Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Aug 25 - पंचे पावहि दरगहि मान।। मान और अभिमान में क्या अंतर है? Dark Truth about Dera’s.
Transcript
- 0:04बाबा जी प्रणम मैं आयरलैंड से हूँ, मेरी भारत यात्रा के दौरान
- 0:18मैंने आपको। ऋषिकेश में अपने मित्र द्वारा
- 0:25यूट्यूब पे सुनते हुए पहली बात सुनो, हिंदी न जानने के कारण मैं
- 0:35वह वीडियो समझ नहीं पाई। कि आप क्या कह रहे हैं, लेकिन
- 0:44आपकी वाणी के मनमोहक जादू को मेरी आत्मा ने महसूस किया।
- 0:52उसके बाद से मैं आपकी वीडियो को एआई की मदद से।
- 0:57इंग्लिश में कन्वर्ट करके सुन रही हूँ मैं एक मुसीबत में फंस गई।
- 1:17इस मुसीबत में बैठी दुनिया का हर तीसरा व्यक्ति है।
- 1:25मैं किसी वक्त विस्तार से इसका बरना करूँगा हो सका तो इसका कुछ
- 1:39उपाय भी बताने की चेष्टा करूँगा। लेकिन अभी इसका मेडिकल उपचार
- 1:50कराते रहो। सहयोग के लिए बेटे को क्रायोग
- 1:58करवाओ जितना अधिक से अधिक हो सकता है।
- 2:03क्रिया योग मानसिक बीमारियों के लिए रामबाण है।
- 2:11क्रिया योग करने वाला व्यक्ति कभी पागल नहीं होगा।
- 2:20क्रिया योग करने वाला व्यक्ति कभी विक्षिप्त नहीं होता।
- 2:27चिंतित उदास हो सकता है। विक्षिप्त और पागलपन की पकड़ में
- 2:33वह नहीं आएगा इस बिमारी के वास्ते।
- 2:41मैं बिमारी का नाम नहीं लेना चाहता हूँ।
- 2:45परीक्षणकर्ता का नाम भी मैंने नहीं बोला, लेकिन मुझे इतना पता
- 2:51है कि संसार का हर तीसरा व्यक्ति इस बिमारी से जुड़ता है।
- 3:00कभी आप मुझे याद करा देना, मैं इसके ऊपर पूरा प्रवचन, इसके लक्षण
- 3:10और इसका उपाय और इसकी मेडिसिन और सर्दी।
- 3:15जो भी होगा, मैं आपको बताती हूँ। हम दूसरा प्रश्न थे बैंक वर्क
- 3:26कनाडा से आया सरणजीत सिंह आपने कल के प्रोजेक्ट में बोला बाबा।
- 3:35जपजी साहब के दुख पंचां पावी दरगाह मान अब आप रहस्य के बारे
- 3:48में बड़ी, गहरी, गहरी और सुंदर, रोचक और रोमांचक बातें कह रहे।
- 3:56तो क्यों ना हम भी पूछ ले पंचा पंगई, दरगाह, मान, मान और
- 4:12स्वाभिमान में क्या फर्क है? बड़ा सुन्दर?
- 4:23सुंदर से सुंदर प्रश्न जो इस जगत में किए जा सकते हैं, उनमें से एक
- 4:32प्रश्न ये भी है भूल गए थे किसी ने पूछा?
- 4:44स्वाभिमान, अभिमान, शब्द सुन, अभिमान और मान बाबा जी ने बता
- 5:02दिया मान कैसे मिलेगा? पंचम पांवई दर का मान जब तुम अपने
- 5:15साग को परमात्मा की अमानत के रूप में सौंप दोगे, उसके हाथों में तो
- 5:24उसकी दरगाह से तुम्हें मान मिलेगा।
- 5:29तुम्हारे रोम रोम की सुगंध बदल जाए, आनंद गहरा हो जाएगा।
- 5:41कहीं मन न लगेगा स्वयं अपने अंतःस्थ।
- 5:49ये लक्षण विकास खो जाएंगे, विचार खो जाएंगे, वासनाय खो जाएंगे, सब
- 6:04उत्पाद खो जाएगा, कोलाहल खो जाएगा, सन्नाटा आ जाएगा।
- 6:15दुख है दरिद्र रौ की शोक सब समाप्त हो जाएंगे।
- 6:24अब आइए हम गहरे में चलते हैं। शरणजीत का प्रश्न बड़ा प्यारा है।
- 6:34मान और अभिमान में क्या फर्क है? मुझे विश्वास न था।
- 6:46इतने गहरे प्रश्न भी पूछे जाएंगे। लेकिन पूछने वाले व्यक्ति आज भी
- 7:00रोशनाई खो नहीं गई। राइट सेगमेंट राइट ने एक शब्द कहा
- 7:14था, सुबह से शाम तक 2472 मनुष्य जो भी काम करता है और काम वासना
- 7:26के। दर्दगर्द नहीं करता है उसके कारण
- 7:33ही करता है सत्य ही ज्ञान था, समुद्र की लहरों तक मैं झाँका था
- 7:47समुद्र में गहरा नहीं गया था। लेकिन यह ज्ञान भी अच्छा क्योंकि
- 7:55एक सीढ़ी बन जाएगा उस तक जाने की जो तुम्हें लहरों के पास समुद्र
- 8:06के उस तल में। जहाँ घोर शांति है जहाँ लहरों की
- 8:15गड़गड़ाहट नहीं जहाँ हलचल नहीं लहरें ऊंची आसमान तक उठती नहीं,
- 8:29तुम वहाँ पहुँच जाओगे। तो एक बार तुम्हें मैं भी कह दे,
- 8:41सेगमेंट फ्राइड का ये शव थोड़ा सा पे उठेगा।
- 8:47मैं उससे जो भी कुछ करता नहीं सम्मान के लिए करता है।
- 8:57और बाबा ने तुम्हें बता दिया कि सम्मान कहाँ मिलेगा, कैसे मिलेगा,
- 9:04फिर दोहरादून सम्मान मिलेगा उसके हाथों में, अपने आपकी जीवन की।
- 9:11नैया की पतवार सौंप देने से तुम अपने को ही सौंप दो, अपने को ही
- 9:17दान में दे दो, परमात्मा दो तो तुम्हें उस दरगाह में मान मिलेगा
- 9:23निश्चित अभिमान के लिए। शब्द कोई भी लगा लो लेकिन अर्थ
- 9:32मैंने बोलती है स्वाभिमान के लिए अभिमान के लिए व्यक्ति कुछ भी कर
- 9:39सकते हैं अभी तुम्हें एक छोटी सी घटना बता।
- 9:52नाम क्या ले? फिर बहुत से भगत मेरे पास आ जाता
- 9:57है। किसी धार्मिक संप्रदाय जिनका एक
- 10:09गुरु वृत्तावस्था में पड़ा। दसियों से मैं वापस आऊंगा।
- 10:24ये शब्द कहीं होंगे, किसी वक्त या उड़ा दिए होंगे।
- 10:32यह संसार सारा मान अभिमान की अंकाक्षा में चल रहा है चाहत है
- 10:42सही सही स्वादिष्ट रस की उस सम्मान की आवश्यकता है जो सुदरगाह
- 10:51में मिलता है। चाहत है आनंद के रस के बाबा के
- 10:59शब्दों में वो मान है तुम भटक जाते हो।
- 11:07रस का गलत पकड़ लिया है। तो तुम अभिमान को कमाना शुरू कर
- 11:16देते हो, स्वाभिमान को कमाना शुरू कर देते हो, धन कमाते हो, पूजियों
- 11:22का अंबार लगा देते हो। पदमियां कमाते हो, सर्वोच्च
- 11:27पदमियां पाप भी जाते हो, मारकाट करते हो, सिकंदर की तरह लाखों
- 11:37लाशों को विजा देते हो और संसार से बिना कुछ लिए विदा हो जाते।
- 11:49इन सब चीजों के पीछे अनकक्ष पे सेगमेंट फ्रॉड कहता है कि इसके
- 11:56पीछे है काम वासना मैं तुम्हें कहता हूँ कि इसके पीछे है अभिमान
- 12:00की इच्छा। कैसे दुनिया मुझे याद रखें?
- 12:07प्रस्तावेशिक रूप का यह जड़ है कारण है फाउंडेशन है प्रत्येक
- 12:22व्यक्ति की बेतरी चाहत। उस रस को पाने की लेकिन जब वह वो
- 12:31रस नहीं पा सकता है, शास्त्र गुमराह कर देते।
- 12:38गुरु गुमराह कर देते हैं, मार्गदर्शक गुमराह कर देते हैं और
- 12:43वो उस रस को पी नहीं पाता। तो फिर क्या करता है?
- 12:50ये नकली रस को पाने की चेष्ठा करता है और नकली रस को पाने की
- 12:59चेष्ठ में। तुम जमीन जायदाद बैंक तो बैलेंस
- 13:07बड़े बड़े बंगले गारें कोठियाँ जहाज तक के गलत है कोई कोई तो
- 13:18भारत रत्न भी के। और तुम्हारे भीतर का स्वाभिमान
- 13:28भूल के कोपाध्य जिसे अभिमान ध्यान रखना ये दो शब्दों का फर्क सदा ही
- 13:36याद रखते है मान और अभिमान मैं दोनों शब्दों का प्रयोग करूँगा।
- 13:42अभिमान और स्वाभिमान ये दोनों एक बात है।
- 13:46और अकेला मान यह अलग बात है चाहते हो तुम मान जो मिलता है उसकी
- 13:55दरगाह से इकट्ठा करते हो तुम अभिमान स्वाधमान जो मिलता है
- 14:03पदार्थों से। पदबियों से, सम्मान से, बाहर के
- 14:08लोगों के सम्मान से, पांव पूजने से, नाम से, दंडौलत से, जमीन से,
- 14:19जायदाद से, पुत्रपोतरादि से। वंशों से चोट जाते हो उस
- 14:34वास्तविकर को, ये है शुरुआत। पहले तो व्यक्ति चेष्टा करता है
- 14:46कि कैसे उस रस में उतर जाऊं गहरा लेकिन क्या करें जब मार्गदर्शक
- 14:57सच्चा नहीं मिलता? झूठे गुरु पंडाल लगाए बैठे हैं और
- 15:09ये धन इकट्ठा करने वाले लोग आपको सोने की पुषा के पहन के लालायित
- 15:14करते हैं। ये बड़ी पद्मियों पर बैठे हुए लोग
- 15:19आपको लालायित करते हैं। छः छः बार वस्त्र बदलकर साड़ियां
- 15:24बदलकर तुम्हें उत्साहित करते कि देखो मैं सुखी हूँ, वास्तविकता तो
- 15:35ये है। एक ही व्यक्ति संसार में सुखी
- 15:45जीसको उस दरगाह से मान मिले वह सुख वह संतुष्ट वह तृप्त, वह ठहर
- 15:54जाएगा वह भागदौड़ने में। सही चाहत तुम्हारी वो ही है।
- 16:12प्रत्येक व्यक्ति की चाहत थी कि मैं कैसे पालू सरस उपनिषद में
- 16:20जिसका वर्णन किया रसोब वैसा है। वह रसूख खोज करता है।
- 16:29गुरुओं के पास जाता शास्त्र कंगाल आपका झाँकी सब कर लेता लेकिन नहीं
- 16:37मिलता, क्यों नहीं मिलता? शस्त्र से मिलता है गुरु कमीने हो
- 16:52गए लोभी हो गए हैं लालची हो गए। इकट्ठा करना, जानते बांटना नहीं
- 17:04जानते और यह एक कला है जो बांटने से ही समझाई जा सकती है।
- 17:18कंजूस व्यक्ति कभी बांटना नहीं चाहता।
- 17:24कंजूस व्यक्ति इकट्ठा करना चाहता। ये उसकी कंजूसियत की निशानी
- 17:35इकट्ठा करेगा और यह सम्पदा ऐसी। के बांट में से बढ़ती है।
- 17:46जितनी बांट हो उतनी बढ़ती है। जिनके पास ये संपदा है वो
- 17:54बांटेंगे हाँ, इसको आप सर्किल में देखो।
- 18:01जिसके पास असली सम्पदा है, वह बांटे।
- 18:10बाबा ने कहा, वंड छको बांट के को यह असली सम्पदा की बात करते।
- 18:23जीस भी व्यक्ति के पास वो संपदा आ गई असली आ गई उसके भीतर एक लक्षण
- 18:34भी आ जाएगा। वह बांटना शुरू कर देगा।
- 18:42बांटना लक्षण है। किसको मिल गया?
- 18:51लेकिन कोई क्या करे? जब नकलची बंदर असली संत की नकल
- 19:01उताटना शुरू कर दें, बांटना शुरू कर दें।
- 19:04पांडाल लगा के टोपियां पहन के जो कहने लगे आओ मेरे पास है मैं
- 19:14दूंगा। सरल तरीके से दे दूंगा।
- 19:21किसी के पास कुछ नहीं, सिर्फ है मेरे पास वह नकली।
- 19:37नकली गुरु तो मैं उस तल पर ले जा नहीं सकता क्यों?
- 19:43क्योंकि वह उस तल का पता नहीं जानता।
- 19:49क्या ठोर क्या ठिकाना? क्या मार्ज कौन सी संकरी गली, कौन
- 19:57सी उबड़ खावड़ पर राहें वहाँ तक जाती हैं अज्ञात मार्ग है कभी
- 20:06पहले गए नहीं अनदेखा। अनसोचा अन खोजा रहा है वो आपको
- 20:24बताएगा कैसे? जो पहुंचा वो ही बताएगा, वो आपके
- 20:34संग संग चलेगा, आगे चलेगा बस अनुकरण करना, पीछे पीछे चले जाना।
- 20:51गुरु आगे चलता शिष्य छाया की तरह चलता और 1 दिन वहाँ पहुँच जाता
- 20:59जिसकी तलाश थी और तुम्हें मान की तलाश है।
- 21:06तुम्हारा दुर्भाग्य है कि तुमने मान की तलाश को अभिमान की तलाश
- 21:11में बदल दिया। वो तुम्हारी मजबूरी भी है।
- 21:16मान मिला नहीं तो क्या करें? असली सिक्का नहीं मिला तो नकली
- 21:24सिक्का ही इकट्ठा कर ले। इसी चाहत ने तुम्हें मार डाला।
- 21:40इसी चाहत ने तुम्हारे जीवन का रस सोक दिया।
- 21:47चाहत थी उस परम रस के पास पहुंचने की।
- 21:52देखिये तुम कितनी भी कीचड़ से लिप्त हो गए हो तो हीरे हीरे ही
- 22:03थे आज सच हीरे ही हो, हीरे ही रहो।
- 22:09जुगाद सच है भी सच नानक हुसैन भी सच कभी आपने खुद को हीन भावना से
- 22:22मत? इनफिनिटी कॉम्प्लेक्स हाइक हीन
- 22:33भावना आई तो संभल जा। विदेश के लोग जो सुनना मुझे पसंद
- 22:41करते हैं वो एआई का इस्तेमाल करके इसको अपनी भाषा में कन्वर्ट कर
- 22:46सकती हैं। ये सभी लोगों के लिए है।
- 22:56तुम्हें कोई भी बिमारी है, याद रखना सब बीमारियों के एक ही दवा
- 23:01होती है। सब रोगों का एक इलाज है।
- 23:05वो इलाज है उस रस तक पहुंची जो जो भी उस रस तक पहुँच गया उसके सब
- 23:15रोग समाप्त हो गए। पीढ़ाई समाप्त हो गई, अभाव समाप्त
- 23:20हो गए, दरिद्र समाप्त हो गए। कष्ट, चिंता, क्लेश आज सब समर्थ
- 23:28हो गए जो वहाँ पहुँच गए एक साथ है सब सद है एक को साध लो सब सत जाय
- 23:44और अगर तुम सभी को साधने लगे। तो फिर कोई भी नहीं सादेगा तुम
- 23:52बाइपोलर हो जाओगे, डिसऑर्डर से ग्रस्त हो जाओगे तुम मल्टीपोलर हो
- 23:58जाओगे मल्टीडाइमेंशनल हो जाओगे। तुम्हारे जीवन ऐसे गुजरेगा जैसे
- 24:12की तुम्हारे धरती पे अनम व्यर्थ हो।
- 24:16ये जिंदगी बड़ी बहुमूल्य थी। हीरा जन्म अमोल था।
- 24:25कौड़ी बदले जाए, लेकिन इन दुष्टों में इन प्रवचनकर्ता इन झूठे संतों
- 24:38में। इन झूठे महात्माओं ने निजी
- 24:44स्वार्थों के निहित आपको गुमराह करके आपको चुप सुनेगा, मिलेगा।
- 24:52इन्हें भी कुछ नहीं ध्यान रखना। खाली हाथ तो ये भी जाएंगे सिकंदर
- 24:59ही नहीं अकेला जाता, लेकिन तो मेरा क्या कसूर था?
- 25:08तुम तो निर्दोष थे, तुमने क्यों गुमराह किया?
- 25:15अब मैं बोलता हूँ तो लोग मुझे कहते हैं बाबा निंदा अच्छी नहीं
- 25:19होती। मैंने कहा निंदा तो अच्छी नहीं
- 25:22होती, आलोचना भी अच्छी नहीं होती क्या?
- 25:28क्या लोचन से जो चीज़ देख ले वह भी ठीक नहीं होता?
- 25:35नहीं कहना चाहिए कि जिधर जारी हो कुआ है भाई आगे घर जाओ कहना चाहिए
- 25:44अगर तुम आँखों वाले हो तो तुम्हारा दायित्व बनता है।
- 25:50इट्स ए ड्यूटी ये तुम्हारा कर्तव्य है।
- 25:55क्या तुम बता दो? कहाँ जा रहा है तू है जान वाले?
- 26:14कहाँ जा रहा है? तू है, जान वाले अँधेरा है, मन का
- 26:31दिया तो? जला ले अँधेरा है मन।
- 26:40का? दिया तो जला ले कहाँ जा रहा?
- 26:54जाने वाले कहाँ जा रहा? फर्ज़ बनता है, बिलकुल फर्ज़ बनता
- 27:05है और जिन्होंने देखा उन्होंने। ऐसे दुष्ट लोगों को प्रताड़ित
- 27:15किया। पाथर पूजा हरी मिले तो मैं पूज
- 27:19हूँ पहाड़ अगर पत्थर के पूजने से हरी मिल जाता है तो मैं पहाड़ को
- 27:24पूज लूँ, एवर वर्स्ट ऑफ दी माउंटेन्स।
- 27:35तुम कहते हो मूर्तियों से मिल जाये, तुम छोड़ो मैं अँगड़े पत्थर
- 27:41को फूल दो, लेकिन क्या करें पत्थर से वह मिलता?
- 27:50मिलता है तुम्हारे समर्पण मिलता है तुम अपने आपको दान कर दो उसके
- 27:56हाथ वैसे भी तो तुम्हारा कुछ नहीं।
- 28:02अंत में तुम यही तो पाते हो। प्रत्येक शरीर का अंत तुम्हें बता
- 28:09देता है तुम्हारा कुछ नहीं और फिर जब तुम उस चरम ध्यान से सुनें, इस
- 28:18बात को प्रत्येक जीवन का अंत तुम्हें बता देता है कि तुम्हारा
- 28:23यहाँ कुछ नहीं। जो इकट्ठा किया वो सुन नहीं जाता।
- 28:28गद्दियां छूट जाएंगी धन के अंबार, छूट जाएंगे पुत्रपुत्रादि छूट
- 28:33जाएंगे स्त्री पुरुष ही छूट जाएंगे मित्र दोस्त छूट जाएंगे
- 28:39रिश्तेदार सब यहीं रह जाएंगे, कमाया धमाया सब यहीं रह जाएगा।
- 28:45ना ये जेब जाएगी ना जेब वाडा जाएगा धड़म से घर पड़ोगे इस धरती
- 28:52पर प्रत्येक मृत्यु का अंत तुम्हें बताया जाता है व्हाट एस
- 28:58दी ट्रुथ सच्चाई? और व्यक्ति जब संबोधि जीवन का वो
- 29:14छ जहाँ अंतिम सत्य घटित होता है, जब वहाँ जाता है तो वो पाता है।
- 29:24यहाँ तुम्हारा कुछ नहीं, तुम ही नहीं, तुम ही नहीं हो तो मान गए
- 29:35को तो बाबा कहते हैं, जब अंत में तुम यही तो पाओगे, हम नहीं यही
- 29:40बात। तो बाबा कहते तुम्हारे यहाँ कुछ
- 29:44नहीं, तुम ही तो नहीं हो तो मर जीवड़े क्यों नहीं हो जाते?
- 29:55किसी वक्त क्यों नहीं अपने आप को उसकी गोद में शरण ले लेते?
- 30:03बाबा कहते हैं दान कर दो अपने आप को सच्चा मान मिलेगा तुम्हें पंचे
- 30:11पांव दर का घर से तो तुम चलते हो उस रस की तलाश।
- 30:24घर से तो हम चले थे, खुशी की तलाश में गमराह में खड़े थे वो ही सात
- 30:32होली है ये परमात्मा के खेल नराले।
- 30:46अजब तेरी कुदरत अजब तेरे खेल छछुंदर के सर में चमेली का तेल
- 30:57उसकी कुदरत निराली। वो पीने चले थे तुम काश कोई न
- 31:09मिला मुझे आज तक ये समझ नहीं आया ये लोग लोभ किस चीज़ का?
- 31:27मुझे उत्तर मिला नहीं मेरे भीतर से बाहर का उत्तर, मैं मानता हूँ
- 31:38मेरे भीतर से जब आप आये। ये छड़े छाँट जो इनके पास ना
- 31:51घरवाली, ना बालवच्च ना कोई। वो ये अपना साम्राज्य क्यों बढ़ा
- 31:58रहे हैं? और वेशभूषा इनकी संतोष।
- 32:19बाबू? जी धीरे चलना प्यार में।
- 32:28ज़रा संभलना बड़े धोखे हैं। बड़े धोखे हैं इस राह में बाबू जी
- 32:44धीरे चलना। प्यार में ज़रा संभलना ये गैरवे
- 32:53वस्त्र पहनने वाले का क्या करेंगे, क्या करेंगे जमीनों का
- 33:03मुझे आज तक समझ नहीं आया। अगर तुम्हें समझाया हो तो बता दे।
- 33:13पूरी चेष्टा करके भी मैं नहीं समझ पाया कि ये कच्छा का ही को करते
- 33:22हैं। ये पागलपन है।
- 33:25यह वस्तुता इनके जीने का ढंग संत के लिवास में लिपटे हुए ये
- 33:40रोक सैकड़ों एकड़ हजारों एकड़ के मालिक जोड़ रहे हैं।
- 33:49पूंजी बढ़ती जाती। बस मुझे यही समझ नहीं आता ये
- 33:55करेंगे क्या? हमारे पंजाबी में एक कहावत।
- 33:59है। रणनी काननी तीनी पुतनी लंडा चिड़ा
- 34:07बड़ाता साथ थी। ती तोरने नी नो ल्याणी नी।
- 34:15ये पैसे कब करेंगे? क्या जो जरूरतमंद है समझाती भूखा
- 34:29रोटी मांगता है। आवास नहीं जिसके पास घर मांगता,
- 34:37ठंडी लग रही वस्त्र नहीं वो वस्त्र मांगता बात जचती है, लेकिन
- 34:44ये छेड़े छाँट लुक आपको पता है? धरती की आदी संपदाएं इन लोगों के
- 34:52पास और मुझे आज तक समझ नहीं आई इन्होंने इस संपदा का करना क्या
- 35:05है? एक बाबा नानक है।
- 35:13जिनको व्यापार करने के लिए उनके पिता थोड़े से पैसे थमा देते हैं
- 35:22और वो उन पैसों से भूखे संतो की भूख को नवारण करते हैं, समझ आता
- 35:28है। कंबल खरीदने गए थे।
- 35:40भूखों को शांत करना पहले पहला कर्तव्य है कंबल तो बाद में भी
- 35:45खरीद लेंगे। क्यों इकट्ठा करते मुझे नहीं
- 35:50समझाइए। शायद इनको पता हो लेकिन एक बात
- 35:56बताऊँ पता ही नहीं अभी ये इकट्ठा क्यों कर रहे दौड़ रही, लेकिन पता
- 36:05इनको भी नहीं कि क्यों दौड़ रहे हो।
- 36:09इससे ही मैं बेहोशी रहता हूँ। जो दौड़ते दौड़ते संत जाग गया, वह
- 36:18हुशी में आ गया। वह मैराथन की इस दौड़ से निकल
- 36:22जाएगा और दौड़ से बाहर सड़क के किनारे आराम से बैठ जाएगा।
- 36:29इन दौड़ते हुए लोगों को देखेगा। और हँसें क्यों दौड़ रहे हो?
- 36:38यह तो एक वृत्ताकार है। यह दौड़ कभी खत्म नहीं होगी।
- 36:43संसार एक चक्र है और चक्र का अर्थ जो कभी खत्म नहीं होता, चक्र कभी
- 36:50खत्म होता है। सर्कल कभी खत्म होता है, व्रत कभी
- 36:54खत्म होता है, दौड़े जाओ, दौड़े जाओ, कभी खत्म हुआ फैसला खत्म
- 37:01होता है, सर्कल कभी खत्म नहीं होता, व्रत कभी खत्म नहीं।
- 37:10फिर ये क्यों दौड़ते हो? बस अज्ञानी अज्ञानता के कर दौड़े
- 37:20चले जाते चाहे उच्छ्वस्त स्थान पर बैठ गए।
- 37:29चाहे इतना धन इकट्ठा कर लिया हो, लेकिन बांटने का मन नहीं करेगा और
- 37:40जोड़तें भी किस लिए हैं, ये मुझे तो नहीं समझ आया।
- 37:49पंचापमी दरगाह, मान अभिमान के लिए अभिमान और मान में फर्क मैंने
- 37:58समझा दिया। अभिमान शब्दगत चीजों को इकट्ठा
- 38:06करने के लिए या इलूशन को क्रिएट करने के लिए हम सदा ही प्रयोग किए
- 38:18अभिमान मत कर तू। अभिमान रे बन रे छोटी तेरी शान
- 38:37रे। मत कर तू।
- 38:43अभिमान, अभिमान, अभिमान न कर घर से तो हम चले थे खुशी की तलाश में
- 38:57हम मान के लिए चलते रस के लिए चले थे धरती पे ऐसा मानव खोजना
- 39:03मुश्किल। आज भी जिसने कुछ पा लिया वो भी
- 39:08भिक्षापत्र उठाई क्यों खड़ा? क्योंकि घर से चला था मान की तलाश
- 39:14में मान नहीं मिला, अभिमान मिला अभिमान से कोई संतुष्ट नहीं होता।
- 39:22स्वाभिमान से संतुष्ट नहीं होता। स्वाभिमान से आत्मा जागृत नहीं
- 39:27होती, स्वाभिमान से आत्मा तृप्त नहीं, बस यही फर्क अभिमान और मान
- 39:37अभिमान के लिए लोग अपनी जिंदगियां निछावर कर देते हैं।
- 39:41और आपको जानकर हैरानी होगी अभिमान के लिए लोग अपनी जिंदगी को मृत्यु
- 39:48में बदल देते हैं। जानबूझकर मुझे बताने में संकोच भी
- 39:55हो रहा है, मैं संशय में नहीं। संकोच में अवश्य क्योंकि मैंने
- 40:06इतना बोला मूडो को कुछ समझ नहीं आया इस लाश को कितने सालों तक धो
- 40:15के? और तीन वर्ष पहले मैंने बोला यह
- 40:25कभी नहीं लौटेगा, लेकिन मूड ऐसे है कि बाहर ढोल की छैना लिए
- 40:34खड़काई चली जा। जया सुतोष महाराज की जया उसे
- 40:43सुनाई भी नहीं पड़ती वो भटकता फिर रहा है अब एक बात आपको बता मैंने
- 40:54कहा मैं संख्या में नहीं। संकोच संकोच में ऐसी भी है।
- 41:03जमीन खा गई ये अस्थमा कैसे कैसे ये तुम्हारी मूड़ मतियां ये
- 41:14तुम्हारी मूड़ मान्यताएँ कैसी कैसी जवानियों को निगल गई।
- 41:22जमाने ने मारे जमा, कैसे कैसे? जमाने में मारे जमा कैसे कै जमी
- 41:49खा गई आसमान? कैसे कैसे जमाने ने मार जमा कैसे
- 42:09कै। एक शादी का बोली मैं लेके आउंगी
- 42:14वापस। बड़े दुख की बात है जब जीवन में
- 42:23कुछ न मिला जब आशुतोष के बताए हुए संदेशों से।
- 42:34क्रियाकलापों से विधियों से कुछ न मिला तो फिर जीवन अनर्क हो गया और
- 42:43खुद वो भी न रहा। अब तो सब एक झूठ और पाखंड मक्खारी
- 42:49लग रही थी उस साथी को। उसने मरने का निर्णय लिया।
- 43:09मरना भी ऐसा हो कि लोग मुझे याद रखें जीने में तो कोई सार आया
- 43:16नहीं। ना आशुतोष की विधियों में कोई सार
- 43:20आया अन्यथा कोई मरने की चेष्टा क्यों करेगा?
- 43:25अगर कुछ मिल जाता तो जब गुरु आएँगे, आयेंगे, आशुतोष का काम ही
- 43:30आगे बढ़ा देती। बिल्कुल अगर मिल जाता तो आशुतोष
- 43:36का काम बढ़ाते, लेकिन नहीं मिला कुछ उसकी लाश को आज भी डोए हैं।
- 43:46मुझे तो भीतर बैठे 13 वर्ष हो गए। मैं जानता नहीं बाहर क्या हुआ,
- 43:51शायद भूँक दिया हो तो भूँक भी दिया हो।
- 43:54दफन कर दिया। वो तो कर भी दिया वो मुझे पता
- 43:56नहीं पूछुंगा ये वीडियो बना के पूछुंगा कि क्या हुआ महाराज का
- 44:05वापस लौटे नहीं लौटे लौटेंगे तो नहीं, मैंने पहले ही बताती हूँ।
- 44:17क्लीनिकली डैड डकला तुम्हे कोई यह डॉक्टर कह दे थोड़ा सा कि थक्का
- 44:27फंस गया है। तुम झट से कहोगे बाईपास पर।
- 44:35और उसके तो थक्के ही थक्के है। सारा शरीर जम गया मोटे मोटे पत्थर
- 44:42बन गए हैं उसके खून के कैसे होगा रक्त संचार?
- 44:52कैसे पिघलेगा ये खून पागल हो गए हो क्या?
- 45:02और इनमें पढ़े लिखे रोग भी हैं। बड़े मज़े की बात बड़े बड़े
- 45:06डॉक्टर भी हैं। अच्छे अच्छे पढ़े लिखे लोग हैं।
- 45:11लेकिन पढ़े लिखे लोग ज्यादा पागल होते हैं मोरू कुछ पूरे सारे कुछ
- 45:22समझी जाती हैं कुछ ऐसे डेट के समिति।
- 45:32अग्रिय जिंदा भी हो गया इस क्लीनिकली डैड, इसके भीतर पत्थर
- 45:37ही पत्थर जम गए, खून के थके जम गए अव्वेंस।
- 45:46मैं कैसे खून पास करें और शरीर में कितनी ब्रेन्स हैं, कितनी
- 45:52ब्रांचेस हैं, कितनी आर्टरीज हैं, आर्ट्स से कितनी जाती हैं, कितनी
- 45:57ब्रेन को जाती हैं, कैसे होगा सर्कल रिपीट समझ में आता है आपके।
- 46:06मैं साइंटिफिक बात कर रहा हूँ मेडिकल नहीं हो सकता इट इस नॉट
- 46:14पॉसिबल इम्पॉसिबल है, लेकिन मैंने कहा।
- 46:21जमीं खा गई आसमान कैसे कैसे इतमाड़ी मूड़ मान्यताएँ कितने
- 46:29कितने लोगों के निगल गए तुम महाशक्तियां के निगल गए वह बतला
- 46:41के गया जो कुछ ठीक नहीं था। कोई पहुंचा, कोई पहुंचा उसने डेरी
- 46:51की जी, मैं इकट्ठी की झगड़ा किसका इस जमीन का झगड़ा, इसकी मरकियत का
- 46:59झगड़ा। न उसको अग्नि भेंट करते, न इनका
- 47:04फैसला होता। ये झगड़ा तो जिंदगी में कुछ मिला
- 47:12नहीं। जहाँ मान मिलता दरगाह, वहाँ तक ये
- 47:18पहुंची नहीं थी सर्द। मरने का निर्णय ले लिया फिर मरना
- 47:23ही है, मरना ही है बड़े दुख की बात है तो सम्मानपूर्वक क्यों न
- 47:35मारा जाएगा? शहीद हो के क्यों न मारा जाए?
- 47:42समर्पित सादिका की तरह क्यों ना मरा जाए?
- 47:46आज भी शायद उसकी मृत्युदेह पड़ी होगी।
- 47:49मुझे पता तो नहीं आश्रम के भीतर की भाँति में जानता हूँ।
- 47:57अब प्रवचन बोल के मैं खबर सा लूँगा।
- 47:59क्या हुआ उसका जो बेचारी साधिका इनकी लपेट में आ गई, दुष्ट
- 48:07मान्यताओं की उसका क्या हुआ? मुझे विश्वास है कि मुझे यही जवाब
- 48:14मिलेगा कि उसकी समाधि बना दी गई। लेपन करके उसको भी गुरु के बराबर
- 48:22लेटा दिया गया। ऐसा ही कुछ मुड़ताएं मुझे
- 48:25मिलेंगी। मुझे विश्वास है ऐसा लेकिन उसने
- 48:31क्या किया? वह कोई दहे चोट न जानती थी,
- 48:34बिल्कुल नहीं जानती थी। जो कला शंकराचार्य में थी, वही
- 48:43साधिका में नहीं थी। शंकराचार्य देह को छोड़ सकते हैं।
- 48:50ये कला है लेकिन इस शातिका में ये कला नहीं होती।
- 48:57और आपको एक और बात बता आशुतोष के भीतर भी यह कला नहीं होती, वो भी
- 49:05अभी इस कला से बांझे थे। उनको भी यह मुकाम यह कला अभी आई न
- 49:11थी। समाधि तक जाया जा सकता है।
- 49:17भीतर पर्थ को धीमा किया जा सकता है।
- 49:23ब्लड प्रेशर को धीरे किया जा सकता है।
- 49:262030 पे लाया जा सकता है कोई बहुत बड़ी बात नहीं और जिंदा रहा जा
- 49:30सकता है। ये कुछ योग एक क्रियाएं हैं।
- 49:36उसमें निष्णा तो होना पड़ता है। ये कोई चमत्कार नियम है, प्रकृति
- 49:44के नियम है, शरीर के नियम है, इन्हें बांधा जा सकता है, इन्हें
- 49:49साधा जा सकता है। लेकिन उसने सादिक ने क्या किया ना
- 49:59रहेगा। बास ना बजेगा बास?
- 50:02ब्लड प्रेशर ही जीरो कर दो। उसने ब्लड प्रेशर लो करने की दवाई
- 50:08खा ली। अति मात्रा में शायद उसका शरीर आज
- 50:17भी नींद की गोलियां खानीं ब्लड
- 50:31प्रेशर को लो करने की गोलियां कर। और धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे
- 50:38ब्रेन की सप्लाई बंद ब्रेन को ब्लड की सप्लाई बंद ब्रेन को ब्लड
- 50:48प्रेशर लोग। फटनी काम धीरे धीरे धीरे धीरे
- 50:53करते करते बंद हो गया। ब्लड प्रेशर लो होता होता शून्य
- 51:03हो गया, शून्य हो गया, मर गई शहीद हो गई।
- 51:10यह कहानी व्यक्ति मर भी सकता है अभिमान के लिए स्वभिमान के लिए
- 51:22व्यक्ति मर भी सकता है। यह एक ऐसी दुष्ट प्रक्रिया है।
- 51:32सीधा राह तो लोग जानते नहीं, तो फिर जब मिला ही नहीं तो फिर क्यों
- 51:39ना मरा जाए और जब मरा ही जाए तो क्यों ना सम्मान की मृत्यु मरा
- 51:43जाए? ऐसा ही कुछ इस साधिका के जीवन में
- 51:47हुआ। कौन करेगा?
- 51:56न्याय? कौन करेगा?
- 52:00शायद कोई नहीं बोलने वाला। मैंने बोला पांच सात बार इस धर्म
- 52:09के बारे में बोला एक कान से सुनो दूसरे से वातावरण में चला।
- 52:24क्या किया जाए? ना तो मसला पहुंचने का है, ना
- 52:29मसला भगवान का है ना मसला किसी चीज़ का है।
- 52:33आज मसला है डेरे की संपत्ति मूल रूप से डेरे की संपत्ति का विवाद।
- 52:42किसे मिले, कौन होगा मालिक और खुश?
- 52:45विभाग में बाकी तो चक्की के दो पाटों में पिस रहे श्रद्धालु।
- 52:53इसके सिवाव उन्हें मिला कुछ नहीं। भजन गा लेंगे, कीर्तन कर लेंगे
- 52:59ढोलक छैने खड़का लेंगे। हारमोनियम को बजा लेंगे दो चार
- 53:04अल्फाज़ हैं वो बकवास हैं इन्होंने खुद जाने नहीं जो जाने
- 53:11नहीं वह बकवासी तो हुआ करता है जो जाना वहीं रूपांतरित करे लातों
- 53:20में। जो पढ़ लिया, जो मान लिया जो देख
- 53:25लिया, जो सुन लिया वह तुम्हारे जीवन को रूपांतरित नहीं करेगा।
- 53:30तुम ही रोटी खाओगे तो भूख बढ़ेगा, तुम ही पानी पीओगे तो प्यास
- 53:35बुझेगी किसी के पानी पीने से, किसी के भोजन खाने से।
- 53:40तुम्हारी भूख नहीं बचे, तुम्हारी प्यास नहीं बजे।
- 53:48आज वो बेला आ गया जब गुरु तेग भगत का बेला था।
- 53:57मुझे बोला क्या है जफरनामी पे कुछ बोलिए सरदार सुपाच में लिखा गुरु
- 54:03गोविंद सिंह जी बोलेंगे मुझे याद करा देना पूरा जफरनामा बोलेंगे उस
- 54:12जफरनामी का वह फर्जी में। फारसी मैं भी बताऊँगा और उसका
- 54:18हिंदी अनुवाद भी बताऊँगा और उसका थीम भी बताऊँगा।
- 54:24और उससे जफरनामे ने क्या किया ये भी बताऊँगा।
- 54:28जफरनामा पढ़ते पढ़ते ही औरंगजेब ने खटिया पकड़ी, गिर गया मूर्छित
- 54:36और ऐसा गिरा ऐसा गिरा फिर उठना सका।
- 54:42फिर उसने गुहार लगाई कि मैं तुमसे मिलना चाहता हूँ गुरु लेकिन गुरु
- 54:49गोविन्द से वो जीते के मिल ना सका।
- 54:55क्योंकि वो मर गया तो मुझे पूछते हैं कि जफर नामी बड़ी शानदार
- 55:12धार्मिक सियासत भी थी। धार्मिक प्रबुद्धता भी थी।
- 55:20एक न्याय की प्रक्रिया भी थी जो से रफरनामे में समाधि हुई।
- 55:26ऐसे शानदार अववाद प्रयोग किए गुरु गोबिंद सिंह जी ने।
- 55:36क्यूरिंग जेब की अन्तःआत्मा हिल गई, झकझोर दी गई और वह 88 साल का
- 55:45बूढ़ा गच के गिर पर मिलने की तमन्ना की तुमसे मिलना चाहता हूँ
- 55:53प्रयासरत करना चाहता हूँ। गुरु गोबिंद सिंह जी ने लिखा कि
- 55:58तू ने मेरे चार पुत्र खा लिए, तू मेरी माता को निकल गया।
- 56:10तुने कस्मे खूं कुरान के। और खेद की बात कि तू सच्चा
- 56:19मुसलमान भी न निकला क्योंकि कसमें कुरान की झूठी निकली तो मुसलमान
- 56:29बनने के भी योग्य नहीं है और ये शब्द उसको तीर की तरह लगा है।
- 56:36मैं घायल हो के गिर पड़ा और गिरा ऐसा गिरा के मर गया।
- 56:41खैर, इस जफरनामे को मैं विस्तार से बताऊँ।
- 56:45यह फारसी में लिखा गया है। 1705 में उन्होंने लिखा।
- 56:52और शायद 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हो गई।
- 56:58जहाँ तक मुझे याद आता है मान और स्वाभिमान और अभिमान में यह फर्क
- 57:12है। अभी माँ के लिए इस शादी का नहीं
- 57:18जीवन पर दान कर दिया और तुम भी तो जीवन पर दान कर देते एक नंबर का
- 57:24अमीर होना है ज़िन्दगी दांव पर लगा दी कि नहीं लगा दी कुछ नहीं
- 57:32है कर्ज कुछ नहीं है। मलंग है।
- 57:35एक नंबर का कबीर भी हो सकता था लेकिन गैर वे वस्त्र पहनकर ही
- 57:48संतुष्ट हो गया, संतुष्ट हो गया। दिमाग संतुष्ट हो गया।
- 57:57आत्मा तड़पती रहेंगी क्योंकि आत्मा जानती है कि मुझको खोजा गया
- 58:05या नहीं। खोजा गया दिमाग को तो तुम शांत कर
- 58:08सकती। कितने 1000 करोड़ की तुम संपत्ति
- 58:14बना लो करोगे क्या इन्हें? मैं क्या कहूँ?
- 58:24संतत्व की परिभाषा समझाऊं या स्वामी की परिभाषा समझाऊं?
- 58:29क्या ये स्वय के आयाम में स्थित हैं या धन के आयाम में स्थित हैं?
- 58:41खुद ही फैसला करेंगे। अब मूल रूप भी आ जाये।
- 58:49थीम पे आ जाएं, मोरल पे आ जाएं प्रत्येक व्यक्ति की कामना उस
- 58:56दरगाह में मान पाने की है उस दरगाह में मान मिलता है आनंद की
- 59:06शक्ल। वह पारितोषिक है, गिफ्ट है,
- 59:12परमात्मक किसी किसी को नसीब होता है।
- 59:22ये वो नगमा है जो हर साल से गाया नहीं जाता।
- 59:31मोहब्बत के लिए कुछ खास तिल मकसूस होते हैं।
- 59:37मोहब्बत के लिए कुछ खास तिल मकसूस होते हैं।
- 59:41ये वो नगमा है जो हर सास पे गाया नहीं जाता।
- 59:48हर सास पे गाया नहीं जाते। प्रेम हर हृदय में उत्पन्न होता
- 59:55है, कोई कोई हृदय है जो इसको सुना सकता है?
- 1:00:03अनसा तो दुविधा में ही लोग आते हैं और दुविधा में ही चले जाते
- 1:00:09हैं। प्रत्येक व्यक्ति को मान की तलाश
- 1:00:19है और मान मिलेगा उसे दरगाह से और मान कहते हैं आनंद कुंज।
- 1:00:25यह उसका खजाना है, बरा पड़ा है, आनंद का समुद्र है, आनंद का खजाना
- 1:00:35है जो कभी चुभता नहीं, कभी गड़ता है सारे में से सारा ही निकालो।
- 1:00:51तो भी सारा ही बचेगा वो। पूर्णमदहा पूर्णमिदं पूर्णा
- 1:01:04पूर्णमदक्षके पूर्णस्य पूर्णमादाएं पूर्णमविवाह शिष्यते
- 1:01:10उस पूर्ण में से पूर्ण भी निकालो तो पूर्ण ही बचता।
- 1:01:16यह कोई गणित नहीं। यह वस्तुस्थिति है।
- 1:01:21यह स्थिति है तुम इस संसार का एक कण भी कभी बना नहीं सकोगे।
- 1:01:30यह बना कैसा? ये जान भी नहीं सकोगे।
- 1:01:35डींगें मार सकते हो, डींगें मार सकते हो सिर्फ।
- 1:01:38और तुम्हारी पहले कृष्ण आइए मोरल प्याज प्रत्येक व्यक्ति की
- 1:01:45प्रत्येक जीवंत प्राणी मनुष्य के लिए यह भीतरी आकांक्षा है कि कैसे
- 1:01:54वो आनंद को पाजाये। आनंद वह खुशी है जो कभी चुखती
- 1:01:58नहीं, जो घटती नहीं, जो चुभती नहीं, उसे ही कहा शास्त्रों में
- 1:02:06उपनिश्चित में पुणश्यपूर्ण महादायु पूर्ण मेवा वशीष्यते वह
- 1:02:13कभी घटता नहीं। उस तक पहुँचना है तुम्हारी
- 1:02:19अंतरात्मा उसके लिए प्यासी तुम्हारा अंतः व्याकुल है उसके
- 1:02:27लिए जीस दिन वह मिल गया उस दिन तुम ठहर जाओगे।
- 1:02:34पूर्ण रूपेण ठहर जाओगे, लेकिन तब तक तो भागते ही रहोगे कुछ भागते
- 1:02:42हुए पागलपन में तुम क्या कमाओगे कुछ पता नहीं वो तुम्हारे काम का
- 1:02:47नहीं है धन कमालो पदवी कमालो। सनमान कुमारो कुछ भी कुमारो कोई
- 1:02:55काम न पड़ेगा पूछा मान मान तो इस सिर्फ उसकी दरगाह में मिलता है और
- 1:03:05वो मिलता है जब तुम अपने आपको खो दोगे?
- 1:03:10तुम खोते हो तो वह होता है। हाँ इसको सर तुम खोते हो तो वह
- 1:03:18होता है तुम अपने आपको खोने को दिया।
- 1:03:30बाहर के पदार्थों की लश्क इतना खींच लेती है तुम्हें और उस लश्क
- 1:03:38का तुम्हें अभी पता ही नहीं, बस यही दुविधा है वह लक्ष्य का तुमने
- 1:03:45एक थोड़ा सा हिस्सा भी कभी जान लिया होता।
- 1:03:48तो यह लश्क तुम्हें प्रभावित नहीं कर सकती।
- 1:03:51यह तुम्हें अपनी और अट्रैक्ट नहीं कर सकती थी।
- 1:03:54यह तुम्हें खींच नहीं सकती थी। बशरती की तुमने उस लश्क का एक
- 1:04:01छोटा सा हिस्सा भी किसी क्षण में निहार लिया होता।
- 1:04:06उसका रस पेरिया होता थोड़ा सा जिसे आनंद कहते हैं तुमने अब तक
- 1:04:11सुख माना, स्वाद माना, सुविधा मानी, आराम माना लेकिन आराम न
- 1:04:20मानो आराम मान लिया, आराम न माना। राम तो तुम जब्तते ही रह गए जब्त
- 1:04:27ने सुबह कभी मिलता तुम्हारी वास्तविक तलाश है उस दरगाह में
- 1:04:38मान पाने की वह मिजता नहीं गुरु लोग वहाँ तक पहुंचे नहीं, तुम्हें
- 1:04:44पहुंचा नहीं सकते और रास्ता भी कुछ कठिन है।
- 1:04:49उबड़ खाबड़ है अज्ञात है अगर कोई पहुंचाने वाला मिल भी जाए तो तुम
- 1:04:55उस स्थल पे जाके कहोगे गुरूजी मेरे माँ बाप भी हैं, मेरे भाई
- 1:05:02बहन भी हैं तुम कम फचाओगे। गुरु भी करे तो क्या करे कोई एक
- 1:05:15चिराग जलता मिल जाता, वह कोशिश करता तो कप जाती हूँ सब भाभी कह
- 1:05:24तुम्हारा कंपनी। लेकिन क्या होगा अनुगुरवों का?
- 1:05:29जो खुद पहुंचे ही नहीं तो मैं पहुंचा कैसे पाऊंगा?
- 1:05:34शिविर लगा लो, कुछ भी कर लो डेरों में बैठ जाओ, आसन जमा कहीं मिला,
- 1:05:44कभी आनंद किसी को मिला। कभी मिला किसी को अगर मिला होता
- 1:05:54तो मैं तुम्हें एक निशानी बता दूँ।
- 1:05:57जीसको मिल जाता है, वह फौरन डेरे से उठ जाएगा।
- 1:06:04वह फोर्न आश्रम से उठ जाएगा और कहीं कहीं एकांत में बैठ जाएगा।
- 1:06:14डेरों में भी शौर आश्रमों में भी शौर वहाँ चला जाएगा वह व्यक्ति।
- 1:06:24जहाँ शोर नहीं है भीतर भी चला गया उसी तल पर जहाँ शोर नहीं और बाहर
- 1:06:31भी उसी तल पर चला जाएगा जहाँ शोर नहीं।
- 1:06:37अभी तो तुम शोर ही कर रहे हो राधे राधे करो राम राम करो शोर ही तो
- 1:06:43कर रहे हो शोर से शोर तक ही पहुंचोगे ये तो अभी तुम्हें
- 1:06:51समझाया ही नहीं तुम्हारे समझाने वालों ने शोर से।
- 1:06:56मौन नहीं मिलता भाई कैसे मिलेगा शोर से कोलाहल से मौन मिलेगा
- 1:07:05कैसे? भटकन से ठहराव आएगा।
- 1:07:09कैसे कभी दौड़ से रूकना हुआ है क्या?
- 1:07:17तुम्हारी दौड़ जारी रहेंगी। रुकना नहीं, तुम्हारी अंतरिम
- 1:07:24अंतिम जरूरत थी। उस आनंद की को तुम पा न सके कोई
- 1:07:31तुम्हें बता न सका। और यह भीद कोई मिटा न सका हमसे।
- 1:07:46आया न गया तुमसे भुलाया न गया। हम।
- 1:08:01से आया न गया तुम से बुलाया न गया फसला प्यार में।
- 1:08:16दोनों से मिटाया न गया हम से आया न गया।
- 1:08:32हम से बुलाया न गया असला प्यार में दोनों से मिटाया।
- 1:08:50न गया हम से आया न गया। जाना तो तुम चाहते हो अड़चन क्या
- 1:09:03है? ये झूठ है, गुरो या लालच है गुरो
- 1:09:07या लौगे गुरो। और तुम्हारी आराम करने की आदत और
- 1:09:18तुम्हारे संस्कार जो रोज़ गहरे होते चले जाते हैं और मेरे पास
- 1:09:24लोग आते हैं। बाबा 40 साल हो गए।
- 1:09:27डेरे में बैठा हूँ। मैंने कहा अब तक तो उठ जाना चाहिए
- 1:09:32था पुत्र, अब तक तो उठ जाना चाहिए था।
- 1:09:386 साल में बुध उठ जाते हैं, 12 साल में महावीर उठ जाते हैं।
- 1:09:46और 36 वर्ष की आयु में तो बाबा नानक उड़ जाते हैं।
- 1:09:50आयु में 17.5 साल की उम्र में उन्होंने सटोरी पाई और 18.5 साल
- 1:10:00बाद उनको संबोधित मत करो। तुम 35 वर्ष से बैठे हुए हैं, तुम
- 1:10:08एक झलक भी ना कहीं ऐसा तो नहीं पुत्र कि रास्ता गलत हो गुरु ठग
- 1:10:16हो बिलकुल ठग मैं रोज़ में रहता हूँ लोग गुस्सा भी हो तुम।
- 1:10:25गुस्सा इसलिए होते हैं कि अगर उनको मेरी बात जच गई तो 35 साल और
- 1:10:3535 सालों को वो सार्थक करना चाहते हैं जो सार्थक आज भी नहीं है और
- 1:10:41कर भी नहीं। क्योंकि लक्ष्य पाएंगे नहीं भटकते
- 1:10:49भटकते मर जाए कौन जीता है तेरी जुल्फ के सर होने तक आह को चाहिए
- 1:11:04एक उम्र असर होने तक। ये तुम्हारे नाम दाम जप तप पांच
- 1:11:10नाम चार नम नहीं कमाएंगे भाई नहीं कमाएंगे तुम्हारी हालत पे।
- 1:11:31रोना आता है तुम पे रोना आता है तुम्हारी हालत पे रोना आता है
- 1:11:45लेकिन क्या करे मजबूर? तुम्हारे संस्कार बीच में आड़े आ
- 1:11:52जाते हैं। इच्छा तो बहुत है, किसकी इच्छा
- 1:11:59नहीं कि मैं उस आनंद के मुकाम पर पहुंचा हूँ जो गुरु तुम्हारी
- 1:12:04चोंकड़ी मारे बैठे हैं। इच्छा उनकी भी है कि आनंद के भीतर
- 1:12:08कैसे पहुंचाऊ? पहुंचे होते तो झूठ न बोलते।
- 1:12:18बस ये लक्षण जो पहुँच गया वह झूठ न बोलेंगे।
- 1:12:24क्यों बोलेंगे जो विराट हो गया? वे लोग क्यों करे जो विराट हो
- 1:12:33गया? जो सब कुछ हो गया, जो मैं ही मैं
- 1:12:36हो गया, जिसके लिए दूसरा न बचा, निर्भय हो गया, निर्भय हो गया,
- 1:12:46उसको और क्या चाहिए? वह छोड़ देगा।
- 1:12:56सप्ताम जाम, ये पकड़, ये गर्व आगे से आगे गदियाँ देते जाना ये रोगी
- 1:13:07हैं खुद और तुमको भी रोगी ही बना के छोड़ जाएंगे।
- 1:13:14बड़ी शानदार करके सोंची समझी। साजिश राजनीतिज्ञ लोग हैं, ये
- 1:13:24किरदार में के नहीं के आएगा, अंतिम में गुरु आएगा।
- 1:13:28तुम्हारा हाथ पकड़ेगा, ले जाएगा, सच खंड में ले जाएगा, कहाँ है सच
- 1:13:33खंड बताओ और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा तुम्हें पता है मरते वक्त
- 1:13:40व्यक्ति तीन घड़ी पहले ही मूर्छित हो जाता है।
- 1:13:46तुम्हें पता चलेगा गुरु आया तुम्हारी अगली पकड़ी सिर्फ सारी
- 1:13:52उम्र तुम इसी बात पर कल्पना करोगे और तुम्हारी कल्पना ही मरते वक़्त
- 1:13:57सामने आएगी सत्य नहीं होगा उसमें कल्पना में कल्पनाएं ऐसे।
- 1:14:06कल्पनाओं के भीतर में यथार्थ नहीं होगा सत्य नहीं होगा सारी उम्र
- 1:14:10तुमने सोचा कि अंतिम बेला में गुरु आएगा मुझको सच कंड लेके
- 1:14:15जाएगा दिल के बहलाने को बोली भी ये ख्याल अच्छा हमने देखी है
- 1:14:22जन्नत की हकीकत लेकिन। दिल के बहलाने को बाली ये ख्याल
- 1:14:28अच्छा है, सम्मान मिलता है उस दुर्गा में और सभी पाना चाहते हैं
- 1:14:37लेकिन क्या करें ये दुष्ट ये दुष्ट आड़े आ जाते हैं।
- 1:14:44इनकी चाहतें कुछ और हैं। तुम्हारी चाहतें कुछ और हैं,
- 1:14:49लेकिन 1 दिन इनकी चाहतें तुम्हारी चाहतें भी बन जाती हैं, यही
- 1:14:57दुर्भाग्य है। यही दुर्भाग्य है आध्यात्मिकता
- 1:15:03का। तुम चाहते कुछ और थे तुम्हें मिल
- 1:15:10गया कुछ और है। पूरा जन्म खराब हो गया।
- 1:15:17लोग कहते हैं कि तुम्हारे लिए खराब हो गया नहीं इन गुरुओं ने
- 1:15:21खराब किया। अगर आज ये गुरु विदा हो जाएं,
- 1:15:30बिल्कुल तुम पहुँच ही जाओगे। ये गुरु रोग है, ये गुरु
- 1:15:36बीमारियां हैं, धर्म बिमारी है। किशन धर्म इस धरती से उखड़ जाएगा,
- 1:15:47उस दिन समृद्धि भी आ जाएगी, सन्मति भी आ जाएगी और संबोधि भी आ
- 1:15:52जाएगी। न गोविंद हरे मुरारी हे नाथ
- 1:16:14नारायण वासुदेव। श्री कृष्ण।
- 1:16:24गोविंद हरे मुरारी हेनाथ नारायण। वासुदेव।
- 1:16:43पितु मत स्वामी सखा हमार। बिथुमात स्वामी सखा अमर।
- 1:17:14हमार पितमात्र स्वामी स्वामी स्वामी।
- 1:17:31सखा हमार हेनाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:17:51हर मुरारी ए नाथ नारायण वासुदेव। अनन्या चिंतन तो नाम ये
- 1:18:12जनपरिबासति तेशामृत्य व्युक्ताण। योगास्म वहाँ श्री कृष्ण गोविन्द
- 1:18:41हरे मुरार। हे नाथ नारायण वासुदेव यदाजदा।
- 1:18:59ही धर्मस गला निर्भक्ति भारत। अभ्युतानम अधर्मश्य सरदारनम।
- 1:19:23ित्रनाय साधुना विनाशाय यदुष्क्रिता नरम संस्थापना
- 1:19:41शंभवामी। युगे युगे।
- 1:19:58जब जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का फैलाव होता है।
- 1:20:11तब तब मैं धर्म की रक्षा करने धर्म का नाश कर प्रकट होता।