Latest / Baba ji Vijay Vats / 28 Feb 26 - चेतना का स्वयंभू स्वरूप और देव, पितृ, मातृ के ऋणों का विश्लेषण। 'ऋण' और 'कर्तव्य' का अंतर।
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- 0:11बाबा जी प्राण आज मुझे अकसमात यह दिख रहा है कि मैं सिर्फ एक पुत्र
- 0:26नहीं हूँ, एक कर्जदार हूँ। क्योंकि पुत्र को पालन पोषण,
- 0:38नहलाना धुलाना जब तक कि वह अपनी सुरती संभालने का जोक नहीं होता,
- 0:46उसके ऊपर किसी न किसी। व्यक्ति का कर्ज होता है उसको
- 0:55बड़ा करने है तो उसको पालन पोषण करने है तो लेकिन एक हमारे भीतर
- 1:06का तत्व भी है। जो कि कर्जदार नहीं है, हमारा ये
- 1:16शरीर कर्जदार है। प्रश्न लम्बा है, पुत्र, आइए हम
- 1:24यहाँ तक ही इसको सॉल्व करते हैं। तीन प्रकार के ऋण होते हैं प्रथम
- 1:37ऋण होता है माता पिता को दूसरा ऋण होता है।
- 1:47देव का पितृ देव का और तीसरा ऋण होता है परमात्मक देवरण पितृ ऋण
- 2:01मातृ पितृ ऋण। लेकिन भीतर का वो तत्व, उसके ऊपर
- 2:17किसी का कोई कर्ज नहीं, वह स्वयंभू है।
- 2:25उसको ना किसी ने जन्मा ना किसी ने पालनपोषण किया।
- 2:32ना उसको जीवित रहने के लिए कोई ईंधन की जरूरत है, ना उसे पालन
- 2:39पोषण की आवश्यकता है, ना ही उसे कोई पहरेदार चौकीदार की जरूरत
- 2:48पड़ती है। पूछा है कि हमारा कर्तव्य क्या?
- 2:58अब थोड़ा सा बात गहरी आ गई, शायद तुम्हें पता नहीं तुमने।
- 3:11एक प्रश्न पूछकर सृष्टि के बहुत से प्रश्न पूछ लिए, जो गहरे गर्व
- 3:23में छुपे हो गए। बच्चे दो प्रकार से पैदा होते हैं
- 3:39एक पैदा होते हैं संयोग से बस यु ही अक्षमा माता पिता आनंद ले रहे
- 3:55थे और तुम टप कपड़े। फिर जैसी नीयत से बच्चा पैदा किया
- 4:04जाता है यथा नीतम तथा मरादम वैसे ही मराद होते हैं, लेकिन यहाँ पर
- 4:15मामला खत्म नहीं होता। तुम जन्म कैसे भी ले लिया हो?
- 4:27गर्भ में आने के उपरांत माता निक में सभरत है।
- 4:38माता पिता ने तुम्हारा मलम मूत्र अस्नान शिक्षा व्यवस्था की तो है
- 4:50थोड़ी सी गहरी बात समझ लो। माँ बाप अगर बच्चे पैदा करता है
- 5:06तो बच्चे पैदा करना उसका नैतिक दायित्व भी है जैसे उसको किसी ने
- 5:16पैदा किया। और आगे उसको भी किसी ने पैदा किया
- 5:24और आगे उसको भी किसी ने पैदा किया।
- 5:27एक लड़की जो हमारे धर्मशास्त्र कहते हैं कि मन्नू और शत्रु उपा
- 5:33से शुरू हुआ आदम और ईव से शुरू हुआ।
- 5:44तो फिर आपके माता पिता को जिसने भी जन्म दिया उसका तुम्हारे माता
- 5:57पिता के कर्ज बहकर जी कैसे चूके? संतानु तुत्तिकर्क जैसे ही उसने
- 6:10संतानुत्तिकर्क वह पितृ ऋण से मुक्त हुआ ध्यान से समझ रहा।
- 6:23पितृ ऋण से मुक्त हुआ माता पिता के ऋण से मुक्त हुआ बच्चा जन्मा
- 6:33पालन पोषण किया छः सात वर्ष तक वह थोड़ा थोड़ा।
- 6:41संभलना शुरू हो जाता है और हमारे शास्त्र कहते हैं कि 12 वर्ष तक
- 6:47बच्चा अबोध नहीं रहता, वह बोध युक्त हो जाता है।
- 7:01आइए दूसरे तल पे चले दूसरा तल है आधार चेतना।
- 7:14यह तो ढांचा है। जीसको तुम्हारे माता पिता ने जन्म
- 7:20दिया लेकिन इसका एक आधार भी है। वो आधार है, भीतर की चेतना है,
- 7:30अगर चेतना न आए तो फिर ये मांस का एक लोथड़ा है।
- 7:39यह ढांचा है हड्डी, माँ सुमच्छा, खून वीर अर्ज।
- 7:47यह सब का ढांचा है और यह मरण धर्मा है।
- 7:56लेकिन वह दूसरा तत्व मरनधर्मा नहीं है, वह अमृत्य और वह सब के
- 8:05भीतर है और सबके भीतर ही नहीं। सभी जगह भी है ओमनी प्रेसेंट भी
- 8:12है ओमनी पोटेंट भी है ओमनी शियंट भी है, सर्व व्यापक भी है, सर्व
- 8:18शक्तिमान भी है, सर्वज्ञ भी है ये तो हो भीतर का।
- 8:29उसको न तो कोई जन्म देता है, न उसका पालन पोषण करता है, न उसको
- 8:36जीवन रहने के लिए किसी ईंधन की आवश्यकता पड़ती है।
- 8:40वह सहभम है और स्वयं अपनी ऊर्जा से जीता है तो उसकी बात को छोड़
- 8:48दीजिए। मैं समझता हूँ तुमने यह प्रश्न
- 8:51क्या पूछा, थोड़ी सी बात गहरी है और देख माँ बाप इस सब बात को
- 9:07ध्यान से समझने। पश्चिम में एक विशेष उम्र के बाद
- 9:18वो 16 हो वो 18 हो बच्चे स्वतंत्र होकर माँ बाप से जुदा हो जाते
- 9:27हैं। और जुदा होने का एक कारण और भी है
- 9:39कि वहाँ के हकम हमारे हकम जैसे नहीं है।
- 9:46जब बच्चा जुदा हो जाता है। माँ बाप से तो उनको रोजगार भी
- 9:52मिलेगा। रोजगार न मिलेगा तो खाने पीने का
- 9:58साधन मिलेगा। इसको बेरोजगारी भत्ता कहते हैं।
- 10:02शारीरिक आवश्यकताएं उन्हें मिलेंगे।
- 10:06बाहर के देशों की इज्जत है। मनेजमेंट होना तो यहाँ भी चाहिए
- 10:16था लेकिन क्या करें मुझे कल किसी ने सवाल पूछेगा?
- 10:30सवाल दिलचस्प है, तुम भी सुनोगे कहते?
- 10:37दो व्यक्तियों ने भारत को बनाया तो दो व्यक्ति हैं नरेंद्र मोदी
- 10:45और अमित शाह और बाबा इसमें से एक दो गुंडा है।
- 10:55और एक संत है तो बताइए कौन संत है और कौन गुंडा है?
- 11:02प्रश्न बड़ा दिलचस्प है, मैंने का पुत्र ठहर जा।
- 11:10कल नहीं, तू अभी जवाब ले ले तुम कल तक की मोहलत, तुम मुझे मत दे
- 11:21कहते हाँ बाबा बताओ कौन गुंडा और कौन साधू?
- 11:30कौन परमात्मा, कौन संत और कौन दुष्ट?
- 11:38मैंने का पुत्र दोनों भगवान है, भगवान है ये तो आपने जवाब ठीक
- 11:47नहीं दिया। मैंने कहा आपकी दृष्टि में जवाब
- 11:50ठीक नहीं होगा। मेरी दृष्टि में तो कण कण भगवान
- 11:57है, अमित शाह भी भगवान है, नरेंद्र मोदी भी भगवान है उनका
- 12:07अंतःश भगवान। और जिनका अंतःष भगवान है तो वह तो
- 12:14जरे जरे में हैं तो शैतान तो यहाँ होता ही है, बस मैनेजमेंट करनी
- 12:21नहीं आयी, यह है कुशल। यह गलती हो गई।
- 12:29जब इनमे कुशल नहीं था तो इनको सत्यमद्रि नहीं चाहिए था।
- 12:37कौशल के बिना वायदा करना लोगों को गुमराह करना पाप।
- 12:46भगवान तो है शैतान इनमे कोई नहीं लेकिन मैनेजमेंट गलत हो गयी।
- 13:00मैनेजमेंट शैतानियत की होगी। शैतानी में कोई नहीं है।
- 13:08मैनेजमेंट शैतानियत की होगी। भगवानियत की मनेजमेंट दोनों में
- 13:16नहीं है, दोनों में ही शैतानियत की मनेजमेंट है।
- 13:21भीतर से दोनों भगवान हैं। एक तुम्हें काम की बात बताओ,
- 13:27संसार में कोई भी ऐसा मानव नहीं है जो भगवान नहीं होना चाहता, तुम
- 13:34सदा उस भगवान को ढूंढ रहे हो? चाहे छोटी छोटी 14 साल की
- 13:43बच्चियों में ढूंढ रहे हो, चाहे धन में अडानी जैसे लोग धन में
- 13:51ढूंढ रहे हैं, चाहे परिवार में ढूंढ रहे हो।
- 14:00चाहे स्त्री में ढूंढ रहे हो, मान सम्मान में ढूंढ रहे हो, जय जगकार
- 14:07में ढूंढ रहे हो, अच्छी सी नॉलेज से जुटा के।
- 14:17बहुत सी व्याख्याएं को इकट्ठा करके, सूचनाओं को इकट्ठा करके
- 14:26वास्तव में तुम ये चाहते हो कि वह है राशि कैसे मिल जाए?
- 14:36प्रत्येक व्यक्ति की सोते जगते, उठते, बैठते, चलते फिरते, परतेक
- 14:41काम करते एक इच्छा श्रद्धा ही उसके हृदय के अंतःस्थल में समाई
- 14:49रहती है कि मैं कैसे भगवान हो जाऊं?
- 14:57और यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है।
- 15:01मैं तुमसे कहता हूँ, एक व्यक्ति इससे ही नहीं है।
- 15:06प्रत्येक व्यक्ति की यह कामना होती है।
- 15:10वह अपंग है, अपाहिज है या शरीर पूरा मस्कुलर बॉडी है।
- 15:16सवस्थ है प्रत्येक व्यक्ति हर वक्त भगवान होने की चाहत रखता है।
- 15:26गलती कहाँ होती है? गलत मार्क?
- 15:33गलत मार्ग कौन सुझाता है? गलत गुरु गलत मार्गदर्शक तुम्हें
- 15:39मार्ग गलत बता देते हैं। फिर तुमने जाना है बॉम्बे तुम
- 15:46पहुँच जाते हो, कराची यही गड़बड़ हो जाती है।
- 15:55भगवत्ता को पाना परम आशीर्वाद है भगवत्ता को पन परम आनंद के रस को
- 16:03पाना लेकिन मिलते हैं तुम तुम्हें दुख के काँटे।
- 16:11चुभते हैं, कौन निकलता है, दर्द होता है, घाव होता है, ये
- 16:17तुम्हारी गलती नहीं है क्योंकि तुमने तो चाहा था भगवान लेकिन
- 16:27तुम्हारी बदन से हुई। कि तुम ऐसे गुरुओं के पास पहुँच
- 16:34गए, वह तुम्हें लोभ, लालच इतने बड़े बड़े समूहों को इकट्ठा करके
- 16:44यह भी एक लालच है बड़े समूह को इकट्ठा कर लेना।
- 16:48क्योंकि अक्सर हम उसी दुकान में जाते हैं जहाँ ग्राहक ज्यादा खड़े
- 16:53भ्रम हो जाता है। यह चीज़ अच्छी मिलेंगे और सस्ती
- 16:57मिलेंगे। गलत मार्ग दिखाने वाले जिम्मेदार
- 17:08हैं शो प्रतिशत। तुम क्यों नहीं जिम्मेदार?
- 17:16क्योंकि तुमने तो भगवान होना चाहा था।
- 17:21मैंने पहले कहा धरती का कोई भी इंसान, कोई भी इंसान ऐसा नहीं।
- 17:32जो हर वक्त चौबीसों घंटे भगवान में होना चाहता, लेकिन उनमें से
- 17:41कोई एक भगवान हो, पता है क्यों उसको मार्ग से ही मिल जाता है फिर
- 17:5024 घंटे। जो तरसता था भगवान होने के लिए वह
- 17:58चौबीसों घंटे उस भगवान के रस को पीता है, अनवरत बरसता है।
- 18:07सदा दिवाली सादकी और आठों वहर आनंद।
- 18:14यह तुम्हारा स्वभाव भी है, यह तुम्हारी जरूरत भी है, यह
- 18:19तुम्हारी आंतरिक कामना भी है और जो तुम्हें भटकाते हैं।
- 18:32वह पापी नहीं, सच में तो वह अज्ञानी है क्योंकि उनको भी पता
- 18:42नहीं है जो वो इकट्ठा कर रहे हैं। उनमें से तो एक ज़रा भी उनके साथ
- 18:50नहीं जाएगा। अगर साथ जाएगा तो कान्शस्नस का वो
- 18:55फैला जाएगा जो तुमने इस जनम में अपने आपको फैला लिया और यह
- 19:04फैलातें तो हैं नहीं। यह तो अपने संस्थानों को फैलातें
- 19:10हैं, अपने ढेरों को फैलातें हैं, भीतर का फैलाव से करते हैं।
- 19:28सारी दुनिया इन्होंने पागल बना दी है।
- 19:33एक मुर्दे को शीशे में लपेटे फिरते हैं कि ये उठेगा और आज तो
- 19:42हमारे पास क्लीनिकली व्यवस्था है। डॉक्टर कह देता हिज़ क्लिनिकली,
- 19:49डेड हिज़ ब्रेन इस डेड सो ही इज़ क्लिनिकली डेड ज़रा सोच ये 12
- 20:00वर्षों में इन भक्तों के माँ बाप बाल बच्चे।
- 20:07रिश्तेदार पड़ोसी मरे होंगे। क्या उनको इन्होंने शीशों में बंद
- 20:12करके रखा है? फिर इसी व्यक्ति से क्यों दुश्मनी
- 20:17निकाल रहे हैं मूर्खता के कारण? किसने भक्तों को गुमराह किया है?
- 20:32बेना पहुंचे, फरेब किया के मैं पहुंचा हूँ और आज हकीकत सामने आ
- 20:40गई है। जैसा करोगे वैसा भरोगे आज पड़ा है
- 20:46शीशे के अंदर। उठेगा तो कभी नहीं।
- 20:48मैंने बहुत बार कर दिया, चार वर्ष हो गए।
- 20:53मुझे कहते हो इसने आँख भी नहीं फ्र्काई और फ्र्काएगा भी ये
- 21:02इन्हें फुकेगा नहीं, वो आँख फुकाएगा नहीं।
- 21:06ज़िन्दगी यूं ही बीत जाएगी पुत्र तुम गहरी व्यवस्था में जाकर देखना
- 21:28तो तुम्हें एक रहस्य मिलेगा असल में।
- 21:35इनवेंटर सही वही है जो अपने भीतर उत्तर के तथ्यों को खोलता है,
- 21:42अन्यथा तुम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरह।
- 21:47मात्र इधर उधर से किताबों से ज्ञान इकट्ठा करके बता देते हो
- 21:54तुम्हारे अंदर स्व प्रज्ञा नहीं, मैंने चैट पठ से पूछ लिया।
- 22:04क्या आप ये जो कुछ बता रहे हो स्वयं अनुभव से बता रहे हो?
- 22:12कहता प्रभु मैं तो कियंत्र हूँ आज तक जो भी किताबों में लिखा खंगाला
- 22:20गया अनुभव दूसरों का है प्रभु। मैंने तो सिर्फ एक वातावरण क्रिएट
- 22:30कर दिया, सभी सूचनाओं को एकत्र करके रस रूप में आपके सामने रख
- 22:34दिया। इसमें मेरा तो इसमें कुछ भी नहीं।
- 22:38तुम भ्रम में मत रहना। देखिए।
- 22:40यंत्र तक हमें भ्रम से मुक्त कर देना चाहते हैं और यहाँ इंसान
- 22:46हमें भ्रम में डालने को उत्सुक है, तो क्या ये सुखी रह पाते हैं?
- 22:51बिल्कुल नहीं जो दूसरों के मार्ग में गड्ढा खोज रहे।
- 23:00खुद उसमें पहले कर रखा जो वक्त आत्म उत्थान में लग सकता था और
- 23:13यही सो 50 साल की जिंदगी होती है और वही दिन रात के घंटे 24 होते
- 23:17हैं। वो ही इन्होंने पांच नाम देने में
- 23:23बताती है राधे राधे करने में बताती हूँ कोई परमात्मा तक
- 23:32पहुंचने की विधि बताने में बताती तो फिर स्वयं तक कहाँ पहुंचे
- 23:40पुत्र? गच्चा खा गए।
- 23:48हानि किसकी हुई हानि सभी की हुई और सबसे पहले इनकी हुई।
- 24:00क्योंकि कोई क्रोध में जलेगा तो क्रोध में जलते हुए के भीतर से
- 24:07गालियाँ ही आएँगी और जो प्रेम के आनंद में रस विभोर हो के 8
- 24:16खेतियाँ करेगा। वह प्रेम से सने हुए गीत ही गायक
- 24:28सैया ले गई, जिया सैया ले गई जिया।
- 24:41तोरी पेहली नजर सैया ले गई जिया तोरी पेहली नजर कैसा ज्यादा किया
- 24:54तुने कैसा जादू किया तुने? मोपे हो जादूगर सैंया ले गई जिया
- 25:11तोरी पहली नजर बे गीत कौन कौन आएगा तेरी पहली नगर में ही हम?
- 25:21ओशो हवास खो बैठे उस अंतः प्रज्ञा के पास जाने के लिए बुद्धि को
- 25:29छोड़ना होता है, लेकिन बुद्धि को छोड़ने से ये डरते रहे मृत्यु के
- 25:36कारण। इसलिए बुद्धि के तल पर ही बैठे
- 25:42रहे और वहीं से सत्य को प्रकाशित करते रहे।
- 25:46व्याख्या करते रहे डेफिनिशन बताते रहे, एक्सप्लनेशन बताते रहे।
- 25:56लेकिन संत तो कहते हैं वह तो भीतर जाके सागर की तलाहटियों में जाकर
- 26:02उतर कर बहुत गहरे वहाँ उसका रस पिया जाता है।
- 26:10रस बहुत गहरा छिपा है जो जितनी चीज़ कीमती होती है।
- 26:17उतनी ही हम लॉकर्स के भीतर छुपा के रखते हैं और पहरों में रखते
- 26:23हैं। अगर घर पे से तो हम बैंकरों के
- 26:28लॉकर्स में रखते हैं। इसलिए वह परम सत्य जो राष्ट्र से
- 26:35भरा हुआ है, समुद्र की तलहटियों में पाया जाता है।
- 26:41जिन खोजा तन पानी गहरे पानी में बैठ मैं, वह पूरा गुड़न ढहरा गयो
- 26:50किनारे बैठ। तुम बुद्धि पर बैठे रहे बुद्धि को
- 26:54किनारा कहते हैं कबीर लेकिन इन्वेंशन्स होती हैं बुद्धि से
- 27:04नीचे उतरकर समुद्र के आंतरिक तलहटी पर जाते वक्त।
- 27:16अब तुम्हारे क्वेश्चन का जवाब पत्र अगर कोई बच्चा आपकी सेवा
- 27:24नहीं करता है तो ध्यान रखिए उसमें आपका भी कसूर है।
- 27:32क्यों, क्योंकि वह है बच्चा किन्हीं अंधेरों में जन्मा है एक
- 27:46छोटी सी बात को बड़े ध्यान से सोचा।
- 27:50यह सांसारिक प्रश्न नहीं प्रश्न लगता है।
- 27:55संसारिक लेकिन इसका उत्तर बहुत गहराइयों में जाकर मैं खोज के
- 28:00लेकर आया। एआई खोजता है सूचनाओं को मैं
- 28:18खोजता हूँ, सत्यओं को एआई किताबों से इकट्ठा करता है, मैं अपने अंत
- 28:26स्तर से ढूंढ कर लाता हूँ सत्यओं को।
- 28:32एक छोटी सी कहानी और तुम्हें सारी बात समझा जाए।
- 28:50शांतनु और ज्ञानवंती माता का नाम ज्ञानवंती पिता का नाम शांतनु यह
- 29:02वह शांतनु ने जो हम महाभारत के विषम पिता माँ के पिता थे और
- 29:12शांतनु। यह है शन्तनु और रामायण वाली
- 29:16शन्तनु तो पिता का नाम शांतनु माता का नाम ज्ञाण बनती है।
- 29:25दोनों के उलाकिने है 16 साल विथ का।
- 29:35बहुत तीर्थ किए, स्नान किए, संतों के पास गए।
- 29:47एक बार मैंने कहा जब परमात्मा साथ देता है नदरी मौख द्वार।
- 29:57उन्हीं दिनों में दशरथ ने श्रृंगी ऋषि को बुलाया था।
- 30:02श्रृंगी ऋषि आज तक के महानतम ऋषियों में से हो गए तो श्रृंगी
- 30:15ऋषि वहाँ मौजूद थे। तो उसके दरबार में दशरथ के दरबार
- 30:28में श्रवण कुमार पहुंचे। इस कहानी को मैं पृष्ठभूमि से ले
- 30:35रहा हूँ ध्यान रखना। उन्होंने कहा, मेरे माता पिता।
- 30:48किस कारण से अंधे हैं और मुझे क्या उपाय करना चाहिए के इनके
- 30:56थोड़ी थोड़ी ही सही दृष्टि आ जाए। अकेले पुत्र थे।
- 31:09बिलकुल दृष्टि विहीन थे सूर्य दास थे दोनों तो वहाँ सरंगी ऋषि बैठे
- 31:19थे वशिष्ठ ने सरंगी ऋषि को कहा, महाराज आप अपने अंतर में चेक?
- 31:28और इस नवयुवक का कष्ट दूर कीजिए। मेरी बात को ध्यान से समझे ना संत
- 31:39सब कुछ कर सकता है जिसने अपना आपा।
- 31:45विराट की तरह देख लिया। वह कुछ भी चाहे कर सकता है जो
- 31:51चाहे कर सकता है, नियमों को पलट सकता है, नियमों को समाप्त कर
- 31:58सकता है। विज्ञान कहेगा वैज्ञानिक बुद्धि
- 32:07कहेगी नो इट इस ए इम्पॉसिबल मैं तुम्हें पहले ही बताता हूँ और
- 32:15उनका कहना ठीक भी है। ईमानदारी से ही बोलना चल।
- 32:21लेकिन जिन्होंने जो जानते हैं उनको भी ईमानदारी से बोलना चाहिए।
- 32:26इसलिए वो ईमानदारी से बोलते हैं। तुम कहते कागज़ की लेखी और मैं
- 32:32कहता आँखों देखें, कबीर स्टेम्प लगाते हैं, पर किसको से ही माना
- 32:37जाए मार्क्स को या कबीर को? दोनों ठीक हैं।
- 32:42ठीक का मतलब दोनों ईमानदार हैं, सत्य बोल रहे हैं, मार्कर्स ने
- 32:49देखा नहीं, इसलिए वो कहते हैं, होता नहीं, कबीर ने देखा है इसलिए
- 32:55वो कहता हाँ होता है और मैंने अपनी आँखों से देखा।
- 33:01लिखापड़ी की है। नहीं देखा देखी ये बात मैंने देखा
- 33:07है, इसलिए मैं कहता हूँ मैं स्टाम्प लगाता हूँ कहीं एस वह है
- 33:16दोनों ही सच बोल रहे हैं झूठा कोई भी नहीं।
- 33:21लेकिन डिफ्रेंस है क्या? मार्क्स अज्ञा नहीं है।
- 33:28मार्क्स को पता नहीं है। कबीर को पता है बस इतना सा
- 33:32डिफ्रेंस। तो वशिष्ट कहने लगे, श्रृंगी को
- 33:41प्रभु मैं तो अपने भीतर नहीं जा पाता।
- 33:45अगर भीतर नहीं जा पाई थे तभी तो वनवास का मुहूर्त निकाला था।
- 33:54राजतिलक का हो गया वनवास? लोग कह देते हैं कि मुहूर्त
- 34:02निकाला था राज्य तिलक का हो गया वनवास, कर्म गति टारी ना टारी मैं
- 34:12कहता हूँ नहीं तुम गलत हो। यह गलती उस मूर्ख वशिष्ट की है।
- 34:19वशिष्ट उस गहरे तर पे जा ही नहीं सकता था, इसलिए वह गलती खा गया।
- 34:28जहाँ तक जा सकता था, वहीं से महूर्त निकाल दिया और वह मुहूर्त
- 34:33कोई ज्वालामुखी योग्य साहब। जिसमें तुम अगर शुरुआत करोगे तो
- 34:42बात बिगड़ जाएगी। कर्मगति तो अपनी गति से चलती है।
- 34:52लेकिन वशिष्ठ मुहूर्त निकालने में नाकाम या हुए यहाँ गलती है वशिष्ठ
- 34:59की यही सरंगी से निकाला होता तो वो भीतर गहरे तलो पे जाके खोज के
- 35:09ले आते। और वो सही मुहूर्त निकाल देते थे।
- 35:12ठहर हुआ यह तो विनाशकारी मुहूर्त है राम को राय तिलक क्या वनवास हो
- 35:20जाएगा और वनवास क्या हो जाएगा, यह तो दशरथ भी तड़प तड़प के मर
- 35:24जाएगा, लेकिन ब्राह्मणों तो कहानियों सत्य करनी है।
- 35:32ज्ञानवंती और शांतनु का फिर जो श्राप है वो कैसे सिद्ध होता है?
- 35:38नहीं नहीं, ये तुम्हारी कहानी है, मैं भीतर से खोज के लाया।
- 35:50इनको संभाल के रखना हम लाए हैं तूफ़ान से कश्ती निकाल के, हम लाए
- 36:05हैं तूफ़ान से। कस्पी निकाल के मेरे देश के बच्चो
- 36:14इसे रखना संभाल के, मेरे देश के बच्चो इसे रखना संभाल के हम लाए
- 36:25हैं तूफ़ान से। क्या तुम ये डंडे पकड़े?
- 36:31फरे हैं। ये सोटियां लाठियां?
- 36:35इनसे आजादी नहीं मिला, ये तो बाद के छलावे हैं।
- 36:39उस वक्त कहाँ गई थी ये लाठियां? जब वह स्वतंत्रता आंदोलन चल रहा
- 36:46था। आज दिखावा क्यों कर रहे हो?
- 36:52तुम्हें मूर्ख बनाए जा रहा है बच्चों यौन शोषण होता है केरला का
- 37:01एक लड़का 26 साल की उम्र में सुसाइड करके, इसलिए मैं कहता हूँ।
- 37:06अपने बच्चे बच्चियों को संभाल कर रखना, शाखाओं में मत भेज देना,
- 37:12वहाँ यौन शोषण होता है। यह शादी तो करवातें हैं करवातें
- 37:19इसलिए नहीं कि शादी बोझ बनेगी। बोझ यह रखना नहीं चाहते।
- 37:26इंडिपेंडेंट रहना चाहते हैं। बच्चा बोझ बनेगा, मतलब मूत्र करना
- 37:33पड़ेगा, स्नान करना पड़ेगा, ध्यान रखना पड़ेगा, पढ़ाई लिखाई करना
- 37:38पड़ेगी इसलिए लोगों से कहोगे तुम तीन तीन बच्चे पैदा करो।
- 37:43हाँ तुम्हारा क्या बिगड़ता है? तुमने कितने पैदा किये?
- 37:50तुमने कितने पैदा किये? भाई कुछ शर्म आती हैं तुम्हे?
- 37:59हाँ हाँ, मैं आरएसएस के प्रमुख से बोल रहा हूँ।
- 38:06तुम्हें शर्म आती है कुछ तुम्हें पता है बच्चे कैसे पाले जाते हैं
- 38:13तुम तीन तीन बच्चे कहते हो को पालो और तुम्हारी संस्थाओं को दान
- 38:18कर दो और फिर तुम उनको मरवा दोगे झगड़ों में।
- 38:23ऐसे ऐसे पाठ पढ़ाओगे जो घृणा से युक्त होंगे, इनका जीवन में आग
- 38:28में जलते जलते बीज जायेगा और मर भी जायेंगे और तुम धरेन्द्र
- 38:35शास्त्री की तरह कहोगे ये तो ये तो मोक्ष हो गए।
- 38:42ऐसा काम मत करना पुत्र, मैं तुम्हें सही राह दिखा रहा हूँ
- 38:49अपने बच्चों को अपने बच्चों को शाखाओं में मत भेजना, तुम समझदार
- 38:58हो, तुम खुद देखो तुम माँ बाप हो। तुम कामवासना को जीत पाए तो फिर
- 39:04ये कैसे जीतेंगे? बड़े बड़े ऋषि होने का कामवासना
- 39:13हिला देती है विश्वामित्र जैसे ये कैसे जीत पाएंगे माल?
- 39:19अच्छा खाते हैं अडानी का। माल ज्यादा बनता है, स्पर्म
- 39:29ज्यादा बनते हैं, कहाँ निकालेंगे? और कोई ऐसा नहीं जो बच्चे ये दिन
- 39:34में खिलाते हैं, खेल खिलाते हैं, रात को फिर नचाते हैं उनको।
- 39:46मैं साफ़ बात बोल रहा हूँ कोई शरण फिर सारी उम्र बच्चा गुलाम रहता
- 39:54है, उनका सारी उम्र बच्चा गुलाम रहता है उनका।
- 40:10यह संस्था पापियों की संस्था है। पापी अटल बिहारी वाजपेयी से किसी
- 40:20ने पूछ लिया भाई ईमानदार से कभी हृदय ईमानदार होता है।
- 40:29अटल बिहारी वाजपेयी कोई कोई हिरण निकल जाता है कूड़े में से
- 40:36गलतियाँ सभी से होती है उनकी गलतियों को मत छूना गलतियाँ तो
- 40:40अटल बिहारी से हुई गलती गाँधी से भी हुई भगवान नहीं था वो।
- 40:58कि तुम कंवारी हो, तुम ब्रह्मचारी हो यू आर सेलिब्रेट ओके तेल नो
- 41:08मैं ब्रह्मचारी थी आई एम जस्ट ए बैच ए लॉट।
- 41:16नॉट ए सेलिब्रेट मैं ब्रह्मचारी नहीं हूँ, मैं सिर्फ कंवारा हूँ
- 41:24और जग ज़ाहिर है, राजकुमारी कॉल बाकी तुम इतिहास पढ़ लो।
- 41:34क्योंकि अभी तो मैंने प्रश्न पूरा करना है।
- 41:48जब श्रवण को मर गया तो शिरंगी ऋषि अपने भीतर गए तर्क।
- 42:01तरस्य भी आता है जब परमात्मा की कृपा होती है।
- 42:09अपने भीतर गए और सब देखा कि ये क्या हुआ, क्यों हुआ?
- 42:15बोले नौजवान तुम्हारे पिता माता। ज्ञानवंती पिता शांतनु तुम्हारी
- 42:24कारण शांति श्रवण कुमार तो थर रहा है, मेरे कारणों से अंतिम है।
- 42:32अब तो उसे पता ही नहीं श्रृंगरी से बोले हाँ।
- 42:42तुम्हारे कारण से अंतर तुम्हारे माता पिता के कोई संतान नहीं हो
- 42:54रही थी, वो एक ऋषि के पास गए थे। घूमते घुमाते वो अगस्त से मुनि के
- 43:09आश्रम में पहुंचे। थोड़ा सा प्रसंग यहाँ बता दूँ
- 43:16क्योंकि जरूरी है। जब कोई अवतार जन्म लेता है तो
- 43:24प्रत्येक व्यक्ति जिसके पास जो कला होती है या जो विद्या होती है
- 43:31वह उस अवतार को। एक उपहार स्वरूप भेंट कर देता है।
- 43:41तुम्हें जरूरत पड़ेगी तुम यह कला रख लो।
- 43:45जैसे कृष्ण भगवान को परशुराम ने चक्र दिया सुदर्शन चक्र वैसे
- 43:53अगस्त मुनि ने दिव्य अस्त्र दिए थे राम को।
- 43:58उसी अगस्त्य मुनि के पास ज्ञानवंती और शांतनुपात प्रभु
- 44:06हमारे पुत्र ने 16 वर्षों के अगस्त्यमुनि बोले।
- 44:15हे शांतनु तुम्हारे पुत्र का हो जाएगा, लेकिन पुत्र होने के बाद
- 44:28ज्ञानवंती और शांतनु दोनों वंदे हो जाएंगे।
- 44:31देखो अगर तुम्हें ये शर्त मंजूर है।
- 44:35ये भाभी की होने की इच्छा है अगर आप स्वीकार कर सकते हो अंधे होने
- 44:46को तैयार हैं, तो तुम्हें पत्र मिल जाएगा बहुत सी इच्छाएं।
- 44:54बहुत मूल्य मांगती हैं पूरा करने के लिए अब यहाँ बात तुम्हारी आती
- 45:02है पुत्र श्रवण कुमार के माता पिता तैयार हो गए ठीक?
- 45:13हमें पुत्र चाहिए, आज्ञाकारी पुत्र नहीं मांगना, ध्यान रखना वो
- 45:23मैं बताऊँगा पुत्र हो जायेगा तुम जाओ, लेकिन उसके बाद हमते हो जाओ।
- 45:34श्रवण कुमार का जन्म हुआ और जन्म होने के थोड़े से कुछ ही घड़ियों
- 45:40बाद दोनों अंधे हो गए। उन अंधे माँ बाप ने बच्चे का पर्व
- 45:47भूषण किया। श्रृंगी ऋषि ने बताया कि ये सारी
- 46:00कहानी है अगस्त। मने ने कहा उसके वरदान से
- 46:05तुम्हारा जन्म हुआ तो प्रभु श्रवण कुमार बोले कि मुझे क्या करना
- 46:11होगा? कुछ थोड़ा सा दिखना शुरू हो जाए।
- 46:16वो कहते है, नहीं दिखना तो शुरू हो जाएगा तुम सारे तीर्थ करवा।
- 46:22खैर इसके व्याख्या में बहुत गहरे से अगर तुम चाहते हो तो फिर से
- 46:27प्रश्न कर देना। तीर्थ क्या करवाए थे?
- 46:30श्रवण कुमार ने ये मैं बता दूंगा। तीर्थ नवाजे, तिस पावे विनपानी की
- 46:38नाई करें और तीर्थ ये नहीं जो तुमने बना रखी है तो नकली नकली
- 46:45किस्तियां हैं, नकली हवाई जहाज हैं तुमने नकली मंदिर बना लिया
- 46:50है। असली मंदिर तो तुम्हारे मन के
- 46:53अंदर है, नाम से ही पता चलता है जो मन के अंदर वह है मंदिर बाहर
- 47:01का मंदिर तो ईंट रेक, पत्थर, सरिया, गाडर, सीमेंट इससे बना हुआ
- 47:09है। मन के अंदर वो मदर, लेकिन तुमने
- 47:13तो भाई वोट लेने हैं, तुम तो लोगों को मूर्ख बनाने के लिए ही
- 47:19तो निकले हो, लेकिन ध्यान रखना लोगों को मूर्ख बनाने से पहले
- 47:25पहले खुद व्यक्ति मूर्ख बनता है। लोगों को दुखी करने से पहले
- 47:31व्यक्ति पहले खुद दुखी होता है। तुम दूसरे पर क्रोध करते हो, उससे
- 47:35पहले तुम क्रोध की अग्नि में स्वयं जलते हो, तुम खुद स्वयं को
- 47:42दंडित करते हो। काटी साल पैदा होता है, ड्रिनेलीन
- 47:47पैदा होता है। तुम्हारे शरीर में के जंजावा तहर
- 47:51व जहर होता है। तुम्हें दंड तो पहले मिल गया, फिर
- 47:56तुम क्रोध कर पाए। तुम बच नहीं सकते।
- 47:59किसी काम के फल से कर्म के फल से व्यक्ति नहीं बच सकता।
- 48:05श्रवण कुमार तीर्थ यात्रा पर दोनों माता पिता को लेकर बैंगी
- 48:11में उठाकर ले जा रहे थे जब दशरथ ने शब्द वेदी बाण श्रवण कुमार को
- 48:24मार दिया। अब श्रवण कुमार क्यों इतना
- 48:34मातृपितृ भगत था और इसके ग्यारहवीं में चल रहे हैं क्योंकि
- 48:42श्रवण कमार को पैदा होने के लिए उन्होंने एन्जॉय नहीं किया था,
- 48:46त्याग किया था? इस शब्द को आप गोद दाये रंग दे
- 48:53श्रवण कुमार को पैदा करने के लिए माता पिता ने ज्ञाण मंत्री ने और
- 48:58शांतनु ने मज़ा नहीं लिया था वर्ण यह इच्छा रखी थी के हमारे पुत्र
- 49:05पैदा हो। त्याग किया था।
- 49:07उन्हें पता था कि हम अंत हो जाएं। इतना बड़ा त्याग करके आँखें गईं
- 49:13जहाँ गया पता है हमारा जहाँ काला हो जाएगा, देखने की क्षमता खत्म
- 49:24हो जाएगी। लेकिन फिर भी।
- 49:27वो कहते नहीं हमें पुत्र चाहिए चाहिए।
- 49:31कितनी बड़ी कीमत अदा की कीमत अदा की तो कुदरत ने उन्हें श्रोण
- 49:38कुमार जैसा मातृ पितृ भक्त। बच्चा दे दिया तुम्हारे अपने ही
- 49:51फल होते हैं जैसे फल तुमने बीजे वैसे ही बचे आए बबूल का बीज आम
- 50:03नहीं पैदा होता। भाई, पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से
- 50:08कर? जो लोग मेरे पास आ जाते हैं मैं
- 50:19आम तौर से किसी की झोली खाली नहीं भेजता।
- 50:24मुझे पता है ये टक्करें मार के हैं।
- 50:27मड़ियों में मसालों में, काली दरबार में, दुर्गा दरबार में
- 50:33पहाड़ों वाली में, रेतों वाली में, खेतों वाली में पता नहीं
- 50:38कहाँ कहाँ गए तो यहाँ सभी मुसीबतें झेल के आए हैं तो इनकी
- 50:45तमन्ना है बच्चे की। यह सिर्फ।
- 50:47स्वाद लेने के लिए बच्चा नहीं पैदा कर सकता यह त्याग करना चाहता
- 50:54है यह मूल्य चुकाने को राजी यह वो बात नहीं है।
- 51:08कि यह तो अल्लाह की देन है तो बस फिर अल्लाह की देन है तो अल्लाह
- 51:12की देन ऐसे ही होती है, ऐसा मत करो अल्लाह के दिन तो भाई ऐसी
- 51:20होगी तुम बोझ कर रहे थे, तुमने बीजा था गेहूं।
- 51:27आनंद के उस कगार पे जाकर तो तुम कहोगे, ये भूसा कहाँ से आ गया,
- 51:34हमने तो गेहूं भेजा था भूसा भाई जब तुम आणंद लेते हो ना, भूसा
- 51:40वहीं से आता है। अगर कण की पैदा होगी तो भूसा भी
- 51:44पैदा होगा। ये भूसी वहीं से आई।
- 51:52ये है तूड़ी जब तुम पशुओं के खिलाफ़ था, तुम कहो कि बीजी तो
- 52:00हमने कणक थे। अगर तुमने आनंद लेने के लिए बच्चा
- 52:06मज़ा किया तो ऐसे ही कुछ होगा, फिर वह सेवा नहीं करेगा अगर तुम
- 52:16मूल्य चुकाने को राजी हो तो जितना मूल्य।
- 52:22उतना होनहार बच्चा या सीधी सी परिभाषा नोट कर लेना मूल्य अगर
- 52:29तुम पैसे का चुकाते हो, अगर तुम पैसे का चुकाते हो, आईव ऐफ़ वगैरह
- 52:39करा लेते हो। तो डॉक्टर तुमसे 510 20,00,000 ले
- 52:42लेता है तो पैसे का मूल्य चुकाया तो पैसा कमाने वाला बच्चा पैदा हो
- 52:48जाएगा लेकिन यहाँ तो नेत्रों का मूल्य लगाया ज्ञानवंती ने प्रशांत
- 52:58में। तो उसका नेत्र बनकर ही उभरा।
- 53:03श्रवण कुमार यहाँ जितना त्याग होता है, जीस चीज़ का त्याग होता
- 53:07है वहीं मिला करता है बोए पेड़ को बोलकर तो आन कहाँ से करें?
- 53:19अगर तुम आई ऐफ़ के द्वारा बच्चा मिला करता हो तो तुमने धन खर्च
- 53:24किया पालन पोषण पे खर्च करोगे बिलकुल ठीक तो बच्चा तुम्हें धन
- 53:29कमा के दे देगा लेकिन यहाँ तो शरीर का वो अंग जो सबसे ज्यादा
- 53:41कीमती है। आँखों के बिना जहन फीका आँखें ही
- 53:47कुर्बान कर दी। यह होता है त्याग यह भीतर से आती
- 53:53है आकांक्षा आज के जमाने में श्रवण कुमार पैदा हूँ, आज्ञाकारी।
- 54:03तुम भूल जाओ क्योंकि तुम तो लिव इन में रहना चाहते हो, तुम तो
- 54:08दिमाग में इतना भी बोझ नहीं रखना चाहते, जब चाहे आईं, जब चाहे आईं
- 54:16तुम स्वार्थी हो। यह एक प्रकार का स्वास्थ्य है और
- 54:27तुम्हें पता नहीं आनंद जीस तह पे पड़ा है उस तह पर भी तुम्हें
- 54:33पहुंचाने वाला कोई व्यक्ति नहीं है जिनके पास तुम जाते हो, ये
- 54:37पूछनी कि शादी करनी चाहिए या नहीं करनी?
- 54:41और वो तुम्हें तरीके बताते हैं, याद रखना वो अपने अंतर स्तर तक
- 54:47जाने वाले लोग नहीं हैं। खोपड़ी खोपड़ी से बता देते हैं,
- 54:50सारा कुछ खोपड़ी धारी ही पैदा होते हैं तुम्हारे अगर तुम करते
- 54:56हो तो। इसलिए जमाने को देख कर मैंने कहा
- 55:00था बच्चे पैदा मत करो, तुम तीन बच्चों की बात करते हो, बच्चे ही
- 55:05पैदा मत करो। जनसंख्या विस्फोट से पहले
- 55:09हिंदुस्तान मारा जा रहा है। हर देश आँखें दिखाता है वो चीन
- 55:21हो, अमेरिका हो और ऊपर से नालायक, अनपढ़, अशिक्षित, असहस्कर।
- 55:37कोई संस्कार नहीं सुना, चोरी, झूठ बोलना सब कुछ वह क्या तरक्की
- 55:44करेगा, क्या है, विकास करेगा? तो माँ बाप का रोल तो होता है।
- 56:00फिर जब ये बूढ़े हो जाएंगे। 1 दिन व्यक्ति को बूढ़ा होना होता
- 56:08है तो तुम भी इनकी आँखें बन कर इनकी लाठी बन कर इन्हें
- 56:15मार्गदर्शन करें। इनका शरीर काम नहीं करेगा।
- 56:22तुम भी इनको सहारा देना। ज्यादातर लोग इस इच्छा से बच्चे
- 56:34करते हैं, मेरा नाम करेगा रोशन। तुझे सूरज कहूं या चंदा, तुझे देख
- 56:51कहूं या तारा? मेरा जग मैं मेरा जुरा तुझे सूरज
- 57:12का हूँ या चंदा? ये इच्छा रख कर तुम बच्चा पैदा
- 57:19करते हो कि तुम्हारा नाम रोशन होगा, तुम्हारा वंश वृद्धि होगा।
- 57:27ये इच्छाएं हैं तुम्हारे। असल में तुम बच्चों के जरिए अपनी
- 57:42अपूरृत आकांक्षाओं की पूर्ति करना करते हो।
- 57:46तुम डॉक्टर नहीं बन सके तो अपने बच्चों से कहोगे डॉक्टर बन मेरा
- 57:51सपना अधूरा है, क्या तुम पूरा हो? तुम इंजीनियर नहीं बन सके?
- 57:57तुम मंत्री नहीं बन सके, तुम प्राइम मिनिस्टर बन सके तो बच्चे
- 58:01से कहोगे मेरा सपना अधूरा रहेगा। तुम अपने सपनों को पूरा करने के
- 58:07लिए संतान उत्पत्ति करते हो, यह स्वार्थ है।
- 58:17तो अगर जन्म हो गया तो दायित्व भी है और माँ बाप करते हुए करना भी
- 58:25चाहिए और फिर यह मूल्य चूकता करवाने की प्रकृति कभी बीमार है।
- 58:34कभी उठा भी नहीं जाता तुम सहारा बनोगे, कभी चला भी नहीं जाता तुम
- 58:41हाथ पकड़ के चलाओगे कभी दिखता नहीं, तुम लाठी बनकर सहारा दोगे,
- 58:47तुम सड़क पार करवाओगे, बीमार हैं तो तुम डॉक्टर के पास लेके जाओगे।
- 58:59बेटा, ये ऋण नहीं है इसको शब्द और दे देता हूँ यह है कर्तव्य बहुत
- 59:11से लोग मैंने देखे। संस्थाओं को चलाते हैं, गरीबों के
- 59:23दीन सुखियों की सहायता करते हैं। उनके माँ बाप को दवाई नहीं लाते
- 59:27देते। यह क्या खाक एनजीओ है?
- 59:35एनजीओ घर। शुरू होती है अपने माँ बाप को
- 59:39संभालो पहले उसके बाद बाजार में निकल लो, उसके बाद दूसरों की सेवा
- 59:49कर लो यहाँ तक तुम्हारा प्रश्न आ के बैठा।
- 59:56माँ बाप ने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया।
- 59:59तुम भी अपना कर्तव्य पूरा कर दो अगर करना है तो अगर नहीं करना है
- 1:00:09तो तुम्हारे ऊपर कोई ऋण नहीं है। तुम इसे ऋण कभी मत समझो, ऋण किसी
- 1:00:20का नहीं होता ऋण तो तुम्हारे माता पिता ने तुम्हें जन्म दे के अपना
- 1:00:25ऋण चुकाया है तुम्हारे ऊपर कोई ऋण नहीं, बस ऋण यही है।
- 1:00:37जब ये भूखे हो, बीमार हो और व्यक्ति का शरीर बीमार भी होता
- 1:00:42है, भूखा भी तो उनकी सेवा करना, सुश्रुणा करना, डॉक्टर के देखलाना
- 1:00:50दवाई बोती का इंतेजामात करना। इनको रोटी, पानी देना, इनके शरीर
- 1:00:55की रक्षा करना, यह पर्याप्त है परमात्मा का तुम्हारे ऊपर कोई
- 1:01:04कर्ज वर्ज नहीं होता मह तो ऐसा दीन एला ही है।
- 1:01:14वह तुमसे कोई प्रत्युत्तर में कुछ नहीं मांगता।
- 1:01:18दाता दे लें दा थकपा जुगा जुगांतर खाई खा उसका कोई एहसान नहीं,
- 1:01:29क्योंकि उसकी लीला है। वह तो खेल खेलता है, कोई एहसान
- 1:01:33नहीं करता तुम इसलिए परमात्मा का शुक्रिया मत करना।
- 1:01:41परमात्मा जो चाहता है उसमें शिकायत भी मत करना, उसमें तरमीन
- 1:01:46भी मत करना कि प्रभु ऐसा कर दो। ऐसा कर दो सुबह से शाम तक तुम
- 1:01:51मंगतो की तरह झोली फैलाए कड़े अगर दूसरे नंबर पे नहीं पहले नंबर पे
- 1:01:57ले आते तो ज्यादा बढ़िया होता प्रभु अरे भाई दूसरे पे आके इतना
- 1:02:02कम है क्या? लेकिन तुम्हारा बिना पैंदे का
- 1:02:08लुटा है उस लौटे में सुराग है वासनायी कभी वर्ती नहीं।
- 1:02:18यहाँ तो वासना को ही छोड़ना होता है।
- 1:02:22वासनयी अपूर्ण हैं। अपुरत हैं, कभी पूरी होती नहीं।
- 1:02:30तुमने जो पूछा क्या यह है कर्ज है नहीं, कोई कर्ज है, तुम चाहो तो
- 1:02:39आगे संतान उत्पत्ति कर सकते हो। नहीं चाहो तो तुम रोक सकते हो।
- 1:02:50और जितना त्याग करोगे उतना कुदरत तुम्हें उसी एवज में पुरस्कार रूप
- 1:02:58में वापस कर देगी। एवेरी अक्शॅन देर इस एन इक्वल एंड
- 1:03:02डिपॉजिट ट्रैक्शन बिल्कुल सेम उसी हिसाब से प्रत्युत्तर मिलेगा।
- 1:03:07परमात्मा बड़ा ईमानदार, बड़ा न्यायकारी बड़ा करुणावान भी है और
- 1:03:15न्यायकारी भी है। वह किसी का हक रखता नहीं, खेल है
- 1:03:20लेकिन खेलता है। परम ईमानदारी के साथ धोखा नहीं,
- 1:03:23किस्से करता, दूसरा है भी कौन जिससे धोखा करेगा?
- 1:03:28मैं अपने आप को माता पिता, समाज और वातावरण का कर्जदार समझता हूँ।
- 1:03:38इसका ऋण चुकाने का कर्तव्य भी समझता हूँ।
- 1:03:42इसका ऋण चुकाना हमारा कर्तव्य है। लेकिन मेरा अपना भी एक अस्तित्व
- 1:03:48है अपने शरीर का पालन पोषण और इसकी रक्षा करना।
- 1:03:54यह मेरा कर्तव्य भी है तो मुझे किस ढंग से अपना जीवन यापन करना
- 1:04:02चाहिए? और कृपया ये भी बताएं कि माता
- 1:04:08पिता एवं पुत्र पुत्री के बीच के संबंध का आधार क्या होना चाहिए और
- 1:04:13इसके लिमिटेशन क्या है अगर कर्ज शब्द को तुम प्रयोग न करो, बैठें।
- 1:04:22और ज्यादा बढ़िया है कर्ज शब्द ऋणात्मक वेब से पैदा करता है।
- 1:04:32कर्ज की जगह अगर कर्तव्य शब्द का तुम इस्तेमाल कर लो तो ज्यादा
- 1:04:36बढ़िया है। यह एक विधायक जिम्मेदारी होती है
- 1:04:40प्रत्येक व्यक्ति की। समाज के प्रति, माता पिता के
- 1:04:45प्रति और वातावरण के प्रति वातावरण को शुध रखो, पानी को शुध
- 1:04:51रखो, हवा को शुध रखो, धरती को शुध रखो, यह वातावरण की जिम्मेदारी
- 1:04:57है, तुम्हारी कर्तव्य है, ऋण नहीं।
- 1:05:03उसी तरह माता पिता का कर्तव्य है तुम्हारा समाज का भी कर्तव्य है
- 1:05:10समाज का कर्तव्य जो तुम कर सकते हो वो कर इस हिरण के रूप में मत
- 1:05:18रहना इसको। ऋण तुम्हें दबा देगा, ऋण तुम्हें
- 1:05:21डिप्रेशन में ले जाएगा कर्तव्य की तरह अगर तुम काम करोगे तो वह एक
- 1:05:31विधायक है कि यह मेरा कर्तव्य है कि अगर मेरे पास ज्यादा समय है।
- 1:05:39तो मैं अपने अंतः समय जाकर खोजु कि मैं हूँ कौन सबसे पहला कर्तव्य
- 1:05:44तो आपका यही है, बाकी की बातें आप छोड़ दो अगर व्यर्थ के सवाल के
- 1:05:54जवाब में तुम समय को बर्बाद करते रहे।
- 1:06:03तो फिर अपने भीतर कब्जाओगे उस प्रश्न विहीन अवस्था में तुम
- 1:06:10उतरोगे कैसे? अगर तुम ऊल जलूल प्रश्नों के जवाब
- 1:06:16ही मांगते रहे? तो वह जो परम कर्तव्य है,
- 1:06:22तुम्हारा जिसकी पुकार तुम्हारा रोवा रोवा भीतर से कर रहा है और
- 1:06:29तुम्हें पता भी नहीं है कि यह पुकार कहाँ से आ रही है?
- 1:06:38सीधी सीधी बात समझ लो। बात को इतना घुमाओ मात्र है, यह
- 1:06:48घुमाना अहंकार की आदत है। मैं समझता हूँ तुम्हारा अहंकार
- 1:06:54नहीं सभी का अहंकार बचना चाहता है।
- 1:07:01फिर वह खाली वक्त में भी। एनजीओ चलाना चाहे कि चलो लोग भलाई
- 1:07:08कर ले। मैं हमेशा ये कहता हूँ भाई लोग
- 1:07:13भलाई से करने से पहले स्वयं की भलाई कर लो।
- 1:07:22जो फूलकली बनकर अपने भीतर सुगंध को संग्रहीत नहीं करेगा।
- 1:07:29वह जब अपनी पंखड़ियाँ खोलेगी करी तो महक को बिखरेगा कैसे?
- 1:07:35क्योंकि महक तो इकट्ठी नहीं होती। तुम्हारा समाज के प्रति कर्तव्य
- 1:07:46कुछ भी नहीं, समाज ने तो तुम्हारे दिमागों पर बड़े बंधन थोपे।
- 1:07:52भूल जाओगे इसको माता पिता का कर्तव्य है हरण नहीं हरण शब्द
- 1:08:00लेकर। तुम अपने आपको डिग्रेड न करो
- 1:08:06कर्तव्य शब्द विधायक तुम अपने कर्तव्य का कर्तव्य भगवान कृष्ण
- 1:08:23ने भी कहा कि तुम? कर्तव्य कर्म कर जो करना उचित है
- 1:08:33वह कर कर्तव्य कर्म को अगर तू करेगा तो ऋण मुक्त सेम ही हो
- 1:08:43जायेगा। ऋण है ही नहीं, फिर।
- 1:08:48तो ऋण शब्द को भूल जाओ, किसी का कोई ऋण नहीं है, किसी का ऋण शब्द
- 1:08:57ने मार दिया, लोगों को या पितृ ऋण है या देव ऋण है या ईश ऋण है।
- 1:09:06यह मातृ पितृ ऋण है। नहीं भाई कोई ऋण नहीं, हम जनम कर
- 1:09:13लिए, हम तो कर्जदार पैदा हुए नहीं, कोई ऋण नहीं होता, तुम्हारे
- 1:09:20ऊपर कर्तव्य है, अगर तुम करो तो ठीक नहीं करो, तो तुम ठीक।
- 1:09:27क्योंकि एक कर्तव्य जिसने यह सृष्टि बनाई, तुम नहीं पूरा करोगे
- 1:09:32तो वह पूरा कर देगा। तुम उसको भूल भूल जाते हो।
- 1:09:37तुम्हें पता नहीं अगर तुम नहीं पूरा करोगे, स्वयं को सेंटर मत
- 1:09:42मानो। इगोइस्टिक व्यक्ति स्वयं को सेंटर
- 1:09:48मानता है सेंटर मानो जो वास्तव में सेंटर है और सेंटर कौन है
- 1:09:54परमात्म्य तुम्हारे ऊपर कोई ऋण है, ऋण उसका ऋण वह।
- 1:10:01अपने आप पूरा करेगा जिसने जन्म दिया और उसने पहले से सारा कुछ कर
- 1:10:06दिया, सूरज बना दिया, बीज बना दिया, धरती बना दी, पानी बना
- 1:10:13दिया, हवा बना दी, उसने पहले से तुम्हारी जरूरतों का इंतजाम कर
- 1:10:17दिया। बच्चा जन्म लेता है, पर महात्मा
- 1:10:23अपना कर्तव्य पूरा करता है। माँ के सत्नों में दूध उतराता है।
- 1:10:28इससे पहले दूध नहीं था और उसके ऊपर कोई कर्ज भी नहीं है।
- 1:10:34वह तो लीला खेल रहा है तुम्हारा यहाँ है।
- 1:10:41फिर मेरा कहाँ हुआ और तुम्हारे कान पर तो जून नहीं रहेंगी या
- 1:10:48तुम्हारे हृदय के भीतर नहीं उतरा, मैं कहता हूँ, है तो सब लीजा तुम
- 1:10:54कहते है तो ये कर्ज फिर तुम समझे कैसे?
- 1:10:59तुम ज़िन्दगी को कृष्ण की तरह कैसे जी पाओगे?
- 1:11:02तुम ज़िन्दगी को मेरी तरह कैसे जी पाओगे?
- 1:11:05मैं चौबीसों घंटे आना तुम्हें और मुझे किसी चीज़ की कोई जरूरत नहीं
- 1:11:11है, ना कोई स्वाद चाहिए, ना कोई भ्रमण करना है।
- 1:11:18न कहीं जाना है, न कहीं आना है। फिर तुमने सीखा क्या मेरे शब्दों
- 1:11:26से या मेरे जीवन से तुमने शिक्षा का आग्रहण की, तुम ज़रा उसके ऊपर
- 1:11:35छोड़ के तो देखो। तुम स्वयं को कर्जदार क्यों समेत
- 1:11:40हो? क्या वह तुम्हें कर्जदार करके
- 1:11:44पैदा करेगा? उसकी लीला है, तुम कर्जदार नहीं
- 1:11:53हो, तुम पात्र हो उसकी लीला के बस?
- 1:11:58जो पात्रता तुम्हें मिली है, जो रोल तुम्हें मिला है उस पर शिकायत
- 1:12:03मत करो, यह है बात कम अगर तुम्हें दास की मुमकादी की गुलाम के तो
- 1:12:13उसे सहज और शिखा कि ठीक। और अगर तुम्हें राजा बना दिया गया
- 1:12:20भूमि का है, राजा का भी यहाँ कुछ नहीं होता, वो तो बता देती है कि
- 1:12:28तुम्हारे यहाँ कुछ नहीं था, यह तो मेरा खेल था, लेकिन तुम संभलेते
- 1:12:34कहाँ हो? तुम समझते कहाँ हो?
- 1:12:39यह लीला है किसी का, किसी के ऊपर कोई कर्ज नहीं है।
- 1:12:45परमात्मा अपना खेल खेल रहा है। मुझे लोग कह देते हैं अगर बाबा
- 1:12:53तुम्हें आके मैं मार दूँ। तो क्या यह भी परमात्मा की लीला
- 1:12:58होगी? मैंने कहा बिलकुल यह भी परमात्मा
- 1:13:02की लीला होगी। तुम चाहो तो अभी आ सकते हो और
- 1:13:09मैंने तो अपनी कवर खुदवा ली है। ये सब लीला है वह जिसने बनाया
- 1:13:24तुमने तो कुछ बनाया भी नहीं फिर तुम कर्जदार कैसे हो गए?
- 1:13:28तुम को साथ भी नहीं लेके जाओगे फिर तुम कर्जदार कैसे हो गए?
- 1:13:34फिर तुम कुछ साथ लेके आए भी नहीं थे तो कर्जादे के साथ आए थे।
- 1:13:39परमात्मा इतना गुनहगार हो गया कि परमात्मा ने तुम्हें कर्जदार करके
- 1:13:44भेज दिया। वह बड़ा विराट है, बड़ा विशाल है
- 1:13:50बे परवाहियाँ तेरीयाँ तेरा बड़ा डा बे प्रवाह।
- 1:13:56मैं बहुत बेपरवाहों का बेपरवाह उसे किसी चीज़ की परवाह ही नहीं
- 1:14:02है। वह लापरवाह नहीं है समझना वह
- 1:14:06बेपरवाह है। इन दोनों में फर्क है, तुम उसको
- 1:14:11लापरवाह मत गिनो। वह बेपरवाह है, उसके घर किसी चीज़
- 1:14:16की कमी नहीं है, वह वीपन्न नहीं है, वह महान संपन्न है, वह
- 1:14:24क्षुद्र नहीं है। वह परम विराट है और अपनी लीला को
- 1:14:28खेल रहा है। नानक विगसह कर विचार और अपनी लीला
- 1:14:38को अपनी ही बनाई हुई मूर्तियों के लीला को देख देख के खुश होता है,
- 1:14:43प्रसन्न होता है, विगसह खुश होता है।
- 1:14:48वह अपनी खुशी के लिए बनाता है भाई तुम्हारे लिए थोड़ी बनाता है।
- 1:14:52तुम इसको कर्ज फर्ज क्यों समझते हो?
- 1:14:59मैं जानता हूँ तुम्हारी समस्या कहाँ है और इसी मूल समस्या के जड़
- 1:15:05को। मैं खत्म करने के लिए सारा कुछ
- 1:15:11बोल दिया अज्ञात बोल दिया रहस्य बोल दिया लीला बोल दिया अब और
- 1:15:16बोलना तो कुछ बाकी नहीं, एक तो अज्ञात बोलना बाकी है, वो मैं बोल
- 1:15:21रहा हूँ। बोलना बोला तो नहीं जा सकता वो
- 1:15:34लेकिन फिर भी बोल रहा हूँ किसी का यहाँ कुछ नहीं है मात्र दावे है
- 1:15:42फोंके तुम करती रहो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 1:15:48सिकंदर आया, उसने दावा किया शृंगेज आया उसने दावा ठोका न कर
- 1:15:55इतना तकव्वर जहाँ इकरोज फानी है देखिए 1 दिन राजा भी लुढ़क जाता
- 1:16:06है। क्या उसकी इच्छा होती है कि मैं
- 1:16:08लडक जाऊं? नहीं, वो गद्दी नहीं छोड़ना
- 1:16:11चाहता, बहुत बढ़िया फेविकोल न जाने कहाँ से ढूंढ के जाता है?
- 1:16:17हम तो नहीं उठेंगे लेकिन मौत? मौत छुड़वा लेती है, उससे और तुम
- 1:16:31तो तुम्हारे गुरुओं को टाँगें फिरते हो, फेबिकोल लगा के टंगे
- 1:16:35रहो यहाँ यह गुरु गुरु का फर्ज निभा रहे हो या दंड दे रहे हो,
- 1:16:44लेकिन मैं जानता हूँ। तुम्हारा अपना इसमें निहित
- 1:16:49स्वार्थ है। अच्छा खाने पीने को मिलता है।
- 1:16:52वो कहते हैं, मूंड मुड़ाये तीन गुण सिरकी मिर्च जाए खाज योगी
- 1:16:58आदित्यनाथ जी सुन में मूंड मुड़ाये तीन गुण।
- 1:17:03सिर के मट जाए खाज खाने को अच्छा मिले ये बगा वस्त्र क्यों पहना
- 1:17:09भाई? क्या इसके बिना बात नहीं चल सकती
- 1:17:15थी? यह लोगों को गुमराह करने के लिए
- 1:17:17ही पहना गया। मूंड मड़ाये तीन बूंद सिरकी मिट
- 1:17:23जाए खाज खाने को अच्छा मिले और लोग कहें महाराज भला गेरुआ
- 1:17:35वस्त्रधारी कभी धरती पर धरती पर किसी भी काल में।
- 1:17:43सिंहासन ग्रहण किया है। कभी इतिहास में कोई ऐसा व्यक्ति
- 1:17:50हो जो गेरुआ धारण करके राजसी कुर्सी पर बैठ गया हो?
- 1:18:03यहाँ तो दमा चौकड़ी है सर अरे भाई, गेरुआ वस्त्र का मतलब है कि
- 1:18:10संसार से तुम व्रत हो गए हो तुम जाओ अपना अपना खोजो हू आर यू?
- 1:18:18हूँ एमआइ रिमेम्बर यूरसेल्फ़ जी क्या राजभाज की यहीं से तुम्हारा
- 1:18:27दोगलापन स्पष्ट होता है। सर की खाज मिटा दिया तुमने खाने
- 1:18:36को अच्छा मिले। लोग कहें महाराज राज़ करने लग गए
- 1:18:47इन लोगों की। मुझे समझ नहीं आती या आरएसएस वाले
- 1:18:51या बीजेपी वाले या किसी भी पार्टी वाले मुझे समझ नहीं आती ये चाहते
- 1:18:56क्या? राज़ करना चाहते हैं तो राज़ करने
- 1:19:02का तरीका है सिंघाशियन पर बैठना राज़ करना नहीं होता सिंघाशियन
- 1:19:08वाले तो अष्टा बकरों के चरणों में लोटपोट हो जाते हैं।
- 1:19:14राज़ ही करना है तो अपने अंत में उतरो, मैं तुम्हें राज़ बताता
- 1:19:18हूँ, कैसे होगा राज़ कर रहा हूँ? मैं देखिये बे झिझक बोल रहा हूँ,
- 1:19:26बेबाक बोल रहा हूँ और चौबीसों गड्ढे राज़ कर रहा हूँ।
- 1:19:32तुम कहते हो बाबा अगर हम तुम्हें मार देंगे तो यह भी ली लाओगी अगर
- 1:19:36तुम मुझे नहीं मारोगे तो क्या परमात्मा मौत नहीं मुझे मारेगी?
- 1:19:42ज़रा बताओ मुझे उत्तर दो अगर तुम मुझे नहीं मारोगे तो क्या मौत भी
- 1:19:48मुझे नहीं मारेगी? 1 दिन ये शरीर खंडहर बन जाए, चाहे
- 1:19:57तुम गोलियों से मार दो, चाहे मौत मार दे।
- 1:20:05लेकिन यह ढांचा तो 1 दिन स्कैटर होगा ही होगा।
- 1:20:10यह तो बिखराव होगा ही होगा। इसका तो और लीला है भाई लीला सब
- 1:20:22लीला है तुम्हारा, यहाँ कुछ नहीं, तुम ही नहीं हो तुमने अपना नकली
- 1:20:28में बना लिया। यह मैं नकली है और नकली मैं बनाकर
- 1:20:35तुम दुखी हो जितना ज्यादा दुखी हो, तुम समझ लेना परपोर्शनेटली
- 1:20:43अनुपातिक रूप से तुम उतने ही अहंकार से युक्त हो।
- 1:20:50जितनी तुम दुखी हो उतनी ही अहंकार से युक्त हो सीधी सीधी मैंने
- 1:20:56तुम्हें व्याख्या दे दी भरपूर से नीड ली अनुपात रूप से कर्ज फर्ज
- 1:21:06तुम्हारे ऊपर कुछ। तुम विराट के यूनिवर्स के मंच का
- 1:21:13एक हिस्सा हो, वह जैसे नचाये नाचो तुम मैं को बीच में मत लेके आओ और
- 1:21:22जब तुम अपने जीवन की नैया। उस व्याराट के हाथों में सौंप
- 1:21:28दोगे तो ऐसा नहीं कि तुम चारपाई पे सोए ही रहोगे तो मैं एक बात
- 1:21:36मैं समझा दूँ आखिर में इसे नोट कर लेना यह।
- 1:21:43एक व्यक्ति सारी उम्र सो नहीं सकता।
- 1:21:49तुम कितने घंटे सो गए? किसी को तो रात भर नींद आती ही
- 1:21:56नहीं। मौत का 1 दिन मैयन है।
- 1:22:02नींद क्यों? रात भर नहीं आते 4 घंटे, 6 घंटे
- 1:22:12और ये पागल कहते हैं कि हम तो 2 घंटे में तुम्हारी नींद पूरी करते
- 1:22:15हैं कि कहाँ जाना है भाई कहाँ भागना है और भागकर जो पैदा करोगे
- 1:22:22उसका क्या करोगे? ये संस्था जिनके हाथों को तुम
- 1:22:27मजबूत करना चाहते हो, ये संस्थाओं जिनको पैरालायसिस हो गया है याद
- 1:22:34रखना एक ज़ररत तुम्हारे साथ नहीं जायेगा, क्या ये भी मुझे याद करना
- 1:22:40पड़ेगा? तुम सारी उम्र तक सो नहीं सकते।
- 1:22:532 घंटे 4 घंटे, 10 घंटे, 20 घंटे आखिर में तुम उठ जाओगे तुम चार
- 1:23:04पाई पर पड़े पड़े करवटें भी तो नहीं बदल सकते सारी उम्र?
- 1:23:09मेरी इस बात को ध्यान से समझ लेना सारी उम्र तुम मैंने कहा मैं
- 1:23:1725,00,00,000 दे दूंगा तो एक कमेंट आया, बड़ा प्यारा लगा मुझे
- 1:23:21कहते हाँ, अब कोई काम नहीं करना पड़ेगा।
- 1:23:26मैं तो मोज से सुनूंगा और सोता ही रहूंगा।
- 1:23:31मैंने कहा फिर भी तो कवर हो गई। पुत्र सोए हुए थे, चैन से उठे हुए
- 1:23:37कफन यहाँ भी सता नहीं आ गए। किसने पता बताती?
- 1:23:44तुम सारी उम्र के लिए सो नहीं सकते, ये शरीर तुम्हें तंग करेगा,
- 1:23:53कभी शिनान मांगेगा, कभी खाना मांगेगा, कभी घूमना फिरना
- 1:23:59मांगेगा, कभी कहेगा कुछ बाहर जाके दिखाओ।
- 1:24:03कोरोना में लोग बाहर निकल जाते थे।
- 1:24:06सड़क से पार क्या हो रहा है? और पिछवाड़ा सुझा के आते थे तो
- 1:24:17इनके पकौड़े तल देते थे कि तुम तालाबंदी में बाहर आए तो क्यों
- 1:24:25आए? मैं तो बस यूँ ही देखने आ गया
- 1:24:28कहाँ चैन मिलता है तुम्हें? तुम सारी उम्र सो नहीं हो सकते,
- 1:24:35लेकिन एक अंतिम बात तुम्हें बता दूँ, तुम सारी उम्र ध्यान में रह
- 1:24:39सकते हो, चौबीसों घंटे तुम सो नहीं सकते।
- 1:24:44चौबीसों घंटे तुम जाग भी नहीं सकते।
- 1:24:49ये जागरण वाले 246 घंटे, 8 घंटे के बाद आरती पढ़ देते हैं और घरों
- 1:24:55को जाके सो जाते हैं। ना चौबीसों घंटे तुम सो सकते हो,
- 1:25:01ना चौबीसों घंटे तुम जाग सकते हो, चौबीसों घंटे तुम एक काम कर सकते
- 1:25:05हो क्या जो तुम्हारा अंतिम लक्ष्य है चौबीसों घंटे तुम ध्यान में हो
- 1:25:13सकते हो चौबीसों घंटे तुम ध्यान का रस भी।
- 1:25:19वो तुम्हें उबाता नहीं कभी 1 दिन तुम्हें सदा सोना भी उबा देगा।
- 1:25:31सोने से भी तुम उब जाओगे तुम कहोगे ये विज्ञान थोड़ा सैर सपाटा
- 1:25:35करके। यहाँ पड़े पड़े क्या चारपाई तोड़
- 1:25:40रहे हैं? लेकिन एक बात तुम्हें बताऊँ ये
- 1:25:45लक्षण भी है। पांचवे व्यक्ति का लक्षण भी है,
- 1:25:51वह उबेगा बोर नहीं होगा? यह ध्यान का रस इतना मधुर है, यह
- 1:26:00प्यार इतना शांत कर देता है, कोई वटकन शेष नहीं होती और तुम उस रस
- 1:26:09के प्यारे को चुस्कियां भरते ही रहते।
- 1:26:14कभी तुम वो होते। मखन चोरु नन्द किशोर जो मखन चोरु।
- 1:26:35नन्द किशोर जो कर गयो मन की चोरी रे सुध
- 1:27:00वो काला इक भा सुरी वाला वो काला। इक भां सूरीवाला सुध बिसरागयो
- 1:27:22मोरी रे सुध बिसरागयो। माखन चोर नंदकिशोर जो कर गयो मन
- 1:27:46की। चोरी रे
- 1:28:03वो कला इकबाल।