Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 Apr 25 - America हमें Deport कर रहा है, हमें क्या करना चाहिए? | Reality of America/Trump |
Transcript
- 0:00किसी मित्र ने पूछा है अमेरिका से बाबा हम क्या करें?
- 0:13ट्रम्प जीत गए हैं। और इन्होंने जो नीतियां बनाई हैं,
- 0:21अब हमें वापस जाना पड़ेगा। आपके सारे प्रकरण को थोड़े से
- 0:31शब्दों में हमारे लिए कैसे व्याख्यात कर सकोगे?
- 0:38एक क्वेश्चन तो ये है साथसाथ मैं इसका जवाब भी देते रहता हूँ।
- 0:47फिर मूल श्लोक प्राणी पूछा है हम क्या करें?
- 1:02तुम वापस आ जाओ क्यों? क्योंकि फिर तुम्हें बुलाया जाएगा
- 1:11मतलब मतलब फिर काम आदमियों को करना पड़ेगा।
- 1:20हसो मत। तुम अपनी जीवन जानते हो, तुम किस
- 1:28तरह वहाँ रोटी कमाते हो? मैंने शब्द बोला कि काम काम
- 1:38आदमियों को करना पड़ेगा। तो क्या अब आदमी काम नहीं करता
- 1:43है? तुम अपने आप को आदमी समझते हो,
- 1:51दिन भर रात तुम जुटे रहते हो, दूसरे देश की तरक्की करी है।
- 1:59और वो देश तुम्हें बाहर निकाल देता है।
- 2:02निकलो अगर थोड़ी सी भी आया बाकी है ना तो वापस आ जाओ, इस मूर्ख को
- 2:11पता नहीं है ये अमेरिका की तरक्की के अंदर।
- 2:17सदा से आप जैसे लोगों का योगदान रहा है।
- 2:22जब काम करना पड़ा न आदमियों को तो इनकी अकल ठिकाने आ जाएगा।
- 2:29फिर ये आपको बुलाया करेंगे, मिन्नत कर कर के बुलाया करेंगे
- 2:35ज़रा ये भी तुम्हारा शब्द। अगर कोई मुल्क किसी मूर्ख को
- 2:44राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री सुन ले तो ये गलती हो जाती है, अक्सर
- 2:51हो जाती है। मुझे पहले पहले जब ट्रंप की फोटो
- 2:59दिखाई गई, मुझे तो पता नहीं था क्योंकि मैं तो एक कमरे के
- 3:07चारदीवारी में हूँ, अपने आपको कैद कर रखा है।
- 3:19चिकना का बाबा देख रहे है ये कौन है?
- 3:22आप इसे पहचानते है? शान चकल से और फिगर से ओरा से बता
- 3:32देते हो तो ज़रा देखना जब कौन। मैंने कहा यह व्यक्ति ऐसा लगता
- 3:41है, इसकी फिगर से नहीं, यह तो पागल है।
- 3:52यह जेल से भागा हुआ है। या जेल में जाने की तैयारी कर रहा
- 3:57है। तीनों में से कोई बात नहीं।
- 4:01अब ज़रा कोर्स इसका मुखड़ा देखना महोदय ट्रंप का समझदारी जैसी कोई
- 4:10बात नहीं लगेंगी। मैं क्षमा भी नहीं मांगूंगा,
- 4:18क्योंकि क्षमा उस चीज़ के लिए मांगी जाती है जिसमें रत्ती भर भी
- 4:25गुंजाइश होती है गलती की मैं जहाँ गलत नहीं हूँ 100% सही।
- 4:35यह मूर्ख राष्ट्रपति है। अब देश ने चुन दिया है तो चुन
- 4:42दिया है। तुम क्या कर सकते हो तुम वापस आ
- 4:46जाओगे। जननी और जन्मभूमि तो स्वर्ग से भी
- 4:54महान है, अपनी जन्मभूमि में आ जाओ, पूछा है मित्र ने ध्येय
- 5:09प्रशस्त। हम क्या करें बाबा तुम वापस आ जाओ
- 5:17जब आदमियों को काम करना पड़ा, मैं तुम्हें आदमी नहीं समझता।
- 5:27क्योंकि मुझे यह समझ नहीं आया आज तक और तुम्हें सच कहता हूँ।
- 5:34मुझे यह समझ नहीं आया कि लोगों का अमेरिका जाते क्यों हैं?
- 5:41आप जाने के लालायित हो। जीभ में से लारें गिरती हैं अब।
- 5:47लेकिन मुझे समझ ही नहीं आया कि कोई अमेरिका में जाता क्यों है?
- 5:56मेरा सारा परिवार वहाँ बैठा है, लेकिन मुझे आज तक नहीं समझाया कि
- 6:03वहाँ लोग जाते कहाँ? मैं बताऊँ वहाँ लोग काम करने को
- 6:10जाते हैं यहाँ पर काम है नहीं जब तुम यहाँ आ जाओगे न।
- 6:22तो यहाँ अपना काम खुद खोज लेना हर जगह काम मिल जाता है।
- 6:26खोजने वाला चाहिए इस देश को और ट्रंप कहता है मैं अमेरिका को फिर
- 6:37से महान बनाऊंगा। अमेरिका कभी महान था।
- 6:46अमेरिका कभी महान था जो कभी गिर गया हो और फिर से तो महान बना हो,
- 6:56ऐसा कभी नहीं हुआ। अमेरिका जनवान तो हुआ, मेरी बात
- 7:02को ध्यान से संग मिला, लेकिन महान कभी नहीं हुआ और भारत हिंदुस्तान
- 7:16धनहीन तो हुआ गरीब तो हुआ। लेकिन महान था और कभी महान हो
- 7:24जाएगा तो अगर हमारे उच्च कम लोग उच्च पद भी पर बैठे हुए लोग।
- 7:37इसे विश्वगुरु बनाना चाहते हैं तो सोच गलत नहीं है।
- 7:42काम गलत हो ये बात अलग है, सोच गलत नहीं है।
- 7:47हम विश्वगुरु थे, हम सोने के चिड़िया थे, कभी किसी देश को
- 7:54हमारे सिवा। सोने की चिड़िया का खिताब मिला
- 7:57है। इतिहास में नहीं मिला ना बहुत
- 8:03पुराने मुल्कों में इंडिया है, ईजिप्ट है, ईरान है, चाइना है,
- 8:13चाइना को नेता ऐसे मिले। और लोग ऐसे मिले और जरूरतें थी,
- 8:19भुखमरी थी। उन लोगों ने मेहनत की और मेहनत का
- 8:26परिणाम है जो आज चाइना में। 18 ट्रिलियन डॉटर की अर्थव्यवस्था
- 8:39है। हिंदुस्तान कहाँ गच्चा खा गया
- 8:45हिंदुस्तान मूर्खताओ में मूर्खताओ में गच्चा खा गया जहाँ के सीजेआई।
- 8:55कागज के गणेश की प्रतिमा की मूर्ति की पूजा कर रहे हम वहाँ
- 9:02अकल घास, झरने चली गई, यह साफ हो जाता है।
- 9:12चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जिनके कंधों के ऊपर न्याय करने का भार
- 9:20है, दायित्व है, उस सरे आम लोगों को दिखाते हैं।
- 9:27पत्थर की या कागज की गणेश की मूर्ति की आरती उतारते हुए सपरवार
- 9:37तो वहाँ साफ हो जाता है कि इनकी अकल घास छरने गई है।
- 9:47और इनको अगर हमने कुर्सी पर बिठाया तो इनमें अक्ल थी नहीं
- 9:56मुझसे रोक पूछ लेते हैं देश खुशहाल हो जाए सोने की चिड़िया बन
- 10:05जाए सूत्र क्या है आपके पास? सूत्र तो मैं बहुत वार बोल चुका
- 10:16हूँ। धर्म नाम के इस पचड़े को संविधान
- 10:21में समाप्त कर दो। ये धर्म है जिसने हुलिया बिगाड़
- 10:27दिया। इस प्यारे प्यारे भारत का इस धर्म
- 10:36नाम के मल ने हिंदुस्तान का रूले बिगाड़ दिया और कुछ किताबें ऐसी।
- 10:49जिन्होंने मानव और मानव के बीच में खाई पैदा कर दिया।
- 10:56मनू स्मिथ उच्च निश्च तो होता है। जैसे सवस्थ आदमी होता है और बीमार
- 11:06होता है, पूर्ण अंगों के साथ बत्ती पैदा होता है और अपाहिज
- 11:11पैदा होता है, वैसे ही कम बुद्धि और कम ज़्यादा बुद्धि वाले भी
- 11:17पैदा होते है। यह समानता असमानता प्रकृति
- 11:23प्रदत्त है। लेकिन मुश्किल वहाँ पेश आती है
- 11:32जहाँ सवस्थ लोगों में बंटवारा हो जाता है एक कहें मैं श्रेष्ठ हूँ।
- 11:41और दूसरे को कहे कि तुम श्रेष्ठ न हो, तुम नीच हो, तुम पांव में
- 11:48बैठे रहो, आदमी उर्स से कहे कि तुम क्षुद्र हो, जबकि स्त्री के
- 11:59बिना? यह संसार नहीं चलता।
- 12:03भगवान शिव का अर्घ नारीश्वर रूप देखना इस बात को इंगित करता है कि
- 12:11ना आदमी के बिना ना इस्र के बिना संसार नहीं चलेगा।
- 12:17दोनों ही जरूरी हैं। और एक पक्ष ने दूसरे पक्ष को
- 12:23कमजोर और नीच की उपाधि देने में कोई कसरखोर बाकी नहीं छोड़ी
- 12:35व्यक्ति व्यक्ति को। पांव की जूती समझ रहा है।
- 12:42मैं ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और तुमशुद्र मैं पुरुष और तुमस्त्री
- 12:53इन असमानताओं ने देखिये, मैंने पहले शब्द बोला।
- 12:58कि प्रकृति प्रदत्त असमानताएं सहज हैं और सहजता का सम्मान होना
- 13:07चाहिए। अगर कोई व्यक्ति जन्मजात अपाहिज
- 13:10हुआ तो उसके साथ मृदुता का व्यवहार होना चाहिए।
- 13:19उसका रिजर्वेशन भी होना चाहिए। उसको एक्स्ट्रा सुविधाएं भी मिलनी
- 13:25चाहिए। जो चल नहीं सकता उसके लिए
- 13:28व्हीलचेयर तो उपलब्ध करवानी पड़ेगी।
- 13:33ये प्रकृति प्रदत्त असमानताएं हैं।
- 13:37कोई कम बुद्धि वाला जन्म गया तो उसको वैसा ही काम दे दो भाई
- 13:42चपरासी लगा दो, कोई ज्यादा बुद्धि वाला जन्म गया अल्बर्ट हिस्टीन तो
- 13:48उसको वही काम दे दो रिसर्च ये प्रकृति प्रदत्त चीजें हैं।
- 13:54इसमें मनुष्य का कोई योगदान है? जैसी जैसी बुद्धि और शरीर कईयों
- 14:01के शरीर कृष्णा होते हैं, कईयों के शरीर सुडोल होते हैं तो सुडोल
- 14:07व्यक्तियों को शारीरिक काम देते हैं और कृष्णा तनु व्यक्तियों को
- 14:13थोड़ा सा कम। प्राश्रम मुकाबला आप काम दे दो,
- 14:19ये थी सही व्यवस्था और कभी अगर ऐसी व्यवस्था आ जाए इस संसार में
- 14:27तो वो वो होगा रामराज। उसको कहना चाहिए, रामराज जो
- 14:40प्रकृति का विचारा मारा हुआ है, उसके साथ आम व्यक्ति जैसा व्यवहार
- 14:48गलत स्त्री के साथ पुरुष जैसा व्यवहार गलत।
- 14:54क्योंकि स्त्री की शारीरिक संरचना वैसी नहीं है जैसी इसरी महीने में
- 15:037 दिन बीमार रहती है या कमजोर रहती है या विमर रहती है, लेकिन
- 15:10पुरुष के साथ ऐसा नहीं होता। पुरुष तो।
- 15:15पूरा महीना पूरा साल तंदरुस्त रहता है तो स्त्री की बनावट ये है
- 15:22प्रकृति पर्दाता मेरी बातों को समझाना अच्छी तरह से मैं बड़ा खोल
- 15:28खोल के समझा रहा हूँ। प्रकृति प्रदत्त असमानताएं उनके
- 15:39साथ बर्ताव मृदुता से होना चाहिए, उनको एक्स्ट्रा फैसिलिटीज मिलनी
- 15:48चाहिए। अब कोई लंगड़ा है, नहीं चल सकता,
- 15:52उसको बैसाखी देनी पड़ेगी, कोई बिल्कुल नहीं चल सकता, उसको
- 15:56व्हीलचेयर देनी पड़ेगी। स्त्री को उसके ढंके पुरुष को
- 16:02उसके ढंके काम देने पड़ेंगे। बलवान को उसके ढंके और कमजोर को
- 16:08उसके ढंके। जो शक्तिशाली मस्तिष्क रखता है
- 16:13उसको वही रिसर्च के और जो कमजोर मस्तिष्क रखता है उसको वही वही
- 16:19पानी पानी पिला दो और क्या है? लेकिन जीवनयापन सभी का होना
- 16:23चाहिए। ऐसी होनी चाहिए व्यवस्था।
- 16:32लेकिन व्यवस्था को हमने बिगाड़ दिया।
- 16:36अगर प्रकृति पर दस्त देखिए इसको ईश्वर पर दस्त मत कहिए, यहाँ
- 16:42गच्चा खा गए हम हिंदुस्तानी। हमने प्रकृति प्रदत्त चीजों को
- 16:48ईश्वर प्रदत्त बना दिया है। ईश्वर ने पदार्थ की संरचना करके
- 16:57मैं साक्षी होकर बैठ गया। काम चलाते हैं नियम प्राकृतिक।
- 17:05प्रकृति भी बनाई परमात्मा ने अब समते जाना है।
- 17:10इस बात को प्रकृति नियमों के अधीन चलती है और परमात्मा नियमों में
- 17:15नहीं चलता। परमात्मा सिर्फ सशाक्षी है,
- 17:23एनर्जी आती है, वहीं से। बनाता है वह नियम बनाए, उसने
- 17:32पदार्थ बनाया उसने प्रकृति ने निर्माण कर दिया कमजोर का और
- 17:40प्रकृति ने निर्माण कर दिया बलवान का।
- 17:44तो पहली बात तो ये समझ लेना कि बलवान व्यक्ति का दायित्व बनता है
- 17:51कि वह निर्बल व्यक्ति की सहायता करे।
- 17:56गिर क्या है? कोई वृद्ध, कोई अशक्त, कोई
- 18:00अपाहिज। तो पास से गुज़रने वाला बलवान
- 18:06व्यक्ति का दायित्व बनता है। बाद में कोई और काम करे, पहले
- 18:10उसको उठाए फिर अपने काम पे जाए ऐसा संसार चाहिए था, आज क्या हो
- 18:21गया? भेद धीरे धीरे बढ़ते गए, धीरे
- 18:29धीरे बढ़ते गए। आज क्या हुआ एक व्यक्ति इतना अमीर
- 18:38हो गया। कि वो अपने संदूकों को भर के रखता
- 18:45है, संदूक छोड़ो कमरों को भर के रखता है, पैसों को कमरे में भर के
- 18:52रखता है और एक इतना कमज़ोर है अभी।
- 19:02जनवरी के पहले सप्ताह की बात है। अक्सर मेरी जो टीम है तो थोड़ी सी
- 19:16मृदु कोमल हल्दर। उनको मैंने काम दे रखा है कि तुम
- 19:22बस स्टैंड पर जाओ, रेलवे स्टेशन पर जाओ, वहाँ देखो वो गरीब आदमी
- 19:27जिसके सिर पर छत ने बिना कंबल के सोया पड़ा है।
- 19:37उसके ऊपर कम्बल डाल के आओ रजाई डाल के आओ जिनके पास है उन्हें
- 19:45काम सौंप देता है और मुझे पता है किसके पास है तो वो जाते हैं।
- 19:52हर साल यही काम करते हैं सुबह पशुओं को।
- 19:57पंछियों को कीड़ों को यथाशक्ति थोड़ा थोड़ा डालते रहो, तुम्हारे
- 20:05थोड़े से घटता नहीं, उनका काम चल जाता है।
- 20:12ऐसे चलता है संसार। और ऐसे पलती है प्रकृति से प्रेम
- 20:18की व्यवस्था है, ये सब प्राकृतिक हैं, ये बोल नहीं सकते, बता नहीं
- 20:25सकते। इन्हें भूख लगी है, इन्हें प्यास
- 20:30लगी है, इशारे जरूर कर सकते हैं। जिसका इशारा आप समझो या न समझो,
- 20:40भूख तो सभी को लगती है। इनको भोजन भी दो, पानी भी दो
- 20:44गर्मियों में तो रात को। वो व्यक्ति गए, उन्होंने कंबल डाल
- 20:55दिया जिसके पास समर्थ थी। रजाई की रजाई महंगी बहुत आती है,
- 21:02कंबल तो ₹100 का आ जाता है, रजाई ₹1000 की आती है?
- 21:07तो वो रजाई बांटने लगे। बांटते बांटते, बांटते बांटते देर
- 21:12हो गई, सर्दी घनी थी, बहुत ठंडी थी उस दिन तो उन्होंने देखा एक
- 21:20आदमी सड़क के एन किनारे पर सोया पड़ा है।
- 21:27उन्होंने रजाई थी रजाई डाक दी और चले गए आगे जिसके पास कंबल था,
- 21:35कंबल डाल रहा था, रजाई था, रजाई डाल रहा था और जब कंबल और रजाई
- 21:41बांट के वापस आए फिर उन्हें पता चला कि जीस व्यक्ति के ऊपर।
- 21:47परजाई डाली गई, वह सर्दी से पहले ही मर चुका था।
- 21:54ये हाल है हमारे हिंदुस्तान का और सिर्फ हिंदुस्तान का ही नहीं
- 22:03अमेरिका जैसे समृद्ध मुल्कों में भी ऐसा होता है।
- 22:07तुम ये मत समझना वो समृद्ध है वहाँ ऐसा कुछ नहीं होता है वैसा
- 22:11भी होता है बस सिर्फ खबरें बाहर नहीं आती और वहाँ इक्का दुक्का
- 22:16होता है यहाँ प्रचुर मात्रा में होता है।
- 22:19एक व्यक्ति का घर का कमरा भरा पड़ा है।
- 22:24एक व्यक्ति भूख से मर रहा है। एक व्यक्ति के अलमारी में 50
- 22:32प्रकार के गर्म कपड़े पड़े हैं और एक आदमी ठंड से मर जाता है।
- 22:39ये भेद ये परमात्मा ने नहीं बनाया ये भेद।
- 22:46इंसान की पहलाइश है फिर जिन्होंने कमरे भर लिए, उन्होंने मीडिया
- 22:54खरीद लिया। मीडिया प्रचार करता है कि पिछले
- 22:59जन्म में इसने कोई पाप किया होगा, तो छंट से मर गया, कोई पाप नहीं
- 23:04किया। पाप किया होगा तो प्रकृति पर दत्त
- 23:10कमी आएगी कोई लंगड़ा, लूला, अंधा ये है प्रकृति पर दत्त कोई
- 23:17मंदबुद्धि, कोई शरीर से विकार, कोई कमजोरी के सिथ।
- 23:23यह प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन भूख से मरण, सर्दी से मरण, सत के न
- 23:34होने से मरण यह प्रकृति प्रदत्त नहीं है यह मान प्रदत्त है।
- 23:43तुमने बाँट लिया है लेकिन बराबर नहीं बराबर नहीं बाँट रहा तुमने
- 23:54किसी को ज्यादा यानी बंटवारा नहीं हुआ।
- 23:59छीना छिप्टी हुई है। दूसरे शब्दों में मैं कहूं।
- 24:06अब इस बात पर आ जाओ संत मत के हिसाब से अगर चले ये तो मैंने
- 24:14संसार मत के हिसाब से आपको बताया कि आप वापस आ जाओ, जहाँ काम कर लो
- 24:19काम ही तो वहाँ करना है। काम ही तो यहाँ करना है।
- 24:24वहाँ की रोटी कोई विशेषता नहीं रखती, बल्कि सच पूछो तो यहाँ जब
- 24:35अमेरिकन गेहूं आया था, लाल रंग का हमसे चबाया नहीं गया।
- 24:4466 में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई है।
- 24:5365 में अनाज की कमी हो गई है। ये हमारे देश का इतिहास है, इसको
- 24:58गौर से सुन लें। बहुत शार्ट शब्द मैं आपको
- 25:02बताऊँगा। ज्यादा वक्त मेरे पास भी नहीं है
- 25:05और ज्यादा वक्त आपका भी नहीं लूँगा।
- 25:08और ये मेरा मुद्दा भी नहीं है, लेकिन अब पूछ लिया है तो मैं
- 25:13थोड़ा सा इसको बता दूंगा तो 65 में यहाँ पर अमेरिकन गेहूं आया।
- 25:2264 में 27 मई को मृत्यु हो गई। मैं दोपहर को जा रहा था सड़क पर
- 25:30और तब टेलीविजन थे नहीं थे रेडियो था रेडियो में से एक खबर आ रही थी
- 25:39कि हमारे। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का
- 25:44निधन हो गया है। चलते चलते सड़क के ऊपर मैंने खबर
- 25:49सुनी तो खबर उस दुकानदार ने ऊंची दगा दी थी कि सभी सुन सके।
- 25:57उसके बाद शास्त्री जी आए। खाने को अनाज नहीं था तब तो देश
- 26:04के पास नहीं था। आज देश के पास तो बहुत है,
- 26:09व्यक्तियों के पास नहीं है, जो भूखे मर जाते हैं।
- 26:17अमेरिका से हमें अनाज मंगाना पड़ा है।
- 26:21और अमेरिका इतना नखरेबाज है, उसके अंदर दया धर्म जैसी कोई चीज़ नहीं
- 26:28है। मेरे भाई बहन यहाँ आते हैं, वो एक
- 26:32शब्द बोला करते हैं मेरे से वहाँ करीब 7080 मेंबर्स हैं।
- 26:39हमारे और यहाँ जब यहाँ से गए तो बड़ा प्रेम था।
- 26:47उनकी भाषा में यहाँ लहू लाल है तो मैं पूछता हूँ तो बहने कहती हैं
- 26:55भाई कहते हैं भाई बात ये है। अमेरिका में जाकर खून सफेद हो
- 27:00जाता है, बस इन दो अक्षरों से मैं समझता हूँ खून सफेद हो जाता है,
- 27:09प्रेम नहीं रहता, यह खून लाल होता है।
- 27:17वहाँ सफ़ेद हो जाता है। इसी बात से मैं सब समझ लेता हूँ
- 27:24डॉडरों का क्या करोगे? न तो कोई सदा के लिए यहाँ रहता है
- 27:32और न जो कमाया वो साथ ले के जाता है।
- 27:37फिर क्यों यहाँ नफरत के बीज भोंके जाते हो न तो साथ जाता है
- 27:41तुम्हारे न तुम श्रद्धा के लिए यहाँ रह पाते हो फिर तुम एक दूसरे
- 27:50की गर्दन काटने पे लगे क्यों? फिर सिर्फ महज 1020 साल 50 साल
- 27:56राज़ करने के लिए तुम आपस में रडाते क्यों हो?
- 28:00लोगों को कोई धर्म का नाम लेके कोई जाति का नाम लेके कोई धन और
- 28:08नर्धनता का नाम लेके अब यू। ये क्यों कहना पड़ा?
- 28:16एक शगुफा था ट्रंप का उसे पता था कमी वहाँ कोई नहीं, मैं फिर से
- 28:25देश को महान बना दूंगा। अब जब वोट डालने वाले हैं वो भी
- 28:29मूर्ख हैं। महानता कब ये यह सदा से ऐसा ही
- 28:36नीच रहा है मेरी दृष्टता को क्षमा मैं सहज लफ़्ज़ बोल रहा हूँ।
- 28:49किसी प्रकार के आवेश में नहीं। अमेरिका सदा से ही दूर तो मुल्क
- 28:55रहा है। तुम्हें नहीं पता सब जरूरत की
- 29:02चीजें जब विदेशों से मंगाता है। और सब विनाशक संयंत्र खुद बनाता
- 29:11है कि जिससे जीवन मिले वो तो हमें दे दो।
- 29:16कणक हमें दे दो, खाने पीने की चीजें हमें दे दो, लेकिन हथियार
- 29:23विनाशक यंत्र मैं दूंगा तुम्हें। यानी मारने का बंदोबस्त मैं
- 29:29करूँगा। दुनिया को ओपेन हाइमर ने परमाणु
- 29:37विस्फोट क्या किया कि उसने दुनिया के रातों की नींद छीन ली?
- 29:47किसी को डरा कर जी न कोई बहादुरी नहीं होता।
- 29:54एक प्रकार से यह कायरता का सबूत होता है या निर्दईता का?
- 30:00दोनों में से एक है या तो वह व्यक्ति निर्दयी है या कायर?
- 30:06अब तुम पूछते हो कि बाबा मैं क्या करूँ?
- 30:08मैं तुम्हें कहता हूँ, तुम वापस आ जाओगे, मैं जानता हूँ तुम कितनी
- 30:12मेहनत करते हो, मैं यहाँ से गए हुए लोगों को जानता हूँ, उसमें से
- 30:17मेरा परिवार भी है जी तोड़ हार्ड तोड़ मेहनत करनी पड़ती हो।
- 30:26मेरे भाई का पांव गाड़ी में चढ़ते हुए जब उसकी विंडो बंद होने लगी
- 30:37तो उसमें फंस गया तो सूझ कर ऐसा हो गया।
- 30:43लेकिन उसके बावजूद भी उसे काम पर जाना पड़ा।
- 30:49ये कोई जीवन है? जो व्यक्ति दुख सुख में भी आराम
- 30:56नहीं कर पाता वो कोई जीवन समझते हो तुम उसको?
- 31:02तो मैंने ये शब्द तो प्रयोग किये। जब तुम काम करने वाले वहाँ से आ
- 31:09जाओगे तो भूल जाओ कि गोरे काम कर सकेंगे ये तुम्हें मैं भीतर की
- 31:17बात बताता हूँ। गोरे भागकर यहाँ इन देशों में आ
- 31:22जाएंगे गोरे मेहनत नहीं कर सकता मेहनत तो अमेरिका से जो बाहर के
- 31:29लोग हैं वो ही कर सकते हैं और उन्होंने ही अमेरिका को स्टैंड
- 31:34किया। उन्होंने ही अमेरिका को समृद्ध
- 31:37किया। अब इस मूर्ख को यह नहीं पता कि
- 31:43अमेरिका को जो महान तुम कहते हो, वह बना कैसे, महान तो है नहीं,
- 31:47वैसे अमीर है, सिर्फ धनपति सुविधाएं हैं, तो वो कैसे बना?
- 31:57वो बाहर के लोगों के परिश्रम से बना।
- 32:03बाहर के लोगों ने प्रश्न किया, तुम लोगों ने जाकर प्रश्न किया तो
- 32:07अमेरिका आज यहाँ तुम वापस आ जाओ, इनका हाल देखना तुम 1 साल में
- 32:13इनकी भूतनी भूल जाएगी। ये कहते हैं तुम्हें निकालेंगे
- 32:18मैं कहता हूँ तुम कहो कि हम निकलेंगे, नौकरियां अमेरिकन को
- 32:28देंगे दो, फिर बाहर भी वो धोयेंगे काम भी वो करेंगे, उन्हें तो आदत
- 32:36है। के 7 दिन में वैसे भी वो 5 दिन
- 32:40काम करते हैं, 2 दिन मोज़ उड़ाते हैं और जो 5 दिन काम करते हैं वो
- 32:47भी जायज ही नहीं करते हैं। वो काम दाम नहीं करते हैं।
- 32:53काम के नाम पर वो आराम ही करते हैं।
- 32:56काम तो तुम लोग कर जाओ तुम देखो ज़रा थोड़ा सा मेरी बातों में
- 33:01सत्यता देखो। मैंने अच्छी तरह से अमेरिका को
- 33:05देखा है और उसके भीतर की बात को जान पहचान कर बोल रहा हूँ।
- 33:13सभी मुल्कों ने मिलकर। अमेरिका को सम्पन्न करती हूँ
- 33:18सम्पन्न हुआ है। सिर्फ महान नहीं हुआ महान बनना तो
- 33:22बहुत और बात होती है महानता क्या होती है इसका स्वाद अमेरिका आज तक
- 33:28नहीं चख सका। महानता चखी तो कुछ मुल्कों ने
- 33:33चखी। महानता चखी, हिंदुस्तान ने चखी,
- 33:39महानता चखी, चाइना ने चखी और समृद्ध भी हुआ और महान भी हुआ।
- 33:45ईरान ने चखी इजिप्ट ने चखी युनान ने चखी, ये थे महान।
- 33:56ये तो कल के उठे हुए लोग जो आपने ही जाकर आबाद कर दिया उनके प्रयास
- 34:06से अमीर हुए हैं। सिर्फ महान नहीं हुए महान तो ये
- 34:11हो भी नहीं सकेंगे। क्योंकि जिनकी बेस कमजोर होती है
- 34:16न उसके ऊपर बहु मंजिला इमारत खड़ी नहीं हो सकती।
- 34:22अमेरिका की नीम बहुत कमजोर है, उथली उथली सी है।
- 34:27जैसे हम 100 मंजिला इमारत की नीम दो तीन फुट की डालते हैं।
- 34:33लेकिन इन पुराने मुल्कों की ईजिप्ट है, ग्रीक है, हिंदुस्तान
- 34:40है, चाइना है, इनकी नींव बड़ी गहरी है, बहुत गहरी नीम है, इनके
- 34:49ऊपर कितनी मंजिलें इमारत डालते रहो।
- 34:52ढाते रहो ढाते रहो महान ये हैं ये हुए हैं इन्होंने महानता का स्वाद
- 35:00चखा है अमेरिका में कभी आय तक महानता का स्वाद नहीं चखा।
- 35:08बता दो वैज्ञानिक पैदा हुए होंगे। महान व्यक्ति कोई पैदा नहीं हुआ
- 35:16इसलिए मुझसे पूछे हो तो मैं कहता हूँ तुम वापस आ जाओ, वो तुम्हें
- 35:21भेजें न भेजें, वो तुम्हें डिपोर्ट करे न करे, तुम खुद ही
- 35:25वापस आ जाओ, इनकी इनकी भूतनी भूल जाएगी।
- 35:31अब ये शब्द सुन लो इनके आदेश सुन लो, तुम्हें समझ आ जाएगी इस मूर्ख
- 35:38बंदे के पीछे मत चलो, ये जानता नहीं मेरी नींव कितनी कमजोर है तो
- 35:47मैं कह रहा था। कि जब पहली बार मैंने इसकी फोटो
- 35:51देखी, मैंने कहा या तो ये जेल से भाग गया या ये पागलखाने से भाग
- 35:58गया। पागल है या ये पागलखाने या जेल
- 36:02खाने में जाने की तैयारी कर रहा है।
- 36:04आप इसके चेहरे को, बॉडी लैंगल को और मुँह को अच्छी तरह से देख लो।
- 36:11अमेरिका वासियों को इसका खौफ हो सकता है।
- 36:14हम लोगों को इनका कोई खौफ नहीं है।
- 36:20हम वा चालु होकर बोलेंगे, हम पूर्ण शक्ति से बोलेंगे और सत्य
- 36:27बोलेंगे। अमेरिका में महानता नाम की कोई
- 36:31चीज़ नहीं हुई आज तक, और अगर कभी अमेरिका महान होगा तो तुम लोगों
- 36:40के कारण होगा।