Latest / Baba ji Vijay Vats / 31/1/26 - बाबाजी को जब जहर दिया | झूठ और पाप का मनोविज्ञान: चेतन, अवचेतन, अचेतन | अतिशयोक्ति मत करो!
Transcript
- 0:19डॉ। श्यामा चरण बाबा जी सादर नमस्कार,
- 0:38आपके आज के प्रवचन में रही मन हीरा कब कहें?
- 0:52लाख टका है। मोल बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न
- 1:00बोलें बोल हमें गहरे शशो पंच में डाल दिया।
- 1:20आपकी बात भीतर उतर गयी, लेकिन अब आप थोड़ा सा कष्ट और कीजिये।
- 1:35इस दोहे को। थोड़ा और विस्तार दीजिए।
- 1:49मैंने अपने पहले प्रवचनों में भी तुम्हें कहा है।
- 1:58हमारे मन के चेतन अवचेतन, अचेतन, सामूहिक अचेतन तथा सामूहिक चेतन।
- 2:20ये पांच तलें जैसे ही कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, झूठ भारी होता है
- 2:36क्योंकि झूठ पाप में। जो जितना बड़ा झूठ होगा वो आपके
- 2:46गहरे अंत स्तर में छू जाएगा। इसका व्याख्यान मैंने पिछले
- 2:55प्रवचनों में आपको दिया है। जब मैं नेपाल का राजा हुआ करता
- 3:09शायद बहुत घोर पाप हो गया और भारी पत्थर ऊपर ऊपर नहीं बैठते।
- 3:21गहरी तलहकी में चले जाते हैं। जैसे भी आप झूठ बोलोगे तुम्हें
- 3:34पता नहीं जो तुम नहीं हो वो दिखलाना।
- 3:54पाप है, झूठ है, इसलिए मैं कहता हूँ दिखावा बंद करो फारमैती बन को
- 4:10प्रकृति की तरफ से खो। अगर गुलाब लाल रंग का है, वह लाल
- 4:17दिखेगा पत्ता हरे रंग का है हरा दिखेगा गुलाब काले रंग का है काला
- 4:29दिखेगा। गेंद आप पीले काहे पीला दिखेगा?
- 4:35प्रकृति झूठ नहीं बोलती बहुत बड़ा सब के आप पीला पति छड़ में पत्ता
- 4:47झड़ जाता है पीला हो जाता है। तो आपको पीला दिखाई पड़ता है बाहर
- 4:56के मौसम में नए पत्ते कोपले होके जाती है तरो ताजा हरी भरी दिखाई
- 5:07पड़ती है। प्रकृति झूठ नहीं बोलते।
- 5:16ध्यान से समय ना इसलिए शांत है तुम कहते हो, झूठ भी बोलता और
- 5:26शांत भी होता रहो। ये दोनों चीजें असंभव है।
- 5:31ये बिलकुल ऐसा है के मैं। उत्तर भी जाऊंगा और दक्षिण भी
- 5:37जाऊंगा। प्रकृति झूठ नहीं बोलती जैसा है,
- 5:44वैसा दर्श आती है, इसलिए शांत है। प्रकृति के पास जाने से तुम्हें
- 5:53बड़ी शांति महसूस होती है। तुम जब झूठ बोलते हो वो तुम्हारे
- 6:11अचेतन में उतर जाता है। इतना भरा होता है झूठ चेतन में
- 6:15ठहर नहीं पाता, अचेतन में उतर जाता, बहुत गहरा होता तो गहरे
- 6:22अचेतन में उतर जाता। बहुत पुरानी बात है मैं फिरोजपुर
- 6:36गया था फिरोजपुर छावनी। मेरी दोनों बहनें रहती थीं तो 1
- 6:44दिन मेरी छोटी बहन मुझे कहने लगी। उम्र में मेरे से बड़ी थी, लेकिन
- 6:55दूसरी बहन बड़ी थी कि पांच 4 दिन पहले भाई मुझे सारी रात।
- 7:06मैंने कहा बहना तुमने कोई पाप किया होगा पाप हाँ की आज मैंने
- 7:19कहा बस वही पाप तुम्हें सोने नहीं देते।
- 7:28पाप किया था कि मैंने अपनी सासों माँ के आगे झूठ बोला और वह सारा
- 7:38परिवार सरयू से ईमानदार लोगों का है।
- 7:45अध्यात्म में रुचि रखने वाले, प्राकृतिक रूप से चलने वाले
- 7:52प्रकृति ईमानदार है। सत्य झूठ नहीं बोलते तो बहना
- 8:02तुमने झूठ बोला होगा। और झूठ इतना गहरा बोला होगा
- 8:08तुम्हारे अंत समय चला गया, क्योंकि झूठ ज्यादा देर तक चेतन
- 8:14में ठहरता भरा होता है। अब चेतन में उतर जाता और भी
- 8:22ज्यादा गहरा होता है। तो अचेतन में उतर जाता।
- 8:29जितना गहरा झूठ हो लोगे, बड़ा पाप गहरे पत्थर की तरह ज्यादा गहरा
- 8:38उतर जाता। यही कारण है कि राजनीतिक लोग झूठ
- 8:46बोले चले जाते हैं और उन्हें पता नहीं चलता क्योंकि चेतन में झूठ
- 8:53ठहरते हैं। झूठ पाप है और पाप भूमि से भारी।
- 9:08जल से पतला ज्ञान है पाप भूमि से बाहर है क्रोध अगन से तेज है कलंक
- 9:22काजल से करें। सभी रिशों ने सबसे प्रथम
- 9:37आध्यात्मिकता में जाने के लिए जाने उस रस को पीने के लिए प्रथम
- 9:45सूत्र बताया सत्य। चाहे पतंजलि हो, महावीर हो, बताओ,
- 10:00याग्यबल को तुम्हारे सामने उदाहरण प्रकृति झूठ नहीं।
- 10:14बोलती झूठ नहीं दिखाती, जैसी होती है वैसी तुम्हें नजर आती है और
- 10:25अगर प्रकृति झूठ होरनी शुरू हो जाए क्योंकि होगी नहीं तो समझ
- 10:32लेना पर ला की। तो बहना कहने लगी।
- 10:39मैंने अपनी सास से बड़े अच्छे स्वभाव किये थे।
- 10:44प्रो। कार्यवर्ती झूठ बोला था, मैंने
- 10:51कहा सबसे बड़ा गुनाह हो गया। बस इसी कारण तुझे नहीं फिर मैं
- 10:57क्या करूँ? मैंने कहा एक ही हो पाए बैन उसके
- 11:09चरण पकड़ ले उसके पांव दबा फिर क्षमा मांग।
- 11:17फिर क्या मुझसे पाप हो गया? मैंने झूठ बोल दिया और उसका
- 11:22परिणाम मुझे सारी रात नींद का मूल्य देख के चुकाना पड़ा।
- 11:30उसने ऐसा ही किया। वह मुझे समितित है क्योंकि मैंने
- 11:42भगवान शंकर के दर्शन किए हैं, ऐसा उसे बता दिया था।
- 11:47हनुमान जी मुझे मिले ऐसा मैंने बता दिया था और किसी को नहीं
- 11:55बताया मैंने। किसी रूप में समझो, लेकिन जैसा
- 12:13मैंने उस वक्त देखा वैसा बोल दिया।
- 12:26बड़ा बुराइ न करे बड़ा न बोले बोल तुम्हे ठीक से समझ नहीं आया पुत्र
- 12:34अब ठीक तरह से समझ लो बड़ा बड़ाई न करे, क्या कृष्ण न कहे?
- 12:45मेरी शरण में आजा मैं तुझे पाप से मुक्त कर दूंगा कृष्ण बड़े क्या
- 12:53बड़े को पढ़ाई करने का अधिकार नहीं है, वो पाप है नहीं, ऐसा तो
- 12:58नहीं कहते। रहीम ऐसा नहीं कहते क्या जिसने
- 13:08कतल किया झूठ बोला, क्या वो वो ये कहे कि नहीं?
- 13:20नहीं, मैंने तो सत्य बोला है। बड़ा बड़ाई ना करें, बड़ा न बोलें
- 13:36बोल रही मा नहीं रा कब कहें लाक टका है।
- 13:42मो। अब निष्कर्ष रूप में सुनें अति
- 13:54शोकती मत करो, जैसे हो प्रामाणिक, वैसे ही खड़े हो जाओ।
- 14:11अतिशय उक्ति न करो अतिशय उक्त अतिशय उक्ति न करो हो तो तुम झूठ
- 14:23है कहते हो। मेरे जितना सत्यवादी हरिश्चंद्र
- 14:29कोई है नहीं, यह अतिशय से हो गई। इससे क्या होगा?
- 14:38क्योंकि झूठ है तुम्हारे चेतन में ज्यादा देर ठहरेगा नहीं भरा है।
- 14:48अब चेतन में उतर जाएगा और ज्यादा भारी है तो अचेतन में उतर जाएगा
- 14:54और ज्यादा भारी है तो अचेतन की कला टीम में बैठ जाएगा और जैसे ही
- 15:01कोई चीज़ अचेतन की गहराई में उतरी।
- 15:05उतने ही तुम दुखी हुए। अगर आज दुनिया दुखी है तो मात्र
- 15:13इसीलिए दुखी है कि उसने पाप इतने घने कर दिए हैं जो उसे ये भी नहीं
- 15:18पता कि यह पाप होते हैं। क्या पतंजलि भगवान बुद्ध का चेहरा
- 15:35देखा? आपने महावीर का चेहरा देखा?
- 15:39आपने कितना कान सहज प्रकृति की तरह खिला हुआ है?
- 15:59वो दुखी नहीं लगते क्योंकि दुखी नहीं होते।
- 16:07मीरा के चेहरे का लावण्या आपने देखा नहीं होगा।
- 16:23यह लाबानी क्या था? आज क्यों बुझे बुझे चेहरे हैं
- 16:27हसीनाओं के एक मात्र जो संतो ने सबसे पहला स्वरूप में तुम्हें थीम
- 16:38बताया था सत्य। वो आज तुम्हें मानने से इंकार
- 16:42करती है। ठीक कहते हैं, अनिरुद्ध आचार्य कि
- 17:00अगर एक लड़की चार पांच जगह मुँह मार के आती है।
- 17:07और अपने पति देव के आगे सती सावित्री बन जाती है।
- 17:12ये घोर पाप है, पाप ये नहीं के तुम तीन चार जगह के मुँह मर लेते
- 17:21हो, पाप ये है के तुमने झूठ बोला। कि मैं तो बोतल हूँ ना भेदी ना
- 17:34भेदी ये बंद बोतलें तनू पीने के नसीबा वाले पाप ये है कि तुमने
- 17:45झूठ बोला। और झूठ पाप बहुत है और पाप जितना
- 17:55भारी हो उतना गहरे में चला जायेगा और जीतने गहरे में पाप चला
- 18:00जायेगा, उतना ही तुम्हे ज्यादा दुःख ही कर देगा।
- 18:07सीधी सीधी परिभाषा समझलो मैं बड़े सरल अंदाज में बोल रहा हूँ, अगर
- 18:19कोई व्यक्ति कृष्ण जैसा व्यक्ति तुम्हें कहे कि नहीं मैं तुम्हारे
- 18:26चरणों का यह झूठ है। वह सारी सृष्टि का स्वामी झूठ
- 18:36बोलता है। यह बात ही गलत है।
- 18:44बड़े को बुराइ करनी ही चाहिए, अन्यथा जो अंधे बहरे घूम गए।
- 18:53मूरख लोग समझ कैसे पाएंगे, फिर दिशा दिखायेगा कौन?
- 19:02अगर संत ये न कहे के मैं संत हो गया।
- 19:13तो फिर तुम रास्ता मांगोगे से फिर कौन तुम्हें बताएगा कि तुम्हारे
- 19:24ही झूठों के कारण तुमने इतने गहरे झूठ बोले क्यों तुम्हारी तलाहटी
- 19:31में बैठ गए और ये तलाहटी में बैठा हुआ झूठ?
- 19:35आग है यह आग का गोरा तुम्हारे भीतर न जाने कितनी कितनी मात्रा
- 19:42में बैठा हुआ है और फिर तुम सुख की कामना करते हो, पीते हो जहर
- 19:50उम्मीद रखते हो जीवन की? मैंने मेरे एक शिष्य को निकाल
- 19:58दिया था, यद्यपि उसने मुझे नहर में से बाहर निकाला था।
- 20:06शायद वो आयुक्त किसी गुमान में फिरता होगा।
- 20:12कि मैंने बाबा जी पर इतना उपकार किया और बाबा जी ने तो मुझे बाहर
- 20:17निकाल दिया, मुझे क्या मेरे परिवार को बाहर निकाल दिया?
- 20:26सिर्फ इसी पर से मुझे दो लोगों ने जहर दे दिया था।
- 20:40चलो दोनों ने मिल बैठकर छः लोगों ने मिल बैठकर योजना बनाई।
- 20:54कि कोई एक जहर दे देगा, लेकिन गलती से उसी दिन दो लोगों ने जहर
- 20:59दे दिया। गलती से दो लोगों ने जहर दे दी।
- 21:08जहर की मात्रा ज्यादा हो गई और मैंने आपसे एक बात बताई कि मेरा।
- 21:17जब मैं चलता था, मेरे हाथों से ऐसा लगता था कौन बाहर निकल जाएगा?
- 21:25हेमोग्लोबिन की मात्रा इतनी ज्यादा थी, एक दम से हेमोग्लोबिन
- 21:35घटने लगा। 171617 से घटकर 7000 मेरे हाथ
- 21:49पांव कपड़े लगे यह एनलाइटनमेंट के बाद की घटना।
- 22:07शरीर शरीर तो शरीर के हिसाब से काम करेगा।
- 22:12यह तो प्रकृति के नियमों से चलेगा।
- 22:18सारा शरीर गड़बड़ा गया और शरीर के साथ साथ क्योंकि।
- 22:24साउंड बॉडी में ही साउंड बनते रहते है।
- 22:26दिमाग भी गड़बड़ा गया। ये सारा तंत्र कंपनी लगा।
- 22:35जहर के कारण से मुझे कोई पता नहीं चला।
- 22:41क्या हुआ? क्योंकि जब सारे तंत्र एक दूसरे
- 22:50से संबंध विच्छेद कर रही हूँ तो पता कौन करें?
- 22:58डगमगाने लगा, बुरी हालत हो गई। बहुत से डॉक्टर्स को दिखाएं।
- 23:11नहीं समझा। उससे पहले मुझे पता चल गया था कि
- 23:17तुम्हारा खून का हीमोग्लोबिन साथ आ गया है।
- 23:21यहाँ दीपो मेडिकोज होता था। दीपक कुमार उसने मुझे कहा शर्मा
- 23:26जी क्या हो गया? हीमोग्लोबिन सेवेन आप तो सर्वोपरि
- 23:35से आपके हाथों से खून निकलता था एमपी चक्र आया मैंने कहा फिर से
- 23:47खून लेके जा। कहीं गलती से खून चेक हो गया खून
- 23:53फिर से ले जा के तनी सात बहुत कोशिश की रक्तवर्धक डाइट ली
- 24:06ध्वन्या ली। डेक्सो रेंज हेफता ग्लोबल लिवोस
- 24:11इन न्यू हाइपरटेक्स्ट वगैरह के इन्जेक्शन लेकिन खून झाक के घटता
- 24:21ही जा रहा था। तीन चार के ऊपर आ गया और शायद
- 24:29मुझे थोड़ा थोड़ा याद आता है, शायद दो पर भी रह गया।
- 24:32उनको बड़ी बात है। खास काम सुन कंपन बना हुआ।
- 24:45बुद्धि शून्य सोच ज़रा भी है सारा शरीर कपड़ा है बहुत बार की मैंने
- 25:00सोचा। अब पता चले ना क्योंकि तंत्र काम
- 25:07नहीं कर रहा है। किसी से जुड़ाव नहीं हो रहा।
- 25:19किसी से पूछूं तो क्या पूछूं कैसे पूछूं?
- 25:25शरीर के भीतर ही दुख का बड़ा जैसे किसी जीवंत व्यक्ति को अँधेर
- 25:33कोठरी में बंद कर दिया हो तो उसका जीवन खत्म नहीं होता, बस उसको
- 25:38बाहर का उजाला दिखाई नहीं पड़ता। गहन गुफा में उसे डकैत दिया गया।
- 25:53आखिर में मैंने कहा छोड़ दो सिर को और कोई उपाय।
- 26:02और मैंने जैसे तैसे करके देखी है उस वक्त शरीर छोड़ना भी बड़ा
- 26:06मुश्किल हो जाता है। शरीर छोड़ दिया लेकिन गलती ये खा
- 26:14गया कि डगम गाया हुआ था शरीर नाभी क्षेत्र से मैंने को निकाला।
- 26:23और एस्ड ट्रैवलिंग पे निकल गया। यह वो घटना है मैंने शायद कभी
- 26:31नहीं बताई उसको इतना तो शायद बताया होगा कि हीमोग्लोबिन की
- 26:38मात्रा घट गई। शरीर से बाहर निकला तो बाबा जी से
- 26:57संपर्क कायम कर सका। उससे पहले शरीर के भीतर रहता हुआ
- 27:06मैं उस सुप्रीम। पावर से कनेक्टेड नहीं हो सकता
- 27:10था। यह एक विज्ञान है गहरा कभी वक्त
- 27:16मिला तो बताऊँगा कैसे शंकराचार्य शरीर को छोड़ देते थे।
- 27:24कैसे छी छ महीने तक। शरीर से बाहर रहा करते थे तो भाभी
- 27:36जी ने मुझे उपाय बताया ऐसा कर। मेरी दृष्टि से मैंने शरीर छोड़
- 27:54दिया था श्रद्धा के लिए लेकिन गलती से खा गया हर बड़ा हत में
- 28:02सहस्रार भी कहाँ सूजता है? वो ही जीस तरह से यात्रा पर जाया
- 28:17करता था। उसी यात्रा पर निकल गया और वो
- 28:19नाभिक यात्रा है। नागरिक की यात्रा कैसे नाभिक से
- 28:25बाहर है, तब दक्षिण मेरा संवाद हो गया।
- 28:32बाबा से मैंने पूछा है क्या है? बाबा ने बता दिया मैंने वो उपाय
- 28:41किया, बहुत जगह गया, मैं बहुत जगह गया।
- 28:56उस उपाय से में दूसरे दिन ठीक बड़े पढ़ाई ना करें।
- 29:11बड़े न बोलें बोल इसका सही अर्थ समझिए आप।
- 29:20झूठ वारा होता है, झूठ पाप है। हमारे सन्तों ने इसे लिखा और
- 29:27जितना बड़ा गहरा पाप होगा, उतना वारा होगा और भरा पाप हमारे चेतन
- 29:36से चेरता हुआ। अब चेतन यानी सबकॉन्शियस और अचेतन
- 29:41यानी अनकॉन्शियस के भीतर गहरे तलों पर बैठ जाता है।
- 29:55अंशु वर्मा, उससे पहले शिवदत्त द्वितीय।
- 30:05उनको उत्तराधिकार के रूप में उन्होंने गद्दी दे दी क्योंकि वे
- 30:10उनके मुख्य सिपहसालार थे। रोज़ तबियत खराब होती जा रही थी।
- 30:19शिवदेव द्वितीय ने 605 में। अंशु वर्मा को गद्दी सौंप दी।
- 30:25आप चलो 621 तक उनके ही काल में अंशु वर्मा के काल में नेपाल
- 30:34तिब्बत का आपसी संबंध बहुत ज्यादा प्रगाढ़ हुआ है।
- 30:41उस काल में मैंने बहुत घोर अपराध किया।
- 30:46राजवंश इसीलिए भी ठीक नहीं है क्योंकि ज्यादा देर एक व्यक्ति के
- 30:53हाथ में सत्ता नहीं होनी चाहिए। द्वितीय विश्व युद्ध के।
- 31:01वक्त में जब चार बार वहाँ का राष्ट्रपति रहा हुआ व्यक्ति और
- 31:13सारे समूह को कैबिनेट को समझाई कि इतनी देर तक एक राजा।
- 31:19लगातार नहीं निरंतरता नहीं बनी रहनी चाहिए तो उन्होंने संविधान
- 31:24में संशोधन करके दो बार से ज्यादा कोई व्यक्ति राष्ट्रपति आर्ट्स
- 31:32राष्ट्रपति नहीं रह पाएगा। बड़ी शानदार व्यवस्था थी।
- 31:41क्योंकि जब खून मुँह को लग जाता है तो वह व्यक्ति चाहे गरीब घर से
- 31:50भी आया हो, वह अपनी गलती को अपना मालिक आनी आपको समझना शुरू हो
- 31:56जाता है। वो भूल जाता है कि यह जनता का खून
- 32:03है और खून मुँह को लग जाता है। उससे वह तानाशाह बनना शुरू हो
- 32:11जाता है। पहली दफ़े किसी देश ने जबा सोच की
- 32:21दो बार से ज्यादा कोई राष्ट्रपति अन्ना बने फ्रेंकलिन डी रोजलेट।
- 32:32यह 1933 से लेकर 1945 तक जब दूसरा विश्व युद्ध चल रहा था तब महामंदी
- 32:42का बकत्था और अमेरिका को सुदृढ़ नेतृत्व की जरूरत थी।
- 32:51और लगातार राज़ करते करते कैबिनेट ने समझा कि अब इसको बदल देना
- 33:01चाहिए तो प्रथम बार समझ में आया कि ज्यादा राज़ करने से।
- 33:14जो हमारी स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता होती है वो प्रभावित हो
- 33:19जाती है, संभावित नेतृत्व क्षमता कमजोर होने लगती है और वह व्यक्ति
- 33:29आलसी हो जाता है। लेकिन जनता को तो आलसी राजा चाहिए
- 33:38या नहीं सब लोग समितार्थ दूसरा विश्व युद्ध रहा था और फ्रेंकलिन
- 33:47डी रोजवेल्ट को। उस महामंत्री के दौर से जो चार
- 33:56बार राष्ट्रपति बन चूके थे, कोई दूसरा राष्ट्रपति आ गया, तब से
- 34:05लेकर दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति कोई नहीं बन सकता।
- 34:10ध्यान रखिएगा हमारे तो वैसे भी 5 साल है 8 साल से ज्यादा हमारी
- 34:20वैज्ञानिक खोजो नवी मैंने अपनी टीम से पूछा वो कहते एक व्यक्ति।
- 34:275 साल से ज्यादा नेतृत्व कर नहीं सकता।
- 34:32फिर वो नए नए रास्ते तलाशेगा क्योंकि नेतृत्व क्षमता उसमें
- 34:38खत्म हो जाएगी। फिर वो झूठ के द्वारा नेतृत्व को
- 34:41पैदा करने की चेष्टा करेगा। इससे पहले उसको हटा देना चाहिए।
- 34:45देखिए मेरा एक सुझाव है एक बार से ज्यादा कोई उच्चस्त्र
- 35:03पद से ना हो सकता है दो बार भी नहीं, क्योंकि एक बार में वह अपनी
- 35:11पूरी क्षमता देखला देगा। दूसरे काल में तो वह अक्षम्य हो
- 35:18जाता है, उसे आदत हो जाती है। फिर फिर वह राज़ नहीं करता, फिर
- 35:27वह अधिकार करता है, समझा दी बात पहले वह राज़ करता था।
- 35:34नेतृत्व करता था। दूसरी पारी में वह अधिकार जताता
- 35:39है और तीसरी पारी में वह अधिकृत हो जाता है कि बस मैं ही हूँ।
- 35:49हमारी टीम ने यह रिसर्च किया। के 5 साल से ज्यादा किसी व्यक्ति
- 35:56को हिंदुस्तान में राज्य करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, क्योंकि
- 36:01लोकतंत्र में ऐसी व्यवस्था फिर वह व्यक्ति किसी तरह लोकतंत्र को
- 36:08तानाशाही में बदल दूँ, इसके सुराग खोजना शुरू करेगा।
- 36:14कौन से संविधान के किस पार्थ को खंडित किया जाए या संशोधित किया
- 36:24जाए। जीस पर कोई इलेक्शन कमीशन चुनाव
- 36:30भी कराए और गलती भी करे। पक्षपात भी करे, निर्णय में भी
- 36:36गलत और फिर भी उसके ऊपर कोई दोषारोपण न हो सके।
- 36:43कमाल की बात है भाई हम कतल भी करते हैं, वो कतल भी करते हैं।
- 36:52तो चर्चा नहीं होता, हम आहा भी भरते हैं तो हो जाते हैं, हम आहा
- 37:06भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम।
- 37:09वो कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
- 37:13प्रथम बार मेरी आत्मा जोड़ी गई। आह तीर लगा हो जैसे लोकतंत्र को
- 37:26आज विषैला तीर लगा है, ये किस दुष्ट की परिभाषा है?
- 37:34कतल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
- 37:38उसके ऊपर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए।
- 37:43नहीं नहीं ये गलत है। ये लोकतंत्र के विरुद्ध है।
- 37:48बिल्कुल देशवासियों झूठ जाना। मुझे पता है तुम्हारे ऊपर कायराना
- 37:58रेंजेस फेंकी गई, इसलिए तुम इतने ज्यादा मंदबुद्धि हो बात फिर
- 38:08बताऊँगा। उसको अभी हम छोड़ दे तो ज्यादा
- 38:14अच्छा रहेगा। बना कैसे हो सकता है हमारे पड़ोस
- 38:22में कोई वारदात हो जाए वो भी ज़माना था।
- 38:27जब दूसरे गांव में कुछ वारदात हो जाती तो सभी गांवों से लोग इकट्ठे
- 38:32हो जाते। भाई बताओ हम क्या सहायता करें?
- 38:35आपकी और आज पड़ोसी के घर में कोई डाका पड़ जाता है और कोई उठता
- 38:39नहीं वो चला ही चला जाता है और कोई उठता नहीं।
- 38:44क्या हुआ ये कुछ रेंजेस? दुष्परिणाम है किसी रेंज का, इसके
- 38:53ऊपर मैं व्याख्या बाद में करूँगा, थोड़ी सीमित हिसाब से करूँगा।
- 39:04बड़ा बड़ाई न करे। बड़े न बोले बोर्ड।
- 39:13अगर कोई पापी ऐसे शब्दों का उच्चारण कर ले, ऐसी सर्कस कर ले
- 39:28तुम्हारी शरण पकड़। हम रोज़ आरती नहीं करते, मैं तो
- 39:39पापी हूँ, तू तो बक्षी नहरा है, मुझे बक्श दे, मैं क्रोध ही खल
- 39:46कामी। लेकिन मानते नहीं।
- 39:50हम आरती करते हैं सर गोस से समझे न बात को कोई मुँह कूल होके आपके
- 40:07पांव पकड़ ले आप तो जी आपकी बड़ाई करने लग जाए आप तो जी बड़े महान,
- 40:11आप तो परमात्मा से भी बड़े महान। आपने तो परमात्मा का भी सृजन किया
- 40:19है, ये लोग तो पाग है लोग तो आपको समझते है आप तो भगवान को भी जाके
- 40:27उसका दरबार के अंदर बैठाओगे उसको। आप राजा नहीं आप महाराजा देराज
- 40:34हो, ऐसा कोई मुँह खोल बात करे तो यह पाप है, लेकिन संत व्यक्ति
- 40:51इनसे प्रभावित नहीं होता। संत जानता है अगर मैंने गलत मान
- 40:57लिया तो वह एक पाप है। वह अचेतन के गहरे तलों पर बैठ
- 41:05जाएगा और जिससे मुझे दुख पैदा होगा।
- 41:08इसलिए सारी दुनिया आज दुखी है। कार्यों से पता नहीं।
- 41:13बड़े बड़े मनोवैज्ञानिक साइकिएट्रिस्ट इतने दुखी हैं।
- 41:18कारण उन्हें पता नहीं कारण मात्र यही है।
- 41:22अंशु वर्मा ने एक ऐसा बात किया। घोर अपराध 617 18 के करीब का वक्त
- 41:34होगा। शायद जहाँ तक मुझे याद है।
- 41:44और वो इतना घोर पाप था। तब से लेकर 2025 में वह भुगता
- 41:53गया। कितने सालों के?
- 41:58करीब 1900 वर्ष क्षमा करना 1400 वर्ष बाद इतना भारी पाप था, वह
- 42:08ऊपर आया ही नहीं, ऊपर आई कैसे छोटे छोटे पाप भुगते तो वह ऊपर
- 42:15उठे। छोटे छोटे पाप भुगते हैं तो उनकी
- 42:18उनकी बारी आई वो तो बहुत गहरा है अगर मैं इस दिशा में ना होता और
- 42:25पापों को भुगतना शुरू ना करता, पापों को जलाना शुरू ना करता
- 42:30निरझरा शुरू ना होता तो वह पाप कभी भी ऊपर ना होता।
- 42:36और फिर आप कहते हो कि इतने जन्मो के इतने जन्मो के बाद परमात्मा
- 42:41मिला है, यह तो बहुत देर हो गई। थीम समझिये अतिशोक्ति ना करें
- 42:53अतिशोक्ति ना माने। अतिशयोक्ति अगर हो अगर मन में आ
- 43:04जाये तो उसको सिर्फ देखें, साक्षी भाव से वो टूट जायेगा।
- 43:13कोई व्यक्ति दुष्ट है आप शरण पकड़ लेते हो प्रभु आप तो तरण हारा
- 43:21इसलिए हम आज परमात्मा के द्वारा दंडतीय व्यक्तियों के चरण स्पष्ट
- 43:25कर रहे हैं। ये नहीं देखते यह व्यक्ति
- 43:31परमात्मा के द्वारा। प्रताड़ित है और परमात्मा ने इसे
- 43:37प्रताड़ित किया है तो इसके भीतर संस्कार अभी टूटे नहीं है।
- 43:43छूटते ही नहीं है का सिर मुँह को लगी हुई है।
- 43:48अगर एक बार एक अपराध हो जाए, फिर वह व्यक्ति अपराध ही बना रहे।
- 43:55फिर कोई संत आकर उसकी दिशा को मोड़ेगा।
- 44:01यह एक संस्कार बन जाता है पानी को अब बखेर दो एक फर्श के ऊपर जो
- 44:07लाइन बन गई। तो दूसरी बार पानी को बुखेर को
- 44:11उसी लाइन से जाएगा। क्रीब क्रीब मुष्ट प्रबहली क्यों?
- 44:16क्योंकि सब जो रेत गर्द था, जो ओब्स्टेकल बन रहा था, वो हट गए।
- 44:31थोड़ा और विस्तार कर लो ना तो किसी को आप जैसा वो है जैसा देख
- 44:46रहे हो। आप उससे ज़्यादा ऊंचे स्वर में
- 44:52उसे अधिष्ठित मत करो, अदिमान मत करो।
- 44:58होता तो दुष्ट है। तुम कहते हो तुमसे बड़ा तो दानी
- 45:05पर से कोई होता चोर है पता है 70,000 करोड़ के।
- 45:16भ्रष्टाचार में लिप्त जीस व्यक्ति की कैबिनेट में मंत्री बनाया जाता
- 45:24है। फिर दोनों की दशा क्या होगी?
- 45:28और फिर जीस देश पर वो दोनों राज़ कर रहे हैं।
- 45:32उसकी दशा क्या होगी? फिर प्रधानमंत्री ने तब गलत बोला
- 45:43या प्रधानमंत्री ने गलत तो नहीं बोला?
- 45:46भाई जो गलत बोला होता तो इस व्यक्ति ने जिसके ऊपर दोष लगाया
- 45:52गया, सामूहिक गंगा सना न किया होता और इस व्यक्ति ने।
- 45:58उस संस्था को ज्वॉइन न किया हो तो डर गया कि फाइल खुल जाए।
- 46:07जैसा आप जानते हो कि यह तो पंथी है, या तो गप्पी है।
- 46:23तो रहीम कहते हैं कि ऐसे व्यक्ति को कहो कि तू गप्पी है, चोर है तो
- 46:31इतना मदर को कहो कि तू चोर है, कहो कि तू झूठा है, तू बाकी है?
- 46:41तू दुष्ट है, तू राक्षस है, तू आदमखोर है, अतिशय उक्ति न करो
- 46:53अतिशय उक्त अगर कोई व्यक्ति दुष्ट है।
- 47:01उसके चरणों में बैठकर हाथ जोड़कर उसके प्रशंसा और अपने अंतर के
- 47:13सत्य तक पहुंचने का प्रथम मार्ग है सत्य।
- 47:23अपने अंतःस के सत तक पहुंचने का प्रथम स्टेप है सत्य मनसावाचा
- 47:32कर्मणा कोई पापी है। और तुम में उसे पापी कहने की
- 47:41हिम्मत नहीं है तो कृपया चुप हो जाओ, लेकिन उसे धर्म शरवणी
- 47:53परमात्मा न कहो यह अतिशोक है। तुमने जाना के वह झूठ हो तुमने
- 48:01जाना के वह झूठ बोलता है और तुम वचन कर रहे हो की आप तुम इस
- 48:14दुनिया के अधिष्ठात्र हो। यह झूठ तुमने ऐसा जाना नहीं कि
- 48:27उसने दुनिया को बनाया है, इसलिए तुम मानों भी मत और उसे कहो।
- 48:43झूठों की कतार समाप्त हो, ऋषियों का वह वचन सत्य हो।
- 48:54तमसो माँ ज्योतिर्गमय असतो माँ सत गमय असत्य से सत्य की ओर रिजाब
- 49:04गम। असत्य से सत्य आएगा।
- 49:08कैसे सत्य को अपना कर और सत्य बोलने से शुरू करोगे?
- 49:21जैसा देखोगे वैसा बोलोगे अगर बोलने की अभी हिम्मत नहीं है तो
- 49:26चुपत और रह सकते हो ना? चुप रह जाओ मैं ऐसे परिवारों को
- 49:32जानता हूँ जिनकी एक बहन, मेरी शिक्षा और दूसरी बहन बीजेपी की
- 49:41गौर समर्थक है, जबकि बीजेपी। क्या बताएं?
- 49:48आज तक ऐसी झूठ की संस्था कभी हुई नहीं पर मैं झूठ बोलता नहीं
- 49:56देखिए, मैंने कहा मैं 25,00,00,000 दूंगा, संत कभी झूठ
- 50:04नहीं बोलता यह उसका। प्रथम प्रमाण है।
- 50:13प्रथम लक्षण है उसका सत्य, अहिंसा, असत्य, ब्रह्मचर्य इसलिए
- 50:22मैं ब्रह्मचर्य का पाठ पढ़ाया तो ओशोवादी मेरे खिलाफ़ हो गया।
- 50:28सारा पक्ष मेरे खिलाफ़ खड़ा है, आज की दुनिया बहुत दिखवादी है।
- 50:38आज की दुनिया सभी सुखों को भोग लेना चाहती है।
- 50:44मेरे कहने के बावजूद। कि आप मात्र टेस्ट को चखने वाले
- 50:51टेस्ट बड्स जो जीबा पर लगे हैं और उसका स्वाद क्या है या टेस्ट बड्स
- 50:57से पता लगता है आप मात्र उसके दृष्ट कीर्ति बार समझाएं।
- 51:04अगर धृष्टा ना हो तो किसे पता चला के जीभ पे रखा हुआ पदार्थ खट्टा
- 51:11था या मीठा था या तीक्षण था या कट्टु था या नमकीन था ये देखा
- 51:23किसने? जब गौर से तुम समझने की चेष्टा
- 51:29करोगे तो तुम्हारे हृदय में बात उतरेगी।
- 51:38अतिशक्ति न करो जीस व्यक्ति को तुमने देखा के झूठ बोलता है।
- 51:52उसको मान प्रतिष्ठा मत दो, ये झूठ है।
- 51:57तुम भी झूठे हो गए। इसीलिए एक विशेष संस्था के साथ
- 52:04झूठे और अपराधी लोग जुड़ते ही चले गए और ये अच्छा भी है।
- 52:12तो कृष्ण इंतजार में थे। सभी गौरव इकट्ठे हो जाए, ज्यादा
- 52:24मशक्कत ना करनी पड़े। बस सुदर्शन चक्र एक बार में काम
- 52:30कर देगा और 17.5 दिन में काम हो गया।
- 52:42कल को जरूरत पड़ेगी। तो हम अपराधियों को एक जगह खड़े
- 52:53पाएंगे। दूर दूर तक खोज नहीं करनी पड़ेगी,
- 52:58भटकना नहीं पड़ेगा। सारे अपराधी एक जगह खड़े हो गए और
- 53:06आशीर्वाद मिलना चाहिए। ईडी को इन्कम टैक्स विभाग को और
- 53:15ऐसी संस्थाओं को इनाम मिलनी चाहिए, लेकिन वो भी गिरफ्त में
- 53:22क्योंकि आखिर किसी ने तो खरीदा होगा उन्हें।
- 53:28जो आगे से चुन चुन के लेके आए पापी व्यक्तियों को तथाकथित लोग
- 53:38जो लेके आए वो आचरण में शुद्ध होंगे क्या?
- 53:48जिन्होंने सही व्यक्तियों को जेलों में बंद कर दिया और सबूतों
- 53:54में पाया गया कि यह व्यक्ति तो बिल्कुल निर्दोष था तो क्या उस
- 54:00व्यक्ति ने जिसने जेल में बंद किया?
- 54:05वे खुद काफी रह के नहीं। आज दृष्टि और सृष्टि इतनी साफ और
- 54:17सुस्पष्ट हो गई है। कि बस आपको ज्यादा खंगालने की
- 54:22आवश्यकता नहीं है मूड लोगों की मूडता का कोई ठिकाना
- 54:36नहीं एक छोटी सी उदाहरण तुम्हारा जीवन परिवर्तन करने के लिए काफी।
- 54:52युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हो रहा था और राज्याभिषेक कौन करेंगे,
- 54:59कौन करेगा तिलक? प्रथम पूजनीय कौन है?
- 55:04सभी आए थे जैसे स्वयंवर में आते है।
- 55:10कि राजकुमारी हमारे गले में वरमाला डालेगी लेकिन राजकुमारी को
- 55:18जो भाता है उसके गले में माला डाल देती है।
- 55:28तो युद्ध के राजतिलक को देखने के लिए सभी योधा और राजा आए थे।
- 55:38कैसे बुद्धि देखते जानते परख्ते अंधी हो जाती है सब कुछ जानने के
- 55:44बाद एक शब्द हमें मूर्ख बनाया जाता है वह शब्द कह।
- 55:55कोइंसिडेंस बड़ा घातक शब्द है ये मैं।
- 56:04खा गई आसमान। कैसे कैसे जमाने ने मारे जमा ऐसे
- 56:22कै जमीन खा गई? आसमान कैसे कैसे?
- 56:42माँ शिशु पाल। भगवान कृष्ण का नाम सजेस्ट कर
- 56:53दिया गया। प्रोपोज़ कर दिया गया कि देखिये
- 57:00प्रथम दृष्टबया अगर हम देखे तो भगवान कृष्ण के अलावा।
- 57:08श्री कृष्ण के अलावा और कोई वह व्यक्ति ही सबसे ज्यादा अग्रगणी
- 57:19है वही प्रथम पूज्य है। इसलिए राज्य तिलक वहीं करेगा।
- 57:33कृष्ण उठे जैसे ही कृष्ण उठे, शिशु पाल उठ गया और कहानी सर्व
- 57:43विचत है जब उसकी बुआ ने सुनाया होगा शिशु पाल।
- 57:48कि बेटा तुझे सो गालियाँ माफ़ हैं, ये भगवान है इसको गालियाँ मत
- 57:58दे देना, लेकिन शिशुपाल ये जानते देखते सब उसकी माता ने कह दिया
- 58:06था। सब को गौण कर दिया और लग गई
- 58:10गालियां निकालने। अगर कृष्ण न कहेंगे सर्वधर्माण पर
- 58:22त्यामा में कम शरण पर। हम तो हम सर्व पापे, भव्य मोक्ष
- 58:33अगर ये घोषणा ना करेंगे तो अर्जुन को पता कैसे चलेगा?
- 58:45अगर कोई स्पेशलिस्ट डॉ। ये न कहेगा कि मैं गायनोकोलॉजिस्ट
- 58:51हूँ, मैं साइकोलॉजिस्ट हूँ, मैं बच्चों का स्पेशलिस्ट हूँ तो पता
- 59:08कैसे चलेगा? क्या ये अपराध है?
- 59:18क्या ये बड़ाई है? बड़े बड़ाई न करें, बड़े ही न
- 59:22बोलें। बोल क्या यह बड़ाई है?
- 59:28अगर किसी ने एमडी किया और बोर्ड पे लिखवा दिया एमडी अर्थ तो फिर
- 59:39रहीम क्या ये कहते हैं कि उसे लिखना नहीं चाहिए?
- 59:47फिर उसके पास किस दुखियारे का दर्द ठीक होगा?
- 59:54दुखी बातें, दुखी आदमी को बताने का ढंग है ये और हम तो हम सर्वाबा
- 1:00:01पे वह मोक्ष स्वामी माँ सोचा। बच्चों को मेरे पास ले आओ बच्चों
- 1:00:10का स्पेशलिस्ट निमोनिया प्लूरेसी ट्यूबरक्लोसिस इसका स्पेशलिस्ट।
- 1:00:27बड़ा बुराइ न करे। नहीं ये अर्थ ने इसका आपने विकास
- 1:00:34तीव्र कृति अर्थ गलत कर दिया। इसका मतलब सिर्फ ये था रहीम कहते
- 1:00:46हैं अतिशोपती मत करो। यूट्यूब के ऊपर लाखों चैनल हैं।
- 1:00:55आज प्रत्येक व्यक्ति दावा करता है।
- 1:01:02और कृष्ण एक बड़ी शानदार बात कहेंगे।
- 1:01:04मैं अक्सर बोलता हूँ के लक्षण देखो क्या इसके जीवन से भोग विदा
- 1:01:13हो गया क्या इसके जीवन से दौड़ विदा हो गयी?
- 1:01:19या कि अभी इसके जीवन में दौड़ बाकी है?
- 1:01:25क्या यह दौड़ता है धन के लिए, पदवी के लिए, पावर के लिए मान
- 1:01:33सम्मान के लिए क्या यह दौड़ता है? लक्षण देखो और अभूतपूर्व बात कहें
- 1:01:45कि कृष्ण ने ऐसी कौन सी बात है जो गीता में बताई नहीं?
- 1:01:49हम न समझ पाए या बात अलग है? अमानितुम दंभितुम अहिंसा
- 1:02:04शांतिराजजीवम आचार्य उपासनम् शौचम सैरियम अतम्भिनग्रह ये सारे
- 1:02:13लक्ष्मण बताये अगर ये हैं। तो फिर ज्यादा पूछ्ताछ करने की
- 1:02:21जरूरत नहीं क्योंकि यहाँ सब अंधों की दुनिया में अंधे हैं, रंगों के
- 1:02:27कितने पैर होते हैं, ये सभी अंधे जानते हैं और सभी अंधे जानते हैं
- 1:02:35के रंगों के इतने पैर होते हैं। हरे रंग के चार पैर होते हैं।
- 1:02:39दूसरा कहेगा नहीं, छह होते है तीसरा कहेगा नहीं आठ होते है
- 1:02:45तुम्हारी डिस्कशन शास्त्रों की मात्र इन रंगों के कितने पांव
- 1:02:50होते है? टाँगे होती है इससे ज्यादा नहीं?
- 1:03:06तो क्या झूठ बोल गए? बिलकुल नहीं रहीमान हीरा कब का
- 1:03:14है? लग तो का है।
- 1:03:20आइए हम रस के ऊपर आ जाए अतिशोक्ति न करो अपने आप को जान बूझ कर किसी
- 1:03:28के पांव में मत करो यह भी तुम्हारी कोई निहित स्वार्थ की
- 1:03:33निशानी तुम उससे कुछ चाहते हो? जो तुमने उसके चरण पकड़ लिए बड़े
- 1:03:44बड़ाई न करे। बड़े न बोले बोल जीतने तुम हो,
- 1:03:52उससे ऊंची बात न कहो। कृष्ण की चेतना 100% है तो कृष्ण
- 1:04:01कहते हैं मैं तुम्हारे भारी से भारी पाप को भी दूर कर दूंगा,
- 1:04:11ज़रा भी गलत नहीं है इसमें। तो मार्क किस को शक्ति मानोगे या
- 1:04:20कृष्ण को मार्क किस कहेंगे यह तो उपन्यास है दो मेरे किताबों को
- 1:04:31जिंदा बैठा हूँ। और सब चमत्कार देखने वाले
- 1:04:39इंशाल्लाह आज ही जिंदा है। कुछ मर गए, कुछ ही जिंदा है लेकिन
- 1:04:47उनके बाल बच्चे जिंदा है वो बताएंगे।
- 1:04:51बहुत से लोगों ने यहाँ इंटरव्यू ले।
- 1:04:56आपके पापा का मोटरसाइकिल गम हो गया था, हो गया था फिर बाबा ने
- 1:05:01बताया हाँ मिल गया, मिल गया दूसरी बार हो गया था, तीसरी बार हो गया
- 1:05:07था बताया बताया मिल गया मिल गया। किसी ने कहा शराब की बोतल मकाद
- 1:05:18सुन रहे हो आप क्या तुम्हें दिखाना जरूरी है लेकिन मेरी आड़
- 1:05:31में झूठे भी टप जाएंगे। हम कभी कभी टिकट नहीं लेके जाते
- 1:05:41थे, हमारा पास खत्म हो जाता था, लेकिन उसी दिन कुदरती से स्पेशल
- 1:05:50चेकिंग हो जाती थी तो पास की अवधि खत्म।
- 1:05:55तो एक व्यक्ति किसी का पास चेक करने के बहाने या टिकट्स चेक करने
- 1:06:01के बहाने वो वक्त लगा देता। हम बीच में से टपक जाते तो देखता
- 1:06:08हाँ ये स्टूडेंट है इसके पास तो पास होगा बस ठीक है ऐसे बहुत से
- 1:06:14लोग। यूट्यूब के चैनल के ऊपर आज टप
- 1:06:18जाते है और आप उनकी बातों को मान लेते हो लेकिन सोना जब आग पे
- 1:06:31थपाया जाता है तो और शुद्ध कुंदन बन जाता है।
- 1:06:35लेकिन ये लोग जब आग पे तो पाये जाएंगे तो वाष्प भी तो के उड़
- 1:06:39जाएंगे। बस यही फर्क है शुद्ध सोने में और
- 1:06:46जो आम धातु थोड़े से टेम्परेचर पे पिकल बन जाती है, बस यही फर्क है।
- 1:06:56तो कृष्ण उठे प्रथम, पूजनीय और गालियां न गालियां शुरू कर दी।
- 1:07:06शिशु पाल शिशु पाल क्या ताइये? ये प्रथम पूजनीय है।
- 1:07:13यह ग्वाला, ये लफंगा ये चोर दूसरों की हितियों का अपहरण करके
- 1:07:18ले जाता है, चोरी करता है, झूठ बोलता है, पाप कमाता है, रंग रह
- 1:07:25जाता है, रास रह जाता है ये ये प्रथम पूजनीय।
- 1:07:33पर कृष्ण बहुत सहजता से खड़े रहते हैं।
- 1:07:38कृष्ण कहते 90, 91, 98। निन्न्याण में वह गाली निकालता
- 1:07:53है, क्या कर लेगा तू मेरा? अरे एक गवाली क्या कर लेगा तू?
- 1:07:58कृष्ण कहते हो बस भोर मत बोलना उसकी बुआ के बेटा था।
- 1:08:11शिशुपाल और मत बोलना मेरी प्रतिज्ञा पूरी हो जाएगी, लेकिन
- 1:08:21शिशुपाल बोलता ही चला जाता है और सुदर्शन चक्र से।
- 1:08:28उसकी गर्दन उतर जाती है। यह सिर्फ एक सिम्बोलिक
- 1:08:33रेप्रेसेंटेशन्स हैं। इनके वास्तु का अर्थ मैं किसी
- 1:08:37वक्त बात नहीं करता। सर, जड़ से अलग हो जाता है।
- 1:08:51सभी ने ये देखा, सभी ने चमत्कार देखा इता बड़ा चमत्कार और वहाँ
- 1:09:02दुर्योधन भी था। कृष्ण कहते हैं।
- 1:09:11युद्ध तब होना चाहिए जब शांति के सब दरवाजे बंद हो जाएं।
- 1:09:20कृष्ण युधिष्ठिर से बोले भैया मैं जाऊंगा।
- 1:09:25संधि के लिए आखिरी प्रयास जरूरी है।
- 1:09:32ये दृष्टि बोले ठीक है और जब दरबार में पहुंचे तो 2 दिन कहते
- 1:09:43तुम पांच गांव की बात करते हो। 500 गांवों में पांच गांवों की
- 1:09:49बात करते हो। मैं सुई की नोक के बराबर इनको जगह
- 1:09:54देने वाला नहीं हो वाले, पकड़ लो इसको लेकिन कहाँ पकड़ में आती है?
- 1:10:07कृष्ण कभी पकड़े हुए हैं नैनंसेधन से शस्त्र प्राण नैनं बाहती बाब
- 1:10:13का मैं चैनम के लिए धन्यवाद सोच सकती हूँ भरोसा।
- 1:10:26भूल गए कि यही व्यक्ति जब उद्घाटन हो रहा था, युधिष्ठिर का राज्य
- 1:10:39अभिषेक हो रहा था। इन्द्रब्रस्थ का राजा बनने जा रहे
- 1:10:44थे, प्रथम पूज्य और राजलिक इन्होंने किया था।
- 1:10:50पर वहाँ क्या हाशिर हुआ था? शिशु पाल का वध हो गया था।
- 1:11:04ये घटना किसी वक्त आप मुझको याद करवाना मैं तुम्हारे सारे पर्दे
- 1:11:09उठाऊंगा। बड़ा सुंदर प्रसंग है।
- 1:11:17फिर वो आयाम नया खुल जाएगा और नया आयाम खुलने वाले खुलने के बाद
- 1:11:25कितनी दूर तक चला जाएगा ये पता नहीं।
- 1:11:31लगेंगी आग तो आएँगे घर, सभी जद में यहाँ सिर्फ अपना ही मकान
- 1:11:49थोड़े है सभी जलेंगे। तब मैं बात कर रहा था देखिये आज
- 1:12:08कोई माईका लाल कह सकता है। कि आने वाले वक्त में तुम्हारे दो
- 1:12:16बेटे होंगे और उनमें से एक बेटा लुधियाना में जा के मेरे लिए चेन
- 1:12:24दे के आता है। मैं इनके कवच बनाया करता हूँ।
- 1:12:26मैंने आज भी डाले हुए हैं, शायद आपने दिख नहीं रहे दिख रहे हैं ये
- 1:12:30पूरा। तो मैंने कहा अरे तू गलत गंध लेके
- 1:12:34आया है, कहता क्या इसमें क्या है? मैंने कहा ये मेरे काम का नहीं
- 1:12:39है। ये रंग मेरे को नहीं चाहिए।
- 1:12:50यह रेंजर्स को गंदी रेंजर्स में डाल देगा।
- 1:12:58कहते हो फिर क्या कर अब तो मैं ले आया, मैंने कहा तू ऐसा कर तेरे को
- 1:13:03रस्ता बताता हूँ वहाँ जाके ले आ, वो तो लुधियाना में है मैं जहाँ
- 1:13:11गिद्दड़बान में बैठा हूँ। ऐसा मुरझा, ऐसा मुरझा, ऐसा वही
- 1:13:17वही बच्चा, जिसके बाद को मैंने कहा था कि तेरे दो पुत्र होंगे ये
- 1:13:26बात बहुत बार हो गई। दो पुत्र हुए।
- 1:13:34लेकिन कोई आज कोई आज तुम कह सकते हो तुम्हारे पास एक शब्द हैं
- 1:13:42कोइंसिडेंट क्या सभी कोइंसिडेंट है सभी कितने, कितने?
- 1:13:55ये सभी को इंसिडेंट है और रोहित के परिवार से एक लड़की आई मेरी
- 1:14:13बेटी है, मुझे बेटा चाहिए, तू जा हो जाएगा बेटा।
- 1:14:18किसी माई के लाल में दम है इतना जो आज बोलते है और बेटा हुआ की
- 1:14:25नहीं हुआ किसी माई के लाल में दम है की तेरे दो पुत्र होंगे।
- 1:14:345 साल पहले भविष्यवाणी कर दे और उसके जुबान से निकला हुआ शब्द शत
- 1:14:43प्रतिशत से ही हो तो वह उस दुकान में गया।
- 1:14:49कहते मेरे पास तो नहीं है भाई इस रंग का मैंने कहा भूत के सामने।
- 1:14:54दराज के बीच में पड़ा है उसको क्या उतार लेगा उसको खुद नहीं पता
- 1:14:59मेरी दुकान में क्या चीज़ पड़ी है।
- 1:15:07अरे सभी लोग आज इत्तफाक से जिंदा है, तुम उनसे पूछ सकते हो और मान
- 1:15:16सकते हो। ऑल वर्क कोइंसिडेन्स ठीक है?
- 1:15:23मुझे ज़रा भी ऐतराज नहीं है। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता इसके
- 1:15:29सिवा ये मेरी जिंदगी और ज्यादा आराम से बीतती है।
- 1:15:35चार आदमी मैंने ब्लॉक कर दिए, मैं ज्यादा शांति से बचता हूँ, जो जान
- 1:15:40खा रहे थे, क्या करूँ मैं? अब ये प्रश्न कोई पूछने होगे
- 1:15:45अच्छा आप मुझे बताओ के मैं इस वक्त क्या कर रही हूँ?
- 1:15:51एक स्त्री है बंगलो से। मैंने देखा वो बाजी नहीं।
- 1:15:56मैंने कहा, देख तू ऐसा ऐसा स्वाद न पूछा कर तू रंग मत दिया कर
- 1:16:03संसार भर में यह चीज़ श्रद्धा के लिए कैन्टेंट के रूप में जाएगा और
- 1:16:08तुम्हारे ही बाल बच्चे कितनी आगे की पीढ़ियां इनसे सबक लेंगी।
- 1:16:13और यह सच्चा अनुभव है इसको बाँट लेने दे नहीं टली तो मैंने उसे
- 1:16:23ब्लॉक कर दिया, फिर मिन्नत करी, फिर अनब्लॉक किया, फिर फिर ब्लॉक
- 1:16:29कर दिया, नहीं टली। लेकिन अंत में पांच या छह बार देख
- 1:16:36के मैंने उसे परमानेंट ब्लॉक कर दिया।
- 1:16:41अब कोई छाती पीटे या कोई गुणगान करे या कोई आरती उतारे, मुझसे कोई
- 1:16:47फर्क नहीं पड़ता। जो व्यक्ति सारी दुनिया की आनंद
- 1:16:52और चैन छीन लेने में उतारू है, वह मेरा कुछ भी नहीं लगता।
- 1:17:03यहाँ लिहाज़ें भाई चारा मित्रता। बिलकुल नहीं पुगाई जाती।
- 1:17:10यहाँ देखा जाता है कि मेरे पास जो कंटेंट है वो सत्य है और वह मैं
- 1:17:16आने वाली पुश्तों के लिए यहाँ एक अमानत के रूप में रखकर जाना चाहता
- 1:17:25हूँ। तो मैंने तीन तीन जगह के ऊपर वह
- 1:17:28स्टोर कर लिया है जो व्यक्ति काल कर देता है।
- 1:17:37पता नहीं कौन होता है मैं वीडियो बनाता हूँ इधर कॉल आ जाता है।
- 1:17:42बिना देखे मैं चुपके से ब्लॉक कर देता हूँ।
- 1:17:45उसे कौन था, कौन है? कोई भी था, आने वाली पुश्तों की
- 1:17:50अमानत छीन रहा था। कोई भी था इसलिए आपसे भी कैद हूँ,
- 1:18:00इसे आदेश मत समझिएगा। अहंकार भी मत समझियेगा और
- 1:18:06समझियेगा तो फिर समझियेगा इधर कोई फर्क पड़ने को है नहीं, आप पहले
- 1:18:21आप पहले मैसेज कीजिये। क्योंकि मेरा कोई पता नहीं जैसे
- 1:18:32राम किशन कभी कभी रात 12:00 बजे उठ के टल्ली बजाने लग जाते है,
- 1:18:37कभी दोपहर को 2:00 बजे मेरे को कोई पता नहीं, मैं वीडियो का
- 1:18:40बनाना मेरे घरवालों तक को पता नहीं।
- 1:18:44बच्चे स्कूल से आ जाते हैं, नाच कूद लेते हैं और मैं अपनी वीडियो
- 1:18:48बनाता हूँ। बहुत बार आपने आवाजें सुनी होंगी,
- 1:18:53जरूरी नहीं है ब्रह्म मुहूर्त में मेरे लिए उठना मैं तो जब मौज आती
- 1:19:02है। बिना मूझ के जबरदस्ती से मैं कभी
- 1:19:12नहीं बोलता। जब मौज आती है तो वो भीतर की सारी
- 1:19:18प्रज्ञा, सारी शक्ति और सारी चेतना मेरी आवाज़ के संग संग होती
- 1:19:25है। बाहरों में ले चलूँ आओ हजूर आओ
- 1:19:48बहारों में ले चलूँ दिल झूम जाएं ऐसी।
- 1:20:07ले चलूँ और अजोर। बड़ा बड़ाई न करें, बड़े न बोलें,
- 1:20:22बहुत अतिशक्ति न करें अगर वह व्यक्ति जिसके चरण चुंबन आप कर
- 1:20:31रहे हो जिसकी मर्यादा के पुल बांध रहे हो।
- 1:20:40वह ये मृयादित है, ये तुम जानते नहीं और जानते हो, लेकिन बोलते
- 1:20:47नहीं तो भगवान का अवतार कह देना धोखा है, उसके साथ नहीं, आपके साथ
- 1:20:58धोखा है। और आपके भीतर यह झूठ अंत में चला
- 1:21:04जाएगा। अवचेतन से होता हुआ अचेतन में चला
- 1:21:09जाएगा और जितना गहरा झूठ तुम बोलते जाओगे उतना गहरा अचेतन में
- 1:21:14वह समाता जाएगा और तुम्हें बता दूं।
- 1:21:18जितना ज्यादा गहरा तुम झूठ को अचेतन में ले जाओगे उतने ही तुम
- 1:21:23दुखी हो जाओगे। अब क्या किया जाए?
- 1:21:27लोगों ने इतना झूठ बोल दिया कि भीतरी तल से लेकर ऊपर तक कंठ तक
- 1:21:34भर गया। इनकी आवाज में ज़रा भी आनंद का रस
- 1:21:40नहीं है गरजना है आनंद न झूठ में आनंद होता भी नहीं।
- 1:21:58और जब तुम अतिशोक्ति नहीं करोगे तो फिर तुम सत्य बनोगे, अगर कोई
- 1:22:08पापी है, हत्यारा है और तुम उसको। हत्यारा कहने की जुर्रत नहीं रख
- 1:22:15सकते। पापी कहने की जुर्रत नहीं रख सकते
- 1:22:19तो कृपया मौन रह जाइए। क्या बिगड़ता है गलत?
- 1:22:27अभी व्यक्त मत कीजिए, यह है मतलब इसका बड़ा बड़ाई न करें, कृष्ण
- 1:22:34कहेंगे? अन्य न्यास चिंतन तो माँ ऍम ये जन
- 1:22:39परिपास है ते श्याम नित्याभूक्ता नाम योग क्षीमां बाहम बिलकुल
- 1:22:45बोलेंगे क्या है आत्मशिला का है ये नार्सी सिम है क्या?
- 1:22:56यार, तुम चला गए हैं क्या? बड़ा बड़ाई न करें।
- 1:23:03बड़ा न बोले बोल तुमने इस धरती को मूड बना दिया है।
- 1:23:10जो कहते हैं मतमंद तुलसीदास हूँ, वे विचार सत्य बोल रहा है, मैं
- 1:23:15मतमंद हूँ, वास्तव में उसे कुछ नहीं आता और उसके दृष्टांत मिलते
- 1:23:21हैं, पर देखो तो सबसे बड़ा दृष्टांत ये है।
- 1:23:29जो रामायण उसने लिखी रामचरित मानस क्या उसे पता था कि ये सारी
- 1:23:34घटनाएं घटीं? पहली झूठ तो जाएगी, बाकी तो बाद
- 1:23:39में देखेंगे और तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा तुम पाठ खा लेते हो
- 1:23:47क्या? रामचरित मानस जो लिखी?
- 1:23:50तुलसीदास ने इतना समय बर्बाद किया ये वास्तव में तुलसीदास ने जो
- 1:24:01लिखा राम हुए थे, सीता थी, लक्ष्मण हुए थे परिवार तो कहते
- 1:24:07नहीं, वैसे इससे नवे उपन्यास है। जब तुम्हें ये ही नहीं पता राम
- 1:24:19हुए कि नहीं तो तुम झूठे ही हो। प्रथम पड़ाव पे झूठे हो कौन बोल
- 1:24:27सकता है? मैं कहता हूँ सिर्फ कबीर बोल सकता
- 1:24:33है क्या? अंतःस्थल पे बहरा सुविद्यमान है
- 1:24:36क्योंकि जा के पी लिया अतिशोक्ति न करो न तो किसी के चरण चुम्भन या
- 1:24:50अतिशोक्ति जिनके गुलाम हैं। उनको कहना चाहिए कि हम आपके गुलाम
- 1:24:57और भाई अगर आपने पाप कर दिया तो धोखतल कर दिए और 50 साल की आपको
- 1:25:03जेल हो गई। ईमानदारी 150 साल की जेल काटो,
- 1:25:08उससे बचने के तरीके मत खोजो। फिर माफी ना में मत लिखो तुम झूठे
- 1:25:14हो फिर बिक जाते हो फिर सौदेबाजी होती है सौदेबाजी ₹60 में हो जाती
- 1:25:24है, गाँधी ने ऐसा करम इसी लेने की।
- 1:25:35पता है के बल से ये हराए नहीं जा सकेंगे।
- 1:25:41दो तिहाई धरती के मालिक हैं और रास्ता खोजना होगा और वो रास्ता
- 1:25:49खोजा जैसा उन्होंने किया। लोग कह देते हैं ले दी हमें आजादी
- 1:25:55बिना खड़क बिना ढाल भने का ये महात्मा गाँधी ने कहाँ कहा?
- 1:26:02महात्मा गाँधी के ये शब्द कहाँ है?
- 1:26:06किस किताब में है तुम्हारी व्हाट्सएप?
- 1:26:10विश्वविद्यालय को छोड़कर कहीं और हैं और व्हाट्सएप विश्वविद्यालय
- 1:26:14पे तो मैं भी लिख सकता हूँ कोई भी लिख दे कोई अनपढ़ व्यक्ति भी लिख
- 1:26:20सकता है ये छुरलियां हैं इनको मैं छुरलियां कहता हूँ।
- 1:26:29असलियत को देखो भाई अगर 50 साल अगर तुमने दो बंदे मारे हैं और
- 1:26:35न्याय ने न्याय कर दिया के 50 साल तो काटू ना भाई फिर माफी क्यों
- 1:26:43मांगते हो? इसकी जगह अगर महात्मा गाँधी होते।
- 1:26:48तो पहली बात वो करते ही नहीं थे। यही तो अहिंसक होना है और अगर
- 1:26:55करते तो 50,000 ईमानदारी से भोगते, चाहे मर जाते या फिर वहाँ
- 1:27:05जाकर। भूख हड़ताल रख देते कि कुछ नहीं
- 1:27:08खाऊंगा कतल मैंने किया है 50 साल की कैद भी ठीक है लेकिन खाऊंगा
- 1:27:14कुछ नहीं, यही तो किया जीतन दास ने।
- 1:27:20जीतन दान और कित्ते भूख हड़ताल? नहीं खाऊंगा कुछ मरूंगा तो मैं
- 1:27:29मरूंगा ना तुम्हे कोई दोष नहीं लेकिन अंग्रेजों ने नाक में
- 1:27:36नालियां फंसा के खून निकल आया। दार निकल पड़ी, खून की मुख में से
- 1:27:41नालियां फंसायीं खून हो गया। दर्द इतना हुआ चिल्लाता रहा, ऊपर
- 1:27:46से दूध कराने की चेष्टा की। ये जतिन दास जिनका नाम अपने वीरों
- 1:27:55के इतिहास में लिखा जो भगत सिंह के बिल्कुल साथ बैठे थे बगल में।
- 1:28:03और मर गए, खाया नहीं नाक में से पाइप में गिराने की कोशिश की
- 1:28:11लेकिन वो उखाड़ फेंकता, दर्द होता लेकिन उखाड़ फेंकता।
- 1:28:22जब से सुना है मरने का नाम है जिंदगी।
- 1:28:27सर्प कफन बांधे कतल को ढूंढ़ते हैं और जतिन दांबर के उनकी अर्थी
- 1:28:42के पीछे। विशाल भारतीय जनता थी और
- 1:28:47अंग्रेजों ने उन्हें सलूट किया और अंग्रेजों ने उसी दिन समझ लिया था
- 1:28:57अब भारत पे ज्यादा देर तक राज़ किया नहीं जा सकेगा।
- 1:29:01कौन कहता है गाँधी ने? अकेले ने यह आजादी दिला दी।
- 1:29:06कहीं गाँधी के हस्ताक्षर हैं, इन शब्दों के नीचे तुम मात्र अपनी
- 1:29:11भाषण में फैला रहे हो, ये बात अलग है।
- 1:29:15गाँधी ने कहाँ दावा किया? सिर्फ मैंने आजाद किया अगर उसने
- 1:29:20आजाद किया हो तो फिर? पुकार क्यों लगाई कि देशवासियों
- 1:29:24इकट्ठे हो जाओ घरों से बाहर निकलो, मैं भी तुम्हें कहता हूँ,
- 1:29:28घरों से बाहर निकलो, वेला है ओसम सुहाना अपराधी एक सन पर इकट्ठे
- 1:29:40हैं। ऐसा वेला कभी आएगा?
- 1:29:43क्या? अपराधी एक स्थान पर कठें भला हो
- 1:29:51ईडी का इट का, अपराधियों को एक स्थान पर इकट्ठा होने का और साथ
- 1:29:57में ही ये ईडी और इट। ऐसे ही कोई थोड़ा ही बिक जाता है।
- 1:30:03भाई अच्छा सा माल मिला होगा। ऐसे ही चुनाव आयोग सिरफिरा है
- 1:30:13क्या बिक जाएगा? क्या सभी के बाल बच्चे हैं भाई?
- 1:30:21सभी के बाल बच्चे हैं। मेरे इशारों को समझना महाराज जो
- 1:30:36डराने की चेष्टा करता है वह डरा हुआ होता है।
- 1:30:47कहते हैं सारी जोड़ी सारे जजेस अमित शाह से बहुत डरते हैं।
- 1:30:55क्या बात भाई? क्या काल ने अमित शाह का रूप धर
- 1:30:59लिया है? ऐसा है क्या कि काल ने?
- 1:31:05अमित ईशा का रूप घर लिया हो? मैंने एक छोटी सी वीडियो क्लिप
- 1:31:10डाली थी। मंद बुद्धियों के भी कमेंट आते
- 1:31:16हैं, बिना पूछे आते हैं, उनसे कोई कहता नहीं कहता, मैं कमेंट करो
- 1:31:19लेकिन करते हैं। मेरे चैनल पे घुस जाते हैं आके और
- 1:31:25छोड़ो, तुम व्हाट्सएप के ऊपर आ जाते हैं बिना पूछे आखिर में मुझे
- 1:31:30उन्हें अंगूठा लगाना ही पड़ता है क्या करूँ?
- 1:31:41और कोई चारा ही नहीं। मैं बांटता हूँ मुझे बांट लेने
- 1:31:46दो, तुम्हारी ही आने वाली पुश्ते इससे लाभान्वित होंगी, कोई पता
- 1:31:52नहीं हिरण्यकश्यप के घर कौन प्रहलाद जन्म ले ले तुम नहीं
- 1:31:57मानते तो मत मानो तुम तुम स्वतंत्र रहो भाई।
- 1:32:00लेकिन तुम्हारी शायद कोई प्रहलाद उत्पन्न हो जाये।
- 1:32:03नारायण का भगत फिर क्या करोगे? और यह कॅन्टेंट उनके लिए है
- 1:32:12प्रहलादों के लिए जो नारायणा बाजा नारायणा बाजा हरी हरी?
- 1:32:20उनके लिए है अतिशोक्ति ना करो ना तो किसी के चरण चुम्बक बन जाओ, यह
- 1:32:27भी अतिशोक्ति है और यह भी झूठ है यह भी आपके भीतर उतर जाएगा और
- 1:32:33तुम्हें पता भी नहीं चलेगा, लेकिन एक लक्षण है सुन लेना तुम सुविधा
- 1:32:39के। तुम्हारे पास सुविधा के 7 दिन तो
- 1:32:43सारे होंगे चित्र तनहरा बटकन में होगा मैं मरी जे इश्क़ हूँ मेरी
- 1:32:53दवा पर्दे में कर। समझ लेना कि हमने कहीं न कहीं
- 1:33:01गलती की है। वो गलती यही किया है कि जीस
- 1:33:06व्यक्ति को तुम जानती नहीं। इसका चरित्र चैत्रण कैसा है?
- 1:33:11उस व्यक्ति को तुमने इतना अधिमान देना शुरू कर दिया कि परमात्मा के
- 1:33:16सिर के ऊपर बैठा दिया इसको। कि परमात्मा को इसी ने बनाया,
- 1:33:28संतो ने सत्य को सबसे पहले दिया बड़ा बड़ाई न करें, बड़े न बोलें
- 1:33:33बोल। कृष्ण तो बड़े बोल कहाँ बोलते
- 1:33:40हैं? भाई कृष्ण ऑथेंटिक बोल बोलते हैं
- 1:33:43प्रामाणिक कृष्ण कहते हैं, तू मेरी शरण में आजा, मैं तुझे सभी
- 1:33:49पापों से मुक्त कर दूंगा और बिल्कुल ठीक बोलते हैं क्योंकि उस
- 1:33:53स्थल पर जाने वाला प्रत्येक व्यक्ति।
- 1:33:56झूठ बोल ही नहीं हो सकता, लेकिन समझेगा।
- 1:34:01कौन समझेगा कौन वह दर्द भरे? दिल की जुबान जाए तो जाएं कहाँ
- 1:34:27जाएं तो जाएं कहाँ समझेगा? कौन वहाँ दर्द भरे दिल की जुबा
- 1:34:47जाए तो जाएं कहाँ? रहीम कहते हैं।
- 1:34:56रहीम ने हीरा कब कहे, लाख टका है मोर कहना भी नहीं चाहिए और कहने
- 1:35:06के लिए उसके पास वाक्य यंत्र भी तो नहीं है, नहीं तो बता देता कि
- 1:35:11मेरा ये मोर है। जौहरी ने परखना होता है कि कौन
- 1:35:17हीरा और कौन कांच हीरा बोलेंगे भी नहीं, जौहरी बोलेंगे लेकिन।
- 1:35:33रहीम ने ये शब्द तुमने बड़ा बिगाड़ लिया रहीम का ये शब्द चोर
- 1:35:39पैदा कर दिए, गप्पोड़ी पैदा कर दिए, गप्पी पैदा कर दिए, झूठ
- 1:35:45बोलने वाले, झूठे कफ़र पैदा कर दिए।
- 1:35:49तुमने एक परिभाषा कर ली कि जो व्यक्ति कहता है।
- 1:35:53मैं तो मतीमंद हूँ, मुझे कुछ नहीं आता उसको तुम कहते हो देखो बेचारा
- 1:36:09कितना अहंकार से रहित है? पूजने योग्य है और तुम उसके क्षण
- 1:36:14पांव पूजने लगते हो, पांव पखारने लगते हो, यह परिभाषा गलत है।
- 1:36:19भाई तुम्हारी बड़ा बिलकुल बड़ा ही करेगा, बिलकुल जो उर्सो का डॉक्टर
- 1:36:29लिखेगा। मैं औरतों का डॉक्टर मैं मडी हूँ,
- 1:36:36यह बढ़िया ही है नहीं यह प्रामाणिकता है इट इस ऑथेंटिसिटी
- 1:36:48और यह कहनी चाहिए। अन्यथा बहुत से दुखी लोग वंचित रह
- 1:36:53जाएंगे। इसकी सेवा लेने से अगरकृष्ण न
- 1:36:58होते ज़रा सोचो अष्टावक्र न होते ज़रा सोचो कबीर न होते ज़रा सोचो
- 1:37:03संत न होते ज़रा सोचो यह दुनिया आज वैसे भी दुखी है उनके होने के
- 1:37:08बावजूद। संत न होते जगत में तो जल मरता
- 1:37:13संसार उसी तल पर बोला हुआ शब्द है, अगर न होते तो फिर क्या होता?
- 1:37:19वो होकर चले गए। फिर ये तुम्हारा हाल है।
- 1:37:29अगर संत कहता है और देखिये जो सत्य बोलता है उसके अंदर
- 1:37:36वाकसिद्धि आ जाती है। मुझे मेरे शिष्य कहते है बाबा आप
- 1:37:42मज़े से कह देते हो जाओ बेटा हो और बेटा ही हो जाता है।
- 1:37:47अब मज़े से कहते हो जाएगा काम और हो जाता है यह क्या है?
- 1:37:52मैंने कहा पुत्र ये बात सिद्धि और तुम भी ये कर सकते हो यह कोई
- 1:37:57असंभव चीज़ नहीं है। झूठ मत बोलो।
- 1:38:03छः 7 साल गुजरते गुजरते। तुम्हारी बातें जो तुम बोलोगे,
- 1:38:10सहज में बोलोगे, सत्य हो जाएंगे। यह है वक्त सिद्धि क्योंकि
- 1:38:17तुम्हारे भीतर से जो अंततम में अचेतन में बैठा हुआ असत्य है, झूठ
- 1:38:24है। वह वाष्पी भूत हो के निकलता
- 1:38:27रहेगा, असत्य बचेगा नहीं, झूठ बचेगा नहीं।
- 1:38:33और फिर 12 वर्षों के बाद यह अनुमानित वक्त दिया बाबा ने मुझे
- 1:38:4012 वर्ष के बाद से। फिर तो तुम जो भी कहोगे, अगर
- 1:38:44क्रोध में भी कहोगे तो वो ठीक हो जाएगा।
- 1:38:47क्रोध में बोली गंधारी, लेकिन तब था इतने वर्षों का मेरा पति अंधा
- 1:38:57है तो मैं भी नहीं देखूंगी। यह तब है।
- 1:39:02इंद्रियों को ठीक होते हुए उनसे काम न देना।
- 1:39:06यह सब गंधारी की इंद्रियां बिलकुल ठीक थी।
- 1:39:12आँखें बिलकुल ठीक थी। सच पूछो तो गंधारी मैंने देखी है
- 1:39:19मेरी गढ़नाई नी थी वो। इतनी सुंदर आँखें शायद ही किसी
- 1:39:24सुंदरी की तुमने कभी देखी, उसने आँखें बाँध ली, लेकिन धृतराष्ट्र
- 1:39:35को तो दिखता ही नहीं तपस्या उसने पट्टी बांध ली।
- 1:39:42और उसके भीतर वह कला आ गई सिद्धि जिसे कह देते।
- 1:39:48फिर ऐसा व्यक्ति इसको कहते हैं। तब 12 साल तुम ब्रह्मचर्य साध लो,
- 1:40:00फिर। कितनी ही कामुक स्त्री या पुरुष
- 1:40:03तुम्हारे सामने आए बेहोश होकर गच्चा खाकर घर जाएगा, उसकी जरूरत
- 1:40:11ही नहीं पड़ेगी कि तुम्हारे आगे किसी प्रकार की ऐसी वैसी बात कर
- 1:40:18जाए। तो गांधारी को सिद्धि प्राप्त हो
- 1:40:24गई थी। कृष्ण जब सारनी आए अच्छा माते,
- 1:40:30मैं चलता हूँ द्वारका, ठहरिए, द्वारकाधीश।
- 1:40:42क्या तुम इस विनाश को रोक नहीं सकते थे?
- 1:40:46कृष्ण ठहरे कैसे झूठ बोलते हैं? यही तो यही तो उनके भीतर विशेषता
- 1:40:57है। झूठ नहीं बोलते वो वो कहते नहीं
- 1:41:00बाते मैं रुक सकता था, मैंने कोशिश भी की थी फिर भी तुमने
- 1:41:06कोशिश की थी, क्या तुम फिर भी युद्ध नहीं रोक सकते थे?
- 1:41:10अब कृष्ण क्या कहें, फंस गए आगे वो स्त्री खड़ी है।
- 1:41:15जिसके भीतर तप और तपस्चर्य का तेल कृष्ण कहते नहीं मारते हुए रोक
- 1:41:24सकता था। फिर भी अगर मैं चाहता तो रोक सकता
- 1:41:28था लेकिन जब दुर्योधन इतना ज्यादा अहंकारी हो गया।
- 1:41:34तो मैंने यही फैसला किया। मैं रोक सकता था माति ऐसा कौन सा
- 1:41:38काम है जो मैं नहीं रोक सकता? ऐसा कुछ भी नहीं।
- 1:41:42असंभव शब्द मेरे लिए है ही नहीं। नेपोलियन के लिए तो कागजी है मोदी
- 1:41:50के लिए कागजी? कृष्ण हैं, जिनके लिए कागजी नहीं
- 1:41:54है, अल फौजी नहीं है, जिनके लिए शक्तिक है।
- 1:42:00कृष्ण कहते हैं बिलकुल कर सकता था माते, लेकिन मैंने जानबूझ के नहीं
- 1:42:04दिया तो गंधारी क्रोधित हो गई। कुपित हो गई 100 पुत्र।
- 1:42:11जिसके मर जाए जहाँ एक पुत्र मरा वेदना तो हुई वेदना तो हुई लेकिन
- 1:42:24वेदना आंसुओं में ढल के बाहर नहीं आई।
- 1:42:28किसी को दुखी करने का मन नहीं होगा।
- 1:42:32जिसने मारा खुद भुगत लेंगे, कुछ भुगत गए कुछ भुगत लेंगे जिसने
- 1:42:37मुझे जहर दिया, एक मर गया, एक बच गया, अभी भी है भुगत देंगे।
- 1:42:49आनंद के रस को नै पीना भी तो एक दंड है।
- 1:42:54इस व्याख्या को आप देख लो सर्किल में कर लो पहली व्याख्या दे रहा
- 1:42:57हूँ तुम्हें आनंद को नै भोगना। भी तो एक भीषण दंड है और इससे
- 1:43:07बड़ा कोई दंड नहीं। संसार में की तुम अपने ही अंत
- 1:43:11स्थल में बैठा हुआ आनंद का वो समुद्र का स्वाद तक नहीं सक पाते।
- 1:43:17इससे बड़ा और दंड क्या होगा? तो कैसे हो वो आनंद की गहराई में
- 1:43:27जाके उससे पी लेते होंगे? नहीं नहीं।
- 1:43:32जिन्होंने मुझे जहर दिया, यह कोई कृत्य था, मैंने कहा तो है ही
- 1:43:37नहीं उन्हें मैंने थोड़ी कहा। तेरी जुल्फों से जुदाई
- 1:44:09मांगी थी, रिहाई तो नहीं मांगी थी कैद मांगी थी।
- 1:44:21रिहाई तो नहीं मांगी थी तो किसी भी व्यक्ति को पैसे से बिक मत
- 1:44:36जाना अन्यथा तुम। अपनी आत्मा को भेज दोगे और आत्मा
- 1:44:43जब बिक जाती है तो घना नुकसान होता है।
- 1:44:47इन बातों को भी आप अंडरलाइन कर रहे हो।
- 1:44:51जब आत्मा बिक जाती है तो घना नुकसान होता है।
- 1:44:57तुम्हारा कोई सामान बिक जाए तो कोई नुकसान नहीं, लेकिन आत्मा बिक
- 1:45:03गई तो घना नुकसान होता है। बहुत बड़ा नुकसान होता है।
- 1:45:07वह रस पीने से चूक गए तो जो झूठ बोलता है वह रस पीने से चूक जाया
- 1:45:14करता है जबकि तुम रस पी सकते हो। तुम गद्दी को खोजते हो, दानों को
- 1:45:21खोजते हो, डिग्रीज़ को छोड़ खोजते हो, आईएस को खोजते हो, आईएस की
- 1:45:26कुर्सी को लात मार देते हो और इसमें भी बड़प्पन जाते हो?
- 1:45:37तो याद रखो, अमृत को नपा सकोगे और तुम अमृत को अगर खोया तो इससे
- 1:45:44बड़ा दुनिया में नुकसान कोई होता ही नहीं।
- 1:45:50बड़ा बड़ाई न करें। बड़ान बोले, बोले जो सत्य है, तुम
- 1:45:56जानते हो उसे बताकर या घटाकर मत दिखाना जैसा तुम जानते हो, बिलकुल
- 1:46:03वैसा ही बोल देना जैसे दर्पण झूठ नहीं बोलते, दर्पण की तरह हो
- 1:46:08जाना। मेरा मन दर्पण कहला, मेरा मन
- 1:46:24दर्पण कहला। हे बुरे सारे कर्मों को भले बुरे
- 1:46:41सारे कर्मों को दिखाए। तोरमनु दर्पण कहलाए इस।
- 1:47:06दर्पण के प्राणी धूल में छमने पाए।
- 1:47:14जब तुम बढ़ा चढ़ा के बात करोगे, जा घटा के बात करोगे, मन की आदत
- 1:47:20है। जब धूल जम जाती है तो गाँधी को
- 1:47:26गाली निकालता है, जवाहर को गाली निकालता है।
- 1:47:31इंदिरा को गाली निकालता, राजीव को गाली निकालता, सबको गाली निकालता,
- 1:47:38क्योंकि स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करना चाहता, लेकिन स्वयं को
- 1:47:43श्रेष्ठ बातों से थोड़े सिद्ध होता है, कामों से होता है।
- 1:47:50कामों से स्वयं श्रेष्ठ होता है। लोग कहेंगे दूसरा तोला करता है,
- 1:47:56तराजू तोला करता है, तुम नहीं तोला करते तराजू बताता है कौन सा
- 1:48:03बड़़ा भारी तो जो गुण गाथा गाता है अपनी।
- 1:48:11वह सेल्फ हिप्नोटाइज़्ड इसे ही कहते हैं आत्म शलाका कृष्ण को
- 1:48:18आत्म शलाका मत कहो कृष्ण तो उस दल पर पहुँच गए जिसकी तुम।
- 1:48:26कल्पना भी नहीं कर सकते क्योंकि वह कल्पना तीत है, उसकी कल्पना हो
- 1:48:32ही नहीं सकती। तुम करोगे कैसे?
- 1:48:37वह कल्पना तीत है, वह अक्षरा तीत है।
- 1:48:41शब्दा तीत है। शब्दों में डालोगे?
- 1:48:43कैसे उनको दिव्य कृति जी। आचार्य जी, कैसे डालोगे तुम डाल
- 1:48:50तो रहे हो, मैं देख रहा हूँ, लेकिन अच्छा होगा अगर तुम्हें ये
- 1:49:00झूठ फैलाना बंद कर दो, यह तुम्हारे दर्पण पर दो लोगे और मैं
- 1:49:06कॉशनली तुम्हें कहता हूँ। इस दर्पण पे प्राणी धूल न जमने पर
- 1:49:15है। ऐसी कोशिशों का अगर तुम नहीं
- 1:49:20जानते, ईमानदारी से कह दो, मैं नहीं जानती।
- 1:49:25ज्यादा शुभ होगा। तुम्हारा मन हल्का हो जाएगा।
- 1:49:31इसको कन्फेशन कहते हैं। ईसा तुम देख लो कोई पाप हो, दूसरे
- 1:49:40के आगे मन हल्का कर लेते हो और तुम्हारा मन भी हल्का हो जाता है,
- 1:49:47स्वच्छ हो जाता है। तुम झूठ फैलाने की चेष्टा पर तुम
- 1:49:54ऐसे व्यक्ति का साथ देते हो, ऐसे व्यक्ति के संग हो लेते हो, ऐसे
- 1:50:00व्यक्ति के साथ कतारबद्ध हो जाते हो जो झूठा है और जो झूठ को
- 1:50:04फैलाता है। झूठ बोलो जितना हो सके झूठ बोलो
- 1:50:13इसलिए आज दुनिया इतनी झूठी हो गई और ध्यान रखना इसलिए आज दुनिया
- 1:50:18इतनी दुखी हो गई, सीधा सा मंत्र तुम्हें दे दिया झूठ तुम्हारे
- 1:50:25अंतःसमन में। पहले चेतन से उतरेगा अवचेतन में
- 1:50:28सब कॉन्शस में, फिर अवचेतन से उतरेगा।
- 1:50:32चेतन में सब अनकॉन्शस में, फिर अनकॉन्शस के गहरे थलों में बैठ
- 1:50:38जायेगा, जहाँ फ्राइड पहुँच नहीं सकते।
- 1:50:43इसलिए फ्राइड ने अचेतन मन को दो भागों में विभक्त कर दिया।
- 1:50:48अचेतन की तो वो प्रभाषा कभी कर ही नहीं पायेंगे साइकोलॉजिस्ट सब
- 1:50:55कॉन्शस की प्रभाषा वो कर देंगे जो ऊपर ऊपर पड़ा है।
- 1:51:02ज्यादा गहरा जब हो जाता है झूठ वह व्यक्ति तानाशाह हो जाता है
- 1:51:08क्योंकि पाप बहुत गहरे में अधिष्ठित हो जाता है।
- 1:51:13सीमेंट की एकता जम जाती है। बाहर नहीं आता वो व्यक्ति करता
- 1:51:16नहीं। मैंने कोई पाप नहीं किया।
- 1:51:20यह एक छलावा है। अपने ही साथ 600 वर्ष पहले का पाप
- 1:51:30मुझे पता था, मैंने किया एनलाइटनमेंट के बाद पता लगा और
- 1:51:36मैंने वो खुशी खुशी। जैसा भुगतवाया मैंने भोंगा और
- 1:51:42देखिए कैसे भोंगा तुम बड़े हैरान हो गए जो अभी मैंने शमद दिया कि
- 1:51:4813 दिनों तक मैं उस अमृत को छूका इससे बड़ा बेरहा की आँख।
- 1:51:59तड़पन मछली की तरह तड़पो हमारा पहला पहला अवतार मछली मत्स्य
- 1:52:07अवतार मछली की तरह तड़पो कब तड़पते हो तुम मछली की तरह।
- 1:52:16जब वो उस आनंद की एक बूँद भी तुम पी नहीं पाते तो उसकी तड़पन में
- 1:52:21तुम ऐसे तड़पते हो, कभी मछली को तड़पते हुए देखना वो 13 दिन जो
- 1:52:30मैंने बताए मैं क्या बताऊँ? और मुझे आज आश्चर्य होता है यह 33
- 1:52:44वर्ष कैसे बीते? कैसे भी था तुम बिना जीवन के से
- 1:53:03भी था पूछो मेरे दिल से। हाय वो पूछो मेरे दिल से 13।
- 1:53:21दिन में इतना बुरा हाल हो गया। 33 वर्ष कैसे गुजरे होंगे?
- 1:53:32दुःख के आलम कैसे गुजारें होंगे और तुमने इतने जन्म कैसे बिता दिए
- 1:53:37और मैंने इतने जन्म कैसे बिता दिए?
- 1:53:40ये अजूबा है जब व्यक्ति पहली दफा सितोरी में उसकी झलक पाता है।
- 1:53:47तो ठहर जाता है, ठगा सा रह जाता है हैं इतने वर्ष तक मैं ठगा ही
- 1:53:54जाता रहा। संसार के हक बिलकुल ठगे जाते रहे
- 1:54:00फिर वह चुभता नहीं। कभी फिर याद आता है जब जग के पता
- 1:54:06चलता है। कि जो देखा वह सपना था उसका वजूद
- 1:54:12तो है ही नहीं लेकिन जगकर पता लगता है जगने से पहले पता नहीं
- 1:54:18चलता। जगने से पहले तो तुम स्वप्न में
- 1:54:21बड़े मदहोश होते हो और बड़ी खुशी से जैसे मूवी को देखते हो।
- 1:54:32बड़ा बड़ाई न करे, बड़े न बोने बोल अतिशोक की मत करो, लेकिन
- 1:54:41कृष्ण कहेंगे अहम तम सर्वा पाप के सभी पापों से मैं मुक्त कर दूंगा
- 1:54:49और बिलकुल ठीक कह। जो व्यक्ति भी वहाँ चला गया, वो
- 1:54:54नानक हो कभी कर सकते हैं। बोलो ये ना बोलो कोई मुखर हो के
- 1:55:01बोल जाता है कोई शांत होकर आनंद पीता रहता है।
- 1:55:06मेरे भी यही। अवस्था थी।
- 1:55:12लगातार 35 वर्ष तक पीता रहा। अगर बाबा न कहते मुझे मैं तो पीता
- 1:55:19ही रहता और अनुरोध भी किया। बाबा किसी और की जिम्मेदारी लगा
- 1:55:25दो। बाबा के शब्द मेरे कान में आज भी
- 1:55:30गुंज रहे हैं और कोई है ही नहीं। मैंने कहा ये जो बैठे हैं यूट्यूब
- 1:55:33पे बाबा कहते हैं आज कोई भी नहीं है बस बात खत्म।
- 1:55:46और पहली दफ़े मुझे जितनी वाट का करंट तुम समझ सकते हो उतना ही लगा
- 1:55:55थर्रा गया मेरा रोम रोम तो फिर ये दुनिया चल कैसे रही है?
- 1:55:59सब झूठ में चल रही है बाबा कहते हाँ।
- 1:56:07झूठों की दुनिया झूठें ही चला रहे हैं और तुम्हें ये काम करना होगा
- 1:56:17पर मैं अपना काम निष्ठा ओनेस्टी और पूरे प्रयास परिश्रम से कर रहा
- 1:56:24हूँ। तुम मुझे सम्मान मत देना क्योंकि
- 1:56:28मुझे सम्मान की आवश्यकता नहीं, तुम मुझे अपमानित कर देना क्योंकि
- 1:56:34अपमान से मैं विचरित होता नहीं। बड़े बड़ाई ना करे।
- 1:56:46बड़े न बोले और अतिशक्ति मत करो जैसा तुम देखो की यह दुष्ट है।
- 1:56:53यह पीछे से हत्या करके आए अंजन सा हत्या का आरोप तुम पर क्यों न लग
- 1:56:59गया? आठ अरब लोग हैं।
- 1:57:02क्या सभी पर हत्या के आरोप हैं? क्या किसी ने कुछ गटर मस्ती की
- 1:57:06होगी ना? भाई क्यों लोग कहते हैं कि लोया
- 1:57:14का कतल अमित इश्वा ने करवाया सोहराबुद्दीन?
- 1:57:21क्यों कहते हैं, क्यों नहीं कह देते कि राहुल गाँधी ने करवाया?
- 1:57:30आखिर तो ऊँगली गुनाहगार की तरफ ही फूसती है ना?
- 1:57:46और फिर सुब्रमण्यम स्वामी जी देखे ये मूर्ख बंदा इसे मैं मूर्खों का
- 1:57:51पिता मैं कहता हूँ जो लोग कहते हैं तुम पर ये मानहानि का केस कर
- 1:57:59देगा मैंने कहा कल करते है आज कर दे आज करते है अभी कर दे।
- 1:58:03अभी करता है तो मैं कहूंगा पहले क्यों नहीं किया?
- 1:58:08महा मूड मूड आनंद है ये कहता है ऐसे बंदे को यह गुजरात में
- 1:58:15लड़कियां छेड़ता था और हमने ऐसे बंदे को जानते देखते हुए।
- 1:58:23सीएम से पीएम बना दिया तो फिर इस पाक में भागीदार कौन?
- 1:58:29अरे मूर्ख कौन कौन भागीदार? तुमने ही बनाया ना?
- 1:58:37तो फिर उलाना किसे दे रहे हो? और तुम बार बार कहते हो कि अगर
- 1:58:41मैंने बोल दिया तो ये किस बात का सबूत है कि अगर तुम्हें फाइनांस
- 1:58:46मिनिस्ट्री मिल गई तो फिर तुम बोलना छोड़ दो बोलोगे अभी नहीं।
- 1:58:54बोलोगे अभी नहीं क्योंकि तुम देशद्रोही हो।
- 1:59:01अगर देशप्रेमी होते तो बता देते कि हमने जीस व्यक्ति को प्राइम
- 1:59:07मिनिस्टर की पदवी पर सुशोभित किया।
- 1:59:10वह ये ये काम किया है। यह थी इमानदार यह तो बेईमानी है
- 1:59:20और बताओ क्या क्या इसे परिभाषा दोगे तुम?
- 1:59:30तुम नहीं बैठाया जानते बूझते लड़कियों को छेड़ता है और जो जो
- 1:59:35कारनामे करता है वो तुम अगर बता दोगे तो फिर मृत्यु का कोई भरोसा
- 1:59:41है अगले बला यार। अमित शाह का कोई पता है?
- 1:59:49कब खून खोल जाए इसलिए मैंने अपना इंतजाम पहले कर लिया।
- 1:59:57अगर विश्वास न हो तो कवर देख लो, खोदनी भी नहीं पड़ेगी खुद ही खुद
- 2:00:03वाली है, मुझे पता है जो काम मैं कर रहा हूँ।
- 2:00:091 दिन मुझे कोड़ियों से भून दिया जाये तो बड़ा आनंद आएगा ऐसे मैं
- 2:00:15मरना भी नहीं चाहता तुम्हें भी ना जीवना कैसे भी।
- 2:00:24था पूछो मेरे। दिल से हाय, हे पूछो मेरे दिल से।
- 2:00:45कबीर का एक शब्द सुनना चाहते हैं, सुनिए लेकिन ध्यान रखना है।
- 2:00:532 घंटे से ज्यादा की वीडियो ऑलरेडी हो चुकी है।
- 2:01:01हमसपयो सरो ताल दलेय क्यों धो लें?
- 2:01:31ताल तले या क्यूँ? बोल ल मन मस्त हुआ मन मस्त हुआ
- 2:01:44फिर क्यूँ बोल ल? मन मस्त हुआ फिर क्यों?