Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Apr 26 - क्यों सृष्टि दुख का सागर है? अस्तित्व की जवाबदेही और तृप्ति का अर्थ!
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- 0:16मनुष्य चैन चाहता है, संतोष चाहता है, तृप्ति चाहता है प्रत्येक
- 0:35मनुष्य। तृप्ति की खोज में है, जबकि पशुओं
- 0:45को तृप्ति का पुष्पता ही नहीं है। इसलिए मानव जनम सर्वश्रेष्ठ माना
- 0:56जाता है। तुम तृप्ति की तलाश में हो और
- 1:08ध्यान रखना तृप्ति ही वहरह से है जीसको पीकर।
- 1:22तुम धन्य हो जाती हो जब कोई व्यक्ति, कोई सदगुरु, कोई
- 1:41मार्गदर्शक जिसने तृप्ति को पाया नहीं।
- 1:51और। उसके लक्षण बता देते हैं कि वह
- 1:58जोड़ रहा है सांसारिक वस्तुओं सांसारिक वस्तुओं से।
- 2:06जरूरतें बुरी होती हैं, तृप्ति नहीं आती।
- 2:17तृप्ति तो वह हीरा। है।
- 2:25जो भरी दुपहरी में गर्मी के मौसम में सड़क पर।
- 2:31पत्थरों को कूँक रहा है। और वहीं चैन की नींद सो जाता।
- 2:40है आप डल्लप के बिस्तरों पर। सारी रात निंदिया को बुलाते रहते,
- 3:01बस दोनों में तृप्ति का फर्क है। फिर अगर तृप्ति होती ही ना जैसे
- 3:16कुछ मार्गदर्शक यह भ्रम फैलाएं के तृप्ति होती।
- 3:31फिर तो भगवान को ढूंढना होगा, उसको ढूंढना होगा और उसको पीटना
- 3:40होगा। फिर तो माता पिता को भी पीटना
- 3:46होगा। तुम हमें कैसा संसार दिखाती हो?
- 3:56जहाँ चैन नहीं जहाँ करार नहीं जहाँ पल भर का हमें बाहर के ठेकों
- 4:10की शराब पी कर। सुरूर साधना पड़ता है लेकिन
- 4:20तुम्हारी बाहर की शराब तुम्हें मूर्छित करती है।
- 4:26तृप्ति नहीं, तृप्ति का तल? और मोर्चा का तल?
- 4:34ये दोनों अलग अलग है। मोर्चा के तल में तुम अपने आपको
- 4:42भूल जाते हो। कारण चाहे शराब चाहे।
- 4:51मादक पदार्थ हो वो गांजा हो व अफीम हो वो।
- 5:01एलएसडी हो तुम्हें मूर्छित करती है।
- 5:13और तृप्ति जागृति को कहते है। 150 साल का जीवन।
- 5:24है। और उस जीवन में भी कॉम्पिटिशन।
- 5:28है। आपने देखा बच्चा स्कूल जाने में?
- 5:35रोता है चिल्लाता? है।
- 5:40जिद करता है नहीं जाऊंगा क्यों? क्योंकि से खेल कूद में तृप्ति
- 5:50मिलती है। एक गाड़ी में एक परिवार सफर कर
- 6:00रहा था। एक भैस का मलक उसके बच्चे को
- 6:10कटड़े को फेंच रहा था और कटड़ा जा नहीं रहा।
- 6:21कटड़ा जद कर रहा था। भैस आगे आगे चली जा रही थी।
- 6:28भैस का मालिक उस कटड़े को खींच रहा था क्योंकि वह कटड़ा लूज़
- 6:35पिएगा। तो भैस दूध देगी अन्यथा भैस दूध
- 6:41नहीं तो उस गाड़ी के ऊपर चलता हुआ परिवार उसमें एक छोटा बच्चा था।
- 6:48एक अपने मम्मा से पूछने लगा, मम्मा।
- 7:00यह इतनी जद्द जो कर रहा है, इसको स्कूल भेज रहा है क्या तुम्हें वो
- 7:13ज्ञान होता है की तरह तुम्हें स्कूल भेजा जाता है?
- 7:24फिर। अगर इसी।
- 7:25का नाम ज़िन्दगी है तो माँ बाप की पूजा आज बंद हो गई।
- 7:40परमात्मा को लोग इंकार करने लगे। दुनिया नास्तिको।
- 7:47है। क्यों?
- 7:56क्योंकि इस धरती को बनाने का। कोई औचित्य नहीं रह जाता।
- 8:10अगर तृप्ति नहीं है तो संतोष नहीं है।
- 8:17हमारी हरियाणा में थ्यावस कहते हैं, कोई जल्दबाजी करता।
- 8:22है। उसे कहते हैं अरे थ्यावस रख।
- 8:29थोड़ा शांत रख। ठहर थोड़ा अगर इस संसार में तृपती
- 8:42नहीं है तो फिर इस सुख में तो। यही कारण बनता है सुसाइड का अगर
- 9:02तृप्ति की एक झलक भी मिल गई होती। आत्महत्या करने वाले को तो वह
- 9:13कितने ही दुखों में घिरा रहना मंजूर कर लेता है, आत्मघात नहीं।
- 9:21करता। एक निगाह बनी रहती दो तलक ये कभी
- 9:33ना कभी वह दिन आएगा। जब मैं तृप्त हूँ चारवाक मार्क्स।
- 9:50आज के तथा कथित आचार्य, नाम दान देने वाले या कुछ इसी प्रकार के
- 10:02फार्मूलास बताने वाले लोग दुनिया को रोज़ गर्त में दे रहे हैं।
- 10:14और दुनिया भी समझ लेती है कि ठीक है, गुरु बनाएं सब काम धाम ठीक
- 10:22है, सब अच्छा गुजर रहा है, लेकिन वह चूक जाता है।
- 10:36मैं तुम्हें आज। एक बात समझाता हूँ और यह बात मैं
- 10:43तो समझाने चला के मैं ध्रुप तो हूँ।
- 10:51तृप्ति का एक कतल? है।
- 10:59तुम सुख संसाधनों को ही तृप्ति समझ बैठते हो और वो सुख संसाधन
- 11:07तुमसे छीन लिए जाते हैं अंतिम वेला में जब तुम प्राण त्याग करते
- 11:14हो। उस तृप्ति की तुम्हें कोई भनक लगी
- 11:24नहीं और ऊपर से ये मार्क्स जैसे लोग बिना खंगाले बिना खोज।
- 11:41निष्कर्ष दे देते हैं परमात्मा नहीं।
- 11:49इसका सीधा सा अर्थ है कि चैन नहीं है करार।
- 12:01और बेचैनी में आदमी कहता है फिर बेचैनी में जीना भी क्या जीना
- 12:08होता है? एंड ही कॉमेक्स सुसाइड बे आत्मघात
- 12:15कर लेता है। या दूसरों को मार देता है।
- 12:23उसका बुनियादी कारण है कि उसको तृप्ति नहीं मिले।
- 12:31बुद्ध कभी कत्लोगारत नहीं करता। क्योंकि बुद्ध को तृप्त मिल गए
- 12:47तृप्ति को पाकर बुध ठहर गए। बाग दौड़ समाप्त हो गए, इसलिए
- 12:54मेरी दूसरी बात। फिर क्या है पटल पे लिख लेना कि
- 13:02जो गुरु तुम्हें दौड़ाता है वह झूठा है, जो गुरु तुम्हें ठहराता
- 13:14है वह सच्चा? क्योंकि तृप्ति की शुरुआत होती है
- 13:22ठहर से जब तुम ठहर जाओ तो धीरे धीरे धीरे।
- 13:35तुम तृप्ति की ओर बढ़ते चले जाओगे, तृप्ति तुम्हारे भी उसे
- 13:46बाहर मत खोजो। बाहर पदार्थ हैं, गद्दियाँ रुतबा
- 13:54हैं। मान सम्मान है दन के अम्बार है,
- 13:59सोना, चांदी, हीरे जवारा तक्षोत्साहस है।
- 14:03मित्र परिवार, लेकिन बाहर तृप्ति है और प्रत्येक मानव तृप्ति की
- 14:16तलाश में। बहुत।
- 14:21से लोग आराम। को तृप्ति समझ लेते।
- 14:24हैं, वो चूक जाते हैं। आराम तृप्ति नहीं होती।
- 14:38ज़रा सोचो तुम। कितने ही नरम नरम गदम गद्दों पर
- 14:44लेटे रहे। रात भर अगर तुम्हें नींद न आए,
- 14:56फिर क्या तुमने आराम वास्तव में किया जैसे सोए धरा?
- 15:05वैसे ही सुबह। उठ गए।
- 15:12अगर निद्रा में जाकर सुसुक्ति की पराकाष्ठा तक नहीं पहुंचे गहरी
- 15:19सुसुक्ति के तल को तुमने नहीं छुआ?
- 15:25तो फिर वह भी क्या सुना जीस, आराम ने तुम्हें तृप्ति के उस स्तर तक
- 15:37नहीं पहुंचाया तो फिर तुम सुबह उखड़े उखड़े से उठोगे।
- 15:49बहुत से लोग मेरे पास आ जाते हैं। बापन नींद नहीं आती।
- 15:58मैंने कहा तुम बहुत अभागे। हो क्योंकि यह परमात्मा किधर?
- 16:07परमात्मा ने तुम पर इतनी भी कर पाने के की तुम चैन से सो जा
- 16:16परमात्मा ने तुम पर इतनी भी कर पाने।
- 16:19के। की दो रोटी भोजन कर लो।
- 16:23तुम्हें इतनी भी भूख नहीं थी। तो तुम अभागे हो।
- 16:36कबीर के पास बाहर कुछ नानक के पास ही बाहर कोई खास।
- 16:45और बहुत से संतो के पास बाहर कुछ खास नहीं था।
- 16:51और बाहर गुलामी थी, लेकिन गुलामी के काल में इतने संत पैदा हुए।
- 17:04कारण कारण गुलामी बाधा नहीं बनते। संतत्व के पानी में जैसे सड़क पर
- 17:20पत्थर पीटने वाला, कूटने वाला। नरम गद्दों का मोहताज नहीं।
- 17:2920 ₹50,00,000 का भी सोना होना चाहिए, इसका मोहताज नहीं होता।
- 17:37वो उन कोटे हुए पत्थरों पर ही सो जाता है।
- 17:46और जब गहरी निद्रा की झुमकी वहल ही रहता है, फिर से उठ के काम
- 17:52करना शुरू कर देता है। उसने घंटा दो घंटा तृप्ति का वह
- 18:01तल छूआ। और फ्रेश हो गया तरो ताजा
- 18:18तुम्हारे पास सब कुछ हो। मेरे पास लोग यहाँ जाते।
- 18:31बाबा सब है। नींद भी आती है, भूख भी लगती है
- 18:39लेकिन मन फिर भी बरकता है। तृप्ति नहीं है।
- 18:54अगर तृप्ति आ जाए तो बाहर झोपड़ी भी ना हो।
- 19:01खुले आसन में आदमी चैन की नहीं सो जाएगा।
- 19:14बाहर राज़ अंग्रेजों का हो या किसी तानाशाह का हो, उसको कोई
- 19:20फर्क नहीं। पड़ेगा।
- 19:25क्योंकि उसने बाहर से। अपने आप को तोड़ लिया है।
- 19:32और भीतर चला गया उस स्थल पर जहाँ कोई बंधन नहीं होता, बंधन बाहर
- 19:39है, बंधन तुम्हारी चेतन खोपड़ी का है जैसे जैसे तुम भीतर चढ़ते
- 19:50जाओगे। तुम्हारा सुरूर और तुम्हें
- 19:59तुम्हारे बंधनों का पता नहीं लगेगा, जो आज कल के गुरुजन
- 20:14तुम्हें ज्ञान दे रहे। वो चेतन बुद्धि से दे रहे हैं,
- 20:24कभी उनसे पूछना कि तृप्ति होती है, वो कहेंगे तृप्ति नहीं, वो
- 20:32हँसेंगे नागपुर का। मतलब साहब?
- 20:45फिर अगर तृप्ति ही नहीं तो माता पिता पीटेंगे, बाल बच्चे कहेंगे
- 20:53माँ बाप से अगर संसार ऐसा ही था। और अगर इस संसार में तृप्ति थी ही
- 21:01नहीं तो तुमने काहे को हमें जन्म दिया?
- 21:10इन दुखड़ों से काहे को हमें सन्मुख किया?
- 21:17फिर परमात्मा को भी गालियां पड़ेगी।
- 21:20रोज़ अगर हाकमों को गालियां पड़ती हैं तो उसका कोई और कारण?
- 21:37उसका कारण है कि जनता अपने आप को दुखी महसूस करती।
- 21:47राजा की जनता उसके बच्चे है और तुम अपने पिता और माता के बच्चे
- 22:00फिर अगर ज़िन्दगी में चैन। और तुम्हारे हाथ में ही है, बच्चे
- 22:09पैदा करने ना काट। दुनिया।
- 22:18बनाने वाले क्या तेरे मन में? समाई काहे को दुनिया बनाई पुनः
- 22:37काहे को दुनिया बना। आगाजकर्ता को गालियाँ पूरा करती
- 22:54हैं, काज़ एंड इफेक्ट में काज़ को गाली पड़ती हैं, तुम हो कारण
- 23:03हमारे दुख का? अन्यथा तुम इतना स्पर्म फेंक देते
- 23:09हो। नालियों में इतने अंडानु नालियों
- 23:14में बहा देते हो, हमें भी बहा दिया बस जो बह गए वो कहाँ शिकायत
- 23:22करते? और बात भी ठीक है।
- 23:35अगर आचार्य ठीक है। तो?
- 23:38आचार्य को जन्म देने वाला आती है मार्क्स को जन्म देने वाला चारवां
- 23:47को जन्म देने वाला। आती है।
- 23:56जब दुनिया में चैन ही नहीं थी, जब दुनिया में रस ही नहीं थी, तो फिर
- 24:05तुमने हमें। इस नापाक दुनिया के दर्शन क्यों
- 24:10कराएं? बात भी ठीक है इसलिए एक शब्द कहा
- 24:26कि संत न होते जगत में तो जल मरता है।
- 24:34ऐसे ऊहापोह में जलती हुई ज्वालाओं के भीतर दौड़ धूप के अंदर
- 24:39कॉम्पिटिशन के इस वातावरण में जब एक दूसरे की टांग खींचने लगे हो,
- 24:47तुम एक दूसरे की गर्दन मरोड़। क्या जरूरत है?
- 24:57अगर तुम्हें तुम्हारे माँ बाप ने पैदा ही ना किया होता अगर गले में
- 25:10ये ढोल डाला ना होता तो तुम्हें पीटना पड़ता और गले में डाला हुआ
- 25:17ढोल व्यर्थ। यह तुम्हें बैठना पड़ेगा।
- 25:24इसलिए बहुत लोग लाचार होकर पहले ही प्राण त्याग देते हैं।
- 25:34कारण साफ है। जैसे बुध कहते हैं संसार में।
- 25:41रुख मैं तुम्हें कहता हूँ वो जो कृष्ण किसी पेड़ की शाखा पर बैठ
- 26:00कर ऐसा मधुर रस का संगीत अब घेरता है।
- 26:10लेकिन बुद्ध के लभों पर बांसुरी नहीं आती।
- 26:16बुद्ध कहते हैं संसार दुख है लेकिन कृष्ण कहते हैं संसार परम
- 26:26सुख है। कौन ठीक कौन करें?
- 26:37या तो संसार एक लोग ठीक है आचार्य ठीक है, कैसी मुक्ति?
- 26:44नागपुर का अगर मुक्ति नहीं होती तो इसका मतलब तृप्ति।
- 26:59बस आचार्य कहते हैं, खाते जाओ, भूख लगी है, खाते जाओ पेट।
- 27:03भर लो किसी तरह कल को ये भी कहेंगे कि लूट पाट करके भी भर लो,
- 27:10यहीं गड़बड़ हो जाएगा। कबीर तुमसे नहीं कहेगा, लूट पाट
- 27:21करके भर लो। कबीर कहेगा ना न कहेंगे तेरी मोज़
- 27:37वह? तेरी मोज़ किसे कह रही?
- 27:39हैं क्या पागल हो गए? पगला गए हैं।
- 27:43क्या उनसे ज्यादा समझदार या गहरे तल पर जाने वाले ये आचार्य हैं?
- 27:52ये मार्कर्स हैं, कर्म के सिद्धांत चारबाक जनता हैं।
- 28:02कहीं ऐसा तो कि ये चले ही नहीं और मंजल का पता ठिकाना लक्षण बता रहा
- 28:13है। ऐसा ही है इन्होंने यात्रा आरंभ
- 28:19भी में। और ये इतने नास्तिकों को छोड़
- 28:26जाएंगे, जो बेचारे सिस्टम को उलट पुलट करते हुए मर जाएंगे, उन्हें
- 28:35चैन और कारा तृप्ति। आनंद का रस।
- 28:40वो कहेंगे होता ही है। आह।
- 28:47क्या बात है? मैंने जो प्रथम बार यह शब्द
- 28:54आचार्य। के मुख से सुने।
- 28:57एक जन्नत आउट। हो?
- 29:05ज़ाहिर था इनका आई एस की कुर्सी को छोड़।
- 29:10दे। बुद्ध के तख्त तो ताज को छोड़ने
- 29:15के सामान्य। तुम्हें घटना यकसा लगेंगी,
- 29:24तुम्हें लगेगा आचार्य ने छोड़ दिया त्याग।
- 29:29किया। नहीं, आचार्य ने त्याग नहीं।
- 29:32किया। आचार्य ने।
- 29:38देखा के ज्यादा कहाँ से मिलता है यहाँ 10?
- 29:4620 लोग तुम्हारे हुक्म को मानें। अगर तुमने अध्यात्म की वह रेखा तो
- 29:58करोड़ों लोग तुम्हें मानेंगे, पांव छुएंगे पूजेंगे और तुम अपनी
- 30:07ये अधूरी अधूरी। शिक्षाओं को बांटते बांटते चले
- 30:15जाओगे। जाना तो सब में होता।
- 30:17है। अगर तुम दुखी हो तो तुम शिकायत
- 30:24करोगे तुम्हारे दुःख का कारण ढूँढोगे।
- 30:32और। पाओगे के मेरे माँ?
- 30:33बाप मेरे दुःख का कारण है क्योंकि मेरे जन्म का आगाज उन्होंने किया
- 30:38है और दूसरा परमा तुम्हारे मन से। माता पिता का सन्मान चला जाएगा।
- 30:59तुम्हारे मन से परमात्मा का सुखराना चला जाएगा।
- 31:07तुम कहोगे क्या खाक दिया है? गले में ढोल डालते हैं, गले में
- 31:15ढोल डाला तो बैठना पड़ा यह जो ढोल बीमार रहता है सैकड़ों प्रकार के
- 31:29रोगों से ग्रस्त। है।
- 31:32और ऊपर से ये तानाशाह लघु पिए जाते हैं।
- 31:38इनको अपनी ही पड़ी है आज नारी वंदन कानून पास कर।
- 31:51दो। तो क्या इन्हें मिल गया है?
- 31:54ये भी तलाश है अगर इन्हें मिल गया होता फिर ये भी ओहो को न करते
- 32:04हैं? अभी तलाश जारी है।
- 32:11ऊंची पद्बियों पे इन्हें लगता था मिल जाएगा मिलन और मिलता भी नहीं
- 32:20तो फिर ये कहते हैं कि अच्छे से भोग लो, हर प्रकार की भोग
- 32:27इन्होंने भोग लिए। छः छः बार दिन में ड्रेस बदलता
- 32:32है, छोटी छोटी बच्चियों से रेप करके देखती है।
- 32:40बड़ी स्त्रियों को हमने जो वोट डाला उसके कारण इनके हाथ में
- 32:47सस्ता आई। उस पावर का नाजायज लाभ उठाकर
- 32:53इन्होंने वीवश स्त्रियों को अपने साथ सोने पर मजबूर किया।
- 33:01क्या यह हमारी दी हुई ताकत का दुरुपयोग नहीं था?
- 33:08था। फिर।
- 33:11इसका मतलब हमने इनको गलत। वोट दिया, बिल्कुल गलत दिया।
- 33:18और इसमें जो भी भागीदार। है।
- 33:21जब दुनिया इनको वोट नहीं देगी तो ये ज्ञानचंद को।
- 33:34और जनता के प्रतिनिधि कोर्ट्स में जाएंगे।
- 33:40हाई कोर्ट राहुल पर फाइल आर करते है।
- 33:50सुप्रीम कोर्ट को खरीदने इन मूर्खों को नहीं पता।
- 34:01क्योंकि जिन पर राज़ कर रहे हैं वो भी तो कोई समझदार नहीं है, वो
- 34:09भी मूर्ख है और वो मूर्ख समझदार ना हो जाए।
- 34:15सारी तरकीब राजनीतिज्ञों की सदा यही रहती है इसलिए वो नए नए झूठ
- 34:23बोल के क्रियाकलाप करके अपने झूठ को सत्य बतलाने की चेष्टा करते ही
- 34:30रहते हैं। इस दुनिया में अगर चैन है फिर
- 34:42जीने का कोई परियोजन नहीं रह जाता।
- 34:51ऐसी ही बिखरती हुई दुखदायी तरंगों के संसार में फैलने से।
- 34:59व्याधियां खड़ी होती है। हर तरफ दुख है।
- 35:05हर तरफ कहीं भुखमरी है, कहीं लुटेरों ने भगवान के द्वारा दी गई
- 35:15सामग्री को अपने संदूकों में कैद कर।
- 35:20बैंक भर लिया है। ऐसे में लड़ाई झगड़ों के बीच में
- 35:38एक संत आता है। और वह कोई एक होता है सब ही नहीं
- 35:47हो जाता। है।
- 35:49उसकी इच्छा होती। कि सभी संत हो जाए, तुम देखना तुम
- 35:57जब सुखी हो जाओगे, सुखी व्यक्ति बांटने की चिष्ठा करता है हृदय।
- 36:08दुःखी व्यक्ति भी बांटने की चेष्ठा करता है लेकिन सय प्रयोजन
- 36:14कि मेरा दुःख दूर हो जाए इसलिए वह टूट के करेगा।
- 36:19दान करेगा, पुण्य करेगा श्राद्ध करेगा भय किसी ना किसी तरह।
- 36:27यह बिमारी, यह गरीबी, यह दुख, यह दर्द, यह बिमारी, रोग, कष्ट,
- 36:36तकलीफ यह दावे मुकदमे समाप्त हो जाएं तो बांटेगा।
- 36:47सुखी व्यक्ति खुशी से बांटे, दुख को दूर करने की मंशा से बांटेगा
- 36:56दुखी व्यक्ति, लेकिन वह बांटना बांटना नहीं होगा, मजबूरी होगी।
- 37:08अगर संसार दुख है, फिर जीने का कोई तुक नहीं।
- 37:14रहता मैं तुम्हें एक कुछ और कहने आया हूँ।
- 37:29मैं तुम्हें कहता हूँ सबको नकारता हूँ।
- 37:38तुम कहते कागद की लिखे तुम तृप्त हुए नहीं इसलिए तुम ये प्रचार
- 37:48करते हो? की तृप्ति होती नहीं नागपुर का
- 37:51संतरा कि उसके फलक को तुम बसीटों के और आँखों में घराओगे और आंसू
- 38:01आएँगे तो तुम आंसू गए। नहीं, ऐसी कोई हँसी तृपती नहीं।
- 38:06होती। ऐसी हँसी तो आँखों में जलन पैदा
- 38:10करती। है।
- 38:15यह तो इर्शारु लोगों का कृत्य होता है।
- 38:22एक हँसी वो है जो संत भी हँसता है, तुम देखना कभी संत को हँसते।
- 38:28वह फूट फूट के हँसता है, विकास इस इनोसेंट जस्ट लाइक उसकी।
- 38:40हँसी में भी मासूम है। तुम्हारे प्रचार करने में भी दुख।
- 38:52होता है। एक बात को समझ लेना अगर ये सत्य
- 38:59है कि संसार में दुख है और संसार को जिसने भी बनाया।
- 39:09तो बुद्ध ने तो इंकार ही कर दी कि कोई परमात्मा नहीं होता, जिसने
- 39:18इतना दुख भरा संसार बना दिया। तुम इसको कैसे रिस्पेक्ट दे
- 39:23पाओगे? ठीक भी।
- 39:26है। जब संसार में दुख है तो फिर उसके
- 39:36दुख के कारण को तुम दंडित करने का इरादा रखते हो।
- 39:42मैं गौशाला मंदिर में जाया करता। था।
- 39:48अक्सर एक जमींदार के साथ। स्प्रे करता स्प्रे करने से पहले
- 40:00नींबू जूस? था।
- 40:011020 फिर वो स्प्रे करता फिर वो ढोलकी को धोता उसी पानी में।
- 40:11मैं अक्सर बहनों से गुजरता, वह मुझे देख कर कहता राम राम जी मैं
- 40:22कहता राम राम जी और बिल्लू शाह क्या हाल है ईमानदार लोक से?
- 40:30मेहनत तो मजदूरी करने। वाले?
- 40:34मुझे कहता, पंडित जी। हाँ, ठीक है ना, मैंने कहा क्या?
- 40:40हुआ कहते है अगर मुझे परमात्मा मिल जाए।
- 40:49तो पंडित जी मैं सच कहता हूँ, वो सच ही कहता हूँ, उसके शब्दों में
- 40:53गुस्सा मैं उसको घसा घसा के इतना सक करता हूँ, बिल्कुल यही शब्द
- 41:01था, मैं उसको घसा गसा के इतना सक करता हूँ।
- 41:06मैंने कहा ऐसा भी क्या? उसे दुश्मनी है।
- 41:12अरे पंडित जी, दुश्मनी उस जैसी दुश्मनी किस्से उसने हमें बनाया
- 41:17है तो बात ठीक मैं उस वक्त तो नहीं समझ पाया नाचता?
- 41:26बेचारा परीक्षण बुध भी ऐसे ही परेशान हो गए।
- 41:33इतने बरसों तक दुःख के दर्शन नहीं होने दिया।
- 41:39शुद्ध धन्य उसके जागने से पहले पीले पत्ते चूक लिए जाते हैं।
- 41:45मर जाए फूल बांट लिए जाते, हरियाली ही हरियाली देखी थी उसने
- 41:52अपने जीवन में उसने मृत्यु का दर्शन भी किया था।
- 42:03फिर अगर दुखन अगर सुखन। तो तुम उस दुख का कारण खंगालोगे
- 42:17फिर माँ बाप के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति समाप्त हो जाएगी इसलिए
- 42:26आज लोग। अमेरिका में माँ बाप अगर डांट दें
- 42:33तो मेरे भाई ने बेटे को कुछ कह दिया, डॉक्टर है 911 पे चुपचाप।
- 42:48फ़ोन किया। थोड़ी देर में पुलिस आ गई।
- 42:52क्या बात यह मुझे हरैस करता है इस मेंटली हरैस?
- 43:07मेरे भाई को छह महीने कैद काटनी पड़ी।
- 43:13यहाँ तो तुम जूतियों से पीटते हो, किसी की घरवाली, किसी का घरवाला।
- 43:28और मजबूरी है के बंधी हुए तो वहाँ का कुछ कानून नरम कर दिया क्योंकि
- 43:38देखो हरस नहीं करना हरस मेंट इस क्राइंग कोई भी किसी को हरस
- 43:45करेगा। तो वह क्रम है जब थोड़ी सी
- 43:52रिलैक्शन्स मिली मनेजमेंट अच्छी है बाहर चुप रहा मार खाके।
- 44:05हमारी भाभी भी चुप रही, भाई भी चुप।
- 44:08रहे। चलो इंडिया घूम चले, ठीक है
- 44:14मातृभूमि के दर्शन कर नमस्ते सदा वत्सले मातृ।
- 44:27तीन ही लोग। हैं।
- 44:29एक ही बेटा यहाँ बीवी हैं यहाँ आ गए इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे के
- 44:42बाहर। 10 नंबर की जूती आती थी।
- 44:48पाइप है उसने वो निकाली और अच्छे क्षेत्र पर कहते हैं अब बोला
- 44:55पुलिस? खूब पीटाओ अरे हराम तुझे अगर मैं
- 45:09अमेरिका लेता हूँ तो इसका मतलब तू मुझे ही जेल दिखाए।
- 45:20संसार वाक्य। ही दुख है।
- 45:24जहाँ आओगे तो गरीबी, भुखमरी, शरारती सब जगह और वहाँ गरीबी
- 45:39भुखमरी। पैसा है खाने को सब है एन्जॉय
- 45:43करने। को सब है।
- 45:48इसलिए तो यहाँ से है हमारे मिस्टर इंडिया रोज़ जहाज उठा लेते हैं के
- 45:58देश के लिए कुछ। व्यवस्था करके आनी है अग्रीमेंट
- 46:02पर सिग्नेचर? करके आनी है क्या बताओ क्या
- 46:09आइसलैंड पे जा रही है? इनके भीतर से फिर झन्नाट्ट उठा
- 46:16है। मुफ्त का तेल है सरकार और तो सुख।
- 46:29मिला नहीं थी तो फिर चलो यहीं देख लेते हैं।
- 46:40ऐसे तानाशाहों हो, अमेरिका हो या इंडिया हो।
- 46:44या उत्तर हो या। पुतिन हो।
- 46:48उसको। इन लोगों ने तुम्हें कैद किया है,
- 46:54वो तो ठीक लेकिन इन लोगों ने संसार को कैद करने का सारा ढांचा
- 47:02घर लिया है। फिर क्या इन्हें संसार को अगर
- 47:09अपने हुक्म में चलाना शुरू कर दिया?
- 47:11क्या ये सुखी हो जाए? अगर ट्रंप ने वेन्जुवाला के
- 47:19राष्ट्रपति को उठा। फिर सभी के राष्ट्रपतियों को
- 47:26प्रधानमंत्रियों को। उठा रहा है।
- 47:31तो मैंने कल भी कहा जब वेन्ज वाला उसके अधीन आ गया ना तो भाई हम तो।
- 47:41खुद ही अमेरिका में जाना चाहते। हैं।
- 47:46जरूरत ही नहीं है। कुछ लोगों को एतराज होगा जो छे
- 47:51बार शूट न बदल पाएगा, जो मनमर्जी का मशहूर न खपाएं।
- 48:01तो जीसको चाहे जेल के लाखों के पीछे ना फेंक पाएंगे, उनको ऐतराज
- 48:08होगा। बिल्कुल होगा।
- 48:10मोटू राम को होगा क्योंकि मन शरारती है, मन अलवाद करता है।
- 48:21लेकिन हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम तो चाहते हैं।
- 48:26कि व्यवस्था बाहर की ऐसी हो चलो यहाँ से शुरुआत कर दो।
- 48:32कुछ रिलैक्सेशन तो मिले। बाकी की भीतर की व्यवस्था तो हम
- 48:41जानते हैं। वो तो हम रबदा की कोना ओद्रो
- 48:50पुटना के ए 10,00,000 दिल के आईने में थी तस्वीरें यार।
- 48:58दिल के आईने में थी तस्वीरें यार जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले हमारे
- 49:05लिए 2 दिन। आसन रस्ता है।
- 49:10बात ये है कि हमें तुम्हारा दुख दिखाने ये लंबे चेहर हैं।
- 49:16रोती आँखें दर्द के कारण एक आँखें खुशी में भिरोती जब तुम विराट हो
- 49:28जाते हो तब भी तुम्हारी आँखों से अश्क रुकते हैं लेकिन वो धन्यवाद
- 49:34के नाम से होते हैं। आज अज्ञान हार गया, आज ज्ञान जीत
- 49:51गया। झूम झूम के नाचूँ।
- 50:00नाचो गओ खुशी के ही आज किसी की हार हुई है।
- 50:16वह जो दुख देने वाला अहंकार था। वह मिट गया, वह हार गया।
- 50:22आज किसी की हार हुई है और किसी की जीत रे गौ खुशी के लिए।
- 50:48तो ऐसे माहौल में जब तुम्हारे लटके हुए चेहरे चारों तरफ संत
- 50:53देखता है तो बोलने की चेष्टा। करता है।
- 50:57नहीं संसार में दुखन संसार में एक स्थान ऐसा भी है जहाँ जाकर।
- 51:04तुम तरफ जाओ। संसार दुखन तुम में भ्रम हो।
- 51:14क्या? यह दुख तुम्हारे ही अज्ञान के
- 51:18कारण हुआ है। अज्ञान दुख की जननी है और अज्ञान
- 51:23का मतलब है इ को अहंकार तुमने खुद को ठीक से पहचाना नहीं रिमेम्बर,
- 51:31यूरसेल्फ नो। खुद से जानो अच्छी तरह से जानो,
- 51:35तुम हो और जीस घड़ी तुम ये जानोगे तो तुम।
- 51:40हो? तब तक संत की बातों को मान लो,
- 51:45सत्य बातों को मानने का कोई हर्ज नहीं।
- 51:48होता। झूठ बातों को मानने का बड़ा हर्ज
- 51:53होता है। अब पांच नाम परमात्मा तक पहुंचा
- 51:56देंगे। ये झूठ है, इसको मत मानो।
- 52:02धन्यवाद अलफ़ाज़ों में व्यक्त नहीं किया जा।
- 52:06सकता। धन्यवाद।
- 52:09चेतना के उन गहरे शरों से उठा करता है और शब्दों को शब्दों में
- 52:16ढल जाया करता है और शब्दों में ढलने के कृत्यों में ढल जाया करता
- 52:22है। जब एनलाइटन हुआ मेरे पिता जी जी।
- 52:34सबसे पहले आकर मैंने पिताजी और माताजी के चरण।
- 52:39स्पष्ट की है। इससे पहले मैं चरण से प्रश्न हूँ
- 52:46क्या तो का आगाज करने वाले यही लोग हैं?
- 52:53मन कहता मैं उनको कभी श्रेय नहीं दिया करता अगर यही ज़िन्दगी है।
- 53:10तो फिर जीवन देने वाला गलत है, फिर तो व्यक्ति को लाना दिया करता
- 53:25है। तेरा क्या बिगड़ जाता है?
- 53:31अगर तू हमें यह संसार न बात ठीक। लेकिन ऐसी कसम कसमें जब तुम किसी
- 53:47आचार्य से कहते हो तो मैं दुश्म शादी बंद है।
- 53:56तो वह तुम जैसा ही मुर्ख है। उसने वह तल छुआ नहीं जहाँ जाकर
- 54:02परम आजाती। होती है।
- 54:05उस बच्ची ने सवार बिलकुल ठीक पूछा।
- 54:10खिसयानी बिल्ली खम्भा नोचा। और बात भी।
- 54:17ठीक है, जब मैं इनकी ज़िन्दगी में देखता हूँ पहले पढ़ाई की, फिर
- 54:24कॉम्पिटिशन किया यूपीएससी उसके बाद आया प्रतिक्षण देखा।
- 54:34के ज्यादा चान्सेस तो इधर है। यहाँ की बजाय मौका ज्यादा उधर है।
- 54:50तो इधर लिखड़ लिए असल में जीस आचार्य की बात कृष्ण ने कही वो
- 55:01आचार्य ये नहीं है इनके शरण में मतलब अमनितोंम लंबितोंम हिंसा
- 55:08शांतिरार जबम। आचार्यों, उपासना, शोशम, सैरम,
- 55:13पातम, विनिग्रह, आचार्यों। पास।
- 55:22आचार्य के पास बैठ जा इन आचार्यों के पास मत।
- 55:25बैठ? क्योंकि जिसने अभी वह सबर संतों
- 55:31का दल नहीं छूआ, उसके भीतर से जैसी किरणें निकलेंगी वो लासवानी
- 55:40तरंगें और सही आचार्य का मतलब कृष्ण जो बताते हैं।
- 55:48जिसके भीतर से भ्रम आसनिक सुंदर तरंगें निकल।
- 55:52रही हैं। तुम्हारे जीवन को सुखद और आसान कर
- 55:57देते हैं उसके करीब पैक आचार्य उपआसन ऐसे आचार्य के करीब आसन
- 56:07बिशाके बैठ तो कहते थे मुक्ति मुक्ति क्या होती
- 56:22है आचार्य जी तो हँस। एक कटु मुस्कान।
- 56:33बच्चे को नीचा दिखाने की वंश से युक्त एक व्यज्ञात्मक सी वह
- 56:43नागपुरी सुन झरनाटा उठा मेरे। यह करोड़ों लोगों को मूल खबर।
- 56:54है। खुद ही उस स्थल पर नहीं उतरा अगर
- 57:04इस धरती पर बंधन नहीं होता रिश्तों में।
- 57:10तो आठ शादी तो कृष्ण ने की। वैलिड स्टैम्प्ड और 16,100 बंदी
- 57:24बनाई गई नरका सुर के द्वारा बोमा सुर के द्वारा उन्हें मारकर उनकी
- 57:30कैद से रिहा की गई। जो राजकुमारियाँ थीं, जो सुंदर दम
- 57:38राजकुमारियाँ थीं, राजा लोग उन्हें उठा लेते थे।
- 57:44यह तानाशाही आज नहीं शुरू हुई है। आज तो बहुत।
- 57:47अच्छा माहौल है। बहुत गंभीर किस्म की तानाशाह इस
- 57:54धरती ने देखी 16,100 राजकुमारियां कहने लगीं प्रभु आपने मुक्त तो
- 58:05हमें करा दिया यह जल्लाद हमें पीटता था शोषण।
- 58:12अब हमें हमारे घर वाले स्वीकृत नहीं करेंगे, समाज हमें अपनाएगा।
- 58:20अब तो हम ज़्यादा कफलत में पड़ गए, ज़्यादा परेशानी में आ गए,
- 58:26क्या करे? आदमी तो कहीं भी निकल जाए आदमी तो
- 58:3675 के बाद सन्यास ग्रहण कर लेता है लेकिन कोई स्त्री सुनी है
- 58:44जिसने आज तक सन्यास ग्रहण किया। क्यों नहीं करती क्योंकि स्त्री
- 58:50असुरक्षित महसूस करती है? अगर अपने पति के साथ वह भी
- 58:57संयुक्त हो जाएगी और ये शरीर का क्या भरोसा है?
- 59:06किस घड़ी धड़ाम न हो जाए फिर यह अकेली स्त्री क्या करेगी?
- 59:13बच्चे भूल गए होंगे, इसके दायित्व से मुक्त हो गए होंगे।
- 59:20कहाँ जाएगी स्त्री? इसलिए स्त्रियों को सन्यास नहीं
- 59:28लेना चाहिए। पुरुष जहाँ चाही जाए स्त्रियाँ घर
- 59:37में ही है इसलिए घर वाली शब्द वहाँ से घर में ही रहेंगी।
- 59:46अंतिम प्राण त्यागनी तक रहना भी चाहिए, नहीं तो उसकी दुर्गति
- 59:52होगी। फलस्थ ऋषि जब मरने लगे अपने पुत्र
- 1:00:03को बुलाया विषर्भा ऋषि को। ये सब ऋषि की संतानी थीं।
- 1:00:07रावण जैसे विशर्भा से कहने लगे पुत्र सुन अपने कुल में एक अत्या
- 1:00:17जारी मानव जन्म लेगा। वह जब जन्म लेगा।
- 1:00:28तो तू इस लंका को छोड़ देना पलस्त और विशर्भा दोनों ही उस तल पर गए
- 1:00:37हुए लोग थे जिसे आचार्य कहते हैं नागपुर।
- 1:00:42का? मुक्त हो चूका है।
- 1:00:47सर मुक्ति का मतलब क्या है? टु नो गाय असल में तुमको शरीर हो,
- 1:00:58इन्द्रियां हो, मन हो विचार। हो?
- 1:01:01भावनाएँ हूँ जरूरतें हों, अंकांक्षायें हूँ वोकबुलरी हो,
- 1:01:13सूचनाएँ हूँ क्या हो तुम? बस इसी द्वंद में तुम घिसटते चले
- 1:01:21जाते? हो?
- 1:01:23सुविधा में दोनों गए माया मिली ना राम तुम फैसला ही नहीं कर पाते कि
- 1:01:32संत ठीक हैं या संसारिक और आय तो एक।
- 1:01:45पहले दो कैटेगरी होती थी। यह तो संत होता था या परमात्मा को
- 1:01:52न मानने वाला असंत होता था। मार्क्स चारवाग न उसका विधान है
- 1:02:00कुछ। ना वो है किसी अक्शॅन का कोई
- 1:02:07रिएक्शन नहीं होगा। यह न्यूट्रान का सिद्धांत होगा,
- 1:02:13लेकिन परमात्मा का सिद्धांत नहीं। आज तीसरी कैटेगरी पे था।
- 1:02:21वो परमात्मा का व्याख्यान भी करते हैं और परमात्मा का मतलब तृप्ति
- 1:02:33को व्याख्यान भी करते हैं, लेकिन शब्दों से जबकि तृप्ति।
- 1:02:40शाब्दिक नहीं। होते।
- 1:02:42अस्तित्व दत्त होते। है।
- 1:02:45तृप्ति में तुम्हारा सारा अस्तित्व ठहर जाता है।
- 1:02:50तुम शूद्र से बराठ हो जाते हो, परम विराठ हो जाते हो विशाल।
- 1:02:54हो जाते हो। तुम्हारे दुख दर्द तकलीफ से मिट
- 1:03:01जाते हैं, विचार ठहर जाते हैं, तुम रुक जाते हो और तुम आनंद से
- 1:03:10युक्त 2400 घंटे उषा अमृत रस का पान करते रहते हो।
- 1:03:18यह है और यह लोग बेरडे हैं। बेरडे ना इधर के, ना धोबी का
- 1:03:27कुत्ता, ना घर का इधर तो सिर्फ ऑपर्च्युनिटीज़ देखकर आयास की
- 1:03:38कुर्सी छोड़ दी है। और यहाँ लोगों को मूर्ख बनाना
- 1:03:44शुरू कर दिया, वहाँ कुछ एक लोग इनके अधीन थे यहाँ मूर्खों की
- 1:03:50संख्या बहुत जीने का ढंग भी सखाएंगे।
- 1:03:59जबकि ज़िन्दगी का ढंग इन्हें स्वयं ही नहीं आया।
- 1:04:09बंधनों से मुक्त होने के उपाय भी बताए।
- 1:04:14कारण? को मिटा दो।
- 1:04:15बच्चे ही न कुछ शादी ही न कुछ। ये एस्केपिस्ट किया करते हैं बचने
- 1:04:30में कृष्ण बचते हैं उस तल पर पहुंचा हुआ व्यक्ति बचने की
- 1:04:38चेष्टा नहीं करता। वह जान गया बंधन होता ही।
- 1:04:44इसे ही मुक्ति कहते हैं। नागपुर का संतरा मुक्ति होती है
- 1:04:53टू नो द इन ए रियल ऑथेंटिकली हू आर।
- 1:05:00मान्यता के रूप में तो तुम शरीर हो इंद्रिय हूँ विचार हूँ,
- 1:05:04बाबुनाय हूँ, लेकिन ऑथेंटिसिटी क्या है तुम्हारी हूँ आर यू रमण
- 1:05:12कहते हैं। सभी संत कहते हैं नो दाए सर
- 1:05:23रिमेम्बर योरसेल्फ, याद करो तुम भूल गए हो।
- 1:05:31हीरे के ऊपर गोबर की बर्द पिछड़ गई।
- 1:05:36और हीरा अपना स्वभाव भूल गया, गोबर के परते ही हो गया जैसे उसका
- 1:05:43होना उसकी दुनिया गोबर ही हो गई, हीरे को भूल गया वो।
- 1:06:00मुक्ति का मतलब यही होता है नगन आँखों से जान लेना कि तुम हो और
- 1:06:16जीस घड़ी तुमने जान लिया देख। कर।
- 1:06:19उस घड़ी अगर मान लेते हो, तुम तो उसे ही बाबा कहते हैं, मन्नी की
- 1:06:25गतक ही न जाए, जे को कहे पाछ्य पक्षदाय।
- 1:06:37इसे मानना पड़ता है जाकर। कैसे ना मानोगे?
- 1:06:51मैं तुम्हारे सामने बोल रहा हूँ। क्या तुम नहीं मानोगे क्या मैं
- 1:06:57बोल रहा हूँ मानना पड़ेगा तो उस तल पर पहुँच कर खोपड़ी के तल पर
- 1:07:10तुम मानते हो जानते नहीं हो किसी गुरु ने जाना?
- 1:07:20तो तुम उस गुरु पर विश्वास और श्रद्धा करते हो, यही तुलसीदास ने
- 1:07:26कहा श्रद्धा विश्वास को अपने या भयाम बिना ना उस गुरु के ऊपर
- 1:07:34श्रद्धा और। करना ही होगा जिसने जान लिया
- 1:07:40लेकिन क्या करें यहाँ तो भीड़ बच। यहाँ तो माखनशा लुबाना का जहाज बच
- 1:07:48जाता है, गुरु तेग बहादर उसे बचाते हैं, उसके कंधे छिल जाते
- 1:07:54हैं। और गुरों की डार बैठे तंबू लगाएं,
- 1:08:03दाढ़ी पीली किए, मेकअप किए वे जयंती माला डाले, त्रिपुंड सजाए,
- 1:08:11यू बनाएं यू। जो बनाते हैं।
- 1:08:22यह तो फैशन है, ऑथेंटिसिटी नहीं, दिखावा है तो कैसे पहचानेंगे?
- 1:08:36पहचान ने कात्रिका कृष्ण ने बताया, जिसके पास बैठने से सुगंध
- 1:08:45आनी शुरू हो जाए, वह निश्चित रूप से पूर्व।
- 1:08:48है। फूलों के भीतर से ही सुगंध आयक।
- 1:08:57और जिसके पास घटने से दुर्गंध आए, निश्चित रूप से वह घट रहे गठरों
- 1:09:05के भीतर से ही दुर्गंध हो रहा करते।
- 1:09:14ये लक्षण बताएं भगवान कृष्ण और उनके जीवन का बल पर बंधन विहीन था
- 1:09:26वर्ण, वो तो जन्म भी बंधन में हुए जेल केन्द्र उनका जो।
- 1:09:33यहाँ ताले जड़े थे मोटे। और।
- 1:09:39टूट गए ताले यह अब्रीविएशन है सिम्बोलिक अब्रीविएशन सच में ऐसा
- 1:09:48नहीं। सिर्फ आपको समझने की पौराणिक
- 1:09:56व्याख्या ऐसे व्यक्ति के आने से तुम्हारे बड़े बड़े लॉ को खुल
- 1:10:04जाए। तुम्हारी धारणाएं जो तुमने माना।
- 1:10:09और सबसे बड़ी धारणा ये है तुम्हारी जो तुमने मान ली जन्मो
- 1:10:15जन्मो से मानते चले जा रहे हो, पता तुम्हें पिछले जन्म का भी
- 1:10:19नहीं पीएलआर लोगों की कर रहे हो अपने जन्म का पता अगर अपने जन्म
- 1:10:26का पिछले जन्म का पता हो। तो उसका एक लक्षण है, मैं बता दूँ
- 1:10:34तुम्हें मैंने बहुत से ऐसे लोगों को आजमाया है पीएलआर।
- 1:10:46गैरॅन्टी देने वाले की मैं आपको पिछला जन्म बता दूंगा, ले जाके
- 1:10:52दिखला दूंगा और जब मैंने उनके पिस्टल रखा छाती पर तो उनके दोनों
- 1:11:00तरफ से चड्डी गीली हो गई। अगर मृत्यु का भय बाकी है तूफ़ान
- 1:11:13आया, जंग चला, ईरान और अमेरिका इजराइल के भीतर घमासान जंग चला।
- 1:11:21एक महान शक्ति के साथ एक बिल्कुल गरीब मुल्क वर्षों से चालीसों
- 1:11:28सालों से उपेक्षित बैन का शिकार। और।
- 1:11:40अमेरिका ने सोचा था इसका? क्या है?
- 1:11:44रशिया ने भी ऐसा ही सोचा था। यूक्रेन।
- 1:11:47इसका क्या है? बस आज अकमन करेंगे कल को यूक्रेन
- 1:11:54अपना चार वर्ष भी कर। ऐसा ही अमेरिका ने सोचा।
- 1:12:00था। तुम मत बनाओ एटम बंप क्यों न
- 1:12:08बनाएं भाई क्योंकि तुम दुनिया को मार दोगे तुमने तो दुनिया मार ही
- 1:12:13दी शक हम पे करते हो। अमेरिका एक अकेला मुल्क है।
- 1:12:22जिसने हीरो सीमा और नागासाकी पर छोटे।
- 1:12:26कम करा करोड़ों को मार दिया। तुमने तो मार ही दिए, शक हम पर
- 1:12:34करते हो अपराधी तुम हो। लेकिन चोर को शक होता।
- 1:12:43है। इसलिए चोर रखवाली करता है।
- 1:12:47अपने मान की उसे पता है कि चोरी भी हो जाया करती है और औंधे मुँह
- 1:12:58पड़ा। पाप हमेशा झूठ हमेशा ऊँ दे मुँह
- 1:13:07गिरा करता है, इसलिए मैंने यह भविष्यवाणी की।
- 1:13:15तथ्यों के बल के आचार्य जैसी प्रज्ञा के लोक।
- 1:13:28सूखों को पा सकते हैं। कदम बिछुओं।
- 1:13:33पर सो सकते। हैं।
- 1:13:35मन चाहा खा सकते हैं, रसास्वादन कर सकते हैं, लेकिन सुख ही नहीं
- 1:13:42हो सकते। और बिल्कुल ऑथेंटिक साइंटिफिकली
- 1:13:50प्रामाणिक मैं जानता हूँ इस धूल भरी आंधियों में कोई संत ही आकर
- 1:14:00तुम्हें। आश्वस्त करता है।
- 1:14:02घबराओ। मत।
- 1:14:05मत उड़ाना दो मत शिकायत करो माँ बाप से परमात्मा से उसने ठीक
- 1:14:11बनाया है शोभा बनाया क्योंकि उसने एक ऐसा तल रखा है।
- 1:14:20गो धन, गज, धन, बाज, धन और रतन धन खान जब आवै संतोख धन सब धन दूर
- 1:14:32समान तुम जीस धन को इकट्ठा करके तुम कहते हो बल इकट्ठा करो।
- 1:14:40दुनिया को यह बात जमेगी और तुम्हारे ज्यादा फॉलोवर होंगे
- 1:14:45निश्चित रूप से क्योंकि दुनिया तो खुद ये चाहती है प्रत्येक व्यक्ति
- 1:14:52सारी दुनिया पर कब्जा करना चाहता। है।
- 1:14:56ऐसा नहीं है कि एक ट्रंप ही कब्जा करना चाहते हैं या हमारे माननीय
- 1:15:00मोदी ही या मोटू जी ही कब्जा करना चाहते हैं।
- 1:15:06सारी दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति काबिज होना चाहता है।
- 1:15:10धरती पे यह बात अलग कि उसकी दान गलती नहीं।
- 1:15:15उलझ थे दूरदर्शी से विश्र्भा से बोला जीस घड़ी यह व्यक्ति जन्म ले
- 1:15:23ले बच्चा तो तुम जन्म लेते ही कै कृषि से पूछना कि तुमने?
- 1:15:35मैं संयष्ट होने जा रहा हूँ, तुम्हें साथ चलना है भाग्यवान
- 1:15:39मैंने तुम्हें वायदा। किया था।
- 1:15:42मोदी जी भी अगर पूछ लेते कि हम भाग रहे हैं।
- 1:15:53क्या तुम भी चलोगे जब सोत्र उसकी ना और हाँ होने के पश्चात भाग
- 1:16:03जाते और अभी उम्र भी क्या हुई थी कुछ भी धोखा देकर भागना।
- 1:16:13श्रद्धा से इनकी फितरत रही है संगियों की तो विसर्बा ने जब रावण
- 1:16:26का जन्म हो। विसर्बा के पुत्र थे राम कैकसी
- 1:16:30उनकी माता थी रावण कैकसी के। कमरे में गए उषा भाग्यवान तुमने
- 1:16:48बच्चे को जन्म दिया, बच्चा दो महीने का होगा।
- 1:16:57मैं संयुक्त ग्रहण करना चाहता हूँ क्या तुम मेरे साथ चलोगे बच्चे को
- 1:17:06पाल लेंगे कोई बात। नहीं।
- 1:17:09तो कैसी बोली? मैं यही और सही निर्णय था।
- 1:17:21औरत का निर्णय स्त्री का निर्णय यही सही होता है।
- 1:17:26वह घर की चारदवारी में है पर्यटन के लिए।
- 1:17:34अगर उसका मन बहलता है बाहर के दृश्यों को देखकर वो बात तड़पता
- 1:17:40है लेकिन संयुक्त मैं हूँ तो विषरवा कैकसी को छोड़कर चले और
- 1:17:49आगे की कहानी आपको पता। है।
- 1:17:59अगर इस संसार संतोष नामक धन नहीं, चैन नहीं करार नहीं नरम बिछोने
- 1:18:16है, नींद नहीं। 3600 प्रकार के भोजन है भूख नहीं।
- 1:18:24क्या तुम ऐसी दुनिया में जीना चाहोगे?
- 1:18:29नहीं जीना चाहोगे लेकिन तुम जी रहे हो?
- 1:18:37यह बात एक अजूबा हमने देखा। जल में रहकर मीन है प्यासी।
- 1:18:49यही तो हैरानी होती है संत को। एक संत ही अगर जगत में न आता
- 1:18:58सिर्फ एक संत तो जलमहर्ता संत साहब इस तूफानी।
- 1:19:12दुखों के मरहले में एक संत आकर कहता है ठहरों तुम कहते कागज के
- 1:19:21लेख तुमने अपने सीख पड़े तुमने अष्टावकर गीता पड़ी तुमने गीता
- 1:19:28पड़ी तुमने अन्य किताबें पड़ी तुमने कॉम्पिटिशन भी किया।
- 1:19:32जीते भी लेकिन ऐसा कुछ करने में तुम्हारे भीतर अहंकार हो गया।
- 1:19:40आई नो मैं सभी जानता हूँ, मैं सर्वज्ञ हूँ, किसी अहंकार के कारण
- 1:19:47तुमने सत्य को देखना नहीं चाहा वह वक्त?
- 1:19:52जो सत्य को खंगाले में लगाना था तुमने वो तुमने संस्थाओं को मजबूत
- 1:19:59करने में गुजार थी। काश तुमने वो ही।
- 1:20:04वक्त। खुद के तल को मजबूत करने में
- 1:20:09लगाया हो। रूपांतरण हुआ होता तो आज करोड़ों
- 1:20:15लोगों की जिंदगी हम खतरे में न डरते, अकेले मार्ग से ही नहीं
- 1:20:28पैदा करता। नास्तिकता को अकेला चारवाक ही
- 1:20:38नहीं, नास्तिकता को और कोई लेन देन का हिसाब नहीं होता।
- 1:20:42यहाँ प्रणम कृतवा ग्रितम भी। हसविभूत से देह हस पुनर आगमन कुतह
- 1:20:54यह शरीर लेने वाला देने वाला दोनों शरीर भस्म हो जाएंगे।
- 1:20:59कौन किस्से मांगेगा बताओ तर्क ठीक ऐसे ही तर्ककों से।
- 1:21:07नागपुर का संतल हालांकि दोनों में कोई हारमनी नहीं, कोई रेखाएं आपस
- 1:21:19में बढ़ती नहीं पैरेलल चलते हैं, लेकिन फिर भी।
- 1:21:28दुनिया को गर्त में गहराकर ही जाएंगे जनाब अली,
- 1:21:45अगर संसार में परमात्मा बड़ा संविदा है।
- 1:21:52वह अद्भुत शिल्पकार अगर आनंद बनाकर वो एक जगह के ऊपर स्थापित
- 1:22:01ना कर देता जीसको कृष्ण कहते हैं हे पात सत प्रज्ञा भोज।
- 1:22:11उस प्रज्ञा में उस आनंद को स्थापित न कर देता तो फिर उस
- 1:22:18शिकायत के योग्य था, लेकिन बहुत हमसे ज्यादा समझदार।
- 1:22:23है। ज्यादा ही नहीं वरना वही समझदार
- 1:22:29है। तुम तो मूर्ख।
- 1:22:30हो? सबय सयाने एक मत मूर्ख, अपनों
- 1:22:37अपनी ओर देखो फिर ये लोग कबीर के दोहे भी गुनगुनाते हैं, उनके भजन
- 1:22:43भी वो बनाते हैं। जी बेरडे मैं इसलिए कहता हूँ ना
- 1:22:49खुदा ही मिला ना वसाले सनम, ना इधर तेरा है ना उजा तेरा है मैं
- 1:22:58तुम्हें गारंटी देता हूँ वह है। ऐसे अविश्वास के माहौल में ऐसे
- 1:23:10नास्तिकता के बवंडर में तूफानी जत्कोंस कोई संत ही आकर तुम्हें
- 1:23:19विश्वसनीय शब्द कह सकता है और उसके जीवन में।
- 1:23:25लक्षण छलकेंगे अगर उसने तृप्ति को पा लिया है तो तृप्ति उसके रोए
- 1:23:36रोए से छलकेगी और तुम दूर दूर तक विदेशों से।
- 1:23:44उस छलकते हुए रस का अपमान करने के लिए चले आओगे खिचे आओगे यह तृप्त
- 1:23:54हो गया। तृप्ति का लक्षण होता है।
- 1:24:01अगर तुम कहते हो कि रौशनी हो गई तो रौशनी का लक्षण आएगा अन्यथा
- 1:24:06अंधकार में तो तुम कुछ देख न सको अगर रौशनायी आ गई सूर्य जी चमका
- 1:24:18आश्मा। प्रभात हो गई तो उसके लक्षण भी
- 1:24:22आए। फिर तुम्हें हर चीज़ साफ साफ
- 1:24:27दिखाई पड़ेगी। धूँथली धूँथली नहीं, अगर तृप्ति आ
- 1:24:34गई किसी को तो उसके जीवन की दिनचर्या से।
- 1:24:40वह तृप्ति के लक्षण प्रकट होंगे। अन्यथा थोती थोती बातें कहने वाले
- 1:24:49तो आचार्य बहुत। बैठे हैं।
- 1:24:53माकिर शाह लुबाना ने देखा और गुरु?
- 1:25:00जो तृप्त नहीं हुआ वो बुलाएगा आओ मैं हूँ गुरु आ जाओ यानी की वो
- 1:25:09ऐड्स लगाएगा, वह पूरे प्रयास करेगा।
- 1:25:13अपने तक ग्राहकों को खींचने की वह तृप्त नहीं हुआ।
- 1:25:18वह व्यापारी है। वह कारोबारी वह कुछ निहत स्वार्थ
- 1:25:26हेतु इकट्ठा करना चाहता है। भोगने हेतु पदार्थ इकट्ठा करना
- 1:25:31चाहता है। वह तृप्त नहीं हुआ।
- 1:25:34और। इसीलिए बहुत कमाल की बात है कि
- 1:25:38ईमानदार। तृप्ति होते ही आह बड़ा सुन्दर
- 1:25:47बली हारी जाऊं तुम्हारी ऐसी शानदार फितरत पर।
- 1:25:59वो कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, हम आह भी बरते हैं तो हो
- 1:26:08जाते हैं नहीं होती ना? शब्दों को शब्दों से कवि तृप्ति
- 1:26:28प्रकट हुई। शब्द तो बनावटी एआई के द्वारा भी
- 1:26:35बनाई जा सकती। है।
- 1:26:38लेकिन ध्यान रखना एआई के भीतर तृप्ति नहीं होता।
- 1:26:43क्योंकि चेतना ही नहीं होती, तृप्ति चेतना से आती है चेतना का
- 1:26:50वो परिपूर्ण तल 100 प्रतीक्षा की चेतना का खेल जाना, 100% परमात्मा
- 1:26:59हो जाना, अनंत विस्तृत हो जाना। जिसका और छोर न रहे आदि मध्य और
- 1:27:08अंत न रहे वह तृप्त हो। वह विराट भी हुआ, वह विशाल भी
- 1:27:15हुआ, उसकी छूद्रता समाप्त हुई। इसलिए वह शूद्र चीजों को इकट्ठा न
- 1:27:20करें। वह बांटेगा और नहीं, स्वार्थ
- 1:27:25बांटेगा वह नहीं कहेगा संस्था के हाथ मजबूत।
- 1:27:34कर। तुम तुम्हारी संस्था के हाथ मजबूत
- 1:27:41कर सकते हो, तृप्त व्यक्ति नहीं। कहेगा।
- 1:27:44उसकी कोई संस्था होती? है, वह तो तृप्त है और जो तृप्त
- 1:27:55हो गया उसको मानसरोवर मिल गया। वह इकट्ठा करने की झंझट नहीं
- 1:28:03करेगा। वह दूर दूर से तुम्हें गुमराह कर
- 1:28:07के बताएगा ना आओ नाम दान ले जाओ, आओ मुझसे कुछ सीख जाओ, सुखी होने
- 1:28:15के तरीके समझ जाओ। और सुखी होने का तरीका ये बताएंगे
- 1:28:21एस के भीषण बचाव करो। बचाव में ही बचाव है, बंधन से बचो
- 1:28:32साफ। है।
- 1:28:34अभी इनके लिए बंधन है। कृष्ण कहेंगे बंधन है ही नहीं, वह
- 1:28:42तत्व निर्बंध है उसे बंध नहीं जा सकता, जलाया नहीं जाता गलाया नहीं
- 1:28:50जाता, मिटाया नहीं जाता, वह मरता नहीं।
- 1:28:54उसके ऊपर शस्त्र का श्रृंगार काम नहीं करता।
- 1:28:58उसके ऊपर अग्नि की ज्वाला उसे झुलसाती ने नैनम सिद्धांत
- 1:29:06शस्त्राण नैनम वास्तु पाब का नैनम कलिदं त्यापो न?
- 1:29:14तुम क्या सिखाती हो? अच्छा न होगा अगर तुम बोलना बंद
- 1:29:19कर दो ज्यादा अच्छा होगा काश तुम यही वेला अब तो घनी गयी, थोड़ी
- 1:29:34रही वो भी बीती जाए। अब क्या खाक करोगे वक्त चला गया,
- 1:29:45अब तो किसी और जन्म में ही होगा। मेरे से साक्षात्कार तृप्ति का
- 1:29:53वहन अर्थ है। जो मिल गया, सी को मुख दर समझ
- 1:30:04लिया, जो मिल गया उसी को मुख दर समझ लिया।
- 1:30:14जो खो गया मैं उसको भुलाता चला गया, मैं जिंदगी का साथ निभाता
- 1:30:26चला गया जैसा मिल गया पहन लिया। जैसा पक गया, खा लिया जो मिल गया
- 1:30:41वही मुकद्दर था जो छिन गया मैं उसको भुलाता चला गया।
- 1:30:48हर हाल में उसकी रजाम में राजबीर। और यह वही कर पाएगा जिसने वह जब
- 1:30:59देखा होगा न गाना लिखा लिखी की है नहीं देखा देखी बात तुम कहते
- 1:31:11कागज़ की। तुमने रामायण में पड़ा होगा
- 1:31:16महाभारत में पड़ा होगा, जो करता है वही करता है, अच्छा करता है,
- 1:31:22लेकिन कबीर कहते नहीं तुम कहते कागज की लेखी और मैं कहता हूँ
- 1:31:29देख। मैंने आँखों से वह सत्ता देखी और
- 1:31:37मरने की गति कहीं न जाए, वहाँ जाकर मैं पहुँच गया हूँ जहाँ
- 1:31:42मानना पड़ता। है।
- 1:31:44शक की कोई गुंजाय शबा की नहीं रहती जब तक शक है।
- 1:31:50तो कृष्ण कहते हैं शंख आत्मा निश्चित विनाश होगा, फिर तुम्हारा
- 1:31:57अहंकार फिर फिर से जन्म लेगा, मरोगे जन्म लेगा।
- 1:32:01मरोगे। यही तो मुक्ति है सत्य को जन नो
- 1:32:08दा है सर। रिमेम्बर यूरसेल्फ़, कहने के
- 1:32:12तरीके हू आर यू? ये है सही तरीका बचाव करना कायरों
- 1:32:22की आदत है और कायरों का फॉर्मूला। सत्य को जानना बहादुरी इसलिए
- 1:32:32महावीर को महावीर कहा गया। ये खिताब था।
- 1:32:38उनका नाम महावीर है। नाम था उनका महा वर्तमान।
- 1:32:47खिताब मिला। उन्हें महावीर यह कोई साधारण काम
- 1:32:52नहीं होता। अगर साधारण होता तो ये आचार्य लोग
- 1:32:59ऐसे छटपटाते नहीं, अहंकार की बलि देना।
- 1:33:07सबसे मुश्किल है दुष्कर्म अपनी होत को ही गला देना मिटा दे अपनी
- 1:33:16हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे कि दान खाक में मिलकर गुरुकुलजार
- 1:33:23होता है बुघी बीज तुमने देखा? छोटा सा बीज धरती के गर्भ में
- 1:33:31जाकर अंकुर बनता और वट वृक्ष बन जाता है।
- 1:33:33इतना तुम्हारी बुद्धि कभी नहीं सोच पाएगी इतना वट वृक्ष, विशाल
- 1:33:41वट वृक्ष जिसमें हजारों पक्षियों का घोंसला।
- 1:33:46है। वह कभी एक छोटा सा बीज।
- 1:33:49थे। तुम भी तो एक छोटे से बीज थे, एक
- 1:33:53धन आज तुम्हारी देह एक। कबीर का ही गुणगान करते हैं ये
- 1:34:10लोग मैं किसी व्यक्ति के वर खिलाफ़ नहीं, मैं व्यक्ति की
- 1:34:19मोड़ता के वर। खिलाफ़?
- 1:34:24जो तुम्हें ऐसे मुकाम पे धकेल दे तो फिर जीवन का कोई अर्थ भी नहीं।
- 1:34:32फिर तो कह दो अपने माता पिता से और तुम भी जन्म मत देना किसी।
- 1:34:40को। क्योंकि जन्म देना गुनाह है क्या
- 1:34:50यही दुखों से भरी हुई, सृष्टि दिखाने के लिए हमें आपने जन्म
- 1:35:01दिया। यह तो बड़ा दर्द से भरा दुख से
- 1:35:05भरा नहीं। किसका हल करेगा, इस समस्या का हल
- 1:35:13करेगा। संत।
- 1:35:25मानसरो कसा पायो मानसरो तार? तलैया क्यों?
- 1:35:45डोल ताल तलैया क्यों डोल मन मस्त हुआ?
- 1:36:01फिर क्यों बोले मन मस्त, फिर क्यों हीरो, पायो गांठ गठियायो?
- 1:36:25बार बार बा को क्यों खोलें? मन मस्त हुआ फिर क्यों बोलें, उस
- 1:36:39सतल पर चले जाओ। जहाँ मौन होना नहीं पड़ता, मौन हो
- 1:36:47जाया करता है, जहाँ मौन कोई साधना नहीं होता, जहाँ मौन सिद्धि होती
- 1:36:55है, जहाँ जाकर तुम पर मून की दशा में।
- 1:37:02अवस्थित हो जाते वह बोल नहीं निकलता।
- 1:37:10शब्दातीत कहा, अखरा नालों वखर जेड़ा अक्षरों से अलग है, बियॉन्ड
- 1:37:21वर्ड्स है। उसे शब्दों में समझाया भी नहीं जा
- 1:37:25सकता, तो तुम उस हीरे को पालो गांठ में गठ्यालो दिखावा मत करो।
- 1:37:40लेकिन जैसे ही तुम हीरे को पा जाओगी हीरे की चमक तो बताएंगे के
- 1:37:47हाँ, इसकी जेब में हीरा है यह प्रकाश रूशनाई कहाँ से आ रही है?
- 1:37:55यह शांति का अमृत कहाँ से बरस रहा है?
- 1:38:00यह आनंद का झरना कहाँ से बह रहा है यह कौन सी वो जगह है जहाँ इतनी
- 1:38:07शांति जहाँ इतना आनंद है जहाँ इतनी सुगंध की बरसात।
- 1:38:13हो रही है। धन्यवाद।