Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 May 26 - स्वप्न और दृष्टांत में क्या फर्क है? सुशुप्ति और मन के गहरे तलों की व्याख्या!
Transcript
- 0:17बाबा जी प्रण, स्वप्न और दृष्टांत में क्या भेप है?
- 0:40जब प्रकृति हमें निद्रा में ली जाती है और हम शिशुक्ति के गहन
- 0:51अवस्था में होते हैं, वहाँ व्यक्ति एक तरफ से।
- 1:00संबोधि केकरे होता है। जब तुम गहन सुसुक्ति में पड़े
- 1:08होते हो तो ना तो तुम्हें पता है, ना ही बड़ी से बड़ा वैज्ञानिक।
- 1:17खोज पाएगा? नहीं खोज पाएगा।
- 1:23वह कौन सा दल है जहाँ जाकर तुम थोड़ी देर के लिए खो जाते हो?
- 1:35अगर वह तन मनुष्य की जिंदगी में तो मनुष्य पागल हो जाएगा, मनुष्य
- 1:50छोड़ो, प्रत्येक जीव को नींद की आवश्यकता होती है।
- 2:00जीस चींटी को वैज्ञानिक कहते हैं कभी नहीं सोते जब तक जीती है तब
- 2:11तक वो जागती है। साइंस को पता नहीं एक झपकी होती
- 2:19है। बीच में से वो इतनी गहरी झपकी दे
- 2:24देती है कि विज्ञान को पता नहीं चलता, बस उस छोटी सी झपकी से ही
- 2:32उसकी नींद पूरी हो जाती है। निद्रा अवस्था प्रकृति लेके जाती
- 2:46है तुम्हें सुश्रुति के पास और सुश्रुति वो तल है।
- 2:58जीस स्तर पर शक्ति और चेतना भरा पड़ा है, वहीं से तुम जैसे
- 3:07पेट्रोल पंप पे हमारी गाड़ी का तेल खत्म हो जाता है।
- 3:10हम पेट्रोल पंप से जाकर भरवा लेते हैं।
- 3:17ऐसे ही रात को निद्रावस्था में तुम उस सतल पर जाकर अपने शरीर व
- 3:26अपने मस्तिष्क को शूल देते हो, भर देते हो, एनर्जेटिक कर देते हो।
- 3:36यही कारण है कि सोभे जब आप उठते हो तब बड़े तरो ताज महसूस करते
- 3:43हो, ज़रा सोचो बड़ी मशक्कत के बाद तुम थोड़ी सी देर के लिए।
- 3:56उस तल के पास जा पाए और संत जो हर वक्त उस तल के भीतर ही घुसा रहता
- 4:10है, उसके भीतर कितनी ताज की होगी? इस परम ताजगी का नाम भी रस है।
- 4:25परम ताजगी से युक्त तुम संत के वचन भाग गए उसमें चेतना और शक्ति
- 4:38का मिला जोला स्वरुप। उसकी आह से घुंघरू छनके आनंद
- 4:48बरसेगा, झरनों की तरह तुम्हारी प्यास मटाकेगा जिसकी खोती की
- 4:58प्यास मट गई। वहीं दूसरे की प्यास हो जा सकता
- 5:03है। इस शब्द को अंडरलाइन कुंए को कोई
- 5:12प्यास नहीं आती है क्योंकि कुंआ तृप्त है।
- 5:20और कुआं खुला है। जो भी कोई प्यासा हो रहा कि वो
- 5:27कुएँ से घर भर और पीले प्यास में डालें।
- 5:39सोपन सोपन जब तुम उस सुसुक्ति के दर से फ्यूल भराके वापस आते हो।
- 5:58और वापस चेतन मन की तरफ मुड़ते हो।
- 6:05अब फिर समझा दूँ चेतन मन यह हमारी बुद्धि है उसके भीतर फराएड के
- 6:15अनुसार। सबकॉन्शियस में अब चेतनमन उसके
- 6:21भीतर थोड़ा और गहरा अनकॉन्शियस में अचेतनमन उसके भीतर और गहरा
- 6:28कोलेक्टिव अनकॉन्शियस में सामूहिक अचेतनमन।
- 6:35और उसके बाद वह दरिया कोलेक्टिव कॉन्शस माइंड सामूहिक चेतनमन, तो
- 6:49जब तुम सामूहिक चेतनमन तक पहुँच जाओगे।
- 6:55फिर तो तुम प्रभुद हो गए, फिर तुम हर वक्त 2400 घंटे उस परम आनंद
- 7:08में रहोगे, जिसकी महक कभी खत्म। लेकिन उससे पहले की बात है
- 7:26कोल्लेक्टिव अनकॉन्शियस माइंड में भी जब तुम चले जाओगे तो तुम अपने
- 7:32मन की बहुत गहरी परतों को खंगालोगे।
- 7:38जो अभी भोगनी बाकी है और वहाँ जाकर तुम दूसरों के मनों में भी
- 7:46उतर सकते हो। दूसरा, तुम्हारे बारे में क्या
- 7:50सोच रहा है? संसार का सामूहिक अचेतन मन क्या
- 7:57सोचता है? तो तुम अच्छे से निहार सकोगे।
- 8:04तुम अच्छे से निहार सकोगे कि अमेरिका का सुपर प्रेसिडेंट
- 8:10डोनाल्ड ट्रंप क्या सोच रहा है उसको चाहिए न पता?
- 8:20तुम्हें पता होगा उससे ऊपर जब तुम आओगे तो फिर आएगा वह तन जोशी।
- 8:39किसको अनकॉन्शियस माइंड का डीपेस्ट पॉइंट कहते हैं, एक शब्द
- 8:46को गहराई से सुनना यह साइंस है मन की।
- 8:53और इसको संत अच्छे से तू जानता है कि उसने सारे क्षेत्र गरीबों से
- 9:03करोड़ों बार तय कर लिए होते हैं। दिल के आइने में थी।
- 9:12तस्वीरें जब ज़रा गर्दन झुकाई देख वह तुमसे बतिया भी रहा होता है और
- 9:27वक्त पाकर अपनी भीतर छलांग भी लगा देता है।
- 9:30तुम्हें पता भी नहीं चलता। तुम संत को बोलते बोलते थोड़ी देर
- 9:38के लिए चुप चुप होते हुए देखो उस जुगबी के मरहलों में।
- 9:49वह अपने अंतश के उस चेतन को छू लेता है जो भरा पड़ा है।
- 9:55चेतन जो व्यक्ति पहुँच गया कलेक्टिव कन्सीस माइंड तक वह संत
- 10:08हो गया। उस व्यक्ति को सपने नहीं आते हैं।
- 10:19बोले शाह का एक प्रसिद्ध वचन है रातिं सपन न आवे उन जेड़ें अल्लाह
- 10:27वाली को। जो परमात्मा के उस आयाम में
- 10:33प्रवेश कर गए उसको रात को सपना नहीं आता यानी मन भटकता तब तक
- 10:44सपना आएगा जब तक तुम कलेक्टिव। अनकॉन्से सम्मान तक जाओगे तब तक
- 10:52सपना आएगा। जैसे ही तुमने कलेक्टिव कौनसे
- 11:00सम्बन्ध को छू लिया? सपना गायब, दुख, गायक दर्द गायक
- 11:11चिंता गाय चिन्तनाय गाय विकास गाय विषय गाय शुद्ध चेतन रह जाता है।
- 11:30और जीस वक्त तुम उस दल को छू लेते रहो जिसे मैंने कलेक्टिव कॉन्शस
- 11:40माइंड कहा, उस व्यक्ति को सफल नहीं आता।
- 11:50यह पहचान और लक्षण है। इसे सर्कल सपने तब तक ही आएगा जब
- 12:03तक आपके भीतर भटकन भीतर की भटकन मन की भटकन होती है।
- 12:13और मन की भटकण सोखन पैदा करते कोलेक्टिव कौन सी माइंड के भीतर
- 12:22प्रवेश करने से या उसके ऊपरी सतह को टच करने में?
- 12:34के बाद तुम्हें स्वपन नहीं आया क्योंकि तुम्हारी सारी भटकना मट
- 12:41गई है शक्ति का पता चल गया। मैंने कल ही एक शब्द बोला था कह
- 13:00नानक बिन आपा चिने मिटेनाभर्म की कइ काहे बन खोजन चाहिए?
- 13:14जब तक तुम अपना आपा नहीं निहार लेते, लाख महाकाल के मंदिरों में
- 13:23माता टेकों गुरुद्वारा मस्जिद मढ़ी।
- 13:31मसान, गिरजाघर, चर्च, मंदिर कहीं भी चले जाओ मन की भटकना, वो चाहे
- 13:48तीर्थ हो गंगासागर। यह कहवा हो सभी भटकन, मन की भटकन
- 13:58मिट्टी कि तुम जहाँ हो, वहीं कहवा है, वहीं तीर्थ।
- 14:15जो व्यक्ति उस स्थल को छू गया, मैं थोड़ा धीरे बोल रहा हूँ, गहन
- 14:21विषय है धीरे बोलने से तुम्हारे भीतर प्रवेश कर जाए।
- 14:31ठैराब से बोला गया शब्द। तुम्हारे अन्तश के गहरे थलों में
- 14:38उतर जाया करता है जीस व्यक्ति ने वह कोएक्टिव अनकोच से समय का ऊपरी
- 14:50सतह भी छू लिया। उसको टॅच भी कर दिया, बस उसके बाद
- 14:58उसको सौंपने आएगा। भटकना मट गई सारे रोग कष्टकली दो
- 15:05का दरिद्र सब समाप्त होगा तो दो मार्ग है तुम अभाव से प्रस्त तुम
- 15:28बीमार हो तुम्हें कोई चिंता है। तुम्हें कोई व्याधी है, तो तुम
- 15:42बाहर से संसार में प्रयास करके उन अभावों को दूर करने की कोशिश कर
- 15:49सकते हो। यह एक तरीका है, लेकिन टेंपररी एक
- 16:00तरीका वह है जो परमानेंट है, स्थाई है, अस्थाई नहीं।
- 16:13वह है उस सतल को छू लेना जिसे मैं कलेक्टिव अन कॉन्शस में रहता हूँ,
- 16:24उस सतल को छू लेना। तुम्हारा मन रूपी रोग मिट जायेगा
- 16:38और सारी कल्पना सारे विकार, सारे विषय सारी भटकण सोपन इसी कारण से
- 16:49आत्म कि तुमने वह दर्द छुआ। मेरी तीन विधियों, जो मैंने बताई
- 17:05क्रिया योग करो खूब रजा के दवा की करोना काल में इसी प्राण वायु के
- 17:13कारण लोग मर गए और गंगा में हमने उसके।
- 17:17की लाशें देखीं और ऑक्सीजन की कमी के कारण परमात्मा ने ऑक्सीजन
- 17:28तुम्हें प्रचुर मात्रा में दिया। वातावरण में ऑक्सीजन 21% है, बहुत
- 17:36है। कार्बन डाइऑक्साइड 1% भी नहीं
- 17:47जिससे सारे पेड़, पौधे, वनस्पतियां उगती हैं, पल्लवित
- 17:53होते हैं, वह 1% भी नहीं। ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में उस
- 18:02विसर्जन हारी ने आपको प्रदान किया, लेकिन फिर भी कमी हो गई।
- 18:19जीस व्यक्ति ने वह तल छू लिया। उसको सपना नहीं आएगा तो सपना कैसे
- 18:30आता है, जिसने वह तल छुआ नहीं। तुम रात को सोचते हो तुम्हारी
- 18:42नींद में और बच्चे की नींद में बड़ा।
- 19:01तो उसे सपना शुरू होता है। जब मन भटकना शुरू होता है उसे
- 19:09पहले बच्चे को सपना नहीं आता। कभी बच्चे को सोते हुए देखने को
- 19:14घूं का बच्चा सोया। बच्चा हल वक्त उस सतल के करीब में
- 19:30बैठा रहता है। अब थोड़ी यहाँ बात सुन।
- 19:43दो तरीकों से उस स्तर पर पहुंचा जा सकता है।
- 19:50ईशा ने कहा ओनली दे विल एंटर इन माइ गॉड्स किडम हू विल बी इनोसेंट
- 19:58जस्ट लाइक ए। यह उसी कोलेक्टिव कॉन्शसनेस की
- 20:05बात कर रहे हैं जहाँ बच्चा रोज़ जाता है, लेकिन प्रभु तो क्यों
- 20:12नहीं होता? तुम भी बहुत गहरे में अगर बच्चों
- 20:23की तरह निर्दोष हो जाओ? तो उससे तल पर जा सकते हो लेकिन
- 20:33प्रबुद्ध नहीं होओगे। आइए आज मैं तुम्हारा भ्रम खत्म कर
- 20:39सकता हूँ जो वहाँ सोया सोया जाएगा जैसे तुम किसी।
- 20:52बाग बगीचे के पास गुजर जाओ तुम्हारे पास सब इंद्रिया हैं तुम
- 21:05ठंडी हवाओं को कुछ होंगे, लेकिन वहाँ पर खिले हुए फूलों का
- 21:16सुगंधों का आनंद नहीं ले पाओगे। क्योंकि तुम्हारे पास नासा पुट
- 21:21नहीं होगा। प्रत्येक चीज़ को अनुभव करने के
- 21:32लिए विशेष प्रकार की इंद्री या इंद्रायातीत यंत्र की व्यवस्था
- 21:39होती है। जैसे स्पर्श करने के लिए चमड़ी
- 21:48सुनने के लिए कान देखने के लिए, आंख, स्वाद जीवा और सुगंध दुर्गंध
- 21:59नाक। यह यंत्र है आभास करने का और तुम
- 22:17अगर कहो कि मैं तो परमात्मा को देखना चाहती हूँ।
- 22:22वैज्ञानिक से बोलो के दिखाओ मुझे इलेक्ट्रान प्रोटन हो के का ठेला
- 22:32ऐसी आँखों से इसके लिए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता पड़ती है।
- 22:41विशेष अत्रे की टेलिस को पकड़ उनमें से दिख जाएंगे।
- 22:45तुम्हें परमात्मा को देख लेते चरम चक्षु नहीं देख पाएंगे।
- 23:00तुम सदा ही इसी भर्म में जीते हो और इसी भर्म में मर जाते हो।
- 23:07के परमात्मा हमारे सामने आए। उनके चार हाथ होंगे, 1000 हाथ
- 23:15होंगे, वो पंचमुखी होंगे और दो मुखी होंगे।
- 23:22इन्हीं भ्रांत धारणों में तुम जीते हो और मर जाते हो, बच्चा
- 23:35रोज़ उस स्तर पर जाता है। तुम भी इनोसेंट होकर उस स्तर पर
- 23:43जा सके। बच्चा सोया सोया जाता है मूर्छी
- 23:56तुम भी मूर्छी अवस्था में जाओ तो तुम प्रबुद्ध नहीं हो।
- 24:03फिर हम क्या करें? रात को गहरी नींद लो बच्चों के
- 24:13समान कोई अगर पाखंडी तुम्हें कहता है कि 1:30 बजे दर्शन कर लेना आज
- 24:20के वृंदावन में रात अकेले कुंज के पास तो उसकी बातों को ये नोट कर
- 24:26देना, वह पागल। ही शुड बी मेंटल ट्रीटेड अपनी
- 24:34नींद को किसी कारण से गंवाना नहीं।
- 24:40यह प्रकृति का एक शानदार तोहफा है।
- 24:45और अगर प्रकृति ने तुमसे नींद छीन ली तो तुम समझो की प्रकृति ने
- 24:52अपने सबसे बड़ा जो गिफ्ट तुम्हें तोहफा दिया था, उससे तुम महरूम हो
- 24:59गए। भूख।
- 25:05नींद जी सब उसकी देन तुम पदार्थ जुटा सकते हो, डंडप के पिल्लों
- 25:16खरीद सकते हो नींद कहाँ से ले के आओ।
- 25:21तुम स्वादिष्ट 3600 प्रकार के 56 प्रकार के भोग लगाते थे।
- 25:32लोग श्याम बाबा को 56 प्रकार का भोग लगाते हैं, सारी रात जागते
- 25:37हैं। क्या ये समझदार लोग हैं?
- 25:46अगर पागलों का देश कोई देख रहा हो तो भारत आएगा।
- 25:50इससे बड़ा पागल देश कोई है महा मूढ़ों का देश इफ़ श्याम पापा के
- 26:04अकेली गर्दन। उसी की पूजा करें और कब के मर गए?
- 26:15त्रेता युग में मर गए पूजा आज तक हो रही कहानियों बनाई गई हैं
- 26:25श्याम बाबा को कृष्ण भगवान ने। यह वरदान दिया था कि करयुग में
- 26:35तुम्हारी पूजा जो करेगा वो धन धान से सम्पूर्ण हो जाएगा।
- 26:39सभी व्याधियों से मुक्त हो जाएगा। यह पंडितों का छलावा है, यही तो
- 26:48छलावा है। अज्ञात के प्रति कुछ ऐसा शब्द बोल
- 26:55देना जो तुम्हें तो पता नहीं हमारे टीचर थे।
- 27:06उनका नाम था शिव दत्त तीसरी कक्षा में।
- 27:14उनको अड़े बोलना नहीं आता था अड़े उस वक्त पैसा दमड़ी देला यह चला
- 27:25करता था 57 की बात है। 58 की होगी तो वह हमें पढ़ाता
- 27:39हिसाब हिसाब मैथ तो वह हमें कहता है बच्चो बोलो एक दमरी दो दमरी।
- 27:53क्योंकि डेथ तो होना आता नहीं दमडी होती है सही दमडी एक दमरी दो
- 28:00दमरी तिन दमरी का एक? वैसा तो हम भी वैसे ही बोलते है
- 28:09एक दमरी दो दमरी। तिन तमरी का एक पैसा कहता नहीं
- 28:16ऐसा नहीं अच्छा तुम ऐसे सीखो बोलो गोरा अब घोड़ा तुमसे बोल रहा है
- 28:28तो बच्चे ऊंचे से बोलते गोरा। अरे नहीं नहीं बेटा नहीं तुम बोलो
- 28:39घोरा, अब डेथ उसे बोलना, समस्या तो यही है, तुम्हारी भी समस्या है
- 28:48तुम इनोसेंट तो हो सकते हो, बच्चों की तरह नींद तो ले सकते
- 28:53हो। लेकिन सोये सोये बेहोश बेहोश
- 28:57मुर्छी तो बोलो घोड़ा घोड़ा तो बच्चे भी कहते घोड़ा पूरा ज़ोर
- 29:07लगा, वह खीच जाता बेचारा। बोलना को देनी है, कहता देखो
- 29:19बच्चों ध्यान से सुनो मैं तो बोलेंगे गोरा।
- 29:30लेकिन तुमने कहना है गोरा बच्चे कहते गोरा अब क्या करें?
- 29:42जब समझाने वाला ही बेचारा कोशिश तो बहुत करते।
- 29:53ऐसा ही राम किशन पर मनच के पास ज्ञान था, उस स्थल को छू लिया था,
- 30:02लेकिन बोलने वाला कोई परिभाषा देने वाला कोई।
- 30:09उस अनुभव को शब्दों में डाल लेना इससे बड़ी कलाकारी और कुछ नहीं
- 30:22धन्य है वो लोग। जो उस तल के पाए हुए अनुभव को
- 30:28शब्दों में डाल के तुम तक प्रेषित कर देते हो।
- 30:33इसलिए बाबा ने कहा उठो तुम उठो, मैंने कहा बाबा काहे बोलो?
- 30:44अरे बाबा अभी 35 वर्ष हुए और किसी और की ड्यूटी लगा दो।
- 30:56बाबा बोले नहीं और कोई है मैंने कसरी से ही बैठा बाबा कहते सब।
- 31:08बस उस दिन से मेरी धरना टूटी तो इसका मतलब ये लोग ये बाप कमा रहे
- 31:22हैं। ये कहर कमा रहे हैं।
- 31:24और पता उस दिन चला, जीस दिन बाबा का दिया हुआ क्रिया योग।
- 31:30मैंने ओपेनली कह दिया थिस इस फॉर ह्यूमन और पता चला कि सुदर्शन
- 31:39क्रिया और श्याम भी क्रिया। को बताने वाले लोग परीक्षा तो
- 31:48सारी बात समझ में आ गए निहे तो स्वार्थ है भाई चाहे कोई संस्था
- 31:59के नाम पर मांगे। चाहे कोई सुदर्शन क्रिया के नाम
- 32:05पर मंगे सब धन को इकट्ठा करने का प्रयास, तुम श्री श्री श्री भी कह
- 32:13दो तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो उस स्तर पर मूर्छित मूर्छित
- 32:25गया। बच्चों की तरह वह फ्रेश तो बहुत
- 32:35लेकिन प्रबुद्ध नहीं होगा तो प्रबुद्ध कौन होगा, कैसे होगा?
- 32:42आइए मैं पहले इस बात को जवाब दे। प्रश्न प्रश्न श्रेयांश जारख।
- 33:06सुबह जब तुम उठ जाओ, ध्यान रखना कि रात को तुम मुर्शीत होकर सोएं
- 33:16और तुम स्वभा के साली हो कि तुमने बहुत गहरे तलों पर जाकर ताजगी को।
- 33:25ग्रहण कर लिया। तुम परम ताजगी से भरे हो और फिर
- 33:33तुम सुबह बाहर आ गए। उस तल पर गए हुए व्यक्ति को
- 33:39स्वप्न्य। बच्चे को सपना नहीं आता, संत को
- 33:53सपना नहीं आता। राति सपना आवे उन गिड़े अल्लाह
- 34:00वाले को। तो फिर तुम सुबह आओगे प्रबुद्ध तो
- 34:10नहीं होगे जब की तुमने होटल छू दिया, लेकिन बिल्कुल ऐसा है जैसे
- 34:16तुम्हारे पास ना सा पुटे ना हो और तुम किसी बगीचे के पास से गुजर
- 34:22जाओ। तुम्हारे पास आँखें न हों और तुम
- 34:28सुनकर दृश्यों के भीतर से पहाड़ी स्थानों में गुजर जाओ, तुम देख न
- 34:36पाओगे प्रकृति की खूबसूरती। प्रत्येक अनुभव उसी इन्द्रिय से
- 34:51या इन्द्रियतीत माध्यम से हुआ करते हैं, इन शब्दों को सर्कल दिल
- 35:02परमात्मा। इस अर्थ में देखा जाता है उसको
- 35:12देखने के लिए परमात्मा ने विधाता ने सृजन हरा ने तीसरा नेत्र
- 35:20बनाया। तीसरा नेत्र जब खुलेगा तो तुम
- 35:30परमात्मा का अनुभव करना सुस्त हो गए वह अनुभव में आता है।
- 35:44और सुबह सुबह तुम परम ताजा, फुल ऑफ एनर्जी एंड फुल ऑफ कॉन्शसनेस
- 35:53जितनी कॉन्शसनेस तुम वहाँ से ग्रहण करते हो क्योंकि वो दोनों
- 35:58का संयोग है एनर्जी प्लस कॉन्शसनेस।
- 36:03चेतना भी है, शक्ति भी है वह उसको सारे को सारी रात तुम वहाँ उसके
- 36:11पास बैठे रहे, परम ताजगी से भरपूर होकर सुबह तुम आए तुमने वो सारे
- 36:18तल फिर से लांघे। और तुम चेतन में आ गए, तुम्हे कोई
- 36:29सपना नहीं आएगा तो संधु ने कहा कि यह बेला जो ताजगी से इतना भरा
- 36:41पड़ा है। यह विला है प्रभु को पाने का
- 36:47प्रभु में लीन होने का, क्योंकि वहाँ जाने के लिए प्रचुर मात्रा
- 36:52में शक्ति चाहिए और यह शक्ति तुम्हारे पास सुबह सुबह हो सकती
- 36:58है क्योंकि सारी रात तुम इकट्ठा ही कर।
- 37:05तो सन्तों ने कहा कि ब्रह्मवेरा में उठ जाना और मौन होकर बैठ
- 37:11जाना, रात को तुम मूर्छित हो के सुय थे एनर्जी रेशने।
- 37:23सुबह तुम जागे हो एनर्जीफुलनेस में रात को योग्यता नहीं थी
- 37:32तुम्हारी ध्यान में जाने अब तुम्हारे में परिपूर्ण योग्यता
- 37:38है, क्योंकि शक्ति भी है। और फुल एनर्जिटिक भी हो चेतन भी
- 37:46अगर तुम उसी तल पर चेतन चेतन चले जाते जगते, जगते चले जाते तो तुम
- 37:53प्रबुद्ध हो जाते। जब तक प्रकृति तुम्हें उस स्थल पर
- 37:59ले के जाएगी। तो ध्यान रखना वह तुम्हें मूर्छित
- 38:03मूर्छित लेके जाएंगे। जब तुम चेतन चेतन जाओगे तो तुम
- 38:11जगह जगह जाओगे तो यही वेला थी जिसे ब्रह्म वेला का हार।
- 38:19तुलसी लोग करीब 3:00 बजे उठ जाते थे क्योंकि रात्रि को सूर्य डलते
- 38:28ही सो जाते थे। खाना उससे एक घंटा पहले खा लेते
- 38:33थे। आज क्लब्स में 12:00 बज जाते 1:00
- 38:37बज जाते। कैसे उठोगे सुबह और उठोगे तो
- 38:42एनर्जी लेस्सनेस में उठाओगे? शक्ति नहीं होगी और शक्ति के बिना
- 38:52वहाँ जाया नहीं जा सकता? यही वेला था, जिसे ब्रह्मवेला का
- 39:02नाम दिया गया। उसका कारण था तुम फुल ऑफ एनर्जी
- 39:10हो, तुम फुल ऑफ कॉन्शसनेस पूरी चेतना के साथ बैठ के आए हो सारी
- 39:17रात। शांत हो आनंदित हो यही वेला है
- 39:25अपने भीतर में उतर जाना जागते जागते इसलिए इसको।
- 39:37लेकिन अगर तुम 12:00 बजे 1:00 बजे 2:00 बजे सो गए तो गलती मत करना।
- 39:45अगर तुम ऐसे ही पंच भौतिक शरीरों को 1:30 बजे रात्रि को जाकर
- 39:53वृंदावन के राधा के कुंज में। पंचभौतिक शरीरों के दर्शन करते
- 39:59रहे और शक्ति को खोते रहे तो तुम कभी भी उस स्थान पे पहुंचने से
- 40:07क्योंकि वह स्थान प्रचुर मात्रा में ही शक्ति मांगता है और प्रचुर
- 40:12मात्रा में चेतना मांगता है। चेतना तुमने खोदी यह तो अभी साबित
- 40:21है, इनको तो श्राप लगा है, इनको तो नींद नहीं आती, इसलिए ये तो
- 40:30जागेंगे और अपना लोभ पूरा करेंगे। डायलीसिस भी कराना है अपने
- 40:36शिष्यों को भी पालना तो इनकी मजबूरी है तुम इनकी मजबूरी में
- 40:43इनका साधन अगर कोई वहाँ जाकर व्यक्ति उसके बाद प्रसिद्धि को
- 40:50प्राप्त कर लेता है। इस समीर कोइंसिडेंट उस व्यक्ति के
- 41:00कारण क्योंकि यह व्यक्ति तो इतना ताजा भी नहीं कि उस ताजगी से उठा
- 41:10हुआ आशीर्वाद। तुम्हारे ऊपर बरस जाए उससे ज्यादा
- 41:16आशीर्वाद तो तुम्हें बच्चा दे सकता है।
- 41:21बच्चा तरोता जाए। बच्चा अगर प्रसन्न हो जाएगा तो
- 41:27परमात्मा प्रसन्न हो जाएगा। क्यों?
- 41:31ही इस फुल ओएफ अनर्बिक ही आर एंड कान्शस्नस।
- 41:51बच्चे मन के सच्चे सारे, जग के आंख के तारे ये वो नन्हे फूल हैं
- 42:07जो भगवान को। लगते प्यारे बच्चे, मन के सच्चे
- 42:19सारी दुनिया की आँख के तार, ये वो नन्हे फूल हैं जो।
- 42:29भगवान को लगते प्यारे बच्चे मन के सच्चे इससे ज्यादा तो बच्चे का
- 42:41आशीर्वाद ले। बच्चा किलकारिया मरता है।
- 42:48तुम्हें नहीं पता वह प्रश्न होता है वह तुम्हें आशीष दे रहा है बोल
- 42:54नहीं सकता प्रकट नहीं कर सकता आशीर्वाद को, लेकिन उसकी
- 43:00किलकारियाँ आनंद से भरी होती हैं। आशीर्वाद से भरी होती है, इसलिए
- 43:14किसी के कहने से बच्चा पैदा न करे और अगर बच्चों को पैदा करो तो
- 43:23बच्चों का। बच्चों का अभिशाप मत ले क्योंकि
- 43:34बच्चों को पैदा करने का जिम्मा और सारा शरीर और सारी जिम्मेदारी
- 43:40तुम्हारी है तुमने बच्चों से पूछा नहीं क्या हम तुम्हें जन्म दें कि
- 43:44ना? उसमें बच्ची मात्र मात्र एक,
- 43:49तुम्हीं वो जिम्मेदार या गुनाह का जो चाहे समझो अगर बच्चों को तुमने
- 43:57दुखी करना है मेरे पास रोज़ कैसे? माँ बाप बच्चों से कहते हैं, यहाँ
- 44:06माता टेको यहाँ माता टेको तुम बच्चे पैदा किये के गुलाम पैदा
- 44:13किये और फिर अगर तुम हमारी बात नहीं मानो।
- 44:22तो हम सारी उम्र का कमाया हुआ तुम्हें हिस्सा नहीं देना।
- 44:29बच्चे के ऊपर मानसिक दबाव पड़ जाता है उस स्थिति में बच्चा
- 44:34तुम्हें श्राप देता है ये सारा विज्ञान।
- 44:40और तुम इसीलिए चैन की सांस कभी नहीं ले सकते और जो भाई का एक
- 44:46बच्चा दूसरे बच्चे का भाग खा लेगा, पिता के दिल को जीतकर या
- 44:56दांत दिखाके या सेवा का? नाटक रच चूके तो वह सुख नहीं
- 45:04पाया। सुख पायेगा मात्र वही व्यक्ति जो
- 45:11ईमानदारी से माँ बाप के कर्तव्यों का निर्माचन करता है।
- 45:18कर्तव्य होती हैं बच्चे पे बेलाशक लेकिन जिन जो तुम्हारे पंडितों ने
- 45:27कर्तव्य बताए देय भरण पितृ ऋण यह सब बकवास है।
- 45:33कोई पितृ ऋण नहीं होता, वो चले गए।
- 45:38जो भीतर का ऋण तुम कहते हो वो तुम्हारे बच्चों के रूप में आज
- 45:42विद्यमान है। तुम्हारे ही घर में मेरे पिताजी
- 45:51जब अंतिम प्राणि किए। तो मेरी जांघों के ऊपर उनका सर
- 46:01प्राण त्याग दिया, मैं ही था घर में या मेरी माता बड़ा भाई
- 46:07रजिस्ट्री करवाने के लिए गया था। अदालत में किसी व्यक्ति ने
- 46:13विश्वास करके सारी कॉलोनी उसके नाम करवा दी थी।
- 46:18इनकम टैक्स से बच तो जब भी कोई प्लॉट बेचता वह भाई को ले जाता और
- 46:27वह ईमानदारी से उसके नाम करा देता।
- 46:36उस दिन वह कुदरती चला गया। उसने बताया नहीं कि पिताजी की
- 46:40तबियत खराब बाद में ज्यादा बिगड़ गई।
- 46:43तभी सांझ हुई थी। सूर्य जभी ढला नहीं।
- 46:57तो माँ ने कहा पुत्र तुम्हारे पिता ठीक नहीं रखते, इन्हें जमीन
- 47:04पर उतार लो, मैंने पांव की तरफ से पकड़ा, माता ने हाथों की तरफ से
- 47:10पकड़ा। हम जमीन के ऊपर उतार लेंगे।
- 47:14जमीन के ऊपर क्यों उतारते हैं? यह साउथ नॉर्थ डायरेक्शन में रखना
- 47:20होता है। सिर हो साउथ की तरफ वहाँ हो नॉर्थ
- 47:30की तरफ तो वह मृत व्यक्ति की जान बहुत ही जल्दी निकल जाता है।
- 47:39अब इस बात को सुन लीजिए थोड़ा साइंटिफिक बात बहुत से प्रश्न भी
- 47:46आए हैं पुराने लोग मृत शैया पर पड़े हुए व्यक्ति को अंतवेला
- 47:54देखकर जमीन पर क्यों उतार लेते थे?
- 47:58क्योंकि जमीन एक बहुत बड़ा चुम्बक है और तुम जीस चार पाइप पे पड़े
- 48:04होते हो वो लकड़ी के उसके पाइप और लकड़ी इन्सुलेटेड है तो इस धरती
- 48:16का चुम्बक साउथ नॉर्थ उसके ऊपर प्रवाह नहीं।
- 48:22और डालता है तो बहुत कम डालता है। आज तो तुम्हें एक बात बताऊँ?
- 48:33सुरेश पूरातन जमाने में जो चार पहियाँ होती थीं।
- 48:45वह थोड़ी सी खाली छोड़ दी जाती थी और उस खाली जगह में हम डोन डालते
- 48:51थे, डोन कसने के लिए वह क्यों डालते थे?
- 48:58बाकी सारी बोनी होती थी जहाँ सोना है, जहाँ पैर रहना है।
- 49:05वहाँ हम रिक्षा डाल देते थे क्यों डालते थे?
- 49:13क्योंकि वह जगह खुली रहे और धरती का खिंचाव पांव भी पड़ता है?
- 49:24धरती इतनी दूर से भी कहेंती है, फेंचती है तभी तो ऊपर से आसमान
- 49:29में से खेच लेती है फिर तुम सोए होगे अगर वो स्पेस नहीं होगी,
- 49:37दोनों जिसे कह देते हैं तो फिर धरती ठीक से खेच नहीं पाएगी।
- 49:44आज तो वेट आ गए, आज तो कोई डॉन भी नहीं।
- 49:47आज तो सीधी लकड़ ही होती है, सनमाइ का होता है या बोर्ड होता
- 49:55है, सब लकड़ी है और सारा इन्सुलेटेड है।
- 50:00ज़रा भी तुम्हारे साउथ और नॉर्थ का प्रभाव नहीं पड़ता तो माँ ने
- 50:09कहा इसको नीचे उतारो, मैंने पिताजी का शरीर सिर्फ नॉर्थ की
- 50:19तरफ। क्षमा करना दक्षिण की तरफ ऐसे
- 50:24समझो दक्षिण की तरफ से कर दिया और नर्क की तरफ पाउंड कर दिया हिमालय
- 50:31की तरफ पाउंड और लंका की तरफ से। इसको नक्शे के हिसाब से ऐसे देख
- 50:40लेना। श्रीलंका जिधर है उधर सर और जिधर
- 50:45पहाड़ है उधर पांव तो नीचे उतारते ही 1 मिनट के अंदर अंदर पिताजी ने
- 50:57प्राण किया। 1 मिनट भी नहीं लगा।
- 51:03सही से कोई तड़पन नहीं, किसी प्रकार का रोजन नहीं शांत।
- 51:17परम शांत में चले गए। बाद में भाई आया और वह सीट भी आए।
- 51:29उन्होंने भी दिया। अगर पिताजी की तबियत इतनी खराब थी
- 51:33तो हम कल रिश्ते करवा देते फिर करवा लेते।
- 51:41लेकिन हमने कहा कोई बात नहीं ये वे तो करना ही था।
- 51:54बच्चा बच्चा शुद्ध मन का और बच्चे के समान क्यों कहा?
- 52:05ईशान से क्योंकि तुम कम से कम फुल ऑफ एनर्जी एंड फुल ऑफ कैन्शसनेस
- 52:13हो जाओ। इतनी गहरी नींद तो सो ना, बाकी तो
- 52:18बाद में निपटी जाएगी तुम फाउंडेशन तो स्ट्रांग करो ना।
- 52:24अगर बचपन न आए बिना सीधा बुढ़ापा आ जाए तो तुम कभी नहीं पहुँच
- 52:29सकोगे क्योंकि बचपन ही वो चीज़ है जो तुम्हें उस परम एनर्जी से
- 52:35युक्त करके प्रोस्पर करती है। सुबह सुबह सारी रात की एनर्जी और
- 52:48कैन्सेस्नस के समुद्र के पास तुम मौजूद रहे।
- 52:55उसके वाष्प तुम थक आते रहे और तुम फ्रेशनेस महसूस करते रहे।
- 53:01बड़ी प्यारी नींद आई सुबह तुम जागे और जब तुम जागे तो तुम फ्रेश
- 53:11तो बहुत लेकिन तुम प्रभुद नहीं होवे।
- 53:21इसे कहते हैं सोए सोए। उस तत्व के पास जाना जिसे मैं
- 53:27कोलेक्टिव कैन्सेनेस करता हूँ, ठीक से समझ लेना एक एक शब्द को यह
- 53:37प्रैक्टिकल है सार्थ अब कल ही एक पुत्र का मेरे पास।
- 53:44कमेंट बाबा आप ये राजनीति के पास जो करने लगे हो हमारे भीतर थोड़ी
- 53:54सी बीज छूट जाते हैं, पहले की तरह प्रवचन कर दिया को।
- 54:03बड़े अच्छे लगते हैं। मैंने कहा पुत्र वो तो मैं भूल
- 54:12चुका हूँ, सर जदा कदा भी बोलता रहूंगा।
- 54:16जैसे आपके प्रश्न आज आ गया है। श्रेयांश का तो मैंने प्रश्न ठीक
- 54:22समझा, मैंने जवाब दे दिया और मैं जानता था।
- 54:24पहले मैंने इस प्रश्न का जवाब नहीं दिया।
- 54:31तो ऐसे में बोलता तो रहूँगा अध्यात्म बोल ही रहा, लेकिन उसका
- 54:40क्या करू जो तुम कहते हो भूखे भजन न हुए गोपाल?
- 54:46तो ठग लोग अगर तुम सर्वोच्च पदवी पर बिठा दोगे तो फिर तो तुम
- 54:55उम्मीद ही मत रखना कि तुम कभी सुख का सांस लो।
- 55:04इस देश को इस वक्त एक ईमानदार, समझदार, कर्मठ और देश प्रेमी की
- 55:18जरूरत है। सच्ची देश प्रेमी की आवश्यकता है
- 55:29और मैंने यह अपना कर्तव्य समझा मैं चला था टिकट बुक करा लिया था
- 55:40नवंबर के महीने। लेकिन पीछे से आवाज आई कि मत जाओ
- 55:53अभी तुम्हारी इन्द्रियां सब काम करती हैं, अभी हमें तुम्हारी।
- 56:01एक मुकाम और हासिल करा दो हमें और वो है फाउंडेशन फाउंडेशन ऑफ
- 56:09एनलाइटनमेंट एनलाइटनमेंट तो हमारा चीफ गौर है ही अल्टीमेट।
- 56:20वो तो गोल है वो तो इमारत जब सजेगी बंगला बनेगा बनेगा।
- 56:27लेकिन अभी तो फाउंडेशन बड़ी गरीबी के मारे पांच किलो अनाज में काम
- 56:34चला रहे हैं और मन दुखड़ दुखड़ करता है।
- 56:38अगर सरकार ने पांच करो अनाज बंद कर दिया तो तब मुझे बताओ मैं क्या
- 56:45करूँ अगर तुम हम आज इस बात की परीक्षा करते हैं?
- 57:00मेरे सुनने वालो श्वेता तुम आज कमेंट जरूर करो कमेंट कि क्या
- 57:11मुझे राजनीति पे बोलना चाहिए या नहीं बोलना चाहिए जबकि मैं
- 57:16तुम्हारे प्रत्येक। आध्यात्मिकता के प्रश्न का जवाब
- 57:22बखूबी देता हूँ, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 57:28चोरों की चोरी बताते हुए मेरे ऊपर कोई बोझ नहीं आता।
- 57:34मैं बेफिकर। निर्भय होकर, बेखुफ़ होकर बोल
- 57:39देता हूँ की इसमें मेरा कुछ गठता है और तुम जागृत हो जाते हो।
- 57:51तुम जागृत न भी हो, लेकिन मैं अपना।
- 57:56दायित्व पूरा कर देता हूँ और मुझे पता है धीरे धीरे दुनिया जागृत हो
- 58:02रही है क्योंकि मेरे बोले हुए शब्द मुझे फिर से सुनाई पड़ते
- 58:07हैं। लोगों के माध्यम से मैं समझ जाता
- 58:10हूँ के हीना रंग लाने लगी है। रंग लाती है।
- 58:17हेना पत्थर पे घिसने के बाद होश में आता है बंदा ठोकरे खाने के
- 58:24बाद लोग मुझे कहते हैं, हम विश्वास कैसे करें?
- 58:34मैं कहता हूँ मेरे लक्षण। इससे ज्यादा मेरे पास कोई प्रमाण
- 58:41मैं तुम्हें हृदय चीर के नहीं बता सकता और तुम देख भी न पाओगे।
- 58:49लोग कहते हैं जो आप कहते हो ये पूरा पक्का हो जाएगा इसका प्रमाण।
- 58:56मैंने कहा कोई प्रमाण नहीं। क्या तुमने मोदी जी से प्रमाण
- 59:00मांगा था? 2,00,00,000 रोजगार देने की
- 59:03गैरैन्टी कौन लेता है? क्या वो लोग लेते हैं जो ईमानदार
- 59:09हैं? लालकृष्ण आडवाणी ईमानदार हैं, मैं
- 59:15जानता हूँ। और झूठ है बात मुरली मनोहर जोश
- 59:24ईमानदार उनमें कम से कम आत्म महसूस ऐसे लोग भी चाहिए हमें।
- 59:38जब उन्होंने कहा था कि छिल्ल आएँगे तुम्हारे टैक्स से वसूली गई
- 59:47रकम। अगर झूठ को फैलाने में लगा दी जाए
- 59:57तो क्या आपके खून पसीने की कमाई सही ढंग से लगाई गई?
- 1:00:03राजा के द्वारा इसका जवाब तो तुम्हें दे सकते हो।
- 1:00:13मैं तो संतुष्ट हूँ, मैं तड़पती हूँ, मैं परिपूर्ण तड़पती हूँ,
- 1:00:19मुझे कोई खबर नहीं मैंने अंतिम छोर का लिया द अल्टीमेट गौर ऑफ
- 1:00:27लाइफ। मेरे भीतर कोई वासना नहीं, कोई
- 1:00:31विकास नहीं, कोई विषय, कोई मांग नहीं, यहाँ तक कि ईशणा नहीं जीने
- 1:00:41की भी ईशणा भी मर गई। मैं तुम्हें कोई प्रमाण नहीं दे
- 1:00:54सकता और जो तुम्हें प्रमाण देने में झुक जाएगा, वह किसी ना किसी
- 1:01:03कोने में बेईमान होगा बस मेरे जीवन को मेरे जीवन जीने के ढंग
- 1:01:10को। जो निरंतर सहजता से चल रहा है।
- 1:01:1514 वर्षों से उसको देख कर अगर तुम समझ जाओ तो गनीमत है अन्यथा मेरे
- 1:01:22पास कोई एक्स्ट्रा प्रमाण नहीं, ना मैं तुम्हें कोई जिम्मेदारी
- 1:01:28दूंगा। तुम्हें मुझ पर विश्वास करना
- 1:01:34होगा। जैसे मैंने परमात्मा पर विश्वास
- 1:01:39किया कराया तो उसने इंसिडेंट ट्रेन की।
- 1:01:44उसने गढ़वाई। बीज तो उसने बो दिया आग तो उसने
- 1:01:49लगा दी लेकिन बुझानी तो मुझे ही पड़ी।
- 1:02:00दर दर भटका पन्ना पन्ना पलटा सबसे पूछा लेकिन कुछ ना मिला।
- 1:02:16दो और सितारों की तमन्ना की थी। सयाही के सिवा कुछ ना मिला।
- 1:02:38मैंने चांदो और सितारों की तमन्ना की थी।
- 1:02:51कभी कहीं गया, कभी कहीं गया आग लगा दी थी उसने और आग भी उसने
- 1:02:58मेरे कर्मों के कारण नहीं लगाई थी।
- 1:03:04निष्काम भाव से किया गया कर्म। और अंत बता देता है, अंत मति सो
- 1:03:16गति कि गाँधी ने आजादी के बाद बैरिस्टर था लंदन के श्रेष्ठ
- 1:03:28कॉलेज में यूनिवर्सिटी। जवाहरलाल भी थे, पटेल भी थे।
- 1:03:35ये सारे वकील थे, अनपढ़ कोई नहीं था इन्होंने अमीरी भी भोगी थी।
- 1:03:52इन्होंने फकीरी भी भोगी थी। तो क्या गाँधी गरीब से वो पैंट
- 1:04:06कोट टाई लगाके प्राइम मिनिस्टर के पोते पर बैठ नहीं सकते?
- 1:04:15बिल्कुल और ये अपने भीतर की बात है कि सावरकर का आखिर में एक दो
- 1:04:28ताले। गद्दी पर तुम्हारा अधिकार है, ये
- 1:04:35लोग सिर्फ अधिकार मांगते हैं, कर्तव्य नाम की कोई चीज़ नहीं
- 1:04:40होती। इनके पास गद्दी पर बैठना तुम्हारा
- 1:04:44अधिकार है, ऐसा कुछ तुमने किया, तुम्हारी लीडिंग व्यवस्था ने
- 1:04:49करवाया है। तुम ही तो मोहरे बने थे, अन्यथा?
- 1:04:56यह मुहिम आगे नहीं चलती तो तुम बैठ जाओ, तुम्हारा अधिकार है,
- 1:05:01तुम्हारा हक है प्राइऑरटी बेस पर गाँधी कहते मैंने इसलिए नहीं मेरा
- 1:05:10कर्तव्य था। भारत माता फौलादी बेड़ियों में
- 1:05:16झकड़ी हुई थी और उन बेड़ियों में झकड़ी थी जो महाबली था।
- 1:05:21थ्री फोर्थ संसार उसके हाथ में था, काविश था, सत्ता थी, शक्ति
- 1:05:28थी, पैसा था। लेकिन क्योंकि मेरा लक्ष्य यह
- 1:05:34नहीं था। इसे कहते हैं निष्काम कर और इसका
- 1:05:43पता चलता है बाद में जैसे मैंने। यूपी से आए हुए उस मजदूर की बात
- 1:05:51आपको वो काम करता सारे दिन जी तोड़ के काम करता, शाम को दिहाड़ी
- 1:06:00ना ले के जाता या निष्काम कर? अगर मालिक खुद बोला के कहेगा कि
- 1:06:12ले जाओ तो मालिक ने मालिक के घर देर है अँधेर में यहीं से बना है।
- 1:06:30बस अच्छा किया घुड़से गोली मार गया अनिथा फिर मारता इधर उधर
- 1:06:37फिरता एनलाइटन तो हुआ नहीं और अगर कहीं मेरे प्राण आखिर में।
- 1:06:48बोलने की क्षमता रखते थे। थोड़ी देर के लिए मुझे जीवन मिला
- 1:06:53होता। मेरे ही तो शिष्य थे सारे अभी अभी
- 1:06:58तो आजाद हुआ था। पांच महीने से ज्यादा 5.5 महीने
- 1:07:02हुए थे देश को आजाद। जीस स्वतंत्रता के लिए इतना कार्य
- 1:07:09किया उस स्वतंत्रता का कोई लुत्फ नहीं उठाया, वो भी इन्हें आरएसएस
- 1:07:17के फैलाए हुए झगड़ों से निपटने में लग गया।
- 1:07:21कभी पश्चिमी बंगाल जा रहे हैं, कभी पंजाब आ रहे हैं।
- 1:07:27तो इन लोगों ने यहाँ वहाँ ही भेजा रखा, उस देश का बंटवारा भी कर
- 1:07:33दिया जो गाँधी कहते थे बंटवारा मेरे लाश के ऊपर होगा।
- 1:07:41उसकी एबसेंस में बंटवारा कर दिया। अन्यथा ये लाहौर और ये हमारे
- 1:07:50सिखों का तीर्थ अस्सल करता है जो भारत के इलाकों में होता।
- 1:07:56हम इसके बदले कुछ और दे देते, उन्हें जमीन और बहुत।
- 1:08:03लेकिन क्योंकि मुझे दूर रखा गया और पीछे से इन्होंने बंटवारा कर
- 1:08:10दिया। एक ऐसा ले के आए आदमी जिसने भारत
- 1:08:19की। संरचना ही नहीं देखी थी।
- 1:08:23उसने लाइन खींच दी, पागलों की तरह चलो बंटवारा हो गया समृथ को नहीं
- 1:08:32दो शुभ साइन समर्थ से भाई जैसा बंटवारा करके।
- 1:08:39क्या करेगा अगर मूर्छित मूर्छित वहाँ से तुम जाकर लौट आओगे सुबह
- 1:08:57तो तुम प्रबुद्ध तो नहीं होगे लेकिन ताजगी से भरे याद रखो अब
- 1:09:02तुम्हारे पास। अपने भीतर जागृत जागृत जाने का,
- 1:09:07पुनः उसी तल पर जाने का जहाँ से आए हो, शक्ति भी है, ताजगी भी है,
- 1:09:15चेतना भी है, मन भी प्रसन्न है। उस रस के करीब बैठ के आए हो मानना
- 1:09:25के पिया नहीं तो सुबह सुबह उसको पीने की तरफ बढ़ना यही कहा था
- 1:09:39ऋषियों ने ब्रह्मेश्वियों ने बिगड़ती बिगड़ती बात कहाँ आ गई?
- 1:09:453:40 पर कुछ टपकता है आसमान से और अगर तुम जगते होगे तो तुम पिलोगे
- 1:09:57और तुम प्रबुद्ध हो जाओगे कितने प्रबुद्ध हुए पागल हो गए।
- 1:10:03सुबह के जागने से नींदों को खोने के कारण तो तुम पागल हो जाओगे।
- 1:10:10नींद पूरी कर कर तो संत सदा ही उगते रहे, क्योंकि वो तो सूर्य जी
- 1:10:16डलते ही सो जाते थे। उसका कारण है कि लाइट नहीं होती
- 1:10:22थी, विद्युत नहीं। बल्ब नहीं था।
- 1:10:26सूरज गया तो रोशनाई गई, खाना पहले खा लिया और फिर सात होते ही सो गए
- 1:10:37सुबह 3:00 बजे तक। 8 घंटे हो जाएंगे सात हो जा अगर
- 1:10:43सो गए तो और 8 घंटे की नींद अब पर्याप्त होती है।
- 1:10:488.5 घंटे 3:40 तो जब तुम वहाँ से वापस आओगे तो ना बच्चे को स्वप
- 1:11:05बनाएगा। ना संत को सोपना लेकिन ब्रह्म
- 1:11:17वीरा में तुम इतने ताजगी से भरे होगे।
- 1:11:23तुम इतने कौन से शून्य से लबालब भरे होगे?
- 1:11:28कि तुम अपने अंत समय उतरने के लिए तुम्हारे पास पर्याप्त शक्ति और
- 1:11:33चेतना तुम ऊंघते ऊंघते नहीं फिरोगे तो ध्यान रखना इन
- 1:11:43मष्ठिण्डों का दर्शन मत करना। अगर ये रात को जगाएं तो मत जागना,
- 1:11:49किसी पहाड़ा वाली किसी शेरा वाली माता के कारण रात्रों को मत जागना
- 1:11:56काली मत करना ये मूर्खों के ढकोसले हैं, ये तुम्हें बहकाने के
- 1:12:04ढंग छलावें। धन उपार्जन करने के बहाने हैं,
- 1:12:11क्योंकि मोदी राज़ में रोजगार तो है और पैसा इन्हें चाहिए।
- 1:12:22पहले जोड़ने के लिए चाहिए था। आज घर चलाने के लिए चाहिए सारी
- 1:12:28रात खुद भी जागते हैं तो मैं भी जगाता हूँ, ऐसी मूर्ताओं को त्याग
- 1:12:36दो, मैं ऐसा ही करूँगा। सभी धर्मों के अनुष्ठानों को
- 1:12:46तुम्हारी आस्था के ऊपर कोई प्रतिघात नहीं होगा, लेकिन वो
- 1:12:52आस्थाएँ तुम्हें तुम्हारे घर की चारदिवारी में ही निपटानी होगी।
- 1:12:58मंदिर, मस्तिष्क सब डाल दिए जाएंगे।
- 1:13:02डेरे, फेरे सब उड़ा दिए जाएं। यहाँ पर मनुष्य को जीवनदायिनी कनक
- 1:13:09या जीरी बोई जाएगी। यहाँ हॉस्पिटल बना दिए जाएंगे।
- 1:13:15यहाँ पर यूनिवर्सिटीज़ खड़ी कर दी जाएगी।
- 1:13:22और प्रत्येक व्यक्ति को जो देश का नागरिक है, 18 वर्ष से ऊपर जो है
- 1:13:28वह देश का नागरिक है। उसको क्वालिफिकेशन के हिसाब से
- 1:13:36मैंने बहुत बार आपको बताया जो अनपढ़ होगा।
- 1:13:3930,000 का महीना। उसके अकाउंट में चला जाएगा।
- 1:13:43माँ बाप को बच्चों की तरफ देखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
- 1:13:46माँ को अलग, बाप को अलग और बच्चों को अलग, सब को अलग अलग।
- 1:13:53अगर सभी अनपढ़ हैं तो 30301000। अगर 1012 में पड़े तो 40 अगर बीए
- 1:14:05पास है तो 50 अगर एमए पास है तो 75,000 महीने का बिना हील हुज्जत
- 1:14:15किये आपके बैंक अकाउंट में डाल दिया जाए।
- 1:14:21और अगर तुमने पीएचडी कर ली तो ₹1,00,000 में वक्त वक्त पर इनकी
- 1:14:30महंगाई के हिसाब से बढ़ा दिए जाएंगे और अगर महंगाई घट गई तो वो
- 1:14:37घटा दिए जाएंगे। ये तो हमारी कार्यप्रणाली है क्या
- 1:14:42महंगाई को बढ़ाते हैं या घटाते हैं लेकिन आपका गुजर बसर बढ़िया
- 1:14:48होता रहेगा। ज़रा सोचो।
- 1:14:59अगर भीख मांगने वाला व्यक्ति जो आज रेडे पर जिसके पांव नहीं,
- 1:15:06जिसकी आँख नहीं, जो अपाहिज है, जो अपंग है, वो सरकार से ग्रांट
- 1:15:13मांगता है, ग्रांट मांगने की आवश्यकता है।
- 1:15:17वो बिल्कुल अनपढ़ है तो उसको 30,000 तो मिलेगा ही लेकिन उसको
- 1:15:23मांगना छोड़ना पड़ेगा। अगर कोई मगता देख लिया तो वह
- 1:15:29प्रताड़ित किया जाएगा। यहाँ मंगतों का देश हमने नहीं
- 1:15:35बनाना तो मंगते हो। जागरण करने वाले भी मांगते हैं
- 1:15:40पाठ पूजा का आयोजन करने वाले भी मांगते हैं।
- 1:15:44पैसे को इकट्ठा करना ही तो मांगना होता है और मांगना तुम कैसे कहते
- 1:15:52हो परमात्मा की याद तो भीतर से तुम्हें।
- 1:16:01ये तो सब व्यापार है धंधे और सुबह सुबह ब्रह्ममूर्त में तुम
- 1:16:19उठे फुल ऑफ एनर्जी फुल ऑफ कॉन्शसनेस।
- 1:16:25उस चेतना, उस एनर्जी को लेकर यही मैं कहता हूँ।
- 1:16:29ब्रह्मचर्य के पालन करने से तुम इतनी शक्ति को जोड़ लोगे, वृहद
- 1:16:36शक्ति के तुम मालिक हो जाओगे लेकिन ब्रह्मचर्य को साधना है, वो
- 1:16:41भी जबरदस्ती लड़ाई झगड़ा करके नहीं।
- 1:16:45उसमें तो तुम शक्ति को फिर खोओगे लड़ाई से ज्यादा शक्ति तुम
- 1:16:56ब्रह्मचर्य का अगर खंडन कर दोगे तो कम शक्ति होगी, लड़ाई करोगे तो
- 1:17:01ज्यादा शक्ति खर्च होगी। लड़ाई मत करो, सहज पके सो मिलता
- 1:17:06हुआ है, धीरे धीरे पकने दो भटकोगे अनिवार्य है बार बार काम वासना।
- 1:17:21इतनी प्रगाढ़ बनाई पर मानी अन्यथा जगत की उसपत्ति रुक जा काम के उन
- 1:17:28क्षणों में तुम इतने मूर्छित कर दिए जाते हो प्रकृति के द्वारा
- 1:17:33जीतने रात्रि की निंदा में बच्चे को मूर्छित कर देती है प्रकृति
- 1:17:38उतने ही तुम मूर्छित हो जाते हो। और तुम्हें वहाँ बड़ी जरूरत है
- 1:17:43जागरूकता की तो साधू जागरूकता हो कामवासियों को तुम अवेयरनेस से
- 1:17:52देखो, देखते ही रह जाओ, बस आराम से अपने आप में सिर।
- 1:17:58मगन हुए बैठे रहो काम वासना के बादल आएँगे ठहरेंगे चले जाए ऐसे
- 1:18:06ही क्रोध, अहंकार, लोख मोह सल विकास आने दो।
- 1:18:17ठहरने दो, जाने दो इसमें तुम्हारी शक्ति खत्म नहीं तो सुबह सुबह तुम
- 1:18:26बैठ जाओ, ध्यान रखो कोई माला नहीं, मालाओं को तोड़ दो, गंगा
- 1:18:32में बहा दो, इनकी कोई आवश्यकता नहीं।
- 1:18:35परमात्मा तुमसे कोई हिसाब नहीं मांगेगा मैं जिम्मेवार ये तो
- 1:18:47तुम्हारे बनाए हुए पंडितों के ठगिया हैं तुम्हें भटका थी।
- 1:18:58आराम से बैठ जाओ, शक्ति से भरे हो, मौन हो जाओ कुछ न बोलो, सुबह
- 1:19:07का वेला है। अभी शोर शुरू हुआ नहीं अभी भीनी
- 1:19:15भीनी सुगंधित हवा चल रही है। किसी बाग बगीचे में बैठ सकते हो,
- 1:19:23घर की छत के ऊपर बैठ सकते हो, एकांत कमरे में बैठ सकते हो,
- 1:19:29द्वार दरवाजे खोल लो ताकि ताजे हवा आती रहे।
- 1:19:39अपने भीतर उतरने का ढंग बनाओ। वो ढंग क्या है?
- 1:19:48नथिंग टू डू अपने भीतर उतरने का ढंग है प्रयास नहीं, प्रयास तो
- 1:19:57करना है। अपने भीतर उतरने का ढंग नथ्थिंग
- 1:20:03टु टु रिलैक्स टोटली कमपुलेट तुम्हारा रोमा रोमा न्यूरॉन्स का
- 1:20:17और टिश्यूस का। पूरा री रैक हो जाए उन तंतुरों पर
- 1:20:27ड्यूसर्स पर या न्यूरोन्स पर तुम्हारी पकड़ न बचे क्योंकि
- 1:20:33तुम्हारी शक्ति बहुत जगहों पे लगी है।
- 1:20:35भारी जगहों पर तुम्हें पता भी नहीं।
- 1:20:39तो तुम्हारे रिलैक्स होते ही छोड़ते ही वो सारी शक्ति तुम्हें
- 1:20:44फिर आ जाएगी, जमा हो जाएगी और उस वृहदय शक्ति को साथ लेकर जब तुम
- 1:20:50नथिंग टू डू में आराम से बैठ जाओगे।
- 1:20:55तो तुम धीरे धीरे अपने ही भीतर खिसकना शुरू हो जाओगे।
- 1:20:59इसमें परमात्मा तुम्हारी अमदाद करता है क्योंकि वह बहुत बड़ा
- 1:21:03चुम्बक है। धरती तो बहुत ही छोटा चुम्बक है।
- 1:21:08इस सारी सृजना का निर्माण करने वाला वृहद ब्रह्मात्मा, बहुत बड़ा
- 1:21:13चुम्बक। ह्यूज मैग्नेट और उसका फील्ड बड़ा
- 1:21:18विशाल है। जैसे ही तुम उसके दायरे में आ गए,
- 1:21:23वह तुम्हें अपनी तरफ खींच लेगा। धीरे धीरे जब तुम दीक्षा लेने आते
- 1:21:31हो। तो अक्सर लोग मैंने कल भी बताया
- 1:21:35था। मूलाधार चक्र पे मैं उनको अंगूठे
- 1:21:40से विशुद्धि चक्र के पास खींच लेता हूँ जो एक बार विशुद्धि में
- 1:21:45आ गया फिर उसको परमात्मा खींचना शुरू हो जाता है।
- 1:21:52लेकिन बेफिक्र मत होना अगर तुमने कुकर्म करने शुरू कर दिए अगर
- 1:22:00तुमने गंधमंद खाना शुरू कर दिया आहार व्यवहार तुम्हारा गलत हुआ
- 1:22:10युक्त न हुआ। अयुक्त हुआ तो फिर तुम उस जीस तल
- 1:22:20पर मैं लेकर गया था विशुद्धि चक्कर के पास उससे नीचे आ जाओ।
- 1:22:30मेरे द्वारा अंगूठा लगाने के बाद तुम विशुटी चक्र पर आने के बाद
- 1:22:35सहजता से नीचे नहीं आ सकोगे। बहुत ज्यादा खुदाई करोगे फिर ही
- 1:22:42तुम नीचे आओगे अन्यथा नहीं आओगे। क्योंकि मैंने ऐसा लगा दिया
- 1:22:49तुम्हारे कि तुम उससे नीचे बा मुश्किल जा पाओगे।
- 1:22:59अगर तुमने बहुत बड़ा बात कर दिया तो ही तुम।
- 1:23:03इसलिए मैं राजनीतिक लोगों को दीक्षा ही नहीं देता।
- 1:23:07मुझे पता है आज तक एक भी व्यक्ति जो राजनीतिक है उसको मैंने दीक्षा
- 1:23:15देने से स्पष्ट इंकार कर दिया कि नहीं मैं आपको दीक्षा, मेरी
- 1:23:22दीक्षा आपके लिए प्रभावी ढंग से काम नहीं करेगी।
- 1:23:26आपने पाप करने है, आपने हुकूमत करनी है, जबकि मेरे पास आने वाला
- 1:23:32व्यक्ति तो हुक्म को मानने वाला होना चाहिए।
- 1:23:37हुक्म को मानने वाले परमात्मा के हुक्म को मानने वाले मेरे पास आ
- 1:23:41जाए। और हुकूमत करने की चाहत रखने वाले
- 1:23:47मुझसे दूर रहने, बिलकुल साधन अंदाज मैं तो बोल रहा हूँ और
- 1:23:56तुम्हारी ही भाषा में बोल रहा हूँ अगर तुम्हें आनंद का रस चाहिए।
- 1:24:04तो तुम्हें हुकुम में रहना पड़ेगा।
- 1:24:08अगर तुम अपने मन के मुताबिक चलना चाहते हो मेरा ऐसे हो जाये मेरा
- 1:24:14ऐसे हो जाये मेरा ऐसे हो जाये फिर तुम हुकुम में नहीं चले और देखिये
- 1:24:20परमात्मा अगर तुम्हें कोई दुख भुगताता है।
- 1:24:24तो वह तुम्हारे ही कर्मों का फर्ज तुम्हें देता है।
- 1:24:27तुम बहुत लोग क्या हर्जा है, मुक्त हो जाओगे।
- 1:24:33कर्ज है वो कर्ज को चुका कर तुम मेरे लिए मुक्त हो जाओगे।
- 1:24:39इसलिए मैं पितृ ऋण से ज्यादा कर्म ऋण समझता हूँ।
- 1:24:45पितृ ऋण नामक चीज़ मेरे पास मेरे मेरी किताब में नहीं पितृ ऋण को
- 1:24:52मत चुकाना क्योंकि पितृ तो तुम्हारे ही आसपास तुम्हारे घरों
- 1:24:55में बैठे मेरा भाई आज मेरे पुत्र के रूप में घर बैठा है।
- 1:25:00मेरा पिता आज मेरे पोते के रूप में घर बैठा घूम फिर के फिर हम
- 1:25:06यहीं आ जाते हैं तो पितृ ऋण कुछ नहीं होता, बस उनकी उनकी सेवा
- 1:25:14गंदगी करलो पितृ ऋण चूक गया। वो जो चले गए उनको खीर खिलाने की
- 1:25:23चेष्टा मत करना, वो तो तुम्हारे मोटे पेट वाले खा जाएंगे और
- 1:25:31इन्होंने ही तो व्यवस्था बनाई थी। और फिर इनकी चालाकी काम कर गई।
- 1:25:40इनकी बनाई गई राजनीतिक बिसात काम कर गई।
- 1:25:46तो सुबह सुबह भ्रम बेला में परिपूर्ण शक्ति के साथ।
- 1:25:54तुम ध्यान के उन तलों में चले जाना जहाँ जाकर तुम प्रबुद्धता के
- 1:26:00उस स्थल के भीतर आसीन हो जाओगे जिसे कृष्ण भवन स्थिति प्रज्ञाता
- 1:26:05कहते हैं, अवमूल प्रश्न आ जाओ। स्वप्न स्वप्न आता है जो व्यक्ति
- 1:26:22भटकता है, जिसका मन अभी मरा नहीं है वह तो सारी सारी रात भटकता
- 1:26:31रहता है। कुछ देर के लिए ही नींद ले पाता
- 1:26:35है। बाकी भटकन ही भटकन इस भटकन के
- 1:26:46कारण तुम्हें शोपना आता है, उनका कोई मायना नहीं होता है, एक होता
- 1:26:53है दृष्टान। वह दृष्टांत आता है।
- 1:26:59ठहर हुए व्यक्ति जो व्यक्ति ठहर गया, जिसने ठहरने के आयोजन करने
- 1:27:07शुरू कर दिए, ध्यान में जाना शुरू कर दिया, नथ्थिंग टू डू में बैठना
- 1:27:14शुरू कर दिया। वह ध्यान का आयोजन करने लगा।
- 1:27:20फिर धीरे धीरे उसके स्वपन दृष्टांत में तब्दील हो जाए एंड
- 1:27:28व्हाटस दी डिफरेंस बिटवीन दट टू स्वपन तो तुम्हारे मन की भटकन है।
- 1:27:36जो तुमने सोचा जो तुमने देखा वह तुम्हें देखा जायेगा, लेकिन
- 1:27:42दृष्टांत तुमने ऐसे आएँगे जैसे तुमने पहले देखे नहीं, बहुत
- 1:27:50दृष्टांत भविष्य में होने वाली घटनाओं से।
- 1:27:54संबंध रखते हैं। अब तुम्हारे प्रश्न का आखिरी जवाब
- 1:28:00का आखिरी दल छूने वाला सपन तो सभी देखते हैं भटकते हुए मन।
- 1:28:12और आज गुर मुखी कोई कोई व्यक्ति है मनमुखी है सारी दुनिया और जो
- 1:28:19मन के पीछे लगेगा वह फटकेगा मन लोभी मन, लालची मन, चंचल मन चोर
- 1:28:28मन के मते नचा रही पलक, पलक, मन और।
- 1:28:34जिसका मन ठहर गया उसको आएगा दुष्टान जिसका मन चला ये मान है
- 1:28:41उसको आएगा स्वप्न अब ये बुनियादी फर्क समझेगा, स्वप्न तो तुम्हारी
- 1:28:47भटकन है। लेकिन दृष्टांत बड़ा कीमती है और
- 1:28:54दृष्टांत आता है ठहरे हुए मन मन अभी पूर्ण रूप से कोयल तो
- 1:29:03दृष्टांत आएगा। जागृत व्यक्ति को भी कभी कभी
- 1:29:06दृष्टांत आया करते हैं। वो तीसरे नृत्य का रिफ्लेक्शन
- 1:29:11होता है। उस पर फिर कभी तुम पूछो मैं बात
- 1:29:14करूँगा वो प्रसंग बड़ा लंबा है। अभी आज की वीडियो भी बहुत लंबी हो
- 1:29:20गयी। एक डेढ़ घंटे की हो गयी मन के
- 1:29:28खोने के बाद जो तुम चित्र देखोगे अपने मनस पर।
- 1:29:35उसको दृष्टांत कहते और वह दृष्टांत भटके हुए मन से नहीं
- 1:29:41आएगा। वह दृष्टांत कमिंग इवेंट्स कास
- 1:29:46देयर शैडोज बेफ। आने वाली घटनाएं अपनी छायाओं को
- 1:29:52पहले गिरा देती हैं। तुम्हारी मांस पटल पर उसको
- 1:30:00उपेक्षित भाव से मत देखना, वो किसी समझदार व्यक्ति से पूछ लेना,
- 1:30:06समझदार कौन? सयाना व्यक्ति जो पहुँच गया उस
- 1:30:11स्थल पर माना आज अभाव है लेकिन फिर भी कहीं कहीं रोशनाई जल रही
- 1:30:20है वो सॉल्व कर देंगे तुम्हें बदला देंगे।
- 1:30:24तुम्हारे इस दृष्टांत का अर्थ क्या है?
- 1:30:27स्वप्न का कोई अर्थ नहीं? दृष्टांत आने वाली घटनाओं का
- 1:30:39कमिंग इवेंट्स काश देर शैडोज बिफोर अब इसको थोड़ा सा मैं वाकई
- 1:30:45कर दूँ क्योंकि इसमें बड़ी भारी की।
- 1:30:50यह होने वाली घटनाओं का पूर्ण प्रमाण नहीं है।
- 1:30:54वरना तुम्हें एलर्टेशन है, सावधान करना है कि तुम अलर्ट हो जाओ,
- 1:31:00सावधान हो जाओ, तुम इसको टाल भी सकते हो।
- 1:31:06अगर तुमने ठीक से विचार कर लिया और अगर तुमने इसकी तरफ उपेक्षित
- 1:31:13भाव से देखा तो वह फिर तुम्हें बाद में याद आएगा।
- 1:31:20यह तो मुझे परमात्मा ने पहले दिखा दिया था।
- 1:31:25अब यह बारीक फर्क मैंने आखिरी तुम्हें समझा दिया दृष्टांत भी दो
- 1:31:30तरह का होगा। दृष्टांत का मतलब क्या है?
- 1:31:35यह घटनाएं अगर तुमने ठीक से इनके ऊपर कोई कार्य न किया, उपेक्षित
- 1:31:42कर दिया? तो ये घटेंगी ही घटेंगी और अगर
- 1:31:47तुमने इनके ऊपर थोकड़ा सा ध्यान किया और सावधान हो गए।
- 1:31:55सावधानी को हटाना मत। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।
- 1:32:05अलर्ट रहना, जागृत रहना वो जो स्वप्न आया वो परमात्मा की तरफ से
- 1:32:11तुम्हें एक अलर्टेशन आया। भविष्यवाणी आई कि यह होगा जीस तरह
- 1:32:18से, तुम चल रहे हो तो। तुम चल रहे हो किसी मार्ग पे और
- 1:32:25परमात्मा जानता है कि सुकर्म आगे जाकर तू आएगा और आँखें तुम्हारे
- 1:32:31पास हैं, नहीं तो वह तुम्हें दृष्टांत देगा कि तुम कुएं में
- 1:32:36गिर पड़े। का मतलब ये नहीं कि गिर पड़े।
- 1:32:41इसका मतलब ये है कि समझ जाओ आदि कुछ खतरा है।
- 1:32:47बुद्धि है सोचो समझदार व्यक्तियों से पूछो सबय सयाने एक मत मूर्ख,
- 1:32:53अपनों अपनी जो सयाने है, जो स्थल पर पहुँच गए उनसे मझोला।
- 1:32:58कि ऐसा खतरनाक या अच्छा दृष्टांत आया।
- 1:33:01बताओ इसका क्या मतलब? वो बताते हैं, घटनाएँ घट सकती हैं
- 1:33:10अगर तुम उपेक्षित हो के निग्लेक्ट कर लिया तुमने और घटनाएँ नहीं
- 1:33:17घटेंगी। जो तुम्हें दिख गई रात्रि के उस
- 1:33:21उपहार में और आमतौर से सुबह सुबह आता है जब तुम पूर्ण चेतना और
- 1:33:30शक्ति से युक्त होते हो। दृष्टांत तभी आता है तो यह
- 1:33:36तुम्हारे लिए। ऑलटेशन है सावधान सावधान मैं देख
- 1:33:42रहा हूँ आगे कुंआ है और वह तो पल पल का ज्ञाता है पल पल का दृष्टा
- 1:33:49है, वह जानता है कि जीस मार्ग में तुम चले हो आगे कुंआ है।
- 1:33:57तो तुम वहीं ठहर जाओ, विचार करना यह दृष्टांत क्यों आया?
- 1:34:05कहीं मैं किसी ऐसे मार्ग पे तो नहीं हूँ?
- 1:34:10जीस मार्ग पर चलने से कोई खतरा है।
- 1:34:17तो फौरन उस राह पे विचार करके उस राह को छोड़ देना, क्योंकि जब
- 1:34:25परमात्मा का एयरलाइकेशन आ गया तो वह सर्वज्ञ है, वह सब जानता है,
- 1:34:32इसलिए तुम? बेहतर यह होगा कि वह मार्ग जीस पर
- 1:34:36तुम सीधे चल रहे थे उस पर उलटे चलने शुरू कर दो।
- 1:34:41जीस तरफ मुँह था उस तरफ पीठ कर लो, जीस तरफ पीठ से उस तरफ मुँह
- 1:34:46कर लो उलटा चलना शुरू हो जाओ बला टल जाएगा।
- 1:34:52देखो कि तुम क्या कर रहे हो। इन दिनों में परमात्मा का
- 1:34:58एलर्टेशन है दृष्टांत मन की भटकना है सोपन और सोपन का कोई अर्थ नहीं
- 1:35:08होता। दृष्टांत का अर्थ होता है
- 1:35:15दृष्टांत परमात्मा की वार्निंग है आवाजाय खलक नकाराएं खुदा वह
- 1:35:24तुम्हारा खलक तुम्हें आवाज देता है।
- 1:35:28परमात्मा का नगाड़ा बजता है सावधान खतरा है ज्वार एंडेजर तो
- 1:35:39वहाँ क्या करो रास्ता पे रखो, जीस रास्ते चल रहे हो उस रास्ते को
- 1:35:46छोड़ दो। खतरा टल क्या है?
- 1:35:51सीधा सीधा तुम्हें बतला रहा तो मैंने तुम्हें सारे ढंगों से सभी
- 1:35:59डायमेंशन से तुम्हारे प्रश्न का जवाब दे दिया अगर फिर भी तुम्हें
- 1:36:05कोई शंका रह गई हो। तो तुम पूछ सकते हो पत्र तुम
- 1:36:10आमंत्रित हो। नाक छू लेना, नाक छू लेना, नाक छू
- 1:36:32लेना। नाक छू देना।
- 1:36:40कभी। राम मकन कभी रे मैं मन ढोला जो
- 1:36:49मेरे। फकीरी मैं फकीरी मैं मंडोला जो
- 1:37:04मेरो। जो सुख
- 1:37:35वो सुख ना है अमीरी में अमीरी में।
- 1:37:46मन डोलाग्यो, मेरो रो फकीरी मैं, फकीरी मैं मन डोलाग्यो मेरो रो।
- 1:38:07धन्यवाद।