Latest / Baba ji Vijay Vats / 22 Oct 25 - विचार से वस्तु तक: संकल्प कैसे सत्य बनता है? प्यास कब और कैसे बुझेगी? गुरु मत बनाना जब तक.
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- 0:22करण प्रिया जम्मू से अंग लगाओ, प्यास बुझाओ।
- 0:41गंगा होकर प्यासी हूँ मैं मन की प्यास बुझाने आई है अंतर्घट
- 1:00तक प्यासी हूँ मैं तो है मेरा प्रेम दया था इन चरणों की।
- 1:11दासी करण पिया तुम अपने मालिक हो जाओ,
- 1:42कब तक दासी बने रहोगे? ध्यान रखना तुम प्यासे हो, तुम
- 2:03दुखी हो तब तक दुखी हो। जब तक जीस चीज़ की प्यास है वह
- 2:15तुम्हें मिल नहीं रखता है। यही तुम्हारे दुख का मूलभूत कारण
- 2:23है। इसे ऐसा समझू तुम्हे प्यास लगी
- 2:36हो। तुम्हारे सामने सैकड़ों प्रकार के
- 2:42भोजन पड़े हैं, तुम्हें कोई कहे के भोजन खा लो।
- 2:55और तुम पहले से ही भोजन खा रहे हो।
- 3:03क्या भोजन खाने से तुम्हारी? प्यास हो जाएगी और कुछ भी खा लो,
- 3:18मनभावन वस्तु खा लो। क्या तुम्हारी प्याज हो जाएगी?
- 3:29महंगे से महंगा द्रव्य भी लो, महंगे से महंगी वस्तु का सेवन
- 3:37करो, क्या तुम्हारी प्याज हो जाएगी?
- 3:44नहीं बुझेगी क्योंकि तुम्हे प्यास लगे हैं और प्यास बुझती है सिर्फ
- 3:56पानी से बस यही तुम्हारा हाल। पानी तुम पीते ना भोजन तुम करते
- 4:18चले जाते और इच्छा तुम ये रखते हो की भोजन ज्यादा खा लेने से प्यास
- 4:28मर जाएगी। तुम गलती हो, भोजन ज्यादा करने से
- 4:35प्यास से ज्यादा लगती है, इसलिए मेरा मीरा बिरहा के अंदर ज्यादा
- 4:43तड़पती है, उसे चाहिए पानी। महलों की रानी है वो, उसको लगी
- 5:04प्यास, महलों के राजकुमार उसे देते हैं भोजन बड़ा स्वादिष्ट
- 5:14शक्ति 100 प्रकार के भोजन है। महंगे से महंगे, स्वादिष्ट,
- 5:18स्वादिष्ट, खुशबूदार, मेरा कहते। हैं।
- 5:27मुझे प्यास लगी है और प्यास उजती है मातृपणी से।
- 5:39सारा संसार इसी उलझन में पड़ा है। मैंने कल के प्रवचन में बोला पहले
- 5:56खोजो कि तुम्हें प्यास है किसकी क्या भोजन की प्यास है?
- 6:04भोजन के तो भूख लगती। है, प्यास होती पानी और बिना पानी
- 6:11के प्यास बुझने वाली है। लाखों चीजों का तुम सेवन करो।
- 6:22प्यास बुझेगी मात्र वंश कल के प्रवचन में मैंने यही कहा पहले
- 6:37खोजो रस्ते में जो भी आएँगे उनको पूजने के लिए।
- 6:48उनका उपयोग करो, पूजने योग्य तो मात्रत्व में हो।
- 6:57जब प्यास लगी हो तो पूजने योग्य मात्र पानी होता है।
- 7:07लेकिन तुम्हें किसी ने गलत राह देखला दिया है, किसी ने तुम्हें
- 7:15समझा दिया है। शास्त्र में लिखा है हमारे गुरुओं
- 7:20का उपदेश है के भोजन खाने से प्यास मर जाएगी।
- 7:26कभी मटिया है क्या नहीं मटते तुम्हारा अंतश जो चाहत करता है उस
- 7:40चीज़ का सेवन करो तो प्यास बज जाएगी, एक क्षण भी न लगेगा।
- 7:49कितनी बार मैं कह चूका? तुम्हें खोजो तुम्हारा अन्तःपुकार
- 8:01क्या रहा है। तुम्हारा रोवा रोवा किस चीज़ की
- 8:05डिमॅंड कर रहा? है।
- 8:09क्या है जरूरत तुम्हें? लेकिन तुम चक्कर खा रहे हो,
- 8:20तुम्हें पता ही नहीं है तुम्हें चाहिए क्या चाहिए पानी?
- 8:28है इकट्ठा कर रहे हो तुम गद्दियाँ।
- 8:32चाहिए। पानी इकट्ठा करे हो तो मान सम्मान
- 8:39लोगों से जयजकार करवा रहे हो। लाखों करोड़ों की संख्याओं को
- 8:45अपने पीछे लगा रहे हो। ये गद्दियों की अभिलाषाजनक को भी
- 8:54होती है और वो पा भी लेते हैं। महावीर को भी होती है, बुध को भी
- 9:00होती है। वो पा भी लेते हैं लेकिन गतियों
- 9:05से प्यास कभी उगती। है।
- 9:11पहली खोजो, व्हाटस युअर डिमांड तुम्हारे अंतः प्राणों की जरूरत
- 9:21क्या है और उस जरूरत को पूरी किए बिना प्यास बजने वाली है।
- 9:35पहले खोजो फिर सेवन करो खोजो क्या है पैस किस से बुझेगी नाम कमाने
- 9:56से बुझेगी। लोगों सारी दुनिया को पांवों में
- 10:00डालो तब बुझेगी चक्रवर्ती सम्राट बन जाओ, फिर बुझेगी सारे संसार को
- 10:09अपने अधीन कर लो, फिर बुझेगी। किसी देवी देवता को सिद्ध कर लो
- 10:17फिर बुझेगी स्वादिष्ट सु स्वादिष्ट भोजन कर लो फिर बुझेगी
- 10:26नहीं बुझेगी पहले खोजो, जरूरत क्या है?
- 10:35तुम खोज ही तो नहीं पाए? प्रथम कदम ये तुम्हारा गलत
- 10:40पड़ेगा, तुम खोज नहीं पाए जाना कहाँ राहगीर बन गए लेकिन जा कहाँ
- 10:52रहे हो? सखी, न कोई मन दिया है न कोई
- 11:13महफिल चला मुझे। लेके है दिल अकेले कहाँ साथी ना
- 11:30कोई मैं कहाँ जा रहा है। तुम्हें पता है।
- 11:43उसी की खोज में चले जाओ। जिससे प्यास हो जाएगी पक्का बचा
- 11:51है। कहाँ जा रहा है?
- 11:59तू है है जाने वाले कहाँ जा रहा तू है जाने वाले अँधेरा है मन का।
- 12:19दी हाँ तो जला ले कहाँ जारा तू हैं जाने वाले कहाँ जारा।
- 12:36पता है तुम कहाँ जा रहे हो। पता है, जीस स्मारक पे जा रहे हो
- 12:45मंजिल तक पहुंचा देंगे नहीं पता है, मैंने कल ही के प्रोचून में
- 12:54बताया। जिनको सेवकों की तरह काम लेना
- 13:00चाहिए उनकी तुम पूजा कर रहा विष्णु, ये ब्रह्मा, ये शंकर, ये
- 13:08दुर्गा, ये लक्षण जिनका भोग करना चाहिए उनकी तुम पूजा कर।
- 13:17क्या ये रास्ता ठीक है? ये तुम्हें तुम्हारे तक पहुंचा
- 13:21देगा। तुम्हारी जरूरत तो कुछ और है।
- 13:27भीतर से प्राण प्यासी हैं। कोई आकुल है, कोई व्याकुल है, कोई
- 13:33प्यासा है, कोई त्रप्त नहीं हुआ, अतर्रप्त है, प्राण पुकारना जा
- 13:39रहे हैं और तुम चले जा रहे हो न जाने कहाँ जहाँ चले जा रहे हो।
- 13:53के मंजे में मिल जाएंगे। जो तुम्हारे प्राणों पुकार रहे
- 13:59हैं, उसी की खोज में जा रहे हो नहीं खोज गलत है।
- 14:10तुम्हारे प्राण जिसे मांगते हैं, तुम प्राणों को देते हैं, तुम
- 14:19अन्य अन्य चीजों की खोज में निकल जाते हो।
- 14:25इसलिए अतिरिक्त बने रहते हो 1000 जन्म पहले भी तुम ऐसे ही अतिरिक्त
- 14:34थे। 1000 जन्म आज भी तुम वैसे ही
- 14:39अतिरिक्त। हो गए।
- 14:41और अगर ये राह न छोड़ी। जीस राह पर तुम चल रहे हो अदरख्त
- 14:47ही बने रहो कैसे संभव होगा ये अंतर यात्रा से गहरी यात्रा तो
- 14:59तुमने बहुत कर लिया है बाहर भीतर भरा पड़ा है।
- 15:07बाहर द्रव्य भरे पड़े। बेहतर सूचनाएं भरी पड़ी हैं।
- 15:13प्रश्न फसल पक गई हैं, फल नहीं आया, फल कैसे आया?
- 15:27अंतर यात्रा से बहर्य यात्रा ने बहुत कर ली।
- 15:34जन्मो, जन्मो से बटकन। के सिवा कुछ न।
- 15:37मिला। और जैसे ही तुम अंतर्मुखी होते
- 15:50हो, मैंने कल भी बताया तुम्हारे भीतर संकल्प को शक्ति होती है।
- 16:05संकल्प शक्ति की मात्रा बढ़ती जाती है।
- 16:10और 100% संकल्प शक्ति का हो जाना, दैट इज़ कॉल्ड सेल्फ एरियालाइजेशन
- 16:21कुछ मूड लोक पश्चिम के। आत्मबोध को आत्म शलाघा कह देते
- 16:30है, इगोइस्म नर्सिसिस्म जैसे यूनानी मिथक की कहानी में
- 16:37नर्सिसिस्म हमका एक हीरो है। उसके नाम के ऊपर चला नारसी सीज़न
- 16:55आत्मबोध और आत्मशलाघा में बड़ा ह्यूज डिफरेंस कृषम तुम्हें
- 17:03आत्मशलाघा करते हुए नजर आएँगे। लेकिन काश तुम स्थल पर पहुँच गए
- 17:10होते तो जान लेते ये चीज़ें बड़ी विपरीत आत्म शलागा इस ईगोइस्म
- 17:23एंड। आदतमबोध उसके लिए कोई शब्द हमारे
- 17:30वितरण है हमारे शब्दकोश में। आदमबोध के लिए और कोई शब्द।
- 17:38है ज्ञान लिया हूँ। एम आर।
- 17:47और यही तुम्हारी मंजली है जैसे ही तुम बहर हो।
- 17:54यात्रा से अंतर यात्रा शुरू करोगे।
- 18:01प्रेम बढ़ेगा। आनंद बढ़ेगा संकल्प बढ़ेगा।
- 18:07आनंद और संकल्प संघ संग चलते हैं जितना आनंद, उतना संकल्प।
- 18:18इसलिए संत इतना लाभन्य से भरा होता है।
- 18:21इसमें करुणा और इतने आनंद से भरा होता है।
- 18:25तो उसने संकल्प का वो क्षेत्र पा लिया जहाँ वो अप्रिय सीम हो गया।
- 18:36उसका कोई बंधन न रहा, वो बौंडलेसनेस में आ गया।
- 18:41बंधन ना रहा कोई उसकी चेतना वहीं जाना है तुम्हें जहाँ तुम्हें कोई
- 18:53बंधन नहीं है जहाँ तुम्हें कोई भय।
- 19:02सारे विकास, सारे विचार, सारी समस्याएं ये तुम्हारी बंधन है।
- 19:10सारी मान्यताएँ इस तुम्हारी बंधन समाज ने खोजें हों।
- 19:20इस शास्त्रों में लिखे हो या संत पुरुष कहते हो तुम्हारे धर्मज्ञ
- 19:26कहते हो सब बंधन और इन्हीं बंधनों के ऊपर तुम आचरण किए हो और सुखी
- 19:34नहीं हुए हो। तो एक कसौटी याद रखना अगर तुम सच
- 19:42में अपने अंतश में उतरने शुरू हो गए तो?
- 19:47प्रेम बढ़ेगा, करुणा बढ़ेगा, आनंद तो बढ़ेगा।
- 19:56और संकल्प रहेगा। कृष्ण अपने उस स्थल को छू लेते
- 20:03हैं। जीसको 100% संकल्प।
- 20:08कहते है। आत्मा बोध का बोतल जिसे रहस्य
- 20:12कहता हूँ मैं रहस्य का बोतल। बिलकुल अंतराल में चले गए हैं, दल
- 20:22के ऊपर चले गए हैं। यहाँ से आगे कोई कोई रास्ता नहीं
- 20:27है। कृष्ण बलराम प्रथम बार मथुरा गए
- 20:33हैं। गोकुज से प्रस्थान किया है।
- 20:41कंस की नगरी में आए हैं जहाँ उनके पिता और माता देवकी और वासुदेव
- 20:49कैद हैं जेल में। कंस बड़ा अत्याचार शार्शक था और
- 21:01कंस हो या रावण हो। अत्याचारी शासक से मुक्ति मिल ही
- 21:11जाया करती है। कोई कृष्ण आ ही जाया करता है, यही
- 21:16तो वचन दिया है गीता में यदाजदा ही धर्म से गलाने भक्ति भारत
- 21:24अद्वुत्थानम अधर्मश्य तदात, मानो शरजाह में हम रित्राणय साधना
- 21:35विनाशाह सदुष्क्रितान धर्म संस्थापना अर्थात संभवामी जुगे
- 21:42जुगे। यही संदेश मैं आता हूँ युगों
- 21:55युगों में मैं आता हूँ जब जब मेरी आवश्यकता होती है, मैं आता हूँ बस
- 22:02तुम पहचान नहीं सकते। क्योंकि तुम बाहरी लक्षणों को
- 22:09पहचानना हो और मुक्ति नहीं है। इसके तो सफेद वस्त्र इसके तो
- 22:23वजन्ति भला नहीं है, वहीं चूक जाते है।
- 22:29बाहरी आवरणों को देखकर जो परमात्मा के उस अवतार का घोषणा
- 22:42करेगा वो जोक जाएगा। संकल्प बढ़ेगा, बढ़ते बढ़ते 100%
- 22:52हो जाएगा कृष्ण ज्यादा उम्र नहीं लिए मात्र 12 वर्ष के हम उन्हें
- 23:07बच्चे भी जा सकते हैं। बलराम थोड़े से बड़े हैं।
- 23:13मथुरा में गए कंस के बुलवाने पे गए हैं ध्यान रखना अगर भगवान को
- 23:29बुलाना हो तो पुकार कंस जैसी ही होनी चाहिए।
- 23:36कंस की आत्मा निरंतर पुकार रही थी चाहे द्वैश्व भाव से पुकार रही थी
- 23:43पुकार रही थी कृष्ण तुम्हारा लेकिन वो पुकार की भावना गलत थी,
- 23:51उसे मारना चाहता था। लेकिन बात तो पुकार की है।
- 23:58कंस की तरह पुकार उठे तो कृष्णा चाहते और कृष्णा के और वो कृष्णा
- 24:07गए जो संकल्प से। बलराम भाई तो बड़े हैं, लेकिन
- 24:20संकल्प अभी परिपूर्ण नहीं हुआ। थोड़ा सा कम ही है, रास्ते में जा
- 24:30रहे हैं। एक वृद्धा औरत कमर झुकी हुई।
- 24:37वह रोज़ इतर की मालिश करके आती। कंस इतर की मालिश करके आती कंस
- 24:48वृद्धा और रास्ते में आ रही है, हाथ में उसके छोटी सी टोकरी है।
- 24:58सीखो के बने हुए है उसमें गंध रस रखे हुए है का मर झुके हुए है
- 25:08धीरे धीरे चल रही है। कृष्ण और बलराम उसके पास से
- 25:14गुजरता। है।
- 25:21संकल्प कैसे सत्य में परिणित हो जाता है इस बात से समझे।
- 25:36कृष्ण कहते हैं उस वृद्धा और उसको झुकी हुई कमर, चेहरे पर
- 25:41झुर्रियाँ, सारे शरीर के ऊपर झुर्रियाँ, बिलकुल व्रत धीरे धीरे
- 25:49चली आ रही है, कंठ के राजघराने से निकली है।
- 25:56रास्ते में कहीं मिलन हो गया। अभी कृष्ण कंठ के दरबार में गए
- 26:05नहीं, नगरी में प्रवेश कर गए कृष्ण कहते हैं।
- 26:13हे सुंदरी बलराम जी चौक कर देखते हैं।
- 26:22कृष्ण कहते हे सुंदरी बलराम जी का।
- 26:32ये छोटे भाई क्या कह रहे हैं? लेकिन इस बात को ध्यान से सुनें
- 26:42वहाँ तुम्हारे मुख से निकला हुआ एक शब्द वस्तु में।
- 26:50परिणीति हो जाता है, परिवर्तित हो जाता है तुम जो कहोगे वो हो
- 26:59जायेगा। विचार वस्तु में परिवर्तित हो
- 27:02जायेगा। कृष्ण के मुख से निकला हुआ ये
- 27:07शब्द हे सुंदरी। उस वर्धा औरत ने बड़े हर्षल भाव
- 27:17से कृष्ण की तरफ देखा। मनमोहक मूर्ति श्यामल वर्णन
- 27:23मौरमुकट उरास रचेगा। तो कृष्ण कन्हैया, बलराम ने देखा
- 27:35ये छोटा भाई क्या कर रहा है? ये तो वृद्धा औरत है और उसके हाथ
- 27:41में छोटी सी टुकड़ी क्या है? कहाँ से आ रही है पता नहीं।
- 27:49और वह वृद्धा भी चौंकते हैं, क्या यह मेरा मजाक उड़ा रहा है?
- 27:57एक छोटे बालक की नटखटे हरकत वृद्धा बड़े प्यार से देखती है
- 28:04कृष्ण केन्द्र। बड़े सुन्दर नए लक्ष्य शामिल वरन
- 28:10कोमल चित्त गूंघरा लेवाल प्यारी अवलोकन कमी से नेत्र।
- 28:27ये तांब्र धारण किया है मृदु वचन से बोलता है ए सुन्दर है ये कहानी
- 28:41सत्य है। कृष्ण परम संकल्प के उस स्थल पर
- 28:48खड़े। हैं।
- 28:53यहाँ से आगे कोई मुकाम नहीं है, कोई रास्ता नहीं है।
- 29:02वृद्धा चोंकती बलराम चोंकते कृष्ण नहीं चोंकते बड़े प्रेम पूर्ण भाव
- 29:10से वह हुर्दता देखती है और देखते देखते योगना हो जाती है नव योगना
- 29:19ये है संकल्प की शक्ति। ये कहानी शास्त्रों में मिलेंगे
- 29:24तुम्हें भागवत की कथा कहने वाले अक्सर इन गथाओं को पता नहीं किसी
- 29:30रूप में बखान कर देते हैं। असल मतलब यह है संकल्प का शत
- 29:38प्रतिशत हो जाना। तुम्हारे शब्दों को वस्तु में बदल
- 29:45देता। है।
- 29:48जैसे 100% टेम्परेचर पानी को ट्रांसफॉर्म कर देता है।
- 29:54वाष्प। में एवय को रेट कर देता है।
- 30:00देखते ही देखते वह वृद्धा, कुरूप, वृद्धा, कमर झुकी हुई सुन्दर नव
- 30:06योजना बन जाती है। कथावाचकों को आवाज़ समझायेगी
- 30:17मात्र संकल्प की शक्ति से कुछ भी किया जा सकता है।
- 30:23रोज़ बढ़ते हैं ये रोग रोज़ व्याख्यान देते हैं लाखों की
- 30:29संख्या भक्तों की सनातन के शास्त्र में लिखा उस परमशक्ति ने
- 30:42संकल्प किया एको अहम बहुशा। उस पर शक्ति ने संकल्प किया, मैं
- 30:50एक हूँ मैं अनेक हो जाऊं एक ओह आह बहु शम एक से बहुत हो जाऊं।
- 30:59और वो हो क्या? साइंटिस्ट इसको बिगबॉग में कह
- 31:06देता है, लेकिन सभी चीजें समझ से बाहर है, साइंटिस्ट भी मात्र
- 31:21अंदाजा ही लगा सकता है। आज सर लोग तुम्हें पढ़ाएंगे और सर
- 31:34कहेंगे वह जाना तो जाएगा लेकिन तब तक हम नहीं रहेंगे।
- 31:43करोड़ो वर्षों बाद न जाने 100 मिलियन प्रकाश वर्ष।
- 31:54इन्हें मैं मूड करता हूँ वह तो कब का जान लिया गया।
- 32:03यही पूर्व और पश्चिम के डिफरेंस है और यही पहचान।
- 32:11अध्यात्म की और संसार के संसार वहाँ जहाँ तुम्हारा संकल्प बोना
- 32:20सिद्ध होता है और अध्यात्म वहाँ जहाँ संकल्प तुरंत मूर्त रूप ले
- 32:26लेता। है।
- 32:28शब्द कह रही है प्रेम से सुनना, बार बार सुनना संसार वह जहाँ
- 32:36तुम्हारा संकल्प बोना होता है, तुम रोज़ संकल्प करते हो, मैं
- 32:41आयुष बन जाऊ, मैं यूपीएससी पास कर जाऊं।
- 32:46मैं ये कर जाऊं मैं वो कर जाऊं कुछ नहीं।
- 32:51कृष्ण मात्र। संकल्प कहते हैं।
- 32:55संकल्प एको अहम बहु श्रम मैं एक से अनेक हो जाऊं और हो जाती हूँ।
- 33:06और कृष्ण उस स्थल पर बोलते हैं मात्र में ही हूँ, एक में ही हूँ,
- 33:14दूसरा कोई नहीं तो सर लोग कहते हैं।
- 33:22ये नार से शम है यह व्यक्ति नार से शिष्ट।
- 33:31आदम शलागाह से भरा हुआ है। बस इन्होंने फर्क को पहचाना है
- 33:40इकोइजम को ये कहते हैं आत्म बौद्ध लेकिन ये है कृष्ण की स्थिति।
- 33:48और वह स्थिति जहाँ से परवर दिखा संकल्प किया एक से अनेक हो जाऊं
- 34:02ओके, यह नार्सेशिज्म नहीं, यह यूनानी मिथक का कोई हीरो नहीं।
- 34:13कह सकते है लेकिन कोई गया हो तो जाने कोई गया हो तो समझे कोई गया
- 34:26हो तो प्रकट करे। तुमने कल्पनाओं को यथार्थ समझ
- 34:33लिया है और आज सब प्रत्येक क्षेत्र में काल्पनिक लोग बैठे
- 34:39हैं, चाहे पीएलआर करने वाले हों, काल्पनिक।
- 34:50तुम्हारे साइको एनालिसिस करने वाले साइकोलॉजिस्ट तुम्हारे
- 35:00आध्यात्मिक प्रवचन करने वाले आध्यात्मिक नेता तुम्हारी गलियों
- 35:07पर राजनीतिक गलियों पर बैठे हुए हैं।
- 35:10राजनीतिज्ञ सभी कल्पना लोक में खोए।
- 35:14होश ये देखो विकास तो हो गया सब बन गया तुम काहे चिल्ला रहे हो?
- 35:27वैसे वही लोग हैं। चारों तरफ इन्हीं का बोलबाला।
- 35:32है। अँधेरा घना हो गया है और जब जब
- 35:41अँधेरा घना हो जाता है तो मैं किसी न किसी रूप में प्रकट होता
- 35:49हूँ। यदा यदा ही धर्म से गलाने भक्ति
- 35:53बारण आना ही पड़ेगा तुम्हारे भीतर की चीत्कार सुनकर आना ही पड़ेगा
- 36:06गंश की चीत्कार सुन लेते हैं कृष्ण और उसकी मंशा से ही नहीं।
- 36:13लेकिन पुकार। से ही है आ जाओ, कृष्ण आ जाते है।
- 36:22लेकिन मूड राजनीतिज्ञ है क्या जाने हमारे शास्त्रों में लिखा
- 36:30है। ब्रह्मलीन व्यक्तियों से कभी
- 36:33छेड़छाड़ न करो, उपहार से न उठाओ ब्रह्मलीन व्यक्ति की उपहार से मत
- 36:43उड़ाओ मखौल मत करो क्यों? जैसे महाभारत में हुआ।
- 36:57कृष्ण पुत्र सांप जाम्बन्ती पुत्र सांप उपहार से उड़ा दिया।
- 37:06पेट पर घुटना बांध लिया, वस्त्र लड़कियों से डाल लिया।
- 37:12घूंघट कर लिया और पूछा ऋषियों से हे ऋषिकंत इसके पेट में जो बच्चे
- 37:27वह पुत्र होगा जो पुत्र। संत के पास दिव्यदृश्य।
- 37:38होता है। उसने सारा दृश्य देख लिया ये तो
- 37:43मुसल। है कुपित हो गए।
- 37:49बस ये कुपित शास्त्री से डरना। छोटे संकल्प वाले की कुपितता कुछ
- 37:55नहीं कर पाई क्योंकि संकल्प बड़ा छोटा है।
- 38:00हमारे सांसारिक लोग रोज़ एक दूसरे के मृत्यु की कामना करते कहीं कुछ
- 38:05नहीं होता, लेकिन अगर कृष्ण के तल पर बैठा हुआ कोई व्यक्ति।
- 38:12एक बार छोटा सा संकल्प ले आए तो तुम्हारा विनाश अवश्यम भाभी तो
- 38:22सांप ने मजाक किया। सरोवर के किनारे बैठे तप में लीन
- 38:38और ऐसे व्यक्ति के साथ मजाक जब उन्होंने देखा उन्होंने देखा सत्य
- 38:45बताने के लिए देखा तो मुसल। था।
- 38:53संत व्यक्ति क्रोध भी हो जाता। है।
- 38:58तुम्हें इस धारणा में ना रहना संत व्यक्ति क्रोधित नहीं होता, मुझे
- 39:04रोक कह देते हैं, बाबा संत कभी निंदा नहीं करते, आप निंदा करते
- 39:08हैं गलती? जहाँ पाप होता दिखेगा वो निंदा
- 39:14नहीं करेगा, वह तो हनन करेगा उसका तुम निंदा की बात करते हो, वह तो
- 39:22उसे मार देगा मत्र निंदा से थोड़ी चलेगी बात?
- 39:30और कृष्ण ने किया तो श्याम ने जब पूछा के क्या है?
- 39:37पेट में और देखा तो मुश्किल था क्रोधो के श्राप दिया यह जो भी
- 39:44है। यह तुम्हारे वंश का नाश कर देगा
- 39:49और जदू पुल का नाश हो गया। उस मसल से?
- 39:53यह कहानी तुमने सुनी होगी। प्रत्येक कथा वाजे किस कहानी को
- 40:03सुनाता है, अर्थ नहीं जनता। कौन सा है वो तल जहाँ जाकर 100%
- 40:09हो जाती है संकल्प शक्ति बस यही तल है जहाँ दरवसा बैठें जहाँ
- 40:19कृष्ण बैठे हैं कृष्ण के गुर में दुर्वास।
- 40:25इनकी भाषा तुम्हे समझ में नहीं आएगी क्योंकि इनकी भाषा सत्य के
- 40:31गरीब है और तुम्हारी भाषा कल्पना की गरीब है।
- 40:37दोनों का मिलन कैसे होगा? एक बड़ी खाई बीच में बनी रहेंगी।
- 40:43संत की भाषा सत्य के करीब। है।
- 40:46वह आत्मबोध के पास बैठा है, वह अपने पास बैठा है, आत्मस्थ हो के
- 40:52व्यक्ति 100% संकल्पवान हो जाता है और तुम संसार में बैठे हुए
- 40:59तुम्हारे पास संकल्प नाम मात्र है।
- 41:01नगली जी बल तुमने देखा यहाँ और से बैठी बैठी करती रहती है फलां का
- 41:09ये मर जाए फलां का ये नुकसान हो जाए ये हो जाए कुछ होता है क्या
- 41:14कुछ नहीं होता। लेकिन उस तल पर गया हुआ व्यक्ति
- 41:26कृष्ण के उस तल पर क्या हो सकता है?
- 41:34कृष्ण के गुरु के धुरवसा के तल पर गया हुआ कोई व्यक्ति।
- 41:41खतरनाक है कभी ऐसे व्यक्ति से मजाक न करना फिर तुम्हारे दुखों
- 41:51के लिए तुम ही जिम्मेदार हो गए। इस व्यक्ति का कोई कसूर नहीं।
- 41:59कसूर है सांप का? उसने सहजता आत्मबोध में आत्म
- 42:07अवलोकन में आत्म स्थिति में परमात्मा स्थिति में स्थिति
- 42:14प्रज्ञता में बैठे हुए उस ऋषि को। डिस्टर्ब और जब प्रकृति डिस्टर्ब
- 42:29हो जाती है तो वह विनाश करती है, बाढ़ आती है।
- 42:36तूफान आते हैं, विनाश होता है, भूकंप आता है, सुनामी आती है,
- 42:49प्रकृति जब कुकपित होती है, तुम प्रकृति को जब एंब्रलाइज़ कर देते
- 42:53हो। और संत जब कोई भी होता है प्रकृति
- 43:02को बनाने वाला प्रकृति का मालिक तो क्या है?
- 43:06शुरू होता होगा तुम विचार भी नहीं कर सकता है।
- 43:14फिर परिणाम के तुम ही जिम्मेदार रहोगे तो मैं कोशिश करता हूँ वहाँ
- 43:26से चले जाना, चुपके से गुजर जाना। उसकी सुगंधी को पी लेना बड़ी
- 43:34प्यारी है। उनकी सुगंधित रहस लेकिन सांप जैसी
- 43:42गलती मत कर लेना। कृष्ण के पुत्र हैं सांप जाम
- 43:47बत्ती। और कृष्ण के मिलान से पैदा हुए
- 43:50शाम और जदुकुल के विनाश का कारण बनते हैं शाम भगवान कृष्ण अपनी
- 44:00आँखों के सामने देखते हैं। अपने ही कुल का विनाश हो के बचा
- 44:04नहीं सकते। वहाँ अगर संत चाहे तो भी कोई उपाय
- 44:12नहीं। परमात्मा खुद चाहे तो भी कोई उपाय
- 44:14नहीं क्योंकि परमात्मा ने ही तो चाहा है विनाश दो परमात्मा तो है
- 44:20नहीं जो परमात्मा ने ही विनाश चाहत रोके।
- 44:26काकु। इसलिए संत वेश में परमात्मा जब
- 44:35बोलता है तो दिशाएं हेल्ती। हैं।
- 44:44भूकंप छोटे पड़ जाते हैं, सुनामियां हार जाती हैं।
- 44:55और जब वह आशीर्वाद देता है तो सूखे हुए खेत लहलहाती फसलों से
- 45:05युक्त हो जाते हैं। कहानी है।
- 45:11के गुरु नानक। पशुओं को जलाने से बाहर जाता है,
- 45:21वृक्ष के तले आँखे मूँद के बैठ जाते है उस रस्म पीने लगते है
- 45:27डुबले लगते गहरे अंतर ध्यान होने लगते।
- 45:33कोई पता नहीं कहाँ उस रस का पान तुम्हें और भीतर खींचता है थोड़ा
- 45:40सा रस आ जाए बस तुम्हें यही मैं रोज़ कहता हूँ।
- 45:45एक बार गिगी तुम सदौरे की झलक देख लो।
- 45:49उस रस की एक बूंद का हजारवां हिस्सा भी पी लो, फिर तुम रोक न
- 45:55सकोगे। बस दुर्भाग्य यही कि तुमने उसका
- 46:00एक कण का हजारवां लाख में हिस्सा भी नहीं।
- 46:03दिया। यही दुर्भाग्य है मानवता का इसलिए
- 46:11आज गपोड़ी दुष्ट गुंडे मवाली शासन कर रहे हैं।
- 46:26संत रहे। संतो के वेश में भेड़िया बैठे
- 46:34नकाब, उड़ते नकाब, संत का वेशभूषा, संत भीतर से बढ़िया है,
- 46:45लेकिन ध्यान रखना दही के भ्रम में कपास मत खा जाना।
- 46:53जब पराकाष्ठा हो जाती है पापों की जदा, जदा ही धर्मस्य गला
- 46:59निर्भक्ति भारत अभ्युत्थाम अधर्म स्य तद आत्मानम सर जामे हम।
- 47:10पित्रानय साधुना सत्य को बचाने के लिए, गपुड़ियों को मारने के लिए,
- 47:18दुष्टों का संहार करने के लिए पित्रानय साधुना विनाशाय या
- 47:24दुष्क्रताम पाखंडियों को। दुष्टों को पापियों को मवालियों
- 47:34को विनष्ट करने के लिए चेंज कर लिया।
- 47:40ध्यान रखना एक छोटा सा सोमवार सुना।
- 47:51जंग अभी शुरू नहीं हुए। महाभारत कृष्ण का रथ, अर्जुन का
- 48:00रथ दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा और अर्जुन भीष्म पितामह।
- 48:10गुरु द्रोण उनको देख कर नर्वस हो गए।
- 48:17कंपने लगे, किनकी छत्रशया की गोदियों में मैं बैठ के पल?
- 48:23रहा निर्भीक। हुआ।
- 48:27जिनसे शस्त्र विद्या मैंने सीखी और अन्नपूर्ण क्या मैं उनको
- 48:31मारूंगा? यह विचार मस्तिष्क में कौन थे?
- 48:36वह काफ में रह गया। रोम रोम उसका कविता है, वो कृष्ण
- 48:42से कहता है मैं युद्ध नहीं करूँगा।
- 48:47मैं युद्ध नहीं करूँगा, अपना गाड़ी धनुष फेंक देता है और रथ के
- 48:57बीचों बीच बैठ जाता। है।
- 49:08कृष्ण कहते हैं, हे अर्जुन इस रणक्षेत्र में इस वक्त तुम्हें ये
- 49:21कायरता शोभा नहीं भेजते। तू क्षत्रिय है, अर्जुन भाग जाना
- 49:33चाहता है। अर्जुन बातों बातों में कृष्ण से
- 49:37कहता है क्या मैं भाग जाऊं और कृष्ण मुस्कुराते है?
- 49:46क्योंकि कृष्ण को परिणाम पता है और जीसको परिणाम पता है वो बोझ
- 49:55नहीं आता उसके दिमाग। पर।
- 49:57तुम्हें जानकर बड़ी हैरानी होगी। तुम्हें बोझ क्यों आता है क्योंकि
- 50:01तुम्हें परिणाम नहीं पता? परिणाम के नपते होने के कारण तुम
- 50:08सारी रातें करवटें बदलते गुजारते रहते हो और जब परिणाम आता है तो
- 50:13तुम्हारी सोच के बपरे रहता है। सारी रात तुमने चिंता की परिणाम
- 50:18तो कुछ और आया। कृष्ण परिणाम को जानते हैं और जो
- 50:23परिणाम को जानता है। रिसाल्ट क्या आएगा?
- 50:27वह बोझ क्यों रखे? तो कृष्ण बोझिल नहीं है।
- 50:31कृष्ण परिणाम को जानते हैं बोझिल है अर्जुन, क्योंकि वह परिणाम को
- 50:37जानता नहीं। इस बात को ध्यान से समझ लेना तुम
- 50:42जब भी चिंताग्रस्त हो। तो एक बात तय है कि तुम्हें व्हाट
- 50:48विल दी रिसाल्ट यह नहीं पता। कृष्ण को पता है।
- 50:58उस 100% संकल्पवान व्यक्ति को सर्वज्ञ हो जाता है।
- 51:02सर्व के का मतलब। सब जानता है वो।
- 51:09अंतश के घट घट की जानत सब के अंतश के घट घट की जानत भले बुरे की
- 51:16पीर। अर्जुन भागने को है, लंगोट कस रखा
- 51:25है, थोड़ा कृष्ण को हिप्नोटाइज़ करने के मूड में है, लेकिन कृष्ण
- 51:30का भी हिप्नोटाइज़ होता है। कृष्ण सम्मोहित नहीं किये जा
- 51:37सकते। कृष्ण में 100% संकल्प है।
- 51:42तुम उससे ज्यादा संकल्प बंद नहीं हो सकते, इसलिए तुम्हारे पास छोटा
- 51:48सा संकल्प और शूद्र संकल्प को लेकर तुम पीएलआर करते हो, तुम
- 51:56हिप्नोटाइज़ करते हो, कितना से कर पाते हो, कुछ भी नहीं।
- 52:01नगली जी बल लेकिन कृष्ण का संकल्प मात्रे पर राजने करता हूँ।
- 52:09उसका संकल्प तुम्हें वस्तु में बदल देता है।
- 52:12सुंदरी मथुरा की उन सड़कों पर जाती है वो कमर झुकी हुई वृद्धा
- 52:19औरत। और कृष्ण कहते है सुंदरी अथक क्षण
- 52:26वो नवजोबना हो जाती है, 16 वर्ष के कृष्ण के चरणों में गिर जाती
- 52:33है। ये कहानी कम रोज़ सुनते हो
- 52:37क्योंकि भागवत की कथा वाचक। बहुत है आजकल।
- 52:43और ध्यान रखना जो कथा पैसे ले के सुनाई जाए उस कथा।
- 52:47को मत सुनना। आज कल महंगे कवियों की भरमार।
- 52:52है। लेकिन इन महंगे कवियों को काश तुम
- 52:58जाकर। कलेक्टिव अनकॉन्शियस में देख सकते
- 53:02हैं के भीतर इच्छा क्या है चल क्या रहा है, तो पाओगे भीतर
- 53:07गद्दियाँ चल रही हैं राज्यसभा की मिलेगा वहाँ के कुछ नहीं जो वहाँ
- 53:12पहुँच के उन्हें क्या मिला सी जे आई।
- 53:18अगर कोई फैसला देकर वहाँ पहुँच गए तो उन्हें क्या मिला?
- 53:25तुम्हें कुछ अलग से मिलने वाला नहीं है।
- 53:28तुम्हें भी वही मिलेगा जो उसको मिल गया, लेकिन महंगे कभी।
- 53:37पैसा लेकर राम कथा कहने वाले ये व्यापारी हैं या कथा पा चूके हैं।
- 53:47ये राम के प्रेमी हैं या पैसे के प्रेमी हैं?
- 53:55सिर्फ वोकबुलरी है, शब्दों की पूरी कतार है।
- 54:00इनके पास रामधारी धनकर के पूरे शब्द हैं।
- 54:06इनके पास और भी कवियों के शब्द हैं इनके पास लेकिन शब्द हैं और
- 54:11शब्द कभी शवदाती तक नहीं जाता। कृष्ण शब्दा तीर्थ हैं और शब्दा
- 54:20तीर्थ होकर ही 100% संकल्प पाया जाता।
- 54:23ये बड़े मुश्किल शब्द हैं, इनको बड़ी शांति से सुनना, धैर्यपूर्वक
- 54:30सुनना ना समझाये तो रिवाइंड कर करके सुनना।
- 54:34रिपीट कर करके सोएं। अर्जुन चाहते हैं भाग्यम बहाना
- 54:42करते हैं, बताओ तो प्रभु हे सखा हे भगवान।
- 54:54क्या मैं अपने गुरु का वास करता हूँ?
- 54:57जिससे शस्त्र विद्या सीखा उस शस्त्र विद्या उसी के ऊपर पटक दूँ
- 55:05जिसकी गोदी में बैठा भय मुक्त हुआ उसी को मार दूँ।
- 55:13कृष्ण मुस्कुराता है क्योंकि कृष्ण उसकी खोपड़ी की बात सुनते
- 55:19नहीं है। उसके लभ से क्या उच्चारण होता है,
- 55:22यह सुनते है कृष्ण देखते हैं उसके भीतर की कलेक्टिव अनकॉन्शियस
- 55:30बैंक। वहाँ क्या चल रहा है?
- 55:32वहाँ भगोड़ापन चल रहा है, भागना चाहते हैं कृष्ण भागने नहीं
- 55:40देंगे। क्यों कृष्ण कृष्ण अंजाम जानते
- 55:42हैं, बात चलती जाती है। कृष्ण कहते हैं, यार।
- 55:53तू कायरों की सी बातें क्यों कर रहा है?
- 55:56क्षत्रिय तू अपने धर्म में मर यहाँ एक और व्याख्या है, स्वधर्म
- 56:08में धर्म श्रेया परधर्म ब्याह। दूसरों के धर्म में तू तो पंडितों
- 56:15के सी बातें कर रहा है तू है क्षेत्रीय बातें कर रहा पंडितों
- 56:22के सी विद्वानों के सी ज्ञानी किसी लेकिन ज्ञानी तो अभी हुआ
- 56:26नहीं तू अपने धर्म में मर। सो धर्म में धर्म श्रेया पर
- 56:36धर्मों ब्याह वाह यह गलती मत कर भागने की गलती मत कर मैं हूँ ना
- 56:44सर तेरे लेकिन मन है कि मानता नहीं।
- 56:53जब तक मन है तब तक मान्यता है मन टूटे तो मान्यता टूटे और गुरु
- 57:03तुम्हारी मान्यताओं को तोड़ता तो में बड़ा गुस्सा।
- 57:06होता। तुम गलती कहा जाते हो कि शायद
- 57:11इसका कोई निहित स्वार्थ होगा, लेकिन गुरु का कोई स्वार्थ हो
- 57:15सकता। है।
- 57:18गुरु का स्वार्थ महज तुम्हें दुख से सुख की ओर ले जाना, गुरु का
- 57:23स्वार्थ महज तुम्हें दुख से सुख और सुख से आनंद की तरफ ले जाना।
- 57:28यह यात्रा करवाना चाहता है तो मैं गुरु सच्चा साहब विजय नजर करे का
- 57:35वो हंसा करे। इसे निहित स्वास्थ्य समझलो किस्म
- 57:45से कुछ छुपाया नहीं जा सकता। क्योंकि कृष्ण जब चाहे तुम्हारे
- 57:53अंत में चले जाएंगे, क्या चल रहा है, देख लेंगे, चोरों की तरह नहीं
- 58:01जाएंगे तुम जब बखान करोगे अपने आप का।
- 58:07तो जाएंगे, देखेंगे क्या? सत्य बोल रहे हैं लेकिन पाते हैं
- 58:12कि अर्जुन गलत बोल रहे हैं। ये बीरू सी बातें, ये कायरों सी
- 58:17बातें ये अर्जुन गलत बोल रहा है, भीतर से कांप रहा है।
- 58:23बाहर से ज्ञानी बनने की चेष्टा करता।
- 58:26क्या मैं चला जाऊं हिमालय में? तो कृष्ण कहते क्या ये तुम्हें
- 58:32जाने देंगे दुर्योधन तुम्हें भागने देगा दुर्योधन तत्व क्षण जब
- 58:39तू भागने लगेगा, लबोट बांध गए तो दुर्योधन।
- 58:43तेरा कट्टर शत्रु है। कितनी कोशिश की मारने की?
- 58:47किसने बचाया मैंने ही तो बचाया लाक्षगृह में तुम जल जाते हैं, मर
- 58:53जाते हैं। कितनी विपत्तियां तुमने सहीं और
- 58:58आयतु भागने को है? जब उसके अंत से मन की बात कृष्ण
- 59:06प्रकट कर देते हैं। हे अर्जुन हे पात्र इस क्षण में
- 59:16इस कुरुक्षेत्र में ये बातें तुम्हें।
- 59:18शोभा नहीं होती तू कायरता की बातें कर रहा?
- 59:23है। भाग ने भगाने की बातें कायरता की
- 59:27बातें तू क्षत्रिय है, तू वीर है, तू धीर है, तू धीरे रख के धैर्य
- 59:36रख के तू ठहर। और युद्ध कर तो अर्जुन मानते हैं,
- 59:46हाँ, मैं काय स्वीकृति अपने पापों की स्वीकृति।
- 59:56अपनी कमियों की स्वीकृति तुम्हें कमियों से मुक्त होने का पहला
- 1:00:01पड़ाव बनती है। इसे फिर सुन लो अपनी कमियों की
- 1:00:10स्वीकृति। कन्फेशन फेयर इज़ लाइक ए ब्रोम।
- 1:00:14दैट स्विफ्ट आवर डाल्टन मिक्स सरफेस क्लीनर थान बिफोर अपनी
- 1:00:21कमियों की स्वीकृति तुम्हें कमियों से बाहर निकलने में पहला
- 1:00:26कदम साबित होता है, तो अर्जुन कहते हैं हाँ, प्रभु।
- 1:00:34कार्पण ने दोषों का स्वभाव मैं डर गया।
- 1:00:41था। कायरता का व्यवहार कर रहा में इस
- 1:00:47स्वभाव के कारण कार्पण ने दोषों का स्वभाव।
- 1:00:51प्रचामितम धर्म से मूर्जे दाह आपसे पूछता हूँ क्योंकि तुम धर्म
- 1:00:59के सर्वोच्च शिखर? हो?
- 1:01:04यत्र है अनिश्चितम रोहतन में मेरे लिए क्या शिखर है इस?
- 1:01:10वक्त। वादना या लड़ना?
- 1:01:17ये श्री है शनि तृण मैं शिष्य से अहम् मैं तुम्हें समर्पित हूँ।
- 1:01:25शादिमान ताम प्रपणमा? मुझे मार्ग सुझाइए प्रभु मेरा
- 1:01:31मार्ग दर्शन कीजिए, मैं कब रहा हूँ?
- 1:01:34मैं हूँ तो क्षत्रिय लेकिन मृत्यु से डरा डरा मैं कब रहा हूँ तुमने
- 1:01:39ठीक पहचाना तो फिर मुझे बताइए व्हाट शुड आई डू ऐट थिस क्रिटिकल
- 1:01:47जंक? लेकिन कृष्ण अब कृष्ण नहीं मानते।
- 1:02:03कृष्ण जानते हैं अभी मन पूरा खोयन अभी स्वीकृति हुई है के हाँ, मैं
- 1:02:10कायर हूँ लेकिन कायरता का मूल उद्गम मन बना हुआ है।
- 1:02:17इसके मन का अंत करना होगा। रोग का अंत करना होगा ताकि ये
- 1:02:23निरोग हो जाए। सवस्थ हो जाए फिर ये तो लड़
- 1:02:26पाएगा, मन के रहते रहते ये कैसे लड़ेगा फिर कृष्ण उसे अपना विराट।
- 1:02:33रूप दिखाते हैं। देख।
- 1:02:36तेरे साथ मैं हूँ, उसे आत्मबोध करता है आत्मबोध अब ये बात मैं
- 1:02:45पहली बार बता रहा हूँ। अब तक आपको ये पता है कि उसे
- 1:02:50आत्मबोध करा हूँ। एम आर।
- 1:02:56लेकिन मैंने ये कहा कि जब व्यक्ति हूँ एमआइ पे पहुँच जाता हूँ,
- 1:03:01बुद्ध की उस अवस्था में पहुँच जाता हूँ तो पीछे एक जीना सा
- 1:03:05पर्दा अगर सांप झांकोगे तो मेरी बातों को नोट कर लेना तो मेरे काम
- 1:03:11आएँगे। जाए।
- 1:03:16अड़ंग वड़ंग सूचनाएं एकत्र करने के यह एकत्र करना पता नहीं कब
- 1:03:21छलांग लग जाए तो बुद्ध की दशा से उस पार तुम्हें जीना सा पर्दा नजर
- 1:03:29आएगा। उसके विषय परमात्मा।
- 1:03:31सारी सृजना को चला रहा है, स्पष्ट नजर आएगा तुम्हें पहले दिखाते तुम
- 1:03:40कौन? हो?
- 1:03:42बेटिका मनुष्का फिर अपना विराट दिखाते मैं कौन हूँ वह उससे जीने
- 1:03:49पर्दे के पीछे? जो कृष्ण बैठे।
- 1:03:55दूसरा पर दूसरा ज्ञान खुद का देते हैं।
- 1:03:59पहला ज्ञान अर्जुन का होता है। हू आर यू दूसरा ज्ञान खुद का होता
- 1:04:06है कृष्ण का हू एमआइ। ये दोनों ज्ञान होने के बाद
- 1:04:15अर्जुन निष्कंभ हो जाता है। डर समाप्त हो जाता है।
- 1:04:27इतनी वृहद शक्ति मेरे संग है। पहला शब्द बोलता है अर्जुन और
- 1:04:38कृष्ण कहता है ठीक अब तक कृष्ण कहते हैं ही संशात्मा लेकिन अब
- 1:04:55अर्जुन कहता है। समृत्तर लब्धा मुझे याद आया मैं
- 1:05:06कौन मुझे याद आया तुम कौन समृद्ध लब्धा।
- 1:05:17तुम रेपुटेशन करते हो, तुम देखते हो?
- 1:05:22अर्जुन ने देखा तू स्पष्ट देखा इसलिए तुम बीच बीच में कब जाते
- 1:05:26हो? समृद्ध तिलब्धा मुझे याद आया।
- 1:05:30स्मरण आया भी स्मरण हो गया। था।
- 1:05:33कि मैं कौन और प्रथम बार मैंने ये देखा नष्टो मोह आपका भी दर्शन
- 1:05:44हुआ, मैं कृत्य करता हूँ। आज अर्जुन सही शिष्य हुआ।
- 1:05:56और अर्जुन ने प्रथम बार कहा कृष्ण से हे भगवान प्रथम बार का संबोधन
- 1:06:05इससे पहले हे सखा हे कृष्ण हे वासुदेव हे देवकीनन्दन ऐसे अलंकार
- 1:06:14चल रहे थे प्रथम बार। अर्जुन कहते हैं हे भगवान हे
- 1:06:21परमात्मा है हे देन बंधु मुझे बताइए मुझे क्या करना है?
- 1:06:40और कृष्ण कहते हैं, माँ मनोज स्मर अब तू अपने आप को स्मरण कर तू कौन
- 1:06:48है? ये मत देख तू मुझे देख जो मैंने
- 1:06:51अपना स्वरूप दिखाया तू विराट को देख क्योंकि मैंने विराट को भी
- 1:06:56दिखाया तुम्हे। अब तक मैंने तुम्हें यह बताया कि
- 1:07:01कृष्ण ने अर्जुन को अपना रूप दिखाया।
- 1:07:04तुम कौन हो यह शरीर नहीं हो, इंद्रिया नहीं हो, विचार नहीं हो,
- 1:07:08भावना ही नहीं हो बस यहाँ तक मैं सिम रहा हूँ, आज वक्त आ गया था
- 1:07:12तुम्हें बताता कि कृष्ण आज बताते हैं प्रथम बार मैं कौन?
- 1:07:18हू एमआइ। पहले बताया हू आर यू आज बताया हू
- 1:07:24एमआइ और जब कृष्ण की विराथता को देखता तो क्षण क्षणवृत्त हो जाता
- 1:07:35स्मृति लवधा। नष्ट मोहा।
- 1:07:39मेरा मोह नष्ट हो गया, कंपन समाप्त हो गया।
- 1:07:42मैं निष्कम्प हूँ हे माधव आज्ञा दीजिये, मैं क्या करूँ?
- 1:07:49कृष्ण कहते मुझे याद कर मुझे याद कर तुने मुझे देखा आज?
- 1:08:02मामू स्मरयुद्ध च युद्ध में कूद च।
- 1:08:08यही मेरा आदेश आज उपदेश नहीं चलेगा।
- 1:08:13आज आदेश चलेगा। इसलिए है अर्जुन।
- 1:08:20इन मेरे द्वारा मारे गए पहले से ही मारे गए दुष्टों को तू मार दे
- 1:08:28और श अपने शीश पे ले ले कृष्ण परिणाम जानते हैं, इसलिए चिंता
- 1:08:37नहीं हूँ। मुझे लोग पूछ लेते हैं पापा शाम
- 1:08:42को रिसाल्ट आएगा, लेने गया है व्यक्ति चंडीगढ़ से मैं पास हो
- 1:08:47जाऊंगा या फैल हो जाऊंगा कितने मार्क्स आएँगे?
- 1:08:52मैंने कहा जो शाम को पता ही चल जाएगा पुत्र तू मुझसे क्यों पूछता
- 1:08:56है? मेरी शक्ति क्यों व्यय करवाता है?
- 1:09:00शाम को पता ही चल जाएगा, लेकिन मन है कि मानता नहीं अभी बता दो जब
- 1:09:06तुम बता सकते हो, बिल्कुल बता सकता हूँ मेरे पास बहुत से।
- 1:09:14प्रश्न हो जाते है। मेरा कभी पुत्र होगा या नहीं
- 1:09:20होगा? मैं चुप हो जाता हूँ जानता हूँ,
- 1:09:26लेकिन क्या मैं इसी लिए आया हूँ बताने के लिए क्या मेरा प्रयोजन
- 1:09:31यही है? तुम्हें ये बताने के लिए पुत्र
- 1:09:34होगा या पुत्र होगा नहीं, मेरा ये प्रयोजन नहीं है।
- 1:09:39मेरा प्रयोजन ये है वस्तु तह हू अरे यू एंड हू ऍम आई पहले मैंने
- 1:09:47तुम्हें बताया कि हू आर यू इंद्राया नहीं हो तुम?
- 1:09:51मन नहीं हो विचार नहीं भावना ही नहीं कल प्रथम बार बोला हूँ एमआइ
- 1:09:56में कौन को सर्व विश्व की विराट आत्मा अखल ब्रह्मण्ड का बहुत
- 1:10:08सौंदर्य अखल ब्रह्मण्ड की आत्मा? अखिल भ्रमण का स्वरूप वो ज्ञान,
- 1:10:17वो विराटता वो अनंतता वो में? कल प्रथम बार में नमस्कार।
- 1:10:29स्टेप ब्य स्टेप ही चलना होता। है।
- 1:10:33जब अज्ञानो से सन्मुख हुआ जाता है तो ज्ञान की सीधी छलांग काम ना
- 1:10:41देगी। काम ना चलेगा।
- 1:10:45अष्टावक्र और कृष्ण अच्छी तरह से जानते हैं।
- 1:10:48अष्टावक्र काम ना करेगा। अष्टावक्र जैसी सीधी सरल बात वो
- 1:10:54भी कह सकते। थे।
- 1:10:58के कूद जा, वही तू है तत्वमसी से के तू कृष्ण भी कह सकते हैं,
- 1:11:08लेकिन कृष्ण इस बेटर मास्टर। हाँ जी यूँ कहूं के बेस्ट मास्टर
- 1:11:16कोई अति शोक्ती न होगी। कृष्ण जानते हैं अगर मैं कहूं तू
- 1:11:23ही है तू यह समझ नहीं पायेगा फिर यह इस अहंकार को ही।
- 1:11:30मैं समझ लूँगा, वहाँ शुरू होता है नार्सी शिफ्ट, वह आत्म शिलाग है
- 1:11:39बड़ी गद्दी के ऊपर बैठ जाना और कह देना कि मैं हूँ तो मुमकिन है, यह
- 1:11:44है नार्सी शिफ्ट आत्म शिलाग। जैसे नेपोलियन कहता है इम्पॉसिबल
- 1:11:52वर्ल्ड इस नॉट फाउंड इन ब्य डिक्शनरी मेरे शब्दकोश में असंभव
- 1:11:57नाम का कोई शब्द नहीं है। लेकिन क्या ये शब्द हुआ?
- 1:12:05मृत्यु से बचना संभव हुआ? मृत्यु से बचना असंभव हुआ ना और
- 1:12:16ये कहता इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन ब्य डिक्शनरी गलत है।
- 1:12:24मैं हूँ तो मुमकिन है लेकिन नहीं है।
- 1:12:28यह है अतः शिलागा इट्स ए नर्सिज़्म एक जुनानी पन्या से
- 1:12:41कहानी पढ़िएगा। उसमें एक पत्र है नर्सिज़्म।
- 1:12:51वहीं से ये शब्द बना आत्मशलाग लेकिन कृष्ण आत्मशलाग नहीं करते
- 1:12:59आत्मशलाग तुम्हारे दिमाग में यही आएगा।
- 1:13:02बुद्धि यही तक पकड़ पाती है। बुद्धि से आगे पकड़ ही नहीं पाते।
- 1:13:08तुम्हारी भी मजबूरी है। हम जो बोलते हैं तुम जो सोचते हो
- 1:13:16किसी दिन हम भी नहीं सोच पाते थे वो तुमसे आया ना गया।
- 1:13:26से बुलाया ना गया फैसला प्यार में दोनों से।
- 1:13:44मिटाया न गया तुम से आया न गया हम से बुलाया न गया।
- 1:14:04असला प्यार में दोनों से मिटाया न गया तुमसे आया न गया।
- 1:14:24बुद्धि और अस्तित्व का फासला कभी कम नहीं होगा।
- 1:14:29मैं जो बोलेंगे अस्तित्व से बोलेंगे और तुम जो समझोगे बुद्धि
- 1:14:33से समझोगे और फासला प्यार में दोनों से मिटाया ना गया ना मैं
- 1:14:39मिटा सकता हूँ कोशिश कर। अस्तित्व को शब्दों में डालने की
- 1:14:45भरपूर कोशिश करता है संत लेकिन ना कामयाबी हाथ लगती है और तुम भी
- 1:14:53संत को संत की प्यारी आवाज़ को हृदय में बसाने की भरपूर चेष्टा
- 1:14:58करते हो। इन 1 सब विवश हो जाता है तुम वहाँ
- 1:15:08जा नहीं सकते, हम तुम्हें वहाँ ले जा नहीं सकते फासला प्यार में
- 1:15:15दोनों से मिटाया ना गया। तुम्हें तुम्हें खुद ही चलना
- 1:15:20होगा। गुरु तुम्हें यही सीखा सकता है
- 1:15:24मात्र और अंत में जब उस जंक्चर पॉइंट के ऊपर बैठे हो कि तुम
- 1:15:30जंपिंग पॉइंट हो तो कंपों के डरोगे या मृत्यु का व्यय ही तो
- 1:15:36तुम्हारे आखिरी वह। पहले से लेके आखिरी भय तक यही तो
- 1:15:41भय तुम्हे सताता है और तुम मरना चाहते नहीं अहंकार मरना नहीं
- 1:15:47चाहता अहंकार के बिना तुम उस गति को पा नहीं सकते यही दंड।
- 1:15:56शंस्य कहलाता है यही कृष्ण कहते हैं, शंस्य आत्मा विनिश्चित
- 1:16:01तुम्हारा विनाश हो जाता है। तुम अरबों पाउंड डॉलर कमा सकते हो
- 1:16:10लेकिन क्या वो कमाया? तुम बड़ी गद्दियाँ कमा सकते हो,
- 1:16:18लेकिन क्या वो कमाया सारी दुनिया को नतमस्तक अपने चरणों में कर
- 1:16:23सकते हो? लेकिन क्या दुनिया नतमस्तक हुई?
- 1:16:29जो संघ न ले जाया जा सके वो क्या खा कमाया?
- 1:16:35कमाया भी तो क्या कमाया जो संग न गया, लेकिन संत वो कमाता जो संग
- 1:16:41जाता संत कमाता आनंद। आनंद।
- 1:16:49उसके संग जाता। जितना तुमने अपनी आत्मा को उत्थान
- 1:16:59किया वो तुम्हारे संग जाएगा। अगले जन्म में इसी हिसाब से
- 1:17:03तुम्हे जीवन मिलेगा। इसलिए कहा संत को सुन लेना अगर
- 1:17:09संत है तो गपौड़ी को मत सुनना। लक्षण हैं इसके बहुत बार समझाया
- 1:17:15मैंने तुम समझ ना पाए। मैंने समझाया मैं लॉबी नहीं होगा,
- 1:17:26मैं काम ही नहीं होगा, अब क्रोध ही नहीं होगा।
- 1:17:29वह मधुमेह मच्छर नहीं होगा, वह आत्म शिलागा नहीं करेगा अमानत तुम
- 1:17:49दंभितुम दंभ से युक्त नहीं होगा। दम यही फोकी मैं हूँ तो मुमकिन है
- 1:17:56ये दम है इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन मैं डिक्शनरी यह दम है।
- 1:18:11आत्म शलागा ज्युटी होती कल्पना होती है, लेकिन आत्म बोध कल्पना
- 1:18:18नहीं होती, आत्म बोध सत्य होते है, आत्म बोध दर्शन है, और आत्म
- 1:18:24शलागा इमेजिनेशन है, कल्पना है इन दोनों का वर्कशाप कर दिया मैंने।
- 1:18:33यही फर्क है यही मजबूरी है तुमसे आया ना गया हमसे बुलाया ना गया
- 1:18:43चेष्टा करते हैं बुलवाने की खींचने की चुम्बक की तरह।
- 1:18:471000 उपाय करते हैं, लेकिन तुम आते हैं कृष्ण कहते हैं तुम गुरु
- 1:18:59को पहले पहचान लेना, गुरु बनाइए जानकर उसके व्यवहार, चरित्र या तो
- 1:19:09गौफाओं में जाने वाले हैं। तुम उनके पांव पकड़ लेते हो
- 1:19:16चरित्र इसलिए ओशो को मैं कंडक्ट करता हूँ।
- 1:19:21वह एक चीज़ को भूल गए। हिंदुस्तान में चरित्र जलता है।
- 1:19:26प्रथम दृष्टया प्रथम दृष्टया हिंदुस्तान में चरित्र चलता है।
- 1:19:38और तुम्हें पहले चरित्र साफ करना होगा।
- 1:19:42तुम पहुँच गए बिलकुल ठीक तुम आनंदित हो बिलकुल ठीक।
- 1:19:47तुम मदमस्त हो बिलकुल ठीक, लेकिन फेर ये इलू इलू क्या है, ये
- 1:20:01लिब्रल सेक्स क्या तुम्हें पता है तुम कहाँ हो?
- 1:20:06तुम उन लोगों के बीच में हो कैसे दुनिया तब्दील होगी?
- 1:20:14तुम्हें इनके बीच में इन जैसा ही होना पड़ेगा जैसे कृष्ण कृष्ण के
- 1:20:18समझ अर्जुन मूड हैं। और कृष्ण भी मूड हो जाते हैं।
- 1:20:28चलो ऐसा ही सही इसलिए मैं कृष्ण को सुपरमास्टर कहता हूँ।
- 1:20:38एक एक पौड़ी पर खुद भी चढ़ते हैं और एक एक पौड़ी पर संग संग अर्जुन
- 1:20:43को। हाथ में हाथ ढले चढ़ाते हैं।
- 1:20:47चलो चलो मेरे संग संग चलो बातचीत भी करते हैं और पड़ाव भी पूरे
- 1:20:55करते हैं, सीढ़ियों भी नापते हैं और संग संग भी चलते हैं और छत पर
- 1:21:02ले जाते हैं। ये देखो, ये है सत्य ये फैसला तुम
- 1:21:14चाहते तो बड़े हो कि संत मिटा दे और संत भी बड़ा चाहता है।
- 1:21:20कि काश इनकी दुविधा मिट जाए, शमशा विहीन हो जाए लेकिन दोनों की
- 1:21:25मजबूरी है तुमसे आया ना गया हमसे बुलाया ना गया।
- 1:21:36असल प्यार में दोनों से मिटाया ना गया।
- 1:21:40इस राह पर चले हो? मार्ग नापने से पहले कितना ही
- 1:21:49वक्त लगा लेना लेकिन चल रहा। जितना मार्ग में चलोगे बड़ा कम
- 1:21:58वक्त लगेगा आपको विकास यू आर कमी मंजिल।
- 1:22:15तुम मेरे। तुम मेरी पूजा, तुम देवता हो, तुम
- 1:22:44देवता, तुम मेरे मन। तुम मेरी पूजा, तुम देव जा मेरी
- 1:23:06आखिरी बात। आनंद की इस राह पे चले हो सबसे
- 1:23:16ज्यादा वक्त तुमने स्पेंड करना है किस चीज़ पे इन सर्च ऑफ गुरु
- 1:23:23कितना ही वक्त लगे गुरु मत बनाना। गुरु तभी बनाना जब परिपूर्ण यकीन
- 1:23:32हो जाए कि हाँ यह गुरु बनने के योग्य।
- 1:23:37है। किसी भी एरे गरे को तुम समर्पित
- 1:23:45हो जाओगे ऐसा ना हो। कि फिर आगे गुफाओं में जाना पड़े।
- 1:23:57ये तुम्हें विकार से ग्रसित कर देंगे।
- 1:23:59इनकी भावना कुछ है मन लोभी मन लालची मन, चंचल मन चूर मन के मते
- 1:24:08न चाह लिए पलक, पलक, मन और इनकी कुछ वृत्ति और हो सकती है।
- 1:24:14गुरु को खोजने में पूर्ण वक्त खर्च कीजिए जब तुम्हारी आत्मदृष्ट
- 1:24:19हो जाए। हाँ यही है मिल गया यूरेका यूरेका
- 1:24:25मिल गया मिल गया और उसके लक्षण मैंने बताये।
- 1:24:35यहाँ तक कि जिसके जीने की भी तमन्ना ना हो, इतनी तमन्नाएं
- 1:24:40समाप्त हो जाएं। इच्छाएं बहुत हैं तो रुलाई हैं
- 1:24:47इसको पैमाना बना लेना। इच्छाएं बहुत हैं तो रुलाई हैं,
- 1:24:52जो खुद ही रो रहा है। जो खुद ही तुमसे मांग रहा है
- 1:24:56भिक्षा पात्र लिया, धन वैभव पूजा तुम सम्मान तो उसे तुम गद्दियाँ
- 1:25:08तो उसे वह भिखारी है याचिका है मगता है।
- 1:25:13क्या तुम उसे गुरु बनाओगे? नहीं नहीं गुरु बनाना है सम्राट
- 1:25:19जो तुम्हारी भिक्षा पर निर्वाण ना करे तुम्हारी भिक्षा पर धर्मदार न
- 1:25:26हो जो खुद के अविलंबन से अविलंबित हो।
- 1:25:35तुम्हारे अवलंबन की कामना ना करे तो सबसे ज़्यादा वक्त गुरु खोजने
- 1:25:41में लगाना, पूरा वक्त लगा देना, तुम्हारा प्राण संतुष्ट हो जाए।
- 1:25:47जब तब गुरु बनाना और याद रखना। खुद भी शिष्य बनना, बिना जाने खुद
- 1:26:01टिप्पणी मत करना खुद भी शिष्य बनना ये शिष्य का स्वभाव।
- 1:26:06है। जो जानता है उसके जानने पर आपत्ति
- 1:26:10न करें। क्योंकि यह रास्ते अज्ञात के
- 1:26:15रास्ते है। जो तुम कभी गए नहीं तुम्हें क्या
- 1:26:18पता ये क्या है तुम अज्ञात राहों पे चल रहे हो जीस राहों पर चलकर
- 1:26:25गुरु पहुँच गया है मंजिल। और गुरु अज्ञात रास्तों का बखान
- 1:26:31कर रहा है। तुम क्या जानो ये सही है या गलत
- 1:26:34है है यू कैन जज इसलिए कमेंट विथ करना है क्योंकि अभी तुम अज्ञानी
- 1:26:45हो और दो बाते मैंने कही सारा वक्त।
- 1:26:48ज्यादा से ज्यादा वक्त गुरु को खोजने में लिखा देना ऐसे नहीं है
- 1:26:52कि डेरे में भीड़ जा रही है। बेड़ों की संग हो रही है।
- 1:26:55चलो हम भी नाम ले नहीं है सन ये ऐसा मुकाम है जहाँ जाकर तुम्हारा
- 1:27:01रोम रोम अलादित हो जाएगा। तुम परम प्रसन्नता की अवस्था में
- 1:27:06खो जाओगे। ऐसे ही बेड़ों के पीछे लग कर भीड़
- 1:27:12मत लगा लेना, गुरु को परखना, गुरु को जांचना, गुरु को जांचना और फिर
- 1:27:22दूसरा दूसरा पड़ाव गुरु गुरु के कहें को मान ना।
- 1:27:27शिष्य विभन्न ये दो चीजें जब पूरी हैं तो मिलन हो गया, योग हो गया,
- 1:27:40योग हो गया तो तुम आनंद में चलेंगी।
- 1:27:50बहुत रात बीत चलो, मैं सुला दूँ बहुत रात बीत चलो, मैं सुला दूँ।
- 1:28:09पवन छेड़े सरगम में लोरी सुना, पवन छेड़े सरगम में लोरी सुना।
- 1:28:28तुम्हें देख कर यूं लग रहा है जै सिफ़ारिशता कोई सो रहा।
- 1:28:48तुम्हें देख कर यूं लग रहा है जैसे फरिश्ता कोई सोरा।
- 1:29:05तुम ही मेरे मंदिर तुम ही मेरी पूजा, तुम ही देवता हो, तुम ही
- 1:29:18देवता किसी को देवता बनाने से पहले।
- 1:29:25जांच लेना, परख लेना और खुद भी शिक्षा हो जाना।
- 1:29:30जांच में कितना ही समय लगा देना बेड़ों के भीड़ के पीछे मत जाना
- 1:29:36जिंदगी की बात है। खुशी की बात है, आनंद की बात है
- 1:29:43से कुर्बान मत होने देना, जांच लेना, लक्षण देखना बाहर से जब
- 1:29:50तुम्हें तसल्ली हो जाए तो सरेंडर कर देना।
- 1:29:55माँ बेकम शरणं वृक्ष आहू तम सर पर पापय भ्यव।