Latest / Baba ji Vijay Vats / 21 Mar 25 - मनोविज्ञान की ताकत! क्या सिर्फ सोचने से ही परिस्थितियों को बदला जा सकता है?
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- 0:04दो तरह के विद्यार्थी होते हैं एक रट्टा फिकेशन एक समझने वाले हैं।
- 0:22रेट्टाफ़िकेशन एक समझने वाले सब्जेक्ट को हृदय में उतार लेना।
- 0:37और एक इन शब्दों को रख लेना नंबर किसके जाता हूँ रट्टाफिकेशन वाले
- 0:48के लेकिन रट्टाफिकेशन वाला व्यक्ति?
- 0:58छात्र एग्जाम के बाद भूल जाएगा क्योंकि उसने याद कुछ नहीं किया।
- 1:11वह रिसर्चर नहीं बन पाएगा। इनवेंटर नहीं बन पाएगा, कोई खोज
- 1:15नहीं कर पाएगा क्योंकि उसने रट्टा मारा, शब्दों को रट्टा और
- 1:27न्यूरॉन्स की। शब्दों को संग्रहीत करने की कुछ
- 1:33क्षमता है। वो शब्द अगर न्यूरॉन्स में पड़े
- 1:39रहे और हृदय में न उतरे तो वह आपकी स्मृति में रह जाएंगे।
- 1:46सिर्फ। लेकिन एक वो होते हैं जो
- 1:56न्यूरॉन्स में तो रखना ही होता है, फिर हृदय में उतार लेते हैं।
- 2:07वह काबिल छात्र हैं। कोई रिसर्च भी करेंगे।
- 2:14नई इन्वेंशन भी करेंगे। ये रिसर्च करने वाले सभी लोग
- 2:20इनमें से कम से कम रट्टाफिकेशन कोई नहीं सभी ने याद किया।
- 2:26हृदय में उतारा, हृदय में उतार कर खोजबीन में लग गए।
- 2:32ये क्यों हुआ? कैसे हुआ?
- 2:43ऐसे ही अध्यात्म में होते हैं। संसार में उस छात्र के नम्बर
- 2:51ज्यादा आएँगे जिसने रट्टा लगाया लेकिन वह क्षणिक थे।
- 2:57बस वह एग्जाम के बाद भूल जाएगा। इस छात्र की समित्री में थोड़ी
- 3:06देर के लिए न्यूरोन्जा संग्रहित कर लेंगे थोड़ी देर के लिए
- 3:14चिपकेगा फिर भूल जाएगा। लेकिन जो सच्चा जिज्ञासु है, वह
- 3:27निरंज में इकट्ठे करेगा, स्मृति से नीचे हृदय में ले के जाएगा,
- 3:31समझेगा और वह ही कुछ भला कर सकता है, अपना भी और देश का भी।
- 3:40जीतने भी आज तक। इनवेंटर हुए रिसर्चर हुए अल्बर्ट
- 3:45आइंस्टीन सराइजेट न्यूटन रदरफोर सर एडिशन स्टीफन हॉकिंग।
- 4:03इन सभी ने रैटानिल लगाया। इन सभी ने हृदय में उतारा गहरे
- 4:12तलों पर ले गए और जो गहरे तलों पर ले जाता है।
- 4:22वही ट्रांसफॉर्म हो पाता है वो बदल पाता है, खुद को भी बदल पाता
- 4:30है और सबसे पहले खुद को ही बदलना होता है।
- 4:40तू भी बदल एम् फलक ज़माना बदल गया पहले खुद बदल ले फिर फलक को बदल
- 4:55लेकिन ये छात्र जो सिर्फ रत्नंत होते हैं ये टाइम टाइम फिश हो
- 5:01जाते हैं। नंबर भले ही इनके ज्यादा आ जाये
- 5:11लेकिन ये ज़िन्दगी में कर कुछ नहीं पाते, ये ज़िन्दगी में फेल
- 5:18ही रहते हैं। एक वो होते हैं।
- 5:26जिन्होंने याद किया निरंज में समाया भीतर हृदय में उतारा और
- 5:32इन्वेंशन की। वो ही इन्वेंशन कर पाते हैं।
- 5:36ऐसा ही है क्या तुम अब 6 साल के बच्चे को आप पूरी गीता सीखा दो?
- 5:44रट्टा वेकेशन है, गीता का एक एक अक्षर बता देगा, व्याकरण सहित बता
- 5:56देगा। ज़रा भी गलती ने कहा गीत लिखने
- 6:05वाला गीत गुन गुना ने वाला। आप दोनों को समान मत समझ लेना गीत
- 6:14लिखने वाले में जो कला उसकी इंटेलिजेंस से आई समस्या आई,
- 6:26लेकिन गीत जो गुनगुना आया। उस समय से नहीं गुनगुनाया।
- 6:33फिर तो नकल की मात्रा तो 6 साल के बच्चे को आप गीता सीखा सकते हो।
- 6:43गीता तो आप तोतों को भी सीखा सकते हो।
- 6:48गीता भी बोलता है राम राम, कृष्ण, कृष्णा, राधे, राधे पर उस राधे
- 6:57राधे का क्या मतलब है? यही तोते तुम्हें सीखा रहे हैं
- 7:04राधे राधे पालतू तोते। इन्हें चाहे पिंजड़े में बंद कर
- 7:16लो पर इनको चोरी मिलनी चाहिए। तोते में तोते में कोई कला नहीं
- 7:32तोते में कुछ ऐसी समझ गई। कोई यंत्र नहीं जो समझ सके राधे
- 7:42राधे होते का है कृष्ण कृष्ण होता का है रट सकता है तुमसे ज्यादा
- 7:52बढ़िया ढंग से बोल सकता है तोता लेकिन तोता।
- 7:57तोता ही होता है जिसने याद कर लिया महज सारा खोपड़ा भर लिया वह
- 8:19शास्त्रार्थ में तुमसे जीत जायेगा बिलासक।
- 8:24कबीर जानते कितना है नान का कितना जानते हैं वो बात अलग है, उनका
- 8:38ब्रेन कुछ नहीं जानता। उनके निग्रोंश के पुर्जे कुछ नहीं
- 8:43जानते। लेकिन वो उसके पास पहुँच जाते हैं
- 8:47जो सब जानता है, जो सर्वज्ञ है, प्रश्न है।
- 9:05मुझे होने वाली बातों का पता चल जाता है और थोड़ी देर में वो बीत
- 9:16जाती है। बहुत सी ऐसी घटनाएँ जो मुझे पहले
- 9:28पता चल जाता है। ये क्या है?
- 9:35बाबा बोला तो मैंने बहुत बार बाहर से नहीं मिलता है।
- 9:47तुम एआई कितना बढ़िया बना लो। चलेगा।
- 9:54तुम्हारे स्मृति के हिसाब से तुम आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स से
- 10:03पूछोगे, मेरे बारे में तो कुछ नहीं बता सके, क्योंकि फील्ड ही
- 10:08नहीं हो? जो फील्ड होगा, विकिपीडिया में
- 10:16उनके सारे क्षेत्र में उनमें से चेंज निकालेगा और कैलकुलेशन बड़ी
- 10:23शानदार है। उसकी बता देता इसको कुछ।
- 10:32लेकिन मेरे बारे में कुछ नहीं बता पाएगा क्यों?
- 10:43क्योंकि मेरे बारे में किसी तरह की कैलकुलेशन या किसी भी तरह की
- 10:47बात उसे पता ही है। बताएगा क्या तुम्हारा ही बनाया
- 10:53हुआ तोता है? व्यक्ति के भीतर एक ऐसा तल है
- 11:07जहाँ खुद खुद खुदा विराजमान है। ये सबके भीतर होती है।
- 11:26कोई एक व्यक्ति इसका उपार्जन नहीं करता।
- 11:35ये जन्मजात मिलती है सबको उपहार के रूप में जिसने सृष्टि को साझा
- 11:43उसने सभी को बराबर दिया। कोई जान ले, कोई ना जाने यह उसकी
- 11:52मौज है। विद्या का आनंद कौन उठा पड़ेगा जो
- 12:11बात को अपने भीतर गहरी लेकर जाएगा।
- 12:17वही साइंटिस्ट हो पाएगा, वही रिसर्चर हो पाएगा।
- 12:23पुनरुक्ति करने वाले रेपुटेशन करने वाले ना खुद को बदल पाते
- 12:32हैं, ना फलक को बदल पाते हैं। तू भी बदल ए फलक ज़माना बदल गया
- 12:47वो ही सर संत कहते हैं, खुद को बदलो जो व्यक्ति आपकी दशा को
- 13:00बेहतर नहीं कर सकता। जो व्यक्ति आपके जीवन के एस ओह
- 13:12आराम को नहीं बदल सकता, सुख साधन का आपको दान नहीं दे सकता, आपको
- 13:23सुख ही नहीं कर सकता। वो स्टेशनों का नाम बदल के बदलाव
- 13:28समझ लेते हैं। स्थानों के नाम बदल कर या तो कोई
- 13:39भी मोरू रख कर सकता है। क्या ज़ोर लगता है टिकट्स पर?
- 13:46स्टेशन का नाम ही बदलना मुश्किल आती है आपके जीवन की।
- 13:56फौद बदल कर आपके जीवन को ग्लोरी देकर रस पूर्ण बनाकर आपके व्यवहार
- 14:07के जीवन को बदल कर सच्चा सेवक वही कहलाता है।
- 14:15अन्यथा दिखावा है और दिखावा तो कोई भी करता रहे दिखावा करना एक
- 14:26भ्रम है भ्रम पैदा करना है। इसलिए मैं जब किसी ज्ञानी को
- 14:42त्रिपुंड लगाए, मेकअप किए, लिपस्टिक सजाए मेकअप करके बोलते
- 14:47देखता हूँ तो मैं उसकी असलियत को अच्छी तरह से पहले ही पहचान जाता
- 14:52हूँ। बिना एक शब्द सुने।
- 14:56किसने मेकअप किया, क्यों किया, बस यहीं से जवाब मिल जाएगा।
- 15:04बाकी तो दिखावे हैं, बाकी तो मीडिया कर लेगा।
- 15:11आपको करने की जरूरत कहाँ है? बुद्धू के बुधू रहो प्याज और लहे
- 15:18सुन के ऊपर प्रवचन करो, रावण से बातचीत करो सरायजक, न्यूटन नगर
- 15:33यहाँ होते हैं। किसी कोठड़ी में बैठकर राधे राधे
- 15:41जप रहे होते हैं। गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत कोई और
- 15:49ही खोजता हो और शायद अभी तक अन खोजा रह जाता हूँ।
- 16:01तुम्हारे यहाँ जो भी कोई आएगा, रेपुटेशन को लग जाएगा, क्योंकि
- 16:05प्रभाव ही ऐसा है। धरती का प्रभाव बड़ा होता है।
- 16:17आज मूर्खों ने इस पावन धरा को मूर्खताई में बदल दिया।
- 16:26शांतनु अपनी पत्नी के साथ जा रहे व्यंगी के ऊपर उनका पुत्र श्रवण
- 16:32कुमार बड़ा आज्ञा खरित तीर्थों की यात्रा कराने या स्नान कराने के
- 16:42लिए निकल पड़ा। एक स्थानों ऐसा बात तो मैंने पहले
- 16:48भी बताई सब जगह डोंट फिरा पर बड़ा खुशी होता सेवा कर के आए माँ बाप
- 16:58का उपकार कहीं दिया जाता है, नहीं दिया जाता।
- 17:05लेकिन माँ बाप हिरण्यकशब नहीं होना चाहिए, फिर उनको तो जूते ही
- 17:14पर नहीं होना। एक स्थान पे जाके बहकी बहकी बातें
- 17:26करने लगा। श्रवण कुमार और शांतनु समझ गए।
- 17:36बोलने लगा मुझे जन्म क्यों दिया था यही कुछ करने के लिए बस ऐसे ही
- 17:45मर मटु। बोझा ढोते ढोते बडबडाने लगा अन्धो
- 17:51की एक रग ज्यादा होती है। कान ज्यादा काम करते थे।
- 17:57यद् भी मन ही मन थोड़ा थोड़ा बहुत राहत लेकिन शांतनु को सुन क्या
- 18:03उसकी पत्नी को सुन क्या? शांतनु बड़ा समदार था, बोला पुत्र
- 18:13श्रवण कुमार हाँ पिता पुत्र वापस सर।
- 18:24यहाँ से आया यहाँ से पीछे पांच चार मील पीछे ले जाओ अब क्यों था,
- 18:35वो पूछता नहीं था श्रवण कुमार से ओह श्रवण कुमार ही क्या जो ये पूछ
- 18:40ले क्यों पिताजी? गोबर गणेशों को तुम श्रवण कुमार
- 18:46कहता प्रश्न भी ना पूछे हो सकता है अंधा है नहीं दिखाई पड़ा होगा।
- 18:58एक मुख्य अंश ही नहीं है इसके पास शरीर का तो ज़रा पूछ ही लूँ
- 19:03क्यों? लेकिन नहीं।
- 19:05श्रवण कुमार कभी नहीं पूछा करते। गोबर गणेश कभी पूछा करते हो इसलिए
- 19:16गणेश की पूजा होती है। गणेश चापलूस था।
- 19:27मुझे कह देते हैं कल बड़े फ़ोन आए बाबा आपने मिट्टी कर दी, कहीं का
- 19:34नहीं छूटा। बेरोजगारी पहले ही बहुत है, ये कह
- 19:40के 1200 के लो का होता है। मैंने कहा कि कितने का होता है
- 19:51भाकर तुंडे महाकाय महाकाय का अर्थ?
- 19:57तुम्हारा आम पहलवान किंग कांग 200 किलो का था।
- 20:04तो महाकाय का अर्थ 1200 किलो, तो मैंने कम कह दिया यह हाथी की जो
- 20:12सुंद लगाई, हाथी का जो मुख लगाया, यह एक प्रतीक था।
- 20:19यह बड़ा भारी है। हाथी जितनी है इसकी।
- 20:25वेट और तुमने हाथी का मौका लगा दिया कोई समझदारी की बात मूर्खता
- 20:34की भी हद होती है, तुमने ज़रा भी नहीं देखा।
- 20:44बेचारी को मलांगियों को स्त्रियों को सिर्फ पकड़ा दिया, नवरात्रों
- 20:54में आन भी न खाओ और जिसके ऊपर बैठी दुर्गा वो शेर मास से कभी कम
- 21:05कुछ खाता ही नहीं। वो शेर तू तो नहीं पीता, तुम गलती
- 21:09में मत रहना और उसकी सवारी करती है दुर्गा और उसके हाथ में शस्त्र
- 21:16पकड़ा दिए ये ठीक लगता है तुम्हें मुझे तो बड़ा 850 साल का।
- 21:27प्रतीक ही चुनने थे कोई अच्छे से चुन लेते है धन की देवी को आप
- 21:36उल्लू की सवारी बता देते हो कहाँ उल्लू सहेगा लक्ष्मी का भार?
- 21:46ऐसा उल्लू मैंने तो कभी नहीं देखो, तुमने देखा हो तो बता देना
- 21:52होते होंगे। बिलाशक होते होंगे।
- 21:58उल्लूओं की कमी है, क्या कोई कमी और चूहों की कमी है?
- 22:08जो गजदंत का भार उठा ले 1200 किलो तो हमने कहा गजा आना ना हाँ तो
- 22:20हमने गज ही बना दिया। हाथी का सूंड लगा दिया कहानी, बना
- 22:26दी कहानी बनानियों में बड़े तक्ष हैं हम बस थोड़ा सा इशारा और
- 22:33कहानी तो मिनट में गढ़ी जाएगी। ऐसे ही शस्त्र थोड़ा लिख दिए वेद
- 22:37व्यास ने नहीं लिखे, वेद व्यास ने स्टेम्प लगा दी वेद व्यास की।
- 22:48कजान न वक्रतुंडे महका है, सूर्यकोटि संप्रभा निर्वैगनम कूरू
- 22:58में दे सर्व कार्य शु सर्पदा तो चालाक था।
- 23:07चला तो जाता नहीं था, ओह ऊपर से चूहे के सोहर ही बेचारा चूहा तो
- 23:15वैसे ही पे लग जाएगा, उसका कुछ उम्र मलिदा निकल जाएगा, चलेगा
- 23:20कहाँ से पर भलीभाँति जानता है? उठ गया भाई भाई के पास तो मोर था,
- 23:38वह तो कभी न कभी वापस आ ही जाएगा, लेकिन चालक था और चालक लोग।
- 23:50अग्रगणी हो जाते हैं अगर पूजा हो जाती है ये ब्राह्मण अगर अग्रे
- 23:56अग्रे ब्राह्मण है, पहले पूजा जाती है क्या?
- 24:03तो उसने कहा और तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
- 24:10ये हाथी जैसे पांव चला तो जाता नहीं, वहाँ भी बैठा ही रहता है।
- 24:16मैं कलश में बहुत बार गया हूँ, ऐसा मत करो, तुम खिखी करने जाता
- 24:24है। थोड़ी सी बात है, ऐसे तो कोई खिखी
- 24:27करने वाली बात भी नहीं है। तो हाथी बिचारा क्या मुकाबला
- 24:35करेगा ऐसी देह काय ठीक कहा है महाकाय तो उठा, धीरे धीरे धीरे
- 24:46किसी तरह। परिक्रमा कर रही और परिक्रमा एक
- 24:51नहीं सात कर ली। क्या बिगड़ता है?
- 25:01जब तक कार्तिक आएगा? कार्तिके को तीन लोगों का सफर
- 25:05करना है। इतनी जल्दी तो आने वाला भी नहीं।
- 25:13तब तक सात परिक्रमा बड़े आराम से कर लूँगा और कुछ ही घंटों में सात
- 25:18परिक्रमा कर ली। बैठ गया पार्वती ने पूछा पुत्र?
- 25:32गणेश तुम गए नहीं कार्तिके तो कब के गए और तुम्हारे पास हुई सवारी
- 25:41थोड़ी सी ऐसा ही वैसा है तुम नहीं जाओगे क्या माता में तो जा लिया।
- 25:51तेरे लोकी का चक्कर लगाना मैंने तो सात चक्कर लगा लिए वो कैसे
- 25:56पुत्र माँ ते मेरी तरलोकी तो आप ही हैं मेरे पिता, मेरी माता यही
- 26:07तो मेरी तरलोकी है। माँ के पांव में जन्नत होती है
- 26:14सही लिखा है इस्लाम में होती भी है, समझदार है चालाक तो प्रथम
- 26:28पुरस्कार देने पर विवश कर दिया पार्वती ने।
- 26:32कहते नहीं हैं प्रभु आपको प्रथम पुरस्कार देना ही पड़ेगा, इसको
- 26:38विजेता घोषित करना पड़ेगा। बिलकुल माँ के पांव तले जन्नत
- 26:43होती है, अब स्त्री को थोड़ा जल्दी।
- 26:51बाबा बीच में लिया जा सकता है। शिव से नहीं रहा उसने शिव तो
- 26:59घबराहट पैदा कर देते, शिव दांडव नृत्य शुरू कर देते।
- 27:08उसने कहा पर बच्चे से माँ तेरे पांव के नीचे जन्नत मैंने सात
- 27:16फेरे निकाल लिया वो जब आएगा आएगा मुझे विजेता घोषित कर दे।
- 27:25और पार्वती ने शिव के कान में फुस फुसाया और शिव ने भी हाथ ऊपर उठा
- 27:32दिया। रेफरी की तरह चल हो गया काम,
- 27:37कार्तिक के हार गया। अभी बेचारा लौटा भी नहीं था।
- 27:50यहाँ मेहनतें काम नहीं करती यहाँ चालाकी काम करती हैं, चालाकियों
- 27:55की बिसात उठाई जाती है, यहाँ घरों में भी राजनीतियां होती हैं।
- 28:00ये तुम्हें पता नहीं चलता, बात अलग है, बड़े ले जाते हैं, छोटे
- 28:06रह जाते हैं, उनका कसूर है चार 6 साल बाद में जन्म लिए तो उनको
- 28:16भुगतना भी चाहिए। हर दुआ मेरी किसी दीवार से टकरा
- 28:33गई। हरदुआ मेरी किसी दीवार से टकरा गई
- 28:53बेअसर। होकर मेरी फरियादवा बस आ गई।
- 29:25हरदुआ मेरी किसी। दीवार से टकरा गई।
- 29:39बेअसर होकर मेरी फरियादवा बस आ गई।
- 29:52इस जमीन से आसमान शायद बहुत ही दूर है सामने।
- 30:09तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर है खुदा हर फैसला तेरा मुझे।
- 30:26मंजूर है, सामने तेरे तेरा बंदा बहुत मजबूर है।
- 30:55यह एक ऐसा फॉर्मूला है जिससे तुम उस मुकाम पर पहुँच जाओगे, जिसके
- 31:03बाद तुमने कहा। मुझे आने वाली घटनाओं का पता चल
- 31:08जाता है। पहले उसकी रजा में राजी होना
- 31:16सीखो, अच्छा हो, बुरा हो। तुम किसी प्रकार की कोई हेलहुजत
- 31:29मत करना स्वीकार कर लेना जैसा है, है कोई किसी को बदल नहीं पाया कभी
- 31:37आगे पीछे 2 साल पहले बाद सब चले जाते हैं।
- 31:46यह शुरुआत है। अगर यह शुरुआत तुम नहीं कर सकते
- 31:55तो अध्यात्म का मार्ग तुम्हारे लिए नहीं है।
- 32:03फिर आचार्यों की बात सुना। वो ठीक लगेंगे क्योंकि खोपड़ी से
- 32:10बोलेंगे और खोपड़ी को खोपड़ी की बात बड़ी अच्छी लगती है।
- 32:19तरक को तरक की बात बड़ी सुन्दर लगती है, समझा आ जाती है।
- 32:33खोपड़ी को बात जचेगी अचरज होगी, वो कहेगा बल इकठ्ठा करो धन वक्त
- 32:41पे काम आएगा और वक्त पड़ेगा भी कि नहीं पड़ेगा, ये कैसे मालूम?
- 32:49तुम्हारी यह शंका के वक्त पड़ेगा और धन काम आएगा, तुम पर वक्त डाल
- 32:55ही देगी, क्योंकि तुमने मान ही लिया तुम्हें इन गहरे गूढ़
- 33:02विज्ञान का मनोविज्ञान का पतन है। मैंने सुना है पहले चाचा जाने के
- 33:16बाद बताया करते थे, मुझे एक आर्य सामाजिक व्यक्ति उसके पास कोई
- 33:25संदेश ले गया। तुम्हारे पुत्र की मृत्यु हो गई,
- 33:37सच घटना है, अक्सीडेंट हो उसमें मृत्यु हो गई और सच में मृत्यु हो
- 33:51गई थी। ये कहानी मुझे मेरे चाचा जान
- 33:56बताया करते थे। सबसे छोटे चाचा संकल्प की बात है,
- 34:07मनोविज्ञान को समझो तो मनोविज्ञान को समझते नहीं।
- 34:12जीवन में भी कामयाबी के कुछ ढंगें तो आर्य समाज जी ने कहा नहीं न,
- 34:28मैं तुम्हारी बात को कतई नहीं मान सकता।
- 34:34मेरे पुत्र का अक्सीडेंट हुआ होगा ये तो ठीक दुर्घटना का शिकार हुआ
- 34:41होगा, लेकिन व्रत तो नहीं हो सकती?
- 34:44उसकी क्यों बड़ा हैरान हुआ? मेरे छोटे चाचा मेरे को बताया
- 34:57करते है ओम प्रकाश तो मेरा मित्र था वो, मैंने कहा दुर्घटना तो हुई
- 35:06होगी लेकिन वह मर गया ये मैं नहीं मानता।
- 35:15मरेगा नहीं वो इसलिए तुम जाओ उसे कुछ नहीं होगा वह है साँझ घर आ
- 35:27जायेगा वह व्यक्ति खुद देख के आया था।
- 35:34डेड बॉडी सड़क पे पड़े हुए कहीं देर बहुत देर बाद उसकी डेड बॉडी
- 35:42उठाई गई, हॉस्पिटल पहुंचाया गया और सांच वह बच्चा घर आ गया।
- 35:55क्या हुआ? संकल्प अगर इतना प्रबल हो, तुम तो
- 36:03पहले से ही मानो करो क्योंकि ऐसा बुरा दिन आएगा तो पैसा कम आएगा,
- 36:10लेकिन कबीर क्यों नहीं जोड़तें? फ्रीद क्यों नहीं जोड़तें कुछ सब
- 36:15छोड़ छोड़ के चले आते हैं वो तो बड़ा संकल्प गहरा है कोई भी पति
- 36:20नहीं आएगी। क्यों छोड़ के चले जाते हैं
- 36:24महावीर धन धान से भरपूर संपदा सम्राट?
- 36:28है। भीतर ये भाव ही नहीं आता।
- 36:35ये शंका ही उत्पन नहीं होती कि कोई दूर दिन आएगा और अगर 2 दिन
- 36:40आएगा तो निपटा लेंगे। फाका रख लेंगे।
- 36:44उस दिन क्या है और 2 दिन कभी नहीं होता।
- 36:52फिर अपनी शर्तों पे भीख मांगते हैं तुम 2 दिन की बात करते हो।
- 36:59महावीर कहते हैं भगवान प्रभु सुन मैं भिक्षा वहाँ से लूँगा।
- 37:05जहाँ से मेरी शर्तें पूरी होंगी और ऊंट पटांग शर्ते लगा देते हैं,
- 37:10लेकिन परमात्मा को उसकी बात माननी पड़ती है।
- 37:16तुम तो पहले से ही कह देते हो कोई बुरा दिन आएगा तो धन धन के बिना
- 37:23कौन कौन आएगा? धन के सिवा सब भाग जाते हैं, धन
- 37:31भी कहाँ काम आता है धन की तिजोरिया भरी पड़ी हो और प्यास
- 37:38लगी हो और तुम्हें उठने की ताकत न हो तो धन तुम्हारे लिए पानी नहीं
- 37:43ले के आएगा। पानी तो कोई व्यक्ति ही ले के
- 37:47आएगा और तुम्हारा बच्चा या किसी और का बच्चा संकल्प इतना गहरा हो
- 38:00तो दूरदिन कभी आता नहीं और अगर आता भी है तो वह दूरदिन जैसा
- 38:05लगता। अब इन बातों को बड़े गहरे से सुन
- 38:09लेना बस ये लोग पूछ लेते हैं तुम्हारे बेटे की लाश घर के
- 38:19प्रांगण में पड़ी और तुम्हें देखने भी नहीं गए।
- 38:24संस्कार में साथ नहीं गए। अंतिम अरदास में साथ नहीं गए।
- 38:31पुत्र की शादी में नहीं गए कोई खुशी नहीं, कोई गमिन है समतुम योग
- 38:38उचित है न शोक कर? न जश्न मना।
- 38:45जब भीतर ऐसी प्रवृत्ति हो जाए तो कौन जाएगा?
- 38:50कहाँ जाएगा सब जगह वो ही तो है, तुम पहले से ही मान लेते हो।
- 39:07मनोवैज्ञानिक रूप से पहले ही तुमने हार मान ली।
- 39:10क्या हमें कभी पैसे का गुलाम होना पड़ेगा?
- 39:14फिर होना ही पड़ेगा, यही तुम्हारी कमजोरी है, तुम मन के गुलाम मन
- 39:25तुम्हारा गुलाम नहीं है। जीस दिन मन तुम्हारा गुलाम हो
- 39:34जाता है उस दिन तुम हुक्म करोगे और फलक बदल जायेगा आसमान बदल
- 39:42जायेगा जा रहे हैं ईसा। समुद्री तूफान आ जाता है बहुत
- 39:51गहरा हिल जाता है, सब कुछ लड़खड़ाने लगता है, जहाज़ रोने,
- 40:01चीखने की आवाज़ें और शांत मुद्रा में बैठे हुए हिस्सा।
- 40:09मस्त अपने भीतर उतरे हुए हैं। अचांट की नज़र पड़ती है कि यात्री
- 40:16की हैं, ये बहरा है, अनंत है, इसे दिखाई नहीं पड़ता।
- 40:26ईशा को हिलाया गया, तुम बहरे हो क्या तुम्हें दिखाई नहीं पड़ता
- 40:34क्या हुआ तुम देखते नहीं ये चीखो पुकार, ये तूफान का शोर, ये
- 40:42डगमगाता हुआ जहाज़। अभी मरे के मर ऐसा कहने लगा तो
- 40:52इससे कह दो शांत हो जाए और फिर ध्यान में चले गए।
- 41:06एक बार भी उस व्यक्ति को लगा कि यह व्यक्ति पागल है तो भी बात है
- 41:14फागलू जैसी अब तुम्हें नहीं लगता कि कृष्ण पागल है?
- 41:19बिल्कुल लगता होगा, लेकिन तुम बोलते नहीं।
- 41:21डर के मरे कबीर पागल हैं। नानक पागल हैं।
- 41:26तुम्हें लगता नहीं संतों की बातों को न मानकर उन पर कटाक्ष करके उन
- 41:36पर प्रश्न करके एक तुम एक बात दर्शाते हो?
- 41:43कि तुम्हें इनकी बातों पर यकीन है?
- 41:49कहाँ माना तुमने कृष्ण को माँ बेगम शरणं वृक्ष।
- 41:53वो कहते हैं, मेरी शरण में आजाओ कृष्ण कहते हैं मैं ही वरमात्मा
- 42:01हूँ। तुम्हें हँसी नहीं आती आनी चाहिए।
- 42:07ये कुछ पागलों जैसी बातें नहीं हैं।
- 42:13बिल्कुल हैं। हँसी हिस्सों में आती होगी, भीतर
- 42:20से आती होगी। अगर तुम्हें नहीं आती तो
- 42:22मुसलमानों को आती होगी। अगर मुसलमानों को नहीं आती तो इस
- 42:27संयोग को आती होगी। योधियों को आती होगी यह बंदा पागल
- 42:31लगता है मैं परमात्मा अरे परमात्मा तो बड़ा क्रोज़ी है।
- 42:40वह तो फूंक देता है सब कुछ अपनी अपनी मान्यता में कृष्ण अपने तल
- 42:47से बोलता है। संत जब बोलता है, बड़े तल बदलता
- 42:50है, खोपड़ी से लेकर अस्तित्व तक के तल बदलता है, बड़े तल बदलता है
- 42:56और तलों के साथ भाषा भी बदल जाती है।
- 43:01मुझे लोग कह देते हैं पापा आपने कब क्या बोल दिया कुछ पता नहीं।
- 43:08अभी तो उस विराट को प्रणाम कर रहे थे और अभी कह रहे हो मेरी सस्ती
- 43:13से कोई मेरी इच्छा के बिना। एक कण नहीं रेत का ले जा सकता।
- 43:20ये बात कुछ जसते नहीं बाबा मैंने कहा कुछ मेरे फर्क तो है बिलाशक
- 43:31तुमने ठीक कहा, ये फर्क मेरे में नहीं।
- 43:36सभी संतों में सभी सियाने एकमत सभी के दिमागों में फर्क है।
- 43:44यह मैं जो बोलता बोलता कहना शुरू हो जाता हूँ कि मेरी सृष्टि से
- 43:52तुम लाख कोशिश कर लो। एक पानी की बूंद तो बहुत दूर एक
- 44:00जल का वाष्प नहीं लेके जाओगे। एक रेत का जर्रा नहीं ले जा
- 44:08सकोगे। तुम कहाँ जाओगे सभी जगह में ही तो
- 44:11हूँ तो तुम्हें कुछ लगता नहीं? कि ज़रा कुछ सकरू ढीले हो गए लगना
- 44:19तो चाहिए बिलकुल लगना चाहिए तो तुम्हें लगता नहीं, कृष्ण मुर्ख
- 44:31लगता होगा, लेकिन तुम हँसते नहीं। क्योंकि तुम्हारी मान्यताएँ बड़ी
- 44:36गहरी हैं। सनातन के साथ कृष्ण के साथ चिपके
- 44:40हुए हो, लेकिन मुसलमानों को लगता होगा ईसाइयों को लगता होगा
- 44:46योदियों को लगता होगा तुम्हें नहीं लगता?
- 44:53क्योंकि तुम चिपके हो और जो चिपका है उसे नहीं लगता तुम्हारे घर का
- 44:59बच्चा अगर कतल करके आ जाये तो कहाँ कतल किया है इसने कतल तो
- 45:04छुरी ने किया होगा, इसने थोड़ी किया है तुम्हारे पास लाख तर्क
- 45:11होते हैं। सुराख तो गोली ने किया होगा, इसने
- 45:20थोड़ी किया है, मरा तो गोली से इसने थोड़ी मारा है।
- 45:27तुम्हारे पास 1000 तर्क होते हैं, कुछड़ में बैठा लेती हो, अपने
- 45:31बच्चे को नहीं नहीं, इसने नहीं किया होगा।
- 45:36हमारा बच्चा ऐसा है ही नहीं, छपकाहटों के परिणाम हैं, शुरुआत
- 45:46होती है यहाँ से। अगर तुम स्वीकार कर लो, वह जो
- 46:04करता है ठीक करता है और भले के लिए ये करता है यहाँ से स्वीकार
- 46:10कर लो, तो तुम अपने भीतर उतरना शुरू हो जाओगे।
- 46:17एक बार प्रयोग के रूप में करो वहाँ पहुँचो तो जाके देखोगे तो
- 46:23मज़ा ही कुछ और है, लेकिन थोड़ी देर में तूफ़ान थमानी शोर शराबा
- 46:37बहुत है। उसने सास के दो चार लोगों को कहा।
- 46:41यह पागल ऐसी बातें करता है, हमें तो पागल ही लगेगा।
- 46:48मैंने कहा ईसाइयों को कृष्ण पागल लगेंगे।
- 46:56हिंदुओं को हजरत पागल लगते हैं। कोई आश्चर्य की बात नहीं है, ये
- 47:08चिपके नहीं हैं। बस तुम कृष्ण से चिपक गए हो इसलिए
- 47:13सब ठीक लगता है। माँ बाप को क्यों लगता है मेरा
- 47:17बच्चा नहीं कतल कर सकता चिपकाहट के कारण सत्य में तो कतल कर सकता
- 47:23है। मैं 1 दिन गुस्से में था।
- 47:31मैंने शीतला माता से कहा, जब कोई भक्तों ने काम किया है तो मैं गधे
- 47:35के ऊपर बिठा दिया है। हम लोग कह लिया कहती बात तो खराब
- 47:41थी। उन्होंने घोड़े के ऊपर बिठाते थे।
- 47:43मैंने कहा चलो घोड़े पे नहीं तो छोटे घोड़े पे बिठा देते खच्चर पे
- 47:47बिठा देते ये कोई ठीक क्यों नहीं किया तो तूफान तो नहीं हटा तो
- 47:58उसने कहा फिर देखा जाएगा, मरना तो है ही।
- 48:03रोते हुए क्यों मरे? हँसते हुए मरे थोड़ा मजाक कर ले
- 48:10उसने हिलाया हिस्सा को, अरे उठ मोड़ ले तू ही कह दे, इसको थम
- 48:17जाएगा, हमसे तो नहीं थमना। इसने आँखें खोलें उठे धीरे से भरा
- 48:30हुआ स्वरूप आसानी तरंगों से लबा लब।
- 48:41और वेव से कहने लगा, तूफान से कहने लगा रुक जाओ, तूफान तुरंत
- 48:49रुक गया। संतों के पास हम क्यों व्यथा कहते
- 49:00थे? जाके तो मैं इसका गहरी बात किसी
- 49:03ने बताई नहीं। संत रोज़ 1000 तर बदलता है।
- 49:14कभी प्यार से बात करता है, आप से क्षमा मांगता है, कभी आपको दंड
- 49:21देने की बात करता है? यह प्रकृति मेरे अधीन है।
- 49:25मैं प्रकृति तुम्हे दंडित करूँगा। ये दोनों बातों में जमीन आसमान का
- 49:32फर्क है। लेकिन एक ही व्यक्ति कहता है अपने
- 49:35मुख से तुम कारण नहीं समझ पाते। कारण सिर्फ इतना कि संत तल बदलता
- 49:42है, खोपड़ी से अस्तित्वों तक है और इसमें बड़े पड़ाव आते हैं,
- 49:49इसलिए बड़ी। नहीं, वो तो प्रकार की बातें कहता
- 49:56है, वो ये ऐसे ही झगड़े नहीं होते।
- 50:02तुम शास्त्र अर्थ करते हो और मैं शास्त्र अर्थ करने वालों को मूर्ख
- 50:06कहता हूँ, मुझे तो कभी कभी लगते हैं।
- 50:09क्या शंकर आचरे ऐसे थे? मुझे कभी शक होता है या पहुंचे
- 50:13हुए नहीं थे, तो क्या अगर जो व्यक्ति जानता है वह विवाद का
- 50:25विषय नहीं? वाद विवाद में वो आता नहीं है, वह
- 50:30विवाद क्यों करेगा? कुछ शक होता है शंकर क्यों वो थी
- 50:40काख में उठाकर झंडा उठाते हैं झंडा तो मूर्ख का पहलवान उठाता
- 50:45है, जिसमें अहंकार की मात्रा प्रबल होती है।
- 50:49मुझे कोई हरा नहीं सकता। क्या शंकर आचार्य ऐसे थे?
- 50:53मुझे कभी शक होता है, बहुत वार शक होता है लेकिन शमन भी होता है,
- 51:02उसकी बातों को लेकर शमन होता है, उसके चरित्र को लेकर बड़ा विवाद
- 51:10उठता है। क्यों करेगा ऐसा व्यक्ति?
- 51:13जिसे पता है ही कैनट बी एक्सप्रेस्ड इन वर्ड्स वह
- 51:19शास्त्रार्थ क्यों करेगा? पागल हो के आए जो अस्तित्व में
- 51:27समा गया सारा अस्तित्व वह हो गया। वह अस्तित्व में अपना झंडा गाड़ने
- 51:40क्यों निकलेगा? क्यों झंडा उठाया फिरेगा जगह जगह?
- 51:46क्यों? मुंडन मास को कहेगा, आओ शास्त्र
- 51:49रथ करो। क्यों कहेगा भारतीय से शस्त्र?
- 51:53गुरु? कुछ दाल में काला तो लगता है
- 52:06जीसको अपने ओमनी प्रेसेंट होने का पता चल गया।
- 52:11आई ऍम ओमनी प्रेसेंट। सर्व व्यापक हूँ मैं बिन नावें
- 52:17नाहीं को ठहाऊ मेरे बिना कोई जगह न सब जगह मैं ही में हूँ और वह
- 52:26व्यक्ति जिसने विशेषता अपनी शब्दों का अध्ययन किया हो।
- 52:31ईशा वस्त्र में दम सर्वमम जात की जगत याम जगत वह शास्त्रार्थ क्यों
- 52:35करेगा? वह क्यों होके का झंडा उठाए जीसको
- 52:41पता है वह व्याख्यात नहीं हो सकता।
- 52:44शब्दों में वह शब्दों में व्याख्यात करने के लिए गुहार
- 52:48क्यों करेगा? आओ शब्दों से लड़ें।
- 52:51इसका मतलब वो जानता नहीं है। लगता कुछ ऐसा है वह जानता नहीं कि
- 53:00मैं सर्व व्यापक हूँ फिर ये पुकार झूठी है।
- 53:09ये पुकार गलत है। शिव, हम शिव, हम शिव, हम।
- 53:27अमर हातुमा सच्चिदान, मैं हूँ शिव, हम शिवम्, शिवम् शिवम्, मैं
- 53:45शिवम्। सर्व व्यापक हूँ सर्व शक्तिमान
- 53:48हूँ सर्वज्ञ हूँ क्या सर्वज्ञता पर कुछ भ्रम हो गया है?
- 53:55शंकराचार्य को जहर जो वह सर्वज्ञता का दिखावा करना चाहता
- 54:01है मंडल में भ्रम ही जगता है। शरीर को छोड़ दे ना तो एक कला है,
- 54:11यह तो मैं अक्सर ही कहता हूँ। यह तो आम सिद्धियों को लेने वाला
- 54:16व्यक्ति शरीर को छोड़ के चला जाता है।
- 54:18मैंने बहुत सी चमत्कार्यों से दिखाया।
- 54:22शराब की बोतल जाकर ठेके से लाया। सब जगह बहरा है, कर्फ्यू लगा है,
- 54:32पंजाब वो दूर है जब उत्पाद है, इमरजेंसी है, कर्फ्यू लगा है।
- 54:43कोई व्यक्ति घर से नहीं निकल सकता, सो शराब के ठेके तो बंद
- 54:47होंगे ही तो वह व्यक्ति अपनी सिद्धि के बल पर जाकर ठेकों में
- 54:54से शराब ले आता है और उससे पूछता है पीने वाले से तो मार का बताता
- 54:58है? और आज वो व्यक्ति जी होता है,
- 55:03धर्म प्रचार कर रहा है लेकिन राम राम का पता तो उसे कहाँ से लेके
- 55:18आएगा? मेरा क्या है थोड़ा सा और आगे हो
- 55:24लूँगा पंजाब में ही लगा है। विश्व में तो नहीं लगा, कहीं न
- 55:29कहीं किसी ठेके पे निकल ही पड़ा तो संकल्प ही तो करना जहाँ जेनटेन
- 55:43की शराब हो, वहाँ ले चल वहाँ से उठा कर लिया था।
- 55:47यह तो कलह है और मैंने साक्षात् लोगों को तो कही।
- 55:55यहीं हलवाई की दुकान से जाकर तीन किलो लड्डू ले आया।
- 55:59क्या तू कला है? शरीर को छोड़ देना तो कोई इतनी
- 56:03बात नहीं है और शरीर को सुरक्षित रखने वाले लोग हैं पीछे से।
- 56:10जो उसकी रक्षा करते रहेंगे, उनके चक्करों को जागृत करते रहेंगे,
- 56:14उनके चक्करों को शक्ति देते रहेंगे और लोग ऐसे आज तो मौजूद
- 56:21हैं। मैं सदा कहा करता हूँ कब से बोल
- 56:24रहा हूँ भाई तुम्हें संदेह तो होगा, मैं भी जानता हूँ।
- 56:29बात ही संदेह की है, मैं भी तुम्हारी जगह होता संदेह करता तुम
- 56:34आपके संदेह को मिटा दो लोग हैं ऐसे मैं जाता हूँ गोरशाला के लिए
- 56:43सैर भी हो जाएगी। पंछियों को चौगां भी डल जाएगा और
- 56:47रास्ते में दो मित्र खड़े हैं। ताला खोल दो बाबा ग्राहक खड़ा है,
- 56:54ताली गुम हो गई है, पानी का छींटा मारता हूँ, ताला खुल जाता है।
- 57:02यहाँ कोई पूर्व नियोजित नहीं है। यह कोई लिखी लिखाई स्क्रिप्ट नहीं
- 57:15है, असमर्थ होती हुई घटनाएं हैं और बहुत से लोग आज साक्षी हैं।
- 57:22मिल जाएंगे अभी जीवंत है भाई पूछ लो फिर कल को तुम कहानी रखोगे,
- 57:27अभी तो मेरी बायोग्राफी मैंने ही बताई है।
- 57:31कल को मैं चला जाऊंगा, लोग बताएंगे तुम कहोगे साक्षी कौन तो
- 57:39आज ही पूछ लो। साक्षी कौन था उस वक्त?
- 57:48कौन कहता है हम पिक्चर देखने वालों को के बाबा अच्छा है तो आ
- 57:54गई अब काजू और देखती पिक्चर के स्क्रीनिंग के ऊपर काजू बरसने
- 58:02लगते हैं। ये लेखा जो।
- 58:06शाम मानो को कृपा करके ये बात पता नहीं उसने इनाम रखा हुआ है और उसे
- 58:19पता नहीं वो रखो। जैसे इनामों का लालच होता है वह
- 58:27जी व्यक्ति। यह कलाएँ नहीं है भाई यह
- 58:30सिद्धियां हैं, सिद्धियां नहीं दिखाई जातीं, कलाएँ दिखाई जाती
- 58:37हैं और वह लोग कह भी देते हैं ईमानदार होते हैं, इतने तो
- 58:41ईमानदार हम भी हैं, कलाएँ होती तो बता देते हैं, कलाएँ हैं।
- 58:47लेकिन सिद्धियां हैं तो बता रहे हैं सिद्धियां।
- 58:53वह शराब का पुआ फूट जाता है लेकिन महाराज जी की कसम उठाई इसने वो
- 58:59शराब पी रहता है। मैंने कहा रुक जा ये कंच भीतर चला
- 59:04जाएगा। मुझे याद आ गए दयानन्द आज मरेगा
- 59:09यह क्योंकि निश्चित ही कांच टूट गया है ये कांच भीतर जाए ख्स के
- 59:17लेकिन बच के वह जिसकी सौगंध खाई थी वह भी बड़ा बली है।
- 59:23प्रेवानंद जी महाराज अल्लाह की मर्जी से होता है।
- 59:48अगर ये सूत्र तुम्हारे हृदय में गहरा उतरना शुरू हो जाए तो उस
- 59:53सूत्र के साथ तुम भी गहरे उतर हो गए।
- 59:58और एक तल ऐसा आ जायेगा। कभी कभी सहज भी घटना घट जाती है
- 1:00:03अपने अतीत के जन्मो के प्रयास के कारण और जीस तल को तुम छोड़कर
- 1:00:11जाओगे इस शरीर से विदा हो गए देखिये तुम एक घर छोड़ देते हो।
- 1:00:18क्या तुमने जो कमाया जो इंटेलिजेंस जीस पोस्ट पर तुम वो
- 1:00:24घर छोड़ें? क्या वो छीन लिया जाता है?
- 1:00:27नहीं वो तुम्हारे पास रहता है तुम मात्र घर बदलते हो।
- 1:00:35तुम्हारी चेतना प्रपोर्शनेट रूप से उतनी ही रहती है, जीतने तुमने
- 1:00:42कमा ली वह कभी कम नहीं होती, आगे बढ़ सकती है सो ये ये लोग कहते
- 1:00:50हैं कि बैल बन गया, गऊ बन गया। कुत्ता बन गया।
- 1:00:57ये खुद बने होंगे, इनको तजर्बा होगा।
- 1:01:01मैंने तो सभी खंगाल लिए। आदमी बनने के बाद कभी ऐसा मुकाम
- 1:01:07नहीं आया जब पशु बना हो। हाँ आदमी ऐसा बन सकता है कि काम
- 1:01:12पशुओं जैसे करें। मैं तो फिर पशु ही हो क्या जो
- 1:01:20बोजाड होते हैं सारे दिन वो गधे ही तो होते हैं बस गधे की योनी
- 1:01:26में नहीं होते हैं, जो गंदगी में लेटते हैं सारे दिन।
- 1:01:33मांस माटी खाते हैं वो सुअर ही तो हो गए सुअर की योनि में नहीं हुए
- 1:01:39बस इतना ही है तुम मराहुओं का मांस खाते हो तुम कब्रिस्तान से
- 1:01:50कम हो क्या? कब्रिस्तान में मुर्दे ही तो दफन
- 1:01:55होते हैं और तुमने अपने पेट को कब्रिस्तान बना लिया है, फिर तुम
- 1:02:03कहते हो हम चिंता हैं नहीं, नहीं तुम कब्रिस्तान हो।
- 1:02:10यहाँ मुर्दे दफ़न होते हैं वो कब्रिस्तान ही तो होता है जब
- 1:02:19तुमने ये मान लिया अल्लाह की मर्ज़ी से सब होता है एखुदा हर
- 1:02:26फैसला तेरा हमें मंजूर है अगर ये मनुष्य दिया जाए।
- 1:02:33तो तुम धीरे धीरे भीतर खिसकने लगोगे, धीरे धीरे भीतर खिसकने
- 1:02:38लगोगे लेकिन ये मुश्किल बड़ा है। बातें कहने में बड़ी आसान होती
- 1:02:47हैं लेकिन जब तुम उन्हें इम्प्लिमेंट करते हो।
- 1:02:54तो भाग खड़े होते हो, बड़ी ही मुश्किल है।
- 1:02:58कल मैंने नाम के ऊपर बोला। मैंने कहा रेपुटेशन करना तो कोई
- 1:03:03मुश्किल नहीं है रिपीट तो तुम चॅप्टर भी करते हो।
- 1:03:09सब्जेक्ट भी रिपीट करते हो याद करने के लिए, लेकिन मिलता क्या
- 1:03:15है? रिपीट राम राम करो राधे ही राधे
- 1:03:19करो लेकिन किस वृत्ति से करो कैसे करो?
- 1:03:26नम जपोज़ ऐसे ऐसे ध्रुव प्रहलाद जब।
- 1:03:44हरि जय से दंगा होता है, पहले मानोगे उसकी रजा में राजी हो के
- 1:03:54तेरा हर फैसला हमें मंजूर है। अच्छा हो या बुरा, हम नहीं
- 1:03:59सोचेंगे जो तू करता है, अच्छा ही करता है।
- 1:04:05और जब तुम्हारी ऐसे ही मनोवृत्ति दृढ़ हो जाएगी, इस भूमि को दृढ़
- 1:04:09करते रहना अगर भीतर जाना है तो अगर बाहर की चीजें इकट्ठी करनी
- 1:04:16हैं तो इस वृत्ति को तोड़ते चले जाना, आचार्यों की तरह ध्यान
- 1:04:20रखना। ये दो ही रास्ते हैं अचारों का
- 1:04:26रास्ता गड़बड़ रास्ता है खिचड़ी रास्ता कहता हूँ मैं।
- 1:04:30वो कहते हैं, बल भी इकट्ठा करो और गीता को भी उपदेश देते हैं, लेकिन
- 1:04:37अपने ढंग से तोड़ मरोड़ देते हैं। गीता को तो तोड़ा मरोड़ा।
- 1:04:41मैं उसे तुगल ने भी थोड़ा बरोड़ा अपने ढंग से उसने प्रख्यात किया।
- 1:04:54एक फॉर्मूला इस फॉर्मूले को दृढ़ भूमि करते रहे।
- 1:05:04अगर भीतर जाना है तो मैं बार बार कहता हूँ, दो ही रास्ते हैं और
- 1:05:10दूसरा रास्ता भी ज्यादा है, बढ़िया जरूरी अगर तुम ढंग से
- 1:05:16चलोगे तो पहला रास्ता तुम्हें पहले अपनाना चाहिए भोग लो।
- 1:05:27हम जानते हैं भोगने से दुख मिलेगा नहीं मिलेगा, सुख और सुख नहीं
- 1:05:36मिलता इसलिए तो फिर फिर काम ना करते हो।
- 1:05:39एक बार और बना दो प्राइम मिनिस्टर।
- 1:05:42फिर एक बार और बना दो, तृप्त नहीं हुए अतृप्ति का परिणाम है ये बार
- 1:05:50बार मांगना अभी मदहोशी हुई नहीं है और ज़रा सी दे सा की।
- 1:06:04और ज़रा सी और और ज़रा सी दे दे शाखी और ज़रा सी और कैसे रहूं चुप
- 1:06:16के मैंने भी ही क्या है? हो छवि तक है वा की मधोशी तो अभी
- 1:06:24हुई नहीं, कैसे रहूँ चुप के मैंने पी ही क्या है?
- 1:06:34हो छवि तक है वा की? और ज़रा सी दे दे साथी और ज़रा सी
- 1:06:43और दृढ़भूमि करते रहना नहीं तो तुम बाहर की पीते रहनो।
- 1:06:56पदार्थ इकट्ठे करना कोई नहीं रोकता है।
- 1:06:59जो रोकता है वो मूर्ख है। सीधा रास्ता तो यही है।
- 1:07:04यहीं से शुरू होता है पहले भोगो भोगने के साधन जुटाओ, बुध छोड़
- 1:07:10पाए क्योंकि उन्हें भोग दिया, महावीर छोड़ पाए।
- 1:07:15क्योंकि उन्होंने भौंक लिया। जैनियों के 24 के 24 तीर्थंकर
- 1:07:21राजा थे। क्यों पहुँच पाए क्योंकि सब भौंक
- 1:07:24लिया राजा ही पहुँच जाता है पहुँच सकता है जनक पहुँच गए राजा थे।
- 1:07:32और कबीर अगर पहुँच गए ना, नगर अगर पहुँच गए तो अवश्य ही पिछले जन्म
- 1:07:37में इतनी चेतना के मालिक हो गए, राज़ किया होगा हमने कभी न कभी
- 1:07:43किसी न किसी जन्म में राज़ किया होता है जो एक घर को छोड़ते दूसरे
- 1:07:50घर में आए। लेकिन हमारी चेतना तो हमारे संग
- 1:07:54रहेंगी, वो तो अगर कोई एसएस पी है तो एसएस पी रहेगा, बस उसकी बदली
- 1:08:00होगी। सरकार ने बदली कर दी, किसी और
- 1:08:07सैटेशन की कर दी, किसी और स्टेट की कर दी?
- 1:08:12लेकिन उसकी गुणवत्ता को कौन छेड़ेगा?
- 1:08:16बस यही तुम्हारा हाल है। तुम शरीर छोड़ते हो, घर छोड़ते
- 1:08:21हो, दूसरे घर में प्रवेश करते हो, दूसरे शरीर में प्रवेश करते हो,
- 1:08:26वासान श्री जी ऋणनीयता विहाय। नवानी घृणाती नरो प्राणी तथा श्री
- 1:08:33रानी विहाय जीर्ण ननयानी सयाती नवानी देहि भगवान कृष्ण यही तो
- 1:08:38कहते हैं जैसे हम पुराने कपड़े बदलकर नए वस्त्र दान कर लेते हैं।
- 1:08:44ऐसे ही आत्मा देही। पुराने घर को त्याग कर नए घर को
- 1:08:54ग्रहण कर लेता है। शुरुआत होगी यहाँ से देखिए अगर
- 1:09:01भोगने से अभी मन नहीं भरा। अभी ना जाओ छोड़कर ये दिल अभी
- 1:09:13वराने तो जबरदस्ती में छोड़ दे, फिर कमाओ पदार्थ मेरी बातों में
- 1:09:23मत आ जाना। कुछ नहीं धरा है इन बातों में जब
- 1:09:28तक के तुमने भोग न लिया हो फिर फिर आत्मा भटकेगी वहीं जहाँ से उठ
- 1:09:35के आए थे छोड़ के कच्चा कच्चा फल जब टूट जाता है तो फिर कैल्शियम
- 1:09:40कारबाइड से ही पकाना पड़ता है। कच्चे मत टूट जाना जब डाली छोड़
- 1:09:50दे तुम्हें खुद से तब तो टूटना ही पड़ेगा सही रास्ता ये।
- 1:10:02सरकारों से कहो एक की जेब न भरो, सबको बाँट कर दो इसलिए बाबा नानक
- 1:10:11ने कहा, वण छको सबको भोगने दो भाई पता चले भोग में नहीं है कुछ कीरत
- 1:10:19करो काम दो सबको। बैठाया किस लिए था, क्यों झूठ बोल
- 1:10:26के आये थे और अगर झूठ बोल ही दिया तो अब राज़ सत्ता मिल गई, अब काम
- 1:10:34भी तो करो रोजगार दो भाई। हम भोग के साधन इकट्ठे करें और
- 1:10:43भोगें और देखें भोग में कुछ होता है।
- 1:10:52तुम अकेले अकेले चल देते हो, हमें भी देख लो।
- 1:11:08हम भी तो पीछे हैं। ज़रा होले, होले, चलो मोरे साझ
- 1:11:17नाम हम भी पीछे हाथ मारे। ज़रा हो ले हो ले चलो मेरे साज
- 1:11:27ना, हम भी पीछे है तिहार हमें भी भौगने के साधन दो भाई एक व्यक्ति
- 1:11:37ट्रंकों को भरे हैं भौगता नहीं देखो भौके का खाक 1000 बीमारियां
- 1:11:44चीनी नहीं खा सकता शुगर नमक नहीं खा सकता, ब्लड प्रेशर है, कुछ भी
- 1:11:51नहीं खा सकता पैंक्रियास खराब है, पानी नहीं पी सकता।
- 1:11:56गुर्दे खराब है, फिर पैसे को जोड़ के क्या करेगा?
- 1:12:02दूसरों को भोगने नहीं देता। जिनके शरीर सवस्थ हैं, राजा होना
- 1:12:08चाहिए, जो वायदा करके आए वह न भाई राजा की कद काठी मत देखना, राजा
- 1:12:16की छाती करना मत देखना, राजा की बातों को देखना गप तो नहीं मरता?
- 1:12:23झूठ तो नहीं बोलता, सच बोलता है जो करता है कहता है वो ही कहता है
- 1:12:32जो करता है यह है मापदंड राजा का। तुम्हें भी भोगने के लिए पदार्थ
- 1:12:43चाहिए। भाई और मैं तो फ़ॉर्मूला ही यही
- 1:12:47देता हूँ कि तुम शुरुआत से अगर उठ के आ गए तो बार बार जीरा वहीं
- 1:12:55जाएगा हर कदम। पे उन्हें मुड़ के देखा।
- 1:13:08उनकी महफिल से हम उठ तो आए। आंसू चा तो आंसू बराए मुद्दतें हो
- 1:13:32गईं, मुस्कुराए। मुद्दतें हो गई मुस्कराए तुम ज़रा
- 1:13:41सोचना कितनी देर हो गई तुम्हें तुम ठहाके मरके हँसी ने कारण क्या
- 1:13:48है इन अमीरों ने तुम्हारे द्रव्य के ऊपर काबू कर लिया है।
- 1:13:57तुम्हें भोगने नहीं देते और जिसने भोगना शुरू नहीं किया उसको पता भी
- 1:14:05नहीं चलेगा कि भोगो में दुख है फिर वैराग्य आएगा कहाँ से और
- 1:14:09वैराग्य नहीं आया तो वो मुक्षा जनमे की कैसे?
- 1:14:13और मुक्षा जनमे नहीं तो तुम मुक्त होगे कैसे?
- 1:14:17तुम कच्चे खिलाड़ी हो, तुम्हें पूरे मैप का पता नहीं पूरा मैप ही
- 1:14:24है पदार्थ तुमको इकट्ठा करो, राजा से कह दो, हमें भोगने को दे।
- 1:14:36हम भोग न चाहते हैं, नहीं है तो छोड़ दे, धरती सब पैदा करती है,
- 1:14:47पशु दूध देती हैं, सूरज दूध देता है।
- 1:14:53चंद्रामास की दरता बरसाता है। सब कुछ है तुम्हारे बिना भी चलेगा
- 1:15:00हमको भोगने दे चाहे शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर या वो जगह बता
- 1:15:13जहाँ खुदा का करना हो या फिर बता हम कैसे मुक्त हो जाए?
- 1:15:21पहले भोगो और भोगने का सीता रास्ता है अष्टवक्र बड़े साफ करते
- 1:15:28वो सिखाते उसे हैं जिसने भोग लिया जनक ने भोग लिया तो आजा मैं
- 1:15:35तुम्हें बता देता हूँ। घोड़े के एक पायदान से दूसरे
- 1:15:39पायदान तक पांव रखने में जितना वक्त रखता है, इतनी देर में तुझे
- 1:15:43मुक्त कर दूंगा। अगर तुमने भोंगा होता तो आज मुझे
- 1:15:48इतने बकवास करने की जरूरत नहीं थी।
- 1:15:52मुझे इतने वीडियो बहुत नहीं तो पड़ती है।
- 1:15:57और एक हिसाब से मेरे हिसाब से ये आचार्य मेरी सहायता करते हैं
- 1:16:04क्योंकि इकट्ठा करोगे वॉल तो भोगोगे।
- 1:16:07भोगोगे तो दुख मिलेगा, दुख मिलेगा तो व्रक्ति आएगी, व्रक्ति आएगी तो
- 1:16:12मु मुख सत्व पैदा होगा और मु मुख सत्व पैदा होगा तो मुक्दि होगी।
- 1:16:18ये सब एक कड़ी के हिस्से हैं, इसलिए मैं इनको प्राइमरी टीचर
- 1:16:22कहता हूँ। मुझे ख़ुशी होती है।
- 1:16:27पर तुम कुछ तो करो, आचार्यों को ही मान लो इकट्ठा तो करो अरे बाल
- 1:16:36कठा तो करो, फिर देखो इसमें कुछ है कि नहीं, तो भ्रम टूटे बुगा ही
- 1:16:42नहीं, तो भ्रम क्या खाक टूटे खा? सोने की पुशाकें डाली ही नहीं तो
- 1:16:48पता क्या चलेगा? सोने की पुशाक में सुख नहीं होता
- 1:16:53नहीं होता मशरूम खाने में सुख पता कैसे चलेगा नहीं मृत्यु को रोकता
- 1:17:00मशरूम पता कैसे चलेगा? वह भी मर जाते हैं।
- 1:17:06जो मशरूम खाते हैं, वह भी मर जाते हैं, जो सूखी रोटी खाते हैं और कई
- 1:17:12बार सूखी रोटी खाने वाले ज्यादा जीते हैं।
- 1:17:19फरीद ज्यादा जीते हैं। फ्रीदा होया 100 वर्ष का गम्बन
- 1:17:26लगी देह 100 साल और खाते क्या हैं?
- 1:17:35रूखी सूखी खाय के ठंडा पानी पी। ये कुछ जरूरी नहीं।
- 1:17:44ईश्वर की सृष्टी में सब कुछ है तुम्हें बड़े गहरे से समझा दिया
- 1:17:48है, भोगो और भोगने के इंतजाम करो और सरकार से मांगो।
- 1:17:58ये प्रथम कर्तव्य हैं तुम्हारा। इकट्ठे हो जाओ बी यूनाइटेड और
- 1:18:06इकट्ठे हो के कहो ये तुम्हारी जरूरत है भाई पेट मांगता है पापी
- 1:18:12पेट का सवाल है, खाने को दो और हम भीख नहीं मांगते?
- 1:18:19हम अपनी कमा के खाएंगे अभी जान है रोजगार तो हम मोहताज हो के भी
- 1:18:28नहीं खाना चाहते। हम कमा सकते हैं, मेहनत कर सकते
- 1:18:33हैं हमें मेहनत के लिए रोजगार तो। हम अलग से खाना चाहते हैं,
- 1:18:40स्वाभिमान की खाना चाहते हैं, हम बेइज्जती की नहीं खाना चाहते, काम
- 1:18:47दो ताकि पेट की भूख मटे और सुख के साधन पैदा करो ताकि पता चले नहीं
- 1:18:55है साधनों में सुख। फिर तुम उसकी तलाश करोगे जिसमें
- 1:19:00सच्चा सुख है और सच्चा सुख कहाँ है अल्लाह पावे सो भला ताँ लब्बे
- 1:19:10दरबार। जब ऐसी तुम्हारी मनोदशा होगी, जो
- 1:19:15परमात्मा करता है, वह मेरे भले के लिए करता है, तुम अपने भीतर उतरना
- 1:19:20शुरू हो जाओगे और उस प्वाइंट पे पहुंचना शुरू हो जाओगे, जिसे मैं
- 1:19:24जंग सुर प्वाइंट कहता हूँ। तुम पुत्र उस प्वाइंट पे पहुँच गए
- 1:19:30जहाँ तुम आने वाली बातों को देख सकते हो।
- 1:19:33वह परमात्मा तुम्हें बताता है, तुमको भी बताता है, लेकिन तुम
- 1:19:37अनसुना कर देते हो तुम्हारी आत्मा तो बहुत कहती है मत करो जब कतलोक
- 1:19:44आरत मत हराम का खाओ मत रिश मत लो लेकिन तुम शराब पी लेते हो।
- 1:19:53इसको बोलना बंद कर देते हो, इसको बेहोश कर देते हो और इस वक्त का
- 1:19:57ही लेते हो। तुम उस्तल पर पहुँच गए जहाँ
- 1:20:05परमात्मा के फरमान आते हैं, जहाँ बाबा कहते हैं जेव फरमाए तेवतवपा
- 1:20:12जेस ए लेख्या तिस शरण। जसेर ने ये लिखा यह मेरी एजाज
- 1:20:19नहीं है, जब वो फरमाए, देबते पा जैसे जैसे वह सफलण करता गया, मैं
- 1:20:27लिखता क्या? अल्लाह पावे सोपरा ऐसी मनोवृत्ति
- 1:20:39आते ही तुम भीतर गहरे खिसकना शुरू हो जाओगे।
- 1:20:42मेरी इस बात को ज्यादा रख लेना इसके बिना भीतर नहीं उतरोगे उससे
- 1:20:48पहले सारे शख्स सुबह दूर कर लेना। और कैसे दूर होंगे भोग के दूर
- 1:20:54होंगे। देखिए, भोगों का तुम तिरस्कार
- 1:20:58करते हो, लेकिन मैं तिरस्कार नहीं करता।
- 1:21:01अष्टावकर तिरस्कार नहीं करते, अष्टावकर तो बुलाते ही उसको है,
- 1:21:05जिसने भोग लिया जनु को कहते हैं तू आ जा, तुने भोग लिया?
- 1:21:14मुझे लोग कह देते हैं बाबा आपने बुलाया नहीं दीक्षक मैंने कहा
- 1:21:20पुत्र अभी तुम योग्य नहीं हो रहे तो उसको तो बुला लिया, वो तो बड़ा
- 1:21:26गरीब है, उसके पिछले जन्म के हैं, तृप्तियां हैं।
- 1:21:33बड़े, ऊंचे तल पे मैं तल देखता हूँ मैं ओह राह देखता हूँ, मैं ये
- 1:21:38नहीं देखता कि आज तुम्हारे पास क्या है, आज तो तुम नंग भी हो
- 1:21:42सकते हो लेकिन मैं तुम्हारे सभी जन्मों का निचोड़ देखता हूँ।
- 1:21:48तुम्हारा आभा बड़ा शानदार है। इसलिए यू अरे इन्वर्टेड फॉर ए
- 1:21:53इनिशिएशन आओ तुम्हें मुक्ति की गारंटी दे दो बुरा से तुम तुम
- 1:22:03गुस्सा मत मान लेना तुम भोगो भोग कर निचोड़, निकालो सीधा सब
- 1:22:09फॉर्मूला। भोगों में दुख है दुख से बैराक
- 1:22:13उत्पन्न होगा बैराक से मोक्ष और मोक्ष से मुक्ति सीधा सीधा सरल
- 1:22:21स्टेप बाइ स्टेप जीस स्तर पे तुम पहुँच गए पुत्र।
- 1:22:32यह सिर्फ तुम्हें ही नहीं मिला। कोई भी उस स्थल पर जाकर परमात्मा
- 1:22:37के फरमान पाना शुरू कर देगा। नानक उस स्थल पर पहुंचते हैं तो
- 1:22:42बोलते हैं जब वो फरमाए, वो भी बहुत से संत पहुंचे और भी बहुत से
- 1:22:50लोग पहुंचे। लेकिन पहुंचेगा कौन जिसने संसार
- 1:22:56की निरसता को जान दिया अभी तो तुमने संसार भोंगा नहीं पुत्र अब
- 1:23:03इस संसार को भोंगो सरकारों से कहो हमें भोंगने को दो।
- 1:23:13तुम बुलंद करो, आवाज़ बी जेनाइटेड तुमने इतना दम होना चाहिए कम से
- 1:23:30कम भूखे हुए तो बोलो हम भूखे। राधे राधे श्याम मिलाधे राधे
- 1:23:52श्याम मिलाधे गोविंदा। गोपाल हरि राधे, राधे शाम मिला दे
- 1:24:07गोविंदा गोपाल हरि। मेरी नैया पार लगा दे गोविंदा
- 1:24:21गोपाल रे मेरी नैया पार लगा दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे
- 1:24:41श्याम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:24:57गोपाल हरे ओम। धन्यवाद।