Latest / Baba ji Vijay Vats / 27 Aug 25 - फ़रीदा सुख-दुख एक कर।। Acceptance vs Suffering | स्वीकार करें, पर भोगें नहीं : Baba Farid.
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- 0:01फरीदा सुख दुख। एक पर फरीदा।
- 0:08सुख दुख एक। पर मन से लह विकास अल्ला पावे
- 0:16सोपला। तालबे दरबार फिर कहते हैं, परम
- 0:31आनंद की तलाश में हो खोज रहे हो उसे कहीं मिलता नहीं है तुम्हें
- 0:41बदबू। श्रेष्ठताएं करते हो, मन ठहरता मन
- 0:52गतिशील रहता है। हर वक्त तरीका बताते हैं तुम्हें।
- 1:01जीवन का तरीका बताते हैं फरीदा सुख दुख एक कर जीवन में सुख भी
- 1:15आएँगे, दुख भी आएँगे। यह बात समझ ले, यह मान ले न तो
- 1:26सुख से न दुख से चिपकना नहीं है। ना दुख को दूर भगाना है, ना दुख
- 1:38से लड़ना है। जीस कारण से दुख आया उसको दूर भी
- 1:45नहीं करना है। उसे झगड़ा भी नहीं करना है।
- 1:54जीस कारण से सुख आया। उसकी फिर से मांग भी नहीं करनी
- 2:02उसे चपकना भी नहीं जब तुम्हारे लिए सुख और दुख श्रम हो जाते हैं
- 2:14सम तो हम योग उचित। फरीदा सुख दुख एक कर सुखाये तो
- 2:32ठीक दो खाये तो ठीक एक कर। उसको स्वीकार कर ले।
- 2:51फरीदा सुख दुख एककर। मन से लाभ विकार मन से विकार
- 3:00उतारते विकार के। जो छः वकार मैंने बताए।
- 3:07काम, क्रोध, लोह, मोह अहंकार उर्फ है, उसके अतिरिक्त भी विकार है।
- 3:20ये छह प्रकार तो हैं विषय प्रकार इनको विश्व में रख सकते हो काम
- 3:32है, क्रोध है, लोभ है मोह अहंकार और वह।
- 3:41मन से लाह विकार विकार किसे कहते हैं।
- 3:47अस्वीकार की भावना को फ्रीद कहते हैं विकार अब ये नई प्रभाषा दे
- 3:53रहा हूँ आपको यद्यपि। फरीद की प्रभाषा यही है, समझी
- 4:02समझाई नहीं गई। मन से लाह विकार है।
- 4:11अस्वीकार करने की भावना विकार है। मतलब?
- 4:18काम आया तुमने झगड़ना शुरू कर दिया लड़ना शुरू कर दिया करो तो
- 4:29आया तुमने झगड़ना शुरू कर दिया ये क्यों आ गया?
- 4:36दुश्मन की तरह मत लो इनको लोह आया मोह आया।
- 4:54ईर्ष्या द्वेषहाय जीसको भी तुम विकार कहते हो?
- 5:02अहंकार आया उसको स्वीकार कर लो अस्वीकार करने की भावना को।
- 5:10फरीद कहते हैं, ये विकार है। तो आएँगे जिंदा हो तो आएँगे काम
- 5:22क्रोध, लोह, मो। अहंकार भ ईशा देश सब आएँगे गलानी
- 5:29भी आएगी, प्रायश्चित हुए है, अब करें क्या?
- 5:33अद्भुत सूत्र है। ध्यान से समझना ऐसा बहुत कम
- 5:45रेश्यों ने कहा, जैसा फरीद ने कहा, फरीद इस मसले में लाजवाब है,
- 5:55बिल्कुल नए आयाम की बात बताते हैं।
- 6:02ऋषि कहते हैं, काम विकार है, क्रोध विकार है, लोभ मो अंकार
- 6:13विकार है भय विकार है। लेकिन फरीद कहते हैं ये आएँगे जब
- 6:25तक जिंदा हो तब तक आएँगे, फिर क्या करें स्वीकार कर, अब यहाँ
- 6:35समझे ना बात को। तुम स्वीकार करने का अर्थ भोगना
- 6:41गिनते हो, फरीद कहते हैं, स्वीकार करने का मतलब भोगना नहीं है,
- 6:53एक्सेप्ट करना है। के जे आएँगे जिंदा हूँ तो आएँगे
- 7:00मर गया तो नहीं आएँगे मुर्दे को अब आता है बेकार कोई भी बेकार
- 7:05नहीं आता वह भी नहीं होता आग में जला देते हैं वह लगता है उसे।
- 7:17फरीद कहता आएँगे, स्वाभाविक हैं नेचुरल प्रोसेसेस ये स्वाभाविक
- 7:26प्रक्रियाएं हैं इनसे झगड़ मत, इनसे लड़ मत परमात्मा की देन है।
- 7:34कोई भी ऊर्जा तुम्हारी देन नहीं है, यह बात समझ लेना कोई भी ऊर्जा
- 7:40तुमने पैदा नहीं की कोई भी ऊर्जा शरीर ने पैदा की और ऊर्जा शरीर ने
- 7:45पैदा की भोजन के द्वारा और भोजन दिया गया परमात्मा के द्वारा।
- 7:56इट्स नेचुरल प्रोसेसर दिस विल कम, बट यू विल हैव टू एक्सेप्ट इट ये
- 8:10आएँगे? लेकिन तुमने झगड़ना नहीं है, तुम
- 8:14इन्हें स्वीकार कर लो, अद्भुत सूत्र देते हैं स्वीकार करने से
- 8:24क्या होगा स्वीकार करना भोगना नहीं होता।
- 8:34स्वीकार करना, लड़ना भी नहीं होता।
- 8:39स्वीकार करना होता है तुम यथास्थिति बने रहो, जैसे हो जहाँ
- 8:44हो। तुम तो झगड़े नहीं निकल पड़ते हो,
- 8:50तुम तो बगाने निकल पड़ते हो ये कहाँ से आ गए दुष्ट सोए हुए थे
- 8:57चैन से ओढ़े हुए कफन यहाँ भी सताने आ गए।
- 9:03किसने पता बता दिया? फ्रीद कहते हैं, यह प्राकृतिक
- 9:11प्रक्रियाएं हैं। आएंगी किसको नहीं आती सभी को आती
- 9:18है। लेकिन तुम्हें स्वीकार कर लेना है
- 9:24कैसे स्वीकार करना है? यह अल्लाह की देन है।
- 9:32अब आगे आगे समझना आगे आगे चीजें बड़ी सरल करूँगा मैं लगेंगी आपको
- 9:40असहज। होगी वो सरल, सहज फरीदा सुख दुख
- 9:50एक कर सुख भी आएगा, दुख भी आएगा, इनको स्वीकार कर लें, ये आयेंगे,
- 9:57आते भी हैं। तुम्हारे झगड़ा करने से इन्होंने
- 10:02कब आना बंद किया? ये आते ही रहे हैं, आते ही रहेंगे
- 10:09सुख भी आएँगे, दुख भी आएँगे। यह प्रकृति का, शरीर का, मनुष्य
- 10:15का स्वभाव है। किसी ने तुम्हारी पूंछ मरुण दी,
- 10:22दर्द होगा, किसी ने तुम्हें गाली निकाल दी, मन व्यथित होगा, ये सब
- 10:31आदिक है, लेकिन फरीद तीसरी बात कहते हैं।
- 10:36जो गाली निकाल गया निकाल जाए किसी ने पूछ में उड़ती दर्द हो गया, हो
- 10:42गया तुमने प्रतिक्रिया नहीं करनी तो उन्हें स्वीकार कर लेना।
- 10:51ये ऐसा ही है। स्वीकार करना भोगना नहीं होता
- 11:04स्वीकार करना सच में देखना होता है बात वहीं टकी जाती है, जाके
- 11:15आँखें मूँद के मत बैठे रहो। आँखें मूँद कर बैठे रहोगे तो
- 11:19झगड़ा करोगे या भोगोगे या भगाओगे दोनों में से एक काम करोगे या तो
- 11:31उसके पीछे लग जाओगे, इन्द्रियों से भोगोगे।
- 11:36या उनको भगाओगे अपने मन से निकल बाहर तू कैसे आ गया?
- 11:41दरवाजे बंद हैं फरीदा सुख दुख एक कर सुखाय दुखाय एक ही सूत्र देते
- 11:52हैं, मैं विस्तार कर रहा हूँ सिर्फ।
- 11:58फ्रीद कहते हैं, सुखाय दुखाय तुम स्वीकार कर क्या समझ के स्वीकार
- 12:04कर लो, यह अगले फिक्र में आएगा मन से लाहविकार।
- 12:12विकार भी आएँगे, सुख भी आएँगे, दुःख भी आएँगे, विकार भी आएँगे।
- 12:18सब आएँगे। अगर जीवंत हो तो सब आएँगे।
- 12:22जब वो मर गए तो कुछ भी नहीं आएगा। आज की वीडियो छोटी करूँगा बड़े
- 12:35कमेंट आए हैं बाबा वीडियो बड़ी मत किया करो एक तो देखे ही नहीं जाते
- 12:43दूसरे आप लगातार कमजोर। हो रहे हो?
- 12:47इतनी लंबी वीडियो मत बनाया करो। ठीक तो मैं शॉट कर दूंगा, शॉट में
- 12:56भी बात समझाई जा सकती है। सूत्रों में भी बात समझाई जा सकती
- 13:02है, बशर्ते तुम समझने के योग्य हो जाओ।
- 13:07मुझे तो बात समझाने का प्रयोजन है।
- 13:11वो मेरा हाल हो जाए, थोड़े शब्दों से हो जाए तो बहुत अच्छा है तो आज
- 13:19थोड़े शब्दों से समझाने की चेष्टा करूँगा।
- 13:21आप मुझे कमेंट में बताना कि आपको थोड़े शब्दों में समझ आया तो छोटी
- 13:29बना दिया करूँगा। मुझे क्या हो जाए?
- 13:36और कमजोर तो मैं नहीं हो रहा हूँ कमजोर मेरा शरीर हो रहा है ओह,
- 13:44मैंने दूध फिर तीन बार कर दिया। फरीदा सुख दुख एकक्कर सुख आए, दुख
- 13:58आए, मन से लाह विकार विकार भी आए। कुछ भी आए तू उसे स्वीकार कर ले।
- 14:09क्या समझ के प्रभु की दात समझ के अगर सच में तुम देखो क्या जीस दिन
- 14:22तुम अपने अंतः समय उतरना शुरू हो गए गहरे और गहरे और गहरे।
- 14:29अतल गहराइयों में उतर गए उस दिन पाओगे सब प्रभु ने दिया था जो
- 14:39प्रभु ने दिया वो तुमने माना कि मैंने किया यहीं चूक हो गए?
- 14:47यही दुख का कारण है दिया प्रभु ने माना तुमने ये कि मैंने किया
- 14:57इसलिए तुम दुखी हो सब वह करता है, मानते हो तुम?
- 15:07के मैं करता हूँ बुनियादी जड़िए है, बहुत गहरे में देखोगे, फिर
- 15:15सुनिए, मेरी बात को बहुत गहरे में देखोगे, अपने ही भीतर उतर के अतल
- 15:21गहराइयों में देखोगे तो पाओगे? तुमने आज तक कुछ नहीं किया तुमने
- 15:36सिर्फ देखा वह देखा जो हुआ यू आर अंडर सर्कमस्टैंसेस यू आर ऑल
- 15:45एक्शन्स आर अंडर सर्कमस्टैंसेस तुम्हें पता नहीं चलता?
- 15:50कुछ अज्ञात कारण होते हैं कुछ अज्ञात कारण होते हैं।
- 15:55तुम्हें उन लहरों का नहीं पता जो एक्स रेज की तरह तुम्हारे भीतर से
- 16:00गुजर जाती है और तुम्हें पता भी नहीं चलता, लेकिन।
- 16:10क्या करें आज का मानव यह समझना शुरू हो गया है कि जो दिखता है या
- 16:23जो समझ में आता है बस वही ठीक है जबकि वही ठीक नहीं होता।
- 16:30बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो दिखते नहीं एक्स रे के करने से दिखाई
- 16:34पड़े बहुत सी चीजें महसूस होती हैं, दिखती नहीं दुख और दर्द कहाँ
- 16:44दिखता है, शोक और धैर्य कहाँ दिखता है?
- 16:50मामूली मामूली भावनाएँ तुम्हें नहीं दिखती?
- 16:55प्रेम से भरा हुआ मन, इसमें प्रेम कहाँ है?
- 17:00दिखा सकोगे निकाल के जो अति सूक्ष्म है वो तुम्हें दिखता भी
- 17:07नहीं, वो सिर्फ अनुभव होता है। और वह समझ में भी नहीं आता, लेकिन
- 17:15तुमने एक धारणा बना ली। ये जीतने सर लोग हैं, मैंने सुनता
- 17:21नहीं। अक्सर मुझे पता है ये दो ही बातों
- 17:25का जिक्र करेंगे। एक जो दिखता है और एक जो समझ में
- 17:31आता है इनके पास दो ही यंत्र हैं देखने की आँखें और समझने की
- 17:36बुद्धि, लेकिन ये मूर्ख है मूर्ख, इसलिए कहता हूँ मैं।
- 17:48जो दिखता है और जो समझ में आता है, सृष्टि इतनी ही नहीं है।
- 17:58सृष्टि से बहुत विराट है, जो दिखता है और जो समझ में आता है वह
- 18:051% का। असंख्यमा हिस्सा है, 1% भी नहीं
- 18:14जीस पर तुम विश्वास कर लेते हो जो ये सर लोग बोलते हैं, इसलिए मैं
- 18:22कह देता हूँ गद्दियाँ चाहने ख्याति चाहिए।
- 18:27ज्ञान चाहिए, खोपड़ी भर लो और खोपड़ी भरो ऐसे सर के पास जाओ
- 18:35जिनकी कीर्ति दिव्य हो विकास से ज़रा भी न हो इन मूड लोगों के
- 18:48पास। चेतना का विकास नहीं होता।
- 18:53कीर्ति दिव्य होती कहानी आपको सुनाएंगे, तुम्हें लगेगा समझा आ
- 19:03गया हाँ हूँ हाँ हाँ हूँ। हूँ भी करोगे?
- 19:10क्योंकि बातें ही मजेदार करेंगे, लेकिन पता ही नहीं कुछ नहीं।
- 19:21अब देखिए ये कितना समझा पाते हैं आपको?
- 19:25तुम देख लेना किसी भी शर्क को सुन लेना, जो बुद्धि ने समझा और जो
- 19:32आँखों ने देखा जो तुम्हारी समझ में आया वो समझ में बुद्धि के
- 19:38द्वारा आया या आँखों को देखने से आया या इंद्रियों के द्वारा आया।
- 19:44बस उसी का वर्णन हो सकता है तो उसी का वर्णन ये लोग करते हैं,
- 19:51उससे पार नहीं, लेकिन फरीद जानते हैं कि इससे पार उस अखंड की धारा।
- 20:05बड़ी बराट है, जिसकी गणना भी नहीं हो सकती।
- 20:12असंख्य है अशंक नाउ अशंकथा बाबा कहते हैं गणित नहीं हो सकती।
- 20:29छोटी छोटी बातें तुम दिमाग में भर लेते हो और तुम ये भ्रम पाल लेते
- 20:40हो कि हमने सब जान लिया और सब जान लिया तो इसका मतलब साफ है।
- 20:47के और जानना बाकी है नहीं और अगर और जानना बाकी नहीं है तो फिर
- 21:01तुम्हारा मन क्यों चलता है? क्या ढूंढता है तुम्हारा मन?
- 21:10चौबीसों घंटे यह चलता क्यों है? अगर और कुछ नहीं चाहिए, तुम्हें
- 21:18मिल गया सब कुछ, तो यह मन क्या ढूंढता है?
- 21:31वह मन जो ढूंढता है वह इन सारे लोगों से नहीं मिलेगा।
- 21:37क्योंकि ये सर लोग अपने टाइम टेबल बनाएंगे, किसी से पूछ लो।
- 21:4324 घंटे 25 तो होते भी नहीं, दिन में ही 24 घंटे और चौबीसों घंटों
- 21:51का इनके पास पूरा टाइम टेबल। ये नॉन बीज़ी कभी भी नहीं होती।
- 22:01इनका सब निर्धारित है। दे अरे बाउंडेड विथ टाइम इन टाइम।
- 22:12और वह समय से बाहर है समय की प्रति से बाहर है जीसको तुम आनंद
- 22:20कहते हो और उसकी जरूरत इनको भी है, तुम्हें भी है तो तुम इनसे
- 22:31ज्ञान ले लेना। पेट भरने के लिए शान शोकत के लिए
- 22:35गदियां पाने के लिए सारे फॉर्मूले इनके पास हैं।
- 22:44बता देंगे, लेकिन कहीं भूल के भी आनंद पाने की।
- 22:52चेष्टा इनसे मत करिएगा। मैंने पहले भी एक प्रवचन में कहा
- 22:57था, जीस दिन अजामिल की कथा ये सारे लोग सुनाने लग गए।
- 23:05उस दिन कहर हो जाएगा क्यूँ? अजामिल की कथा आध्यात्मिक कथा है
- 23:14ये तोलेंगे उसको दिमाग से ये तोलेंगे उसको जैसा आँखों से देखा
- 23:22लेकिन दोनों चीजों से बाहर की चीज़ है अजामिल और कभी।
- 23:29बात करूँगा मैं उस पे जो समझ में आता है और जो दिखता है बस उसी का
- 23:43बखान हो सकता है एक बात को समझ लेना उसके पार का बखान तो हो ही
- 23:48नहीं सकता। उसके पार का होता है अनुभव छोटी
- 23:53छोटी बातों को जो अनुभव की होती हैं, उसे आप व्याख्यायित नहीं कर
- 23:58सकते। शब्दों में दे आर अनेबल टू
- 24:06एक्सप्रेस। फरीदा सुख दुख एक कर सुख आय दुखन
- 24:30मन से लाह विकार, कामय क्रोधाय लोभाय मोह अंकार वह ईर्षक विश।
- 24:40जो आये प्राकृतिक है, किसी कारण से आया होगा।
- 24:52अकारण नहीं आता अकारण तो एक ही चीज़ आया करती है, वो तुम्हें बता
- 24:59दे। बाकी सभी चीजें कारण से आती हैं।
- 25:05अकारण आती है एक ही चीज़ जैसे तुम टूट रहे हो, बस उसी की तमन्ना है
- 25:15तुम्हें। उसी के लिए तुम मरते हो और उसी के
- 25:20लिए तुम जीते हो। मेरी है तमन्ना तेरे घर के सामने।
- 25:37मेरी जान जाए मेरी जान जाए हाय मेरी है तमन्ना तेरे घर के सामने।
- 25:56मेरी जान जाए, मेरी जान जाए। किसी भी चीज़ के लिए तुम जान
- 26:09नुशावर नहीं कर सकते समझ लेना ये बात समझने जैसी।
- 26:16कुछ सीखने के लिए तुम जान नशावर नहीं कर कुछ इकट्ठा करने के लिए
- 26:23तुम जान नशावर नहीं कर सकते, जान को सदा बचाए रखोगे और पदार्थ को
- 26:31इकट्ठा करना और गदियों को इकट्ठा करना।
- 26:35और ज्ञान को इकट्ठा करना, सम्मान को इकट्ठा करना, तुम जान को
- 26:40कुर्बान नहीं कर सकोगे लेकिन एक चीज़ के लिए तुम जान को कुर्बान
- 26:45कर दोगे। क्या है वो चीज़ जीसको तुम आनंद
- 26:51कहते हो? जिसके लिए परवाना क्षमा में जल के
- 26:57वश में भूत हो जाता है उसे संत कहते हैं आनंद हाँ उसे प्रेमी
- 27:07कहते हैं प्रेम फकीर कहते हैं इश्क हकीक की।
- 27:19उसके लिए तुम जान भी परवान कर सकते हो और फरीद यही कहते हैं।
- 27:24कबीर भी यही कहते हैं। बाकी चीजों की तमन्ना तो बुद्धि न
- 27:31डालो। कोई न कोई हल मिल जाएगा।
- 27:39लेकिन एक चीज़ ऐसी और उसी की तमन्ना है तुम्हें, जो बुद्धि
- 27:45लड़ने से नहीं मिलता। कैसे मिलता है बुद्धि छोड़ने से
- 27:48मिलता है? तुम तो हर चीज़ बुद्धि में भर
- 27:52लेना चाहती हो फिर क्या करें फिर आनंद कभी निभाओगे, बस यही
- 28:01पुरस्कार है प्रकृति का तुम्हारे लिए।
- 28:06अगर तुम बुद्धि उसके चरणों में सौंप देते हो सर्पधर्माण पर तज्ज
- 28:10मामी कम शरणं वृक्ष अहम् तो आम सर्प पापे भव मोक्ष श्याम माँ
- 28:16सुचाह मैं तुम्हें सभी दुखों से मुक्त कर दूंगा।
- 28:22बुद्धि को छोड़ने का साहस है जिसमें नहीं।
- 28:25समर्पण करने की चाहत जिसमे नहीं समर्पण करने की तीव्र भावना भीतर
- 28:32से जिसके नहीं आई वह उस आनंद की कल्पना भी ना कर रहा है।
- 28:47और फिर ये जो तुम मैसेजस करते हो मेरे पास करीब करीब सभी मैसेजस
- 28:54उनके भीतर एक ही चीज़ होती है वो क्या होती है तुम इस मीठे शहद को
- 29:04पाना चाहते हो? तुम्हारी आत्मा की चीख पुकार
- 29:13चीतकार करती है तुम्हारी आत्मा मुझे आनंद चाहिए, लेकिन दब जाती
- 29:21है बुद्धि तक आते आते। तुम उसे ढाल लेते हो, पैसा चाहिए
- 29:27होगा, जैसे बच्चा रोता है, तुम समझते तो हो भूखा होगा।
- 29:36दूध पीला देते हो, वह नहीं पीता, उलटी कर देता है, फिर तुम कहते हो
- 29:41पेट दुखता होगा। लेकिन फिर रोता रहता है।
- 29:481000 कोशिशों करते हो, तुम जायफल रगड़ के दे देते हो, बुखार चेक
- 29:53करते हो लेकिन वो रोने से हटता नहीं, तुम्हारी समझ से बाहर हो
- 30:00जाता है। बता वो सकता नहीं, समझो तुम्हें
- 30:06आता नहीं है आत्मचित्रकार करती है और तुम्हें समझ नहीं आता तुम
- 30:16सोचते हो धन मांगती हो क्या? पदवी मांगते होंगे, मान सम्मान
- 30:24मांगती होगी, ज्ञान मांगती होगी, खोपड़ी को भर लूँ और सभी लोग
- 30:29खोपड़ी को भरे फिरते हैं। सब मेरे से तेज तर्रार हैं, सब
- 30:34ऊंची गद्दी पर बैठे हैं, सब के पास प्रचुर मात्रा में धन है, सभी
- 30:38लैंडलोर है। लेकिन नहीं, तुम गलती में हो
- 30:45आत्माचित कार्य करती है, उस चीज़ के लिए जो अकारण आता है, पदार्थ
- 30:53उसका कारण नहीं होता है। लेकिन तुम पदार्थ को कमाने निकल
- 30:59जाते हो, वह आता है, अकारण बिना किसी कारण के आता है।
- 31:05इसे समझ न पाओगे, लेकिन इशारा काफी है।
- 31:08जो इशारा जिसने पकड़ लिया वह समझ जाएगा।
- 31:19ये मन तुम कहते हो ऊपर जगता है, बोलता है, रात को भी बोलता रहता
- 31:24है, सपने में बोलता है दिन में बोलता लेट जाते तो बोलता खाना
- 31:29खाते तो बोलता चलते फिरते तो बोलता ये रुकता है।
- 31:41कारण क्या है? कुछ ढूंढता है और तब तक यह
- 31:49चिल्लाता रहेगा जब तक यह उसे मिलेगा नहीं जिसे वो ढूंढ रहा है।
- 31:57चिल्लाना बंद तब करेगा। जब उसे वो मिल जाएगा, जो ये
- 32:01मांगता है उसे तृप्ति कहते हैं जब आवय संतोष धन सब धन दूर समान, फिर
- 32:13ये चुप हो जाएगा। जैसे प्यासे को प्यास लगी, पानी
- 32:17मिल गया, भूखे को भूख लगी, खाना मिल गया, तरफ़ तो हो गया फिर वह
- 32:24चलाएगा नहीं, भूखा हूँ, प्यासा हूँ, नहीं करेगा संत के पास तब
- 32:32जाना। जब तुम समझ जाओ पदार्थों से भूख
- 32:37मिटी है, फिर निश्चित ही उसकी भूख होगी जिसकी तरफ मैं इशारा करता
- 32:46हूँ, इसलिए मैं पहले सर लोगों के पास भेजता हूँ तुम्हें वहाँ जाओ।
- 32:54ओके मिटी तो ठीक नहीं मिटी तो संत का दरवाजा खट खटा लेना और मैं
- 33:02पक्का कहता हूँ कि इन सर लोगों की नहीं मिटी, तुम्हारी क्या
- 33:07मिटाएंगे? दिल ढूँढता ही रहेगा दिल।
- 33:20ढूँढता है फिर वही फुर्सत के रात दिन दिल ढूँढता।
- 33:34है। फिर वही फुर्सत के रात दिन बैठे
- 33:44रहे। तसबुरे जाना।
- 33:50किये हुए दिल ढूँढता है फिर वो ही फुर्सत के रात दिन।
- 34:05फुर्सत के रात फुर्सत में मिलता है वह।
- 34:10और तुम्हें आज डॉक्टर भी समझाते हैं, अकेले मत बैठो, अपने आप को
- 34:19बीज़ी रखो इसलिए तुम दुखी हो ये पढ़ाने वाले सर लोग भी तुम्हें
- 34:29बीज़ी रखते हैं। इतना सा सिलेबस दे देते हैं कि
- 34:37तुम सोने तक को मोहताज हो जाते हो, जो नेचुरल प्रोसेसर है।
- 34:49नॉन बिज़नेस के लम्हे तुम कैसे पैदा करोगे?
- 34:53फुर्सत के लम्हे कैसे पैदा करोगे और वह मिलता है फुर्सत के लम्ह और
- 35:02जब तुम बड़ी नौकरी पे चले गए, बड़ी पदवी आ गई।
- 35:08समृद्धि मिल गई, सब मिल गया जो चाहा था लेकिन तुम पाओगे भीतर
- 35:18जागोगे खाली के खाली रह गए सोने के सोने रह गए अगर तुम्हें ऐसा
- 35:26लगे। तो संत का दरवाजा खटखटा लेना और
- 35:31ऐसा लगेगा तुम जज बन जाओ, सुप्रीम के जज बन जाओ, तुम सीएम पीएम की
- 35:42गद्दी ले लो। लेकिन आखिर में क्या होगा ये जो
- 35:53दो बार, चार बार पांच बार पीएम सीएम बनके कहते हैं एक बार वो
- 35:59मतलब तृप्ति नहीं हुई। साफ बात है।
- 36:04तृप्ति नहीं हुई तो एक बार फिर झूठा उठा लिया।
- 36:09अब के फिर वोट डालता हूँ और सदा इनके हाथ में ठूठा ही रहा काम ये
- 36:19ठूठे को कभी फेंकना इनके लिए मुश्किल है।
- 36:24क्यों? क्योंकि ये नॉन बिज़नेस में कभी
- 36:27आएँगे नहीं अब के चुनाव जीत लिया, जीत लिया, ये तो हो गया, अब अगला
- 36:35कैसे जीतेंगे? उसमें खो जाएगा, यह कभी ये व्यस्त
- 36:42नहीं होते। और वह मिलता है अव्यस्तता में,
- 36:49व्यस्तता में वो कभी मिलता नहीं। मुझे परमात्मा रोज़ कहता है ये जो
- 36:57मुझे ढूंढ रहे हैं, मैं रोज़ इनके द्वार खड़ा रहता हूँ, लेकिन पाता
- 37:02हूँ। दे आर बीज़ी बाहर पट्टिका लिखी
- 37:06होती है। हम व्यस्त हैं, कृपया छेड़छाड़ न
- 37:10करें तो मैं वापस चला जाता हूँ, परमात्मा ठीक कहता है।
- 37:22वह तो आता है, उसके तो तुम बच्चे हो, उसे तो तुम्हारी बड़ी फिक्र
- 37:29है। उसका लाल गुम हो गया है।
- 37:36उसके बच्चे, बच्चियां गुम हो गई। वो तुम्हारे द्वार पे आता
- 37:40खटखटाता, लेकिन यू अरे बीज़ी इन यूपीएससी इन आई ए एस इन जजमैंट्स
- 37:54इन डिस्कैशन्स यू अरे बीज़ी? तो परमात्मा कहता मैं वापस लौट
- 38:02जाता हूँ और करेबे का विचार इतना हिंसक नहीं कि दरवाजा तोड़ दे
- 38:12बड़ा अहिंसक है नॉन वायलेंट। चला जाता है वापस द्वार जरूर खट
- 38:26खटाता है तुम्हारा तुम मैं सुनता नहीं हूँ तुम इतने व्यस्त हो तुम
- 38:34कहते हैं छेड़ो मत मुझे। अभी मैंने एग्ज़ैम में बैठना है
- 38:39अभी मैंने कॉम्पिटिशन फिर तुम ढूंढ़ते हो परमात्मा को चैन को,
- 38:51आनंद को, खुशी को सच्ची खुशी को मिलेंगे भी कैसे?
- 39:00जब वो द्वार पे रो जाता और तुम अपने आपको व्यस्त रखते और अव्यस्त
- 39:05तो तुम हुए नहीं कभी एक बार अव्यस्त हो के देखो दिल ढूंढता है
- 39:14फिर वही फुर्सत के रात दिन। बैठे रहे तो सबूरे जाना किए हुए
- 39:20हैं। बस देखते रहे प्यार के लम्हों में
- 39:25तेरी आँखों में झाँका तेरी। आँखों के सिवा दुनिया।
- 39:38रखा क्या है तेरी? आँखों।
- 39:45के सिवा दुनिया में रखा क्या है? हे उठे सुबह चले।
- 39:57ये झुके शाम ढले मेरा जी न मेरा मरना फलकों के तले।
- 40:13ये उठती हैं तो सभा होती है। ये झुकती है तो शाम।
- 40:21होती है। ये उठे सुबह चले ये झोके शाम ढले।
- 40:33झुकती है तो शाम ढट जाती है। मेरा।
- 40:37जीना मेरा मरना इन्हीं पलकों के तले।
- 40:46इन पलकों के तले। तेरी आँखों के सिवा दुनिया में।
- 40:55रखा क्या है? और रखा भी क्या है जब तुम थक जाओ,
- 41:03चारों तरफ़ से घोर निराशा, अंधकार अमावस्या की रात और बादल घनेरा
- 41:11चारों तरफ़ दुखड़े। तुम कितने भी बड़े हो, कितने भी
- 41:18बड़े गद्दी निशी हों, कितने न्यूरोन् जो तुमने सूचनाओं से भर
- 41:25लिए हैं सभी पर ये बेला तो आता ही है तो फिर एक काम करना।
- 41:35फिर उसके दरवाजे पे दस्तक देना है आज तक वो तुम्हारे दरवाजे पे
- 41:40दस्तक देता है तुम व्यस्त थे जब तुम्हारे ऊपर गनेरे बादल छा जाएं।
- 41:50तो तुम उसके द्वार पे दस्तक दे देना वह खोल देगा और तुम्हारा
- 42:00मसला हल हो जाएगा फरीदा सुख दुख एक कर मन से लह विकास।
- 42:13सुख आए, दुख आए, कोई भी बेकार आए उसको स्वीकार कर लो, जी आयेंगे दे
- 42:20आर नेचुरल शरीर है तो ये आयेंक मर गए तो कोई नहीं हरका आगे चलें।
- 42:32वक्त थोड़ा रह गया है। अल्लाह पावे सो पला यह तुम्हारी
- 42:45इच्छा से नहीं आए। फरीद कहते हैं, यह उसकी इच्छा से
- 42:49आए। तुम्हारी इच्छा से कुछ हुआ भी
- 42:53नहीं। तुम अपने आपको मूर्ख बनाने में।
- 43:00बड़े माहशिर हो तुमने खुद को ही मूर्ख बना दिया जानबूझकर मूर्ख
- 43:08यानी तुम दुखी हो सयाना तो वो होता है जो कभी दुखी नहीं हुआ।
- 43:16जो सुखी हो गया, जो शांत हो गया, जो आनंदित हो गया।
- 43:19जो नाचने लग गया वो वो सयाना जो गाने लग गया मस्त भाव से वो मेरा
- 43:26की तरह नाचने लग गया, पद वही सयाना, तुमने अपने आप को मूर्ख
- 43:34जानबूझकर बना दिया। तुम ही हो कारण उसके अला पा व्य
- 43:40सो पला यह अल्लाह की दात है सुख, दुख, काम, क्रोध, लोह, मो।
- 43:48अहंकार भै मधु मत्सर। इरशादेश ये सब उसकी दांत है, इनको
- 43:56स्वीकार कर लो। इनके साथ एकाकार मत हो।
- 44:02ना झगड़ो ना एकाकार हो, ना भगाओ ना अपनाओ ये बात को समझ लेना चूक
- 44:10सकते हो तुम? फिसल सकते हो, बड़ी फिसलन भरी
- 44:15हैरान या तो तुम चिपक जाते हो इन्हें भोग लेते हो या तुम इन्हें
- 44:25दुश्मन की तरह घसीटते हो बाहर निकलो।
- 44:27यहाँ तुम्हारा क्या काम है? ये दोनों ही नहीं करना फ्रीज़
- 44:34कहते एक्सेप्ट कर लेना, झगड़ा नहीं करना, ये आएँगे इनको आने
- 44:40देना बस इनसे एक आकार मत होना और इनसे झगड़ा भी मत करना।
- 44:46ये दोनों चीजों से बच सकोगे। अगर बच सकोगे तो फ्रेद कहते हैं
- 44:53ता लब बे दरबार तो दरबार मिल जाएगा तुम्हें जीस अखंड खुशी की
- 44:59तलाश में तुम दर दर भटक रहे थे आज तलक और तुम्हें मिली नहीं थी सब
- 45:06कमाया आनंद न आया। अल्ला पा वे सोप ला इन सब को आने
- 45:16देना उसकी न्यामत समझ के अल्ला पा वे सोप ला वो अच्छा ही भेजेगा यह
- 45:26मालिक है, तुम्हारा पिता है। पिता का भी बुरा सोच सकता है अपने
- 45:30पुत्र पुत्रियां का वह किसी जीव तक का बुरा नहीं सोच सकता।
- 45:35वो सदा भला ही सोचता है। यही ला उसे कहते हैं वह जो अच्छा
- 45:40करता है, भले के लिए करता है, वह जो करता है।
- 45:49अच्छा करता है और भले के लिए करता है अल्लाह पा वे सो पला ता लबे
- 45:56दरबार सरल भाषा में मैंने अर्थ कर दिया वक्त बड़ा कम लिया।
- 46:08फिर भी पौन घंटा हो गया। फरीदा सुख दुख एक कर मन से लावकार
- 46:18फरीद कहते हैं, सुख को भी अपना ले आने दे।
- 46:22दुख को भी अपना ले कुंत ने तो मांग ही लिया के दुख दे दे प्रभु
- 46:30काम क्रोध लोग अंकार ये अल्लाह की देन हैं आएँगे जिसने शरीर दिया
- 46:36बेकार तो आएँगे भाई। तुम कहो विकार मुक्त जीवन चाहिए
- 46:43तो तुम मुर्ख हो, फिर तो मेरी जा जा रही छोके समझ रहे तो विकार
- 46:53नहीं आएँगे। अल्लाह पा वे सोपला ये उसके दांत
- 47:07हैं और वैसे तुम्हारी दांत तो कुछ है भी नहीं तुम्हारा सिर्फ दागा
- 47:11है, तुम तो स्टेम्प पर लगा देते हो मेड इन इंडिया और तुम्हारे पास
- 47:16कुछ है भी नहीं। हाँ, जब बेहतर बार तो मिलेंगे वो
- 47:32परम खुशी परम आनंद जो भीतर से पुकार उठ रही थी जब पानी पानी।
- 47:39भूख भूख करा रही थी और तुम्हें चैन नहीं आ रहा था, जो बच्चा रोए
- 47:45ही चला जा रहा था और तुम्हें पता नहीं था इसका क्या दुख रहा है?
- 47:51प्रीता सुख दुख एक कर मन से लह विकार।
- 47:57सुख भी आएँगे, दुख भी आएँगे। सारे बेकार भी आएँगे।
- 48:04इनको उतर जाने दे, इनको स्वीकार कर ले ना अपना ना दुग्धकार ये
- 48:12दोनों शब्द समझने योग्य हैं। लड़ोगे तो फसोगे।
- 48:19एक्सेप्ट करोगे तो फसोगे भोगोगे फिर तो क्या करो?
- 48:26इन्हें आने दो, स्वीकार कर लो, स्वीकार करने से भोगना नहीं
- 48:29पड़ेगा। तुम्हे ध्यान रखना, ये मेरा सूत्र
- 48:32याद रख लेना, ये फरीद ने दिया। स्वीकार कर लो ये आएँगे भाई
- 48:42स्वीकार करो, इनके पीछे मत लगो, भोगो मत इन्हें दुधकारों भी मत
- 48:48क्यों अपनी शक्ति व्यय करनी ये तुम्हारी ही शक्ति है, अल्लाह की
- 48:52शक्ति है। अल्लाह की शक्ति से अल्लाह की
- 48:55शक्ति को बढ़ाओगे एक गदर मचाओगे रणक्षेत्र बनाओगे शरीर को इस
- 49:03दिमाग को नहीं, नहीं फरीद कहते हैं, लड़ो मत, स्वीकार करो।
- 49:11भोगो मत और लड़ो, मत स्वीकार करो अल्ला पावै सोप पला जो उसने दे
- 49:19दिया फला है शंकर विष पी लेते हैं अल्ला पावै सोप पला।
- 49:32इतना लंबे दरबार जीस खुशी की तलाश में तुम जन्मो जन्मो से फिर रहे
- 49:37थे और चूक रहे थे उस आनंद को इस फॉर्मूलेशन से आपको मिल जाएगा
- 49:45इट्स दी अल्टीमेट फॉर्मूलेशन ऑफ आनंद, वह आनंद होता क्या है अभी
- 49:51तो तुम्हें पता भी नहीं। तुम तो कहते हो होता ही नहीं जैसे
- 49:55मार्कस कहते हैं परमात्मा नहीं होता कर्म का विधान लेखा जोखा
- 50:01नहीं होता, चारबाग कह देते हैं, नीच से कहते हैं वो था तो लेकिन
- 50:06मर गया, मैंने दफन कर दिया। आचार्य कहते हैं लाइटर में नहीं
- 50:11होता। और तुम्हारे सर कितनी?
- 50:14आनंद नहीं। होता होता ही नहीं तुम खाओ पीओ,
- 50:20मौज करो गद्दी नशीं हो जाओ बड़ी बड़ी डिग्रीज़ ले लो कॉम्पटीशन ले
- 50:26लो मौज करो, धन कमाओ परचुर सा। अच्छी सी कार गाड़ी ले लो,
- 50:32हेलिकॉप्टर ले लो, जहाज़ ले लो, बस तुम सुखी हो जाओगे, लेकिन नहीं
- 50:38सुखी नहीं होगे। फ्रीद कहते है तुम सुखी नहीं हो,
- 50:42फिर भी तुम्हारे भीतर कोई चीज़ तुम्हे सताती रहेंगी।
- 50:48अभी भी तुम्हें कुछ चाहिए, वो क्या चाहिए, वो कैसे मिलेगा, ये
- 50:53बताते हैं वह आनंद चाहिए, वो मिलेगा अल्लाह की दांत को स्वीकार
- 51:00कर के वह जो देता है मेरी तो यही मर्ज़ी कर वो ही।
- 51:07मेरी तो यही अर्जी कर वही जो तेरी मर्जी है, तू वैसी ही नचा जैसे तू
- 51:14नचाना चाहती है, मेरा अपना कुछ नहीं, और है भी नहीं।
- 51:20जब तक तुमने समझा कि मेरा कुछ है, तब तक तुम हो और तुम्हारा होना ही
- 51:25दुख है। तुम्हारा होना दुख का कारण है।
- 51:31जीस दिन तुमने जान लिया कि मेरा कुछ नहीं तेरा तुझको अरबण क्या
- 51:38लाके मोरा उस दिन न तुम रहोगे, न तुम्हारा रहेगा।
- 51:46उस दिन जिसका है उसका ही रहेगा। अभी तक तुम्हें भ्रम है कि मेरा
- 51:50है, मैं सदा ही दो बातें कहा करता हूँ।
- 51:57दो तरह के लोग हैं, ये कहते हैं प्रकृति सयभम है, प्रकृति स्वयं
- 52:01उत्पन्न हुई, बुद्धि जैसे लोग हैं।
- 52:04और एक कहते हैं, प्रकृति स्वयं नहीं पैदा हुई, पर महात्मा ने
- 52:07पैदा किया नानक जैसे लोग मैं कहता हूँ, अगर दोनों में से दोनों भी
- 52:13सही हैं तो एक बात तो सिद्ध होती है अगर प्रकृति स्वयं से पैदा
- 52:21हुई। तो प्रकृति का प्रत्येक अणु अपना
- 52:25स्वयं मालिक है। तुम मालिक ने और अगर प्रकृति
- 52:31परमात्मा ने पैदा की तो प्रकृति का प्रत्येक अणु का मलक परमात्मा
- 52:37है। तुम क्या लगते हो?
- 52:39दोनों ही स्थितियों में तुम मालिक ने।
- 52:44सैभम चाहे प्रकृति हो सैभम चाहे परमात्मा हो, तुम्हारा कुछ नहीं
- 52:51है, तुम तलाश में हो आनंद के और आनंद मिलेगा।
- 52:57फरीद कहते हैं, कैसे मिलेगा? अल्लाह पा वे सो पला जिसने
- 53:09तुम्हारे हृदय के भीतर उतर गया। अभी तो खोपड़ी में नहीं उतरता,
- 53:14अभी तो खोपड़ी का दिन है ना इट्स रॉन्ग कॉन्सेप्ट।
- 53:20इट्स ए बैड कॉन्सेप्ट यह थोड़ी होता है, हम भी तो हैं भाई
- 53:28तुम्हारा सिर्फ दावा है ये दावा छोड़ जाए, तुम सुखी हो जाओगे इस
- 53:37दावे के कारण तुम दुखी। जीस दिन तुम्हारा कुछ ना रहा उस
- 53:41दिन तुम सुख के स्वरूप हो जाओगे तुम आनंद के सागर हो जाओगे।
- 53:52राधे राधे श्याम मिलादे गोविंदा। गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे
- 54:13गोविंदा गोपाल हरे। मेरी नैय्या पार लगा दे, गोविंदा
- 54:26गोपाल हरे मेरी नैय्या पार लगा दे।
- 54:37गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे ओह।
- 54:56धन्यवाद।