Latest / Baba ji Vijay Vats / 18 Feb 25 - Powerful words of Krishna | श्रद्धा को बढ़ाओ, तर्क नहीं! भगवान शंकर विभूति क्यों लगाते हैं? Geeta ka Gyan.
Transcript
- 0:01महर्षि नाम बेगुराह हम एकम अक्षरम यज्ञा नाम जब यज्ञोहा सुना।
- 0:21स्थबरानाम हिमालयम् महर्षियो में मैं भिगो।
- 0:39और शब्दों में अक्षरों में, मैं एक अक्षर हूँ प्रणव ओंकार यज्ञा
- 0:52नाम जब यज्ञवास्म। जपों में मैं जपों यज्ञ हूँ।
- 1:07जप नाम यज्ञा नाम जप यज्ञो अस्मा। साबरा नाम जो स्थित हैं, अटल हैं,
- 1:21अचल हैं, हिलते नहीं अकंप हैं हिमालय में हिमालय।
- 1:44आइए इसके विस्तार में चले महर्षियों में मैं भृगु,
- 1:58ब्रह्मापुत्र, भृगु, छोटी सी कहानी।
- 2:07देवताओं में श्रेष्ठ कौन है? ये झगड़ा हो गया।
- 2:14कोई कहे ब्रह्मा कोई कहे विष्णु कोई कहे शुभ तीन ही मुख्य देवता
- 2:25हैं। त्रि।
- 2:27नैतिक ईसाईयों में भी मानी जाती है।
- 2:35सभी देवताओं ने स्वर्ग में निश्चय किया कि यह कठिन प्रश्न किसके जिम
- 2:46में लगाया जाए। कौन करेगा हाल इस।
- 2:53सभी ने एक स्वर में कहा भृगु, ब्रह्मापुत्र भृगु, अब बड़े मज़े
- 3:01की बात है। किसी ने ये सवाल नहीं उठाया के
- 3:05ब्रह्मा के पुत्र भृगु। ब्रह्मा के पक्ष में बात करेंगे।
- 3:17यही तो होता है न्याय न्यायकारी को अगर अपने पिता को अपने पुत्र
- 3:25को भी दंड देना पड़े, वो देते हैं, वो सच्चा न्यायकारी है?
- 3:33अन्यथा रिश्वतखोर है महर्षा नाम रघोर अहम् मैं भृगो हूँ और भृगो
- 3:49पहले ब्रह्मा जीके पास गए। ब्रह्मा के पुत्र थे, जाकर कुछ
- 3:58टेढ़ी मीढ़ी हरकत कर दी। अब देवताओं का तह हिसाब ही होता
- 4:03है और थोड़ी सी टेढ़ी मीढ़ी हरकत की और व्रम्मा जो उसके पीछे भागे
- 4:09कोई चिप भी चढ़ा दी होगी की। मुँह भजका लिया होगा ब्रह्मा अपने
- 4:17चारों से लेके भागे ठेका रामखोर तेरे को बताता हूँ मैं कोई
- 4:23परिक्रमा नहीं की कोई दंडवत नहीं किया, पुत्र है भाग गया वहाँ से।
- 4:32शंकर के पास गया, शंकर बैठे शांत वहाँ हड़बड़ाहट शुरू करती, शोर
- 4:46फैलाना शुरू कर दिया। शंकर ने आंख खोली देखा, वहाँ भी
- 4:52कुछ गड़बड़ी करती। शंकर भी पीछे ही भागे, फिर सोल
- 5:02चला दिया। रबू थोड़े साइड में होली है,
- 5:08समझदार है। फिर गए विष्णु के पास खीर, सादर
- 5:18में शाइन कर रहे वह विष्णु योग निद्रा में जीस योग निद्रा की मैं
- 5:35बात करता हूँ। और लक्ष्मी उनके पांव दबा रही है।
- 5:47भृगु ने आप देखा ना तब? उसकी छाती में पांव जमा दिया,
- 6:02उसकी छाती में प्रहार किया, पैर से और इतना गहरा प्रहार किया कि
- 6:12बहुत बड़ी आवाज आई। जैसे कुछ चीज़ से टूटी हो।
- 6:18इतना खटका योग? निद्रा खुली विष्णु विष्णु ने
- 6:29देखा भृगु ने। उठे हुए उसके प्रांग पकड़ लिए हे
- 6:41ब्रह्मदेव, मेरी छाती वज्र सी कठोर है और ब्रह्मदेव आपके पांव
- 6:50तमिल से कोमल। कहीं चोट तो नहीं आई?
- 7:05रघु नत्तमस्तक हो गया है, चरणों में पड़ के खूब रोया है लेकिन
- 7:17वहाँ बैठी लक्ष्मी बर्दाश्त न कर सकें।
- 7:23लक्ष्मी कुपित हो गई। क्रोधित हो गई आँखें लाल कर ली,
- 7:32बोली भृगु, तुमने मेरे सामने मेरे पति का अपमान करके ठीक नहीं किया,
- 7:40अतः मैं तुम्हें श्राप देती हूँ। कि मैं तुम्हारे वंशजों के पास
- 7:47ठहरूंगी नहीं, मेरा निवास नहीं होगा तुम्हारे वंशजों के पास
- 7:55आऊंगी, चली जाउंगी बस। तो भृगु बोले लक्ष्मी से माथे
- 8:14तुम्हारा अभिशाप, सिर माथे लेकिन गुमान मत करना मैं ऐसे ग्रंथ का
- 8:22निर्माण करूँगा भैया। कि उस ग्रंथ का अगर एक पन्ना भी
- 8:27किसी के पास होगा या उस ग्रंथ की एक शब्दावली भी उसके पास होगी,
- 8:35जहन में तो उसके पाँचों में गई तू ठहरने की बात करती है।
- 8:45तो उसके पांव में पड़ी रहेंगी वो तुम्हे झटकेगा और इसमें तुम अपमान
- 8:54नहीं मानेगी तो उसके पांव को पकड़े रहेंगी।
- 8:57मैं ऐसे ग्रंथ का निर्माण करूँगा और उसने लिखा भृगु संगता खैर
- 9:03शास्त्र की बातें हैं। इनमें कुछ गहरी रस हैं।
- 9:08वक्त इतना होता नहीं जीतने से आप समझ जाओ, उतना ही काफी बस उतना ही
- 9:17बोलना उचित होता है। विष्णु का कैसा रिएक्शन?
- 9:39हे ब्रह्मदेव, मेरी छाती वचर्सी कठोर, आपके पांव, कमल से कोमल।
- 9:49अवश्य ही चोट आई होगी। बताइए, दबा दूँ?
- 10:07मुझे लोग कह देते हैं, आप नाम अक्षरों का जाप करने वालों को
- 10:16बड़े प्रताड़ित करते हैं। मैंने कहा नहीं आप समझने में गलती
- 10:21कर देते हो नाम जाप करने वालों को मैं प्रताड़ित नहीं करता, तुम समझ
- 10:31ते गलत हो, तुम कहते हो अच्छा बसूड़ी डाली इसके नहीं ऐसा मैंने
- 10:37मेरी। मंशा नहीं होती कारण तुम समझ नहीं
- 10:42पाते ज़रा एक बात का जवाब देना अगर एमए को पढ़ाने वाला, एमए के
- 10:50छात्रों को पढ़ाने वाला व्यक्ति प्रथम कक्षा को पढ़ाने वाले टीचर
- 10:56की बेइज्जती करेगा? पीएचडी को पढ़ाने वाला प्रोफेसर
- 11:06लेक्चर आर। क्या प्रथम श्रेणी के छात्रों को
- 11:11पढ़ाने वाले शिक्षक की बेइज्जती करेगा?
- 11:21तुम्हारे दिमाग में उत्तर जरूर आ गया होगा, नहीं करेगा, वह उसे
- 11:27प्रणाम करेगा। इसलिए जो मैं सबसे पहले प्रणाम
- 11:33करता हूँ, उन लोगों को करता हूँ जिनकी भावनाओं क्षीण हो जाएंगी।
- 11:42टूट जाएंगी भावनाओं उनकी, लेकिन मेरी दृष्टि में वो इतने मूर्ख
- 11:47नहीं हैं। कुछ तो समझ होती है उनमें भी
- 11:57प्रथम श्रेणी का। शिक्षक अगर बच्चे को सिखायेगा
- 12:01नहीं ए अनार होता है तो दशम कक्षा का शिक्षक ये कैसे बता पाएगा कि
- 12:13एस ऐफ़ अनार का नहीं होता? ये सभी चीजों का होता है जिन
- 12:20जिनकी शुरूआत ऐसे होती है मेरे कहने का तात्पर्य आप नहीं समझते।
- 12:34और फिर अगर उनकी भावनाओं को चोट लगती है तो सबसे पहले मैं आपसे
- 12:37क्षमा जांच न करता हूँ। मैं पहले ही सिर निभा लेता हूँ।
- 12:44देखिए बोल रहा हूँ बोलने से बहुत कुछ गलत भी होगा।
- 12:49मैं उन जीवों को भी प्रणाम करता हूँ जो मेरी जीव की तली आके कुछ
- 12:53ले जाएंगे बड़े सूक्ष्म बैक्टीरिया से और मैं अच्छी तरह
- 13:00से जानता हूँ, मेरे बोलने से मेरी जीव की उलट पलट।
- 13:06उनके ऊपर ऐसा आघात करें कि जैसे सुमेरु पर्वत गिर गया हो और उनसे
- 13:13प्रथम ही क्षमायाचना कर लेता हूँ। यह अस्तित्व से क्षमा का भाव है।
- 13:30बड़े मज़े की बात है। तुलसी असुरों को भी प्रणाम करते
- 13:35हैं। अगर वो बाधा डालेंगे तो यह कथा
- 13:43सम्पूर्ण ना हो सकेगी इसलिए आप कृपा बनाए रखें।
- 13:48आप वाधा मत डालिए, बड़ी कक्षाओं को पढ़ाने वाला शिक्षक छोटी
- 13:58कक्षाओं को सर्वप्रथम प्रणाम करेगा।
- 14:03अगर ये शिक्षक न होते। तो आज मैं पढ़ाना पाता है, ए अनार
- 14:09होता है, ये सीखना आवश्यक है। तभी तो आज कह पाऊंगा ए अनार का
- 14:15नहीं होता सिर्फ लेकिन टीचर अच्छी तरह जानता है कि अगर ये पढ़ेंगे
- 14:22नहीं के ए अनार होता है। तो मैं कन्डेम कैसे कर पाऊंगा?
- 14:29लेकिन आप एक पक्ष को उठा लेते हैं।
- 14:35ये आपकी भी मुश्किल है क्योंकि आपकी बुद्धि दोनों चीजों को
- 14:42समाहित नहीं कर पाती यकसा न इन लोगों को प्रथम प्रणाम करता हूँ
- 14:55क्योंकि अगर ये जप कि नींव न डालते हैं तो मैं कैसे आगे कह
- 15:03पाता हूँ? आगे की बात कहनी।
- 15:07असंभव हो जाती है। महर्षा नाम भृगुज अहम महर्षियों
- 15:18में मैं भृगु हूँ, उन्होंने कोई पार्शलिटी नहीं की।
- 15:27कि कह दिया हो कि ब्रह्मा जी सर्वश्रेष्ठ हैं क्योंकि मेरे
- 15:30पिता भृगु जी ब्रह्मा के मनपुत्र थे।
- 15:44कृष्ण कहते हैं, शब्दों में मैं एक अक्षर हूँ।
- 15:54अक्षरों में मैं एक अक्षर हूँ, मैं एक अक्षर प्रणब ओंकार यज्ञा
- 16:07नाम जब यज्ञो आप यज्ञा नाम। देखिए, उन्होंने ये नहीं कहा कि
- 16:20जपों में मैं राधे राधे हूँ नहीं कहा।
- 16:29उन्होंने कहा, यज्ञों में जप यज्ञ आसमान।
- 16:38यज्ञ का मतलब होता है यज्ञ का अर्थ है आहूत हो जाना, मिटा देना,
- 16:48समर्पित हो जाना टु सरेंडर। यज्ञा नाम जब यज्ञोवस्म अब यहाँ
- 16:59बहुत से प्रश्न आए मेरे पास, मैंने कहा वक्त आने दो वक्त के
- 17:08अनुसार ही शब्दों के भेद खोलेंगे। आज वक्त आ गया और कृष्ण के इसी
- 17:19शब्द का उदाहरण देते थे। यज्ञा नाम जप यज्ञो उन्होंने
- 17:27यज्ञो में मैं जप यज्ञ हूँ। अगर भस्म होना है, राख होना है,
- 17:36विभूति बनना है विभूतियों का जिक्र कर रहे हैं कृष्ण विभूति का
- 17:46अर्थ आप समझ। ये प्रतीक चिन्ह जो हमारे बीच में
- 17:54छूट दिए गए उनका अर्थ हम समझ नहीं सके।
- 17:59विभूति का अर्थ है वो भस्म, वो राख जो बच जाती है अग्नि के बीच
- 18:08में से गुजर के भी। अग्नि उसको जला नहीं सकती, लकड़ी
- 18:19को जला देती है। सभी पदार्थों को सुगंधित द्रव्य
- 18:22जो आप डालते हो, हवन सामग्री कपूर वगैरह घी वगैरह सबको जला देती है।
- 18:30लेकिन फिर भी शेष बच जाता है। क्या विभूति उसे नहीं जला पाते तो
- 18:40सनातन एक बहुत सुंदर? ऐसा प्रतीक चिन्ह उबारह उसारा शिव
- 18:57के सभी अंगों के ऊपर विभूति लगी है जिसे आप रात कहते हो, जलते हुए
- 19:05धुनाई के पास बैठे हैं। जो शैव हैं वो जलते हुए दूने के
- 19:12पास फटते हैं। लकड़ी का दूने जलता रहता है, हर
- 19:16वक्त गर्मी हो, सर्दी हो, वैष्णव भी त्रिपुंड लगाते हैं।
- 19:26किसका लगाते हैं विभूति का विभूति, जानें राख इसका अर्थ था
- 19:35नहीं समझ पाए हम जब हम शब्दों को ठीक से नहीं समझ पाते।
- 19:44तो सिम्बोलिक रेप्रेसेंटेशन्स को कहाँ समझ पाएंगे?
- 19:50जब हम पानी को जल की तरह नहीं समझ पाते तो एच टू ओह की तरह कैसे समझ
- 19:54पाएंगे? जब हम नमक को नमक की तरह स्वाद चक
- 19:59के नहीं समझ पाते तो एनएसीएल की तरह कब समझ पाएंगे?
- 20:05लेकिन ये बचाने के लिए थी। सब मिट जाएगा सिंबल नहीं मिटेंगे
- 20:15सिंबल देर तलक टिके रहते हैं, लेकिन आज मूर्ख हैं।
- 20:24महाकालेश्वर मंदिर के बाहर भिखारी बैठे हैं, उनके अस्थि पिंजरे
- 20:30निकले हुए हैं। खाने को रोटी नहीं, उन्हें और
- 20:37सुगंधित द्रव्य और घी। दुग्ध दही बिखेरा जा रहा है पत्थर
- 20:45के ऊपर इसे कहते हैं महाकालेश्वर मंदिर तुम्हारे दिमाग का बेजा सड़
- 20:53गया है। तुम अपने आप को सनात्नी कहते हो।
- 21:01इन सुगंधित द्रव्यों को ऐसे ही नष्ट करना चाहिए अगर ईश्वर ने
- 21:08प्रदान कर दिया आपको जो इनका काम है उनसे वो लीजिए, कोई हवल में
- 21:14फूँक रहा है। भिक्षों को काट रहा है, जीवन को
- 21:23काट रहा है और यज्ञ कर रहा है शावश बहुत बढ़िया यज्ञ की प्रणाली
- 21:32है तुम्हारी। वातावरण प्रदूषण का उतार हैं, हम
- 21:37तो जगे करेंगे करो फिर परिणाम भी भुग दो।
- 21:44फिर 5060 डिग्री का अगर टेम्परेचर होता हैं तो उसे सहन करना सीखो और
- 21:51किसी दिन आग भी लग जाएगी। किसी दिन ये ग्लेशियर भी तो
- 21:56जाएंगे क्योंकि 6070 डिग्री के ऊपर ये ग्लेशियर बने नहीं रह
- 22:03सकते। ये सब बिगल जाएंगे और तुम देख
- 22:07लेना ये ग्लेशियर, ऐसा जिगलेंगे सिर्फ तुम्हारी मूडताओं के कारण।
- 22:16तुमने जीवत थपेड़ों को काटा और काटा, उसका कागज़ बना दिया, उसको
- 22:24जला दिया, बसम बना दिया खाने को रोटी नहीं मिलती।
- 22:32और तुम घी को पत्थर के ऊपर लुढ़काए जाते हो और ऐसी शान्ति
- 22:37होती है। इन लोगों के चेहरों पर हृदय सड़े
- 22:42होते हैं, चेहरे पर बड़ा पुण्य का भाव होता है।
- 22:51इससे बड़ा पाप कोई नहीं हो सकता। जो चीज़ जीस चीज़ के लिए बनी उसी
- 22:56जगह के ऊपर उसका इस्तेमाल करना ही ठीक है या परमात्मा ने तुम्हारे
- 23:01लिए बनाया तुमने नहीं बनाया तुमने तो सिर्फ फूंका फूंक तो ठीक ढंग
- 23:09से देते। किसी गरीब को खिला देते ये 80
- 23:13पिंजर से जकड़े हुए लोग तुम्हारे मंदिरों के बाहर बैठे तुम्हें तरस
- 23:17नहीं आता ये तुम्हारी सब शरारतों का परिणाम है और ध्यान रखना ये तो
- 23:26भुगत रहे हैं तुम भुगतोगे। मैं आवेश में नहीं हूँ, मैं आवेग
- 23:36में भी नहीं हूँ, मैं सिर्फ सत्यवचन बोल रहा हूँ और सत्यवचन
- 23:44बड़ा कटवा होता है कड़वे लेकिन। शांति प्रदायक भीतर उनकी शांति
- 23:55छिपी होती है। होते हैं कड़वे तुम्हें लगेंगे
- 24:00कड़वे बाहर से, लेकिन भीतर इनके प्रणाम बड़े शोभ हो गए।
- 24:11फिर तुम कहते हो हाय 60 डिग्री हो जाएगा हार्ट हाय 70 हो जाएगा, हो
- 24:17जाएगा भाई बिल्कुल हो जाएगा और ये सभी तुम्हारे जिनके ऊपर तुम
- 24:21सम्मान करते हो गंगा ये गंगा माता 1 दिन विलीन होने वाली है।
- 24:271 दिन तो हमारी ये सभी माताएं विलीन हो जाएंगी, वाश्वा बन
- 24:34जाएंगी, हवा में उठ जाएंगी। अगर ऐसे ही पागल बने रहे तो ऐसा
- 24:39ही कुछ असर होने को है। भक्त रहते चेत जाओ, लेकिन अब तो
- 24:46मेरी दृष्टि में भक्त इतना बचा भी नहीं, अभी ही चेतना होगा बहुत भटक
- 24:55लिए, पागलपन से बहुत उछल कूद लिए। अब आज आ जाओ सही रास्ते पे आ जाओ,
- 25:07लेकिन नहीं ये चले जायेंगे मेरी आवाज़ इन तक पहुंचेगी नहीं, मैं
- 25:12जानता हूँ क्योंकि मेरे पास मीडिया नहीं है।
- 25:18मीडिया तो गलत बातों को मिनट में सेकंड में प्रचारित कर देता है और
- 25:24सही बातें बरसों वर्षों तक माटी के नीचे दफन रह जाती हैं।
- 25:30पता नहीं मेरी बात इन मूर्खों तक पहुंचेगी नहीं पहुंचेगी, संभावना
- 25:36ज्यादा है कि नहीं पहुंचेगी? नहीं, नहीं तो बोल दिया मैं कहता
- 25:44हूँ ये मूर्ख सब मत करो या सिद्ध करो, कुछ तो करो, साइंटिस्ट से
- 25:50कोई बात कहता है, फिर उसे सिद्ध करता है कि ये ऐसा है।
- 26:00तुम सिद्धू भी नहीं कर पाते कैसे? घी डालने से कैसे चंदनयुक्त घी
- 26:05डालने से कैसे सुगंधित पदार्थों को पत्थर के ऊपर डाल देने से तुम
- 26:13मुक्त हो जाओगे। तुम्हें पुनने लगेगा।
- 26:15ये तो बहुत बड़ा अनर्थ है, ये तो बहुत बड़ा पाप है।
- 26:23मैं इन जोड़ने वाले तथाकथित अमीर लोगों से कहूंगा, तुम्हें तब तक
- 26:32चैन नहीं मिलेगा जब तक कोई भी भूखा भूख से मर जाता है।
- 26:39तुम सोओगे तुम्हें पता भी नहीं होगा कि जो द्रव्य तुमने छीन के
- 26:46अपने ड्रंक भर लिए हैं, उनसे जो मरेंगे, उनका दोष और पाप आपके सिर
- 26:51के ऊपर आएगा। तुम्हें पता ही नहीं है क्योंकि
- 26:54तुम्हारे में इतनी बुद्धि नहीं, इतना विवेक है।
- 26:59तो जोड़तें ही चले जाओ, कोई इंकार नहीं, बस मैं तो एक बात कहता हूँ,
- 27:05परिणाम भुगतने को तैयार रहो, फिर मत कहना मेरे पास बहुत लोग आते
- 27:09हैं। इस जनम में तो बाबा जहाँ तक मेरी
- 27:13स्मृति काम करती है, मैंने कोई पाप नहीं किया।
- 27:16मैंने कहा तुमने कोई बात नहीं किया तो फिर परमात्मा पागल हो
- 27:21गया। वह तो न्यायकारी है, वह दंड क्यों
- 27:25दे रहा है? वह सच में दंड दे रहा है, वह
- 27:31मूर्ख नहीं है। इतनी सृष्टि का उत्पादन करने वाला
- 27:34सृजन हरा। न मूर्ख है, न ही पागल है।
- 27:42वह न्यायकारी है, अगर तुम्हें दंड मिला है तो इस जन्म में नहीं, इस
- 27:46घर में नहीं किसी और घर में करके आ गए होंगे, शहर बदल लिया होगा,
- 27:51घर बदल लिया होगा, देश बदल लिया होगा।
- 27:54और कुछ लोग तो ग्रह बदल देते हैं, लेकिन किया तुमने ये दही के साथ
- 28:02ही चिपके जाता है। उसका विधान बड़ा सूक्ष्म है और कल
- 28:07तक तो विज्ञान नहीं मानता था लेकिन आज तो मानना शुरू हो गया।
- 28:14जब से इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन की खोज हुई, तब से
- 28:19सूक्ष्मता की महत्ता जानने लगा। विज्ञान भी उससे पहले इतनी नहीं
- 28:25जानता था। और विज्ञान भी हतप्रभ है।
- 28:36विज्ञान मारा मारा फिरता है जब से कैंटम सिद्धांत का निर्माण हुआ
- 28:43है। एक ही चीज़ कण की तरह और लहर की
- 28:50तरह व्यवहार करती है। एस ए पार्टिकल एंड एस ए वेव एक ही
- 28:57चीज़ एक ही बार में क्या करोगे इसका कैसे सुलझाओगे हैरान हैं।
- 29:08भेजा खराब हो गया इनका और अभी तो कुछ भी नहीं खोजा।
- 29:17राहतें और भी हैं वसल की राहत के सिवा।
- 29:21और भी दुखें हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा अभी खोजा ही
- 29:26क्या? बस सीना फैलाया है सिर्फ छोटी
- 29:31छोटी खोजें करके अल्बर्ट आइंस्टीन भी शायद कहते होंगे कि मैंने इज़
- 29:38इक्वल टु एम सी किया। ये ठीक बहुत बढ़िया सिद्धांत
- 29:42दिया, लेकिन कोई तीर नहीं मार दिया।
- 29:47अभी आज क्विंटम जैसे क्विंटम का पता लगा है।
- 29:55सब सेंटेंस धराशाई हो गया है। और अभी तो कुछ भी नहीं खोजा है।
- 30:05नेग्लिजिबल कहता हूँ मैं कुछ भी का मतलब नेग्लिजिबल कुछ भी नहीं
- 30:11अभी बहुत खोजें पड़ी मैंने पिछले प्रवचनों में कहा था कि जैसे आज।
- 30:19हम घर बैठे बिना तार के हमारे पास फ़ोन आता है।
- 30:23मोबाइल फ़ोन ऐसे ही मोबाइल इलेक्ट्रिसिटी होगी।
- 30:29ध्यान रखना मेरी बात का और आज ये मेरे चैनल कंट्रोलर ने बताया कि
- 30:36आज ये खोज हो चुकी है। आज बिजली को सिर्फ ट्रांसमिट करके
- 30:46आपके घर में भेजा जा सकता है और कोई वक्त आएगा जब आप।
- 30:57स शरीर बिना दिखे दृश्य हो जाएंगे और किसी अन्य जगह पर प्रकट हो
- 31:02जाएंगे। ये सब संभावनाओं अस्तित्व के भीतर
- 31:07परमात्मा की देनें तुमने खोजी नहीं बात अलग है।
- 31:13वक्त आएगा जब स शरीर। क्या कहता हूँ ध्यान से सुन लेना?
- 31:21अगर मेरे शब्द तब तक सुरक्षित पड़े रहे तो वो लोग हैरान होंगे
- 31:27कि कैसे किसी व्यक्ति ने ऐसा कह दिया।
- 31:33किसी दिन ऐसा वक्त आएगा जब व्यक्ति सहशरीर गायब हो जाएगा और
- 31:41किसी और जगह पर प्रकट हो जाएगा। तुम्हें पता ही नहीं है।
- 31:44अन्य ग्रहों से आती हुई रोहें सहशरीर आती हैं, पृथ्वी पर आती
- 31:50हैं, अन्य ग्रहों पर जाती हैं। मैंने तो ये कमाल अपनी आँखों से
- 31:54देखा है। किसी दिन पृथ्वी के ऊपर भी कोई
- 32:00वैज्ञानिक इसे खोज लेगा और तब न्याय करना मुश्किल हो जाएगा।
- 32:09एक जगह पे हत्या हुई। और वो किसी और जगह पे फर रहा है
- 32:13क्या करोगी जुड़ी शिरी सारी फैल हो जाएगी वह कहेगा जी मैं तो यहाँ
- 32:20पर हूँ देखो वहाँ कैसे आ गया? एक ही चीज़ एक ही समय में दो
- 32:27प्रकार का व्यवहार कर रही है जस्ट एस ए प्रैक्टिकल।
- 32:31जस्ट एस ए पार्टिकल एस वेल एसएस ए वेफ तो एक पदार्थ एक ही समय में
- 32:41दो स्थानों पर दृश्य क्यों नहीं हो सकता?
- 32:44सब हो जाएगा, वक्त आने दीजिए। अभी तो सोचा ही क्या है तुमने अभी
- 32:52तो खोजा ही क्या है तुमने अभी तुमने कुछ नहीं खोजा, तुम जिन्हें
- 33:00वैज्ञानिक के गुण गाते रहते हो। पश्चिम में अभी मुझे आज सुबह एक
- 33:05मैसेज आया, क्या आप कहते हो? कि इन्होंने हमारी सभ्यता को
- 33:11बर्बाद कर दिया। सच तो ये है कि आपने हमारी
- 33:14पश्चिमी सभ्यता को बर्बाद कर दिया।
- 33:16मैंने कहा नहीं, आप गलत कहते हो। पश्चिमी सभ्यता सभ्यता थी ही है।
- 33:25सभ्यता के नाम पर एक मूर्ख था और कलक था, खोजा तो ऋषियों ने खोजा,
- 33:34तुम साइंटिस्ट कह देते हो वैज्ञानिक कह देते हो हम ने ऋषि
- 33:38कह देते हैं और हमारी किताब है ऋषि है, महर्षि हैं बड़े ऋषि।
- 33:44देव ऋषि हैं देवताओं के वृषि हमारे तो यहाँ खिताब हैं तुम्हारे
- 33:50डिग्रीज़ हैं, तुम नोबेल दे देते हो, तुम्हारी सभ्यता थी ही कहा,
- 34:03चोरों की सभ्यता थी, टैरिफ लगाने वालों की सभ्यता थी और क्या था?
- 34:13भेद दिखलाने वालों की सभ्यता थी। फिरंगियों ने क्या नहीं किया?
- 34:20ये तो एक सूरमा निकला हमारे सुनाम में से और उसने जनरल डायर को
- 34:27जाकर। सरे आम गोली मारते हैं ऐसे हिमती
- 34:33लोग हैं हमारे भारत में तुम्हारी जानी तुम्हारे काहे रोप हैं
- 34:42तुम्हारी सभ्यता को हम क्या खराब करेंगे?
- 34:49वैश्याओं को हम खराब हो गए सत्यत्व को तो खराब किया जा सकता
- 34:55है वैश्याओं को क्या खराब किया जाता है?
- 34:59तो मूर्ख मत बनो मूर्ख बनाने की चिष्टा मत करो।
- 35:05वैश्य तो पहले से ही पतित होती हैं।
- 35:07तुम तो पहले से ही पतित हो। वीर के संरक्षण के बारे में बोला।
- 35:14उसके कमेंट में जवाब आया। कि तुमने हमारी सभ्यता को खराब कर
- 35:23दिया, तुम मौज किये जाओ भाई और फिर तुमने सुना ही क्यों?
- 35:28मुझे किसने कहा था मुझे सुनने के लिए?
- 35:31मैं अपने लोगों के लिए बोल रहा हूँ जो उस तत्व तक जाने की।
- 35:39पर हम आकांक्षा रखते हैं, मैं उनके लिए बोल रहा हूँ तुम्हारे
- 35:47लिए, मैंने बोला ही नहीं, तुम्हें प्रतिकार करने की आवश्यकता भी तो
- 35:51नहीं थी? और मैं काली हमारी गुरुकुल पद्धति
- 36:05को ले गया और आज वो पुनः स्थापित नहीं हो सकती।
- 36:10एक बार जो चेन टूट जाती है वो बिखर जाती है, फिर उसको इकट्ठा
- 36:16करना मुश्किल हो जाता है। मैं काले की यह सोच ज़रा बताना।
- 36:24यह सच्ची सोच ये दुर्भाग्यपूर्ण थे।
- 36:29विकृत सोच, विकृत मानसिकता का सबूत तोड़ो और राज़ करो, बांटो और
- 36:36राज़ करो इनसे इनकी। विशेषता छीन लो इनकी विशेषता है
- 36:46गुरपुर कोई जला देता है हमारी नालंदा यूनिवर्सिटी को कोई विकृत
- 36:54कर देता है, कोई प्रणाली ही हटा देता है।
- 36:59हम मौज कर रहे थे हमारे वैसी दिन भर रात आनंद में और आज देखो हमारे
- 37:09हिंदुस्तान का हाल देखो मुक्ति के लिए तरस रहे हैं।
- 37:16मर जाते हैं, मुक्ति नहीं मिलती हाल देखो हिंदुस्तान का, आज ये सब
- 37:25तुम्हारी एजाद हैं तुमने खत्म कर दी हमारे ऋषियों ने जो व्यवस्था
- 37:36खोजी थी। जो लागू की थी।
- 37:38हजारों सालों से हम बड़े प्रेम से रह रहे थे, तुमने सब विकृत कर
- 37:44दिया, तुम्हारी मानसिक दूषकता हमारे विध्वंस में कारगर सिद्ध
- 37:52हुई। तुमने हमें गुलाम भी मनाया, तुमने
- 38:00हमारे मानसिकता को भी छीना। इतने शेर बहादुर यहाँ पैदा होते
- 38:06थे, आज गुलाम पैदा होते हैं। आज वो वक्त हो गया है।
- 38:13है। दो दोस्त अगर आपस में मैंने ऐसा
- 38:18सबूत एक देखा है कुदरती मेरी निगाह में आ गया।
- 38:24एक दोस्त दूसरे दोस्त को सहायता कर रहा है।
- 38:31और वो गलत काम कर रहा है, कभी जेल में फंस जाता है, कभी खुश हो गया,
- 38:35कभी खुश हो गया। कभी जमानत के लिए उसे पैसा चाहिए
- 38:42वो बेचारा गरीब व्यक्ति पैसा देता है उसे और जब मांगता है तो वो
- 38:48कहता है मैंने तुमसे लेने। इतना ही नहीं फिर उसे वो पुलिस
- 38:55स्टेशन खरीदता है। वहाँ बाहुबल के ज़ोर के ऊपर दबाने
- 39:02की कोशिश करता है और नहीं दबता जब वो तो फिर उसको कचहरी में ले जाता
- 39:08है। कोर्ट में।
- 39:09ये बात अलग है कि हमारी न्याय प्रणाली आज चिंता है, हार जाता
- 39:15है। डेफर्मेशन का केस आज भी चल रहा है
- 39:21और हद की बात है कि ये व्यक्ति मानने को तैयार नहीं है कि हाँ
- 39:25मैंने देने हैं। ये बाजित है कि नहीं?
- 39:29मैंने लेने हैं, सबूत भी नहीं दे पाता।
- 39:35इसका सगा भाई कहता है कि हाँ इसमें देने हैं मेरे सामने ये मान
- 39:41रहा है इकट्ठे रहते हैं भाई अब क्या किया जाए?
- 39:46कोई इलाज है, कोई इलाज नहीं। इलाज सिर्फ ये है कि इसके साथ
- 39:51मष्टंडे हैं। ये इलाज है जिसकी लाठी उसकी भैस
- 39:57लेकिन नहीं है। ऐसा होता नहीं है।
- 40:00ये तुम्हारे संसार में कभी कभार चल जाता है लेकिन उसकी उसके संसार
- 40:05में नहीं जलता। एक शक्ति को हमेशा याद रखो दो
- 40:11आँखें हमेशा तुम्हें निहार रही हैं।
- 40:16तुम क्या कर रहे हो, तुम क्या सोच रहे हो, तुमने क्या प्लान की है?
- 40:21दो आँखें तुम्हें हमेशा बाहर भीतर से झांक रही हैं।
- 40:26अगर तुम्हें नहीं पता तो ये गलती तुम्हारी जो जानते हैं वो देखते
- 40:33हैं ऐसे ऐसे। ढंक बनाए गए।
- 40:43मैं काले हमारे शिक्षा पथिक को विनर्स करके कोई आके हमारे नलंदा
- 40:50को आग लगा देता है। महीनों तक वो आग जलती है और हमारे
- 40:58ऋषियों की खोजें। विभूति बन जाती हैं हम प्रसंग
- 41:09पिया जाएं भगवान शंकर की लगी हुई विभूति आपको याद कराने के लिए है
- 41:17कि 1 दिन। ये तुम विभूति में तब्दील हो
- 41:20जाओगे, राख बन जाओगे और ये आग का जलना धोने के सामने ये तुम्हें
- 41:31याद कराता है कि तुम्हारे सारे पदार्थ धू धू करके ऐसे ही जलेंगे,
- 41:36कोई न बच पाएगा। राख बचेगी।
- 41:39इसलिए भगवान शंकर राख लगा लेते हैं, लेकिन तुम कुछ सीख नहीं सकता
- 41:49है। इन चीजों से तुम्हें सीख नहीं
- 41:58सकती, तुम सीधी बातों से नहीं सीख सकते।
- 42:02अलंकारों से कैसे सीख पाओगे प्रतीकों से कैसे सीख पाओगे आज
- 42:11प्रतीक व्यर्थ हो गए हैं, इसलिए मैं कहता हूँ प्रतीकों को आग लगा
- 42:15दो। प्रतीक व्यर्थ हैं।
- 42:19आज कोई सीधी बात सुनने को तैयार नहीं।
- 42:22समझने को तैयार नहीं। तुम्हारे प्रतीक कोई कैसे समझेगा?
- 42:32इसलिए प्रतीकों को आग लगा दो प्रतीकों को मिटा दो और मैं यही
- 42:37काम कर रहा हूँ तुम मुझे गालियां दो।
- 42:43कोई बात नहीं तुम मुझे जो चाहे बोलो तुम मुझे दंड दो, तुम मुझे
- 42:52मार दो, कोई बात नहीं, मैं तो सदा कहता हूँ, तुम ना मरोगे मौत मार
- 42:58देगी, कौन बचा हैं? कोई बचा है जीसको तुम कहते हो
- 43:05माहावतार बाबा बच गया देखा है किसी ने क्यों पागल हुए हो कोई
- 43:11नहीं बचा यहाँ और कोई नहीं बचेगा यहाँ भोतक शरीर धारी कभी नहीं
- 43:16बचता, थोड़ी सी लम्बी उम्रियाँ हो सकती है।
- 43:22बस इतना सा ही है और उसमें क्या करोगे?
- 43:25अगर दुखद ज़िन्दगी हो तो लंबी ज़िन्दगी उतना ही नर्क बन जाएगी।
- 43:33लंबी ज़िन्दगी की उम्मीद मत करना सुंदर ज़िन्दगी की।
- 43:41मस्त ज़िन्दगी की प्यार भरी ज़िन्दगी की इच्छा करना काम न
- 43:45करना ऊचाही छोटी सी क्यों न हो बड़ी ज़िन्दगी नरक से भरी हो मेरे
- 43:53पास लोग आ जाते हैं बाबा 20 साल से तड़प रही है मेरी मैया।
- 43:57कोई इलाज कर दो, वो कह तो सकते नहीं कि कह दो भगवान से इसे मार
- 44:02दे तो मैं पूछ लेता हूँ कि मैं कह दूँ कि इसे मार दे राम राम राम
- 44:08राम यह तो क्या कहना मैं और क्या कहूँ बताओ ऐसे कह दो शब्दों का
- 44:13हेर फेर देखो। ऐसे कह दो, इसे कष्ट से मुक्ति
- 44:17दिला दो। कहने का ढंग है तुम उलटे पुलटे कह
- 44:21के यही कह रहे हो की इसको मार दो और क्या कहूं, मुझे तो सीधा ही
- 44:25कहना पड़ेगा के भगवान इसको मार दो।
- 44:32तुम शब्दों के खिलाड़ी हो, शब्दों से चिपके पड़े हो महर्षा नाम
- 44:41प्रगोर अस्मा जप यज्ञ अस्मा यज्ञों में जप यज्ञो अस्मा।
- 44:53जग का मतलब है आहूत हो जनो और वो मंजिल जिसकी तलाश आपको है आहूत
- 45:02हुए बिना मिलती नहीं। और कृष्ण का एक एक अलफास आपको
- 45:12आहूत करने के लिए वचनबद्ध है, प्रतिबद्ध है।
- 45:17कृष्ण आपको आहूत करना चाहते हैं, कुछ भी बोल दे अन्य्न्य चिंतन तो
- 45:22माँ ये जना प्रभाव से इसमें आपको आहूत करने का ही विचार आएगा।
- 45:28सर्वधर्माणपत्रज्य मामी का शरणम वृक्ष शरण में आ जा यानी आहुत हो
- 45:34जा। इसे यज्ञ कहते हैं।
- 45:40जैसे आप भले ही कहते हो, इसको कृष्ण यज्ञ कहते हैं।
- 45:48जग में होता क्या है ज़रा सोच के बताओ जग में कुछ चीजों को हम अभूत
- 45:54करते हैं, राख में तब्दील कर देते हैं, बैठ जाते हैं, उन भौतिक
- 46:00पदार्थों को विनष्ट करने का नाम यज्ञ है।
- 46:05जब कुछ हो रहा है तो बता दो यज्ञों में मैं जप यज्ञ हूँ, आहूत
- 46:19करना है। अपने आप को कृष्ण का ये लक्ष्य है
- 46:24जीस कारण से तू डर रहा है, दैट इज़ एलूज अनुभव भ्रम है।
- 46:29और इस भ्रम को नष्ट करना है। कृष्ण चोट करते हैं।
- 46:37बुनियाद पर फाउंडेशन पर तुम्हें पता भी नहीं चलता, तुम शब्दों से
- 46:43उलझ जाते हो, मैं बार बार कहता हूँ यज्ञा नाम जपु यक्ष।
- 46:49जग्गों में आहूत होने में जप यज्ञ अस्व मैं जप यज्ञ हूँ, तुम भस्म
- 47:00हो जाओ तुम मिटो कहाँ पहुंचोगे? जब मिट जाओगे तो वहाँ पहुंचोगे
- 47:12जहाँ जब हो रहा है तुम जब करने लग जाते हो यही तो मैं रोज़ कहता हूँ
- 47:20कोई पांच नाम करने कोई दो नाम कर रहा कोई चार नाम कोई 1000 नाम।
- 47:26कोई एक नाम कर रहा है भगवान कृष्ण के पीछे रख के।
- 47:32मैं तो एक अक्षर ओम हूँ तो वो ओम का जाप शुरू कर देते हैं।
- 47:38तुमने हर जगह समझने में गलती खाई, कृष्ण के शब्दों को ही पकड़ लिया
- 47:44और नहीं। भाव देखो क्या कहते हैं कृष्ण
- 47:51कृष्ण कहते हैं, अगर आहूत होना है अपनी विभूतियों को गिना रहे हैं,
- 47:57वो आहूत होना है तो सबसे श्रेष्ठ क्या है?
- 48:07मुझ में समझ जाऊ समर्पित हो के यज्ञ का अर्थ है समर्पित होना
- 48:15भस्मी भूत हो जाओ, कहाँ पहुँच जाओगे वाजय नाद अनेक असंखा
- 48:20कीर्त्य वापन हार। मस्जिद कोरो जोड़ा डरिया जा ठकर
- 48:27दे ढेरे, बढ़िया ठाकुर कोण ठकर वो जहाँ जिथे वैदे नाद 1000 इश्क दी
- 48:39नमियो नमी बहार। जहाँ पर हजारों प्रकार के वादी
- 48:45यन्त्र बज रहे हैं, मस्ती ही मस्ती है, आनंद ही आनंद है,
- 48:50खुमारी ही खुमारी है, उसकी शोभा बरण न जाइए नहीं, बरण में नहीं आ
- 48:59सकती। वहाँ पहुँच जाओगे लेकिन पहुंचोगे
- 49:03कैसे? ये भी तरीका है लेकिन कोई क्या
- 49:08करे? अगर तुम तरीकों को अड़चनों की तरह
- 49:12बना लो तो? तुम मार्गों की को अड़चनों की तरह
- 49:20बना लेते हो तो कोई क्या करे? कृष्ण क्या करे ये कृष्ण आज तो है
- 49:26नहीं आज का कृष्ण ही तोड़ेगा तुम्हारे भ्रमों को और फिर नए नए
- 49:32कृष्ण पैदा हो जाते हैं आओ आचार्य का संघ हो।
- 49:38गीता के रंगों में भगवान कृष्ण की वाणी से जुड़ जाओ।
- 49:42बस महीने के इतने पैसे हैं यह ऑनलाइन क्लासों वालों ने बीड़ा
- 49:48गर्व कर दिया। किसी को पता नहीं चलता, पैसे देने
- 49:52पड़ते हैं। संतों के कानों में बात न पड़
- 49:56जाए। इसलिए जो पैसे देगा वो सुनो और
- 50:00पैसे देने वाला बुद्धू होता है। समझदार तुम्हे पैसे क्यों देगा?
- 50:06जो जानता ही है वो पैसे क्यों देगा मुड़ता थोपने के लिए?
- 50:18बस सुंदर अलफज हैं, आचार्य का संग हो, गीता के रंग हो, भगवान कृष्ण
- 50:25का विभूति पाज। आइए आचार्य के संग समझे जीने का
- 50:33डंग जीने का डंग तो तुम्हें नहीं आता।
- 50:35आचार्य जी? पैसे इकट्ठे करने का डंग आता है।
- 50:41जीने का डंग किसे आया आपसे बड़े से बड़े महारथी सेठ को जीने का
- 50:46डंग आया नहीं आया इसीलिए तो इकट्ठा कर रहे हो।
- 50:52नहीं आया इसीलिए तो बड़ी गद्दियाँ ढूंढ रहे हो?
- 50:55नहीं आया, इसीलिए तो मान सम्मान ढूंढ रहे हो।
- 50:58अगर जीने का डंग तुम्हें आ जाता तो ये सब कूड़ा कचरा क्यों इकट्ठा
- 51:02करते? कूड़ा कचरा इकट्ठे करने का कारण
- 51:07नहीं ये है कि तुम्हें जीने का डंग नहीं आया, सलीका आया ही नहीं।
- 51:14कितनी ही संताये कितनों ने कितनी कितनी बाते की तुम समझे कहा
- 51:20तुम्हें जीने का ढंक नहीं आया तुम रोते के रोते, फिर यज्ञों में मैं
- 51:32जब यज्ञ हूँ। यज्ञ का मतलब आहूत होना अगर आहूत
- 51:41होने के जरिये बहुत से तरीके हैं, उस तक पहुंचेगा और बहुत से तरीकों
- 51:47से लोग वहाँ पहुंचे। जैसे मैं हमेशा ही सफीर की बात
- 51:53करता हूँ, सर्कल में आपने देखा केंद्र से प्रकार लेके हम सर्कल
- 51:58खींच दे, एक गोला तो वो केंद्र परिधि से हर क्षेत्र से जुड़ा
- 52:06रहेगा। अनेकों डाइमेंशन होंगे।
- 52:11परिधि से केंद्र पे आने के और केंद्र से परिधि पे जाने के बहुत
- 52:17से तरीके हैं। सब ने अलग अलग तरीके आजम आए और
- 52:22सभी के तरीके अलग अलग हैं। लेकिन सभी पहुंचे केंद्र के पास
- 52:26ये जो लड़ाईयां हो रही हैं, ये केंद्र पर पहुंचे हुए लोगों की
- 52:30नहीं हैं। ये सफीर पर बैठे हुए लोगों की
- 52:33हैं, ये जो मतभेद हैं, ईश्वर अल्लाह तेरे नाम हैं के नहीं हैं।
- 52:42ये मतभेद सफीर पर बैठे हुए लोगों के हैं, जो परिधि पर बैठे हैं
- 52:47केंद्र पर जो पहुँच गया। वो तो मुहम्मद भी एक और राम भी एक
- 52:52और कृष्ण भी एक मीरा भी एक और रूबिया भी एक वहाँ कोई फर्क नहीं
- 53:07सब भीड़ जहाँ मिट जाते हैं। वो केंद्र है।
- 53:14सभी वेद जहाँ उजागर हो जाते हैं वो परिधि है तुम परिधि पे बैठे
- 53:21बैठे लड़ते हो केंद्र का तुम्हें कोई पता नहीं केंद्र का स्वाद
- 53:25तुमने कभी चढ़ा नहीं। केंद्र पे पहुँचो लफ्जों की गुफ्त
- 53:38गू में मत उलझो, शास्त्रार्थों में मत उलझो चलो वक्त जाया मत
- 53:46करो, चलना सीखो। केंद्र की तरफ उन्मुख हो जाओ जहाँ
- 53:52भी बैठे हो मुझे लोग कहते हैं बाबा आपके पास आना चाहते हैं मैं
- 53:59कहा क्यों? आपके अल्फाज़ अच्छे लगते हैं।
- 54:06मैंने कहा जहाँ बैठे हो वहाँ चिपके रहो, एक व्यक्ति सारी धरती
- 54:11को मुक्त नहीं कर सकता और एक व्यक्ति की बात सभी धरती के
- 54:20मनुष्यों की प्रवृत्ति से मिलेंगे नहीं सभी की प्रवृत्तियाँ।
- 54:28कैसे तादाद में बना पाएगा एक व्यक्ति सभी के साथ कोई तो
- 54:35नास्तिक है, उसने खोजा नहीं, कोई तो छीन लेना चाहता है ऋण कृतवा
- 54:43ग्रितम भी। बसमभूत से देह से पुनर आगमन कुतह
- 54:50लो और घी पीलो मुकर जाओ और अदालत में कह दो मैंने लेने हैं यहाँ तो
- 54:57मांगने वाला कोई है ही नहीं। वो कहते हैं जी शरीर जिसमें लिया
- 55:02था मिट जाएगा। बस हो जाएगा और शरीर जिसने दिया
- 55:10वो भी मिट जाएगा ना ऋण लेने वाला बचेगा ना ऋण देने वाला बचेगा
- 55:18इसीलिए उधार उठाऊ। ऋणम कृतवा गिरितम् बीवेद घि बीलो
- 55:25शुक्र है उस वक्त दारू नहीं थी, नहीं तो चारवा की यही लिखते ऋणम
- 55:34कृतवा दारू पीवेद ठेके जावेद मस्त होवेद।
- 55:41ना ली पड़ित हाँ यही बोलते हैं हद है तुम्हारे लोगों की क्योंकि न
- 55:56ऋण देने वाला बचेगा। ये तथ्य तो है सत्य तो है।
- 56:02लेकिन सत्य का दुरूपयोग करने वाले लोग इस तरह करते हैं किस किस के
- 56:08साथ तदात में बैठाऊंगा तुम सभी आकर यहाँ बैठ जाओगे।
- 56:12पहली बात तो यहाँ जगह नहीं है। ये संसार किस लिए बनाया इतना
- 56:17विशाल सभी अपनी जगहों पर टिके रहो।
- 56:21जो जीसको मानता है मानते रहो लेकिन श्रद्धा वत होके मानते रहो।
- 56:27श्रद्धा पहुंचाएगी आपको गुरु नहीं पहुंचाएगा आपको श्रद्धा पहुंचाएगी
- 56:36श्रद्धा विश्वास रुप या ब्याम बिना न शांति आपकी श्रद्धा गुरु
- 56:48महत्त्व कर देता है। बस गुरु और कोई काम नहीं करता।
- 56:54गुरु का एक ही काम है तुम्हारी श्रद्धा को महत्त्व कर दे, वृहत्
- 56:58कर दे बढ़ा दे उस तल तक ले जाए जहाँ से बस एक कदम आपने जंपिंग की
- 57:06और अब वहाँ पहुँच गए तो जहाँ है टिके रहो।
- 57:14कोई और भी धर्म पैदा हो जाएं। 150 तो वहाँ भी टिके रहना क्योंकि
- 57:19पुराने सब चले जाते हैं, नए नए आ जाते हैं, लेकिन घबराना मत।
- 57:24जो नए नए आ जाए वहाँ भी टिके रहना।
- 57:32वो झूठ बोले वो सत्य बोले, लेकिन तुम्हें अगर श्रद्धा है तो धरना
- 57:37भी पहुँच जाते हैं उस पत्थर से जिसमें जीवन नहीं होता, बात धरने
- 57:45की काबिलियत की है। बात ये नहीं कि पत्थर जड़ है,
- 57:51चेतन नहीं है। बात ये है कि धन्ना परिपूर्ण
- 57:55समर्पित है। मेरा बच्ची थी।
- 58:03कृष्ण की मूर्ति ले के सोती थी समर्पित।
- 58:09और अगर सपने में भी रात को सोए पड़े भी उसके कृष्ण भगवान की
- 58:14मूर्ति को छीन लेता तो उसकी जाग आ जाती।
- 58:16फौरन चेलाने लगती वो लव मेरे भगवान लव मेरे पति।
- 58:24बचपन में ही अपना पति उसने कृष्ण को मान लिया था।
- 58:30उस छोटे से गुड्ढे को साथ ले के सोती और तुम उसे छीन नहीं सकते
- 58:37थे। ये मान्यता बड़ी जाकर रंग खिला
- 58:42गई। श्रद्धा बढ़ती ही गई, बढ़ती ही गई
- 58:47और एक वक्त ऐसा आ गया जब श्रद्धा इतनी महत हो गई कि छलांग लग गई।
- 58:55लेकिन बात तो ये है कि तुम श्रद्धा को नहीं बढ़ाते, तुम तर्क
- 58:58को बढ़ाते हो। साइंस ने एक नुकसान भी किया है,
- 59:04एक फायदा भी किया है। फायदा ये किया है कि आपके शरीर को
- 59:08आराम बख्शो। नुकसान ये किया कि आपकी श्रद्धा
- 59:11को विलीन किया, श्रद्धा कमजोर हो गई, तर्क को बढ़ावा दिया।
- 59:17सुविधा को और सुख को भी बढ़ावा दिया और तर्क को और तार्किक शक्ति
- 59:21को भी बढ़ावा दिया, यह नुकसान कर दिया, इसलिए पहले आराम से व्यक्ति
- 59:31बैठता पर अपने भीतर उतर जाता है। जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले इतना
- 59:39आसान था उस आनंद में खो जाना जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली दिल के
- 59:49आईने में थी तस्वीरें यार। वो भी ज़माना था।
- 59:56आज ये भी ज़माना है कि तुम खोज रहे हो।
- 1:00:00निर्जीव शास्त्रों में जो शास्त्र बोलते नहीं उनको सिर पे उठाए जाते
- 1:00:05हो वो खुद बोल नहीं सकते, खुद चल नहीं सकते, तुम्हें रोने पड़ते
- 1:00:11हैं और तुम उनसे जवाब मांगते हो जीवन के।
- 1:00:16निर्जीव से तुम जीवन के सवाल मांगते हो, जवाब मांगते हो कैसे
- 1:00:20देगा वो जुबान? हाँ, एक टंग है तुम्हारी श्रद्धा
- 1:00:29रोज़ बढ़ती जाएगी और 1 दिन। वो तुम्हारी जी जान बन जाए, इतना
- 1:00:40बढ़ती जाए, बढ़ती जाए, बढ़ती जाए और श्रद्धा आपको उसके करीब लेती
- 1:00:45जाएगी। करीब और करीब आप।
- 1:00:50तो? नजदीक से नजदीक तर आते गए अब तो
- 1:01:05नजदीक से नजदीक तर? आते गए पहले दिल फिर दिल रुबा फिर
- 1:01:19दिल के मेहमान हो गए। रफत रफत।
- 1:01:28वो मेरी हस्ती कसामा हो गए पहले दिल फिर दिल रुबा फिर दिल के
- 1:01:41महिमा हो गए 1 दिन एक आकार हो जाओगे।
- 1:01:45ये श्रद्धा आपको ऐसे लेकर जाएगी श्रद्धा, विश्वास, उपनौजा, व्याम
- 1:01:53बिना न पसंद, लेकिन श्रद्धा के बजाए आजकल तर्क ज्यादा है।
- 1:02:04मुझे रोज़ बेचारे प्रश्न आ जाते हैं।
- 1:02:09बेचारे प्रश्न कहता हूँ कैबल की प्राप्ति के बाद पापा फिर
- 1:02:15समझाइएगा ज़रा पूल हूँ विशलेसन से कि क्या कुछ होता है?
- 1:02:22इन्होंने एक वीडियो भी नहीं सुनी होगी मेरी आज ही आई है चैनल के
- 1:02:27ऊपर। और पहला प्रवचन सुना होगा और न
- 1:02:31जाने कितना कूड़ा। कबाड़ा चल रहा है।
- 1:02:33सारा फेंकेंगे मेरे ऊपर तो मैंने लिख दिया कि 2500 वीडियो हैं आप
- 1:02:39उनको सुनो, आपकी हर बात का जवाब मिलेगा।
- 1:02:42अगर कुछ रह गया हो तो फिर पूछ लो। दो बार एक बात को अब नहीं
- 1:02:49बोलेंगे। पहले 1010 बार बोल चुका हूँ।
- 1:02:53पहले 1010 बार बोलने से आप ऊब गए, अब फिर बोलूं वो ही बातें बोलूं
- 1:03:01नहीं, आप सुनिए, उनको जाके सुनोगे।
- 1:03:06तो समझ आ जाएगा। ये उठे हुए तर्क मेरे शब्दों के
- 1:03:12बाण बाणों को काट देंगे। तुम्हारे तर्कों को और श्रद्धा
- 1:03:18उपजेगी श्रद्धा रोज़ बढ़ती जाए, श्रद्धा रोज़ बढ़ती जाए।
- 1:03:28और आप जैसे जैसे श्रद्धा ये पैमाना है जैसे जैसे श्रद्धा
- 1:03:34बढ़ेगी, आप उसके करीब आते जाओगे। आप तो नजदीक से।
- 1:03:44नजदीक तर आते गए, नजदीक से नजदीक तर आते गए पहले।
- 1:03:54दिल फिर दिल रोया, फिर दिल के मेहमान।
- 1:04:02हो गई। फिर 1 दिन तुम उसके मेहमान हो
- 1:04:07जाओगे, वो ही हो जाओगे जहाँ कह सको, अनल हक, अनल हक अहम
- 1:04:16ब्रह्मस्व ये कहने का जिक्र शब्दों से नहीं होता।
- 1:04:22शब्दों में, इतनी जान कहाँ? अनुभव में इतनी जान होती है,
- 1:04:29अनुभव ललकार सकता है, शब्द नहीं ललकार सकते हैं, अनुभव कीजिए जैसे
- 1:04:38जैसे आप श्रद्धान भी तो होंगे जहाँ हैं बैठे रहे।
- 1:04:43मत आइए मेरे पास इतने सालों की मेहनत बेकार करके मेरे पास आओगे,
- 1:04:52ज़रा देखिए तो जहाँ बैठे हों, वहाँ क्या रिसाल्ट आता है?
- 1:04:58परिणाम देखिए। फिर उसके बाद आगे निपटेंगे, क्या
- 1:05:02होगा? जाप से मिलता है जो तुम रेपेटिशन
- 1:05:08करते हो, इससे मिलता है एक अनुभव तो पक्का कर लीजिए, भोग लीजिए
- 1:05:17देखिए भोग के मिलता है। दान इकट्ठा कीजिये, देखिये दान
- 1:05:22इकट्ठा करने से मिलता है सर्वोच्च पदबियों पर बैठे रहिये और देखिये
- 1:05:27भोग के उन हुक्म करने वाली पदबियों को इनसे मिलता है सूचनाओं
- 1:05:38को एकत्रित करने से मिलता है। सारे जहान की सूचनाओं को एकत्रित
- 1:05:44कर लीजिए और देखिये इनसे शुभ मिला उसके करीब आए।
- 1:05:50अगर आइए अगर आ गए तो ठीक लेकिन नहीं आओगे संत जानता है इसलिए संत
- 1:05:59कहता है। कि अगर थोड़ा सा कच्चा रास्ता रह
- 1:06:02गया तो उसको कच्चा मत रखना। अच्छे तरह से भोग लेना भोगने से
- 1:06:09मुक्त हो जाओगे तुम क्योंकि भोग में दुख है, दुख से वैराग्य
- 1:06:18उत्पन्न होता है। बैरक से मो।
- 1:06:24मुक्त होने की कैसे इन वीडियो को तोड़ दूँ और मो।
- 1:06:29मुक्त से मुक्ति हो जाती है। फिर तुम 1 दिन मुक्त हो जाओगे।
- 1:06:33ऐसे चैन वाइज चलो, तुम मुक्त हो जाओगे।
- 1:06:44जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले गर्दन झुकाना या नहीं चलता समर्पण।
- 1:06:54कच्चा कच्चा समर्पण मत करो, नकली नकली समर्पण न करो, यह प्लास्टिक
- 1:06:59के फूल तो में कहीं नहीं ले के जाएंगे।
- 1:07:03महर्षि नाम ऋभु रहम महर्षियों में मैं भृगु शब्दों में, मैं एक
- 1:07:12अक्षर प्रणब हूँ। यज्ञों में मैं जब यज्ञ हूँ, खाक
- 1:07:21हो जाएंगे, राख हो जाएंगे राख हो के देखिये जहाँ पहुंचोगे वहाँ जब
- 1:07:30हो रहा है तो मैं करने की आवश्यकता नहीं।
- 1:07:36जा ठाकर दे तेरे बड़े हाथ जिथे वायदे ना ध 1000 इश्क दे नम, न
- 1:07:43नमी बहार जाप हो रहा है। इसलिए भगवान कृष्ण ने कहा आसान से
- 1:07:51आसान रचता है। जप, यज्ञ, यज्ञों में आहूत होने
- 1:07:58का सबसे सरल उपाय उसकी मर्जी पर छोड़ दो जप करता है।
- 1:08:04करो, हमारा यहाँ कुछ नहीं है और वास्तव में तुम्हारा कुछ नहीं है।
- 1:08:11खंगाल के देख लो तुमने क्या बनाया तुमने सिर्फ कमाया है और कमाया
- 1:08:16हुआ अपना नहीं होता बनाया हुआ अपना होता है जा करता सिरठी को
- 1:08:21साझा अबे जाने सोई जिसने सृजन किया है, इस सृजना का सृष्टि का
- 1:08:28वही मालिक है असली? तुमने कमाया कमाने का अर्थ छीना
- 1:08:33छुप के अमीर गरीबों की जेब में से छीन लेते हैं, अमीर हो जाते हैं
- 1:08:38उन्होंने बनाया थोड़ी उन्होंने कमाया है और कमाना तो गलत तरीकों
- 1:08:44से भी हो सकता है। इसलिए मैंने बहुत कहा पहले भी।
- 1:08:51अमावस्या की रात को लक्ष्मी आती है, काले दंतों से आती है, उल्लू
- 1:08:58की सवारी भी आती है, उल्लुओं के पास आती है।
- 1:09:02समझदारों के पास तो सरस्वती आती है।
- 1:09:05उल्लुओं के पास लक्ष्मी आती है, इसलिए धनपति सारे उल्लू हैं।
- 1:09:11ऐसा मत करो। धनपति सारे उल्लू हैं, क्योंकि
- 1:09:17उल्लू वाहनी की पूजा करते हैं। उल्लू के ऊपर सवार लक्ष्मी की
- 1:09:23चाहत इनको भी उल्लू बना देती है। यज्ञों में मैं जप यज्ञ हूँ, अगर
- 1:09:33आहूत ही होना है, आहूत होने के जरिए ही मिलेगा।
- 1:09:38सभी रास्ते आहूत होने के हैं। सभी रास्ते मैं कहता हूँ जीतने भी
- 1:09:44सफर से केंद्र की तरफ जाते हैं। सभी रास्ते तुम्हें मिटाने के
- 1:09:49हैं। मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ
- 1:09:52मर्तबा चाहे कि दाना खाक में मिलकर को लेकर जाल होता है।
- 1:09:58नहीं उगेगा पेड़ नहीं लगेंगे फल अगर दाना अपने आपको खाक नहीं
- 1:10:03करेगा तो कृष्ण कहते हैं कि आहूत होने में।
- 1:10:10ये सभी मार्ग आहुतियों के हैं। 112 की 112 विद्या विज्ञान भैरव
- 1:10:15तंत्र की कैसे तुम आहूत हो जाओ, कैसे तुम अपना वजूद खो दो?
- 1:10:26और देखो बूंद को समुद्र होने के लिए अपना वजूद बूंद को अपना वजूद
- 1:10:32खोना होता है, फिर ही समुद्र होती है, एक तो खोना ही पड़ेगा एक होने
- 1:10:39के लिए बूंद खोना पड़ेगा समुद्र होने के लिए।
- 1:10:44अब ये जिगरा तुम जुटा पाते हो या नहीं, ये तुम्हारे पर डिपेंड करता
- 1:10:49है। ये साहस तुम में है या नहीं, ये
- 1:10:53तुम पे निर्भर करता है। आहू तो होने में वह जो जप हो रहा
- 1:11:00है तुम्हारे भीतर। सबसे श्रेष्ठ उपाय जय बताते हैं
- 1:11:04और वह बनाने के विजय कहते हैं छोड़ दे उसकी मर्ज़ी को तेरी खुद
- 1:11:11की कुछ मर्ज़ी काम भी नहीं आएगी ये सर्कमस्टैंसेस से बदलते चले
- 1:11:15जाएंगे तो कागजों के महल कागजों की किश्त से।
- 1:11:22भव्य सागर पार करना चाहता है ना इन महलों में रह पाएगा ना इन
- 1:11:28कस्तियों से भव्य सागर पार कर पाएगा छोड़ दे इन्हें असली
- 1:11:33कस्तियाँ ले आ असली महल बना ले जो तूफानों में डोले नहीं और वो क्या
- 1:11:40है आहूत हो जा। आहुत हो जाए तो वहाँ चला जाएगा।
- 1:11:46जहाँ लगातार जाप हो रहा है। ये ओंकार का नाज़ जो तुम्हें यहाँ
- 1:11:51भी सुनाई पड़ता है जिम ग्रुप की तरह आवाज़ अलग अलग थोड़ी सी फर्क
- 1:11:56पड़ सकता है सन्नाटे की आवाज़ तुम खेतों के लिहनों में चले जाओ।
- 1:12:02हर वक्त होती पांव की रात को गहरी हो जाती है।
- 1:12:11स्थिर चीजों में मैं हिमालय हूँ, हिमालय बिल्कुल स्थित है।
- 1:12:22ज़रा भी कम्पन नहीं इशारा इशारों इशारों में बात करते हैं, उस
- 1:12:31हिमालय की बात करते हैं जो तुम्हारे भीतर डोलता नहीं, एक अंश
- 1:12:38ऐसा भी है एकतत्व ऐसा भी है? जो हिलता नहीं, जो डोलता नहीं, जो
- 1:12:44अकंप बना रहता है, जो कंपता नहीं किसी भी आग से जो जलता नहीं, किसी
- 1:12:51भी शस्त्र से जो कटता नहीं, किसी भी बाढ़ के बहाव में जो बहता
- 1:12:56नहीं, किसी भी तूफान से उड़ता नहीं।
- 1:13:00नैना छिद्दंती शस्त्राणी यही तो कहा है उस हिमालय की बात करते हैं
- 1:13:07जहाँ तुम अडिघ खड़े रहते हो अनचेंज्ड बिना परिवर्तन किए तो
- 1:13:15मैं कोई परिवर्तन नहीं होता प्रवर्तन पदार्थ में हो जाता हूँ।
- 1:13:20पानी कभी वाश बन जाएगा, कभी ठोस बन जाएगा, लेकिन तुम वैसे के वैसे
- 1:13:25रहोगे साक्ष्य ये तुम्हारे भीतर का वो आनंद कभी डोलतन है उसको कोई
- 1:13:36आग नहीं। मटा सकती।
- 1:13:38तुम्हारा आनंद नहीं जलाया जा सकता, शरीर जलाया जा सकता है,
- 1:13:46भावनाएँ जलाई जा सकती हैं और तुम भावनाओं के जलने से खुद जल जाते
- 1:13:53हो, क्योंकि तुमने गलतफहमी पार ली है कि भावनाएँ मैं हूँ।
- 1:13:59तुमने गलतफहमी पाली के शरीर में हूँ इसलिए तुम भी जल जाते हो,
- 1:14:06लेकिन जब शरीर मुर्दा होता है तो तुम ऑफ भी नहीं करते।
- 1:14:10तुम्हारे अपने ही उठा के तुम्हें पटक देते हैं आग में और तुम ऑफ भी
- 1:14:15नहीं करते, तुम नहीं कहते तुम मेरे दुश्मन हो।
- 1:14:21तुम शिथ रहने वालों में हिमालय में हूँ, सर्वोच्च को बना रहे हैं
- 1:14:25कृष्ण उस तक पहुंची जा, सर्वोच्च का सहारा लेकर पहुंचा।
- 1:14:32भावनाओं में सर्वोच्च क्या है? समर्पण मठ जाना, खाख हो जाना, राख
- 1:14:48हो जाना, विभूति हो जाना इसलिए कृष्ण?
- 1:14:53इसलिए शंकर ने महूति लगाई। इसका मतलब यही था यह जो लकड़ी का
- 1:15:01खूंठ जल रहा है, इसमें जलोगे और यह जो।
- 1:15:09धोने के अंदर बनी पड़ी है राख ये हो जाओगे ये तुम्हारा असर है
- 1:15:15लेकिन तुम इन प्रतीकों से समझ नहीं पाते और शंकर इसको अंग
- 1:15:21पहलेपन करते हैं ताकि सबसे पहले तुम्हें यही दिखे।
- 1:15:25सबसे पहले मृत्यु दिखे तुम्हें। और इसलिए मृत्यु के देवता कहलाते
- 1:15:30हैं तुम 1 दिन यह सत्य भी है सभी भस्म हो जाते हैं सभी हो जाएंगे
- 1:15:38जो आज हैं कल नहीं रहेंगे कल यही भस्म हो जाएंगे बिना जाने।
- 1:15:46भस्म का लेपन करना मूर्खता है शंकर, जानते हैं शिव जानते हैं
- 1:15:54क्या? अंत में इस शरीर ने भस्म हो जाना
- 1:15:57है, कोई थोड़ी उम्र, कोई ज्यादा उम्र, कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:16:08शिथ रहने वालों में मैं हिमालय हूँ खाक हो जाने में मैं समर्पण
- 1:16:16हूँ आस्थां श्रद्धां उस जप तक पहुंचने के लिए श्रद्धा काम करती
- 1:16:27है। इसके अर्थ बड़े गलत लिए गए हैं।
- 1:16:31राधे राधे करते रहो करते रहो, करते रहो, कुछ मिल जाए तो हमें भी
- 1:16:37बता देना मेहरसियो में बिलकुल हूँ।
- 1:16:47शब्दों में एकंकार बाबा नानक ने कहा, एकंकार सतनाम प्रणब हूँ,
- 1:16:55अहंकार हूँ, सर्वश्रेष्ठ की बात करते हैं कृष्ण।
- 1:17:01इसका मतलब यह नहीं कि वह निकृष्ट नहीं है, निकृष्ट हुए।
- 1:17:06जब प्रश्न आ जाते हैं नेकृष्ट विबोर बीजेक सबसे पहले जब शुरू
- 1:17:12करते हैं दशम अध्याय तो कृष्ण कहते ही ये बात हैं सभी अवस्थाओं
- 1:17:21में आदि भी मैं हूँ मध्य वि में हूँ।
- 1:17:25और अंत भी, मैं हूँ तीनों चीजों का जिक्र करते हैं, अब जब एक धागा
- 1:17:30पकड़ लिया तो मध्य कहाँ से अलग रहा गया?
- 1:17:37देखिए यह धागा इसके दो छोर हैं दोनों विपरीत हैं।
- 1:17:42ये उत्तर में जाता ये दक्षिण में जाता लेकिन क्या है?
- 1:17:48ये विरोधी है ये छोर और ये छोर विरोधी है नहीं।
- 1:17:56अगर इनको सामूहिक रूप से डिफैन किया जाए तो हम क्या कहेंगे?
- 1:18:00एक धागा है। उत्तर दक्षिण नहीं कहेंगे, हम हम
- 1:18:05कहेंगे एक धागा है और बीच का जो मत देखा है वो इस उत्तर दक्षिण को
- 1:18:10जोड़ने वाला पुल है, साधन मात्र है लेकिन तुम्हारी बुद्धि सबको
- 1:18:19भेद कर लेती है। कृष्ण कहते हैं सब मिला हुआ है,
- 1:18:26सारा अस्तित्व में आपस में गुत्थमगुत्था है।
- 1:18:31एकतंतु दूसरे के साथ जुड़ा हुआ है।
- 1:18:34अगर जुड़ा न होता तो तुम्हारे अंगूठे के चोट लगती और पता न
- 1:18:39चलता। चोट लगती है तुम्हारे आखिरी नीचे
- 1:18:44से नीचे अंगूठे पे और नींद सारे शरीर को नहीं आती।
- 1:18:51क्या मसला है मसला है कि तुम भीतर से जुड़े हुए हो?
- 1:18:59तो इस शरीर की बात छोड़ो, कृष्ण अनंत अस्तित्व की बात करते हैं।
- 1:19:04वो कहते हैं, अस्तित्व ही जुड़ा हुआ है।
- 1:19:08जब तुम पाप करते हो तो अस्तित्व दुखी होता है।
- 1:19:13एक व्यक्ति दुखी नहीं होता, शमष्टि दुखी होती है।
- 1:19:17इसलिए पाप करो भी मत, पाप फैलाने वालों को प्रेरित करो, कृपा न
- 1:19:23करो। शांति से लिए होते हैं पाप, तुम
- 1:19:28तो रोक ही दो आज से ही, क्योंकि पाप का फल दुख होता है और दुख तुम
- 1:19:33भोगतना नहीं चाहते। भीतर से सब जुड़ा हुआ है।
- 1:19:37चोट लगेंगी। पांव के अंगूठे को जो हाथ के
- 1:19:41अंगूठे को नींद सारे शरीर को नहीं आएगी क्योंकि भीतर से तुम जुड़े
- 1:19:47हुए हों। अस्तित्व एक शरीर है।
- 1:19:51इसका प्रत्येक प्रत्येक अंग जुड़ा हुआ है।
- 1:19:57कृष्ण कहते हैं कि तुम खुद भी पाप करना छोड़ो।
- 1:20:00सबसे पहले मैंने भी कहा घरों में शांति नहीं होती, अक्सर प्रश्न आ
- 1:20:06जाते हैं। मैंने कहा तुम आहु तो हो जाओ,
- 1:20:09सबसे पहले यू विल हैव टु सैक्रिफ़ाइस फर्स्ट।
- 1:20:16सबसे पहले तुम्हें त्याग करना होगा।
- 1:20:19तुम तुम इच्छा रखते हो कि दूसरा झुके नहीं तुम झुको, दूसरा झुके
- 1:20:26ही जायेगा जब तुम चरण पकड़ लोगे। दूसरा अपने गर्दन को ऊंचे न रख
- 1:20:34पाएगा। उसके गर्दन का गुल्ला तुरंत गिर
- 1:20:36जाएगा। तुम झुको, तुम्हारे से शुरूआत
- 1:20:40होनी चाहिए। दूसरा तो झुका ही हुआ है।
- 1:20:46कृष्ण कहते हैं, सब जुड़ा हुआ है आपस में ये अनंत।
- 1:20:51सब जुड़ा हुआ है। भीतर से सृष्टि में दुःख मत फैलो
- 1:20:59सबसे पहले तुम पाप करना छोड़ो फिर दूसरे को प्रेरित करो, दुखी है
- 1:21:07उसकी सहायता करो, उसको सुखी करो। और प्रेरित करो कभी पाप न करे
- 1:21:12इसलिए मैंने कर भी कहा था कि जेलों में जाकर जो गलती से किसी
- 1:21:18कारण से पाप कर बैठे और नियम के अधीन अधीन आज जेलों में बंद हैं,
- 1:21:26उनको प्रेरित करो कि आगे से ये काम मत करना।
- 1:21:31आप जहाँ बैठे हो वहाँ कम से कम टिके रहो वहाँ शांति फैलो और जब
- 1:21:39बाहर जाओ तो भी शांति फैलो ये गलती हो गयी हो जाती है ह्यूमन
- 1:21:44इज़ टू एरर्स। लेकिन जब तुम बाहर जाओ, फिर गलती
- 1:21:49मत करना और यहाँ बैठकर भी गलती मत करना तो जेलों में जाना चाहिए,
- 1:21:56उन्हें बदलना चाहिए। ये सुधार भी है, कोई बिगड़ गया है
- 1:22:00किसी कारणवश वो अंग तो हमारा है। कृष्ण कहते हैं सारा अखंड
- 1:22:11ब्रम्हंड मैं ही हूँ वो तुम ही हो सब तुम हो अगर तुम्हारे पांच
- 1:22:22बच्चे हैं। तो पांच में से एक बिगड़ गया उसको
- 1:22:26ठीक करो, उसको ठीक करना तुम्हारी जिम्मेदारी है ना कि उसके साथ ओरे
- 1:22:31जाओ, न ही उसको ठीक करो। इतना कोई भी विकृत नहीं होता कि
- 1:22:37ठीक करने से हो ना सब ठीक हो जाते हैं प्रेम के आगे।
- 1:22:42ऊँगली माल भी नतमस्तक हो जाता है। जिसने 999 में उंगलियाँ काटी, 999
- 1:22:50में सिर काटे, एक सिर नहीं काट पाता, वो सिर्फ बुद्ध के कारण
- 1:22:56बुद्ध उसे बदल देते हैं। अगर कोई विकृत हो गया है तो तुम
- 1:23:06उसे मनाओ तुम देखो के वह विकृत हुआ क्यों है?
- 1:23:15उसका कारण खोजो और उसको ठीक करो। हम किसी कारीगर के पास किसी
- 1:23:20मिस्त्री के पास जाते हैं तो वो देखता है इस कार का कौनसा पुर्जा
- 1:23:24खराब है, जो सारी कार ने काम करना बंद कर दिया, सारी गाड़ी चल नहीं
- 1:23:30रही, वो उस पर्जे को बदल देता है, हटा देता है और गाड़ी इतना नहीं
- 1:23:35लग जाती है पर से। सभी ठीक हैं, कोई गलती कर बैठता
- 1:23:41है उसे क्षमा करना सीखो। क्षमा वीरत से भूषण वीरों का
- 1:23:47आभूषण है क्षमा श्री कृष्ण। गोविन्द।
- 1:23:55हरे हे मुरारी हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:24:09मुरारी हे नाथ नारायण। वसुदेवा पितुमात स्वामी सखा हमार
- 1:24:25पितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ नारायण?
- 1:24:34वासुदेव वा श्री कृष्ण गोवेन्द्र हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:24:46वासुदेव। सखा हमारे पितुमात स्वामी सखा
- 1:25:03हमारे हमारे। हमारे पितुमात स्वामी सका हमर
- 1:25:21हेनाथ नारायण वा। सुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे
- 1:25:35मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:25:48श्रीनाथ नारायण, वासुदेव और। धन्यवाद।