Latest / Baba ji Vijay Vats / 15 Apr 26 - नॉन-रिएक्टिव जीवन के लिए 'साक्षी भाव' कैसे विकसित करें? 'योगः कर्मसु कौशलम्' की व्याख्या!
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- 0:12कुलबीर सिंह बाबा जी बनाओ, आपने कहा बाबा जी नॉन रिएक्ट मोजाओ
- 0:30तुम्हारी ज़िन्दगी सुखी हो जाए। लेकिन नॉन एक्टिव रहा नहीं जाता।
- 0:43ज़िन्दगी का सबसे अहम सवाल है, ज़िन्दगी की सबसे बड़ी समस्या भी
- 0:51है। के नॉन रिएक्टिव रहा नहीं जाता।
- 0:59इसका कोई उपाय नहीं। हाँ, बहुत सुंदर विषय जीवन के लिए
- 1:09कारगर। सुखी जीवन जीने के लिए एक अमूल्य
- 1:16आभूषण जीतने भी विकार हैं जब विकार हमारे आते हैं।
- 1:42वो अचेतन से आते हैं। अचेतन से चेतन तक आने में थोड़ा
- 1:50सा वक्त लग जाता है। मैं धीरे धीरे बोल रहा हूँ ताकि
- 2:00तुम समझ जाओ कर्मों की व्याख्या है तुम्हारी ज़िन्दगी का सारा
- 2:04उत्तरदायित्व इसके ऊपर है काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जब कोई
- 2:18भी विचार। जब भी उठता है भावना उठती है तो
- 2:29वो सबसे पहले हृदय से उठते है। अचेरितन मन से उठती है।
- 2:38और चेतन मंथ का आने में थोड़ा सा वक्त लग जाता है।
- 2:42अब देखो यक् सास से तुम क्रोध नहीं होते।
- 2:55जैसे ही तुम्हें किसी ने कोई गालियां काट दी।
- 3:03तुम्हें गुस्सा आ गया, क्रोध आ गया, क्रोध आया चेतन से और चेतन
- 3:21में आया अब यहाँ समझो बात कर रुक जाओ थोड़े से।
- 3:28जैसे ही चेतन में क्रोध आएगा या काम आएगा, लोभ, मोह, अहंकार, मद
- 3:38मत्सर्व है तो तुम क्षण भर के लिए रुक।
- 3:48तुम्हारी गलती कहाँ रह जाती है कि तुम यहाँ थोड़ा सा रुकते नहीं,
- 3:58अच्छे तन से बात चेतन में आई। और तुम सामने वाले के मुँह के ऊपर
- 4:04फेंक देते हो उसे जैसे तुमने ईंट चला के मारा हो नहीं बाहर जाना
- 4:12है। यह कर्मों की कुशलता कहलाता है।
- 4:20भगवान कृष्ण का एक शब्द बुद्धियुक्तों जहा दोह उभे
- 4:27सुकृत्य दुष्कृत्य तस्मा त्योगाय युजस्व योगः कर्मशु कौशलम्।
- 4:42कर्मों में कुशलता का नाम योग है। तुमने सुना तो बहुत बार लेकिन
- 4:52पुत्र तुमने इसका अर्थ नहीं समझ पाए?
- 4:56बहुत से व्याख्या करो ने। लेकिन वो व्याख्यान सरल नहीं थी।
- 5:09एक्सपेरिमेंटल नहीं थी, थ्रोटिकल थी ध्यान रखना यह व्याख्या भगवान
- 5:18कृष्ण की गीता की। साइंटिफिक व्याख्या जो कि
- 5:26प्रैक्टिकल व्याख्या है, जो तुम्हारे जीवन में रोज़ घटता है,
- 5:33काम भी आता है, क्रोध भी आता है। लोह मोह, अहंकार, मधु, मच्छर, भय।
- 5:41ये सब तुम्हारी जिंदगानी में आता ही रहता है, जब तक कि तुम जिंदा
- 5:47हो और ऊपर से मैंने कह लिया बी नॉन रिऐक्टिव प्रतिक्रिया विहीन
- 6:01हो जाओ। प्रतिक्रिया न करो जैसे सास बहु
- 6:16के झगड़े आज घर घर में। पिता पुत्र के जबड़े का घर में,
- 6:27भाइयों, भाइयों के जबड़े का घर में इनको कैसा सॉल्व करें?
- 6:37इस बात को गहरे से समझ लें आपकी जिंदगी से झगड़ा समाप्त हो जाएगा।
- 6:48आपकी जिंदगी मौन शांत जैसे एक कमरे में मैं एकांत बैठा रहता
- 6:56हूँ। ऐसे ही तुम्हारा मन करेगा, मैं
- 7:01बाजार में चलूं तो एक कला चलो घर में बैठो तो अकेला बैठो, शांत हो
- 7:14के बैठो। जैसे ही तुम इनको बेकार कहते हो,
- 7:25ये वास्तव में ऊर्जा के हो। मुर्दे को कभी काम नहीं आता।
- 7:33क्रोध भी नहीं आता, भय भी नहीं आता।
- 7:36मुर्दे को तुम आग में डाल देते हो वो डरता।
- 7:42अगर मूर्ति को तुम काट काट कर आग में डाल दोगे, तो भी वह नहीं
- 7:46डरेगा क्योंकि उसके भीतर जीवन नहीं है ध्यान से समिति जाना।
- 8:01तुमको किसी ने गाली निकाल दी, बुद्ध के ऊपर किसी ने थूक दिया वो
- 8:05तुने क्या किया जो वो तुने किया वो मैं तुम्हें बता रहा हूँ?
- 8:13सेम फॉर्मूलेशन। प्रत्येक संत प्रयोग करता है।
- 8:20पहली बात तो समझी भूल जाओ कि किसी अक्शॅन का रिएक्शन तुम मुझे गाली
- 8:31निकालोगे मैं कितना ही बड़ा संत? मेरे भीतर रिएक्शन आएगा।
- 8:44बहू सास को कुछ कह देती है, बहू जहर से।
- 8:55पागल हो जाती है। सास को कुछ कह देती है आगे से सास
- 9:01कह देती है यही तो जगह है तुम मुझे कोई बात कहोगे तो हो ही नहीं
- 9:13सकता कि उसका रिएक्शन ना आए। पहली बात ये समझ लो यह एक नियम है
- 9:24वैब रक्षक दरिनेक्ल एंड ऑपज़िट रक्षक बुद्ध के ऊपर कोई थूक गया
- 9:37गुस्सा बुद्ध। क्योंकि गुस्सा है तो बुद्ध क्या
- 9:47करेंगे? बुध निपट न जानते हैं।
- 9:49गुस्से से बस इसी कला को योगः कर्मशुभ कोष।
- 9:58कर्मों की कुशलता कहा गया है। ये तुम्हारी ज़िन्दगी का सवाल है।
- 10:06इसे बार बार सुनना अगर समझे न आये तो वैसे मैं इतने सरलतम ढंग से
- 10:14बोल रहा हूँ। कि तुम्हें मेरी बात हृदय में उतर
- 10:18जाएगी, बहुत क्या करते हैं? बहुत को गुस्सा अचेतन से चेतन में
- 10:30गुस्सा आया। और वृद्ध हमेशा साक्षी है।
- 10:41वो उस गुस्से को निहारते हैं, गुस्सा आता ही चला जाता है।
- 10:51जितना एक्शन किया है आदमी अब थूकना बहुत बड़ा एक्शन होता है।
- 11:05टु एवरी एक्शन देर इस एन इक्वल एंड अपोज़िट एक्शन इक्वल अगर थूक
- 11:13दिया। तो बहुत बड़ा गुस्सा दिलाने वाला
- 11:19काम करती है, बहुत मुर्दा नहीं है।
- 11:25बुध परम जी बनते हैं। गुस्सा बुध को भी आएगा।
- 11:33यही चीजें तुम्हें समझाई नहीं जातीं, क्योंकि वो महापुरुष थे
- 11:39इसलिए उन्हें गुस्सा आता है। उन्होंने गुस्से के ऊपर वजह
- 11:44प्राप्त कर ली थी। नहीं तुम्हें समझाने वालों ने गलत
- 11:49समझा दिया। विजय प्राप्त करने का अर्थ गुस्सा
- 11:58तो हो नहीं आता है लेकिन वो उस गुस्से की अवस्था में साक्षी बने
- 12:07रहते हैं यही उनके जीवन का। उपासना का ढंग है?
- 12:27श्वास को आती जाति को देखो, बुध देखते देखते देखते देखते भ्रष्ट
- 12:39हो गए। साक्षी अब जब कोई उनके ऊपर थोकेगा
- 12:49या गाली निकालेगा, क्रोध होने पे आएगा, उसी मात्रा में आएगा, तुम
- 12:56क्या समझते हो? दीवार पर हम गेंद मारते हैं,
- 13:01दीवार को दर्द नहीं होता, चोट नहीं लगती लगती है, यही तो
- 13:08तुम्हें पता नहीं, लेकिन दीवार को चोट फर्क नहीं डालते अगर यही
- 13:15दीवार के ऊपर। घण्ट पटक के मारा जाए तो द्वार दे
- 13:18जाएगा, लेकिन गेंद मारी तो दीवार इतनी मजबूत है।
- 13:27वह गेंद उससे टकरा कर वापस आ जाती है रिएक्शन के रूप में।
- 13:43बुद्ध के ऊपर तुमने गाली फेंक दी या थूक फेंक दिया, बुद्ध को भी
- 13:52गुस्सा आएगा और मैंने कहा गुस्सा अचेतन से चेतन में।
- 14:01थोड़ा सब क्षण भर का वक़्त अगर तुम संभल जाओ तो तुमने बेकारों पर
- 14:11विजय पाली। इस सूत्र को ध्यान से सुनें यह
- 14:19संतों का। जीवन का मर्म है।
- 14:24ये बात अलग है कि तुम्हें समझ नहीं आया या उन्हें समझाना नहीं
- 14:29आया सरलतम ढंग से अब यही बात कृष्ण इसी स्लोक में कहते हैं।
- 14:43दूसरे अध्याय का पच्चासमां श्लोक बुद्धि युगते जहाँ तीह ऊबे सुकृत
- 14:53दुष्कृत्य, कस्माध्य। पाय युजस्व योगः कर्मशु कौशलम तो
- 15:13तुमने बुद्ध को गाली निकाल दी, बुद्ध के ऊपर थूक दिया।
- 15:19बुद्ध को भी गुस्सा लेकिन गुस्सा आएगा चेतन।
- 15:24सभी को चेतना में गुस्सा आता है और गुस्सा थोड़ा भी हो सकता है।
- 15:32गुस्सा भी हो सकता है। लेकिन बुद्ध क्या करेंगे आप?
- 15:48बुद्ध गुस्से को उसके स्थान पर रहने देंगे।
- 15:53जो अति अचेतन से उठकर चेतन में आए बुध उसे निहारते रहेंगे।
- 16:09जो आपको वो सिखाते हैं सांस कर लेना, सांस कर छोड़ना।
- 16:22विपश्यना पक्ष पक्ष कहते हैं देखने को।
- 16:31देखते रहो सांस आ गई, सांस चली गई, ऐसे ही देखते रहो क्रोध आ के
- 16:42किसने गाड़ी निकाली, किसने थूक दिया।
- 16:47किसी ने भयंकर गली निकाली, किसी ने पत्थर मार दिया, लघु लोहान हो
- 16:53गया। लेकिन बुद्ध क्या करेंगे?
- 17:03बुध? अपना अंगोछा उठाएंगे और उस लहू को
- 17:10पहुँच लेंगे वो जो तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे।
- 17:22तुम्हें कुछ कहने की बजाय उन्हें जो चोट लगी खून निकल रहा।
- 17:31उस खून को वो अपने अंगों से साफ कर ले।
- 17:37खून ज्यादा निकलता होगा तो अंग उछाव पर रख ले ताकि खून न निकले
- 17:48वो अपने शरीर का बचाव करें। तुम्हारी कोई फ़िक्र नहीं, अब ये
- 18:00होगा कैसे? ये होगा दृश्य भाव से साक्षी भाव
- 18:07से जो कुछ भी हो रहा है। तुम उसे देखते रहो जो अचेतन से
- 18:22चेतन्य आए वो विकार वो विचार वो विषय है यह परिस्थितियां जो बाहर
- 18:31बन गई। वो अनुकूल है, वो प्रतिकूल है, वो
- 18:41तुम्हारे मासिक नहीं हैं, वो तुम्हारे मासिक हैं तुमने उनको।
- 18:52सिर्फ देखना जैसे आसमान में आए हुए बादलों को तुम देखते हो और
- 18:59कहते हो कि आसमान में बादल आ गए। वो तुम्हें देखते हैं क्योंकि तुम
- 19:05उन्हें देखता। आसमान में पागल है या कि दी भाग
- 19:19में वासनाएँ हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 19:25फिर आसमान में सफेद बादल है या काले बादल हैं।
- 19:33या गरजने वाले हैं या बरसने वाले हैं।
- 19:37बहुत तरह के बादल होते हैं, लेकिन तुम कभी शिखर किए के बादल आगे
- 19:51सफेद हैं के काले हैं के बरसने वाले हैं के गरजने वाले हैं।
- 19:58तुम मात्र देखते हो क्या आसमान में बादल आ गए, इसी तरह देखो के
- 20:06किसी ने गाली निकाली थी किसी ने मुँह के ऊपर थूक दिया था।
- 20:16उसका रिएक्शन आया था। जो भी आया था तो रिएक्शन चेतन में
- 20:25आएगा, लेकिन तुम साक्षी बनकर जो भी रिएक्शन आया उसको देखते रहो।
- 20:38उसके साथ जैसे मैंने विकारों को बताया, उस रिएक्शन को देखते रहो,
- 20:49उसके साथ चिपट मत जाओ। तुम क्लिंग हुए नहीं के क्लिंग
- 20:59होते ही वह रिएक्शन उसको बल मिल जाएगा, क्योंकि तुम्हारी क्लिंग
- 21:09अनलेस चेतना के पावर से आती है। फिर तुमने पावर उस रिएक्शन को दे
- 21:19दिया, फिर वह रिएक्शन जिसने अक्शैन किया था, उसके ऊपर बरस
- 21:28जाएगी और तुम बाद में पछताओगे। वह चार गुना रक्षण करेगा।
- 21:38तुम आठ गुना करो बात छोटी सी थी पहुँच जाएगी हत्या तक यह जेलों
- 21:48में बैठे हुए लोग। कभी पूछना इनसे मसला क्या ये
- 21:56कहेंगे? मसला कुछ भी अगर ठीक से संभल जाते
- 22:01तो मसला टाला जा सकता था। कोई बड़ा मसला था भी और होता भी
- 22:08नहीं कभी। बड़ा मसला नाम की कोई चीज़ संसार
- 22:15में होती है तुम बना लेते हो बड़ा तुमने कहा पुत्र क्रोध आता है काम
- 22:31आता लो। आता विचार आता प्रतिक्रिया आती।
- 22:37लेकिन प्रतिक्रिया तो उसकी करने से आई ना तो काम भी तो किसी के
- 22:45दृश्य को देखने से आया ना मैं क्यों कहता हूँ इन अद नंगी
- 22:53शोकरियों को? लोग सड़क पर फिरते हैं कि जब
- 22:57बच्चों को उत्तेजित कर रहे हैं तुम्हें नगम देखकर इन्होंने
- 23:10कांडवासना कोई विजय नहीं प्राप्त की या कोई नाराज नहीं हो गया?
- 23:21की निश्चित रूप से छेड़छाड़ करेंगे और तुम जाकर पुलिस स्टेशन
- 23:29के अंदर ऐफ़ आई आर लॉन्च करो कसूर किसका हमारा समाज?
- 23:35अभी इतना प्रबोध नहीं हुआ। सच में अगर मेरे हाथ में नायक हो
- 23:43तो कसूर उस लड़की का जिसने शरीर के साथ अंग दिखा दिए जो बच्चा
- 23:52देखना चाहता है। ईरान की सभ्यता से सीखो ईरान को
- 24:07अनपढ़ अशिक्षित मुल्क कहने वालों तुम्हें पता नहीं वहाँ की यूथ
- 24:1999.99% पड़ी हुई है। साक्षर और कम नहीं पड़ी है कि 10
- 24:28पास है कि पांच पास तुम तो निरक्षर भी हो यहाँ पर वो मास्टर
- 24:36डिग्री लिए है और 50% लोग वहाँ के।
- 24:45पीएचडी के यह जो डेलिगेशन जाएगा ईरान का पाकिस्तान में वार्ता
- 24:56करने के लिए इन औरत में समझना। वह जो अमेरिका सिनाही दो प्रश्क
- 25:04दी डिवांस या खुद जलट्रम आ जाएगा या उनसे कम पड़ा है जी ईरान के
- 25:16रोक तुम सिर्फ देख लेते हो। ये बुरका करते हैं, परता करते
- 25:23हैं, ये तो शालीनता का परिचालक है, यह तो एक प्रकार की मर्यादा
- 25:36में रह रही हैं। स्त्रियाँ और कितना शुभ है
- 25:40स्त्रियाँ भी मर्यादा में हैं। पुरुष भी मर्यादा में हैं।
- 25:44पुरुष पगड़ी रखते हैं। स्त्रियाँ अपने सभी अंगों को ढक
- 25:51लेती। यह पिछड़े वन का उद्युक्त नहीं
- 26:00है। वर्ण यह समझदारी का।
- 26:07और एक प्रकार के इन्होंने अपने आप के चरित्र को साथ दिया है।
- 26:19तुम इन बुर्के में लपेटी हुई। नकाबों में लिखेती हुई स्त्रियों
- 26:25को अशिक्षित गणों उनसे उनकी क्वालिफिकेशन पूछो।
- 26:32वो कहे कि एमएस सीपी हेच डी शौक मत खाओ और किसी भी स्त्री से पूछ
- 26:41लेना। और देखने में तुम्हें ऐसे लगेंगी
- 26:46जैसे राहत। यह तो एक पर्दानिश है।
- 26:56यह लड़की इतनी पड़ी है, हाँ इतनी ही पड़ी है इससे ही भगवान राम की
- 27:04मर्यादा पे। भगवान राम अमर्यादित हैं।
- 27:14उन्होंने कहा जगह मर्यादाओं को साथित।
- 27:24वहाँ के राष्ट्रपति विदेश मंत्री हैं।
- 27:29या बड़े औदे वाले कोई भी या छोटे औदे वाले मास्टर डिग्री से कम
- 27:37नहीं है। मास्टर डिग्री या पीएचडी उनकी
- 27:42मिनिमम क्वालिफिकेशन। हमने यहाँ अशिक्षित लोगों को, नॉन
- 27:53एक्सपीरियंस्ड लोगों को जिनमें अनुभव नहीं था, लट्ठमार लोगों को
- 28:02लट्ठमार समझ जाओ। गद्दी पर बिठा दिया।
- 28:20उन मूर्खों ने मंदिर बनाए, उन मूर्खों ने हिंदू मुस्लिम करके
- 28:24आपस में लड़ा है भगवान कृष्ण का एक शब्द याद रखना।
- 28:37जहाँ शांति है, वहाँ समृद्धि है घर के लिए भी इस बात को आप एक
- 28:48प्रकार का नियम समझ लेना। जहाँ शांति होती है वहाँ समृद्धि
- 28:58होती है। ये कैसा राजा हमने चुना और ये
- 29:03कैसी कैबिनेट हमने सुनी जो शांति रहने ही नहीं देते तुमने 12
- 29:11वर्षों से? 1 दिन भी कभी शांति रहते देखी
- 29:20जहाँ सोमति तह संपत्ति ना ना जहाँ कुमती तह विपत निदान व्हेर देर इस
- 29:3420 देर इस प्रास्पर्ट। जहाँ शांति है वहाँ प्रफलता है,
- 29:44वहाँ विकास है, ये कहते हैं हम विकास करेंगे।
- 29:51विकास क्यों नहीं हुआ? हमारे कर्म फल देते हैं, हमने
- 29:57कर्म क्या किया? आपस में लड़ा नहीं, बैरी बना
- 30:11लट्ठमार भाषा और ऐसे लोगों की प्रशंसा होती है।
- 30:19योगी आदित्यनाथ जैसे किसी लड़की से किसी ने रेप कर दिया था और
- 30:28योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया, क्या बात हुई?
- 30:36ये कोट्स किस लिए हैं? फिर अगर कोट्स तुम्हारे मसले के
- 30:43अंदर इंटरफेरेंस करते हैं, तुम तुम गाजर का दूध खेलते हो, इनको
- 30:52पकड़ो। इनको पकड़ कर कानून के हवाले करो।
- 31:03क्या पता तुमने जो मारे वो तुम्हारे दुश्मन ना हो जैसे तुमने
- 31:09हेरेन पांड्या को मार दिया। तुलसी प्रजापति और उसकी घरवाली को
- 31:14मार दिया। लोया ने किसी का क्या पकड़ा था?
- 31:20सोहराबुद्दीन केस में किसी ने किसी का क्या पकड़ा था?
- 31:26ये रोज़ लोग मर जाते हैं, तुम छानबीन क्यों नहीं करवातें क्या
- 31:32सरकारों का काम? बस जेब में हाथ फिर फिरते रहना
- 31:38होता है। टु इन्वेस्टिगेट दी ट्रुथ पुलवामा
- 31:48कांड हुआ। हमारे अपने ही नौजवान बने थे।
- 31:53जो हमारी दिन भर राहत रक्षक, जिन के होने के कारण हम आराम से घरों
- 32:00में चैन की नींद सौंप पाते हैं। तुम्हें पता नहीं हम पंजाब में
- 32:04रहते हैं। हमने पैंसठवें एक अंतर में तोपों
- 32:12की गड़गड़ाहट। गोलों की बरसात देखी।
- 32:16तुम दूर बैठे हो के भगवान कृष्ण कहते हैं, जहाँ शांति है, वहाँ
- 32:27समृद्धि है, दो देश हो। 20 में बाल हो परलादेश अपना खेतवा
- 32:40तारे हैं इस हरलादेश अपना खेत जोत तारे हैं, इसे कहते हैं प्रेम इसे
- 32:49कहते हैं विकास की आगाज। आगाज यहाँ से होता है।
- 32:56ऐसे लट्ठमार बाजा से विकास नहीं होता, भय पैदा होता है।
- 33:05फिर आज तुमने उनको मार दिया। कौन जाने वो दोषी थे कि नहीं?
- 33:13कल को किसी को भी मारता हम आराम से घर में बैठा हूँ, मैं 14 सेकंड
- 33:21में बैठा हूँ यहाँ पर मेरे पास लोग मारने आ जाते हैं।
- 33:28एक दो बार की कहानियाँ मैंने सुनाई थीं, मैंने कहा तू ये मारने
- 33:39आया है हाँ फिर तू क्यों फंसता है मूर्ख अरे तू तो अपनी छोटी उम्र
- 33:47का है तुने तो सारी जिंदगी जीनी क्यों किसी के कहने से बहकावे में
- 33:52आता है? मुझे मारना चाहता है ला मुझे दे
- 33:56दे। मैं खुद की गणपती पे रखूँगा और
- 34:01100 गंध करता हूँ कि मैं चला दूंगा, इसको तेरी इच्छा भी पूरी
- 34:07हो जाएगी और तेरे पैर जाम भी नहीं लगे।
- 34:12और तू यहाँ से चला जा तो उसने मेरे पांव पकड़ लिया, रोने लग
- 34:21गया, उसने मुझे नाम भी बताया, किसने बचा है मेरे बड़े बेटे का
- 34:31कतल हो गया? मैंने आज तक उन अपराधियों का नाम
- 34:36किसी बताया और उनकी दुर्गति मैं अपने नाइनों से देखा, मरते हुए भी
- 34:45देखा और वो जी रहे हैं कैसे ये भी देखा तुम भूल जाते हो।
- 34:53इस वृहद सृष्टि को बनाने वाला चित्रकार कोई है?
- 34:58बस यही झगड़ा रह जाता है। सर और तुमने उसे देखा नहीं, इसलिए
- 35:06तुम शिशु पंज में। एक मन तुम्हारा कहता है, शायद वह
- 35:15हो ही। इतना शानदार इतना एक्यूरेसी
- 35:22सिस्टम थी कि बीपी अगर 120 है 500 हो जाए तो आदमी गया।
- 35:32250 300 में ही गया। कितना एक्यूरेसी सुसने परमात्मा
- 35:40ने यह सारा जाल बुछाया है ये नब्ज़ थोड़ी सी नब्ज़ दबजाई तो
- 35:46तुम चेलाने लगोगे। तुम्हारे पास कोई उपाय नहीं होता,
- 35:55बस यहीं आकर पीच अटक जाता है इस धरती के प्रत्येक मानव का पशुओं
- 36:06में तो अभी वो विवेक जन्मा। मनुष्य का 14 इसलिए सर्वश्रेष्ठ
- 36:14माना गया कि मनुष्य जान सकता है कि वह है और यह जानना बड़ा
- 36:24बहुमूल्य है कि वह है। यह आपकी जिंदगी को यक सा आनंद में
- 36:30तब्दील कर दे। अमेरिका ईरान पर पिछले 40 वर्षों
- 36:35से कहर डाल रहा था। क्यों कहीं एटम बम न बना दे?
- 36:47बहुत सी रिस्ट्रिक्शन तो लगा दी थी तुमने रशिया जैसमुर्ग पे
- 36:52रिस्ट्रिक्शन लगा दी, यह संसार का विश्व का चौधरी बन के।
- 37:04देखो मैं गुंडा गर्दी करता हूँ और दूसरों से कहूं खबरदार अगर तुमने
- 37:11गुंडा गर्दी की बस यही हाल है। अमेरिका का अमरीका के पास 5000
- 37:18अनुपम है और ईरान से कहता है तुम एक भी मत बनाओ।
- 37:26तुम यूरेनियम को 90% तक प्यूरीफाई न करो।
- 37:35क्या यह न्याय संगत बाधा है अगर तुम अपने एटोमिक पावर प्लांट
- 37:43यूरेनियम से चलाना चाहते हो? तो ईरान क्यों नहीं चलाना चाहता?
- 37:50वो कहता, हमें शक है की तुम परमाणु बम बना लोगे तो बना लोगे
- 37:54तो तुमने तो 5000 बना रखे हैं, इसलिए मैं कहता हूँ अमेरिका दोस्त
- 38:03वहाँ की हवा जाकर बदल जाती है। हिंदुस्तान से लोग जागते हैं, खून
- 38:09का रंग लाल होता है। अमेरिका जा के खून का रंग सफेद वो
- 38:17प्यार नहीं बसता भाई भाई के बीच में जो यहाँ है।
- 38:26यहाँ एक व्यक्ति पर मुसीबत आ जाए, सभी दूर पड़ेंगे।
- 38:31वहाँ कोई किसी को नहीं पूछता, पड़ोसी को पड़ोसी नहीं पूछता
- 38:40रेस्ट्रिक्शन तो लगे बैंड न लगाए। तुम ये नहीं कर सकते, तुम वो नहीं
- 38:46कर सकते। यह हुकुमरान बनना चाहती है और
- 38:52बाबा नानक कहते हैं जो हुकुम करना चाहता है, वह सदा दुखी रहे।
- 38:58कैसे लिए आय? अमेरिका को बता ही नहीं सब कुछ
- 39:03होने के बावजूद भी हम क्यों दुखी यह हुकुम करने की आदत बाबा कहते
- 39:13हैं। जो हुकुम को मानना सीख गया वह
- 39:16सुखी है। क्योंकि बाबा नानक जानते हैं कि
- 39:23वह बलि खस्म को स्वयं प्रत्येक व्यक्ति का है, जिसने इस सृजना का
- 39:32निर्माण किया है पर बाबा नानक ने इसे अपनी नगना को सजा।
- 39:38कबीर ने भी जगह है, मैंने भी जगह है इसलिए हम कह देते हैं तुम कहते
- 39:47कागज की भी और मैं कहता हूँ आंख कैसे मुंगेर होंगे हम?
- 39:56हम कभी नास्तिक नहीं हो पाए। कैसे मुक्के होंगे जब एक बार
- 40:03परमात्मा के दीदार कर लिया। अरे हम तो यहाँ पर ताजमहल को
- 40:10देखकर आ जाते हैं, उसे नहीं भूल पाते।
- 40:13उसे इनकार नहीं कर सकते कि ताजमहल नहीं है।
- 40:18और वह पृमात्मा का विराट स्वर्ण जिसने एक बार निहार लिया वो कैसे
- 40:24बोलेंगे, कैसे इनकार करेगा अगर कोई इनकार करता है मार्क्स चारबाग
- 40:32तो बस मात्र एक ही कहना है। कि उसने देखा वह इतना विराट जैसे
- 40:44अंधों के पास आँखें नहीं होती। रंगों को पहचान नहीं पाती, रंगों
- 40:51को देख नहीं पाती आँखों के बिना। ऐसा ही मसला है नास्तिक और
- 40:59आस्तिक। तुम तुम्हारी बुद्धि के तर्ककों
- 41:04से आस्तिक हो जा क्या? और तुम तुम्हारी बुद्धि के
- 41:09तर्ककों से ही नास्तिक आस्तिक हो जा क्या?
- 41:14और बुद्धि पर मार्क तक पहुँच नहीं सकती।
- 41:17वह इतना विराट गादर में सागर समय आएगा तो प्रथम बात मैंने तो उसे
- 41:33कहा कि जब भी कोई। तुम्हें गाली दे, तुम्हारे मन के
- 41:41हिसाब से व्यवहार ना करे, तुम्हें बुरा लगे और तुम्हारे भीतर आक्रोश
- 41:48एक रोज़ा आएगा। और वह क्रोध याद रखो, भीतर होगा
- 41:56तो बाहर आएगा। अगर आप जैसे क्रिया योग कर करके
- 42:05सारे क्रोध को बाहर निकाल दोगे, काम वासन को बाहर निकाल दोगे।
- 42:14तो फिर तुम्हें क्रोध नहीं आएगा, यह इतना शानदार प्रयोग शंकर भगवान
- 42:23ने दिया है। तुम अगर निरंतर इसका अभ्यास करते
- 42:28रहो, धीरे धीरे क्षय क्षय। तुम्हारा मन जल्दी से फर जाता है।
- 42:35जल्दी ध्यान देना देर आया द दुरुस्त आया कोई बात नहीं देरी से
- 42:43मिल जाए, लेकिन मिल जाए। तुम धीरे धीरे चलते रहे।
- 42:56क्रिया योग करने से तुम्हारी सारी शरीर की बुरुजतियां होगी जो मल
- 43:02मैल भीतर फौरन मटेरियल मटेरियल की तरह या म से और सब बाहर निकल
- 43:09जाएंगे स्वास्थ्य के जरिए। जब तुम एक्सेल करोगे तो वो सब
- 43:15बाहर निकल जाएंगे और उसके अतिरिक्त शरीर तो शुद्ध होगा ही
- 43:27विकार भी धीरे धीरे हटेंगे। क्रोध घट जाएगा, काम घट जाएगा, नौ
- 43:33घट जाए, लोभ घट जाएगा, अन्हूकार घट जाएगा, वह घट जाएगा क्योंकि जो
- 43:42भीतर छिपा पड़ा है वह क्रिया योग की हवा।
- 43:50उस धुल को उड़ाकर तुम्हारे चेतन मन में ले आएगा और यहाँ से वो
- 43:56बाहर कैथल से होगा। उस वक्त तुम घबराने मत।
- 44:02यह कैथल से है। मेरे पास कुछ फ़ोन आ जाते है।
- 44:06बाबा जल्दी करो, फ़ोन उठ। क्या हुआ?
- 44:13बाबा काँप रहा हूँ बस मर जाऊंगा मैंने कहा तू कहाँ बता रहा है तू
- 44:19मरेगा नहीं तो फिर आधा घंटा बाद मेरे को फ़ोन कर दो, यह भय का
- 44:26कहता है उससे। यह तुझे लगता है कि मैं मर
- 44:31जाऊंगा, लेकिन नहीं, ये दबाया हुआ मन का भय है जो बाहर निकलता है,
- 44:39तुमने बहुत कुछ दबा दिया है। वक्त वक्त वह।
- 44:44और उसका तुम्हें पता नहीं है। दबाते वक्त तुम कहाँ पता रखते हो
- 44:54रिएक्शन तुमने दबा दी। सास ने बहू से कुछ कह दिया बहु ने
- 45:04सास से कुछ कह दिया। सास कमजोर है।
- 45:10यह बहुत कमजोर है। निश्चित रूप से वह प्रतिक्रिया
- 45:14नहीं करेगी। दूसरा तुम जानते नहीं कुछ तो फिर
- 45:21तुम दबा लोगे, ये दमन किये हुए बेकार तुम्हारे भीतर जमा पड़े हैं
- 45:27अचेतन के। इसलिए अचेतन इतना भर गया है तुमने
- 45:31दमन बहुत किया है। जिंदगी में दमन की वृद्धि को आज
- 45:38से ही क्या और उसका हल मैं बताता हूँ।
- 45:45जैसे किसी ने गाली निकाली, थूक दिया, बुद्ध की तरह क्रोध बुद्ध
- 45:50को भी आएगा, लेकिन बुद्ध उस क्रोध को साक्षी की तरह निहारते रहेंगे
- 45:56जैसे आसमान में आए हुए बादल। आए हैं।
- 46:02जानते हैं थोड़ी देर ठहरेंगे ये भी जानते हैं और ये भी जानते हैं
- 46:08कि वो चले गए और ऐसा ही होता है रिएक्शन्स आते हैं बुद्ध के अंदर
- 46:17भी महावीर के अंदर भी रिएक्शन्स। लेकिन वह बहुत कंट्रोल्ड व्यक्ति
- 46:25हैं। सही साधना कहते हैं, 1020 बार चूक
- 46:32जाओ तो कोई बात नहीं, लेकिन आगे से संभलकर वाह।
- 46:35ऊंच रहे ना? इसीलिए संतों ने कहा, बीअभब।
- 46:40जागते रहना, होश पूर्वक रहना अगर तुम सो गए तो फिर तुम इन
- 46:49प्रतिक्रियाएं के साथ संलग्न हो जाओगे और वो प्रतिक्रियाएं।
- 46:58जो भी कुछ हो वो अगले के बरस से जाएंगे।
- 47:02फिर वो तो आगे बेहोश है ही, वो दोगुनी शक्ति से तुम्हारे ऊपर
- 47:10प्रहार करेगा। यही गड़बड़ पैदा हो गई बस फिर जेल
- 47:15की कार्य को। छोटी छोटी बातों पर मैंने देखा
- 47:25मेरे ही शहर में दो जमींदार थे, उनकी सांझी जमीन थी।
- 47:39थोड़ी सी वट का फर्क पड़ जा। इतना उसने उसकी वट घेर ली।
- 47:47उसने कहा तू वट क्यों इधर की? वट कहते हैं बाढ़?
- 47:55करता। ये तो मेरी है, वो लड़ते लड़ते
- 48:00बाजार में आ गए। जमींदार के हाथों में हथियार तो
- 48:06होते ही है, गंडासा वगैरह खुरपी वगैरह कुल्हाड़ा वगैरह, क्योंकि
- 48:12इनका काम है वह। धरती को ब्लो करना है, समतल करना
- 48:19है तो बहुत से औजारियों के काम आते तो बाजार में आ गए और बाजार
- 48:28में आए भी। वो लड़ रहे हैं।
- 48:29आपस में देखो इतनी समझ नहीं। के पीछे से ही तुम दो फाड़ हो
- 48:34जाओ, तुम अलग रस्ते निकल जाओ, तुम अलग रस्ते निकल जाओ लेकिन नहीं ये
- 48:41तो फिर हमारी बैस्ती है। घटों की मैं घट्ठे से का घट्ठे
- 48:50लड़ते हो। उनमें 100 के पीछे नहीं भागेगा।
- 48:54पूरा ज़ोर लगा देंगे। किसी के सिंग सूंघ टूट गए।
- 48:58ज्यादा चोट फट आ गई तो भागेगा नहीं तो नहीं भागेगा तो यहाँ भी
- 49:05लड़ने लगे वो कहता देख। वो जमीन मेरी है, इतनी सी जमीन
- 49:13थी, मैं रोज़ जाया करता था, वो कहते ऐसी कैसी तेरी है?
- 49:23वो लड़ पड़े, वही लड़ पड़े। वो कहता है, मैं इसको गार्ड को
- 49:29उठा के अपनी आली तरफ़ कर लूँगा क्योंकि यह मेरी जमी है और दूसरा
- 49:37कहता है तू कर के तू कर वो कहता है अच्छा तू एक है उसने वहाँ।
- 49:46सड़क के ऊपर ही एक लाइन कैच दे ये ले परली पार तेरी जमीन इस बार
- 49:52मेरी जमीन अब तू क्रॉस करके दिखा इस जमीन को वो सड़क है जमीन वहाँ
- 50:00पड़ी यही तो मूर्खता है तुम्हारे। इस जमीन पर कितने नाम मालियों के
- 50:09आए और कितने मिट गए? कितने और आएँगे पीढ़ियां बदलती
- 50:21जाएंगी, मालियों के नाम बदलते जाएंगे।
- 50:29आज से 100 साल पहले एक जमीन मेरे दादा पर दादो की थी, शर्ट दादे का
- 50:37था कारिगांव। आज वो आगे भक्ति, भक्ति, भक्ति
- 50:43पता नहीं कौन से कितने नाम लिखे गए, उस कागज पर जमीन वहीं की वहीं
- 50:50रही जमीन को पता भी नहीं है कि मेरा मालिक बदल गया हो, लेकिन
- 50:57मालिक को पता है। कि मैंने ये जमीन खरीद ली, वह
- 51:02बधाईयाँ देगा, मठिया ही बांटेगा उसे पता नहीं है।
- 51:07अरे मूर्ख 4 दिन की जीत गानी है यह कौन सा साथ जानी है?
- 51:18आज मालिक तू है कल कोई और था, ऐसे ही बदल जाएगा कल को कोई और हो न
- 51:29कारी इतना करकवर जहाँ एक रोज़ फानी है तेरी से आला हो गुजरे न
- 51:37कुछ बाकी निशान। तो जब रिएक्शन भीतर से आए किसी की
- 51:49एक्शन के कारण इसको मौर्य रूप में समझना तो वह आएगा चेतन में।
- 52:00और तुम चीतन में उन विचारों के रिएक्शन के साक्षी बने रहना जैसे
- 52:07ढंग मैंने सिखाया था काम, क्रोध, लोक मो, अहंकार भै।
- 52:19वैसे ही तुम रिएक्शन के साक्षी बने रहना।
- 52:26रिएक्शन को बाहर वाले के ऊपर सामने वाले पर पटक मत देना बस
- 52:31इतना अवेयर रहना अगर तुमने इतनी अवेयरनेस जगा दी तो तुमने।
- 52:40समस्याओं को जीत लिया। फिर तुम्हारे पास कोई समस्या नहीं
- 52:46आएगी। प्रत्येक मनुष्य के लिए मेरा आज
- 52:54का पैना। अगर प्रत्येक मनुष्य छोटा सा काम
- 52:59करना शुरू कर दे तो स्वर्ग कहीं और होता नहीं सचखंठ कहीं होता
- 53:07नहीं और सतलोक कहीं और होता नहीं। सत्यखंड तुम यहीं बना पाओगे,
- 53:19स्वर्ग लोक तुम यहीं बना पाओगे, जीते जी आनंद का नाम सत्यखंड है
- 53:26तुम सत्य के खंड में पहुँच गए, तुम इतने आनंदित हो गए।
- 53:33कि तुम परमात्मा का सुपरगुजार कर रहे हो हे ईश्वर 13,00,000 लक्ष्य
- 53:39पूजा फिर समझा दूं जैसे किसी ने कोई एक्शन किया भीतर से रिएक्शन
- 53:52आएगा, रिएक्शन आएगा तुम्हारे अचेतन से झलके तुम्हारे चेतन में।
- 53:59और विपश्यना सिखाई बुद्ध ने क्या सासों को आते जाते देखना तो उस
- 54:11विचार के जो रिएक्शन भीतर से आए, उसके तुम साक्षी हो रहे हो।
- 54:19रिएक्शन बाहर निकलने की चेष्टा करेगी करने देना तुम स्थिति
- 54:27प्रज्ञा बने रहना जब भगवान कृष्ण कहते हैं ये पार्थ स्थिति प्रज्ञा
- 54:34हो जा। अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जा
- 54:37प्रज्ञा अवेयरनेस विस्डम तुम अपनी विस्डम में आसीन हो जा।
- 54:45तू इतना याद रख कि यह अक्शॅन का रिएक्शन है और मैंने सामने वाले
- 54:53को फेंकना है। बस मैंने सिर्फ साक्ष्य अगर तुम
- 55:02इतना सा काम करो तो ये धरती कल नहीं आज ही स्वर्ग हो जाएगी।
- 55:15फिर संतों की आनंद की सुगंध लेने तुम्हें संतों के पास नहीं जाना
- 55:20पड़ेगा। वही सुगंध तुम्हारे भीतर भी है
- 55:25दिल के आईने में थी तस्वीरें यहाँ दिल के आईने में थी तस्वीरें
- 55:33यहाँ। जब ज़रा गर्दन झुगाई देख ले फिर
- 55:39तुम्हें किसी संत के पास मोहताज नहीं होना पड़ेगा।
- 55:45फिर तुम अपने ही भीतर उतरोगे और उस सोखों को पालोगे, वह परमपिता
- 55:52परमात्मा। तुम्हारे ही घट के भीतर विराजमान
- 55:57है, लेकिन अनंत अनंत जन्मों से तुम उसे बाहर ढूंढ रहे हो कस्तूरी
- 56:07कुंडल बस है मृग ढूंढ है बन माँ। मृग उसको मन में ढूंढता है और
- 56:17हिरण की कस्तूरी कुंटन में होती है।
- 56:22ऐसे घाटों में पीवे है मूर्ख जाने ना?
- 56:27कबीर कहते हैं कि ऐसे ही हमारे इस गढ़े में पिया बैठे।
- 56:34लेकिन मूर्ख व्यक्ति बेहोश व्यक्ति मूर्ख शीत व्यक्ति यह
- 56:41जानता नहीं कि परमात्मा मेरे ही भीतर है परमात्मा के दर्शन करने
- 56:47के लिए हाध्य करता है। तीर्थ करता है।
- 56:51मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च जाता है।
- 56:57कितना मूर्ख है इसकी मूर्खताई का कोई अंत?
- 57:10तुम्हारी ही भीतर बसल है और तुम उसको साथ लेके जाते हो।
- 57:15जहाँ भी जाते हो और ढूंढ़ते हो। मंदिरों की दीवारों के भीतर जो
- 57:22ईंटो, पत्थरों, सीमेंट, सरिया से बनी।
- 57:27अपने भीतर नहीं देखता है, पर चीजें वहीं मिला करती हैं जहाँ
- 57:33हुआ करती हैं। तुम कितना ही खोज लो बाहर से कभी
- 57:38किसी को नहीं मिला और कभी किसी को मिलेगा।
- 57:51रिएक्शन आएगी। तुमने कहा कि आपने रिएक्शन से
- 57:59सुलझने का कोई उपाय नहीं बताया, तुमने बस ये कहा कि रिएक्शन मत
- 58:04करना, बिल्कुल वैसे ही जैसे मैं कहूं कि क्रोध नहीं करना, काम
- 58:09नहीं करना, वह नहीं करना। हैलो मैंने आज साफ कर दिया जैसे
- 58:15एक रोज़ आया और तुम साक्षी हो के जैसे काम आया और तुम साक्षी हो के
- 58:22तुम ठहर जाओ काम की क्या विशाल था कि तुम पर हावी हो।
- 58:30ये तो तुम उत्तेजित होते हो, कुछ तो सुनने वाले बेकार हैं।
- 58:46कुछ महफिल बदरंगी हो गई। दोनों तरफ़ से गलत हो जाती है।
- 58:57ये बाहर से इन अधरंगी औरतों को रोकना चाहिए या फिर इतना ही शोक
- 59:10है तो ये भी उतार दो देखो तुम और सफर।
- 59:17मैं तुम्हें यही कहता हूँ, ईरान के लोगों को तुम असीम से समझ रहे
- 59:23हो लेकिन वो पीएचडी एमए सिंह और देखिए वो मास्टर्स डिग्री आर्ट्स
- 59:31में नहीं लिए हैं। 95% लोग आपको वहाँ के मेडिकल,
- 59:39साइंस, नॉन मेडिकल आर्ट्स वगैरह में नहीं करेंगे।
- 59:47कोई हार्ट सर्जन है, उनके उच्च पौधे पर बैठा हुआ है।
- 59:54कोई ब्रेन सर्जन है बहुतरे तो उसमें डॉक्टर हैं और बहुतरे उनमें
- 1:00:06पीएचडी हैं। तुमने किस्से पंगा ले लिया है
- 1:00:09मिस्टर ट्रंप, इसलिए मैंने उस दिन।
- 1:00:14के उनमें तो को तो लड़ाके वो तो 8 साल तक 8 साल तक ईरान इराक से
- 1:00:22लड़ता रहा। अब हिसाब लगाओ उनके पास कितना
- 1:00:26जज्बा है लड़ने का और तुम थुलथुलसे हो।
- 1:00:31और तुम तो जाते हो एपिस्टीन के आइसोलैंड में यह साधते हैं
- 1:00:37ब्रह्मचर्य परते में अपने आप को रखना ब्रह्मचर्य को साधने में
- 1:00:44सहयोग करता है, अपने आप को उगाड़ा कर देना।
- 1:00:50आपकी काम भाषण को उत्तेजित करता है, सुसभ्याचारिक रोग हैं,
- 1:00:59इन्होंने साधन किया है अपने आप ये मर्यादित लोग हैं जो मर्यादा में
- 1:01:05बंधे हुए लोग हैं, इन्हें असीकृत मत समझना।
- 1:01:10हमारे मूर्खों ने अनपढ़ो ने अशिक्षितों ने मंदिर बनाये,
- 1:01:17इन्होंने विश्वविद्यालय बनाये, हमने हिन्दू मुस्लिम को लड़ाया।
- 1:01:32इन्होंने आप उस में प्यार मांगा है।
- 1:01:38एक तरफ बात तो सबके भीतर होती है लेकिन बात तो ये है।
- 1:01:48हिंदू धर्म क्यों मार खा गया? हिंदुस्तान क्यों गुलाम रहा
- 1:01:53क्योंकि इसने एक कोम को अलग कर दिया, शुद्र कोम को अलग कर दिया।
- 1:02:01वैश्य कोम को अपने से नीचे माना। शूद्र कौन को इसने अपने से नीचा
- 1:02:07माना लेकिन साथ ले लिया तो आंधी जनता कट गई।
- 1:02:12जब किसी ने आक्रमण किया तो आंधी जनता कहती है हमें क्या है?
- 1:02:18ये तो ब्राह्मणों के पुरवा है और हम हार गए।
- 1:02:26हमारी वाइफ वेकेशन का हमें यह इनाम मिला।
- 1:02:32तुम आज तक सोच सोच कर हार गए कि आखिर हम गुलाम हुए क्यों?
- 1:02:38गुलाम हम ऐसे हुए हमने आंधी जनता को काट दिया।
- 1:02:44कि तुम तो शूद्र हो, तुम तो अछूत हो तुम तो त्यागी हो वो क्यों
- 1:02:51लड़ेंगे हमारे लिए? और हम लड़ने भी नहीं देंगे।
- 1:02:55हम अपनी तलवार को उनकी छाया भी नहीं बढ़ने देंगे।
- 1:03:01तो फिर वो लड़ेंगे क्यों? और वो भी डर सकते हैं अच्छे से
- 1:03:05क्योंकि वो हार्ड वर्कर है। पंडित तो हराम की खाता है, मंत्र
- 1:03:12पड़ता है और आग में घी को जलाता है।
- 1:03:17व्यर्थ है सब। जब तुम परमात्मा को जानते ही नहीं
- 1:03:22तो इन हवन कर्मकांडों में फायदा क्या है?
- 1:03:25तुम जानते हो कुछ अपने भीतर झांक के देखना तुम्हें पता है कि
- 1:03:30परमात्मा नाम की कोई चीज़ होती है।
- 1:03:33नहीं पता मैं जानता हूँ। तो हमारा देश इसलिये गुलाम हुआ कि
- 1:03:44हमने जातियों में विभक्त कर दिया। हमने एक पोर्शन को काट दिया हम
- 1:03:48अपना एक हाथ काट क्या खाक लड़ेंगे, एक हाथ से क्या लड़ेंगे?
- 1:03:56हमने आधा शरीर काट दिया। व्यस्यों को हमने अपने से कम
- 1:04:00समझा, सूत्रों को हमने कम समझा, हम बैठे ग्रंथों को पढ़ते रहे, वो
- 1:04:14बैठे केमिस्ट्री और फिजिक्स की बॉटनी ज्यादा चीज़ की किताबें
- 1:04:18पढ़ते रहे। उन्होंने बड़े बड़े रिसर्च सेंटर
- 1:04:25खोले। हमने मंत्रों में गूंघल लटका
- 1:04:31दिया। फिर मुझे ये बताओ यह जो देश।
- 1:04:41एक वक्त विराट था महंत विशव गुरु था तो विशव गुरु की पदवी से नीचे
- 1:04:51कौन दोष लेके आया तुम बांटने वाले लोगों में?
- 1:05:01विश्व गुरु की उपाधि छीन ली और आज हम लाचार बेजार हैं।
- 1:05:08आज हम कर तो कुछ नहीं सकते, सिर्फ दूसरों की तरक्की को देख नहीं
- 1:05:13सकते। बस आज हम मलाल कर सकते हैं मन
- 1:05:19में। किसी दिन हम फखर भी कर सकते थे।
- 1:05:26किसी दिन हमारे घरों में सोने चांदी के ढेर लगे रहते थे।
- 1:05:30सिखों के जब फयान यहाँ पर आया चाइना का।
- 1:05:38और इसी चाइना में जब जाकर बताया होगा कि हिंदुस्तान बड़ा वीर है।
- 1:05:47इसके हर घर में जहाँ जाते हैं वहाँ दूधदही की नदियां बहती हैं।
- 1:05:54अतिथि सत्कार बहुत है। और उसने ऐसा सत्कार किसी मुल्क
- 1:06:05में पाया नहीं। उसने जाकर चैन में बताया, अरे तुम
- 1:06:12क्या समझते हो अपने मुल्क को जाके भारत में सीखो, हिंदुस्तान में
- 1:06:18सीखो? हर घर में वह ढेरों से सिक्के पड़
- 1:06:25गए इसलिए माउस से तो यहाँ पर आए उसने जवाहरलाल ने बाकड़ा डैम
- 1:06:39दिखाया। साइना उस वक्त हमसे बहुत तरक्की
- 1:06:48में निश्चित और वाखडा डैम को देखते ही उसकी आंखें ठहर।
- 1:06:57उसने क्षत्रे कट। इकट्ठे किए और हमारे से मित्रता
- 1:07:04डाली। मुझे याद है वो दिन हिंदी, चीनी
- 1:07:09भाई भाई के नारे लगते थे। हमारी कलियों मित्र द्रोह किया।
- 1:07:18उसने हथियार इकट्ठे किए। हम ताजा ताजा आजाद हुए थे।
- 1:07:221015 साल कोई नहीं होते। तरक्की के लिए कहाँ विकास हुआ है?
- 1:07:301215 सालों में क्या विकास हुआ? तुम बता दो, जवाहरलाल ने तो नहीं
- 1:07:36किया तुमने क्या किया? सब झूठ, पाखंड, तूफान, कफर सब
- 1:07:48गुंडा, घर पे पाप कर लिए, उसमें वक्त खराब किया फिर पाप उखड़ ना
- 1:07:59जाए। उसके लिए पैसा बर्बाद किया।
- 1:08:03ये व्यश्ययी रख लिंग चिल्लाने के लिए उखड़ ना जाए सब तर की बेटी
- 1:08:13लेकिन कभी कोई छुपा रहा आज नहीं कल उखड़ जाएगा।
- 1:08:19क्यों नहीं जुर्रत होती एक व्यक्ति के मुँह पर रोई।
- 1:08:22थूकता है सुभ्रमनम यह है चार के साथ एक को छोड़ के इसलिए आया इसकी
- 1:08:33तमन्ना विराट। और एक तो उसमें से मंत्री भी बन
- 1:08:40गई थी। अब जो व्यक्ति सरेआम इसी की
- 1:08:42पार्टी का कह रहा है, यह गंगा है या बहरा है?
- 1:08:48हमारे प्राइम मिनिस्टर मिस्टर नरेंद्र मोदी के बारे में बात कर
- 1:08:52रहा हूँ, तुम कहीं ऐसा न कह दो हैं।
- 1:08:56तुम तो किसी और की बात कर रहे थे नहीं, मैं तुम्हारी बात कर रहा
- 1:09:00हूँ। यह कहता है तो इसको जवाब क्यों
- 1:09:06नहीं देते भी बताओ कौन है वो? लेकिन साइलेंट इस हाफ कंसेंट चुप
- 1:09:17रहना आंधी सहमति होती है। साइलैंड इस हाफ कंसेंट तो तुम
- 1:09:26जवाब नहीं देते। इसका साफ मतलब है कि तुम स्वीकार
- 1:09:30करते हो। जवाब है ही नहीं तुम्हारे पास।
- 1:09:33आप हो तो तुम मुँह के ऊपर ठोक के भाग ले गई कह रे क्या बात करता है
- 1:09:39तू मैं तेरे ऊपर मान हनी करूँगा तुम अदालत जाओ, दंड मत दो एडी
- 1:09:49सीबीआइ मत भेजो। तुम अदालत जाओ, मान हानि करो,
- 1:09:54इसके ऊपर तुम सर्वोच्च देश के नेता हो, लेकिन नहीं क्योंकि जनाब
- 1:10:02ने ये किया कहीं एक्टिविस्ट ना हो।
- 1:10:11अब देखो एक व्यक्ति क्या कुछ करेगा बात ठीक है तथा एक अकेला सो
- 1:10:15ऊपर भारत सो व्यक्तियों को दबाने में लगा है कोई उधर से उखड़ जाती
- 1:10:23है लूप और लूप होर कोई उधर से उखड़ जाती है।
- 1:10:29किस किस को दबायेगा बेचारा अथरा में पार्लियामेंट सदन में आना ही
- 1:10:34छोड़ दिया कहता जी स्त्रियाँ मुझे काट लेंगी, मैंने कहा भाई किस्से
- 1:10:43काट लेंगी, कहता इनके पास दांत है ना मैंने कभी देखो स्त्री हो।
- 1:10:49दांत बाहर रख के आया ये दांत उखड़वा लो, नए मसूड़े लगवा लो।
- 1:10:58जब सदन में प्रवेश करो तो मसूड़े बाहर निकाल के आया।
- 1:11:03ये मोदी जी का फरमान। अब क्या करें?
- 1:11:09इसका चंद्रभान के स्टेशन लगती नहीं है।
- 1:11:21काफी मुँह को छूटती नहीं है, काफी मुँह को लगी हुई है, अभी छोड़ता
- 1:11:27भी नहीं करती। कुछ इधर उधर के शब्द बाग दिखाकर
- 1:11:34पहली बार आया था तब का क्यों जंड लगा है?
- 1:11:38छोड़ने का नाम? छूटती नहीं है काफी अब ऐसा स्वाद
- 1:11:49आया बैठने का आह ये बढ़िया। बड़े बड़े लोगों से मिलो तेल का
- 1:12:00मुफ्त का है जहाज है जहा चाहे घूमो, तो क्या तुम घूमने ही आये
- 1:12:08थे फिर घूम ही रहे हो अच्छी तरह से?
- 1:12:12अरे भाई यहाँ पर रोजगार कौन देगा? महंगाई के बारे में कौन सोचेगा?
- 1:12:23यहाँ की व्यवस्था कौन बनाएगा? तुम तो हर किसी के पांव पढ़ जाते
- 1:12:31हो, तुम तो हर किसी के साथ झुला झूलने लग जाते हो, तो माउस से तुम
- 1:12:35कमाने चला गया। उसने कहा भाई ये तो काम गलत है।
- 1:12:42उसने हिंदी चीनी भाई भाई का नारा लेकर युद्ध छेड़ दिया।
- 1:12:47हमारे पास कोई दिया। हारमना तय था भाई मित्र घास हो
- 1:12:54जाए कितने लोग मरे शिवाजी मरिटा मरा गुरु गोबिंद सिंह हो रहे की
- 1:13:01नहीं मरे क्यों मित्र घास? पता ही नहीं लगा कि यह पीठ में
- 1:13:13छुरा घोंप देगा। ये मित्र हाथ करने वाला व्यक्ति
- 1:13:18हिंदी चीनी भाई भाई का नारा देख के तुम इतिहास भूल गए, याद होगा
- 1:13:22इन्हें सब। जानबूझ कर पागल बने फटते हैं।
- 1:13:29उन्होंने आक्रमण कर दिया। हार तय थी, हमारे पास कोई तैयारी
- 1:13:34ही नहीं थी। यहाँ से हाथ मिला के गए हैं, गले
- 1:13:38मिल के गए हैं। आते ही उन्हें आक्रमण कर दिया।
- 1:13:43बर्फीली जमीनों पर लड़ने वाली हमारे पास सेना इतने तैयार नहीं
- 1:13:48थी, ना ही हथियार थे हमारे पास। उसके बाद जवाहर लाल को अकल आई के
- 1:13:59घर भी संवारना होता है और बाहर से भी सुरक्षा करना।
- 1:14:08फिर उन्होंने बाहर की सुरक्षा का इंतजाम करना शुरू किया।
- 1:14:19कोई कुछ कहे रिएक्शन करे तो मैं भीतर से रिएक्शन आयेगी।
- 1:14:23बुद्ध के भी आती है लेकिन वो रिएक्शन।
- 1:14:29आती है वैसे ही जैसे काम, क्रोध लोग मो।
- 1:14:33अंकार मत मस्त बह ये आते हैं यहाँ चेतन में खड़े रहते हैं बादलों की
- 1:14:41तरह। और संत पुरुषों को निहारते रहते
- 1:14:46हैं, उनका कोई बेहतर का केमिकल प्रोसेसर वगैरह अलग नहीं होता है।
- 1:14:51सबका एक होता है। उनका ब्लड प्रेशर देख लोगे वहीं
- 1:14:56मिलेगा 120, 80 या 110 70। खून से पहचानी की जा सकती है कि
- 1:15:07ये आदमी एनलाइटन है आर नॉन एनलाइटन तो जो भी कुछ विकार आए जो
- 1:15:17तुम्हारी ज़िन्दगी में उत्पल पात मचा दे।
- 1:15:21उसके लिए यही फॉर्मूला खैर, तुम बहुत गए, कुछ ना मैं बताना भूल
- 1:15:29गया। जब भी कोई ऐसा काम हो ना हो जो
- 1:15:37उत्पाद मचा दे तो तुम साक्षी बने रहना।
- 1:15:42वह है तो शक्ति। यह जो रिएक्शन तुम करते हो, यह
- 1:15:52ऊर्जा है अगर इस ऊर्जा के साक्षी हो गए।
- 1:15:58जैसे काम की, क्रोध की, लोभ की, मोह के, अंकार की, वह की मधुमक्तर
- 1:16:03की ऊर्जा के साक्षी हुए थे, वैसे ही अगर तुम इसके रिएक्शन के
- 1:16:10साक्षी हो गए तो यह रिएक्शन थोड़ी से ठहरेगा तो मत भाग जाना वहाँ
- 1:16:17से। तुम भी ठहरे रहना उम्म, साक्षी
- 1:16:22बने ही रहना, इसीलिए विपश्यना का ध्यान तुम शुरू कर सकते हो ताकि
- 1:16:28तुम्हें साक्षी साधना आ जाए। साक्षी को साधोगे।
- 1:16:38तो तुम विचारों के ऊपर विजय प्राप्त करने के योग?
- 1:16:44फिर उसके बाद तो कुछ विशेष बचता। जैसे ही तुम विपश्यना में कामयाब
- 1:16:51हो गए, देखने में तो महारत हासिल कर गए।
- 1:16:57तुम पक्ष होने में निशाना हो गए तो फिर उस बनाए हुए साक्षी को तुम
- 1:17:04छोड़ तो जब चाहो फिर तुमने उस अपने बनाए हुए कृत्रिम साक्षी को
- 1:17:12अपने भीतर छोड़ देना है। उस अस्तित्व में जो कि तुम वास्तव
- 1:17:18में हो जो अस्तित्व में तुम सारे अस्तित्व में मौजूद हो, तुम उसमें
- 1:17:29घर जाओगे। और उसके साथ एक आभार हो जाऊंगा।
- 1:17:34मैं यही कह रहा हूँ कि बुद्ध ने ये काम नहीं किया।
- 1:17:40उस नकली साक्षी को छोड़ कर देख तो क्या हो गया?
- 1:17:47अगर वो छोड़ देते तो भ्रम में गिर जाते।
- 1:17:52और वहाँ जाकर जो शब्द बोलते हैं, वो आपको दीपो भाव नहीं बोलते।
- 1:17:58बुद्ध अगर वहाँ पर शाक्षितों को छोड़ देते तो वह अपने अस्तित्व
- 1:18:04में गिर जाते। एग्ज़िस्टन्स में घर जाते और वहाँ
- 1:18:07जाकर वो ये नहीं कहते थे आपको दीपो भाव तो क्या कहें।
- 1:18:12वहाँ जाकर वो कहते, अहम ब्रह्मस्व मैं ब्रह्म इतना फर्क पड़ जाता
- 1:18:21है, बस यही बात है जो समझाने वाली रह गई अब।
- 1:18:33लेकिन सम्पूर्ण नहीं जाग्यपाल के सम्पूर्ण कृषिक, सम्पूर्ण नानक और
- 1:18:43कबीर सम्पूर्ण है, बुद्धपूर्ण है सम्पूर्ण।
- 1:18:53बुद्धि युक्तों जहा तिह उभे सुकृत दुष्कृत्य बुद्धि से युक्त मनुष्य
- 1:19:06यहाँ। कृष्ण के शब्द इन पाखंडियों की
- 1:19:16ऐसी खाल उदाड़ते हैं, बशर्ते के इनके शब्दों को जानने वाला कोई।
- 1:19:28बुद्धि से युक्त मनुष्य यहाँ वह नहीं स्वर्ग में नहीं, सच खंड में
- 1:19:38नहीं, सतलोक में नहीं ध्यान से समझना एक एक शब्द बड़ा कांती है।
- 1:19:50बुद्धियुक्तों जहातिह को वे सुकृत दुष्कृत्य समता से युक्त मनुष्य
- 1:20:08यहाँ। पुण्य और पाप से परे हो जाता है
- 1:20:16ना वह पुण्य के साथ लगता है ना वह पाप के साथ लगता है।
- 1:20:25हमारे अंतःस्थल की यही व्यर्थ है। हमारा अस्तित्व हमारा अंतःस्थल
- 1:20:36ऐसा ही होता है ना वहाँ पाक जाता और वहाँ पुण्य भी नहीं जाता।
- 1:20:45अगर जीते जी व्यक्ति ऐसा हो जाता है, तुम क्या समझते हो?
- 1:20:51कृष्ण ने कोई ऐसा काम सिखाया जब तुम मर के कर पाओगे?
- 1:20:59नहीं, यह तो फखंडी लोग कहते हैं। तो मरकर सचखंड जाओगे तो मरकर
- 1:21:05सतलोक जाओगे तो मरकर स्वर्ग जाओगे, यह तो व्यापारी लोग कहते
- 1:21:10हैं लोही लोग कहते हैं लालची लोग कहते हैं मरकर कोई स्वर्ग और कोई
- 1:21:19सचखंड और सतलोक नहीं। इस शब्द को अच्छी तरह से समझो।
- 1:21:26यहीं यहीं यहीं ईह इसी का मतलब जहाँ जीवत अवस्था में इसलिए संतो
- 1:21:36ने कहा मर्जी बड़ा हो जाए मरना है।
- 1:21:42लेकिन जीते जी मर जाओ मरो है जोगी मरो मरो मरण है अभी ऐसे मरने मरो
- 1:21:54जिससे मरने मरगो और घटी जैसे हम जीते जीते रोजे स्नान करते हैं।
- 1:22:02पर अपने वस्त्र बदल लेता है। बस ऐसे ही भगवान कृष्ण कहते हैं
- 1:22:09तुम्हारा जीवन भी वस्त्रों को बदलना ही है।
- 1:22:15तुम एक गर्भ से दूसरे गर्भ में चले जाते हो, जाने एक वस्त्र को
- 1:22:21छोड़कर दूसरे वस्त्र डाल लेते हो। वंश जिरणानि यथा विहार नवानि
- 1:22:28ग्रहणति नरपराण तथा श्री रानी विहार।
- 1:22:33घृणा अनन्या यानी सैया की नवानी के कृष्ण भगवान कहते हैं, यही यही
- 1:22:44मिलेगा, तुम दुख भी यहाँ भोगते हो, लेकिन पंडितों ने तो दुख
- 1:22:51भोगने के लिए विन्नर खोला। फिर यहाँ हॉस्पिटल के अंदर जो
- 1:22:59वर्षों वर्षों तक लोग सुइयां लगाई, ऑक्सीजन लगाई वेंटिलेटर के
- 1:23:06ऊपर सड़े गले पड़े रहते हैं। वो कौनसे नरक हैं?
- 1:23:17लेकिन यह पाखंडियों के लादेचियों की बात है।
- 1:23:23अगर नरक ऊपर होता तो दो बार एक चीज़ का भुगतान नहीं होता।
- 1:23:28एक कर्म का भुगतान एक बार होता है।
- 1:23:31या तो यहाँ भोग लो या फिर यहाँ नहीं भोग तो वहाँ भोग लो लेकिन
- 1:23:38परमात्मा ने यहीं इसी सृष्टि पर भोगने की व्यवस्था की है।
- 1:23:43जहाँ कर्म करोगे उसी भूमि के ऊपर भोग भोगो।
- 1:23:48तुम यहाँ गुनाह करते हो, हत्या करते हो यहीं पर कैद किए जाते हो
- 1:23:52जेल में या कोई नरक में जाके जेल है नहीं तुम्हारे पंडितों ने
- 1:24:01तुम्हें गुमराह किए हैं तुम्हारे आचार्यों ने तुम्हारे
- 1:24:04मार्गदर्शकों ने तुम्हारे डेरा बाद में।
- 1:24:08गुमराह किया है। बुद्धि युक्तो जातिह उभे सुकृत
- 1:24:12दुष्कृत्य तस्मध्योग युजस्य योगः कर्मशु पोषणम कर्मों में कुशल हो
- 1:24:25जा। कर्मों में कुशल कैसे हो जाए?
- 1:24:34दुख और सुख दो चीजों से पार हो जाएं, इनको क्रॉस कर ले।
- 1:24:46ये बुद्धि में सुख भी है और दुख भी है।
- 1:24:51ये हृदय में सुख भी है और दुख भी है।
- 1:24:55किसी ने गाली निकाल दी तो बुद्धि दुखी हो गयी।
- 1:24:59किसी ने प्रशंसा कर दी तो बुद्धि सुखी हो गयी।
- 1:25:05ना तुम्हें ये पता कि तुम अच्छे हो ना तुम्हें ये पता कि तुम बुरे
- 1:25:09हो यही कृषण कहते हैं तुम ना अच्छे हो तुम ना बुरे हो तुम
- 1:25:15मात्र आनंद हो तुम हो और तुम आनंद हो ना अच्छे हो ना बुरे हो।
- 1:25:28आज का सवाल यही समाप्त होता है बाहर कहीं नहीं है, ना सचखंड बाहर
- 1:25:38है, ना स्वर्ग बाहर है, ना नरक बाहर है?
- 1:25:41यहीं का किया हुआ कर्म यहीं पर कोपना होता है और दूसरी कोई
- 1:25:46व्यवस्था भगवान ने बनाई है। श्री कृष्ण गोब्वे।
- 1:25:59हरे मुरारी दे नाच नरायन वासुदेव। श्री कृष्ण गोविंद, हरे मलावी हे
- 1:26:25नाथ नारा यन वासुदेव वा श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी।
- 1:26:37हेनाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी, सगा हमारे पितुमात।
- 1:26:55स्वामी सथा हमार केनाथ नारायण वासुदेव।
- 1:27:13श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव, श्री कृष्ण
- 1:27:26गोविंद हरे मुरारी ए नाथ नारा।