Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Mar 25 - The First Step of Enlightenment - आत्मज्ञान की ओर पहला कदम! आत्मज्ञान की यात्रा!
Transcript
- 0:11चक्रवर्ती बंधु चार पांच प्रश्न हैं यक् मुश्त इनका जवाब तुमको?
- 0:30क्या परमात्मा है बाबा, मैं तुम्हें पूछता हूँ क्या परमात्मा
- 0:38है, आपने देखा है? क्या हमें हमारी इच्छा के अनुसार
- 0:54चक्र, शंख, गदा, पदाम धारण किये हुए भगवान दर्शन दे सकते है?
- 1:06बुद्ध ने क्यों कहा ये परमात्मा नहीं है?
- 1:19उसको पाने के बाद क्या होता है? परमात्मा है तुमने पूछा प्रमाण
- 1:37क्या है? मैंने देखा है कोई उदाहरण।
- 1:48परमात्मा है। मैंने देखा है इसके आगे अगर
- 1:55बोलेंगे तो लड़ाई शब्दों के हो गया।
- 2:04अब तक प्रगटीकरण हुआ अनुभव का आपने मुझसे पूछा, मैंने जवाब दे
- 2:13दिया, परमात्मा है, मैंने देखा है।
- 2:24इसका प्रमाण तुम जान लो, तुम देख लो, तुम्हें प्रमाण मिल जाएगा
- 2:31शाब्दिक प्रमाण मेरे पास हैं तो बहुत लेकिन वो शास्त्रों की लड़ाई
- 2:38है, उनमें से निकलेगा कुछ नहीं। बस इतना ही जब आप काफी समझना वह
- 2:47है, मैंने देखा है कोई मानता है तो उसको प्रणाम है, कोई नहीं
- 2:59मानता है। उसको भी प्राणम है कोई दोनों ही
- 3:05नहीं है, न्यूट्रल है उसको भी प्रणम है क्या?
- 3:18हमारे ढंग के अनुसार चक्र, शंख? पद्म धारण किए हुए हमें भगवान के
- 3:30दर्शन हो सकते हैं। बिल्कुल हो सकते हो अब छोड़ो
- 3:39तुमको। चक्र गधा पतम बगैर पूछो तुम सूंड
- 3:50लगे हाथी की कल्पना भी कर लोगे तुम त्रिशूल लिए चटा जूठ किए।
- 4:00गंगा निकलते हुए हालांकि किसी के सिर में से गंगा निकले।
- 4:08जो भी कल्पना करोगे, उल्लू वाहनी गधे के ऊपर शीतला को चढ़ा दिया।
- 4:17जो भी कल्पना करोगे वैसे ही वो दर्शन दे देगा।
- 4:25प्रमाण सातवें एका इक्कीसवाँ श्लोक।
- 4:33गीता के अनुसार। मैंने कल के प्रवचन में कहा कि
- 4:40मैं दो होते हैं नकली में और असली में बस यात्रा तो इतनी ही है नकली
- 4:49में से असली में तक। तुम्हारे दो स्वरूप हैं एक तुमने
- 4:57खुद बनाया तुम्हारी मान्यताओं के आधार पर और सारी लड़ाई मान्यताओं
- 5:04की है एक जो सत्य में है आज सच जुगाद सच।
- 5:12है भी सच नानक उसी भी सच वह असली में है।
- 5:21वहाँ कोई झगड़ा नहीं होता, कोई आकार, निराकार गुण।
- 5:31सगुण निरगुण किसी प्रकार का हिंदू मुसलमान वह नहीं यहाँ सब भेद मिट
- 5:43जाएं वहाँ असली में है और उसका लक्षण।
- 5:51उसकी पहचान परम आनंद परम खुश इसलिए तो सारा संसार उस खुशी को
- 6:00तलाश रहा है। बस तुम्हें पता नहीं वह मिलेंगे
- 6:06कैसे? मज़े की बात यह है जो अहंकार उस
- 6:18मज़े को तलाशता है, उस अहंकार के मिटे बिना वह मज़ा मिलता नहीं।
- 6:31ये बात बड़ी गहरी है। अहंकार ही खोजता है और अहंकार को
- 6:41ही मचना होता है। क्या हमारे हिसाब से परमात्मा
- 6:53हमें दर्शन देंगे? बिलकुल देंगे?
- 6:57लीजिये हम सातवें शहर के इक्कीसवें श्लोक में चलते हैं
- 7:04कृष्ण। सब कुछ हैं, सब विद्वानों के
- 7:09ज्ञापन हैं। 64 कलाएं संपूर्ण हैं।
- 7:17वह काखा ग भी पढ़ा सकते हैं और काखा ग वालों को उसकी भाषा में
- 7:25बात करेंगे। और पीएचडी भी करा सकते हैं।
- 7:34उनको उन्हीं की भाषा में बात करें।
- 7:40इसलिए उन्हें मास्टर ऑफ़ मास्टर्स नहीं उन्हें मालिक कहा जाता है।
- 7:48सर्व शक्तिमान। सर्वकला संपूर्ण वह नर्सरी को भी
- 7:58पढ़ाते हैं, प्री नर्सरी को भी पढ़ाते हैं।
- 8:06बस तुम सीखने वाले होने चाहिए। परमात्मा तो है लेकिन प्रश्न ऐसा
- 8:22जैसे अंधा पूछे रंग होते हैं। तुम तो हंसोगे खिल्ली नहीं उड़ानी
- 8:30चाहिए। तुम्हारी आँखें हैं तो देख लो
- 8:37ज़रा कहता है बेचारा मजबूर है, प्रश्न ऐसे ही करेगा तुम्हारे
- 8:47प्रश्न करने से मुझे दुख तो होता है।
- 8:52लेकिन दुख इस बात का होता है कि बेचारा आँखें नहीं मैं खिली नहीं
- 8:59उड़ाता। आपकी बहुत से लोग बेईमानी से धन
- 9:04कम आते हैं, गरीबों की खिली उड़ाते हैं।
- 9:12यह व्यवहार शो बनी है, तो अगर कोई पूछता है कि परमात्मा है, अगर कोई
- 9:26अंधा पूछता है, रंग है। आँखों वाला उस पर तरस खायेगा तुम
- 9:38कहते हो तुम बोलते क्यों हो बाबा बस इसीलिए कि तुम पूछते हो रंग है
- 9:49हमें तरस आ जाता है। तुम पूछते हो खुशी है या कि ऐसे
- 9:58ही मर जाएंगे? हमें तरस आता है ये मत समझो कि
- 10:08तुम ही रोते हो। हमारा जीरा भी रोता है तुम्हारे
- 10:13दुखों को देखकर, लेकिन तुम किसी और कारण से रोते हो?
- 10:28तुम्हारी प्रश्नावली बिलकुल सही है।
- 10:32रंग होते हैं सही प्रश्न। और हमारे भीतर से बाबू को हो जाना
- 10:39है सरल हम देखते हैं आँखें उठाके बेचारा अंधा है कैसे?
- 10:51इसे आँखें देती जान इस प्रयास में जुट जाते हैं।
- 10:55इसलिए सारे संत इसी प्रयास में जुट जाते हैं और मैं इन संतों को
- 11:07हृदय से प्रणाम करता हूँ। जो आपको सत्य का मार्ग दिखाते हैं
- 11:22तो भगवान कृष्ण कहते हैं, सातवें के इक्कीसवें श्लोक में यो यो याम
- 11:30याम, जो जो जीस तरह से। तनु भक्तः श्रद्धार चित्र
- 11:41विगक्षति तत्सम तश्य अचलाम श्रद्धाम जो व्यक्ति जीस, जीस
- 11:54स्वभाव से। मुझे चाहता है मेरी पूजा करता है,
- 12:03मैं उसको उसी भाव में दृढ़ता दे देता हूँ।
- 12:09श्रद्धा तामेब विजय धाम में हम अगर तुम अपनी कल्पनाओं में पूंछ
- 12:20लगा लोगे तो वह पूंछ लगा के आ जाएगा, उसके घर पूंछों की कमी है,
- 12:30बंदर जैसा बना लोगे, बंदर जैसा बन जाएगा।
- 12:39सुअर जैसा बना लोगे, वह रहा अवतार सुअर जैसा बन जाएगा, कछुए जैसा
- 12:46बना लोगे, कछुए जैसा बन जाएगा बोना व्यक्ति बना दोगे बोना
- 12:52व्यक्ति बन जाएगा। क्रोध ही बना लोगे, परशुराम बन
- 12:57जाएगा महासमर्थ्यवान सभी दुखों को झील देने वाला है।
- 13:18सभी प्रकार की आस्थाओं को सलातों में सम रहने वाला पुरुषोत्तम राम
- 13:28की तरफ पुकारो का वह धनुष उठा लेगा और चक्रधारी कृष्ण की तरफ
- 13:36पुकारो। तो बंसरी सब रूप उसके हैं, कोई
- 13:48रूप उससे बाहर किसी भी रूप से। आप उसे पुकारो लेकिन एक बात याद
- 14:00रखें श्रद्धार चित एक शब्द बोला है उसमें श्रद्धा होनी चाहिए।
- 14:13श्रद्धा का मतलब? मजाक नहीं होना चाहिए।
- 14:23किसी की गरीबी पर मजाक में मत उड़ाओ तुमने उसकी जेब में से
- 14:30निकाली लूटा, अपनी जेब में डाला, अमीर हो गए, फिर तालियां बजा के
- 14:37हँसते हो। बड़ी बुरी बात है और ऐसे लोगों को
- 14:45परमात्मा की दरगाह में दंडित होता है।
- 14:54तश्य तश्य अजलां श्रद्धां। श्रद्धा भी अचल गड़बड़ा नचा।
- 15:04अगर ये है तो वह दूर नहीं है। तश्य तश्य अजलाम श्रद्धां।
- 15:22ता मेप वृद्धा में हम श्रद्धा की आँखें हैं तो रंग पहचान में आ
- 15:32जाते हैं श्रद्धा आँखें तुलसीदास ने लिखा।
- 15:40श्रद्धा विश्वास रूपणों या भयान बिनानपश्चमते उसके बिना नहीं
- 15:47दिखता। वह प्रश्न करने वाले के भीतर कण
- 15:53कण में वो ही है। देखिये तुम इतने बड़े शरीर के
- 16:03हमारे को और अगर इस शरीर में आँखें हैं तो तुम अपने ही शरीर को
- 16:09नहीं देख सकते हैं देख सकते हो बस यही हालात हैं तुम्हारे।
- 16:18तुम अपने ही स्वरूप को नहीं देख सकते कितना विराट है तुम्हारा
- 16:26आकार वृहद्य आकार और आँखें नहीं हैं तुम्हारे इतने बड़े शरीर में
- 16:36छोटी सी आँख नहीं है। तो तुम अपने ही शरीर को नहीं देख
- 16:41पाओगे, बस यही सच है। परमात्मा के विषय में संत कहता है
- 16:56अहम् ब्रह्मस्त्र मैं ब्रह्म। आप शब्दों से खंडन करने लग जाते
- 17:03हैं, उसके शब्द आए अनुभव से देखने से, और आँखें तुम्हारे पास है
- 17:16नहीं बिना आँखों के। सभी बातें बेकार हो जाएँगी।
- 17:27तुम्हारी सभी गीताएं कुरान पुराण, ग्रंथ गीता बेकार हो जाती हैं अगर
- 17:35आंखन जैसे अंधे के लिए सभी रंग बेकार है।
- 17:45वो सफेद है, वो काला है, वो हरा है, नीला, पीला, गुलाबी सब बेकार
- 17:52है एक आंख के कारण। परमात्मा है, मैंने देखा है इतना
- 18:21काफी है क्या? इसी रूप में चक्र, शंख गधा।
- 18:33इस रूप में दिख सकते हैं, बिल्कुल सभी रूपों में दिख सकते हैं पाथर
- 18:42मेघन दिख सकते हैं। धन्ना पत्थर में देख लेता है।
- 18:49है है तो देख लेता है मूर्ति में तुम देख लेते हो किसी भी तरह की
- 19:04मूर्ति है, लेकिन तुम्हारा लगाव होना चाहिए जीस भी रूप में
- 19:10तुम्हारा लगाव है वह तो समर्थ्य है।
- 19:15उसी रूप में आ जाएगा। बस तुममें पहचानने की शक्ति होनी
- 19:22चाहिए, लेकिन एक शब्द बड़ा प्यारा बोलते हैं कृष्ण अचल श्रद्धा।
- 19:43सुबह निरंकारी हैं। दोपहर को राधास्वामी हो गए, शाम
- 19:50को ब्रह्माकुमारी हो गए, फिर बीच में नास्तिक हो गए।
- 20:00सुबह गुरुद्वारा जाए। दोपहर को मस्जिद चले गए।
- 20:06श्याम अंदर जाए क्या कहेंगे? इसको श्रद्धा नहीं जीसको श्रद्धा
- 20:21होती है क्षमा करना। ना मंत्र जाता है ना गुरुद्वारा
- 20:27जाता है क्योंकि जो मन के अंदर मिले, जो तुम्हारे अंदर से मिल
- 20:34जाए, तुम्हें उसे मंत्र कहते हैं। बाहर के राम मंत्रों से कुछ नहीं
- 20:39होने वाला। कित नहीं बना लो खुदाई कर लो,
- 20:43जुताई कर लो। वो नहीं मिलेगा, पाथर मिल जाएंगे,
- 20:49अवशेष मिल जाएंगे। इसलिए लोग मुझे कुछ नहीं कहते।
- 20:57उन्हें पता है कि कुछ नहीं मिलेगा।
- 21:04पाथर की मूर्तियां मिलेंगी, वह बुद्ध की मिल जाए, वह शंकर की मिल
- 21:10जाए, शिवलिंग की मिल जाए, राम की मिल जाए, कृष्ण की मिल जाए, यही
- 21:16कुछ मिलेगा। लेकिन मैं तुम्हें कहता हूँ कि
- 21:22मंदिर के नीचे मस्जिद के नीचे मंदिर को और मस्जिद को दिलासने
- 21:27वालों क्या तुमने आँख पैदा कर ली? रंग हरा है के नारंगी है।
- 21:42के सूर्य की तरह तप रहा है सुबह के के गेरुआ है के भगवान है अगर
- 21:54तुम इसके ऊपर से बहस न कर के आँख को पैदा करने में जुट जाओ।
- 22:02तो यह रास्ता शुभ है अगर आँखों की परख चढ़ी है तुम चाहते हो रंगों
- 22:17की पहचान तो आँखें पैदा करनी होंगी।
- 22:26बिना आँखें पैदा किया तुम्हारा सब करा धरा बोला सब बेकार किसके पास
- 22:38आंख में वह जो बोलता है, झूठ बोलता है रंगों के बारे में।
- 22:47जिसके पास आंख है, वह जो बोलता है सत्य बोलता है।
- 22:54रंगों के बारे में मुझे लोग कहते थे, लाउसे ने कहा।
- 23:09कबीर नानक ने कहा पल्टू ने कहा, मलोक ने कहा वह जो करता है, ठीक
- 23:17करता है, हमें समझ नहीं आता। फिर ये चोरी, गद्दारी, लाचारी,
- 23:29बलात्कार, अन्याय, क्या ये वो करता है?
- 23:42ये सब साजिश उसकी है? तुम्हें प्रश्न पूछने का ढंग नहीं
- 23:51बस लेकिन जीस ढंग से तुम पूछ रहे हो उस ढंग से उत्तर दिया जाए तो
- 23:58बिल्कुल वही करता है और बलात्कार खुद से करता है वो।
- 24:12हाँ, ये भी समझ ले ना क्योंकि दूसरा कोई है ही नहीं, किस्से कर
- 24:18करेगा, किसका कतल करेगा? दूसरा कोई है ही नहीं, दूसरा होगा
- 24:28तो कतल करेगा ना? इसलिए जो बहुत गहरे उतर गए।
- 24:34उन्होंने कहा, लीला खुद से खुद का खेल आपे खेले, खेल खिलाड़ी आपे
- 24:46खेल हारा हुआ। खुद का खुद से खेल और यह बात ठीक
- 24:58भी है क्योंकि दूसरी कोई हस्ती नहीं है।
- 25:02शैतान जैसी कोई हस्ती नहीं है, शब्दों का घोर है किसी तरह का।
- 25:15एक बात बताऊँ तुम्हे ज्ञानियों ने समझदारों ने, बुद्धिमानों ने
- 25:24फिलोसोफर ने, मनोवैज्ञानिक ने जवाब तो दिया।
- 25:32लेकिन वो सभी जवाब गलत हैं क्यों? क्योंकि शब्दों में जवाब दिया ही
- 25:42नहीं जा सकता। सच पूछो तो जीसको, तुम जानना
- 25:51चाहते हो वह जाना ही नहीं जा सकता और जो जानती है बुद्धि वह वहाँ जा
- 26:04के अशक्त हो जाती है। उसको तो छोड़ना पड़ता है इसलिए इस
- 26:13एक बात पर सहमत हैं वैज्ञानिक भी और आध्यात्मिक संत भी।
- 26:20इस नॉट ओनली अननोन वह है सिर्फ़। ऐसा नहीं कि जाना नहीं गया।
- 26:28बट ऑल्सो अनोनो एवर। वह ऐसा भी है कि कभी जाना नहीं जा
- 26:33सकेगा। कौन जानेगा?
- 26:43सन्तों ने कहने की चेष्टा तो बहुत की।
- 26:52लेकिन क्यों प्रयास विफल हो गया? क्योंकि जो ढंग था कहने का?
- 27:01वैती लैंगुएज और लैंगुएज में वाता ने समझने का जो ढंग था वो है
- 27:10बुद्धि। और बुद्धि की पकड़ से बाहर है।
- 27:13वो मेरे पास रोज़ कमेंट आते हैं। बाबा क्या करें?
- 27:19आपकी बातें सिर के ऊपर से गुजर जाती हैं।
- 27:25मैंने कहा बिलकुल गुजरेंगे। क्योंकि जीस बुद्धि से तुम समझना
- 27:31चाहती हो उस बुद्धि में इतनी क्षमता कहाँ है जो इस विराट को
- 27:40समझ ले, एक जर्रे तक को तुम नहीं समझ सकते?
- 27:49तो वराटत्व को कैसे समझोगे? यही बात कृष्ण कहती हैं, अर्जुन
- 27:56को कि तुम इन चरम जक्षकों से नहीं देख पाएगा।
- 28:12अतः यही बर्बरिक को का है। कि तू देखना चाहता है युद्ध कैसे
- 28:22हुआ, जंग कैसे हुआ, कौन जीता, किसने क्या किया?
- 28:29तो पुत्र तू देख नहीं पाएगा इन चरम जश्नों से।
- 28:38जिन आँखों से दिखता है अब मैं तुझे आँखें देता हूँ वो देव वे
- 28:45चक्र हैं उन आँखों से तू देख सकेगा।
- 28:55यही बात कहते हैं अर्जुन को यही बात कहते हैं वरप्रीत को ये दो ही
- 28:59लोग थे, जिन्होंने देखा मुझे लोग पूछ लेते हैं यह गीता का ज्ञान
- 29:07वास्तव में किसकिस ने देखा? वो जो नाम गिनाते हैं।
- 29:14उसमें श्याम बाबा का नाम नहीं बनाते।
- 29:18मैं माथे पर हाथ मार लेता हूँ। अरे मूर्ख जिसने सच सच देखा, शीश
- 29:24दे दिया उसने तो सबसे पहले देखा। और वो पूज्य नहीं इसलिए हुआ कि
- 29:39उसने सारा दृश्य अपनी आँखों से देखा।
- 29:43अर्जुन तो खो गया लड़ाई में लेकिन बरबरीक तो नहीं खोया बरबरीक तो
- 29:50सिर्फ साक्षी ही रहा। तुम कहते हो बाबा 2 घंटे की
- 29:56वीडियो नहीं देखी जाती, छोटी बना लिया करो, आधे घंटे की वीडियो बना
- 30:02लिया करो, हम बड़े मज़े से देख लिया करेंगे, सुन लिया करेंगे,
- 30:07समझ में आ जाएगा तो लोग। अब आधे घंटे की हो गई है, यहाँ
- 30:13बंद कर दो देखो शोर मचा रहे हैं, सभी शोर मचा रहे हैं नहीं नहीं
- 30:19बाबा आनंद आया, अभी तो आनंद आना शुरू हुआ, अभी आप बंद कर देंगे बस
- 30:26ये बात है। जब मैं कहता हूँ श्री कृष्ण
- 30:34गोविंद, तब आपकी तृप्ति आ जाती है मन में बड़ा मज़ा आया, अब देखो
- 30:44मैं तो आधे घंटे की बोल देता हूँ, मुझे क्या एतराज है?
- 30:48मुझे कोई बोलने की बिमारी थोड़ी है।
- 30:53तुम्हारे कारण मैं बोलता हूँ जब तुम ऐसे ऐसे प्रश्न कर लेते हो
- 31:00बाबा रंग होते हैं तो मैं रहूँ ना तो और क्या करूँ?
- 31:09बोलने के लिए बाध्य होना पड़ता है।
- 31:11मुझे क्योंकि रंग होता है, मैंने देखा है तुम सवाल ही बड़े अटपटे
- 31:19करते हो, फिर तुम कहते हो बाबा ब्लॉक कर देते हैं, बार बार अगर
- 31:24तुम कहोगे बाबा होते हैं, रंग पक्का होते हैं।
- 31:33मेरे पास क्या ऑप्शन है? फिर तुम कहते हो बाबा तुमने पाप
- 31:38कर दिया यही कृष्ण कहते अचल श्रद्धा।
- 31:48प्रश्न उससे पूछो जिसकी बात के ऊपर विश्वास कर सको सुबह दोपहर
- 31:59शाम कभी सफेद साड़ी पहन ली शाम को वही लोग मैं मंदिर में दिखता हूँ
- 32:06वही लोग। गुरुद्वारा में अखंड पाठ करते
- 32:09प्रसाद छिड़ते देख लेता हूँ वही लोग मेरे पास आ जाते हैं वही लोग
- 32:17किसी और बाबा के पास चले जाते हैं।
- 32:19इसका मतलब क्या है? कहीं नहीं मिला।
- 32:22इन्हें यही मतलब है और कोई मतलब नहीं अगर।
- 32:28कोई व्यक्ति पूछता फिर सभी से रंग होते हैं, इसका अर्थ क्या है?
- 32:35तुम खुद ही समझ लो एक मुसलमान ठकिर अँधेरी हो, तूफान हो, बारिश
- 32:50हो, ओले गिरते। ठंडी हवाएं हूँ गर्म लूएँ हूँ
- 32:56रोज़ मच्छी जाता था नमाज़ पढ़ने हर हाल में वह जाता ही जाता
- 33:12मुद्दते भीत गई। बरसों वर्ष बीत गए, 1 दिन वो नहीं
- 33:22आया। काफी बूढ़ा हो गया था 7580 साल की
- 33:33उम्र। धीरे धीरे लठिया लेके आता उससे
- 33:39नहीं आया तो मोरबियों ने नमाज़ पढ़ी और बैठ के कॉन्फिडेंस की, आज
- 33:50वो नहीं आया। पक्का है कि वह मर गया।
- 33:57जीवंत होता तो जरूर आता नहीं आया तो एक ही कारण है मर गया तो चलो
- 34:07थोड़ा घर चख के अफसोस तो करें। पुराना मित्र है, 50 साल का संघ
- 34:12है, कभी नागा नहीं। हम नहीं आए, लेकिन वो तो आया।
- 34:24मस्जिद को संभालने वाले तीन लोग मर गए।
- 34:27उसके होते होते वह रो जाता है। आज नहीं आया तो मर गया वो।
- 34:37तो चलो नमाज़ पढ़ने के बाद उसके घर चलेंगे तुम्हारी शंकाएँ और
- 34:51तुम्हारे निर्णय ऐसे ही होते हैं। सिर्फ समझ से आए हुए निर्णय वो
- 35:01नहीं आया तो वह मर गया। गौर से देखना तुम्हारे फैसले आते
- 35:09ही कैसे? घर गए वह तो नाच रहा है फिर उनका
- 35:26फिर फैसला बदला एक दूसरे के मुँह की तरफ़ देखा, वृद्ध हो गया है
- 35:35पगला गया। आज तक कभी नाचा नहीं था।
- 35:44आज नाचा मस्तिष्क में बैठे थे तो कहते मर गया, घर आए वो नाच रहा
- 35:55है। बड़े प्रेम से आँखों में आंसू
- 36:01कहते पगला गया और जब आवाज़ दी तो उसने घूम के देखा वो सिर्फ ए
- 36:17कुरान। वह भाग के दौड़ा गले लगा बोला, आज
- 36:34ईद हो गयी क्या कैसे होते हैं? आज ईद हो गया।
- 36:44आज ईद हो गया तो आज ईद हो गई। सोचा मूर्ख हो गया, पागल हो गया,
- 36:52वाकई ही पागल हो गया ना तो आज ईद है।
- 37:01न आज ईद का चंद्रमा निकला, आज तो और ही थी आज ईद का सवाल नहीं ये
- 37:13कहता आज ईद हो गई और दीद हो गया। आँखों में झरझर आंसू बहते हैं,
- 37:26प्रेम कह सबसे गले मिलता है और कहता है आज ईद हुई है।
- 37:35सच में आज ईद हुई है। ठीक कहता हो, समझने वाले समझ न
- 37:46पाएगा। तुम जीस भाषा में समझते हो, वो
- 37:50भाषाएँ वहाँ जाके खो जाती हैं, वहाँ कोई भाषा शेष नहीं रहती।
- 38:00वहाँ अनुभव रहता है सिर्फ प्रेम का, आँख से अश्कवत ईद हो या कि न
- 38:18हो, मेरे लिए ईद हुई। ईद सभी के लिए 1 दिन नहीं होते,
- 38:30सभी के लिए अलग अलग दिन ईद होती है।
- 38:36तुम तो यक्सा 1 दिन ही मना लेते हो लेकिन ईद होती वास्तव में।
- 38:44सबकी अलग है कभी बुद्ध को हो गयी कभी अदरक को हो गयी कभी कबीर को
- 38:52हो गयी कभी नानू को हो गयी मीरा को कस।
- 39:08दिल सुलगने लगा। अश्क बहने लगे दिल सुलगने लगा
- 39:28अश्क बहने लगे। जाने क्या क्या हमें लोग कह ने
- 39:42लगे मगर। रोते रोते फंसी आ गई है ख्यालों
- 40:01में आके वह जब मुस्कुराए। जब याद आए बहुत याद आया गमे
- 40:23जिंदगी के अंधेरों में। हम चिराग महोबा तू जलाई बजाएं और
- 40:44जब याद आए। बहुत ये आज अश्क बहने लग है दिल
- 41:02सुलगने लगा अश्क बहने लगे। जाने क्या?
- 41:06क्या हमें लोग कहने लगे? ऐसा ही हाल होता है प्रेमी का
- 41:16मजनूं हो, हीर हो और राँझा हो, लैला हो, सीरी हो, परियाथ हो,
- 41:23सोनी हो, मजुबाल रोमी हो जुल उठाओ।
- 41:30प्रेम में ऐसा होता है वो अज्ञात तत्व दिख जाता है।
- 41:37जीसको भगवान दिव्य चक्षु कहते हैं उससे होते हैं प्रेम के दर्शन।
- 41:47वो दिव्य विचक्षु होना चाहिए। दिव्य विचक्षु से सत्य दिखता है
- 41:59और भगवान कृष्ण ने बरबरी को दिव्य विचक्षु दे दिया।
- 42:06और अर्जुन तो मस्त हो गया लड़ाई झगड़े में लेकिन बरबरीक सिर्फ
- 42:13साक्षी रहा। परमात्मा की तरह ये बड़े प्यारी
- 42:19उदाहरण हैं। अर्जुन वह न जान सका जो भरपरी
- 42:25जानवर है क्यों? क्योंकि वे युद्ध में इन्टेंकल
- 42:29नहीं हुए। दिव्य चक्षु लेने के बाद अर्जुन
- 42:35उलझ गया। भरपरी नहीं उलझा वर्बरी सिर्फ
- 42:40साक्षी ही बना रहा। सिर्फ देखता रहा और जो सिर्फ
- 42:46साक्षी है उसे ही परमात्मा कहते हैं।
- 42:54उस दिव्य जक्षु से ही वो निहारा जाता है।
- 43:03प्रेम के पलों में यही दिव्य जक्षु व्यक्ति को मिल जाते हैं।
- 43:07पल दो पल के लिए। यह कोई मामूली घटना नहीं होती।
- 43:14जब हृदय में प्रार्थना उठती हैं तो पल दो पल के लिए यही दिव्य
- 43:19जकसूत में मिल जाता है। वह ईश्वर तुम पर कृपा कर देता है,
- 43:24वर्ष जाता है। नदरी मोख दवार कर्म कर देता है,
- 43:31वो तुमसे रहम आ जाता है, उसे तुम कहोगे क्यों आ जाता है, यह नहीं
- 43:41पता, यह उसको पता है। हमसे क्या पूछते हो उसके सवाल
- 43:50हमसे मत पूछा करो जा करता शिरठी को सजा आप पे जाने सोई हम क्या
- 44:01जानें? हम तो खुद ही उसके चरणों की धूल
- 44:09हैं। हम क्या जानें वो क्या चाहता है?
- 44:20हम उसके आदेश को जरूर सुनते हैं। ऐसा तल है जहाँ उसके आदेशों को
- 44:27सुना जा सकता है। और उसी को भक्त कहते हैं।
- 44:34लोग मुझे कहते हैं अंध भक्तों के बारे में आपका क्या ख्याल है?
- 44:38मैंने कहा बड़ा शोभ है, अंध भक्त तुमसे ऊंचे हैं तो घबड़ा जाते हो।
- 44:49अरे बाबा तुमसे तो उम्मीद न थी अंत भक्त तुमसे ऊंचे होते हैं,
- 44:59क्यों? क्योंकि वो बुद्धि को छोड़ देते
- 45:01हैं और जीस ने बुद्धि को छोड़ा। उसने एक पड़ाव पार किया।
- 45:08तुम कभी नहीं आओगे, बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी इस बुद्धि को छोड़ने
- 45:12के लिए बड़े झगड़े तुम तो अदालतों तक पहुँच जाते हो, इन बुद्धि के
- 45:21झगड़ों को लेकर अदालतों में पहुँच जाते हो।
- 45:25अंत भक्ति इस बुद्धि को छोड़ देता है, आप उसका अपवास उड़ा सकते हो।
- 45:34उड़ाते रहिये लेकिन एक कदम ऊंचा है अंत भक्त तुमसे यही इस श्लोक
- 45:42में। आखिरी क्वेश्चन बुद्ध ने क्यों
- 45:50कहा ईश्वर नहीं है? थोड़ा सा तल को बदल लीजिये तो समझ
- 46:03पाओगे ठीक से। गैर बदलने की कला सीखो।
- 46:15वो किसी और तल से बोलते हैं बोलती यही बातें परमात्मा नहीं है।
- 46:26किस रूप में तुम उसे मानते हो? ये काली, पीली शेरों वाली गधे
- 46:37वाली उल्लू वाली जो तुमने कहा शंख, चक्र, गधा, पद्म।
- 46:48इस रूप में का नहीं है सर और इस रूप में है भी यह नकली मैं के
- 46:59तुम्हारे ही सवाल हैं यह कच्चा कायदा है।
- 47:04ये अना ये आम ठीक भी हैं और गलत भी हैं।
- 47:15शुरुआत करने वाले के लिए ठीक डॉक्टरेट करने वाले के लिए गलत।
- 47:26बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं है, ठीक कहते हैं क्योंकि बुद्ध
- 47:32तुम्हारे मूल तत्व तक जाते हैं, बुद्ध देखते हैं, तुम्हें चाहिए
- 47:42तो खुशी तुम दुखी हो इसलिए बुद्ध का सिद्धांत ये हो गया।
- 47:49जीवन दुख है, जीवन दुख है तुम्हें जरूरत क्या है सुख के तुम किसकी
- 47:58तलाश में भटक रहे हो? दुखी है तो सुख के तलाश में भटक
- 48:03रहे हो। बुद्ध ठीक कहते हैं तुम नास्ते
- 48:08को। इन शंख, चक्र, गदा, पदम इनकी पूजा
- 48:17करने से सुख नहीं मिलेगा। सुख मिलेगा सब भ्रांतियों का खंडन
- 48:25करने में। तुम मुक्त होना चाहते हो, बुद्ध
- 48:30कहते हैं तुम बाहर से मुक्त हो जाओ।
- 48:36जीस मुक्ति की कामना तुम कुंभ में जाकर गंगा श्राइन में डुबकी लगा
- 48:40कर करते हो तो तुम्हें रोगी बना देगा।
- 48:46क्योंकि जहाँ 50,00,00,000 लोगों ने डुबकी लगाई हो और तरह तरह के
- 48:51व्याधियों से शारीरिक व्याधियों से और मानसिक व्याधियों से ग्रस्त
- 48:55हैं, वो वहीं छोड़ के जाएंगे। अपना सब कुछ कूड़ा खिचरा और
- 49:01तुम्हें आगोश में ले लिखा। सुंदर वेरा है?
- 49:16ग्रहों के हिसाब से है, लेकिन स्वच्छ वेला नहीं है।
- 49:24शनान के हिसाब से शनान करना, कबीर संगम में उस वक्त जाना।
- 49:30जब गंगा परम पवित्र हो, यमुना गंगा सरस्वत है, परम पवित्रता में
- 49:37हो तब जनो बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं है।
- 49:44जीस रूप में तुम कहते हो परमात्मा है, जीस रूप में तुम पूजा करते हो
- 49:49उस रूप में परमात्मा नहीं है। जीस रूप में परमात्मा है उस रूप
- 49:56में बुद्ध कहते के है बुद्ध कभी भी पक्के से इंकार नहीं करते के
- 50:02परमात्मा नहीं है। बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं है
- 50:06जीस रूप में तुम मानते हो वैसे नहीं।
- 50:10जीस रूप में, मैं नहीं जाना वैसा है क्या रोक है वहाँ खुशी खुशी
- 50:25सुख। तुम ढूंढ़ते हो सोको ज़रा भीतर
- 50:30जाकर देखो क्या ढूंढ़ते हो सुबह से शाम तक बताओ मुझे तुम्हें 2
- 50:37मिनट का वक्त दिया सुबह से सांझ तक जो करते हो क्या ढूंढ़ते हो
- 50:45यही बुद्ध कहते हैं। बुद्ध कहते परमात्मा नहीं है।
- 50:54जीस रूप में तुम मानते हो छोड़ो ये पाखंड हैं ये बार इस बार से
- 51:02मुक्त होना ही मुक्ति है। तुम इसको सिर पर लाते क्यों कर
- 51:07रहे हो? ये शास्त्र, ये शब्द सब?
- 51:11वेद, पुराण सब कचरा और नहीं मैंने एक व्यक्ति देखा जो सिर पर पकड़ी
- 51:25बांधी थी और इतनी बोली पकड़ी कहते ये 35 किलो के हैं।
- 51:32मैंने कहा दिमाग में फर्क है। इतना भार क्यों उठाए रखता?
- 51:36किसने दंड दिया? इसे यह दंड है।
- 51:42यह शान नहीं है, पगड़ी शान होनी चाहिए, दंड नहीं होना चाहिए,
- 51:52लेकिन मूड व्यक्ति। अपनी मूड़ताओं के कारण सत्यओं को
- 51:58विकृत कर लेता है, जो पगड़ी शान बन सकती है।
- 52:03तुम्हारी ढांग से डपेटोस कितना सुंदर लगता है पगड़ीधारी आदमी
- 52:10कितना सुंदर लगता है। और अगर तुमसे बोझ बना रहे हो की
- 52:1535 किलो की पकड़ी मैंने कहा मजदूरी कर लो, इससे ज्यादा अच्छी
- 52:21शाम को पांच 400 घर लेकर आओगे सारे दंड होते हैं, हद हो गई
- 52:29तुमने मजाक बना दिया पकड़ी तक का। तुमने सब चीजों का मजाक बना दिया,
- 52:35धर्म ही तुमने मजाक बना दिया नमाज़ में कहाँ तुम्हारा अहंकार
- 52:42झुकता है? शरीर झुकता है और शरीर तो झक है
- 52:48वो तो आसन कर लिया करो सुबह उठ के।
- 52:51बाजरासन हल आसन, मत्स्य आसन, चक्रासन, हस्तपद आसन ये सब बाबा
- 52:59के पास जाओ, उसी कहो पहले से सीखा देंगे तुम्हे तो तुम्हारी नमाज़
- 53:09नमाज़ नहीं है। आसन है, बजरासन है।
- 53:16नमाज़ उस दिन हो गई कि तुम तुम भीतर से झुके जाओगे और झुकोगे तब
- 53:25जब तुम अपने सभी पापों को स्वीकार कर लोगे।
- 53:32पापों का बोझ तुम्हें झुका देगा और तुम उस भक्षणहारे की शरण में
- 53:40झोंके जाओगे। हे भक्षणहर कृपा कर करम कर और अहं
- 53:47कर। वहाँ होती है नमाज़, वहाँ तुम
- 53:52नमते हो वहाँ झुकते हो वहाँ सिर्फ शरीर नहीं झुकता, शरीर भी झुकता
- 54:00है। शरीर के साथ तुम भी झुकते हो।
- 54:05पापों का बोझ अभी तुम्हें हुआ नहीं और ईसाईयत ने भी यही कहा
- 54:12पापों के बोझ को परमात्मा के आगे समर्पित कर दो।
- 54:18कन्फेशन ऑफर्स सभी धर्मों ने। करीब करीब वही बात कही गुमा फिरा
- 54:28के अब देखो चाइनीज अपनी भाषा में बोलेंगे हिंदू अपनी भाषा में, सिख
- 54:34अपनी भाषा में, यहूदी अपनी भाषा में फ़्रेंच है, रशियन है,
- 54:42इंग्लिश है। सभी भाषाएँ हैं, उर्दू हैं,
- 54:47पंजाबी हैं, सभी हैं, अपनी अपनी भाषाओं में सभी बोलते हैं और अपनी
- 54:55अपनी भाषाओं में तुम्हारे तथा कथित समप्रभाई धर्म अपनी अपनी
- 54:59भाषाओं में बोलते हैं। बात एक ही है, उसी की बात करते
- 55:04हैं। पानी को पानी कह दो या वाटर कह
- 55:10दो, कोई फर्क नहीं पड़ता, जल कह दो नीर कह दो, कोई फर्क नहीं
- 55:13पड़ता। भाषाएं अलग हैं, बात एक की ही हो
- 55:20रही है। तो ये साइयत कहता है तुम इतने
- 55:28झुके जाओ कब झुकोगे जब तुम तुम्हारे पापों के बोझ तरे दब
- 55:34जाओगे, तुम मानते ही नहीं कि मैंने पाप किया, यही मुश्किल है।
- 55:46संत कहता है तुम झुको कैसे झुको? सत्य को देखकर सत्य क्या है?
- 55:52तुम झूठे हो और अब तो झूठों का रिकॉर्ड होने लगा।
- 55:59अमेरिका का प्रेसिडेंट 10,000 रोज़ का झूठ बोलता है तो चलो फिर
- 56:05सभी झूठ बोलो, झूठ बोलो, राजनीतिक मापदंड हो गया है।
- 56:11कौन कितना ज्यादा बोलेंगे? मैराथन की दौड़ जैसा हो गया है।
- 56:18यही संत कहता है तुम झूठे हो, इसको स्वीकार करो और उस झूठ से
- 56:26किस किस को क्षति हुई, जनता लूट गई, किस किस को क्या नुकसान हुआ,
- 56:33इसे स्वीकार करो। प्रकृति तो तुम्हें दंडती ही
- 56:37देंगे। लेकिन तुम अगर शांति चाहते हो तो
- 56:47अपने पापों को याद करो और झुको पापों को याद करने से तुम झुक ही
- 56:54जाओगे। अकड़े न रह सकोगे।
- 56:57अकड़ता वो आदमी है जो अपने त्यागों को याद करता है।
- 57:01जो पापों को याद करता है वह आंकड़ा नहीं रह सकता।
- 57:07त्यागों को याद करके यह तथा कथित महामुनी इनके देखना गर्दन, गर्दन
- 57:16में गुल्ला फंसा रहता है। हर भक्त क्योंकि त्याग इतना किया
- 57:21है। 4000 करोड़ छोड़ के आए।
- 57:27अगर अहंकार न मिला तो कुछ न मरा अहंकार मरने से सब मरता है, तुम
- 57:40समर्पण करते हो? अंकार कहाँ मरता है?
- 57:45जब के समर्पण का मतलब ही अहंकार को मरना है तुम ब्रह्मकुमारी बन
- 57:51जाते हो, ब्रह्मकुमार बन जाते हो अंकार कहाँ मरता है?
- 57:57वो ही गाली गलोच चलता है। बाहर नहीं भीतर चलता है।
- 58:13सभी धर्मों ने अपने अपने ढंग से तो मैं कहा झुको, नमन करो,
- 58:20मुसलमान नमाज़ कहता है। हिंदू कहते हैं तुम पाप को याद
- 58:31करो, कुंभ में तभी जाओगे ना, पाप किए हैं तभी जाओगे ना मुझे रोक
- 58:38पूछ लेते हैं बाबा तुम क्यों न गए?
- 58:40मैंने कहा मैंने बाप नहीं बे। जो जितना प्राप्त करेगा वह जाएगा
- 58:47और कई कई बार लोग जाते हैं। शक रह जाता है।
- 58:51एक बार डुबकी लगाने से रह गए बाकी और लगा लो जिसने ज्यादा डुबकी
- 58:59लगाई। उसके भीतर की भावना के मैंने
- 59:03ज्यादा किए हैं। जो एक आध डुबकी में काम चल जाता
- 59:07है वह समझता है कि मैंने कम किया है लेकिन जाते हो तुम पाप के बोझ
- 59:15के कारण जिसने पाप नहीं किया उसको कुम्भ कभी याद नहीं आता।
- 59:19क्यों करेगा वो? क्या जरूरत है?
- 59:30पापी व्यक्ति ही कुंभ क्षनान पे जाते हैं।
- 59:33मेरी इस बात को जाद रख लेना लेकिन हिंदू हिंदू कहते तुम पापों का
- 59:41बोध तो करो कि हाँ मैंने पाप किया।
- 59:47रहेंगे, वैसे के वैसे पापों का बोध नहीं करेंगे।
- 59:52गंगा स्नान कराएँगे, कोई मंत्र न हुआ, तुमने एक अवसर गवां दिया।
- 1:00:01यह अवसर था। पापों को स्वीकार करो कि मैंने
- 1:00:05पाप किया है, मैंने गाय के घी में चर्बी मराई सुअर की इसको स्वीकार
- 1:00:12करो, स्वीकार करने से आपका वो अहंकार।
- 1:00:23जो अकड़ रहा है, जिसमें गुल्ला फंसा है वो टूटेगा और गंगा शिनान
- 1:00:32हो गया। पापों को स्वीकार कर लेना ही गंगा
- 1:00:39शिनान है। गंगा में स्नान करने से पाप नहीं
- 1:00:45धुलते गंगा गंगा बेचारी क्यों भोगते पाप?
- 1:00:51तुम करो भोगते गंगा उसने कोई अपराध नहीं किया, अपराध तुमने
- 1:00:57किया। मसाले में घोड़े की लिफ्ट मिला
- 1:01:05देते हो, मिर्चों में ईंटों का गरुवा मिला देते हो नमक में भाटा
- 1:01:14मिला देते हो। कमाल की बात सब याद करना होगा।
- 1:01:24मैं अक्सर एक चुटकुला सुनाया करता हूँ।
- 1:01:27रामू हाँ जी, देसी घी में सूअर की चर्बी मिला दी, जी मिला दी, ठीक
- 1:01:37है और मिर्च में। गेरुआ आये तो का मिला दो मसालों
- 1:01:44में, घोड़े के लिए गधे के लिए मिला दे अरे गाय का गोबर तुने
- 1:01:54मिला दिया नहीं जी नहीं इतना पुण्य से नहीं करना है और रीना को
- 1:02:02में बाटा मिला दिया। जी मना दिया ठीक हो गया सब हो गया
- 1:02:09चलो चलो फिर गंगा शरण कर ऐसे लोग जाते हैं गंगा शरण के लिए तुम गए
- 1:02:19मुझे मत बताना खुद को बताना। पाप बाप नहीं धुलेंगे तुम देखने
- 1:02:26हॉस्पिटलैज़ भी हो गए। पेट दर्द भी होगा, सिर दर्द भी
- 1:02:30होगा, सब होगा। ये पापा का ही परिणाम है, ऊपर से
- 1:02:37नहीं आता। ये पापु का परिणाम है।
- 1:02:43दुल्हे नहीं, पाप पाप कैसे दुल्हेंगे?
- 1:02:45कन्फेशन ऑफ़ फेरस कन्फेशन ऑफ़ सेंस पापों को स्वीकार कर लो।
- 1:02:53मैंने किया दुल्हे शुरू हो जाएंगे, कन्फेशन महा औषधी है।
- 1:03:01कन्फेशन रसायन है तुम रिश्वत खाते हो चलो खाली यहाँ रिटायर भी हो गए
- 1:03:11लोगों के गर्व पट दिए कोई बात नहीं लेकिन अब गरीबों को चिढ़ाओ
- 1:03:19तुम मत। हीरो पायो गांठ कट आयो, अरे जेब
- 1:03:34उसकी काट ली और ताड़ी मार के हँसते हो तुम।
- 1:03:42कोई अच्छा काम थोड़ी किया है तो बाबा कहते हैं संत कहते हैं कि
- 1:03:47याद करो तुमने पाप किया, जिसकी जेब तुमने काटी पता नहीं, उसके
- 1:03:55बच्चे भूखे सोये होंगे। कोई बेचारा सुदामा जैसा रहा हो,
- 1:04:01कहीं से भिक्षा भिक्षा मिल गई होगी, तुमने उसकी जेब काट ली।
- 1:04:07उसके बच्चे रातों भूखे सोए होंगे, पानी पी के गुज़ारा किया होगा
- 1:04:14जैसे तैसे रात लंगाई होगी। तुमने उसकी जेब काट लिया इंतकाल
- 1:04:23कराने जाते हो पटवारी के पास वो कहते दर्दो 500 दरदो 2500 क्यों
- 1:04:32भाई सरकार तुमको तनखा नहीं देती, मैं सरकार से पूछता हूँ।
- 1:04:38आपने पटवारियों को तन्खा से निबंध कर दी।
- 1:04:41क्या फिर ये क्यों दमा झौकड़ी मचाते हैं?
- 1:04:49तुम किस लिए चुने गए हो या कि तुम भी ऐसे ही हो?
- 1:04:58बता दो, अगर तुम ऐसे हो, हम कोई दूसरा चुन लेंगे गली में नहीं तो
- 1:05:04कार्रवाई करो, पापों को स्वीकार कर लेना पापों से मुक्त होने की
- 1:05:18तरफ पहला कदम है। तुम पापों को स्वीकार नहीं करते
- 1:05:29हो, तुम कहते हो नहीं नहीं नहीं, तुम्हारा बेटा कतल करके आ जाता
- 1:05:34है, बलात्कार करके आ जाता है, छोटी छोटी नन्ही बच्चों से पर्स
- 1:05:37कर और तुम कहते हो नहीं, मेरा बेटा तो विश्वामित्र है।
- 1:05:46इसको स्वीकार करो हाँ शक्ति को स्वीकार करना सीखो, पहला स्टेप
- 1:05:53होगा मुक्ति की तरफ। एनलाइटनमेंट की तरफ फर्स्ट स्टेप
- 1:06:01पापों को सिक्खते हैं। हाँ, मैंने किया यहाँ से शुरू
- 1:06:10करो। बुद्ध कहते हैं, भगवान नहीं हैं,
- 1:06:18बिलकुल ठीक कहते हैं, किसी और तरह से बोलते हैं जिसे ढंग से तुम
- 1:06:22मानते हो सीरम वाली को गिद्दड़ों वाली को।
- 1:06:28उल्लू वाहिनी को मवर वाहिनी को उस ढंग से परमात्मा नहीं है।
- 1:06:34ठीक बोलते हैं, किस ढंग से परमात्मा हैं?
- 1:06:39बुद्ध कहते हैं बुद्ध कहते हैं परमात्मा हैं सुख रूप में।
- 1:06:44और तुम्हारी चाहत है सुख अभी तक तो 2 मिनट हो गए होंगे, मैंने 2
- 1:06:49मिनट दिए थे तुम्हें सोचने के लिए तुम क्या चाहते हो सुख चाहते हो,
- 1:06:58कैसे मिलेगा बुद्ध के हिसाब से मिलेगा।
- 1:07:06इनको सबको मानना छोड़ो ये तुम्हारे सिर के ऊपर बोझ है,
- 1:07:10पगड़ी शान होनी चाहिए, पगड़ी बोझ नहीं होना चाहिए।
- 1:07:15तुम बना सकते हो बोझ उसको 35 किलो की पगड़ी बांध लो तो बोझ है किसी
- 1:07:19ने दंड दिया है क्या तुम्हे? बुद्ध कहते हैं परमात्मा नहीं है
- 1:07:35परबद्ध कभी इंकार नहीं करते हैं, परमात्मा का ही प्रसार कर रहे
- 1:07:39हैं, किसी और रूप में कर रहे हैं क्योंकि अगर उसी रूप में करेंगे
- 1:07:45तो फिर तुम्हें समझ नहीं आएगा वो क्या बोल रहे हैं।
- 1:07:48फिर तो तुम्हारे बीच ही मिल गए। वो कुछ अलग से होना पड़ेगा तो
- 1:07:53परमात्मा की जगह शब्द इस्तेमाल करते हैं।
- 1:07:57वो सुख, खुशी, एन्जॉयमेंट, आनंद उसकी तलाश करो।
- 1:08:09और तुम वास्तव में तलाश भी इसी के हो मिला शक हर एक व्यक्ति हरक
- 1:08:14प्राणी सुख की तलाश में हर वक्त फ्राइड इसे किसी और तरह से
- 1:08:25परिभाषित कर देते हैं। वो कहते हैं जो व्यक्ति दिन भर
- 1:08:28में करता है दट। इस फास्ट सेक्स ओनली उसको आता ही
- 1:08:35इतना है उसको शोख का मतलब ही सेक्स है तो फ्राइड अपने ढंग से
- 1:08:45करेगा व्याख्या। संत अपने ढंग से करेगा व्याख्या
- 1:08:49प्रत्येक व्यक्ति अपने ढंग से करेगा व्याख्या बुद्ध कहते हैं
- 1:08:57परमात्मा नहीं है ठीक है, बुध कहते हैं तुम्हारे सर पे।
- 1:09:06मान्यताओं का बोझ है तुम मुक्त होगे कैसे इतना बोझ रखे बैठे हो
- 1:09:15लाखों लाखों मान्यता जो तुम्हें पता भी नहीं इतना बोझ संभाले तुम
- 1:09:20जी कैसे रहे हो? स्वतंत्र जियो मैं भी तुमसे कहता
- 1:09:26हूँ इसलिए चाहे तुम्हें बुरा लगे, मुझे गालियाँ पड़ती हैं, रोज़
- 1:09:32मारने की धमकियाँ आती हैं, क्यों? क्योंकि मैं इनके बोझ को अपहरण कर
- 1:09:37लेती हूँ, तुमने मेरे सिर का बथल क्यों गिराया?
- 1:09:44मेरी भैस को डंडा क्यों मारा? और बुद्ध कहते हैं तुम बंधे हुए
- 1:09:55हो तुम्हारी ही मान्यताओं में और अगर तुम मान्यताओं में बंधे हुए
- 1:10:03हो शूद्र मान्यताओं में। कह दो न बाबा के विष्णु होते हैं,
- 1:10:09क्या हो जाएगा? क्या तुम्हें फिर उस कीचड़ में
- 1:10:12धकेल दूँ? नहीं बाबा ऐसा नहीं करेगा।
- 1:10:22तुम्हारा मन तो बड़ा करता है, छिप के पड़े हो, यहाँ बड़ा मोझ है।
- 1:10:30चपकाहट को तोड़ना क्योंकि चपकाहट तुमने जीवन की तरह समझ ली है, ये
- 1:10:38चिपकना ही जीवन है और बुध तुमसे ज्यादा समझदार है बुध पहले सुख।
- 1:10:50सम्पदा सिंहासन इन चुबकाहटों को छोड़ देते हैं, भाग जाते हैं,
- 1:10:55वहाँ से छोटी चुब्काहटे हैं। बाहर के असली परख तो होगी तब जब
- 1:11:05तुम्हें अंतिम चपकाहट छोड़नी पड़ेगी।
- 1:11:13तब निकलेंगे तुम्हारे बट्ट हाँ, हमारी पंजाबी में कहते है न बट्ट
- 1:11:19कट दूंगा सर, एक हिसाब से गुरु तुम्हारे बट्ट कट देता है।
- 1:11:30और प्रेस कर देता है। तुम्हें सारे बाल वगैरह सब खत्म,
- 1:11:36वो तो कहते है शुरुआत करनी होगी यहाँ से नहीं है परमात्मा एक एक
- 1:11:42करके तोड़ो ये लालना फलना वाला सबको तोड़ दो।
- 1:11:48ये झंडों के आगे झुकना तोड़ दो, छोड़ दो सब वो मान लेता है तुम्हे
- 1:11:56डराती है, कब पते हो? मैंने कहा जब मैं गउशाला मंदिर
- 1:12:01जाता था। तो एक व्यक्ति साथ जाता, जंड को
- 1:12:05प्रणाम करता। मैंने कहा यह पेड़ है तू क्यों
- 1:12:08मोर बुआ है, क्यों प्रणाम करता है यह देवता है बाबा तो मैं उसको चप
- 1:12:17लगा के आता है, ले थप्पड़ मार दिया मैंने तेरे जंड को कह दे
- 1:12:21मेरी टंगड़ी तोड़ दे। न कोई जांड फंड खेत्रपाल वगैरह
- 1:12:33कोई नहीं आया। 40 वर्षों से लगातार गालियाँ
- 1:12:39निकाल रहा हूँ, तुम्हारे हिसाब से तो गालियाँ हैं, मेरे हिसाब से
- 1:12:44पाखंडों को दूर करने का प्रयास। मैं प्रोकार कर रहा हूँ तुम्हें
- 1:12:51आँखें देने की कोशिश ताकि तुम रंगों को पहचान सकूँ, लेकिन तुम
- 1:13:01इन मान्यताओं से चिपके हो और अब आखिरी बहुत बुध कहते हैं।
- 1:13:13अगर तुम इन शुद्र मान्यताओं को नहीं तोड़ पाने का साहस जुटा सकते
- 1:13:18तो बड़े से बड़ा साहस जो है क्या कि मैं शरीर नहीं हूँ, ये कैसे
- 1:13:24जुटा पाओगे? साहस ये तो बहुत मुश्किल काम है
- 1:13:28और तुम्हारे लिए तो यही असंभव है। तुम्हारे तो शादी हो जाती है,
- 1:13:38बच्चा हो जाता है, तुम तो बकरा चिढ़ा के आते हो और पांव कपड़े लग
- 1:13:44जाते हैं, यह तो मतता है, कौन सी मतता है?
- 1:13:51ये तो गुडगाँव वाली माता है, ये बेरी वाली माता है, ये सभी माताएं
- 1:13:59ही है। भाई सभी मतते है ये तो जो गर्व है
- 1:14:07ये माता नहीं है। अब से पहली माता तो यह तुम ही
- 1:14:14समता को छोड़कर पत्थर की माता को अच्छी बात हो रही सारी सारी रात
- 1:14:23चल लाते हैं। इस माँ का हाल भी नहीं पूछते दी
- 1:14:28पानी का ग्लास पी लो। उस माता को पूजन तुम सेरा वाली
- 1:14:38वहाँ चले जाओ, पहाड़ों में चले जाओ तो पहाड़ा वाली माता अरे भाई
- 1:14:42सबकी माता है सब जगह माता है तुम्हारी कितनी माएँ हैं गंगा तों
- 1:14:47माता जमुना तों माता सरस्वती तों और पता नहीं कौन कौन सी माता
- 1:14:52तुमने बना रखी? शेरों वाली तो गधों वाली तो शीतला
- 1:14:56माता उल्लू के ऊपर बैठे लक्ष्मी माता बुद्ध कहते हैं ये नहीं है
- 1:15:05परमात्मा इन मान्यताओं को छोड़ दो मत ढो इस गंदगी को ये गंदगी है।
- 1:15:14पहले तुम ये साहस जुटा लो, इसी से तुम्हारी टाँगें कम थी।
- 1:15:23मैं जब उल्टू पुल्टू बोलता तो मेरे साथ वाला आदमी थोड़ा सा दूर
- 1:15:27हो जाता है। मैंने कहा तुम कुछ दूर हुए।
- 1:15:31कहता बब्ब कहेगा घोट न उठा के तो वो तो चलो बोल रहा था तुम क्यों
- 1:15:39खड़े सुन रहे थे भाई और तुम्हारी बातें सुनकर हँसी आती है क्या कह
- 1:15:46तो मैंने कहा हँस लिया करो, यह ज्यादा बढ़िया है, मुश्किल तो
- 1:15:50तुम्हें हँसी आती है। अन्यथा तुम रोते ही रहते हो।
- 1:15:57बुध कहते हैं, अगर तुम शुद्र मान्यताओं को नहीं तोड़ पाओगे,
- 1:16:01इतना साहस भी नहीं जुटा पाओगे तो वो जो अंतिम वादा है फॉर
- 1:16:06एन्टाइटनमेंट समाधी। जहाँ सब जाके आधिव्यादी खत्म, वो
- 1:16:13है समाधि आधिव्यादी सब खत्म वहाँ कैसे पहुंचोगे आखिरी साहस कैसे
- 1:16:23जुटा पाओगे? इसलिए बड़े से बड़ा व्यक्ति
- 1:16:27नाश्ते को हो सकता है। ज्ञान ही नहीं हो सकता।
- 1:16:34किसी मार्कर्स को कह दिया जाएगा कि तुम शरीर नहीं हो, यहाँ तक
- 1:16:39पहुँच के दिखाओ, इसकी जान निकल जाएगी, इसलिए तो शुरू में ही कह
- 1:16:45देते है ही नहीं वो। और जो भी ये कहते हैं कि
- 1:16:48एनलाइटनमेंट नहीं होता बस ये समझो कमजोर आदमी है।
- 1:16:52कमजोर आदमी पीछा छुड़ा लेता है अपना कैसे न कैसे बहाने बाजी करता
- 1:16:57है जो बंधनों को सहन नहीं कर पाता।
- 1:17:09हालांकि ये कच्चे बंधन है। धागे।
- 1:17:12शादी भवायो कोई बंधन थोड़ी लेकिन पीछा छुड़ाने के लिए ना तो खुद
- 1:17:17कराते हैं और कितने लोगों की ज़िन्दगी बर्बाद कर देते हैं लाइव
- 1:17:22इन में रहो ये कहो वो कहो वो करो वो करो, मैं कहता हूँ भाई कराओ ही
- 1:17:27मत, क्यों कराते हो तुम? शादी मत कराओ, बच्चे ही ना करो,
- 1:17:34मजार हो अकेले बुध कहते हैं इन शूद्र मान्यताओं को छोड़ोगे साहस
- 1:17:41बढ़ेगा और साहस को बढ़ाते जाओ। रोज़ एक कदम आके रोज़ एक कदम आके
- 1:17:48तो अंधभक्त हो न अपने आप में? एक साहस का कदम है।
- 1:17:53ऐसे आँख मूँद के विश्वास कर लेना थोड़ा मुश्किल होता है।
- 1:18:00रोज़ अंध भक्त बनते जाओ, अंध भक्त बनते जाओ और इतने अंध भक्त बन जाओ
- 1:18:08आखिर में जाकर। कुछ तो सीखो अंतभक्ति भी तो अपने
- 1:18:15आप में एक साहस है, ये भी साहसी लोग होते हैं।
- 1:18:25आखिर में तुम इतना साहस जुटाओगे वहीं गुरु का माता है, तुम
- 1:18:31तुम्हारे पैर लड़खला जाते हैं, अंतिम वादा है शरीर मैं नहीं हूँ
- 1:18:36क्योंकि शरीर तो तुमने जन्मो जन्मो से माना हुआ है, तुम छिपकली
- 1:18:41थे तुम सांप थे, तुम पेड़ थे, तुम पत्थर थे।
- 1:18:48तुम एक कोशी अजीव थे, तुम बहु कोशी अजीव थे, तुम चलने वाले
- 1:18:54प्रणी थे। आज तुम मनुष्य हो गए हो, लेकिन
- 1:18:57शरीर तो हो गहरी से गहरी मान्यता है तुम्हारी यह इसको तोड़ना सबसे
- 1:19:06ज्यादा मुश्किल है। तो शुरूआत कहाँ से करनी होगी?
- 1:19:12ए अनार ए अनार सी कैट बी बॉर्न यहाँ से शुरू करना।
- 1:19:26धीरे धीरे साहस को बढ़ाते जाओ 1 दिन तुम डॉक्टरेट हो जाओगे, आखिरी
- 1:19:34मुकाम पे जाके बड़े से बड़ा अटके जाता है, बड़ा मुश्किल है ये बड़ा
- 1:19:39साहस का कदम है अरे तुम झंड को देवता तक नहीं इंकार कर सकते।
- 1:19:46तो तुम मैं शरीर नहीं हूँ, ये कैसी मानोगे?
- 1:19:52वहाँ तो टूट जाएंगे तुम्हारा सब ध्वस्त हो जाएगा सब वहाँ सिर देना
- 1:20:00पड़ता है। बरवरी की तरह अर्जुन की तरह फिर
- 1:20:10दिव्य जटशु मिलता है फिर होती है पूजा और तुमने तुमने तो सिर कटे
- 1:20:17की महा लगा दी मूर्ति। वो सिरकटे की मूर्ति तुम कर रहे
- 1:20:23हो तुम किस का अर्थ नहीं पता भीतर शीश देना पड़ता है शीश का दान महा
- 1:20:30दान तुम उसकी पूरी पिक्चर लगाओ इसने शीश दान किया सच में शीश दान
- 1:20:39किया। अहंकार का दान किया।
- 1:20:41उसने अहंकार छोड़ा, मैं शरीर हूँ, इसको छोड़ो और आखिर में ये छोड़ना
- 1:20:49पड़ेगा तैयार हो, तैयार हो? जो घर बार है अपना चले हमारे साथ
- 1:21:06अगर तैयार हो, अपने घर को आग लगाने को राजी हो तो मेरे साथ
- 1:21:13चलो। बिना सीस दिए वह मिलता नहीं है।
- 1:21:22आखिर का कदम बड़ा मुश्किल होता है।
- 1:21:24तुम कहते हो गुरु की जरूरत गुरु की जरूरत देखो पहले तो तुम तोड़
- 1:21:28दोगे। कोई भी एरा गहरा तोड़ देगा लेकिन
- 1:21:33वहाँ जाकर सबसे बड़ी मुश्किल हो जाती है वहाँ बड़ी मुश्किल दर पे
- 1:21:38शायद। वहाँ होगी तुम्हारी भी साहस की
- 1:21:46परीक्षा और गुरु के गुरुता की परीक्षा वो तुम्हें 1000 तरह से
- 1:21:54समझायेगा। लेकिन तुम छोड़ने को राजी नहीं
- 1:21:59होगे। बहुत बार तो लोग वहाँ से मुड़ते
- 1:22:02हैं नहीं, ये नहीं होगा, वहाँ तक तो पहुंचना ही होगा यही बुध ने
- 1:22:11कहा श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरा हे नाथ नारायण वसुदेव।
- 1:22:30श्रीकृष्ण? हर मुरा हे नाथ नारा वासुदेव
- 1:22:49ऋतुमात। स्वामी।
- 1:22:53सखार हे नाथनारा घन वासुदेव श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरार।
- 1:23:14हे नाथनरायन वासुदेव तेरे जहाँ। में न हो।
- 1:23:31और न कोई मैं जे है लख तेनु तेरे जहा में न और न कोई मैं जे है लख
- 1:23:49तेनु। जे मेरे बिच एब न हो दे।
- 1:23:58तू? बक से ला के न जे मेरे बिच एब न
- 1:24:07हो दे। तू बक्से द के नु तू बक्से द के
- 1:24:16नु रखे चरनाल कॉल मेरा वाले आ साईया।
- 1:24:27रखीं चरना बे कोल मेरा वाले आ सांया मेरा।
- 1:24:37वाले आ पे? तू मात स्वामी।
- 1:24:48सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव पित्र मात स्वामी।
- 1:25:07सखा मारे हेनाथ नारायण वासुदेव। श्री?
- 1:25:18कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारा।
- 1:25:26यन वासुदेव हे नाथ नारायण वासुदेव हे नाथ नार।
- 1:25:47जन वासुदेव। धनबाद है।