Latest / Baba ji Vijay Vats / 12 Dec 24 - परमात्मा के रहस्यों का खुलासा: वह क्या चाहता है? अध्यात्म के नाम पर ये गलतियाँ न करें!
Transcript
- 0:10प्रश्न है नाम लेने की मनाही है जैसी आज्ञा वह तुमसे नहीं कहता।
- 0:34की हज करके आओ हजी बन के हजी का अहंकार मेरे पास लेके आओ वह यह भी
- 0:49नहीं कहता कि तीर्थ यात्रा करके आओ।
- 0:54तीर्थ यात्रा करके तीर्थयात्री का अहंकार साथ लेके आओ तुमसे यह भी
- 1:03नहीं कहता कि सारे शास्त्र पर क्या तुमसे यह भी नहीं कहता कि
- 1:10अरबों खरबों जाप करके आओ? तप करके आओ पाठ पूजा, येस।
- 1:25सब उसके लिए बेकार है, फिर वह क्या चाहता है?
- 1:34वह नहीं चाहता कि तुम उसकी इबादत करो, फिर ये सब कुछ नहीं चाहता।
- 1:47हाँ नहीं चाहता। सच्चा दाता तिलना कमाल है उसके
- 1:56भीतर ज़रा भी नहीं है तुम्हारा बच्चा गुम हो जाए।
- 2:10तुम उसकी याद में उसकी धड़क में दरबदर की ठोकरे खाते रहो, वह आ
- 2:21जाए ऐसी प्रार्थना करते रहो, इच्छा पालते रहो।
- 2:31और क्या तुम ये इच्छा रखोगे की वह जब आए तो नहा धो के आए, अच्छे
- 2:40वस्त्र पहन के आए, बेल्ट शर्ट लगा के आए, टाई लगा के आए?
- 2:48तुम कहोगे लिपडा तिब्बडा नाक झलता हुआ लाड़ गिरता हुआ उलझे, उलझे से
- 3:01बाज, चेहरे पर बेर होने की आँखों में आंसू।
- 3:08चलेगा सब चलेगा, लेकिन मेरा बच्चा वापस आ जाए, इसके सिवा अगर तुम
- 3:22चाहोगे तो मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर लिख लेना।
- 3:28व्यर्थ के जो कमेंट करते रहते हो, उसके बजाय आज मैं कमेंट मांगता
- 3:34हूँ, तुम चाहोगे कि वह लिपटा तिब्डा आ जाये, लेकिन आ जाये।
- 3:42या चाहोगे पैंट? सूट डाल के आए ताई लगा के आए
- 3:46हेडसेट पहन के आए फिर आए तो मुझे कमेंट में आज लिख देना आज मैं
- 3:55कमेंट मांग रहा हूँ तुमसे प्रश्न पूछ रहा है।
- 4:04और जिसने पूछा है वह सुन भी रहा होगा, वह नहीं चाहता कि तुम जुमे
- 4:17की पांच नमाज़ पढ़ के आओ। तुम राम मंदिर बना के आओ तुम शिव
- 4:24मंत्र बना के आओ तुम विष्णु का मंत्र बना के आओ तुम पूजा करके
- 4:28आओ, आराधना करके आओ नहीं बहने जायेगा क्यों सच्चा दाता तिल न
- 4:42थमाया। जो दाता सच्चा होता है, मैं तुमसे
- 4:49कोई कामना नहीं रखता, वह एक कामना रखता है क्या?
- 5:01बता दूँ क्या लाना? तुम लौट के आ जाना ये छोटा सा
- 5:14नजारा न पिया याद रखोगे? के भूल जाओगे, याद रखोगे के भूल
- 5:33जाओगे, बता दूँ क्या लाना तुम लौट के आ जाना।
- 5:42ये छोटा सा नज़ारा न पिया याद रखोगे के भूल जाओगे याद रखोगे?
- 5:58बस तुम आ जाना। तुम लौट के आ जाना ये छोटा सा
- 6:06नजारा ना पिया याद रखोगे के भूल जाओगे फिर ये कौन शरारती है?
- 6:21ये कौन दुष्ट है? ये कौन दुष्ट प्रवृत्ति है जो
- 6:26तुम्हें इन सब कर्मकांडों में उलझा देता है?
- 6:30लोभी और लालची लोग स्वार्थ के मारे मारे।
- 6:44ये लोग ही लोग तुम्हें कहते हैं पांच नब्जपों लोग ही लोग तुम्हें
- 6:50कहते हैं राधे राधे करो, राम राम करो लोग ही कहते हैं आज यात्रा
- 6:59करो मक्खा जाओ, मधे न जाओ। लोग ही कहते गंगासागर जाओ और लालच
- 7:07देते हैं तुम्हें उन्हें तुम्हारी परवृत्ति का पता तुम लालच से काबू
- 7:13में आ जाते हो। लालच वह अंकुश है जो बड़े बड़े
- 7:19हाथियों को काबू में कर देता है। इसलिए तो देखो राजनीतिज्ञों के
- 7:25पास अगर पांच चार नंबर छोड़ते हैं तो वो खरीद लेते हैं।
- 7:35वो जानते हैं कि जो व्यक्ति राजनीति में आएगा, सब बिकाऊ है।
- 7:45और बेक ही जाएगा। कमती में बत्ती कोई गद्दी लेके
- 7:51बिक जाएगा, कोई पैसा लेके बिक जाएगा लेकिन बिक जाएगा ओके जो
- 8:00कोठे पे आ गया वो शरीर बेचने के लिए आता है।
- 8:06वो राजनीति में आ गया। यह बिकाऊ गुमाल होता है, ये अच्छी
- 8:12तरह से जानते हैं। ये खुद बेक हो गया अपना अनुभव भला
- 8:17कौन याद नहीं रखता। सो ये जानते हैं कि बिकने के लिए
- 8:24आए हैं। बिकने वाले घोड़े हैं, बिक ही
- 8:26जाएंगे। बखूबी जानते हैं इसलिए शतरंजों का
- 8:32जाल फैला लेते हैं। तुमने पूछा और मैंने जवाब दिया।
- 8:45नहीं, वह कुछ नहीं चाहता और एक उदाहरण भी दिया।
- 8:51एक शब्द भी कहा, बाबा का सच्चा दांता तिलना तम्बा है, उसमें ज़रा
- 8:58भी तमन्ना नहीं है, बस उसमें एक ही तमन्ना है।
- 9:08वेद विनाशनम् नृत्यम यम व्यायम कथम सपुरशह पार्थकम्।
- 9:26घात, यति, हंसिका हे। प्रथानंदन जो मनुष्य इस अशरीरी को
- 9:43शब्द देखना क्या बोला है? अशरीली जो शरीर से दूर शरीर में
- 9:55विराजमान है, जो शरीर नहीं है, शरीर के भीतर बैठा है, जो अशरी
- 10:04है। हे प्रथानंदन जो मनुष्य इस अशरीवी
- 10:13को अविनाशी नृत्य, जनम रहित और मरण रहित अब वह।
- 10:23जानता है वह कैसे किसको मारे और कौन उसे मार सकता है?
- 10:38कृष्ण कहते हैं, प्रथानंदन हे अर्जुन।
- 10:43ये व्यर्थ की बात है। तुम कब रहे हो, मैं उनको मारूंगा,
- 10:53कैसे मारूंगा? कृष्ण कहते हैं, इस शरीर को।
- 11:01एक शब्द बोलते हैं जो जो जान गया, क्या अव्यय जन्म मरण से रहित था?
- 11:13ध्यान रखना क्रांति घटित होती है जानने के बाद।
- 11:20मानने से क्रांति की शुरुआत होती है।
- 11:25मंजिल मिलती है। रास्ते पे चलने के बाद रास्ते पे
- 11:31चलने से मंजिल की तरफ गति हो जाती है और जो रास्ते को मंजिल समझ के
- 11:38पकड़ लेते हैं। वो कहीं नहीं पहुंचता है।
- 11:45जो रास्ता चुन लेते हैं और उस पर चलते रहते हैं।
- 11:48उन्हें कुछ तो मिलेगा ही, गलत रास्ता चुन लिया तो बटकन मिलेंगे
- 11:54और बटकन मिली तो एक अनुभव मिला कि इस रास्ते से गया था नहीं मिला।
- 12:01इसलिए मैं कहता हूँ कि तुम पाठ, पूजा, जप, तप, त्याग, दान, पुण्य
- 12:15सब करके देख लेना। सब करने के बाद भी तुम्हें गली
- 12:24बंद नजर आए। आगे कहीं यह मार्ग ना मिले तो
- 12:30तुम्हें एक बात समझा जाए कि केन से मिलता नहीं करके जरूर देखना
- 12:37मैं रोकता नहीं तुम्हें। रोकता।
- 12:41इसलिए नहीं कि मैं बखूबी जानता हूँ।
- 12:47इस रास्ते से कभी किसी को मिला नहीं और इस रास्ते से कभी किसी को
- 12:54मिलेगा। इस रोग कह देते हैं कि आप वृद्ध
- 12:58अपनी शक्तिका को खराब करते हैं। मैंने कहा तुम गलत समझे मैं शक्ति
- 13:07को कहाँ खराब कर रहा हूँ आँखों वाला अगर अंधों को ये नहीं
- 13:13बताएगा, यू आर ऑन दी रोंग वे। कि तुम गलत रास्ते पर चल रहे हो,
- 13:23तो क्या वह सही आँखों वाला है? फिर तो उसकी आँखों पर भी संदेह
- 13:29करना बनता है अगर आँखों वाला गलत रास्ते पर चलते हुए व्यक्ति को।
- 13:39ये चेतावनी ना देगा ये वार ना करेगा कि देखो भाई तुम्हारी आँखें
- 13:44नहीं और मैं देख रहा हूँ जो सराह पे तुम चल रहे हो वह गली बंद है
- 13:53भाई। आगे कोई रास्ता नहीं।
- 13:58मैं इसी गली में रहता हूँ तो तुम ये कहोगे कि उस आदमी ने अपनी
- 14:07शक्ति बर्बाद की है किसी गलत राह पे जाने वाले व्यक्ति को सावधान
- 14:13कर देना। उसे बता दें ना कि यह मार्ग गलत
- 14:17है या ठीक है या गलत है, यह पुण्य है या बात है, मैं इसे पुण्य
- 14:27समझता हूँ। तुम इसे पाप समझते रहो, तुम ही
- 14:33स्वतंत्र हो। तुम्हारी इच्छा पर और तुम्हारी
- 14:37आजादी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता।
- 14:42यही तो लोकतंत्र की सुंदरता है। लोकतंत्र में कोई व्यक्ति निंदा
- 14:48कर सकता है। लोकतंत्र में कोई व्यक्ति प्रशंसा
- 14:55भी कर सकता है। या तो तानाशाही में ना तुम निंदा
- 15:00कर सकते हो, ना प्रशंसा कर सकते हो या सिर्फ प्रशंसा ही प्रशंसा
- 15:04कर सकते हो। भगवान कृष्ण कहते हैं, पार्थ जो
- 15:11इस अशरीरे को। जो शरीर के भीतर विद्यमान है,
- 15:22उसको ऐसा जान लेता है। भगवान कृष्ण और व्यक्त को व्यक्त
- 15:34करने की कोशिश कर रहे हैं। जो व्यक्त किया नहीं जा सकता,
- 15:44उसको व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
- 15:49जो बोला नहीं जा सकता उसको बोलने की कोशिश कर रहे हैं।
- 15:57और अंत में, अंत में सभी संत सभी अवतार हाथ उठा देते है उसकी विराट
- 16:11संरचना के आगे। कोई संत हो, कोई फकीर हो, कोई
- 16:18अवतार हो, कोई पैगम्बर हाथ उठा देते हैं कि वह कौन है?
- 16:32मैं बता नहीं सकता। इशारे भर कर रहा हूँ और अगर
- 16:41इशारों से तुम समझ पाओ तो राज़ की बात है राज़ को उगाड़ा न जा सके।
- 16:54इशारों को अगर समझो राज़ को राज़ रहने दो।
- 17:06अच्छा है अगर तुम जद ना करो। कि कोई बोल के तुम्हें बदला ही
- 17:13दे, पूरा का पूरा बदला दे नहीं बदलाया जाएगा तुम उससे झूठ
- 17:19बुलवाओगे तुम उसको झूठ बुलवाने की प्रेरणा दोगे, वह बोला नहीं जा
- 17:29सकता। ज्यादा से ज्यादा मुझे लोग पूछ
- 17:34लेते हैं वह कैसा है? वह खुशी का सागर है।
- 17:46वह आनंद से भरा खजाना है। गम उसके पास नहीं फटकता।
- 17:58घाव उसे नहीं होता, बिमारी उसे नहीं होती, पीड़ा उसे नहीं होती।
- 18:05वह पीड़ा का दृष्टा है। चिंताओं का वह दृष्टा है, वह
- 18:13तुम्हारी सभी क्रियाएं का दृष्टा है।
- 18:16तुम सो जाते हो तो भी हो जाता है, वो सर्वसाक्षी है।
- 18:25आठों पहर साक्षी है, तुम कोई भी कर्म करो, तुम सोओ, तुम जागो तुम
- 18:36कुछ भी करो, वह निरंतर देखता रहता है, वह साक्षी है, आनंद का स्वरूप
- 18:44है। और खुमारी का स्वरूप है बे सुद्धि
- 18:51का आलम है वो सुगंधियों का बाग है वो क्या क्या माँ करो उसकी?
- 19:05कितनी भी उपमा करूँ संतों वो माई छोटी पड़ेंगी उसकी उपमा की ही
- 19:22नहीं जा सकती। और जो कोई उसकी उपमा करता है, वह
- 19:31सटीक उपमा नहीं होती या सिर्फ इशारे होते हैं, कुछ अक्सर लोग
- 19:41पूछ लेते हैं। तो मैं यही कहता हूँ, वह आनंद का
- 19:48सागर है और तुम आनंद की तलाश में हो।
- 19:55तुम ये झक क्यों मार रहे हो कि धरती किसने बनाई?
- 19:58संसार किसने बनाया, क्यों बनाया, कब बनाया?
- 20:03और तुम्हें इस बात का जवाब देने वाले सब मिल जाएंगे क्योंकि तुम
- 20:10जवाब मांगते हो और मैं जवाब दे नहीं सकता तो कोई सिरफिरा, कोई
- 20:19झूठा, कोई मक्कार। कोई ठग तुम्हें बता देगा, बिल्कुल
- 20:29बता देगा कि 97 अरब वर्ष पहले इस सृष्टि का आगाज हो।
- 20:40जैसे उस वक्त वो वहाँ खड़ा हुआ, उसने संकल्प किया एक को हम बहुत
- 20:51श्यामी इस्लाम कहता है के अल्लाह ने संकल्प किया।
- 21:05हो जा तो सृष्टि हो गई, लेकिन तुम्हें क्या पता चला तुम्हें
- 21:17क्या पता चला कि परमात्मा ने संकल्प किया?
- 21:24यह बातें बहुत दूर की हैं। जब पता चलेगी तब चलेंगे।
- 21:31उससे पहले तुम अपनी खोपड़ी को खुजलाने की चेष्टा मत करो।
- 21:37दो टूक बात है तुम आनंद की तलाश में हो, तुम दुखी हो।
- 21:45तुम तो बात वो करते हो। बठिंडा स्टेशन के ऊपर कोई अंग्रेज
- 21:48आया था, उसके पास लगे था और अंग्रेजों को आदत होती है कि वो
- 22:01अपना सामान खुद उठाते हैं। अपना काम आप करो।
- 22:07इसके लिए नहीं, लेकिन वहाँ लेबर महंगी बहुत है।
- 22:13हिंदुस्तान में अब हंसा मत करो, लेबर ही लेबर है।
- 22:23यहाँ भक्त ही भक्त हैं। जितना चाहे बड़ा उठवा लो, उनसे
- 22:28उठा लेंगे। लेकिन अंग्रेजों में महंगी है।
- 22:37लेबर यहाँ मेरे पास आ जाते हैं, अंग्रेज भी आ जाते हैं।
- 22:41नीदरलैंड से आ जाते हैं कनाडा से ऑस्ट्रेलिया से।
- 22:48नर्वे से आस्टरिया से तू दूर से आ जाते हैं, वो मुझे बताते हैं वहाँ
- 22:57लेबर बड़ी महंगी है, यहाँ लेबर बड़ी सस्ती है।
- 23:01मैंने कहा यहाँ लेबर ही लेबर है। जो प्रचुर मात्रा में हो वो सस्ता
- 23:07ही होगा। यह राज़ करने वाला तो कोई एक दो
- 23:15ही होता है और वो सब एक दो ही रहता है।
- 23:19शब्दों पर बहुत फॉर्म आया करो, राज़ करने वाला एक दो ही होता है
- 23:27और एक दो ही रहता है। वो कैबिनेट पर राज़ करें, जनता पर
- 23:35राज़ करें, राज़ वो ही करेगा। जब तक मर न जाएगा, मरेगा तो दूसरे
- 23:44के लिए जगह खाली करेगा। उससे पहले नहीं, उससे पहले वह
- 23:56नहीं छोड़ता, मैं को नहीं छोड़ू भाई अब क्या करेंगे, इसका तुम
- 24:01गद्दी को नहीं छोड़ो, तो फिर कोई क्या करेगा?
- 24:07चोरी से हेरा फेरी से इसको बस में कर उसको बस में कर वह जीत ही
- 24:14जाएगा। वह जीतना ही चाहता है और राजा अगर
- 24:17जीतना चाहे तो ध्यान रखना जीत ही जाया करता है।
- 24:21क्यों? क्योंकि सब फावड़ उसके पास?
- 24:25ईमानदार लोग गद्दी छोड़ देते हैं, प्रोस्परट्टी करके गद्दी छोड़
- 24:35देते हैं। अब मैं बूढ़ा हो गया, मेरे सेल्स
- 24:39वीक हो गए, अब जवानों को जिनके सेल्स बढ़े।
- 24:47ताजा ताजा है। उनको मौका देओ लेकिन यहाँ ऐसा
- 24:51नहीं है। यहाँ तो घिस जाएंगे, पीठ जाएंगे,
- 24:57मरने के करीब होंगे, आखिरी हिस्सा होंगे लेकिन वो कहेंगे गद्दी को
- 25:03नहीं छोड़ो मत छूटो भाई। अगर गद्दियों से ही कुछ मिलता
- 25:09होता तो राम गद्दी को छोड़ते वक्त इतने खुश ना दिखाई पड़ते।
- 25:17ज़रा भी सेकंड न रोए ना चिल्लाए। ना कोई उत्पात मचाया।
- 25:29लक्ष्मण ने बड़ा उत्पात मचाया, मैं राम जी का रोल किया करता था
- 25:37तो जब आज्ञा होती है महाराज की केकेई कहती है के महाराज ने राम।
- 25:45तुम्हारे लिए 14 वर्ष का वनवास नियत किया है और मेरा पुत्र भरत
- 25:5414 वर्ष तक राज़ करेगा। यह महाराज का आदेश है और दशरथ पास
- 26:02पड़े। हाथ हिलाते रहते हैं।
- 26:05मैंने नहीं कहा ये कल मुँह ही ये कुल क्षणी ये कुलघातनी गालियां
- 26:14देता है। ये वंश को रघुकुर को नाश करने पर
- 26:20तुली हुई है। तो मत जाना बेटा मेरा कोई फरमान
- 26:26नहीं है, लेकिन कुछ तो राम की भी इच्छा थी।
- 26:36राम भी चाहते थे कि राज़ में क्या पड़ा है?
- 26:41वो राज़ कहाँ कर पाए? राज़ करना उसके बस की बात ही नहीं
- 26:47थी। एक बात बता दूँ के अंदर ले जाना
- 26:57कोमल चित्त। दूसरों का अधिकार नहीं कर सकता।
- 27:06दूसरों को स्वतंत्रता तो दे सकता है गुलाम नहीं बना सकता कोमल
- 27:12चित्र दुष्ट चित्र राज़ करेगा सिर्फ।
- 27:18आज थोड़ा ज्यादा हो गया है ना राजनीति में चलो कोई बात नहीं,
- 27:23दूसरी तरफ चलते हैं। भगवान कृष्ण कहते हैं कि अशरी के
- 27:32पास कोई आंच नहीं पहुंचती। कोई शस्त्र नहीं पहुंचता, कोई
- 27:43वायु का तूफान, कोई पानी की बाढ़ जहाँ नहीं पहुंचती, मृत्यु तक
- 27:51वहाँ नहीं जाती। जो खिला हुआ है सदा आनंद से महकता
- 28:01हुआ फुलकारियां ही फुलकारियां झूमझूम जाता है हर पर्व।
- 28:16तरन्नू उठते हैं उसके हृदय से, भीतरी कोनों से और वह गुनगुना आता
- 28:27है। दुख का रेष मात्र भी उस तत्व के
- 28:41पास नहीं पहुंचता जिसकी बात भगवान कृष्णन करते हैं।
- 28:44इस श्लोक में वेद विनाश नम। वेद जो जानता है अविनाशीनम जिसका
- 29:02विनाश नहीं होता, जिसका विनाश नहीं होता उसे जानता है नित्यम जो
- 29:10नित्य है जो सदा रहेगा आध सच जुगाध सच है भी सच।
- 29:16नानक कहो सी भी सच यह जो एनम अजम अवयम, जो अजम जो जनमता नहीं अवयम
- 29:29जो व्यय नहीं होता, जो खर्च नहीं होता, जो मरतन है, जो ऐसा जान
- 29:34लेता है उन तत्वों को। कथम सप्तर्ष पार्थ कं गात यंति
- 29:49हंति कं हे पार्थ जो जान लेता है कि वो कभी मरता नहीं?
- 29:56कभी घटता नहीं, कभी खर्च नहीं होता तो बता वह किसको मारेगा और
- 30:04कौन मरेगा? अंत तक भगवान कृष्ण समझाने की
- 30:11चेष्टा करते हैं अर्जुन को। कितने सुन्दर शब्द हैं शायद
- 30:19तुम्हारी भी समझ में आ जाए जिसने गीता का एक श्लोक भी नहीं सुना
- 30:26कभी वह भी इन शब्दों को सुनकर गीता का?
- 30:32डीप अर्थ समझ लेगा कि वह कभी मरता नहीं।
- 30:36वह नित्य है, वह जन्म भी नहीं लेता।
- 30:40वह खर्च भी नहीं होता, तो ज़रा सोच जब कोई मरता नहीं तो तू उसे
- 30:47मारेगा कैसे? तू उसे मारेगा कैसे?
- 30:52तू उसे मरवाएगा कैसे? तेरे पास कोई चारा नहीं है अर्जुन
- 31:00तू व्रत की बात कर रहा है ये मरने मारने की बातें तेरे व्यर्थ हैं,
- 31:08फिजूल हैं इनको भूल जा। यह ठीक नहीं है, पर मैंने आपसे
- 31:15पहले भी कहा कि कृष्ण तैयार कर रहे है।
- 31:20कृष्ण अर्जुन को तैयार कर रहे हैं उस मुकाम पर आने सुन सुन के सुन
- 31:27सुन के सुन सुन के उन बातों को। वह तैयार हो जाएगा कृष्ण की सही
- 31:35बात सुनने के लिए और जब वह तैयार हो जाएगा, वह अपने आपको कृष्ण की
- 31:44शरण में छोड़ देगा। अभी कृष्ण की शरण में उसने छोड़ा
- 31:49नहीं है। अभी सिर्फ शब्दों से कहा है कृष्ण
- 31:55को कि मैं तेरी शरण में हूँ, लेकिन ध्यान रखना अभी आत्मा से
- 32:03कहना बाकी है अभी शब्दों से कहा है।
- 32:09कार्पण्य दोषोपहस स्वभाव प्रिछामितवाम धर्मसमूह विजेताः
- 32:17यक्ष्रय से अनिश्चित रोहितन में क्या कहते हैं शिष्यसति आह, मैं
- 32:24तुम्हारा शिष्य हूँ। शादी माँम तोम परपन्नम मैं
- 32:31तुम्हारी शरण में हूँ, मुझे रास्ता दिखलाओ जो श्रेष्ठकर है
- 32:37धर्म के अनुसार है अधर्म नहीं है, मैं पाप नहीं करूँगा।
- 32:48शब्दों से भी समर्पण हुआ करता है और सत्य में भी समर्पण हुआ करता
- 32:58है। एक फर्क बतला दूँ।
- 33:07जो सिर्फ मात्र शब्दों से समर्पण करता है, वह जतलाता है।
- 33:16वह बतलाता है कि मैं तुम्हारे समर्पण में हूँ।
- 33:26पहला समर्पण जताने जैसे बतलाने जैसी कोई चीज़ है समर्पण तो खो
- 33:36जाने जैसा नाम है जब समर्पण हो जाता है।
- 33:44तो बोलने वाला कहाँ बचता है और अगर बोलने वाला भी बचा तो समझो के
- 33:53समर्पण हुआ न समर्पण जब हो जाएगा। फिर आवाज बंद हो जाएगी।
- 34:03तुम मन हो जाओगे फिर तुम बोल सकोगे बोलती बंद हो जाएगी जो
- 34:17गूंगा गुड़ खाई के कहे कौन मुख्य स्वाद?
- 34:23समर्पण उस क्षेत्र में पहुँच जाना है जहाँ जाकर बोला नहीं जा सकता।
- 34:27उसका स्वाद कैसा है? जीसको समर्पण हो जाता है, ऐसा ही
- 34:39प्रेम भी है। जब प्रेम हो जाता है तो प्रेम का
- 34:50प्रकटीकरण नहीं हुआ करता है। प्रेम उसके रोये रोये से प्रकट
- 34:57होता है, सिर्फ जुबान से प्रकट नहीं होता।
- 35:04तुम तो जुबान से अगर कोई कह देता आई लव यू तुम उसके साथ लिपट जाते
- 35:11हो। तुमने उसका हृदय नहीं खंगाला और
- 35:17जुबान कोई ज्यादा भरोसे की चीज़ नहीं है।
- 35:20ये झूठ जाट बोल लेती है। तुम ऐसा मत करो, इतने भरोसे की
- 35:27चीज़ नहीं है तो अगर कोई कहेगा आई लव यू जुबान कोई इतने भरोसे की
- 35:38चीज़ नहीं है। भरोसा तो।
- 35:44यो देश का बहुत था। अपने जुबान के मैं सत्य बोलेंगे
- 35:50लेकिन झूठ बोलना पड़ा ना, हाँ तो अश्वत था।
- 36:08जुबान का इतना ज्यादा विश्वास मत करना प्रेम की तुम्हें पहचान बता
- 36:14दो प्रेम तुम्हें देखता ही जैसे ईद में गले से लगते हैं।
- 36:25बोलेंगे, प्रश्न गले से लगा देगा तो मैं अंतर समाहित करने की
- 36:31चेष्टा करेगा जैसे बरसों से प्यासा हुआ होगा।
- 36:46मैं कहूं राम कथा सुना रहा था भरत के प्रसंग में, थोड़ा ज्यादा वक्त
- 36:55ले लेता था सीता बिरला पे। लक्षण मोर्चा पर ज्यादा वक्त ले
- 37:03लेता था। बनवास में भी ऐसा ही होता था।
- 37:12लेकिन कुछ व्यक्ति जल्दबाजी में होते हैं।
- 37:18उनका कसूर नहीं होता। यह उनकी बिमारी।
- 37:23और इसी बिमारी को दूर करने के लिए वो मेरा सरसंघ सुनने आते हैं और
- 37:30इसी बिमारी से मरे मरे बेचैन होड़ से मन जल्दबाजी करता है और मैं
- 37:39तुम्हें कहता हूँ जल्दबाजी छोड़ दो।
- 37:43तुम सिथरता में आ जाओ, तुम ठहरों दो घड़ी के लिए आए हो इतनी देर तो
- 37:53ठहरों लेकिन किसी किसी को प्रसंग जयता नहीं।
- 38:02बाबा आप एक अध्याय पर बड़े हो देर लगा देते।
- 38:09मैंने कहा देखो बात ये है, अगर जल्दी है तो मैं चार शब्दों में
- 38:18खत्म कर देता हूँ। सारी रामायण अच्छा होगा, हाँ,
- 38:29अच्छा चलो फिर करो नहीं कहा देखो मैं हरयाणवी हूँ एक तो राम।
- 38:43एक थो रामड़ो ऊ ना उसकी बीन चुरा ली ऊ ना उसको फूंक दियो गावड़ो
- 38:57मेरे मुँह की तरफ देखने लगे कहते हैं अब बस खत्म हो गया अब।
- 39:03रामायण खत्म तो हो गई एक छोटी सी रामायण कहा करते थे हम।
- 39:10आदो, राम तपोवन आदि घमनम। हतवा अमृता कांसणम, वैदेही हरणम
- 39:29जटायु मरणम। सुक्रवसम भाषणम, कक्षा रावण कुंभ
- 39:44कर्ण। आदि हनम ऐथादिरामयणम।
- 39:54यह रामायण हो गए कि जल्दबाजी का प्रसंक नहीं।
- 40:03तुम्हारी बिमारी का इलाज हो रहा है और बिमारी का इलाज कराते हुए
- 40:10धीरज नहीं होना चाहिए। इसलिए मैं कहता हूँ धीरज कभी मत
- 40:15खोना, धैर्य और प्रतीक्षा प्रतीक्षा करना कि कब मैं सवस्थ
- 40:23हो जाऊंगा, कब रोग नष्ट हो जाएगा और धीरज रखना कि देर चाहे कितनी
- 40:31भी लगे। लेकिन मैंने सवस्थ होना है, स्वयं
- 40:35में सिद्ध होना है, हमारे मन की तो प्रवृत्ति ही है, मैं तो भटकता
- 40:45ही रहता हूँ। जब आओगे तो भटकते हुए मन से आओगे
- 40:51निश्चिंत मुझे पता है लेकिन मेरा काम है इस भटकते हुए मन को लगाम
- 41:02देना, नथ्य डालना। संत का यही काम होता है।
- 41:10तुम पीड़ित हो तुम्हारे मन से ये मन तुम्हें पता नहीं कहाँ कहाँ
- 41:15जुड़ाता है और अब भी मैं बोल रहा हूँ तो पता नहीं तुम कहाँ कहाँ कि
- 41:20सैर करके लौट आए तभी तो बाद में कहा करते हो बाबा?
- 41:26प्रश्न पूछते हो, वाइफ का जवाब तो मैंने दे दिया निस्से देव उस वक्त
- 41:32तुम कैलिफोर्निया की सैर करने गए थे।
- 41:36मैं जानता किसी प्रेमिका के गले में आगोश में लिए बैठे थे।
- 41:45निश्चित ही उस वक्त तुम कल्पनाओं के जाल में खोए हुए थे, इसलिए चूक
- 41:56जाते हो। मैं क्या बोला चलो कह देते हैं
- 42:03बाबा आप बीच में शेर हो। शहरी।
- 42:09ये मुसलमानों की शेयरों शायरी है। ये फिल्मी गीत ये सिर्फ तुम्हारे
- 42:22भटकते हुए मन को जब मैं देखता हूँ उबासी आने शुरू हो गई तो मैं गीत
- 42:28बंद करा देता हूँ। मेरे नैना।
- 42:48मेरे नैना सावन भा दूँ फिर भी मेरा मन।
- 43:03प्यासा फिर भी मेरा मन प्यार सा मेरे नैना।
- 43:26बरसों बीत गए, बरसों बीत गए। हमको।
- 43:42मिले बिछुड़े बेजुरी बना कर गगन में चमके बीते समय की रेखा मैंने
- 44:04तुमको देखा हो मन संग आंख। मिचोनी खेले आशा और निराशा फिर भी
- 44:34मेरा मन। प्यासा मेरे नै न सावन वादों फिर
- 44:50भी मेरे मन प्यासा। फिर भी मेरा।
- 45:00मन प्रश्न तुम्हारा मन कहीं और होता है, इसलिए मन को बहलाने के
- 45:14लिए। बाबा नानक गीत ला देते हैं,
- 45:21गुनगुना देते हैं, कभी मीरा नृत्य करते हैं, तुम्हारा मन एकाग्र हो
- 45:31जाए, कोई चुटकीला सुणा देता है। कोई कहानियों सुना देता है, वो
- 45:38कहानियों तुम्हें बांध लेते हैं, तुम्हारे मन को छिट करने से हटा
- 45:43देते हैं। ये तुम्हारा प्रयोजन है हमें ना
- 45:49गाने का शौक है, ना बोलने का शौक है।
- 45:56तुम्हारे मन को बांधने के लिए कोई हास्य व्यंग्य सुना देता है, कोई
- 46:02कहानी सुना देता है, कोई भेद गुण बना देता है, कोई कहानी सुना देता
- 46:10है, बस तुम बंध जाते हो। और तुम्हारा मन ठहर जाता है।
- 46:19बाबा नानक के जीवन के घटना, जुमे का दिन, नमाज़ का वेला और नवाब ने
- 46:34कहा। आप एक ही ईश्वर की बात करते हैं,
- 46:43आज जुमे की नमाज़ पढ़नी है, आओ चले नमाज़, तुम भी पढ़ लेना।
- 46:53बाबा बोले हाँ पढ़ लूँगा, एक शर्त है बशर्ते के तुम भी नमाज़ पढ़ो
- 47:03तो मैं भी पढ़ लूँगा क्या दिक्कत है, चले गए नमाज़ का वक्त हुआ
- 47:14नमाज़ के वक्त। मुसलमान में बैठ के झुकते हैं और
- 47:22अपने अल्लाह के प्रति माथा टेकते हैं।
- 47:26जमीन इतने झुक जाते हैं, थोड़ा सा बता चलो।
- 47:35ये हल आसन का भी एक प्रकार है। इससे पेट के रोग नहीं होते और
- 47:41बज्रासन ये दो आसन हैं। इसमें बज्रासन से आपके घोड़े खराब
- 47:47नहीं होंगे और ऐसे झुकने से धरती को।
- 47:53माथा लगाने से आपका पेट ठीक रहेगा, पाचन तंत्र ठीक रहेगा।
- 47:58ये के साइंटिफिक वे था, लेकिन धर्म में भी काम करता है।
- 48:06सभी झुके नमाज़ अदा हो रही थी। गुरु नानक देव भी संग आये थे,
- 48:14लेकिन वो खड़े रहे न बैठे, न जोके न नमाज़ ज्यादा के कुछ नहीं किया।
- 48:21खड़े रहे, नमाज़ की विला समाप्त हुई, न बाग उठे।
- 48:32नबाब ने देखा के गुरू नानक तो खड़े हैं ये तो झुके भी ना नमाज़
- 48:41अदा नहीं की बाबा क्या झूठ भी बोल लेते हैं, उसने कहा नहीं।
- 48:50तो आप ने कहा था मैं नमाज़ अदा करूँगा, आप तो खड़े हैं, आपने
- 48:55नमाज़ अदा नहीं की, बाबा नानक बोले लेकिन मैंने एक बात और भी
- 49:04कही थी। क्या कहा था बाबा?
- 49:08मैंने कहा था मैं नमाज़ अदा कर दूंगा, मेरा एक शर्त है कि तुम भी
- 49:13नमाज़ अदा करना हाँ तो हमने कर ली ना, देखो नमाज़ खोली, नमाज़ पड़ी
- 49:21झुके, धरती से मस्तक को छुआ और परमात्मा को अल्लाह को याद किया।
- 49:30हमारी नमाज़ तो हो गई, वही जो बात मैं कह रहा था, बाबा नानक न कहे
- 49:44खजूर आप कहाँ नमाज़ पढ़ रहे थे? आप तो पेशावर में घोड़ा खरीद रहे
- 49:52थे, आपका घोड़ा चुरा लिया गया था, आपको फिकर थी?
- 49:59घोड़े की के नमाज़ पढ़ने के बाद जल्दी से पेशावर जाऊंगा और घोड़ा
- 50:06खरीद कर लाऊंगा। आप नमाज़ के विला में पेशावर में
- 50:12खड़े खड़े मोल भाव कर रहे थे। कोणों का कहाँ नमाज़ पढ़ी है
- 50:19आपने? नवाब दंग रह गए।
- 50:30नवाब कांपने लगा है, नवाब ने हाथ जोटाया है मुझसे गलती हुई गुरु
- 50:39वाक्य ही मैं नमाज़ अदा करते वक्त पेशावर में घोड़े ही खरीद रहा था।
- 50:45मोदभाव कर रहा था, एक होरा पसंद आ गया था उस पर थोड़ा सा रस्सा कसी
- 50:51चल रही थी। तुम भी ऐसा ही करते हो, इधर मैं
- 51:03बोलता हूँ। मैं जानता हूँ मन चलाये मान मन
- 51:11ठहरता नहीं लेकिन फिर भी थोड़ी देर के लिए ठहर जाता है ये शुभ
- 51:19सत्संग की आंधी घड़ी 12 मिनट भी ठहर जाती बहुत है कुल मिलाकर क्षण
- 51:25क्षण करके। आंधी घड़ी तक भी तुम ठहर जाओ तो
- 51:32भी बात बन गई भजन के वर्ष 5050 साल तुम राधे राधे करते रहो आज
- 51:40घड़ी का वर्ष नाम हर्ट न 12 मास। ओह 50 साल का भजन राम राम, राधे
- 51:48राधे कृष्णा कृष्णा तुम्हे कोई काम नहीं करता?
- 51:52आधा घड़ी का सत्संग तो मैं काम करता हूँ।
- 52:10एक छोटा सा सूत्र तुम बाबा ने एक सूत्र दिया है मर्जी के संग होलो?
- 52:26परमात्मा की मर्जी के संग होरो इसे स्वीकार कहते हैं।
- 52:34इसे समर्पण कहते हैं। दूसरी भाषाओं में मर्जी के संग
- 52:42होरो। जब परमात्मा की तरफ मन जाए तो
- 52:50सारी शक्ति को उस तरफ झोंक देना है।
- 52:54यह एक सूत्र है, काम कर जाएगा। कृषि क्षण में मन परमात्मा में
- 53:02डुबकी लगाता है। तुम तो जानते हो साक्षी उस क्षण
- 53:10में अपने मन को सारी शक्ति दे देना।
- 53:15इसे ही तलीता कहते हैं। संत कहते हैं, एक बार में एक काम
- 53:22करो। और उस काम में अपनी 100% शक्ति को
- 53:26झोंक दो। इसे ही कहते हैं लीनता इसे ही
- 53:32कहते हैं त लीनता इसे ही कहते हैं एकमिक होना।
- 53:44एकसूत्र वेद अविनाशिनम् नित्यम् य एनम् जम् व्यायामं कथम् सपुशह
- 54:01पार्थ कम्गातिर्न्त हंति कम्। किस्से मारेगा कौन मरेगा, कौन
- 54:10मरेगा जो उस तत्व को इस तरह जान लेता है कि वह सदा से है?
- 54:21नृत्य है और सदा रहेगा वही बाबा की बात?
- 54:25आद सच जुगाद सच है भी सच नानक हुस्न भी सच अगर ये बात अनुभव से
- 54:32आ जाए, है भी सच, हुस्न भी सच। अगर ये बात अनुभव में आ जाए, सदा
- 54:47से है था रहेगा ये शब्दों में बात न रहे, ये तुम्हारे अनुभव से बात
- 54:55प्रकट हो, ये शब्द तुम्हारा अनुभव बन जाए।
- 55:02ये वह मर्तन हैं, श्रद्धा है तो तुम्हें और कुछ करने की आवश्यकता
- 55:08है कि सब उसके पीछे पीछे चला आएगा।
- 55:12शांति, आनंद, खुशबू, मदहोश की खुमारी छाया की तरह।
- 55:22जैसे तुम्हारे पीछे छाया चली जाती है।
- 55:29इस चीज़ को जान लो कैसे जानोगे फॉर्मूला वही है अपने अंतःस में
- 55:39उतरों। अचेतन को खाली करो क्रिया योग से
- 55:47अचेतन को खाली करो पूरी ने दरालो व्यर्थ की बकवास राधे राधे।
- 55:59राम राम छोड़ दो, शक्ति को बचाओ, अगर लोभ लगाना है तो लोभ शक्ति को
- 56:09बचाने में लगाओ, पैसे को बचाने में, लोभ को शक्ति को बचाने में
- 56:15प्रयोग करो। काम को ओज बनाने में प्रयोग करो,
- 56:23क्रोध को शांति में डालने की चेष्टा करो।
- 56:31ये सभी विकार जिन्हें तुम कहते हो अगर इनकी ऊर्जा को रूपांतरित कर
- 56:37दिया जाए विरोधी चीजों में। तो ये अमृत दायिनी बन जाते हैं।
- 56:43ये तुम्हें उस स्थान पर ले जाएंगे जहाँ तुम स्वयं बैठे हो।
- 56:48तुम स्वस्थित हो जाओगे उसे ही स्वस्थ्य कहते हैं तुम बीमार
- 56:54व्यक्ति को कहते हो अस्वस्थ। और तंदरुस्त व्यक्ति को कहते हो
- 56:59सवस्थ कृष्ण कहते हैं सवस्थ हो जो अपने में स्वस्थित हो जाये स्थिति
- 57:07प्रज्ञा जो अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जाये, प्रज्ञा ही सवस्थ
- 57:13है। तुम कितना ही भूल जाओगी, लेकिन
- 57:25यादगी की छोटी सी रेखा बारीक सी किरण तुम्हारे संग सदा ही रहते
- 57:34हैं, तुम उसे पूरा पूरा कभी नहीं भुला सकते।
- 57:40है दिल दीवाने खेल है क्या जानें है दिल।
- 57:58दीवाने खेल है क्या? जानें दर्द भरा ये गीत कहाँ से?
- 58:17इन। होठों पे आए दूर कहीं ले जाए भूल
- 58:33गया क्या? भूल के भी हैं मुझको याद ज़रा सा।
- 58:52भूल गया क्या भूल के भी हैं। मुझको।
- 59:01याद जरासा। फिर भी मेरा मन, प्यासा मेरे
- 59:19नैना, सावन वादों फिर भी मेरा मन। प्यासा फिर भी मेरा मन प्यासा।
- 59:41मन प्यासा ही रहेगा जब तक मन। उस जोत में समा नहीं जाएगा।
- 59:49मन तू जोत स्वरूप है अपना मूल बचाओ मन को विलीन कर देना है
- 59:57किसमें उस जोत में तो फिर मन उसका अखंड रूप बन जाएगा मन वो धारा है।
- 1:00:07जो सागर में लहरा रही है और उस धारा को सागर में विलीन कर देना
- 1:00:12है। अतल गहराइयों में ले जाना है उसे
- 1:00:17तब तुम जान पाओगे भगवान कृष्ण कहते कर कौन मरेगा, कौन मारेगा?
- 1:00:28वह नित्य वह अजन्मा सदा से है, अब भी है, फिर भी रहेगा।
- 1:00:43कभी नहीं बदलेगा कभी नहीं मरेगा बस उसे ही जान लो जान लो मानने से
- 1:00:53शुरू कर दो मैंने तुम्हें एक बात समझाई है मानना उसको शुरू करो जो
- 1:00:59सत्य है। एम् अनार है बिल्कुल है तो मान लो
- 1:01:06कोई कहे के एम् भालू है मत बनो एम् भालू नहीं है और मैं अगर
- 1:01:11निंदा करता हूँ जिसे आप कहते हो वो निंदा नहीं होता।
- 1:01:17और सिर्फ गलत रास्ते पर चलते हुए लोगों को सही राह दिखाना होता है।
- 1:01:22वो चाहे कितना भी बड़ा तुम्हारा पूज्य क्यों न हो, मैं आँखों वाला
- 1:01:30हूँ और अंधों को चलते हुए देखता हूँ तो बोलेंगे।
- 1:01:37मेरे बोर्डले में कोई बाधा न बने वहाँ पहुँच जाओ, यहाँ तुम्हें पता
- 1:01:48चल जाए और देखो। राधे राधे के कहने से तुम्हें वो
- 1:01:53पता नहीं चलेगा कि तुम शर्बत हो रहे हो, राधे राधे कहने से तुम
- 1:01:59मूर्छित हो जाओगे, तुम बेहोश हो जाओगे, राधे राधे कर लो की शराब
- 1:02:03पी लो या सो जाओ, तीनों एक ही बातें हैं।
- 1:02:08मैंने कल के प्रवचन में कहा था। ये तीनों मूर्चा दायिनी हैं।
- 1:02:13तुम्हारी शक्ति नष्ट कर देते हो तुम और राधे रात से करो चाहे शराब
- 1:02:23पी के करो। मूर्च्छी तो हो जाते हो तुम चाहे
- 1:02:30नींद में चले जाओ ये तीनो चीजें मूर्च्छ और मूर्च्छ से वो मिलता
- 1:02:35है कितना ही लोग तर्क कर रहे है, कितना ही तुम्हारे साधु और संत
- 1:02:39न्याय कर दे, तर्क दे दे। लेकिन उनके तर्क बिल्कुल बेकार अब
- 1:02:45कल ही मुझसे कोई कह रहा था। ये स्वामी जी कहते हैं नहीं वो
- 1:02:51मून से भी मिल जाता है तो मैंने कहा फिर ये बताओ के शोर से भी मिल
- 1:02:57जाता है अगर अब तुम लकीर पे आ गए हो।
- 1:03:05कि नहीं? वो मोन से भी मिल जाता है तो भी
- 1:03:07का क्या? सवाल हुआ भी का?
- 1:03:10सवाल तो ये हुआ कि वह शोर से भी मिल जाता है दिल।
- 1:03:26श्री कृष्ण। गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण
- 1:03:39वासुदेव। श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरार
- 1:03:51हेनाथ नारायण वासुदेव। पितमात स्वामी सखा हमारे पितमात
- 1:04:09स्वामी सखा हमारे अनाथ। नारायण वसुदेव हाँ श्री कृष्ण
- 1:04:25गोविंद हरे मुरारी हे नाथ? नारायण वसुदेव।
- 1:04:44धन्यवाद।