Latest / Baba ji Vijay Vats / 14 Oct 25 - मन चलता है तो चलने दो - New Formula! सारा जीवन लेखे लगाने की जरूरत नहीं! बस 10 min!
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- 0:01अरे मन्नू, कहाँ ढूंढेगा उसे जो सब जगह मौजूद है फूलों में,
- 0:15गलियों में, रस्तों की गलियों में।
- 0:20वही तो है सांसों की धड़कन में वही तो है लेकिन तुम्हारा मन
- 0:35तुम्हें भटकाता है, यहाँ नहीं। वहाँ मिलेगा हर की पैड़ी पे
- 0:42मिलेगा अमरनाथ मिलेगा बद्रीनाथ केदारनाथ मिलेगा।
- 0:53तो वह जो कहने वाले कह गए जानने वाले कह गए खोजने वाले कह गए
- 0:58जिनको मिला वह पता ठिकाना दे गया कि वह सर्वव्यापक है।
- 1:06तुम्हारे घर में भी उतना ही तीर्थ में भी उतना।
- 1:14काबा, मक्का, मदीना, गंगासागर सभी तीर्थ सभी में समान रूप से है
- 1:22सर्वव्यापी सदा अलेप्पा, तोहे संग समाज काहे अरे बन।
- 1:32खोज न जाए तू खोज मत उसे खोजने की कोई आवश्यकता नहीं।
- 1:40जो सब जगह व्याप्त है उसको खोजोगे कहा खोजना नहीं है मात्र दर्शन
- 1:48करना है। तुम्हारी खोज ही बाधा बन जाते।
- 2:01दिल के आइने में थी तस्वीरें यार दिल के आइने में थी तस्वीरें यार।
- 2:11जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ले तुम जहाँ हो वहीं मिल जाएगा बात तो
- 2:22झुकने की है पानी पिलाने वाला। मदिरा पिलाने वाला साकी सदा मौजूद
- 2:36तुम अंजलि तो बांध लो तुम्हारे मार्गदर्शक तुम्हारे पथ पर दर्शक
- 2:50तुम्हें भ्रांति में डालते हैं यहाँ नहीं मिलेगा और तुम्हें
- 2:53ऐतबार भी हो जाता है क्योंकि यहाँ तो नहीं मिला।
- 2:58यहाँ तो शोर है, यहाँ तो भोज है, यहाँ तो बंधन है, तो फिर चलो
- 3:10अकेले चलो। चल चल जहाँ गम के मारे न हों झूठी
- 3:24आशा के तारें न हों, चल जहाँ गम के मारे न हों।
- 3:38झूठी आशा के तारें न हों, झूठी आशा के तारें न हों।
- 3:52बाहरों से क्या फायदा? जिसमें दिल की गली जल गई।
- 4:03जख्म फिर से हरा हो गया है मेरे। दिल कहीं और चल सब अक्षरों का खेल
- 4:18है और बड़े मज़े की बात है। सब्जेक्ट्स को विषयों को तो हम
- 4:29अक्षरों से समझ सकते हैं। अक्सर बनाई ही इसीलिए थी, शब्दों
- 4:35का निर्माण ही कन्वर्सेशन पे लिया हुआ था परमात्मा कोई कन्वर्सेशन
- 4:41की चीज़ थोड़ी। शब्दों की खोज भाषा की खोज हुई।
- 4:50मनुष्य मनुष्य को बदला सके, कॉन्वर्सेशन कर सके लेकिन
- 4:58कॉन्वर्सेशन जैसे हम रुपय बनाते हैं, करेंसी बनाते हैं, डॉलर
- 5:05बनाते हैं। रोज़मर्रा के कामकार पूरे करने के
- 5:10लिए और बहुत से लोग धन को ही परमात्मा समझ लेते हैं।
- 5:19हमने धन बनाया किसी और पर्पस से? वह पर्पस था, पहले वक्त हुआ करते
- 5:28थे जब सामान के बदले सामान दिया करता था।
- 5:32ले भाई तू एक सिर चने ले ले मुझे दो सिर कणक दे दे ये ले तुम घी ले
- 5:40ले मुझे दूध दे दे ऐसा व्यापार हुआ करता था।
- 5:44यह वक़्त हमने देखे ट्रांसक्शन को इजी करने के लिए हमने करेन्सी का
- 5:56निर्माण किया। हर चीज़ के भाव तय कर लिए बड़ा
- 6:02आसान हो गया मसला लेकिन बिगड़ भी गया।
- 6:07बिगड़ गया कि हम कितना स्टोर करेंगे।
- 6:10कन को मूंगे को और खराब हो जाएगी लेकिन पूँजी को हम स्टोर कर सकते
- 6:17हैं। फिर स्टोर करने के लिए बैंक भी
- 6:19खुल गए। मनुष्य ने।
- 6:26सभी चीजों का निर्वाण कर लिया, खुद को बहलाने के लिए तुम्हारे
- 6:36रबये पैसे मान सम्मान गद्दियाँ सब बच्चों के छुनकरें कड़काए जाओ
- 6:45बच्चों के छुनकरें। और तुम बच्चों के छंकण शब्द लेकर
- 7:01परमात्मा की खोज में चला मान्यताओं के बल के ऊपर कागजों की
- 7:17किश्तियां। कागज़ों के जहाजों से क्या तुम
- 7:24अमेरिका पहुँच जाओगे? कागज़ों की किश्तों से क्या ये
- 7:31सागर पार कर लोगे? नहीं कागज़ों की किश्तियाँ तो
- 7:37इतनी बारीक? होती है कि तुम पांव रखोगे और डूब
- 7:44जाएंगे। खुशबू डूबेंगी आप काबिल डूबेंगे
- 7:51कागजों के जहाज अगर उन पर बैठने की तुमने कोशिश की?
- 7:58और कहीं नहीं जाओगे औंधे मुँह घरोगे चूकना छुड़ा बैठोगे यह
- 8:11कागजी महल जिनको हम नाम कहते है, तुम आज जमा के देख लो।
- 8:22हमने आजमा के देखा और पाया कि कागज की कस्तियां डुबोती हैं, बीच
- 8:29मजेदार नहीं, किनारे पर ही डुबो देते हैं, तुम बैठ भी नहीं पाते
- 8:38और कश्तियां डूबती हैं तो मैं भी डुबो देती हूँ।
- 8:42और इन नाम के सहारे अनुमान्यताओं के सहारे आज हमने जीना सीख लिया
- 8:52है कल किसी महान पुरुष ने। हमारे चीफ जस्टिस के ऊपर जूता
- 9:03फेंक दिया। मान्यता ही तो है, सनातन हो,
- 9:13हिंदू हो, सिख हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, पादरी हो, यहोद हो,
- 9:18मान्यता ही तो है। और कागज की किश्तियां होती हैं?
- 9:26मान्यताएँ ना शब्दों में समाती ना कल्पना में समाती।
- 9:38कोई विष्णु को भगवान माने बैठा कोई मोहम्मद को भगवान माने बैठा
- 9:50कोई ईशा को भगवान माने बैठा लेकिन हैं तो मान्यता।
- 10:02मैं तुमसे पूछता हूँ कोई भी नाम जपने वालो क्या तुम्हें पक्का पता
- 10:11है कि वो है? और सबसे बुनियादी सवाल तो यही है
- 10:19जिसे पानी चले हो, वह है भी? अगर नहीं है तो मैं कहता हूँ काहे
- 10:34प्रयास करना। मार्क्स कहती हूँ, वे नहीं।
- 10:42चार बार कहते हैं कोई लेन देन का हिसाब नहीं होता ऋण कर्त्व गर्दन
- 10:47पे बैठो, कर्ज उठा लो गे फिरो ना ऋण देने वाला बचेगा।
- 10:57ना ऋण लेने वाला बचेगा। बस में बहुत से देह से पुनर आगमनम
- 11:02कुत्ता ऋण देने वाली देह भी भस्म हो जाएगी।
- 11:08ऋण लेने वाली देह भी भस्म हो जाएगी और फिर से नहीं आएगी।
- 11:14ठीक है। किसको खोज रहे?
- 11:21हो लगी है प्यास? क्या पानी पानी कहने से प्यास मच
- 11:33जाएगी? भूख है वो?
- 11:41भोजन भोजन कहने से भूख मर जाएगी, कल्पनाओं की किस्तियां कहाँ तक
- 11:52लेके जाएंगी? आपको खुद भी डूब जाती हैं और
- 12:00तुम्हें भी डुबो देती हैं। एक कदम भी तो नहीं चल पाती और सच
- 12:07पूछो तो पहला कदम ही तुम्हारा पहला कदम ही भारी होता है।
- 12:12कागज की खस्ती इसलिए तुम्हारे ओछे तर्क।
- 12:20पांव रखते ही टूट जाते हैं और टूट जाते हैं, तभी तो गुस्सा आता है।
- 12:24मैं सनातन का अपमान नहीं सहूंगा ये कत्तर साल का बुढ़ा बोल रहा है
- 12:30सारी गँवार सारी गँवालई तुम जिंदड़ी है।
- 12:40उनकी जहाँ नवी चौखट या बस यही कोटा था, अरे बूढ़ा हो गया है
- 12:48मरने के करीब है सनातन का अपमान नहीं समुगा ये तुम्हारी माँ ने तो
- 12:54ये कागजी नामी है। कोई कहता मैं इस्लाम का कोई कहता
- 13:03मैं ईसाईयत का कोई कहता, मैं यदियत का अपमान नहीं सहूंगा
- 13:12परमात्मा के नाम पर यह झगड़े तभी होते हैं।
- 13:17जब तुम परमात्मा को शब्द बना लेते हो, शब्द न हों तो परमात्मा के
- 13:27नाम के ऊपर झगड़े ना परमात्मा का नाम भेद पैदा करता है।
- 13:33सबसे बड़ा कातिल है परमात्मा का नाम।
- 13:37तुमने व्याख्या गलत कर ली। नाम अगर धरती पर आज तर्क सबसे
- 13:44ज्यादा कतल करवाएं तो इन मान्यताओं ने कराया शक्ति कभी कतल
- 13:52नहीं करवाता। मान्यताएँ ही कतल करवाया करती
- 13:56हैं। सनातन का अपमान नहीं चाहूंगा और
- 14:01गबई साहब बुध नहीं हैं, बहुत संविधान की रक्षा के लिए बैठे हैं
- 14:12और संविधान पर जूता पड़ गया। वो कहने वाले कौन होते हैं कि जाओ
- 14:19मैंने तुम्हें क्षमा की जूता संविधान पे पड़ा है क्षमा तुम कर
- 14:28रहे हो। ये शब्द बुद्ध बोले तो बोलें,
- 14:36क्योंकि बुद्ध ने उस तल को छू लिया जहाँ राग द्वेष वहरभाव में
- 14:42जाता है लेकिन आपने क्षमा करना आपने वो तल छुआना।
- 14:54बुध कहे तो कहे बोध कहे यह गलत सनातन के उस पार जाने वाला अंतरंग
- 15:06पहलुओं में बैठ जाने वाला यह कहे तो कहे।
- 15:10ये सनातन का अपमान नहीं सुनता सनातन को मान्यता के रूप में लेने
- 15:19वाला व्यक्ति विष्णु ही भगवान तुम्हारे तो कितने भगवान हैं,
- 15:24जीतने बंदे नहीं हैं, उससे ज्यादा भगवान हो।
- 15:31नवरात्रों में सिंह वाहिनी दुर्गा की पूजा करते शराब की दुकानें
- 15:42बंद, मास मट्टी की दुकानें बंद। और हमारी दुर्गा बैठी है उस सींग
- 15:56की सवारी कर रही है जो खुद मांस खाता है, शेर दूध नहीं पीता, शेर
- 16:06खाता है मांस दोष पीलाओगे मर जाएगा।
- 16:13और तुम सिंह वाहनी दुर्गा की पूजा करते हो, अजब पागलपन है, या तो
- 16:20तुम्हारी बुद्धि तुमने कही गिरवी रख दी है या फिर बुद्धि है ही
- 16:26नहीं? गोबर कूड़ा करा है?
- 16:33मान्यताओं के बल के ऊपर एक वो पागल हुआ।
- 16:40तुलसीदास कलयुग केवल नाम अधारा जैसे कलयुग में सिद्धांत बदल
- 16:47जाएगा। सुमर सुमर नर उत्तर हीं पर क्या
- 16:56बदले का कलयुग में एच टू ओह एच थ्री ओह हो जाएगा कलयुग में
- 17:04एनएसीएल एनए, टू सी एल हो जाएगा। कलयुग के वाला नाम अथारा बड़ा
- 17:13बढ़िया भक्त है अकेले नाम जपलो बस एक ठगी का एक जाल।
- 17:24दिल के बहलाने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है हमने देखी है जनक
- 17:29की हकीकत लेकर नाम के जपने वालों को ऐसा कहो तुम खाना बंद कर दो
- 17:41तुम खाना खाना। जपना शुरू कर दो रोटी रोटी रोटी
- 17:46प्यास लगी है पानी पानी पीना शुरू पानी, पानी, पानी, पानी ख्यालों
- 17:53में पिरो, ख्यालों में भोजन खाओ होके मर जाएगी, प्यास मर जाएगी।
- 18:05बिलकुल नहीं मैं तेरी मर जाओ के ऐसे ही धर्म धर्म का सही स्वरूप
- 18:12तुम सनातनियों ने मार दिया है तुम हिन्दुओं ने मार दिया मुसलमानों
- 18:18ने मार दिया, ईसाईयों ने मार दिया आज।
- 18:24सब मृत पड़े है जिंदा कोई नहीं लाशें हैं, सांस ले रहे हो, प्राण
- 18:37नहीं जैसे खाल, लोहार की सांस लेतबे न प्राण।
- 18:46लोहार की खाल आजकल तो नहीं तुमने देखी होगी।
- 18:49हमारे जमाने में लोहार की खाल होती थी, वह सांस लेती थी पर
- 18:57उसमें प्राण नहीं होता था। अक्षरों का खेल कड़ाई भाड़े के
- 19:11ऊपर 10 पांच टटू ले आओ जो शाम तक तुम्हारा गुणगान करते रहे।
- 19:21मुझे लोग कहते हैं कि आप। इंटरव्यू क्यों नहीं करते?
- 19:36आप मीडिया को इंटरव्यू क्यों नहीं देते?
- 19:40मैंने कहा, मैं कोई प्रॉब्लम तो नहीं हूँ?
- 19:42मैं कौन सा प्राइम मिनिस्टर, यहाँ तो प्राइम मिनिस्टर को।
- 19:52में कोई प्रॉब्लम था हम पीने आए और दुनिया है यहाँ पर।
- 20:07नाम लेने के लिए हम तो आए हैं महज आराम करने के लिए और ध्यान रखना
- 20:19हमने आराम करके ही पाया जीसको तुम ढूंढ रहे हो काम करता है नाम जब
- 20:27क्या। हमने वो पाया आराम करके यकीं न हो
- 20:37तो आराम करके देख लो। प्रकृति पागल थोड़ी है जो आपको
- 20:40रात को विश्राम दे देती है। प्रकृति को पता है ऐसे तरोताजा न
- 20:48हो पाओगे। तो विश्राम देना जरूर है।
- 20:53सारे दिन के थके मान दे वक्त के थपेड़े बॉस ने क्या कुछ कह दिया
- 20:59ग्राहकों ने क्या कुछ कह दिया? यही तो इकट्ठा है तुम्हारे दिमाग
- 21:05खोपड़े में शब्दों का खेल। और देखिए अगर ये मन चलता है और
- 21:15फॉर्मूला बता दूँ हे चल ने विकास इट इस केथोर्सेस और तुम इतने मूड
- 21:25हो। कि न दुनिया तुम्हारे समाज सुधार
- 21:29के तुम्हें जीने देते हैं, न खुद जीते है।
- 21:33यह प्राकृतिक प्रक्रिया है जैसे तुम सारे काम करते रहते हो दिन
- 21:39में और भीतर की प्रोसेसिंग हमारे विजाती है।
- 21:44द्रव्य निकालने में लगी रहती है। उसे पता ही नहीं तुम क्या कर रहे
- 21:47हो। वह अपना काम निर्बाध, बिना बताए,
- 21:52बिना शोर गुल के करती रहती है। सारा विजाति या द्रव्य फॉरन
- 21:56मटेरियल बाहर निकालने में व्यस्त रहती है।
- 21:59सारी गंदगी, कूड़ा, कबाड़ जो तुमने जुटा लिया।
- 22:05वह प्रकृति भीतर का काम जारी करती, प्रकृति तुम्हारी बात नहीं
- 22:09मानती प्रकृति तुम्हारे आदेश पर नहीं चलती तुम लाख चाहे सोचे जाओ
- 22:16कि प्रकृति हमारे आदेश से चलती है, तुम गलती हो।
- 22:20ना दिल तुम्हारे आदेश से धड़कता है ना स्वांस तुम्हारे आदेश से
- 22:25चलता है एक पागल है, वो कहता है कि 2 मिनट में एक सांस ले क्या हो
- 22:31जाएगा भाई चमत्कार हो जाएगा तुमने चमत्कार देख लिया।
- 22:412 मिनट में एक सांस लें। हमने ये सारे कूड़े कबाड़े करके
- 22:46देखे हैं मुद्दतों तक वर्षों वर्षों तक में यही तो जगह ही मरता
- 22:51है बस्ती धोती नेती, नौली मुजरौली यह सब।
- 23:00यह सब कंजर खाने में करता रहा, ओह दुखी से दुखी होता क्या?
- 23:13जीस दिन समझ आया ये कर कर के पाया?
- 23:17कि कर कर के तुम और दुखी हो जाते हो उस दिन करना छोड़ दिया और जीस
- 23:25दिन करना छोड़ दिया उस दिन बहे मिल के जिसकी तलाश तुम कर रहे हो
- 23:33दौड़ते दौड़ते। वो मिलता है, ठहरते, ठहरते और
- 23:40दुनिया है यहाँ पर नाम जपने के लिए हम तो आए हैं महज आरंभ करने
- 23:46के लिए और हमने आरंभ करके ही राम। तुम आराम को हराम कहते हो, हम
- 23:58आराम को आराम का पाना कहते हो, एक प्रकृति का आरंभ होता है, जो
- 24:05प्रकृति तुम्हें स्वतः ही देती है वह प्रकृति का काम है।
- 24:11जब तुम थक जाते हो, तुम तुम्हे सुला देती हो, लेकिन एक आराम तुम
- 24:16स्वयं से पैदा कर सकते हो। यह कोई जीना थोड़ी है जो तुम जी
- 24:23रहे हो सवस्थ चल रहा है, जल धड़क रहा है और तुम्हारा मन भी चल रहा
- 24:30है। फिर वो कहती है, सांस को 2 मिनट
- 24:34में एक सांस ले लो, क्या होगा भाई, दिन में तो किसी तरह यदा कदा
- 24:43कर लोगे, ये रात क्यों आ जाती है? दिन तो जैसे तेरे से गुजर जाता
- 24:57है। यह रात क्यों आ जाती है?
- 25:01मोहम्मद पगला गए हो और या खुद को ओशो का वक्त बताते?
- 25:16जब ओशो ही दुनिया को गुमराह कर गया शब्दों से तुर्क की तलवार
- 25:24बड़ी तीखी थी, लेकिन तुर्क की तलवार तीखी थी।
- 25:34और तुम्हें सीखा गया तर्क और वह जो हमारे ऋषियों ने परंपरा बनाई,
- 25:42शांति में जाने की तोड़ गया। सब खुद भी बेमौत भर गया।
- 25:50और तुम्हें भी ऐसे ऐसे आयाम दे गया कि तुम भी जिंदा ना रह इसको।
- 25:59ओशो का शिष्य मुझे एक बात बताओ ओशो के शिष्य 90 गोलियां।
- 26:17डायल जुबान की खा के 30 सीसी नाइट्रस ऑक्साइड की सूंघ के अगर
- 26:25कोई लाफ़िंग मुद्दा पे बोलना शुरू कर दे क्या वो सत्य होगा?
- 26:31बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे भांग खा के।
- 26:36व्यक्ति कहे कि मैं एनलाइटन हो गया हूँ, यही सखा के गए लोगों को
- 26:47अपने कृत्यों के द्वारा यही सखा के गए हो।
- 26:53संत कहते हैं की अगर तुमने पा लिया है और आने वाली जनता को आने
- 27:01वाली पीढ़ी को तुम आनंदित करना चाहते हो तो तुम्हारा आचरण बड़ा
- 27:06ऐसा होना चाहिए। जीसको तुम्हारी शिष्य अनुकरणीय कर
- 27:12सकें। अब शिष्य भी ऐसा करें नाइट्रस
- 27:18ऑक्साइड को सूंघकर लाफिंग बुद्धा करें हँसें क्या हो जाएगा इसे
- 27:26भीतर के प्राण तो न हस पाने का या ढांचा हँसे का?
- 27:35क्योंकि नाइट्रस ऑक्साइड और डाइजेपाम शर्ट ये बाहर का है।
- 27:40ये शरीर की संरक्षण को हँसा सकता है।
- 27:44लेकिन तुम्हारे प्राणों को कौन हसाएगा?
- 27:51अरे मूडानंद? तो भीतर जाने का मार्ग सका।
- 27:59तुम इन 60 के ऊपर निर्भर हो के लाफुन बुद्धा का प्रचार करोगे?
- 28:07मुझे लोग कहते हैं, देखो इसकी आँखें कितनी नशीली हैं।
- 28:11मैंने कहा जो व्यक्ति 90 गोलियां डाईजी पाप के खाएगा तो उसकी आँखों
- 28:17में नशा ही तो होगा। नशा ही तो खाया जो व्यक्ति
- 28:28नाइट्रस ऑक्साइड की 30 शीशियां सूख जाए।
- 28:33उसकी आँखों में नशा ही तो होगा बात बिलकुल सत्य है।
- 28:39संतों की अनुकरणीय लक्षण देखो अगर तुमने पालिया परमात्मा को उस परम
- 28:50खुशी को। और अभी पकौड़े तले हुए भल्ले खाते
- 28:55हो और उसी की डाइट बताता हूँ? आपको?
- 28:59चटपटी सी डाइट बड़ी पसंद थी। स्त्रियाँ बड़ी पसंद थी को।
- 29:14मुझे कोई कहता कि ओशो होते ना फिर आपको जवाब देते हैं।
- 29:19मैंने कहा अब ये मेरा कसूर तो है नहीं।
- 29:24ओशो गए तो अपनी मूर्खता की कारण क्या है?
- 29:32शरीर इतना विकृत कर लिया और बहाना लगा दिया कि अमेरिकन जेल में मेरे
- 29:37को थैलिम दे दिया गया। भाई अमेरिकन जेल में तुम्हें
- 29:41थैलिम दे दिया, जबकि तुमने ही नाइट्रस ऑक्साइड और वेलिम फाइव
- 29:47का। इतना इतना डोस खा के खुद के शरीर
- 29:52को विषैला कर लिया, लेकिन अंध भक्त किसी के भी हो, मेरे भी हो
- 30:01जाए हम मानते नहीं। सीखना तो तुम्हें यह है कि तुम
- 30:19बिना सहारे के हम रोज़ कहते हैं नीरा विलंब हो जाओ और ओशो भी कहते
- 30:29हैं नीरा विलंब हो जाओ, अगर नीरा विलंब हो जाओ।
- 30:35तो नाइटनेस ऑक्साइड का अविलंबन क्यों करते हो?
- 30:40मेरा अविलंब हो जाओ, सहारे त्याग दो सब सहारों को छोड़ दो तो
- 30:45वेलियम फाइव का सहारा क्यों लेते हो और फिर वेलियम फाइव का सहारा
- 30:52लो, चाहे भांग का सहारा लो। चाहे ओपियम का सहारा लो, चाहे कोई
- 30:57और नशीली माध्यम का द्रव्यों का सहारा लो, तो आँखें तो नशे में
- 31:03आएंगी, लेकिन वह नशा और भीतर जाकर उस मस्ती का नशा बड़ा फर्क है।
- 31:15बाबा यही तो फर्क बताते है तुम्हारे नशे रोज़ लेने पड़ते है
- 31:21एक बार वलियम की 90 गोलियां खा के फिर सुबह उतर जाएगी जिन्हें नशे
- 31:27जहाँ के उतर जान पर बात। एक नशा वो जो स्वयं की उपस्थिति
- 31:39को छूकर खुमार आता है होता वो भी नशा है।
- 31:47लेकिन वो खुद से अकारण विलियम के कारण नहीं, डाइजेम के कारण नहीं,
- 31:52नाइट्रस ऑक्साइड के कारण नहीं अकारण खुशी होती है और जैसे अकारण
- 32:01खुशी न मिली उसने जीवन। बेकार में समाप्त कर दिया एम्
- 32:13जन्म तुम्हारे लिख पहले जन्म तो सब खत्म हो गए लेकिन ये जन्म
- 32:22तुम्हारे लिख संत तो कह गए। कि एक जन्म उसके लेखे लगा दो,
- 32:36लेकिन तुम लगा कहाँ बात हो और शब्द तुम ये कह गए यह जन्म उसके
- 32:45लेखे लगा दो, मैं तुम्हें कहता हूँ।
- 32:48बस 10 मिनट उसके लिए खेलवा दो इन्सर्ट कंप्लीट्ली यू अरे सर ऐसा
- 32:59लेखा फिर बाय बार आपको कुछ न करना पड़ेगा।
- 33:07परवाना एक बार क्षमा में जलता है फिर कभी देखा है आपने, मैं
- 33:16तुम्हें नहीं कहता बहुत जन्म बिछड़े मेरे माधव बिछड़े का बहुत
- 33:22जन्म से हो है जन्म तुम्हारे लिखे मैं नहीं कहता जन्म बुरा लगे।
- 33:27मैं कहता हूँ सिर्फ 10 मिनट लगा दो।
- 33:31इस शम में पूरे गुस्सा, परवानी की दरखा तुम्हारा वजूद न बचे, तुम जो
- 33:40वास्तव में हो तुम्हें पता नहीं तुम हो कौन?
- 33:45वह जो नकली तुमने मैं मैं बना लिया है, यह जो सनातन की मान्यता
- 33:50मैं बर्दाश्त नहीं करूँगा। बेइज्जती यह मैं है इस मैं को
- 33:55समाप्त करना मुसलमान कहता है हजरत की मोहम्मद की बेइज्जती।
- 34:04मैं बर्दाश्त नहीं करूँगा इस मैं को खोजो कौन है ये हूँ इस थिस आई
- 34:16उस मैं को ही वर्षों में बहुत करना होता है छोटी सी बात है इतने
- 34:21शस्त्र लिख दिए। जितना धरती का भार भी नहीं
- 34:36सारा अचीवमेंट उसके लेखे लगाने की कोई आवश्यकता भी नहीं है।
- 34:43बस पूरे प्राणों से और 10 मिनट भी मैंने ज्यादा बोलते हैं।
- 34:50कभी परवाने को क्षमा में खोने में 10 मिनट लगे बस क्षमा में घुस
- 34:58गया। एक कपल ही तो लगा है और खाक हो
- 35:04गया। तुम मुझसे जलती हुई क्षमा में
- 35:11घुसने से ही डरते हो, क्योंकि मौत तुम्हें कम आती है, मौत छोड़ो मौत
- 35:17का नाम ही तुम्हें डराता है। ये सब डरे हुए लोग हैं जो तुम्हें
- 35:26इंसाफ देने के लिए बैठे हैं। मृत्यु से बह खाये हुए लोग बाबा
- 35:36कहते हैं नाम कुमारी नान का चिढ़ी रहे धनराश एक ऐसी कुमारी भी है जो
- 35:43तुम्हारी वेलिंग भाव से नहीं होती, जो तुम्हारी नाइट्रस
- 35:47ऑक्साइड के सूखने से नहीं होती। नहीं नहीं, मैंने नाइटसाइड कभी
- 35:51देखा ही नहीं लाओ दिखा दो मैं अगर के बारे में बोलेंगे तो नाइटसाइड
- 36:08सुन के नहीं बोलेंगे। मैं एड्रलिन और कोर्टर स्माइल का
- 36:18इंजेक्शन लगा के क्रोधित नहीं होऊंगा।
- 36:23मैं कम्पोज का इंजेक्शन ले के शांत नहीं होऊंगा।
- 36:32वेरे जदबी में लिए फर्जा तो तेरे मुखदी किताब ले बैठा अगर भीतर का
- 36:42वो नाइट्रस ऑक्साइड का समुद्र जान लिया होता अगर भीतर का वो वेलियम
- 36:47का डाईजीपम का समुद्र जान लिया होता।
- 36:51तो बाहर से डाइज्यूम लेने की आवश्यकता कहाँ रह गई थी?
- 36:59फिर नाइट्स ऑक्साइड को सूंघने की आवश्यकता कहाँ रह गई थी?
- 37:07यह सब कुछ ऐसा दिखलाता है। तुम वहाँ गए थोड़ा सा उस दीवार को
- 37:20छू तो लिया, बिला शक ये तो मैंने कभी इंकार।
- 37:30अन्यथा रती चटपटे पकौड़े चाउ में चुग्गा बल्ला, इमली खटाई हमारे
- 37:45यहाँ। मैं अर्थ का काम करता था, मैं
- 37:50स्त्रियाँ पे काम करते है। डेरियों को साफ करना कणक की जावल
- 37:56की तो और तो गालियाँ, मैंने बड़ी सुई, लेकिन स्त्रियाँ स्त्रियों
- 38:01को गाली देती और बड़ी अजीब सी मैं आज तक नहीं समझ सका।
- 38:05उसे गाली कारतके अगर तुम्हें पता हो तो कृपया मुझे बता देना दो।
- 38:11स्त्री स्त्री को गाली निकालती, मर्दों वाली गाली नहीं निकालती,
- 38:15उसे कहती खटाई खानी। मैंने कहा ये भी कोई गाली खटाई तो
- 38:23उसको भी खाते थे। खटाई खाने ये कोई गाड़ी हुई खैर
- 38:30मुझे आज तक नहीं समझ में आया ये गाली किस तरह हो गई?
- 38:36आखिरी ज्ञान गीत गुण गाय। तुम अक्षरों से उसका नाम झपते हो
- 38:48और कहते हैं कि हमने उसे जप लिया है।
- 38:53आखिरी साला तुम अक्षरों में उसकी सलाह ना करते हो और मन को तसल्ली
- 39:00दे देते हो कि हमने उसकी सलाह कर दी।
- 39:03तो बाबा कहते क्या सच में तुमने सुलाह क्यों कर दी?
- 39:07आखिरी नाम आखिरी साला आखिरी ज्ञान गीत गुण का तुम अक्षरों में ही
- 39:14ज्ञान देते हो, आदान प्रदान करते हो, कन्वर्सेशन करते हो?
- 39:21आखिर ज्ञान गीत गुण ग उसके गुण गाते हो गीत गाते हो क्या?
- 39:29उसके गीत गा लिए गए क्या गीता में कृष्ण ने उसके गीत गा लिए?
- 39:44अखरी लिखण बोलन बानी वाणी को भी अक्सर में लिखते हैं।
- 39:50बोलते हैं अखरी सिर संजोग वखाण अब ध्यान से समझना।
- 40:00अगर आपने एक अक्षर भी ठीक से समझ लिया गुरबानी का या गीता का, तो
- 40:10तुम्हें सारी उम्र, ये नाम क्या करने वगैरह की जरूरत नहीं होगी।
- 40:15ये तो तुम दास जन्म भी करते रहो, तब भी।
- 40:19सारे जन्मों तक तुम नाम जब्त करके ही भटके हो, इन अक्षरों ने ही
- 40:25तुम्हें लूटा है और सभी अक्षरों ने लूटा है।
- 40:32ऐसा नहीं राजधानी राम ने मोहम्मद ने।
- 40:38ईशा ने लूट लिया हो कहाँ तक नाम किस किस का नाम गिनवाएं गिनवाएं
- 40:49सभी ने हमको लूटा है। कहाँ तक नाम गिनवाई सभी ने हम को
- 41:06लूटा है, अखरी लिखन बोलन बाण अखरा सर संजोग वखन।
- 41:16यह तो सिर के ऊपर जाए, अक्षर बनाई किसने परमात्मा ने हम्म अक्षर
- 41:24मनुष्य मेड है, मैन मेड आखिरी सर, संजो व खान।
- 41:36अब देखिए आगे अक्षरों का संबंध सिर से कहा गया है, लेकिन ये जो
- 41:43अक्षर आई है मेरे सर की उपज नहीं है।
- 41:49जीस ए लिखे तिस शरण। जब फरमाई ते ओह ते पापा ये जो
- 41:56शब्द लिखा गया, जब जी का यह सिर की खोज नहीं, तुम तो सारे दिन
- 42:03जगाई बुकाई मरते हो इस सिर की खोज के कारण लेकिन बाबा बड़े साफ़
- 42:09अंदाज़ में कहते हैं ये ए लिखे। जो जपजी लिखी गई तिसरना जिसने
- 42:15लिखे उसके सर की उपज नहीं है ये अखरी सर संजोग बखान जीस है लिखे
- 42:25तिसरना परंतु ये अक्षर जिसने लिखे उसके सर के कार्ड नहीं है ये।
- 42:31तो कहाँ से आये ये वो फिर हम आये थे?
- 42:35मतलब पापा जब परमात्मा ने जैसे जैसे फुरना दे दी वैसे वैसे मैं
- 42:43लक्षता चला गया। ये फर्क है तुम्हारे अक्षरों में
- 42:54और उसकी सफरना में उसकी सफरना अक्षरों में नहीं आती, उसकी सफरना
- 43:01आती है वाइब्रेशन वाइब्रेशन को तुम कन्वर्ट करते हो अक्षरों में
- 43:07गुस्सा तुम्हें कभी शब्दों में आता है।
- 43:13एक बात कुछ शांति से बैठ जाओ, तुम कोने में तुम्हें गुस्सा आता है
- 43:22कभी अक्षरों में आता है, गुस्सा आता है, तुम अक्षरों में कन्वर्ट
- 43:27करते हो? फिर तुम गाली निकालते हो खटाई घंड
- 43:37हाँ सो हमारे एक देवी है संतोषी माता।
- 43:49शुक्रवार को कहते हैं उसका वर्ता रख लो और पाबंदी क्या है कि उस
- 43:53दिन घटाई नहीं खाने कि मैंने सारे शास्त्र पढ़ लिए।
- 44:01मुझे किसी शास्त्र में इस बात का समझ नहीं आया।
- 44:06यह कोई नई नई जन्मी देवी हैं। तुम्हारी ही कल्पना है जो कहते
- 44:14हैं सनातन का अपमान नहीं है, उनकी ही कल्पना है।
- 44:22मैंने कहा, खटा ही नहीं कर। उस दिन व्रत रखना है, खटाई नहीं
- 44:29खाना मगर वो लोग के पट्ठे जो तुम खाते हो उसमें खटाई तो होती है।
- 44:34विटामिन सी खटाई तो हर चीज़ में खटाई तो होती है विटामिन सी होती
- 44:40है। नहीं, शायद दूध में नहीं होती।
- 44:43मेरे हिसाब से मुझे लगता है अरे नाम मत होता है, एक मिलीग्राम एक
- 44:52मिलीलीटर में बिलकुल नाम मत नेगलिजबल जैसे कह देता है।
- 45:03बाबा कहते हैं कि अक्षरों का जहाज़ कागजी है, अक्षरों की
- 45:14किश्ती कागजी है और यह जो अक्षर में डाल दिया मैंने।
- 45:22ये अक्सरों में मैंने सिर्फ कॉनवर्ट किया है।
- 45:25ये आए तो वाइब्रेशन की तरह है। जब वो फुरम आए होती है तो पापा
- 45:32फरमान की तरह आता है। ये तुम्हें जैसे ही गुस्सा आता है
- 45:36फिर तुम शब्दों में ढाल लेते हो। क्या गाली की तरह गुस्सा थोड़ी
- 45:39आता है, किसी को भी नहीं आता। बस गुस्सा आता है फिर गुस्से को
- 45:44तुम कन्वर्ट कर लेते हो। शब्दों में अब चीनी अपने हिसाब से
- 45:52गुस्सा तो वही होता है ना अंग्रेज अपने हिसाब से क्या हो?
- 45:56यू बास्टर्ड है। शब्दों में तुम परवर्तन करते हो,
- 46:03लेकिन आता है बाबरक्षण की तरह तो बाबा कहते हैं यह जो शब्द आए यह
- 46:16वो शब्द नहीं है। जो तुम नित्य प्रतिभाषा में
- 46:21प्रयोग करते हो। अब इनमे फर्क समझले न आप बार बार
- 46:26इन चीजों का डिफरेंस न कोई समझाने वाला मिलेगा, न कोई समझने वाला
- 46:33मिलेगा। इन शब्दों को बार बार दोहराना।
- 46:39जिब फरमाई तेब तू वाह पहले तो कहा कि अक्षर तुम्हारी रोज़मर्रा के
- 46:45लेनदेन के काम के लिए बनाए गए थे। आखरी नाम आखरी साला आखरी ज्ञान
- 46:52गीत गुण गा, आखरी लिखन बोलन बाण अखरा शिर संजोग वखाण।
- 47:00जहाँ तक सिर के अक्षर आ गए जो तुमने खोजे, जो तुमने आम लेन देन
- 47:07की भाषा में कन्वर्सेशन के लिए खोजे और प्रयोग किया।
- 47:13पर अक्षर तो ये भी है जो मैं लिख रहा हूँ बाबा के।
- 47:21पर ये अक्षर जैसे ए लिखे, तिस से रहना, ये अक्सर नहीं की तरह नहीं
- 47:28आए। ये वो फर्म आए तब तो यह फरमान की
- 47:33तरह आए हुक्म की तरह आए है, ऑर्डर की तरह आए है।
- 47:39उसका फरमान आया है और मैंने शब्दों में डाल दिया।
- 47:44बस मैंने इतना काम किया है ये मेरे नहीं है जब वो फरमाएं,
- 47:50तिब्बती पापा जैसे जैसे उसका फरमान आया, फरमान आया।
- 47:58हो कम करो मैंने तब्दील कर दिया अक्षरों में क्योंकि तुम अक्सरों
- 48:07की भाषा समते हो भाई। मैं समझा रहा था कि चीनी को भी
- 48:12गुस्सा आता। अंग्रेज को भी आता फ्रैंसीसी को
- 48:15भी आता पंजाबी को भी आता, मराठी को भी आता बंगाली को भी, लेकिन
- 48:23गुस्सा एक ही है, तुम भाषा में कन्वर्ट कर देते हो।
- 48:37यह तुम्हारी खोपड़ी की बात है आखिरी सर संजोग बखान।
- 48:43इनका संयोग है तुम्हारी खोपड़ी से उसके ऑर्डर को, खोपड़ी से।
- 48:52तुम दुभाषियों की तरह काम करती है, तुम्हारे खोपड़े जैसे दुभाषीय
- 49:00होते हैं। जो देश दो देश के राष्ट्रपति
- 49:04राष्ट्राध्यक्ष आपस में बात करते हैं दुभाषिया उसको।
- 49:09एक दूसरे को बताते है कन्वर्ट करके बस ऐसा ही काम करती है।
- 49:16तुम्हारी बुद्धि तुम्हारी बुद्धि का बहुत ही ज्यादा उपयोग नहीं है।
- 49:19ये एक यंत्र है और तुम इसको मैं समझ बैठो।
- 49:23अब थोड़ा गहरी चलें। अगर इस उदभाषियों को बीच में से
- 49:29हटा दिया जाए दो राष्ट्रध्यक्ष अपने सामने बैठे हैं, क्या वो बात
- 49:37कर पाएंगे? नहीं कर पाएंगे कन्वर्सेशन विल
- 49:44नॉट हैपन। वह अपनी भाषा बोलेंगे, वह अपनी
- 49:51भाषा बोलेंगे। समझ कोई नहीं पाएगा क्योंकि भाषा
- 49:56नहीं है, बीच में अब समझो बात को। तुम्हारे अस्तित्व, तुम्हारे
- 50:09अस्तित्व और तुम्हारे खुशी के भीतर दुभाषिया काम करता है यह यह
- 50:18खलल डालता है। अगर इस दुभाषी को हटा दिया जाए तो
- 50:25बात बन गई। बस तुम इस से दुभाषी को ही नहीं
- 50:30हटा पाते तो मैं कुछ बोलता हूँ, तुम फ़ौरन कमेंट कर देते हो।
- 50:35मैंने एनलाइटनमेंट की वीडियो डाली जो मैंने देखा वैसे डाल दिया।
- 50:42बहुत से कमेंट है, मैंने कहा कि तुम मत देखो, सीधी सी बात है, मैं
- 50:50लोग अवश्य नहीं बोलता हूँ और वह बोल सकने कि मुझे अथॉरिटी है।
- 50:57जो मैंने देखा वह मैं बोल सकता हूँ मुझे कैसा सपना आया तुम कह तो
- 51:04इट्स ए मुझे कैसा सपना आया तुम्हारे हिसाब से क्या मैं बोल
- 51:09नहीं सकता हूँ कहते बोल सकते हो तो ठीक है, मैंने बोल दिया तुम
- 51:13सपना समझ लो। लेकिन मुझे मेरे लिए तो मैंने
- 51:18देखा है तुम्हारे ऊपर कोई बैन नहीं है, मैं कोई तानाशाह थोड़ी
- 51:26हूँ, लेकिन मैंने देखा है आई ऍम कन्फर्म।
- 51:33तो उस परमात्मा को मैंने देखा, उसमें मर्ज भी हुआ, उसका स्वाद भी
- 51:37चखा और यह कोई सपना नहीं था। इट वास् नॉट ए हैलूसिनेशन इट वास्
- 51:45एक्सप्रेस ही तुम्हारा सपना तो आज है।
- 51:52कड़ी बर्बाद टूट जाएगा। क्या वह हैलुसनेशन है जो आज तक
- 51:58नहीं टूटा? बस यही फर्क है सपने में और सत्य
- 52:07में सपना आज नहीं कल घड़ी दो घड़ी बाद टूट जाता है।
- 52:15और दर्शन सत्य ना आय टूटता है ना 1000 साल बाद टूटता है कभी कभी
- 52:21नहीं टूटता सदा ही बना रहता है वह जो अमृतपान मैंने उस घड़ी किया आप
- 52:30एनलाइटनमेंट की वीडियो जरूर देखा। और बहुत से लोगों ने एनलाइटनमेंट
- 52:39एस्ट्रल ट्रैवेलिंग और जैसा सारा कुछ जो उनकी खोपड़ी दुभाषिया
- 52:44मानता है उसको सुनकर मुझे सुनना ही छोड़ दिया।
- 52:51क्यों? क्योंकि उनको ये भाषा समझ नहीं
- 52:56आई, इस में छोड़ दिया जैसे हम उर्दू की किताब को फ्रैंसीसी जो
- 53:07इंग्लिश नहीं जानते। जो दूसरी भाषा को नहीं जानता,
- 53:14चाइनीज वह चाइनीज किताब को देखकर एक तरफ रख देगा, झट से क्यों रख
- 53:20देगा? क्योंकि वह जानता है यह मेरे काम
- 53:23के नहीं। ऐसे ही संतों की बातें।
- 53:29तुम्हारे इस दुभाषिये के काम की नहीं होती क्योंकि ये दुभाषिया
- 53:33वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकता। यही तो जगह है परमात्मा की भाषा
- 53:40दुभाषिया कन्वर्ट नहीं कर सकता। यही उलझन है इस बुद्धि के लिए
- 53:49उद्धभाषी वह कन्वर्ट नहीं कर पाता परमात्मा की बात को, इसलिए वह
- 53:57क्या कहता है? फिर वह मार कर सो जाता है।
- 54:00वे कहते नहीं है परमात्मा यह उर्दू की किताब बकवास है।
- 54:06यह क्या है? ये काले अक्षर हैं दोहासियाँ कुछ
- 54:13न कुछ तो कहेगा अनीता बुगना सा भी तो होगा तुम कुछ जानती नहीं तो
- 54:20दोभासियाँ अपने आप के अहम को बचाने के लिए।
- 54:25इन शब्दों का प्रयोग करता है। ये उर्दू को ही नकार देता है।
- 54:30यह भाषा नहीं है, यह तो सफेद अक्षरों पर उकीर ही गेंग कुछ काली
- 54:36स्याही की लकीरें हैं और इतने से बात वह समाप्त कर देता है।
- 54:46तो संत क्यों कहता है कि जब तुम परमात्मा के दरबार में जाओगे तो
- 54:54देखो जहाँ जूते उतारो वहाँ इस बुद्धि को कोई उतार देना?
- 55:04बड़ी गहरी बात अब इस को समझ नहीं आएगा।
- 55:13वो कहेगा है मेरे को क्यों ज्योति के स्थान पे उतारते हो।
- 55:19मैं बड़े काम का हूँ। कहीं भी जाओगे वहाँ की भाषा को आई
- 55:24विल कन्वर्ट इंटू बाबा कहते हैं वहाँ की भाषा को यह बुद्धि
- 55:34कन्वर्ट नहीं कर सकती। इसलिए प्रत्येक संत ने कहा अखरा
- 55:41नालो भखर, जीरा ब्योंड वार्स, शब्दा तीर्थ।
- 55:50लेकिन कितना भी संत बोलते रहे तुम मानने को तैयार नहीं।
- 55:57और तुम मानने को तैयार नहीं हो तो याद रखना तुम दुखी ही बने रहोगे।
- 56:07अब हम उस प्रश्न का पी ही आ जाए यह कथोरशी से जो तुम्हारा मन चलता
- 56:12है और कथोरशी का मतलब यह है रीचन होना चाहता है बाहर वातावरण में।
- 56:19इट एस ए नेचुरल प्रोसेसर ऑफ केथोर्सेस यह रीसन की प्राकृतिक
- 56:25क्रिया अब समझना बात अगर यह बात आपकी समझ में आ गई तो आपका दुख
- 56:34समाप्त होगा। इसको बोलने देना।
- 56:38इट इस कैथोवर से रोकना मत दमन मत करना सुप्रेष मत करना क्योंकि यह
- 56:46कैथोवर से सो रहा है धूल उड़ रही है आपने झाड़ू लगाई, फर्श पे धूल
- 56:52उठी तुम रोको मत इस धूल को। अगर रोक दिया तो फिर ये दब जाएगा,
- 57:01बाहर नहीं निकलेगा और तुम्हारा अचेतन खारिज नहीं होगा और
- 57:06तुम्हारा अचेतन इतना भरा पड़ा है कि हिमालय पर्वत जितनी ऊँचाई हो
- 57:11गई है इतना भर लिया है तुमने तुमने न जाने क्या क्या?
- 57:18अपने अचेतन मन में शब्द हैं समृतियाँ हैं, कल्पनाएं हैं,
- 57:22वासनाएं हैं, अंग काक्षाएं हैं मैं, जाने तुमने क्या कुछ भर लिया
- 57:30है गंद फंदा? और फिर उसकी सड़ान जब मारती है,
- 57:36दुर्गंध आती है तो तुम कहते हो यहाँ दो बाबा दुर्गांध तो बड़ी है
- 57:42भाई, ये दुर्गंध तुम्हारे अचेतन में तुम नहीं इकट्ठे और ये निकलना
- 57:49चाहती है नेचुरल प्रोसेसर जैसे तुम्हारे भीतर की तुम कर नहीं
- 57:53सकते। तुम्हारी भीतर का विजती है द्रव्य
- 57:57तुम्हारी भीतर की प्रणाली निकालती है बाहर और तुम किसी तरह से उसे
- 58:03रोक लो कि न निकले तो याद रखना तुम मर जाओगे।
- 58:12क्योंकि प्रकृति परमात्मा ने बनाई है, तुम्हारे फौरन मैटेरियल्स को
- 58:21भी जाती है, द्रव्यों को बाहर निकालने के लिए और परमात्मा सदा
- 58:27तुम्हारे भले का काम करता है, लाउ से गलत नहीं कहते।
- 58:31वह जो करता है, ठीक करता है और तुम्हारे भले के लिए करता है,
- 58:34बताओ क्या बुरा किया इसमें तुम्हारे शरीर की सारी गंदगी भीतर
- 58:40फिल्टर लगा दी है और तुम गुर्दों को फेल कर दो।
- 58:51कोई कूड़े कबाड़े करके फिर क्या होगा?
- 58:56कोई डायलीसिस ही करवाना होगा और क्या होगा?
- 58:59और जब डायलीसिस नहीं था तो व्यक्ति सूज सूज के उम्र जाया
- 59:02करता था तो हम प्रकृति से खिलवाड़ करते।
- 59:12यह कैथोडसिस भी प्राकृतिक प्रणाली है।
- 59:19इट्स कैथोडसिस नीचे तुम इसको भी रोकते हो?
- 59:26तुम कहते हो लोग क्या कहेंगे? मैं अगर चलती सड़क पर हँसना शुरू
- 59:32कर दूँ, अगर ताड़ी मारकर ओह ऐसे शुरू कर दूँ तो?
- 59:38लोग बागली गए गए या बतियाना शुरू कर दूँ?
- 59:42आपने देखोगे? बहुत से लोग जा रहे हैं सड़क पे
- 59:44खुद ही बतियारे। और एक्टिंग भी कर रहे हैं।
- 59:48ऐसा भूसा मारूंगा, ऐसा थप्पड़ मारूंगा।
- 59:50ये पागल लोग हैं, कथकश हो रहा है उनको बाहर के संसार का कोई ज्ञान
- 59:57नहीं, ये अपने ही खलवाड़ में मस्त हैं।
- 1:00:03एक बात तह कि यह आदमी पागलपन के करीब है।
- 1:00:06इतना भर गया है चेतन कि चेतन खाली हो रहा है और उसको पता भी नहीं है
- 1:00:14तुम थोड़ी सी कम पागल हो। मैं क्यों कहता हूँ कि नींद
- 1:00:21ज्यादा लो? क्योंकि नींद में कैथर से सोता है
- 1:00:25तुम्हारा मन, इसीलिए तो तुम इतने फ्रेश पूछते हो?
- 1:00:32आइंस्टीन जैसे लोग 10 घंटे सोते हैं, रात को और दिन में भी झपकी
- 1:00:36ले लेते हैं। यह तुम्हें साइंटिफिक वे बता रहा
- 1:00:41हूँ और तुम सबके लिए मेरा अनुभव सीमित नहीं है, मैं भेजता हूँ
- 1:00:51अनुभव को अब क्रियाजुग मैंने बोला, लेकिन बहुत से लोग हैं जो
- 1:00:57सुदर्शन क्रियाग्य भी से लेते हैं।
- 1:01:01अब क्रिया योग करके देखो शर्म हित के लिए मैंने बनाया।
- 1:01:08तुम्हें पता है ऑक्सीजन अगर 15 मिनट दिमाग को न मिले जोल डायल।
- 1:01:15और क्रिया योग की प्रोसेसर में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजनेटेड
- 1:01:18होना, ऑक्सीजन को इन्टेक करना क्या बुरा किया अगर मैं छुपाने लग
- 1:01:26जाऊं? इसको सुदर्शन क्रिया की तरह से
- 1:01:28लेने लग जाऊं? क्या वह विद्या सर्व हितकारी
- 1:01:35होगी? नहीं, यह तो उस व्यक्ति के लिए
- 1:01:39हितकारी है जो पैसे लेता है। बोलने के टीचर की तरह प्रोफेसर की
- 1:01:45तरह लेक्चरर की तरह बोलता तो मैं भी हूँ।
- 1:01:52लेकिन पैसे नहीं लेता, बोलता हूँ और अनुभव बोलता हूँ और सच बोलता
- 1:01:58हूँ और उसके बदले में तुम कितने कितने कमेंट कर देते हो नहीं।
- 1:02:06बाबा से कहा बाबा यहाँ तो सभी पहुंचे हुए हैं।
- 1:02:11देखो सभी के कमेंट कोई कहते तुम पागल हो गए, कईयों ने गालियां पे
- 1:02:16निकाले माँ बहन की गालियां बजे उल्लू के पट्ठे गलत बातों को भगा
- 1:02:26रहे है। हमा सनातन को कैसे गलत मान रहे?
- 1:02:32यह है जूता उछालियों वाले लोग। इन्होंने बड़े कमेंट किए, मैंने
- 1:02:37बाबा से कहा अब यहाँ भी पेस्ट फंसता है।
- 1:02:39लोग कहते हैं कौन सा बाबा तो मैं इनके लिए नहीं बोलता हूँ तो बाबा
- 1:02:46ने बड़ा सुंदर बात कह दिया। बाबा कहते ज्ञानियों के लिए मत
- 1:02:52बोलो, बड़ी प्यारी बात है, तुम बोलो अज्ञानियों के लिए बाबा बस
- 1:03:01बात रंग गई बेटा बात जच गई। जांच में नू आ गई गमखान दी जांच
- 1:03:18में नू आ गई गमखान दी। होले, होले रोक जी पर चाण दे जांच
- 1:03:36में नू आ गई गमखाने। होले होले रोके जी पर चौण दी चंगा
- 1:03:52हो या तुम पराई हो गई, बहुत अच्छा हुआ जब तुमने कह दिया तुम बकवास
- 1:04:00कर रहे हो। चंगा होया तुम बेगानी हो गई मुक
- 1:04:09गई चिंता से नु अपनोण दी। जांच में नो आ गई गम खान तो जांच
- 1:04:27सीख ला गए बाबा बाबा तो बाबा ही है, हमारे भी मार्गदर्शक है।
- 1:04:38चंगा होया तुम पराई हो गई, मैं घूंठा लगा देता हूँ, पूछता हूँ
- 1:04:47लोगों से मैंने कुछ मांगा तुमसे नहीं तुम जानते हो फिर चुप हो
- 1:04:55जाते हैं। मैं छाती ठोक कर रहता हूँ,
- 1:05:00परमात्मा है, मैंने देखा है मैं कहता आँखों से कोई कागज़ की लेखी
- 1:05:12नहीं, कोई गुरु की लेखी नहीं। कोई मार्गदर्शकों की लेखी नहीं,
- 1:05:19कोई शास्त्रों का कथन नहीं आई। सीन विथ आज मैंने अपनी आँखों से
- 1:05:27उसे निआरा मैंने छुआ है मैंने पिया आजमसात किया है, मैं उससे
- 1:05:33अठखेलियां की हैं। मैं झूमा हूँ, मैं इतना हूँ, इससे
- 1:05:43ज्यादा क्या करो और ये सब सपना नहीं था।
- 1:05:51क्यों? सपना 1 दिन टूट जाता है घड़ी दो
- 1:05:56घड़ी का मेहमान होता है सपना। नहीं क्या 85 के बाद 85 के बाद 40
- 1:06:05वर्ष हो गए? एक कपल के लिए नहीं टूटा?
- 1:06:09क्या ये सपना है? क्या ये लंबा सपना है?
- 1:06:13नहीं। मैं चुआंग्शे की तरह तितली नहीं
- 1:06:19बन गया हूँ, मैं बिल्कुल जीता जागता बहूश हूँ ना मैंने नाइटस
- 1:06:27ऑफ़ साइट सूँघी है ना मैंने वॉल्यूम का सेवन किया है बिल्कुल
- 1:06:32जागत बहूश बोल रहा हूँ बेहोश नहीं।
- 1:06:40और अर्चन बस यही कीमती बात है जो तुम प्रथम दृष्टया देखते हो, जो
- 1:06:49तुम कहते हो बाबा तुमने जो ये जो ऐने लगाई इसका शीशा बहुत मस्त है।
- 1:06:55तो इसका मतलब तुम उस वक्त मेरे शब्दों को चूक गए जो तुम शीशा
- 1:07:01देखने में समय व्यतीत किया, न जाने वही घड़ी कोई ऐसा शब्द तुम
- 1:07:07चूक गए जो तुम्हारे भीतर उतर के क्रांति कर सकता था?
- 1:07:13जब तुम कहते हो पीछे ही बेस्टोजेम की शीशी पड़ी है या तो डायस्टेज
- 1:07:19को या तो रोटी को कन्वर्ट करने के लिए होती क्या तुम रोटी खाते हो
- 1:07:29नहीं खाते? अरे ये क्यों रखी है?
- 1:07:35मैं तुम्हें क्यों पसंद? मेरा दायित्व नहीं है तुम्हें
- 1:07:41बताना मैं तुम्हें परा के अनुभव बताने आया हूँ ये क्यों बताऊँ ये
- 1:07:47वेस्टल जैम किस लिए रखा है? भाई घर में और भी मेंबर हैं।
- 1:07:56यहाँ तो बहुत सी द्वइयां रखी होती हैं।
- 1:07:59यहाँ तो मेडिसिन स्टोर है, एक दर्द की दवा भी है यहाँ पेट दर्द
- 1:08:04की भी है सर दर्द की भी है यहाँ पागलपन की दवाई भी है, चाहिए तो
- 1:08:08ले लो। बाबा कहते हैं अज्ञानी के लिए
- 1:08:18बोलो, ज्ञानियों को गुंठा लगा दो बस वो कमेंट नहीं कर पाएंगे, सुन
- 1:08:29सकेंगे उन पर सुनने पे कोई प्रतिबंध नहीं।
- 1:08:35लेकिन कमेंट क्योंकि वो जानती नहीं और गलत कमेंट किया और तुम
- 1:08:39जानते हो कि यह कमेंट गलत है। बिकॉज़ वी हैव सीन बाबा कहते हैं,
- 1:08:46मैंने भी देखा, तुमने भी देखा तो यह कमेंट इसका गलत है और बखूबी आप
- 1:08:52जानते हो, मैं भी जानता हूँ। तो फिर अंगूठा लगा दिया करो लोग
- 1:08:56तुम में है नहीं तुमने कोई डेरा थोड़ी बनाओ ना तुमने कोई संसार
- 1:09:03में जमीन थोड़ी अपने नाम करानी है और करा भी लोगे तो कसंग लेके
- 1:09:07जाओगे एक ज़रा भी तो असंग जाता है।
- 1:09:13फिर जब जो वहाँ पर पहुँच गया, वह क्यों अमेरिका जाने की इच्छा
- 1:09:20करेगा जब वहाँ पर पहुँच गया ना? वह क्यों फ्रेंड्स से जाने की
- 1:09:30इच्छा करेगा? और फ्रांस वाला इंडिया में आने के
- 1:09:34को अमेरिका वाला इंडिया में आने के को तो बाबा जवाब देते हैं,
- 1:09:41इसका डिट्टे सब बैठ थम नहीं तो दे जे हया एक थम ऐसा है जो सब के
- 1:09:47भीतर है। तुम अमेरिका जाओ, तुम इंडिया जाओ।
- 1:09:52तुम जर्मनी जाओ फिनैन्स जाओ, तुम कहीं भी चले जाओ वह स्थान
- 1:09:57तुम्हारे साथ जायेगा इठ है सभ्य स्थान नहीं तो नीचे हैं ध्यान
- 1:10:07रखना यह हरमिंदर साहब के बारे में बोली की बात है, तुम गलती मत खा
- 1:10:11जाना। यह ईंटों पत्थरों की बनाई हुई
- 1:10:14इमारत के लिए बात नहीं कही है। वह तो सब बराबर है।
- 1:10:19मक्का, मदीना और तुम्हारे सभी बनाए के तीर्थ, मंदिर, गुरुद्वारा
- 1:10:24और मत्स्य। ईंटों, पत्थरों से बनाई गई चीजें
- 1:10:28सभी बराबर हैं चाहे तुम सोना चढ़ाए हो, चाहे तुम पत्थर लगाए हो
- 1:10:34और चाहे तुम सीमेंट लगाए हो, ये बराबर है।
- 1:10:39डिट्ठ सभ्य था नहीं, तू दे जे हया एकन तेरे जैसा कोई नहीं।
- 1:10:45एक ऐसा स्थान है जहाँ ना तो पत्थर रखा, ना सोने का कृष्णा, ना कोई
- 1:10:56मूर्तियां हैं। वहाँ जन मूर्तियों का इसकी नाक
- 1:11:01टूट गया, नाक लगा दो क्योंकि हमने ठेका लिया और कह तुम्हारे विष्णु
- 1:11:04का नाक लगा। तुम खुद लगा लो जाके और ना की हिल
- 1:11:10गाने हैं तुम्हारा पागलो का क्या पता तुम तो गणेश का एक दांत तोड़
- 1:11:16देते हो बकर तुम डे महाकाय? एक दंतताए विथ महे वकरतुंडई।
- 1:11:23भीम ही तनु दंत परशोत एक दांत तोड़ दिया और मैंने देखा गणेश जी
- 1:11:30बैठे गणेश जी तुम्हारा दांत टूटा कहाँ है, अच्छा कौन सा दांत नहीं,
- 1:11:37तुम्हारे भक्तों ने तो बना रखा है।
- 1:11:43तो गणेश से बोले पागलों को पागल ही रहने दो, रास को रास रहने दो,
- 1:11:53पर्दे की बात तोड़ते है, तोड़ दे जोड़तें है जोड़ दें।
- 1:12:00दो लगाने दो लगा दिए तीन लगाने तीन लगा दिए माता के कितने हाथ
- 1:12:04लगा दिए तुमने विष्णु सहस्रण कित्ते कित्ते हाथ लगा दिए तुमने
- 1:12:17और तुम सनातन का मान नहीं सोओगे सनातन बनाया है क्या?
- 1:12:28यह सनातन की प्रतिकृति है। असली सनातन की खोज करो जहाँ जाकर
- 1:12:37खेलती हैं बाघों में करीना जहाँ जाकर।
- 1:12:43हरा भरा हो जाता है। तुम्हारा मन आनंद से भर जाता है
- 1:12:56तुम विष्णु भगवान की पूजा करने में कितने जन्म गुजारती है?
- 1:13:01कितने जन्म इन पत्थरों की मूर्तियों को पूजते हुए तुमने
- 1:13:04गुजारती है? और तुम्हारे ब्राह्मण तुम्हें
- 1:13:06मूर्ख बना रहे का प्राण प्रतिष्ठा कर दिया ऐसा प्राण प्रतिष्ठा नामक
- 1:13:17कोई चीज़ नहीं होती। हर चीज़ पे यह पदार्थ टूटता है।
- 1:13:21खंड विखंड होता है, संतो के भी। ये शरद गए, भगवान कृष्ण गए नहीं
- 1:13:26गए, भगवान राम गए नहीं गए, फिर वो क्यों चले गए?
- 1:13:33इसकी मूर्ति टूट गई, टूट गई हमने तो नहीं तोड़ी भाई, जिसने तोड़ी
- 1:13:39उसको बुला लो। उसको कहो जोड़ के जाए सीजे साहब
- 1:13:46का क्या कसूर है इसमें ये तुम्हारे विष्णु के नाक लगाने पे
- 1:13:50बैठे होंगे और क्या काम कम है और भी गम जमाने में हैं मोहब्बत के
- 1:13:58सिवा राहतें और भी हैं। वसल की राहत के सिवा आज तुम
- 1:14:07मूडताओं के कारण मूर्खों के कारण लाखों की पैंटिंग पड़े।
- 1:14:12तुम न्यायालयों का समय बर्बाद कर रहे हो।
- 1:14:14इन विष्णु किस्नु में उड़ के किसी की माता की टांग टूट जाती है कि
- 1:14:21किसी के। गणेश का दांत टूट जाता है और रुक
- 1:14:27है। बट ठो और सनाते नहीं कहते अपने आप
- 1:14:35को तुम्हें शर्म है थोड़ी बहुत ना शर्म है।
- 1:14:41शर्म होती है समझदार व्यक्ति समझें तुम्हारे मज़ा नहीं गोबर
- 1:14:44भरा है मुझको अदालत में बुला लिया गया।
- 1:14:5125 वर्ष पहले की बात है जब मैं बाजार में घूमा करता था, किसी ने
- 1:14:58कह दिया मेरी भावनाओं यहाँ। क्या भावनाए आहत हो गई?
- 1:15:07भावनाए आहत ये हो गई। ये कहते हैं कि शीतला माता को
- 1:15:14गद्दे पे बैठा दिया, मैंने कहा बस इससे ही आहत हो गई।
- 1:15:20तुम देखो सीता मात्रा की तस्वीर तुमने तुमने ही तो गधे के ऊपर
- 1:15:24बैठाई मैंने तो इतना कहा जब गधे के ऊपर बैठा दी तो जूतों के मारे
- 1:15:29वो डाल देना, क्या गलती की भाई इनसे पूछो गधे के ऊपर क्यों
- 1:15:36बैठाई? क्या और कोई वाहन नहीं था?
- 1:15:42और लक्ष्मी को तो मैं रोज़ ही कहता हूँ अरे लक्ष्मी हाँ बाबा
- 1:15:46हाँ तुम्हारे साथ तो बहुत नया किया भाई इन्होंने हाँ बाबा
- 1:15:51तुम्हें तो उल्लू दे दिया हाँ बाबा।
- 1:15:56और देखिए जिम्मेदारी और लॉटरी लगा दी।
- 1:15:59पैसा बांटना है दिन में ग्राहक आएँगे दिन में और उल्लू दिल में
- 1:16:04जागता है उल्लू को दिखता ही नहीं अक्सीडेंट कर देगा उल्लू की आँखें
- 1:16:11बंद रहती है, सुन धिया जाती है तो फिर तुम कैसे करती हो?
- 1:16:18लक्ष्मण कहते हैं कारोबार तो भाई निभाना ही है तो फिर काला धंधा
- 1:16:23करने वाला उल्लू को जब दिखता रात को उल्लू की सवारी ही तो करके
- 1:16:28जाउंगी, दिन में इसको दिखता नहीं। पिछले दिन में तो मैं धन वगैरह
- 1:16:34बांट सकती नहीं। रात के अंधेरे में ही उल्लू को
- 1:16:38देखता है। इसको फिर जगाना नहीं पड़ता, खुशी
- 1:16:42से जाग जाता है। दिन में तो अगर इसके जलाऊं भी तो
- 1:16:47यह अक्सीडेंट कर देता है। एक बार टांगड़ी तुड़वा दी थी
- 1:16:50इसने। आँखें क्यों धिया जाती है दिखता
- 1:16:55नहीं है ठीक से तो मुझे तब पता चला जब मेरी आँख का पर्दा गिर गया
- 1:17:01कि हाँ, जब दिखता नहीं होता तो अक्सीडेंट ऐसा ही होता है।
- 1:17:11मुर्खों किस किस समूढ़ानंदों की बात करते हो तुम कुछ खोपड़ी पैदा
- 1:17:18कर लो कुछ तुम भी मशरूम खा लिया करो, बादाम खा लिया करो कैश्यू खा
- 1:17:25लिया करो। ये हाल है इन लोगों का किस किस की
- 1:17:35बात करूँ सभी धर्म करके पड़े इसलिए कृष्ण ने कहा यदा यदा ही
- 1:17:44धर्म से गलानेर भक्ति भारत जब जब इन बुद्धि नाशिकों का।
- 1:17:49उत्थान होता है। ये बुद्धि नाचकें सनातन का अपमान
- 1:17:53नहीं समूंगा ये बुद्धिवादी लोग नहीं है।
- 1:17:55बुद्धि नहीं है इनमे ये गोबर भी नहीं भरा है खाली एम्प्टी है ही
- 1:18:06नहीं कुछ टना टन इसलिए तो घंटे हो जाते हैं।
- 1:18:13क्या वो सोया तुम्हारे घंटों से ही जाग जाएगा?
- 1:18:17अरे वो सदा जागृत रहने वाला सदा आनंद की मूरत तुम भी रात को सो
- 1:18:25जाते हो वह जगता रहता है यही तो कृष्ण ने कहा।
- 1:18:31मेरा योगी जब तुम्हारा संसार ही दिन में सो जाता है मेरा योगी रात
- 1:18:35को जानता है ये उस योगी की बात है जो आपके ही भीतर विद्यमान है जो
- 1:18:44देखता है कि यह सोया पड़ा। जो रात को भी देखता है कि ये सपना
- 1:18:49देख रहा है। इसको रात को नींद नहीं आई।
- 1:18:53यह उस योगी की बात करते हैं भगवान की और तुम इसकी नाक को दोबारा
- 1:18:59लगाने की बात करते हो तो गवाई साहब ने बिल्कुल ठीक किया।
- 1:19:03ओके? थोड़ा सही से आगे भी चला जाना
- 1:19:08चाहिए था। न्याय तो ना हुआ इसे तो पुरस्कार
- 1:19:15मिला, न्याय के हिसाब से न्याय करो कभी इसने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट
- 1:19:25का? क्राइम क्या है जो कहते हैं कि
- 1:19:32मैं डरता नहीं। वह सबसे ज्यादा डरा करते हैं
- 1:19:35अन्यथा कहने की आवश्यकता है। रात को सोया पड़ा व्यक्ति कहता है
- 1:19:41कि मैं डरता नहीं क्यों, क्योंकि वह डरता नहीं।
- 1:19:46फिर उसे कोई कतल नहीं करते, तलवार मारते, मैं डरता नहीं, ये शब्द
- 1:19:53कहने वाला वही होता है जो डरता है।
- 1:19:58जो रात को सोया पड़ा है, वह डरता ही नहीं तो वो कहता भी नहीं कि
- 1:20:03मैं डरता। यह डरता है और सबसे ज्यादा कायर
- 1:20:10व्यक्ति है जिसमें इतनी सी सहनशक्ति भी नहीं है कि कल्पनाओं
- 1:20:16को तोड़ सकें या विष्णु कल्पना है तुम्हारी या फिर दिखाओ।
- 1:20:24जाहिद शराब पीने दे, मस्जिद में बैठकर जाहिद शराब पीने दे, मस्जिद
- 1:20:32में बैठकर या वो जगह बताओ जहाँ खुदा का घर न हो या फिर दिखाओ
- 1:20:38विष्णु का? हमें पागल बनाने की चेष्ठा न करो
- 1:20:46और चाहे तुम अनिरुद्ध आचार्य हो और चाहे तुम जूता फेंकने वाले
- 1:20:50इसका नाम भूल जाता हूँ मैं मस्ती के आलम में खोया खोया नाम अक्सर
- 1:20:57वो ही जाया करता हूँ। मुझे तो वो याद रहता है यार भगत
- 1:21:06भाई शाम का क्या लग गया? वो ही ज़िन्दगी का सवाल आ गया।
- 1:21:38ेश्याम का ख्याल आ गया।
- 1:21:46जैसे ही श्याम ढलती है, शराबी में खाने की तरफ दौड़ पड़ता है और
- 1:21:54श्याम होती है। हमें उसकी याद आती है कौन वह जो
- 1:22:05देखा नहीं जा सकता वह जो पिया जा सकता है और जिसके पीने से बड़ा
- 1:22:10आनंद आता है और जिसके पीने से सब। शंकाएं टूट जाती हैं।
- 1:22:17इल्यूश़न्स टूट जाते हैं और हमारे बनाए हुए पाखंड हमारी मान्यताएँ
- 1:22:23जो हमने देखा नहीं वो हमने बना लिया, वो भी टूट जाते हैं।
- 1:22:31हमें तो यही। था गुरु गमे यार है हमसे दो वही
- 1:22:48गम जिसे हम ने। किस किस यत्न से निकाला था इस दिल
- 1:23:03से दूर ऊंचकर। कयामत की चला गया, उछलकर कयाम की
- 1:23:21चला गया। ख्याल आ गया, धन्यवाद।