी से भर दिया जाए तो एक सूर्य जी एक है
- 22:48दिखेगा सब में वो चाहे 1000 केढ़ें लात रख दो।
- 22:54ये कला है जो कृष्ण अक्षर आजमाते थे।
- 22:59निधि मन में अपने शरीर को छोड़कर सूक्ष्म शरीर होता था।
- 23:07जीसको फरकेट कर देते थे मल्टी फरकेट।
- 23:16इसलिए प्रत्येक गोपी को यह दिखता था।
- 23:19कृष्ण मेरे साथ है। कृष्ण मेरे प्रेम में और कृष्ण
- 23:26किसी के साथ नहीं होते थे। कृष्ण अलग बैठे है।
- 23:36समझा दिया। आशुतोष जीके पता नहीं, अब तो मैं
- 23:45और बात बताता हूँ। आशुतोष हम भरी।
- 23:53इसने कहा कि मैं इनकी धर्मपत्नी हूँ, मैंने सुना है जैसा वैसा बता
- 23:57रहा हूँ, मेरा दायित्व कोई नहीं है।
- 24:05मैंने इनके साथ शादी की, इन्होंने छोड़ दिया और उनके एक जैविक पुत्र
- 24:11ये घोषणा करते हैं। दिलीप झा कि मैं आशुतोष जी महाराज
- 24:17का जैविक बुद्ध अब समझीगा खेल समझीगा अंधविश्वास की जनता इतनी
- 24:30मात्रा में। अंधविश्वास के कारण द्रव्यों को
- 24:35झोंकता है, क्योंकि ये लोग आपको विश्वास दिला देते हैं कि आखिर
- 24:42में अपने आपको झोंकना पड़ेगा तो द्रव्य को पहले झोंक दो, इनको पता
- 24:51कुछ है नहीं। तो इस बहाने से येलो भी व्यक्ति
- 24:58अपने संस्थान खड़े करते हैं और जिसमें जो थोड़ा बहुत होता है वो
- 25:03दिखाता है यही बताया जाता है धार्मिक संस्थानों में।
- 25:15आज तो आईएएस भी अपने आप को धार्मिक संस्थान बनाने में लगे
- 25:20हैं, उधर थोड़ी संभव नहीं ज्यादा है।
- 25:23अब परचुनिटी ज्यादा है तो गीता की व्याख्या करेंगे, उपनिषित की
- 25:29करेंगे अष्टवकर की। अगर गीता के चल पे कोई पहुँच जाए,
- 25:35अष्टावक्र के चल पे कोई पहुँच जाए तो व्यवहार अष्टावक्र जैसा ही
- 25:40होगा। लक्षण अष्टावक्र जैसे ही आएगा।
- 25:46रूखी, सूखी खाय के ठंडक, फ्रिज, फ्रिज पहुँच जाते हो।
- 25:55और क्या बोलते हैं? दादू पहुंचते हैं, क्या बोलते
- 26:01हैं, क्या बोलते हैं संस्थाओं के लिए धन तो दान करो क्योंकि
- 26:11संस्थाओं के। हाँ, तो मजबूत करो या कोरे ठगी है
- 26:18चार भाजी अभी एक पीछे अवतार आए थे उस।
- 26:27कहती मैं उसों का अवतार हूँ 1000 करोड़ 2000 करोड़ 5000 करोड़
- 26:3110,000 करोड़ जीतने आपके पासियों दे जाओ, मैं कोई साफ तो लेकर
- 26:35जाऊंगा, मैं भगवान हूँ, मैं सृजन करता हूँ, मैं सृष्टि का रच देता
- 26:42हूँ। आपके पास जो हो दान कर जाओ, मैं
- 26:46कौन सा साथ लेके जाऊंगा? तुम ही तो बैठोगे उसको ये नहीं
- 26:51पता कि ये कौन सा यहाँ रह जाएंगे। अगर तुम चले जाओगे तो चले दो ये
- 26:56भी जाएंगे और फिर तुम सृष्टि करता हो।
- 27:02तुमने सारी सृष्टि की संरचना कर दी, तो आश्रम भी बना लो, आश्रम
- 27:08बनाने में क्या हर्ज है? इतनी सृष्टि पैदा कर दी एक आश्रम
- 27:13तुमसे बनता नहीं, होल खोल के की नहीं।
- 27:17खैर मैंने तो नहीं देखे उसके बाद। मुझे किसी ने क्लिप भेजा।
- 27:23मैंने कहा इनसे कह दो कि आश्रम बना लो भी इतनी सृष्टि कर रचयिता
- 27:27हो, इतने भ्रमण बना दिए तुमने आश्रम भी बना लो आश्रम के लिए,
- 27:33लोगों से दान में इकट्ठा कर। क्या नाम बताया चौहान चौहान जी
- 27:50मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, आप तो देख रहे होंगे जो वहाँ बैठे छने
- 28:00ढोलकी तब लकड़ खा रहे हैं वो तो छोड़ो जो शीशे के भीतर शव को
- 28:07रखना। क्या यह व्यक्ति का अपमान नहीं
- 28:14है? जीवंत व्यक्ति के भी कुछ अधिकार
- 28:23होते हैं और मृत व्यक्ति के भी कुछ अधिकार होते हैं।
- 28:28मृत शव का भी अधिकार होता है। क्या अधिकार?
- 28:35कि उसके मृत शरीर को सम्मान पूर्वक विदाई दे दी जाए।
- 28:40होता है ना? 1 दिन में 2 दिन में 4 दिन में 10
- 28:44दिन में जिसने दर्शन करने ही अंतिम वो कर लो।
- 28:50और फिर उसका अंतिम संस्कार कर दो। अपने धर्म के अनुसार जला दो या
- 28:55दफन दो तो मृत व्यक्ति का भी शव का भी अधिकार होता है।
- 29:06मैं इन संस्था के प्रभारियों को पूछता हूँ।
- 29:11बस यही गुरु की कदर है तुम्हारे मन में इतना ही प्यार है, ये तो
- 29:17यहाँ वदिकता पर है और तुम इसको सहज सम्मान विदाई भी नहीं देते।
- 29:2611 वर्ष से तुमने लटका रखा है इसके शव को लेपन, क्या इसने कहा
- 29:33था मरने से पहले के मेरे शव को इनकी वसीयत है।
- 29:38अभी के मेरे शव को कांच के भीतर रख लेना सुरक्षित इन्होंने कहा।
- 29:46तो आप फैसला कैसे कर सकते हैं? व्यक्ति का जीवंत का भी अधिकार
- 29:50होता है और मृत शव का भी अधिकार होता है।
- 29:55और अगर जो व्यक्ति जो संस्था जो संस्था के अधिकारी जो आज है, जो
- 30:01उस वक्त थे, बदल गए या वो ही है पतन।
- 30:09उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए कि आपने इस सब को इसके
- 30:15अधिकार से वंचित क्यों रखा है? इतने साल तक क्यों इसको सह सम्मान
- 30:21विदा करना था और तुमने कांच के इसी समय से क्यों रख दिया?
- 30:27अंतिम संस्कार से रोकना, शव को छुपाना, ठंडे कमरे में
- 30:33अनिश्चितकाल तक रखना, शव के साथ दुर्व्यवहार करना ये सब कानूनन
- 30:41गुनाह है। आई पीसी की धारा 297 आई पीसी की
- 30:48धारा 201 आई पीसी की धारा 202, 166 ए 218, 221 इन धाराओं के
- 31:05अंतर्गत दंड का प्रावधान है और जिम्मेदार कौन है?
- 31:10संस्था के अधिकारी गण उनके ऊपर एक और धरा लगी है 120 बी षड़यंत्र।
- 31:25और सबसे बड़ी बात धाराओं के अतिरिक्त शव का अधिकार और कोट्स
- 31:39शव को भी सम्मान देती है। ठीक आपके गुरु बोल नहीं सकते, बता
- 31:45नहीं सकते ये जो तुम इधर उधर से बकवास करते हो कि मेरे सपने में
- 31:51गुरु जी आये, वो आये, ये कह गए वो कह गए सरासर झूठ है।
- 31:57सब को सब की दृष्टि से सहज सम्मान विदा करना चाहिए था।
- 32:05अब न्यायालय को हस्तक्षेप करने चाहिए।
- 32:11न्यायालय ने मैंने सुना है। कि दिसंबर 2014 में फैसला लिया था
- 32:18कि 15 दिन के भीतर भीतर इसका संस्कार कर दिया जाए।
- 32:25क्या आशुतोष जी महाराज कोई वसीयत कर चूके थे कि मेरे शव को मैं
- 32:31वापस आऊंगा? मेरे शव को इतनी?
- 32:35दिन तक या साल तक संभाल के रखना है, तो दिखाओ अगर नहीं है, तो आप
- 32:48सभी अपराध जो भी इस संस्था के। प्रभारी हूँ, प्रधान है या
- 32:56सेक्रेटरी है या कोई किसी भी पद पर है या मेम्बर है सभी ही
- 33:05जिम्मेदार हैं। इन सभी धाराओं के अंतर्गत के
- 33:10अलावा। षड्यंत्र करना, षड्यंत्र करना 120
- 33:18बी कुल मिला के इन समधारों का अगर जोड़ेंगे हम तो आपने सभी धारों का
- 33:30उल्लंघन किया है, आप अपराधी। 297, 20120266 ए और 120 वे।
- 33:51आपने अपने गुरु के शब का अकारण ही अपमान किया है।
- 34:01वो गुरु जिसके लाखों से है वो गुरु जिसने आपको प्रेम का मार्ग
- 34:09सिखाया। वो गुरु जिसने आपको जल का दीपक
- 34:17बनकर रोशनई दिखाई उस गुरु को आखिर के वक्त वो बोल नहीं सकता।
- 34:28ये आपका प्यार है कि आप उसको दंडित कर दो, वो जाते जाते कोई
- 34:35वसीयतनामा करके गए तो फिर आऊंगा या कोरी बकवास है या और डेरों की
- 34:44तरह यह डेरा भी? जायदाद की भड़ चढ़ गई।
- 34:52अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए, सरकारों को हस्तक्षेप करना चाहिए।
- 34:58सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए जब एक कोर्ट ने।
- 35:06यह निर्णय दे दिया कि 15 दिन में इसका संस्कार हो जाना चाहिए।
- 35:11जिसने भाई अंतिम दर्शन करने हैं करे तो शव के अधिकार को वंचित
- 35:21रखने का दुस्साहस किस व्यक्ति ने किया या किस संस्था के?
- 35:26गणमान्य अधिकारियों ने किया। वह सब दंड के पात्र हैं।
- 35:31उनके ऊपर इन्हीं सभी धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
- 35:43उनको सजा लेनी चाहिए। इतने इतने वर्ष तक अगर उन्होंने
- 35:52जाते जाते किसी प्रकार का कुछ लिखित वसीयत किया है तो देखना अगर
- 36:02नहीं किया है। तो किस अधिकार के कारण तुम इस
- 36:07शब्द के अधिकार को खत्म कर रहे हो?
- 36:11शब्द का अपना अधिकार होता है सह सम्मान विदा एक व्यक्ति जिया
- 36:18तुम्हारे। तुम्हें दीपक की तरह खुद जलकर
- 36:24रोशन आई थी, तुम्हारा मार्ग प्रदर्शित किया और तुम उसको रुला
- 36:31रहे हो उसके शव को वो कुछ कम छोड़ के गया है तुम्हारे।
- 36:41मैं दातु से बिकूंगा, उन्हें स्वय संज्ञान लेना चाहिए और जो व्यक्ति
- 36:47यह कहता है कि मैं उसका पुत्र हूँ दिलीप झा तो जब वो कहता है कि आप
- 36:57टेस्ट करवा लीजिए, मैं आपको समझाता हूँ।
- 37:02सभी ये टेस्ट झूठे हो सकते हैं। डी या नहीं, कभी झूठा नहीं होता।
- 37:10बात तो सारी कुछ घंटों की जब एक व्यक्ति इतना बड़ा दावा कर रहा है
- 37:18दिलीप जा कि मैं उसका पुत्र मेरा डीएनए टेस्ट करवा दो तो आप उसका
- 37:26डीएनए टेस्ट कराए बगैर और अपने ही अधिकारों को जायदाद के ऊपर
- 37:35प्रभुत्व जमा के जो बैठे हो? अपने गुरु का अपमान करे हो और वो
- 37:43भी लाश का। शव का वह मृत हो गया बेचारा बोलने
- 37:48से, लेकिन हमसे तो बोलता है, हमसे तो कहता है।
- 37:56कि कुछ करो हमारा हमें नया गर्व दिला दो।
- 38:03आप किस अधिकार के अंतर्गत इस मुर्दा लाश को फ्रीजर में रखे हुए
- 38:11माइनस वै डिग्री सेंटिग्रेड पर बत।
- 38:18अनिल चौहान जी तुमने प्रश्न पूछा ये तुम्हारा प्रश्न नहीं है, ये
- 38:28न्याय का प्रश्न है यह सत्य का प्रश्न है उसको सह सम्मान?
- 38:36उसका संस्कार तो करना ही होगा। ये तो छोड़।
- 38:41अभी पिछले कुछ वर्षों में एक रेप केस हुआ था।
- 38:46दिल्ली में उसकी गूंज सारे विश्व में फैली हिंदुस्तान में खास
- 38:53फैली। जीस तरह से दुर्व्यवहार किया गया।
- 38:57उसकी लाश को भटक दिया गया। अब वो तो बेचारी बोल नहीं सकती,
- 39:01जो मर गया वो बोल नहीं सकता आपके गुरु के, वो तो आपने में रख दिया
- 39:06बड़ा चित्र जीत जैसे आपका अधिकार हो शव पर किसी का अधिकार नहीं तो
- 39:12देखो। शव पर अधिकार उस व्यक्ति का होता
- 39:16है जिसका शव है और उसे सह सम्मान विदाई चाहिए थी।
- 39:21आपने नहीं दी आपने अधिकारों का आनंद लिया।
- 39:25प्रथम दृष्टया आप पर केस होना चाहिए।
- 39:30अदालत यह है न्याय की। डिमांड अब अब संस्कार नहीं होना
- 39:40चाहिए। उसका सबसे पहले आपके ऊपर केस दर्ज
- 39:42होना चाहिए। अभी जो आपने इतने साथ रख लिया अभी
- 39:47और रखो, कोई बात नहीं और संस्कार करने से पहले।
- 39:53दिलीप झा नामक व्यक्ति का सत्य और झूठ परख लेना चाहिए।
- 39:57कहीं ऐसा न हो कम यहाँ गरीब मार कर दे।
- 40:01डीएनए टेस्ट कभी झूठा नहीं होता। मैं आपको बताता हूँ क्योंकि मैं
- 40:05साइंटिस्ट हूँ, वैज्ञानिक की भाषा अच्छी तरह से करता हूँ।
- 40:10वैज्ञानिक कभी ऐसा बोलता नहीं। डीएनए टेस्ट में 99% से ज्यादा
- 40:1799.9999% सत्य होता है। मतलब इतना सा सेंटीफिक तो रख ही
- 40:26लेते हैं मैं कहता हूँ 100% ही सत्य होता है आज।
- 40:32अगर कोई टेस्ट है वारिसाना हक के लिए जैसे एनडी तबाड़ी केस में हुआ
- 40:38एनडी तबाड़ी जीवद थे, वो कहते मेरा बच्चा नहीं तो उस बच्चे ने
- 40:43कहा मेरा डीएनए टेस्ट करा दो। डीएनए टेस्ट किया और डीएनए झूठ
- 40:49नहीं। अभी एक कांड हुआ, प्लेन क्रैश,
- 40:57आपने शब्द दिए संस्कार के लिए किसको दिए आफ्टर मैचिंग ऑफ डीएनए
- 41:03ट्रस्ट? उसमें हमारे पंजाब के भाजपा
- 41:07प्रभारी भी थे विजय रूपाणी। तो डीएनए टेस्ट करने के बाद उनके
- 41:14वारिसों को लाश मिल गई। अब क्या ये लाश के ऊपर अधिकार जो
- 41:22क्लेम कर रहा है और इतना बड़ा क्लेम कर रहा है कि झूठ नहीं होता
- 41:28वो? डीएनए टेस्ट 100% सही होता है।
- 41:32आज के जमाने में कोई साइंटिफिक विधि ऐसी नहीं है जो कि इसको झूठा
- 41:38करार दे सकता है। तो क्यों नहीं दिलीप जोशी झा का
- 41:46डीएनए टेस्ट होता है? बड़े ढंग है आशुतोष जी महाराज के
- 41:52बड़े गहरे बाल, दाढ़ी, बालों से नाखून से टेस्ट हो सकता है।
- 42:02ब्लड सैंपल्स ये तीनों मौजूद हैं। अभी व्यक्ति को दफन नहीं किया
- 42:07गया। अगर आप आग लगा देते तो त्रस्तकार
- 42:11खत्म था, लेकिन गनीमत है कि आपने नहीं आग लगाई।
- 42:19चलो अब दोषी में न्याय मिलना चाहिए।
- 42:26सत्य को न्याय मिलना चाहिए। अगर दिलीप झा का दावा सही है कि
- 42:34मैं इनका जे आइवी का पुत्र बायोलॉजिकल सन तो डीए एनए टेस्ट
- 42:43मांगू ली टेस्ट ये कोई बहुत बड़ा टेस्ट?
- 42:49जो आप हर सप्ताह या हर दो सप्ताह में डॉक्टर को बुलाते सब का माइना
- 42:54करते हो। क्या आपकी अन्य श्रद्धा साइंस को
- 43:01महत्त्व देंगे? और फिर क्या वो वापस आई ये तो
- 43:05मेरे पास यहाँ बैठे हैं मैंने पहले भी दो बार बोला मैंने कहा
- 43:11नहीं आएगा भाई यह नहीं आएगा ये यहाँ बैठा है मेरे पास रोज़ सुन
- 43:16रहा है पांच वर्ष से मैं बोल रहा हूँ।
- 43:23और अब तो आशुतोष आम भरी ये भी भेट चिढ़ गई।
- 43:28ये कहती हैं कि महस के धर्मपत्र में छोड़ो, ये न्यायिक मसलें।
- 43:39न्यायिक प्रणाली की बात सत्य है या झूठ ये अदालतें करेंगी?
- 43:46हम नहीं करे, लेकिन मैं इतना सा कहता हूँ न्याय में विलम्ब और
- 43:51इतना इतना विलम्ब तो बिल्कुल भी नहीं हो रहा है।
- 43:54ऐसे किस में विलम्ब की शव को उसके आखिरी सम्मान से वंचित कर दिया
- 44:00जाए? उसका संस्कार ही न हो।
- 44:06मैंने धरती के ऊपर पहला केस देखा है एजिप्ट की ममीज़ देखी मैंने,
- 44:13लेकिन आफ्टर डेथ उन्हें वरी कर दिया क्या सह सम्मान को?
- 44:21इसाईत में इस्लामियत में व्यक्ति को मर्दा होते ही दफन कर दिया
- 44:28जाता है। लेकिन तुमने ये सजा की हो रखा हुआ
- 44:31है। तुम्हें पक्का पता है वो आएगा 11
- 44:38साल का नहीं आया। इस अंधविश्वास के कारण क्या
- 44:45अदालते भी अंधी हो गई थी? अदालते ये विश्वास रखती हैं कि
- 44:53कोई फैसला न करना और शिंचे में बने रहना अदालतों का अविश्वास।
- 44:59जताता है कि श्रद्धा ठीक हो सकती है।
- 45:05तो फिर इसका मतलब अदालतें भी अंधी हो गई।
- 45:09क्या न्याय को श्रद्धा के हिसाब से ही चलना चाहिए?
- 45:16न्याय को श्रद्धा के हिसाब से चलना चाहिए।
- 45:19फिर न्याय रहेगा। अदालते हैं किसलिए?
- 45:24क्या आपको ये कहा जाता है कि अगर न्याय के ऊपर श्रद्धा भारी पड़
- 45:31जाए तो श्रद्धा को जीता देना तो फिर आपको गलत बात पढ़ायेगा मैं
- 45:37बेहिचक बोल। अगर आप के कानून में यह बात लिखी
- 45:44कि न्याय के ऊपर श्रद्धा को अधिमान दिया जाए तो आपको पाठ गलत
- 45:49पढ़ाया गया है। अदालतों का ये कर्तव्य भी बनता है
- 45:54और अधिकार भी। कि वो फौरन स्वःसज्ञान ने अपनी
- 46:02टीम भेजकर देखे हैं। जो भक्ति 11 वर्षों से क्लिनिकली
- 46:06डैड है और देखिए जो समझदार आदमी है, जो साइंटिफिक या मेडिकल।
- 46:16जानकारी रखता है। जो व्यक्ति मेंटल ब्रेन जिसका डेड
- 46:23हो गया है, वह आना भी चाहे तो नहीं आ पाएगा।
- 46:27कैसे आ पाएगा बताओ? 12 मिनट के बाद 12 मिनट सिर्फ।
- 46:35ब्रेन डट होना शुरू हो जाता है और करीब 3 घंटे में तो सब डट हो जाता
- 46:43है। क्या शंकर की कहानी को सत्य मानकर
- 46:51आशुतोष को 11 वर्ष के लिए यह दंड देना?
- 46:56गुरु के लिए सम्मान प्रकृत करना ये आपके गुरु हैं क्या?
- 47:05और आप गुरु को इस तरह से सम्मानित करोगे?
- 47:07शीशाओं के बीच में मूर्तियों की तरह झड़के एक व्यक्ति बाहर बैठा
- 47:14है। जो कहते हैं मैं जैविक मैं अच्छी
- 47:21तरह से जानता हूँ, ये क्यों हो रहा है?
- 47:24मैं रोज़ बोलता हूँ। आप जैसे संस्थानों के स्वयंसेवक
- 47:31कहलाती हैं जो। होते हैं।
- 47:33सच में उत्तराधिकारी गलत तरीके से जायदाद को हड़पना चाहते हैं, वो
- 47:40लोग ऐसे काम किया करते हैं, फिर अदालतें किसलिए?
- 47:43न्याय करने के लिए अदालतों को बीच में कूदना चाहिए, अदालतों का
- 47:49अधिकार है और कर्तव्य भी है। अगर अदालतें निष्क्रिय बनी रही तो
- 47:54हम समझेंगे, अदालतें निकामी हो, आपका काम है न्यायगण आपका काम
- 48:06श्रद्धा। न्याय के ऊपर थोप दी जाए को नीम
- 48:11के ऊपर शुगर कोटेड कर दिया जाए। ये कानून अदालतों को स्वसंख्या
- 48:21लेना चाहिए। अगर छोटी अदालतें नहीं स्वसंख्यां
- 48:24लेती। तो सुप्रीम कोर्ट को सश देना
- 48:27चाहिए। क्या सब को उसका अधिकार नहीं होना
- 48:30चाहिए? मैं जायदाद की तो बात ही नहीं
- 48:32करता। जायदाद की बात तो मैं तो सब की
- 48:36बात करता हूँ। यह है व्यक्ति जो मेरे पास बैठा
- 48:39रो रहा है और पहले दिन मैंने आपसे कहा था।
- 48:45अगर आप ठीक से जायदाद हड़पने का आपके मन में विचार नहीं था तो उसी
- 48:53दिन मेरी बात का संज्ञान ले लेते। आप सोच लेते विचार कर लेते आप
- 48:57अपनी मीटिंग। मैंने जो बोला मेरी बात में दम
- 49:05है, सत्य है या मैं है जी मैं बकवास कर रहा हूँ तो फिर वो मैंने
- 49:12कहा ये नहीं आएगा तो फिर ये आए ये तो आप भी मेरे पास बैठे हैं।
- 49:19अरुण चौहान जी ये देखो रोज़ सुनते हैं मेरे परिजनों ये धक्के सा ही
- 49:27है और अगर मेरे जैसे लोग यहाँ नहीं रहेंगे या नहीं होते तो ये
- 49:35बात कौन करता सारी सारी धरती पे कोई बोला?
- 49:40सारी पृथ्वी पर सारे हिंदुस्तान में कितने लोग कहते हैं कि हम
- 49:45प्रबुद्ध हो गए? हम नहीं जान लिया कुछ कोई बोला ये
- 49:50आशुतोष मारा मारा फिरता है। क्या किसी ने इसकी आवाज़ सुनी?
- 49:57सुनना जानते ही नहीं, उनके तीसरा नित्र हैं ही नहीं।
- 50:01उनके ज्ञान चक्षु हैं ही नहीं। उनके दिव्य चक्षु हैं ही नहीं।
- 50:04वो सुन ले जो सुनने वाला एक था उसको वो सुना गए और वो मेरे पास
- 50:11ही बैठे हैं मैंने आपको ये चीज़। ब्रॉडकास्ट करते हैं, अवश्य ही
- 50:20आपने सुनी होगी। ये कैसे हो सकता है कि आपने ना
- 50:25सुना। फिर मैं दूसरी बार बोला।
- 50:27आपने फिर अन्न सुना कर दिया। अब आज अनिल चौहान का फिर ये
- 50:33प्रश्न आया। क्योंकि आज का दिन मैंने सूक्ष्म
- 50:37शरीरों के लिए ही रखा है। मैंने ना तो आशुतोष की जायदाद से
- 50:45कुछ लेना, ना आशुतोष के किसी प्रकार के शिष्यों से कुछ लेना।
- 50:54ना जायदाद के मालिका, ना हक में कौन कौन व्यक्ति है, मैं नहीं
- 50:58जानता। आशुतोष के मरने से पहले मैं एक
- 51:03कमरे में बंद बैठा हूँ, मैं तो जानता भी नहीं।
- 51:07आपका डेरा कहाँ है? लेकिन जब ये मेरे पास हाथी
- 51:14झल्लाता है तो मेरा कर्तव्य बनता है।
- 51:18आप मानो या ना मानो मैं अपनी बात कह दूँ।
- 51:21आप चाहे मुझे मोरू की सुन लो, इतने समझोगे समझो लेकिन मैंने
- 51:29अपनी बात। आप तक पहुंचाने का पूरा प्रयास
- 51:32किया, आपने नहीं माना तो अब कोर्ट संज्ञान में ये धाराएं जो मैंने
- 51:38अपने घनाईं आप ज्यादा समय था, अब सब धाराएं को पढ़कर जज बने अब
- 51:47नायक। जिन्होंने ये पाप किया उनको दंडित
- 51:54करो और जिनको न्याय मिलना चाहिए। वाकई ही अगर दिलीप झा जैविक पुत्र
- 52:00है तो उसका डीएनए टेस्ट करवाओ। अगर वो झूठ बोलता है तो उसको भी
- 52:07इसकी सजा दो। कि तुने झूठ क्यों बोला?
- 52:14क्योंकि इससे जैविक पुत्र होने का कारण एक बहुत बड़ा धब्बा है।
- 52:20आशुतोष के चरित्र पर वह खुद को कर्मचारी रहता है।
- 52:28अगर दिलीप जा डीएनए में उसका जैविक पुत्र कंसिडर हो जाता है तो
- 52:35आशुतोष जी महाराज का संस्थान तो गया।
- 52:39उनका कमाया हुआ सम्मान भी खराब हो जाएगा।
- 52:46क्यों उसने झूठ बोला? मैं ब्रह्मचारी और ये जैविक पुत्र
- 52:50उसका दावा कर रहा है और सभी प्रमाण आपके पास हैं।
- 52:56फिर न्याय में विलंब क्यों? फिर न्याय में विलंब क्यों?
- 53:03अगर मेरी आवाज़ वहाँ तक पहुंचती है तो।
- 53:08नहीं जो भी इस सदिव्य संस्थान का व्यक्ति सुन रहा हो मेरी इस बात
- 53:15को पहुँचाए न्याय मिलना चाहिए। सबका खुद का भी अधिकार होता है।
- 53:21जीवित व्यक्ति का अधिकार तो होता ही है।
- 53:24लेकिन जीवित अगर प्राण विहीन हो गया तो उसका अधिकार बरकरार है।
- 53:28उसको सह सम्मान विदाई मिलनी चाहिए।
- 53:31उसके शव को उसके शव का अधिकार देना चाहिए और जिसने कोताही बरती
- 53:36है वह दंडित होनी चाहिए, छोड़ नहीं देनी चाहिए।
- 53:40अब छोड़ने का कोई कारण नहीं बनता। जिसने इतना असम्मान कर दिया जिसने
- 53:47इतनी बेइज्जती कर दी सब की उस सब की जो बेचारा है, जो कुछ कह नहीं
- 53:53सकता, जो हाथ पांव तक नहीं हिला सकता, जो शरीर में प्रवेश करना
- 54:00चाहता वो प्रवेश नहीं कर सकता। अब हम तो सेंटिक वेद से जानते हैं
- 54:05कि ब्रेन डेड होने के बाद व्यक्ति आ ही नहीं सकता।
- 54:08अगर आना भी चाहे, यही दुविधा है तो मैं न्याय की गुहार लगाना कभी
- 54:20भी गलत नहीं होता। पाप तो बिल्कुल ही नहीं होता,
- 54:27न्याय की अपील करता हूँ, जीतने भी संस्थान के सेवक हैं या शिष्य
- 54:33हैं। तुम बात को सुलझाती करो, वो आएँगे
- 54:40वो आएँगे। कब आयी, कब आयी अब ये?
- 54:49आशुतोष अंबरी कह रही थी कि 30 समय में मैं गुरु जी को देख के वापस आ
- 54:52जाऊंगा और मैंने सुना है कि 200 कुछ दिन हो गए इसको गयी को ये
- 54:59बैठिये तो यहाँ है। तुम्हारे पास कैसे आ जाएगी?
- 55:03गुरूजी कैसे यार जंगली बैठे हैं सब अनिल चौहान जी आप देख रहे हो
- 55:07की नहीं हस के ये हस के ये बहुत पैसे का हस रहा है।
- 55:21सबको सबका सम्मान मिलना चाहिए। मैं सिर्फ एक धार्मिक व्यक्ति
- 55:29होने के कारण इनको न्याय डलवाना चाहता हूँ, न इसमें मेरा कोई
- 55:37प्रयोजन है, न इसमें कोई मेरा। हेतु तो बिल्कुल ही नहीं और
- 55:42स्वार्थ तो कथा ही नहीं मैं इतना बोला हूँ क्योंकि इसकी रूह ने
- 55:49मेरे आगे आँखें पुकार क्या आप बोल सकते हैं अकेले आप बोल दीजिए कृपा
- 55:56मैंने बोल दिया अब तीसरी बार बोल रहा हूँ आज।
- 56:03अगर कोई शिष्य है इनका तो मेरी बात को समझो ही।
- 56:07इस क्लिनिकली डेड आपके कोई घर का व्यक्ति श्रम करना आपके कोई घर का
- 56:13व्यक्ति मर जाता है और डॉक्टर कहता है ही इस डैड।
- 56:17क्या आप उसको शीशियम में रख देते हो?
- 56:21मुझे बताओ हो सकता है वह भी वापस आ जाए।
- 56:25साल भर नहीं हो सकता नहीं हो सकता।
- 56:29आप आपके आपके पिता के लिए नहीं हो सकता आपके माँ बाप के लिए नहीं हो
- 56:35सकता। और आशुतोष के लिए हो सकता है यह
- 56:41दोगली न्याय प्रणाली नहीं होनी चाहिए।
- 56:45ये गलत आप फ़ौरन डॉक्टर के डिक्लेर करते ही आप सारा सम्मान
- 56:51मांगा लेते हो कि संस्कार करो भाई।
- 56:53डॉक्टर ने क्लिनिकली डैड डिक्लेर कर दिया है।
- 57:03आस्था न्याय से ऊपर नहीं होनी चाहिए।
- 57:09अदालतों से मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूँ।
- 57:15अदालतों का दायित्व भी है। और अधिकार तो है ही है, फिर आप
- 57:22अपने अधिकार का प्रयोग क्यों नहीं कर रहे?
- 57:28अनिल चौहान जी पूछते हैं कि अगर जैसे न्यायालय ने यह आदेश दे दिया
- 57:33कि 15 दिन के भीतर आप शव को अग्नि दे दो।
- 57:37अगर इन्होंने अपनी नहीं दी तो कौन सा कंटेम्प्ट बनता है?
- 57:40ये कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट बनता है। न्यायालय ने आदेश दिया था और
- 57:46इन्होंने उसकी अवमानना की है ये बनता।
- 57:50है। श्री कृष्ण गोविंद हरे मुराद ए
- 58:06नाथ नारायण वासुते। नारायण वासुदेव पितुमातू, स्वामी
- 58:43सखा हमारे। पितुमात स्वामी सका हमारे हेनाथ
- 59:01नारायण वासुदेव। वह सुदेव।
- 59:42धन्यवाद।