Latest / Baba ji Vijay Vats / 8 Nov 25 - सिक्के को use करने का सही ढंग! मेरे जाने के बाद भी मैं रहूँगा - प्राण प्रतिष्ठा का रहस्य! Baba Ji Vijay Vats satsang
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- 0:02प्रश्न दो प्रश्न हैं, पहला प्रश्न है हार्मन हे पिता
- 0:15परमेश्वर एक और आप कहते हैं कि नीचे उतरो?
- 0:23बुद्धि से हृदय तक और हृदय से नाभि तक और दूसरी ओर ऊपर जाने की
- 0:31बात करते हैं। मूलाधार से आनंद, आनंद से विश्ति,
- 0:40फिर आज्ञा और फिर सहस्त्र। यह उल्टी बन से उलझा देते है।
- 0:47इसका गुण विज्ञान और आंतरिक का समझाकर इन घाटों को खोलने की कृपा
- 0:52करें। प्रश्न पूछने के बजाय भीतर उतरना
- 1:07ही सही रहेगा। यह क्रिया प्रोपोर्शनल है जैसी
- 1:23कथकड़ी में एक बाट आपने डाल दिया दूसरा।
- 1:43जो पलड़ा था वो फिर आपने दूसरे पलड़े में कोई सामान डाल दिया।
- 1:55फल, फ्रूट, चीनी, गुड़, अनाज, चावल।
- 2:04धीरे धीरे वह नीचे बैठना शुरू हो गया।
- 2:09जीस परेड में वेट डाला था वो पढ़ाना शुरू हो गया।
- 2:18यह प्रपोर्शन नीत है। समान अंतर चलती है और ऐसे
- 2:32तुम्हारे प्रश्न खत्म नहीं होंगे, क्योंकि तुम्हारी खोपड़ी गुजराती
- 2:40ही रहती है। और खुजलाहट तब मटेगी जब तुम उस तल
- 2:50को अपने भीतर उतर के छू लोगे और पुत्र तुम ये करते नहीं तो
- 3:01खुजलाहट जाती नहीं। अब मैं करूँ तो क्या करूँ?
- 3:12सही शिष्य वो जो गुरु की बताई हुई एक्सपेरिमेंटल वे को अपना लें,
- 3:20तर्क बितर का न करें। भीतर के रहस्य को खंगालने की
- 3:26चिष्ठा ना करें और ध्यान रखना भीतर के रहस्य को खंगालने की
- 3:32चेष्टा वो व्यक्त करता है जिसमें कल को नकली गुरु बनना होता है।
- 3:42वह गुरु से सभी सूचनाओं को इकट्ठा कर लेगा।
- 3:47ऐसे ही तो नकली गुरु पैदा होते हैं।
- 3:53मैंने सब कुछ बोल दिया और इतना कुछ बोल दिया जो शायद अब तक बोला
- 3:59न गया था। रहस्य की बात तो बोली ही नहीं गई
- 4:04थी जो मैंने खोल के समझा दिया और मैं ठग पैदा नहीं करना चाहता, मैं
- 4:17चाहता हूँ ईमानदार। शालीन लोग जो भ्रम न फैलाएं
- 4:25दुनिया भ्रमित तो पहले से ही है। अगर तुम सूचनाओं को इकट्ठा करके
- 4:33ध्यान रखो, मैं जो बोलता हूँ वो सूचनाएं हैं, मेरे लिए अनुभव
- 4:37होगा। तुम्हारे लिए सूचनाएं हैं वो तुम
- 4:44उसको इकट्ठा करके आगे लोगों को बांट भी सकते हो और फिर बांटने
- 4:53में अनुभव के बिना बांटने में। भूल भी हो सकती है।
- 5:01यही तो शिष्यों ने किया। प्रत्येक असद पुरुष के शिष्यों ने
- 5:09गंदगी फैलाई, चाहे बुद्ध के हों, चाहे कर्षण के हों, महावीर के
- 5:15हों। रामक्षण केहूं गुरु नानक केहूं
- 5:25कबीर केहूं प्रत्येक शिष्यों ने गुरु ने जो कहा उसको विकृत कर
- 5:31दिया और स्वाभाविक भी था। क्योंकि जो व्यक्ति खुद भीतर उतरा
- 5:41नहीं है, वह जैसे गुरु बोला, बिल्कुल हो हो, उसी तरह कैसे बोल
- 5:53पायेगा? ऐसा समझो कि तुम अंधे हो और मैं
- 6:03तुम्हें रंगों की पहचान करने बता दूँ, लेकिन तुमने रंग देखे तो है
- 6:12नहीं। अब मुझे इस प्रश्न का जवाब दो कि
- 6:19तुम्हें रंगों की पहचान सूचनाओं में अपने न्यूरॉन्स में बैठानी
- 6:26होगी, रट्टे मारने होंगे या की आँखें पैदा करनी होंगी।
- 6:38अगर आंख पैदा करोगे तो इस रचना के वास्तविक सौंदर्य को निहार पाओगे।
- 6:52तुम अंधे बने रहना चाहते हो, रंगों की फिलॉसफी न्यूरॉन्स में
- 7:03समा लेना चाहते हो भला इससे सत्य कैसे उत्पना होगा?
- 7:14प्रश्न तो तभी करेंगे पुत्र जब आँखें आएँगी और मैं जानता हूँ मैं
- 7:25उसी दिन समझ गया था जीस दिन बाबा ने कहा बोलो 22 लोगों ने बुद्ध
- 7:31पुरुषों ने आके मुझे कहा बोलिए। अब कोई बोलने वाला है नहीं, मैं
- 7:41अपनी मस्ती में झूम रहा आनंद को पी रहा एक ही स्थान पर बैठा मैंने
- 7:46कहा बाबा कोई और ढूंढ लो। मुझे बाद में ख्याल आया कि मेरी
- 7:53गुस्ताखी थी। बाबा ने कहा और कोई है नहीं,
- 8:04अन्यथा हम तुम्हें कष्ट न देते। पुत्र बुद्धि ऐसे ही प्रश्न उठाती
- 8:13चली जाएगी। क्योंकि बुद्धि वह राज़ नहीं समझ
- 8:21सकती, रहस्य नहीं समझ सकती। बुद्धि मूर्ख है और मूर्ख ही बनी
- 8:28रहती। और जिन पढ़े लिखे विद्वानों ने आइ
- 8:35ए एस की कुर्सी को ठोकर मार दी और बुद्धि से उपनिषद, अष्टावक्र,
- 8:42गीता और गीता का आश्य करना शुरू कर दिया और लोगों को गुमराह करने
- 8:49के अलावा। और अन्य कोई पाप नहीं कर सकते और
- 8:53सबसे बड़ा पाप यही है के तुम जानते नहीं तो हमारी बुद्धि ने
- 8:58तर्क वितर्क किया, कैंची की तरह काटा और तुमने वो प्रसारित कर
- 9:04दिया। इससे बड़ा कोई पाप है?
- 9:12मैं 1000 बार कह चुका हूँ, तुमने सुना समुद्र कभी गागर में नहीं
- 9:21संभालना तुम फिर वो ही रोज़ नया प्रश्न।
- 9:29उसी कुनीन के ऊपर शुगर कोटेड कर देते हो, नाम कुछ कर देते हो और
- 9:39मैं भलीभाँति जानता हूँ कि तुमने जो पूछा होगा, वह मात्र।
- 9:46गंदगी का ढेर होगा। इसलिए मैं कितनी बार कह चुका हूँ
- 9:55कि तुम क्रिया योग करो, कुछ न करने में बैठ जाओ अपने भीतर उतरो।
- 10:04तुमने दूसरे परड़े से लेना क्या है?
- 10:11एक तरफ बात है, दूसरी तरफ तुमने सामान डाला तो बात जीस परड़े में
- 10:22रखोगे? दूसरा परड़ा।
- 10:24ऊपर हो जायेगा। जब दूसरे पर्दे में सामान रखोगे
- 10:31तो एक पल ऐसा आएगा जब दोनों पर्दे प्राप्त हो जाएंगे, लेकिन जब तुम
- 10:37सामान दूसरे में रखते ही जाओ तो पहले वाला पर्दा ऊपर हो जायेगा।
- 10:44भार वाला बड़ा नीचे हो जाएगा यह प्रपोर्शनेट है क्या होना ही है
- 10:53नियम में देखो पुत्र, तुम भीतर उतारो व्यक्त की मागजगपाई में।
- 11:03वक्त खराब न करो, मैं तुम्हें बार बार चेता रहा हूँ, फिर नहीं आएगा
- 11:09कोई व्यक्ति आपको बताने के लिए मैं अच्छे से देख रहा हूँ।
- 11:14भविष्य में झांक रहा हूँ ये भविष्य मलका की भविष्यवाणी करने
- 11:20वाले लोग रह जाएंगे डराने वाले गांव के गांव धंस जाएंगे, कुल का
- 11:29पिंड घरेंगे आग के गोले बरसेंगे, ओले गिरेंगे, तूफान आएगा, जीर्ण
- 11:38शीर्ण हो जाएगा, तबाह हो जाएगा। तो मैं पूछता हूँ कि तुम कहाँ
- 11:42जाओगे तो हम तो बच जाएंगे। बस यहीं इनकी नब्ज पकड़ी जाती है
- 11:53और तुम क्यों बच जाओगे? क्योंकि हम त्रिकाल संध्या करते
- 11:57हैं? काल संध्या करते हैं परमात्मा की
- 12:02तो बच्चे जाएंगे तो मैं पूछता हूँ क्या परमात्मा रिश्वतखोर है, जो
- 12:12रिश्वत देता है उसको बचा लेगा, जो रिश्वत नहीं देता है उसको मार
- 12:18देगा। फिर उसके पुत्र सभी समान कैसे
- 12:22हुए? फिर वह न्यायकारी कैसे हुआ?
- 12:28जो अपनी खुशहमत से ही खुश हो जाता है वह भी कैसा परमात्मा हुआ?
- 12:38जीसको स्तुति अच्छी लगती है, निंदा बुरी लगती है, वह भी कैसा
- 12:43परमात्मा है? परमात्मा तो स्तुति और निंदा
- 12:47दोनों से दूर है। ऐसे अधर्मी युग में हम प्रवेश कर
- 12:58गए हैं। बहुत सी ऐसी संस्थान केंद्र खुल
- 13:05गए हैं। अब बीके वाले कहते हैं जिसने जो
- 13:11बीके बन गया वो पच जायेगा। इनकी तमन्ना है सारा संसार बीके
- 13:18बन जाए नाक कटी नाकटी हो आई चेहरा लघु लहान हुआ कहो तो बहन से रूप न
- 13:30खाओ ये कैसा घमसान हुआ? एक का नाक कट गया।
- 13:42नाक कटी नकटी हो आई चेहरा लहू लोहान हुआ बता तो बहन स्वरुपण का
- 13:51ये कैसा गमशान हुआ एक ने नाक कटारे।
- 13:57नकटी हो आई, वो बीके बन गई, उसके भीतर अंतर्ध्वुंद छिड़ेगा, मिला
- 14:06तो कुछ ने चलो फिर नकटों की कतार खड़ी कर लेते हैं।
- 14:21मेरे अक्षसू मुझे रोज़ कहता, बाबा ये बड़ी तंग करते अपनी लड़की को
- 14:27समर्पण क्यों नहीं करवा देते? मैंने कहा देखो अगर कोई इतनी जद
- 14:35करता है ना तो पुत्र। देख लेना, उसका कोई निहित स्वार्थ
- 14:42होगा, ऐसे कोई जिद्द क्यों करेगा? किसको पड़ी बांटने की जीसको
- 14:56चाहिए? आके ले जाएगा।
- 15:00कुआं कभी जद करता है कि मेरे पास ही आओ और मेरा ही पानी पियो।
- 15:11जीसको अच्छा लगेगा, कुएँ से जल भरेगा पिलेगा।
- 15:19कुआं डिक्टेटर नहीं होता वह तानाशाई कभी नहीं करता, प्यास हो
- 15:28जाता है तो अगर ये सब इकट्ठी हो के आ जाती हैं तो पुत्र कोई नहीं
- 15:35तो स्वार्थ होगा। और 1 दिन खबर मिली तो उसने अपनी
- 15:40बेटी का समर्पण करवा दिया। मैंने का पुत्र समर्पण कभी किया
- 15:46जाता है। समर्पण कभी करवाया जाता है, मूड
- 15:54मंडाया जाता है। समर्पण भी कभी कोई करने जैसी चीज़
- 15:59है? समर्पण तो हो जाया करता है, होने
- 16:05जैसी चीज़ है, प्रेम कोई करने जैसी चीज़ है जो कोई इक्का दिक्का
- 16:12लोग प्रेम में पड़े होंगे वो जानते होंगे।
- 16:19उन्हें प्रेम हुआ उन्होंने किया करने जैसी वृहद चीज़ प्रेम है,
- 16:28प्रेम होती है, स्वत से होती है, होती है तो होती है, नहीं होती है
- 16:33तो नहीं होती। समर्पण भी कोई करने जैसी चीज़,
- 16:44लेकिन नाक कटी नकटी हुआ चेहरा लहू लोहान हुआ बता तो बहन सुरपनखा यह
- 16:53कैसा गमशान तब नाक कट गई। मिला तो।
- 16:57और बी के में क्या खाक मिलेगा हर्मन मैंने शायद 3000 के करीब
- 17:09वीडियो बना दी होगी। गाहे बगाहे प्रति दिन मैं तुमसे
- 17:19ये कहता हूँ मिलेगा। ना बी के में मिलेगा, ना सी के
- 17:24में मिलेगा ना ए के में मिलेगा मिलेगा तो तुम्हें तुम्हारे भीतर
- 17:30मिलेगा अपने भीतर उतरो और परपोर्शनेट, जैसे तुम अपने भीतर
- 17:43उतरोगे। तुम डम टु अर्थ आए तो अपने स्वभाव
- 17:50में उतरे पर पोर्श नेट तुम्हारा नीचे उतरना अपने अंतश के पहलुओं
- 18:00में। और चेतना का कान्शस्नस का ऊपर
- 18:10उठना ये पैरेलल घटते है। जैसे जैसे तुम भीतर जाओगे, वैसे
- 18:23वैसे तुम्हारे चक्करों के भीतर से ऊर्जा ऊपर उठे।
- 18:28इधर तुम अपने अंत स्थल में प्रवेश किया, उधर चेतना ने सहस्त्रार को
- 18:36छुआ बना, इसमें क्या मुसीबत है? लेकिन मुसीबत तब तक है पुत्र
- 18:48इसलिए तो मैं तुम जैसे लोगों को ब्लॉक कर देता हूँ सारी रात
- 18:56रामायण पड़ी सुबह उठकर तुम पूछते हो सीताराम की माँ थी?
- 19:05धध करे तो रामायण तुमने क्या सुना तुम अभी सौदेबाजी में उल जाओ, मैं
- 19:21कहता हूँ बुद्धि को छोड़ दो और तुम्हारी बुद्धि फिर से
- 19:27कार्यआंबित हो जाती। अगर ऐसे हैं तो फिर ऐसे क्या है?
- 19:35तो ऐसे लोगों को देखो मैं तुम्हें प्रवचन तो दे दिया अब इसके बाद
- 19:41पुत्र तो मैं ब्लॉक कर दूंगा, तुम मुझे सिर्फ सुन सकते हो।
- 19:48सुनने में तुम्हें मैं कोई बाधा नहीं बन सकता हूँ कोई और गुरु
- 19:52तराश? क्योंकि मैं जानता हूँ अच्छी तरह
- 19:59तुम्हारे प्रश्न संदिग्ध होते हैं तुम्हें भीतर ले जाएंगे।
- 20:07मैं आश्वस्त हूँ इस बात से कि तुम्हें भीतर नहीं ले जाएंगे
- 20:13क्योंकि तुम्हारी बुद्धि कैंची की तरह चलती है, काट पीठ करती है,
- 20:18सुई की तरह सिमती ना तुम्हारे प्रश्न का जवाब मैंने दे दिया।
- 20:26बस इससे आगे प्रश्न मत करना, व्हाट्सएप के ऊपर ब्लॉक करना इसका
- 20:33मतलब यही होता है कि तुम सीधे सीधे सवाल ना कर सकोगे ज्ञान
- 20:43राँटने का ज्ञान लेने का। यह भी कोई सलीका है?
- 20:50छोटी सी बात को तुम अब तक समय नहीं पाए अब परपोर्शनेट वैल्यू
- 20:57निकाल यह कोई अलगेबराइक फॉर्मूला है क्या यह वह फॉर्मूला है?
- 21:05अज्ञात की राहें और अज्ञात की राहें बुद्धि के लिए सदा ही
- 21:14अनजानी रह जाएंगी। बुद्धि अज्ञात की राहों से सदा ही
- 21:21अनभिज्ञ रहेंगी। किन रास्तों से हम गुजरे चेतना
- 21:27किन रास्तों से गई? बुद्धि के भीतर यह फिट नहीं हो
- 21:30पाई। ये कतल आता है वहाँ से आगे बुद्धि
- 21:35की स्मृति काम नहीं करती तो फिर तुम कहाँ से गुजरे बुराहें कैसी
- 21:43थीं? आसपास क्या था?
- 21:46बाग बगीचे थे, उजाड़ था, पथरीली राही थी, एक राजमार्ग था।
- 21:52यह कुछ भी भीड़ नहीं होगा। बुद्धि को परे हटा दो।
- 22:09मैंने तुम्हें 1000 पर कहा, अब तुम सुन तो सकोगे लेकिन मुझसे
- 22:19प्रश्न ना कर सको। कोई क्यों?
- 22:21प्रश्न करने की कोई इम्तहा होती है?
- 22:28तुम एक ही प्रश्न को अलग अलग रूप दे के रंग दे के शब्द दे के
- 22:34घुमाते चले जाते हो कितनी बार चला और कितनी बार कहूं के बुद्धि में
- 22:52नहीं आता भाई। फिर तुम्हारी बुद्धि कहती है चलो
- 22:59ये तो पूछलो बुद्धि तुम्हें फंसा जाती है, बिलकुल उस बच्चे की तरह।
- 23:12जो बच्चा कहता है इस प्याली में समुद्र आता है और में सोकरोटी
- 23:20खड़ा हुआ कहता है ये प्रथम बार इस बच्चे ने मेरी अंतःसात्मा को हिला
- 23:27दिया। प्रथम बार मैंने अपने भीतर झांक
- 23:33के देखा कि हम भी तो यही कर रहे हैं उस विराट साम्राज्य के
- 23:41क्रिएटर को इस छोटी सी बुद्धि जो उसने ही बनाई।
- 23:48उसके भीतर समाने का प्रयास करते हैं।
- 23:53संभव हो पाएगा यह अपने पांवों को हाथ लगा के उठाना चाहती हूँ अपने
- 24:03शरीर को उठा पाओगे। प्रश्न कभी खत्म नहीं होंगे, काम
- 24:22कभी ना होंगे पूरे तो पूरा हो जाएगा।
- 24:28सोयेगा तो 1 दिन ऐसा। कोई ना तुझे जगाए, कहा आसमान पे
- 24:36उठने वाले माटी में मिल जाएगा इससे पहले कि ये दशा हो जाए जागो।
- 24:53भक्त कभी भी ज्यादा नहीं होता। भक्त सदा ही कम रहता है और बताने
- 25:02वाले सदा मौजूद नहीं रहते। फिर तुम्हें मिलेंगे उल्लू नाथ?
- 25:13जो कहेंगे हरे रंग के छह टाँगें होती हैं और गेरुवे के होती हैं 8
- 25:23और अंधा अंधे की बातों को माना जाएगा।
- 25:30ऐसा ही कुछ आज चल रहा है। अगर इन अंधों की कतार के भीतर कोई
- 25:37आँखों वाला आके तुम्हें समझा रहा है तो तुम इस तरह से उसका वक्त
- 25:43बर्बाद कर रहे हो। पुत्र ये वक्त तुम्हारा नहीं यू
- 25:56अरे नॉट ऑन ट्यूशन मैं ट्यूशन रखता नहीं, मैं सार्वजनिक रूप से
- 26:05और सार्वभौमिक रूप से बोलता हूँ, सबके लिए बोलता हूँ, सबके लिए
- 26:10समान बोलता हूँ। भेद नाम की कोई चीज़?
- 26:15मेरे भीतर तुम कब तक एक ही प्रश्न को बार बार पूछोगे?
- 26:29कितनी बार मैंने कहा गांठ मार लो इस बात को?
- 26:34बुद्धि की समझ में वो आएगा नहीं। आज फिर तुम्हारी बुद्धि की समझ
- 26:38में नहीं आया एक तरफ़ा आप ये कहते हो दूसरी तरफ़ आप ये कहते हो कैसे
- 26:46भीड़ भिड़ेगा बताइए पुत्र तुम्हें बता दिया प्रश्न का जवाब तो मैंने
- 26:56दे दिया। और प्रश्न का जवाब अलग अलग तरीके
- 27:00से मैंने बहुत बार दिया। ये बात अलग है कि आज तुमने कुनीन
- 27:06के ऊपर रंग हरा चढ़ा लिया है। पहले गेरुआ, काला, पीला, लाल और
- 27:13हुआ करता था। प्रश्न वो ही है और प्रश्न वहीं
- 27:19से आया है बुद्धि से आया है। प्रश्न हमेशा बुद्धि से आता है,
- 27:30इसलिए अपना वक्त तो तुम्हारा खराब हो ही जाएगा?
- 27:40ये जो लाखों करोड़ों व्यक्ति हजारों की तादाद में आज और लाखों
- 27:48करोड़ों व्यक्ति भविष्य में मुझे सुनने वाले हैं, उनका वक्त क्यों
- 27:52खराब कर रहे हो? क्या ये पूछेंगे ऐसी बात है?
- 28:00जो बात बुद्धि में नहीं आती, उसे पूछा ही नहीं जाना चाहिए।
- 28:07परमात्मा क्या है? परमात्मा कहाँ से आया, उसने क्यों
- 28:13बनाया संसार क्या लेना था बनाके? यह तुम्हारी भीतर की दुखी मनोदर्श
- 28:21है और तुम यह सोचना कि अगर तुम दुखी हो तो सारा जहन दुखी नहीं
- 28:28है। कोई सुखी भी है, अन्यथा सारी
- 28:34सृष्टि एक दम से मर जाती। जब तक बुद्धि रहेंगी, जब तक
- 28:46बुद्धि से चिपकाहट रहेंगी, तुम्हारी तब तक तुम मूड के मूड
- 28:54रहोगे, ऐसे ही प्रश्न आएँगे। तुम नीचे नहीं उतरोगे कभी हृदय का
- 29:00प्रश्न पूछा तुमने? कभी पूछा कि प्रेम में आंसू बहे,
- 29:12अगला प्रश्न कुमारी शरजा? बाबा जी प्रणाम जैसे ही मैं आपको
- 29:31सुनने लगती हूँ आँखों से झर झर आंसू बहने लगते हैं।
- 29:44शरीर में हल्का सा कंपन दिमाग में हल्की सी मदहोसी क्या ये शुभ है
- 30:03या कुछ अशुभगत हो रहा है? और बाबा क्या हमें आप हमें छोड़
- 30:16तो नहीं जाएंगे? हम पहले पर्सन से शुरू कर।
- 30:31जब मैं बोलता हूँ तो यह बोलना टेप रिकॉर्डर जैसा नहीं है टेप
- 30:47रिकॉर्डर में अगर तुम कुछ चीज़ रिकॉर्ड कर दो।
- 30:57वो जब उसे आप सुनोगे अब वो सिर्फ आवाज और भाव सुनाई लेकिन बोलने
- 31:09वाले ने बहुत कुछ उड़ेला उस आवाज में।
- 31:16आसानी, तरंगें और बहुत सी ऐसी सीक्रेट शक्तियां जो उसमें डाली
- 31:30गई वो लुप्त हो गई। लेकिन जब मैं बोलता हूँ, तुम मुझे
- 31:41सुनते हो, इसलिए मैं कहता हूँ डाउंलोड मत कर लेना।
- 31:46आज कुछ लोगों ने मुझे शिकायत आई दी मेरी वीडियो को डाउंलोड करके
- 31:52गायत्री मंत्र के वीडियो को डाउनलोड करके।
- 31:55सिक्के बाजार में बेचने शुरू कर दिए।
- 31:5715151000 इन मूर्खों को ये नहीं पता कि प्रत्येक व्यक्ति के नाम
- 32:06का सिक्का बनता है। यहाँ तुम घर तो चाहे जीतने चार्ज
- 32:10करते रहो। बात तो यहाँ की मैं यहाँ क्यों
- 32:15मंगवाना हूँ उस विराट की उपस्थिति में मैं प्राण प्रतिष्ठा करता हूँ
- 32:25उस व्यक्ति के नाम की जिसके लिए वह सिक्का चार्ज किया गया है।
- 32:31तुम चार्ज तो घर पे कर लो। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा का क्या
- 32:38होगा? प्राण प्रतिष्ठा तुम्हें
- 32:43पुजारियों की तरह खुद ही करनी होगी।
- 32:47पुजारी भी करते हैं मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा।
- 32:51लेकिन क्या वो प्राण प्रतिष्ठा करने के योग्य होते हैं?
- 32:56प्राण प्रतिष्ठा करते हैं कि जड़ को चेतन में बदल देना तुम भगवानो
- 33:06की प्राण प्रतिष्ठा करते हो। मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा
- 33:10करते हो। मैं ये नहीं कहता की प्राण
- 33:13प्रतिष्ठित वो हो नहीं सकती। हो सकती है लेकिन करने वाला भी तो
- 33:18कोई हो वो होती हैं उस विराट की उपस्थिति में।
- 33:29और उस विराट की उपस्थिति वक्त पे होती है।
- 33:34जब आपको बुलाया जाता है उस वक्त उसकी उपस्थिति होनी होती है तो
- 33:42आपको बुलाया जाता है। और उसकी उपस्थिति में इन सिक्कों
- 33:49को मैं प्राण फूंके जाते हैं। उसके नाम के फूके जाते हैं जिसके
- 33:56नाम का है एक बार तुम्हे अच्छे से समझा दूँ।
- 34:05कुछ मुझे ऐसे कॉमेंट्स आ रहे हैं कि बाबा सिक्कों को डालने के बाद
- 34:12घर में हो गया, काम नहीं बना, गलत हो गया तो निश्चित ही आप एक गलती
- 34:24कर रहे हैं। जैसे रोहित के केस में हुआ रोहित
- 34:32सिक्के को तो लेके गया लेकिन सिक्का ले गया।
- 34:37नेहा का अपनी धर्मपत्र का ये सोच करके काम तो नेहा का है।
- 34:46यही गलती खा के कौन जा रहा है? शंख या तो नेहा ही सिक्के को लेके
- 34:58आजाती शंख चाहे फिर रोहित ऐसा कोई बात नहीं।
- 35:02लेकिन जिसके नाम का सिक्का है ही शुड बी ऑर शी शुड बी प्रेसेंट ऐट
- 35:09दी स्पॉट ये तो किया नहीं उसने काम उल्टा पड़ गया और वो काम आज
- 35:23तक नहीं। होगा क्योंकि हरियाणा सरकार ऐसी
- 35:31ही है। राज़ के नाम पर सेवा कहा जाता है,
- 35:38लेकिन होता राज़ है ये बदमाश इकट्ठे की है सब।
- 35:48हम लाख चिल्लाए जाए, लेकिन इनके कान के ऊपर कौन चूना है?
- 35:58सारे के सारे बदमाश मैं रोज़ बोलता हूँ मेरा सोच।
- 36:08बारीकी से सोचेंगे तो आपको समझ आएगी बात खैर, मैं ज्यादा गहरी
- 36:16बातों में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि देश से संभालना भी।
- 36:25अपने आप में एक आपदा है, आपदा से निपटना होता है, लेकिन अगर गलत
- 36:35व्यक्ति गद्दी पर बैठ गया, वह भला नहीं कर पाएगा।
- 36:40निश्चित वह गरीबों का माल उठा के। एक व्यक्ति के लिए मैं और यह गलत
- 36:53है। मैं सदा से कहता हूँ कि अगर
- 37:00वसुधैव कुटुम्बकम का फार्मूला है तो परिवार में कोई भूखा ना रहे।
- 37:07में इतना भेदभाव नहीं होना चाहिए। इंसान इंसान से भेदभाव ना करें।
- 37:13हाँ, परमात्मा ने ही अगर किसी को अपांग अपाहिज, मंदबुद्धि बना दिया
- 37:20बिना आँखों के या बिना किसी अंग के पैदा कर दिया वो बात अलग है।
- 37:28बीच में से छोटा सा प्रश्न आ रहा कि बाबा अब तो आपका ग्रंथ पूरा हो
- 37:32गया, आपने ग्रंथ से पार भी बहुत कुछ बोल दिया, क्या इंसान सबसे
- 37:43पहले रोटी नहीं मांगता? मांगता है शांतिवाद में चाहिए ना
- 37:50बिल्कुल बाद में चाहिए। क्या आप हम जनता का ऐसा कोई उपाय
- 37:56नहीं करोगे? देखिए पुत्र बात मैं राजनीति में।
- 38:05तो नहीं है उनका? ना ही पिछले जन्म में मैंने
- 38:08राजनीति की राजनीति करता तो गद्दी पर छलांग लगाकर बैठ जाता।
- 38:13कोई रोकता नहीं, अब भी राजनीति नहीं करता।
- 38:19मुझे अर्जुन की जरूरत थी। अर्जुन मुझे मिल गया ये आपके लिए
- 38:28खुश खबरें अब जरूरत है इंसाफ पसंद और शांतिप्रिय लोगों की।
- 38:37मैंने एक नया धर्म न कहो। जीने की एक पद्धति को सलिका जीने
- 38:47का उसका आगाज किया। मोक्ष द्वार जिससे तुम मुक्त हो
- 38:53जाओ, तुम्हारी आत्मा बंधन से रहित हो जाए इंसाफ प्रिय व्यक्ति।
- 39:01शांति प्रिय व्यक्ति चैनल को सब्सक्राइब करें, इसी चैनल पे
- 39:07चलेगा सब अगर आप शांति प्रिय हो इंसाफ पसंद हो।
- 39:21इन सब चाहते हो और चाहते हो हम चैन की और आराम की नहीं सोएं।
- 39:29धोखाधड़ी न हो, झूठे लोग ही शासन ना करें।
- 39:35बेईमान लोग शासन ना करें। बेईमान लोग दंडित हूँ जैसा
- 39:43उन्होंने पाप कर किया है, मैं भी मानता हूँ, पुत्र और मैं तुम्हें
- 39:51आमंत्रित करता हूँ के चैनल के मेंबर बन जाओ।
- 40:01देखिए कोई फीस नहीं है हमारी, हम संस्था के हाथ हमारे पोलियो नहीं
- 40:08हुए हैं। हमारी संस्था के हाथ मजबूत हैं
- 40:13क्योंकि मेरे हाथ ही मजबूत हैं। मैं बिलकुल दृढ़ता से आपको पार
- 40:21लगा दूंगा। मेरा वादा है अहम् तुआम सर्व पापे
- 40:30भव्य मोक्ष स्वामी माँ सुचक मैं तुम्हारे सारे दुखियों का।
- 40:36तुम्हें इंसाफ दूंगा, बेईमानी का खात्मा कर दूंगा, लेकिन राजनीति
- 40:44में नहीं आऊंगा, राज़ नहीं करूँगा।
- 40:47जरूरत थी अर्जुन की, वह मुझे मिल के योग्यता के सतर्क।
- 40:59पद बटेंगे और जिनके पास पद हैं उनकी छानबीन और जिन्होंने कोताही
- 41:09की जैसे आरएसएस संस्था ने लीक कर दिया था।
- 41:15मेरी हत्या क्षमा करना गाँधी जी की हत्या के बाद गुरु गोलवरकर ने
- 41:20लिखकर दिया था कि आरएसएस की संस्था विल नॉट पार्टिसिपेट इन
- 41:29पॉलिटिकल मेडल्स। आरएसएस विल रिमेन ए कल्चरल
- 41:37ऑर्गेनाइजेशन एंड विल हैव नो पॉलिटिकल एम्स अब क्या है?
- 41:45क्या देख रहे हो आप? सभी उच्चस्त ओहदों पर जो लोग बैठे
- 41:51हैं वो आरएसएस में किसी रूप से कुंसर्ण इन 11 वर्षों में सभी
- 42:02बड़े छोटे पदों पर आरएसएस के लोग तैनात कर दिए गए हैं।
- 42:07बिना। उनमें योग्यता है कि नहीं, मैं
- 42:18तुम्हें आह्वान करता हूँ। वो ही बात वैसे ही चलूँगा।
- 42:29शांतिपूर्ण ढंग से तुम चलो मुझे थोड़ा सा वक्त दे दो जब मैंने एक
- 42:41वीडियो डाला कि बस मेरा काम समाप्त।
- 42:46अब मैं त्रिवेणी संगम पर जाकर विलीन हो जाऊंगा, जल्द समाधि ले
- 42:59लूँगा। पर वो मेरी वीडियो रिलीज नहीं की।
- 43:08मेरे चैनल कंट्रोलर मेरे प्रेम और मुझसे बोले कि फिर जल समाधि लेने
- 43:19से ज्यादा बेहतर तो ये है कि थोड़ा सा आप भूखों के लिए भी
- 43:25कल्याण कर जाओ। जब आपका निहित स्वास्थ्य कभी कुछ
- 43:30रहा है, तो मैं जानता हूँ कि आप ओके हो, मैं जानता हूँ कि आज
- 43:38भेदभाव उशर्म सीमा पर है पहले नस्ली था जाति पाति का था आज
- 43:45आर्थिक है। और भेदभाव किसी भी रूप में हो
- 43:51अच्छा नहीं होता। नहीं तो मैं इतना ही कहूंगा इस
- 44:06ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत मैंने करती है मोख दवास।
- 44:13इसका लक्ष्य है जियो और देने दो। किसी की जिंदगी को विकृत न करो और
- 44:21अपनी जिंदगी को भी विकृत न होने दो।
- 44:27अगर कुछ ऐसा आपको। लगता है कि आपके साथ अन्याय हो
- 44:33रहा है। आप अपनी फरियाद मुझ तक पहुंचा
- 44:40सकते हैं। लिखित में जल्दी ही ये संस्था
- 44:48विशाल वट वृक्ष की तरह हो जाएगी। और वही दृश्य देखने को मिलेगा
- 44:55आपको जो दृश्य 1942 के बाद मिले थे जब गाँधी ने एक शब्द कहा दू और
- 45:11डार करो या मरो बस। अब वक्त बर्दाश्त करने का है तो
- 45:20अंग्रेज का सभी के प्रयास से सारी जनता घरों से निकल गई।
- 45:31गलत अफवाह हैं, उड़ानें बनीं दक्ष हैं ये लोग।
- 45:37कोई गाँधी ने अकेले में कुछ नहीं किया, गाँधी ने सिर्फ दिशा दी, बल
- 45:47आपका था। गाँधी ने सिर्फ दिशा दी
- 45:53डायरेक्शन। बल था।
- 45:55आपका और बल न होता तो गाँधी की दिशा कोई काम न करता, फिर भी
- 46:06गाँधी लोग नहीं खाये। भरी सर्दी में जहाँ तुम्हारी।
- 46:14हीरो गर्म सूट पहनते हैं, भीतर से थ्री भी सूट पहनते हैं।
- 46:26पहले गर्म बनियान फेर ऊपर जाकेट, फेर ऊपर कोट ऊपर से टाई गलबंद हवा
- 46:35न लग जाए कैसे पैर में जूते चमड़े के कहीं से कोई हवा ठंडी नहीं
- 46:43लगती और गाँधी जी लंदन में जब गए नवंबर में।
- 46:51गोलमेज कॉन्फ्रेंस राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस उनके पांव में जो थे,
- 47:04नंगे पांव थे, करीब गरीब नंगे पांव थे।
- 47:07आप उनकी फोटो को देखिए। एक लंगोटी छती भरी सर्दी में क्या
- 47:25तापमान था चार डिग्री सेल्सियस? वो दिन मुझे आज भी याद है।
- 47:34इतनी ठंडी हार्ड कंपा देने वाली सर्दी और अंग्रेजों ने तो बहुत
- 47:41गर्म सूट पहन रखे थे। गाँधी जी को इन वस्त्रों में
- 47:48देखकर पत्रकारों ने पूछा क्या आप इन वस्त्रों में जाओगे?
- 48:00जॉर्ज बंचम के समय। गाँधी जी ने बड़े सहज
- 48:08व्यंग्यात्मक जैसे कहा हाँ, क्योंकि मेरे कपड़े तो राजा पहनने
- 48:15बैठे हैं, बैरिस्टर थे, दीवान के पुत्र थे, दादा भी दीमान था।
- 48:23उत्तम चंद। पारंपरिक कोई गरीब नहीं थे, कोई
- 48:33वृक्ष नहीं मांगी, कभी मांगते नहीं बने, कोई गरीब माँ के बेटे
- 48:40नहीं थे, बिल्कुल अमीर थे। लेकिन इतने अमीर नहीं कि लोगों की
- 48:45जेबें कुतर के बने मेहनत से उनके दादा उत्तमचंद भी दीवान थे।
- 48:54अंग्रेजों की सरकार में और पिताजी भी दीवान थे।
- 49:02करमचंद गाँधी खुद वेरी स्ट्रू थे। लॉ कॉलेज एंड्स ऑफ गॉड लंदन में
- 49:18वो पड़े हैं वेरी स्ट्रू थे लेकिन क्या हुआ?
- 49:27खादी के कपड़े को कभी गिनाया नहीं कभी कहा नहीं कि मैंने देश के लिए
- 49:35गर्म वस्त्र छोड़ दिए, अपने बैरिस्टर का सूट छोड़ दिया।
- 49:40देखो गांव में मोजे भी नहीं, जो रात भी नहीं।
- 49:48और तस्वीर खंगाल के देखिएगा ये जो गाँधी जीके ऊपर आक्षेप लगाते हैं,
- 49:56मैं कहता हूँ नवंबर के महीने में जब सर्द सर्दी ठंडी सर्दी पड़नी
- 50:02शुरू हो जाती। तो एक बार उन वस्त्रों में लंदन
- 50:05में जाकर देख लीजिए, बस 1 दिन एक रात गुजार दीजिए, फिर बोलिए मैं
- 50:14गाँधी जी क्या था ये तीसरी बात ज्यादा नहीं।
- 50:24साहस ये कहने का का मेरे वस्त्र तो राजा ने पहन रखे हैं ये कहने
- 50:36का साहस, ऐसा साहस आज राहुल गाँधी में है।
- 50:47और ये लोग बड़े होशियार हैं। ये जानते हैं कि गद्दी का वारिस
- 50:53कौन हो सकता है, जिनमें पैतृक रूप से डीएनए है।
- 50:58लघु उनका ऐसा है। पहले ही मीडिया को लगाकर उसे
- 51:03पप्पू साबित करने में लग गए हैं। वह विदेशों से बड़ा हुआ व्यक्ति
- 51:16आपको मैंने शायद कल भी बताया, अब ध्यान से समझ लीजिए।
- 51:23अगर किसी को हिप्नोटाइज़ करना हो याने अंधभक्त बनाने तो हमारी
- 51:30पीनियल ग्लैंड के पास एक छोटी सी रेत के बराबर रेत के कण के बराबर
- 51:37छोटी सी ग्रंथी होती है, क्योंकि अभी साइंस ने वो खोजी नहीं।
- 51:43तो साइंस ने बहुत सी चीजें नहीं खोजी, सारे चक्कर नहीं खोजी।
- 51:47कुंडल ने नहीं खोजी नहीं खोजा ब्रमरन नहीं खोजा, अभी बहुत कुछ
- 51:56नहीं खोजा। तो यह पीनियल ग्लैंड के पास पड़ी
- 52:02हुई छोटी सी ग्रंथी यह चलाती है सारे सारे शरीर को इस ढांचे को
- 52:12तुम सोचोगे कि इतनी छोटी सी ग्रंथी बिल्कुल एटम कितना छोटा?
- 52:21और पल भर में पलक झपकते ही बसन कर देता।
- 52:25करोड़ों ये मत देखो कि उसके साइज छोटी बिलकुल रेत के धरने के
- 52:35बराबर। ये देखो कि उसमें शक्ति कितनी
- 52:45ताकत उसमें आपको एक नियम बता दूँ, साइकोलॉजी का?
- 53:02ये साइकोलॉजी और अध्यात्म का मिक्सर अगर किसी भी बात को आप
- 53:09रिपीट करना शुरू कर दोगे, अब इस बात को ढंग से समझ लीजिए।
- 53:14ये संसार में भी काम आएगी और यह परमार्थ में भी काम आएगी।
- 53:19अध्यात्म में भी काम आएगी। किसी भी चीज़ को रिपीट करना शुरू
- 53:26करो तो वह आपके इस पीनियल ग्लैंड के पास इस छोटी सी ग्रंथि में फेल
- 53:39हो जाती है। तुम अंधभक्त बन जाओ।
- 53:48ऐसे ही इन्होंने अंधभक्त बनाए? राहुल पप्पू है, राहुल पप्पू है,
- 53:54मोदी है, तुम मुमकिन है, मोदी है, तुम मुमकिन है?
- 53:59रेपतीश से ये तो है राजनीतिक व्यवस्था राहुल पप्पू है, पता है
- 54:11जिसके तीन पृष्ठों ने राज़ कर दिया है जवाहरलाल इंदिरा गाँधी
- 54:17राजीव गाँधी। और जिनमें से दो शहीद हो गए, कर
- 54:23दिए गए या हो गए, अपनी गलती से हुए या दूसरे की गलती से हुए इन
- 54:29सब अखीड़ों में मैं नहीं लेकिन बात तो ये कि शहीदी हुई।
- 54:36और मैं सदा ही कहता हूँ कि आरएसएस एक चिड़ी का नाम बता दे, जब से
- 54:44स्वतंत्रता संग्राम का आंदोलन चला, इनकी एक चिड़ी मरी हो तो उसी
- 54:51चिड़ी का नाम बता दे मुझे कि यह चिड़ी हमारी मर गई।
- 54:58या कभी एक बूंद लहू खिंडा हो किसी का, वो बता दे किसका खिंडा फिर वो
- 55:08तो देशभक्त हो गए और राहुल देशद्रोही हो गया।
- 55:16जिसकी तीन पुश्तों ने कुरपानी थी। जौहरलाल ऐसे नहीं मरे 62 में उनके
- 55:23साथ यार मार गई धोखा हो माफ़ से तुंग ने जो वचन दिया वो गलत
- 55:30निकला। बाखड़ा डैम के ऊपर खड़ा हुआ।
- 55:36मव से तुम घबरा गया इर्षालु व्यक्ति था और हृदय में दर्द
- 55:45समेटे हुए उसने सोचा कि जवाहरलाल हमें नीचा दिखाने की चेष्टा कर
- 55:51रहा है। बाखड़ा डैम के ऊपर खड़ा हुआ
- 55:54बाखड़ा डैम को देखता रहा और उसके भीतर का अहंकार गलता रहा तो उसने
- 56:00ठान ली के हिंदुस्तान को नीचा दिखाना और पूरे लायो लश्कर के
- 56:10साथ। हिंदी चीनी भाई भाई मैं जानता हूँ
- 56:13मैंने खुद नारे लगाए। 1962 में सर्द रातों में हमला बोल
- 56:24दिया गया। हिंदुस्तान की सेना मुकाबला न कर
- 56:28सके। वो गम देश के प्रति इसे कहते हैं।
- 56:34देश प्रेम देश के प्रति प्रेम था और उसके देश को नीचा देखना पड़ा।
- 56:45ठीक से मकाबला नहीं कर पाई। हमारी सीना तैयार नहीं थी क्योंकि
- 56:49भाई है। हिंदी चीनी भाई यही तो फ़ॉर्मूला
- 56:56पकड़ा आ रहा है, सच में नहीं जाएंगे पॉलिटिक्स में और
- 57:01पॉलिटिक्स में ही जाते हैं। इनसे तैयार हुए लोग पॉलिटिक्स में
- 57:05ही तो बैठे हैं। बताइए कितने लोग हैं जो आरएसएस के
- 57:18हैं और वो उस लिखित का क्या हुआ? गोल वर्कर तो मर गए, हेडगेवार भी
- 57:24गए, गोल वर्कर के बाद भी गए क्या आज?
- 57:34मोहन भागवत को पता नहीं कि हमने लिख के दिया था और हमारे ही
- 57:40द्वारा पैदा किए गए लोग बड़ी गल्तियों पर बैठे रहे।
- 57:45ये किस चीज़ का परिणाम सिर्फ मीडिया?
- 57:50सिर्फ मीडिया मैं तुम्हें गहरी बात समझा देता हूँ रेपेटिशन से
- 57:57बार बार किसी भी चीज़ को रिपीट कर हमारे बहुत पुरानी कहानी आती एक
- 58:07व्यक्ति बाजार से एक मेमना खरीद के लाया।
- 58:10ठगों की नजर पड़ गई। कहते ये मेम ना तो अपूर्ण बड़ा
- 58:19लबालब सा है मासूम, इसको तो काट के खाएंगे, बड़ा स्वादिष्ट होगा
- 58:26इसको खून मुँह लग जाता है। वह फिर ये नहीं देखता के प्राणी
- 58:33मासूम है या प्राणी ने कोई ये शेर को नहीं मार सकता, ये मेमनों को
- 58:40ही मार सकता है। उन्होंने व्योथ बना ली और कहा कि
- 58:46ये कुत्ता कहाँ से ले के आया? पांच जगहों पर अलग अलग आदमी खड़े
- 58:52कर दिए गए जब मीडिया का ही प्रस्ताव था कि वह व्यक्ति जब
- 58:58आखिरी आदमी निकाह कुत्ता कहाँ से ले के गए और कुत्ता भी ऐसा लाया
- 59:04करते हैं, सड़ा हुआ कुत्ता ले के आया।
- 59:07तो उसने टोकरे समेत मेमने को फेंक दिया और भाग्य बस ऐसी ही इनकी चाल
- 59:15है। राहुल गाँधी पप्पू है, मैं
- 59:21तुम्हें कहता हूँ, मुझे अर्जुन मिल गया।
- 59:27अर्जुन कौन अभी मैं बताऊँगा अभी मुझे मेरा काम कर लेना।
- 59:35मैं अपने अध्यात्म में रहता हुआ तुम्हारी बेढ़ी बनने लगा जाऊंगा।
- 59:46विश्वास हो, बशर्ते की ये ढांचा बरकरार है और देखिए इस बात का
- 59:54ध्यान रखना अगर कहीं मुझे मार दिया जाए क्योंकि यहाँ ओपेन आते
- 1:00:04हैं लोग। मेरे पास यहाँ खुला है, कोई
- 1:00:09सेफ्टी नहीं, कोई मेरे पास नहीं है, कुछ रिवॉल्वर वगैरह कुछ नहीं,
- 1:00:14ना ही मैं इन चीजों में विश्वास रखता हूँ।
- 1:00:16हम तो वही हैं जो ये सफेद जुल्फों वाले कहते हैं बिना खडक बिना ढाल।
- 1:00:26ठीक कहते हैं वो ही अब हम वो ही है चालबे ढंगी जो पहले थी वो अब
- 1:00:35भी है। जो व्यक्ति हार्वर्ड यूनिवर्सिटी
- 1:00:40और केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ा हुआ और उसके जीवन में इतनी
- 1:00:46विपत्तियां आई हों, तुम्हें शायद पता नहीं।
- 1:00:51जब 1990 में वह हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे थे तो और
- 1:00:55राजीव गाँधी की हत्या हो। सुरक्षा कारणों से उन्हें कॉलेज
- 1:01:03बदलना पड़ा और आपको जानकर बड़ा आश्चर्य होगा कि यूएसए में रॉल
- 1:01:11कॉलिंग के नाम से उन्होंने पढ़ाई थी।
- 1:01:17रोलविनसे नाम बदलकर जीस परिवार ने इतनी शहादतें दीं।
- 1:01:33जवाहरलाल इस गांव में मारे गए यार मार हो गई, धोखा मिला दोस्ती में
- 1:01:44इंदिरा गाँधी को आपके सामने कितनी गोलियां लगीं?
- 1:01:53खैर गलती किसकी नहीं किसकी मैं इतिहास में नहीं जाऊंगा?
- 1:02:02गलती दोनों तरफ ही होती है लेकिन मैं बात करता हूँ शहादत की।
- 1:02:08इनकी चिढ़ी भी मरी और एक बात याद रखना।
- 1:02:13जो काम करेगा वो गलती भी करेगा। इसे सुन लो, जो बड़ा काम करेगा,
- 1:02:22वृहद काम करेगा, वो वृहद गलती भी करेगा जो काम ही ना करेगा, चरण
- 1:02:28चुम्बक बना रहेगा वो गलती का का करेगा।
- 1:02:37चाहे सवार गिरते हैं। मैदानी जंग में उबाल क्या गिरे जो
- 1:02:43घुटनों के बल चले चाहे सवार गिरते हैं।
- 1:02:50मैदानी जंग में उबाल क्या करे जो घुटनों के बल चले?
- 1:02:56जो घुटनों के पास चलता है, वो क्या खाद गिरेगा जिसने चरण पकड़
- 1:03:00लिए है वो क्या गलती करेगा? गलती हमेशा वो ही करेगा जो काम
- 1:03:07करेगा और जो जितना बड़ा काम करेगा और देश को आजाद कराना सारे दिन भर
- 1:03:14रात। ब्लड प्रेशर 200 महात्मा गाँधी
- 1:03:23शुगर 450 इस दिशा में इस दशा में धुन सवार।
- 1:03:42गरीब नहीं है, लेकिन उतने से वस्त्र पहनें जो हमारे देशवासी
- 1:03:47पहन सकते हैं। ये देशप्रेम है या नहीं है?
- 1:03:54जहाँ ग्रिब को गर्म कम्बल न मिले और एक व्यक्ति 20,00,000 का सूप
- 1:03:59पहने। ये देशप्रेम है।
- 1:04:05यह वह देशप्रेम है जिसने सर्द रातों में चार डिग्री माइन समक
- 1:04:12चार डिग्री सेंटिग्रेड के अंदर खादी का कपड़ा पहन रखा है।
- 1:04:19शरीर नंगा है, छाती, नंगी हाथ, पांव, नंगे और पांव में चप्पर
- 1:04:25शायद कोई तस्वीर तुम्हें मिले तो तुम देख लेना।
- 1:04:32जब वो जार्ज पंचम के दरवाजे के बैरगम्बम पलेश के सामने खड़े थे।
- 1:04:40बकिंगघम प्लेस के सामने खड़े हुए उनकी तस्वीर देखना अगर आपको मिल
- 1:04:44जाए लेकिन ठूंस दिया गया मोदी है तो मुमकिन।
- 1:04:56यह आपको मैंने बहुत गहन फिलस्पी बता दी।
- 1:05:01अगर किसी चीज़ को दिमाग में ऐसा खपाना है यह जो टेलीविज़न पे चलती
- 1:05:08है ना लाइव वॉय है जहाँ तंदरुस्ती है वहाँ ये तो तुम्हारे दिमाग में
- 1:05:14भरा जाता है। तुम जहाँ जाते हो वो सब भी
- 1:05:16टेलीविजन पे यही चल रहा है लक्ष सुंदर त्वचा के लिए मनमोहक कोई
- 1:05:23मनमोहक नहीं। तुम्हारे दिमाग की उस ग्रंथि में
- 1:05:30भर दिया जाता है और उस दिमाग की ग्रंथि में जो तुम्हारा सारा
- 1:05:34न्यूरॉन नहीं समेट सकता वह उस छोटे से एक रेत से भी छोटे वजन और
- 1:05:45वॉल्यूम। से दाने में समा जाता है, बस उसे
- 1:05:54इम्प्रेस करने की आवश्यकता है। ये राजनीतिक व्यवस्था बताया तो
- 1:06:03किसी संत नहीं होगा। संत के बिना यह बात कोई जानता
- 1:06:08हूँ, मैं किसी को अपना भक्त बनाना है तो वही काम करो जो ठगों ने
- 1:06:16किया था। कह रहे कुत्ता कहाँ से तो किया है
- 1:06:19और फेंक के चला गया उनकी मौज बन गई शाम को काट के खाये।
- 1:06:28वो ही ये शुरू में चला दिया गया और इसमें कुछ लोगों ने योगदान
- 1:06:34दिया। रजत शर्मा आपकी अदालित बिल्कुल
- 1:06:39बेबाक बोलेंगे, इससे पहले मैं आठ बार मर चुका हूँ।
- 1:06:51बहुत बार मैंने कहानियों भी सुनाई।
- 1:06:54प्रत्यक्षदर्शियों ने भी सुनाई, लेकिन मरते वक्त मेरे में कोई
- 1:06:58कंपैरट नहीं आती। मैं बिल्कुल उस संत की सहज समाधि
- 1:07:04की तरह लीन हो जाता हूँ और तुम देख लेना।
- 1:07:09जैसे गाँधी ने कहा था मैं मरूंगा तो जरूर लेकिन जब मेरी गोली
- 1:07:15लगेंगी तो मेरे भीतर से राम ही आएगा।
- 1:07:21मैं खाटड़ी पे पढ़ के नहीं मरूंगा काम ही हम ऐसे करते हैं।
- 1:07:26जानबूझकर काम करते हैं खाटड़ी पे पढ़ के नहीं मरना चाहते हम मरना
- 1:07:32ही ऐसा चाहते हैं कि गाँधी के वक्त मेरे तीन गोलियां लगीं, चार
- 1:07:38थी वैसे वो एक गोली का क्या है? बाद में कभी बताऊँगा शायद मैंने
- 1:07:44अपने प्रियजनों को तो। गोलियों चार पोस्टपार्ट में तीन
- 1:07:52आई क्योंकि तीन ही गोर से निकाह चलाई।
- 1:07:58चौथी निकालने की सहमत नहीं की। खैर।
- 1:08:06जिनकी छड़ी भी नहीं मारी, जिनका इतना सा खून भी नहीं गया जितना हम
- 1:08:13पीलिया चेक करने में या हीमोग्लोबिन चेक करने में एक छोटी
- 1:08:17सी बूंद निकालते हैं। शुगर चेक नहीं करते आप सुबह कितना
- 1:08:21खून निकलता है? क्या उससे शहीद हो जाते हो आप?
- 1:08:25तो इस समय रोज़ शहीद होते फिर तो बस इतना से भी खून नहीं पाया,
- 1:08:32लेकिन हुआ क्या? वह ग्रंथि को प्रेरित करना होता
- 1:08:36है जो पीनियर ग्लैंड के बिल्कुल पास है।
- 1:08:40वह ग्रंथि आज तक विज्ञान खोज नहीं पाया।
- 1:08:43जैसे चक्करों को नहीं खोज पाया। कभी खोज लेगा शर्त लेकिन तुम्हें
- 1:08:53मैंने सारा प्रोसेसिंग बता दिया। किसी भी झूठ को सत्य कहना हो, उस
- 1:09:00झूठ को बार बार दोहरा लो। वो देखो विकास हो गया भाई विकास
- 1:09:09हो गया तो महंगा ही क्यों हो गयी? विकास हुआ तो नौकरियां कुछ नहीं,
- 1:09:16विकास हुआ तो उन वायदों का क्या हुआ?
- 1:09:20क्या हुआ तेरा वादा क्या हुआ तेरा बाद?
- 1:09:302,00,00,000 रोजगार हर साल दूंगा क्या हुआ तेरा बाद?
- 1:09:4115,00,000 हरेक की जेब में यूं ही आ जाएंगे इन साफ पसंद लोगों,
- 1:09:53शांतिप्रिय लोगों। मैंने अभी अभी एक धर्म की शुरुआत
- 1:10:01की, वो अधर्म नहीं है, वो सिर्फ ज़िन्दगी के जीने का तरीका है,
- 1:10:05सलीका है, जियो और जीने दो। किसी की जेब से इतना मत निकालो कि
- 1:10:12वह भूखा मर जाए तरफ जाए, किसी के ऊपर इतनी तानाशाही मत खाओ।
- 1:10:18कि उसे बोलने की भी आजादी न हो और किसी के ऊपर अपना धर्म मत सौंपो
- 1:10:26धर्म थोपने के लिए नहीं है। धर्म तक पहुँचना है।
- 1:10:31हमें और धर्म क्या है? जियो और जीने दो।
- 1:10:35अपने उस अंत स्थल तक जाना जहाँ हम खुद ही विराजमान हैं, बार बार
- 1:10:44दोहराओ मोदी है, तुम किन है, तुम अंत भक्त हो जाओ।
- 1:10:54यही पॉलिसी बरती गई। और आपको भी बता दूँ ये राज़ मैंने
- 1:10:58आज खोल दिया। ये ऐसा होता है राहुल गाँधी पप्पू
- 1:11:06है हॉरर केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त व्यक्ति?
- 1:11:16कैसे पप्पू होगा भाई? इतने वर्षे का मालिक इतना शानदार
- 1:11:26डीएन कुछ गलतियाँ हुई मैं कहता हूँ।
- 1:11:31जो काम करेगा गलती उपयोग और अगर देखा जाए तो इंदिरा गाँधी की
- 1:11:38मृत्यु में हत्या में सबसे बड़ा योगदान लालकृष्ण आडवाणी का है।
- 1:11:45लालकृष्ण आडवाणी ने इंदिरा गाँधी को कहा।
- 1:11:49के चढ़ाई कर दो। इसके ऊपर उसका क्या बिगड़ता था।
- 1:11:56उसने तो कह दिया और किन्हीं अभागे क्षणों में इंदिरा गाँधी को ये
- 1:12:02बात जच गई। इंदिरा गाँधी ने वो कर दिया अकाल
- 1:12:06तक तो। बड़े से बड़ा बड़े से बड़ा हृदय
- 1:12:10को तोड़ने वाला काम बुध गुरु गोविंद सिंह के चार बच्चों की
- 1:12:16शहादत के बाद अगर दिल दुखा गमगीन हुआ, बहुतों के घरों में खाना
- 1:12:24नहीं बना। उसका कारण अकाल तख्त साहब का ढह
- 1:12:30जनम था। इसके लिए जिम्मेदार इंदिरा क्विट
- 1:12:33थी और इंदिरा ने अपने दिमाग से काम नहीं दिया।
- 1:12:40लालकृष्ण आडवाणी ने उसे राय दी, मैं सारी कहानी बता देता हूँ।
- 1:12:50कोई भी चीज़ को दोहराते जाओ ये तो होगी संसार की बात अब मैं क्यों
- 1:12:56कहता हूँ राधे राधे ना करो राम रमण करो राधे राधे करोगे तो तुम
- 1:13:04राधे के गुलाम हो जाओगे? शब्दों के गुलाम हो।
- 1:13:10बस फिर राधे के अलावा तुम ही कुछ और जचेगी और तुम शब्दों के जोगे
- 1:13:16ही रह जाओगे। शब्दों से पार उस निःशब्द की
- 1:13:21दुनिया में तुम उतर न पाओगे यह एक।
- 1:13:26बहुत शानदार वैज्ञानिक बात मैं क्यों कहता हूँ डोन्ट रिपीट
- 1:13:35रेपेटिशन को बंद कर दो, क्योंकि रेपेटिशन उस ग्रंथी में तुम्हें
- 1:13:41अंत वक्त बना दे। इसलिए तुम देखोगे कि जो रेपेटिशन
- 1:13:47देते हैं डेरे वाले या कोई भी तुम्हारे गुरु रोग तुम्हारी राह
- 1:13:53की राह दिखाने वाले ये जो मंत्र जप देते हैं वह मंत्र जप सिर्फ
- 1:14:02इसलिए होता है। कीजिए, हमारे गुलाम बन जाए और तुम
- 1:14:07उनके गुलाम हो जाते हो। उनका स्वार्थ सिद्ध हुआ और जब एक
- 1:14:13व्यक्ति गुलाम हो गया तो उनकी आने वाली पुश्तें गुलाम हो गई।
- 1:14:18फिर तो तुम कहोगे हाँ हम तो धरे में ही जा ना भाई वहाँ नाम जान ले
- 1:14:22के आना है। इतनी ज्यादा तुम अंधभक्त हो जाते
- 1:14:28हो? मैं भी तुमसे कहता हूँ, बहुत बार
- 1:14:31कहता हूँ अभी कल मेरे को एक प्रश्न आया, किसी बिटिया का बाबा?
- 1:14:38हम आपकी मूर्ति की पूजा कर सकते हैं, फोटो की पूजा कर सकते हैं।
- 1:14:44मैंने कहा बिलकुल कर सकते हो पुत्र अगर श्रद्धा है लेकिन ध्यान
- 1:14:49रखना, चेपक मत जाना, यह मूर्ति आपके लिए जंजाल ना बन जाए फिर
- 1:14:57बाकी बंधनों को तो तुम तोड़ दो लेकिन मूर्ति ही बंधन बन जाए।
- 1:15:02जैसे गौतम के लिए महावीर स्वामी, भगवान बंधन मंदिर ऐसा न हो करो,
- 1:15:10अगर श्रद्धा है तो करो पूजा करो लेकिन ये पूजा व्यवधान ना बन जाए
- 1:15:18ये पूजा। पूजा ही बंधन ना बन जाए, ये ध्यान
- 1:15:23रख लेना और तुमने बंधनों को तोड़ना और बंधनों को तोड़कर वहाँ
- 1:15:28जाना निर्बंध है जो वो तुम हो यहाँ कोई बंधन नहीं है जहाँ सुख
- 1:15:35आनंद ही आनंद है और यही तुमने पाना है आज के धर्म।
- 1:15:40की जो मैं शुरुआत कर रहा हूँ तीन चीजें हैं खुशी कौन नहीं चाहता
- 1:15:51मैं कहता हूँ मेरे धर्म को नास्ती कभी अपनाएंगे कौन नहीं चाहता
- 1:15:58खुशी? मस्ती कौन नहीं चाहता खुशी,
- 1:16:10मस्ती, आनंद कौन नहीं चाहता? तीनों को नास्तिक विचारता आस्तिक
- 1:16:19विचारता प्रत्येक देवी देवता का। उपासक भी चाहता।
- 1:16:24प्रत्येक देश, काल, प्रत्येक भाषा, सारा संसार इन तीन चीजों को
- 1:16:32चाहता हम मदहोश ही में रहे, आनंद में रहे, मस्ती में रहे, हम खुश
- 1:16:38रहे कौन नहीं चाहते? बस यही मेरा धर्म है और इस धर्म
- 1:16:45के लिए सभी जप, तप, पाठ, पूजा, प्रार्थना, उपासना, सभी हवन,
- 1:16:55यज्ञ, जप, तप। सभी कुछ छोड़ देना है, सभी वहम
- 1:17:02वगैरह सब छोड़ देनी है। सभी श्राद्ध सभी पितृ पूजा सभी
- 1:17:08गंगा स्नान सभी छोड़ देने हैं। कोई वंत नहीं निरबंध हो जाओ, बस
- 1:17:16तुम ही काफी हो। यू यूरसेल्फ़ अरे सफीशिएंट यू
- 1:17:23यूरसेल्फ़ इस सफीशिएंट तुम ही पर्याप्त हो, तुम ही पर्याप्त हो
- 1:17:35तुमने तुम्हारे पास पहुंचना है। और इन चीजों को ध्यान में रखना,
- 1:17:41अपनी उस ग्रंथि में इन चीजों को घुसने मत देना।
- 1:17:45जहाँ रेपेटिशन की बात हो, वो राजनीतिक हो, वो चाहे आध्यात्मिक
- 1:17:52हो, तुमने इन लोगों का संघ त्याग देना है।
- 1:17:56क्योंकि तुम गुलाम हो जाओगे, तुम्हें पता नहीं होता तुम
- 1:17:59अप्रत्यक्ष रूप से गुलाम हो जाते हो।
- 1:18:04तुम्हें पता भी नहीं होता कि हम गुलाम हैं।
- 1:18:07यह ग्रंथि ऐसी कि तुम सदा के लिए उसके गुलाम हो जाते हो, ऐसे ही
- 1:18:15वृतियां होती हैं। बार बार बार बार रिपीट किया।
- 1:18:20तुम संभोग में गए, संभोग में गए गए गए, वो ग्रंथि प्रभावित होती
- 1:18:27कि रेपेटिशन रेपेटिशन करते रहे तुम और फिर तुम उसके गुलाम बजाते
- 1:18:34हो करो। तुम बार बार।
- 1:18:38लो तुम बार बार करते हो रोज़ करते हो झूठ, तुम रोज़ बोलते हो अहंकार
- 1:18:46तुम रोज़ करते हो व्यग्रस्त तुम रोज़ होते हो?
- 1:18:52इससे उस ग्रंथि में प्रभाव छूट जाता है।
- 1:18:56तुम एडिक्टेड हो जाते हो सीख और तुम जिसके एडिक्टेड हुए उसके
- 1:19:06गुलाम हो गए, फिर तुम मालिक नहीं रहे, फिर तुम गुलाम हो गए।
- 1:19:15यही है तुम्हारी जिंदगानी का पूरा चिट्ठा।
- 1:19:21तुम रोज़ गुलाम होते हो, फिर तुम रोते हो बाबा ये काम पीछा नहीं
- 1:19:26करता जब तुम एडिक्टेड होगे। संस्कृत होगे, बार बार दोहराओगे
- 1:19:34रिपीटेड करोगे और चाहे नाम को रिपीट करो, चाहे किसी शब्द को
- 1:19:41रिपीट करो, किसी राजनीतिक चीज़ को रिपीट करो, चाहे किसी भासना को
- 1:19:47रिपीट करो, तुम उस चीज़ के। जो तुम्हें आज मैंने रास रूप में
- 1:19:56बात समझा दी। इसलिए तुम गुलाम हो और तुम्हारी
- 1:20:01आत्मा छटपटाती है कि मुझे आजाद करो।
- 1:20:07मुझे आजादी चाहिए या स्वतंत्रता चाहिए?
- 1:20:11आत्म की इच्छा स्वतंत्रता ही होती है।
- 1:20:15आत्म कभी गुलामी बर्दाश्त नहीं करते, गुलामी मजबूरन तानाशाह थोप
- 1:20:23देते। ये है सारी प्रोसेसर मैंने समझा
- 1:20:30दी, बारीकी से समझा दी शायद तुम्हें समझा गई होगी अगर ना
- 1:20:35समझाई हो तो बार बार इसको फिर वीडियो को सुनना बड़ी सूक्ष्मता
- 1:20:41से मैंने समझाई। जीस चीज़ को तुम रिपीट करोगे, वो
- 1:20:48चाहे नाम है, चाहे विषय विकार है, चाहे राजनीति में कुछ भी है, चाहे
- 1:20:56तुम पढ़ने वाले विद्यार्थी रिपीट करें, ना तो वो उनको अच्छे से याद
- 1:21:03हो जाएगा। वो गुलाम हो जाएंगे।
- 1:21:07रेपेटिशन करना और समझना ये दो बातें हैं समझो और बात है
- 1:21:14रेपेटिशन रट्टा लगाना और बात है, समझ तो कुछ दूसरे ही आयाम की बात
- 1:21:20है। समझ तो होता है के भोग के पता
- 1:21:24लेना। भोग भोग की पता लेना कि भोग
- 1:21:28व्यर्थ है, भोग बेकार जब आप बोलते हैं तो आँखों से झर झर आँख से आने
- 1:21:38शुरू हो जाते हैं, बहुत शुभ है। अभिषेक हृदय के अंतर्म कोनों में
- 1:21:51बसा लीजिए जैसे तुम्हारी काम भाषण निकलती है बाहर और तुम चिपट जाते
- 1:22:00हो उसके साथ और काम भाषणों को भोग लेते हो, उसे बाहर के थोर से से
- 1:22:05नहीं होने देते। करो जाता है करो से चिपट जाता है
- 1:22:10लोह मुँह अनकार से चिपट जाते आया है वो, कैथोड के लिए चेतन में,
- 1:22:17लेकिन तुम उसे चिपट जाते और भोग लेते बस यही गलती है, तुम में
- 1:22:23चिपटा मत। वह कैथल से सोने के लिए आया,
- 1:22:27वातावरण में उसे हो लेने दो, बादल की तरह आया चला जाएगा, रोना बड़ा
- 1:22:38शानदार रोना परमात्मा की अमूल्य देन है।
- 1:22:44सबसे बड़ा कैसा रोने में होता है क्योंकि तुम दुखी हो और कितना
- 1:22:54अच्छा हो कि तुम्हारा दुःख जैसे तुम रोज़ लोगों के सामने बताते हो
- 1:23:01कि मैं दुखी। रोने के पलों में वह दुख के थर से
- 1:23:07सोता है। अगर रोना आ जाए तो ये सौभाग्य है।
- 1:23:17बहुत से लोगों के ऐसे ही कमेंट आए।
- 1:23:21मैं उसे कहता हूँ कि रोना खूब रोना जी भर के रोना एकांत में बैठ
- 1:23:26जा जितना रोना आये रोना क्योंकि यह रोना दुख से आता है, तुम दुखी
- 1:23:36हो अभी सुख का रोना तुम्हें पता नहीं।
- 1:23:41रोना सुख में भी होता है, लेकिन अभी वो नहीं है रोना तो वो तब
- 1:23:46आएगा सुख का जब तुम अपने अंतश को छू लोगे और हृदय आनंद से मर जाएगा
- 1:23:53तो एक रोना तब भी आएगा लेकिन वो अभी आया नहीं है।
- 1:23:58अभी तो आया है। दुःख का रोना क्योंकि तुम दुखी हो
- 1:24:04और ध्यान रखो इसके तिरस्कृत मत करो।
- 1:24:08इसे ये मत सोचो कि ये क्यों भाग गया रोऊं?
- 1:24:12इसको आनी दो जितना रोना आता है आनी दो।
- 1:24:21शुभ है क्या होगा? यह जो दुख, दर्द, पीड़ा, दिल में
- 1:24:32छुपी है वो कैथर से सो जाएगी और तुम हल्के हो जाओगे।
- 1:24:38रोने से तुम्हारा अचेतन हल्का होता है जो कि हमारा टारगेट है।
- 1:24:45हमारा लक्ष्य यही है हमने अचेतन को खाली कर दिया है।
- 1:24:51इसमें बाकी भी सहायक है क्रियायोग करो।
- 1:24:57क्रियायोग इसमें सहायक है। भीतर का धूल धमा से उठेगा।
- 1:25:03जैसे हम फर्श को साफ करते धुंआ उठता, धूल उठता वो धूल उठकर आएगा।
- 1:25:09चेतन मन में और चेतन मन में जो चीज़ आती है वो आती है कथ और
- 1:25:14सशक्तिय। लेकिन दुर्भाग्य तुम्हारा ये कि
- 1:25:19कैथोरिस्ट तुम होने नहीं देते, तुम उसे पकड़ लेते हो, पकड़ लेते
- 1:25:25हो तो तुम इसे भोग लेते हो फिर पश्ताते हो काश तुमने वो एक क्षण
- 1:25:33बचा लिया होता हो। जब कैथल से सोने के लिए आया था
- 1:25:39तुम अलगाव साक्षी बने रहते, धृष्टता बने रहते और स्थिति
- 1:25:47प्रज्ञता में रहते देखते रहते काम आया, क्रोध आए।
- 1:25:55लोभ मोह अंकार आया अगर देखते रहते तो ये कैथर से सो जाता ऐसे हीरो
- 1:26:05नो बड़े से बड़ा कैथर से पहली बात तो आता कहते मर्द रोते नहीं।
- 1:26:13यह मृदानगी की निशानी है नहीं या किसी ने गलत अफवाह उड़ा दी और
- 1:26:23रोना मर्द हो या औरत सबके अचेतन को खाली कर जाएगा।
- 1:26:29रो मर्द हो तो भी रो। जितना रोना आता है, उतना रोओ और
- 1:26:38ऐसी इंतज़ामात करो कि तुम रोओ और जीस।
- 1:26:44प्रवचन को सुनकर तुम्हें ज्यादा रोना उस प्रवचन को बार बार चलाओ।
- 1:26:51वक़्त मिलते ही उसको चलाओ, रोना आएगा।
- 1:26:57एक वक्त ऐसा आएगा कि प्रवचन को सुनोगे रोना नहीं आएगा।
- 1:27:02बस वो सारा कैथल से हो गया। अचेतन काफी मात्रा में खाती हो।
- 1:27:10रोना अचेतन को जितना खाली करता है, अनुपातिक दृष्टि से उतना कोई
- 1:27:17भी कथोर्सेस खाली नहीं करता। रोना एक मात्र ऐसा कथोर्सेस है जो
- 1:27:25आँखों से निकलता है बाकी सभी कथोर्सेस।
- 1:27:29तुम्हारे ब्रह्मतर से जाते हैं। सिर से एक रोना ही मात्र दुःख ही
- 1:27:36मात्र ऐसी चीज़ है जो सिर से नहीं निकलती, जो तुम्हारी आँखों से
- 1:27:41आंसू बन के निकलती है और वही तुमने मर्दानगी में छुपा लिया।
- 1:27:46इसलिए मर्दों के चेहरे लटके हुए। मृद क्यों इतने लावण्य से युक्त
- 1:27:54नहीं होते स्त्री क्यों लावण्य से युक्त होती है?
- 1:27:57क्योंकि वो रो लेते है तुमने मृद को अरे मृद हो, रोते हो यह पता
- 1:28:06नहीं यह दुष्ट परंपरा कहाँ से आगा?
- 1:28:10रोना अपने आप में एक बहुमूल्य हीरा है क्योंकि वो तुम्हारे दुख
- 1:28:14के सारे भावों को तुम दुखी हो बाहर फेंक देता है आँखों।
- 1:28:21के जरिये दिल के हर माँ। आंसू में बह गए दिल के अरमा आंसू
- 1:28:40में। बह गए ये दिल के अरमान दिल के
- 1:28:45अरमान क्या है तुम्हारे? पूरे नहीं हुए वो दुख दिए तुम्हें
- 1:28:50तुम दुखी हो, तुम निराश हो, तुम हताश हो अगर सुसाइड करने चला
- 1:29:01व्यक्ति थोड़ी देर के लिए रो ले। सुसाइड नहीं करेगा, यह मेरी
- 1:29:07गारंटी है। अगर सुसाइड से भरा हुआ व्यक्ति इन
- 1:29:14मनोभावों से भरा हुआ व्यक्ति उसको तुम रुलाने में कामयाब हो जाओ तो
- 1:29:20वह आत्महत्या नहीं करेगा। क्योंकि जो दुख था, जो दर्द था वो
- 1:29:24आंसू बनकर बह गया बाहर जिसके कारण वो ये गलती कर जाता, बाहर बह गया।
- 1:29:36अब वो दुख न रहा, तू सुसाइड करेगा?
- 1:29:41तुम पुत्री रोती हो तो अवश्य रो एकांत कमरे में बैठ जाओ, खूब रो
- 1:29:48रोने को प्रोत्साहित करो। ये रोना बड़ा कीमती है।
- 1:29:56यह तुम्हारे अचेतन को खाली जीतने अनुपात दृष्टि से करेगा।
- 1:30:01और कोई भी विकार नहीं कर सकता। अगर तुम उसके साक्षी हो जाओ तो
- 1:30:09रोना सैकड़ों होना ज्यादा जल्दी आपके अचेतन को खाली कर जाता है,
- 1:30:18इसलिए रो। रोने के कारण पैदा करो अगर मेरी
- 1:30:26वाणी से तुम्हे रोना आता है, मेरे किसी विशेष प्रसंग से रोना आता
- 1:30:31है। मेरी किसी विशेष कहानी से रोना
- 1:30:35आता है तो उस कहानी को बार बार सुन।
- 1:30:38वक्त वक्त के बाद तो सुनो अभी सुनो दोपहर को फिर सुनो फिर रो
- 1:30:44लिए फिर रात को फिर सुनो फिर रो लिए रोना एक ऐसी शानदार कला है।
- 1:30:59जो आपके अचेतनो को जितनी शीघ्रता से त्वरता से खाली करती है, इतना
- 1:31:06कोई और कैथोड से नहीं पुत्रे। खूब रो, जीस कारण से जीस वीडियो
- 1:31:20से तुम्हें रोना आता है रो बिलकुल मत चूको उस वीडियो को अलग से रख
- 1:31:28लो। जब भी कभी तुम्हें ऐसा लगे कि
- 1:31:32रोने का मन करता, वो वीडियो चलाबो रोने में सहयोगी होगी और रोने से
- 1:31:39तुम्हारा अचेतन खाली हो जाएगा। वो ही हमारा लक्ष्य है।
- 1:31:44तुम्हारा अचेतन खाली हो और खाली मन में परमात्मा उतरता है।
- 1:31:51ये बातें पता नहीं किसी ने बनाती हैं खाली मन में शैतान उतरता है
- 1:31:59खाली मन में भगवान हो सकता है, भगवान को आने के लिए जगह नहीं है।
- 1:32:07यू अरे बीज़ी? तुम नॉनवेजिनेस में आते हैं,
- 1:32:13रहोगे तो खाली हो जाएगा, हृदय थोड़ा सा, उसके आने को बैठने को
- 1:32:19जगह बनेगी, सिंहासन बन जाएगा और दूसरा।
- 1:32:28ये तुम्हारे सभी के लिए खूब रहो, जो वीडियो इतने हजारों वीडियो
- 1:32:35बोले जो वीडियो तुम्हारे हृदय को छू जाए और अक्सर बहुत सी वीडियो
- 1:32:41तुम्हें छू जाती है। बहुत से मेरे पास ऐसे।
- 1:32:47कमेंट आते हैं। सैकड़ों की तादाद में हजारों की
- 1:32:51तादाद में रोना बहुत आता है। बाबा आपने बोलना शुरू किया, इधर
- 1:32:58रोना शुरू हो गया, बड़ी शुभ बात है ये तुम्हें पता की नहीं।
- 1:33:03किसी ने बताया भी नहीं, आज तुम्हें बता देता हूँ।
- 1:33:07रोना तुम्हारे चेतन को जीस तरह से खाली करता है उतना कोई भी
- 1:33:15कथोर्सेज़ खाली नहीं करता। अगर रोना आता है तो बड़ा शोभ है
- 1:33:21फिर यह रोना। तुम्हें सभी बिखरों से मुक्त कर
- 1:33:27जाएगा। न काम उतनी तेज़ी से उठेगा, न
- 1:33:32क्रोध, न लोभ, न मोर, न अंकार न बह सब बह गया ह चेतन खाली हो गया
- 1:33:40क्या? क्या निकला इस चेतन में, तुम्हें
- 1:33:42पता नहीं। इसलिए रोना आता है तो रो और क्या
- 1:33:52तुम हमें छोड़ तो नहीं जाओगे नहीं मैं अगर छोड़ भी गया।
- 1:33:59तो उस मूर्ति में, क्योंकि वह हर जगह है ही, इस प्रेसेंट तो हमने
- 1:34:07पहले से सब बात बना ली है। सब तैयारी है यहाँ मेरी ग्रेप है,
- 1:34:16मेरी कबर उसमें दफन। उस कवर के भीतर जो मूर्ति होगी,
- 1:34:24उसमें मैं प्रतिष्ठित होऊंगा। मैं उतरने की कला जानता हूँ और वह
- 1:34:33मूर्ति किसी ब्राह्मण से तुम्हें। प्राण प्रतिष्ठित नहीं करानी
- 1:34:37होगी। किसी ब्राह्मण को तो आने पे मत
- 1:34:39देना प्राण प्रतिष्ठा मैं खुद ही कर लूँगा स्मृति की क्योंकि मैं
- 1:34:45ही उतर जाऊंगा उसमें वो बूंद जो पाथर से चली और आज चर्म ऊंचाइयों
- 1:34:53पे 100% पहुँच गई। अब उसने अपना देह ही समाप्त कर
- 1:34:57दिया तो मैं उतरूंगा उस मूर्चे में जक्र बनकर तैयार हो जाएगी या
- 1:35:02हो गई होगी मैंने सब इंतजामंद कर दिया है जगह प्रेमियों ने खरीद ली
- 1:35:10है, आश्रम के बिल्कुल पास ही है। नक्शा तैयार है।
- 1:35:17रोहित के पास सभी लोग इसमें योगदान दे रहे हैं।
- 1:35:25मेरे जाने के बाद उस मूर्ति में मैं उतर जाऊंगा।
- 1:35:32मैं यानी के जो। बूंद समुद्र में सामान्य तो
- 1:35:37समुद्र तो सब कहीं है, कोई विशेष एक जगह समुद्र नहीं है ये प्रशांत
- 1:35:44हिंद महासागर इनमें कोई उतरने नहीं, हर जगह ही इस प्रेसेंट
- 1:35:48एव्री होगा। ईशावास्तुमितम सर्वमयत किंची जगत
- 1:35:53नाम जगत तो उस मूर्ति के भीतर मैं उतर जाऊंगा यह मेरी इच्छा है, मैं
- 1:35:59स्वतंत्र हूँ उस स्थान को मैं चुन लूँगा यही मुक्ति का।
- 1:36:08प्रयोजन है और यही मुक्ति का ढंक है।
- 1:36:23अपनी मूर्ति के भीतर उतर जाना मुझे सहजता से आता है।
- 1:36:31जब सारा देही गल गया जो कि गलने को है।
- 1:36:38तो उस मूर्ति में मेरी वो चेतना की हल्की सी छोटी सी जो बहुत चली
- 1:36:45थी वो समुद्र में समाएगी और समुद्र किसी विशिष्ट जगह पे नहीं
- 1:36:51वहाँ जाना पड़ेगा उतरने के लिए। नहीं नहीं समुद्र इस एव्रीवन
- 1:36:56क्योंकि ही इस प्रेसेंट एव्रीवेयर ही इस ओमनी प्रेसेंट मेरा विराट
- 1:37:04रूप हर जगह है। मैं अपने ही विराट में इस मूर्ति
- 1:37:09के स्थान पर समा जाऊं। मैं प्राण प्रतिष्ठित हो जाऊंगा,
- 1:37:17वो मूर्ति प्राण प्रतिष्ठित हो जाएगी, फिर तुम उस मूर्ति के
- 1:37:21सामने जो भी मन्नत मांगोगे जो भी दुखड़ा रोग है, करो लेना।
- 1:37:33मैं उसे दूर कर दूंगा, मैं उसे हार दूंगा, तुम्हारे दुख तुम
- 1:37:43फिक्र मत करना, तुम चिंतित मत होना खंडेगी ये दे खंडेगी ये तो
- 1:37:49खंडेगी। देखो इसे तो स्वीकार करना ये तो
- 1:37:53तुम भी जाओगे, मैं भी जाऊंगा, लेकिन मैं जाऊंगा एक सिंघाशीन चढ़
- 1:37:59चढ़ मैं सिंघाशीन चढ़ के जाऊंगा जाने अपनी मूर्ति में अपनी उस
- 1:38:07मुक्त आत्मा को। चेतना को जो पात्र से चली वह अब
- 1:38:13देही से मुक्त हो गई, कुछ न बचा जो देही के साथ चिपटी हुई आत्मा
- 1:38:22थी वह मुक्त हो गई, देही गल गया, सारा रसम्राख खाक हो गई।
- 1:38:29मैं बचा, अपने शुद्धतम रूप में बचा, शिव हम रूप में बचा, मैं उस
- 1:38:37मूर्ति में उतर जाऊंगा और अपने अनंत में समा जाऊंगा।
- 1:38:42मेरे दो रूप हैं एक वह रूप जो देही के साथ बंदा।
- 1:38:49एक वह रूप जो सर्व में समया हुआ। सरबग्या पि सदा अलेपा सरबग्या पि
- 1:39:04सदा अलेपा। तोहे संग समर तोहे संग समर काहे।
- 1:39:26काहे रे रे बन को जन जा काहे रे बन को जन जा?
- 1:39:45इसी वन में मत खोजना किसी और जगह मत खोजना मैं इसी मूर्ति में
- 1:39:53प्रतीक्षित होऊंगा। चेतना मुक्त हो गई है।
- 1:39:59बस अब थोड़ा सा देव थोड़ा सा जो वक्त बाकी बच्चा है।
- 1:40:07वह गुजार लूँ, तुम्हें राजनीतिक रूप से भी दिशा दे।
- 1:40:17बस यही मेरा प्रवचन है। तुमने कहा वैसे मैं चाहता था।
- 1:40:25लेकिन मेरी चाहत तुम्हारी चाहत के आगे फीकी पड़ जाती है।
- 1:40:30मैं त्याग देता हूँ अपनी चाहत को निर्लो भी है मन तुमने कहा के
- 1:40:38बाबा थोड़ा हमें दिशा दे दो राजनीति में तुम जा तो रहे।
- 1:40:44लेकिन अब क्योंकि तुम सभी कहते हो कि बाबा हमें निशा दे दो ठीक है
- 1:40:53न्याय प्रिय लोग शांति से जो रहना चाहते हैं जो अभी अन्त भक्त नहीं
- 1:41:01होंगे। जिन्होंने रेपुटेशन नहीं किया, वो
- 1:41:05तो देखो मजबूर हैं बेचारे उनकी कोई गलती भी नहीं, लेकिन वो चाहे
- 1:41:11तो इस बंधन को तोड़ भी सकते हैं। कोशिश करो अगर टूट जाए नहीं टूटे
- 1:41:20तो कोई बात नहीं। बहुत ज्यादा संख्या है।
- 1:41:25करीब 90% के करीब संख्या है जो इंसाफ पसंद है जो शांतिप्रिय आए
- 1:41:39इस चैनल को सब्सक्राइब करें। तुम्हारी सास अगर कुछ ज्यादती
- 1:41:47हुई, राजनीतिक व्यक्ति ने की, जैसे अभी डीआईजी के घर से करोड़
- 1:41:56रुपए मिला, किसका था? क्या सरकार इसको तनख्वाह नहीं
- 1:42:01देती? क्यों करते हैं ये लोग?
- 1:42:06ऐसा ही अकेले ये अभिसर लोग नहीं है।
- 1:42:12राजनीति तो परम भ्रष्ट है जब 70,000 करोड़ रुपया।
- 1:42:19वारे मुख्य सेवक कहते हैं कि 70,000 करोड़, एनसीपी और चिक्की
- 1:42:37पी सिंह पी सिंह तो क्या हम बेवकूफ हैं?
- 1:42:43मूर्ख है क्या? उचक्की पीसिंग दो दिनों के बाद
- 1:42:50गंगा स्नान करके महाराष्ट्र का खजाना मंत्री बन जाता है।
- 1:42:59यानी तुम चाहते हो की और रूट ले। यह नहीं चलेगा।
- 1:43:04भैया हाँ बिलकुल चलेगा अगर तुम मुझे मार दो और मैं अगर मर जाऊ तो
- 1:43:15याद रखना, हम दो हमारे दो ये चार बंदे।
- 1:43:23पर जो तुम करोगे वो मुझे पता है कहीं छोड़ते नहीं जाओगे नहीं नहीं
- 1:43:37बिलकुल नहीं छोड़ूंगा, सदा बना रहूंगा और देखो शरीर को गोली लगे
- 1:43:43या शरीर को अग्नि शरीर दभन हो, कोई बात नहीं।
- 1:43:48दर्शन तो होगा ही लेकिन मैं जो उस मूर्ति के भीतर समा जाऊंगा, सदा
- 1:43:54से तुम्हारी व्यथाओं को सुनूंगा, सदा से तुम्हारी दुखों को दूर
- 1:43:59करता रहूंगा, अनंतकाल तक मैं बना ही रहूंगा मेरा समुद्र का बूंद।
- 1:44:07मेरा समुद्र का प्रभाव मेरी अनंतता से कोई नहीं छीन सकता।
- 1:44:13ये शरीर तो छीन सकता है, कोई भी छीन सकता है लेकिन मेरी अनंतता
- 1:44:19मेरी अखंडता, मेरी विशालता कोई नहीं छीन सकता, मैं सदा बना
- 1:44:26रहूंगा। और तुम्हारे दुख दर्दों का सदा ही
- 1:44:30इलाज करता रहूँगा तुम ज़रा भी आंसू न बहाना जितना संग नभा दिया
- 1:44:45उतना। ही।
- 1:44:48उप। कार समझ कोई जितना सच निभाना उतना
- 1:45:04ही। कार समझ कोई जीत ना साथ निभाब
- 1:45:20जन्ममारण का? मेल हैं सपना जे सपना बिसरा दे
- 1:45:39उतना ही उपकार समझ कोई। जितना सा से निभा दे, जन्ममरण का
- 1:45:59मेल है सपनों। ये सपना बिसरा है कोई न संगमर कोई
- 1:46:21न संग। मरे मनरे तू काहे न दे र धरे ये
- 1:46:39निरमो ही? मोह न जाने जिनका मोह करे।
- 1:46:57मन रे रे रे। तू का है न देर धरे धन्यवाद।