Latest / Baba ji Vijay Vats / 21/2/26 - घटनाएं पूर्व निश्चित हैं तो संकट से कैसे बचें? बाबाजी की वो भविष्यवाणी जिससे जज भी कांप गए
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- 0:13साहब सिंह बाबा जी, क्या आप जानते हैं कि आपकी मृत्यु कब होगी?
- 0:35तंग आ गए वो क्या मेरे सर? या कोई और कारण है?
- 0:48हाँ, मैं जानता हूँ। मैं जानता हूँ इसलिए अपनी कवर खुद
- 1:02वाली सन 2000 के आस पास की बात हो गई।
- 1:36यहाँ शहर में एक जज रिशित हुआ करते थे।
- 1:50गहे बगाहे राय मशविरा लेने के लिए मुझे बुला लेते हैं।
- 2:041 दिन उनका फ़ोन आया। उनके धर्मपत्ने कहा कि आपको या
- 2:14साहब ने याद किया? मैंने कहा ठीक है, मैं आधे घंटे
- 2:21में आ जाऊंगा, थोड़ा काम है। उसके बाद मैं आ जाऊंगा।
- 2:33आज पौन घंटे के बाद मैं जस साहब के घर में गया।
- 2:40सरकारी बंगला होता है। गर्मियों के दिन थे।
- 2:51दो मंजली इमारत थी, मुझे ऊपर की इमारत में बढ़ा दिया गया एसी
- 2:57वगैरह ऑन कर दिया गया मुझे दो जन्मपत्रियां हॉरोस्कोप रख दिए
- 3:05गए। आप देखिए गुरूजी इन दोनों के
- 3:16संस्कार मिलते हैं, क्या हमको इनकी शादी तय कर देनी चाहिए?
- 3:33उन्हें पता था। कि कोई गहरा प्रश्न पूछने के बाद
- 3:40मुझे अकेला छोड़ना है। आज उन घंटे तक हर 15 मिनट के बाद
- 3:49पीएन आता कभी शिकंजा भी, कभी शरबत, कभी ठंडा पानी दे जाता हूँ।
- 4:02करीब एक घंटा बीत गया मैंने वहाँ पर पड़ी हुई बैल लगाई।
- 4:12पीएन आ गया, मैंने कहा कुंडली तैयार बोलिए, मैं नीचे आऊ।
- 4:20कि जब साहब यहाँ आते हैं तो जब सब कहने लगे कि आप नीचे आ जाओ, मेरी
- 4:40धर्मपत्नी भी यहाँ बैठी है। यह मामला कुछ ऐसा है कि हम दोनों
- 4:47ही इसमें एन्टेंगल हैं। मैं नीचे वाले कमरे में बैठ गया।
- 4:59बिल्कुल सत्य घटना है 100% सत्य घटना है।
- 5:17मैंने कहा जब सब बात यह है गुण तो इनके नहीं मिलते हैं।
- 5:24गाण भी नहीं मिलते हैं जो हमने विशेष हित चीजें मिलानी होती हैं
- 5:30और नहीं मिलते हैं। ना बकोट ना नाड़ी।
- 5:44ना ही गुण मिलते हैं। फिर क्या होगा इसका नतीजा?
- 6:02मैंने कहा जैसा पैसा करो, आप इनकी शादी तय कर दो।
- 6:13तो कल आप शादी तय कर दो, ठीक है सात दिनों में लड़के की टांग टूट
- 6:23जाएगी। ये होती हैं बीसवाणियां मुझे लोग
- 6:37पूछ लेते हैं बाबा अब 6 साल आगे की बात कितने?
- 6:41दो पुत्र होंगे और गला कटवा दूंगा, अगर न हुए तो?
- 6:46कैसे बिना पे बोलते हैं वो रात को नींद आ जाती है।
- 6:50मैंने कहा बिल्कुल घोड़े बेच के सोता हूँ, आपको फिकर नहीं होती कि
- 6:57मेरी इमेज खराब हो जाएगी, मैंने कहा नहीं क्योंकि मैं आश्वस्त
- 7:02होता हूँ ये होगा ही। यहाँ हिसाब कचानी यहाँ विशेष ही
- 7:12चीजें परखनी हो वहाँ एस्ट्रोलॉजिकल व्यवस्था देखने के
- 7:16बाद मैं बाबा जी से पूछता हूँ, देखिए मेरी व्यवस्था गणना ठीक है?
- 7:27उनसे ओके करवाने के बाद ही मैं बोलता हूँ, मैंने कहा जत्था इनकी
- 7:36मंगनी कर दीजिए, परिणाम क्या होगा?
- 7:42गेन लीजिए। सात दिनों के भीतर कभी भी लड़की
- 7:47की टांग फूट चढ़ के और फिर फिर जब शादी होगी तो शादी के एक महीने
- 7:57में लड़की की मृत्यु हो जाएगी। अब तो जैज भी कहाँ पे जैज के
- 8:05घरवाले भी कहाँ पे है? ऐसा ने कहा ऐसा क्या है?
- 8:18मैंने कहा आपने जन्मपत्री दिखानी है कि ज्योति सीखनी है, आपने
- 8:26मुझसे फर्क पूछा, मैंने बता किसी और से पूछ कहते, औरों से तो पूछ
- 8:37के ही किया था गुरूजी? मैंने कहा तू कर दिया है क्या
- 8:45कहते है हाँ कर दिया है तो फिर मुझे क्यों बुलाया?
- 8:49आपको तो बुलाया कि आपकी बातें सत्य होती है।
- 8:54लड़की की ही टांग टूट गई है। 6 दिन पहले मंगणी की थी, टाँव टूट
- 9:06गई इसलिए आपको बुलाया तब शादी कर दो।
- 9:13उन दोनों के चेहरे पीले पड़ गए। ऐसा है क्या?
- 9:18मैंने कहा बिल्कुल ऐसा है। करके देख लो कथनी गुरूजी, आपकी
- 9:26सभी बातें सही निकलेंगी। हम आपको आजमाएंगे आजमाया हुआ है।
- 9:42फिर अब क्या करें? टांग तो टूट गई तो मैंने कहा जज
- 9:48साहब आप इतने बड़े बड़े फैसले देते हो समीदार हो बड़े
- 9:56योग्यजाध्य थे वो आज पता नहीं है क्या?
- 10:05एक लड़का था, दो लड़कियां थी, सभी की जन्मपत्रियां दिखाने के लिए
- 10:10कभी कभी मुझे बुला लेते थे और कोई केस फंस जाता है, जिसमें फैसला
- 10:16नहीं दे सकते थे तो मुझे बुला लेते कि आपके हिसाब से इनका फैसला
- 10:23क्या होना चाहिए? खैर, बातें गहरी हो जाएंगी।
- 10:37अगर ऐसा है तो दोनों कांपे जज की घर वाली कहने लगी बात ये है
- 10:49गुरूजी। मुश्किलात खड़ी हो गई।
- 10:52लड़के की तरफ से मैं हूँ मीडिया ओके बिचौलनी और लड़की की तरफ से
- 11:04हम दोनों फंस गए। अभी कुछ नहीं बिगड़ा है।
- 11:13देखिये टांग ही तो टूटी फ्रेश से तो ठीक हो जाएगा रोड वगैरह पड़े
- 11:20कोई बात रोड पढ़ने के बाद भी लड़की वालों ने तो इनकार नहीं
- 11:25किया नहीं, उन्होंने इनकार नहीं किया।
- 11:30वो कहते ठीक हम बनिए, लोग होते हैं।
- 11:34बीआर गर्ग उनका नाम हम वायदा बी वायदा नहीं होते।
- 11:42हमने जो बात कह दी वो कह दी। करोड़ों के सौदे हम जवान के सिर
- 11:47पर करते हैं। मिल का फिर कीजिए, शादी कर दीजिए,
- 11:55जुबान पक्की रखी। अरे वाह कैसे शादी करें जब आपने
- 12:05बात ही स्पष्ट कह दी? मैंने कहा, यह हिम किम मेरे से
- 12:11होती नहीं। हिम किम वो लोग किया करते हैं
- 12:13जिनको पता नहीं होता मैं स्पष्ट ज्ञाता हूँ और मैं यह दृश्य अपनी
- 12:20आँखों से देख रहा हूँ। मुझे बिल्कुल साफ पता है तथ्य।
- 12:29अगर लाल पीला मिलेंगे तो क्या होगा?
- 12:34अगर पीला नीला मिलेगा तो क्या होगा यह व्यवस्था में अच्छी तरह
- 12:38से जानता हूँ। हॉरोस्कोपिक स्टार्स आपस में गणना
- 12:50बिठाएंगे तो फल क्या आएगा? यह एक बहुत गहन विज्ञान कृत
- 12:58गुरूजी टांग तो टूट गए। सरिये पड़े हैं दो।
- 13:02लेकिन लड़की वालों ने अभी तक इंकार नहीं किया।
- 13:05वो कहते हैं, हम तो यहीं करेंगे, कोई बात नहीं।
- 13:08छह महीने साल लग जाए लग जाए। मैंने कहा तुम्हारी मर्जी है, मैं
- 13:17चलता हूँ। मैं तो आ गया, बाद में उन्होंने
- 13:30विचार किया अब क्या किया जाए? दिमाग पे बोझ पड़ गया जब एक
- 13:37व्यक्ति जीसको ये नहीं पता कि हम हैं कहाँ के।
- 13:42मैं ज्यादा पूछ्ताछ नहीं क्या करता मेरे पास यहाँ के तीन लोग
- 13:45आते कभी पूछा तुम्हारा नाम क्या है?
- 13:49गोत्र क्या है? कहाँ से आए कुछ नहीं पूछता इतिहास
- 13:59में मेरी रूचि नहीं। मैं सिर्फ पूछता हूँ कि दीक्षा
- 14:07लेने आए हो? हाँ तो बैठ जाओ, आँखें बंद कर लो
- 14:15और दीक्षा देके विदा कर देता हूँ, अब जाइए कहाँ जाएंगे ये नहीं पता।
- 14:28कोई औपचारिकता नहीं। मैं किसी से ये नहीं पूछता कि
- 14:33गाना वगैरह खा लिया। नहीं खा लिया मुझे पता है सिस्टम
- 14:40इतना सेट है हमारा। और इतनी शांतिपूर्वक निपट जाता है
- 14:44सारा काम कि किसी को भी पता नहीं चलता।
- 14:51यहाँ कोई आश्रम नाम की व्यवस्था चल रही है।
- 15:02लेकिन अंत में उन्होंने फैसला दिल डगमगा गया।
- 15:09फैसला लिया लड़के वाले की तरफ से थी जज के घर वाली लड़की वाले की
- 15:20तरफ से जज। जज साहब गए कि ऐसा बात है क्या
- 15:38किया जाए? घबरा तो होगी क्या?
- 15:45अब ऐसे कैसे किसी व्यक्ति को पता? कि जैसे ही तुम संबंध जोड़ने का
- 15:52संकल्प लोगे। लड़की की टांग टूटे कि लड़की की
- 15:56नहीं बताया और टूट गई। अब क्या किया जाए?
- 16:04लड़की वाले कहते हम तो यही करेंगे।
- 16:08हम तो जुबान के भक्ते हैं। जो लड़के वाले जो कहते हैं हम
- 16:17नहीं करे क्योंकि मरेगा हमारा टांग टूटी हमारे बेटे की तुम्हारा
- 16:32नुकसान कुछ हुआ नहीं। तुम्हारे जो खर्चा वर्चा है,
- 16:38उसमें हरजाना भी ले लो और रिश्ता हम तो तोड़ते है लेकिन उससे पहले
- 16:51एक चंडीगढ़ में एस्ट्रोलॉजिस्ट है, ₹2000 लेते है।
- 16:57उस वक्त लेते थे ₹2000 एक प्रश्न पूछने थे।
- 17:04दिन में 10 प्रश्न बताते थे, जो आप और 10 से ग्यारहवें आदमी को
- 17:09जवाब नहीं देते थे। 10 प्रश्न बताये और अपना कमरा बंद
- 17:15किया। जाके आराम विश्राम करने लगे।
- 17:21उनका नाम मैं जानता तो नहीं, लेकिन हल्का सा दिमाग में आ रहा
- 17:27है। शायद प्रेम कुमार था, शायद पक्कन
- 17:35तो उनके पास गए। वो कहती कर दो, कोई हर्ज नहीं।
- 17:42उससे पहले जिसने पूछा था उसने कहा कर दो कोई हर्ज नहीं मंगणी करने
- 17:51से पहले। इससे भी पूछा मंगनी करदे कहते कर
- 17:57दो और ये टांग तो टूट गई, आपने तो बता दिया, लेकिन श्रद्धा भी कोई
- 18:08चीज़ होती है? रिश्ता वापस हो गया?
- 18:18लड़के वाले लड़की वाले हमारे ग्लटबाह के रिश्तेदार थे, उनको भी
- 18:34बुरा लगा। लेकिन जिसने सत्य बताना है किसी
- 18:39को बुरा लगे, किसी को छलके सत्य बतलाने वालों को कोई फर्क नहीं
- 18:45पड़ता, क्योंकि फर्क अपने आप ठीक हो जाएगा।
- 18:48जब घटनाएँ बीत जाएँगी, दरें ठिकाने आ जाएगी जब घटनाएँ बीत
- 18:56जाएं। मेरे बड़े भाई डॉक्टर थे, उनकी
- 19:06मृत्यु होने वाली थी, मैंने माता को बुलाया, भाभी को बुलाया, अपने
- 19:10गैलरी में दोनों को बिठाया। मैंने कहा तुम भाभी माता दोनों
- 19:16बैठी हो, गौर से सुन लो। कल डॉक्टर साहब गाड़ी के नीचे सिर
- 19:22देख के मर जाएंगे कल कल दोनों को अच्छी तरह समझा के अच्छी तरह समझा
- 19:36के आध घंटा भर जिखाई मार तरा। मैंने आधे घंटे बाद कहा तुम जाओ
- 19:47चले गए, बड़ा ख्याल रखा क्योंकि विश्वास था बहुत से लोग मुझसे पूछ
- 19:58के जाते थे। और मेरा एक ढंग था शुरू से ही रहा
- 20:03है। मैं किसी को बताता था तो मेरी कोई
- 20:07फीस नहीं होती थी और जब मेरा मन नहीं होता, मैं कहता नहीं बताता
- 20:14नहीं था जाओ तो मैं नहीं बताऊँगा। आज यही तो मौज होती है।
- 20:22आई मौज फकीर की दई झोंपड़ी फूंक किसी को बता देता तो कोई पैसा
- 20:29नहीं, किसी को नहीं बताता तो लूट जाओ, लालच मेरे आगे चलता नहीं।
- 20:39अब और कोई रास्ता नहीं बचा, किसी और पंडित से पूछ लो, हज़ारों
- 20:42पंडित तो बैठे ही हैं। यहाँ के जो रिश्तेदार थे, लड़की
- 20:58वालों को मेरे से नाराज रहने लगे लेकिन रिश्ता तोड़ दिया गया।
- 21:09जो भी डब्बे वगैरह बर्फी, लड्डू बांटे गए थे।
- 21:15सबका खर्चा पानी वापस कर दिया गया।
- 21:18जितना मांगा उतना वापस कर दिया। दोनों पार्टी बड़ी अमीर थे।
- 21:33मैंने फिर कहा जस्सा से देखो, अंजाम देख ही लेना चाहिए।
- 21:42वो कहते हैं, अंजाम तो दिख गया जब एक जीस व्यक्ति को जानते नहीं।
- 21:47आप तो मुझे भी नहीं जानते मैं कहाँ कहूं?
- 21:51आप तो ये भी नहीं जानते कि लड़के और लड़की के मग्ने हो चूके हैं।
- 21:56आपने सीधा कैलकुलेशन दिया है और कैलकुलेशन बिल्कुल ठीक है, वह घट
- 22:02चुका है। शादी के बिल्कुल छःवें दिन क्षमा
- 22:07करना मंगनी के बिल्कुल छःवें दिन निश्चित रूप से मृत्यु है।
- 22:12इसमें कोई शंका वाली बात नहीं है। हम रिस्क नहीं ले सकते और जिंदगी
- 22:17का रिस्क बिलकुल नहीं ले सकते। इसीलिए लड़कियां और बहुत लेकिन
- 22:29हमारी लड़की की मृत्यु का वियोग हम सहन नहीं कर सकते।
- 22:35लड़की तो और जगह शादी कर लेगी, कुछ नहीं होता।
- 22:39ये मगनी टंगनी तो होती रहती है हाँ टंगनी होती है मगनी टंगनी
- 22:45होती है टंग दो बस उसको। सब पता होता है, लेकिन बताना
- 23:07जरूरी नहीं होता। इंतजाम कर रहा।
- 23:17एकासा ही अगर तुम सबक लेलो, कुछ एस्टीमेट लगालो तो पर्याप्त है।
- 23:29मेरे बोलने से कुछ नहीं होगा, लेकिन 1 दिन मौत तो जरूर आएगी, ये
- 23:32तो पक्का है। क्यों क्यों?
- 23:51क्योंकि सभी घटनाएं पूर्व निश्चित हैं, तो विकृति कहाँ आती?
- 24:07अब समझना बात को अब बात असली मोड़ पर आई है।
- 24:15अगर सभी घटनाएं पूर्व निषिद्ध हैं तो फिर आदमी की स्वतंत्रता कहाँ
- 24:24रह जाती है? आप ये भी कहते हो कि आदमी
- 24:30स्वतंत्र भी है, हम बिलकुल स्वतंत्र है फिर इसको कृपा करके
- 24:36खुलासा करने की चेष्टा कर नहीं जी इसका खुलासा करता हूँ मैं आज अब।
- 24:46हम महत्वपूर्ण मोड़ पे आ गए। वो महत्वपूर्ण मोड़, वो प्रश्न जो
- 24:58सभी की ज़िन्दगी में हैं। लेकिन कोई भी संत अवतार परमात्मा
- 25:11उसका जवाब नहीं दे सका लीजिये आज मैं गुण्डी खोलता हूँ, आखिरी
- 25:17गुण्डी। यहाँ भी दुविधा खड़ी होती है जब
- 25:25लव से कहते हैं ऑल दी इवेंट्स आर प्रीडस्टाइन्ड फिर आदमी के हाथ
- 25:40में क्या है? फिर कृष्ण क्यों कहते हैं,
- 25:45कर्मण्येवाधिकार से कर्म करना तो तुम्हारा अधिकार है।
- 25:50ये दो बातें आपस में विरोधी हैं बिलकुल विरोधी।
- 26:01कृष्ण कहते हैं, कर्म करने का अधिकार है तुम्हें यू अरे
- 26:07इंडिपेंडेन्ट जे और लॉजी कहते हैं कि जो होता है वह परमात्मा करता
- 26:20है और भले के लिए करता है, फिर आप।
- 26:24इस गुंडी को बोलिये यहाँ तो हम फंस गए नहीं नहीं कोई बात नहीं।
- 26:32अब ये गुंडी खोलने वाला बैठा है। आइये हम इसको खंगालते है।
- 26:48एक मार्ग तय है। एक सड़क के बीचों बीच कुआं खुदा
- 26:56हुआ है और एक सड़क ऐसी जहाँ कुआं नहीं।
- 27:14एक सड़क ऐसी जहाँ कुआं नहीं खुला है, एक सड़क ऐसी जिसके बीच में
- 27:20कुआं खुला है लेकिन रास्ते से निकल जाने का थोड़ा सा मार्ग है।
- 27:34जीस सड़क के ऊपर कुआं नहीं खोदा है वहाँ से अंदर भी जा सकता है
- 27:41जिसके नेत्र नहीं हैं सरदार है, वह भी अपनी लठिया ले के आराम से
- 27:48जा सकता है, लेकिन जीस। सड़क के ऊपर कुआं खुदा है वहाँ
- 28:02जिसके पास आँखें नहीं वह गिरेगा। मोस्ट प्रोबैबली गिरता।
- 28:14क्योंकि ज्यादा संभावना है, शंकरा रास्ता है शंकरा रास्ता को खोज न
- 28:26पायेगा। तो अंधा तो उसमें गिरेगा ही
- 28:33गिरेगा। वह अंधा जो सपाट राजपथ पर चलने का
- 28:38अभ्यस्त है उसको पता नहीं कि यहाँ क्या होता है।
- 28:49लेकिन एक बात और भी है। साथ में जिसकी आँखें हैं वो देख
- 28:54लेगा कि कुआं है, वह कुंए के साइड से संकरे मार्ग से निकल जाएगा और
- 29:05कुएं में गिरेगा भी नहीं। जो जानता है कि कुआं खुदा है, वह
- 29:25अज्ञानी है, जो नहीं जानता कि कुआं खुदा है, वह अज्ञानी।
- 29:37इसलिए ज्ञानी बच जाता है, अज्ञानी कर जाता है।
- 29:49आज फिर महाभारत की एक कहानी सुना दो पांडवों के पांच भाइयों में से
- 30:01चौथा भाई सहदेव बहुत बड़ा एस्ट्रोलॉजिस्ट था।
- 30:08नक्षत्र विज्ञान की बड़ी समय थी उनमें और उस रात जब पांचों पांडव
- 30:20और कुंती भी वहाँ रुकी हुई थी। अचानक अर्ध रात्रि को आग लगा दी
- 30:27गई। दुर्योधन और शकुनी के द्वारा
- 30:31लाक्षा ग्रह था यानी लाक का ग्रह था और लाख एक ऐसा द्रव्य है,
- 30:39पदार्थ है जो आग को बड़ा जल्दी पकड़ता है।
- 30:46इन्फ्लेम एबर्ब और लाख का बनाया था ऊपर चित्रकारी कर दी गई थी।
- 30:58मंतव्य यह था कि पांडवों का भवंश नष्ट कर देना।
- 31:06और दुर्योधन की तो शुरू से ही ये इच्छा रही।
- 31:09मामा भांजा इकट्ठे होकर योजनाएं बनाते रहे, लेकिन सभी योजनाएं उस
- 31:20पर्व देगार ने व्यर्थ कर दिया। कोई नहीं चली पांडवों का हित
- 31:31चिंतक धृतराष्ट्र का ही भाई पांडु का भी भाई।
- 31:44दासी पुत्र बिदर वह सदा शक्ति का पक्ष लेता था, महामंत्री भी था
- 31:54हतनपुर का और उसके कान बड़ी दूर तक।
- 32:03चीजों को पकड़ते थे, खुसुर फुसुर होते दिखी।
- 32:10शकुनि और दिव्य धन में मामा भांजा में और क्या प्लान बना यह विदुर
- 32:18समझ गया। जब पंडक जा रहे हैं
- 32:38राज्य शासन में एक व्यवस्था थी कि जब किसी ने।
- 32:46राजा बनना होता था तो वार्नर व्रत नाम की उनकी एक जगह थी जो उनकी
- 32:56पित्रों की जगह माना जाता था। वहाँ पर जाकर रात रुकना होता था,
- 33:02रात जगानी होती थी। और वहीं पर ठहरना होता था।
- 33:08एक रात मन्नत तो मांगनी होती थी कि मैं राज़ पाठ संभालने जा रहा
- 33:19हूँ अतः मेरे पूर्व जो। मेरी सहायता कीजियेगा, आशीर्वाद
- 33:27मांगा जाता तो वाराणवृत्ति चले गए।
- 33:32लाक्षा ग्रह का निर्माण किया गया बड़ा सुंदर लाक्षा ग्रह।
- 33:48पाँचों पांडव, कुंती ये सभी गए चिकन दुर्योधन को तो खबर मिलनी
- 34:08चाहिए। कि पांडव मर गया।
- 34:12जल गए विधि को कुछ और ही मंजूर होता है, सीधे सीधे नहीं कहता
- 34:25बिद्रु कहता है युधिष्ठिर को युधिष्ठिर बड़ा समय अर्थ?
- 34:32युधिष्ठिर से पोषण लगे। जब जंगल में आग लग जाती है तो एक
- 34:39प्राणी बच जाता है। कितनी भी भयंकर आग वह प्राणी कौन
- 34:44बचता है? युधिष्ठिर बोले।
- 34:51चाचाजान प्राणी तो चूहा होता है, अपने बिल में चला जाता है, गहरी
- 35:00बिल होती है उसकी और परले पार निकल जाता है।
- 35:12बस बिद्रु इतना बोल के चुप हो गए और इतना सुनकर चुप हो गए।
- 35:18युधिष्ठिर व्यर्थ में बोलते नहीं हैं, अवश्य ही इस बात में कोई
- 35:25राज़ छुपा है। युधिष्ठिर समझ गए थे।
- 35:30किसी अनहोनी घटना का अंदेशा हमें दे रहे हैं एक गुप्तचर विभाग के
- 35:38रूप में काम कर रहे थे सत्य के पहरेदार के रूप में।
- 35:48तो रात भर ठहरे तो रात को अर्ध रात्री को आग लग गया।
- 35:54आग लग गई तो वहाँ पर अपने अपने कमरे में सभी राजकुमार, पांचों
- 36:06भाई और कुंती अपने अपने कमरे में ठहर गए थे।
- 36:16आग लग गई तो युधिष्ठिर ने पूछा सहदेव से ध्यान से समझना बात को
- 36:28ज्ञानी और अज्ञानी का कितना फर्क होता है?
- 36:36सहदेव को पूछा युधिष्ठिर ने भैया क्या?
- 36:43यहाँ से? आग के भीतर तो मेन गेट से लेकर
- 36:48चारों तरफ आग भयंकर फैली हुई है। और यह लाक्षागृह है, लाग आग को
- 36:56पकड़ लेती है, बड़ी जल्दी जल्दी ही हम सब जल के मर जाएंगे।
- 37:02क्या यहाँ से कोई रास्ता निकलता है?
- 37:09एक रास्ता बनाया गया था जिन्होंने लाक्षा ग्रह को बनाया था।
- 37:18पूर्वोचन नाम के व्यक्ति ने उनकी धर्मपत्नी थी।
- 37:23एक निषाद पांच उसके पुत्र थे। वह सात लोग वितरसे जब आग लगा दी
- 37:38गई। चारों तरफ तो महल के अंदर लाक्षा
- 37:43ग्रह के अंदर सात तो वो लोग हैं प्रवचन, प्रवचन की धर्मपत्नी भीर
- 37:51और पांच उसके पुत्र। और छः लोक से पांच पाठक और एक
- 37:58कुंते 13 लोक से कुल तो युधिष्ठिर पूछते हैं भैया सहदेव तुम बड़े
- 38:08विद्वान हो। तुम ज़रा हिसाब ला के बताओ कि इस
- 38:18लाक्षागृह में यहाँ से आग से बाहर निकलने का कोई गुप्त दरवाजा है।
- 38:31सहदेव ने हिसाब लगाया। उसका तीसरा नेत्र भी खुला हुआ था।
- 38:41उसने तीसरे नेत्र से सारी चीजें खंगाली और आखिर में उसने एक सुरंग
- 38:48ढूंढ ली, जो लाक्षागृह से भीतर भीतर जाती थी।
- 38:55और बहुत दूर जाकर निकल जाती थी। वह बनाई गई थी, जिन्होंने
- 39:01पूर्वोचन ने लाक्षागृह बनाया था, उनके बच निकलने के लिए बनाई गई
- 39:08थी। ऊपर एक पत्थर रखा हुआ था और पत्थर
- 39:11बिल्कुल उसके साथ का था। जिसके साथ का फर्श था तो सह देव
- 39:26ने कहा भैया हाँ, यह एक सुरंग है। उस सुरंग में से शायद ये जो
- 39:40प्रोचून जैसे लोग हैं, इनके निकलने के लिए बनाई गई है क्योंकि
- 39:45ये भी बीच में फंसे हुए हैं। इन्होंने ही महल बनाया है और ये
- 39:50अच्छी तरह से जानते हैं। इतनी बात सहदेव ने समझा दी और कुछ
- 40:05इशारा कर दिया था। बुद्ध ने जब जंगल में आग लगती है
- 40:10तो कौन बचता है और कैसे बचता है तो दृष्ट ने सोचा बचता है चूहा।
- 40:19और अपनी बिल में जाकर बिल से पार चला जाता है।
- 40:23इसलिए बच जाता है। आग से बहुत दूर निकलती है वह बिल
- 40:37शह दीवने का भैया है। इस फर्श के बीचोबीच एक ऐसी जगह
- 40:43है। अभी मेरा खुद का दिमाग फज़ल है,
- 40:55मैं इतना कंसेंट्रेट नहीं हूँ। इस आग को देखकर मुझे भी फिक्र हो
- 41:00गया और फिक्र होने से। तीसरे नेत्र की खोलने की क्षमता
- 41:05कम हो जाती है, इसलिए फिकर करना मनुष्य के लिए बुरा इस अर्थ में
- 41:13है कि आपका तीसरा नेत्र जागृत नहीं हो सकेगा अगर आप चिंता।
- 41:21चिंता मग्न रहने वाले व्यक्ति का तीसरा नेत्र खुलता ही नहीं, जो
- 41:27दिन भर रात चिंता से ग्रस्त रहता है तो सहदेव ने कहा एम ऑल्सो
- 41:32पज़ल। मैं तो खुद ही चिंता में हूँ हौ
- 41:37टु सॉल्व थिस प्रॉब्लम। इस समस्या को हल कैसे किया जाए?
- 41:43जानता हूँ इतासा मेरी विद्या मुझे बताती है।
- 41:47इस वर्ष के बीचोबीच कहीं से कोई रास्ता निकलता है और वर्ष का सबका
- 41:55पत्थर बराबर था। उसका रास्ता पता था।
- 41:59प्रवचन को तो भीम की ड्यूटी लगाई, भीम ने प्रवचन का गला लबेट लिया।
- 42:09क्या बता वो कौनसा पत्थर है भीम शक्तिशाली से जैसे ही गला।
- 42:17दबाया उसका परोचन ने फौरन बता दिया कि इस पत्थर को उखाड़ोगे तो
- 42:24इस पत्थर के नीचे से सुरंग निकलेगी।
- 42:29बीर ने तो दक्षिण उस पत्थर को उखाड़ दिया उनके पास तो।
- 42:36उपकरण थे उखाड़ने के, लेकिन भीम तो खुद ताकतवर थे।
- 42:41भीम ने अपनी उँगलियों से ही उखाड़ दिया उसे और देखता है तो नीचे
- 42:45सरंक है उन्होंने एक एक करके भीम ने माता कुंती को पहले फिर सभी
- 42:54भाइयों को। आखिर में आप निकल गए, आग बहुत फैल
- 43:00गई थी, तब तक आग इतनी फैल गई थी कि वो साथ के साथ लोग खुद ही
- 43:05लाक्षागृह में आग में जल के मर गए।
- 43:11सुबह जब। कौरव आए देखने के लिए तो सात लोग
- 43:15मरे पड़े थे। सोचने लगे भेजे तो छः थे पांच भाई
- 43:24एक कुंती ये सात कौन बुरी तरह से जल चूके थे?
- 43:30शब्द तो पहचान में आते नहीं। लेकिन सोचा कि एक कोई आया गया
- 43:36होगा गलती से प्रवेश कर गया होगा जब कोई अपना ही से पैसा लाल होगा
- 43:44उसको पता नहीं था। क्योंकि जो बनाई गई थी रचना हो
- 43:55सकता है। किसी को पता नहीं तो सात व्यक्ति
- 43:59डंडोरा पुटवा दिया गया के वाणपत्र के अंदर कुंती समेत पांचों पुत्र
- 44:07पांडव मारे गए। और पांडव तो बाहर निकल चूके थे,
- 44:18एक शब्द ने जान बचाई। बिदुर ने कहा कि जब आग लगती है।
- 44:30वणों में तो कौन सा जानवर बच जाता है उसने का चूहा बिल में जाने के
- 44:36कारण और बिल भी पार तलक निकलती है दूर तलक जहाँ आग का नामो निशान।
- 44:45युधिष्ठिर समझदार थी। उसने अंदाजा लगा लिया और सहदेव से
- 44:49पूछा बता सहदेव ने कहा भैया है तो बीचोबीच इतना तो मेरे समझ में आ
- 44:57रहा है लेकिन वो कौन सा पत्र है जीसको या तो सब को उखाड़ेंगे देर
- 45:02बहुत लग जाएगी। बड़ी तेजी से फैल रही है आग तो
- 45:08उसने कहा फिर ऐसे करे परोचन को ही भीम की ड्यूटी लगाई परोचन को की
- 45:15इसका गला दबा हरामखोर का ये बताएगा कौन सा है पात्र?
- 45:23तो भीम ने गला दबाया तो बोल पड़ा इस पत्थर को उखाड़ लो, उस पत्थर
- 45:32को उखाड़ा क्या सुरंग निकले सुरंग में से बाहर चले गए।
- 45:42अगर सुरंग में से बाहर न जाते तो वो सात लाशें अपने अपने कमरों में
- 45:51सोए होते तो गनीमत ये रही कि वो जागते रहे।
- 45:55उन्हें शंका पहले विदुर ने डाल दी थी।
- 46:01अन्यथा वो थके हरे सो जाते। नींद तो बहुत गहरी आ रही थी लेकिन
- 46:07विद्रुर का शब्द ऐसे ही नहीं आता। विद्रुर ने किसी कारण से ये बात
- 46:13कही है इसलिए जागते रहे। पुरुचन भी नहीं सोया और पांडव भी
- 46:22नहीं सोये तो पुरुचन पांडवों के सामने उस पत्थर को उखाड़े कैसे
- 46:30द्विदान पड़ी यह काम किया सही रूप में?
- 46:39विद्र आगाह न करता सभी थके हुए थे।
- 46:42कुंती तो सो ही गई थी, कुंती को जगाया गया हड़बड़ाट में जल्दी कर
- 46:48आग लग गई और हिसाब लगाया सहदेव ने निकल गए पांडव।
- 47:06मर गए प्रवचन जिन्होंने बनाया था शिल्पकार थे वो उसे जमाने के बड़े
- 47:14प्रसिद्ध शिल्पकार थे। करता तो परमात्मा है।
- 47:22लेकिन तुम्हें बुद्धि नामक एक यंत्र दिया है विवेक नामक एक
- 47:26यंत्र दिया है जिसकी सहायता लेकर तुम घटनाओं को पलट सकते हो।
- 47:35बस तुम इतने से स्वतंत्र हो। फिर वो घटना कहाँ से आती है?
- 47:44बस इसी को कहते हैं नजरी मोख दवा परमात्मा की नजर जिसपे हो जाती है
- 47:58उसके लिए कोई न कोई रस्ता खुल जाता है।
- 48:03अंधा भी निकल सकता है। अगर अंधे को समझ आ जाए तो अंधा भी
- 48:11उस संकीर्ण मार्ग से निकल सकता है।
- 48:17करता तो परमात्मा ही है, परमात्मा नहीं।
- 48:20घु आँख होता पर महात्मा ने ही सड़क बनाई, पर महात्मा ने ही
- 48:25शंकरा रास्ता छोड़ा, लेकिन बचेगा वह जीस पर ईश्वर की कृपा है इसलिए
- 48:37बहुत सी बातें। जो होने वाली होती हैं वो नहीं
- 48:43होती हैं। कबीर ने दो शब्द कहे हैं इसके
- 48:48दोनों के अर्थ तुम इनमें समझ जाओगे।
- 48:51मेरी आज की कहानी में अनहोनी होवे नहीं।
- 48:58जो होनी सो होय मूर्ख मनवा सोचकर फिर काहे कुरवाय अनहोनी तो जहाँ
- 49:12कोई होती नहीं, ध्यान से समझेगा मेरे बात को।
- 49:18जो होना होता है वही होता है। कमिंग इवेंट्स कास्ट देयर
- 49:23शेड्यूल्स बिफोर जो होना होता है वही होता है।
- 49:31फिर कबीर कहते हैं कि हे मानस तू सोच सोचकर क्यों घबरा रहा है?
- 49:39लेकिन एक दूसरा शब्द है, मुझसे लोग बहुत पूछ लेते हैं बाबा ये
- 49:43उलट शब्द कबीर ने कैसे बोल दिया? किसी गलतफहमी के कारण तो कबीर बोल
- 49:48नहीं सकते। दूसरा शब्द है जब तुम बच निकलते
- 49:54हो। कब?
- 49:55जब परमात्मा की मेहर तुमपे हो जाती है, सच्चा साहब जे नजर करें
- 50:02टेकागो हंस करे उन्हें रास्ता मिल जाता है, कुएं के पार से भी संकरी
- 50:10गली दिख जाती है उन्हें वहाँ से निकल जाती है कुएं में।
- 50:14गेरे बगैर दूसरा शब्द बोला है अनहोनी हो कर रहे, होनहार मित्र
- 50:27जाय, अनहोनी हो कर रहे। होनहार मिट जाए ऐसे दीनानाथ को
- 50:38किसे बिधू बकाए जीस पर परमात्मा की कृपा होती है उसे दीनानाथ के
- 50:44दिन बंध होंगे, जिसका बखान नहीं किया जा सकता।
- 50:52जिसके ऊपर उसकी कृपा हो जाती है। नदरी मुख दवार उसको रास्ता मिल
- 51:00जाता है, वह सब बाधाओं को पार कर लेता है।
- 51:09तो पुत्र तुमने पूछा सवाल आज उसका जवाब मैंने दे दिया।
- 51:15वाणा व्रत की आंख से पांडव निकल गया और वर्णा व्रत की आंख से मारे
- 51:24गए। उसके परिवार भी मारे गए।
- 51:30करता तो परमात्मा ही है, लेकिन बुद्धि नामक एक यंत्र दिया गया है
- 51:38और यंत्र कभी व्यर्थ में नहीं दिए जाते।
- 51:42परमात्मा ने जो भी चीज़ बनाई, अब मुझे लोग कह देते हैं बाबा।
- 51:48हमारे यहाँ पर एक छोटी सी ग्रंथि होती है।
- 51:57हार्निय बह परमात्मा क्यों देता है जबकि काम तो उसका कोई है नहीं?
- 52:05मैंने कहा परमात्मा कोई भी चीज़ व्यर्थ नहीं दिया करता।
- 52:08उसका अवश्य ही काम होगा। अभी तुम जानते नहीं हो, अगले किसी
- 52:13प्रवचन में मुझे याद करा देना। प्रवचन लंबे हुए जाते हैं और आप
- 52:17ज्यादा देख नहीं सकते। यह जो ग्रंथि दी गई है जीसको हम
- 52:27हिरनियां कहते हैं। यह दोनों तरफ होती है और क्यों
- 52:31बढ़ जाती है और बड़ा दर्द करती है, फूल भी जाती है फिर इसको
- 52:35निकालना पड़ता है फत्ते की तरह, लेकिन इसको निकालने से फत्ते को
- 52:42निकालने से हानि होती है, क्योंकि परमात्मा देता ही क्यों?
- 52:47इतना शानदार रचनाकार व्रत में कोई चीज़ एक कण भी नहीं बनाता।
- 52:52इतनी बड़ी ग्रंथि के रूप में बना दी इतनी बड़ी ग्रंथि उसने हरनिया
- 52:59के रूप में बना दी व्रत में नहीं बनाई।
- 53:01कारण है इसके किसी व्रत मुझे किसी वक्त मुझे याद करना मैं तुम्हें
- 53:06इनके इनके फर्ज बताऊँगा। इनके लाभ बताऊँगा।
- 53:12अभी प्रसंग बहुत लम्बा हो जायेगा क्योंकि करीब 1 घंटे के करीब
- 53:15वीडियो होने को हो गई है। अब तुम्हें समझाए, पुत्र।
- 53:26करता तो परमात्मा है। उसने तो लिख दिया लेकिन दूसरा
- 53:35शब्द कबीर दो शब्द लिखते हैं। उसने लिख दिया पर आप?
- 53:42अनहोनी को मिटा सकते हो अनहोनी होवेनी होनहार मिट जाए ऐसे
- 53:54दीनानाथ को किस बिध कहूँ जकाए उस प्रभु को मैं किस तरह कहूँ?
- 54:03बस कहने का मतलब ये सच्चा साहब ये नजर करें तेका।
- 54:08वो हंसकर है सच्चा साहब कब नजर करेगा अब आखिरी स्वाद पे हम माँ
- 54:16जानें। जब तुम अपने जीवन की नाव की पतवार
- 54:23उसके हाथ में सौंप दोगे, तो याद रखो, मैं स्टेम्प लगाता हूँ, तुम
- 54:31डूब नहीं पाओगे पतवार उसके हाथ में।
- 54:38नाभ तुम मत चलाओ अपने जीवन की तुम उसको सोंख कर निश्चिंत होके सो
- 54:44जाओ घोड़े पेच कर जीवन की डैय्या को चलें तो वो चलाएगा और तुम
- 54:55पाओगे। जो होता है, परमात्मा करता है और
- 55:03आगे एक और शब्द कहा लव जे ने भले के लिए होता है, जो उसके वाणी में
- 55:16चलता है, सब कुछ छोड़कर वह अकरमन्य नहीं हो जाता।
- 55:20वह आलसी नहीं हो जाता। व्यक्ति को कर्म तो करना ही
- 55:24पड़ेगा, कितने दिन तुम खाना नहीं खाओगे, कितने दिन स्नान नहीं
- 55:30करोगे, कितने दिन सोच नहीं जाओगे, कितने दिन तुम बाजार में नहीं
- 55:35जाओगे, ये सब क्रियाकृप तुम्हें करने ही होंगे।
- 55:40क्योंकि शक्ति है बेटा मूर्ता कुछ नहीं करेगा मूर्ते को जहाँ दफन
- 55:46करके आ गई उसका कंकाल तुम नहीं पाओगे ये एक गहरा प्रश्न जो तुमने
- 55:58कहा हमारे फंसा पड़ा है दिमाग में आज मैंने उसे शांत कर दिया।
- 56:03होता तो वही है जो परमात्मा लिखता है, लेकिन तुम उसे चाहो तो बदल
- 56:13सकते हो और फिर भी यहाँ भी तुम्हारी चाहत नहीं काम करती।
- 56:23यहाँ काम क्या करती है, जहाँ काम करती है, उसकी नजर उसकी नजर कैसे
- 56:32होगी? अपनी जिंदगी को की पतवार को उसके
- 56:37हाथ में दे दो। कि अब तू चला प्रभु जैसा चलाना है
- 56:44अब हमने हम अपनी जिंदगी के क्योंकि हमारा वैसे भी कुछ नहीं
- 56:49है, वैसा ही वैसे भी सब कुछ आपका ही है प्रभु और अब इस ढांचे की
- 56:58बागडोर मैंने आपको। इसको अपने ढंग से चलाइये और जो
- 57:04व्यक्ति ऐसे जीता है उसकी ज़िन्दगी स्वर्ग से भी उत्तम होती
- 57:08है। तुम अगर अपने ढंग से चलोगे तो दुख
- 57:13पाओगे। तुम अगर उसके ढंग से चलोगे तो
- 57:18उससे बढ़िया सुख कहीं पा ही नहीं सकते और फिर तुम्हारा नाम भी होगा
- 57:25कि देखो तुम कितने सुखी हो और फिर तुम करोगे भी कुछ नहीं करेगा तो
- 57:31वही मार्ग। मेरा आपकी मेरा आपकी कृपा से।
- 57:53सब काम हो रहा है मेरा आप की कृपा से।
- 58:11सब काम हो रहा है, करते हो तुम कन्हैया करते हो तुम।
- 58:29कन्हैया मेरा नाम हो रहा हैं, करते हो तुम कन्हैया?
- 58:50मेरा नाम हो रहा है मेरा आप की कृपा से।
- 59:04सब काम हो रहा है मेरा आप की कृपा से सब काम हो रहा।
- 59:28धन्यवाद।