Latest / Baba ji Vijay Vats / 7 May 26 - सच्चे शिष्य की परिभाषा और शक्तिपात ना करने का असली कारण Must Watch.mp4
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- 0:08सुद विसरा गयो। मेरी।
- 0:24कर गयो मानो की चोरी। एक मन की चोरी करता है, एक वोट की
- 0:36चोरी करता है मन की चोरी करने वाला तुम्हारे हर्दों में हजारों
- 0:43लाखों लाखों सालों तक छाया रहेगा और वोट की चोरी करने वाला दंडित
- 0:49होगा टांगा जाएगा। वो काला, वो काला इकबां सूरीवाला
- 1:06सुध विसरा गयो। शुद बिसरा गयो मोरी रे शुद बिसरा
- 1:22गयो मोरी। माखन चोर नन्द के शोर जो कर गयो
- 1:39मन की चोरी रे। सुध भी सिरा गयो मोरी बो।
- 1:55काला इकबां। मंसूरी वाला।
- 2:08छुप गयो फिर इक तान सुना के कहाँ के।
- 2:26छुप गयो फिर इक तान सुना के चला के कहाँ गयो।
- 2:46चलाते गोकुल। ढूंढा मैंने मथुरा ढूंढ।
- 3:02गोकुल ढूँढा मैंने मथुरा ढूंढ कोरी नगरिया न।
- 3:19छोड़ी रे? सुध विसरा गयो मोरी वो काला ह
- 3:35इकबा सूरीवाला। तुम अवश्य ही सोचते होगे जे कृष्ण
- 3:50कन्हैया गोपियों के साथ प्रेम का रास रचाते रचाते।
- 3:59महाभारत में अर्जुन से कैसे कह पाता है कौन से सुधाय कृत्य उठ
- 4:14खड़ा निश्चय पूर्वक युद्ध कर। कौन ते युद्ध निश्चय हे अर्जुन
- 4:32कौन ते युद्धाय कृतनिश्चय आहा निश्चय पुरोख।
- 4:41बल पूर्वक सारी शक्ति झोंकते हैं। कैसे कह पाता है बनथरी बजाने वाला
- 4:57एक संगीत का गीत का? मधुर रस को बिखेरने वाला गर्दनी
- 5:07कैसे कटवा देता है और वो भी ज़रा थर्राहट नहीं होती थर्राहट होती
- 5:15है तो अर्जुन में होती है। क्या कारण है अर्जुन में?
- 5:24मोह है सबसे पहले अपने शरीर का, क्योंकि वह अपने आपको शरीर समझता
- 5:32है, फिर गुरु द्रोण का जिससे वर्ण विद्या सीखी।
- 5:40उसी पर प्रयोग करो। फिर भीष्म परतामा का छोटा सा
- 5:47बच्चा था, भीम उसे मारता और डरकर भीष्म पीतामा की गोदी अम्बेडकर
- 5:56बोला, माँ के आंचल में बच्चा बैठाओ।
- 5:59कितना सुरक्षित महसूस करता है? बस अब मुझे कोई नहीं मार सकता।
- 6:06कैसे मार दूँ उसको प्रताप धाम को जिसकी गोदी की शरण ने मुझे लाखों
- 6:14बार हजारों बार बचाए। कृष्ण कहते हैं तू का अर्जुन ज़रा
- 6:29भी प्रतिरोध नहीं करते। अर्जुन कहते हैं, बिल्कुल ठीक कहा
- 6:32तुमने कार्बन ने दोषों का स्वाभाव?
- 6:41कृपाणता के इस कायरता के स्वभाव के कारण कायपन्य दोषो वह स्वभाव
- 6:48परछामी धर्म से मूड चेता। मैं तो कायरता के स्वभाव से युक्त
- 6:55हूँ प्रभु लेकिन आपसे ये प्रश्न पूछता हूँ।
- 7:02धर्म समूह विजेता या श्रेया या नसीरत में मेरे लिए इस वक्त कौन
- 7:08सा श्रेष्ठ कर्म मार्ग है? क्योंकि मैं दुविधा में हूँ या
- 7:14श्रेय है या निशीता रोहित में शिष्य से अहम देखिये।
- 7:20जब तक अर्जुन ने यह नहीं कहा, भगवान कृष्ण को के मैं आपका शीश
- 7:26हूँ तब तक कृष्ण ने अर्जुन के ऊपर शक्तिपात।
- 7:38बस यही सिख धर्म की मूलभूत भीतर का रहस्य सिख धर्म कहता है।
- 7:50पहले शिष्यवानो तुम समर्पण तो करते नहीं, तुम्हारी नजरें तो
- 7:56रहती हैं। जैसे ब्राह्मणों की नजरें रहती
- 8:00हैं कि गौबुदान में कितने पैसे दिए, ऐसे ग्रंथियों की नजरें तो
- 8:06रहती हैं और हमारा कौन सा चढ़ाया और माथा कितना टेका?
- 8:22और तुम बात करते हो सीखिजम कृष्ण तब तक चुप रहते हैं।
- 8:31कृष्ण तब तक हुकुम नहीं करते जब तक अर्जुन नहीं कह देता।
- 8:38शिष्य से हम। साद इमाम पर पन्नमा मुझे सही
- 8:45मार्ग दिखाइए प्रभु मैं आपके शरण में बस यह आवश्यक है प्रश्न पूछने
- 8:53वाले कभी शरण में नहीं होते। शरण में तब आया जाता है जब प्रश्न
- 9:00समाप्त हो जाता है। इसलिए मैं तुमसे रोज़ कहता हूँ,
- 9:06कल भी कहा मेरे बोलने से तुम मेरी शरण में नहीं आ सकोगे।
- 9:12मेरे से प्रभावित मात्र हो सकोगे। इनफ्लूएंस हो जाओगे, मेरे से शरण
- 9:20होना और प्रभावित होना ये तो बिल्कुल अलग बात है।
- 9:26तुम मेरी बातों से बोलोगे कि शैली से प्रवचन से गायन शैली से
- 9:32प्रभावित हो सकते हो। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि तुम
- 9:35शरण में आ जाओ। शरण में तो जो एक बार आ गया वह
- 9:42फिर शरण से पार नहीं जा सकता। शरण तो ऐसी है पॉइंट ऑफ फन और
- 9:48रिटर्न वहाँ से वापस नहीं आ जाता। मैं रोज़ देखता हूँ, बी के के
- 9:55अंदर समर्पण करने वाली स्त्रियाँ बाहर आकर उनके लांछन बताती हैं।
- 10:04भाई जब हमें पता ही है, जहाँ मर्द और औरत मिलेंगे।
- 10:11अकेले में तो चूमा, चाटी होगी ही होगी भाई, हम नहीं जानते क्या?
- 10:18फिर हमें बताने की क्या जरूरत है इसलिए बाबा ने कहा के में मत बना
- 10:27लेना। तुम सही शिष्य हो, तुम तन मन, धन
- 10:37से शिष्य हो इसलिए कम्यून मत बना लेना, बस यह चीज़ मैं जो सोच रहा
- 10:45हूँ तुम्हें। यह मार्गदर्शन कर देना इट इज़
- 10:49सुफ्फिसिएंट मोर दैन सुफ्फिसिएंट। यह पर्याप्त से भी ज्यादा है।
- 11:02तो जब तक अर्जुन ने नहीं कहा शिष्य से अहम।
- 11:07मैं आपका शिष्य हूँ, मैं आपकी शरण हूँ, मैं समर्पित हूँ शादिमांकुम
- 11:13प्रबन्धम पहला कदम यह है फर्स्ट स्टेप फिर कृष्ण अपनी पोटली खोलता
- 11:25है। ज्ञान अमृत की वर्षा करते हैं।
- 11:36तुम चाहत करते हो कि हम वैसे ही बने रहे भला गंदा नाला अगर चाहे।
- 11:45कहें कि मैं ऐसे ही अपने भीतर गंदगी को भी हो जाने और फिर देसी
- 11:54घी भी बहना शुरू हो जाए। यह कैसे संभव होगा?
- 12:01नहीं उस गंदे नाले को पहले अच्छे से साफ, स्वच्छ क्लीन।
- 12:06हाइजीनिक करना होगा फिर वह नदियां बन सकता है घी की।
- 12:13ऐसे में 1000 वासनाओं से विषयों से।
- 12:22काम, क्रोध, लोगो, अहंकार विषय सब्जेक्ट्स तुम कितने कितने
- 12:26सूचनाएं नहीं इकट्ठे किए हो, ये सब सब्जेक्ट्स हैं।
- 12:30इनको कोई आवश्यकता नहीं है। जहाँ जाना है उसके लिए किसी
- 12:36शास्त्र की आवश्यकता नहीं है। उसके लिए महत्त्व, मार्गदर्शन की
- 12:43आवश्यकता है। एक बार गुरु से मार्गदर्शन ले लो
- 12:52और मिलेगा तो तुम्हें अपने भीतर से मेरे पास से सिर्फ उसकी
- 12:57सुगन्ध। बाद बगीचों में तुम्हें फूलों की
- 13:03सुगंध मिला करती हैं। तुम फूल नहीं हुआ करते, फूल तो
- 13:07तुम्हें ही होना पड़ेगा। फूल होने के लिए अपने भीतर वो बीज
- 13:12अंकित करने होंगे जो 1 दिन अंकित होकर।
- 13:17पुष्प बन सकें तो पहला स्टेप तुम सीखने की तैयारी जुटाओ।
- 13:29सिंह का समाधान की तैयारी तो बहुत हो गई।
- 13:32जन्मो जन्मो से तुम्हारा मन पूजता है, तुम्हें पता भी नहीं।
- 13:40उन्हें नहीं पता ये प्रश्न आते कहाँ से हैं?
- 13:43ये मन से आते हैं, अहंकार से आते हैं, अज्ञान से आते हैं और अहंकार
- 13:51प्रश्न कैसे कर सकता है? शुद्धतापूर्ण?
- 13:57अहंकार परीक्षा लेने के लिए प्रश्न पूछ सकता है।
- 14:01शाम मानव की तरह सीखने के लिए प्रश्न नहीं पूछ सकता।
- 14:12मात्र शब्द हैं क्या उसे पता है कि पर्चा लिखा नहीं जा सकता।
- 14:19अच्छी तरह जानता है वो। और बागेश्वर भी जानता है कि मैं
- 14:24ठग हूँ। पैसा कमाने के लिए, लोगों को
- 14:28दिखाने के लिए कितना झुंड बैठा है।
- 14:30इनमें से एक नहीं बजेगा। थोड़ा सा एक रिवॉल्वर की गोली चला
- 14:34के दिखा दो, एक भी ठहर जाए तो मुझे कह देना ये भक्त थोड़ी है।
- 14:42ये भगोड़े हैं कि भागने को तैयार हैं।
- 14:46थोड़ा सा फायर कर दो, देखो उड़ते हैं कि नहीं?
- 14:51भक्त वो होता है जो महाभारत के बीच में कृष्ण के कहने से डटा
- 14:57रहता है और गाड़ी उठा लेता है। और वाणनों की वर्षा कर देता है और
- 15:06मृत्यु की नींद चरनद्र में सुला देता है।
- 15:08वह होता है शिष्य जब तक शिक्षक की अंकाक्ष नहीं की अर्जुन ने।
- 15:21तब तक कृष्ण भी अपने मूल स्वरूप में नहीं आए और तुम भी जब तक अपने
- 15:28भीतर उस योग्यता को अर्जन नहीं करोगे।
- 15:37जीस भूमि के भीतर मैं बीज हूँ और वो।
- 15:40अंकुरित हो के पुष्प पल्लवी तो हो जाए तब तक मैंने बीज खराब नहीं
- 15:46करना है, ये समझ लेना है किसी और के काम आएगा और फिर समय भी क्यों
- 15:58बर्बाद करना है? अब रामकृष्णा परमहंस का समय खराब
- 16:03हो गया, क्योंकि आधा अधूरा ज्ञान अज्ञान से ज्यादा बुरा होता है।
- 16:16आधा अधूरा ज्ञान अज्ञान से ज्यादा बुरा होता है।
- 16:24और विवेकानंद आधा अधूरा ज्ञान दिए दिए उठ गए स्वामी जी मेरे माँ बाप
- 16:30भी हैं कांपने लग गया, कांपने लग गया, ठीक है बेटा, बाहर आ जाओ मैं
- 16:38कोई। डिक्टेटर तो हो ही नहीं तानाशाह
- 16:43सर तुम्हारी इच्छा थी तुम ढूंढ़ते फिर रहे थे मेरे सामने कितने
- 16:47लोगों को तुमने पूछा इसीलिए तुम्हारे ऊपर शक्तिपात किया कि
- 16:53तुम कब से तरस रहे हो? और मैं जानता था जब वक्त आएगा तब
- 17:03इस धरती में बीज दफन कर दूंगा, क्योंकि यह धरती बीज में बीज को
- 17:12अंकुरित करने में सक्षम है। लेकिन मैं नहीं पाया कि मेरा
- 17:18अंदाज गलत है। ज़रा सोचिएगा विवेकानंद जैसा धीर
- 17:31वीर पुरुष महाबली। अगर कहता है कि मैं समर्पित हुआ
- 17:38और फिर भी समर्पित नहीं हो पाता कब जाता है, तो तुम कहाँ खड़े हो
- 17:44इस युद्ध के मैदान में बताओ। हजारों सार नर के सपने बेनूरी
- 17:53पिरोती है, हजारों सार नर के सपने बेनूरी पिरोती है, बड़ी मुश्किल
- 18:03से होता है चमन में बेदावर फायदा तुम क्या समझते हो?
- 18:07जातिर माथा टेक दो। और गुरु से थोड़ा सा बाहरी बाहरी
- 18:15दांतों को फाड़ के कह दोगे, मीठी जबान से लजत भरी जबान से कह दोगे?
- 18:24के। शक्तिपात कर दो शक्तिपत कर देगा
- 18:32कर भी देगा, तुम झेल पाओ वही हाल होगा जो विवेकानंद का हुआ और
- 18:38विवेकानंद तुम्हें पता नहीं है कैसी मौत मरेगा?
- 18:42इसी के कारण के आधे न खुदा ही मिला न बसा ले।
- 18:48न इधर के रहे न उधर के रहे। आधे अधूरे ज्ञान अज्ञानी से भी
- 18:54ज्यादा खतरनाक होते हैं। विवेकानंद को पूजने वाले हिंदुओं
- 19:00को तुम्हें विवेकानंद की असलियत का पता नहीं।
- 19:07वह कायर थे, कायर वही होता है जो ट्रांसफॉर्मेशन से डर जाता है और
- 19:14विवेकानंद डर गया। रामकृष्णा ने हाथ खींच लिया।
- 19:20रामकृष्णा के पास वोकबुलरी नहीं थी।
- 19:25बोलने का वो कंठ नहीं था, विवेकानंद के पास था, नरेंद्र के
- 19:32पास था, उसने कहा ठीक शिष्य तो ठीक है, मैंने जो जाना उसका
- 19:40प्रचार तो ठीक कर देगा दुनिया में।
- 19:45लेकिन उसका अंदाज गलत निकला। इससे अच्छा तो विवेकानंद हाथ ना
- 19:58रखवाता। सिर पे तो ज्यादा बेहतर था जगतरफा
- 20:02बना रहता। 21 से बीमारियों से युक्त हो के
- 20:05हमारा विवेकानंद कौन सी बिमारी जो उसकी नहीं थी?
- 20:13अब तुम चौकना मत। विवेकानंद पश्चिम में चले गए।
- 20:22और जब व्यक्तिपूर्ण पहुंचता नहीं पहुंचता नहीं तो वह बाहर की चूँ
- 20:30चमक धमक से आकर्षित हो जाता है। विवेकानंद पश्चिम में।
- 20:39शिकागो में जाकर 1893 के अंदर उसने भाषण दिया।
- 20:48उस भाषण में कम से कम 20 कमियां हैं।
- 20:51मैंने अच्छे से सुना जब मैंने कहा ये तो किसी मूर्ख की आवाज इसको
- 20:55कौन स्वामी कहता है? यह स्वयं आयामी कब से हो गया?
- 21:01शिकागो के उस भाषण का मैंने एनालिसिस किया।
- 21:0620। कमी निकली उसमें जो कि भीतर के उस
- 21:10अंतः पर जाकर प्रभावी नहीं होते, ठीक भी था, क्योंकि उस अंतः पर
- 21:15पहुंचा भी नहीं। जहाँ तक पहुंचे हो वहाँ तक की ही
- 21:19खैर खबर बता सकते हो? कैसे कहते का चारबाग के लेने देने
- 21:25के नियम हैं इस संसार में कोई अछूता जाता नहीं।
- 21:31कैसे कहते का मार्क उसकी परमात्मा है।
- 21:35कैसे कह देंगे? आचार्य क्या एनलाइटनमेंट होती है
- 21:39बस इतना है कि इनको मैं सरल और सच्चे आदमी कहता हूँ भाई झूठ नहीं
- 21:49बोलते बस ये लोग पांच न तुम पहुँच जाओगे इनसे अच्छे।
- 21:54कहीं अच्छे लेकिन जो चीज़ आप पाने चले थे वो तो इनके पास भी नहीं।
- 22:03घर से तो हम चले थे खुशी। की तलाश में।
- 22:17खुशी की तलाश। में गुमराह में खड़े थे।
- 22:30वो ही। साथ हो।
- 22:33लिए खुद दिल से दिल की। बात कही और रो लिए।
- 22:48यूँ हसरतों के दाग मोहब्बत। में धो लिए।
- 22:58खुद दिल। से दिल की।
- 23:02बात कही और रो लिए। जो जितना जानता है उतना ही वह कह
- 23:15सकता है इसलिए गुस्सा मत होना। अगर ये लोग कहते हैं कि
- 23:19एनलाइटनमेंट नहीं होता तो को ठीक इसलिए मैं किसी से शस्त्र करता
- 23:25हूँ। उस विराट का शास्त्रार्थ कैसे
- 23:30करूँगा जो शब्दों में आता है? शास्त्रार्थ तो शब्दों में किया
- 23:35जाता है, शब्दों से ही जीत होती है इसलिए मैं अष्टावकर के सारे
- 23:41शास्त्रार्थ की कहानी गलत रहता है।
- 23:45अष्टावक्र क्या इतना भी नहीं जानते थे, कोई शब्दों में नहीं
- 23:48आते। क्या अष्टावक्र के पिता इतना नहीं
- 23:53जानते थे? ये शब्दों में जो आता नहीं उस पर
- 23:59परी चर्चा तुम करोगे कैसे? जब मैं तक इतना जानता हूँ तो
- 24:07अष्टावकर नहीं जानते थे क्या? क्या जागे वल्क नहीं जानते थे
- 24:14क्या? गार्गी नहीं जानती थी कृष्ण भगवान
- 24:17ने किसी के साथ शास्त्र रद्द किया?
- 24:22जो उस पर पहुँच गया वो शास्त्रार्थ नहीं करेगा क्योंकि
- 24:25वह जानेगा। उस अवरात को शास्त्र में बांधा
- 24:28नहीं जा सकता। शास्त्र तो महज अक्षर है और वह जो
- 24:35शब्दातीर्थ है वह जो अखरा नालो अखर है।
- 24:40वह अक्षर में समाहित होगा कैसे? जो सही सही उस दल को छुए हैं,
- 24:47प्रथम पड़ाव पे ही कह देगा प्रमुख ही कैनट बी एक्सप्लेन्ड इन
- 24:53वर्ड्स। वह बांधा नहीं जा सकता न तुम्हारे
- 24:59मंदिरों की चारद्वारियों में न तुम्हारे मस्तितों के
- 25:03चारद्वारियों में तुम बना लेते हो क्योंकि तुम मुर्ख कोई ढहा देते
- 25:13हो, कोई ढहा देता है। तो तुम्हारी उन झूठी मान्यताओं को
- 25:19ठेस पहुँचती है जबकि वो मान्यताएँ झूठी तुम्हारी ही थीं।
- 25:23तुमने ही ठोंपी थी, किसी ने कहा कि परमात्मा सिर्फ मंदिर के अंदर
- 25:28होता है। तुम्हारे ही मन ने कहा या
- 25:32बुद्धुओं ने, जिनसे तुमने सीखा? वह जानते नहीं थे इसलिए जैसा
- 25:38जानेंगे वैसा ही तो बोलेंगे। यहीं से सारी मूलता की कहानी शुरू
- 25:45होती है। अगर सच में कृष्ण को मानने वाले
- 25:51या भीतर जानने वाले होते। तो जब गजनबी ने सुमन का अंदर लूटा
- 25:59तो ये मोटे पेटों वाले कोने में छिप कर कृष्णा कृष्णा कृष्णा ऐसे
- 26:07न करते तान के खड़े हो जाते मर जाते हैं।
- 26:13इससे ज्यादा और क्या होगा? कट जाते शोर वीर तो मरा ही करते
- 26:23हैं, साधारण वीर भी मरा करते हैं, साधारण लोग भी मना करते हैं।
- 26:31मृत्यु किसी को छोड़ती नहीं सुबह ना कृष्ण को, ना राम को, ना
- 26:36परशुराम को, ये तो तुम्हारी कहानी है के वो अमर है अमर अमर कोई नहीं
- 26:42है, अमर तो एक ही तत्व है, वो सबके भीतर है, वो चाहे दुष्ट हो,
- 26:48चाहे ज्ञानी हो। वह अमर का तत्व तो सबके भीतर है,
- 26:55जिसे नैनम छदंत शस्त्राणी नैनम राहती पाक नैन चैनम क्रेधन क्या
- 27:00फ़ोन है मारो ता वह बताइए किसके अंदर हैं?
- 27:07वह तो रोम रोम में हैं। मेरे रोम
- 27:29रोम रोम में बसने। आले।
- 27:36राम जगत के स्वामी यंतरियामी मैं तुझसे क्या मानू, मैं तुझसे क्या
- 27:52मानू? मेरे रोमरो