Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Mar 26 - परमात्मा की रज़ा और 'कर्ता-भाव' से मुक्ति का मार्ग!! सबसे सुखी व्यक्ति का रहस्य!!
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- 0:13नीदरलैंड के एक प्रसिद्ध चित्रकार बेन सैंट वान गाग यह बच्चा था
- 0:32सातवीं आठवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके अध्यापक ने पूछा उससे गौ इस
- 0:45दुनिया में सबसे ज्यादा सुख है? कौन और सबसे ज्यादा दुखी कौन?
- 1:09तो विन्सेन्ट यरा बीएस में पड़े बगैर केत गुरुदेव।
- 1:24सबसे सुखी बहे जो हर हाल में जैसा है जैसा भी है राजी है।
- 1:42हुक्म रजाई चलना नानक लिखिया नारू उसकी रजा में ही राजी हैं।
- 1:58वान गोप का ये उत्तर सुनके? अज्ञात तो बहुत खुश है।
- 2:08उसने कहा क्या ऐसा हो सकता है? प्रश्न लाजवाब है।
- 2:23वो क्या तेरी क्यों नहीं? हर हाल में जो खुश रहता है वही
- 2:37सही मायने में सूखे? मैं जिंदगी का साथ निभाता चला
- 2:49गया। गम और खुशी का फर्क न महसूस हो
- 2:58जाऊं मैं दिल को उस मुकाम पे लाता चला गया।
- 3:09वान का थोड़े बड़े हुए चित्रकार बन गए।
- 3:15एक वक्त नीदरलैंड के सबसे मशहूर चित्रकार थे।
- 3:25सबसे महंगे चित्र उसके विकसित थे। लेकिन वह खुश था।
- 3:37साधारण जीवन व्यतीत करता था। एक वक्त आया जब उसकी सेहत बिगड़
- 3:48गई। मानसिक हॉस्पिटल में दाखिल करना
- 3:55पड़ा और जब ज्यादा तो वे बिगड़ गए तो वही अध्यापक उसके पास पता लेने
- 4:10आए कहीं उसका घर पास ही होगा। उसका सारा शरीर दर्द कर रहा था,
- 4:26बुरी तरह उसके चक्कर आ गया था। शरीर में इतने तकलीफ थी तो उसी
- 4:39टीचर ने पूछा। क्या नाम था सेन्ट सेन्ट वैसे
- 4:49साधु को भी कह देते हैं। सेन्ट ने पूछा 1 कॉक क्या अभी जो
- 5:02परमात्मा करता है वो ठीक किया तो 1 को बोला क्यों नहीं गुरुदेव?
- 5:19वह ठीक नहीं करता है। तुम्हारे चेहरे पर पहले भी वही
- 5:32खुशी थी, आज भी वही खुशी है लेकिन डॉक्टर कहते हैं वह बड़ा डेंजरस
- 5:38कंडीशन में तो वान कॉक मेरी दृष्टि से पहुंचा हुआ संत।
- 5:50नीदरलैंड का वह चित्रकार विंसेंट वैनकॉक तो सेन्ट ने कहा, गुरुदेव
- 6:06ने पुत्र तुम देखने में तो कमजोर लगते हो।
- 6:14आँखें धसनी है सब में शक्ति भी कमजोर हो गई, बाल भी हो गए, चमड़ी
- 6:28पे झुर्रियां पड़ गई। क्या तुम्हें कुछ फर्क नजर नहीं
- 6:37है? तो तो विन्सेन्ट गाग बोला नहीं?
- 6:46यह आखिरी बात ध्यान देने योग्य है।
- 6:55विंगसेंट वैनगाब ने कहा कि वो परिस्थितियों के साथ बद्र जाए
- 7:01कुरदेव वह मैं नहीं है, मैं तो सददा सुखी रहने वाला।
- 7:13वेनसेन्ट गौकम गुरु को पता नहीं समझाया कि नहीं आया, जरूरी नहीं
- 7:23होता ज्यादा सूचनाओं को संग्रहित करने वाला गुरु।
- 7:32विकास हिंदी भी कीर्ति जैसा आचार्य प्रशांत जैसा सब इकट्ठा कर
- 7:46लिया हो, विज्ञान भी साहित्य भी, रसायन विज्ञान भी।
- 8:00साइको एनालिसिस भी सबकी सूचनाएँ संग्रहित करने से व्यक्ति सुखी
- 8:09नहीं होता। वह खेल तो हमारे न्यूरोन से।
- 8:18मस्तिष्क के भीतर के न्यूरॉन भी जिसे फीड कर लेते हैं और कितनी भी
- 8:27मात्रा में फीड कर लेते हैं, उससे व्यक्ति ज्यादा जानकार तो हो जाता
- 8:35है, समयदार नहीं होता। एक एक शब्द को ध्यान से सुनिए ये
- 8:46प्रवचन मेरे अंतिम प्रवचन चल रहे हैं।
- 8:51ओके, मैंने जो बोलना था बोल दिया। अब मैं वो बोल रहा हूँ जो किसी ने
- 9:02पूछा नहीं बगैर पूछे बोल रहा हूँ किस के सर इन दी रो इन पर गए।
- 9:17जो हिसार की कैलकुलेशन भी कर लेता है।
- 9:20फिजिक्स भी जानता है, केमिस्ट्री भी जानता, जियोलॉजी भी जानता है।
- 9:25बॉटनी भी जानता है, साइकोलॉजी भी जानता है, पैथोलॉजी भी जानता है,
- 9:30जो सब जानता है, जो सब जानता है वह जानकार।
- 9:36और जानकारीयों से व्यक्ति सुखी नहीं होता, तुम क्या करते हो?
- 9:46तुम दुखी क्यों हो? तुम जानकारीयों को अपने जीवन में
- 9:54इम्प्लिमेंट कर सकते हो? बाबा ने कहा, हुक्म रजाई चलना,
- 10:02नानक लेके आना और तुमने अपने दिमाग के तंतुओं में फीड कर दिया,
- 10:12लेकिन जब अच्छे दिन आए तो बहुत खुश हुए।
- 10:15शुक्राणा किया वाह हे गुरु और जब बुरे दिन आए तो शिकायत करने लगे,
- 10:26एक्सेप्टेंस हो गए। जानकारी का पता नहीं गया कहाँ गई
- 10:33जानकारी तुम्हारी? हर हाल में राजी रहना गुम हो गई
- 10:40क्योंकि वह इम्प्लीमेंटेड थी, वह भीतर से नहीं आई थी, वह आपने बाहर
- 10:50से थोपी थी। और बाहर के रंग सदा उघड़ जाया
- 10:54करते हैं। वो रंग चाहे कोई भी हो तो तुम
- 11:03जानकारीयों को जुटा के गीता को पढ़ के स्टंप कर गीता को पढ़ के
- 11:09उपनिश्चित को पढ़ के वेदों को पढ़ के।
- 11:13अन्य अन्य किताबों को पढ़कर जानकारियां जुटा सकते हो, वेदांत
- 11:17का प्रचार कर सकते हो, लेकिन वेदांत में जो चीज़ लिखी गई, जो
- 11:23कही गई कैसे उस महा आनंद के राग में उतर जाओ, दोनों कर सकोगे।
- 11:35जानकारीयों के पास कोई ऐसा तत्व नहीं है जो तुम्हें आनंद के रास
- 11:42के पास पहुंचा दे, जो रास कृष्ण करते हैं, जो रस कृष्ण पीते हैं।
- 11:53तुम बेक खरीद सकते हो, तुम्हें करोड़ों लोग भी सुन सकते हैं
- 11:58तुम्हें सारी दुनिया भी सुन सकते हो, लेकिन जब तुम घेर आओगे रात को
- 12:05सो तो किसी न किसी बात के ऊपर चिंता हो।
- 12:13और तुम उन चिंताओं को अपनी सूचनाओं के द्वारा इम्प्रिमेंट
- 12:19करके मिटाने की चेष्टा करोगे, लेकिन मिटेंगे नहीं और गर्म
- 12:23मिटेंगे तो टाइम पर रह के थोड़े गहरे पर वचन।
- 12:29शांति से सुन ना समझ आए तो रिवाइंड करके सुन लिया करो
- 12:42जानकारियां सभी किताबों को फाड़ दो।
- 12:47शास्त्रों से नहीं मिलता सुख। शास्त्रों में नहीं होता अमृत का
- 12:53वो रस, शास्त्रों को आग लगा दो अगर इतनी बेइज्जती नहीं करना
- 13:01चाहते तो अलमारी में बंद कर दो तुम जिंदगी की बात शास्त्र से
- 13:09पूछते हो? ज़िन्दगी जीकर पता चलती है
- 13:16शास्त्रों में मर्दों की बात होती है, ज़िन्दगी को सीखना है तो जीना
- 13:25पड़ेगा। दुनिया में अगर आये हैं, जीना ही
- 13:43पड़ेगा दुनिया में अगर आये हैं, जीना ही पड़ेगा।
- 13:54जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा जीवन में अगर आए हो, जीना
- 14:07ही पड़ेगा जीवन है अगर जहर तो। पीना ही पड़ेगा।
- 14:18अगर आए हो तो देना ही पड़ेगा। अगर जहर है तो जहर भी पीना
- 14:25पड़ेगा, अमृत है तो अमृत भी पीना पड़ेगा।
- 14:34तो वन गोप हॉस्पिटल में उसका गुरु पूछ रहा है सेंट गोप क्या अब भी
- 14:45तुम प्रश्न हो, कितना काम करते हो?
- 14:53हालत तो ठीक नजर नहीं आते। डॉक्टर भी कहते हैं शिरीष खतरनाक
- 15:03और तुम्हारे चेहरे की झुर्रियां तुम्हारे हाथ में।
- 15:07तुम्हारा दुबला पन तुम्हारे शरीर का काँपना तुम्हारे चेहरे का सूख
- 15:15जाना, पीला पड़ जाना, आँखों का जैसे जीवन का रस कहीं चला गया।
- 15:29तो विन्सेन्ट गौ का यह शब्द कृष्ण की उसी बात का एक अंश समझ लेना जो
- 15:43परिस्थितियों से बदल जाए। वह मैंने एक मामूली चित्रकार जो
- 15:56नक्काशी करता है चित्रों के कागजों पर दीवारों पर वो कहता है
- 16:06जो बाहर के सर्कमस्टैंसेस से बदल जाए।
- 16:12वह मैं नहीं अगर इस एक शब्द को तुम न्यूरॉन्स में न फीड करके
- 16:26हृदय की अंत की गहराइयों में उतर जाने दो।
- 16:30तो जीवंत तुम्हारा सुखद अनुभव से भरपूर हो जाएगा।
- 16:36इस एक शब्द को बाकी अलसाजों की तरह दिमाग के तंतुओं में फीड मत
- 16:44कर लेना इस एक शब्द के लिए। दिमाग को खोलना ताकि मेरे शब्द
- 16:52हृदय में प्रवेश कर जाएं और हृदय में प्रवेश करके तुम्हें बेहतर
- 17:02चले जाएं और क्रांति का टित हो जाए।
- 17:08संत कहते हैं जो बदल जाता है और बाहरी सर्कमस्टैंस है,
- 17:18परिस्थितियां बदलती हैं, तुम नहीं बदलते, अगर परिस्थितियों से तुम
- 17:24बदल जाते हो तो एक ही बात है। कि तुमने परिस्थितियों का दामन
- 17:30पकड़ लिया। अगर परिस्थितियों के बदलने के साथ
- 17:36साथ तुम बदल गए तो पक्का है कि तुमने परिस्थितियों का दामन पकड़
- 17:43लिया। परिस्थितियों में एक आकार हो गया।
- 17:50सर्कमस्टैंसेस के साथ तुम तलीन हो गए तो बिगड़ी परिस्थितियां तुम भी
- 17:58बिगड़ गए और अच्छे की परिस्थितियां और तुम भी अच्छे थे।
- 18:04ये शब्द बड़ा प्यारा है। और नाजुक भी है।
- 18:09समझ में आएगा भी नहीं, कंपनी का जड़ है ओवन को कहते हैं जो
- 18:19परिस्थितियों से बदल जाए वह है, मैं नहीं हूँ, गुरुदेव।
- 18:25और जिसने यह पता कर लिया, जिसके अंत से यह सहस्र्राज का फूल खिल
- 18:34गया, परिस्थितियां तो सदस्य आएंगी, तुम कभी बच्चे कुछ।
- 18:44तुम कभी गर्भ में भी थे, तुम कभी माता और पिता के शुभकरणों और
- 18:50अंडाणुओं में भी थे और तुम आज इससे धरबबो बचपन गया जवानी आई।
- 19:01प्रोड ताई और वृद्ध हो गए और फिर व्यक्ति मर जाता है।
- 19:07ये हालात बदल गए। ये हालात बदल गए जिसके वह है, तुम
- 19:18नहीं। ने हन्नते अन्य माने शरीर तुम
- 19:29नहीं बदलते शरीर बदलता है ने हन्नते अन्य माने शरीर।
- 19:38तुम नहीं मरते शरीर मरता है। यह अणु अणु जोड़कर जो एक ढांचा
- 19:49खड़ा हुआ उसका सारे का समूह शरीर है।
- 19:57और जब ये बिखर जाएगा तो अणु तो वही रहेंगे।
- 20:01बस एक ढांचा जो कल तक जुड़ा हुआ था, कोलेक्टिव था, आज बिखराव में
- 20:07आ गया। तो गई है माला।
- 20:22मन के बिखर गए, 2 दिन रहकर साथ न जाने किधर गए।
- 20:41हो गई है। माला माला मन के बिखर गए, 2 दिन
- 20:54रहकर साथ न जाने किधर गए। तो गई है।
- 21:09क्या तुम्हें पक्का भरोसा है? जीस ऋतीली जमीन पर तुम चल रहे हो?
- 21:15मैं तुम्हारी ही पिछले जन्मों के शरीरों की खाक न हो।
- 21:21बाहर से तो कुछ आता नहीं। यहीं का यहीं पर स्थान परिवर्तन
- 21:27हो जाता है। तुम्हें पता नहीं वह सिकंदर जो
- 21:38तुम्हारे सर के ऊपर राज़ करता था तुम्हारी गर्दनों को उड़ा देता
- 21:42था। आज तो हमारे पांव के धूल में
- 21:46बिखरा पड़ा है। आज तुम्हें पता नहीं है ये
- 21:51खोपड़े, जो कद तक तुम्हें तलवारों से काट देती थी, वह आज जमीन पर
- 21:58लुढ़कती फिर रही। संत इसे अज्ञानता कहते हैं।
- 22:12जिसने इस कलेक्टिवटी को मैं समझा वहीं दुखी हुआ।
- 22:24जिसने इस कोलेक्टिविटी को अपने आप से खुदी से अलग समझा जाना जाना
- 22:32माना नहीं मान तो लेते हैं, आचार्य रोग क्षण रोग मान लेते
- 22:40हैं, पढ़ लेते हैं और तुम्हें पढ़ा भी देते हैं।
- 22:43लेकिन निहे तो स्वार्थ कुछ और है। निहे तो स्वार्थ कुछ और है।
- 22:51जब ऐश की कुर्सी थी तो भी अंधकार गहरा था।
- 23:00इतने से बात नहीं बनेगी। दे वर नॉट सैटिस्फाइड दैट तुम
- 23:07चाहते हो वरना इन्होंने ठोकर मार दी और आपदा में अफसर को तलाश
- 23:13लिया। मेरे पास ज्ञान बहुत है, मेरे
- 23:18जंतु भरे पड़े। फिर मैं यहाँ थोड़ी सी नौकरी के
- 23:24अंदर क्यों गुजर करूँ? और फिर धार्मिक उपदेशक बन गए।
- 23:29बहुत से लोग आज ऐसे ही चैनलों के ऊपर बोल रहे हैं।
- 23:35उनके निहित स्वास्थ्य ऐसा नहीं है।
- 23:40वो जान लिए हैं अपने आप को। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।
- 23:44अगर जानलिए होते तो उनकी भागदौड़ मिट जाती, उनकी दौड़ समाप्त हो
- 23:57जाती और ठहराव में आ जाते। यह प्रमुख लक्षण प्रमुख लक्षण है।
- 24:07जिसने खुद को देख लिया वह ठहर गया।
- 24:12ठहराव से ही पाया जाता है वो और ठहराव में उतरकर।
- 24:19ठहराव ही तुम्हारे जीवन की जीने का डंका बन जाता है।
- 24:26थोड़ा मुश्किल है शब्द एक एक करके इसका सन्धि शेध कर लेना और बार
- 24:33बार सुनना समझा जाएगा? तो वन को कहता गुरुदेव
- 24:51प्रस्तुतियां बदल जाएं। उससे जो बदल गया वह मैं नहीं हूँ
- 24:57गुरुदेव और यही कृष्ण कहते हैं। इसी कृष्ण कहते हैं, वैकृतता नहीं
- 25:05नैनम चदंती शास्त्रण वह जलता नहीं नैनम दहलु बाबू का वह गलता नहीं,
- 25:17न चैनम क्लिज़न त्याग को। वह सूखता नहीं, न सूख आती मारूता
- 25:32कृष्ण भी यही कहता यह तो माला बिखर जाएगा तन 2 दिन रहकर साथ न
- 25:46जाने की दरगाह। टूट गई है माला ये एक माला है और
- 25:51सिर्फ तुम्हारा शरीर ही एक माला है ये मत समझना मैंने बहुत बार
- 25:57कहा ये यूनिवर्स ही एक माला है सारा यूनिवर्स।
- 26:04इन्हीं तंतुओं से आपस में गुथा हुआ है।
- 26:07परमात्मा रूपी बारीक धागे के बीच में और उसका धागा इसको गिरने नहीं
- 26:16देता है। वह धागा बड़ा बहुत ताकतवर है।
- 26:24उसी में सूरज चाँद से तारे घूमते हैं लेकिन वो धागा टूटता है।
- 26:30इतनी आग होते हुए भी 1,00,00,000 डिग्री सेल्सियस सूरज का तापमान
- 26:35है बेहतर का बाहर का 5000 डिग्री है।
- 26:41तो धागा तो टूट जाएगा, गल जाएगा, जल जाएगा, खाक हो जाएगा, वो स्टील
- 26:49भी गल जाएगा, तुम्हारा तुम्हारा किताब भी हार्ड पदार्थ हो।
- 27:00किसी न किसी टेम्परेचर पर जाके वह बिखर जाता है, वाष्पभूत हो जाता
- 27:05है, लेकिन परमात्मा वाष्पभूत नहीं होता।
- 27:10परमात्मा वह तत्व है जिसने सूरज को भी प्रतिक्षित कर दिया।
- 27:15अपने स्थान पर वो हाथ कैसे होंगे? जिन्होंने सूरज के इस गोले को
- 27:26जिसका टेम्परेचर 1,00,00,000 डिग्री सेल्सियस है, अब तुम्हें
- 27:31यहाँ मैं बता दूँ बीच में मुझे तो ठहरना पड़ा ये मैं सब अपने अनुभव
- 27:36से बोल रहा हूँ। मेरे शब्द मार्क्स जैसे नहीं मेरे
- 27:45शब्द चारवाक जैसे मेरे शब्द मेरे खुद के अनुभव से आज।
- 27:55मैं उसे देखा हूँ, मैं उसे जानू हूँ और मैं उसे पिया हूँ और मैं
- 28:01वही हो गया हूँ अब आगे चल कैसे होंगे वो हाथ?
- 28:15जिन्होंने 1,00,00,000 डिग्री सेल्सियस पर भगता हुआ सूरज ऐसी
- 28:21जगह के ऊपर फिट कर दिया होगा। यहाँ कोई जा ही नहीं सकता।
- 28:33इतना जलता हुआ सूरज देखिए वो कितना भी जलता है लेकिन जलता नहीं
- 28:41कहाँ जलता है अगर सूरज जल जाए। तो फिर सब अंधकार में हो जाए इतना
- 28:53जलता हुआ सूरज 1,00,00,000 डिग्री सेल्सियस में खुद नहीं जलता
- 29:01विज्ञानिक कहते हैं कि कुछ अरब साल बाद।
- 29:06यह सूरज समाप्त हो जाएगा। वह गलती में तुम्हें मैं बता दूँ,
- 29:14ये तुम्हारी कल्पनाएं हैं। अगर सूरज बूझ गया तो अगर धरती में
- 29:19चंद्रमा स्ट्राइक हो गया तो अगर धरती सूरज में गिर गई तो?
- 29:26नहीं ऐसा कुछ नहीं। उसने विधना ही ऐसी बनाई है, वह
- 29:39खुद भी अद्भुत है और उसकी संरचना भी अद्भुत है।
- 29:53इस छोटी सी बात के प्रतिमासू हत वेद।
- 30:03न तेरे न आते हैं। वेदना तेरे लेखक, सीक समझ न आते
- 30:28हैं। जन जन के प्रिय राम लखन सिंह वन
- 30:45हो जाते हैं। हो।
- 30:52वेदना तेरे लेख किसी के समझ न आते हैं।
- 31:10जीसको सोचकर जिन दृश्यों को देखकर तुम बाबा पहुँच जाते हो, आँखें
- 31:15नीर बहाने लगती हैं, दिल दुखी हो जाता है, उसकी रचना देखो कैसा
- 31:22कुशल कार्यक्रम? उसने कैसे कैसे भगवान बनाए कैसे
- 31:31कैसे इंसान बनाए? तुम सोच भी नहीं सकते उसकी कुशलता
- 31:40का और तुम कहते हो हम एक न 1 दिन उसे ढूंढ लेंगे।
- 31:47तो तुम गलती हुई, मैं तुम्हें एक बात कहूंगा, आज तुम्हें बुरी
- 31:53लगेंगी। यद्यपि वैज्ञानिक काम तो बड़ा भले
- 32:03का करता है, लेकिन क्या जो वैज्ञानिक चले गए खोज करके?
- 32:15क्या उनको मालूम था कि जो हमने खोजा वो 1 दिन इसी दुनिया को
- 32:21विनाश कर दिया और कोई वैज्ञानिक उस विराट को खोज पाएगा?
- 32:34यह दावा हर्ष पर लगता है। बच्चों से तुम ये सारा मटेरियल
- 32:44बना सकते हो। यह मटेरियल जोड़ तो सकते हो लेकिन
- 32:51तत्व बना सकते हो। यह हस्ता यह रोता।
- 32:59ये चलता ये फिरता ये खाता, ये पीता ये प्रेम करता, ये घृणा करता
- 33:04क्या तुम? यह सब कुछ ढाँचा बना सकते हो तुम
- 33:13नहीं बना सकते। इस ढांचे का जो मूल तत्व है एटम
- 33:18और एटम के अंदर इलेक्ट्रान वाटर क्या तुम बना सकते हो नहीं बना
- 33:25सकता एक न 1 दिन विज्ञान को। परमात्मा के अस्तित्व के आगे नत
- 33:33मस्तक होगा, बिल्कुल भक्तों की तरह भगत अज्ञानता में नत मस्तक
- 33:40होंगे। ज्ञानी ज्ञानता में नत मस्तक होता
- 33:47है इतना फर्क है। जो पूजा करता है श्योर सुचार पूजन
- 33:54करता है जो भक्ति भाव करता है, फूल अर्पण करता है, पानी अर्पण
- 34:00करता है, फज अर्पण करता है, धूप दीप करता है।
- 34:09वह तो मूर्ख है, उसे कुछ पता नहीं वह कितना विराट और जीस चीजों को
- 34:18लेकर तुम उसकी पूजा प्रतिष्ठा करते हो, वह भी उसी ने बनाई।
- 34:27क्या जी सुगंधित अगरबत्तियाँ तुमने बनाई हैं, तुमने तो महज
- 34:32जोड़ी हैं, बनाई तो तुमने नहीं, इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ।
- 34:44एक भी चीज़ अगर कोई साइंटिस्ट कभी मुझे बता दे कि मैंने बनाई हर
- 34:50क्रिएटर तो जो चाहे दंड दे देना मुझे, क्योंकि तुम्हें ये संभावना
- 34:58ही है तुम सिर्फ पुरज़ों को जोड़ सकते हो और वो भी।
- 35:05कुछ लिमिटेड सभी को नहीं तुम जोड़ सकती यह शरीर ठहर जाता है, बिखर
- 35:13जाता है, फिर तुम कहाँ से जोड़ पाती हो उसको फिर तुम हार्ट को
- 35:25फिर से पलपिटेट करने के लिए? कोशिश करते हुए सिर्फ सांस फिर आ
- 35:32जाए, लेकिन नहीं। इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ तुम
- 35:41कोशिश किये जाओ। जैसे मैं कहता हूँ तुम भोगते चले
- 35:47जाओ क्योंकि मैं जानता हूँ, भोगने में आनंद आएगा भोग भोगकर, तुम
- 35:57पाओगे, नीरस है सब पदार्थ। और जैसे ही तुमने ये तत्व निकाला,
- 36:04निष्कर्ष निकाला के पदार्थ नीरस है।
- 36:09इसमें सुविधा तो है लेकिन रस नहीं है और जो सुविधा रस विहीन हो वह
- 36:16क्या खाद्य सुविधा होती है। डंड लगती गद्दों पर पड़ा हुआ
- 36:29मखमली गद्दों के ऊपर पड़ा हुआ व्यक्ति अगर नींद न आए नींद तो
- 36:35उसकी देन है ना? तो क्या करेंगे तुम्हारे मखमली
- 36:44गत्ते जो सड़क बनाने वाले जिन पत्थरों को तोड़ा उन नुकेले
- 36:51पत्थरों पर सो जाते हैं उन्हें कोई दवाई की जरूरत नहीं पड़ती।
- 36:58उन्हें ऐसी ही नींद आती है वो बिछ ही जाती है।
- 37:01हमें और पल भर में नींद आ जाती है।
- 37:05अल्बर्ट आइंस्टीन ऐसे ही नींद लिया करते थे, 10 घंटे रात को
- 37:10सोते, लेकिन फिर भी दिन में नींद आती उसे झपके कहते थे वो झपके।
- 37:17तो हाथ में की चमच रखते हैं, नीचे एक थाली रखते हैं उल्टी करके जब
- 37:27वो थोड़ी झपटी लगती है, हाथ से पकड़ छूट जाती है चमची और चमची
- 37:34करती टन। उसकी जांच कर जाती है।
- 37:42वस्तुतः आदमी मुर्ख है, आदमी की प्रजाति ही मुर्ख है।
- 37:56क्यों किसी पेड़ पौधे को किसी जानवर को यह गुमान नहीं होता?
- 38:10कि मेरे कारण ये सारी धरती चल रही है।
- 38:16किसी जीव जंतु को पानी में हो, जल थल में हो, नभ में हो, यह भ्रम
- 38:25नहीं होता। कि मैं जो चाहूं तो दिल निकलता
- 38:30है। मैं जो चाहूं तो रात होती है
- 38:33लेकिन आदमी ऐसा ऐसी प्रजाति बनाई, इसे अकेले को भ्रम हो जाता है।
- 38:48जिक्र होता है जब कयामत का तेरे जलओं की बात होती है।
- 39:09तू जो चाहे तो दिन निकलता है तू जो चाहे तो रात होती है।
- 39:26जिक्र होता है जब कयामत का तेरे जलबों की बात होती और जलवा क्या
- 39:34है? ज़रा गौर से देखना तुम अपने आप को
- 39:38पागल पाओगे। कुछ वर्ष पहले जब आधुनिकता शुरू
- 39:50हुई थी एक स्त्री अपने वस्त्रों को कम करते सड़क पे जा रहे थे मैं
- 40:08आग्रा में। लोग उसकी तरफ देख रहे थे।
- 40:18देखेंगे नया नया फैशन और यह ढांचा चाहता है कि मुझे हर कोई देखे,
- 40:27यही तमन्ना मार जाती है। उससे पता नहीं ये ढांचा 1 दिन
- 40:36बिखर जाएगा। तुम्हारा नामो निशान मिट जाएगा।
- 40:40उसके बाद तुम कहते हो कि मेरा नाम बचा रह जाएगा।
- 40:42तुम गलत हो के आज अल्बर्ट आइंस्टीन को हम याद करते हैं ज़रा
- 40:50गोर से समझे ना मेरी बात को? आज हम अल्बर्ट आइंस्टीन को भौतिकी
- 41:00का पिता अम्मा कहते हैं। उसकी हम प्रशंसा करते हैं जो तुम
- 41:06बटोरते फिरते हो। इधर से दो मैटर ले आए, उधर से दो
- 41:10मैटर ले आए, श्रेय ले आए चार नारे लगवा लिए ऊंचे ऊंचे लोग उठ लिए
- 41:16योगी मोदी मोदी ऐसे पागल कर दिया लोगों को तुम चले जाओगे।
- 41:27फिर ये गूंज का हो जाएगा। आज अगर कोई व्यक्ति अल्बर्ट
- 41:33आइंस्टीन को कहता वाह क्या नियम खोजा है तो अल्बर्ट आइंस्टीन को
- 41:42इससे क्या फर्क पड़ता है। गहरी बात है गहरे से सूचना आज तुम
- 41:52गाँधी को गाली निकाल देते हो, जवाहरलाल को गाली निकाल देते हो।
- 42:00गाँधी को जवाहरलाल को क्या फर्क पड़ता है?
- 42:04तुम भी कल को सभी जाएंगे जो आए हैं सो जाएंगे राजा रंग फके यानी
- 42:16ये खंडहर बन जाएगी माटी का प्रतीक कण बिखर जाएगा।
- 42:24जल जल में मिल जाएगा, वायु वायु में मिल जाएगी, अग्नि, अग्नि,
- 42:27आकाश, आकाश में मिल जाएगा। फिर तुम कहाँ रह गए?
- 42:36अल्बर्ट आइंस टीम तो बेचारा पता नहीं कहाँ कहाँ रुलता कुलता भरता
- 42:40होगा। थोड़ा सा पानी के समुद्र में मिल
- 42:45गया होगा थोड़ा सा गंदे नाले में मिल गया होगा थोड़ा सा खेतों
- 42:52खलिहानों की मंडी में पड़ा होगा थोड़ा सा हवाओं में मिल गया होगा।
- 43:02थोड़ा सा फिजाओं में खो गया होगा, थोड़ा सा आग की लपटों में होगा
- 43:13थोड़ा सा आकाश में समा क्या होगा भला उसका वजूद कहाँ है?
- 43:19उसे पता चलता है कि उसकी प्रशंसा हो रही है कि कहाँ गया वो अल्बर्ट
- 43:29आइंस्टीन, जिसकी प्रशंसा तुम कर रहे हो बस इस बात को संत समझ लेता
- 43:36है। टूट गई है।
- 43:43माला मन के बिखर गए। 2 दिन रह कर सा न जाने किधर गए तो
- 44:03गयी है माँ। बताओ तुम कहाँ आज कहाँ है।
- 44:13अल्बर्ट आइंस्टीन कहाँ है सरायजिक न्यूटन कहाँ है अनादर, फोर्क कहाँ
- 44:22है तुम्हारे चहेते एक्टर एक्ट्रेसेस जिनका जलवा बिखरता था
- 44:30और लोग उनकी बात करते थे। कहाँ है?
- 44:34वे लोग जो कहते हैं कि तेल तो वृशिया से नहीं लोगे तो नहीं लोगे
- 44:42और कल को खो जाएंगे। कहाँ जाएंगे?
- 44:49तो फिर तुम? जब चाहो तो तेल हँसियों से लोगे
- 44:55तो फिर ठीक है लेंगे लेकिन कल को कहाँ जाएगा?
- 45:01बिखर जाने के बाद तुम कहाँ होगे, तुम्हें पता है कौन जाने तुम किसी
- 45:13गले के शरीर पे लग जाओ। पता लगता है किसी बुद्धू व्यक्ति
- 45:21के शरीर पे लग जाएगी ये माटी ये हवा जो स्वास्थ्य के जरिए तुम
- 45:28लेते हो एडजेल और इन नहेल करते हो?
- 45:31यह न जाने किस पेशेंट के भीतर से आई।
- 45:36तुम्हें पता है तत्व तो वही है, तत्व तो घटाए बढ़ाए जा नहीं सकता
- 45:44मैटर कैनट बी क्रिएटेड नॉर कैन बिट एक्स्ट्रा।
- 45:50वो ही है वो ही है ये जो तुम पानी पीते हो कितनी बार गंदगी में से
- 45:56हो के निकला कितनी बार यह गटरों के भीतर से हो के निकला है, यह तो
- 46:07परमात्मा ने तुम्हारी व्यवस्था की हुई।
- 46:12सूरज की गर्मी से वाष्प वन के गटरों का पानी फिर चला जाता है और
- 46:19शुद्ध वन के नीचे बरस जाता है, लेकिन तुम्हें पता है कि तुम्हारे
- 46:25शरीर का पानी आज गटरों में नहीं है।
- 46:29कितने जन्म तुम्हारे हो चूके तुम जानते हो कहाँ गई वो माटी कहाँ है
- 46:37वो हवा कहाँ है वो अग्नि कहाँ आकाश तुम जानते हो नहीं तुम्हें
- 46:48कुछ पता नहीं। इसलिए मैं मानव की प्रजाति को
- 46:53मूर्हतम कहता हूँ और कोई भी व्यक्ति जो उस स्थल पर चला जाएगा
- 47:02वो ऐसा ही कहेगा। सामान सो बरस का पल की खबर है आधा
- 47:18अपनी मुँह से कोई बेशर्म नहीं मौत आएगी।
- 47:221 दिन यह खंड जाएगा सारा ढांचा। आगाह अपनी मौत से कोई बसर नहीं
- 47:32सामान 100 बरस का पर की खबर नहीं 100 बरस का सामान तुम जोड़ लेते
- 47:38हो खबर अगले पल के बने सांस आए न कौन जाने?
- 47:50इसलिए मैं मानव की प्रजाति को मूर्ख कहता हूँ क्योंकि अकेले उसी
- 47:54को विवेक दिया गया किसी घोड़े को, किसी गधे को, किसी अरबी घोड़े को।
- 48:05यह घुरूर नहीं होता कि मैं हूँ, तुम किन, लेकिन ऐसे गधे राजनीतिक
- 48:13गद्दी पर बैठे जो कहते हैं मैं हूँ, तुम मुमकिन है, जो कहते हैं
- 48:19मैं तुम्हें मार दूंगा और मार भी देते हैं।
- 48:23लेकिन क्या वो सच में मरते हैं? जिनको मार दिया गया, क्या मर गया
- 48:29हेरेन पांड्या? वो तो आज भी यही है।
- 48:34तुम क्या समझते हो तुम्हारे राज़ किसी को पता नहीं खुद हेरेन
- 48:39पांड्या बता देगा। खुद बता देगा जिसने गोली मारी
- 48:47नाथूराम मुझे किसने कहा था तुम समते हो हमने मिटा दिए सबूत
- 48:57डिस्ट्रॉइड ऑल दी प्रूफ्स। नो नो यू अरे इन एल्लूसन ह्यूज
- 49:04एल्लूसन तुम बड़ी अदांद फ्रॉम में हो, वो तो आज ही मेरे पास रोज़
- 49:16मेरे प्रवचन सुनता है। लेकिन जीसको तुम कहते हो मैंने
- 49:26मार दिया वह कहाँ है? आज उसके भीतर से जो निकला वो तो
- 49:34आज भी है, वह जो बोल रहा है आज मैं ही तो हूँ जिसे गोली मारी तो?
- 49:45आज फिर तुम्हें आमंत्रित करता हूँ कि आ जाओ लोग मुझे कहते हैं तुम
- 49:56गोली मारते थे फला मैंने कहा तुम कायर में कहाँ औकात है?
- 50:02तुम नपुंस को नामर्द हो, इजड़े हो।
- 50:06इतना कहने पर भी वो उकसाए नहीं जाते।
- 50:12फिर आके मुँह पकड़ लेते हैं अरे बाबा भूल हो गए मानव की प्रजाति
- 50:22को मैं सबसे ज़्यादा मूर्ख प्रजाति कहता हूँ।
- 50:26किसी पेड़ को गमान नहीं होगा और चाहे आम के मीठे आम के फलों का
- 50:34हो, चाहे वेटरन टेस्ट कड़वा जहरीला, लेकिन किसी को यह फखर
- 50:43नहीं होता। कि मेरे होने से बदलती हैं ऋतुएं
- 50:47मेरे होने से चाँद निकलता है मेरे होने से सूरज सकता है किसी को यह
- 50:53फखर नहीं होता, एक बनता ही ऐसा मूड तम है इसलिए मैं कहता हूँ
- 51:00विवेक तो मर गया उसे, लेकिन विवेक को।
- 51:03प्रयोग भी तो कर लिया करो अगर तुम प्रयोग न करोगे क्या इसीलिए पैदा
- 51:12हुए थे के पत्थरों की मूर्तियां बनाओ और उन्हें पूजो हम नवरात्र
- 51:22आने वाले हैं? और तुम्हारी माता तुम्हें कहेगी
- 51:28दही के अंदर आलू डाल के वो रायता पियो शाकाहारी खाना खाओ और वह
- 51:38माता जीस शेर के ऊपर सवार है। वह मांस के बिना कुछ और खाते हैं।
- 51:47पहले तुम्हें क्यों रोकेगी भाई मूढ़ आत्माओं मैं तुम्हें कहता
- 51:53हूँ वह माता तुम्हें करोगी जब खुद अपने हाथ से शेर को मांस कहलाती
- 51:59है अब। जब खुद अपने हाथ से तुम्हारी माँ
- 52:05शेरम वाली अपने ही वाहन को कोन नहीं रखता भाई साफ करके तुम अपनी
- 52:12कार को साफ नहीं करते सर्व स्टेशन पे लेके नहीं जागते जो लाते नहीं
- 52:18उसको। अपने वाहन को कौन नहीं सवस्थ रखना
- 52:23चाहता हो, चाहे चूहा हो, चाहे उल्लू हो, चाहे साढ़ हो और चाहे
- 52:34सिर हो और उसको भाई खाना खुना भी देना पड़ता है।
- 52:40या फिर कह तो के माटी के हो माटी का सिर तो कुछ नहीं खाये फिर याद
- 52:47रखना फिर तुम्हारी माता भी माटी के हो इसलिए मैं इस देश को
- 52:53मूर्खता हूँ का राजा कहता हूँ मूड़ता हूँ का राजा?
- 52:59यहाँ समृद्धि आई थी किस वक्त जब वो मूंगताएं नहीं थी, वो वेरा भी
- 53:06मैंने देखा और आज महा अंधकार का युग भी मैं देख रहा हूँ।
- 53:13ये मेरी आँखों के सामने ही घटित हो रहा है सब कुछ।
- 53:19लेकिन तुम हो कि फिर नवरात्रियां फिर वो ही राइता खाओगे फिर वो ही
- 53:27कद्दू, लेकिन तुमको क्यों पता? यह कारण कुछ और मैं भी अनाज नहीं
- 53:46खाता। 14 बरसों से मैंने अनाज का एक
- 53:48दाना भी नहीं खाया, लेकिन मुझे किसी ने प्रताड़ित नहीं किया।
- 53:54मैं किसी शेरा वाली गिद्दड़ों वाली के भ्रम में नहीं, मेरे भ्रम
- 54:00सब टूट गए, मैं इस शरीर को परिपूष रखने के लिए जो आवश्यक है उतनी सी
- 54:08खुराक लेता हूँ और मैं जानता हूँ जय शरीर में।
- 54:13अपने वाहन को ठीक से काम करने योग्य बनाने के लिए उतना ही आहार
- 54:19और उसी तरीके का आहार मैया कराता हूँ जैसे तुम अपनी कार की धुलाई
- 54:26करते हो, कोई टाइर पंक्चर हो जाओ, टाइर बदलते हैं।
- 54:30इंजन खराब हो जाए तो इंजन को बोर करवातें हो।
- 54:36वैसे मैं अपने शरीर को अगर मैं अपने शरीर को अलग अलग जाना होता,
- 54:41तो मैं भी तुम्हारी तरह भाग दौड़ करता, मैं भी तुम्हारी तरह 10 बार
- 54:47सूट बदलता कोई शोक मेरे में कम थोड़ी तुम क्या समझते।
- 54:55सोक मेरे में कम, थोड़ी हम भी जहाजों पे सैर करना का सूक कभी
- 55:01बालक लेकिन टूट गई सारी बाद। मन के बिखर गए।
- 55:152 दिन रहकर साथ न जाने किधर गए, टूट गई है माला मन के।
- 55:31बिखर गए 2 दिन रहकर साथ। न जाने किधर है जितनी मुड़ताएं इस
- 55:48देश में हैं, इसलिए। मैं इस देश को मूर्खों का देश
- 55:54कहता हूँ। हालांकि इस मूर्खों के देश में
- 56:00मैंने भी जन्म लिया है, लेकिन क्या करूँ जब चलता चलता व्यक्ति
- 56:07चाहे अपने घर का ही बूढ़ा हो? चलता चलता व्यक्ति अगर पागल हो
- 56:12जाए हो जाते हैं भाई मैंने 9090 साल के लोग 70708080 साल के लोग
- 56:19पागल होते दिखे सीजोफरेदिया क्या पता लगता है कबूजा तो फिर हमें
- 56:26कितना ही पेरा हूँ। हम उसको मेंटल हॉस्पिटल में
- 56:30पटकाते हैं, लेकिन हम अपने प्रधानमंत्री को कभी नहीं पटकेंगे
- 56:35जाके और वह मानसिक रोग से रखते हैं।
- 56:42ये भी कोई बात है? रशिया से तेल लो।
- 56:47रशिया से तेल ना लो, उठ जा बांदरी बैठ जा बांदरी नचले बांदरी थाले
- 56:56बांदरी भूखी रह ले बांदरी। ये है भी कोई खेला है अरे ये अजीब
- 57:03तमाशा है। तुमने तो तभी समझ जाना था कि 1200
- 57:12किलो के गणेश को 200 ग्राम के चूहे पर बैठा दिया, अब उसका ही
- 57:19निकलेगा और क्या होगा? लक्ष्मी तुम्हें पता है कितनी
- 57:24भारी उर्लु कितना भी ताकसे पर उड़ पाएगा।
- 57:30लक्ष्मी को लेकर आपने कोई स्त्री कितने भी कमजोर उर्लु के ऊपर
- 57:40बैठकर जाती हुई देखी है। फिर निश्चित ही तुम उल्लु दो।
- 57:49दिन रह कर साथ। न जाने।
- 57:54किधर गए श्रद्धालु? का दिन था, मेरे मित्र ने मुझे
- 57:59बना लिया। मैंने कहा भाई मित्र देख बात ये
- 58:04है मैं शरद वगैरह खाता नहीं, हमारी ऐसी कोई परंपरा नहीं है,
- 58:16लेकिन वो मित्र ऐसा था, वो कहता कि देखो आपको तो।
- 58:19मैं पंडित जी को बाद में करूँगा आपको पहले मैंने कहा ठीक है भाई आ
- 58:28जाऊंगा, मैं चला गया, घर में गया तो कहते चलो डाइनिंग टेबल पे
- 58:36बैठो। वह देखा मैकडवल की बोतल रखी हुई
- 58:46खारा सोडा रखा हुआ नमकीन बुझिया, बादाम, मूंगफली, दाल 1000 चीजें
- 58:55रखी हैं उसमें। मुझे कहते गुरु हो जा शुरू अरे
- 59:08मैंने कहा क्या सुनु ये क्या है, कैसा अपन बुजुर्ग को यही खाता था।
- 59:18मैं तो वहाँ से जैसे भागा। बस घर ही आके दम दिया मैंने
- 59:24रास्ते में प्राणायम ही करता था। ऐसी ऐसी वाक्य होती है और तुम फिर
- 59:31भी खिलते हो। बुजुर्गों को जो चले गए, जिनका
- 59:35शरीर हमने अपने हाथों से फूंक दिया।
- 59:38फिर कहते है ना वो आएँगे अरे कहाँ आएँगे उनका खाने वाला मुख और जीस
- 59:44पेट में जाता था आपका खाना। वो तो तुमने यहाँ फूंक दिया यही
- 59:49तो पंडित जीके जाएगा और तुम्हें इतनी सी बात समझ नहीं आती जो
- 59:52बिलकुल साधारण है। कि पंडित जी खायेगा तो पंडित जीके
- 59:58पेट में जाएगा, तुम्हारे पितर कैसे हो जाएंगे इस बात का जवाब है
- 1:00:03तुम्हारे पास, मैंने तो देखा है देख के बोल रहा हूँ कोई पितर पितर
- 1:00:09नहीं होता ये बिल्कुल वैसे ही जैसे स्वर्गनर।
- 1:00:15ये बिलकुल वैसे ये ऐसे सच खंड सतलोक यहाँ तो तुम दुख से है ना
- 1:00:24यहाँ तो बल्ला तुसी आए हो तो फिर से आके जानी हो हाँ की करी है
- 1:00:30बल्ला कुछ नहीं है, बस नाम जपते रहो।
- 1:00:34ओके ओके सुन दे सांडे कूड़े को इलाज नहीं है उसका तो फिर
- 1:00:45तुम्हारा क्या अचार डालना है अगर तुम्हारे पास कोई इलाज नहीं है तो
- 1:00:50फिर क्या अचार डालना है तुम्हारा? फिर तो घर बैठ के हम भुगत लेंगे,
- 1:00:55फिर तो भुगतता ही है। ऐसा कोई ऐसी मानसिकता और मूडता से
- 1:01:02भरा हुआ है। हमारा समाज, इसलिए मैं इस देश को
- 1:01:05मूड आत्माओं का देश कहता हूँ। 2 दिन रहकर साथ।
- 1:01:16न जाने। किधर गए?
- 1:01:20टूट गई? है माल मन।
- 1:01:25के बिखर गए। 2 दिन रहकर साथ।
- 1:01:34न जाने। किधर गए?
- 1:01:39ठोक गई। है मानो धन्यवाद।