Latest / Baba ji Vijay Vats / 11 Feb 26 - संथारा क्या है? क्या यह आत्महत्या है? उपवास और अनशन: क्या शरीर को कष्ट देना सही है?
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- 0:27बाबा जी प्रणव तहे दिल से शुभ्रान गुरुदेव वैभव भरा आत्मनमन जैन
- 0:44धर्म में। संथारा का क्या महत्त्व है?
- 0:51क्या यह आत्महत्या नहीं है? मार्गदर्शन कर?
- 1:10यह प्रश्न मेरे प्रिय शिष्य ने पूछा है।
- 1:25जब से चैनल की शुरुआत हुई तब से यह पुत्री मुझे सुन रहा है।
- 1:39और कोई प्रश्न जो काम का होता है वैसे सुलझाना क्या संथारा
- 1:55आत्महत्या है? मैं प्रश्न पूछता हूँ क्या तुम
- 2:08संथारा कर सकोगे? करने का विचार है?
- 2:11क्या संथारा एक ऐसी महत्त्व क्रिया है?
- 2:29जिसके लिए इन्द्रियां व्यस्त होंगी।
- 2:32जैसे राम के लिए इन्द्रियां व्रत हैं, कृष्ण के लिए इन्द्रियां
- 2:38व्यस्त होंगे और संसार वह व्यक्ति करता है।
- 2:48जिसके लिए शरीर में न रहा हो तो फिर उसका शरीर को त्याग देना
- 3:04बिल्कुल ऐसा ही होगा जैसे आप अपनी कांच से नीचे उतर जाएं।
- 3:14कार के शीशे दरवाजे बंद कर दे, लॉक कर दे और घर चले जा।
- 3:21आपका घर कार नहीं है, आपका घर कार से कोई भिन्न है।
- 3:35वैसे ऐसे प्रश्न पूछने, वक्त की बर्बादी के अतिरिक्त और कुछ नहीं
- 3:45जब मैं आपको ऐसे ऐसे प्रश्नों के जवाब दे देता हूँ, मुझे पता है।
- 3:50आपको प्रश्न पूछने में तो नहीं आती तो चलो मैं अपनी तरफ से ठीक
- 3:57प्रश्नों को जांच के आपको उत्तर देता हूँ।
- 4:01ये डेल्टा थेटा बेटा गामा रेंज ये किसने पूछा?
- 4:11हमारे उपवास को अति कर देना संथारा उपवास तुम एक वक्त करते
- 4:21हो, तुम्हारी जान निकलने को हो जाती है।
- 4:28तो ज़रा सोचो उस व्यक्ति की क्या हालत होगी जिसने शरीर के ठीक ठाक
- 4:35रहते रहते हैं। सदा के लिए जीवन दायनी शक्ति को
- 4:46छोड़ दिया। यह एक महतपश्य है, लेकिन रोगी के
- 4:57लिए नहीं सवस्थ व्यक्ति के लिए सावरकर जैसा व्यक्ति भी संतरा कर
- 5:08सकता है। और वीर कहलवा सकता है।
- 5:14लेकिन उसके भीतर रोग इतना गहन हो गया था कि उसके पेट में बड़ा दर्द
- 5:19रहता था। फिर उसने 1 दिन पाया महीनों बाद।
- 5:31किस ज़िन्दगी से या मरना अच्छा तो उसने खाना पीना बंद कर दिया।
- 5:38ऐसे ही विनोबा भाभी ने किया। जैसे आप व्रत रखते हो, बीमार तो
- 5:56नहीं होते हो, एक व्रत है कि बिमारी के अंदर भूख ही ना लगे तो
- 6:02आप व्रत रख ले। मन खाने को हो ही ना तो वह वह तो
- 6:09व्रत स्वयं में। स्वयं में भी हो गया एक व्रत है
- 6:18के भीतर तो भूख लगी हो, खाने को भी सब कुछ हो अनुकूल वातावरण में।
- 6:31फिर भी तुम न खाओ वह व्रत और ऐसे व्रत हमारे भारत वर्ष में बहुत
- 6:46आयत में रखे जाते हैं। मैंने ऐसे लोग देखे हैं।
- 6:55जो किसी न किसी बहाने से व्रत रख लेते है।
- 6:58आज एकादशी है, आज अमावस्या है, आज फलां त्यौहार है, जन्माष्टमी है
- 7:06शिवरात्रि आज यह नवरात्र है नोधन। आज गुप्त नवरात्र, नो धन, महज
- 7:17प्रक्रियाएं थीं सवस्थ शरीर को उतना सा भोजन देना।
- 7:29कि इसके भीतर विजातीय द्रव्य निकालने की ताकत बढ़ जाए।
- 7:34जो ताकत भोजन को पचाने में लगती थी, वह ताकत अज्ञात बीमारियां
- 7:43जिनका हमें पता भी नहीं जो अभी जन्म ले रही हैं।
- 7:48या दो चार महीने बाद जन्म लेंगी तो उनको खत्म करने के लिए यह प्री
- 7:56प्लेन्ड थी। पूर्व योजना व्रत रखना शुरू हुआ
- 8:01था तो फिर जो शक्ति अन्न को पचाने में लगती थी।
- 8:08वह आपके रोगों को ठीक करने में लगी लेकिन व्रत आज कोई किया जा
- 8:18रहा है। वह व्रत नहीं है।
- 8:22वो अनशन है, भूखों मरना है, व्रत का महत्त्व उसे पता नहीं।
- 8:37संतारा इस व्यक्ति के लिए इन्द्रियां व्यर्थ होंगे और
- 8:47इन्द्रियां व्यर्थ कब होंगे, जब ये पता चल जाएगा, जान लेगा
- 8:54व्यक्ति। अपनी नगन आँखों से कि यह सारा
- 9:02उपकरण में नहीं, फिर वह गाड़ी से नीचे उतर जाएगा गाड़ी को चलाना
- 9:12बंद कर देगा। इसे ही संसार करते हैं।
- 9:16आप गाड़ी को चलाना बंद कर दो, इससे फूल ही मत दो, गाड़ी रुक
- 9:25जाए। बहुत से जैन मनी, बहुत से जैन
- 9:41मुनियों के शिष्य और बहुत से जैन मनी बड़े जो खुद प्रवचन करते है,
- 9:49उस संथारा के महत्त्व से पूछते है, किसका असली महत्त्व के?
- 9:58तो मैं कहता हूँ, अभी तुम नहीं समझोगे, अभी तुम प्रवचन दे लो,
- 10:05लोगों से पांव छुवा लो, जय जयकार करवा लो, पुष्प वर्शन करवा लो।
- 10:21लेकिन अभी तुम्हें वो असली बात नहीं पता चला कि शरीर बेकार
- 10:27पहुंचा है। शरीर बेकार होता है तो नो दाय
- 10:31शायद वास्तव में मैं हूँ कौन? एक व्यक्ति गाड़ी ही चला रहा है
- 10:44और अचानक उसे याद आता है कि अरे मैं तो जन्मो जन्मो से गाड़ी चला
- 10:50रहा हूँ, गाड़ी से उतरा ही हूँ। फिर 1 दिन उसे याद आता है कि ये
- 11:00गाड़ी ये कलपुर जे यह स्टेरिंग जे ब्रैक यह रेश या कलच यह सब मैं
- 11:14नहीं हूँ। यह तो एक विशनरी है बस तब ये
- 11:20घटना। घटती है और ये घटना क्रांति की
- 11:24घटना है। फिर व्यक्ति संथा रहता है।
- 11:31ये बिलकुल आखिरी पोज़ीशन है लेकिन ऐसे प्रश्न मत पूछो क्यों?
- 11:41क्योंकि जिज्ञासा से नहीं आई। न्यूरॉन्स के भीतर सूचनाओं को फीड
- 11:48करने के महत्त्व से आए। आगे क्या है इसका रास्ता मत पूछो,
- 11:57बजाए इसके मैं कहता हूँ तुम चलो। शुभ होगा।
- 12:03चलने से थोड़ी सी यात्रा कम पड़ेगी।
- 12:08तय हो जायेगा रास्ता प्रश्न पूछते पूछते तो वक्त को खराब करोगे और
- 12:15यही प्रश्न पूछने का वक्त साधना में भी गुज़ारा जा सकता था।
- 12:26इसलिए मैं अपने शिष्यों से कहता हूँ जो वास्तव में शिष्य हैं, जो
- 12:34आज यहाँ इस चैनल पे कल वहाँ उस चैनल पे, वो तो मक्कड़ तरह के
- 12:42फकीर है। और फकीरी कई तरह की होती है।
- 12:55हसा मक्का सूट वूट वाले भी फकीर होते है।
- 13:05सबका माल इकट्ठा करके एक आदमी को दे देने वाले भी फकीर होते है।
- 13:12वो नगद रंग वाली महावीर जैसे लोग फकीर होते हैं।
- 13:16फकीरों की थोड़ी सी क्वालिटीज कई विभिन्न तरह के होते हैं, ऐसे ही
- 13:25संसार करने वाले विभिन्न तरह के होते हैं।
- 13:30एक तो जिनन का छोड़ सुसाइड कर लिया, भोजन खाना बंद कर दिया कि
- 13:41पंख कैसे लटक गए? के गाड़ी के नीचे से दे दिया।
- 13:50चाहे कुछ ऐसी व्यवस्था बना ली, कैसे भी खत्म हो जाए।
- 14:01लेकिन ये लोग दुनिया को ठीक सिखाके नहीं जाते, भ्रम रह जाता
- 14:06है। ध्यान रखना जिसे आप सुसाइड कहते
- 14:13हो, वह परम साधना भी हो सकती है और जिसे आप परम साधना कहते हो, एक
- 14:21टांग पर खड़ा होना। एक पागल मैंने देखा नीचे जुगा
- 14:30रहता दो वर्ष तक नीचे जुगा रहा रीढ़ की हड्डी बिंग अब रीढ़ की
- 14:40हड्डी क्या क्या कसूर कोई कसूर है क्या?
- 14:44उसको तो फ्लेक्सी वाला है। जैसे ही करोगे और 2 साल तक लगातार
- 14:49रखोगे तो अष्ट्राबकरी तो उसने आत्महत्या और संतारा।
- 15:07इसमें जमीन और आसमान का फर्क है। गौर से समझिए बड़ा वारी आत्महत्या
- 15:20का मतलब है कि आपकी कोई वासना पूरी नहीं हुई सोचा था कुछ।
- 15:29हो गया। कुछ आप दुखी हैं, तरस हैं।
- 15:37अपनी इच्छाओं की पूर्ति ना होने के कारण वह एक अवस्था है।
- 15:49जब आप अपने आप को दीन, हीन, दुखी, दरिद्र कंगाल महसूस करता
- 16:07फिर आपके मन में ये बात आती है के जीवन में सुख है ही नहीं।
- 16:19एक आत्महत्या तो यहाँ से उपस्थित है, फिर जीने का फायदा ही क्या
- 16:25है? फिर जीने का कोई अर्थ भी न रहा
- 16:33यानी आपने? आपकी मनोवांछित चीज़ को पायने,
- 16:38आपकी वासन अधूरी रहेंगी। प्रकृति ने कुदरत ने,
- 16:43सर्कमस्टैंसेस ने, माहौल ने समाजने सरकार ने, मित्रों ने,
- 16:52घरबार वालों ने। सगे संबंधियों ने आपका संग नहीं
- 16:56दिया सब विपरीत था। उस अवस्था में आपको जिंदगी जीना
- 17:09बेकार, लगने लगा कि ऐसा भी जीना क्या जीना?
- 17:19यह एक नाकामी की व्यवस्था होती है।
- 17:23यह वैराग्य नहीं है, जान समझना वैराग्य कुछ हो गया यह नाकामी है
- 17:35वासनाओं की। पूर्ति ना होना किसी मिशन में फेल
- 17:41हो गया। अब कल ही मैंने एक खबर पढ़ी।
- 17:52एक व्यक्ति ने अपने घर के पाँचों मेंबरों को मार दिया।
- 17:56अपनी माता को मार दिया, धर्मपत्नी को मार दिया, पिता को मार दिया,
- 18:01दो बच्चे लड़के दोनों को मार दिया।
- 18:04भला किसी व्यक्ति को किसी का जीवन लेने का अधिकार थोड़ी तुम्हारी।
- 18:15मानो इच्छाएं अगर पूरी नहीं हुई, अगर पूरी नहीं हुई तो यू कैन कमिट
- 18:28सुसाइड, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि आप दूसरों की जान ले लो।
- 18:38और उसने लिखा, नीचे कि मुझसे कोई बहुत भयंकर गलती हो गयी थी, इसके
- 18:57कारण मैंने यह कदम उठाया। मुझसे बहुत भयंकर गलती हो गयी थी।
- 19:06दिखे विस्तार। अगर मैं खंगालूँगा तो मिल जाएंगे,
- 19:12लेकिन मुझे इनमें दिलचस्पी नहीं है।
- 19:15क्या नाम था, कहाँ की घटना है? लेकिन सत्य घटना है।
- 19:19मैं निकल पड़ी और फेक मीडिया पे भी नहीं पड़ी।
- 19:31असली मीडिया पे पड़ी थी। वैसे आज कल असली नकली का फासला
- 19:39करना बहुत मुश्किल है। पता नहीं।
- 19:46कुछ न्यूज़ चैनल तो ऐसे हैं जो कहते हैं बस शाम को 4:00 बजे मोदी
- 19:53जी गद्दी से उतर जाएंगे, त्यागपत्र दे देंगे योगी जी तो
- 19:59मैं कहता हूँ दिल के बहलाने को वाली।
- 20:05तुम चाहते हो ये सिर्फ लेकिन ये आगे पता है कैसा चेपूनाथ है ये
- 20:13पक्का चेपूनाथ है ये छोड़ेगा तो मैंने कहा काश।
- 20:22तुम से जीवन लेने से पहले थोड़ा सा मेरे से मिल लेते फ़ोन पर ही
- 20:27बात कर लेते तो मैं तुम्हें एक ही शब्द बोलता हूँ और उससे सारा
- 20:35मसला। किसी व्यक्ति ने पूछा, आप ऐसा
- 20:51क्या कह देते हैं कि छह लोगों का जीवन बच सकता था?
- 20:57आपके एक शब्द से बिल्कुल एक शब्द से छह लोगों का जीवन बच जाता?
- 21:07चलो भला हमें ही बता दो इसने तो जो कर लिया कर लिया, हम तो न करे,
- 21:13मैंने कहा तुम भी तंग हो क्या कहता हाँ कभी कभी आ जाते है।
- 21:21मैंने कहा जब भी तुम तंग हो। कभी ऐसी परिस्थिति आ जाए कि छोड़ो
- 21:30क्या जीना है? ओह वैसे भी मौत तो मार ही दे और
- 21:36ये कटु सत्य है। यू कैनट चेंज इट ऐट ऑल।
- 21:41किसी भी तरह से तुम इसको बदल सकते हैं।
- 21:45यू रेह टु डाई वंड है 1 दिन ऐसा आएगा कि तो हमें मरना ही पड़ेगा,
- 21:51फिर छोड़ो झंझट क्या है अगर ऐसा आ जाये?
- 21:59ये होता है ज्यादा ज्यादा पति गामा रेंज़ के कारण।
- 22:05बहुत ज्यादा हो जाए। इतना फिरकी से घूमता है दिमाग कि
- 22:13कहीं चैन नहीं कहीं शांति में, इसलिए थोड़े से ढंग से काम दाम
- 22:20किया करो यहाँ से ले के कुछ नहीं जाना होता।
- 22:25थोड़ा सा आराम भी कर लिया करो, राम राम बाद में कर लेना, आराम कर
- 22:31लिया करो। आराम की ज्यादा जरूरत है, राम के
- 22:35बिना चल जाएगा। राम तो बेचारा खुद ही गुप्त घाट
- 22:41में कूट गया। खुद ही कूद गया तो कितने आप क्या
- 22:49बोलते हैं? मैंने कहा देखो एक सुसाइड होता है
- 23:01बस। जी भर गया जैसे महावीर का जी भरा
- 23:13था, निर्वासना हो के अब कोई वासना शेष न बची।
- 23:17देखिये पहले सुसाइड में आपकी वासनई तो बहुत इतनी वासनई थी।
- 23:25और परमात्मा इतना उलट पड़ गया कि आपकी एक भी भाषा पूरी नहीं है।
- 23:32तब झल्ला के सुसाइड कर लेते आप के तो ये भी कोई जिंदगी है अलग अलग
- 23:42तरह से? भड़ास निकालते कोई कहता है
- 23:44परमात्मा है ही नहीं, नहीं तो हमें खाने को रोटी न देता, ये कोई
- 23:52तर्क हैं वाला जीसको आप पूछते हो मार्क्स को उसका बैकग्राउंड ये है
- 23:59कि परमात्मा होता तो हमें खाने को रोटी न देता।
- 24:04पूछा जाए मार्केट से की तुम्हारे दादाजी देके जाते हैं, अरे भाई
- 24:11धरती दे दी, बीज दे दिया, पानी दे दिया, सूर्य दे दिया, हवा दे दी
- 24:16सब कुछ तो दे दिया और कोई तो चावल खाना चाहता है, कोई गेहूं खाना
- 24:20चाहता है। कोई चाव मुन चुग्गा खाने तो जैसा
- 24:25चाहता है वैसा पका लो बना लो, उगा लो और खा लो आपको रॉ मटेरियल सब
- 24:31तैयार दे दिया और तुम्हारे दद्दाश्री ने दिया है क्या?
- 24:38ऐसी छोटी छोटी बातों से लोग नास्तिक हो जाते हैं।
- 24:44ऐसी छोटी छोटी बातों से मुझे हँसी आती है हँसी आती है मुझको हरकतें
- 24:51इंसान पे गलतियाँ तो खुद करें और दोष दे भगवान।
- 25:02ये जिदिन का सलीका ना होगा एक तो यह अवस्था है कि आपकी वासना तो
- 25:09बहुत लेकिन उनमें से वासना पूरी नहीं आप जल्ला के मर जाते हो आप
- 25:19कहते हो। अवनी की बरखा फूल बने अंगारे आग
- 25:37बनी। सावन की बरखा फूल बने अंगारे
- 25:50नागिन बन गई रात सुहानी। पत्थर बन गए तार बने अंगारे।
- 26:11आग बनी। सावन की बरखा।
- 26:18फूल बने अंगार, नाग न बन गई रात सुहाने।
- 26:32पत्थर। बन गए तार?
- 26:38सब टूट चूके हैं, सहारे हो जीवन अपना वापस ले ले।
- 27:15म के रोख वाले सुन दर्द भरे। मेरे नाल सुन।
- 27:28दर्द भरे मेरे नाल। एक तो ये भाव दशा है ध्यान से
- 27:42सुनिएगा खोर बने अंगारे। आग बनी सावन की बरखा है सावन की
- 27:55बरखा भी आग लगाती है, फूल बने अंगारे नागिन बन गई रात सुहानी या
- 28:05काली रात भी नागिन जैसी लगती है अब सुहानी नहीं रही।
- 28:12पत्थर बन के तार ये तारे ऐसे लगते हैं जैसे झलमल सितारों का आंगन
- 28:20होगा ऐसे नहीं लगते, पत्थर ऐसे लगते हैं जैसे पत्थर किसी ने
- 28:26आसमान में चिपका दिया। सब टूट चूके हैं सहारे जीवन अपना
- 28:35वापस ले ले। जीवन देने वाले ये हताशा की
- 28:42वास्ता है, कोई सहारा नहीं। एक जीवन देने वाले परमत में आई ऍम
- 28:56गोइंग टु कमिट सुसाइड, मैं ये जीवन तुझे वापस देता हूँ, कुछ
- 29:02नहीं है। इसमें एक दूसरी भावस्था है।
- 29:10जिसके पास सब कुछ है। महल है रथ सारथि दास दासिन हीरे
- 29:21ज्वारथ जनता है। तश्तो ताश उसको भोग कर पाया के
- 29:39कुछ नहीं। पहल की लालसा अधूरी रह गई, उसने
- 29:45भोगना दूसरे ने भोग लिया और भोग के पाया।
- 29:52ये महल, ये अटारिया, ये खामोश इनमें कोई रसन है?
- 30:04इन फूलों में कोई महक नहीं। महल उदा।
- 30:21सुर गलियां। सुन।
- 30:27चुप चुप हैं दी व। रे ये महल?
- 30:39रात के सन्नाटे में जब घर छोड़ते हैं बहुत।
- 30:43महल उदास और गलियाँ। सुनें चुप चुप।
- 30:52हैं दीवार अरे। हताशा से आता है।
- 31:09जब तुम भोग नहीं पाते भोगने की इच्छाएं तो बहुत और महावीर के पास
- 31:18सब कुछ है। बुद्ध के पास सब कुछ है, महावीर
- 31:20तो राजा है। राजपुत्र भोग की सारी सामग्री है
- 31:36लेकिन फिर भी भोगने का मन है, मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए।
- 31:47मुझे मेरे मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो, मेरा दिल अगर कुछ दिल नहीं तो
- 31:56उसे मेरे सामने तोड़ दो। इसके अर्थ को ठीक से समझो
- 32:18आत्महत्या भोगों की नाकामी भोग के लिए तुम्हे समग्री नहीं मिली।
- 32:26साधन नहीं मिला सर कमसके मिले जरूरी।
- 32:33संसाधन नहीं मिले तो तुमने हताश में अपने शरीर को खत्म कर लिया,
- 32:38जबकि शरीर तुम और है। एक दूसरा व्यक्ति है महावीर,
- 32:44जिसकी जीव वेषण समाप्त हो गयी कि जीने की ही इच्छा खत्म हो गयी,
- 32:51जिसकी। महलपुधा सुर गलियाँ।
- 33:04सुन चुप चुप। हैं।
- 33:11देववार। दिल क्या?
- 33:19उजड़ा दुनिया उजड़ी रूठ गई है वह। दिल का।
- 33:38उजड़ा दुनिया उजड़ी रूठ गई है बाहर मंदिर गिरता।
- 33:57फिर बन जाता। अगर मंत्र गिर जाए बाहर
- 34:07कंस्ट्रक्शन कर जाए बाहर और फिर से उतर जाती है दिल को कौन?
- 34:16संभाल ले। लेकिन ये वासन कैसे पैदा करूँ?
- 34:26उसकी वासन खोके। उसकी जीने की इच्छा में कैसे पैदा
- 34:30करूँ? दिल ही टूट गया।
- 34:38जीने की इच्छा ही खत्म होगी, जीवेशन ही खत्म होगी।
- 34:41अब जीने की इच्छा कैसे पैदा करूँ? जीने की इच्छा कभी पैदा नहीं की
- 34:46जा सकती, क्योंकि वह इच्छा भोग के बाद आई है, भोग की व्यर्थता के
- 34:54बाद आई है। भोग में कुछ नहीं है।
- 34:59संसार असार है। जब यह ऐसा रस रूप में पता चल जाता
- 35:05है तो जीने की इच्छा समाप्त हो जाती है।
- 35:09यह परिणाम है जीने की इच्छा। कोई मंत्र थोड़ी है जो गिर गया तो
- 35:18फिर से उतार लो कोई हिस्सा गिर गया तो फिर से उतार लो।
- 35:25मंदिर गिरता फिर बन जाता। मंदिर तो फिर?
- 35:33उवार लोगे तुम? लेकिन जिसकी वासनाएँ गिर गई फिर
- 35:40वो कैसे वासनाओं को कैसे पैदा करूँ, जिसकी जीने की इच्छा खत्म
- 35:47हो गई? जीवेशना खत्म हो गई और भोगों को
- 35:51भोगकर खत्म हो गई। भोगों को न भोगने के कारण नहीं
- 35:55भोगों के आभाव के कारण नहीं भोगों को भोग कर पाया।
- 36:03किस्में कुछ नहीं नी रस है, स रस नहीं है, संसार असार है, स सार
- 36:12नहीं। बड़ी महत्वपूर्ण लाइनें हैं जिसने
- 36:23लिखी होंगी। पता नहीं किस मतलब से लिखी, लेकिन
- 36:28इसके आध्यात्मिक अर्थ मैं समझा रहा हूँ तुम्हे बाहर के मंदिर तुम
- 36:34कितने शोक से मनाते हो? हालांकि मंदिरों में तुम खुद ही
- 36:43बनाती हो, अपने हाथों से बुधपरस्तों का निराला भगवान देखा
- 36:52है, खुद तराशा है और नाम भगवान रखा है।
- 36:57अपने भगवान को तुमने खुद ही बनाया, लेकिन भगवान की सरह सर
- 37:04भेजते जाने तुमने इंकार कर दिया। तुम दूसरी प्रकार के नास्ते को जो
- 37:13कहते हो परमात्मा हैं। तुमने मानने से इंकार कर दिया कि
- 37:18भगवान ने हमें पैदा किया क्योंकि तुमने भगवान को बना दिया, यह
- 37:25तुम्हारी कृति है, फिर तुम इसे श्रद्धा कैसे दे सकोगे?
- 37:31श्रद्धा तो तुम उसी को दे सकोगे ना?
- 37:33जिसने तुमको बनाया, उसके कृतज्ञ हो सकोगे।
- 37:40लेकिन जीसको तुमने बनाया वह तो तुम्हारी कृति है उसकी तुम पूजा
- 37:46कैसे करोगे? यह पूजा बाहर बाहर से है इसलिए
- 37:50मैं रोज़ बोलता हूँ तुम्हारे भेजे के भीतर नहीं घुसती बात।
- 37:55मैं कहता हूँ ये सब भगवान तुमने बनाया है, पुत्र बरसतों का निराला
- 38:00भगवान देखा है, खुद तराशा है और नाम भगवान रखा है, मैं तुम्हें
- 38:09कहता हूँ। गिरा दो मंदिर को गिरा दो मशहूर
- 38:16गिरा दो जो ढहता है धर्म स्थान गिरा दो मंदिर उठा दे मशहूर उठा
- 38:23दे टा दे जो कुछ टेन्हा पर किसी का दिल न टाई।
- 38:32पर किसी का दिल न टाइम ऐसे दिल बचे दिल पर रहता।
- 38:40महल, पुदा सुर गलियां। चुप चुप हैं दीवार दिल क्या
- 39:01हुजिड़ा। ये वासन क्या उजड़ी वासना?
- 39:07उसे हृदय क्यों खाली हो गया? जैसे दुनिया उधर गई दिल क्या?
- 39:15उजड़ा दुनिया उजड़ी रूठ गई है। अब बाहर में भी ऐसा लगता है जैसे
- 39:27पतझड़ा। बाहरें बाहरों जैसा स्वाद नहीं
- 39:33देती, अब अब अमन नहीं करता जीने का।
- 39:45मंदिर गिरता फिर बन जाता। मंदिर गिरता फिर बन जाता।
- 40:02दिल को कौन? संभाले ओह दुनिया के।
- 40:11रखवाले, वो दुनिया के रखवाले सुन दर्द भरे मेरे।
- 40:24नाले।