Latest / Baba ji Vijay Vats / 24 Feb 26 - बाबा आप नाम जप को पाखंड कहते हैं और बाबा नानक “नाम जपने” को कहते है! किसकी बात सही मानें??
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- 0:17चरण स्पष्ट रूप परम प्रकाश
- 0:41आपने परमात्मा के बारे में बहुत बोला।
- 0:51इंसान को अपनी जिंदगी कैसे जीनी चाहिए कृपया इस बात को तफ्सील से
- 1:05व्यख्यायित करने का कष्ट करें। प्रश्न अच्छा है, लेकिन इसमें
- 1:23किसी प्रकार की कमेंडमेंट नहीं लगाई जा सकती।
- 1:30और धर्म गलत थे जिन्होंने 10 कमेंडमेंट से लगा दिया।
- 1:37वो कमेंडमेंट्स उनके दिमागों पर बंधन बन गई।
- 1:47व्यक्ति का लक्ष्य है सभी बंधनों से आजाद होना।
- 1:58और जब तुम्हारी मान्यता ही तुम्हारे बंधन मान जाए तो उनको
- 2:03छूट देना। चाहिए यही।
- 2:11सुखी जीवन की शुरुआत है बाबा नन्क ने।
- 2:21सुखी जीवन जीने का ढंकी बजाया था। लेकिन हम लोगों ने सुखी जीवन जीने
- 2:37का लक्ष्य बनाने की बजाय। उसको कर्मकाठ में घड़ी इसलिए
- 2:51कृत्य करो ना जपो इस छोटे से फॉर्मूले से।
- 3:13अगर आप अपनी जिंदगी को जीना सीख लो तो आपकी जिंदगी स्वर्ग से भी
- 3:24ज्यादा बेहतर हो जाएगी, जो स्वर्ग की हमने कामना की थी।
- 3:34स्वर्ग कोई भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, हमारी ही बनाई गई जीवन की
- 3:43व्यवस्था का सुचारु रूप से चलना स्वर्ग होता है।
- 3:59आइए शुरुआत कर दे, सार्थक चीजों को अपनाओ, व्यर्थ की चीजों को
- 4:13छोड़ दो। व्यर्थ क्या है और सार्थक क्या
- 4:26है? जरूरतें सार्थक हैं अपनी ज़िन्दगी
- 4:35को सुंदर साबरिक आनंदमयी बनाने के लिए।
- 4:46किसी शास्त्र का सहारा न लेना तुम्हारे पास जीवन है इस जीवन से
- 5:00सीखना और इसी जीवन से सुखी होना और इसी जीवन से दुखी होना।
- 5:14भगवान कृष्ण के इन शब्दों का अर्थ यह भी सार्थक है सुधर्म निधर्म
- 5:25श्रेया पर धर्म ब्याह? ज़िन्दगी को अपने ढंग से जियो फिर
- 5:39अगर दुख भी हो जाए तो कोई बात नहीं एक प्रयोग हो गया और वह
- 5:48प्रयोग तुम्हारे बड़ा काम आएगा। कमेंट मैन्स तो बंधन है और
- 6:03व्यक्ति की अंतिम लक्ष्य सभी बंधनों से आज़ाद होना।
- 6:19कृत करो सबसे पहली बात इस शरीर को चलने के लिए जो चीजें जरूरी हैं
- 6:35वह अपनाओ। इसका खान पान द्रव्य का उपार्जन
- 6:50का ढंग, शरीर को ऐसी वस्तुएं मह्यकरण।
- 6:59जिससे आनंदित जीवन जिया जा सके और अपना काम करके स्वावलंबी बनके जी
- 7:15न खोज के प्रयास से भूख मिटा न। और अगर खुद के प्रयास से कुछ बच
- 7:38जाए, उसे बाँट देना आज तक जिन्होंने भी सुखी जीवन जिया।
- 7:51ऐसी ही जिंदगी जीने वालों ने सुखी जीवन किया, क्योंकि यह सत्य है के
- 8:06मनुष्य अपने संग कुछ लेके नहीं आता और यह भी सत्य है के मनुष्य
- 8:13अपने संग कुछ लेके भी नहीं जाता। जो है यहीं कमाओ और यहीं छूट जाओ
- 8:20कि बाकी तुम्हारे मोह हैं, कर तो करो, यह करने योग्य है।
- 8:40नै करनी योग्य क्या है स्मरण तुम चौक स्मरण करना व्यर्थ है।
- 8:57न करने योग्य चीजों में मैं रखता हूँ स्मरण, स्वर्ण स्मरण,
- 9:11व्ययवचार। स्मरण पागलपन वैसा स्मरण जैसा तुम
- 9:25करते हो, यह जरूरी भी नहीं है। आंधी से ज्यादा दुनिया तो नास्तिक
- 9:37है पक्की। पक्की यानी वो कहती है कि हम
- 9:42नास्तिक है और जो बाकी के आप कहते हो मंदिर जाते हैं, गुरुद्वारा
- 9:48जाते मसीह जाते जर्ज़ जाते वो भी नास्तिक है, वो अंधे आस्तिक है।
- 9:59तो कभी भी परमात्मा का स्मरण मत करना बात बिल्कुल उलटी लगेंगी।
- 10:18स्मरण के क्षण को किन्हीं और कामों पे लगा देना, परमात्मा को
- 10:32याद करके वक़्त खराब न करना। जीने का एक अमूल्य सूत्र तुम्हें
- 10:41बता रहा हूँ क्यों और अपने जीवन के अनुभव से बता रहा हूँ।
- 10:49मैंने कभी परमात्मा को याद नहीं किया।
- 10:54यह गैर जरूरी है। और ये है व्यर्थ है गैर जरूरी
- 11:03इसीलिए है कि हम अपनी इच्छा से पैदा नहीं हुए सब बकवास है, जो
- 11:15लोग कहते हैं कि तुम अपनी इच्छा से पैदा हो जो पहला व्यक्ति बना
- 11:21होगा। उसकी क्या इच्छा रही होगी?
- 11:27तुम उसे आदम कह लो, तुम उसे मन्नू कह लो।
- 11:33आदम ईब की जोड़ी मनुष्यतरुप की जोड़ी।
- 11:40उनकी स्वयं की क्या इच्छा रही होगी, उन्हें पता ही नहीं होगा।
- 11:53तुम अपनी इच्छा से पैदा होते ही नहीं, तुम्हें पैदा करने वाला कोई
- 12:06और जिम्मेवारी है। और सारी जिम्मेदारी उसकी है इसलिए
- 12:16मुझे लोग कह देते हैं बाबा परमात्मा हूँ सृष्टि आदमी में मैं
- 12:22कहता हूँ ना भाई, मुझे पता है, पिटेगा ये क्योंकि मैंने कहा।
- 12:31कि हाँ, मैंने बनाई तो फिर उस किसान की बात मुझे याद आती है कि
- 12:39अगर किसी दिन परमात्मा मिल गया तो पंडित जी मैं गसा गसा के इतना कर
- 12:45दूंगा उसको ये बेड ही करेंगे। ये भी बनाया तो क्या बनाया
- 13:04परमात्मा का नाम लेना बिल्कुल कह से किसने क्या कहा?
- 13:12मुझे उन बातों से ज़रा भी तकलीफ नहीं है और ज़रा भी।
- 13:21कोई लेना देना नहीं। जो कुछ कह गया वो अपने ढंग से कह
- 13:25गया लेकिन आपने मुझसे पूछा तो पुत्र मेरा जवाब सुनिए।
- 13:34गैर जरूरी है परमात्मा का नाम सिमरन।
- 13:38बिल्कुल गैर जरूरी क्या है? अगर सिर में दर्द करना हो तो
- 13:43परमात्मा का नाम ले लेना। लेकिन सातवें शरिडान एनल जैसिक
- 13:52टेबलेट रक्षण। क्योंकि व्यर्थ की जगाई है
- 14:00परमात्मा करना। एक प्रकार का दंड दे रहे है ये
- 14:08मार्गदर्शक और ये भी दंडित है। इनको भी इनके गुरुओं ने कहीं
- 14:19दंडित कर दिया, नाम जपो। अगर किसी शब्द का अर्थ अगर तो हो
- 14:33जाए, वहाँ गलती हो जाए तो गलती सुधार लेना चाहिए।
- 14:42तो ज़िन्दगी को कैसे अच्छी? कृत करो सबसे पहला ये तो जरूरी
- 14:55है। इस से शरीर का कार्यपुषण करना है।
- 15:10इसके हर पल सांस चलती है, दे धड़कता है।
- 15:16एनर्जी की जरूरत पड़ती है। कैलोरीज की जरूरत होती है।
- 15:25उसे भोजन देना पड़ेगा, पानी देना पड़ेगा, स्नान करना पड़ेगा,
- 15:34वस्त्र मैले हो गए, बदलने पड़ेंगे।
- 15:39यह हमारी जरूरतें हैं शरीर की। और ध्यान रखना, ये हमने पैदा नहीं
- 15:44किया। अरे नॉट रेस्पोंसिबल फॉर जिसने भी
- 15:51पैदा की उसके कसूर मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा आप क्या सीखा रहे
- 16:00हो मैंने कहा सत्य? एक बाप के चार बच्चे निश्चित रूप
- 16:17से तुम कम से कम 20 साल तो बड़े हो गए और आजकल तो 3035 साल के बाद
- 16:23शादी होती है तो 3035 सालों में तुमने जो जोड़ा और बच्चे जब बड़े
- 16:29होंगे। तो तुम 60 के हो जाओगे तो 60 में
- 16:35तुम्हारी रिटायरमेंट हो जाएगी। बच्चों ने अपना नया जीवन शुरू
- 16:39करना है। सबसे पहली बात जो घरों में क्लेश
- 16:46का कारण बनती है। वो बनती है बटवारा बटवारा अगर
- 17:11तुम्हारे चार बेटे हैं, तुम एक के साथ ज्यादा वो करोगे।
- 17:20तो निश्चित ही बाकी तीनों में जाएगी कि यह हमारे से कम प्रेम
- 17:26करता है। तुम जीने के ढंग सफल होने के ढंग
- 17:34स्वेट मार्डन की किताबों से पूछते हो।
- 17:39लेकिन हमारे ऋषियों ने आगे काल से हमें लिखकर देखें सबसे पहला
- 17:52पुरुषार्थ प्रयास इसको मत छोड़ो। आपका अंग अंग भ्रष्ट होगा, सवस्थ
- 18:04होगा घंटा आध घंटा खुली हवा में बैठना ओक्सीजेनेटेड वातावरण में
- 18:18बैठना हो सके तो लंबे लंबे सांस लेना।
- 18:26यह प्राण वायु है, शुद्ध सात्विक भोजन खाना है।
- 18:39यह मिर्च मसाले तो बाद में इज़ाद हुआ है।
- 18:51नमक जरूरी है खाने पीने के मसले में पशुओं से सबक ले लेना।
- 19:06पशु को आप मसाले और मिर्च से। मिश्रित खाना खिलाओ, जितनी भूख है
- 19:25उतना खायेगा बाकी का छोड़ के चला जायेगा।
- 19:34प्रकृति में सभी चीजें तुम्हें सिखाने के लिए पैदा की है
- 19:38परमात्मा ने। प्रकृति से सीखो पेड़ से सीखो
- 19:48दूसरे के लिए जीना वह तुम्हें छाया भी देता है मीठे फल भी देता
- 19:55है। ठंडी हवाएं भी देता है और धूप से
- 19:58भी बचाता है। पंछियों से सीखें, पशुओं से सीखें
- 20:11तुम दाना डाल दोगे, पशुओं को स्वान को गाय को भोजन दे दोगे
- 20:19उतना ही खाएंगे। जितना भूख है, उतना ही पानी
- 20:24पिएंगे। जितना उनको प्यासे हैं, बाकी छोड़
- 20:27के चले जाएंगे। क्या हुआ क्या हुआ?
- 20:42काश तुमने पूछ लिया तो मुझे बताना भी पड़ेगा, मैं जानता हूँ
- 20:52तुम्हारा अंत इस बात की गुहार नहीं देखा।
- 21:03मनुष्य को जरूरत से ज्यादा थोड़ा सा जोड़ना चाहिए ज्यादा क्योंकि
- 21:14वह जोड़ना किसी प्रकार की दुविधा में।
- 21:23बुरे वक्त में बुढ़ापे में किसी अक्सीडेंटल वक्त में मुसीबत काल
- 21:37में वह काम आएगा। और अगर तुम्हें काम नहीं आएगा तो
- 21:44किसी दूसरे के काम आएगा उसको दे देना।
- 21:50लेकिन जरूरत पूरी करने के बाद अगर तुममें क्षमता है, जो कि अक्सर
- 21:59होती है। तो जोड़ना बस मनुष्य में और पशु
- 22:07में इतना ही फर्क होना चाहिए। मनुष्य जावा इसलिए सर्वश्रेष्ठ
- 22:15कहा गया कि पशु दूसरे के लिए नहीं सोचता।
- 22:19मनुष्य दूसरे के लिए सोच सकता है। पशु चाहता भी तो दूसरे के लिए सोच
- 22:25नहीं हो सकता। जितना मनुष्य सोच सकता है मनुष्य
- 22:35को दूसरे। जिनके पास पूर्ण विकसित अंग नहीं
- 22:40है, हाथ पांव है तो ठीक से नियोजित नहीं है।
- 22:49अब हमारी सभी उँगलियाँ देखिये 50 डिग्री के ऊपर यह है लिख सकते हैं
- 22:54हम जल्दबाजी। अगर ऐसे लिखना पड़ जाता, हम बड़ी
- 22:58मुश्किल से देखते। हैं भीतर।
- 23:04बाहर के अंग बड़े ढंग से बनाये परमात्मा सबसे बड़ी जो चीज़
- 23:13परमात्मा ने एक्स्ट्रा दी मनुष्य को वह विवेक।
- 23:20बुद्धि तो थोड़ी घनी सभी के पास होती है, विवेक नहीं होता।
- 23:28निर्णय की क्षमता उसे विवेक कहते हैं।
- 23:41गैर जरूरी कामों को छोड़ देना। आज दुनिया दुखी क्यों है?
- 23:51जो कृत्य करने का वक्त है, उस वक्त हमारे गुरु हमें माला पढ़ा
- 23:57देते हैं। जब दिमाग फर्टाइल है एंड वी कैन
- 24:05इंवेंट सब हमारे हाथ में माला पकडाई जाती है कि जाओ रेपेटिशन
- 24:13करो किसी भी नाम का। इससे बड़ा पागल कृत्य कोई है?
- 24:25भूल कर भी कभी किसी नाम को जप नहीं करना, व्यर्थ में शक्ति को
- 24:31खराब करोगे मेरी बातों को हृदय के भीतर वसा लेना।
- 24:36कभी मार नहीं खाओगे और यह मैंने अपनी ज़िन्दगी से सीखा और
- 24:43ज़िन्दगी से सीखा मेरा बाप कोई इतना धनी नहीं था, बस इतना सा था।
- 24:51उसने जरूरतें पूरी की, थोड़ा सा जोड़ा।
- 24:56थोड़ा सा जोड़ा और सर्वश्रेष्ठ उदाहरण मानता हूँ मैं बाकी खुद
- 25:08कमा लेंगे कोई टुंडे पांगे लूले लंगड़े अंधे।
- 25:16नहीं पैदा किया है सब ठीक ठाक पैदा हुए हैं पूत कपूत तो क्यों
- 25:21धन संचय पूत सपूत तो क्यों धन संचय पुत्र के लिए भी क्या जोड़ना
- 25:30होता है? फिर हम ही जोड़ के चले जाएंगे।
- 25:36तो उनकी देह आरामपरस्त हो जाएगी, वह तरक्की नहीं कर पाएंगे।
- 25:42उन्हें मौका दो जो फसलें तूफानों से टकराती नहीं, उनमें हुनर नहीं
- 25:52आया करता। उनमें फल नहीं आया करता।
- 25:57फल उसी फसल को लगता है जो तूफानों से टकराती है।
- 26:03बारिशों और ओलों के बीच में। ओलावृष्टि होने के बावजूद भी उनसे
- 26:09लड़ती है, बचती है, अपना जीवन बचाती है।
- 26:27परमात्मा से परमात्मा से दुखद पीरियड की मांग करना बड़े उलट
- 26:42लगेंगे। मेरे शब्द।
- 26:46परमात्मा से मांग करना कि परमात्मा हमें थोड़ा थोड़ा दुख दे
- 26:50दिया कर, इतना भी नहीं क्या हम लाचार हो जाये और इतना कम भी
- 27:01नहीं। कि हम आलस में हो जाये, थोड़ा
- 27:07थोड़ा दुख दिया कर दुख बड़ी कीमती चीज़ दुख तुम्हारे अहंकार को नष्ट
- 27:14करते है। और दुःख तुम्हे अलसी नहीं करने
- 27:21देते, मांग कर दुःख लिया करो, तुम तो दुःख से भागते हो, इसीलिए मैं
- 27:29कहता हूँ तुम्हे जीन का असली खाना है जब बात से से।
- 27:38क्यों? तुम कहोगे पहले से ही दुख बहुत
- 27:42है, यही तो मैं कह रहा हूँ वो जो पहले से दुख है वो मैन मेड है,
- 27:49गॉड मेड नहीं है, दुख है कि आज 10,000 जैप करना था।
- 28:00आज तो सो हो पाया, एक माला हो पाई ये दुख है तुम्हें जबकि माला
- 28:05फेरनी जरूरी है ही नहीं, व्यर्थ की बातों पर तुम दुखी हो जाते हो।
- 28:20व्यर्थ की बातों को छोड़ दो, उपवास रखना बंद कर दो, कोई
- 28:30आवश्यकता नहीं है। इसकी मशीनरी लगातार भीतर की चलती
- 28:36रहे। अब हार्ट को कहाँ आराम मिलता है?
- 28:40और अगर जीस दिन हर्ड ने आराम कर लिया उस दिन बस तुम आराम कर लोगे।
- 28:47भीतर की सारी प्रणाली शनि, शनि निरंतर चलती रहे।
- 28:59जब आराम कर रहे है अपने आप आराम कर लोगे।
- 29:02प्रकृति ने ये व्यवस्था की हुई है।
- 29:07जब तुम्हारे शरीर को आराम की जरूरत पड़ेगी, प्रकृति तुम्हें
- 29:12सुस्ती दे देगी और कहेगी तुम्हें इंकित करेगी, तब थोड़ा आराम करो।
- 29:20दिन भर के थके हारे प्रकृति तुम्हें कहे कि सो जाओ तुम शक्ति
- 29:31विहीन हो गए हो तो प्रकृति कहे कि खाना खा लो, ईंधन ले लो थोड़ा।
- 29:39प्रकृति के भीतर ये मापदंड पहले से तय है।
- 29:44सारे पैमाने लगा दिए गए हैं। तुम्हें व्यर्थ में चिंता लेने की
- 29:49जरूरत नहीं है। तुम्हारा काम बड़ा डमांड होल है।
- 29:56तुम्हें ज़िन्दगी का सलीका नहीं पता इसलिए जो तज़र्बेकार है
- 30:04तज़र्बेकार कौन? जो ज़िन्दगी से शिकायत करता है
- 30:12उसकी तो बात मत मानना है। जो जिंदगी को प्रेम से जीता है और
- 30:21नाचता है और कूदता है और तुम देखते हो किसके पास है तो कुछ है,
- 30:29फिर भी ये खुश है। और तुम वैसी ज़िन्दगी तलाशते हो,
- 30:40उसको गुरु बनाना, उससे पूछना कि बताओ हमें जीने का ढंग, क्योंकि
- 30:45तुम सुखी हो सुख को जीवन के जीने का ढंग बना लेना, जो पहले से ही
- 30:53रो रहा है। शिकायतों से भरा पड़ा है और
- 31:06तुम्हारी शिकायतें भी बड़ी अटपटी। हैं।
- 31:11शिकायतें ये हैं कि बाल घोंघराले क्यों नहीं हो रहे हैं?
- 31:16शिकायतें ये हैं कि इस छोटी उम्र में बाल से फायदे क्यों आ गए?
- 31:23सिर के बाल क्यों उड़ गए? मैं गंजा क्यों हो गया ये छोटी
- 31:28छोटी शिकायतें? जो ज़िन्दगी को आनंद से जीता उसको
- 31:40गुरु मान लेना, उससे पूछना कि तुम्हारी आनंद मयी अवस्था का राज़
- 31:49क्या है? बस कहीं और जाने की जरूरत नहीं।
- 31:54जो? वित्तीय रस को किये।
- 31:56है। उसको गुरु बना लेना।
- 32:00सीधा सीधा लक्षण तुम्हें बताये। जो अभी दुखी है जो।
- 32:06अभी अभाव से ग्रस्त है। उसको गुर मत बनाना जो शिकायत
- 32:20करता। है।
- 32:21दिन भर रात उसको गुर मत बनाना, जो अहो भाव में है हर वक्त।
- 32:30उसे गुरु मान लेना। उसको जीने का तरीका।
- 32:36फिर उससे राज़ पूछना। वे राज़ बताए करते हैं।
- 32:47कृत कर। नाम जप नाम जप क्या है?
- 32:55बाबा के इन अर्थों। को जितना मिसयूज तुमने किया।
- 33:00और गलत एक्सप्लेन जिसने तुमने किया उतना किसी शब्द को नहीं किया
- 33:07नाम। जपों का मत लो।
- 33:10उसकी। कभी कभी याद आ।
- 33:12एक है स्वता एक है। जब तुम ज्यादा दुखी।
- 33:19होगे तो उसकी याद आएगी हे भगवान। ज़िन्दगी में इतना दुख?
- 33:26है तो याद आएगी तुमने करना नहीं। सबसे बेकार दोहा।
- 33:35अगर मुझे लगता है। तो यही रखता है दुख।
- 33:40में सुमरण सब करें। सुख में करें ना कोई देखिये जो
- 33:45बात। मेरे चलने में बाधा।
- 33:48पहुंचाएगी मैं? उस अड़चन को?
- 33:52बौहारी से साफ करूँगा वो शब्द किसके हैं ये जाने बगैर?
- 34:00वो कृष्ण के हैं कबीर। के हैं।
- 34:03नानक। के हैं या किसके?
- 34:05हैं। उस वक्त के परिस्थिति।
- 34:09के अनुसार बोले होंगे आज गैर जरूरी हो गए।
- 34:19देखिये तुम दौड़ लगाते। हो उस अवस्था में जबकि तुम पूरे
- 34:27तंदुरुस्त हो। और अगर तुम्हें अभी।
- 34:31अटैक आया। हो?
- 34:37फिर तुम दौड़ लगाने। लग जाओ तो डॉक्टर क्या कहेगा?
- 34:40नहीं नहीं बेड रेस्ट। अभी बेड।
- 34:47रेस्ट करो सर्कमस्टैंस बदल गया परिस्थितियों के हिसाब से चलो।
- 34:56तो अगर कबीर का। दोहा आज मेरे आड़े आ रहा है तो
- 35:02मैं। इसको भी गुहार दूंगा।
- 35:07दुख में सुमरण सब। करे सुख काहे को सुख में करे न
- 35:11कोई। सुख में सुमरण।
- 35:16जो? करे।
- 35:17दुख काहे का? है।
- 35:22सबसे व्यर्थ दोहा। मुझे कबीर का यही लगता है।
- 35:28इसने हमें दौड़ना सिखा। दिया।
- 35:35इसका अर्थ ये है। कि।
- 35:38दुःख में तुम चिल्लाते। हो हे परमात्मा हमदादकर सुख।
- 35:44में तुम नहीं। स्मरण नहीं करते और।
- 35:49अगर तुम सुख में। स्मरण करोगे तो दुख होगा ही नहीं।
- 35:53बस यही गलत है। कबीर ने कुछ और।
- 36:00कहा था तुमने कुछ और समझ लिया? कबीर के इस दोहे को मैं गलत नहीं
- 36:11कहता, कबीर के इस दोहे के तुमने जो अर्थ किया, उसको गलत कहता हूँ।
- 36:22दुःख में तो सहजता। से तुम रहोगे चीख निकलेगी वो
- 36:27स्वभावी है बिल्कुल उसी तरह से सुख में भी अगर धन्यवाद निकले।
- 36:37तो वह स्मरण। बिल्कुल सही है।
- 36:42अब समझे? मेरी बात को तुम गैर जरूरी वक्त।
- 36:46पर माला लेके बैठ जाते हो, रिश्वत की तरह परमात्मा को नाम।
- 36:54और तुम अंतकारी। हो जा तो देखो तुमने हमें जन्म
- 36:57दिया। जीने के साधन दिए।
- 36:59हमने तुम्हारा नाम दिया। यह दोहा अगर।
- 37:08तुम अर्थ गलत कर गए तो तुम्हें अहंकारी बना देगा।
- 37:15और गलत राह पर। ले जाएगा और आज सारी दुनिया इसे
- 37:18गलत राह पे पड़ी। जो?
- 37:21जिसका पुजारी है। उसका नाम जप रहा है रिश्वत की तरह
- 37:27के। तुमने मुझे जीवन दिया।
- 37:29जीने के साधन दिए मैं तुम्हारा नाम देके।
- 37:35तुम्हारा दिया हुआ वापस। से लौटाता हूँ।
- 37:40तो? तुम अहंकारी हो जाओगे।
- 37:42तुमने मुझे जीवन दिया, जीने के साधन दिए, हमने भी तो तुम्हारा
- 37:45नाम लिया तो? बाजी बरप में डाल।
- 37:49दी तुमने? इससे तुम अहंकारी हो।
- 37:55जाओगे? नाम कैसे जपना है?
- 38:02अब इसको अच्छी तरह से समझ लेना क्योंकि सारी दुनिया इसी भ्रम के
- 38:06अंदर खोई हुई है और इसीलिए दुखी है।
- 38:13जैसे दर्द में। चीख निकलती है, मैं चुटकी काट रहा
- 38:17हूँ तुम्हारे। और तुम चिल्लाओ, चीखो।
- 38:25ऊंचे। से बोलो मर के।
- 38:26रे माँ। ऐसे ही सुख में।
- 38:33तुम्हारी आत्मा के भीतर से धन्यवाद की पुकारा।
- 38:38हे प्रभु हे रहमान करीम तेरी अनायतों का?
- 38:50कोई बार बार। तू रहमो करीम।
- 39:03तुने इतनी इनायत? बरसाई है।
- 39:10कि मेरे हृदय में। तस्लीमियत उतर आई है।
- 39:15मैं तृप्त हूँ। मैं सटिस्फाई हूँ।
- 39:19तेरा? धन्यवाद।
- 39:21अगर उस चीख की तरह धन्यवाद निकले भीतर से तो वह है सिमरन।
- 39:30सिमरन की परिभाषा मैंने। चार अक्षरों में देरी।
- 39:34माला ले के मत। व्यर्थ समय को खराब कर समय बड़ा
- 39:39कीमती है और समय उतना ही होता है 24 घंटे का कभी दिन।
- 39:45बड़ा हो जाता है। कभी रात बड़ी हो जाती है।
- 39:54तुमने पूछा, पुत्र सुखी? जीवन जीने का।
- 40:00तरीका ये समझ लेना पहले कृत करो। अगर तुम कृत नहीं।
- 40:08करोगे? देखिए पहले मैं कहा।
- 40:12करता था 70,000 करोड़, वह तो गया अब।
- 40:19मैं कहता हूँ, मिस्टर। नायडू और अडानी जी और।
- 40:31बाकी भी लोग हैं। धीरे धीरे।
- 40:36नहीं, नहीं, हसो मत। मैं कुछ नहीं कर सकता।
- 40:41व्यक्ति के कर्म ही उसे डुबो देते हैं।
- 40:44मुझे कुछ करने की जरूरत भी नहीं। तो आज नहीं कल।
- 40:56वक्त। बदलता रहता।
- 40:59है। फिर हम पूछेंगे नायडू से साहब
- 41:09ज़रा ये बताना कि तुम जेल में किस केस के कारण थे?
- 41:15और क्या सेट्लमेंट हुआ? कि तुम जेल से।
- 41:19बाहर आ गए और। मुख्यमंत्री बन गए।
- 41:24क्या थी डील? क्या?
- 41:26था सेट्लमेंट और जेल में क्यों थे ये बता दो थोड़ा सा।
- 41:31और जीस से बाहर किस सेटलमेंट के कारण आय अधीन आय हो बता दो, बस अब
- 41:38दूसरा हिस्सा नायडू। और अडानी जी से तो सदा।
- 41:44ही हिस्सा मांगेंगे। क्यों तुमने करोड़ों लोगों का धन?
- 41:51अपने सिंतुक में जमा करना चाहो इसका जवाब।
- 41:55दे दो हमें सही। जिससे हमारी आत्मा तप हो जाए।
- 42:02क्या तुम्हें इस देश की भुखमरी? गरीबी दिखती नहीं थी कि
- 42:0580,00,00,000 लोगों को। दो वक्त का।
- 42:09भोजन दिया जा। रहा है वो इस योग्य नहीं।
- 42:14हमारे पास इतना रोजगार नहीं को स्वावलंबी बन सके।
- 42:20फिर इस 2 दिन अवस्था में तुमने। अपने ट्रंकों को क्यों?
- 42:25भरा। और उनसे पूछेंगे।
- 42:31जो यहाँ। का पैसा लेके जो।
- 42:32गरीबों का है, देखिये जो भी धन है समझ लो किसी अमीर ने, सत्ताधीश ने
- 42:40न्यायाधीश ने नहीं कमाया ये सिर्फ।
- 42:45कुर्सियों पर बैठा है। बिलकुल।
- 42:49न्यायाधीश को भी। रखता हूँ।
- 42:53क्योंकि। ये खर्च करने वाले।
- 42:56वो चुनाव आयोग को वो पार्लियामेंट वो असेंबली।
- 43:10ये सारे कर्मचारी। पॉलिसी वगैरह मॉनेटरी वगैरह।
- 43:19तो कुछ ज्यादा ही करता है। आम लोगों से इनको तो मैं।
- 43:24धन्यवाद देता। क्योंकि ये चौबीसों घंटे काम करते
- 43:30हैं। लेकिन जो लोग इदारे।
- 43:36हैं, जिनके पास सत्ता है, उन लोगों से पूछो मत ब्यूरोफ्रेट्स।
- 43:48गरीबों की खून पसीने। की कमाई ऊपर से।
- 43:54जलता हुआ 50। डिग्री का सूरज।
- 43:59पांव के नीचे से जलती हुई। जमीन निकलती हुई भड़ास और खेतों
- 44:04में हलचलाता हुआ किसान। उसकी कमीज पसीने।
- 44:12से गीली होकर चमड़ी से चपक जाती है।
- 44:19मैंने ऐसे किसान देखे। ये है खून पसीने की कमाई?
- 44:30उनके खून में से हाइड्रेटेड पसीना निकला, डिहाइड्रेशन हुआ और वह
- 44:41पसीना छिप कर गया। कपड़े के साथ।
- 44:46यह खून। पसीने की कमाई अगर कोई मुख्य।
- 44:54सेवक, प्रधान, सेवक, छोटा सेवक, मध्यम सेवक कोई कहे के हमने मेहनत
- 45:00की। वो गलती करता है।
- 45:07यह कमाई है उन खेतों। में उस।
- 45:11वक्त में जब तुम। एयर कंडीशनर रूम में दोपहर में सो
- 45:15रहे थे और साहेब विश्राम कर रहे थे।
- 45:20यह साहेब? ऊंची हवाओं में हवाई जहाजों में
- 45:24ऊपर की हवा खा रहे थे। तब यह किसान बेचारा।
- 45:31दुपहरी के सूरज में जगती हुई धरती।
- 45:38और हल। चला रहा था।
- 45:41और बार। बार प्यास लगती थी।
- 45:43वो क्षण मैंने देखे हैं और एक 2 दिन नहीं मुद्दतों तक देखें हैं।
- 45:503040 वर्ष तक देखें हैं लगातार। इसलिए किसानों से मैं।
- 45:58विशेष। संवेदनशीलता रखता हूँ मेरा मुँह
- 46:03है इनकी ईमानदार मेहनत के प्रति। और सबसे ज्यादा तंग।
- 46:15इस सरकार। ने किसानों को।
- 46:17किया है। बस तुम्हारी थोड़ी सी तुम्हारी
- 46:26थोड़ी सी मैप के अंदर। लकीर का इधर उधर कर देना लोगों के
- 46:35तकदीरों को बदल जाता है। इसलिए समझदार व्यक्ति को हमेशा
- 46:41गद्दी के ऊपर बैठाना जो समझदार भी हो और जो करनाबान भी हो, दोनों
- 46:48चीजें आवश्यक है। अकेला समझदारी काफी नहीं करुणाबान
- 46:53भी होना चाहिए, करुणा भी होनी चाहिए उसके भीतर।
- 47:02गर्त करो, नाम जपो। नाम तुम्हे बता दिया फिर बता।
- 47:09देता हूँ शार्ट में। जैसे मेरी।
- 47:12चुटकी भरने से तुम। चिल्लाओगे ऐसे ही परमात्मा का
- 47:16सुकराना अदाएं भीतर से तुम इतने सुखी अवस्था के अंदर।
- 47:21हाँ तो तुम्हारे ऊपर की तरफ उठ जाएं।
- 47:31परमात्मा का शुक्रगुजार करें। ला ला ला।
- 47:4113,00,000 लाख शुक्रगुजार? है।
- 47:51बस इतनी इबादत। हृदय के भीतर से उठी हुई
- 47:57पर्याप्त। है।
- 48:01चौबीसों घंटे तुम गिन। गिन कर माला करते हो और उसे तुम
- 48:06बैंकरों के अंदर जमा कर देते हो। इससे बड़ा पागलपन कभी धरती पे हुआ
- 48:12नहीं। इससे पहले पहली दफ़े व्यक्ति इतने
- 48:14पागलपन पे उतर आया है और यह। पागलपन रोज़ बढ़ता जाता।
- 48:19है। राम राम के बैंक।
- 48:24बने है। राधे राधे के बैंक बने है।
- 48:27पांच नामों के बैंक बने है। और यह ऐसी करेंसी है कि कहीं।
- 48:35भी नहीं चलते, न अमेरिका इसे लेता है, न चाइना इसे लेता है, न जापान
- 48:42लेता है, न फ्रॉम से लेता है, और जीस।
- 48:46दरबार की तुम बात? करते हो?
- 48:49वो वहाँ। है ही नहीं, जहाँ।
- 48:51का अता पता तुमने बता दिया? यह करेंसी कहीं नहीं।
- 48:57चलती, यह सड़ जाती है, बड़ी बड़ी तुम्हारी व्यर्थ की मेहनत बेकार
- 49:03हो गई है। तो मैंने कहा कहा।
- 49:09अपनी शक्ति को सार्थक चीजों पर लगाना।
- 49:17कृत्य करना यह सार्थक है। अगर थोड़ी सी ज्यादा कृत्य भी कर
- 49:21लो तो मसीबत के वक्त तुम्हें काम आएगा अगर मसीबत।
- 49:27तुम्हें ना पड़े। तो किसी पे नसीब आए उसकी सहायता
- 49:31कर देना। दूसरों का दर्द अपना।
- 49:38लेना किसी के। काम जो आए।
- 49:49उसे इम्सान। कहते हैं उसे इम्सान कहते हैं
- 50:03पराया। दर्द।
- 50:08अपनाये उसे इंसान कहते हैं उसे इंसान कहते हैं।
- 50:24किसी के काम जो। आए।
- 50:34वो शक्कत। ज्यादा भी हो जाए।
- 50:37तो कोई बात नहीं, जाब ज्यादा। ना करना जाब तो?
- 50:41करना ही मत। यह तो बेकार कि आज सुन लो लाख।
- 50:48वर्ष बाद मेरी बात। को सुन लेना यह वो।
- 50:55प्रयास है परिश्रम है। जो सदा ही व्यर्थ हो जाता है।
- 51:04कभी काम नहीं आता। न संसार में न भ्रमण दोनों लोगों।
- 51:13में दोनों जहानों। में नाम जब्त काम नहीं आता।
- 51:20बस इतना सा काम आता है। तुम्हें खुशी हुई, यह परमात्मा ने
- 51:25खुशी तुम्हें दी उसके लिए। धन्यवाद अपने आप।
- 51:30से भीतर से आएगा आत्मा, प्रसन्न होगी जप आत्मा दुखी होगी तो
- 51:37पुकार। और यह थी आरती।
- 51:44आरती उतारण मत कभी जब। अर्थ स्वर से दुखी।
- 51:49हो के तुम पुकार करो तुम कहाँ गए महाराष्ट्र कहीं?
- 51:54द्रौपदी ने आरती उतारी थी। जब सभी अवलंबन गिर गए तो द्रौपदी
- 52:03के भीतर से पुकार उठी थी। करो मत दे तुम कह गए महाराज।
- 52:14करो मत देरी दुख हरो द्वारका न शरण मैं तेरी इसे दौरान नहीं
- 52:20रिपीट नहीं करना एक बार। के भीतर से उठी।
- 52:25आवाज़ न वो बहरा है, न वो गोंगा है, न वो पागल है।
- 52:32ये बड़ा सेंसिटिव है। और उसके सारे अंग परजंग सही से
- 52:37काम करते हैं और कभी खराब भी नहीं होंगे।
- 52:40आज सच जुगाद सच है भी सच नानक और सही भी सच?
- 52:48एक बार घर। जा के अंत से कोने से पुकार आ
- 52:51जाए। बस एक बार।
- 52:57तो वह बहरा नहीं है। जो चढ़ मतलब मांग दे क्या बहरा
- 53:04हुआ खुला है। ए लाउडस्पीकर लगा के जो।
- 53:12लोगों की। नींदों को खराब करने वाले
- 53:15पापियों। तुम अपने घरों को।
- 53:20देखो कहीं ना। कहीं तुम्हें दर्द और।
- 53:24दुख मिलेगा मैं तुम्हें बता। देता हूँ कौन सा?
- 53:28दुख तुमने कमाया सुबह सुबह। किसी व्यक्ति।
- 53:34को ब्रह्म मुहूर्त में। जगा देना इससे बड़ा अपराध कोई है
- 53:37ये जो। तुमने नियम कायदे, कानून।
- 53:41बनाये कि 3:40 पे ऊपर से अमृत झड़ता है तो हम पागल हुए।
- 53:50ऐसा। कोई अमृत नहीं जड़ता।
- 53:523:40 पे। जीस।
- 53:58वेला में तुम कहो। कि यहाँ ऊपर से अमृत गरता है और
- 54:02तुम श्रद्धा के लिए। अमर हो जाते हो।
- 54:06कितने ब्रह्म मुहूर्त आए? और तुमने एक भी अमर देखा है।
- 54:17सत्य को प्रत्यक्ष नग्न। आँखों से देखो और कसो कसो मिट्टी
- 54:22के साथ क्या ये बात ठीक है? सत्य की कसबट्टी पर।
- 54:30कसना ही साइंटिफिक होता है। परमात्मा कहने का नाम मिल।
- 54:37जाएंगे, लेकिन साइंटिफिक नाम तुम्हें एक ही मिलेगा।
- 54:41हेच टू ओह पानी का नाम। परमात्मा कहने का।
- 54:52पानी के भी अनेक। नाम मिल जाएंगे।
- 54:55कोई नीर कहेगा? कोई आग।
- 54:57कहेगा कोई वाटर? कहेगा कोई जल्द?
- 55:01कहेगा, लेकिन साइंटिफिक भाषा कहेगी दो अणु।
- 55:08हाइड्रोजन की एक आणु ऑक्सीजन का एच टू?
- 55:17ये साइंटिफिक नाम है। बस जस्ट।
- 55:20फॉर रिकग्निशन। पहचान करने के लिए जैसे तुम्हारा
- 55:25नाम किसने रख दिया? तुम्हारा नाम ये नहीं है।
- 55:30तो फिर क्यों? रखा पहचान करने के।
- 55:31लिए अरे डब्बू अरे मुन्नू अरे टुन्नू, ये सिर्फ पहचान करने
- 55:43परमात्मा का। कोई नाम नहीं।
- 55:45जो आज तुम नामों के ऊपर झगड़ा करते हो?
- 55:48यह तुम्हारी मूडता है, वंड छको। पहले कृत्य करो फिर नाम जपो, फिर
- 56:07वंड छको। अगर।
- 56:11ज्यादा इकट्ठा हो जाए। किसी को जरूरत है उसको गांट दो
- 56:16सहायता करो सदा के लिए तुम यहाँ नहीं।
- 56:26कभी जीवन में मैं तुम्हें एक बात। कहूँगा।
- 56:32कभी सेठ बनने की। इच्छा मत करने की।
- 56:37जितना दुखी सेट होता है। उतना कोई भी नहीं होता।
- 56:42क्योंकि जितना कमाओगे उसकी। रखवाली चोर न लूट लें, डाका न पड़
- 56:48जाए। फिर सारी उम्र चौकीदारी।
- 56:52भी तुम्हें ही करनी पड़ेगी। उतासा कमाओ जितनी से तुम्हें
- 57:00जरूरत है। तुम्हारे बच्चे भी पल जाएं स्वयं
- 57:04इतना दीजिए तामे कोटो में समाये मैं भी भूखा न रहूँ साधु न भूखा
- 57:11जाए। साधु भूखा न जाए जितनी तुम्हारे।
- 57:16पास। गुंजाइश है उस वक्त उतनो से दो।
- 57:31वंड छको यह तीसरा। है।
- 57:37यह तो संसार की प्रक्रिया है। मैंने जो बताई इसको हृदय में उतार
- 57:42ले। कृत।
- 57:45करो सबसे। पहला नाम जपो उसका शुक्राण अदा
- 57:50करो अगर दुखी। हो तो पुकार लगाओ।
- 57:54गुहार लगाओ, वह सुनता है वह करीब से करीब है वह।
- 58:01सुनता है तुम्हारी बात? एक बार गुहार लगाओ।
- 58:07रटो मत। मन की व्यथा।
- 58:14एक बार बता दो, वह बहुत सेंसिटिव है, वह बहुत कर्णामान है।
- 58:20उसके सिर में दर्द ना करो। तुम्हारे बार बार अपने।
- 58:28सो के सिर। में दर्द होता है, मेरे पास माता
- 58:30आ जाती है, पहाड़ा वाली कहती। है।
- 58:34बाबा हाँ बेटे ये। बड़े परेशान करते है।
- 58:41कौन? ये जागरण करने वाले ये तुम्हें
- 58:45क्या कहते है? ये सोने ही नहीं देते।
- 58:49जब थोड़ी सी झपकी लगती है तो ऐसी चीख।
- 58:55मारते है। माँ पता नहीं क्या हो।
- 58:58गया। जब मैं वहाँ से भागती हूँ।
- 59:07आती हूँ जिसने पुकारा था और देखती हूँ सारी तरफ बस लोग रोशन।
- 59:14ही कर रहे हैं। जाके।
- 59:17देखती हूँ। तो बेसुरा व्यक्ति गा रहा होता
- 59:21है। देखती?
- 59:23हूँ तो? जी गार गए होते।
- 59:27हमारे यहाँ पर जी थे किसी। ने बरलाप सुना हो?
- 59:34तो हम रात को उसे। समय दे देते थे।
- 59:36अब देखो बरलाप का वक्त है। अब थोड़ी देर।
- 59:402 घंटे 4 घंटे। तुम वरला कर लो, दिन में तो लोग
- 59:44सुनेंगे नहीं। तो मैंने कहा बेटी मैं क्या करू?
- 59:56तो पहाड़ों वाली माता कहती आप बाप हो आप को ना कहूँगी अपना दर्द तो
- 1:00:01और किस्से कहूं मैंने कहा पुत्री। बिल्कुल मुझसे।
- 1:00:05कहो। लेकिन मैं।
- 1:00:08क्या करूँ मेरे? आगे जो बच्चे हैं वो मूड है, मूड
- 1:00:14है वो वो। प्रेमानंद।
- 1:00:17कैसे से है अब? मैं क्या करूँ?
- 1:00:19तुम जानते हो, प्रेमानंद कैसे? वो कहते हाँ, समझ गए तो।
- 1:00:27बस जा सो जा कानों। में रु।
- 1:00:32ठूस लिया। कर अरे बाबा घणी।
- 1:00:37दूर जाके डेरा। डाला पाडों में।
- 1:00:41मैदानों में तो ये। रोज़ ही टेंट।
- 1:00:45लगाए रखते हैं। वहाँ भी आवाज पहुँच जाती है या
- 1:00:48बड़े बड़े युंठ लगा देते हैं। तुम जिससे प्रेम करते हो।
- 1:00:57माँ से उसको भी चैन से सोने नहीं देते।
- 1:01:05ये तुम्हारे। देवी देवता सदा।
- 1:01:07ही मेरे आगे आके शिकायत करते हैं। बाबा ये भक्त नहीं सुनाई देते,
- 1:01:17मैंने कहा गोड ना मार कर इनका सर। मैं।
- 1:01:25अरे वाह भाई। ये 11 फुट का।
- 1:01:27गोठ ना किसके सिर में पड़ गया बिखर जाएगा कृत करो नाम जपो वण
- 1:01:39चको। संसार।
- 1:01:45का काम समाप्त हो। गया।
- 1:01:48तुम इसे आजमा के देखो, कृत्य। करो।
- 1:01:54बेईमानी से मत करो ऐसा। नहीं तुम्हारे पास कोई।
- 1:01:59नकल लेने आ गया तो उसे कहो कि। ₹500 दो।
- 1:02:05फिर जमीन। की फर्द मिलेंगे अन्यथा।
- 1:02:07नहीं मिलेंगे। मैंने पूछा।
- 1:02:13प्रकाश सिंह बादल से जब वो। बहुदा आया करते।
- 1:02:18थे आप इन पटवारियों? को पैसा नहीं देते।
- 1:02:22क्या? कहते देते हैं।
- 1:02:25मैंने कहा फिर? ये ₹500।
- 1:02:27₹200 ₹100 मांगते हैं इंतेकाल के ये क्यों मांगते हैं?
- 1:02:32कहते ये बेईमान है, मत दिया करो, मैंने कहा ये काम।
- 1:02:36नहीं करते कलम। छोड़ हड़ताल कर देते हैं।
- 1:02:42हड़ताल भी नहीं करते। हड़ताल भी करते तो भी काम खत्म।
- 1:02:49ये बड़े होशियार हैं ये हड़ताल। भी करते करते कलम छोड़ ये नाम
- 1:02:55नहीं आज निकाल लिया कंप्यूटर। नहीं चलाएंगे, कलम नहीं।
- 1:03:00चलाएंगे। इनका।
- 1:03:05इलाज किया था। प्रताप।
- 1:03:06सिंह करुण। सख्त ऑर्डर कर दो।
- 1:03:14न्यायालय को कि देखो बात ये है हमने कलेक्ट करना है धन।
- 1:03:21और हमने। बांटना है और किसे?
- 1:03:23देना है हमें पता है तुम इंटरफेरेंस से मत करना, जो काम
- 1:03:28नहीं करता, जो नालायक है, जो सुस्त है, जो लेज़ी है जो बेईमान
- 1:03:35है उसको हम निकालेंगे। तो न्यायालय सम जाएगा।
- 1:03:46कि सभी। को नहीं निकालेंगे।
- 1:03:49सिर्फ एहसान फरामोशों को निकालेंगे जब तुम्हें तनख्वाह
- 1:03:54मिलती है, तुम फर्द के 500 क्यों लेते हो?
- 1:03:57लेकिन मेरे कहने से कोई नहीं रुकेगा।
- 1:04:00क्यों मेरी ये बात वहाँ तक पहुंचेगी?
- 1:04:07अनजाने होंठों। पर ये पहचान है।
- 1:04:16पहचान गीत हैं अनजाने होंठों पर यह पहचान गीत हैं पहचान गीत हैं।
- 1:04:33कल तक जो। थे।
- 1:04:35बेगाने जन्मो के मित हैं, जन्मो के मित हैं, उम्मीदवारें।
- 1:04:51कल तक जो थे बेगाने जन्मों के मित हैं, क्या होगा कौन से पर में
- 1:05:06कोई? जाने।
- 1:05:11ताल मिले नदी के जल में। नदी।
- 1:05:17मिले सागर में सागर। मिले कौन?
- 1:05:23से जल में कोई जाने न और। ताल मिल नदी के जल में, सूरज को
- 1:05:35धरती तरसे धरती को चंद्रमा, धरती को चंद्रमा।
- 1:05:47सूरज को धरती तरसे, धरती को चंद्रमा, धरती को चंद्रमा, पानी
- 1:06:00में शीप जैसे। प्यासी हर आत्मा प्यासी हर आत्मा
- 1:06:12उम्मीदवारें पानी में सी वजह से प्यासी हर।
- 1:06:23आत्मा बोंध छिपी किस बादल में बोंध छिपी?
- 1:06:33किस? बादल में कोई जाने न।
- 1:06:39ओह रे ताल मिले नदी के जल में। नदी मिले सागर।
- 1:06:48में सागर मिले कौन से जल में कोई जाने ना।
- 1:06:58तालमेल नदी के जल में।