Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Apr 25 - Babaji Real Life Story - आपने अपने पुत्र को बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया?
Transcript
- 0:10गुरूजी प्रणब दीपक शर्मा बहुत लोगों के प्रश्न हैं प्रकाश और
- 0:28साईप्रस से। विदेशों से भी हैं भारत से भी और
- 0:40ये प्रश्न आम चित्त का आम प्रश्न मैंने आपकी बायोग्राफी पढ़ाई आप
- 0:57कहते हैं और संत भी कहते हैं उसकी मर्जी पे छोड़ दो, वह जो करेगा
- 1:07ठीक करेगा। जो करता है ठीक करता है भले के
- 1:11लिए करता है बात ज़रा भी गले से नीचे नहीं उतरती बाबा उसकी मर्जी
- 1:22पे छोड़ दो जो तू दब्बा गया सुई पर।
- 1:30और शांत इससे भी आगे निकल जाता है, अच्छा करता है और भले के लिए
- 1:36करता है और हम साक्षात खुले नेत्रों से देखते हैं कि भला भला
- 1:43कुछ नहीं इसमें तो सारा गर्व हो गया कहाँ?
- 1:50फिर आपने जंक्चर बाट की बात की, वहाँ जाकर जो कुछ मांग लिया जाता
- 2:00है, परमात्मा ततक क्षण उसे प्रदान कर देता है।
- 2:06बातें तो दिमाग में बहुत फंसीं लेकिन एक बात जो सबसे ज्यादा फंस
- 2:13गई वो ये फंस गई कि आपका जमा पुत्रपच्ची वर्ष की उम्र में मर
- 2:22गया या मार दिया गया। आपने उस स्थल पर जाकर परमात्मा से
- 2:30कहा, क्यों नहीं जहाँ बड़ा शक उत्पन्न होता है?
- 2:38आप पर भी होता है भगवान पर भी होता है जंक्चर पैंट पर भी होता
- 2:44है कैसे मानें? मानने के लिए कोई आधार तो चाहिए।
- 3:16बात बिलकुल मामूली है। आप इतनी आसानी से वर्णन कर देते
- 3:22हैं कि हमें लगता है चुटकी मारी और जंगचड़पहट के।
- 3:29लेकिन बाबा आप तो पहुंचे हुए थे। ये घटना तब हुई जब आपने सब को
- 3:35लिया था। 85 की शरद पूर्णिमा को संबोधित कर
- 3:41जाती है और उसके बाद 2018 को। पुत्र वियोग सहना पड़ता है।
- 3:59आपके लिए मामूली बात है, हम आपके जीवन से प्रेरणा कैसे लें?
- 4:09जब आपने अपने ही मृत पुत्र को जीवंत नहीं किया, आपको संज्ञा
- 4:21शून्य मान लिया जाए या पागल या झूठा या प्रपंची पाखंडी।
- 4:28आपको क्या माना चाहिए? ऐसे हजारों प्रश्न हैं।
- 4:34जरूरी भी थे या प्रश्न अच्छा है मेरे रहते या प्रश्न अन्यथा मेरे
- 4:41से बात में करते हैं। वह जो करता है, भले के लिए करता
- 4:51है सभी संत कहते हैं, अपने जीवन की नाव की पतवार उसके हाथों में
- 5:00सौंप दो, लेकिन आपकी वायग्रोफी में।
- 5:08जो बात सबसे ज्यादा अड़ी जो बायोग्राफी में आपने अपने पुत्र
- 5:14की फोटो भेजे, कृपया करके इन सब बातों का विस्तार वरन करने का
- 5:24कष्ट कीजिए तल खलेहजी में पूछे गए जब प्रश्न।
- 5:34हजारों व्यक्तियों के प्रश्न हैं और आज से नहीं आ रहे बरसों बरसों
- 5:43से आ रहे हैं और क्योंकि मैं सब बोल चुका हूँ, अध्यात्म के लिए जो
- 5:53बोलना चाहिए। तो अब आपके प्रश्नों का अधिकार है
- 6:01रहते प्रश्न आपको सत्य हो जहाँ आपकी कुण्डी फंस गई।
- 6:08गांठ ने गोल गांठ बन गए। पूछने का आपका अधिकार है, उसके
- 6:13बाद किस्से पूछो। 1983 की बात।
- 6:29है। सर्दी का महीने था, सही से मुझे
- 6:39महीना नहीं याद तारीख में नहीं याद, लेकिन इतना जानता हूँ महीना
- 6:45सर्दी का था। मुझे रात को सपना आया 83 की बात
- 7:01है अब तक मैं संबोधि को उपलब्ध नहीं हुआ था, लेकिन वो ट्रेन की
- 7:16क्रांतिकारी घटना देख चूके थे। तब तक मुझे स्वप्न ही आते थे।
- 7:26सुबह का वक्त था। बड़ा अजूबा सपना आता है।
- 7:41ये सपने हमारे अतीत के जन्मो से भी संबंधित होते हैं और अतीत के
- 7:48जन्म की। घटनाओं से भी सम्बंधित होते हैं।
- 7:52इसी जन्म के और पिछले जन्मों के क्योंकि हमारे भीतर सब कुछ
- 7:58संग्रहित है तमाम जन्मों का लेखा जोखा हमारे मित्र और वो आखिर के 8
- 8:07मिनट। वह व्यक्ति अपनी जब पोटली बांधता
- 8:13है, सब कर्मों की जो इसे घर में रहकर उसने किया है वो सब एक बार
- 8:25ही वह इकट्ठा कर लेता है जल्दी जल्दी से।
- 8:31सारी स्मृतियों को लपेटता है। उन आठ मिनटों में सबसे पहला काम
- 8:41है प्राणी यह करता है दे ही यह करता है।
- 8:49सारी समृतियों को इकट्ठा मुख्य मुख नहीं सभी क्या आप मृत्यु की
- 8:59घटना से गुजरोगे घबराना मत शास्त्रों में लिखा कि जब व्यक्ति
- 9:06मरता है। तो जैसे लाखों बिच्छू यक्षंट डंक
- 9:12मार रहे हैं। इतना दर्द होता है होगा ही उसको
- 9:16होगा जिसने कुकर्म किया, जिसने कुकर्म नहीं की, ये संताना शाहनी
- 9:24बना अपनी मर्जी से। संसार को चलाने की उसको नहीं
- 9:29होगा। ये बड़ी शांति से जाएगा जिसने
- 9:34सारी उम्र लोगों की कब्रें बनाकर उन कब्रों को सीढ़ियों की तरह
- 9:41इस्तेमाल करकर अपनी पद्बियाँ ऊंची की हूँ।
- 9:45उसको तो डंक मारेंगे। बिछु निश्चिंत हैं क्योंकि प्राणी
- 9:53को अंत में अपनी सभी समृतियाँ एकाग्र करके पोटली बांध के जाना
- 9:58होता है और सब इकट्ठा कर लेना होता है।
- 10:03जो जो भी घटा। मुख्य नहीं जो जो भी घटा ऐसे
- 10:10व्यतीत होता है, वह आपको लगेगा। ये 8 मिनट 8 दिन जैसे हो जाते हैं
- 10:20क्योंकि वहाँ वक्त का पैमाना कुछ और है।
- 10:26डायमेंशन ऑफ टाइम बदल जाता है। वो आज के डॉक्टर कहेंगे।
- 10:378 मिनट। लेकिन उस तल पर जो बैठा अपनी
- 10:42समृतियों को एकाग्र कर रहा, वह 8 मिनट नहीं गाएगा।
- 10:47उसके लिए तो 8 दिन है। धीरे धीरे सभी जैसे हमने घर
- 10:55छोड़ना है हम द्वार दरवाजे। सभी अलमारियाँ नौकर सब छान लेते
- 11:05हैं, छत पर दिखाते हैं सब कहीं कोई पेच रहत नहीं क्या ज़रा भी
- 11:14तिनका यहाँ छोड़े तो नहीं जाता हूँ?
- 11:20सभी उसे पोर्टल में लपेट लिया जाता है, जीसको मैं सुपर सेंसिटिव
- 11:25कंप्यूटर कहा करता हूँ, उन आठ मिनटों में यहाँ के हिसाब से बोल
- 11:34रहा हूँ। व्यक्ति अपनी सारी समृतियों को
- 11:39एकागार करके फीड करता है। बाकी अपनी सारी और पोटलियाँ भागता
- 11:45है। कर्म समृतियाँ वासनाएँ कल्पनाएँ
- 11:53योजनाएँ। सभी बांध लेता है, सभी बांधनी
- 12:00पड़ती है। अंत में बेला आगे जाना पड़ेगा।
- 12:03इस घर को छोड़ना है दूसरे घर में प्रवेश करना।
- 12:09यह सब प्रकृति की मौजूदगी में होता है।
- 12:15क्योंकि प्रकृति उसके कर्मों का लेखा जोखा देखकर उसको अगला जन्म
- 12:23अनुकूल परिस्थितियों में देती है जो उसके अनुकूल बनता है।
- 12:27अब हिटलर के लिए जो गर्व चुना जाएगा।
- 12:32वो माँ राक्षी सी होगी और बुद्धि के लिए जो गर्व चना चाय का वो माँ
- 12:40देवी हो के। 83 की सर्द रात मुझे सपना आया ये
- 13:03स्वप्न, ऐसे ही नहीं आ जाते ये सारी धरा।
- 13:12एक बार भी यही समझलो मैं तो सारी सृजन ना बोलूँगा कई बार हम दूसरे
- 13:18ग्रहों से भी आ जाते हैं। यहाँ कोई एक नहीं है जहाँ पर जीवन
- 13:24हो खोज लोगे धीरे। धीरे।
- 13:27अभी बच्चों का अभी साइंस विकसित नहीं हुई।
- 13:35अभी साइंस बच्चा है। धीरे धीरे सभी लोग खोज लिए जाएंगे
- 13:43और जैसे हम एक दूसरे देशों से व्यापार करते हैं, ऐसे व्यापार भी
- 13:48होने लगेंगे। अभी तरंगें भेजी जाती हैं, फिर
- 13:56सामान भेजे जाएंगे। अभी साइंस बच्चा है, इसको थोड़ा
- 14:04डल होनी था। तो मुझे स्वप्न आया, नेपाल के साथ
- 14:17मेरा कोई विशेष रिश्ता रहा था, मुझे बाद में पता चला उस वक्त पता
- 14:23नहीं था। कुछ राजाओं की मौतों का मुझे पहले
- 14:27पता चल जाता है। हमारे मुख्यमंत्री पंजाब सरदार
- 14:34बीयेन्द्र सिंह का मृत्यु हो जायेगा।
- 14:39मुझे पता चल गया। मैंने बता दिया इंदिरा गाँधी का
- 14:43पता राजीव गाँधी का पता लग गया। या कोई कारण होते हैं, कोई संबंध
- 14:52रहा होता है तो ये सब बनाते हैं। मैं बात के खुलासे में नहीं
- 15:00जाऊंगा। फिर वीडियो बड़ी लम्बी हो जाती
- 15:03है। आप सुन नहीं पाते हैं।
- 15:09स्वप्न आता है मुझे नेपाल नरेश वीरेन्द्र का बड़ा बेटा मर गया।
- 15:27कुछ दिन से कोमा में था, मर गया गद्दी का वर्ष था।
- 15:37मैं हड़बड़ा के उठा, क्योंकि तब तक मैं एलआईटी नहीं हुआ था।
- 15:44जैसे ही आपको प्रभावित करती हैं, सभी बातें वैसे ही मुझे भी
- 15:48प्रभावित करती थी। रत्ती कम नहीं, रत्ती ज्यादा
- 15:52नहीं। बिलकुल आप के जैसे नेपाल नरेश का
- 16:02पुत्र भर क्या जवान पुत्र भर क्या?
- 16:11लेकिन इस बात का मेरे साथ कर मुझे ये शौपन क्यों है?
- 16:25तब तक 1976 से भगवान शिव इसी रूप में मेरे पास आते रहे।
- 16:35मैंने कहा बाबा से पूछेंगे रोज़मर्रा का काम चाय पानी पीता
- 16:48और गौशाला मंदिर चला जाता वहाँ जाकर फिर मैं आराम से।
- 16:541:00 बज जाता 2:00 बज जाते। कभी कभी तीन भी बज जाते हैं, कभी
- 17:00कभी सांय घर वापस आना होता। ऐसी पेड़ लगती है कि लग जाती।
- 17:23मैं चला गया गोशला बैठ गया कुछ दिन बीते, बाबा नहीं आए 1 दिन
- 17:38बाबा। आए।
- 17:44मुझे वो बात याद थी। मैंने कहा बाबा जवान पुत्र के
- 17:51मरने का दर्द बड़ा होता है और मुझे स्वप्न आया और अवश्य ही आपने
- 18:00फेंका होगा। आपके सिवा होने वाली घटनाओं को
- 18:06कौन फेंक सकता है? बाबू बोले मैं जानता हूँ फिर बाबा
- 18:19इसको बदल दो। गद्दी का बारिश है, बड़ा पुत्र है
- 18:32नेपाल के राजा वीर यंत्र। मेरा कोई इलाका दिखा नहीं।
- 18:37ब्राह्मण परिवार में जन्मा हुआ व्यक्ति हिंदुस्तान के पंजाब में।
- 18:44भला क्या लगा लगा देगा? हो सकता है नेपाल के साथ कोई भी
- 18:48ना फिर मुझे स्वप्न क्यों आता है? मुझे स्वप्न क्यों आता है?
- 18:54इंदिरा गाँधी का मुझे स्वप्न क्यों राजीव गाँधी का आता है?
- 18:57बीएन सिंह का आता है कोई कारण इसके विस्तार में मैं नहीं
- 19:03रहूंगा। मैंने कहा बाबा नेपाल तो उजड़
- 19:19जाएगा, कहते छोटा बेटा है, बेटी है, बेटी है, बहुत संभाल लेंगे,
- 19:35तुम्हें क्या फिक्र हो गया? मैंने कहा नहीं मुझे कोई फिक्र
- 19:39नहीं बाबा लेकिन एक राजघराने का वारिस अगर चला जाये तो पूरे मुल्क
- 19:46की तकदीर बदल जाया करते। बाबा वहाँ से बोले।
- 19:58मोर वो तो मैं सो तो हूँ पर हूँ तो आपका बदल दो ना इसको।
- 20:19इतने करूण अंदाज़ में मैं बोला बाबा तथा तू कह के चले गए लेकिन
- 20:27चेहरे पर थोड़ा सा तनाव था और घटना नहीं 83 का आया हुआ सपना।
- 20:50उसके बाद कुछ साल बाद बाबा मुझसे बोले मैंने बदल दिया, लेकिन तुमने
- 20:57अच्छा नहीं किया, बदल दिया। मैंने भक्त की बात को भगवान मना
- 21:06नहीं करता। क्योंकि जो अंतिम पड़ाव पे चला
- 21:11जायेगा ऋषि वह एक बात कहेगा अब आप इसको नोट कर लो।
- 21:17ये आखिरी आखिरी स्टेज है। वह ऋषि कहेगा।
- 21:28ये सब खेल है उसका अपनी ही रचना से खेल रहा है वो तुम यह मत पूछना
- 21:38कि क्यूँ खेल रहा है, वह बस खेल रहा है?
- 21:44सृजना वो कर सकता था, उसने करती खेलना चाहता है, खेल रहा है इसलिए
- 21:51आप पे खेले खेल खिलाड़ी आप पे खेल नहारा हुआ यह संतत्व का आखिरी छत
- 22:01पे गया हुआ व्यक्ति। वही कह सकता है ये सब मेरे मारे
- 22:09हुए हैं अर्जुन इन्हें तुम मार दे श्रेय तू फिर क्या फर्क पड़ता है?
- 22:19मैं इन्हें मार चुका हूँ। तो सेहरा अपने सर पे सजा ले सरे
- 22:27तू ले ले लखनऊ से समझ नहीं आता फिर विराट दिखाना पड़ता है।
- 22:39कि भगवान के पास बड़े रास्ते हैं, तुम एक सूत नहीं बना सकते।
- 22:48कबीर कहते हैं तुम चदरिया का एक सूत नहीं बना सकते और उसने इतनी
- 22:53सृष्टि बना दी है, जिसका कोई और छोरी नहीं।
- 22:57असंख्य अनगिनत। और तुम उस पर उसको शिकायत करते
- 23:08हो? अंधविश्वास तुम्हारी शिकायतों का
- 23:14अंधविश्वास तुम्हारी नए मानने का ये भी अंधविश्वास।
- 23:20अंधविश्वास ही सिर्फ भगत ही नहीं होते हैं, अंधविश्वास नास्तिक भी
- 23:25होते हैं। जाना तो वह नहीं खोजा तो है नहीं,
- 23:30दोनों समान पाते हैं। तुम अंधे होकर उसे मान लो कि वह
- 23:36है। और तुम अंधे होकर कह दो, वह नहीं
- 23:39है दोनों में कोई वेद नहीं है। दोनों समान है क्योंकि जाना नहीं
- 23:44दोनों अवस्था में तुमने पहली अवस्था में तुमने खोजा नहीं,
- 23:49लेकिन बिना खोजे तुम नास्ता हो गया वो है नहीं।
- 23:55दूसरी अवस्था में तुमने देखा नहीं और बिना देखे तुम अस्तिक हो के वो
- 23:59है तुम तीर्थ यात्राएं करने लग जाते हो।
- 24:03ये पाखंड जो इतना पाखंड बिखेरा गया, इन्हीं लोगों के द्वारा
- 24:10बिखेरेगा जिन्होंने देखा नहीं और फैला दिया कि वो है।
- 24:17कहते तो कबीर भी हैं, लेकिन कबीर कहते मैंने आँखों से देखा है,
- 24:24मैंने तुम्हारे शास्त्रों के शब्दों से नहीं देखा, मैंने अपने
- 24:29खुद की आँखों से देखा। मार्कस यह नहीं कह सकते कि मैंने
- 24:36देखा मैंने खोज लिया, वो नहीं कहीं नहीं मिला।
- 24:43मार्कस के पास बुद्धि का तर्क है, सिर्फ़ कबीर के पास अनुभव की
- 24:49आँखें हैं। कबीर कहते वो है और मैंने देखा है
- 24:58और मैं कहता आंखन देखी तुम कहते कागद की लेखी कौन कागद की लेखी
- 25:04कहता है यह जिन्होंने फैला दिया कि वो है देखा है नहीं, उनकी जीवन
- 25:11तब्दील तो होगा नहीं। फिर वो जो बोलेंगे वह गलत होगा,
- 25:16वह गप होगा, वह तुम्हें भरमाएगा गलत रस्ता दिखायेगा और तुम कुमार
- 25:23के पर चढ़ पड़ोगे क्योंकि वह खुद ही नहीं जनता उसकी मजबूरी है।
- 25:31जो ऋषि अंतिम पड़ाव पे पहुँच गया वह एक बात कहेगा, तुम्हें अच्छी
- 25:37नहीं लगेंगी। उसके बाद तुम तो ऐसे दावे कर देते
- 25:41हो जैसे तुम्हारा बनाया हुआ किसी ने छीन लिया हो।
- 25:50जबकि शक्ति यह है कि तुमने कुछ नहीं बनाया, उसने बनाया।
- 25:55वह अपनी सर्जना के साथ खेल रहा है।
- 26:00देखिये तुमने कमा लिया तुम विश्व के एक नंबर के धनीयों में फिर तुम
- 26:06उस पैसे को आग लगा दो, तुम्हें कौन रोकेगा?
- 26:11तुम फिर उस पैसे को बांट दो, कौन रोकेगा तुम?
- 26:16उस पैसे से भोखों का पेट भर दो, कौन रोकेगा?
- 26:21और उस पैसे से तुम व्यय विचार भी कर सकते हो।
- 26:31किसी के जीवन का हनन भी कर सकते हो।
- 26:34जब शक्ति है तुम्हारे पास तो परमात्मा ने बनाया मालिक और अगर
- 26:47कोई एक नंबर का सेट। आग लगाना शुरू कर दे और तुम मुझसे
- 26:51नहीं कह सकते क्यों आग लगाते हो? तुम क्यों बांट रहे हो?
- 26:57नहीं, वह मालिक है, उसने कमाया अपना कमाया वह बांट दे।
- 27:07लेकिन तुम जिसने बनाया उसके ऊपर आपत्ति करते हो, ऐसा वह क्यों
- 27:11करता है? अगर वो है तो फिर बलात्कार क्यों
- 27:17होते हैं? अगर वो है तो हदते हैं।
- 27:18क्यों होते हैं कमल की बात? वह अपनी सृष्टि से खेल नहीं सकता।
- 27:27जिसने बनाया भाई वह मिटा भी तो सकता है और वह दूसरा कोई मिटा दे,
- 27:35उसका ही बनाया हुआ उसे कोई आपत्ति नहीं।
- 27:39तुम क्या आपत्ति करते हो? तुम्हारा तो कुछ किया ही नहीं,
- 27:44लेकिन तुम बेवजह आपत्ति करते हो। इन शास्त्रों को पढ़ो, इन
- 27:51शास्त्रों ने तुम्हारा दिमाग खराब कर दिया इसलिए मैं कहता हूँ जब तक
- 27:55तुम देखो ना तब तक बोलो मत फिर अनर्थ हो जाएगा अगर देखने के बाद
- 28:03बोलोगे फिर अर्थ हो जाएगा। बिना देखे बोलोगे तो अनर्थ हो
- 28:09जाएगा इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ ये आचार्य लोग अनर्थ करते हैं इनको
- 28:17पता नहीं ये आपको किन रास्तों पे धकेल रहे हैं?
- 28:26ये धनु का समूह लगा लेंगे, बड़े बड़े आश्रम बना लेंगे, बड़े बड़े
- 28:30संस्थान बना लेंगे, लेकिन क्या ज़रा ज़रा इनका रहेगा रहेगा तो
- 28:39उसका? पहले दिन मेरी आँखें खुलीं जब मैं
- 28:44फिजिक्स का विद्यार्थी था और मेरा प्रोफेसर मुझे बुराने लगा, मैट के
- 28:53नीचे भी क्रिएटर नार्कोन मुझे झटका लगा।
- 28:58उन्होंने कहा। ये कैसे हो सकता है?
- 29:07फिर हम कर क्या सकते हैं? हम उत्तपन भी नहीं कर सकते और हम
- 29:11बेनष्ट भी नहीं कर सकते। फिर हमारे हाथ में क्या उसकी
- 29:15आँखों में करीब करीब बाँस होता है?
- 29:21के तो हम कुछ नहीं कर सकते वर अनेबल फिर तुम पढ़ा क्यों रहे हो?
- 29:32मजबूरी में पेट का सवाल है। बस ये सर लोग तुम्हें इतना बना
- 29:39सकते हैं अब जन्म ले लिया है तो पापी पेट भी साथ आएगा।
- 29:46उसको पालना किया है। इतना ही करेंगे और बड़े ओहदे पे
- 29:51बैठ कर तुम पेट भरो या गरीब की झोपड़ी में बैठ कर पेट भरो।
- 29:56कोई फर्क नहीं पड़ता। रूखी सूखी खा लो कि चिकनी चोपडी
- 30:02खा लो, कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन तुम कहोगे बहुत फर्क पड़ता
- 30:09है, पढ़ना भी चाहिए तुम्हें। जिसने जाना नहीं उसे फर्क पड़ेगा।
- 30:20जिसने जान लिया उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
- 30:22वह जानता है अंतिम पड़ाव पे पहुंचने वाला व्यक्ति देख लेता है
- 30:27अपनी खुली आँखों से यह खेल है सब उसका कठपुतलियों को वो नचा रहा
- 30:33है। खुद की बनाई हुई खुद के दागे खुद
- 30:35के हाथ खुद के इशारे और खुद की ही स्क्रिप्ट खुद ही देखता है, ये
- 30:48बात तुम्हें समझ में नहीं आएगा। इसलिए बहुत गहरे शास्त्रों को लोग
- 30:57पढ़ते नहीं रख देते हैं, उसकी पूजा करनी शुरू कर देते हैं।
- 31:02कृष्ण तुम्हारी समझ में नहीं आते तो तुम पूज न शुरू कर।
- 31:06देते हो? जो तुम्हारी समझ में नहीं आता
- 31:10उसके तुम पांव पकड़ लेते हो बाबा। तुम भगवान हो, मुझे लोगों ने
- 31:14भगवान करना शुरू कर दिया, मैं उससे पूजता हूँ, मुझे भगवान क्यों
- 31:22कहते हो बाबा, तुम्हारी बातें सिर के ऊपर से गुजर गई।
- 31:33अब तुम्हे पूजना ही पड़ेगा। मैंने कहा पागल की बातें भी तो
- 31:38ऊपर से गुजर जाती है, उसे नहीं पूछते कहते उसकी बातों में संगति
- 31:45नहीं होती, पागल की बातों में संगति नहीं होती, आपकी बातों में
- 31:49धरा। आपकी बातों में संगति है भी संगति
- 31:53नहीं है इसलिए आपको पूजना ही पड़ेगा।
- 32:02मैंने कहा ठीक पूजो लेकिन तुम खुद को भी पूजो क्योंकि तुम भी वो ही
- 32:10हो तत्व मसीस फेत के तू। तुम खुद को भी पूजो, खुद को
- 32:20क्षुद्र कह के अपमानित मत करो, अगर तुम कृष्ण को पूजते हो तो
- 32:28तुम्हे अपनी पूजा भी संग संग करनी चाहिए।
- 32:33इतने लाचार मत बचना कृष्ण अगर भगवान हैं तो तुम भी हो, तुम
- 32:41शुद्र नहीं हो, सपना आया मुझे बाबा से, मैंने कहा बाबा के तिल
- 32:54डाल दिया और हँस पड़े। कोई बात तो होगी, अब पूछने में तो
- 33:01डर लगता है क्या पूछे? अब संत के बोलने से वो डर लगता।
- 33:09है। कहीं कुछ ऊंट पुटांग न बोल दे,
- 33:14गलत तो हो जाएगा, लेकिन 85 में एनलाइटन हुआ।
- 33:22सब भ्रम टूट गए। मुझे मेरा फैलाव नजर आया, मुझे
- 33:28मेरी असीमिता नजर आई। मुझे मेरा व्याटत्व नजर आया और सब
- 33:33भ्रम टूट गए। बस यह भ्रम था, सही टूटना।
- 33:37इससे पहले कोई शब्दों से भ्रम तोड़ देता।
- 33:40मैंने कोई ज्यादा शास्त्र भी नहीं पढ़े थे और भ्रम टूटा बड़ा सुन्दर
- 33:50रूप से टूटा हंसते गाते नाचते कूदते।
- 33:57की आप मुझे लोग कह देते हैं अपनी जीवनी पहले भी तो बताओ आपने क्या
- 34:04उपवास किया आपने कौन सी साधना की कैसे कैसे सब बताओ आप मैंने कहा
- 34:10क्या बताऊँ क्या बताऊँ तुम्हें? जब मैंने किया ही कुछ नहीं उसे
- 34:21पाने के लिए और वह मिल गया इसलिए बाबा कह पाते हैं नदरी मोख्तवार
- 34:28वह मिलता है इतना बेहद वह परिश्रम से नहीं मिलता, वह नजर से मिलता
- 34:35है। सच्चा साहब जे नजर करे थे, कामों
- 34:38का अंश कर रहा है कोई की कालीमा को श्वेत हंस में बदल देता है भाई
- 34:47बस नजर होनी चाहिए। मैं विराट हो गया और मैंने वीडियो
- 35:00डाला। बहुत साल बाद डाला जब मैंने बोलना
- 35:02शुरू किया और मेरे पास पहुंचे हुए लोगों के बड़े कमेंट हैं बाबा यू
- 35:10आर इन हैलो स्नेशन। यह तो आपने कोई मादक का द्रव्य खा
- 35:18लिया होगा। इसकी वजह से हुआ बड़े बड़े कमेंट
- 35:26आए। एक वक्त को तो मैंने बाबा से कहा
- 35:30बाबा। तुमने मुझे बोलने को कहा, मुझे
- 35:34ऐसा लगता है जैसे सारा संसार मुझसे पहले पहुंचा हुआ है।
- 35:38किसको पहुंचाऊं बाबा से कहते तुम्हें कैसे लगता है मैं ये
- 35:47कमेंट देखिये। ये कमेंट पहुँचे हुए लोगों के
- 35:53कमेंट हैं, अरे बाबा तुमने कोई मादक द्रव बिखा।
- 35:59लिया होगा। नो नो इट्स ए हेलूस नेशन ये कौन
- 36:05वक्तव्य दे सकता है ये जो मुझसे पहले पहुँच गया?
- 36:13तो मुझसे बाबा कहते हो बोलो क्या बोलूं, किनके लिए बोलूं?
- 36:17यहाँ तो सभी परमात्मा हैं, बाबा कहते हैं तो परमात्मा हैं, ये
- 36:24सत्य है। लेकिन इनको अपने परमा तत्व का पता
- 36:31नहीं है। तुम्हें तुम्हारे परमा तत्व का
- 36:34पता लग गया। बस इतना सफर क्या है?
- 36:38इन्हें कमेंट करने दो, आप अपनी गति से चलते रहना, बस आप कमीन मत
- 36:44बनाना, थोड़े से गिने चुने लोगों को जिनको मैं भेजूं।
- 36:49उनको दीक्षित कर लेना। जो लोग सुने सुने जो नहीं सुने ना
- 36:53सुने तुम सिर्फ बोलो तुम नहीं जानते क्या हो?
- 37:05भविष्य में इस कॅन्टेंट की बड़ी आवश्यकता पड़ेगी जब लोग एक शब्द
- 37:10बोलने का फीस लेंगे बोलेंगे लेकिन फीस लगेगा।
- 37:17अब तो शिवर लगाने की फीस लेते हैं।
- 37:19फिर शब्द बोलने की फीस लगेंगी, यह वेला भी आएगा।
- 37:24उस घने अंधकार की वेला में आपके शब्द बड़े कारगर होंगे।
- 37:29अब छोड़ जाइए इनको संग्रह के रूप में समृद्धि के रूप में बने रहने
- 37:35दीजिये। मैं तो हूँ और तुम भी कहाँ जाओ
- 37:41गए? तो मैं उपदेश देता हूँ, लेकिन मैं
- 37:50जानता हूँ कि मैं परमात्मा को ही उपदेश दे रहा हूँ, इसलिए पहले मैं
- 37:57परमात्मा को नमस्कार करता हूँ। आपको कोई गलती त्रुटि रह जाए एक
- 38:05शर्म में करते हैं। ये मनीषा सफलता है।
- 38:11मुझे सबसे ज्यादा शरारती है, बदल दिया गया सब बदल दिया गया नेपाल
- 38:24नरेश से मेरा कर लेने देना ये मुझे बाद में पता चला।
- 38:32नेपाल के साथ बड़ा गहरा संबंध, कई जन्मों का रिश्ता।
- 38:50वक्त बीतता गया, बीतता गया। मैं तो भूल गया।
- 38:53उस बात को जब बाबा ने टाल ही दी तो वो स्टल गई।
- 38:59बाबा ने मेरा कहा मान लिया, बड़ा उपकार किया और 1 दिन।
- 39:091 दिन मुझे खबर मिली मुझे महीना तो याद नहीं इतना याद है 2000
- 39:17शायद एक। राजा वीरेन्द्र के बड़े बेटे ने
- 39:30सारे परिवार की हत्या कर दी और खुद भी गोली मर दी।
- 39:39मैक्सिमम ये वही बेटा है। जिसकी भविष्यवाणी बाबा ने की थी।
- 39:49यह मर जाएगा और जिसकी फरियाद मैंने की थी, इसको बचा लो, यह
- 39:54वारिस है मैंने बाबा से पूछा बाबा मैंने तो जर्म कर दिया, बाबा कहते
- 40:05पश्चात अब मत कर। जो हो गया सो फिर मुझे समझाया अगर
- 40:21बाबा उसको मार देते, कुछ होने को न बदलते तो सारा परिवार न मरता,
- 40:29उसने माता को मार दिया, पिता को मार दिया।
- 40:32बहन को मार दिया, छोटे भाई को मार दिया और खुद को भी मार लिया और
- 40:39उसके बाद वो कुछ दिन कोमा में पड़ा रहा, लेकिन मर गया, बचा तो
- 40:45फिर भी। बाबा मुझसे बोले अब देखो अगर होने
- 40:57को तुम होने दे देते तो आज या कुछ न होता।
- 41:10इसने और चार लोगों को मार दिया और चार लोगों के साथ नेपाल के लोगों
- 41:16को मार दिया। वहाँ का राजा वीरेन्द्र, भगवान
- 41:23विष्णु का अवतार समझ के लोग उसकी पूजा पर चलते बड़ी शांति।
- 41:31उसके राज्य में कभी दुखी नहीं हुए लोग प्रचुर मात्रा में वह धन तेज़
- 41:36रहता था। सही राजा वही होता है।
- 41:41ये लोकतंत्र से भी ज्यादा सुंदर प्रणाली है अगर राजा ईमानदार हो।
- 41:48राजा बेईमान हो तो फिर डिक्टेटरशिप को भी मात दे देता है
- 41:52वो वह दुष्ट हो जाता है। इस बात पर सिर्फ यह चुन के आया
- 42:01होगा। वह कहर ढा देता है।
- 42:13लेकिन नेपाल में राजवंश था और जब एक का दायित्व होता है तो वह सारी
- 42:22प्रजा का समूची प्रजा का अपने बच्चों के समान रक्षा करता है और
- 42:27वह गुण थे राजा वीरेन्द्र में यह गुण थे।
- 42:34बड़ा शर्मशार हुआ मैं, मैंने कहा वाह वाह तुम्हें बताया मैं
- 42:44अज्ञानी था, मुझे पता है अज्ञानता में मैंने फिर याद कर दी।
- 42:51क्योंकि किसी का बड़ा बेटा मर जाए और उसे राजगद्दी मिलनी हो और पूरी
- 43:02प्रजा का सवाल हो तो मेरा फरियाद करना बनता है ना?
- 43:09बाबा कहते नहीं बनता, यही तो गलत किया था परमात्मा के विधान में
- 43:19खल्लर डालना कहता हूँ उसे मैं तब तक तो समझ बहुत आ गई।
- 43:2785 के बाद तो संसार बदलता चल रहा है और तुमने पूछा तो मारा बड़ा
- 43:37बेटा बात बेटे के मरने की नहीं है।
- 43:45बात यह है कि उसके मरने पे मैं विक्षिप्त हुआ, मेरा अंतर से हेला
- 43:57मेरी आँखों में एक अश्क टपका है मैं रोया मैं चिल्लाता।
- 44:06आज भी लोग मुझे कह देते हैं तुम पत्थर तिल हो पाशान हृदय हो तुम
- 44:13अपने बच्चे के संस्कार तक मैं नहीं गए, अपने बच्चे के अंतिम भोग
- 44:19में नहीं गए तुम पाशान हृदय हो। ऐसा कोई बाप हमने आज तक नहीं
- 44:25देखा। मैंने कहा तुमने ऐसा बाप भी नहीं
- 44:27देखा होगा जो बच्चे की शादी में ना गया हो।
- 44:31आगे आगे पकड़ी बांध के चुर्र छोड़ के बैठे होते हैं दिखाने के लिए
- 44:37कि मैं बाप। ये कुछ घट गया है भीतर इस ही सम
- 44:54समतम योग उचित है सम तुम सम रहना शोक में भी हर।
- 45:04और जो व्यक्ति वहाँ पहुँच ही जाता है वह शोक और हर्ष दोनों से परे
- 45:09हो जाता है। इसलिए भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते
- 45:13हैं अर्जुन तू उनके लिए शोक कर रहा है, जिनके लिए तुझे शोक नहीं
- 45:17करना चाहिए, वह जानते हैं। अगर मैं शोक करूँ तो तुम मुझे
- 45:32क्या कहोगे? बिल्कुल जायज है।
- 45:36इसका जवाब बेटा चला गया और रोएगा मेरा शक रोएगा।
- 45:42और अगर मैं नहीं रोया तो मेरे एक शिष्य की धर्मपत्नी मेरे गले से
- 45:46रोई लग के बहुत ही चिपट के रोई, ऊंचे ऊंचे मेरा शिष्य कहने लगा ये
- 45:54पागल हो जायेगा इतने बड़े आघात के बाद इसकी आँखों में आंसू नहीं।
- 46:01ये हमें सांत्वना दे रहा है। निश्चित ही इज़ डबली शॉक्ड इसकी
- 46:11आंख में थोड़ा आंसू ले आओ इसको रुलाओ डॉक्टर तो।
- 46:16यही कह रहा है। उसने बड़ी चेष्टा की।
- 46:23चिल्लाई खुद रोई, इसीलिए कि मैं रोना, लेकिन कौन रोये रोने वाला
- 46:34बच्चा है? रोए कुमार अब ये तो नहीं जानते
- 46:43भीतर की दशा ये तो बाहर की दशा को जानते हैं।
- 46:46बाहर के समाज की व्यवस्था को जानते हैं।
- 46:53अब तुमने सत्यपुज सपुत्र। पुत्र को तुमने सही पूछा क्योंकि
- 46:57तुम समाज के रीती रिवाजों। को जानते हो तुम भीतर के अंतरम
- 47:01अवस्थाओं को जानते हो कि नहीं? तो तुम्हारा पूछना।
- 47:06निस्संदेह बिल्कुल सत्य है सही प्रश्न।
- 47:09पूछा तुमने? पूछना पूछेगा?
- 47:13यही प्रश्न तो रह गया था मुझे खयालना है।
- 47:19अक्सर मुझे ख्याल तब आता। है जब तुम मुझे ख्याल करवा देते
- 47:23हो। इसको लक्षण के रूप में भी ले।
- 47:33लेना। जिसका भीतर डगमगाता।
- 47:39नहीं। इसका भीतर।
- 47:41शेक नहीं। होता।
- 47:45वही तो संत है जो भी हानि लाभ में सम।
- 47:55नहीं रह पाता। यश अप यश में सही सम नहीं रह
- 48:01पाता। किसी ने बुरा बोल दिया।
- 48:04उठाओ इसको इसपे करो ऐफ़ आई आर इसको पटक दो।
- 48:10जेल में क्या हुआ बस? यही से लक्षण पहचान।
- 48:16में होते हैं राजा ऐसा नहीं होना चाहिए।
- 48:23राजा में। व्यावहारिक बहुत, बहुत ज्यादा
- 48:35सहनशक्ति होनी चाहिए। बहुत ज्यादा बोला मैंने क्योंकि
- 48:41वह राजा है इसका अनुकरण करने के लोग।
- 48:46खुद ही छाती पीटेगा तो लोगों का क्या होगा?
- 48:56मेरा छाती पीटना। मेरा नुकसान होगा, मैंने कहना
- 49:00मेरा लूट गया सब। तो मेरे शिष्य तो रोएंगे ही।
- 49:10इसका दूसरा अर्थ यह है। कि मैं वहाँ उस तथ्य पर पहुंचा
- 49:14नहीं जो सम है। जो शेक नहीं होता।
- 49:20जिसे भगवान। कृष्ण ने कहा कि।
- 49:22आग नहीं जलाते उसे। शस्त्र नहीं काटता पानी।
- 49:27नहीं गलता। वायु नहीं सुखाती फिर वो।
- 49:32वहाँ पहुंचा नहीं। वो नकली साधु है, तुम्हें जीने की
- 49:39शिक्षाएं देगा, लेकिन मान मत लेना उसकी शिक्षाओं से तुम सुखी हो
- 49:47सकते हो। निस्संदेह लेकिन सुख और आनंद में
- 49:54लॉट ऑफ। डिफरेंस बिटवीन टू यूज़ डिफरेंस,
- 49:58वल्टर डिफरेंस विथ एंड। नॉट?
- 50:02क्वांटिटेटिव डिफरेंस। तुम्हें पता ही नहीं तुमने आज तक।
- 50:09सुख ही सुख दख। तुमने आनंद देखा ही?
- 50:17नहीं आनंद मिलता है। सुख में तो कम मिलता है।
- 50:24दुख में से। गुजर के आनंद।
- 50:26मिलता है। इसलिए मैं।
- 50:28अक्षर कहता हूँ। शौक क्रिएट्स आनंदा मैं उसू की
- 50:39जीवनी मुझे कोई बता रहा था नाना से बड़ा मोह था।
- 50:46चिपकाहट जहाँ टूट। जाए वहाँ तुम।
- 50:50वहाँ पर फेंक दिए। जाओगे जो तुम हो।
- 50:56और तुम्हारी तो चिपकाहटें बहुत। हैं।
- 50:59ओशो जैसे व्यक्ति के चिपकाटे इतने नहीं रहे होंगे।
- 51:03उसको नाना से बड़ा प्रेम था। और नाना अंतिम छोर पे था।
- 51:08शैय्या पे बैठे उसको शहर में ले जाए जा रहा था, अंतिम शास ले रहे
- 51:14थे और ओशो ने उन्हें मरते देखा, मर गए और।
- 51:21उनके भीतर का छिप का। चिपकाहट मर गया क्लिंगिंग नेक्स्ट
- 51:30डेड बस यही डेड हो जाए और तुम्हे कुछ नहीं चाहिए और कुछ न मरे।
- 51:42फिर चाहे तुम्हारे आस पास। कृष्ण की तरह सामग्री हो, भोग
- 51:47सामग्री हो। रावण की तरह सोने की लंका।
- 51:52हो लेकिन चपकाहट न हो तो तुम आजाद हुए कृष्ण की तरह सिंहासन हो से न
- 52:01हो। प्रेम करने वाली हूँ गोपी काई हो
- 52:05प्रेमी काई हो पत्नी क्या फर्क पड़ता है?
- 52:13बाहर कुछ भी हो। भीतर चिपकाहट करने वाला न हो,
- 52:18चिपकने वाला न हो। फिर बाहर चाहे बिलकुल।
- 52:23फकीरे हो, कबीर की तरह 2 जून की रोटी भी न हो।
- 52:31और कृष्ण की तरह सब। सब हो।
- 52:36समृद्धि के लिए जो आवश्यक। है सब हो, वह राजा।
- 52:42और सभी। भोग सामग्रियाँ उसके।
- 52:43पास है और परचुर मात्रा में नहीं परचुर से ज्यादा मात्रा में।
- 52:56यह चिपकाहट जो। करता है।
- 52:59यह ही तुम्हारे दुख का कारण है, यह ही प्रश्न उठाता है।
- 53:08अन्यथा यह प्रश्न यह प्रश्न आया और देखो सभी मेरे
- 53:28मित्र, सभी मेरे शिष्य। सभी मेरे गणेश मित्रा।
- 53:35सभी मेरे परिवार बड़े दुखी तो हैं।
- 53:39अमेरिका से मेरे बड़े भाई का फ़ोन।
- 53:41आया रमेश अरे भाई तू क्या कर रहा है?
- 53:47मैं अपनी छाया को तरस रहा हूँ उसके अपना बच्चा कोई नहीं था दो
- 53:50शादियां की उसने। मैं अपनी छाया को तरस गया और तुम
- 53:55अपनी छाया को ऐसे मारोगे तो होगा क्या?
- 53:59मैं चुप रहा हूँ, मैंने कुछ नहीं। कहा, वह मेरा बड़ा भाई था, चदा
- 54:08गया चोरोन में। लेकिन बड़े सुन्दर।
- 54:15चित्त का मालिक सूरज हुई आत्मा। तुमने पूछा हज़ारों लोगों ने?
- 54:31पूछा ये प्रश्न और भी हज़ारों लोगों का हो सकता है जिन्होंने।
- 54:36बायोग्राफी पढ़ी और। जियोग्राफी पढ़ेंगे।
- 54:41ये किताब तो कहीं नहीं जाने। वाले हैं।
- 54:45यह तो आपके पास रहेंगी। फिर फिर से कोई और पढ़ेगा।
- 54:51तुम्हारे बाद और पढ़ेंगे तुम्हारे बच्चे तुम्हारे वारिस और उनके
- 54:56वारिस यह कंटेंट। तो इसमें ही।
- 54:59रहेगा। ये मेरी बोली हुई।
- 55:07शब्दावली रिकॉर्ड रहेंगी तुम्हारे पास घोर अंधकार के क्षणों में
- 55:15बाबा मुझे कहते हैं, जब एक शब्द के बोलने का पैसा ले गए लोग तब ये
- 55:21बड़ा काम आएगा। इसको।
- 55:24छोड़ के जाओ अभी। जरूरत है।
- 55:37मैं कोई ड्रामा नहीं करता। मैं कोई सर्कस नहीं करता मैं यहाँ
- 55:42सर्कस करने के लिए आया हूँ। मैं आया हूँ।
- 55:48और ऐसे। ही 1 दिन चला।
- 55:50जाऊंगा। तुमने बुद्ध को तथागत कहा जैसे
- 55:53आए, वैसे ही चले गए। ऐसे ही कौन रहा है?
- 55:59बड़ी। छाती वाले लोग यहाँ।
- 56:00रहते हैं, ये तुम भूल करते हो। छोटी छाती वाले भी चले जाते हैं।
- 56:10और बड़ी वाले भी चले जाते हैं। छातियां कभी किसी को बचाती हैं,
- 56:16तुम गलती में मत पड़ जाना एक और प्रश्न पूछा है।
- 56:28आप एस्ट्रोलॉजी की बात करते हो? बहुत बात करते हो और बाबा नानक।
- 56:35के मुरीद हो। मैं तो मुरीद सभी संत जनों का।
- 56:42तो बाबा नानक ने क्यों कहा? ये ज्योतिष नहीं होती छोड़ दो
- 56:46उसको ठीक कहा, उसका कारण था तुम कारण नहीं समझ पाते तुम शब्दों को
- 56:52पकड़ लेते हो। मुझसे लोग पूछ लेते बाबा बता न
- 57:00शाम को रिज़ल्ट आएगा मैं। पास हो जाऊंगा फैल।
- 57:05फर्स्ट आ जाऊंगा कि सेकंड? मैं उन्हें नहीं बताता।
- 57:11पहले पहले कुछ लोगों को बताया। अब तो भीड़ का जमावड़ा इकट्ठा
- 57:15होना शुरू हो गया। फिर समझ में आया की भविष्य को
- 57:19जानने का इतना करेज क्यों है? जो शाम को आ ही जाएगा।
- 57:24भाई गजट छप गया। अखबार में छप गया सब।
- 57:30गजट। प्रकाशित हो गया वहाँ से चल पड़ा
- 57:34सांझ को आ जाएगा, मुझसे क्यों पूछ रहे हो?
- 57:40कैन यू चेंज दैट गजट। कहते नहीं, वो तो नहीं कर पाएंगे,
- 57:46फिर तुम धीरज नहीं रखते। शाम तक का धीरे तुम रख नहीं सकते
- 57:51क्या ठहर जाओ क्या है बदल तो सकता नहीं शाम को आ जाएगा पता लग जाएगा
- 58:02बस बाबा नानक भी एक तुम बदल तो सकते हो।
- 58:08जो होना होता है वह होगा। तुम उसकी मर्ज़ी पर छोड़ दो होता
- 58:14तो वही है जो मंजूर है, खुदा होता है मधे लाख बुरा चाहे भी तो क्या
- 58:19होता है? तो फिर इतनी जल्दी क्यों पड़ी?
- 58:27कि आज ही पता चल जाए कब मरूंगा, अगर पता चल जाए तो बल्कि जीना
- 58:32मुश्किल हो जाएगा। तो बाबा नानक बड़े दयालु हैं
- 58:38तुम्हारे पढ़ते अगर तुम्हें पता चल जाए कि तुम 7 दिन के बाद मर
- 58:44जाओगे। तो तुम्हारी जिंदगी के वो 7 दिन
- 58:48रस पूर्ण हो सकते थे, लेकिन तुमने कमा दिया इस फिक्र।
- 58:53में कमा दिया कि सात। दिन बाद मैं मर जाऊंगा, फिर बाबा
- 58:56नानी कहते हैं फिर उसे जीने का कर फायदा।
- 59:02इसलिए पापा नानक ने जड़। ही काट दी होता ही नहीं।
- 59:07ए शनि क्यों नहीं पता नहीं वह तुम्हारे गुरु हैं, बाप हैं
- 59:13तुम्हारे वह ए सनी को वह? जानता है।
- 59:17वह मुझसे ज्यादा जानते हैं। लेकिन वो कहते हैं जो हो।
- 59:22जाएगा। 10 मिनट के बाद अभी क्यों पूछना?
- 59:32ज्योतिष का तो पता ही। है।
- 59:38हम देखते ही हैं, सूरज है। गृह तारे नक्षत्र हैं सब है, कौन
- 59:43मना कर सकता है उसकी सृजना को। और नानक अच्छी तरह से।
- 59:49जानते हैं। पाताल पाताल लख।
- 59:56आग सा आगास ओढ़क ओढ़क बाल थक के वैदकैण एक बात।
- 1:00:03618 केण। कतेबन अस्सुलो कतार लिखा हो त
- 1:00:09लिखिए, तलेखे होए विनाश। जो लिखा गया वो तुम्हारे।
- 1:00:18सामने आ जाएगा। 1 दिन वह बीत।
- 1:00:25जाएगा। तुम क्यों जल्दबाजी में पड़े हो?
- 1:00:32जितना वक्त बीत गया, जितना रह गया, ये हिसाब क्यों करते हो?
- 1:00:42ये हिसाब तुम्हारी जिंदगी को दूभर बना देगा।
- 1:00:47यह तुम्हें जीने नहीं देखा, क्यों पूछना चाहते हो तुम मंशा क्या है?
- 1:00:55कैन यू चेंज दट। बा किए मीनू ए हो हिसाब ले बैठा
- 1:01:41मीनू ए हो? हिसाब ले बैठा।
- 1:01:48कितनी पीली और कितनी? बाकी है।
- 1:01:51यही तुम पूछते हो इतनी गुजर गई कितनी बाकी है मेनू ए हो हिसाब ले
- 1:02:01बैठा तुम ये हिसाब ले बैठेगा। इसलिए बाबा ने जड़ काट दी।
- 1:02:05होता ही नहीं छोड़ दो उसको, क्योंकि वो जानते हैं, जान भी
- 1:02:09जाओगे तो तुम मूड हो। सबको पता है कि 1 दिन हम नहीं
- 1:02:14जाना है और अरबों खरबों कमाया है। और पता?
- 1:02:20है कि हमने जाना है। कभी तो जाना है।
- 1:02:22ये तो पता है कब जाना है ये नहीं पता कौन बांट के गया ये बता दो।
- 1:02:31इसलिए बाबा कहते हैं तुम मूड। हो तुम्हें बता भी दिया जाए कि।
- 1:02:37इतने बजकर इतने मिनट। पे इस साल और इस तारीख को।
- 1:02:42तुम मर जाओगे तो भी तुम बांट के नहीं जाओगे, तुम और इकट्ठा करना
- 1:02:46शुरू कर दोगे जल्दी करोगे अभी तो मैंने जोड़ा ही क्या है?
- 1:02:52और ज़रा। सीधे, जैसा कि और ज़रा सी और।
- 1:03:00और ज़रा सी। दे दे सा की और ज़रा सी और कैसे
- 1:03:07रहूं चुप के मैंने पी ही क्या है होश अभी तक है बाकी।
- 1:03:18और। ज़रा सी।
- 1:03:19दे दे साखी और ज़रा सी और तुम मुझे देखोगे कितना जोड़ लिया।
- 1:03:28और ये तो 10 पुस्तों के लिए। ही हुआ ग्यारहवीं।
- 1:03:32पुस्त क्या करेगा? तुम जल्दी से बटोरना शुरू कर
- 1:03:35दोगे। इसलिए जितना आदमी वृद्ध होता है
- 1:03:39उतना हवड़ तवड़ में जल्दी जोड़ता है तो ठीक कहा हमारी सनत ने 75 के
- 1:03:47बाद तुम बड़ो को चले जाना भाई, क्योंकि तुम्हारी तमन्ना इतनी बढ़
- 1:03:53जाएगी? मौत का कोई भरोसा नहीं है।
- 1:03:57अब तो शरीर कांपने लग गया है, लेकिन गद्दियाँ तो मैं चाहूँ?
- 1:04:04दिमाग तुम्हारा काम नहीं? करता आकर हर चीज़ के घिसने की
- 1:04:09मशीनरी की एक वक्त होता है। तब 75 के बाद तुम्हारे रिटायर।
- 1:04:17हो जाना तुम सिंहस्थ हो जाना बस कोई मरे, कोई जी तुम्हें कोई।
- 1:04:25मतलब नहीं वण। भ्रष्ट शुरू तो तुम 50 से ही कर
- 1:04:28देना। आधा संसार में।
- 1:04:32आधा बच्चों के लिए और आधा। छोड़ने के लिए।
- 1:04:38बच्चों की सहायता करो। मार्गदर्शन करो, अपने अनुभव का
- 1:04:41बताओ, अगर पूछें तो यहाँ लोग बिना पूछे कहना शुरू कर देते हैं मैं
- 1:04:50इतने साल का हूँ मेरे पास। अनुभव जाता है।
- 1:04:55जैसे अनुभव ही सब कुछ हो, अनुभव तो पागलों के भी होते हैं।
- 1:05:02अगर बच्चे आपसे दिशा निर्देश मांगे तो बताना जो बिना दिशा
- 1:05:09मांगे दिशा निर्देश देते हैं। वह पागलखाने में बैठे हुए मरीज।
- 1:05:15होते हैं। मत बताना अगर कोई ना।
- 1:05:22पूछे। जब जरूरत होगी पूछ।
- 1:05:27दिया जाएगा। फिर तुम बता देना अपना अनुभव बता
- 1:05:31देना कि मैंने तो ऐसा जाना भाई। तुम देखो।
- 1:05:37इसे परख लेना मेरी बातों। पे यकीन मत करना मैंने ऐसा जाना
- 1:05:42साथ तो कोई ले के जा तुम देखो तुमने जोड़।
- 1:05:49के जाना तुमने। गवां के जाना तुम देखो।
- 1:05:52तुम्हारी तुम जानो, हमारी हमने जी ली तो चार आश्रम बनाए।
- 1:06:07गृहस्थ को पूरा भोगना 50 तक जोड़ना, उछलकूद करना शक्ति भी
- 1:06:13होती है। मैं मैं करना।
- 1:06:18बकरे में मियाना खूब लेकिन उसके बाद ढीले हो जाते हैं पर ये ध्यान
- 1:06:26में रखना। फिर, मैं मैं मत करना।
- 1:06:35क्योंकि ये पूर्जे घिस गए। हैं तुम कार खरीदने जाते हो, उसका
- 1:06:40मॉडल पहले पूछते हो क्योंकि वो इतना घिस गया।
- 1:06:45और घिसा हुआ माल। कम भाव में देखता है ये बात ध्यान
- 1:06:49में रखना और आखिर में। तुम दावा तो करते हो 500।
- 1:06:57करोड़ का, मान हानि का। पर वैज्ञानिक कहते हैं जब
- 1:07:02तुम्हें। फूंक दिया जाता है।
- 1:07:03तुम्हारे में से माल निकलता है ₹5 छः आने का।
- 1:07:08वो भी आज महंगाई के जमाने। में थोड़ा सा ज्यादा बढ़ गया
- 1:07:11होगा, ₹6 पहुंचा नहीं हो गया होगा।
- 1:07:16इतनी तो महंगाई भी नहीं हुई। जीतने तुम उछल कूद मचाते हो क्या
- 1:07:25है? कोई खास बैंक का नहीं हुआ।
- 1:07:34मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा मंदा।
- 1:07:36आएगा, तेजी आएगी। मैंने कहा कभी मंदा आया है धरती
- 1:07:39पे पागलो कभी मंदा आया मैं तो अपनी जिंदगी में ₹128 तोला सोना
- 1:07:53देखा। और मैंने अपनी आज की ज़िन्दगी में
- 1:07:5680 85,000 वही सोना देख रहा हूँ मैं अपनी ज़िन्दगी की बात करता
- 1:08:01हूँ कभी मंदा है? अरे मूर्खों तेजी ही आती।
- 1:08:07है। तो वो समझ जाते हैं बात कोई
- 1:08:14इशारा? समझ कहते हैं बात तो ठीक है।
- 1:08:18₹4 से दूध मैंने? बेचा और आज।
- 1:08:22₹50 से। फिर महंगाई हुई क्या मंदी हुई?
- 1:08:27ये स्वाभाविक है भाई ये हो गई होगी।
- 1:08:41तो 75 के बाद छोड़ देना। इसे सन्यास कहते हैं।
- 1:08:45बहुत भोग लिया फिर जानना किसने भोंगा 50 के बाद शुरू कर देना।
- 1:08:56और पिचत्तर पे जाके निष्कर्ष निकाल ले ना कि मैंने नहीं भोंका
- 1:09:01मैंने। इन्द्रियों को भोगते।
- 1:09:03हुए देखा वो चाहे सुख वो चाहे सुख वो चाहे संभव मैंने तीनों ही का
- 1:09:10मैं साक्षी रहा। सुख भी आया मेरे सामने से।
- 1:09:16गुजर गया, दुःख भी आया, मेरे सामने से गुजर गया और स्वभाव भी
- 1:09:22आया न्यूट्रालिटी भी आती है, गैर न्यूट्रल भी होता है भाई।
- 1:09:26और एक बेक घर भी। होता है ध्यान रखना।
- 1:09:33सब तुम्हारे सामने से आएँगे। और गुजर जाएंगे बादलों की तरह और
- 1:09:38तुम महज साक्षी ही हो, साक्षी ही रहोगे बे शर्ते के चिपकना चाहो इस
- 1:09:46चिपकाहट को छोड़ना तुम्हारा अंतिम कर्तव्य है।
- 1:09:52और तुम पाओगे। तुम ही हो सब कुछ जीसको खोजने
- 1:10:11निकले थे खोजने वाले में वहीं छिपा था, इसलिए नजर नहीं आया और
- 1:10:19ढूंढा नहीं जा सकता क्योंकि वो तुम हो।
- 1:10:25यही कहा मैसूर ने। आनाल हक मैं खुद खुदा हूँ यही
- 1:10:30कहरिसियों ने हम ब्रह्मस्मा मैं किसको खोजना बस ठहर जाओ।
- 1:10:40ठहरने? में तुम भीतर उतरना।
- 1:10:42शुरू हो जाओगे और 1 दिन आज नहीं कल अगर ठहरने का धीरज पकड़े गए।
- 1:10:51तो उतरते जाओगे। उतरते जाओगे मत पूछना मुझसे।
- 1:10:59यह अल्टिमेट है, यह मेरा महावाक्य याद रखना ठहर जाओ।
- 1:11:13ठहरने से तुम भीतर। फिजकोगे।
- 1:11:17और 1 दिन आज नहीं कल। वहाँ पहुँच ही जाओगे जहाँ।
- 1:11:22तुम्हें दिख जाएगा। तुम्हारा होना कौन हो?
- 1:11:26तुम दिख जाओगे मैंने कुछ नहीं किया मुझसे लोग बायोब्रो से पूछ
- 1:11:31लेते हैं, मैंने कुछ नहीं किया, सब हो गया सब हो गया।
- 1:11:37इसलिए बाबा कहते हैं नगरी मोख जावा कर्मी आवे कपड़ा, ये शरीर भी
- 1:11:43मेरे किसी कर्म से नहीं आया। क्या किया था गधे ने?
- 1:11:47मैं पिछले जन्मो में गधा भी था। गधा कोई पुण्य करता है।
- 1:11:53बस एक पुण्य करता है बाढ़ जोड़ता है।
- 1:11:57इसको पुण्य समझ लो भाई गधा भी था, गाँधी भी था, गधा भी था मेरे पास
- 1:12:07और लोग आते हैं बाबा गाँधी थे तो इसका लाभ उठाओ मैंने कहा ला भाभी
- 1:12:11यहाँ कुछ होता ही नहीं है। अरे भाई, सब उसका है।
- 1:12:18लाभ उसे होगा हानि उसे। होगी और उसे होती नहीं।
- 1:12:26तुम पागल हो जाओगे जब। आखिरी पड़ाव हो जाओगे तुम जब छत
- 1:12:31पे पहुंचोगे वहाँ का नजारा कुछ और होगा।
- 1:12:40तुम्हारी सब धारणाएँ। सब थोप नाएँ सब मान्यताएँ, धूल
- 1:12:46दूषित हो जाएंगे जब तुम छत पे पहुँचोगे और देखोगे अब पे खेल खेल
- 1:12:58खिलाड़ी अब पे खेल नहरा हो। न तुम हो, न घटनाएं हैं, ये खेल
- 1:13:07है, न दूसरा है न तुम हो यहाँ भेद आभेद के चक्कर में ही न पड़ना।
- 1:13:19दूसरा कोई नहीं। आखिर में पाओगे अँधेरा, हाथ लगा
- 1:13:29बड़े शोक से चले थे उसे ढूँढने सूरज।
- 1:13:36को। छूने?
- 1:13:41निकला था। सूरज।
- 1:13:49को छूने निकला था। आया हाथ अंधेरा कोई नहीं है मैं।
- 1:14:15कोई नहीं है। मेरा कोई नहीं है।
- 1:14:26मैं सबके रह थे। लगता है ऐसे कोई नहीं है।
- 1:14:44मेरा कोई नहीं है मेरा। आखिर में पाओगे ना तुम?
- 1:14:57हो ना? दूसरा है सब वो है सब खेल उसके वो
- 1:15:08ही खेल रहा है, तुम कुछ नहीं करते।
- 1:15:14सभी उसका खेल इसलिए जो आखिर में पहुंचे उन्होंने शब्द कहा, तुम
- 1:15:20इससे झगड़े में ही मत पढ़ जाना। उठ लोगे कूदोगे।
- 1:15:26खाओगे पीओगे खेलोंगे ध्यान करोगे सब बेकार।
- 1:15:32तुम पाओगे। उसका खेल है सर, जैसे ही आंख ऊपर
- 1:15:44उठेगी और उन। नचाने वाले।
- 1:15:47हाथों को दागों से बंधा हुआ अपने आप को कठपुतली की तरफ पाओगे।
- 1:15:54तो सारे भार नष्ट हो जाएंगे, तुम कुछ नहीं कर सकते, पता लग जाए भी
- 1:16:02तो क्या करोगे? साँझ फेल होने को हो क्या करोगे?
- 1:16:11साँझ फर्स्ट आने को हो। जज बन जाओ, क्या करूँ?
- 1:16:19अगर जज बन कर भी। तुम्हें चैन न आया जो कि नहीं आता
- 1:16:28पक्का है नहीं आता। आई कैन से विथ गारंट ये खिसियानी
- 1:16:39बिल्ली खम्भा नोचे। बड़ी मशक्कत करके।
- 1:16:48इतनी। बड़ी कुर्सी पर पहुंचते।
- 1:16:50हैं। मैं सीएम बन गया, मैं सीजेआई बन
- 1:16:54गया लेकिन आखिर में पता है नहीं कुछ नहीं मिला हाथ अँधेरा ही रखा।
- 1:17:13रास्ता ही रास्ता है आगे नामंजिल ना किनारा।
- 1:17:33जाने कहाँ पहले चली है मुझको समय की धारा।
- 1:17:50टूटी नैया बिछड़े खिवैया, टूटी नैया, बिछड़े खिवैया।
- 1:18:07तूफान ने घेरा कोई नहीं है मेरा। सब के रहते सब है सब है बड़ी
- 1:18:31कुर्सियां, जनता जनार्दन है, सारी शक्ति हाथ में है सब के रहते।
- 1:18:44लगता है ऐसे आखिर में पता चलेगा जब कुर्सियां तुमसे छीन ले
- 1:18:53जाएंगे, कोई नहीं है मेरा। कोई नहीं है में राधे राधे श्याम
- 1:19:19मिला दे। राधे?
- 1:19:24राधे शाम मिला दे गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे।
- 1:19:42गोविंदा गोपाल हरे मेरी। नैया?
- 1:19:49पार लगा दे। गोविंदा।
- 1:19:57गोपाल हरे। मेरी नैया हार लगा।
- 1:20:07दे हार लगा। दे।
- 1:20:11यही जाना है, सबके हैं इसमें न तुम हो।
- 1:20:21ना कोई दूसरा है, ना कोई किसी का है।
- 1:20:28सब खेल है, उसका खेल है जिसने बनाया।
- 1:20:35मेरी नैया। बाहर लगा दे।
- 1:20:41गो बिंदा, गो फल हर राधे राधे शाम मिला दे राधे राधे राधे।
- 1:21:00राधे राधे श्याम मिला दे श्याम मिला दे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:21:13गोपाल हरे। राधे राधे शाम मिला दे मेरी नैया
- 1:21:24पार लगा दे नैया पार लगा दे या बता दे के कौन?
- 1:21:36यह बता दें कि सब कौन है, ये कौन है?
- 1:21:39ये क्या है ये बता दे मेरी नैया? पार लगा दे।
- 1:21:53गोविंदा। गोपाल हरे राधे राधे शाम मिला दे
- 1:22:03गोबिंदा गोपाल हरे। राधे राधे श्याम मिला दे गोविंदा
- 1:22:22गोपालहर ओह। धन्यवाद।