Latest / Baba ji Vijay Vats / 5 Apr 25 - मैं कुछ खाता नहीं, कहीं जाता नहीं? मैं किसके लिए बोलता हूँ? देखिए और समझिए!
Transcript
- 0:07हे विराट। विकास मलिक परमात्मा न्यायकारी है
- 0:31या करुणा? मान या दोनों?
- 0:39विस्तार में समझाने का कष्ट करें। अति कृपा ओके धन्यवाद गुरुदेव
- 0:55विकास मालिक, रोहतक। रोने वाले तुझे रोने का सलेका ही
- 1:13न है। अश्क पीने के लिए है या की बहन के
- 1:24लिए है। ये पता होगा शराब न्यायकारी होती
- 1:41है या करुणा भान होती है, दयालु होती है।
- 1:50के सर्वज्ञ होती है। क्या होती है शराब?
- 2:02ज़रा सोचना कब से तुम इस पचड़े में पड़े हो, तुम्हें समझ नहीं
- 2:13आता। वह जो समझा जा नहीं सकता, अब इसका
- 2:25हल कौन क्या करे? वह न्याय कार्य भी है, वह भी है
- 2:44थोड़ा आगे भुर भुर वह हत्यारा भी है।
- 2:52जिसकी हत्या होती है वह भी वो है। जो न्यायाधीश है वे भी वो गुनाह
- 3:04भी वो करता है, गुनाह भोगता भी वो है?
- 3:10अगर ऐसा ना हो तो संत व्रत हो जाएंगे।
- 3:19उपनिषद गलत हो जाएंगे, गीता गलत हो जाएगी, धर्मशास्त्र गलत हो
- 3:25जाएंगे। हम जैसे लोगों ने आँखों से देखा
- 3:36हम गलत हो जाएंगे। मुझसे प्रश्न पूछा कबीर से तो आप
- 3:42पूछ नहीं सकते वो तो कब के का है, न्यायकारी है या करुणा?
- 3:54मान या दोनों दोनों नहीं सभी कुछ वो है वो ही बदमाश है।
- 4:04वो ही गुंडा है, वो ही लफंगा है, वो ही दानी है, वो ही दान लेने
- 4:09वाला बिकारी है बस ये पूछो वह क्या नहीं है, इसका जवाब तो शायद
- 4:21मैं दे दूंगा। वह क्या है इसका जवाब तो मैं नहीं
- 4:29दे सकता। फिर तुम्हें किसी पांडाल लगाने
- 4:34वाले को खोजना पड़ेगा। कैसे शिविर लगाने वाले को खोजना
- 4:41पड़ेगा? कोई धंधा करता हो उसको ढूंढना
- 4:46होगा कम से कम विकास मेरे पास इस बात का जवाब है, मैं तो सिर्फ
- 4:57जानता हूँ अश्क पीने के लिए। पीओ शराब जानने के लिए नहीं नहीं,
- 5:08शराब पीने के लिए और शराब को पीने से ही मस्ती आती है।
- 5:18और ज़रा सी दे दे साखी और ज़रा सी और कैसे रहूं चुप के मैंने भी ही
- 5:31क्या है होश अभी तक है वाकई? और ज़रा।
- 5:41सी दे दे साकी। और ज़रा सी।
- 5:45हो जानने की कोशिश में पुत्र जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे?
- 6:05तुम जैसे आसमानों को यह प्रश्न निगल गया छोड़ दो जब छोड़ दोगे
- 6:15तभी शुभ वेला होगा शब्दों में। निहीं शब्द को समझने की चेष्टा मत
- 6:25करना मैंने बहुत समझाया, उदाहरण देके समझाया, कहानियों कह के
- 6:34समझाया, लेकिन तुम कहाँ समझ फिर आज फिर वही।
- 6:49प्रश्न उठ जाता है तुम्हारा तल? नहीं बदला तो ठीक कहते हैं कबीर
- 7:06मूर्खों का तल नहीं बदला करता। कब पिओगे पीने के लिए कोई योग्यता
- 7:23नहीं चाहिए ये समझ लेना तो ये संत समझाएंगे वो तथा कथित संत हो गए।
- 7:33पीने के लिए योग्यता चाहिए माला फेरो इतने घंटे बैठो इतने घंटे
- 7:45जॉब करो, दुर्गा सप्तस्त्री का पाठ करो।
- 7:50नवा परायण का? अन्य अन्य तरीकों से उसके योग्य
- 7:59हो जाओ तो मैं समझी नहीं आया उसका।
- 8:09माता अपने लाड़ले को या लाड़ली को कभी देखती है कि लेबड तेबड के
- 8:16बाहर से आया है कीचड़ से सना सन आँखों में आंसू।
- 8:32डेढ़ हवा चेहरा पे जान नहीं आता और सिर सिर के पर सारा कीचड़ सारा
- 8:40शरीर कीचड़ से लबालब कर रहा है। क्या माता के पास जाने के लिए
- 8:51बच्चे को किसी योग्यता की आवश्यकता होती है?
- 8:55नहाया धोया हो, अच्छी पुष्क पहने हो फिर वो गोदी में उठाएगा नहीं
- 9:04फिर वो माँ फिर माता की परिभाषा तुम्हें पूछनी पड़ेगी माता वो
- 9:14होती है। बच्चे की आँखों में सिर्फ आंसू
- 9:18देखते हैं और उससे कुछ लेना देना नहीं, मेरा बच्चा दुखी है।
- 9:29क्या लेना था ये प्रश्न पुष्क इससे तुम्हारी कौन सी समस्या हल
- 9:39होगी? मैंने तुम्हें एक बात समझाई।
- 9:45प्रश्न वो पूछना जिससे तुम्हें ज़िन्दगी में सुकून आये।
- 9:53तुम दुखी हो या तुम्हे जानो, मैं भी कभी था और तुम्हारे जैसा ही
- 9:59मैं था शायद तुम्हारे से दो रत्ती ऊपर, लेकिन मैं अच्छी तरह से
- 10:11जानता हूँ। मुझे चाहिए क्या था?
- 10:15मुझे खुद भी नहीं मालूम था कि मुझे क्या चाहिए और उस परवर दिगार
- 10:24में बच्चा जानता है कि मुझे क्या चाहिए?
- 10:31लेकिन उस निबड़े तिबड़े बच्चे को माँ गोदी में उठा लेती है, प्यार
- 10:43करती है, दूध पिलाती है, आंचल में बैठाती है, अपने पल्लू से उसका
- 10:50मुख साफ करती है, उसे ज़रा भी तो फिकर नहीं।
- 10:55मेरा साड़ी का ब्लू खराब हो जाएगा होती है क्या अब माता की परिभाषा
- 11:05भी पूछोगे मेरे से अब क्या पूछोगे माता?
- 11:14दयालु होती है या करुणावान होती है।
- 11:19शायद कभी ऐसा दिन आ जाए। माता तक के बारे में तुम पूछ नहीं
- 11:27सकते वो दयालु होती है या न्यायकार्य होती है, करुणावान
- 11:31होती है। माता तो बस माता होती है माता तो
- 11:37वो वट वृक्ष है जिसके नीचे बैठ के शांति की छैया में बैठा जाता है,
- 11:47माता की परवाह पूछोगे। फिर एक बात तो पक्की है कि प्यास
- 11:59जगिनी मैं जानता हूँ मेरे चैन पे बहुत पुरानी हो शहीद।
- 12:12प्रथम वीडियो से ही मुझे सुन और मैं हैरान हूँ आज भी वो ही प्रश्न
- 12:26तुम बदले नहीं? तू भी बदल एम् फलक ज़माना बदल
- 12:33क्या माँ की परभाषा कुछ नहीं ज़रा गौर से देखना माँ दयालु होती है,
- 12:51न्यायकारी होती है, कोरोनामानु होती है, क्या होती है?
- 12:55माता तक इसको परमात्मा के मुकाबले में हम बराबर नहीं रखते।
- 13:10उस तक की परभाषा नहीं पूछी जाती। और तुम परमात्मा की परभाषा पूछते
- 13:17हो उस विराट उस विराट के क्या? वह परिभाषाओं में बंधता है?
- 13:33वह इतना छोटा है कि प्रभाषाओं से बांध लिया जाए।
- 13:40अगर वह करुणा मान है तो यह क्रोध कौन करता है?
- 13:51अगर वह न्यायकारी है तो यह। उपद्रव कोण करता?
- 13:54है। मेरे इस बात का जवाब देना तुमने
- 14:00मुझसे पूछा मैं तुमसे पूछता हूँ सभी से पूछता हूँ, अगर वह मात्र
- 14:08करूणावान है, तो क्रोध कौन करता है?
- 14:16अगर वह मात्र दयालु है तो दंड कौन देता है?
- 14:29अगर वह मात्र क्षमा करता है, तो फिर?
- 14:35दंड कौन देता है? क्या तुम शब्दों से ही उसे नापते
- 14:45तोलते रहोगे? सदा और मैं विदा हो जाऊंगा कैसा
- 14:51है क्या? फिर मेरी कमरों से पूछोगे, फिर
- 15:02मेरी उसम, सोई हुई माटी से पूछोगे, कबीर अगर तुम्हें मूड
- 15:14कहते हैं तो कुछ करते हैं। कबीर कहते हैं कि जब गुरु जीवंत
- 15:25होता है। तुम ऐसे प्रश्न पूछते हो जिनका
- 15:31आनंद से कोई वास्ता नहीं होता। चिल्ला चिल्ला के मैं बुरा हो
- 15:37गया। वो प्रश्न पूछो जिससे या तो
- 15:44तुम्हारे संदेह मिटें भ्रांतियां नवृत्त हूँ ये धार न टूटे और तुम
- 15:52उस आनंद के तट को छू सको, उसमें नहा सको लेकिन।
- 16:00फिर फिर वही शाम। वो ही गन, वो ही तन्हाई है फिर वो
- 16:16ही शान, वो ही गन। वो ही सब कुछ है।
- 16:25ज़रा भी तो नहीं बदले क्या फायदा हुआ?
- 16:33मैं कोई व्यापारी हूँ जो धन कमाने के लिए बोल रहा हूँ।
- 16:39आखिर अंदेशा क्या है? क्यों बोल रहा हूँ मैं कभी गौर से
- 16:48देखा, मेरे जीवन को जी नहीं काटा, कितना मजेदार है और बिना किसी
- 16:57साधन के मजेदार है। ये बेड वगैरह तो तुम्हें दिलवा
- 17:03दिया है, अन्यथा मैं तो टूटी चारपाई पे भी बैठ के बॉल्स करता
- 17:08हूँ। ज़रा भी आपत्ति नहीं, मुझे शर्म
- 17:13नहीं आती। इस मसले में मैं तो फटे चीड़,
- 17:17चीड़ पहन के भी बोल सकता हूँ। मुझे राजशाही लिबास नहीं चाहिए,
- 17:26इसीलिए तो त्रिपुंड नहीं लगाता। इसीलिए तो मेकअप नहीं करता,
- 17:32इसीलिए कोई लालिमा का सवाल नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ।
- 17:39कि मैंने तुम्हें आकर्षित नहीं करना है, यह मेरा मंतव्य नहीं,
- 17:48मेरा मर्टन है, मैंने तुम्हें उस पल तक पहुंचाना है जहाँ जाकर तुम।
- 17:57तुम्हारा भीतर का अस्तित्व बोल पड़े वाह वाह हे गुरु और तुम तभी
- 18:07बोल पाओगे अगर सच में तुम्हें आनंद का खजाना मिल गया।
- 18:12अन्यथा तो बोलना झूठ होगा। तुम वाहेगुरु वाहेगुरु का नाम
- 18:16जपते रहो। कहाँ कुछ होता है भीतर वो आनंद न
- 18:25वोपड़ा भीतर का तन तुमने नहीं छुआ।
- 18:33तुम वाहेगुरु का जाप करते हो, कुछ भी नहीं होने वाला।
- 18:41वाहेगुरु उस स्थिति में बोला जाए। तुम्हारे भीतर का रोम रोम बोले
- 18:47तुम्हारी अंतरंग ध्वनि। प्रकट हो बाहर वाह वाह वाह हे
- 18:54गुरु अगर ये ना आया तो फिर तुम वहाँ नहीं पहुंचे जीवा से तो कोई
- 19:05भी बोल सकता है क्या दिक्कत है? कोई भी तो नहीं रोकता लेकिन काश
- 19:23तुमने वो मकान छू लिया होता। तुम इस बगीचे में उतर गए होते,
- 19:33यहाँ भांति भांति के फूल खले हुए यहाँ मदमस्त करती हुई हवाएं
- 19:43फिज़ाएं ये गुलस्ता। तुम्हारी नाश्ता पुटों में उड़ेल
- 19:50दिया जाता है और तुम मदहोशी के आलम में कहते हो, वह वह
- 20:07कब तक पूछते रहोगे? प्रश्न।
- 20:13अब तो मुझे दुख होने लगा है सत्य का तुम इतनी देर में तुम कितना
- 20:23बदले तुम्हारे भीतर धन्यवाद का एक स्वर तक नहीं होता।
- 20:34और ऐसे प्रश्न यही इंगित करते हैं क्योंकि अगर वो आनंद उपज गया होता
- 20:51तो पुत्र प्रश्न गिर गया होता। मैं लक्षणों से सब कुछ जान लेता
- 20:59हूँ हाँ मेरे व्हाट्सएप के ऊपर बहुत प्रश्न आते हैं, बड़े संदेश
- 21:09होते हैं। बस मैं उन चार अक्षरों से समझ
- 21:14जाता हूँ। बहुत से लोग बहुत सी भाषाओं का
- 21:23इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मैं मस्त आनंद में पढ़ा उस विराट।
- 21:35के विराट तत्व का आनंद सस्ता रहता हूँ और अकेला मैं ही अधिकारी नहीं
- 21:45हूँ। तुम भी उतने ही अधिकारी हो ना
- 21:55मेरे से कम ना मेरे से। मैंने तो मांगा भी नहीं था ओह बरस
- 22:05गया, उसकी कृपा हुई न जाने क्यों वह बरस गया।
- 22:17और मुझे नहला गया सारा कूड़ा कचड़ा झड़ क्या साफ हो क्या और
- 22:32आनंद से मैं नहा गया वो शरद पूर्णिमा की रात?
- 22:43लेकिन मेरे भीतर ऐसे कुछ नहीं क्यों?
- 22:54क्योंकि मैंने कभी संतो को सुनाया करीब करीब किशोर अवस्था में।
- 23:02ट्रैन इंसिडेंट हो गया तब तक खोपड़ा इतना चला नहीं था, अभी तो
- 23:10मैंने अपने पांव पे खड़ा बना था, अभी तो मुझे जल्दी होती थी जबली
- 23:20स्नान करके। गाड़ी पे जाऊं यहाँ से 15
- 23:26किलोमीटर दूर पिरकोलस सुबह सुबह जल्दी और फिर वापस आना फिर वहाँ
- 23:40सीखना। फिर घर आके रिपीट करना, बस यही
- 23:44मेरी ज़िन्दगी थी परमात्मा, परमात्मा, आनंद, खुशी किसी का कुछ
- 23:53भी पता नहीं होता। पौष्टिक पदार्थ बहुत ही खाने के
- 24:06लिए है। दूध, दही, घी, माखन, मलाई इसमें
- 24:10खेलते थे हम मिठाई पैसे की कमी थी, नकदी नहीं थी।
- 24:22इसलिए गरीब थे। यहाँ तक कि मेरा पास मेरे
- 24:35प्रोफेसर बना के देता था। किताबें मुझे लाइब्रेरी से फ्री
- 24:38मिल जाती है। गरीब है।
- 24:45एक आध सूट भी मैडम सिला देते थे, बूट भी दिला देती थी, जोराबी दिला
- 24:54देती थी, बराबर ख्याल रखती थी, यह दयालुता थी।
- 25:01यह न्यायकारी था, मैंने कौन सा कार्य किया था, क्या हो गए?
- 25:10इससे और खूब मन लगा के पड़ता था। एक छोटी सी कहानी, मेरी संगति
- 25:27खराब हो गई और मुझे पता भी नहीं था 1 दिन, कुछ पांच चार लोग
- 25:38उन्हें पता नहीं था। इसके पास कोई पैसे होते हैं कि
- 25:41नहीं, लेकिन पता नहीं कहाँ से। मुझे ₹30 महीना मिलता है, ₹1 रो
- 25:48चुका, वो मुझे मेरी मैडम महीने में दे देती है।
- 25:54एक बार वो मेरे पास आए थे। वह थोड़े बहुत कभी कभी घर से भी
- 26:03मिल जाते। वह व्यक्ति मुझे कहने लगा
- 26:13तुम्हारी ये पीरियड खाली है, मैंने कहा हाँ, ये पीरियड खाली
- 26:18है। उस दिन एक लेक्चर मेरा खाली था
- 26:27कहता थोड़ी ताश खेल ले ये तिकड़ी होती है।
- 26:34मैंने कहा मुझे ताश आती नहीं खेली, मैं कभी खेला ही नहीं।
- 26:38वो तो हम सीखा देंगे। 1 मिनट में शमीदार हो आकर कॉलेज
- 26:43में हो, मेडिकल के छात्र हो या तो अनपढ़ भी खेल लेता है।
- 26:54मैं बैठा सब समझा गया। वो कद्दर की बात मुझे पता चला कि
- 27:04ये पैसे से खेली जाती है और मेरे पास तो ले दे के कुछ ज्यादा पैसे
- 27:10भी नहीं थे तो गैम्बलिंग शुरू हो गई।
- 27:17और तीन पत्तों वाले नाम नहीं पता आज क्या कहते हैं उसे हमारे वक्त
- 27:23में उसे तिकड़ी कहते थे। जिसके पास बड़े पत्ते आ गए वो जीत
- 27:30गया, बिच में ब्लांड हो जाती। जब कुछ मैं वहीं से सीखा हो तभी
- 27:35सीखा। बचपन में कभी जुआ नहीं खेला और
- 27:44कमाल की बात में सारे जीत गया। सबकी जेबें खाली, सभी मलंग हो गए,
- 27:52घंटे भर में दूसरा पीरियड भी आ गया, लेकिन मैं तो मस्त था।
- 28:04जैसे जुए में तुम्हारा ध्यान लगता है ना रस।
- 28:12अगर यही रस उस परमात्मा में पैदा कर लो तो कब के पहुंचे?
- 28:21जाओ ठीक कहा रत्नावली ने। तुलसीदास को जितना प्यार तुम
- 28:32मुझसे करते हो, हार्ड मास के चामड़े से करते हो, उसे आधा प्यार
- 28:39भी राम से किया होता निस्संदेह पहुँच गए होते।
- 28:47कितने एकाग्र होते हो तुम और मुझसे पूछते हो बाबा एकाग्र कैसे
- 28:51हो जाएं? कितने मस्त होते हो तुम जुआ खेलते
- 28:55हो, लेकिन सोए होते हो जाग के कभी देखा ये नहीं इतना रश होता है।
- 29:06इतना रस, वो परमात्मा का रस हमेशा परमात्मा का होता है।
- 29:12वो जुए में हो वो संभोग में हो, वो खेल में हो वो कूद में हो जहाँ
- 29:19रस हुआ समझो परमात्मा बरसा। तुम मुझसे पूछ लेते हो बाबा आनंद
- 29:34कैसे मिलेगा? मैंने कहा देखो जब तुम जुआ खेलते
- 29:37हो, आनंद कैसे मिलता है? क्या होता है उस घड़ी थोड़ा सा
- 29:42बारीकी से झाँस लेना? अंतरंग क्षणों में तुम्हें आनंद
- 29:46मिलता है। उस वक्त क्या दशा होती है
- 29:49तुम्हारी मैं बता दूँ देह भान नहीं रहता, वक्त का भान नहीं
- 29:58रहता। ये दो चीजें मिट जाती हैं
- 30:01एकोलेस्स्नेस्स टाइमलस्नेस्स। अगर तुम ये दो परिस्थितियां बिना
- 30:12अंतरंग क्षणों के पैदा कर सको तो तुम वहीं पहुँच जाओगे जहाँ अंतरंग
- 30:22क्षणों में पहुंचे। तो मैंने सारे पैसे जीत लिए हैं,
- 30:32अब राजनीतिक तो बेईमान होता है। उसने कहा ये तो भागों वाला कर्मों
- 30:38वाला है। कर्मों वाला कौन होता है, मुझे तब
- 30:45भी नहीं पता था। बस ये खुद बुला के ले गया।
- 30:50सारे पैसे जीत लिए, अब मौज करेंगे साल भर साल भर क्या हज़ारों रुपए
- 30:58हो गए सबकी जेबें खाली सात आठ लोग से और पीछे से खिलाड़ी।
- 31:09लेकिन बदकिस्मिति उनकी ये रह गई कि वो जो ताश थी वो ताजा अभी लेके
- 31:17आए थे, लगाई नहीं थी, वो ताश को भी लगाना होता है, ये टैक्ट नहीं
- 31:24आता है, मैंने कभी सीखा नहीं। वो अनलगायी हुई ताश से खेले और
- 31:34हार गए तो मुझे बोले कुछ रुपए उसकी तरफ से रहे, आज मुझे याद
- 31:42नहीं बहुत पुरानी घटना हो गई। करीब 50 साल पुरानी बाकी पैसे थे
- 31:55मुझे कहते चलो घर चलो घर पे पैसे पड़े हैं सारे पैसे ठूस ठूस के
- 32:01मैंने सब भर लिए जेबों में। खींसा तो होता नहीं था, तीन चार
- 32:07जेबें होती थी दो पैंटों की तीन पैंट की और एक ये जेब एक चोर जेब
- 32:14होती थी, सब भरी गई, ठूंस ठूंस के भरी गई।
- 32:21कहते है चलो घर। बाकी के पैसे दे दूँ?
- 32:23उसके बाद तो तुमने पीरियड टेंड करना होगा।
- 32:26मैंने कहा तो चलो घर मैंने कहा चलो लालच बुरी बला है।
- 32:37वहाँ गया तो उनके पेच में फंस गया।
- 32:39वहाँ लगी हुई ताज पड़ी थी। कहते खेलोंगे मैंने कहा लालच बुरी
- 32:50बला होते है, मैंने कहा तुम्हारे पास पैसे तो हैं नहीं थे कहता यार
- 32:55तो भरी पड़ी अलमारी, मैंने कहा फिर हो जाये।
- 33:02हो जाए तो उन्होंने सारे पैसे वापस ले लिए।
- 33:05लगी हुई ताश मेरे पास तीन बादशाह आ गए हैं।
- 33:11उनके पास तीन झक्के थे और मुझे कुछ मालूम नहीं।
- 33:15ये ताश से लग भी जाया करते। मुझे तो बड़ा मान के तीन बादशाह
- 33:24मैं तो बड़ा भाग्यशाली हूँ आज लेकिन ये राजनीतिक लोग भाग्यशाली
- 33:30को निर्भाग बना दिया करते हैं, धीरे धीरे धीरे धीरे करता।
- 33:41एक ही चाल सिर्फ एक ही चाल मैं जेब से निकालता ये ले गिन ले
- 33:48कितने हैं ये लगा दे वो उससे ज़्यादा लगा देता है।
- 33:53मैं सारी जेबें खाली कर एक पैसा भी नहीं बचा।
- 34:00और चाल बड़ी लम्बी फंस गई। अब मुझे याद नहीं कितनी फंसी
- 34:09मैंने कहा अच्छा शो कर वो तो जानते थे मेरे पास इक्के हैं तीन
- 34:16वो कहता पैसे बनाओ मैंने कहा पैसे तो।
- 34:20तुने भी उधार किया था अब ये देख ले जो बचे वो गिन ले बाकी फिर दे
- 34:26देंगे तुमने भी तो ऐसा किया था, वो तो चाहते थे उन्हें पीसे गनी।
- 34:40जितनी चार थी कहते इतने पैसे आपको और देने पड़ेंगे।
- 34:43बोल दो शो कर दो या फिर पत्ते, पटक दो तीन बादशाह पटे रखने का
- 34:52दिल नहीं करता। मैंने कहा तुम शो कर ही दो, नहीं
- 34:58जाने तुम। बल्ब खेल रहे हो पता लगता है तो
- 35:05उसने पत्ते खोल दिए तीन इक्के अब यह तो मुझे बाद में पता लगा मैं
- 35:11हार हूर के आ गया, घर चला गया। मन बड़ा खराब था, अगले दिन फिर आ
- 35:21गया, कॉलेज गया, लेकिन उस दिन मैं मैडम का पीरियड अटेंड नहीं कर
- 35:28सका। इतने में सब पता चल गया था मैडम
- 35:34को। मुझे एकांत में बुलाएं, रोने लगी,
- 35:39मैंने कहा क्या हुआ, मैंने पांव छुए, माता क्यों रो रही, क्या
- 35:48बताऊँ मैंने सुना तुमने जुआ खेला, मैंने कहा क्यों खेला?
- 35:55हाँ, ये तो मुझे भी नहीं मालूम हार गए, हाँ फिर इतने पैसे सिर हो
- 36:04गए, कैसे दोगे? देखेंगे आगे से मत खेलना, ये पैसे
- 36:11मैं दे दूंगा। बस वो मेरे लिए भारी सबक भारी सबक
- 36:22सिद्ध हुआ और उसके कुछ दिन बाद डेक्लमेशन कॉन्टेस्ट उसके बाद।
- 36:36प्राइज विनिंग डिस्ट्रीब्यूशन और फिर वो ट्रैन की घटना मुझे लोग कह
- 36:44देते हैं। बाबा आज शुरू से ही ऐसे थे नहीं,
- 36:49नहीं अब उलफरे का? हाँ, बस आगे का बुरा जीसको तुम
- 37:08भरे से बुरा कर्म कहते हो वो भीग ही है।
- 37:19लेकिन उसको क्यों तरस आया? यह तो मुझे नहीं पता अब माँ को
- 37:27क्यों तरस आता है लिबड़े तिवड़े बच्चों पर यह बना कोई जान सकता
- 37:32है? उसको 1 दिन तरस आ गया अब क्यों
- 37:38तरस आ गया? ये मत पूछ लेना मुझे क्योंकि ये
- 37:44मुझे पता नहीं, मुझे लोग पूछ लेते हैं तुमने भगवान देखा, मैं कहा
- 37:49बिल्कुल देखा कैसा है, क्या बताऊँ क्या बताऊँ नहीं बताया जा सकता।
- 38:02कुछ कुछ वो तो मैं बोल दिया अब मैं क्या करूँ?
- 38:08नहीं आता सब नहीं आता भावनाओं में रो तो पड़ता हूँ इससे ज्यादा क्या
- 38:14करूँ? कभी खोद पे, कभी हालात पे रोना
- 38:34आया कभी खोद पे। कभी खुद पे कभी आलात पे रोना आया
- 38:52बात निकली तो हर बात पे। रोना आया बात निकली तो हर बात पे
- 39:11रोना आया कभी खुद पे। बस रो सकता हूँ बता नहीं सकता हूँ
- 39:29और जो बातें तुम पूछते हो, मुझे लगता नहीं वो पूछने योग्य हैं।
- 39:38बस छोटी सी उदाहरण मैं दे दिया करता हूँ शराब के बारे में मत
- 39:42पूछना, शराब का मज़ा लेना, गटक जाना, गले से नीचे उतार लेना, और
- 39:54फिर तुम भी देखो गए। शराब के बारे में पूछा नहीं जाता
- 40:01कौनसे घटक हैं? कौनसे कॉन्टेंट एनालिसिस नहीं
- 40:05करोगे? बस उस का मज़ा उठाना होता है एक
- 40:14सर का मज़ा उठाना। ईश्वर को पियो, बड़ा मजेदार है,
- 40:24बड़ा आनंद से भरा पड़ा खल जाओगे तुम भला एनालिसिस करने वाला कभी
- 40:35मज़ा चख सकता है। नहीं, उसकी खोपड़ी काम करने से और
- 40:45जब तक तुम्हारी खोपड़ी काम करती है तो हम परमात्मा की योग्यता
- 40:50हासिल नहीं करते। ये सभी खोपड़ी का प्रश्न है जो
- 40:55तुम पूछ लेते हो। बार बार मेरे कहने के बावजूद भी
- 41:01तुम मुझसे वो सवाल पूछा करो जिससे तुम्हारी कुछ गुत्थियां सर्व हो
- 41:08जाएं जिससे तुम उन तरों को छू सको।
- 41:13जहाँ जाके डुबकी लगा के तुम भी मज़े में हो जाओ, क्या तुम ये ठीक
- 41:19नहीं लगती? बात फिर तुम उसकी वृहदता को
- 41:25प्रणाम करोगे हे विराट तेरे व्रत तत्व को प्रणाम।
- 41:37इतनी मस्ती को, चख के उस विराटत्व को प्रणाम ना निकले भीतर से वाह
- 41:44हे गुरु ये शब्द ना निकले इसे जपना नहीं पड़ता ये ध्यान रखना।
- 41:53ये भीतर के अंतरंग तलों से आता है पुकार की तरह शिकायत की तरह नहीं
- 42:02आशीर्वाद की तरह। तुम अभी भी सवाल पूछने की इच्छा
- 42:17रखते हो, तुम्हारा कभी मन नहीं हुआ तो इस व्यक्ति को यह एक जगह
- 42:29क्यों बैठा है? कोई लूला लंगड़ा है, कोई लकवा मार
- 42:39गया है, कोई मजबूरी है क्या? क्यों नहीं घूमता लूले लंगड़े तक
- 42:48घूम लेते? ट्राइसाइकलिक है क्योंकि मन करता
- 42:58है घूमने का यह अच्छा भला सब है, कुछ खाता क्यों नहीं?
- 43:09कुछ हजम नहीं आता। क्या कुछ खराबी है क्या एक स्थान
- 43:18पर क्यों बैठा रहता है कभी तुमने गहराई से सोचा नहीं सोचा?
- 43:28तो सोचना बहुत कुछ मिलेगा तुम्हें इसमें जिन रस्तों पे तुम चले हो
- 43:44और अस्तित्व में लगती हैं। क्या हम सूरज को पालेंगे?
- 43:50इन प्रश्नों में कुछ नहीं रखा। सूरज को छूने निकला था।
- 44:16आया हाथ अंधेरा कोई नहीं है मैं। कोई नहीं है मेरा कोई नहीं है
- 44:49मैं। सबके रहते लगता है।
- 45:00ऐसे कोई नहीं है मेरा। कोई नहीं है में।
- 45:22यहाँ रस्ता ही रस्ता है मंजर नहीं लगता है, मृग मारी चिका की तरह
- 45:33रस्ता। ही।
- 45:36रास्ता है आवे ना मंजिल ना किनारा।
- 45:55रास्ता ही रास्ता है आगे नामंजिल न किनारा जाने कहाँ।
- 46:13पर ले चली है मुझको समय की धारा टूटी नैया।
- 46:29बिछड़े खिवैया टूटी नैया बिछड़े खिवैया तो फनोने।
- 46:46घेरा कोई नहीं है में कोई नहीं है।
- 47:04मेरा कोई नहीं है मैं। रस्ता ही रस्ता है आके ना मंजिल
- 47:19ना के। जीस राह बिचल पड़े हो बेटा पुत्र
- 47:28रस्ता ही रस्ता है न मंजिल है, न किनारा है तुम खो जाओगे कहाँ
- 47:35जाओगे प्रश्नों की इस बाबरी में गुम मत हो जाना?
- 47:43कौन बचाएगा तुम्हें? आज लालची लोगों का ज़मान है कौन
- 47:50निकालेगा पुत्र? तुम्हें क्यों फंस रहे हो तुम?
- 47:59कितनी बार मैंने बोला है? मेरे बैठे बैठे कोई दल चूर जब ये
- 48:14तुम्हें रास्ता दिखाने वाला चला जाएगा तो फिर मैं बच्चा अच्छी तरह
- 48:23जानता हूँ। और बाहर क्या है?
- 48:30ऐसा नहीं मुझे बाहर निकले, ज़माना भीत के ठीक लेकिन मेरे पास एक
- 48:37दूसरी दृष्टि भी है चरम चक्षुओं से अलग एक दिव्य दृष्टि भी है।
- 48:43वो मैं देखता हूँ तुम सूरज को छूने निकले हो आया।
- 48:52हाथ अँधेरा। अँधेरा होता है।
- 49:08मत चुको मत चुको मुझे ठीक नहीं लगता ये कालिमा से भरा हुआ भविष्य
- 49:20पल पल पे मैं तुम्हें जगाता हूँ। जाग जाओ वेला है जागने का, फिर तो
- 49:31तुम्हें जगाएगा भी कोई नहीं? फिर तो तुम्हें हर एक व्यक्ति
- 49:37सुलाने की कवायद में आसन बैठा है, तुम्हारे इंतजार कर रहा है।
- 49:43कब तुम उसकी चौखट को झूम लो और बहुत तत्पर है मेरे घर से कोई
- 49:50तिरष्कृत व्यक्ति उनके पास है, वो तैयार है, उन्हें संख्या चाहिए।
- 50:03उन्हें भर जाए, तुम मत चूको यह वेला है, सुबह कब की हो चुकी है,
- 50:17कब की मुर्गे ने बाग दे दी और कब का सूरज निकल गया?
- 50:25तुम अब भी सोए हो और ये प्रश्न एंकित करते हैं कि तुम सोए हो और
- 50:32जागने की कहीं तमन्ना आस पास मुझे नज़र नहीं आती मैं तुमसे कहूँ तो
- 50:39क्या कहूँ? हृदय भरा आता है, वह क्या है,
- 50:55क्या नहीं है यह बाद में कर लेना पहले पी लो।
- 51:08और फिर पीके मुझे बताना मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, फिर तुम ये
- 51:14प्रश्न कर पाओगे वहाँ जाकर सारे प्रश्न गिर जाते हैं।
- 51:21प्रश्नों का जवाब नहीं मिला। वहाँ जाकर प्रश्नों को करने वाला
- 51:28घर जाता है तुम मत भटको बहुत देर भाई फिर इंतजार करोगे?
- 51:52अगर अब चुक गए तो फिर पुत्र तुम्हें उठाएगा कौन?
- 52:02हर माता का, हर पिता का यह संदेह होता है।
- 52:09मैं चला जाऊंगा, मेरे बच्चों का क्या होगा और ध्यान रखना तुम जो
- 52:16मेरे चैनल पे हो सिर्फ यही मेरे बच्चे हैं।
- 52:21मेरे बच्चे वो भी हैं जो किसी ढेरे में बैठ गए हैं।
- 52:27मेरे बच्चे वो भी हैं जो किसी एकांत में बैठ के राम राम चुप रहे
- 52:31हैं और मैं उनकी दुर्दशा पर दुख पुकारना हूँ, लेकिन मेरी आवाज़
- 52:46वहाँ तक पहुंचने नहीं दी जाती। क्योंकि तुम मेरी आवाज़ हो और तुम
- 53:01ही बावरे हुए फिर से हो पहुंचाएगा फ़ोन काश तुमने उस तल को छुआ
- 53:12होता। और तुम नृत्य करते हुए फिरते तो
- 53:17लोग पूछ ही लेते, जो दुखी हैं, ये नृत्य तुमसे किसने बताया?
- 53:26ये नृत्य तुममें जन्मा कैसे? ज़रा हमें भी रास्ता बता दो।
- 53:40मैं सिर्फ करना बा नहीं, मैं क्रोध ही और सनातन बड़ा शानदार
- 53:48है। सनातन विरोधों को समाहित कर देता
- 53:52है। बड़े आराम से सनातन कहता है मैं।
- 54:00मर्यादा पुरुषोत्तम आराम ही नहीं हूँ, मैं शील और शांत स्वभाव रखने
- 54:07वाला आराम नहीं हूँ, मैं क्रोध ही पर सुराती हूँ।
- 54:18मैं मर्यादा रखने वाला भगवान राम नहीं, मैं सब मर्यादाओं को लाने
- 54:26वाला कृष्ण भी हूँ, मैं एक स्त्री व्रत दिये सिर्फ राम नहीं हूँ।
- 54:36मैं बहू स्त्रियों के साथ संगम करने वाला कृष्ण भी हूँ, मैं
- 54:44मात्र सती सावित्री ही नहीं हूँ। अनिका गुणिका भी मैं हूँ तुम
- 54:54सनातन को समझा नहीं पुत्र। सनातन आखिर तक जाता है जहाँ सब
- 55:14बाधाएं समाप्त हो जाती हैं, सब सीमाएं लाँघ जाता है।
- 55:19सनातन। और सनातन के ऋषि पूजनीयत हैं।
- 55:35उन ऋषियों ने जो धारा बांधी वो आज भी अखंड हैं।
- 55:41यद्यपि इसको विकृत करने की चेष्टा बहुत हुई है।
- 55:45इतिहास फूंके गए, उनकी खोजें समाप्त कर दी गईं।
- 55:52किसने की ये जरूरी नहीं जानना लेकिन समाप्त कर दी गईं, लेकिन ये
- 56:02सनातन आज भी मौजूद है। मुख्यधारा के रूप में कहीं नहीं
- 56:09गया। सनातन सदा है सनातन, कार्ति या
- 56:20तुम्हें विरोध देता हुआ भी। यूनाइटेड कर देता है।
- 56:27तुम कहते हो उत्तर है और दक्षिण है दागा कहता है, मैं उत्तर भी
- 56:33हूँ और मैं दक्षिण भी हूँ, क्या सनातन है सनातन तुम्हें डबाइट
- 56:41नहीं करता? सनातन वसुधैव कुटुम्ब भूकंप का
- 56:46नारा देता है और वो सत्य भी है। मुझे कहाँ बांटोगे, देशों में
- 56:55मुझे कहाँ बांटोगे धर्मों में मुझे कहाँ बांटोगे जागती फाती
- 57:00में? मैं कभी बैठता हूँ हिंदू
- 57:03मुस्लिमों में नहीं, ये तुम्हारी कोशिश से व्यर्थ हो जाएंगे।
- 57:091 दिन बांटने वाले 1 दिन बैठ जाएं।
- 57:20जूनियफिकेशन करने वाले मात्र बचे जाएंगे।
- 57:28कहाँ नहीं हूँ मैं किस समय नहीं हूँ मैं बताओ तो कोई एक जगह हूँ
- 57:39मैं। जेता तेता तेता नाम ये सारा पसारा
- 57:47मैं ही हूँ मेरा नावे ना ही कोठा मेरे बिना कोई जगह नहीं, कोई
- 57:57स्थान नहीं। आई ऍम प्रेसेंट एवरीवेयर, ओमनी
- 58:04पेटेंट, ओमनी शिएंट, ओमनी प्रेसेंट क्या नहीं हूँ मैं कहाँ
- 58:13नहीं हूँ मैं सब हूँ सब जगह हूँ सब कुछ।
- 58:22मुझे शब्दों की सीमाओं में बांधने की चेष्टा नु करो ईश्वर कर्ण बाण
- 58:32है या न्याय कहे या दोनों? दोनों ने ही सब कुछ बस इस बात को
- 58:40याद रखना पड़ता है। डिवाइड करने की चेष्ठा कम से कम
- 58:49मुझे मत करना डिवाइडेशन में मैं कभी आसन।
- 59:00मैं वो हस्ती हूँ जिसे बांटा नहीं जाता सब जगह हूँ मैं ईशा वस्त्र
- 59:11में सर्वम यत के जगते आम जगत है। अहम् ब्रह्मास् तत्व और मशीष्वेद
- 59:22के तो तुम भी हो तुम्हें भी जगा दूं।
- 59:27यही जगाने की चेष्ठा शुरू से आज तक है और आगे भी।
- 59:40यह मकान जब तक जीवन है और जब तक मैं इसमें बैठा हूँ, जब तक ये काम
- 59:48करता है, इसका पुर्जा पुर्जा, तब तक मैं बोलता ही रहूँ।
- 1:00:00तुम्हारे लिए बोलेंगे तुम्हें जगाऊंगा और जागे हुए का ये ही
- 1:00:11कर्तव्य होता है कि सोए हुए को जगा दे।
- 1:00:14और क्या कर्तव्य होता है? तो बोलो मत तुम भी वो ही हो कभी
- 1:00:23मैं तुम्हारे जैसा था कभी तुम मेरे जैसे हो जाना।
- 1:00:33इसी बात को समझाने का प्रयास निरंतर तुम्हारी दैनी दिशा को मैं
- 1:00:47भलीभाँति जानता हूँ, देखता हूँ और यही तुम्हारी भीगी पलके घेरते,
- 1:00:54आंसू मुझे वाद्य करते हैं कि मैं बोलूं।
- 1:00:59अन्यथा कोई कारण न था। काश काश तुम संभल जाओ, काश तुम
- 1:01:10जाग जाओ। मुझे प्रश्नों की सीमाओं में
- 1:01:16बांधने की चेष्टा मत करना कौन हूँ मैं, क्या हूँ मैं कहाँ से आया
- 1:01:24क्या है मेरा अस्तित्व ये सब मैं कहाँ से लेके आया ये सब क्या है
- 1:01:32मत पूछो। जो भी है तुम्हारे लिए है, तुम
- 1:01:39आनंद क्यों नहीं मान लेते? रिसर्चर बनने की चेष्ठ ना करो
- 1:01:50ऐनालिस्टिक बनने की चेष्ठ ना करो कम से कम।
- 1:01:56इस विषय को तो छोड़ दो इस राह को तो बिना खोजे छोड़ दो ये राह
- 1:02:06पूछने के लिए नहीं है ये राह पीने के लिए है मैं खाने में जाके सवाल
- 1:02:13जवाब कहाँ। और यह तो मधुशाला है यहाँ मस्ती
- 1:02:21बनाई जाती है यहाँ डाला जाता है उस रस को उस सोम रस को।
- 1:02:32जो तुम्हें आनंद से आपूर्ति कर देता है सीमाओं को बांधना बंद
- 1:02:39करो, प्रश्न मत पूछो, तुम्हारे प्रश्न तुम्हारी अज्ञानता से
- 1:02:47ज्यादा कुछ नहीं बताता। उस विराट को बंधनों में बांधते
- 1:03:01हैं ये प्रश्न फिर लुटेरे तुम्हें जवाब भी देते हैं।
- 1:03:11इसी बात का डर है सर मुझे लुटेरे तुम्हें भरमाएंगे बताएंगे वो क्या
- 1:03:19है और लुटेरों को पता कुछ भी नहीं।
- 1:03:32फिर तुम उनके पास जाके चरणार, बिंद करो, तुम्हारे चरणों के बंधन
- 1:03:40से कुछ नहीं होगा क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है।
- 1:03:47जीसको पता है वह बोलता है, पियो। यह पीने के लिए है और फिर तुम सब
- 1:03:56जान जाओगे जब तुम पिटोगे तुम चुप होते हो।
- 1:04:06इसका एक कारण है। क्योंकि तुम चुप होते हो, इसीलिए
- 1:04:12कि तुम जान लेते हो, तुम कौन हो और जानने के बाद कभी पूछा जाता है
- 1:04:19कभी कौन हो? संत कहते हैं कि वहाँ जाकर
- 1:04:24व्यक्ति चुप हो जाता है। प्रश्न घर जाते हैं।
- 1:04:27आज तुम्हारी ये गुंडे भी न कर दो। क्यों घर जाते हैं?
- 1:04:38प्रश्न क्योंकि जो पूछना था उसका जवाब आ गया तुम कौन हो, कहाँ से
- 1:04:50आए क्या हो? कैसे हो ये सब पता चल जाता है।
- 1:04:58पूछेगा क्यों किस्से पूछेगा? प्रश्न इसलिए करते हैं कि उसके
- 1:05:09जोबा उसमें जाया करते हैं। बिना जवाब मिले कभी प्रश्न गिरे
- 1:05:20हैं इतनी समझ नहीं तुम्हें बिना जवाब मिले प्रश्न नहीं गिरा करते।
- 1:05:30कितनी भी मदहोशी का आलम हो। लेकिन आखिर कभी तो बाहर आओगे,
- 1:05:39थोड़े से बाहर खिसकोगे वो प्रश्न बने ही रहते हैं।
- 1:05:43प्रश्न घर जाते हैं, समाधी में समाधान हो जाता है, समाधान हो
- 1:05:48जाता है, ये समझो समाधान का अर्थ है के उत्तर बन जाता है।
- 1:05:56इसलिए समाधि कहा तो जब उत्तर बन जाता है तो फिर फिर से मुझे
- 1:06:03पूछोगे, तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर मिलता है वहाँ जाग।
- 1:06:11निरप प्रश्न तुम तब होते हो प्रश्न तब गिरते हैं जब उनका
- 1:06:16समाधान मिलता है, तकलीफें तब गिरती हैं जब तुम्हें तकलीफों का
- 1:06:22हर मिल जाता है। रोग निरोग व्यक्ति तब होता है जब
- 1:06:28रोग मिट जाता है। तुम मत पूछो पुत्र उस दल पर
- 1:06:35पहुंचने की कवायद करो, मत जलाओ इस जिया को दोनों तरफ से तुम जल रह
- 1:06:47रहो। जलते हो दोनों तरफ से उजाला ज़रा
- 1:06:53पीना तो उसको जला लो जिसके जलने से उजाला हो जाता है।
- 1:07:03पुत जले दी पक। इत मन मेरा उत जल दी हित मन मेरा,
- 1:07:22फिर भी न जाए मेरे घर का तेरा। होत जलदीपक इतमान मेरा मेरा।
- 1:07:45मेरा आ मेरा होत जल दीपक हित मन मेरा, फिर भी ना जाए मेरे।
- 1:08:03घर का अँधेरा तड़प तू तरसत उम्र वीटा पूछो ना कैसे मैंने।
- 1:08:23रहन बेता पूछो ना कह से मैंने रहन बेता।
- 1:08:45राधे राधे श्याम मिला दे राधे राधे श्याम मिला दे गोविंद गोपाल
- 1:09:01हरे। राधे राधे शाम मिला दे गोबिंदा
- 1:09:09गोपाल हरे मेरी नैया पार लगा दे। गोविंदा गोपाल हरे राधे राधे शाम
- 1:09:28मिला दे गोविंदा गोपाल हरे। धन्यवाद।