Latest / Baba ji Vijay Vats / 3 Sep 25 - जो मन से पार हो गया! - जपुजी साहिब पौड़ी 15 | चरम चक्षु मिलने के बाद क्या दिखाई देता है?
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- 0:09मीना कुमारी बाबा मन कहता है कि कहीं दौड़ जाऊं?
- 0:34यह मन लगता नहीं कहीं भाग जाऊं, कहीं दौड़ जाऊं, लेकिन स्त्री हम
- 0:51दौड़ भी तो नहीं सकते? पुरुष होती तो भाग जाते आप की
- 1:10बातें रसो गरी बातें सुनकर ऐसा लगता है।
- 1:21की दौड़कर आपके पास चले जाओ, कोई उपाय बताइए?
- 1:31बाबा ये तुम्हारा मसला नहीं है, सिर्फ
- 1:50सभी का मसला है। फिर तुम बिन कहीं लगता नहीं हाँ
- 2:09क्या करें? ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं हम
- 2:23क्या करें लौटे दिल में। लूटे दिल में दिया जल था न लूटे
- 2:43दिल में दिया जल था न। हम क्या करें ये दिल तुम बिन कहीं
- 3:02लगता नहीं हम क्या करें? निशाना कहीं पर निगाहें गुत्री
- 3:21मैंने बहुत समझाया मैं हार के। क्या कहा?
- 3:35या तो मेरे ही समझाने में कोई कमिंग बेस ही रहेगा।
- 3:42क्या तुम्हारे समझ में कुछ अड़चन आ गए?
- 3:50ये मसाला विश्व का मसला है। अकेले तुम ही दौड़ के कहीं नहीं
- 4:01जाना चाहते, ये देख रही हो सारा संसार दौड़ता है।
- 4:12लेकिन कहीं पहुंचता नहीं दौड़ता है, पहुंचता है तुम इन दौड़ते हुए
- 4:23लोगों को देखो हमारा के जमींदार पंजाब का।
- 4:27दिल्ली में चला गया था। दिल्ली में भीड़ भड़का बहुत होता
- 4:30है। जब वापस आया पुराने जमाने के बाद,
- 4:38तो मित्रों ने पूछा मैं बैठा हूँ क्या देखा तुमने दिल्ली में?
- 4:50कहते कहीं कोई आगजनी हुई है, कहीं कुछ भूकंप का प्रकोप आया है,
- 4:59जलजला आया है, कहीं कुछ ऐसी गड़बड़ हुई है?
- 5:04सारी दिल्ली भाग रही है। और मैं भी भागा और ऐसा भागा दुम
- 5:11दबा के। सच बताऊँ तो अब तक तो दिल्ली खाली
- 5:18हो गई होगी। सभी भाग रहे थे।
- 5:24जान बचाने के लिए यही मसला तुम्हारा है।
- 5:30बेटे और यही मसला विश्व का है और संत आते हैं, चले जाते हैं और
- 5:40तुम्हें यही एक बात समझाते हैं। तुम किसी की खोज में हो ये दिल
- 5:50तुम बिन कहीं लगता नहीं हम क्या करें तुम लूट गए हो तुम से कुछ
- 5:59छिन गया है और छिन गया है चैन। करार ठहराव, विश्राम तुम रात को
- 6:12भी आराम करते हो, वो आराम नहीं होता, विश्राम नहीं होता।
- 6:19विश्राम मिलता है उस अनहद में जिसकी कोई हद नहीं थी।
- 6:24अनहद में विश्राम तुम आराम करते हो विश्राम में तुम लूट गए हो।
- 6:41लूट गये हो क्योंकि तुम्हारा पासवर्ड से लिया क्या है और उसी
- 6:47पासवर्ड के सहारे तुम सारे क्रिया प्राप्त कर रहे थे अब तुम्हारा
- 6:52कंप्यूटर बंद पड़ा, तुम्हें पता नहीं।
- 6:59क्या गुम हो क्या तुम्हें पता नहीं खोज किसके लूटे दिल में लूटे
- 7:15दिल में दिया। जलता आने लूटे दिल में दीया
- 7:31जलताने हम क्या? करें।
- 7:39ये तुम्हारी अकेली सारी दुनिया सुन ले, सारा विश्व सुन ले,
- 7:48तुम्हारी भी यही तकलीफ है। ओह, यही तकलीफ है एक मात्र।
- 7:57तो अगर भाग रहे हो तो ठहर जाओ, एक क्षण के लिए मेरी बात सुन लो,
- 8:03बड़ी कीमती बात है दोस्तों कभी मैं भी रहा था मन तो मेरा भी करता
- 8:16था कहीं भाग जाओ भाग भी गया था। यहाँ से भाग गया ऋषिकेश मिलेगा
- 8:30जिसे मैं खोज रहा हूँ अरे द्वार मिलेगा, तुम भी यही कहते हो।
- 8:39सालासर धाम में मिलेगा कार्टून में मिलेगा अमरनाथ मिलेगा
- 8:45केदारनाथ मिलेगा, बद्रीनाथ मिलेगा लेकिन बढ़िया एक बात सुन लो, कहीं
- 8:55नहीं मिलेगा। ये धाम वगैरह तुम्हारे बनाए
- 9:03छोड़ो, बेकार की बात है, कहीं भी इतना जाए रहना रहना भी ठीक है।
- 9:18और तुम अभी सोय पड़े हो जग जाओ तो मेरा सब लूट गया, लूटे जल में
- 9:30दिया जलतन अब क्या करें? ये तकलीफ है, तुम्हारी नहीं है
- 9:39बेटे तकलीफ है, सारे विश्व की है और सारा विश्व मुझे सुन नहीं
- 9:45सुनता अगर ये चार सर मेरे सुन लिए जाएं और सभी संती से बोलते हैं।
- 9:59तो इन चार अक्षरों से ही काया, फिर तुम्हें भिक्षा नहीं मांगनी
- 10:12पड़ेगी, मन में करें। तारे गुरु सिख मन्ने नानक, पवई न
- 10:25बेख अगर तुम मन से पार हो गए कुन मुनी अवस्था में आ गए तुम मुनी हो
- 10:36गए मन ने। मन शब्द बाबा ने बड़ा शानदार शब्द
- 10:43ईजाद किया। मन तरे, तारे और शेख का प्यारा
- 10:55शब्द है। जो मन से पार हो गया, यथार्थ में
- 11:00पहुँच गया, सत्य में पहुँच गया में पहुँच गया, रहस्य में पहुँच
- 11:10गया मन ने शब्द अपना प्यारा किया है बाबा ने काश।
- 11:16इसका अर्थ व्याख्याकार जानकारी होता है, खुद भी तर जाता है, जो
- 11:29मन से पारख है और जो गुर सिखों को है जो सीखने की कैपेबिलिटी रखते
- 11:39हैं। और जिनके भीतर प्यास से जगी सीखने
- 11:46की इच्छा रखने वाला व्यक्ति से युक्त हो जाता है, तड़पता है, अगर
- 11:52वो मिलता नहीं तो ऐसे ही गुरु का शेख रहता है।
- 12:00गुरु की सड़ में आ गया सीखने के नियत से आग।
- 12:07तुम तो कमेंट करने के नियत से आते हो।
- 12:09कैसे हराएंगे मेरे पास यहाँ आ जाते हैं।
- 12:13बाबा शास्त्रार्थ करें। मैं उनकी मंशा को समझ जाता हूँ।
- 12:18उनके पांव को हाथ लगाता भाई तुम जीत गए ऐसे कैसे जीत गए बाबा बिना
- 12:23शस्त्रार्थ के मैंने कहा तुम्हारी पूरी हुई तमन्ना मैं हार गया
- 12:30इसलिए तो आए थे बस तुम्हारा मंतब पूरा हुआ।
- 12:36जल पान करो, खाना वगैरह खा लो और विदा ले लो मन में तरे, तारे,
- 12:45गुरु, सिख अगर मन से पार हो गया व्यक्ति व्यय शास्त्र अच्छा इसलिए
- 12:54मैंने। शंकराचार्य की ऐसी धज्जियां नाराज
- 13:00हो गया होगा। शंकराचार्य भी नाराज हो गया होगा।
- 13:05लेकिन सारी दुनिया नाराज हो जाए। सत्य बोलने वाला कभी सत्य को
- 13:09छोड़ता है, सत्य अडिग है। और सत्य को जाने वाला भी अकंप है
- 13:17अड़ी वह कंपता नहीं, वह डिगता नहीं वह थर्राता नहीं, वह हटता
- 13:24नहीं अपने सपनों से तरे तारे खुद भी थर जाता है, दूसरे को भी तार
- 13:32देता है मन में। जो मन के पार हो गया।
- 13:36गुरु सिख जो गुरु की शर्ट में सीखने की नीयत से आया कटाक से
- 13:42करने की नीयत से नहीं आया। बहुत से लोग कटाक से करने की नीयत
- 13:45से आ जाते हैं। भरे भरे मन में तरह पहले तैरता है
- 13:50व्यक्ति। मन के पार जो हो जाता है वह तरक
- 13:56तारे फिर ताड़ता है, दूसरों को मन के पार होना सीखाता है गुरु सिख
- 14:04वह जो गुरु की शरण में आ गया सीखने के बिरहा से व्याकुल।
- 14:13आग जला रही है उससे बिछोड़े की अभी तुम्हें बिछोड़ा महसूस नहीं
- 14:18होगा इसलिए तुम्हें ये बातें मीरा की नानक की कबीर की रैदास की समझ
- 14:28में आएंगी। क्योंकि घायल की गद्दी घायल जान
- 14:36है जिसके भीतर आग लग गई है। बिरहा की वो ही तो जान सकता है तो
- 14:45बिरहा की आग होती क्या है ये तुमने जानी नहीं तो तुम शब्दों का
- 14:50अर्थ भी नहीं समझ पाओगे। क्या होगा?
- 14:53फिर तुम शब्दों के अर्थों की जगह अनर्थ कर लोगे, वही कुछ आज हुआ
- 14:59है। धर्म शास्त्रों में कोई कमी नहीं
- 15:02है। बांचने वाले मूर्ख हैं, उन्हें
- 15:08तैरने की थियरी आती है। तैरना नहीं आता थ्रोटिकली वो
- 15:18जानते है, प्रैक्टिकली अगर कोशिश करेंगे डूब जाएंगे इसलिए भरा पड़ा
- 15:25यूट्युब तैरना किसी को आता नहीं। मन से पार जाना किसी को आता नहीं
- 15:36अगर मैं एक चैपटर को निगलुं 38 कौड़ियों में वैसे तो सभी
- 15:41स्वर्णिम अध्याय है, लेकिन चैपटर बड़ा प्यारा है मुझे।
- 15:52मन में तरह पहले डरता है मन के पार हो के व्यक्ति तर जाता है
- 15:59तारें गुरु सिख फिर जो सीखना चाहते हैं जो शरण में आई सीखने की
- 16:05नीयत से आई। उसको तार देता है, समझा देता है,
- 16:13यह है भाई असली वे यह असली तरीका मत उलझो इन नामों गमों में मत
- 16:20उलझो तरे तरे गुरु सिख मने नानक पवई न पेख नानक कहते हैं जो मन से
- 16:36पार हो गया ध्यान से संजना वो भिक्षा नहीं मांगेगा, क्यों
- 16:46मांगेगा? क्योंकि मन के पार हुआ व्यक्ति
- 16:51जंक्चर पैंट के पास पहुंचा, वह भिक्षा नहीं मांगेगा।
- 16:57वह तो कहेगा जो मांगू ठाकुर अपने थे सोई सोई जब है।
- 17:14और कबीर कहते हैं बिना मांगे मोती मिले हैं, मांगे मिले न फेंक उस
- 17:24स्थान पर उस स्तर पर आकर वह स्थान बीत रहे।
- 17:32तुम्हारी सूक्ष्म से सूक्ष्म जो तुमने कभी सोचा था यह मुझे मिल
- 17:36जाए और तुम्हारे भीतर ही पड़ी है, तो कबीर कहते हैं मांगें मिल लेना
- 17:49ठीक। तुम्हें भीख भी नहीं मिली थी जब
- 17:54तुमने भीख मांगी लेकिन अब तुम मांग नहीं रहे तुम ऐसे लेवल पे
- 18:02आके तो तुम्हें मौत ही मिल रहे हैं और तुमने मांगे।
- 18:10और उन मोतियों का क्या फायदा जो तुमने मांगे हैं?
- 18:17जब फायदा था तब तुम्हें मिले नहीं क्योंकि तुम किसी और तल से आवाज
- 18:22दे रहे थे बस स्थलों का ही फर्क है।
- 18:26जीस तल पर तुम मांगते हो वहाँ मिलता नहीं और जीस तल पर मिल सकता
- 18:32है वहाँ तुम मांगते हो मांगना खो जाता है क्योंकि तुम ही तो गए
- 18:38मांगने वाला विदा हो गया मने नानक पवई ही न पीख है, भिक्षा नहीं
- 18:48मांगेगा। कभी जरूरत क्या है?
- 18:51बिन मांग है, मोती मिल है, सब कुछ मिल जाता है, उससे यह है गल पर
- 18:56विक्षय है, यह मांगना भी तो नहीं पड़ता।
- 19:02कहीं कोई सूक्ष्म रेखा कभी काश यह बड़ी कार्य मेरे पास हो जाए।
- 19:09काश यह बड़ा बंगला मेरे पास हो जाए और तुम्हारे भीतर पड़ी है और
- 19:16तुम्हें बंगला भी दे देंगे, तुम्हें कार्य भी दे देंगे लेकिन
- 19:19तुम्हारे घूमने की। तुम्हारी ऐशो आराम करने की तबियत
- 19:24खो जाएगी और जब तबियत न हो तो साधन बेकार हो जाते हैं।
- 19:31इन शब्दों को इनको सर्कल में दे दो।
- 19:37जब तबियत न हो तो साधन बेकार हो जाते हैं।
- 19:47कल ही किसी ने क्लिप भेजा मुझे एक बुजुर्ग व्यक्ति बोल रहे थे, अगर
- 19:53तुमने 7080 साल की उम्र में सेक्सी नहीं किया तो ये हो जाएगा
- 19:57तुम पाबिल भी हो सकते हो तुम ये भी हो सकते हो मैं इसे क्या
- 20:03समझाऊँ? इतनी उम्र में आकर भी तुमको अकल न
- 20:08आए निहित कारण कुछ और है इनका चेहरा मोहरा ये दिखाना चाहते हैं।
- 20:19यद्यपि यहाँ कोई चेहरा मोहरा अमर होता है, वक्त का असर पीड़ा पड़ता
- 20:28है। सारी महल ढह जाती हैं और कल जो
- 20:39चमन था, देखते ही देखते से हैरान हो जाता है।
- 20:52कर चमन था, आज एक सेहरा हुआ। देखते ही देखते।
- 21:12ये क्या हुआ कल चंद था, आज एक सेहरा हुआ, देखते ही देखते।
- 21:30ये क्या हुआ कल चमन था तुम्हें पता नहीं इस माटी पे तुम चल रहे
- 21:39हो वह तुम्हारी किसी अतीत के शरीर की माटी और तुम अपने ही पूर्व के
- 21:48शरीर को पांव तले रौंद रहे हो। जिसकी तरफ किसी ने घूर के देखा था
- 21:54तुमने उसकी आँखें निकाल ली इसलिए तुम जल रहे हो आज भाग जाऊं दौड़
- 22:04जाऊं देखने वालों ने। देखा है धुआँ देखने वालों ने देखा
- 22:27है धुआँ किसने देखा? दिल मेरा जलता हुआ कल चमन था, आज
- 22:48इक सेहरा हुआ। देखते ही देखते ये क्या हुआ कल
- 23:04च्यवन कोई नहीं बचता यहाँ पर। नए नए कॅन्टेंट हो जाते हैं और जब
- 23:15तक मन है तब तक नए की खोज बनी रहती है।
- 23:22तुम्हारा मन अभी खोया नहीं जीस दिन मन खो जाएगा, तुम ढूँढना बंद
- 23:27कर दोगे क्योंकि मिल गया जो चाहिए।
- 23:36महात्मा गाँधी से किसी ने पूछ लिया तुम्हारी माता का नाम क्या
- 23:41है? अंग्रेज़ सब पर्यटक था, बाहर से
- 23:48आया, साबरमती आश्रम में पहुँच गया बापू।
- 23:56तुम्हारी माता का नाम क्या है? गाँधी कहते हैं कस्तूरबा आस पास
- 24:07के लोगों ने माथा पीटा। कस्तूरबा तो उनके घर वाले थे
- 24:13धर्मपति। क्या नाम था निकोलस चार्ली?
- 24:24उन्होंने पूछा, तुम्हारी माता का नाम क्या है?
- 24:26पुतली भाई क्या है, कैसे कस्तूर। बड़ी कमाल हो गई तुम्हें तो कोई
- 24:36माँ की गाली निकाल दे तुम बद होश हो जाते लेकिन ठीक बोले।
- 24:49इस जगत से जन्म में मुझ पर कृपा हुई।
- 24:53पिछले जन्म में मैं उसे जंक्चर पॉइंट पे पहुँच गया था जहाँ से
- 24:57छलांग ले सकता था। प्रभु ऐसे ही तो नहीं बरसता।
- 25:04गाँधी उस अवस्था में पहुँच गए जहाँ भेद खो जाता है।
- 25:10तो धर्मपत्नी माँ हो गई और सच में माँ हो गई तो तुम जो बोलोगे अपनी
- 25:18ही चल पे तो बोलोगे। कल ही मेरे एक शिष्य ने किसी
- 25:35स्त्री की तस्वीर दिखाई, हाथ में नोट पकड़े, इस गाँधी को हटा दो।
- 25:40आओ सामूहिक प्रयास करें, मैं बड़ा हैरान हूँ।
- 25:49गाँधी ने कहा लिखा कि मेरी फोटो लगा देना अरे बिना पूछे तुमने लगा
- 25:59दी, उनके भक्तों ने कहा होगा। गाँधी ने कब कहा और भक्त उनका
- 26:09प्रतिनिधित्व नहीं करते गाँधी का प्रतिनिधित्व गाँधी ही करता है जो
- 26:15उस सतल पे पहुँच गया जहाँ पत्नी माँ नजर आती है।
- 26:24तो आभा और मन के गले में हाथ डाल के चलने वाला व्यक्ति तुम्हें
- 26:35बदमाश लगता है या की तुम्हारे मन के भीतर बदमाशी।
- 26:43मैं स्त्री से पूछुंगा, मैं इसका नाम नहीं जानता।
- 26:45खैर, किस क्रांति को हटाना चाहती हो तुम?
- 26:52वह जो मर गया वह जो चला गया वह जो तुमने मार दिया और तीन गोलियां
- 27:00मार दी? अल्लाह निकला तीनों बार हीराम
- 27:11निकला। जो बेहतर होता है वो बाहर आ जाता
- 27:16है अंत वेला में, इसलिए एक शब्द है अंत मति सौगति।
- 27:24जो सारी उम्र तुमने किया होता है वह अंतिम वेरा में छड़ के जाता है
- 27:29तो सारी उम्र राम को ही आदर्श मानो मरते वक्त अल्लाह कैसे कहते
- 27:37कह? और ये भेद तुम्हारे भीतर है पुतरे
- 27:50ये कल ही मुझे बता रहे थे, एक छोरा है वो बड़ी आग उगलता है
- 27:57गाँधी जीके ऊपर। मैंने कहा आग उगलता है तो जहाँ आग
- 28:04लगती है वहीं तो जला करता है, आपका क्या लेता है, जो जलता है
- 28:14उसे जलने दो। फरियाद न कर आंसू न बहा फरियाद न
- 28:30कर दिल जलता है तो जलने दे जलता है दिल।
- 28:40गाँधी के नाम पे जलता है और मैं समझता हूँ मैं देखा नहीं उसे तब
- 28:46जन्मा भी नहीं होगा वह जब गाँधी जी चले गए।
- 28:54इन कब्रों पे ज्योतियां पीटने का मतलब क्या है।
- 28:58बुत्तों की गोलियां मारी जाती है। तुम पागल हो?
- 29:02अरे चला गया वो एक बीजेपी का बड़ा नहीं था, बोल रहा था महंगाई घनी
- 29:10है, गिर रहा है बेरोजगारी। घनी है घरों में रोटी नहीं,
- 29:21बीजेपी का बढ़ाने का बोल रहा था इन्हें रोजगार?
- 29:25दो खाने को भोजन दो, पहनने को वस्त्र दो, सिर पर कफन हैं इनके।
- 29:35सर ढकने के लिए छत दो वो रास्ता पीछे से किसने उगली लगाई कहते
- 29:48जनाब सत्ता तुम्हारे हाथ में आ गई है और 10 साल हो गए हैं।
- 29:56तुम भूल गए क्या? मैं तो भूल गया।
- 29:59मैं तो कहा कहीं कांग्रेस का ही राज़ चल रहा है।
- 30:02इसीलिए तो विकास लेके नहीं आये, इस कल्पना में भूल गए के वास्तव
- 30:12में हम ही बैठे हैं गद्दी नहीं तो भूल ही गए।
- 30:17इसलिए कहते है रोज़गार तो बेरोजगारी बहुत रुपया गिर रहा है,
- 30:22तुम्हें कुछ शर्म आनी चाहिए। रोज़ दुर्घटनाएं हो रही हैं, रोज़
- 30:31अटकगी हो रही है, तुम्हे जेपीसी ही नहीं बटाते।
- 30:38कितनी कतरोगारत हुई ये हुआ वो हुआ पुलवामा हुआ, पहलगाम हुआ तुमने
- 30:44कोई भी तो जेपीसी नहीं बैठाई तो पीछे से किसने ऊँगली लगाई?
- 30:55अरे महाराज, राज़ तुम्हारा ही है और 10 साल से है कहाँ फिर रहे हो?
- 31:04अरे अरे मैं कल्पना लोक में विकास करता करता कल्पना में ही जी रहा
- 31:12हूँ। ऐसे ही तुम हो पुत्र गाँधी चला
- 31:19गया और अगर गाँधी को मारने की एक बिटिया कह रही थी पांच 4 दिन पहले
- 31:27अगर मैं होती तो अपने शोभ गम से हाथों से इस अकर्म को निपटाती।
- 31:32मैंने कहा गाँधी तो ये बैठे। और ये लिख के दे दूंगा मेरी मौत
- 31:40का जिम्मेवार मैं इस बिटिया को कोई दंड न दिया जाए तुम अपनी
- 31:46तमन्ना अरजू पूरी करो। तुम्हारी ठंडक पड़नी चाहिए।
- 31:56हमारा अवतरण ही तुम्हें ठंडक पहुंचाने के लिए तुम्हारी जंजीरें
- 32:00काटने के लिए हुआ है। अगर तुम्हें अब भी रोष है वो तो
- 32:05मर्तिया भाई गोडसे ने वो तो लटक भी किया।
- 32:09अगर अब भी कुछ खून तक बच गई अचेतन मन में भरा रहता है बरसों बरसों
- 32:15लाखों लाखों बरसों तक जब तक तुम इसको खाली करोगी इसलिए मैंने आज
- 32:20के प्रोफेसर ने बोला कि अचेतन को खाली कर दो भाई बहुत कुछ भरा
- 32:23पड़ा, कूड़ा करकट। तुम जलते हो गाँधी का नाम देख वह
- 32:37जो अभेद्य बुद्धि को प्राप्त हो गया उसके लिए क्या मनु और क्या
- 32:44मानव, उसके लिए क्या स्त्री और क्या पुरुष?
- 32:50लेकिन ध्यान रखना, यथा दृष्टि तथा सृष्टि तुम्हारी सृष्टि में विकास
- 32:55तुम्हारी दृष्टि में विकास गाँधी तो है नहीं, किसको गाली निकालो,
- 33:03पागल हुए हो देवारों से भी कभी बातें होती हैं।
- 33:11चला गया उसे भूल जा जो चला गया उसे भूल जा।
- 33:26वो न सुन सके गा तेरी सगा। जो चला गया उसे बोल जा लेकिन।
- 33:46तुम्हें याद ही रहता है, मुझे लगता है तुम गाँधी के प्रेम में
- 33:51पड़ गए हो, प्रेम में ही याद नहीं जाती बीते दिनों की।
- 34:04जा के ना आए जो दिल उसे क्यों बुलाए तुम उसके प्रेम में पड़ गए
- 34:18हो कहीं नहीं वो तो चला गया तुम्हें मालूम नहीं है क्या?
- 34:23अरे भाई जाने वाले चले गए। और लटकने वाले लटक गए।
- 34:29तुम किस कल्पना में फिरते हो? बेरोजगारी घनी है, कृपया गिर रहा
- 34:36है भूखों मर रहे हैं लोग गद्दी पर तुम बैठे कल्पनाओं के लोक में
- 34:43उलझे खड़े हो। तुम्हें पता ही नहीं कि ये गद्दी
- 34:46मुझे मिल गई। 10 साल हो गए मन में नानक पवे ही
- 34:57न पीखा जो मन से पार हो गया मन में तरे, तरे, गुरु, सिख जो मन के
- 35:08पार हो गया वह तर गया। और फिर जो उतर गया वह जो उत्कंठा
- 35:16लिए आया ग्राहकी अग्नि से जो तरस है इस संसार से इस वंच से उसको भी
- 35:24पार कर देता है गुर क्योंकि वह जानता है।
- 35:30कि मन के पार कैसे हुआ जाता है। आज चैनल के ऊपर यूट्यूब चैनल के
- 35:39ऊपर बोलने वाले बहुत हैं लेकिन थ्रोटिकल वो जानते हैं।
- 35:44सब इधर से पढ़ लिया, उधर से पढ़ लिया।
- 35:47किसको सुन लिया, किसको सुन लिया? सब इकट्ठा करके कहीं का ईंट कहीं
- 35:59का रोड़ा भानुमती ने गुण बाज उड़ा और तुम्हें सुनाना शुरू कर देते
- 36:05हैं, बड़े प्रवचनकर्ता हो जाते हैं।
- 36:09लेकिन ध्यान रखना जो तैरना आपको सीखा रहा है, उसे खुद को तैरना
- 36:14नहीं आता। मैं रोज़ बोलता हूँ, हाउ टू रीच
- 36:22एक्सटसी उस परम आनंद तक कहाँ कैसे पहुंचा जाए, ये नहीं आता है इनके
- 36:30घर के झगड़े देखना। इनको घर में झगड़े मिलेंगे।
- 36:35जाकर देखो शांति नहीं असलियत बखान कर देती है बयान कर देती है तुम
- 36:43ज़रा इनके घरों में जाकर देखो अगर द्वंद मिट गया होता इनके भीतर का
- 36:54तो इनके आसपास का द्वंद भी मिट गया होता।
- 36:57क्योंकि जहाँ ऐसी रेंज वाला व्यक्ति होगा वहाँ दाँत ठहरेगा
- 37:02कैसे मन तरे तरे को सिख मन नानक पवि ही न पिका तुम्हें भिक्षा
- 37:14नहीं मांगनी पड़ेगी, सब मिल जाएगा।
- 37:17जो तुमने कभी सोचा था वो भी मिल जाएगा, आज सोचा वो तो मिल ही
- 37:22जाएगा, जो मांगू ठाकुर अपने तेह सोई सोई देव नानक नाम ऐसा नाम
- 37:32मनोरंजन सोई। वह पसारा, ऐसा वह विस्तार, ऐसा वह
- 37:40अखंड वह विराट, वह विशाल, ऐसा कैसा ऐसा नाम निरंजन सोय जो दिखता
- 37:53है ना? तुम किसको झप रहे हो, किसको कभी
- 38:02देखा नहीं और जीसको कभी देखा नहीं, उसको झप सकते भी हो, पहले
- 38:09ये तो देख लो। जीस रस का बखान कर रहे हो, उसको
- 38:17पीया है, कभी जीस रस को जप रहे हो उसको पीया है कभी आलस से नीचे
- 38:27उतरा है कभी याद किसे करोगे? तुम्हारे से अच्छे तो प्रेमी
- 38:36जिनके भीतर कभी कभी किसी भाग्यशाली लम्हे में आँखें चार
- 38:43हुई थीं और वो प्रेम के एक बूँद उतरे थे, वो कहीं ज्यादा गहरा
- 38:48आनंदित है। वह एक कोने में घर के कोने में
- 38:52बैठ के फूट फूट के रोता है। किसकी याद में उसने देखा है किसकी
- 39:04याद में वो रोता है उसने देखा है? लेकिन तुम किसकी याद कर रहे हो
- 39:09तुमने देखा है प्रेमी को पता है कि मैं किसकी याद में रो रहा हूँ
- 39:16फूट फूट के रोता है मैं जरूर रातों को फूट फूट के रोता है
- 39:25लैला। मेरी प्यारी लैला आह मेरी बाहों
- 39:31में समाजा और वृक्षों के साथ गल बकरी डाल लेता है जैसे कि सच में
- 39:40वृक्ष लैला हो, रात के अंधेरे में अर्ध रात्रि में चिल्लाता है,
- 39:46रोता है। और इतना ऊंचार होता है कुदर्तन
- 39:55उसके बिल्कुल पास ही राजा का महल है।
- 39:59राजा को भी कभी किसी से प्यार हुआ था।
- 40:05अब उसे भी नहीं मिली थी उसकी प्रेम कभी कभी राजा भी चूक जाते
- 40:11हैं, रंग कभी चूक जाते हैं। मैं क्या बोल रहा हूँ कभी कभी उस
- 40:21प्रेम को राजा भी चूक जाते हैं। और कभी कभी रंग कभी सूख जाते हैं
- 40:26और कभी कभी रंग तो पा लेते हैं। राजा नहीं पा सकता क्योंकि राजा
- 40:31में अहंकार हो जाता है। मैं डिक्टेटर हूँ, मैं तानाशाह
- 40:36हूँ, मेरे में बल है, मेरे पास पावर है।
- 40:40ये नहीं पता होता कि पावर लोगों की है।
- 40:42यह हाथ लोगों ने काट के दिया तो उसे भी याद आ जाती है अपनी
- 40:50प्रेमिका के जब मजनू रोता और बुरे हाल रोता फटे हाल रोता, सुबह उठ
- 40:57के पूछा ये व्यक्ति रोज़। अब बताया तो है नहीं कि मैं
- 41:01तड़पता हूँ उसकी जब ये रोता है बुरी तरह तो मुझे अपनी याद आ जाती
- 41:07है। मैं कैसे रोजा करता था ये कौन है
- 41:15इसे पकड़ के लेके आओ। रोज़ मेरी नींद को खराब करता है,
- 41:19नींद को नहीं, चैन को खराब करता है।
- 41:24याद ना जाए। जाके न आए जो दिल क्यों भुलाए
- 41:45उन्हें दिल क्यों भुला याद न? ज्या दिन जो पखेरु होते पिंजरे
- 42:08में मैं रख लेता हूँ पालता। उन को जतन से खाने को मोदी देता
- 42:27सीने से लह त लगा। याद न याद नहीं जाती।
- 42:39बीते दिनों की याद वो होती है। स्मरण वो होता है जिसे पलट पलट के
- 42:46बाहर फेंकना पड़ता है और फिर भी वो चली जाती है।
- 42:53तुम याद किसे करते हो उसे देखा है, सच्ची याद तो वही होती है, पर
- 43:03तुम झूठी याद करते हो। तुम ठीक से याद नहीं करते क्योंकि
- 43:10तुम नहीं सुना होगा किसी से उसका नाम अल्लाह उसका नाम राम है राधे
- 43:19लेकिन कभी दीदार भी हुए उसके और दीदार के बिना तुम याद भी कैसे
- 43:24करोगे? जो प्रेमी प्रेमिका को भुला देता
- 43:32है उसे पता नहीं होता कि वह भुलाया नहीं जाता।
- 43:39परमात्मा कभी भुलाया जाता है बस तुम्हें अभी तक मिला नहीं,
- 43:47तुम्हें एक झलक नहीं मिली। अन्यथा तुम पाओगे मैं क्यों बोलता
- 43:50हूँ रोज़ कि एक दीदार कर लो एक बार सटोरी की झलक देख लो, क्यों
- 43:56कहता हूँ? मुझे पता है ये लत लग जाएगी और
- 44:02ऐसी लत लगेंगी। ऐसी लगी लगन मेरा हो गई वो तो गली
- 44:18गली ही हरि गुण गाने लगी। महलों में बाली बन के जो गन चली
- 44:35मेरा रानी दीवानी। कहानी लगी ऐसी लगी लगन मेरा हो गई
- 44:53मगन। क्योंकि लगन नहीं लगी क्योंकि
- 44:59तुमने उसे देखा नहीं जीसको स्मरण कर रहे हो।
- 45:06मजनू ने देखा लला को और हुक्म हो गया सुबह बताया तो है नहीं
- 45:16शरमाती। मुझे भी मेरी प्रेमिका की याद आती
- 45:20है ये प्रेम ऐसा बधाई नहीं चाहता तुम्हें ये आग लगी नहीं इसलिए तुम
- 45:30उसको उड़ा सकते हो लेकिन जीस दिन आग लग जाए।
- 45:35और मैं चाहता हूँ तुम्हें लग जाए तुम भुला ना पाओगे।
- 45:44सिमरन वह था जिसे बाबा कह गए, मैं तुम्हारे बस में नहीं हूँ।
- 46:00जब आएगी धक्के से आ जाए कब आएगी जब तुम खाली होगे, मैं आज बोला
- 46:07हूँ और इसी कड़ी को लगातार शुरू रख रहा हूँ।
- 46:14इश्क पे ज़ोर नहीं है। तुम ज़रा खाली हो जाओ, जगह तो दो
- 46:20उसे आने की तुम तो भरे पड़े हो गंदगी से तुम तो तुमने तो मैन मेड
- 46:26नाम जपने शुरू कर दिए तो तुम्हारा अचेतन बढ़ेगा ही ना भाई और ऊपर से
- 46:32विकार और ऊपर से विचार। और ऊपर से विषय ये सब कुछ भरे
- 46:40पड़े तुम्हारे भीतर उमंगें वासनाएँ कल्पनाएँ अतीत की
- 46:46स्मृतियां ना जाने कितना कुछ भरे पड़े कूड़ा कबाड़ा तुम्हारे ये
- 46:51गाँधी को ऐसे ही नहीं रोते। इन विचारों का सपने टूट गया।
- 46:591906 में मोहनदास गाँधी, विनायक दामोदर सावरकर मिलते थे।
- 47:12एक दूसरे से कभी वो उसके घर चला जाता, उसके घर चला जाता।
- 47:16दोनों पढ़ते थे लंदन में बैरिस्टर, लेकिन दोनों के भीतर आग
- 47:27थी। साबरक्र के भीतर भी आग थी विलाशक।
- 47:31लेकिन जीस पद्धति से देश आजाद होगा।
- 47:35वो दोनों के अलग अलग गाँधी कहते बिना हथियार उठाए अहिंसा से
- 47:45मिलेगा खुद मरना सीखो मिलेगा, बिल्कुल मिलेगा।
- 47:51लेकिन एक तरफ साथ थे दोनों में सबर कर कहते नहीं मोहनदास तुम
- 48:00जानते हो, वह मिलेगा बंदूक की नोक पर।
- 48:08सशस्त्र क्रांति करनी होगी, फिर मिलेगा।
- 48:13अब दोनों के बनियादी मतभेद भीतर आग जलती रह गई साबरकर के कि मेरा
- 48:22मिशन फेल हो गया और मेरी पद्दति फेल हो गई।
- 48:24ये था स्लीकर इसको तुम जानते नहीं।
- 48:28पर मैं उसे क्षमा करना गाँधीजी उसे सदा ही कहते हैं विनायक कि
- 48:42अरुंधराइक्वे करनाटुंधराइक्वे तुम पथ भ्रष्ट हो गए हो।
- 48:51दो तिहाई धरती पर राज़ करने वाला व्यक्ति सशस्त्र सेनाओं से कैसे
- 48:58पराजित होगा? वर्ल्ड का दो तिहाई क्षेत्र उसके
- 49:03पास दो तिहाई फोर्स उसके पास है। कैसे खराब होगा तुम्हारे 138
- 49:10वर्ग? 38 बोर की पेस्टल गाँधी को तो मार
- 49:16सकती है लेकिन जार्ज पंचम को नहीं मार सकती।
- 49:23हाँ तो चिड़िया भी पंख नहीं फड़फड़ा सकती चर्चल की इच्छा के
- 49:28बिना माउंट बैठने की इच्छा के बिना।
- 49:40बहुत बार मोहन दास ने कहा गाँधी ने कहा कि तुम्हारी यह फिलॉसफी
- 49:46गलत है, वरुंधरों में इसको सुधार करो, आओ दोनों भाई मिलकर चले।
- 49:54जब अपनी मनशाही दोनों की एक आजाद ही तुमने करना आजाद ही नहीं करना
- 50:00आजादी के लिए दोनों लड़ रहे भारत माता को गुलामी से आजाद करना
- 50:08गाँधी ने बहुत बार ऑफर किया। लेकिन सावरकर नहीं माना।
- 50:14सावरकर ने कहा नहीं यह तो क्रांति होगी तो मारना ही पड़ेगा।
- 50:20इन्हें यह मारने की आग आज इनमें जल रही है।
- 50:25वो चाहे ये पी एल आर करने वाली देवी हो।
- 50:32उस देवी का एक छोटा सा संकृत मेरे पास आया, फला आ गया, बु आ गया,
- 50:37मुकेश आ गया, धर्मेश आ गया, बु आ गया, बु आ गया।
- 50:42अब आज तो इसके हैं और ये समझती है कि सभी अंधे अंदाज सदा ही ये
- 50:48समझता है। यही भ्रम पाले रहता है अंधा के
- 50:53दूसरे भी अंधें क्योंकि उसे पता ही नहीं होता कि आँखें होती कैसी
- 50:59हैं तो जो भी चाहे, बोल देता है। आज यूट्यूब चैनल पर ऐसे ही अंधों
- 51:04की भरमार है। जिन्होंने कभी उस क्षेत्र में
- 51:09प्रवेश तक भी नहीं किया। छुरी जानते हैं यह निश्चित पड़े
- 51:18वेद पड़े हैं, विलासक पड़े हैं और सभी गीता पड़े हैं, अष्टावक्र
- 51:24गीता पड़े हैं। सभी बखूबी आपको बता देंगे।
- 51:27लेकिन थ्योरी अगर इनसे कहो सिखाओ, हमें तैरना, ये कहेंगे स्वाद बयान
- 51:36लगा देंगे तो मैंने देखा ना कोई मुकेश आया, ना कोई धर्मेश आया।
- 51:47ना कोई जीतेन्द्र आया, कोई नहीं आया।
- 51:50मैं तो देख रहा था। मैंने कहा हद हो गयी, लेकिन ऐसा
- 51:56नहीं है। मैं जानता हूँ।
- 52:00इन लोगों को भड़काने वालों की पूरी कतार यूट्यूब चैनल पर सक्रिय
- 52:06ये गिरोह है। आँखों वाला कोई नहीं है, आँखों
- 52:13वालों के कुछ लक्षण होते हैं वो इन जीभ के चटोरो में लक्षण नहीं
- 52:19होते हैं। और क्या क्या बताऊँ कुछ बातें
- 52:25सार्वजनिक करने का योग्य नहीं होती।
- 52:32गाँधी को हटाना है भाई हटा दो इकट्ठे कर लूँ लोगों को।
- 52:40पर गाँधी ने कब कहा तू मेरी फोटो लगा दो गाँधी चाहते तो उसी वक्त
- 52:48जब देश आजाद हुआ था जवाहरलाल ने पटेल ने सभी ने कहा शास्त्री ने
- 52:54कहा बापू आप बैरिस्टर हो पड़े, लिखो समझदार।
- 53:00अहिंसक हो, गद्दी संभालो कोट, बेंट रखे हैं, टाई हैं, मोजे
- 53:10नहालो धोलो और डालो प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया बन जाओ पर
- 53:18मुझे एक बात बता दो। ये जो चबर चबर चबर तुम्हारी जुबान
- 53:24चल रही है और गाँधी जी फैसला कर देते उनकी बात मान लेते तो क्या
- 53:30गॉड से कितनी हिम्मत थी के जाके मार देता तो राम राम करता हुआ
- 53:37व्यक्ति। आज तुम भी कहोगे एक आयरन हरकत है।
- 53:43उसके ऊपर तीन गोलियां दाग देना क्या मुश्किल सीआईडी लगाई गई?
- 53:50इन्टेलिजेन्स लगाई गई कि सबकी तलाशी ली जाए, लेकिन गाँधी ने मना
- 53:54किया नहीं, तलाशी लेनी। मैं संध्या को उपासना करता हूँ और
- 54:03कोई भी आ सकता है किसी की तलाशी नहीं जो आए आने दो और उसी दिन की
- 54:10बात है। तुम कहते हो मन्नू और आभा के कंधे
- 54:20में। तो तुम्हारी मानसिकता है।
- 54:24वह उस क्षेत्र में प्रवेश कर गए हैं।
- 54:28जीस क्षेत्र में भेद मिट जाता है। लड़की का लड़के का, आदमी का,
- 54:33स्त्री का, मित्र का, शत्रु का ये वे समझो।
- 54:38वह न कोई मित्र है, न कोई शत्रु है, क्योंकि सब और मैं हूँ इसलिए
- 54:45किसी ने पूछा तुम्हारी माता तो उसने कहा कस्तूर बहा।
- 54:54ऐसे व्यक्ति के बारे में कमेंट बेकार हो जाते हैं।
- 55:01क्या कहोगे जिसकी वेद बुद्धि खत्म हो गयी, वह तुम्हारी समझ में नहीं
- 55:06आएगा, जिसकी वेद बुद्धि समाप्त हो गयी, वह बुद्धि में आएगा कैसे?
- 55:15तुम्हारी बुद्धि में आएगा क्योंकि तुम्हारी बुद्धि अभी तक वेद
- 55:18बुद्धि हुई नहीं तो तुम बोलोगे, इसको हटाने का प्रयास करोगे ये है
- 55:24कहाँ भाई ये बताओ गाँधी कहाँ है? गाँधी ने कब मना किया कल हटाते आज
- 55:33हटाते लगाई ही क्यों थी? कभी मना नहीं किया भाई अटक बस यही
- 55:42दायित्व है ऐसे सिर्फ रे लोग सिर्फ किसी निहत्कारणों से ये
- 55:50प्रॉप एक घंटा किया करते हैं। इनका मंतव्य कुछ और होगा।
- 55:54बस पीएलआर झुके होता नहीं है। अब इस पर मैं अलग से कभी वीडियो
- 55:58बनाऊंगा। पीएलआर बस वही होता है जो मैं
- 56:01क्रियायुग कहता हूँ करो अपने अचेतन को खाली कर दो।
- 56:04अचेतन में बहुत कुछ भरा पड़ा है। ये मुकेश, ये धर्मेश, ये हेमंत ये
- 56:09सब कुछ उसमें भरे पड़े हैं, वो ही निकलते हैं बाहर।
- 56:13अन्यथा अगर तुम कहो की पिछले जन्म में जाकर वह व्यक्ति बोलता है,
- 56:18तुम कैसे मरे थे? हम ऐसे मरे थे सब बकवास है, मैं
- 56:22ओपेन चैलेंज करता हूँ, मैंने बहुत बार ओपेन चैलेंज किया, इन लोगों
- 56:27को क्या हुआ मेरे सामने? मुझे बताओ चलो मेरा पिछला जन्म तो
- 56:33पता है उससे पिछला जन्म बता दो क्या था किसी भी व्यक्ति को ले
- 56:38आऊंगा, जिसका पिछला जन्म मैं जानता हूँ तुम बता देना पिछले
- 56:42जन्म में कौन था अगर चैलेंज स्वीकार हो और जब भी हो तुम आ
- 56:48जाना। ऐसे चबर चबर मत करो सत्य के आगे
- 56:57जुबाने बंद हो जाया करती है, वहाँ जाकर बोलती बंद हो जाती है, संत
- 57:06की खुद की बोलती बंद हो जाती है। और वह जब बोलेंगे तो तुम्हारी
- 57:11बोलती कैसे बोलेंगे? दूसरों को गुमराह करने से बड़ा
- 57:19कोई बात नहीं होता। तुम जानते नहीं हो जो बोल रहे हो
- 57:27तुम आग में जल रहे हो। तंतु टूटेंगे तुम्हारे काटीसोल
- 57:31पैदा होगा तुम्हारे में। अडरिनेलिन पैदा होगा तुम्हारे
- 57:34में, तुम अभी इच्छा मत करना कि डोपामेन पैदा हो जाएगा, सारा टोन
- 57:39पैदा हो जाएगा, तुम गलत जहर, खून के भीतर जहर रासायनिक तत्व ये
- 57:45हार्मोन से पैदा शुरू हो जाए। तुम ही के गुजरेंगे गाँधी का
- 57:51क्या? वो तो है ही नहीं।
- 57:53और गाँधी को तो पता ही नहीं और फिर भी अगर तुम मारना चाहते हो
- 57:58गाँधी को और बिटिया कह रही थी मैं ये शुभ काम अपने हाथों से करती
- 58:03हूँ तो मैंने कहा ये बैठा गाँधी आजा देख और वलवर वगैरह तो मेरे
- 58:10पास है। कल भी अहिंसक था।
- 58:15श्वेत जुल्फों वाले तुम्हें सुना रहा हूँ पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ
- 58:24ले आओ 38 बोल ले आओ 12 बोल ले आओ 1000 बोली फूंक दो मेरे कालजे
- 58:31में। हे राम ही निकलेगा तुम कहाँ फिर
- 58:42रहे पागल हो? फिर तुम्हारा निहित स्वार्थ
- 58:49मंतव्य कुछ और है। वो तुम कर रहे हो अरे वो और क्या
- 58:53चाहिए? अब तुम्हें चाहिए कि तुम्हें
- 58:56अवतार घोषित कर दें कर देते हैं भाई बड़ी देर से तमन्ना थी तो
- 59:08अवतार घोषित कर देते हैं। ऐसा नाम रंजन होय जे को मन वह
- 59:19निरंजन इन आँखों से नहीं दिखता चरम चक्षुओं से नहीं दिखता वो
- 59:23दिव्य चक्षुओं से दिखता है मैंने खाटू श्याम।
- 59:29के प्रवचन ने यह बात बताई थी। बरबरीक के बारे में बरबरीक बड़ा
- 59:37योद्धा था, उसे पराजित नहीं कर सकता था।
- 59:41कोई कृष्ण कहने लग गए किंतु देखना चाहता है महाभारत का युद्ध।
- 59:49तो चर्मचक्षुओं से तो नहीं देख पाएगा आह मैं तुम्हें दिव्यचक्षु
- 59:53देता हूँ उन दिव्यचक्षों से तुम सारा महाभारत देख लोगे किसने क्या
- 1:00:00किया सच में क्या हुआ सच दिखता है वहाँ?
- 1:00:07चरम चक्षुओं से तुम्हारी क्रियाकलाप नहीं दिखती।
- 1:00:10भारत चरम चक्षुओं से वह दिखता है जो सत्य होता है जब तुम अनंत हो
- 1:00:16जाओगे, विराट में जाओगे तो ये भौतिकता मिट जाएगी सोलिडिटी विल
- 1:00:21एंड वैनिश क्या रह जाएगा? पारदर्शिता रह जाएगी।
- 1:00:28सोलिडिटी नहीं होगी या चाँद तारे नहीं होंगे या पेड़ पौधे नहीं
- 1:00:31होंगे या धरती आकाश नहीं होंगे, ये सागर नहीं होंगे, नक्षत्र
- 1:00:38ग्रह, तारे नहीं होंगे, बस एक एक हो, एक हो ओंकार।
- 1:00:47वह एक होगा यही हुआ मेरी एनलाइटनमेंट की वीडियो पढ़ लेना,
- 1:00:55सुन ले न पढ़ लेना। अब तो शायद हिंदी में भी है,
- 1:01:01पंजाबी में भी आ जाएगी। बोला भी हुआ है, शायद इंग्लिश में
- 1:01:05भी पब्लिश हो गई हो तो जब तुम संकीर्णता से तुच्छता से विराटता
- 1:01:15में जाओगे, उस अनंत सागर में जाकर टच करोगे।
- 1:01:24तो एक बात है कि सोलिडिटी बढ़ जाएगी, रह जाएगा ट्रांसपेरेंट सब
- 1:01:32ट्रांसपेरेंट जिधर देखोगे जिधर निगाह जाएगी चारों तरफ सिर्फ
- 1:01:38पारदर्शी होगा। अपारदर्शी कुछ नहीं रहेगा।
- 1:01:42अब तो अपारदर्शी है, ये दीवारें तुम्हें देखने नहीं देतीं तब
- 1:01:46दीवार के पार तुम देख सकते हो जैसे ये इनके धर्मेंद्र पीएलआर
- 1:01:54करने वालों के। धर्मेंद्र परमिंद्र, सत्येन्द्र।
- 1:02:00पता नहीं क्या क्या घुस जाते है और भूकंप चलाते है।
- 1:02:05ऐसे ही एक वो भूसुंड है वहाँ पर बैठा पता नहीं कहाँ पर क्या नाम
- 1:02:08है उसका, मैं चाहता नहीं बट क्लिप्स आती है मेरे पास, वो कहता
- 1:02:14है जना अरे भाग जा यहाँ से। मार दूंगा तेरे को, ये कहूँ क्या
- 1:02:19मारेगा भाई इसको आत्मा तो कभी मरती या तो कृष्ण पागल हैं नैनम
- 1:02:26चेतन तीषस्त्रण और आत्मा को कोई दुख नहीं होता उसे क्या सताओगे?
- 1:02:36उसको क्या तुम कड़ाहू केन्द्र उबालोगे जब यहाँ की अग्नि में से
- 1:02:40वो निकल के बाहर चली गई, कुछ नहीं हुआ।
- 1:02:44300 डिग्री होता है, 800 डिग्री में शबद्ध दाहगरी होता है, उसका
- 1:02:49टेम्परेचर होता है। वहाँ से उसको कुछ नहीं हुआ और
- 1:02:52कड़ाहू का तो तापमान ही 500 होता है।
- 1:02:57उबलते हुए तेल का तापमान 500 तो क्या जलेगी?
- 1:03:03वो नैनाम दाहती बाबा काहा फिर तुम क्या जलाओगे, कौन किसके वेदर घुस
- 1:03:12जाए, तुम्हें पता है? तुम्हारे भीतर कौन कौन गुस्सा हुआ
- 1:03:17है, पता ही नहीं। मैं देख रहा हूँ।
- 1:03:21इसके खुद के भीतर 2022 जने खुशी हुए है।
- 1:03:31अहंकार जब तक रहेगा, गुस्सा आएगा बिटिया।
- 1:03:35जे। अंहकार के होने के निशान खुद के
- 1:03:39भीतर 20 व इस जने घुसे हुए हैं। मैं देख रहा हूँ तो बरबरीक को
- 1:03:46बोले कृष्ण के दिव्य जक्षु से दिखेगा भाई दिव्य जक्षु दे देता
- 1:03:51हूँ। दे विचक्षु दे दिया तो उसने सारा
- 1:03:57महाभारत ऐसा नाम नरंजन होय जे को मन जाने मन कोय, वही जानता है जो
- 1:04:10मन से। पार हो गया।
- 1:04:12उन् मुनि अवस्था में आ गया और मन में चला गया जहाँ मन नहीं है जहाँ
- 1:04:22शांति है, क्योंकि मन ही कोलाहल है, मन ही शोर है शोर से पार मन
- 1:04:29से पार। तो इनकी फिक्र ज्यादा मत किया
- 1:04:36करो। ये जो व्यक्ति गाँधी के बारे में
- 1:04:38बोलते हैं, ये खोपड़ी से बोलते हैं।
- 1:04:42काश ये एक पल एक पल। अपने भीतर डुबकी लगा दे, छू मंत्र
- 1:04:54हो जाएगा इनका सारा द्वेष क्योंकि गोता लगा लिया समृद्ध में जहाँ
- 1:05:04जाकर। तुम संवर्गिक से भी ज्यादा बड़े
- 1:05:12आनंद में खो जाते हो। एक मोदक से तमन्ना थी।
- 1:05:25तुम्हें छूने की एक मौत से तमन्ना थी तुम्हें छूने?
- 1:05:47आज बस में नहीं जज़्बात आज बस में नहीं।
- 1:06:02जज्बात करी बाजा दूर रहकर न करो बात।
- 1:06:21करी बाजा, ईद मनाई गल बकड़ी डाली तुम वहाँ पहुँच जाओगे, परमात्मा
- 1:06:30तुम्हें बनाएगा दूर मत रहो करी बाजाओ एक मुद्दत से तमन्ना थी
- 1:06:38तुम्हें छूने। आज बस में नहीं जज बात करी, बाजू
- 1:06:45दूर रह कर ना करो बात तुम बड़ी जुआ तुम खोपड़ी में बैठे बैठे बात
- 1:06:50कर रहे हो उस गाँधी की जो अपने को छू गए थे तो तुम्हारी बातों को
- 1:06:57कोई जवाब नहीं है। क्योंकि तुम बहुत ऊंचे ऊंचे अंकार
- 1:07:03ऊँचा ही होता है वहाँ से बात कर रहे हो और गाँधी इट डाउन टु एस
- 1:07:13कुतब मीनार पे बैठा हुआ व्यक्ति नीचे से जाते हुए व्यक्तियों को
- 1:07:17कीड़ियों के सामान देखता है। ऐसी ही तुम्हारी दृष्टि बस
- 1:07:27तुम्हारे लिए एक ही शब्द कुंभ अज्ञानी छोड़ो भीतर प्रवेश चर्चा।
- 1:07:39उस आनंद की मूर्ति में उतर जाओ जहाँ जाकर चह न जाए छोड़ो प्लीज़
- 1:07:50बहुत वर्टिकली है ये जन्म तुम्हारे लेखे।
- 1:07:56बहुत जन्म भटके मेरे माथम कभी तो उतरो, ऐसी सड़ाध ही फैलातें
- 1:08:05रहोगे? खुद भी इस सड़ाध में इस दुर्गन्ध
- 1:08:10में सड़ते रहोगे और लोगों को भी सड़ाते रहोगे।
- 1:08:13ये बुरे से बुरा काम है। लोगों को बहका देना, लोगों को गलत
- 1:08:18मार के दिखा देना। अब मैं इस बिटिया से पूछुंगा क्या
- 1:08:21ये तीन बंदे जो तुमने गलाये चार बंदे एक पांव में बैठा था, वो था
- 1:08:25तुमने देखा, बिल्कुल नहीं थे क्यों झूठ फैला दिया?
- 1:08:33गुरुवाणी की बातें करने वाली आखिरी पंक्ति को भी देख लो
- 1:08:37चंगियाइयां बुर्ययां वाचे तरमह दूर करनी आपको अपनी कैनेडा के
- 1:08:44दूर। गप्पो में मत उलझो, पीएलआर वगैरह
- 1:08:51कुछ नहीं होता। ये चेतन चेतन मन की खेलें हैं,
- 1:08:55अपने भीतर का बोतल छूने के लिए मन से पार होना पड़ता है और तुम मन
- 1:09:00की बातें करती हो। कोई भी पीएलआर करने वाला मैंने
- 1:09:04बहुत बार कहा छोड़ो। बहुत कमा लिया इतने इतने पैसे तुम
- 1:09:08सेशन के ले लेते हो, कहाँ ले के जाओगे, दम से गिर जाओगे, 1 दिन
- 1:09:17झूठ मत फैलाओ। मुझे मत बताओ किसी को मत बताओ एक
- 1:09:23कमरे में एकांत में बैठ जाना मेरी बेटी को लगा लेना सुन क्या मैं
- 1:09:27जानती भी हूँ इसे ये तो जीतेन्द्र आया, धर्मेंद्र आया फलाना आया जी
- 1:09:34आया जी आया तुमने देखा? क्यों बहक रही हो और लोगों को बहक
- 1:09:40रही हो छोड़ो अपने भीतर उतरो, ऐसा नाम निरंजन सोए किसको पता लगता
- 1:09:54है? उसको पता लगता है जो मन से पार हो
- 1:09:58गया, जे को मन जाने मन कोय, जो मन से पार हो गया वह ही जान सकता है।
- 1:10:07ऐसे लोगों की एक नहीं है। मैं रोज़ बोलता हूँ।
- 1:10:1323000 के करीब लंबी लंबी वीडियो मैंने बोल दिया इनके कान पे जू
- 1:10:18नहीं सर तुम मन की बातें कर रहे हो बाबा कहते हैं मन की बातों में
- 1:10:29मतूल ये चेतन अचेतन की बातें जेपीएलआर वगैरह।
- 1:10:36सब अचेतन मन की बातें हैं बहुत कुछ छिपा हुआ है तुम्हारे इतने
- 1:10:40जन्मो के इतने जन्मो की स्मृति, इतने इतने तुमने सजा रखी है,
- 1:10:46भविष्य के सपने मैं ये बनु मैं वो बनु मैं वो बनु क्या करोगे भाई
- 1:10:52बहन? यहाँ से कोई कुछ ले के क्या खाली
- 1:11:03हाथ चले जाते हैं, सिकंदर न कर इतना तकब जहाँ एक रोज़ पानी में
- 1:11:11मत बोलो 1 दिन मर जाएगा। यहाँ से तेरे से आला हो, गुजरे
- 1:11:18बड़े आला हो गुजरे 35 वर्ष की उम्र में इंतकाल और आंधी परसु जीत
- 1:11:26रही थी सिकंदर सिकंदर रोने लगा जब भूगोल बढ़ाने लगा उसका अध्यापक।
- 1:11:34रोने लगा तो झपक ने पूछा बेटा बात क्या है, क्यों रो रहे हो?
- 1:11:42कहते हैं बच्चे के पूत के पांव पाले में ही बिछा लिए जाते हैं।
- 1:11:50सिकंदर बोला इतनी छोटी सी धरती ये लोग।
- 1:11:53गुलाब तो छोटा ही होता है, हाँ ये सारी धरती कक्षा है तो रोती क्यों
- 1:12:00हो? अरे इतनी छोटी सी धरती है तो मैं
- 1:12:03जीत लूँगा, फिर मैं क्या करूँगा? ऐसी ऐसी अंकांक्षाएं लिए यहाँ आए
- 1:12:14और जब विदा होने लगे, दोनों हाथ कहते मेरे जनाजे से बाहर कर देना
- 1:12:24सिकंदर चला, लेकिन खाली हाथ चला कितने कमा लोगी तुम?
- 1:12:31कितने सेशन किए, कितना कमा लिया संग जाए बहाना हो सकता है बाल
- 1:12:40बच्चों के लिए कमा रही हूँ, पोते पोतियों के लिए कमा रही हूँ लेकिन
- 1:12:43बहाना वो भी क्या ले जाए? इसी कस्म कस्म इसी भागदौड़ में वो
- 1:12:49भी अपने जीवन को सुरवित कर देते हैं।
- 1:12:52सारे हमारे 1000 पुस्त मैं हरिद्वार जाया करता हूँ।
- 1:12:56100 पुस्तों के नाम गिना देता हूँ इनका 100 पुस्तों में सो के पांच
- 1:13:04कोई नहीं। क्या ले के गए कुछ नहीं अगर एक
- 1:13:13पुस्त ने बोतल छू लिया तो कहते हैं सात पुसते हैं उसकी निहाल हो
- 1:13:20जाती है उसका कारण मैं बाद में बताऊँगा।
- 1:13:23थोड़ा सा लंबा प्रोसेसर हो जाएगा वीडियो पहले ही।
- 1:13:27लंबी हो गई है। कहाँ लेके जाओगे तुम कहाँ लेके
- 1:13:38जाओगे? गाँधी की इतनी बरतसना करके अभी
- 1:13:43खाली नहीं हुआ क्या ये चिन्ह प्रक्रिया योग कर दिया कर?
- 1:13:51क्रिया युग से सब निकल जाता है, इवैपरेट हो जाता है या थर से सो
- 1:13:55जाता है कोई और जुगाड़ बना लिया करो इनके पास ही चले जाओ पीएलआर
- 1:14:04में तुम्हारा अच्छे दिन खाली करवा देंगे।
- 1:14:07बात अचेतन की मन की बात है और बाबा नानक क्या कहते हैं?
- 1:14:12गुरुबाणी को मारने वालो दो शब्द दोहराने वालो बाबा क्या कहते हैं?
- 1:14:20मन में जो उलझा वो घर का गया। तुम मानते तो हो बाबा नानक को?
- 1:14:32लेकिन जानते कहाँ हो बाबा नानक को?
- 1:14:38सख्त में तुम शिष्य उस दिन हुए जीस दिन बाबा नानक को जान लिया।
- 1:14:41कहाँ से बोलते हैं वो उनका तल पहचान में आ गया।
- 1:14:48कृष्ण का तल जीस दिन पहचान में आएगा अष्टवकर का तल जीस दिन पहचान
- 1:14:53में आएगा कबीर का तल, नानक का तल जीस दिन पहचान में आएगा।
- 1:14:58उस दिन तुम्हें पता चलेगा वो हैं कौन?
- 1:15:01उससे पहले तो तुम सिर्फ थ्रोटी कर जानते हो यहाँ जन्म हुआ पिता का
- 1:15:07नाम ये था ये तुमने सब रट्टा फिगरेशन कर लिया है, लेकिन असल
- 1:15:12में वो क्या थे ये जो लबादा उड़ा हुआ था।
- 1:15:16क्या ये थे वो क्या वो ये था न हनते न हनते हनमानी शरीर कृष्ण
- 1:15:30कहते हैं तुम्हारा शरीर हमारे। इनका भी शरीर मरेगा तू अपना ने
- 1:15:38हनते हनुमानी शरीर है क्या नहीं हन्नता हाँ तुम्हारी तुम खोजो
- 1:15:44तुम्हारा स्वरूप तुम्हारी निजता तुम्हारा वो जिसमें मैं कहता हूँ
- 1:15:48जाकर तुम आसीन हो जाओ अपने आप में।
- 1:15:51सती प्रज्ञ हो जाओ, वह नहीं मरता मैं ना मरो मरा संसारा, ओहे मिला
- 1:15:58जिला बनहारा कबीर कहते हैं मुझे वह चीज़ मिल गई जो कभी मरती नहनते
- 1:16:04अनवाने शरीर। तुम बात मन की करती हो?
- 1:16:09पी एल आर पी एल आर में क्या होता है?
- 1:16:12क्यों बहक रहे हो छोड़ दो आज से ही ये लोग तुम्हें ऐसे गहरी खाई
- 1:16:17में ले जाएंगे जहाँ से न कोई निकालने वाला होगा और न तुम खुद
- 1:16:22निकल पाओगे। पी एल आर करना आज ही छोड़ो।
- 1:16:26मेरे पास पी एल आर करने वाले बहुत हैं, पागल हो के मरे हैं।
- 1:16:32आज भी मैं इलाज कर रहा हूँ। रेकी करने वाले खून के फौव्वारे
- 1:16:38छूट जाते हैं और मैं इनका इलाज करती हूँ।
- 1:16:45क्या है ये? लोगों को क्यों गुमराह कर रहा
- 1:16:51हूँ? पूरी की पूरी कथा इन मूर्खों से
- 1:16:58भरी पड़ी जानते कुछ नहीं जानते हैं तो थ्रोटिकल जानते हैं
- 1:17:03प्रैक्टिकल कोई भी नहीं। आओ तमन्ना तो तुम्हारी भीतर भी है
- 1:17:11उसको छूने, वो खुशबु को तुम भी मानना चाहते हो और बिटिया तुम कहा
- 1:17:16जाओगे मीना तुम्हारी कहा भागोगी सब जगह मुझे ही पाओगे।
- 1:17:27मुझे बाबा ने कहा हनुमान जी ने तुम जाओ, लेकिन जा न सकोगे और मैं
- 1:17:34जा भी नहीं सका वापस ही आना पड़ा चले जाओ वापस अपने घर जो मिलेगा
- 1:17:40घर मिलेगा वो घर पे ही मिला। तो मैं कहता हूँ बेटे तुम जाओगी
- 1:17:50कहाँ? भाग ये मन भागने को करता है क्यों
- 1:17:54इस मन की एक इच्छा है भेदरी वो पहचानो, भागो मत, कहाँ जाओगी,
- 1:18:02यहाँ मेरे पास आ जाओगी। कहीं और चली जाओगी, कहीं और चली
- 1:18:07जाओगी। ऐसे ही तो गुफाएं खुलती है।
- 1:18:12ऐसे ही तो गाँधी जी को तुम कह देते हो।
- 1:18:17मैंने कहा उसके ऊपर कोई ऐफ़ आई आर आश्रम के ऊपर तो पूरी छान।
- 1:18:25राम रहीम के ऊपर तो पूरी छान बना ली लेकिन बापू गाँधी को तो आज भी
- 1:18:29राष्ट्रपिता कहा जाता। महात्मा कहा जाता पूजे जाते हैं।
- 1:18:35जो पीड़ित था उसने ऐफ़ आई आर कराई उसने शिकायत की।
- 1:18:42मन्नू ने कहा, जब मैं सोती हूँ गाँधी के साथ, मुझे लगता है मैं
- 1:18:50अपनी माँ के साथ सोई हूँ और गाँधी मुझे माँ की तरह प्यार करता है,
- 1:18:55बुरा है क्या बच्चा नग्न होता है जब माँ से चिपक जाता है।
- 1:19:01और बच्चा नग्न होता है, नहीं तो कोई वस्त्र नहीं डालता।
- 1:19:04कोई पैंट कोट नहीं डाले होता। नग्न होता है जब माँ के पेट में
- 1:19:08होता है नग्नता से तुम इतना गुरेज़ क्यों करते हो?
- 1:19:12इतना परहेज़ क्यों करते हो? क्यों डरते हो तो तुम्हारी दमित
- 1:19:15आवाज सुनाई तो मैं डराती हूँ और यही जितेंद्र धर्मेंद्र बन के आती
- 1:19:20हूँ। छोड़ो इनको खाली करो, क्रियाएं
- 1:19:23करो मैंने एक बता रखा है ऊंचे ऊंचे श्वास लो ये निकल जाएगा
- 1:19:30कूड़ा कबाड़ा 1 दिन खाली हो जाओगे, राजपथ हो जाएगा तुम्हारी
- 1:19:34बुद्धि से लेकर तुम्हारे अंतरंग तक का तुम्हारे अस्तित्व तक का।
- 1:19:41मार्ग एक राजपथ बन जाएगा। तुम बड़ी आसानी से आजा सकते हो।
- 1:19:47क्या करोगी? पैसे कमा के कहाँ जाओगे बात कर
- 1:19:55जहाँ जाओगी वहाँ ये शोर मचाने वाला मन साथ जाएगा।
- 1:20:02तुम मुझे भूल गई क्या? शोर मचाने वाला मन साथ ले के गए?
- 1:20:07बुध भाग तो गए लेकिन शोर मचाने वाला जो शोर करता था वो मन तो साथ
- 1:20:14में गया। अजय रोट कर अब कहाँ जाइएगा अजय
- 1:20:32रोट कर अब। कहाँ जाइएगा जहाँ जाइएगा हमें
- 1:20:47पाइएगा सब जगह में। सर्वधर्म परतजमा में कम शरम, ब्रज
- 1:20:58हम तुम सर्वबा पे बे मोक्ष। पाइएगा कर अब कहाँ जाइएगा, कहाँ
- 1:21:25जाओगे? भागे नहीं मिलेगा कहीं वो?
- 1:21:30अगर यहाँ नहीं मिला तो कहीं भी नहीं मिलेगा और अगर कहीं मिल सकता
- 1:21:37है तो यहीं भी मिल सकता है तो पीएलआर वगैरह के लिए प्रश्न था
- 1:21:42बीच में छोड़ो। ये तुम इस नाटक में उलझ जाओगे।
- 1:21:48मैं ये नाटक देखे हैं। 2022 मिनट के मैं सारी सर्कस देखी
- 1:21:54और ये सर्कस है, आग लगेंगी। मुझे पता है और आग में सिर्फ।
- 1:22:04वही पत्ते जलते हैं जो पतझड़ में जड़ जाया करते हैं।
- 1:22:08नैनम चदंती शस्त्राणी नेनम धरती बाबा का जो इनका स्वरूप है ना,
- 1:22:13अंदर का वो नहीं चलेगा। बाबा भी कहते हैं, कबीर भी कहते
- 1:22:18हैं मैं ना मरूँ, मरे संसार। ना मैं जलूंगा, ना मैं मरूंगा, ना
- 1:22:23मैं कटूंगा ना मैं करूँगा ना मैं सूखूंगा ना मैं उड़ूंगा मोहे मिला
- 1:22:29जलावन हारा। मैं उस तत्व के पास पहुँच गया जो
- 1:22:33जीवन है। वहीं रुकी रहो वहीं मिलेगा।
- 1:22:44धन्यवाद।