Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Apr 25 - कौन से तल पर जाकर, सच्चा Gratitude शुकराना आता है? Deep Meaning of Gratitude?
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- 0:06नितिन माइ डेयरेस्ट बी लव्ड बाबाजी प्रणाम बाबाजी हैव ए बेसिक
- 0:19क्वेस्शन। फ़ोर ऑल दी वर्डली पीपल वॉट इस दी
- 0:28डीप मीनिंग ऑफ ग्रैटिट्यूड सुखराना इन अध्यात्म थिंकिंग गोद।
- 0:40ऑल दी टाइम एवरी टाइम वॉट्स थे डीप मीनिंग एंड सिग्निफिकेंस ऑफ
- 0:53दिस प्लीज़ गाइड थैंक यू सो मच। प्रश्न भी गहरा है, जवाब भी गहरा
- 1:10है। इसलिए से शांति से चुप्पी के
- 1:16ध्यान हो। सुनने की कोशिश करेंगे।
- 1:26हम तीन तलों पर जीते हैं, पहला तल मेरा है।
- 1:43मैं हूँ, मेरा है और ये कल ऐसा कि अगर कुछ मेरा है तो कुछ तेरा भी
- 1:55है, उसे ही हम समाज कहते हैं, उसे ही हम कानून कहते हैं।
- 2:06आदमी ने विभाजन कर लिया है, यह मेरा है और यह तेरा भी है जहाँ
- 2:15मेरा तेरा होता है वहाँ पहला स्टेप है।
- 2:22वहाँ में मौजूद रहता है। फिर सुनिए ना जहाँ कुछ मेरा है,
- 2:33वहाँ कुछ तेरा भी होगा ऊर्जा होता है इसका कारण मैं।
- 2:41मैं भाव यहाँ बाइफरकेशन है कुछ मेरा कुछ तेरा।
- 2:54इससे व्यवहारिक जिंदगी चलती है। यहाँ ईश्वर नाम की कोई चीज़ नहीं
- 3:02है। इस स्थल पर सिर्फ तुम और तुम्हारा
- 3:08प्रेषण और कुछ नहीं, बस तुम हो अगर तुम गरीब हो तो मेहनत करो।
- 3:25मेहनत करो, अमीर हो जाओगे, क्या कोई प्रयास करो अगर सनातन ने
- 3:42लक्ष्मी का वाहन उल्लू बनाया? अकारण से नहीं बनाया।
- 3:48वो बड़े समझदार लोग थे। हम कहते हैं उल्लू में समझ नहीं
- 3:57आता बड़ा प्यारा संकेत है। इसका अर्थ क्या है?
- 4:11अर्थ दूसरा भी लग सकता है। लेकिन जिन्होंने बनाया वो ऋषि थे,
- 4:23उन्होंने इस ढंग से बनाया जब तुम अपनी खो पड़े।
- 4:37उल्लू जैसे हो जाते हैं ऐसा मत करो भाई यानी बस समझो के होती
- 4:49नहीं और अगर थोड़ी बहुत होती है तो वह नाम मत।
- 4:59अगर ऐसा होगा तो लक्ष्मी तुम्हारे पास आएगी।
- 5:09अक्सर लक्ष्मी उल्लुओं के पास आती है।
- 5:17लक्ष्मी कहीं और भी आती है कहाँ आती जहाँ कोई भृगु जाके लात मारता
- 5:27है विष्णु को दो पायदान है ध्यान रखना।
- 5:34और लक्ष्मी को पित्त हो जाती है। तुमने मेरे सामने मेरे पति के
- 5:40साथी पर प्रहार किया, वो तो बड़ी कोमल है करुणावान उन्होंने पांव
- 5:49पकड़ लिया। प्रभु मेरी छाती बज्रश्री कठोर है
- 6:05पर्वत के समान और आपके चरण पादुकें चरण।
- 6:15कमल के समाज को वाला कहीं आपको चोट तो नहीं लगी?
- 6:26तो पांव पकड़ विभू जीके पांव पकड़ लिए।
- 6:32विष्णु जी कहानी है। कहानियों के साथ चिपका मत करो
- 6:37इनके सेंस लिया करो उल्लू यानी उसके पास समझे नहीं होती या तो
- 6:47लक्ष्मी उसके पास आती है फिर आजा थोड़ी थोड़ी समझवाइए।
- 6:56फिर आगया चरम समझता लक्ष्मी ने श्राप दे दिया आपने मेरे पति की
- 7:04तो मेरे सामने की जा मैं तुझे शराब देता हूँ देता हूँ देती हूँ
- 7:12के। मैं तुम्हारे वंशजों के पास करू
- 7:16नहीं। भृगु के वंशज भृगु के वंशज
- 7:23ब्राह्मण भृगुज बोले हे देवी। तुमने मुझे शराब तो दे दिया,
- 7:41धन्यवाद लेकिन मैं ऐसा एक ग्रंथ रखूँगा, ये कहानी है समझना।
- 7:55जी आज जो ब्रेगों के पन्ने मिल रहे हैं, ये वास्तविक नहीं है।
- 8:03ये सिर्फ कभी कहानी गिरी हुई थी। 200 400 साल में कागज़ गल जाता
- 8:10है। जिसके पास उसका एक पन्ना भी होगा।
- 8:19उसके तुम पांव पूजती फिर इसका सेंस सिर्फ यही था।
- 8:35के यहाँ विद्वता होती है, ज्ञान होता है वृगों के पास ज्ञान था,
- 8:44शास्त्रज्ञ थे और कहते उन्होंने एस्ट्रोलॉजी का अस्वीकार किया।
- 8:52भृगु जी बड़े महारथी थे बड़े। बड़े डायमेंशन्स में वो मास्टर्स
- 8:59कहलाते थे। सिर्फ एस्ट्रोलॉजी मिली है लेकिन
- 9:07ये कहानी है और ये पन्ने जो मिलते हैं ये सत्य तब के नहीं हैं।
- 9:13क्योंकि भृगुज कोई अवध नहीं, उस वक्त के भृगुज के लिखे हुए पन्ने
- 9:21आज तक सुरक्षित कैसे रहेंगे तुम्हें समझ नहीं आती तुम्हारी ही
- 9:29ज़िन्दगी में तुम्हारी ही किताब। तुम्हारी ज़िन्दगी में भुरभरा
- 9:36जाती है तो भृगु जी कब हो? हिसाब लगाओ लेकिन कहानी है कहानी
- 9:49के साथ छक्का मत करो। या तो ना समझो हो जाओ फिर क्या
- 9:54होगा फिर काले धन पे करोगे फिर काले धन पे करोगे फिर राजनीति में
- 10:05जाओगे। फिर शतरंज की जोश बिछाओगे बेईमानी
- 10:13करोगे पापा बाज ना होवे गट्ठी मोया संग न जावे काले करण में
- 10:24करोगे काले धंदे करो, झूठ बोलोगे। लोगों को बेवकूफ बनाया तुमने भी
- 10:36अगर सिर्फ पैसा ही कमाना हो, अगर सिर्फ पैसा ही कमाना हो तो दो
- 10:43तरीके हैं इसको गौर से लिख लेने में।
- 10:49बड़ा महत्वपूर्ण सवाल पूछा है नितिन ने अगर तुम्हें लक्ष्मी
- 10:56चाहिए तो उसके दो ही तरीके हैं या तो उल्लू हो जाओ।
- 11:00उल्लू काले धंधे हैं, जो भी है। जहाँ से प्रचुर लाभ होता है।
- 11:12कोई 2050 100,00,00,000 मिल जाए। एक पार्टी से दूसरी पार्टी में
- 11:16जाने का मैं काला कंधा है क्योंकि लोगों ने तुम्हें चुना था और
- 11:23जिन्होंने चुना था वो उस पार्टी के लिए सुना था।
- 11:29और तुम 150,00,00,000 लेके पार्टी बदल लो।
- 11:31फिर ये काला धंधा हो गया। इतनी जनता के साथ विश्वासघात हो
- 11:36गया। ये बात अलग है कि जनता का मन?
- 11:48दुश्मन क्योंकि तुम उन्हें भी किसी तरह सटिसफाई कर देते हो और
- 11:5551% को ही तो सटिसफाई करना होता है।
- 11:5849% को भोंकते फिरे, कोई बात नहीं।
- 12:03यह लोकतंत्र बड़ी गजब की चीज़ है। मैं कहा करता हूँ कि लोकतंत्र
- 12:14नहीं एक तो रोयेगा ही कौन रोयेगा बस जिसका दो नंबर कम है।
- 12:26जिसके 49 हैं वो रोयेगा जिसके 51 हैं बहुत सिर्फ मात्र दो वोटों की
- 12:34है और दो वोटों का क्या बड़े ढंग है दो वोट?
- 12:43लेकिन जनमत नहीं है। ये तुम्हारी होशियारी, शतरंज को
- 12:49बिछाने की इच्छा थी, इसलिए फिर तुम जो चाहे कर लेते हो।
- 12:59और थर्क देते हो कि हम तो चुन किया है पक्का है, पक्का है कि
- 13:10तुम चुन किया है, इसलिए मुझे। मेरे पिताजी कहा करते थे कि
- 13:18राजनीतिज्ञों में आत्मा नाम की कोशिश निरआत्मा होती है वो तब मैं
- 13:31नहीं समझता था बच्चा लेकिन आज बखूबी समझता हूँ।
- 13:36आज तो मैं आपको भी समझा रहा हूँ। तो भृगु कहते हैं, मैं ऐसे ग्रंथ
- 13:44की रेजना करूँगा जिसके पास उसका एक पन्ना भी पड़ा होगा।
- 13:49हे देवी तो उसके 500 में। इतनी इंटेलेक्चुअलिटी विकसित
- 14:03करूँगा डॉ अंबेडकर कि तुम चरणों में।
- 14:19कोई बात नहीं अगर चीफ जज नहीं बने।
- 14:24ध्यान से सुन मेरी बात अगर तुमने तो तुम सुपर वकील तो बन सकते हो।
- 14:38तुम्हारे तर्क तो पहने होंगे, तर्क पहने होंगे तो वहाँ खरीदा
- 14:44हुआ जज सुप्रीम कोर्ट का हो, हाई कोर्ट का हो या छोटा जज हो वो मात
- 14:52खा जाएगा। अच्छा वकील बनकर अच्छी दलील दोगे,
- 15:03कोई बात नहीं अगर जज नहीं बनेंगे। अगर तुम भी समझ है और समझ तार्किक
- 15:13शक्ति को पैदा करती है। ज्ञान और तर्क को लिखना पड़ेगा जज
- 15:22को ऑर्डर ये बात अलग है कि बिका हुआ जज अपने ढंग से इन मैं यू ये
- 15:32लिख कर कुछ भी बदल दे, ये बात दूसरी है।
- 15:37लेकिन अगर सही जगह है तो उसको लिखने ही पड़ेंगे।
- 15:43पक्ष विपक्ष दोनों की दलीलें और फिर अपना भी देना पड़ेगा।
- 15:47मैं क्या समझता हूँ? एक धड़े ने ये बोला।
- 15:51दूसरे ने ये बोला लेकिन इन दोनों को समझ गयी।
- 15:55मैं इस नतीजे पे पहुंचा हूँ अब देखो वो तो नतीजा कुछ भी निकाल ले
- 16:02फैसला फिर भी उसके हाथ में है ये कह तो सकते हैं लेकिन मेरा पूरा
- 16:08उसके हाथ में है ये नहीं कह सकता। एक तो यही दल है जहाँ पर सब बनता
- 16:25हुआ है, कुछ तेरा है, कुछ मेरा है और तुम आपस में।
- 16:39यह सहमति बना लेती हूँ। आप एकत्रित हो के जैसे तुमने समाज
- 16:45बना लिया, देखो भाई, ऐसा वणिक वणिक से शादी करे।
- 16:55क्षत्रिय क्षत्रिय से शादी करेगा और अपने गोत्र में करेगा।
- 17:06ब्राह्मण ब्राह्मण से करेगा की तुमने समाज बना लिया।
- 17:12अब समाज की जब कोई नियम तो है नहीं, कानून तो है।
- 17:20ये तुम्हारे बनाये हुए इसी समाज को मैं कहता हूँ ये है नहीं, ये
- 17:24तुम्हारी मान्यताओं की एक पंढ है गांठ जिसे कह देते है।
- 17:36तुमने खुद ही अपने सिर पर थोप दी है ये बात पहला तल कुछ तेरा है
- 17:44कुछ मेरा है यहाँ बुद्धि नहीं होती यहाँ समाज होता है और देखिए
- 17:53जो समाज के अनुसार चलते हैं। मेरी बात को अच्छी तरह से कल
- 17:57प्रश्न आया था। उसमें से ये जो भी है समाज से वो
- 18:04घबरा रहा था। अगर तुम समझदार हो तो तुम समाज की
- 18:19फिक्र नहीं करोगे। जिसने समाज की फिक्र की वह डूबा
- 18:32मैंने कल भी कहा था। कानून जो हमने बनाए, संविधान उसकी
- 18:37फिक्र करो और एक कानून है। तुम उसकी फिक्र करो या न करो, वह
- 18:44तो तुम्हें मानना ही पड़ता। वो कानून है परमात्मा।
- 18:53वो कानून परमात्मा का है जिसे चार वाक नहीं मानते और जो कानून देखा
- 18:59भी नहीं जाता क्योंकि वो इतना बूढ़ है और रहस्यत्मक है कि कई
- 19:05बार एक जनम का फल भीष्यों जन्मो के बाद मिलता है।
- 19:12तो चार वाक्य जैसे लोग पैदा होते हैं चार वाक्य कहते हैं प्रणम
- 19:22कृतवा या जीवेद सुखी जीवेद भस्मभूत से देहस्य।
- 19:32पुनः आग में नमक होता है ये दहेज तो 1 दिन बस में कभी देखा कर्ज
- 19:42देने वाला, कर्ज लेने वाला, दोनों मर जाती हैं, बस में जाती हैं।
- 19:47कभी कोई वापस आया नहीं आया, उस रूप में तो नहीं है।
- 19:52रूप बदल के बिल्कुल आता है, लेकिन चार बात को ये पता है तू इस नियम
- 20:00को क्योंकि चार बात जानते नहीं इसलिए कहते है नहीं वो मैंने बहुत
- 20:07बार समझा है। जो जिसने देखा वह उसको ही मानता
- 20:16है और यह उसकी मजबूरी भी है और यह उसका उनेस्टी भी है।
- 20:24ईमानदारी भी है, उसको वही मानना चाहिए क्योंकि वो वही देखता है।
- 20:33चारवाक ने कहा कि कोई कर्मवरम नहीं, कोई लेने देने का जोखिम
- 20:39नहीं, कर्ज ले लो, घी पी लो, बस वापस न लुटाओ।
- 20:51वापस ना लौटाओ ठीक यानी मुकर जाओ विचार वापस लेकिन ना तो ऐसे ही
- 21:07समाज चलते हैं। ज़रा देखो किसी से कुछ उधारी लेके
- 21:13मुकर जाओ नहीं मैं नहीं लेने हैं तो उनका हाल क्या होता है?
- 21:22समाज में उसकी वैल्यू जीरो हो जाती है क्योंकि आज तुम उसका मुकर
- 21:27गए। कल को तुम दूसरे का मुकरोगे तो
- 21:34आपका विश्वास उठ जाता है। अगर तुम चारवाकवादी हो तो तुम
- 21:44भोगवादी हो। और चार वाक कहते हैं जा जीवित
- 21:52सुखी जीवित सबसे बड़े मज़े की बात है।
- 21:55चार वाक सारी उम्र दुखी रहे, चार वाक सारी उम्र दुखी रहे।
- 22:06चार वाक को मान सम्मान तो मिला। लेकिन मान सलमान को क्या चाहते
- 22:22हो? दुख जैसे चरवा के हाथ में हैं।
- 22:27जब जिंदगी ने उसे तड़वा दिया, तो अंतिम वेला में उसे याद आया।
- 22:33क्यों? कहाँ चूक हो गई?
- 22:37यहीं चूक हो गई। प्यार बाक तुझे पता नहीं सुख
- 22:46तुम्हारे हाथ में है कहाँ नहीं तो प्रत्येक व्यक्ति सुखी हो जाए अगर
- 22:52व्यक्ति के हाथ में सुख लेना। उसके हाथ में होता है तो प्रत्येक
- 23:01व्यक्ति सुखी हो जाता है। फिर परमात्मा की नियमों की कोई
- 23:05जरूरत नहीं। फिर ठगी मारो, कर्ज ले लो, पी लो,
- 23:11सुखी हो लो। लेकिन अफ़सोस चार वक्त सारी उम्र
- 23:16तड़पता रहा। कभी रोग से अभाव से नहीं तड़पा
- 23:25अभाव से नहीं तड़पा चारवाक उसकी ज़िन्दगी तुम जानते हो चारवाक
- 23:36तड़पा। जिससे कर्ज लोगे, वह मांगेगा और
- 23:42कभी क्यों देना पड़ेगा? तुम कितनी उसकी शिकायत करोगे?
- 23:49कितने लोगों को कहेंगे नहीं, मैंने नहीं देना, मैंने तो लेना
- 23:54है। बस यही तुम्हारे विश्वास को घटा
- 24:04देगी। चार बार कहते हैं कि लेके मुकरजो
- 24:15लेकिन परमात्मा का नियम। कुछ उलट है।
- 24:23उसने जो नियम बनाए, उसने सारी सृष्टि बनाई।
- 24:25तुम्हारे हाथ में है न? सत्य विजय लोग पूछ लेते हैं
- 24:32परमात्मा ने सृष्टि क्यों बनाई? सीता जवाब है इसका।
- 24:36कोई ज्यादा मशक्कत नहीं है। मैं कहता हूँ क्योंकि वो बना सकता
- 24:41था अब उनको हजम नहीं आती। बात ये भी कोई जवाब हुआ इतना सरल,
- 24:46इतनी जल्दी भाई जवाब ही ये है और जवाब सीधा कर लेते है।
- 24:51कॉम्प्लिकेटेड तो हमारी फिलॉसफी बना देती है।
- 24:56ज़रा आप बताओ अगर तुम कोई चित्र बना सकते हो और अगर तुम बना दो तो
- 25:02क्या कहेगा कोई तुम बना सकते थे भाई तुम में योग्यता से तुमने बना
- 25:08दिया और तुम में योग्यता है, तो तुम बना लो।
- 25:13कहावत है कि वि स्वामित्र ने खुद का स्वर्ग पैदा कर दिया।
- 25:20कहावत है इसके अर्थ ये है कि खुद का जनत आनंद तुम पैदा खुद करने
- 25:30में समर्थ हो। यू कैन प्रोड्यूस युअर हेवन।
- 25:34एंड हेल ऑल्सो तुम तुम्हारे स्वर्ग का निर्माण खुद कर सकते हो
- 25:46और तुम तुम्हारे नरक का निर्माण भी खुद कर सकते हो।
- 25:54चारवाक सारी मजूदर अपमान की आग में, क्योंकि उसने सिर्फ कहा ही
- 26:03नहीं, उसने उसे क्रियान्वित भी किया।
- 26:08उसने कर्ज लिया और मुखर्जी। और घी पी लिया।
- 26:13उस वक्त घी ही पिया जाता था, उस वक्त दारू नहीं होती थी।
- 26:24कैसा होती थी दो नंबर की होती थी अच्छा चलो।
- 26:34हम आगे चले एक तल है बीच में थोड़ा थोड़ा हस्सन खेलना मन का
- 26:48चाव मन खिल जाए तो ब्रॉड हो जाता है।
- 26:55और फिर समझाने वाले की बात, क्योंकि तुम्हारी नसें अब्रॉड हो
- 27:00जाती हैं तो तुम अच्छे से समझ जाती हो।
- 27:03इसलिए थोड़ा सा जोक्स जरूरी हो जाता है और वो खुद ही हो जाता है।
- 27:09जोक्स कहता है घर की गड्डी होती थी चलो।
- 27:14हम आगे गए एक तल है जहाँ कुछ मेरा है कुछ मेरा है, वहाँ समझ नहीं है
- 27:28ना समझ व्यक्ति समाज बनाती हूँ गुस्सा करना मेरे।
- 27:33और अगर गुस्सा कर भी जाओगे तो मेरा भी कर लो, मैं तो चाहत हूँ,
- 27:45कोई गुस्सा करेगा कुछ तेरा है कुछ मेरा है समाज बना लिया ये प्रथा
- 27:56बना ली बैठकर हमने समझोता कर लिया वहाँ बुद्धि नहीं होती।
- 28:02थोड़ी सी होती है, कुछ तेरा कुछ मेरा इससे बाहर नहीं जाना है।
- 28:10कोई बाहर जाएगा तो फिर हम हुक्का पानी बंद कर देंगे उसको।
- 28:21एक जवान ने कुछ ऐसे ही कर दिया था जोड़ा था शादी करा ली थी अपनी
- 28:26मर्जी से और पंचायत ने उसको घर पे बिठा लिया।
- 28:35कहते थे देखो तुमने ये काम किया है।
- 28:43100 तुम ग्राम छोड़ दो, बच्चे ठीक है, छोड़ देता हूँ, एक तुम्हारा
- 28:51हुक्का पानी बना बोलो, क्या करना है कहते देखो हुक्का पानी की बात
- 28:59ये है हुक्का मैं पीता नहीं। धुम्रपान की आदत नहीं मैं सिख पंत
- 29:07को मारने वाला और वहाँ घर बदलने की वो मैं बदल लूँगा यहाँ के घर
- 29:14की कीमत आंकड़ों और मुझे कहीं और घर दिला दो, मैं वहाँ चला जाऊंगा।
- 29:18मुझे क्या फर्क है? इन उल्लुओं के विषय में मैंने
- 29:21रहना भी नहीं समाज तुम्हें ठुकराएं तो ध्यान रखना तुम इतनी
- 29:28सी जमीन रखना कि तुम समाज को ठुकरा सको अगर तुम इतनी जमीन नहीं
- 29:40रखते, इतना हौसला नहीं रखते। तो फिर समाज तुमपे हो जाये यही
- 29:45हुआ कि एक व्यक्ति शुद्र हो गया पैरों की जूती स्त्री भी शुद्र हो
- 29:52गई, सारी जमाने की स्त्रियां शुद्र हो गई दुनिया की आंधी आबादी
- 29:57पांव के तले हो गई, जूती बनते रहे।
- 30:01बड़पना है कि थोड़ी कमजोर थी, अबला का नाम दे दिया गया उसे जबकि
- 30:12थोड़ी सी सबल बनने के लिए कोई प्रेरक होना चाहिए।
- 30:20तो जरूरी नहीं कि वरीष्ठ व्यक्ति ही सफल हो सकता है।
- 30:25प्रेरणा भी तुम्हें समझदार बना सकती है।
- 30:33हौसला समझदारी हौसला पैदा करे। एकतल है कुछ तेरा है कुछ मेरा है
- 30:52वहाँ परमात्मा नाम की कुंजी अगर है, तो मूर्तियों की तरह है, और
- 31:00मूर्तियां एक। तरह से नासमझी का प्रणाम मैंने कल
- 31:07ही बात सुना है आपको लड्डू, ये सारी मूर्तियां हमने पैदा कर दी
- 31:12और ध्यान रखना जैसे जैसे हम मूर्तियां बढ़ती जाएंगे वैसे वैसे
- 31:18समझ घटती जाएगी। और वैसे वैसे 2 दिन आते जाएंगे,
- 31:28अच्छे दिन नहीं, ये बुरे दिनों का आहट है।
- 31:38मूर्तियों का ज्यादा पैदा होना हर 10 5 साल बाद कोई नया बखीरा कर
- 31:48लेते हैं। पहले ये संतोषी माता नहीं थी, फिर
- 31:53संतोषी माता शीतला माता नहीं थी। अब गद्दे पर ही बैठाती किसी पर
- 32:00माता जिसमें बुद्धि नहीं होगी वो गद्दे पर ही बैठेगा।
- 32:08जिसमें बुद्धि नहीं होगी वो कुल्लू पर ही बैठेगा।
- 32:13ये बड़ा खिलवाड़ करते हैं देवी देवताओं के साथ।
- 32:22इस साल से पार यहाँ खुशी होती है थोड़ी सी लेकिन नकली नकली सी बस
- 32:29इतनी ही खुशी होती है कि हम समाज की मान्यताओं के अनुसार चले।
- 32:37वहाँ क्या होता है जैसे शीर बोलने वाला शीर बोलता है।
- 32:43और दाग देने वाला दाग देता है भला की वो शेर दाग देने वाला हो न
- 32:50देने वाला हो तो कभी वहाँ कभी राष्ट्र कभी बन जाता है।
- 32:59बस दाग देने वाली खरीदी हुई फौज होनी चाहिए।
- 33:09इसी प्रकार का मीडिया होता है ब्रेकिंग न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़
- 33:17ब्रेकिंग न्यूज़ मैंने कहा ऐसे चिल्ला रही चीखें मरे।
- 33:22पता नहीं क्या हो गया इसको कोई मर गया या कोई कुएं में से लाइन लगा
- 33:29गया या कुछ ऐसा हो गया ऐसे चिल्लायेंगी ये कुछ तो आवाज ही
- 33:38ऐसी परमात्मा की कृपा? और कुछ डंग ऐसा बोलने का?
- 33:44ब्रेकिंग न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ एक अपराधी को लेकर आ रहे थे।
- 33:53अरे भाई क्या हो गया मैंने कहा देख ना बेटा क्या हो गया है पापा
- 34:00कुछ नहीं हुआ। नहीं तो जीस अपराधी को ले के गए
- 34:03थे ना उसको पेशाब आ गया था। ये व्रत नहीं और बिलकुल सच बात है
- 34:10ये आप खंगाल सकते है उसी को और ऐसे चिल्लाइए।
- 34:24क्योंकि स्त्रियों को इसलिए रख सकते है।
- 34:27एक तो आवाज पतली होती है, एक जब ये चिल्लाते हैं तो आदमी का ध्यान
- 34:33भरबसी से जाता है और होता क्या है?
- 34:38पुत्र क्या होता है देखना ज़रा कहते पापा ये तो किसी अपराधी को
- 34:43लेके जा रहे थे उसको पेशाब की आज तक ये ब्रेकिंग न्यूज़ है आज की
- 34:52पहला पद है। शाबाशी मिलेंगे उसको ही तुम
- 34:56संतुष्टि में ले लो। हाँ समाज संतुष्ट है, ठीक है, है,
- 35:02लेकिन वास्तव में तुम सुखी नहीं हो।
- 35:07वहाँ तुम पराधीन रहोगे क्योंकि तुम्हारा सुख व्यक्ति आधारित है।
- 35:13समाज आधारित समाज खुश है। बस इसी बात की तुम्हे खुशी है।
- 35:22और ऐसा वक्त हजारों साल तक हिंदुस्तान में रहा।
- 35:26सभी जगह रहा। प्रत्येक सविताओं में ऐसे वक्त
- 35:29रहे प्रत्येक सविताओं ने ऐसे वक्त काटे।
- 35:34लेकिन एक वक्त आया कि क्रांति भी आई है।
- 35:39दूसरा तल है पहला तल, कुछ तेरा और कुछ मेरा यहाँ परमात्मा।
- 35:53का कुछ नहीं है। जिसका सब है उसका कुछ नहीं है,
- 35:58फिर दूसरा गलाते है जहाँ परमात्मा का वजूद आ जाता है।
- 36:08यहाँ कुछ तेरा और कुछ मेरा। और कुछ ऐसा भी है जो परमात्मा की
- 36:16कृपा होती। है।
- 36:21अब तीसरी शक्ति का आह्वान हुआ, तीसरी शक्ति का शिकार हुआ।
- 36:34कि उसका भी है। समाज उससे आगे बढ़ा, व्यक्ति उससे
- 36:43आगे बढ़ा। पहले तल पे व्यक्ति गुलाम था,
- 36:52दूसरे तल पे थोड़ा थोड़ा गुलाम रह गया।
- 36:54थोड़ा थोड़ा आजाद रहेगा। अब एक तीसरा तल आता है।
- 37:01बाबा नानक कतल पहले दो तल मुर्ता के तल हैं।
- 37:11थोड़ी ज्यादा थीं पहले में। दूसरे में थोड़ी कम होती है,
- 37:19तीसरे में व्यवहारिक तल नहीं है, तीसरे में तल वो है जो अनुभव से
- 37:26आता है। वह कोई एक व्यक्ति, तीसरा तर 1313
- 37:47मेरा कुछ नहीं। और ये आता है अनुभव से सब तेरा है
- 37:59सब बदल जाता है पहले दो तलों पे जो तुमने माना तीसरे तल पे जा के
- 38:07ध्वस्त हो जाता है। बदला तो है सा बदला कुछ रंग।
- 38:34एक फूल पे बहरा एक फूल पे खजाना। ऐसा बदल जाता है पहले तुम जी रहे
- 38:57थे खिजा में और अब तुम्हारी ज़िन्दगी में बाहर आ जाती है यहाँ
- 39:08से ग्रैटिट्यूड। पहले परमात्मा की चीजों पर
- 39:14ग्रैजुएट हे प्रभु 13,00,000 शुक्र है तुने पीने को पानी दिया
- 39:22तुम भूल जाते हो बाबा याद रखते हैं।
- 39:34हे प्रभु तेरा शुक्र है कि तीने जीने को हवा दी, ऑक्सीजन दी,
- 39:42प्राण वायु दी 13,00,000। तुने खाने को?
- 39:52प्रतिनिधि बीज दिया, पानी दिया, सूर्य दिया सभी साधन उपलब्ध कराए।
- 40:03पहले उसकी दांतों के प्रति ब्रैटी चुराता है।
- 40:10यह ग्रेटी सूट का। पहला स्टेप है।
- 40:18और यहाँ से बाहर शुरू। होती है।
- 40:28अब समझ लो बात को अब। गहरी आ जाएगी बात पहले खोपड़ी की
- 40:34खुजलाहट। अब अपने अंत की बात।
- 40:40है खोपड़ी की खुजला। इतनी चार्मिंग नहीं।
- 40:46होती तो मैं भी इस वक्त खोपड़ी में ही होता हूँ।
- 40:55देखिये कोई रस नहीं होता वो रस के बिना एक का कद तो बहुत लंबा हो
- 41:07सकता है, लेकिन अगर मठास नहीं उसमें तो क्या करोगे?
- 41:21तुम्हारे पास कुछ है। नहीं है।
- 41:23इसका यह भावनाओं की बात है। हमारे पास सोच।
- 41:37मैसेज? आती हूँ और।
- 41:38मैं कहता हूँ देखो, भाई। संसार के लिए मैंने तुम्हें एक।
- 41:43बात कही बहुत बार कही बार बार बोलता हूँ, तुम्हारे ही कर्म हैं,
- 41:51क्यों डर रहे हो वो लोग? अगर तुम डॉक्टर के पास।
- 41:58जाओगे, दर्द हो रहा है वो इंजेक्शन लगा देगा ये मत समझना के
- 42:02रहते कर्म तुम्हारे खत्म हो गए नहीं उसने सिर्फ पोस्टपोनड किया,
- 42:11उसने आगे डाल दिए। दवा है, दवा है।
- 42:16उसके उसकी सृष्टि में दवा है, लेकिन संत कितना ही बोले आपके
- 42:25हृदय में ये बात नहीं। पर तुम्हें ये नहीं पता कि यहीं
- 42:32से जीवन की मिठास से शुरू होती है।
- 42:37और जीवन की मिठास। ही सच्चा ही बना है छोटा सा जी
- 42:47लाखों साल की ज़िन्दगी तो तुम गौर हो जाओगे जीते जीते।
- 42:52यू विल कम इट सुसाइड? बड़ी बोरिंग है, लेकिन थोड़ी देर
- 42:59की रस हरी ज़िन्दगी लंबी लंबी। प्यार की एक घड़ी है बड़ी प्यार
- 43:22कर लें घड़ी दो घड़ी बस यही जीवन है।
- 43:30जिसमें जीवन का रसू उतरता है, जो नीरस जाती है।
- 43:37जिंदगी वो जिंदगी नहीं होती, वो तो एक मूर्छा होती है।
- 43:47और तुम मूर्छित मूर्छ। से बाजार देते हो अपनी ज़िन्दगी
- 43:50को। ग्रैटिट्यूड सदा।
- 43:55ही बरस रहा है और तुम इस महाप्रयोग को कभी प्रयोग में नहीं
- 44:04ले गया था। पूछा है।
- 44:19कि अकारण ग्रैटिट्यूड करें कैसे अकारण कैसे भाई कारण मैंने?
- 44:30तुमने धरती दी बीज। दिया पानी दिया सूर्य दिया, हवा
- 44:34दी यह। ग्रैटिट्यूड के लिए काफी।
- 44:37नहीं है। क्या यह कारण से यह छूट है?
- 44:45और बाय वर्स ये तुम्हारे साथ है। बस तुम्हें याद नहीं है।
- 44:52तुम एहसान पर मौसो। अन्यथा जब भी याद आ।
- 44:57जाएगी। जब जाग आ जाए तो सवेरा जब याद आ
- 45:02जाए। शुभ दिन शुभ घड़ी याद बड़े जान ना
- 45:12जब तुम्हें उसका ग्रैटिट्यूड याद आ जाता है वो ही शुभ दिन है वो ही
- 45:19शुभ घड़ी। लगन मुहूर्त।
- 45:24और पगार का? एक ही कमी है।
- 45:32तुम्हारे और खुशी के बीच में एक स्टेप का फासला।
- 45:45तुम्हारे इस नारकीय। जीवन से तुम्हारे उस सामरिक जीवन
- 45:50में एक स्टेप इदर से कदम उठाया अगर उधर चले गए।
- 45:58तो तुम स्वर्ग में हो जाओगे, बस स्वर और नरक के बीच में ये महीन
- 46:03सीर की है, प्रगोर से देखोगे तो सब उसकी दात है ज़रा।
- 46:16बताओ मुझे देख के। अगर बता दोगे तो तुम्हारा बहुत
- 46:20धन्यवाद और। तुम्हारे चरण।
- 46:24ऐसा कुछ बता दो जो उसकी सौगात नहीं है।
- 46:29कुछ बता दो, ऐसा तुम खुद ही उसकी सौगात हो।
- 46:38और तुमने अपने परिश्रम। से जो पैदा किया वो परिश्रम से जो
- 46:42शट्टी लगी वो भी उसकी सौगात और तुमने?
- 46:46जो अर्जुन किया। उस परिश्रम से वो भी उसकी सौगात
- 46:50कौन जाता जानता की तुम फेल हो जाती।
- 46:55तुम काम जब होती। हर जगह उसकी।
- 47:00शोभा संत हृदय, बाल हृदय ये बड़ा आश्चर्य से भरे होते हैं।
- 47:15इनके लिए हर पल। ब्रेकिंग न्यूज़ होता है।
- 47:21ये हर पल को जीते। हैं रस पूर्ण तरीके से जीते हैं,
- 47:26कभी कभी मैं यहाँ कमरे में नहीं होता यहाँ बैठा बैठा अचानक मेरे।
- 47:35हाथ जुड़ जाते हैं, सिर झोंक जाता है, लहों पे मुस्कराहट तैर जाती
- 47:43है। और अगर कोई मेरा परिवार का सदस्या
- 47:49जाए, किसी काम से दुष्ट है। ये किस से हाथ जोड़ रहे हो?
- 47:56यहाँ है तो कोई है नहीं मैंने कहा है वह।
- 48:01जो सब जगह है। बस मुझे याद आती है शुभ घड़ी यही
- 48:11है। बड़ा।
- 48:13आनंद बिखेर। जाती है।
- 48:15रस का शहद जैसा मीठा है ये। उसकी जास आ जाती।
- 48:24है है तो वो हर बल, हर वक्त कणकण में।
- 48:31लेकिन तुम्हे याद आती है। कभी कभी ऐसा।
- 48:35अगर तुम में घटने। लग जाए तो तुम समझो कि शुभ मार्ग
- 48:42पे तुम आ गए। तुम अरदास करते।
- 48:50लेकिन तुम अरदास करना करने का तरीका भूल गए।
- 48:56अरदास करना अरदास में तुम सब कुछ मांग लेते हो साईं बेमेनु छड़के
- 49:04नजरें विक्की के दोर ना हो जाए। ये फरियाद नहीं है।
- 49:13हरदास ने। यह तो तुम सदा ही मंगते।
- 49:18बने रहते हो। और लोग मुझे कहते हैं कि हम।
- 49:23मंगते ही तो हैं नहीं, जो मंगता होता है।
- 49:27वह तो ग्रैटीच्यूड भी करता है, मैं जाने के बाद।
- 49:34तुम ग्रैटीच्यूड नहीं करते हो। तुम्हें मिल जाता है।
- 49:41तीसरी ये कल। आती है।
- 49:47जब तुम अस्तित्व में। उतरते आओ।
- 49:54बाहर रस बरसने लग। जाता है।
- 50:00कारण से। होता है।
- 50:01अकारण। तुम्हारे हाथ जुड़ जाते।
- 50:07हैं, मस्तक नहीं जाता है। रोम रोम कुमारी से।
- 50:13भर जाता है अचानक लफों पे एक संगीत और गीत गूंजता है, कंठ गाने
- 50:24लग जाता है रोवां रोवां। जैसे।
- 50:28उसकी स्तुति करने लगता है। इश्वत करें ऐसा वक्त तुम पर भी
- 50:40आया है, बड़ा प्यारा वक्त होता है आएगा।
- 50:47अगर तुम तीसरी अवस्था में। उतर गए।
- 50:53बस जहाँ तेरा ही। तेरा है क्या तेरा मेरा भी न रहा
- 51:03मोरखुन जैसा। और।
- 51:05तेरा मेरा भी न। रहा।
- 51:07थोड़ी समझी जैसा जहाँ मेरा कुछ न रहा, तेरा ही तेरा हो गया वहाँ हर
- 51:18चीज़ ग्रैटिट्यूड का कारण बन जाती है।
- 51:22तुम ऐसा भी कर सकते। हो?
- 51:25कि तुमने सोचा कि। मुझे ₹1000 बच जाए, बचा 500 और
- 51:31तुमने मुँह लटका लिया और ऐसा भी हो सकता है कि तुम सोचो कि ₹1000
- 51:41बच जाए। और 500 बच जाए।
- 51:46तो तुम कहो कि शुक्र है कुछ सोना तो नहीं बचा ही है, बस इसे ही मैं
- 51:56ग्रैती चूक करता हूँ। तुम्हारी वासनाएँ कभी पूरी नहीं
- 52:09होंगी, तुम पूरे हो जाओगे वासनाएँ दुष्पूर्ण रहेंगे अंत तक।
- 52:21और वासनई दुष्पु रहेंगी। इसलिए तुम्हें अन्य जन्म मिलते
- 52:25हैं जब तक वासनई रस में तब्दील नहीं होती, स्टिमुलेशन की बजाय रस
- 52:38में तब्दील नहीं होती। यहाँ फर्क समझ लो।
- 52:41ये फर्क बड़ा भारी है। तुम वासनियों की उत्तेजना के
- 52:45स्वाद को खुशी समझ लेते हो, सुख तो होता है लेकिन वो सुख नहीं
- 52:57होता जिसे कबीर कहते हैं। जो सुख।
- 53:02पायो। राम?
- 53:07भजन में। वो सुख?
- 53:14नाम है। अमीरी में।
- 53:23मंडला जो मेरे रहा फकीरी में फकीरी में।
- 53:37जो फकीरी में भी खुश। रहे।
- 53:44तुम चौपड़ी में भी खुश? नहीं रहती।
- 53:4636 प्रकार के भोजन और मुद मरा लटका रहता है।
- 53:54और फरीद। कहते हैं कि रूखी, सूखी।
- 53:58खाये के ठंडा पानी दे ये ठंडा पानी जो उसने दे दिया ये जो रूखी
- 54:04सूखी दे दी ये उसका ग्रैजुएट है। पेस्ट तो भरेगा।
- 54:12भूख लगी। फरीद का कुछ।
- 54:19डायमेंशन अलग है, काश तुम उस डायमेंशन पे पहुँच जाओ।
- 54:30फिर तुम भागदौड़ को समाप्त। कर सकते हो?
- 54:34उस रस में उतर जाओगे। जो तुम्हे तृप्त कर देगा और।
- 54:39जब तुम एक बार तृप्त। हो गए फिर कभी नहीं उठती।
- 54:48एक बार तो यहाँ के भोजन से भी तृप्त होने के बाद तुम कहते हो बस
- 54:54और। लंगर से पंगत।
- 54:59में उठ जाते हो। बस वही ठीक हो गया।
- 55:08लेकिन फरीद कहते हैं। कि श्रद्धा के लिए तृप्त हो जाओ
- 55:12और श्रद्धा के लिए तृप्त हो गए हम।
- 55:15उस स्थल पर जाकर। उस जल को पीकर जो शहद है, शहद
- 55:22नुमा है, जो तुम्हारी। प्याज को बजा।
- 55:25देता है पूर्ण रूप से सदा के लिए। और फिर तुम आते नहीं।
- 55:31यहाँ। फिर तुम्हारा कोई जन्म नहीं।
- 55:36होता। ध्यान रखना मैंने बहुत बहुत बार
- 55:38कहा, आत्मा का जन्म नहीं होता, वो तो श्रद्धा मगन है।
- 55:45वासना का जन्म होता। है।
- 55:48वासनाई कब मरती हैं, बस उतनी देर तुम जिंदा रहते हो।
- 55:52देही देही का? मरना ही असल मरना है।
- 55:56तुम तो कभी मरते नहीं कृष्ण ने कहा नैनं चिदंती शास्त्रानु नैनं
- 56:05दाती बाबकह नैनं क्लिदन तपु न सुश्रुति मारू तह तुम तो अमर हो।
- 56:14कुछ नहीं होता तुम में गत्ते। हो ना जलते हो ना छिदते हो ना
- 56:20कटते हो। जन्म किसका होता है?
- 56:29वासनो का वासन देही की होती है। और देही को वाष्पि?
- 56:36बुध करना होता है। तीसरी अवस्था ग्रेटी।
- 56:40सूट की है। अगर जीवन में ग्रेटी सूट।
- 56:46आ जाए। किसी भी काम से कई बार समाप्त हो
- 56:49जाता है। तो वह जो धन्यवाद।
- 56:56का रस होगा। उसका मज़ा अलग।
- 57:02होगा तुम्हारे इस मज़े से तुम्हारी अरजासों में कोई रस
- 57:07नहीं। मेरे पास रोज़ ऐसे प्रश्न आ जाते
- 57:13हैं मेसेजेस? यद्यपि।
- 57:16उन्हें यह प्रश्न। करना नहीं चाहिए।
- 57:20क्या करें मजबूर है तुम? गुरू ही इसलिए अपनाते हो, लेकिन
- 57:27तुम इस चीज़ से अनभिज्ञ होते हो कि तुम्हारे दुख को मिटाने का।
- 57:34एक कारण नहीं है। दो दो ढंगे हैं एक ढंगे तो जीस
- 57:40कारण से तुम दुखी हो तुम अभाव से दुखी हो तो तुम्हें सेठ बना दिया
- 57:49जाए तो तुम्हारा दुःख इत्रोहित हो जाएगा।
- 57:54ऐसा तुम्हें लगेगा, लेकिन वास्तव में नहीं होगा।
- 57:58यह नकली नकली तपती है जीसको मैं उत्तेजना का शोक कहता हूँ, जिसे
- 58:04तुम शोक कहते हो, संत तुम्हें कहता है।
- 58:14ऐसी मरणी जो मरे बहुरना बहुरना मरना हो रहे है, संत तुम्हें ऐसा
- 58:23फॉर्मूला बता देता है, यद्यपि तुम मानने को तैयार नहीं, कोई एक बरला
- 58:30मानता है, आते बहुत है। इसलिए गुरु जानता है।
- 58:37आएँगे तो बहुत लेकिन ठहरेगा कोई रोज़ चैनल पर नहीं आते हैं।
- 58:50रोज़ चैनल से लोग। चले जाते हैं।
- 58:52बहुत से टिके रह जाते हैं। और जो नए आते हैं मैं।
- 58:59जानता हूँ वो कहीं से ऊब के आए ऐसे तो आएँगे तो मैं कहता हूँ के
- 59:09भाई यहाँ भी आने की क्या आवश्यकता है?
- 59:13वहीं टिके रहते एक जगह टिके रहते समझ तो आ जाती के जाप करने में
- 59:26नहीं मिलता। वो जाप यहीं करते रहते।
- 59:32लेकिन नहीं तुम्हें आवाज मेठा सुनाई पड़ता है, तुम खींचे चले
- 59:40आते हो लेकिन तुम्हारी वाश में पूरी नहीं होती।
- 59:44तुम कहते हो हम बाबा। हमें हमारा ये काम करता है।
- 59:52किसी को धन चाहिए, किसी को मान सम्मान चाहिए।
- 59:58विवाह मेरे पास कई दिनों से एक मैसेज आ रहा है।
- 1:00:02बाबा तुम्हारे घर क्या कमी है? मेरे घर तो कोई कमी नहीं है।
- 1:00:08मेरे घर क्या? मेरे घर।
- 1:00:10कोई कमी नहीं। है, इसलिए मैं मज़े में हूँ।
- 1:00:18मेरे घर कोई कमी। नहीं है बात समझो इसलिए मैं मज़े
- 1:00:23में हूँ। तुम ऐसा क्यों नहीं बन जाते?
- 1:00:27तुम्हारे घर भी तो कोई कमी नहीं है।
- 1:00:30तुम अपने घर में क्यों नहीं जाते? यह तुम नहीं सीखते।
- 1:00:34मेरे से शास्त्र में लिखा संत का दर्शन अगर एक बार हो जाए और उस
- 1:00:44दर्शन को पी लिया जाए। और तुम्हारे भीतर।
- 1:00:49अन्तःप्राणों में उतर जाएगी ये बात?
- 1:00:54कि मैं भी इस जैसा। हो जाऊं तो होने।
- 1:00:57की आकांक्षा? जग जाती है।
- 1:01:01फिर साधनकाल शुरू हो। गया और बढ़ता बढ़ता बढ़ता।
- 1:01:07तुम भी 1 दिन गुरु ही हो जाओ गुरु।
- 1:01:10कोई ऊपर से तो गिरण। है।
- 1:01:12गुरु कोई नॉन बायोलॉजिकल नहीं है। गुरु बायोलॉजिकल है हैं वो ही
- 1:01:23रस्ते, वो ही। गलियाँ मगर सुनसान हैं वो ही
- 1:01:38राहें वो ही गलियाँ मगर सुनसान हैं।
- 1:01:49तू नहीं तो दिल की सारी बस्तियां भी रहमान हैं, तू नहीं?
- 1:02:03तो दिल की सारी बस्तियां वीरान हैं, दिल में है जो गम तेरा वो
- 1:02:19जान। लेकर जाएगा।
- 1:02:28दिल में है जो धरते जान लेकर जाए। जिंदगी?
- 1:02:44भर गम। जुदाई का मुझे हर नया मौसम पूरा।
- 1:03:00यहाँ लेकर आएगा ज़िन्दगी बरगम जोधा।
- 1:03:15जिसके कारण तड़प रहे हो। उससे कभी जगा हुआ था।
- 1:03:21बस यही तड़प का कारण है, यही दर्द का कारण है तुमने और और समझ लिया
- 1:03:27है लेकिन संत जानता है और है नहीं कोई जिससे बिछुड़ गए थे कभी।
- 1:03:38बुरे दिनों में वो ही दर्द है ये। दिल में टीस बन के।
- 1:03:45उभरता है। तो यहाँ संत कहता।
- 1:03:50है ये तुम्हारी जान ले के जाएगा। कौन बिछड़ गया है तुमसे, यह आनंद
- 1:04:03का संग क्यों बिछड़ गया है? क्योंकि आनंद का संग तुम दूर
- 1:04:11निकलाया। तुम्हारा अस्तित्व तुम्हारा।
- 1:04:16होना। आनंद का स्थल है।
- 1:04:24आनंद की कोई गलती वो तो है। बस तुम ही किन्हीं।
- 1:04:30अभागे क्षणों में वहाँ से दूर निकल आया।
- 1:04:36और दूर जाते जाते। हैं।
- 1:04:39बहुत दूर। निकलता है।
- 1:04:43अब तुम्हें समझ नहीं आता। कि मैं वापस अपने घर कैसे बिलकुल
- 1:04:51उस यात्री की तरह हूँ जिसे पता नहीं।
- 1:04:57मैं अपने घर लौटू कैसे। बस यही तुम्हारी तकलीफ है, तुम
- 1:05:04अलग अलग रास्तों से खंगालते हो, इससे लौट जाऊं, धन को मारू।
- 1:05:11पदवी कुमारू प्राइम मिनिस्टर। बन जाऊं, ट्रंप बन जाऊं?
- 1:05:17गणपति बन जाऊं, मस्त बन जाऊं लोग दुनिया मुझे पूछने लगे भगवान की
- 1:05:28तरह कृष्ण हो जाऊं। अलग अलग रास्तों।
- 1:05:36से तुम उस आनंद को खंगालते हो, लेकिन रास्ता मिलता नहीं क्योंकि
- 1:05:40तुमने ना तो गणपति होना ना प्राइम।
- 1:05:44मिनिस्टर होना ट्रम्प। होना ना तुमने कृष्ण होना इन
- 1:05:52तीनों के होने से। तुम्हें तृप्ति नहीं मिलेगा, तो
- 1:05:59फिर तृप्ति कैसे मिलेगा? तुम तुम हो जाओ, वहीं शांति होगी
- 1:06:09कि तुम तुम्हारे से बिछड़े हो। तुम तुम्हारे स्वभाव।
- 1:06:17से दूर निकल आए हो मैं? बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर।
- 1:06:30पूरी चला तेरी दुनिया से हो के मजदूर चला मैं बहुत दूर।
- 1:06:50बहुत दूर, बहुत दूर चला बहुत। दूर निकला है और बड़ा आसमान मरते
- 1:07:07हो। लेकिन वापस नहीं जा पाती।
- 1:07:13अपने खाने में कहाँ से आई तुम्हें पता किसकी तलाश है तुम्हें पता
- 1:07:21नहीं। तुम कौन हो कुछ?
- 1:07:25नहीं पता लोगों ने नकली नाम दे दी।
- 1:07:32नकली नामों को तुमने? स्व।
- 1:07:35समझ बैठे तुम मैं ये हूँ मैं वो हूँ, मैं ट्रंप हूँ, मैं मस्क
- 1:07:43हूँ, ये तुम नहीं। ये तो जब तक ट्रंप।
- 1:07:49ट्रंप रहेगा और मस्क मस्क रहेगा, दुखी रहेंगे।
- 1:07:53ये संत की? निष्कर्ष है कन्क्लूजन ऑफ लाइफ।
- 1:08:00संत बहुत से। जीवनों का सार निकाल के बोलता है।
- 1:08:07और तुम प्रभावित होते। हो।
- 1:08:09आज के लोगों की जिंदगी की चढाइयां लेकर बस यही फर्क है।
- 1:08:18बच्चे के लिए खिलौना। बड़ा असर होता है।
- 1:08:22हाँ छोटा बच्चा यहाँ आ जाता है मेरा पोता।
- 1:08:26बोलते दादू ये। एक पंख लेते मुझे मोर पंख ले बेटा
- 1:08:32ले जा दादू एक और ते एक और दे देता हूँ यहाँ तो पंख गाने ही
- 1:08:40पड़े। हैं 2 दिन।
- 1:08:45खेलता है। कभी।
- 1:08:47कहीं रख दिया कभी। कहीं रख दिया उसके लिए ये
- 1:08:51परमात्मा से कम नहीं है। थोड़ा बड़ा हो जायेगा, बनते
- 1:08:55खेलेगा। फिर बनते उसके लिए परमात्मा।
- 1:08:59हो गए फिर और बड़ा हो जायेगा। फिर धनुष के लिए परमात्मा हो
- 1:09:05जायेगा। रुतबा उसके।
- 1:09:09लिए परमात्मा हो जाएगा। तुम कहोगे मैं तो सीजेआई बन जाऊं।
- 1:09:14मैं तो सीएमपीआई बन। जाऊं और तुम जिंदगानियां कितनी
- 1:09:18खराब कर चूके हो पहले। इसी किंग कर्तव्य महूता में तुमने
- 1:09:29कितना जीवन समाप्त कर दिया? यह कितने जीवनों?
- 1:09:37को निकल गई। आप कहाँ गई जमीं खा गई?
- 1:09:48आसमान कैसे कैसे जमाने में मारे जमा कैसे?
- 1:10:09जमीं खा गई। आसमान कैसे कैसे?
- 1:10:20बड़ी जन्म निकल गई है ये भ्रांति तुम्हारी बस तुम्हें पता है।
- 1:10:29जीस आनंद को तुम। 100, जन्म 1000 जन्म पहले पा सकते
- 1:10:33थे आज तक तुम नहीं पास कर और भटकन सिर्फ यही है, आज सुन लो, फिर सुन
- 1:10:40लो। संत का मूल वाक्य।
- 1:10:43कभी नहीं बदलेगा। संत का मूल।
- 1:10:48वाक्य कभी नहीं बदलेगा अनचेंजेबल वो जानता है क्योंकि उसने पी लिया
- 1:10:55है, उसने पी लिया है, वह जगह जगह नहीं डोलता।
- 1:11:05प्रवृत तो हो गया है। इसलिए संत का मूल मूल कभी नहीं
- 1:11:11बदलता। वो कहेगा जीस दिन तुमने।
- 1:11:14ये पी लिया जब अब संतोष धन सब धन दूध समान।
- 1:11:22तुम्हारी पदवियां तुम्हारी राशियाँ।
- 1:11:27मान सम्मान। रिश्ते, नाते सब बस में भौत हो
- 1:11:32जाते हैं। जीस दिन तुमने वो पा लिया।
- 1:11:37ग्रैटी सूट वहीं। असली ग्रैटी सूट।
- 1:11:41पहले तो नकली होता है और तुम्हारी अरदासियाँ तो मैं बहुत बार कहूं।
- 1:11:45इसे बड़ी बकवास कोई नहीं। मगता ही मगता।
- 1:11:50तुम्हारी अरदास में होता है ज़रा गौर से देख लेना एक एक शब्द को।
- 1:11:55तुम परमात्मा को। गुलाम बना के नौकरशाही में रखती
- 1:12:00हो? मेरे कर भी छुपेरी पांव हैं मैंने
- 1:12:09अरदास करते हुए देखी जागरण मैं मैंने कहा तेरे बाप की गोली लगी
- 1:12:13है क्या वो? कहते एक तो लखमण।
- 1:12:18कैसे बना दे कि लोग ऐसे कर्मचिव फिर फिर आपका यदि गोच पुत्तखिलानी
- 1:12:30यही तुम चाहते हो और ये तुम्हारी वासनाओं को वर्मा के इन।
- 1:12:40मैं तुम्हें बता रहा हूँ उसकी खोज करो, जीस दिन तुमने वो पी लिया उस
- 1:12:46दिन फिर जो उमड़ेगा भीतर से वह सज्जा व्रती शुरू होगा तुम कहोगे
- 1:12:54वाह वाह वाह हे गुरु वाह हे गुरु। वाह वाह हे गुरु ये है सच्चा
- 1:13:02ग्रैटिट्यूड तुम्हारी अरदास में तो मांगें ही मांगें हैं, अहो भाव
- 1:13:10है ही नहीं। ज्योति पसारे रहते हो तुम सदा
- 1:13:15तुम्हारा इच्छा पत्र खाली रहता है।
- 1:13:19इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ मत। करो अरदास तुम इतने दोगले मत रहो
- 1:13:24कि एक तरफ कहो। तुम ही कहते हो।
- 1:13:29गट गट के अंतस की जानत। भले बुरे की वीर पहचान अगर वो
- 1:13:34तुम्हारी पीड़ा को पहचानता है तो फिर वो पीड़ा को हार भी लेगा,
- 1:13:43लेकिन बात ये है कि तुम छोड़ते नहीं और बहुत से लोग मुझे कह देते
- 1:13:48हैं कि बाबा छोड़ते हैं, अरे भाई छोड़ते हो।
- 1:13:52लेकिन समझो बात को, ये आपकी बात है।
- 1:13:56तुम छोड़ते हो 50। प्रतिशत छोड़ते हो 50 अपने हाथ
- 1:13:59में रखते हो पूरी पतवार कहाँ उसके हाथ में देते हो और जब आंधी पतवार
- 1:14:05तुम पकड़े रहते हो तो फिर समझो के पूरी पतवार ही तुम पकड़े रहते हो।
- 1:14:11क्योंकि तुम जब चाहे बदल सकते हो उस बुधवार को।
- 1:14:16मैं क्या कहता हूँ। अगर क्रांति अब तक नहीं हुई तो
- 1:14:21जैसे पानी 99 डिग्री पर इवैपरेट नहीं होता।
- 1:14:30वाष्प पे बोध नहीं होता वैसे ही 99% तक नहीं आता वह काम करेगा
- 1:14:47100% पे वाष्प बनता है पानी समझाने की बात है समझना।
- 1:14:54तुम पूरे के पूरे इन्सर्ट यूरसेल्फ़।
- 1:15:05उसके क्षेत्र में। प्रवेश कर जाओ जैसे परवाना क्षमा
- 1:15:10में प्रवेश कर जाता है, फिर कोई फिक्र नहीं होती, वह मरता है के
- 1:15:15जीता है तुम्हारे हिसाब से मर जाता है।
- 1:15:18उसके हिसाब से वह जीवन पा जाता है।
- 1:15:26तुम कितना ही चिल्लाओ, हरदास करो, ग्रैटिट्यूड असली नहीं आएगा, जो
- 1:15:34आएगा, नकली आएगा उसे तुम ग्रैटिट्यूड समझो।
- 1:15:39लेकिन असली। ग्रैटिट्यूड प्रांत कोर ऑफ योर
- 1:15:42हार्ट। हमारे हृदय के अंतरिम।
- 1:15:47कणी से आंख वहाँ से बोले गए थे ये शब्द।
- 1:15:55और तुमने इसे जाप बना दिया, कुछ ऐसा नहीं घटा जो ये शब्द तुम कह
- 1:16:02सको, लेकिन तुमने माइला पकड़ लिया।
- 1:16:07मन के फेरते रहते हो वह गुरु, वह गुरु इट इज़ रेपुटेशन।
- 1:16:13रेपुटेशन मत करो। वह जो वाहेगुरु आएगा 100%
- 1:16:19एवपोरटीओन से वह सफीशियंट है, एक ही सफीशियंट है इसलिए बा बनाने के
- 1:16:25लिए कहा एक उनका बस एक बार आएगा बहुत है तुम क्यों जप रहे हो, दिन
- 1:16:31भर रात समझो मत को। जब वह पूरे का पूरा।
- 1:16:37घना का घना तुम्हारे सारे अस्तित्व में छा जाएगा और
- 1:16:41तुम्हारे प्राणों को खुमारी से ढकरेगा तुम महा आनंद की अवस्था
- 1:16:47में आओगे तो ग्रैटिट्यूड उपजेगा भीतर से तो वाणी से परागित होगा।
- 1:16:55बाबा के कंठ गाएंगे, वाहे को ये होता है मैं इसलिए कहता हूँ जा मत
- 1:17:06कहो इस ग्रैटिट्यूड को भीतर से आने दो और एक बार ही काफी है।
- 1:17:14तुम धन्यवाद बार बार। करते हो क्या किसी ने तुम्हे पानी
- 1:17:18पिलाया, तुम्हारी प्यास बूझ गई, तुम क्या कहते हो?
- 1:17:22धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद ऐसे करते हो फिर
- 1:17:27तो तुम। प्राणों से निकला हुआ एक।
- 1:17:30बार का भी धन्यवाद बहुत अच्छा। प्यास बज के इतना का और ये सही भी
- 1:17:36है तुम एक रिश्वत देते हो महे गुरु के नाम पे अल्लाह के नाम पे
- 1:17:45राम के नाम पे राधा के नाम पे। भीतर से नहीं है।
- 1:17:53जब भीतर से आएगा। राधे राधे राधे श्याम मिला दे
- 1:18:07गोविंदा गोपाल हरे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:18:20गोपाल हरे। मेरी नैया।
- 1:18:25पार लगा दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम
- 1:18:39मिला दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे।
- 1:18:50गोबिंदा गोपाल। हो हेवराट तेरा कोटी कोटी।
- 1:19:13धन्यवाद।