Latest / Baba ji Vijay Vats / 31 Oct 25 - नक्षत्रों का ज्ञान! जीवन से मृत्यु तक का चक्र! अध्यात्म और आकाशीय स्थितियों का संबंध! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:01श्यामा चरण बाबा जी चरसपर्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण पशु जो
- 0:21आध्यात्मिकता। उस्तार्स के साथ जुड़ा है खौगोलीय
- 0:33घटनाओं के साथ आकाशीय स्थितियों के साथ।
- 0:44भी जुड़ा हुआ है। कृपया इस गुंडे को निकालने की
- 0:50चेष्टा करें। मैं जैनी हूँ।
- 1:01भगवान महावीर ने स्वाति नक्षत्र का क्यों इंतजार किया?
- 1:13आज की रात उन्होंने प्राण जागें। और प्राण त्यागते हुए उन्होंने
- 1:26स्वाति नक्षत्र को क्यों अति मान दिया?
- 1:31क्यों चुना बहुत महत्वपूर्ण स्वाद?
- 1:39शायद आज तक किसी ने कुछ नहीं होगा।
- 1:46आज तुमने प्रथम बार पूछा इसका उत्तर बड़ी क्रांतिकारी मिलेगा
- 1:52तुम्हें जो जाग के मरा। जो खुद से मरा जो अवेयरनेस में
- 2:08मरा, वह अपने मरने की तिथि, नक्षत्र, काल, सच लेख।
- 2:24बड़ा गहरा विषय है। प्रत्येक व्यक्ति थोड़ा होशियारी
- 2:30से सुनें और खासतौर से जो व्यक्ति, ग्रह, नक्षत्र, तिथियों,
- 2:41महीनों। में विश्वास करते हैं, वो तो अब
- 2:46शीश का सुने बड़ा लाभप्रद रहेगा उनके लिए, क्योंकि ऐसे प्रश्न
- 2:54रोज़ ना तो कुछ नहीं आते और ना ही बताने वाला कोई होता है।
- 3:07मैंने आपसे पहले भी कहा है आपके प्रश्न का जो जवाब देगा दट।
- 3:14इस नॉट कोइंकिडेंटल वह सत्य के धरातल पर सही होगा।
- 3:25तो आइए। हम इस प्रश्न का समर्थन करते हैं।
- 3:32भगवान महावीर के त्यागते हैं नक्षत्र गृहस्थ और यह भी ध्यान
- 3:47रखिएगा। हस्त नक्षत्र में प्राणाया की।
- 3:54उन्होंने शिष्यों से पूछा, वैसे ये कहानी मैं आगे भी बहुत बार
- 3:59सुना चुका हूँ। उन्होंने शिष्यों से पूछा।
- 4:07कौन सा नक्षत्र चल रहा है? शिशु नगर गुरुदेव हस्त नक्षत्र चल
- 4:17रहा है तो फिर ठहरना पड़ेगा। यही जागृत वर्ष की निशान में।
- 4:35तुम बड़ी अजीबो गरीब निशानियां बताती जा, लेकिन एक अति
- 4:44महत्वपूर्ण जानकारी नहीं। सत्य तथ्य मैं तुम्हें बताऊँ।
- 4:52जीतने भी जागृत पुरुष आज तक हुए हैं।
- 4:57एक ही बात नहीं करता हूँ। जीतने भी जागृत पुरुष आज तक हुए
- 5:03हैं और जिन्होंने। इस ईश्वरीय संग रचना को देखा है
- 5:17जाना है। उन्होंने ग्रह, नक्षत्र, तिथि सब
- 5:22चुना है। महागठबंधन से हस्त नक्षत्र में
- 5:29गर्पण छोड़ेंगे। तो बड़ी तकलीफ आएंगी।
- 5:36शरीर छोड़ने के बाद भी बड़ी बाधाएं होती हैं, ये तुम्हें किसी
- 5:42ने बताया ही नहीं होगा। प्रसंग बड़ा लंबा चौड़ा है इसलिए
- 5:49आज अभी मैं उसका जिक्र नहीं कर सकता।
- 5:56भगवान ने पूछा पुत्र कौन सा नक्षत्र चढ़ रहा है?
- 6:09नेखा भगवान नक्षत्र खास्त्र चढ़ रहा है।
- 6:16फर्स्ट में अच्छा बता देना मुझे जब स्वाति नक्षत्र शुरू हो जाए,
- 6:29आज की ही रात थी। चतुर्दशी और अमावस्या की
- 6:39मध्यरात्रि चतुर्दशी और अमावस्या की मध्यरात्रि।
- 6:54उससे नक्षत्राय, स्वाति और महावीर बौद्ध व्यक्ति महावीर उस स्तर तक
- 7:13पहुँच गए। जीस स्तर तक कृष्ण पहुँच हराम
- 7:19पहुँच। वो तो उस स्तर पर नहीं पहुंचे
- 7:26लेकिन मैं आपसे बहुत बार कहता हूँ वो तो वो तल देर से रोक लिया
- 7:37तथ्यातु के बातों में चले जो तथ्य कम और सत्य यादव है।
- 7:47शिष्य ने कहा स्वाति नक्षत्र स्वाति नक्षत्र की ओर बड़ी महिमा
- 8:02थोड़ी सी महमत में बता दूँ। संक्षेप स्वाति नक्षत्र में अगर
- 8:11तुम ध्यान में जाओगे। तो वो ध्यान 1000 गुणों से ज्यादा
- 8:24ये गुण्डी को अच्छी तरह से संघ लेना है तो ये गणित आकाशीय
- 8:34ब्रम्हंडईय गणना लेकिन है शक्ति परमात्मा की बनाई अगर तुम स्वाती
- 8:45नक्षत्र में ध्यान में अगर तो आम दिनों से 1000 गुणा ज्यादा आपके
- 8:54जान में तरक्की होगी। कॉन्शसनेस लेवल आपका 1000 गुण
- 8:58ज्यादा बढ़ेगा। यह स्वाति नक्षत्र के मेहमान यह
- 9:09मत पूछिएगा कि परमात्मा ने ऐसा क्यों बनाया?
- 9:14मेरे पास इसका जवाब नहीं है। कदली शीप बजंग मुख स्वाति एक गुण
- 9:22तीन स्वाति नक्षत्र में अगर चोर बनना चाहोगे तो 1000 गुना चोरी
- 9:30बढ़ जाएगी। स्वाति नक्षत्र में अगर तुम।
- 9:38ध्यान करो तो ध्यान 1000 गुणा कर जाएगा।
- 9:44स्वाति नक्षत्र में अगर पाप करोगे, पाप 1000 गुणा ज्यादा
- 9:54तुम्हें संस्कृत करेगा संस्कार इतने डीप हो जाएंगे तुम कभी सोच
- 10:00भी नहीं सकते। इसलिए स्वाति नक्षत्र में कोई भी
- 10:07काम करो, स्वाति नक्षत्र में गृह प्रवेश का स्वाति नक्षत्र में नया
- 10:18कारोबार। ये नई बात बता रहा हूँ आकाशीय
- 10:27गणनाओं से अतिरिक्त जो आपके पंडितों को पता है करोड़ों की
- 10:37भीड़ हो सकती है उनके कुछ। लेकिन जिसके पास अनुभव नहीं उसके
- 10:48साथ सारे ब्राह्मण भी उसका अनुकरण करें तो भी कुछ नहीं होता।
- 10:54अनुभव जिसके पास है उसको चाहे कोई भी अनुकरण ना करे, खुद में ही
- 11:00मस्त है। कदली शी पबजंग मुख स्वाति एक
- 11:08गुणतीं संत कहते हैं और हिम का दोहा है।
- 11:24स्वाति नक्षत्र में रात्रि को एक बहुत कहते हैं आसमान अगर वो केले
- 11:33के फल में पड़ जाए तो मीठा का केला बन जाता है।
- 11:41सी में पड़ जाए। तो मोती बन जाता और साँप के मुख
- 11:50में पड़ जाए तो जहर बन जाता। इसका एक मंत्र था।
- 12:00तुम अगर ध्यान में बैठोगे तो 1000 गुणा ध्यान ज्यादा फली तुम्हारा
- 12:05बड़ा मन लगेगा दुष्टता की तरफ अगर तुम अग्रसर हो गए तो दुष्टता का
- 12:16तुम्हारे भीतर संस्कार हजारों गुणा बढ़।
- 12:23स्वाति नक्षत्र रशांत अपने बच्चों को इस वेला में शुभ गुणों से
- 12:32युक्त करना है। पंचांग से देख लेना।
- 12:41किसी अलोभी शास्त्रज्ञ से पूछ लेना वेहाब को से ही आंकड़ा निकाल
- 12:49देगा। स्वाति नक्षत्र कब तक है?
- 12:56कदरी शीप भजन का मुख्य सती एक गुणतीं जैसी संकल्प बैठिए।
- 13:02पैसों ही फलते यह एक शक्कर है जिसे पूरा करना चाहती हैं
- 13:15जाग्रपुश नक्षत्रों का। तथ्यों का एक ऐसा चक्र मैं जानकर
- 13:26बड़ी हैरानी हो क्योंकि ये राज़ कवि के सीने खोल रहे है।
- 13:35संत पुरुष जागृत पुरुष अवैध पर्सन, ज़िन्दगी और मौत का।
- 13:44एक कीचक्र बैलेंस करना चाहते हैं और जानते हैं कीचक्र पूरा होना
- 13:51अवश्य हाँ जी हम थोड़ा और आगे चले भगवान महावीर का जन्म।
- 14:04स्वाती नक्षत्र में हुआ था पर वो अच्छी तरह से बाखूबी जानते थे के
- 14:17मुझे स्वाती नक्षत्र में ही प्राण त्याग कर और वो प्राण त्याग कर
- 14:22सकते थे, अपनी मर्जी से। सुनते जाना आराम से बड़े काम के
- 14:33बाद तो उन्होंने स्वाति नक्षत्र पर चुना अपने शिष्यों से कहा बदला
- 14:44देना। जब स्वाति नक्षत्र शुरू हो जाए,
- 14:49चतवदर्शी और अमावस्या की अर्ध रात्रि को स्वाति नक्षत्र शुरू हो
- 14:56जाए, उन्होंने प्राण तप किया। इसलिए अगर तुम जैन ग्रंथ में
- 15:13दिखोगे उनके केवल लिखा महापरिनिर्वाण का जो वक्त मिलेगा
- 15:26वह मिलेगा दीपावली से पहले की रात।
- 15:29चतुर्दशी और दीपावली की मध्य रात्रि अमावस्या और चतुर्दशी के
- 15:36मध्य रात्रि। लेकिन शायद नक्षत्र का ज़िक्र न
- 15:42हो लेकिन यहाँ नक्षत्र बड़ा मुख्य है।
- 15:47जिसका इंतजार किया। वह कोई दमदार कारणों ऐसे थोड़ी
- 15:59इंतजार कर सकते हैं। जैसे ही खाती आया, वृक्ष के
- 16:15किनारे बैठे पीठ लगा ली, आराम से बैठ गए, आंखें बंद कर लीं और देह
- 16:23त्यागकर। आपने पूछा पुत्र के क्यों किया
- 16:36देह त्याग? इसलिए क्या एक चक्कर पूरा हो गया?
- 16:39स्वाति में जन्म स्वाति में ही अंत हुआ।
- 16:48एक जीवन का आखिरी चक्र पूरा हो गया।
- 16:50इसके बाद कोई चक्र जीवन चक्र की लीला को पूरा करना है।
- 17:07आइए थोड़ा आगे चले। आइए कृष्ण का जन्म अष्टक रोहणी
- 17:27नक्षत्र को महिना था भद्रपद। उन्होंने भी प्राण त्यागा और यह
- 17:41तो मैंने पहले भी कहा एक वीडियो में ये हम स्टोन्स डाले होते हैं।
- 17:46ना तुम हमसे पूछ लेते हो, हम आपसे कुछ जखाई नहीं मारते।
- 17:53मैं तो अक्सर कह देता हूँ मेरे फर्क के थोड़ा लेकिन इसके बड़े
- 17:59बेहद कारण होते हैं भगवान राम भगवान कृष्ण।
- 18:10यहाँ तक कि महावीर उनके हाथों में तुम रत्न डाले हुए देखो गए खुद ने
- 18:20डालते थे, क्योंकि बुद्ध इन चीजों को मारते हैं।
- 18:29अगर सत्य को माना न जाए तो वह भी असत्य ही हो जाया करता है, उसके
- 18:36लिए सार्वभौमिक असत्य नहीं होता, लेकिन उस व्यक्ति के लिए असत्य हो
- 18:44जाते हैं। कृष्ण जन्मे और रोहणीय नक्षत्र
- 18:48में। और कृष्ण जन्मे अष्टमी तिथि
- 18:57स्वाति नक्षत्र में जन्मे महावीर स्वाति नक्षत्र में चक्र पूरा कर
- 19:02दिया। नक्षत्रों का एक बहुत बड़ा चक्र
- 19:12जीसको अभिमान दिया। ब्रम्डीय घटनाओं ने और ज्योतिषीय
- 19:22घटनाएं जिन्हें आज सिर्फ एक आंकड़ा बनाकर लिख देती हैं,
- 19:28तथ्यों का कुछ पता नहीं। कृष्ण जन्मे अष्टमी।
- 19:36और कृष्ण जन्मे रोहणी नक्षत्र को और आप खंगाली कृष्ण मरे हत्या
- 19:49किया, बिल्कुल उसी वक्त सारी क्रियाकलाप बना ली।
- 19:55लीला समेटने जब रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी इकट्ठे हो रहे थे, लेट गए,
- 20:04पांव को ऊपर किया, उनके पांव में पदम था, हिरन की आंख की तरह चमक
- 20:09रहा था। दूर से देखा ज़रा नामक शिकारी ने
- 20:20वाण चला दिया और कृष्ण के शरीर को तेल छीरता हुआ चला गया।
- 20:33कृष्ण योग नेत्र में चले गए। देह त्याग कर तिथि के अष्ट
- 20:42नक्षत्र के अष्ट अब आइए भगवान महावीर।
- 20:50क्षमा कीजिए भगवान राम भगवान राम जानते थे चक्र पूरा करना होगा, अब
- 21:03ये नई बात सुनो क्या जानते हैं चक्र पूरा करना होगा आखिरी जन।
- 21:14आखिरी जनम महेंद्र का आखिरी जन्म कृष्ण का और आखिरी ही जन्म राम का
- 21:22राम ने तो बिलकुल चक्कर पूरा कर दिया राम ने तो महीना, तिथि,
- 21:31नक्षत्र। तीनों का बैलेंस कर दिया।
- 21:34मर्यादा राम ने वो वक्त चुना। जीस वक्त से जीवन चक्र बिल्कुल
- 21:44पूरा हो जाए ज़रा भी गड़बड़ी का अंत हो।
- 21:51यह सृष्टि में जीवन चक्र जीवन का बुरा करना होता है।
- 21:54मृत्यु विसंग राम पुनर, वसु नक्षत्र, व्यंजन महता क्षेत्र का
- 22:09तृतीय तीन नवमी। नवमी तिथि चित्र महीने की पुनर
- 22:16वसूल नक्षत्र में उनका जन्म हुआ। और कमाल की बात है राम ने तो वक्त
- 22:25को भी नहीं छूटा। राम का जन्म सुबह 5:43 पर हुआ।
- 22:41और शरीर नदी में उन्होंने प्राण त्यागए पांच बजकर 43 जिन्हें हम
- 22:49ब्रह्मूर्त कहते थे। राम ने ऐसा चक्र पूरा किया
- 22:55मर्यादा की अति अगर किसी ने की तो श्री राम ने।
- 23:02नक्षत्र भी पुनर बस महीना भी क्षेत्र का पक्ष भी शुक्ल चाँदनी
- 23:15रातें थी। क्षेत्र का महीना पुनर्वासु
- 23:24नक्षत्र, नवमी तिथि और 5:43 का वक्त था।
- 23:35उन्होंने बिलकुल वक्त देखा गणना के हिसाब से।
- 23:41व्यक्ति का अंतर से बता देता है। घड़ी नहीं थी उस वक्त, लेकिन
- 23:4901:00 ओ क्लॉक होता है हमारे उधर उसे आप जानते है यूनिवर्सल क्लॉक
- 23:56होता है उससे समय की गणना हो जाती है।
- 24:04जो कोई वेधर के यूनिवर्सल क्लॉक खत्म हो गए, उनसे संबंध जोड़ना
- 24:09भूल गए हम कागजों की कश्ती पर सवार नाविक हैं।
- 24:15हम कागजों के जहाज पर बैठे हुए पायलट।
- 24:20भूल गए वो सब जो सच में जहाज हुआ करता था जो सच में कष्टियां हुईं
- 24:28करती थी आज हमने सब नकली नकली बना लिया भीतर आनंद नहीं तो कोई बात
- 24:36नहीं। बस छः बार सूट बदलो, आठ बार साड़ी
- 24:43बदलो सोने की पुश शापेन डालो बड़े बड़े कारोबार चला लो ऊपर अपना देख
- 24:53लो। भला इतने से खुशी मिलती वह चरम
- 25:01आनंद, वह चरम खुशी कहते से मिल जाए।
- 25:07सारे भ्रमण को अपने नाम करा दो जमीन जायदाद, सारा कैश।
- 25:16सारा खुशी जो है बहुत वक्त अस्त अपने नाम करा लो, क्या तुम सच में
- 25:25मालिक हो जाओगे नहीं होगा? राम ने इन सब चीजों की अथियां
- 25:37करके ऐसी मर्यादा कर दी और संतों ने सबसे बड़ा तगमा इसे हम कह देते
- 25:50हैं। पुरस्कार।
- 25:56सलमान अलंका भगवान राम को दिया मिला तो महावीर को फिर महावीर नाम
- 26:07था वर्धमान। राम को मिला मर्यादा पुरुष जीवन
- 26:20चक्र को पूरा पूरा करते गए वही तिथि, वही महीना।
- 26:29वही नक्षत्र, वही चाँद नी रहते वही वक्त और भगवान राम ने वक्त
- 26:43देखा सारी जनता को साथ लेकर चले ऐसे।
- 26:46छुपके से सुसाइड नहीं कर लिया। सब बदला के क्योंकि उनको रोकने
- 26:53वाला नहीं था। भगवान राम राजा थे, उनका हुक्म
- 27:03सर्वोपरि था। चिंता कितना ही रोए, कितना ही
- 27:08चिल्लाए, बड़े प्यारे थे, राम जाने नहीं देती, लेकिन क्या करें?
- 27:15राजा के सामने बोला भी तो नहीं जाता।
- 27:18बड़े चरण में पकड़े बड़े रोज़ चलाए, लेकिन राम कहते हैं देखो।
- 27:25मेरा वक्त क्या है मुझे जानना है। सभी का वक्त आता है सभी जाएंगे
- 27:33मुझे भी जानना है एक बड़ा कारण और भी हुआ करता है वह।
- 27:45संत उसे कहते हैं, हम जिसने जान लिया कि सृष्टि में यह नीरस है।
- 28:04इसमें रस्म कुछ नहीं है। यहाँ भोग नहीं योग्य कुछ नहीं है
- 28:13यहाँ पानी योग्य और कुछ नहीं है यहाँ त्याग नहीं योग्य।
- 28:18त्यागना का भय नहीं पाने का रोग कोई वैरी नहीं कोई प्रेमी, कोई
- 28:31लोभ नहीं, कोई भय नहीं, कुछ छिन जाने का भय नहीं।
- 28:37जिसके लिए सारा व्यर्थ हो गया। जिसने जान लिया निरर्थक है सार्थक
- 28:46यहाँ कुछ भी तो नहीं है। वह संत होगा इसलिए संत अक्षर।
- 28:56तुमने भगवान राम और भगवान कृष्ण की खुराक नहीं देखी?
- 29:05अगर देख लेते मैंने इन दोनों को देखा है तो तुम बड़े हैरान हो
- 29:13जाते। राजा है ऐसा साधारण भोजन ज़रा भी
- 29:25स्वाद नहीं है जब ज़िन्दगी में ही स्वाद न रहा हो।
- 29:35तो भोजन से स्वाद की उम्मीद क्या रखी जा सकती है?
- 29:42उससे लोग पूछ लेते हैं कि दुर्योधन के मवे क्यों त्याग
- 29:46दिया, स्वादिष्ट भोजन क्यों त्याग दिया और बिदुर के घर का साग क्यों
- 29:54खाली? साग अगर सच में दिखाया जाए तो हरे
- 29:59पत्तों से बनता और हरा पत्ता तो पुरुषों का आहार होता।
- 30:09दुर्योधन के मेवे त्यागे 3600 प्रकार के।
- 30:16हस्तिनापुर के राज़ सम्राट का वो मालिक था, वो त्याग दिया भगवान
- 30:22कृष्ण ने साग फितूर घर खाये इस कथक कारण तुमने कुछ और जाना लेकिन
- 30:31सही कारण यह था कृष्ण की इंद्रियां स्वादनी।
- 30:37फर्ज निभाती जीवन जीने के लिए मात्र उपभोग करती है जीवन देने
- 30:48वाली वस्तुओं का स्वाद के लिए नहीं और जो अभी भी स्वाद के लिए
- 30:54खाता है। वह संत भुआ नहीं, उसने अपने आप को
- 31:03जाना होगा लेकिन संत होना अलग बात है, उसने अपने आप को जाना होगा।
- 31:14लेकिन जिसने बाहर के लक्षण बता देते हैं, कृष्ण कहते हैं दक्षिण
- 31:18देखो अपने आपको जाना होगा। उस दिन नो दाय सिर्फ हूँ एमआइ ये
- 31:32जान लिया लेकिन उस रस के तल पे नहीं पहुंचा।
- 31:40जिसे परमेश्वर कहते हैं राधा उसे गली गली ढूंढती है, राधा
- 32:01उसे हर जगह ढूंढती है। शिप गयो फिर इक तान सुना के कहाँ
- 32:23गयो। बान चला के छिप गयो फिर इक तान
- 32:42सुना के कहाँ? गयो वो इकबान चलाकर गोकुल ढूंढा
- 32:59मैंने। मथुरा।
- 33:08गोखले ढूंढा मैंने मथुरा ढूंढ कोई नगरिया न।
- 33:26छोड़ी रे कोई नगरिया न छोड़ी रे। सूद विसरा गयो मोरे ओह कला इक पा।
- 34:03कहाँ गए हो इकतान सुनाकर इतनी प्यारी आभास वंशरे के ऐसी मधुर
- 34:15साच ऐसा संगीत छेड़ा। लेकिन एक तान सुना के पता नहीं
- 34:23कहाँ चला गया तुम्हारे जीवन में भी ऐसे कभी कभी लम्हे आएँगे
- 34:31क्योंकि तुम भी भीतर से प्रमाण हो इन लम्हों को।
- 34:40इनका लाभ उठा देना इनको व्यर्थ ही मत जाने देना।
- 34:50ये लम्हे, बड़े बेशकीमती और राम पुन और वसु नक्षत्र में।
- 35:11क्षेत्र तिथि शुक्र, नवमी तिथि में जन्म हुआ और उसी तिथि को
- 35:24प्राण त्याग दिया। और कमाल की बात है, बिल्कुल वही
- 35:29वक्त। पांच बजकर ऐसा चक्र पूरा किया।
- 35:38इसलिए जानने वालों ने उन्हें उपाधि वह जो सर्वोत्तम उपाधि उसे
- 35:46सुशोभित किया पुरुष उत्तम। सर्वश्रेष्ठ मर्यादा का बना हुआ
- 35:58मर्यादा और स्वप्न सर्कमस्टैंसेस बदलने से जिसका मूड स्विंग नहीं
- 36:09होता। अभी एक क्षण पहले एक क्षण बाद के
- 36:19कई ने मंत्र के बहकाने से दशक से अपने भरत पुत्र के लिए राजमा।
- 36:33हुकुम हुआ दसर तो बेहोश हो करके बड़े क्योंकि सबसे प्यारा पुत्र
- 36:40ही। कुछ बच्चे अपने भीतर से ऐसा फैलाव
- 36:54करते हैं, आनंद का कि उन्हें त्यागना नामुमकिन हो जाता है।
- 37:04राम उन्हीं में से एक उपराण हरले। प्राण हर के ले जाते हैं, एक दुख
- 37:12दारण नहीं ऐसे भी व्यक्ति होते हैं जो एक मिलते हैं तो दुख देते
- 37:21हैं, दुख के सिवा कुछ नहीं देते। किसी को चाहे उनके अपने हो।
- 37:27चाहे उनके वेगाने राम को मर्यादा पुरुषोत्तम का खिताब मिला, अलंकार
- 37:37मिला और राम ने अपने जीवन के चक्र को।
- 37:47बिल्कुल पूरा किया सटीकूस तो हम चले थे महाविष स्वाति नक्षत्र में
- 37:56जन्मे स्वाति में ही प्राण छोड़ें।
- 38:01फिर हम कृष्ण व्याये पुनर्वसु की अष्टमी को।
- 38:06जन्मे और पुनर्वशो की अष्टमी में ही शरीर छोड़ते हैं।
- 38:11चक्रपुरा नक्षत्रों का चक्रपति ज़रूरी होता है।
- 38:19तिथियां कई बार मिल खाई जाती हैं, कई बार नहीं।
- 38:30राम ने तो एक वक्त भी बराबर कर दिया।
- 38:34ज़रा भी एक क्षण भी इधर उधर ना बताइए।
- 38:45चुथ वह व्यक्ति जो परम करणवान था। वो भगवान जो परम करूणावान था
- 39:00किसने संसार के दुख के लिए स्वयं का लोभ इतना छोड़ दिया?
- 39:10पहले कपिल वस्तु को लात मारे, सिंहासन को लात मार दिया, उसके
- 39:19लिए व्यर्थ हो गया था और मैं तुम्हें कहता हूँ संतभो ही जिसके
- 39:26लिए यह संसार। व्यर्थ हो जाए सार्थक नारे तुम
- 39:35अगर रोज़ भोगते हो ना, अच्छे अच्छे पदार्थ भोगते हो ये खाते हो
- 39:42चाउमीन सूगा नहीं तुम्हारे कसूर में।
- 39:49तुम्हारी वासना अभी भरी नहीं तुमने अभी जाना नहीं कि व्यर्थ
- 39:56है, तुम समझते हो कि सार्थक है और उसे चलने तो मैं रोकता नहीं, मैं
- 40:04तो कह देता हूँ। के दूसरों को भी थोड़ा भोग लेना
- 40:09है ट्रंकों में पड़ा हुआ तुम्हारा घर ले आएगा तुम भोगो उर्पाओ भोग
- 40:19से बैराग्य का जन्म होता है क्योंकि भोग से दुख मिलता है तो
- 40:25भोगो पूर्ण भोग इतने भोगों के भोगने के अति हो जाए उससे मिलेगा
- 40:35दुख छः बार बदलो सूट 20 बार बदलो, सूट ही बदलते रहो झूठ ही बोलते
- 40:43रहो। कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बात
- 40:52तो तुम्हारी है, तुम कब पाओगे, किस तन पाओगे?
- 40:58किसनसार सार्थक नहीं है, यह व्यर्थ है, निरर्थक है।
- 41:05और भोग के ही पाओगे ध्यान रखना ये बात जो अभी अभी पशु योणी से
- 41:16निकले, मुंशी योणी में आए वो तो ज्यादा भोग ही है।
- 41:22उनको प्रताड़ित मत करना क्योंकि अभी अभी आए हैं उनके लिए संसार के
- 41:30भोगों के सिवा और कुछ नहीं भोगेंगे।
- 41:34उन्हें भोग नहीं। कि मैं तुमसे करबद्ध यह प्रार्थना
- 41:41करता हूँ कि दूसरों को भी भोग लेने दो, थोड़ा थोड़ा ट्रंको में
- 41:47जमा मत करो खजानों में जमा न करो, बैंकरों में जमा न करो।
- 41:57इतना फैलाव न कर लो धरती जमीन का कि तुमसे खेती भी न हो सके और
- 42:04दूसरा बज़ारा खेती के लिए धड़पना इतना न करो, क्योंकि संसार
- 42:09निरर्थक है और अंत में तुम यह पाओगे अंत में।
- 42:16पता नहीं कितने जन्म लगेंगे अगर कोई संत मिल गया गुरु दो चार जन्म
- 42:24में ही छुटकारा हो सकता है पर अगर कोई मूड मिल गया तो फिर कोई पता
- 42:35नहीं। लाखों जन्म भी लग सकते हैं, लेकिन
- 42:38उसके घर में भक्त की कोई कमी नहीं हे बड़ा विराट है, बड़ा विशाल है
- 42:48तो कोई बात नहीं दाता देलेन्द्र थकपा जुगाजुगंतर खाई।
- 42:54तुम खाते ही जाओ, जुगुजुग अंतर तक खाते जाओ, लेकिन एक वक्त आएगा जब
- 43:02खाने का स्वाद तुम्हारा समाप्त हो जाएगा, इसलिए शांत वह।
- 43:14जिसके लिए सभी प्रकार के स्वाद निरस्त हो गए।
- 43:19स्वाद हमेशा इन्द्रियों से लिए जाते हैं तुम जीबा से तृष्ट बढ़ते
- 43:24स्वाद हो, आँखों से सुंदर दृश्यों का स्वाद लो, कानों से सुंदर।
- 43:33गायन का, भजन का, कीर्तन का स्वाद लो, लेकिन हैं स्वाद जो इंद्रियों
- 43:39के द्वारा लिए गए स्वाद किसी को आगोश में ले लो।
- 43:51किसी प्रेमिका को गले से लगा लो, प्रेमी को गले से लगा लो।
- 43:56यह त्वचा का स्वाद इंद्रियों से लिया हुआ स्वाद तब तक जारी रहेगा,
- 44:09जब तक तुमने संसार को निरर्थक नहीं पाया।
- 44:17तुम जान बूझकर कोशिश करोगे? अभी तो शिकायतें आती हैं बाबा जो
- 44:25मुझे बैड टॅच करता है, गुड टॅच करता है ये सब तुम्हारी वाश नाम
- 44:32की निशान है। क्या हो जाएगा उस किसे को कुछ
- 44:43मिला किसी को कुछ मिला किते आए कोई तुम पहले तो आए।
- 44:58अनंत अनंत दुनिया आई अनंत काल से आई और तुम्हें तो पता भी नहीं
- 45:03सृष्टि का आगाज कब हुआ? बस एस्टिमेटेड कैलकुलेशन है।
- 45:13ज्योतिषीय अलग है, पंडित्य अलग है।
- 45:18तुम कह दोगे एक अरब 95 करो, लेकिन ये सही है अगर तुमने उसका आंकड़ा
- 45:28सटीक निकाल ही लिया तो तुम समझदार उससे ज्यादा हो गया है नहीं।
- 45:34तुम्हें पता ही नहीं चलेगा, कुछ भी तुम निकाल लो, मात्र कैलकुलेशन
- 45:41ही होगी ही होगी सटी का गणना तुम नहीं कर सकोगे हाँ सटी का रस तुम
- 45:49ले सकते हो। मुझे लोग पूछ लेते हैं बाबा जब
- 45:55उसे देखा ही नहीं जा सकता फिर उसको ढूँढना मैंने कहा जी से तुम
- 46:07स्वाद कहते हो, क्या उसे देख सकते हो तो फिर क्यों लेते हो?
- 46:17वैसे ही वो स्वाद है, रस है, परम रस है, जो चीज़ देखी ना जाए और रस
- 46:29रूप में वो अनुभव की जाए पी जाए। तो जरूर ही तुम स्वाद ही लेना
- 46:37चाहोगे। उसका तुम देखना ही चाहोगे उसका
- 46:42नहीं जो दिखने में आता नहीं, तुम्हारे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन
- 46:47न्यूट्रॉन देखने में आ गए देख लिया।
- 46:51लेकिन जो दिखने में आता ही नहीं उसको देख के सीखो, उसको देखने की
- 46:59सारी दो सेहत बेकार है। व्रत के प्रयास है तो फिर व्रत के
- 47:06प्रयास मत करो, छोड़ दो इनको। इस व्यर्थ के प्रयास के लिए जीवन
- 47:15को दांव पे लगाना, वैसे ही बैठे बैठे राधे राधे करते रहना मुठता
- 47:25से सिवा और क्या है? क्या तुम उस रस के लिए राधे राधे
- 47:34करने के लिए सब छोड़ दोगे? लेकिन ऐसे मूड हैं जो उस रस को
- 47:43छोड़ सकते हैं? राधे रस को छोड़ो।
- 47:50छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए छोड़ दे।
- 48:03सारी दुनिया किसी के ये मुनासिब। प्यार से भी जरूरी कई काम में
- 48:34प्यार सब कुछ नहीं। ज़िन्दगी के छोड़ दे सारी धुन
- 48:49किसी के। जैसे हम भागते हैं जो स्वर्मात्मा
- 48:55के रस के लिए राधे राधे को छोड़ने को तैयार।
- 49:00तो इनको ऐसे ही चलने दो, इनको बदलने की चिष्टा न करो, मैंने
- 49:07तुम्हें पहले ही कहा जो पशु जीवन से नया नया आया वो ऐसे कर्म करेगा
- 49:17उसे करने। भोंकेगा भोंकने का वह मूर्खता की
- 49:24चरमहकाश्ता को छूएगा छूने को तुम्हारे का लड़का तुम अपने आनंद
- 49:32का फिक्र करो। तुम दूसरे की परवाह न करो।
- 49:39वह अच्छी नई कार बड़ी उसने छह मंजिला डाल दिया।
- 49:47यह पशुता की बातें हैं? तुम पाश में बंद हो गए, पहले से
- 49:50ही पाश में बंद हो। नहीं छः मंजल मकान नहीं बना
- 49:59व्यर्थ तुमने उस मुकाम पे पहुंचना जहाँ छः मंजल मकान व्यर्थ हो जाए
- 50:08कैसे मिलेगा तुम्हारे असली मुकाम पे जा के?
- 50:15ओह मंजले तुम व्यर्थ थी, अब जब सही मुकाम तुमने छू लिया तो वह
- 50:24मंजिलें भी मारते हैं, चाहे 1000 मंजिलें भी कौन हो, बेकार हो जाए।
- 50:34जब तक तुम उस मुकाम पे नहीं पहुँचते जहाँ तुम सन हो, तब तक सब
- 50:41बेकार, नीरस और संत वह जो जान लेता।
- 50:47के संसार में जो दिखता वो सब निरस्त जो दिखे सो सकल बेनासी वह
- 50:57सदा रहने वाला नहीं है, वह आध सच जुगाद सच है भी सच नानक हो उसने
- 51:03भी सच नहीं। तो सत्य क्या है?
- 51:06उस मुकाम पे होने वाला दर्शन ही सत्य है, सदा रहेगा कभी टूटता
- 51:12नहीं, कभी घटता नहीं, विखंडित नहीं होता, जीर्ण क्षीर्ण नहीं
- 51:16होता मैं कभी घटता नहीं, कभी बढ़ता नहीं।
- 51:21उस पूर्ण में से पूर्ण को ही निकाल लो तो भी पूर्ण बचा रहता है
- 51:26वहाँ पहुंचा है तुम्हारी मंजिलें तो डैबी जाएंगी, कभी भूकंप आएगा
- 51:32अगर जाए, लेकिन वह ऐसा भूकंप से प्रभावित नहीं होता।
- 51:41एटम बम उसे खत्म नहीं कर सकता। पदार्थों को तोड़ सकता है
- 51:46स्कैटरिंग कर सकता है, लेकिन दोनों कुछ नहीं यह जो चिंता में
- 51:52तुम सारी रात गुजार देते हो, तुम जानते नहीं हो के उस सतत्व को
- 51:58ज़रा भी नहीं। आँच पहुँचती तुम्हारी गर्मी तुम
- 52:05सारी रात चिंता में सो नहीं पाते कारण चाहे कोई भी हो लेकिन तुम
- 52:12सिर्फ ये नहीं जानते कि तुम तक वह आँच नहीं पहुँचती।
- 52:19यह वो तत्व है जहाँ तुम तक कुछ भी नहीं पूछता, ना अच्छा ना बुरा।
- 52:29अब इसे ठीक से समझ लेना ना तो खुशी के इम्तहा वहाँ पहुंचती है
- 52:33इसलिए खुशी को कमाने के यथन तुम्हारे 1 दिन में व्यर्थ हो
- 52:37जाएंगे। ना ही दर्द की इम्तह वहाँ पहुंचती
- 52:43क्योंकि दर्द की इम्तह कैसे वहाँ पहुंचे पीड़ाओं से तुम तड़पते
- 52:48रहोगे वहाँ तो कुछ नहीं पहुंचता। जहाँ सुख और दुख यह सब द्वंद
- 53:08मिर्जा थे आन ला शोक खुशी। तनाव रिलैक्सेशन दोनों दूर छिटक
- 53:22जाते हैं जहाँ दूर रह जाते हैं जहाँ वहाँ तुम्हारा मुकाम है उस
- 53:35चक्र तक पहुँचना इस जीवन चक्र को पूरा करना है।
- 53:42लेकिन संत अपने जीवन चक्र को पूरा भी करके जाते हैं।
- 53:49अब आइए हम बुद्ध के ऊपर आ जाये, बुद्ध ने भी बिल्कुल वो ही किया।
- 54:00विशाखा नक्षत्र में जन्मे पूर्णिमा का दिन जन्मे भगवान
- 54:12बुद्ध के बारे में तो बिलकुल अद्भुत संयोग हो।
- 54:20भगवान बुद्ध का जन्म बैशाखी पूर्णिमा को मास्ता बैशाख और
- 54:32देखिए। वैशाख मास था इसीलिए उस नक्षत्र
- 54:38का नाम भी विशाखा ही पड़ता है। मैं चैट जीप से कहा कि तुम्हें
- 54:47पता नहीं है इन सूचनाओं को फीड करता हूँ।
- 54:57तुम्हारे पास जो सूचनाएं हैं वो भी जीवंत व्यक्तियों ने ही दी हैं
- 55:01तुम्हारी अपनी कोई खोज इसलिए आज मैं तुम्हें ये कुछ सूचनाएं देता
- 55:08हूँ। इनको भी फीड कर लो।
- 55:10आगे से काम आये। विशाखा नक्षत्र में जन्मे भगवान
- 55:22पथ। इसलिए उसे महीने का नाम विशाखा
- 55:26पड़ गया। लेकिन इससे भी आगे उनका कोई
- 55:33ठिकाना ना रहा। उन्होंने ऐसी मर्यादा साधी सिर्फ
- 55:42भगवान राम की तरह ब्रह्मचारी ही नहीं रहे, वो तो एनलाइटन भी उसी
- 55:50तिथि को हो गया। यद्यपि इसमें उनका कुछ नहीं यह है
- 55:58प्रकृति की करामात थी, लेकिन ऐसा अद्भुत संयोग बना तो मैं थोड़ी सी
- 56:10बात बीच में बता दूँ जब तुम्हारी जन्म की तिथि होती नक्षत्र होता
- 56:15है। इसको गौर से समझ लेना तुम्हारे
- 56:23जन्म की तिथि, नक्षत्र और महीना मैं तो अक्सर ही कहता हूँ लेकिन
- 56:34आज कल के लोग। देसी महीने के बजाय अंग्रेजी
- 56:39महीनों को मानने लगते हैं, लेकिन अंग्रेजी महीने इतने सटीक नहीं
- 56:52है। आप चाहे क्रियाकिलाप अपने
- 56:54अंग्रेजी हिसाब से करते रहो, कोई बात नहीं।
- 56:57लेकिन ये सूक्ष्मगणनाएं हमारे देसी हिसाब से करवा पंचांग के जो
- 57:12आपका महीना जन्म का जो आपका नक्षत्र जन्म का।
- 57:24जब का पक्ष जन्म का अगर वो कभी ना भी मिले, कई बार नहीं मिलता।
- 57:29बुध के वक्त तो प्राकृतिक रूप से मिल गया।
- 57:36तीनों चीजें इकट्ठी हो गई, लेकिन नैचुरली हो गई।
- 57:40कोइंकिडेंटल कह सकते हैं महीना भी वही, विशाखा नक्षत्र भी, वही
- 57:51विशाखा और तिथि भी वही पूर्णमश ये तीनों मिल गए।
- 58:05इसलिए मैं तुमसे आज एक बात कहना चाहता हूँ, तुम अपनी नक्षत्र तिथि
- 58:17पर महीना इस दिन जितना हो सके उतना अच्छा काम।
- 58:27गरीब को भोजन, वस्त्र, पांव में जूते नहीं, जूते दो दो तुम्हारे
- 58:32पास है गरीब को, जरूरतमंद को, ब्राह्मणों को।
- 58:43श्राद्ध में हम ब्राह्मणों जिनको पहले ही पेट भरे हैं, इनको
- 58:48जबरदस्ती मार पुणे खिलाते तो वो गालियाँ खाते हैं, आपको मैंने
- 58:53देखे हैं, दुष्ट ने इतना भोजन करवा दिया, पेट तो करा है।
- 58:59इनको मत घराना कोई पुण्य नहीं लगता, पाप लगता है बल्कि पुण्य
- 59:05लगेगा। देखना भूखा कौन उसे कराना भोजन से
- 59:12अवश्य। तुम जाती पाती धर्म वगैरह के
- 59:22चक्कर में पड़ गए और ये दुष्ट लोग तुम्हे यही सखा रहे है।
- 59:28यह राजनीतिक दुष्टों से ज्यादा बड़ा दुष्ट और कोई होता भी नहीं
- 59:35और तुमने यही सीख लिया। तुम्हें जैसा पढ़ाएंगे इतिहास
- 59:39सुबह से ही तो पढ़े लेकिन इनकी तरफ ध्यान मत कर अपने जीवन का
- 59:52महीना देखना, जन्म का तिथि देखना, नक्षत्र देखना।
- 59:59अगर कुछ भी ना हो सको तो तीनों में से कुछ भी ले लेना उस महीने
- 1:00:04में उस दिन मैं श्रद्धा से कहता हूँ गो मुँह को चाय और पशुओं को
- 1:00:12भोजन खिलाओ, पानी खिलाओ, गर्मी है तो पानी पी लो।
- 1:00:18सर्दी है तो थोड़ी सी आग जला दो उस आग के किनारे पर रात को ठंडी
- 1:00:28हवाओं में बैठ जाएंगे वो कोई गर्म वस्त्र, कंबल पुराना धराना दे दो
- 1:00:36उनके ऊपर। आराम मिलेगा, सुकून मिलेगा, लेकिन
- 1:00:41तुम्हें पता नहीं आदमी उतना तुम्हें नहीं पुरस्कृत कर सकता
- 1:00:57जितना पुष्प कर सकता है जितना धन्यवाद गाय कर सकती है।
- 1:01:04कुत्ता कर सकता है जानवर कर सकता है उतना धन्यवाद मनुष्य नहीं कर
- 1:01:10सकता। मनुष्य आज स्वार्थी हो गया है,
- 1:01:15लेकिन आज भी भूखा स्वार्थी नहीं भूखे को भोजन दो वह तुम्हें भीतर
- 1:01:20से आशीर्वाद देखा। इसलिए बाबा नानक ने व्यापार के
- 1:01:26लिए लाए गए पैसों को भूखों को भोजन करा दिया।
- 1:01:31वो संत थे या असंत थे, इस बात को छोड़ दो।
- 1:01:34बात ठीक है वो भूखे थे तो श्राद्ध में भी लेकिन करें क्या?
- 1:01:43तुम्हारे पंडितों ने ऐसी गहरी रकीर डाली है कि तुम तो
- 1:01:49ब्राह्मणों को बोलो, ब्रह्मपुत्र होने चाहिए और ये लकीर मिटेगा
- 1:01:53नहीं। श्रद्धा उस बच्चे या उस बूढ़े?
- 1:02:01या उस माता या उस स्त्री के प्रति श्रद्धा जो चला गया आज नहीं
- 1:02:08तुम्हारे पास किसी दिन तुम्हारे भीतर बैठे हँस रहा था, खेल रहा था
- 1:02:12तुम्हारे सुख दुख संधित उसको याद करके श्रद्धा से।
- 1:02:21उसकी कल्पना करते थे, किसी भी जरूरत मंद को खेला तो उसका
- 1:02:26तुम्हें बड़ा पुण्य मिलेगा। ध्यान रखना ब्राह्मणों की अगर
- 1:02:30भूखा है तो उसे दे दो। जरूरी नहीं है कि सभी ब्राह्मण
- 1:02:36तुम्हें गाली निकालेंगे। अगर भूखा है तो।
- 1:02:40कुछ ब्रह्म संतोषी भी हो सकता है, यह कोई जरूरी नहीं है, लेकिन
- 1:02:47सिर्फ मात्र ब्राह्मण नहीं। मैं तो एक बात रखता हूँ।
- 1:02:53मैं किसी धर्म या जाति विशेष का हिमायती नहीं।
- 1:02:59मैं हिमायती हूँ इंसानियत इंसान इंसान से इंसानियत का व्यवहार
- 1:03:09हूँ, भूखे से भूखों का व्यवहार। उसको खाने को भोजन दो, वस्त्र
- 1:03:20नहीं है, पहनने को ठंडा मौसम है, उसे कोई गर्म कपड़ा उठाता।
- 1:03:31तपती रेगिस्तान की जमीन लोई चल रही हैं।
- 1:03:34पीने को पानी, पांव की जूती, दर्द।
- 1:03:38सिर पर बांधने के लिए कोई पटका से ये सभी पुण्य कर्म आते हैं।
- 1:03:46तुम कर्मकांडों में मत डालना इनको क्योंकि तुम्हारे कर्मकांड तो आज
- 1:03:51सारे ही विकृत कर दिए गए। पुत्र पूछा महावीर ने स्वाति
- 1:04:03नक्षत्र में क्यों जगा? मैं सारे ही बता देता हूँ और भी
- 1:04:07बहुत से लेकिन वक्त बड़ा कम बहुत संतो ने बिल्कुल उसी।
- 1:04:16नक्षत्र में प्राण था, लेकिन आज तक तुम्हें पता नहीं चला।
- 1:04:27बुध विशाखा नक्षत्र में विशाख महीने में पूर्णिमा की तिथि को
- 1:04:35जन्म हुए। और यह एक प्राकृतिक घटना थी।
- 1:04:42नेचुरल कोइंसिडेंट कहलो के वो उसी दिन प्रबुद्ध हुए।
- 1:04:47सुबह सुबह जन्म भी उनका सुबह ही हुआ था और प्रबुद्ध भी।
- 1:04:55वो सुबह ही हुए। बस भोर का तारा डूबने चल रहा था।
- 1:05:08रात खूब अच्छी तरह से पेट भर के सोए सुबह आँख खोली।
- 1:05:14इसे कहते हैं जागना ब्रह्म का जगना इसे कहते हैं।
- 1:05:19तुम जैसे आज भ्रम का जगना बना दी हो।
- 1:05:22कर्मकांडों में और भ्रम का जगन नहीं है।
- 1:05:25मज़े से खूब खा पी के सो प्रकृति तुम्हें सुबह जगाएगी, वह भ्रम
- 1:05:31मुहूर्त है, प्रकृति खुद भीतर एक क्लोक है भीतर के।
- 1:05:39यूनिवर्सल क्लॉक है वह हर क्लॉक को हर वक्त को संभालना है।
- 1:05:47तुम्हारी घड़ियाँ नहीं संभल, तुम्हारी घड़ियाँ को डिस्टर्ब
- 1:05:51करती हैं। पशुओं के पास कहाँ है क्लॉक?
- 1:05:57लेकिन उनकी सारी संग रचना उनको वैसे ही चलाती है तो उस तिथि को
- 1:06:07नोट करना, उस नक्षत्र को नोट करना।
- 1:06:12बुद्ध उसी नक्षत्र में पैदा हुए विशाखा उसी महीने में पैदा हुए।
- 1:06:15विशाख। थोड़ा गर्मी का महीना होता है
- 1:06:23क्षेत्र विशाख, विशाख में गर्मी हो जाती है, थोड़ी थोड़ी विशाख का
- 1:06:32नक्षत्र, पूर्णमासी की तिथि। पुण्य चंद्रमा बुध का जन्म हुआ और
- 1:06:45बुद्ध का प्रभुदत्व भी इसी तिथि में हुआ और इसी महीने की इसी तिथि
- 1:06:56में हुआ। और तीसरा, यही बस नहीं बीमार हुए
- 1:07:07गलती से उन्हें फाइव दिनेस चीज़ कहला दी गई थी।
- 1:07:12गलती थी कुंदा लोहार। बड़े दुखी हुए, बड़े तंग हुए,
- 1:07:23बहुत दर्द हुआ, उनके सारे शरीर, तन बदन, उनका दर्द, दर्द ही जैसे
- 1:07:30हो गया, जिंदगी रह गई दर्द बन के लेकिन किसी को बताया नहीं।
- 1:07:40ज़िन्दगी रह गई दर्द बनके दर्द दिल में छुपाए छुपाए दर्द को
- 1:07:49छुपाते ही बताएं इतने करूणवान व्यक्ति?
- 1:07:57धरती पे खुशी कमान ऐसे हुए उनमें से एक वक्त भी थे उसी महीने की
- 1:08:12उसी तिथि के उसी नक्षत्र में प्रबुद्ध भी हुए उसी तिथि के उसी
- 1:08:19महीने के उसी नक्षत्र में। जनम भी हुआ और आखिर में चुनना था
- 1:08:24उन्होंने स्वयं यह मृत्यु तो खुद ही चुनी जाती बस एक प्रबुद्धता
- 1:08:29खुद नहीं चुनी जाती दट। इस ए नेचुरल इंसिडेंट वह तो खुद
- 1:08:36से गठित के परमात्मा के हाथ से नदरी मोख दवार।
- 1:08:41मुक्ति का दरवाजा परमात्मक है वह यह घटना परमात्मा के हाथ में जनम
- 1:08:48भी तुम अपनी इच्छा से ले सकते हो देखिए बड़ी गहरी बात है, मृत्यु
- 1:08:54भी तुम्हारी इच्छा से आएगी, लेकिन प्रबुद्धता तुम्हारी इच्छा से
- 1:08:57नहीं है। ये दो घटनाओं को तुम किसी ना किसी
- 1:09:01तरह ऑक्यूपाई कर सकते हो एस्टब्लिश कर सकते हो जीस दिन
- 1:09:12तुम्हारा जन्म नक्षत्र हो, तिथि हो महीना हो।
- 1:09:18उस स्थिति को ध्यान में रखे ना साल में एक बार आए उस दिन खूब
- 1:09:25अच्छी संगत में बैठा है, जो आज जैसे बर्थडे वगैरह मगाते हो या
- 1:09:31आपने विकृत कर दिया सारा काम? उस दिन उस तत्व को याद करो, जिससे
- 1:09:38तुम ईश्वर कहते हो, जिसने सारी सृजना को संजो दिया एक दागें उसको
- 1:09:46याद करो, एकांत में बैठो, पौष्टिक भोजन करो।
- 1:09:54अपने जैसे व्रतियों के रोगों से बैठो, संघ करो, जरूरतमंदों को
- 1:10:01सेवा करो, दानकों अस्पतालों में जाओ, इस को ध्वनियों की आवश्यकता
- 1:10:09हो सकती है। कोई वृद्ध है उठने में असमर्थ हो
- 1:10:14सकता है। उसको उठाओ 1 दिन ही रख लो अगर एक
- 1:10:20व्यक्ति 1 दिन रख ले इस काम के लिए तो इतने अस्पताल में नहीं,
- 1:10:25मरीज होते जितनी संख्या है। अगर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन
- 1:10:32का 1 दिन अपना जन्मदिन हॉस्पिटल के एक चक्कर लगा दे, वहाँ दुखी
- 1:10:41दर्द से भरे हुए लोग जो कर्म, जो कमती के शिकार हैं।
- 1:10:48उनकी जरूरतों को पूरा करती। जैसे आपकी यथा संभव हो यह मानवता
- 1:10:57की सबसे बड़ी सेवा और अकेले मानव ही नहीं पशु पक्षी।
- 1:11:09इनका भी ख्याल रखो वायु, पानी, धरती इनका भी ख्याल रखो, वायु को
- 1:11:18दूषित रखो, पानी को दूषित रखो, धरती को दूषित ना करो।
- 1:11:27पवन, पिता पानी, पवन, गुरु, पानी, पिता, माता तरती, महत इन तीनों को
- 1:11:35बचाओ क्योंकि तुम अपनी विरासत में अपने बच्चों को क्या ले के जाओगे।
- 1:11:41क्या यहीं सड़ी गली? व्यवस्था जहाँ सांस लेने को वायु
- 1:11:48ही शुद्ध नहीं पीने को पानी ही शुद्ध नहीं, ऐसी व्यवस्था अपने
- 1:11:55बच्चों को देके जाओगे, बूंदी में इसमें बच्चों को तो कोई कसूर
- 1:11:59नहीं, तुम्हारा दायित्व बनता है। कि तुम इन्हें स्वच्छ और क्षुद्र
- 1:12:08रखो, बहुत से दोष देश हैं समझदार जिन्होंने अपनी हरियाली को बचा
- 1:12:15दिया है जैसे फिनलेंड है इन्होंने अपनी हरियाणार्वे।
- 1:12:22इन्होंने अपनी हरियाली को बचा लिया।
- 1:12:26बहुत से देश हैं ऐसे कुछ कुछ देश तो बिल्कुल गर्क गए हैं, लेकिन
- 1:12:34कुछ देशों ने इन तीनों चीजों को बचा लिया है।
- 1:12:38वो समझदार है। ईश्वर की सर्जना की मेहरबानी उनके
- 1:12:43ऊपर रहेंगी, प्रकृति भी उनके प्रति दयालु रहेंगी।
- 1:12:51उग्रह नक्षत्र अतिथि इन सब की बातों में कर रहा था।
- 1:12:59क्यों देह त्याग किया? स्वाति नक्षत्र में जीस नक्षत्र
- 1:13:05में तुमने जन्म लिया मोरल पे आ जाए बिल्कुल उसी नक्षत्र में
- 1:13:13प्राण त्यागना, जीवन के चक्र को बैलेंस करना।
- 1:13:20बस एक नक्षत्र ही है पंचांग के पांच अंगों में जीसको अगर तुम
- 1:13:27बैलेंस कर सको और संत तो इसे बैलेंस करेगा, संत परिपूर्ण
- 1:13:35चिष्टा करेगा। बशर्ते कि उसको मार नहीं आता, ना
- 1:13:40दिया जाए। यह परिपूर्ण कोशिश करेगा।
- 1:13:50क्या है जीस में उसका जन्म हुआ नक्षत्र में।
- 1:13:58तिथि में, महीने में, शुक्र में के कृष्ण में वह उज में प्राण डाल
- 1:14:08हम थोड़ा फिर से दोहरा ले। बुधनी शुक्ल पक्ष पूर्णमा को।
- 1:14:15विशाखा नक्षत्र में, विशाखा मास में और प्राण भी इसी दिन त्यागे
- 1:14:20और संयोग से वह अनुपम घटना भी उसी दिन बीते।
- 1:14:30प्रबुद्ध भी इसी दिन हुए। कृष्ण ने भी ऐसा किया।
- 1:14:34रोहणी नक्षत्र में जन्म हुआ अष्टमी के तिथि को हुआ अष्टमी की
- 1:14:39तिथि रोहणी नक्षत्र में सुनें। प्राण जा के राम के साथ भी ऐसा ही
- 1:14:44हुआ। राम पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे
- 1:14:48क्षेत्र के नवमी में बिल्कुल वैसे ही जैसे।
- 1:14:52बोध ने किया, लेकिन राम तो बहुत पहले हो गए थे।
- 1:14:58किसने किसका नकल किया ये मत कहना। किसी ने किसी का नकल नहीं किया।
- 1:15:03यह सहयोगिक घटनाएं थीं। मात्र राम पुनर्वसु नक्षत्र में
- 1:15:08जन्मे। क्षेत्र में जन्मे महीने में शुगल
- 1:15:16पक्ष में जन्मे बिल्कुल सेम तिथि और उसी नक्षत्र में समया गया।
- 1:15:38ज्योति चौथ शमक है। वहाँ राम ने भी ऐसा किया।
- 1:15:45क्षेत्र का महीना शुक्ल का पक्ष, नवमी की तिथि, पुनर्वासु का
- 1:15:51नक्षत्र चारों चीजें बने हुए। जीवन मृत्यु के चक्कर को पूरा
- 1:16:00किया फिर से जन्म नहीं होगा। कृष्ण ने भी ऐसा ही किया।
- 1:16:08अष्टमी का दिन काली रातें। रोहिणी का नक्षत्र नक्षत्र प्रमुख
- 1:16:20है। मैंने फिर आपसे ठहर दिया।
- 1:16:24संत व्यक्ति जो जीते जागते जागते हुए शरीर का त्याग करेगा, नक्षत्र
- 1:16:30उसके लिए बड़ा प्रमुख है। पुनः वसु नक्षत्र में ही राम ने
- 1:16:40भी देह त्याग किया। बुद्ध ने भी देह त्याग किया,
- 1:16:45बुद्ध त्याग पहले कर सकते थे लेकिन वह कैसे ना कैसे देरी करते
- 1:16:53रहे? शायद कोई जानता नहीं था बहुत
- 1:16:56जानता। बुद्ध उस नक्षत्र का इंतजार कर
- 1:17:02रहे थे जिसमें उनका जन्म विशाखा नक्षत्र आकाशीय मंडल में तृतीय
- 1:17:12भाग से द्वितीय भाग तक फैला है। ये कोई कल्पना नहीं है।
- 1:17:17यह स्थित है। आप देख सकते हो विशाखा नक्षत्र
- 1:17:22आकाश मंडल में तृतीय भाग से द्वितीय भाग में फैला हुआ है और
- 1:17:29इसकी जो स्थिति है तुला और वृश्चिक राशि।
- 1:17:35लिब्रा और स्कार्पियो इन राशि के मध्य में स्थित है तुला और
- 1:17:45वृश्चिक राशि के बीच में द्वितीय और तृतीय भाग में स्थित है अकाशीय
- 1:17:51मंडल में। यह कोई कल्पना नहीं है, तो मेरे
- 1:17:55समर्थन की तरह यह सत्य है। आकाश मंडल में द्वितीय तृतीय भाग
- 1:18:02में और वृश्चिक और तुला स्कार्पियो और लिब्रा इनके बीच
- 1:18:08में स्थित है मध्यम। इनकी अवस्था मैंने आपको स्थिति
- 1:18:13इनको बता दी। आपको यह है सारा क्यों छोड़ा?
- 1:18:19महावीर ने स्वाति नक्षत्र में क्षरित कहाँ से शरत हो कहाँ पहुँच
- 1:18:27गए, लेकिन सभी चीजों का अवलोकन। और सभी चीजों का विस्तार और सभी
- 1:18:35चीजों की बहुत सूक्ष्म डिफरेंस करते करते व्याख्या करते करते हम
- 1:18:48यहाँ पर आते हैं, संक्षेप में अगर कहूँ मर रूप में।
- 1:18:55तो संत व्यक्ति जिसने उसके बाद नहीं आना आना है तो वह उसका काम
- 1:19:04नहीं। वह परमात्मा का काम है।
- 1:19:06जैसे बुध अभी आएँगे लेकिन वह उसका काम नहीं, वह परमात्मा का काम है।
- 1:19:12मैंने आपसे कहा है संबोधि के वाद का कुछ काम बाकी है परमात्मा तक
- 1:19:16की यात्रा, वह बुद्ध का काम नहीं, वह परमात्मा का काम है।
- 1:19:21ईश्वर होना तो आएँगे लेकिन खुद कुछ नहीं करेंगे, सब करेगा वही जो
- 1:19:31मालिक। सृजना कम्बल जिसने सृजना को
- 1:19:34बनाया, मैंने सारा विस्तार आपको दिया, मुख्य बात है नक्षत्र ये
- 1:19:46जीस चीज़ की मैंने उदाहरण दी और बड़ी मेरे पास सैकड़ों उदाहरण थी।
- 1:19:53लेकिन मुख्य मुख्य उदाहरण मैंने तो बता दी कि ये आपके आप इनकी
- 1:19:59पूजा करते हैं। बुद्ध हूँ, कृष्ण हो, राम हो
- 1:20:05महावीर। लेकिन और सैकड़ों उदाहरण मेरे पास
- 1:20:09हैं। जिन्होंने जीस नक्षत्र में जन्म
- 1:20:12लिया उसी नक्षत्र में उन्होंने चक्कर पूरा किया।
- 1:20:15जीवन और मृत्यु का ये एक बड़ी गहन फिलोस्फी थी जो आज तक आपको किसी
- 1:20:21ने बताई नहीं और प्रथम बार में डिस्क्लोज़ कर रहा है।
- 1:20:26इसको संभाल के रखा। कृष्णवीन हरे मुरारी हे नाथ
- 1:20:47नारायण? यनु वासुदेव, श्री कृष्ण गोविन्द
- 1:21:02परे मुरारी। हे नाथ नारायण, वासुदेव ऋतुमातू,
- 1:21:19स्वामी सखाम। पितुमात स्वामी सखा अमर है नाथ
- 1:21:36नारा यन वासुदेव। श्री?
- 1:21:45कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव पितुमात स्वामी।
- 1:22:01सकम। पितुमात स्वामी सकमारे हेनाथनारा
- 1:22:11धनवासु देवा श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हेनाथनारायण।
- 1:22:23वासुदेव। धन्यवाद।