Latest / Baba ji Vijay Vats / 1 Dec 25 - कैसे जाएँ गहरे ध्यान में? अनहद सुनने से मन के पार कैसे जाएँ? अध्यात्म का प्रैक्टिकल मार्ग! Baba Ji Vijay Vats Satsang
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- 0:04जो सोता नहीं, वह मुनि है और उस तक पहुंचना है, उसको स्मरण नहीं
- 0:14करना तुम्हारी पुरानी आदत। और आज तो लोगों में बस यही कुछ रह
- 0:22गया है। असुत्तों मुनि असुत्तों मुनि जाप
- 0:26करते रहो, नमो आरी हंथाण नमो सिद्धाण कर देओ, ये नहीं पता हरि
- 0:34हंतकुण थे ये नहीं पता सिद्ध कोण थे?
- 0:38नमो आहे रिया, नाम 9 ऐसे ही करते रहो बुधाई नम सिद्दाय नम ये करते
- 0:48रहो तुम बैठ कर लेकिन संत जो वहाँ पहुँच गया, वो कहते देखो इन मूड।
- 1:00छोड़ो इन पागलपनों को असल में बात ये है कि तुम्हारा कुछ तुम भूल गए
- 1:07हो तुम्हारा आपा तुम भूल गए हो अक्सर।
- 1:17बेहोश व्यक्ति के साथ ऐसा होता या जाम भी या व्यक्ति के साथ ऐसा
- 1:24होता जो उस तल पर गया हुआ व्यक्ति मद होशी के आलम में खाया, उसके
- 1:31साथ भी ऐसा हो जाता। आइंस्टाइन जा रही हैं।
- 1:37एक कार में घर जाना रास्ते में टैक्सी को हार दिया, वहाँ पर बैठ
- 1:53गए चला टैक्सी वाला। अब वो आवाज दे रहा था साउथ वेस्ट
- 2:01साउथ वेस्ट ऐसे ही कर रहा था जहाँ जाना तो आइंस्टीन पे बैठ के थोड़ी
- 2:07दूर चला, आध घंटा सारा हो गया तो आइंस्टीन को याद आया मैंने जाना
- 2:14कहाँ है। कितना समझदार व्यक्ति हूँ मैं
- 2:22नहीं जाना कहाँ है? उसने पूछा ड्राइवर से अरे भाई,
- 2:28बात सुन तुम कहाँ चले? कहते कि मैं तो साउथ वेस्ट जहाँ
- 2:36जाना। था क्या?
- 2:39तुम्हें मेरा घर पता है, खुद भूल गया हूँ ऐसे ही तुम अपना घर भूल
- 2:47गया हो होता है ऐसा भाई। इत्तेफ़ाक से को कोई नहीं जानता
- 3:04वो कितना गुरुदेव मैं आपको जानता हूँ आपका घर भी जानता हूँ पहुंचा
- 3:08दूंगा मैं आपको ओके सर, मैं भूल गया था।
- 3:17दुनिया को इतना शानदार तोहफा देके जाने वाला इज़ इक्वल टु एम सी
- 3:21स्केयर, जिसने दुनिया पलट दी एटम बम्ब बनाने में दो कारगर।
- 3:36एक ट्रैन में बैठ गए टिकट तो ले ली, ईमानदार बन्दे से टिकट ले ली,
- 3:46ट्रेन आ गई, बैठ गए। टिकट जा रही है और टीटी भी आ गया।
- 3:52टिकट चेक कर तो टिकट चेक कर ने ट्रैन टिकट चेक कर ने पूछा मिस्टर
- 4:07टिकट लगा कोर्ट में? पैंट में सारे हाथ उसमें नहीं
- 4:13मिले? माथे पे पसीना आ गया सर्दी के
- 4:19वक्त पे माथे पे पसीना सिनसियर मिलती थी नामी गर्म ही था उसकी
- 4:27घबराहट देखकर कीर्ति से ने कहा घबराओ मत।
- 4:32मैं जानता हूँ तुम ईमानदार आदमी हो टिकटली होगी कहीं गुम हो गई
- 4:38लेकिन वो फिर भी देखता रहा टिटी सारी गाड़ी को चेक करके वापस आ
- 4:44गया। वापस आता देखा तो आई थिंक अभी भी
- 4:48टिकट को ढूंढ रहा था। तो टिकट चेक करने का प्रभु ऐसा भी
- 4:58मत करो मेरा तो ये काम है मेरे तो ये ड्यूटी है मैंने पूछ लिया टिकट
- 5:05कहाँ है तुम मत ढूंढो अब ठीक हो गई खो गई।
- 5:11इतना पक्का है तुमने खरीदी तो होगी वो कहते नहीं ऐसा कोई मसला
- 5:17नहीं है और फिर क्या मसला है? मसला तो ये है टिकट के बिना मुझे
- 5:23पता कैसे चलेगा कि मैंने जाना कहाँ है?
- 5:29अब जहाँ जाना वहाँ की टिकट ली है ना मैंने गिद्दड़बाह जाना तो
- 5:33गिद्दड़बाह की टिकट लूँगा, मैं टिकट इसलिए देख रहा हूँ मुझे टिकट
- 5:39से ही तो पता चलेगा कहाँ? की कृति है तो मदहोशी बेहोशी का
- 5:45आलम आता जाता रहता है। तुम भूल गए उसे याद करना है।
- 5:52इतनी सी बात है ये सारा दो शब्दों में अध्यात्म पिरो लिया गया कि
- 5:59तुम कुछ भूल गए हो, आनंद को भूल गए हो और उस आनंद को भूलने के
- 6:05कारण तुम दुखी हो। सीधा सीधा सा कारण।
- 6:09और तुम उस आनंद की तलाश में हो उसे ढूंढ रहे हो इतनी बात ने
- 6:14कितना बकीरा खड़ा करो, सो सो मंजिलें मरते मरने लगी कंप्यूटरों
- 6:20का जन्म हुआ, कॉम्पिटिशन बढ़ता चला गया।
- 6:26बात कहीं से कहीं चली गई। बात इतनी सी थी कि तुम भूल गए थे
- 6:31कि तुमने जाना कहाँ टिकट टिकट को आज तक ढूंढ रहा है।
- 6:39आइंस्टी जाना कहाँ है पता नहीं तुम आइंस्टी नहीं हो।
- 6:48तुम अपने घर का पता भूल गया, इतनी सी बात का अध्यात्म कितना नाजायज़
- 6:57फायदा उठाते हैं ये लोग भी लोग दुष्ट ये पखंडी।
- 7:03ये लाल की लोभी शिव पर लगाते हैं आओ तुम्हें दिखाएं ऐसा करो राधे
- 7:13राधे करते रहो तुम भी समझ के देखो राधे राधे करने से याद आ जाएगा।
- 7:23हम्म तुम कहीं चाबी रख के भूल गए राधे राधे करते रहो या चाबी चाबी
- 7:30करते रहो मिल जाएगी, मिल जाएगी ज्यादा संभावना है कि तुम शांत
- 7:40होके बैठ जाओ खाली लम्हों में जब। मन बिल्कुल फ्रेश होगा तो तुम्हें
- 7:45याद आ जाएगा। ओहो मैंने कनस के ऊपर रखी थी,
- 7:51समझा के उठा लो या ढूंढ़ते ढूंढ़ते उस चीज़ को ढूंढ़ो जीसको
- 7:57ढूंढ़ते हो। इन टेंशन को मोडो नहीं
- 8:01राजनीतिज्ञों की तरह के इलेक्शन जीतना तो बम विस्फोट करा दो ताकि
- 8:10तुम इलेक्शन के बारे में तो भूल जाओ और जो 9 दमाचौकड़ी मचानी वो
- 8:15मचा ले। तुमने ध्यान को डाइवर्ट किया यह
- 8:21शरण तुम्हारे गुरु की अगर कोई साफ सुथरा बंदा आके जिसने कोई लाग
- 8:28देगा नहीं। जिसने जान लिया वह बेलाग हो गया।
- 8:33नृलिप्ति जिसे कहते हैं। तो ये मूड लोग ये इनका कुछ नहीं
- 8:41तो स्वार्थ है। जानते ये हैं नहीं, ये भी अपने आप
- 8:46को भूले हुए हैं। सबका एक ही हीरो है सबका एक ही
- 8:53रोग है दो बहरे गए थे सब्जी मंडी में।
- 8:58एक बहरा और दूसरा बहरा बचपन से जानकारते बूढ़े हो गए।
- 9:03दोनों को सुनना बंद हो गया। कम सुन्दर अब ऐसे लोगों को बूढ़ों
- 9:10को सब्जी लेने, बच्चों को स्कूल में छोड़ने ऐसे छोटे मोटे कामों
- 9:15में। लगा देते हैं बाल बच्चे चलो जीरा
- 9:18वीरा का घर का काम भी हो जाएगा तो सब्जी लेने गया है एक लेके सब्जी
- 9:25वापस आ रहा है एक सब्जी लेने जा रहा है औपचारिकता भी तो होती है।
- 9:33तो एक बूढ़े ने दूसरे बूढ़े से पूछ लिया उम्र दोनों की 8090 के
- 9:38करीब है तो तू घिस गया ही नहीं है सारे कबाड़े में फेंकने जो हो गया
- 9:44है माल तो एक पूछता है दूसरे से। क्या हाल चाल है दूसरे को सुनता
- 9:57तो है नहीं न तो उसको सुनता है जिसने पूछा न उसको सुनता है।
- 10:03जीस से पूछा कित्ता क्या हाल चाल है?
- 10:09अब वो सब्जी मंडी से बैंकण लेकर आया।
- 10:13वो कहते बैंगण ले के आए उन बैंगण वो उसको भी नहीं सुनते वो कहते और
- 10:23बाल बच्चों का क्या हाल है, सुनता उसे है नहीं।
- 10:31किसी ने जवाब क्या दिया? बस एक फर मल्टी निभानी जैसे तुम
- 10:37निभाते हो, बस कोई आ गया, हाथ मिला लिया, किसने मिलाया?
- 10:41पता नहीं बाल बच्चों का क्या हाल है उसने तो कही भी।
- 10:49ये बैंगन लेके आए इसी के बारे में पूछता कहते भून भून के खाएंगे?
- 11:00अब इन्हें पता नहीं है कि तुम्हारी इच्छा भी गुम हो गई है।
- 11:07इनकी भी चाभी गुम हो गई है। पहरे ये हैं बहरे, तुम हो।
- 11:16लोभी गुरु लालची चेला दोनों नरक में ठेलम ठेला लोभी गुरु लालची
- 11:24चेला दोनों नरक में ठेलम ठेला दोनों को आनंद नहीं मिलता।
- 11:32नर्क में तुम ठेला मठेला होते रहते हो कोई चोद में पड़ाव में
- 11:38फंसा है सचखंड के कोई सोल में फंसा है मैं तो भाई इसलिए निकला
- 11:46ही नहीं। किसी भी सचखंड में क्यों फंसू?
- 11:50मैं धरा पे ही अच्छा हूँ यहाँ फसना फसाना होता नहीं इसलिए मैं
- 11:58किसी सच्च खंड की यात्रा पे निकला नहीं, क्योंकि मैं असली सच्च खंड
- 12:05की यात्रा को जानता हूँ जो अपने अंत में होती है।
- 12:09सच कंड हमारे भीतर है और अब तो मैं जीते जी सिखाऊंगा सच कंड
- 12:15मोक्ष द्वार इसी को कहता हूँ मैं तुम ही हो मोक्ष के द्वार सच कंड
- 12:22भीतर है नरक भी तुम्हारा भीतर जब तुम दुखी होते हो मन।
- 12:27स्वर्ग भी तुम्हारे भीतर जब तुम प्रसन्न होते हो मन ये सभी चीजें
- 12:32तुम्हारे भीतर मौजूद हैं। सत्य भी तुम्हारे भीतर है।
- 12:39असतो मा सदगा मैं इस संसार के असत्य से मुझे सत्य की तरफ ले जा
- 12:46ही। तमसो मा ज्योतिर्गमय इस अन्धकार
- 12:51से जब मैं भटक गया हूँ, मुझे ज्योति की तरफ़ ले जाओ और ज्योति
- 12:55भीतर है। तमस बाहर है, असतो मा सतज्ञ में
- 13:03है, असत्य बाहर है। सत्य भीतर है सत्य की ओर ले चल
- 13:11ऋषि प्रार्थना करता है परमात्मस मैं तो।
- 13:15हार गया मैं तो तून संग। नैन मिला के हार गई, सजना हाँ हार
- 13:39गई सजना। मैं तो तुम संग नैन मिला के हार
- 13:54गई, सजना हाँ हार गई। से जीना असुतो।
- 14:11मुनि जो मन से पार हो गया वह सोता।
- 14:18नहीं फिर। मूडों का जन्म हुआ मूड कहते हैं,
- 14:26कम से कम 100। क्वांटिटेटिव सो क्वांटिटेटिव मत
- 14:32सो मात्रात्मक रूप में मत सो गुणात्मक रूप में सो ख्वाव तो में
- 14:38सिखाते हैं 10 घंटे मत सो और आइंस्टीन 10 घंटे सो।
- 14:45और दिन में भी कभी कभी झपके ले लेते थे और दुनिया का सर्वश्रेष्ठ
- 14:52खोज करके गए हैं क्यों सोने के कारण।
- 15:03इन दुष्टों ने तुम्हारी नींद छीन ली।
- 15:06रात को 1:30 बजे स्वामी जी कुंज केले की करेंगे प्रस्थान वहाँ पर
- 15:12दर्शन कर लो पंच भौतिक शरीर के क्यों भाई मिट्टी नहीं देखी, पानी
- 15:18नहीं देखा, वायु नहीं देखी, आकाश नहीं देखा।
- 15:23या अग्नि नहीं देखी? कौन सा तत्व तुमने नहीं देखा?
- 15:27उन्हें पांच तत्वों से तो बना हुआ है।
- 15:30आत्मा दिखती नहीं, चक्कर दिखते नहीं, कुंडल नहीं दिखती, नहीं फिर
- 15:39तुम देखने के आगे हो। ये भरमाते हैं तुम्हें, आज नहीं
- 15:46कल तुम्हें कुछ मिलेगा ना, यही पैमान है यही पैमाना है।
- 16:01बड़े ब्यावर होकर तरे कोचे से हम निकले,
- 16:16अदम का सुनते आए थे निकलना वहिष्ण से लेखन।
- 16:22कदम का सुनते आये थे निकलना बहिष्य से लेकिन बड़े ब्यावर होकर
- 16:29तरे कूचे से हम निकले कोई हाल है चारों तरफ आग मची पाखंड है हर
- 16:40तरफ। लोह हो तो ठीक है तुम्हारा आनंद
- 16:48वह पाने का फर्क, लेकिन आनंद के लोह के कारण तुम कहाँ कहाँ फंस गए
- 16:56हो। धन जुटाने में लग गए, पदवीया
- 17:00जुटाने में लग गए, मान प्रतिष्ठा जुटाने में लग गए, नाम कमाने में
- 17:05लग गए, डिग्रीज़ कमाने में लग गए, बड़े बड़े कमाने में लग गए, पैसा
- 17:11कमाने में लग गए और कुछ नहीं तो बच्चे कमाने में लग गए।
- 17:18स्त्री पुरुष को माने में लग गए सारी ज़िन्दगी बीत।
- 17:27गई सारी उम्र गँवा ले, तू जिंदड़ी ये।
- 17:3810 की जहान वी चु खटिया सारी उम्र गवाले तुम ज़िन्दगी है 10 की
- 17:48जहान, वी चु खटिया पूरी ज़िन्दगी। तुमने कमा ली।
- 17:55कोई आनंद की बूंद कभी छलके और घर से तो तुम आनंद की तलाश में निकले
- 18:06थे। रहा में ये राधे राधे राम राम
- 18:12जपने वाले मिल गए घर से तो? घर।
- 18:16से तो हम चले थे। खुशी की तलाश में खुशी की तलाश।
- 18:33आंसू में गम था। दुख सा दर्द था, तनाव था, चिंताएँ
- 18:43थीं, चिंताएँ थीं। इनसे कैसे मुक्त हो जाऊं उसके लिए
- 18:50चले थे। गुरु ने कहा स्मरण करो तुम रास्ता
- 18:55भटक गए हो, तुम अपने आप का ठिकाना ठोर ठिकाना भूल गए हो तुम ही हो
- 19:02आनंद गुरु ने सही बताया। गम राह में।
- 19:11खड़े थे। रास्ते में दुष्ट पड़े थे राधे
- 19:17राधे जगते रहो वो ही। साथ हो लिए।
- 19:24वो ही संगोली। खुद दिल से दिल की बात कही और रो
- 19:37लिए यूँ हसरतों के दाग। मोहब्बत में धो लिए खोज दिल से
- 19:54दिल की बात कही और रो लिए। घर से तो हम चले थे खुशी की तलाश
- 20:07में बिलकुल यही यही लक्ष्य तुम्हारा जहाँ आनंद न मिले, भाग
- 20:16जाना तुमने स्मरण करना है सुमरण नहीं करना है।
- 20:24तुमने आनंदित होना है रीपेटिशन नहीं करना है तुमने जान ना मैं
- 20:32कौन मैं ही आनंद हूँ आनंद आनंद आनंद अहम ब्रह्मस्म का जाप नहीं
- 20:40करना डूना ट्रिब्यूट। इससे नहीं मिलेगा।
- 20:44खुद खुद के पास जाना तो खुद के पास जाना होगा।
- 20:54पानी पीने से प्यास बुझती पानी पानी कहने से प्यास नहीं बुझती।
- 21:01खाना खाने से भूख मिलती खाना खाना कहने से रिपीट करने से भूख नहीं
- 21:07मिलती राधे राधे कहने से आनंद नहीं मिलता?
- 21:17लेकिन दुष्ट राह में खड़े थे, वो ही संग हो लिए।
- 21:21घर से तो हम चले थे खुशी के तलाश में तुम्हारी तलाश तो बिलकुल ठीक
- 21:26थी, दुखी थे, कहीं चैन न था, सुकून न था, सरोर न था, अनंत न था
- 21:33इस दुख के कारण घर से चले तो देखें।
- 21:37खोजें कहाँ आनंद है और दुष्ट राह में खड़े थे कहते राधे राधे करते
- 21:42हो तुम भी क्या करो जब एक नहीं दो नहीं पांच तुम मेम नाम ले के चले
- 21:55हो? ये कहते हैं ये तो कुत्ता है, तुम
- 22:01छोड़ के भाग जाते हो ये मैं बना खा लेते हैं ऐसा कुछ है सस्ता
- 22:08बाकी तुम लगा लो, मैं थोड़ा सा कम हिसाब अब जानता हूँ असुतों में।
- 22:19जब तुम उस मुन्नी के पास मन से बाहर पहुँच जाओगे तो तुम पाओगे कि
- 22:25वह कभी सोता नहीं रात भर दिन भर वह जगता है।
- 22:31श्री कृष्ण ने लक्षण बताए जागे हुए आदमी।
- 22:36वैसे ही महावीर ने इलेक्शन बताया मुनि का मुनि कभी सोता नहीं लेकिन
- 22:46यह ना जानने वाले अनुभव तक ना पहुंचने वाले लोग लोगों ने
- 22:50तुम्हें बहका दिया है। फिर इन्होंने संतो के शब्दों का
- 22:57बुद्धि से विवेचना करना शुरू कर दिया।
- 23:00वो गलत था। पानी पीने से आनंद मिलता है, यह
- 23:06पीकर ही तो पता चलेगा किसी के कहने से तो तुम फीड कर सकोगे।
- 23:14इस सूचना को के पानी पीने से प्यास बुझ जाती किसी की बात मानने
- 23:21से तो तुम इस सूचना को फीड करोगे, अपने न्यूरॉन में के पानी पीने
- 23:28से। क्या समट जाती है भोजन खाने से
- 23:31भूख मच जाती है यह अपने नूरोस में तुम सूचना फिट करे बैठे हो सारे
- 23:37शास्त्र सारे वेद, पुराण, कुरान, बाइबल, ग्रंथ गीता सब सूचनाएं हैं
- 23:43ये तुम भरे बैठे हो कुपड़े को क्या ये ज्ञान है?
- 23:49सूचना ज्ञान नहीं होता भाई ज्ञान तो ये है हमें थ्योरी भी पढ़ाई
- 23:57जाती थी। थ्योरी के बाद प्रैक्टिकल कराया
- 24:00जाता कि चलो तुम्हें मिला के दिखाएं।
- 24:03कौन से तत्व में कौन सा तत्व मिलता, क्या बन जाता?
- 24:07केमिकल रिएक्शन्स हौ इट हैप्पेन्स ये बताए तुम्हें तो प्रैक्टिकल भी
- 24:13होता था तो मैंने पूछा प्रैक्टिकल की क्या आवश्यकता?
- 24:18कहते थियरी की तो कोई आवश्यकता नहीं वैसे देखा जाए, असल में तो
- 24:22प्रैक्टिकल ही की तो आवश्यकता है। शस्त्र तो अगर न भी हो तो चल
- 24:28जायेगा, सिर्फ तुम्हें प्रैक्टिकल करवा दें।
- 24:34समझा दें कि देखो भाई ये फलां साल्ट है और इसमें फलां तेजाब में
- 24:42ला दिया। और यह फलां चीज़ बन गई या
- 24:48प्रैक्टिकल ही समझा दें तो काफी थ्योरी की वैसे कोई ज्यादा जरूरत
- 24:53भी नहीं, लेकिन तुम सिर्फ थ्योरी ही थ्योरी पढ़े जाते हो।
- 24:59शास्त्री ही शास्त्र पढ़े जाते हो, अनुभव में कभी उतरते नहीं
- 25:04हैं। जब अनुभव में उतरने की मैं बात
- 25:07करता हूँ तो तुम कोई ना कोई प्रश्न खड़ा कर सकते हो, फिर मैं
- 25:12पूछ लेता हूँ क्या बात अभी अपने भीतर उतरने की इच्छा नहीं है?
- 25:17क्या नहीं जन्मा है क्या भीतर से प्यास नहीं जगी है?
- 25:24भूख नहीं लगी है तो भाई किसी गुरु के पास चले जाओ, मेरे पास काहे आए
- 25:29हो? मुझे वो चाहिए जिन्हें प्यास लगी
- 25:35हो और तीव्र प्यास लगे हो और इतना प्यास लगा हो जैसे सिकंदर ने कहा
- 25:41कि सारा राज्य दे दूंगा बस प्यास। मटा दो।
- 25:46वही मैं कहता हूँ जब तक तुम गंगा हो कर भी जैसे रह जाओ, इसका मतलब
- 25:55क्या है पता है तुम्हारा खोपड़ा भर गया तुमने समझा मैं गंगा हो
- 26:00के। लेकिन तुम अपने अंतरस में जहाँ रस
- 26:06है वहाँ गए, नहीं तो प्यासे ही रहोगे।
- 26:10खोपड़े को भर लेने से कभी प्यास खत्म होती है, कभी प्यास बुझी है?
- 26:16खोपड़े को कितना ही भर लो। व्यास मुकेगी कैसे बुझेगी कैसे?
- 26:23उसके पास जाने से सूचनाएं जुटाने से नहीं उसके पास जाने से उसको
- 26:31पीने से जहाँ पानी है। महंगोरी तू सन महंगोरी तू कन तू
- 26:53हमारा आ। आ मैं गोरी तू कन तू हमारा, मैं
- 27:11नदिया तू मेरा किनारा। मैं गोरी तू कंत हमारा, मैं गंगा
- 27:25तू मेरा किनारा अंग लगालो प्यास बुझा दो।
- 27:36अंग लगाओ प्यास बुझाओ गंगा हो कर प्यासी हो मैं मन की प्यास।
- 27:56बोझाने आई मन की प्यास बोझाने आई अंत से घट तक प्यास सी हो मैं।
- 28:14तो है मेरा प्रेम देवता। असुत्व में उसके पास पहुँच जाओ जो
- 28:26कभी सोता नहीं वो कहाँ मिलेगा मन से पार मिलेगा।
- 28:33जब तक मन में उलझे हो, वह नहीं मिलेगा, जो कभी सोता है और हमारी
- 28:40मंजल वह जहाँ तुम सोते नहीं जाता, जागरण करवाना नहीं है।
- 28:52उस तत्व के पास जाना है जो दिन भर रात जगता रहता है उस जागरण के पास
- 29:00जाना है, जागरण कराके माँ माँ करके रात को भौंकना नहीं है।
- 29:11उस जागरण के पास जाना जो दिन भर रात सोता है एक दिया मेरे प्राण
- 29:17वस्त है क्या दिवस कह रहे है और वह जागरण मिलेगा कैसे अशुत तो
- 29:23मुनि मन से पार होकर वह जागरण में।
- 29:28मन से पार कैसे हो जाए? अपने अंत में उतर जाओ, धीरे धीरे
- 29:32मन से दूरी होती चली जाएगी और फिर मन से पार हो जाओगे।
- 29:36उसकी। सीमा लांघ जाओगी सीता सीता सरल
- 29:40उपाय बता रहा हूँ मन से पार, जो हुआ वो जगह।
- 29:48जागरण के पास पहुंचा, वह कभी सोयेगा नहीं, मन से पार होगे
- 29:55कैसे? अपने अंत में उतरो, बाहर की सारी
- 29:57शक्ति को समेटो अपने अंत में उतरो, जैसे भीतर चलते जाओगे।
- 30:06फासला बढ़ता जाएगा तुम में और तुम्हारी बुद्धि में बुद्धि अड़चन
- 30:11है, सूचनाओं का भंडार पड़ा है लेकिन सुख नहीं देता, आनंद नहीं
- 30:17देता, काम चलाऊ यंत्र है। जीवन यापन के काम तो आता है लेकिन
- 30:24आनंद महिया नहीं कर पा सकता। यही इसकी कमी है कि यह आनंद नहीं
- 30:37दे सकता सूचना दे सकता है तो कैसे मिलेगा?
- 30:44कैसे जाए? उस तत्व तक यों सोता नहीं और जो
- 30:48तुम हो तुम अपने भीतर हो तो बाहर से सारी शक्तियां को एकत्रित करके
- 31:00शक्तियां को गंवाना बंद करो। अपने भीतर फासला बढ़ता जाएगा तुम
- 31:08में और यह बकवास करने वाले मन में 1 दिन तुम उसके करीब पहुँच जाओगे,
- 31:20जो तल बोलता ही नहीं। जो तल मौन में समाया रहता, आनंद
- 31:27का रस्मान करता रहता तुम्हारी वो मंजिल है तुमने वहाँ जाना है
- 31:35जाओबे कैसे? सारी शक्ति को एकत्रित करके अपने
- 31:42भीतर उतरना शुरू हो जाओ। अगर अनहद नाद जग गया है तो उसका
- 31:49धागा थाम नीचे नीचे उतरते जाओ उसका सहारा दिखो, एक वक्त आएगा जब
- 31:56तुम बहुत दूर निकल जाओगे तुम्हें। बाहर की आवाज़ वर्दी की आवाज़ भी
- 32:02ना सुने। यह अनस्ट्रिक्टेड साउंड्स में
- 32:07वहाँ ली जाती है, जहाँ पर मन है, जहाँ ज़रा भी खटका है पिन ड्रॉक्स
- 32:16साइलेंट। वहाँ पहुंचना है चिल्लाना नहीं,
- 32:25ना मामा करना, ना राधे राधे करना, ना राम राम करना, यह चिल्लाना है
- 32:30शब्द चिल्लाना है, कुछ भी हो तुमने वहाँ जाना।
- 32:37जहाँ शब्द नहीं शब्दातीत अखरा नालों बखर, जेड़ा बियॉन्ड वर्क्स
- 32:50वहाँ आनंद है वहाँ तुम हो वहाँ आनंद का सागर है।
- 32:59अशुतत्व मन उस सतत्व के पास चले जाओ जो सोता और जाओगे कैसे इस मन
- 33:14को छोड़ दो? इस संबंध से दूर चलो तेरी।
- 33:23धोनी आ से हो के मजबूर। ओर चला।
- 33:39मैं बहुत दूँ। बहुत दूँ बहुत दूँ चला।
- 33:54तेरी ही दुनिया। से जब इसने सुख न दिया तो छोड़
- 34:02दो, तेरी दुनिया से हो के मजबूर में चला आनंद मिला, सूचनाएं मिल
- 34:09गई, आनंद न मिला। पहले करके देख लो नहीं तो मन बार
- 34:20बार छिटके का पीछे फिर देखेगा कहीं ऐसा तो नहीं?
- 34:29जीस मकान को हम छोड़ आये जीस में पुलिस हम उठाये उस में आनंद।
- 34:34हो हर कदम पे उन्हें मुड़ के देखा।
- 34:53हर कदम पे ने मुड़ के देखा उनकी महफिल से हम उठ तो।
- 35:10आए उनकी। महफिल से हम अब तो आए ऐसा नहीं
- 35:17करना है। राधे राधे करके देख लो राम राम
- 35:22करके देख लो पांच नाम जबके देख लो जो तुम्हें पांच नाम देते हैं
- 35:27आनंद तो अभी उनको मिलो। जदा कदा मेरे पास ऐसे लोग आते
- 35:34रहते हैं जो दुनिया में प्रचारित करते हैं कि आनंद कैसे मिले, मेरे
- 35:40पास आकर पूछते चले जाते हैं फार्मूला क्या है?
- 35:45कैसे उतरें रोज़ का सवाल? रोज़ का पाठ्यक्रम मुझसे लेके
- 35:49जाता है अब क्या बात करूँ, मिला तो उन्हें भी नहीं सच में अगर वो
- 36:00अपनी आत्मा के साथ सच्चे हैं तो वो जब भीतर जाएंगे तो पाएंगे।
- 36:07नहीं, कुछ नहीं मिला गए ही नहीं गए।
- 36:12कब पहले कॉम्पिटिशन लड़ा, आईएस किया, यही जुनून था, कॉम्पिटिशन
- 36:21पास हो गया, फिर नौकरी मिली, कुर्सी मिली।
- 36:26लेकिन मन लो भी मन लालची मन, चंचल मन चोर मन के मधे न चा लिए पलक
- 36:33पलक मन और मन कहने लगा उधर ठीक है काम अपने पास अपने पास, वह कब लगी
- 36:41तो बहुत है। उधर पांव छूने वाले बहुत हैं यहाँ
- 36:47करोड़ों लाखों की संख्या आनंद की तलाश में फिर रही आयश तो कोई कोई
- 36:52बनता है भाई कौन बनता है? थोड़ी सी वेकेंसी होते हैं, उधर
- 37:02ज्यादा? अपॉर्चुनिटीज़ हैं, संभव नहीं
- 37:07जाता है पोटेंशिअलिटी जाता है तो चलो उधर चलो खाली लम्हें तुम्हें
- 37:14कब मिले और खाली लम्हों के बिना भीतर उतरा नहीं जाता।
- 37:21यह मूल हो तो सूत्र है इसे परो लेना येस इसे सर्कल में देखो,
- 37:30खाली लम्हों के बिना वो मिलता नहीं क्योंकि जब तुम खाली नहीं
- 37:37होते हो तब तुम बेसी होते हो। और विजीनेस में वो उतरता नहीं है,
- 37:43तो बताओ तुम खाली कब थे? कब तुम अपने अंत से गए?
- 37:49यह मन बड़ा जबरदस्त एक जाल है। इस मन को समझना आसान है क्या?
- 37:59लेकिन मैं लो। भंसा गया।
- 38:01इतना भक्का ब्लरी और तू यहाँ थोड़ी सी तनखा का कोई तो तेरा बॉस
- 38:07है वहाँ तेरा कोई बॉस नहीं होगा चल है मेरे दिल कहीं।
- 38:13और चल। गम की।
- 38:17दुनिया से दिल भर गया। ढूंढ।
- 38:21ले अब कोई। घर में यार उधर बोलिए दे दो पांच
- 38:27ना बड़ा आसान काम कोई आय ऐसे नहीं करना पड़ेगा।
- 38:32कोई कॉम्पिटिशन नहीं करना पड़ेगा। पूजे जाओगे क्या?
- 38:35क्या खिताब मिलेंगे तुम्हें आनंद आ जाएगा।
- 38:52क्या पानी चले थे, कहाँ भटक गए, क्या मिला?
- 39:02अंत में जड़म से घर पड़ो एक जिंदगी और बेकार हो गई।
- 39:10एक जनम और गया बहुत जनम बीते मेरे माथो में जनम तुम्हारे लेख लेकिन
- 39:20ये जन्म भी कहाँ लेखे लगा कहीं ना कहीं उलझ गए।
- 39:25पांच नाम में उलझ गए 1000 नाम में उलझ गए।
- 39:29राम राम में उलझ गए। कृष्ण कृष्ण में उलझ गए कोई देवी
- 39:37देवताओं में उलझ गया कोई भूत प्रेत में चिन्ह में उलझ गया कोई
- 39:43धन में उलझ गया कोई पदवी में उलझ गया उलझने ही उलझने हैं यहाँ।
- 39:49सुलझाव तो एक ही जगह पे है अपने भीतर जाके मिलता है समाधान जिसे
- 39:55समाधि कहते हैं वहाँ उतर जाओ और कहीं न जाओ छोड़ो इनकी बातें कल
- 40:07की बात पुरानी। नए दौर से लिखेंगे हम मिलकर नई
- 40:16कहानी तुम्हें चाहिए आनंद तुम्हें दे दिया गया राधा नाम।
- 40:31तुम्हें चाहिए आनंद तुम्हें दे दिए गए पांच नाम बड़ा धोखा है ये
- 40:38खुद ही धोखा खाये हुए लोग खुद से धोखा हुआ बदला ले रही पीड़ा है।
- 40:51खुद धोखा खाई अब दूसरों को जब तक पीड़ा ना दे लूँ, आनंद नहीं आता
- 41:01है। ये अहिंसक लोग नहीं हैं, ये हिंसक
- 41:06लोग हैं, इनके साथ हिंसा हुई है। तो फिर आगे तुम्हारे से हिंसा
- 41:13करेंगे तो बराबर हो जाएगा मसला ऐसा है आज का ज़माना सतयुग शुरू
- 41:24हो चुका है। मेरी बातों को ध्यान से सुनें।
- 41:32इसमें कोई लाग लपेट में शुद्ध बोलता हूँ।
- 41:36शुद्ध खत्म, शुद्ध ही शुद्ध है, चारों तरफ शुद्ध ही में ही समा
- 41:43जाता हूँ। शुद्धता में ही निर्वहन है मेरा
- 41:49शुद्ध आचरण शुद्ध व्यवहार शुद्ध आहार शुद्ध ही आपसे बताता हूँ
- 42:00निषय पाप हूँ निषय कम हूँ। आनंद हूँ आनंद हूँ खजाना हूँ
- 42:10मस्ती का आलम हूँ हर वक्त पिया रहता हूँ शिबो।
- 42:18हम शिबो। शिव हम शिव, हम शिव, हम शिव, हम।
- 42:42अमर आत्मा सच्चिदानंद में शिव, हम शिवम् शिवम्।
- 43:00हमारी आत्मा सच्चिदानंद, मैं हूँ शिवम्, शिवम् शिवम्।
- 43:27धन्यवाद।