Latest / Baba ji Vijay Vats / 9 Nov 25 - विवक्षा ग्रंथि का रहस्य! विवक्षा ग्रंथि: इंसान के भीतर की गुप्त शक्ति का भेद! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:05पीतांबरेश बाबा जी चंद्रष्मर्ष भक्ति के बारे में आपने बहुत
- 0:17विस्तार से बोला है। कल आपने एक अजीब बात कही।
- 0:28अंधवक्ति पीनियर ग्लैंड के पास एक ग्रंथी होती है बेबीशा।
- 0:43उसमें अगर कोई बात फिर हो जाए, वह नहीं निकल सकते।
- 0:54मेरे आखिरी सवाल का है, मैंने सवाल पूछ के नहीं डाला।
- 1:03सह विस्तार रहस्यत्मक विवेचना करने का कष्ट करें पुत्र
- 1:17पितामरेश। पहले सोच लो क्या मैं इसका
- 1:30रहस्यत्मक विवेषण कर दूँ? मुझे कोई अर्जुन नहीं है।
- 1:46लेकिन यहाँ कृष्ण की पोल उगड़ेगी जी इससे पहले बहुत लोगों की पोल
- 2:00उगड़ी। और सत्य उगाड़ ही दिया करता है।
- 2:09अब अगर तुम्हारे जवाब मैंने दिए हैं तो कृष्ण की पोल उगड़े।
- 2:28क्योंकि कृष्ण ही वो तत्व है जो जानते हैं ये मैंने क्यों बोला?
- 2:42आपको कोई एतराज तो नहीं? सूक्ष्म?
- 2:52ये मनीष कहता है, उगड़ने दो उगड़ने दो निन्दा सुनने में बड़ी
- 2:57है, कान लगा लेते है, उस ग्रंथि का नाम है विभिक्षा।
- 3:14उसमें जो सूचनाएं संग्रहित होने की प्रोसेसर है उसको कहते हुए भी
- 3:20शाह उस ग्रंथि में जो कि रेत के दर्रे के समान महीन है।
- 3:36संतो की ऋषियों की मनियों की भाषा उसे विभीषा कहते हैं।
- 3:42वी भिक्षा अभी साइंस ने खोजी नहीं इसलिए साइंस जो नाम देगी वो दे
- 3:50देगी। साइंस से बहुत कुछ छुपा रह गया है
- 3:59अभी और कभी उखड़ रहे हैं, लेकिन हत उत्साहित मत होना।
- 4:09चरई व्यक्ति चरई बेटी चलते चले जाओ, कुछ न कुछ तो खोज लोग हैं।
- 4:25आइए अगर सुनने को तैयार हों तो मैं इस प्रश्न को उगाड़ देता हूँ।
- 4:38आपने गीता तो पढ़ी होगी पितामरेश नितने गहरा स्वाद पूछ लिया।
- 4:55साइकोलॉजिस्ट ने मनोवैज्ञानिक ने यह नियम तो खोज दिया की अगर बार
- 5:03बार किसी चीज़ को रिपीट की जाए तो वह आपके जीवन का डंग बन जाती है।
- 5:14मैंने भी बहुत बार उदाहरण दिए हैं।
- 5:17लाइफ है जहाँ तंदरुस्ती है कहाँ अब बाजार में चले जा रहे हो सावन
- 5:23खरीदने के लिए और रास्ते में टेलीविज़न पे लगी है।
- 5:33ये एड्स लाइव है जहाँ तंदरुस्ती है वहाँ इसलिए आज एडटाइजमेंट
- 5:41इसलिए मैं एडटाइजमेंट लगा रहा हूँ क्योंकि एडटाइजमेंट झूठ ही लगती
- 5:48है। सच के नृत्य सच तो खुद में ही फैल
- 5:55जाता है, बशर्ते के बस सत्य होना चाहिए झूठ को फैलाने के लिए
- 6:02मीडिया की जरूरत होती है दुष्ट तंत्र की जरूरत।
- 6:13सच को किसी मीडिया की जरूरत नहीं है।
- 6:18सच शम सिद्ध है, पहुँच ही जाता है धीरे धीरे उसे कोई जल्दबाजी भी
- 6:24नहीं होता, इसलिए मैं सदा से कहता हूँ।
- 6:31सब कुछ बोल जाऊंगा, फीड रखना तुम न सही तू नहीं और सही और नहीं और
- 6:47सही तू अगर है हरजाई तो अपना भी यही तो।
- 6:53तुम्हारी पुश्तों के काम आएगा, पुश्तों के बिना ही उनकी पुश्तों
- 6:58के काम आएगा। किसी की नस्लों के काम ये आएगा बस
- 7:06इससे संग्रहीत मात्र रख लेना। अब सुनिए व तथ्य जो मनोविज्ञान ने
- 7:18अधूरा छोड़ दिया, जो मनोविज्ञान से अभी तक खोजा नहीं गया क्योंकि
- 7:25वह ग्रंथी मिले और कृष्ण इसे जानते।
- 7:34जो भी व्यक्ति बुद्धि के दर से भी उतरा उसे मन के पार होना पड़ता है
- 7:41और मन के पार जाने का अर्थ है मन की पूर्ण यात्रा जाग कर कर लेना।
- 7:47एक एक पड़ाव। एक एक कदम उठेगा सब कुछ देख के
- 7:52जाओगे तुम बेहोशी में एक भी पांव नहीं उठेगा बा होश उठेंगे पांव
- 8:00तुम्हारे और तुम सब कुछ निहार लोगे।
- 8:04मार्ग में क्या गुस्सा आएगी? कृष्ण कहते हैं, बार बार कहते हैं
- 8:20मैं मैं अहम काम सर्व पाप्य भव मुख्य श्याम मानसूचा अन्यन्यास
- 8:32चिंतितु मांग। यो यो यम, यम ओम भक्तः श्रद्धार
- 8:49चित्त मैं इश्ति तश्य तश्य अचलाम श्रद्धां मान एवं व्यर्थम्या।
- 9:04जो जो व्यक्ति जीस जीस, संभावना से जीस जीस देवता के रूप को हृदय
- 9:12में बसा लेता। मैं उसी में ही उसकी श्रद्धा को
- 9:19अविचलित कर देता हूँ। तस्य तस्य अचलाम श्रद्धा अचल
- 9:27श्रद्धा पैदा कर लेता हूँ। कौन महामेव व्यथा में हम मैं कर
- 9:34सकता हूँ? ये बिल्कुल वही फार्मूला है।
- 9:39मोदी है तो मुमकिन है फिर ये अंधभक्ति कैसे हुई।
- 9:52तुम्हारे पास आँखें भी हैं। तुम्हारे पास वृद्धि भी है क्या
- 10:00तुमने नहीं सोचा यह पांच तत्वों का हार्डमास का पुतला कभी मरेगा
- 10:07भी फिर मोदी है तो मुमकिन है कैसे मुमकिन रह जाएगा?
- 10:14बुद्धि होते हुए भी तुमने कभी नहीं सोचा इसे ही अंधभक्ति कहते
- 10:21हैं जो कृष्ण चला गया वो कहते हैं, सभी धर्मों को छोड़ दो,
- 10:41सर्वधर्माण प्रतिज्ञा। तो क्या करो मान एकं शरण वृक्ष
- 10:47मेरी एक थी शरण आज फिर मैं क्या करूँगा हम तुम पाप से ही डरते हो
- 10:59क्योंकि पाप का फल होता है कष्ट प्लीज़।
- 11:03दर्द, तनाव, चिंता, हानि, सर्व पाप्य भव मोक्ष, शनि मा सुच्चा
- 11:17पापों से मुक्त कर तुम्हें मुक्ति मुक्ति की कोई जरूरत नहीं है।
- 11:23ये तुम्हारे शब्द हैं फौके। के कुंभ में लोग मारे गए, अच्छा
- 11:32मोक्ष हो गया। सही मोक्ष तुम्हें चाहिए तुम मौत
- 11:41से इसलिए डरते हो। कि तुम्हारे रचनाकारों ने शास्त्र
- 11:49के रचनाकारों ने मृत्यु को इतना पीड़ादायक दिखा दिया कि मृत्यु का
- 11:59क्षण जैसे लाखों, लाखों भिक्षु। काटते हैं।
- 12:02एक बार की उतना दर्द होगा, मैं तुम्हें बता दूँ, ये भ्रांत है,
- 12:16कोई दर्द नहीं होगा बल्कि खुशी हो गई तुमने ज़रा झीरने पुराने कटे
- 12:26फटे वस्त्र त्याग दिए। और नूतन नवनिर्मित वस्त्र पहन
- 12:33लिए। क्या तुम्हे दर्द होता है?
- 12:36उसमें क्या तुम्हे दुःख होता है, संताप होता है, शोक होता है,
- 12:44क्लैश होता है? ये जो कहावत बताई गई, इन लोगों के
- 12:52द्वारा जो व्यापारिक थे, जो लोग ही थे, जो लालची थे, पखंडी थे।
- 12:58उन्होंने कहा, जब मरोगे तो इतनी पीड़ा होगी, लेकिन मैं आऊंगा।
- 13:06और उस शिक्षण में तुम्हारी अंगुली पकड़ूंगा तुम ठीक ठीक पांच नाम
- 13:14लेते रहना और मैं तुम्हे सच खंड अब ये सच खंड होता ही नहीं।
- 13:26अगर स्वर्ग होता है तो यहाँ गद्दी नशीं लोग किस पुण्य का फल भुगते
- 13:33हैं अगर नर्क होता है तो यहाँ हॉस्पिटल में दर्द से कराहते हुए
- 13:41लोग। किस पाप का भुगतान करें?
- 13:49अगर सचकण कोई दूसरा ले जा सकता है तो वह भी मरने के बाद तो तुम्हें
- 13:58क्या पता चला? जिया जब जुं में सागन है सावन आए
- 14:36या न आए जिया जब जुं में। सावन है सावन आए या न आए जिया जब
- 14:49झूमे सावन है इन मूर्खों के दाऊ पेचों में फंस मत जाना।
- 15:02जीते जी आनंद पानी का नाम है मोक्ष इसलिए मैंने नव धर्म का
- 15:12निर्माण किया मुख्य द्वार मरने के बाद सब खा जो पाओगे जीते जी।
- 15:24और जीते जी तुम्हें मैं उस आनंदित सितारों पे ले जाऊंगा, थोड़ा करीब
- 15:36आओ। याद रह जाएगी देर रात करी बाज।
- 16:35धड़कते हैं बदन के शोले सद जो भड़कते।
- 16:53बदन में सो ले जान ले ले गई ये बरसा।
- 17:10एक करी बाजा। मेरे कई बाजा सर्द जीवकों से
- 17:21भड़कते हैं। बदन में सो ले जान ले लेगी ये
- 17:27बरसात। आनंद की बरसात करीब आ जाओ, जीते
- 17:34जी दिखाऊंगा तुम्हें शर्क जीते जी दिखाऊंगा तुम्हें सच्च खंड जीते
- 17:42जी दिखाऊंगा तुम्हें सतलोक। मरने के बाद आंखें यहाँ फूंक दी
- 17:52जाएंगी। किस्से देखोगे,
- 18:06जो जीते जी दिख जाए, वही शक जो जीते जी मिल जाए वही मुक्ति, वही
- 18:15मोक्ष। और चलो मेरे संग चलो, मैं तुम्हें
- 18:28उन सितारों पे ले जाऊंगा। जहाँ आनंद की करण बरस्त मरने के
- 18:45बाद तो धूल दूषित हो जाओगे। जली हुई हड्डियाँ गंगा में बहा दी
- 18:54जाएंगी। या कीर्तपुर साहब में बहादी
- 19:02जाएंगे, अपने अपने धर्म स्थानों पे बहादी जाएँगी, तुम्हारा क्या
- 19:10बचेगा? फिर कैसे देखोगे?
- 19:21जीते जी, मैं तुम्हें दिखाऊंगा और सरोशनाई की किरणों की झलक जिसमें
- 19:32तुम। प्रसी ही है।
- 19:48हजूर तुम को सितारों पे ले चलूँ। हजूर तुम यही है मोक्ष पार, जो भी
- 20:32धर्म तुम्हें मरने के बाद के सपने दिखाएं, वह सपने हैं, कल्पनाएं
- 20:44हैं। सपने तो तुम रोज़ देखते हो,
- 20:49कल्पनाएं तो तुम रोज़ करते हो क्या वो सत्य हो जाती है?
- 20:56ये धर्म तुम्हारे साल कीमती वर्ष शिव परमात्मा ने मानस का जमा
- 21:02दिया। बर्बाद करते हैं।
- 21:10इन्हें लोभी लालची व्यक्तियों के कारण तुम अब तक भटकते फिर रहे हो
- 21:18और आनंद की पुलक एक झलक तुमने कभी देखी?
- 21:26अन्यथा इतने इतने वर्ष थोड़ा लगा करते हैं।
- 21:36जीविषा, आग, तड़प, बिरहा अगर अनंत हो तो इसी पल भी मिल सकता है।
- 21:51बट को छः वर्ष से लगे महावीर को 12 वर्ष से लगे मुझे भी कोई
- 21:59ज्यादा वर्ष नहीं लगता। सन 70 में वो आग जगी रेलवे स्टेशन
- 22:08का। और 85 में मैं अनंत में सुना गया।
- 22:30कृष्ण कहते हैं मुझे समर माम एकम शरण बृज आइये, अब शुरू होती है
- 22:39कहानी अब तक था के 10 फ़िल्म की कहानी शुरू होती है।
- 22:47माँ एकं शरण वृक्ष अपने जीवन की लगाम मेरे हाथ में देते है पतवार
- 23:02नहीं लगाऊ, अब इसका फर्क समझ लो पहले।
- 23:07फिर हम आगे चल, तुम उसी के घोड़े पे सवार हो जाओ, उसी के रथ में
- 23:14बैठ जाओ, जिसका वह सारथी है कृष्ण अर्जुन के साथ ऐसा नहीं के कृष्ण
- 23:23का रथ हो। अर्जुन का रथ और था कृष्ण, कहा
- 23:27मैं तुम्हारा सारथी यहीं से बात साफ हो गई लगाम मेरे हाथ में है,
- 23:40तुम पतवार पकड़ा देते हो, पतवारों से तुम्हारी।
- 23:48नाव डोल जाती है तुम लगान सारथी के हाथ में दे दो कृष्ण तो कहते
- 24:02हैं, सर्वधर्माण प्रतिज्ञ माम एकम शरणम।
- 24:07अब इस बात को बारीकी से समझें भानुष्कर यह प्रश्न आया है अगर
- 24:14मैं विभीषा की बात न करता, अन्त भक्ति की बात न करता, भक्ति की ही
- 24:21बात करता हूँ कि यह प्रश्न न होता है?
- 24:34कृष्ण कहते हैं, समर्पित हो जाओ, तुम मेरे रास्ते पर ही बैठ जाओ और
- 24:47लगाम को मेरे ही हाथों में रहने दे।
- 24:49लगाम को पकड़ने की चेष्टा न करो। और अर्जुन मान लेता है।
- 25:02मुझे बहुत से प्रश्न आते हैं। इन सभी प्रश्नों का समाधान आज के
- 25:09इस प्रवचन में हो जाएगा। लगान तो बाबा।
- 25:17हमने आपको कभी की सौंप दी बिलकुल सौंप दी
- 25:33लगाम मेरे हाथ में है, जैसे में दिशा दूँ लगाम को इधर मुड़ जाओ,
- 25:41रुक जाओ। इशारे होते हैं।
- 25:44लगाम के रुक जाओ, चल पड़ो, इधर मडो बाएं मडो दायें मडो ठहर जाओ
- 25:54दौड़ो लगाम के इशारे थोड़ा अच्छी तरह से समझता है।
- 26:02और सारथी घोड़े को चलाना आता है। सारथी घोड़े को निर्देश देना आता
- 26:09है तुमने लगाम तो पकड़ा दी अब तुम अपनी हालत देखो क्या है?
- 26:26एक शब्द आता है अड़ियल टट्टू। तुमने सुना होगा सारथी लगाम से
- 26:35कहें के भागो और अड़ियल टट्टू अगले पांव मोड़ के बैठ जाए और
- 26:47अड़ियल टट्टू कहें देखो लगाम मैंने सोच तो दी।
- 26:57कहाँ लगाव सोंप दी भाई बात तो तब थी अगर तुम अपने पांव को वैसे ही
- 27:10रखते और इशारा मानते सारथी क्या चाहता है?
- 27:16दोनों बाएँ मडू, बाएँ मडू रुक जाऊं।
- 27:21क्या करूँ? क्या न करूँ तुम करते हो अपने मन
- 27:34कहते हो हम गुर मखी हैं ऐसे अड़ियल टट्टू की तरह?
- 27:45पांव मोड़ के बैठ जाना धरती पे तो बेचारा सारथी क्या करेगा सारथि
- 27:55तुम्हें दिशा देता है सारथि तानाशाह नहीं मैंने बहुत बार
- 28:00तुम्हें कहा। सारथि तुम कैसे चलो ये तो बता
- 28:07सकते है लेकिन सारथि तुम्हें तुम्हारे पांव सीधे करके नहीं
- 28:12कहेगा कि उठो और चल ने यही तो सारथि का था।
- 28:21तुम रोज़ कहते हो परमात्मा कैसे देख लेता है?
- 28:24इतना सब कुछ होता है उसी की सृष्टि में बलात्कार होते, हत्या
- 28:30होती, चोरी होती, झूठे व्यक्ति ऊंचे पदवी पे बैठ जाते और हमें
- 28:36पता होता है झूठ है। हमें पता होता है कि भला अगर खून
- 28:43में सिंदूर दौड़ेगा तो सिंदूर तो बड़ा है, जहर है, बंदा बजेगा
- 28:49कैसे? लेकिन हम सुनते हैं और मानते हैं।
- 28:56यही तुरंत लगती है और कृष्ण इस चीज़ को अच्छी तरह से जान।
- 29:08लेकिन एक ही नियम को दो तरीके से कार्यान्वित किया जा सकता है।
- 29:17उसी एटम से एटोमिक का पावर प्लांट बनाए जा सकते हैं और उसी एटम से
- 29:29एटोमिक का बम बनाया जा सकता है से किया जा सकता है।
- 29:34उसी आइटम से आनंद लिया जा सकता है।
- 29:39सुख लिया जा सकता है। दो धाराएं हैं जिधर चाहो तो मुझसे
- 29:47काम ले। जी मनीष कहते हैं तुम्हारा आज
- 29:57एनलाइटन डे है, आप पूर्वचन कर रहे है।
- 30:04मेरी शादी का दिन था 27 नवंबर 1991।
- 30:12थोड़ी थोड़ी सर्दी हो जाती है। मैं मोज से सोया।
- 30:17अपना बारातियों को ज्यादा शोक होता है।
- 30:22उन्होंने तो अपने पेंट कोट पहने हैं और टाई पहने हैं।
- 30:25बढ़िया मोज पॉलिश किया तो जीजा मुझे कहने लगा मैं सो रहा था।
- 30:33मेरी शादी थी और मैं सो रहा था और मज़े में सो रहा था और आनंद में
- 30:41सो रहा था। ये मजाक की बात नहीं, सच बात है
- 30:48तो मेरा जीजा कहता शादी है तुम्हारी।
- 30:52अब जीजा के मजाक करने की आदत भी है और उन्हें हक भी है।
- 30:59अच्छा के कहता हाँ सबके। साथ ही है कहता तो जीजा बासु।
- 31:09अब आनंद से सराबोर व्यक्ति का हाल क्या होता है?
- 31:13यह लफ्ज बा लफ्ज तुम्हें सही बता रहा हूँ।
- 31:18नहीं क्या जीरे ऐसा नहीं हो सकता। आवाज़ में आनंद की खसबो अरे तुम
- 31:28उठे नहीं अभी तक कब ना आओगे कब से मैंने कहा देख जीजा मेरे मन में
- 31:36एक प्रपोजल आ गया था थोड़ा सा वो भी मज़ा किया अब तू चला गया।
- 31:46कोई 90 के साल की उम्र में चला गया।
- 31:52सबसे बड़ा सर क्या प्रपोजल आयी? मैंने कहा तुम ऐसा करो, मेरी फोटो
- 32:06ले जाओ पासपोर्ट साइज बड़ी कहते हो बड़ी।
- 32:10सब तरह की फोटो है अच्छा तो इस फोटो से फेरे दिलवा लो तो सिंधुर
- 32:24कौन लगाएगा? उसने मज़ा किया, मैंने कहा सिंधुर
- 32:28तो। बहू रानी खुद ही लगा ली क्या शादी
- 32:35होने के बाद पति रोज़ लगाता है, बाद में भी तो लगाती है?
- 32:41पहली बार लगा लेगी तो क्या ठीक है?
- 32:49लाओ फोटो लाओ मैंने कहा बंदे ये बात मैंने झट से फोटो उठाई और
- 32:59संभाल के ले जाओ यह पासपोर्ट है, बड़ी कहें बड़ी कहते ठीक चलेगी
- 33:05यही चलेगी। लेकिन एक बात सुन ले, मैंने कहा
- 33:15ये शाम को जब हम आयेंगे ना बारे मुँह सूझाओगे और फोटो की जगह उसकी
- 33:21फोटो ही आएगी अरे? ये तो बड़ी बात कही तुमने फिर
- 33:31तुम्हारे मुँह तो नहीं, मैं सुजाता भाई तो फिर तू उठ ले, नहा
- 33:37धो ले और तैयार हो? ये बातें मजाक की नहीं हैं, लगती
- 33:44होंगी ये सत्यम तो कृष्ण कहते हैं, मेरी शरण में अच्छा और कृष्ण
- 33:54ये भी जानते हैं कि मेरी शरण में आओगे, तुम जूठे मोठे सौर सो
- 34:00प्रचार भोजन करोगे। कन्हैया के कपड़े, बदलोगे और सब
- 34:13तरफ अंधकार होगा और कहोगे दिल धड़कता है इसके अंदर इससे बड़ी
- 34:19बकवास की शोर सुनी धरती पर एक पंडित आया मुझे कहता वहाँ चलो।
- 34:30वहाँ कान्हा का दिल धड़कता है। मैंने कहा ली चलो मैं तुम्हारे
- 34:35दिल की हकीकत निकाल दूंगा, उसको चीर फाड़ कर के बता दूंगा ये था
- 34:39जो फिर दिल धड़कता है। तो अंधेरा क्यों हो जाता है सारी
- 34:49नगरी में? फिर पुजारी तक को क्यों नहीं
- 34:55बेहतर प्रवेश करने दिया जाता? कोई गड़बड़ है भाई पर्दा करने का
- 35:01मतलब यही होता है कुछ गड़बड़ करने।
- 35:10गड़बड़ पर्दे में ही होती है तो कृष्ण जानते हैं सब छोड़ दो
- 35:27धर्म धुरम को नहीं पता कोई धर्म नहीं छोड़ेगा।
- 35:32माँ ऍम एकम शरणम बरजो जानते हैं कोई मेरी शरण में नहीं आएगा शरण
- 35:38में आने का अर्थ है मैं किधर मुड़ु उधर मुड़ जा ठहराऊं तो ठहर
- 35:43जा भगाऊं तो भाग खुद भी भाग जाते हैं, रण छोड़ कहलाते हैं।
- 35:53मैं कहूं चोरी कर ले तू चोरी कर, मैं कहूं, दान कर दे तो दान कर
- 35:59तुम्हें बड़ी मुश्किल पड़ेगी, क्योंकि तुम्हारी तो बनी हुई
- 36:04दानवीर की छवि टूट जाए। परमाथों को भाई, डाका मार तुम को
- 36:17को नहीं मारो, फिर झगड़ा होगा अब वो भाई कहती है अब कसु झंका करू
- 36:27अब झगड़ा किस्से करू। लेकिन बड़े उच्चतम सत्र की बात है
- 36:39ये झंका बाई गति अवकाश को झंका का झगड़ा किसे का?
- 36:49क्योंकि मैं वहाँ पहुँच गई जहाँ झगड़ा करने योग्य कोई दूसरा बचे
- 36:53ही ना अब कहाँ सूजन खा कर अब तो एक ये है खुशी झगड़ा कर।
- 37:08शब्दों से ही तुम समर्पण कर देते हो, शब्दों से ही तुम परमात्मा से
- 37:16खुशी मांग लेते हो। शब्दों से ही चित्रों से तस्वीरों
- 37:21से कागजों के ऊपर नक्काशी करके तुम भगवान बना लेते हो।
- 37:29लेकिन आनंद कागजी खिलौना नहीं है, जो बाजार में मिल जाए।
- 37:35आनंद कागजी खिलौना नहीं, जिसका दान मिल जाए प्रेम न बाड़ी
- 37:42उपजाये। प्रेम किसी खेती में नहीं होता।
- 37:48प्रेम ना हार्ट विकाय प्रेम बनिये की दुकान पे नहीं मिलता प्रेम ना
- 37:58बॉडी उपजाए प्रेम ना हार्ट विकाय तो प्रेम मिलता कैसे?
- 38:06राजा परंजा जेहि रुचक दोनों में कोई भेदभाव नहीं जिसे अच्छा लगता
- 38:13है प्रेम जिसे चाहिए प्रेम बस एक छोटी सी प्रणाली है शीश देह ले
- 38:21जाय। तुम थोड़ा सा जरूरत करो।
- 38:42प्रेम मिलान की चार जेका प्रेम मिलान की चार।
- 39:01शी शीतलीधर शीतलीधर घर घर आ। जाते हो प्रेम से तो आप शीश तली
- 39:34पे रहते हो अरे शाम बाबा नहीं बन जाना है और।
- 39:42ये डंका डालते रहता है डंगा कहता अभी काट तू है नहीं इसके पास वो
- 39:55शीश तलीधर घरों में रह। वह जो अहंकार की शीश है, उसको गला
- 40:04दे मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मृतवा चाहे कि दाना काक में मिलकर
- 40:12गुलो गुलजार होता है। वो शीश काटना है वो काटना ही
- 40:20नहीं, गलाना है, जलाना है, उसकी बसम तक भी नहीं बचने देना है।
- 40:32संतों के वचनों में बड़ा गहरा रहस्य चुका होता है।
- 40:40बार बार बार बार बार बार अगर श्रद्धार चिंतन मी क्षति जो जो
- 40:47जाम जाम इस शब्द को फिर से समझा तनु भक्तः, श्रद्धार, चितं इ
- 40:55क्षति। जिसकी भी इच्छा है श्रद्धापूर्वक
- 41:01जीस, जीस देवता में किसी के दुर्गा में तुमने मूर्ति बनाई या
- 41:11अपनी मूर्ति बनाई सबको अच्छी लगती है हनुमान में।
- 41:16काली में जिसमें भी तुम्हारी श्रद्धा है यो यम यम सरदार चित
- 41:29श्रद्धापूर्वक चित्त जिसमें रम गया।
- 41:35और तुम उसके समर्पित हो जाओ तो कृष्ण जानते हैं।
- 41:42वह विविक्षा ग्रंथी प्रभावित हो जाएगी और उसके भीतर वो मूर्ति चली
- 41:49जाएगी, वो सूचना चली जाएगी। बस फिर फिर तुम कहोगे हाँ।
- 41:57मेरो तो गिरधारी गोपालु दूसरो न कोई मेरो तो गिर।
- 42:14धर्म गोपाल दो सिरों न कोई जा के सिर पे मोरू मुक्त है जा के सिर
- 42:30पे। मोरू मुकुट है, मेरो पति सोए मेरो
- 42:41तो गिरधर गो फिरम जाएगा विविषाकरण।
- 42:54बस मेरा तो गिर झरकों बाहर और मीरा की शादी हो गई।
- 43:01गुजरात से पांच चार वर्ष बाद युद्ध में मारा गया।
- 43:16लेकिन मीरा का पति नहीं बदला, तुम तो सात फेरे ले लेते हो, सात भी
- 43:26कहाँ होते हैं? 3.5 होते हैं तुम कभी गिड़ना।
- 43:34और पंडित से पूछना कि साथ कहूंगा ये तो 3.5 हो गए, इधर से उधर पैसा
- 43:43बैठ दिया, पचड़ा भर दिया, वो तो आधा ही रहेगा ना?
- 43:46पटड़ा अपनी तरफ तो आया ही नहीं। लेकिन तुम्हारी बिभिषा में सूचना
- 43:59चली गई कि यह तुम्हारा पति है। उसने मांड भर दी।
- 44:05ये सब बाहर की क्रियाकलाप बिभिषा ग्रंथि के भीतर अगर उतर जाए तो
- 44:12तुम सतीक। अब इस बात को गौर से सुन लेना
- 44:20जिसने सिंदूर लगाया अगर यह मान्यता तुम्हारी विवीक्षा ग्रंथि
- 44:26के भीतर उतर गई। तो यह तुम्हें उसकी दासी बना
- 44:40देता, फिर तुम कहो कि बस मेरा पति यही है।
- 44:53स्त्री सती होने से पहले श्रद्धा बनती होनी चाहिए।
- 45:00अगर श्रद्धा बनती नहीं है कुछ कुछ ठीक कहते हैं ये क्या नाम है इनका
- 45:15अखंडानंद के पगंडा खैर, कुछ ना तो कहते हैं ना की पांच।
- 45:23पांच जगह पे मुँह मार के आती उसका सतित्व नष्ट नहीं होता।
- 45:32अगर पांच जगह मुँह मारने से सतित्व नष्ट होता तो फिर ईसा की
- 45:42माता। मेरी कुंवारी माता न होती इसके
- 45:51ऊपर मैं प्रवचन पूरा दूंगा। अगर स्त्रियाँ चाहेंगी तो फिर
- 46:01कुंती भी कुंवारी न रहती कर्ण के जन्म के बाद?
- 46:08लेकिन इसकी एक बहुत गहन है कुंवारी माँ के पीसा पैदा हो गया
- 46:18हो सकते है गर्व फाड़ कर ही बचा है।
- 46:24और कोई जरिया नहीं। तुम्हारे ब्राह्मण मुख से पैदा
- 46:29होते होंगे, मुँह से खेंच लेते हो के तुम भाई क्या ज़ोर लगा निकल
- 46:35बाहर पंडित जी महाराज, लेकिन मैं कभी कभी सोचता हूँ।
- 46:44ये क्षत्रिय बाजारों से कैसे? यहाँ तो कोई सुराख वगैरह भी नहीं
- 46:51और ये बननी है कैसे? कोई सुराख भी नहीं, मुश्किलें
- 46:57दोनों में आती है। खैर कोई बात नहीं ब्राह्मण तो
- 47:00बड़े ही। मुख है चलो वहाँ से खींच लिए जाए
- 47:08असली द्वार जहाँ से बच्चा पैदा होता है वो गणाया नहीं है
- 47:14मूर्खानंदों में यहीं से तुम्हें इनकी मुरताएँ नजर नहीं आती।
- 47:24ज़रा सोच के वतन तुम कहते हो अन्ध भक्ति के बारे में कुछ बोलो
- 47:30तुम्हारी अकल ने कोई काम नहीं। किया।
- 47:3511 साल होने को आए। पर ये महानुभाव आज भी कर रहे हैं।
- 47:41कांग्रेस ने ये किया कांग्रेस ने ये किया और पीछे से कोई पूछ खींच
- 47:47लेता है और वो प्रभुत्व में बैठे हो।
- 47:4911 सालों से जवाहर लाल तो 64 में गया, इंदिरा चुरासी में गयी।
- 47:59राजीव विज्ञान में चले गए। अभी तो तुम हो, कांग्रेस ने जो
- 48:08किया उससे पहले तो बहुत कुछ निकल गया।
- 48:11तुम्हारी अटल बिहारी वाजपेयी जी भी निकल गए।
- 48:22अभी तुम बैठे हो भाई तुम पूछते हो उन्होंने क्या किया?
- 48:2770 सालों में हम नहीं पूछते, तुम नहीं कह रहा साल में बताओ बेचने
- 48:36के सिवा कुछ किया? एक व्यक्ति की तिजोरियां भर देना
- 48:47कहाँ का यूं साफ मतलब तो हमारी मंशा है बाकी भूखे भरे अंधा बांटे
- 49:01रेवड़ियाँ मुड़ मुड़ अपने को ही दे।
- 49:05इसका मतलब बाकी भूखे मरे प्रसाद उन्हें नहीं मिलेगा।
- 49:16अब घोड़े के ऊपर झलने का स्त्री को प्रवेश न करने देने का मंदिर
- 49:29में स्त्री को न भुलाने छूत। अछूत को न बुलवाने का कारण क्या
- 49:38है? कोई उसमें हरा खून बहता है अगर
- 49:46पर्दे खोलने लग गया। तो विनाश हो जाएगा तो मैं कहता
- 50:05हूँ ढका ही रहे गंदा तो अच्छा बदबू तो नहीं आ रही, ढक दो उसको।
- 50:20हजारों सालों से एक ही बात दोहराई थी विभिक्षा ग्रंथि के भीतर बैठ
- 50:26गए और तुम कुछ भी ना लेके जाओ संस्कार तो लेके जाओ कहीं।
- 50:35कॉन्शसनेस लेवल के साथ तुम्हारा देही संस्कार युक्त हो के जाता है
- 50:40अगले जन्म में और यह संस्कार तुम्हारे संगज है छू अछू तो बढ़ता
- 50:48ही गया जो जो तुमने सफर तक किया। ये आज का नहीं, एक जन्म का नहीं,
- 50:59हजारों जन्मों का इकट्ठा किए जैसे और संस्कार आए जैसे और ऐडिक्शन
- 51:07आए, वैसे ही एक ऐडिक्शन आए। फिर इनका हल क्या है?
- 51:17हल है कृष्ण क्या किया जाए? जो व्यक्ति ऐसी बातें करें।
- 51:35उसको चौराहे पर कर ईश्वर एक उसके बंदे एक एक नूर ते सब जग उपजा,
- 51:44कोण पले कोण बंदे। और अगर फिर भी कोई बंदा न माने
- 51:54क्योंकि प्राणी संस्कार मेहनत में साइंटिफिक।
- 51:57वे समझाती है, विविक्षा ग्रंथि के भीतर जो फंस गई, चीज़ वो तुम्हारे
- 52:06संस्कार में ऐड हो गया। जब तुम्हारा देह ही जाएगा अगले
- 52:11जन्म में तो वो भिक्षा ग्रंथि से यह संस्कार निकल के संग जाएगा।
- 52:18और संस्कार क्या है? अछूत का अगर साया भी पड़ जाए तो
- 52:22ना हो जाके। वह ब्राह्मण चाहे 20 दिन से न
- 52:29नहाया हो, फिर भी वह नहायेगा अछूत का साया संस्कार तुम्हारे संग
- 52:46जायेगा आज की परंपरा नहीं है। ये भला हो तुम्हें तुम्हें ही
- 52:59नहीं किसी भी धार्मिक व्यक्ति को डॉ।
- 53:07अंबेडकर के पांव शून्य। जो मानवता को इस गंदगी से निकाल
- 53:15गया। भेदभाव और जगह भी है सब तो फरका
- 53:23से भी लड़ के आएगा गाँधी को सारी उमर?
- 53:28भेदभाव से लड़ना पड़ा और अंत में भेदभाव के कारण ही सीने में चार
- 53:36गोलियां खा गई और मुख से गाली नहीं निकली।
- 53:44हैरान। खे।
- 53:48राम खे राम, तुम फिर भी गाली निकालो तो तुम्हारे है ही भीतर
- 53:57गाली मबाद है कूड़ा है, कैंसर राइटस का तो खून निकलेगा भी नहीं
- 54:03भाई। वे पुत्री कहती मैं नहीं थी, तू
- 54:09नहीं थी तो तेरी गलती यार तेरे माँ बाप की गलती पहले पैदा कर दी
- 54:14अब तो नहीं तो ये शुभ कृत्य मैं अपने आँखों से करती हूँ, मैं कहता
- 54:24हूँ चलो। अब कर ले पता, ठिकाना रोज़ बोलता
- 54:31हूँ 5 साल से ज्यादा हो गए डेली बोलता हूँ 5:05 और नीचे मेरे घर
- 54:39का पता होता है तू आजा। पिस्टल अपनी ले आ जैसे गुड़ से ले
- 54:48के आए मेरे पास तो यहाँ कोई शस्त्र है मेरे पास तो एक सीरि
- 54:54साहब पड़ी है, वो मुझे सम्मानित करके कोई भगत दे गया था सिंघसूर
- 54:59में वो मेरे दूसरे घर में पड़ी है यानी।
- 55:08अलंकार और पुरस्कार कभी साथ नहीं उठाये जाते।
- 55:12वह सलमान तो अगर तेरी तमन्ना नहीं भरी तो भूतों को गोली मत मारो।
- 55:24तुम कल्पना के आशी को तुम सपनों के आशी को सपनों में परमात्मा
- 55:36बनाने वाले लोगों दुष्टों मूर्खों मूडानंदों।
- 55:45वो खून नहीं था, वो रंग था जो तुमने भूत के भीतर भर दिया था और
- 55:55गोली चलाई और वो ही रंग निकला और तुमने तालियां मारी लेकिन अफसोस?
- 56:03फिर लड्डू की बांटे, मिठाई भी खाई लेकिन वो मिठाई उसी रब से आए जीस
- 56:14रब के ऊपर गाँधी की तस्वीर। तुम गाँधी की तस्वीर में कैसे
- 56:27मिटाओगे उन बूतों को मेरा भाई कहा करता है हम इंडियन हैं, न्यूयॉर्क
- 56:32में इंडियाना स्टेट में था तब। कहता यहाँ पर सब्जी मार्केट में
- 56:40गाँधी जी का पर्व है तो गोरे लोग आते हैं, हैट उतारते हैं, गाँधी
- 56:45जीके चरणों में रखते हैं, हम इंडियन हैं, हमारा सीना चौड़ा हो
- 56:50जाता है कि हम इंडियन हैं। जीस संत ने जीस, महात्मा ने या
- 57:05जीस व्यक्ति ने सारे हिंदुस्तान का गौरव बढ़ाया या जीस व्यक्ति ने
- 57:14जिसकी एक भी तस्वीर। तुम्हें किसी दूसरे देश में नहीं
- 57:19मिलेंगे। सलमान मिला गाँधी को और तू भी
- 57:27आजमाले पुत्री कौन है मुझे पता नहीं।
- 57:30मुझे नाम भी नहीं पता एंड तो सिर्फ कमेंट ही दे रहा था।
- 57:36कमेंट ही मेरे पास आया था। फॉर्वर्ड किया कमेंट ही मैंने
- 57:39पढ़ा था, मैं नहीं थी नहीं मैं शुभ कृत अपने हाथों से करती तू
- 57:44आजा अभी तो मैं हूँ। अभी भी शुभ कृत्य काम करने का
- 57:57वक्त बाकी है और मैं खुद ही कन्फेस कर रहा हूँ।
- 58:00आई ऍम गाँधी, फिर फिर से मरने के लिए आया हूँ है कोई कोर्ट से है
- 58:11कोई कोर्ट से। तुम कायर हो, चड्डी गाड़ी हो,
- 58:22तुम्हारे से बड़ी कायर को हम संसार में नहीं।
- 58:38विविक्षा ग्रंथी के भीतर हम जो जहर या जो अमृत भर देते हैं।
- 58:46मैंने कहा दो तर्फी धार है इसमें तुम चाहे तो ये भर दो।
- 58:56इम्पॉसिबल वर्ड इज़ नॉट फाउंड इन माइ डिक्शनरी मेरे शब्द कुश में
- 59:01असंभव नाम का कोई शब्द नहीं भरते ही जाओ, भरते ही जाओ, भरते ही
- 59:08जाओ। या ये भर दो, मोदी है तो मुमकिन
- 59:13है सारा जहान बोलना शुरू कर दे। यह खोज है ऋषियों की साइंटिस्टों
- 59:20से पहले ऋषियों ने इसे खोज लिया था।
- 59:23इस ग्रंथी को खोज लिया था। यह जो रेपुटेशन वर्ड्स है ये भी
- 59:35बार बार दोहराव ऐसा के नकली करते करते तुम्हें कभी असली याद आ जाए।
- 59:48ये गहरा विज्ञान है राम राम राम राम, राम राम करते हुए तुम राम ही
- 59:57हो जाओ राधे राधे राधे राधे करते करते।
- 1:00:07तुम अभी तो मूर्छित हो चेतना ही हो रहा है और वास्तव में तो तुम
- 1:00:12यू अरे कॉन्शस राधा का क्या करोगे?
- 1:00:21तुम हैं, क्या करोगे, राधा का क्या करोगे?
- 1:00:33राधा राधा करते करते तुम्हें समझ आजाये कि मैं क्षेत्र में हूँ,
- 1:00:42मैं जड़ नहीं। मुझे यह ढांचा नहीं है, यह जड़ यह
- 1:00:47जड़ है सारा। मैं जड़ नहीं हूँ, मैं राधा हूँ,
- 1:00:52मैं चेतन हूँ, राधा चेतना को कहते है, और राम वह जो रम हुआ है राम
- 1:01:03राम राम राम राम करते हुए उल्टा नाम जपेते जाना।
- 1:01:09बालमी का भय ब्रह्मा समाना तुम राम राम करते हो वह ब्रह्मा मई
- 1:01:14राम हो जाओ, फैल जाओ अनंत अभी सो में तुम्हारा कोई और छोर न बचे।
- 1:01:27तुम इतने फैलो, इतने फैलो कि तुम्हारा आधे अंत मध्य पता ही न
- 1:01:32चले, उसे ही राम कहते हैं वहीं जाकर आराम मिलता है, लेकिन तुम
- 1:01:44शब्दों से चिपकने के आदि। ऐसे अंधभक्ति पैदा होती है।
- 1:01:52राम राम राम, राम राम करते करते तुम धनुषधारी राम के साथ चिपक गए?
- 1:02:05राधा राधा करते करते तुम राधा से चुपक गए?
- 1:02:08कोई कहता राधा का तो नाम ही नहीं बात हुई।
- 1:02:14ठीक है राधा का नाम किसी शास्त्र में जो महत्वपूर्ण ग्रंथ थे,
- 1:02:21उनमें राधा का नाम नहीं है क्या? लेकिन तुम?
- 1:02:27शब्दों को चिपकने के आदि शब्द ही तुम्हारी जान है तुम्हें कोई गाली
- 1:02:34निकाल दे शब्द ही तुम्हारे लिए विश का काम करे।
- 1:02:45तुम कभी शब्दों के पार गए ही नहीं इसलिए शब्दों से पार तुम।
- 1:02:50सोच ही नहीं सकते। जो शब्दों से पार गया उसे भी गाली
- 1:02:55निकाली, बुद्ध को गाली निकाली, मुझे भी माँ की गाली निकाली,
- 1:03:01मैंने कहा मेरी माँ तो है नहीं। बहन की गाली निकाली, मैंने कहा
- 1:03:10मेरी बहन भी कोई नहीं है, दो थी मर गई माँ भी मर गई, अब क्या करूँ
- 1:03:18ये जो तू दे रही है ना तू माँ है ना बहन है अब तू ही रख ले अपने
- 1:03:24पास। ढंक होता है।
- 1:03:28मैंने कौन सा राज़ करना है जो आंसू बहू मगरमश्य से अंधभक्ति?
- 1:03:40जो बात बार बार बार देखिए वो सच्ची है, वो झूठी है, अब यहीं
- 1:03:45आके पेच भर जाता है। कृष्ण बोलते हैं श्रद्धा भाव से
- 1:03:54ईमानदारी से के मैं ही हूँ अनन्या चिंतन तो माँ ये जनाब्रुपास से और
- 1:04:05बिलकुल ठीक बोलते हैं, सच बोलते हैं।
- 1:04:09अनन्य भाव से जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक मेरा ही स्मरण करता
- 1:04:14है, मुझे ही समर्पित हो जाता है। तुमने तो समर्पण के भी गलत धंध
- 1:04:20निकाल दिया। तुम कहते हो समर्पित कर तो दिया
- 1:04:24लगान तुम्हें दे तो दी। लेकिन फिर घोड़ा अगर अगले पांव
- 1:04:29मोड़ के बैठ जाए कौन ताकत उसे उठा पाएगा?
- 1:04:33घोड़े की पावर? तुम्हें पता है कितने होते है?
- 1:04:35हम होर्स पावर से घोड़े की ताकत को गिनते हैं।
- 1:04:48तुमने लगान तो सौंप दी, लेकिन खुद बैठ गए सड़क के साथ तो क्या यह
- 1:04:56समर्पण है? कागजी समर्पण है।
- 1:04:59जैन धर्म में बीके में ये कागजी समर्पण होते है।
- 1:05:06कहाँ परमात्मा की इच्छा से तुम चलते हो मुझे मेरी शिष्य से कहने
- 1:05:14लगे आज तुमने कुछ नहीं कहा सुबह से मैंने कहा तुम्हे कौन कहता है?
- 1:05:20कहते है माता कह रही है कुछ नहीं कहा, मैंने कहा भाई मुझे किसी ने
- 1:05:25पूछा ही नहीं होगा। अगर तुम पिलाना चाहते हो तो यहाँ
- 1:05:43रख जाओ, कई बार तुम रख जाते हैं चुप कर के पहुँच जाता हूँ याद
- 1:05:50नहीं रहता। उस मस्ती को पीऊ या चाय को पीऊ
- 1:05:59दोनों में से एक ही पीना होगा। मुझे तो चाय बनाना है।
- 1:06:06और उस मस्ती को अपनाने से एक बार भी रोकना है तो झिझोड़ के भी जाना
- 1:06:10पड़ेगा। ये चाय बड़ी है।
- 1:06:12पी लो तो उस मस्ती को बड़ी मुश्किल से छोड़ के बाहर रहूंगा।
- 1:06:21चाय के भीतर चला जाऊंगा। ये अपने दिनचर्या है, यही है आलम
- 1:06:33बरसों से चला आ रहा अब आज एनलाइटनमेंट की चालीसवीं छात्रा
- 1:06:41है। पर मैंने सोचा कुछ और था, लेकिन
- 1:06:54भक्तजनों के आंसू दर्द भरी आवाज को चीखो पुकार जब अनकॉन्शियस में
- 1:07:07जाता हूँ। सुनी नहीं गयी।
- 1:07:12अगर मेरा एक फैसला मन बदलने से तुम्हारे मन को चैन आया तो ये भी
- 1:07:20एक खुशी की बात है और तुम खुश कैसे हो जाए?
- 1:07:26यही मेरी तमन्ना है, जान भी चले जाए वैसे भी टूट जाए, कोई बात
- 1:07:36नहीं लेकिन तुम्हें सुख मिल जाए। अपनी तो जान भी चली जाए तो कोई
- 1:07:48बात मेरी है तमन्ना तेरे घर के सामने।
- 1:08:04मेरी है तमन्ना तेरे घर के सामने मेरी जान जाए।
- 1:08:22मेरी जान जाए हाय मेरी है तमन्ना तुम्हारी खुशी के लिए बोलता हूँ,
- 1:08:37तुम कैसे खुश हो जाओ। कैसे आनंद में झूमने लगो तुम वो
- 1:08:44मस्ती का प्याला गटक जाओ और जाम को उठा के घूम घूम घूम ऐसा अलमस्त
- 1:08:58आलम हो तुम्हारा। जैसे मेरा तुम मुझे देखकर वापस मत
- 1:09:05लौट जाना, तुम मुझे देखकर एक बार गांठ में बांध के जाना कैसा हमने
- 1:09:11भी होना है और तुम ऐसा हो इसलिए तुम हो सकते हो।
- 1:09:22सभी तुम मानस योनी मिल गई। मानस योनी, एक कसौटी और ये पांच
- 1:09:32नाम देने वाले ये 20 नाम देने वाले 1000 नाम देने वाले कुछ भी
- 1:09:37कहें कि तुम घोड़ा बन जाओगे तुम। ऊंट बन जाओगे, बैल बन जाओगे नहीं,
- 1:09:41ऐसा कुछ नहीं होता। मानस सीरम में जो एक आ गया एक बार
- 1:09:47बना गेंहू का बीज चावल का बीज कैसे बन जाएगा?
- 1:09:56जो मनुष्य के जामे में आ गया वह बैल के जामे में कभी नहीं जाएगा।
- 1:10:02हाँ, कहने वालों ने किशोर कहा था तुम समझ कुछ और कहे?
- 1:10:08बहुत से लोग हैं जो आज भी मानस की योने में होते हुए गधे किसी
- 1:10:14जिंदगी जीते हैं जैसे हमारे प्राइम मिनिस्टर जैसे राजनीतिक
- 1:10:20लोग। सारे देश का बाहर इनके ऊपर है।
- 1:10:28बोझा ढोने के लिए आए हैं बड़ा पुण्य का का लेकिन वस्त्र ही न
- 1:10:35बदलते रहे ना कुछ बोझा भी ढोले। पेन ऊपर से ही नानक चलाते रहे।
- 1:10:46कुछ पेन को कागज के साथ भी रगडा दिलें।
- 1:11:03कैसी कैसी पागल पागलपत है इसका उपयोग भी हो सकता है दुरूपयोग के
- 1:11:14रूप में सद उपयोग के रूप में ये विविक्षा ग्रंथी तो अपना काम करे।
- 1:11:21ये तो एक इंस्ट्रूमेंट है, इंस्ट्रूमेंट को विनाश की तरफ
- 1:11:28मडोगे विनाश कर देगा, संरचना की तरफ मडोगे संगरक्षित कर देगा।
- 1:11:41लेकिन काम तुम्हें लेना आना चाहिए और कृष्ण जीस तरह से जानते हैं।
- 1:11:46कृष्ण तुम्हें आनंदित करना चाहते हैं इसलिए कहते हैं अनन्या चिंतन
- 1:11:56तो मान। और तुम्हें आनंद देना चाहते हैं
- 1:11:59तो आनंदित हो गए और जो खुद आनंदित हो गया उसकी कोई विषय, वासना, कोई
- 1:12:10विचार, कुछ संस्कार कुछ नहीं रहा। सब मिट गया खाख वह कोई तमन्ना
- 1:12:18नहीं रखेगा। बस उसकी एक ही तमन्ना है कि तुम
- 1:12:26भी ऐसे ही खुशी हो जाओ जैसे कृष्ण भगवान, इसलिए कृष्ण इसका सुदुपयोग
- 1:12:35करते हैं। इस ग्रंथी का जो अभी तक साइंस से
- 1:12:40खोजो ये है इसीलिए इसका मैं विवरण दे रहा हूँ।
- 1:12:47ये के बिल्कुल पास है, एक्यूरेट प्रेस मैंने इसका बदला दिया।
- 1:12:56इसका डायमेंशन क्या है? रेत के जरिये के बराबर इसका
- 1:13:04दुरुपयोग भी हो सकता है। मोदी है तो मुमकिन, फिर कहोगे,
- 1:13:10थाली खड़काओ, मोमबत्ती जगाओ, करोना भाग जाएगा।
- 1:13:18ऐसे भी इसका दुरुपयोग भी तुम कर सकते हो और दुरुपयोग वही व्यक्ति
- 1:13:25करेगा जो दुखी होगा। श्रद्ध उपयोग वही व्यक्ति करेगा
- 1:13:30जो सुखी होगा। जो दुखी होगा वो दुरुपयोग करेगा,
- 1:13:35वह प्रैक्टिकल करेगा, पूरे देश को प्रयोगशाला बना देगा, अलग अलग से
- 1:13:42प्रयोग करके देखेगा, लेकिन देश कहाँ सुखी होगा, देश सुखी होगा
- 1:13:50कृष्ण के ढंग से। फिर तो सुख नहीं फिर तो आनंद मिल
- 1:13:57गया। नॉन स्टिमुलेशन अपील्स गैर
- 1:14:03उत्तेजना से आया हुआ सुख इसकी परिभाषा है।
- 1:14:09आनंद। वह कोई उत्तेजना नहीं है, इतना
- 1:14:14ठहराव इतना मौन, परम मौन सांसों ज़रा अहिस्ता चलो वो आ रहे हैं।
- 1:14:31साँसों ज़रा अहिष्ण चलो दिल के धड़कने से भी इबादत में खलल पड़ते
- 1:14:37हैं, इतना भी खलल नहीं होता, तुम गर्क से गर्क, तुम चले जाते हो।
- 1:14:51आज तो बड़े बड़े यूनिट लगा दिया। वृद्ध गोली ले के सोना चाहते हैं
- 1:14:59और तुम सारी रात जगाते हो हमको क्या?
- 1:15:04क्योंकि तुम खुद दुखी हो। दुखी व्यक्ति कहेगा, हमें तो नींद
- 1:15:10नहीं आएगी, दूसरों को भी क्यों सोने दें सखिया, आज हमें नींद
- 1:15:24नहीं। आएगी साथिया, आज हमें नींद नहीं
- 1:15:33आएगी, सुना है तेरी महफिल में रति जगह है सुना है?
- 1:15:43तेरी महफिल में रतजगा है आँखों ही आँखों में रात कट जाएगी आँखों ही
- 1:15:57आँखों में रात कट जाएगी। सुना है तेरी महफिल में रतजगा है
- 1:16:11तुम शापित। हो।
- 1:16:14ये शापित लोग ही रात को 1:30 बजे पंचतत्व के पुतलों की को दर्शन
- 1:16:21कहते हैं। दर्शन है उस अज्ञात तत्व को निहार
- 1:16:29लेना और उसके बाद की परिस्थिति तुम्हारा रोम रोम आनंद से खिल
- 1:16:36जाएगा। क्या जिसके तुम 1:30 बजे रात को
- 1:16:41दर्शन करते हो उसके बाद रोम खेल जाता है और श्रद्धा के लिए खिल
- 1:16:45जाता है? बार बार दर्शन की आवश्यकता नहीं
- 1:16:47होती, दर्शन के नाम पे आज धोखा होता है।
- 1:16:55कोई थार के ऊपर छर्क से निकल जाता है दर्शन हो गया।
- 1:17:00कोई रात को 1:30 बजे पैदल चलो कुंज कैली राधा ये दर्शन हो गया
- 1:17:06क्या खाद दर्शन हो गया, पदार्थ के ऊपर पदार्थ चला इसको दर्शन कहते
- 1:17:14हो तुम को शर्म करो। कुछ हया करो क्यों भटका रहे वो
- 1:17:22मानवता को मानवता पहले ही दुखी है तुम इसको और नट में धकेलने के लिए
- 1:17:32आबध हो तुम। विभिक्षाग्रद्धि में तुम्हारे
- 1:17:51संस्कार भरे जाते हैं। साइकोलॉजिकल मनोवैज्ञानिक ने यह
- 1:18:01बात तो खोज ली अगर बार बार बार बार बार बार रेपुटेशन करोगे?
- 1:18:06और यह बात सिर्फ संसार के लिए नहीं, अध्यात्म के लिए भी लोग
- 1:18:10प्रयोग कर रहे है। रात रात को करो, राम राम करो
- 1:18:13कृष्ण कृष्ण करो, देखो ये पागल ये प्रभुवाद ने चलाया कि किसने चलाया
- 1:18:22हरे रामा हरे कृष्णा सम्प्रदाय। ये डोल के लिए फिर से अंग्रेजों
- 1:18:26को पागल कर दिया। ठीक से बोलना नहीं आता है रामा
- 1:18:34है। वही व्यक्ति दूसरों को दुखी करना
- 1:18:55चाहेगा, जो खुद दुखी हरे रामा हरे कृष्ण सम्प्रदाय महा जूतों का एक
- 1:19:06सूट बस। विवीक्षा ग्रंथि में भरना है के
- 1:19:14ऐसा करने से तुम्हें संस्कार बनेंगे और कुछ नहीं बनेगा।
- 1:19:18ना आनंद मिलेगा ना कुछ और मिलेगा इस ग्रंथि में तुम्हारी जो बहुत।
- 1:19:28गहरी से गहरी मान्यता है। इसको मैं धीरे धीरे तो बोल रहा
- 1:19:33हूँ कि तुम समझाओ जो तुम्हारी गहरी से गहरी मान्यता है वो इस
- 1:19:40ग्रंथि के भीतर फीड हो जाती है। वो बाहर नहीं निकलती सर और तुम?
- 1:19:48अंधभक्त हो जाता है, सब बदल दिए जाएंगे।
- 1:19:55अंधभक्त नहीं बदले जाएंगे। अंधभक्त तो कभी नहीं बदले जाएंगे।
- 1:20:02मैं अच्छी तरह से जानता हूँ। लेकिन अंधभक्तों का ऑब्जेक्ट बदला
- 1:20:12जा सकता है। इसको खाड़ फेंको गद्दी से तो
- 1:20:18अंधभक्ति मिटेगी तो नहीं बस कुल बुलाते रह जाएंगे कुल बुलाते।
- 1:20:29और इस कुल बुलाते हुए लोग सबरकर की इच्छा पूरी नहीं सबरकर कहता है
- 1:20:35मेरा सिद्धांत चलो। दोनों की डिस्कशन हुई मोहन दास और
- 1:20:42विनायक वो कहता युद्ध से मिलेगा। हथियार उठाना पड़ेगा।
- 1:20:48गाँधी कहते हैं, बिल्कुल हथियार नहीं उठाना पड़ेगा क्योंकि उनके
- 1:20:51पास हथियार सारे आलम के हैं। कैसे लड़ोगे उनसे?
- 1:20:56तुम्हारी एक छोटी सी कारतूस उसको मार देगा।
- 1:21:02तुम जार से पंचम तक पहुँच पाओगे। चार जो पंचम सिर्फ गाँधी को बुला
- 1:21:10सकता है वो देखते है इसने पटी धोती डाल रखी है।
- 1:21:13इसने कहीं रिवाज पर छुप भी नहीं सकता।
- 1:21:17अच्छी तरह देख उस लंगोट को भी देखा गया अच्छी तरह से।
- 1:21:23कहीं कुछ छुपा तो नहीं रखा बहू रुपिया के विश में आ गया वो कातिल
- 1:21:28लेकिन नहीं गाँधी सच्चे गाँधी जाते हैं और पूछते हैं मिस्टर
- 1:21:36गाँधी व्हेर अरे युअर क्रॉस? गाँधी कहते हो होता आपने पहन रखे
- 1:21:42हैं जना मेरे मेरे नहीं, मेरे सारे देश के कपड़े आपने पहन रखे
- 1:21:48हैं और जॉर्ज पंचम शौक लग गया उसे।
- 1:21:58हमने शायद यह बात कभी सुनी नहीं होगी।
- 1:22:01जार के पंचम को गाँधी की इस बात पर शक लगा और वो चारपाई पकड़ गया।
- 1:22:09उसके बाद कभी उठा नहीं मर गया और मरा भी।
- 1:22:14तड़प तड़प के। और मरा भी वो कहता अब ना मैं मरता
- 1:22:18हूँ ना मैं जीता हूँ बात बताई सिर्फ उसने अपनी एक विशेष व्यक्ति
- 1:22:26को कि गाँधी की ये बात मेरे जड़ गई।
- 1:22:36उसके बाद वह उठ नहीं सका। मर भी नहीं सका तो फिर अपने
- 1:22:41डॉक्टर से कहा, ऐसा कर मेरे कोकीन का इन्जेक्शन का जहर का टीका दे
- 1:22:48दे मुझे, क्योंकि यह जीना तो मरने से भी बदतर है।
- 1:22:57शब्द लड़ जाए क्योंकि तुम शब्दों को ही मान्यता आदित्य हो तो उससे
- 1:23:05बुरा कुछ नहीं होता। शब्द ही तुम्हें प्रभावित करता।
- 1:23:10शब्द ही तुम्हें सम्मोहित करता और ये जो पी एल आर वाले हैं ये
- 1:23:15शब्दों का ही उपयोग करते हैं तुम्हें ये प्रमोटैश करने के लिए
- 1:23:20जानते वानते कुछ नहीं। इनको अपना ही पिछला जन्म नहीं पता
- 1:23:24है और मैं चैलेंज बहुत बार कर लिया हूँ अगर कोई पिछला जन्म खुद
- 1:23:29का जानता है। तो आ जाएंगे ये तो मैं बताऊँगा।
- 1:23:37ये कौन थे पिछले जन्म में या ये बताये कि ये कौन थे पिछले जन्म
- 1:23:42में और मैं पिछले जन्म का तो तुम्हें पता है उससे पिछले जन्म
- 1:23:46में मैं कौन था? विविक्षाक्रांति में जो चीज़ फीड
- 1:23:59हो गई प्रोसेसर ऑफ फीडिंग, दैट इज़ कार्ड विविक्षा।
- 1:24:07और जो चीज़ फिट हो गई अगर तुम कृष्ण फिट हो गए तो सौभाग्य है
- 1:24:13आपका फिर तुम एक ना 1 दिन समर्पण करके दोगे, फिर तुम अड़ियल टिट्टू
- 1:24:21की तरह। अगली टाँगें धरती से सड़क से लगा
- 1:24:25के नहीं बैठूंगा, तुम दौड़ो उसके कहने से दौड़ोगे मैंने आपको अपनी
- 1:24:30बायोग्राफी में बताया, मैं घर से चल तक उछला, काली ऐन का लगा लेता
- 1:24:36और मेरी आँखें बंद होती बिल्कुल सत्य बोल रहा हूँ।
- 1:24:40मैं कहीं भी आंखें नहीं खोदता। मैं खुद मोड़ता, खुद आदेश उसका
- 1:24:47आता और मुझे तभी पता चलता जब मैं गौशला मंदिर के गेट पे हो जाता बह
- 1:24:56चलाता है, चलने वाला चढ़। लेकिन फिर तुम्हें वार न कर देता
- 1:25:03हूँ डिस्क्लेमर क्योंकि तुम में अभी वो श्रद्धा आई नहीं, मेरे में
- 1:25:08आ गई थी। ट्रेन की उस घटना के बाद परम
- 1:25:14श्रद्धा वान में हो गया था। कुछ तो है।
- 1:25:17देर इज़ सम पावर बियॉन्ड दिस वर्ल्ड ऑर इन दिस वर्ल्ड है।
- 1:25:29लेकिन बाद में पता चला कि बियॉन्ड दिस वर्ल्ड भी है ऑर इन दिस
- 1:25:33वर्ल्ड भी है ही इज़ आवर। तो तुम मत नकल करना शुरू कर दो ना
- 1:25:47क्योंकि तुम नकल से ही बनता हो। पहले कोई झलक में जाए, पक्की
- 1:26:02पक्की झलक में जाए। सितोरी की झलक से शुरू कर लो बाबा
- 1:26:06नानक को सतौरी की झलक से शुरू करा और फिर बढ़ता ही गया हाथ तो नजदीक
- 1:26:21से। नजदीक तर आते गए अब तो नजदीक से
- 1:26:33नजदीक तर आते गए पहले दिल। पहले दिल को अच्छा लगेगा।
- 1:26:44पहले दिल फिर दिल रूबा फिर दिल के दिल के प्यारे हो जाओगे।
- 1:26:53पहले दिल फिर दिल रूबा, फिर दिल के मेहमान।
- 1:27:01हो गए। रफत रफत, वो मेरी हस्ती कसम हो
- 1:27:12गए। रफत रफत वो मेरी।
- 1:27:18हस्ती का सामना हो गए। पहले जा फिर जाने जा फिर जाने
- 1:27:30जाना हो गए। रफ्तारफ था वो मेरी हस्ती कसम हो
- 1:27:45रफ्तारफ था वो मेरी हस्ती कसम हो। जीस दिन वो तुम्हारी हस्ती का
- 1:27:55सामना तो कृष्ण भिक्षा का लाभ उठाएंगे तुम्हें सन्मार्ग पर ले
- 1:28:05जाने के लिए तुम अड़ियल घोड़े मत बन जाना समर्पण करना।
- 1:28:12और समर्पण करके जैसे वो चलाये वैसे चलो क्वेश्चन ब्रह्माकुमारी
- 1:28:22की तरह समर्पण मत कर देना जैन धर्म।
- 1:28:30की तरह समर्पण मत कर देना। साध्वी की तरह ये झूठे हैं नकली
- 1:28:37इन्हें समर्पण का कोई पता नहीं। मेरी रोज़ मुलाकात होती है इन
- 1:28:45धर्माचार्यों। ये आपस में ड्राई फ्रूट ही बांटते
- 1:28:51रहते हैं। ये गुरु माँ तो सारे ड्राई फ्रूट
- 1:28:55खा गई, हमको तो कुछ नहीं दिया अरे फिर उसके देखो भाई उसे उठा भी तो
- 1:29:03नहीं जाता? परमात्मा पाप का दंड शंख शंख दे
- 1:29:09देता है। देखो ढ़ाई क्विंटल की हुई पड़ी है
- 1:29:19इसको तुम पुरस्कार समिट ड्राई फ्रूट छटें इसमें तुम्हारे।
- 1:29:26तुम्हारे हिस्से के तो डायपोंटर की कोई बड़ी उठा नहीं जाता उठेगी
- 1:29:36तो पांव की मुख हड्डी टूट जाएगी। इतना बार अरे भाई व्यक्ति को उठा
- 1:29:43सकता है, ट्रक को थोड़ी उठा सकता है।
- 1:29:47तो समर्पण करना है। कृष्ण सही ढंग से इस ग्रंथि का
- 1:29:55उपयोग करते है। राजनीतिक गलत ढंग से इस ग्रंथि का
- 1:30:02उपयोग करते है। इस ग्रंथि के बारे में अभी पता
- 1:30:05नहीं है। आज परसों बार मैं इस ग्रंथि का
- 1:30:09विवेचन कर रहा हूँ। व्याख्या रहस्यत्मक ढंग से कर रहा
- 1:30:13हूँ, क्योंकि आपका इसका नाजायज फायदा, क्योंकि आगे चलकर तुम सब
- 1:30:21कुछ भी पा जाओ। चक्रवर्ती सम्राट भी बन जाओ, वह
- 1:30:30नहीं मिलेगा जिससे मैं नॉन स्टिम्युलेटेड हैपीनेस कहता हूँ,
- 1:30:36आनंदा, वंचित रह जाओगे। तुम सारे आलम का राजवी पालो, जो
- 1:30:48किया संभव अभी तो गढ़ती मिढ़ती ही नहीं कर पाते कि हमारे भ्रमण में
- 1:30:57कितनी आकाश गम मैं। कितने यूनिवर्स हैं?
- 1:31:03इसकी संख्या की गणित भी नहीं हो सकती।
- 1:31:06तो राज़ क्या खाकर हाँ राज़ करने का एक ही तरीका है जो कृष्ण कहते
- 1:31:13हैं अखंड हो जाओ। इतना विस्तार कर लो अपना और
- 1:31:22विस्तार होगा प्रेम से अगर प्रेम नहीं अगर तुमने प्रेम
- 1:31:39की जगह को फैलाया, नफरत को फैलाया।
- 1:31:48तो मेरी इस बात को ध्यान से सुन लेना तुम संकुचित होते चले जाओगे,
- 1:31:55संकीर्ण तुम दुबक दे जाओगे, विराट न हो सकोगे।
- 1:32:02विराट होने का एकमात्र ढंग है प्रेम।
- 1:32:08ज्योत से ज्योत जलाते चलो ज्योत से ज्योत जलाते चलो।
- 1:32:23प्रेम की गंगा बहते चलो राह में आए जो दीन दुखी राह में आए जो दीन
- 1:32:38दुखी। सबको गले से लगाते चलो प्रेम की
- 1:32:48गंगा बहाते चलो, वही होगी ईद। तुम गले तो लगाते हो?
- 1:33:00लेकिन ईद नहीं होती। अगर प्रेम फैलाने लगो तो सच्ची ईद
- 1:33:11उस दिन होगी। फिर ईद का त्यौहार नहीं, इंतजार
- 1:33:22करोगे रोज़ ईद रोज़ गले मिलोगे? दुखियों को दिनों को गले से लगा
- 1:33:32लो फिर ईद हो या ना ईद हो या के न हो।
- 1:33:43मेरे लिए ईद हुई। जो प्रेम करता है उसके लिए ईद हो
- 1:33:47गई। फिर ईद का त्योहार तुम्हारा आये
- 1:33:50या ना आये? जो प्रेम करता है उसके लिए सदा ही
- 1:33:54ईद आ जाती है। ईद उसका मिलना, मानस को गले लगाते
- 1:34:00लगाते उस विराट को गले लगा लो। यही संदेश
- 1:34:19धन्यवाद।