Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Oct 25 - परमात्मा 1 है! कोई 2 नहीं 3 नहीं 33 करोड़ नहीं! हिन्दू का पहुंचना मुश्किल या सबसे आसान?
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- 0:29तुम्हारी सभी सोचें, समझें, दूसरों पर निर्भर करती है।
- 0:45तुम हर वक्त संशय की स्थिति में रहते हो।
- 0:53फैसला नहीं कर पाते क्या सत्य है, क्या झूठ है?
- 1:09एक मजाक की बात से शुरू करूँगा। मैं कॉलेज जाता हूँ।
- 1:17मेडिकल स्टूडेंट्स सब मेडिकल स्टूडेंट्स में को एजुकेशन होते
- 1:21हैं, लड़कियों को शोक होता है दिखावा करने का।
- 1:37यह प्रकृति पर दत्त है तो किसी लड़की ने नया सूट कमाया होता, नए
- 1:48कपड़े डाले होते हैं। मेरी आदत थी अपनी मस्ती में रहना।
- 2:00शांति से उसके पास से गुजर जाता तो जीस लड़की ने नया सूख सिलाया
- 2:16वो पीछे से मुझे थोड़ा पुश करती अरे देख विजय।
- 2:25इस शूट में मैं कैसी लग रही हूँ? मैं माता पीठ लेता, मैंने कहा तू
- 2:35एक घंटा शीशे को तंग करके आइए, मेरे को पता है।
- 2:42शिक्षा भी रो पड़ता है। जब पीछा ही नहीं छोड़ता है।
- 2:49हाँ मुझसे पूछती है कैसी लग रही हो मैं थोड़ा मैं भी शरारती किस्म
- 2:57का था मैं नाक हूँ सिकोड लेता कितनी अच्छी लग रही हो।
- 3:04मैंने कहा तू पूछ ताड़ का ले रही है त्रि जीता रख ले राक्षी बस एक
- 3:17इसी बात से खफा हो। शीशा से मैंने पूछा 1 दिन तुम्हें
- 3:27सबसे ज्यादा तंग कौन करता है? घर में शीशा कहता है घर के इस थे
- 3:34जब पीछे ही नहीं छोड़ते, तुम्हारी समय मान्यता है।
- 3:42दूसरों के लिए तुम खुद निर्णय नहीं कर पाते संक्षेप स्थिति में
- 3:58बने रहते हो। इसलिए भगवान कृष्ण कहते हैं शंश्य
- 4:06आत्मा अनिश्चित जो संशय करता है। अब संशय क्या है ये अभी मेरे पास
- 4:22किसी शिक्षा का मैसेज आया। उसके ऊपर किसी ने केस कर दिया।
- 4:34झूठा आजकल यही तो चलता है तो कल परसों मेरे पास फ़ोन आया की मैं
- 4:54यहाँ अदालत में बैठी हूँ। पांच 6 घंटे हो गए।
- 5:08मैंने शॉर्ट और अप्लाई किया। घबराओ मत ठीक हो जाएगा और 2 दिन
- 5:18में उसका फैसला हो गया। आज फिर उसका अभी मैसेज आया नाम
- 5:30नहीं बताऊँ तुम्हारी मनोवत्तियां दिखाने का एक शिक्षा।
- 5:44मुझे काली तारा, बगलामुखी 10 महाविध्यालय की कृपा से मुझे
- 5:54छुटकारा मिलो और कमेंट में ये भी लिखा है कि मेरे पास आपके द्वारा
- 6:01दिए गए सिक्का भी था। उसका चमत्कार भी क्या खूब रहा और
- 6:12मैं प्रार्थना भी कर रही थी काली घाट से काली मठ से सभी देवताओं की
- 6:22जिनकी भी आराधना मानेगी। मैंने तो सबको समझ लिया फिर आज
- 6:33सबका तंत्र देख ही लेते हैं। संकटकाल में अगर ये काम नहीं आए
- 6:40तो इनका क्या अचार डालें? और 2 दिन में एक इसका निपटारा हो
- 6:48गया और यह जोड़ी सख्त भाषा में बोला।
- 6:58उनके वकील को लताड़ दिया। इससे ही शिक्षा कहते हैं खुद ही
- 7:14निश्चय की स्थिति में नहीं होना। और इस अनिश्चित स्थिति ने,
- 7:23अनिश्चय की स्थिति ने ही इतनी देवी देवताएं 33,00,00,000 देवी
- 7:30देवता इकट्ठे की 10 महाविध्यालय की।
- 7:40हम कहते हैं कि वह एक कृष्ण कहते हैं के भीतर मैं ही बैठा।
- 7:56इस प्रकट अपरकट संसार को चला रहा। लेकिन शक्ति अब ध्यान से समझेगा
- 8:14तुम्हारे आपे से आती है हृदय को पार करके तुम्हारे खोपड़ी तक आते
- 8:20आते मल्टीफरकेट हो जाते। तुम मल्टीडायमेंशन हो जाते हो,
- 8:29तुम ठीक से निश्चय नहीं कर पाते। बट शुड आई?
- 8:46इसे ही संशय ग्रस्त व्यक्ति की मूर्खता कहते हैं।
- 8:57रणक्षेत्र में कुरुक्षेत्र में अर्जुन इसी संशय के शिकार होंगे।
- 9:08उसे याद आती है सभी बातें समृद्धि जब वह छोटा बच्चा था, भीम इसको
- 9:16पीटा करता था और जाकर पशो पिता माँ की गोदियों में बैठ जाता था।
- 9:26तो भीम कितना ही शक्तिशाली था लेकिन वेषम से ज्यादा नहीं।
- 9:32देवव्रत महाशक्तिशाली थे, उतना ही चिरित्रवान भी था।
- 9:43चिरित्र की शक्ति अलग से मायने रखती है।
- 9:51पश्चिम में आज चरित्र टूट गया है। मर्यादा नाम की कोइचगी से पूर्व
- 10:00में आज भी चरित्र बचा है। हम आज भी मर्यादा पुरुषोत्तम
- 10:07श्रीराम को अपना आराध्य मानते हैं।
- 10:12चरित्र की अपनी गरबा और अपनी शक्ति होती है।
- 10:26शक्ति तो एक है, एक को अहम् द्वितीय और नास्ती मैंने कर के
- 10:35प्रश्न रखा। बस मैं ही हूँ, दूसरा कोई नहीं वह
- 10:44विभक्त होते होते होते होते जैसे ही बुद्धि में पहुंचती है बहुगणित
- 10:53हो जाती मल्टीडाइमेंशनल हो जाती। बिखर जाती है और बिखरी हुई धूप बस
- 11:04तुम्हें हल्की सी गर्माइश हो सकती है।
- 11:08रूपपांतरण नहीं कर सकती, आग नहीं लगा सकती, जैसे बिखरी हुई धूप को
- 11:13कॉन्वेक्स लेंस के द्वारा हम इकट्ठी करते हैं।
- 11:18सेंटर्ड कर लेते हैं और आग लग जाते हैं।
- 11:28तुमने सेंटर्ड करना था एनर्जी को और दृश्य महाविद्याओं ने तुम्हारी
- 11:36एनर्जी को। उन सेंटर्ड कर दिया।
- 11:47बिखेर दिया। यह बिखराव ही तुम्हारे पतन का
- 11:52कारण ये 10 महाविध्यान इनसे बड़ा धोखा कुछ नहीं मुझे बहुत बार।
- 12:00कमेंट आया बाबा 10 महाविद्या के बारे में क्या खाकू तुम इतने
- 12:11फर्किटेड हो गए हो, इतने विभक्त हो गए हो सुनिए वी काट दो वी भक्त
- 12:23से आगे वी काट दो। रहेगा।
- 12:26भक्त जो भक्त है ही इज़ यूनाइटेड, शी इज़ यूनाइटेड, जो वि भक्त है
- 12:36ही इज़ डिवाइडेड भक्त योग हो गया योगी हो गया।
- 12:47विभक्त खंडित हो गया। तुम भी भक्त हो भक्त नहीं और
- 12:57विभक्त से भक्त होना है। बोला तो मैंने बहुत बार।
- 13:07तुम्हारी एक शक्ति बाहर बिखरी पड़ी है कहाँ कहाँ बिखरी पड़ी है
- 13:13तुम्हें पता है बाल बच्चों के मोह में यार दोस्तों के रिश्तेदारों
- 13:21के मोह में पदार्थों के मोह में। सानू शोकत के मोह में राजगल्तियों
- 13:29के मोह में खाने पीने के लोह के मोह में छिपकी पड़ी है बाहर और
- 13:38मैं सदा ही कहता हूँ कि इन्हें आप कछुए की तरह यूनाइटेड कर लो।
- 13:47यही भक्त होना है। वि भक्त तो तुम हो ही डिवाइडेड यू
- 13:55अरे तुमने होना है भक्त। भक्त शब्द तो बहुत प्रयोग करते
- 14:05हैं लेकिन भक्त होना कैसे है ये पता नहीं।
- 14:09बाहर की सारी शक्तियां को कुन्निन्स कर लेना है,
- 14:12कॉन्सेंट्रेट कर लेना है, वो है भक्ति।
- 14:285 साल मेरे प्रवचन सुनें 5 साल साधना की क्या खाक साधना की हो?
- 14:44इसे मैं द्वंद्वि नहीं कर सकता। इसे मैं तुरंत भी नहीं कह सकता
- 14:56हूँ यह तो धूप जैसा फैलाव है, रोशनाई है बस अगर तुम पहुंचना
- 15:05चाहते हो। तो तुम एक बात ख्याल में कर लो,
- 15:13मैंने कल भी कहा था सारे देवी देवता, सभी संसार, भूत, प्रेत,
- 15:20पिशाच, बैताल सभी मेरे बाल बच्चे हैं।
- 15:37मेरे ही उत्पन्न किये जब मैं चाहूंगा इनका विलय कर दूंगा।
- 15:54जब तक तुम विभक्त हो तब तक तुम सुन शमे हो।
- 16:00तुम्हें पता ही नहीं है कि काली ने बचाया कि छिन्न मस्ता ने बचाया
- 16:10गौरी ने बचाया के सिक्के ने बचाया के हनुमान ने बचाया कि माँ ने
- 16:17बचाया। इसलिए तुम द्वंद में हो और द्वंद
- 16:29से घिरा घिरा व्यक्ति शांत नहीं होता इसलिए हर व्यक्ति को आज
- 16:35शांति की तलाश है। डालरों की चमक धमक उसने देख लिया।
- 16:47अब जरूरत है अब खोज है शांत और बुद्ध शांति पर रहता है।
- 17:02शांति पाने के बाद कुछ और पाना शेष नहीं रहता।
- 17:11तुम्हारी यात्रा समाप्त हुई। जब तुमने शांति का वो मुकाम छू
- 17:17लिया, उससे आगे की यात्रा तुम्हारी कोई यात्रा नहीं।
- 17:24फिर यात्रा परमात्मा की है और परमात्मा की यात्रा तो असीम है,
- 17:28वो तो खुद करेगा। भक्त हो जाओ और भक्त होने की
- 17:49निशानी तुम्हें तुम्हारे भीतर से प्रतीत हो गयी।
- 17:55यू विल बी काम तुम शांत हो जाओ। तुम ठहर जाओगे, आनंद में मगन हो
- 18:05जाओगे, मैं कहानी सुना रहा था, मैं कॉलेज में जाता इधर उधर नहीं
- 18:14देखता था। जो व्यक्ति चलता हुआ इधर उधर
- 18:19देखता है, आगे पीछे मुड़कर देखता है ही इस अनस्टेबल शी इस अनस्टेबल
- 18:32वह एकाग्र नहीं हुआ। वह बहका बहका सा लगेगा जैसे उसका
- 18:42कुछ गुम हो गया। चौकन्ना यह चौकन्ना होना परमात्मा
- 18:49की राह में सबसे बड़ा बाधा है। चौकन्ने मत रहो।
- 18:59चौकन्ना तो वो है जो आपके भीतर है, तुम्हारा वास्तविक स्वरूप
- 19:05बड़ा चोकन्ना है, दिन भर रात जगा रहता है, ज़रा भी तो सोता नहीं,
- 19:11ज़रा भी तो झपके नहीं लेता। तुम जो करने मत होना तुम मस्त
- 19:22होना तुम भक्त होना तुम भी भक्त मत रहना।
- 19:31तो मैं बिना इधर उधर देखे, शांति से अपने रास्ते पे चलता रहता,
- 19:37अपने कॉलेज के डेस्क पे जाके बैठ जाता।
- 19:50तो अक्सर मैं ही छेड़छाड़ कर देता हूँ, मुझे पता था बच्चे ही चाहते
- 19:57है कोई सुन्दर पेंट शर्ट टाई डाल के आया कोई कोट नया डाल के आया।
- 20:11पहले तो वो खुद ही देखते थे। यह कह के क्या बात है?
- 20:15बहुत बढ़िया, मैं कोई कमेंट ना करता अगर पूछ लेते कैसा लगता है
- 20:23कुछ नहीं बेकार है कोई कलर अच्छा नहीं है, कोई डिजैनिंग अच्छी नहीं
- 20:29है। सब करा कराया गो वर्गनेश हो जाता
- 20:36है। तुम्हारी सभी मान्यताएँ दूसरों के
- 20:42द्वारा दी गई हैं। शीशे के आगे 2 घंटे बैठी रहती है
- 20:48इस तरह। खुद ही आत्मसमोहित हो जाती है और
- 20:58ये बाहर जाके कोई कहता है तो 2 घंटे क्या जिंदगी ही बेकार हो
- 21:07जाती है? तुम्हारी सारी मान्यताएँ लोगों के
- 21:22द्वारा दी गई। ये छिन्नमस्ता है, ये काली है, ये
- 21:31गोरी है, ये पी तांबरी है, ये श्वेतांबरी है।
- 21:40फिर तुम कहते हो कि हम दुखी हैं, वे भक्त हुआ।
- 21:46व्यक्तित्व दुखी हित होता है। मैं तुम्हें ये कहता हूँ मुसीबतें
- 22:02व्यक्तियों पर ही आती हैं, धरतियों पर नहीं आती पानी पर हवा
- 22:14पर विपत्ति नहीं आती, पदार्थों पर विपत्ति नहीं आती।
- 22:19क्योंकि पदार्थों में चेतना नहीं, विपत्ति चेतन में आती है और आएगी
- 22:33मु्द्दे पर कभी उत्पत्ति नहीं आती।
- 22:38मूर्ति को हम ठुड्डे मारते रहे। उसके भीतर का आत्म सम्मान कुछ
- 22:44नहीं बोलेंगे। थूक दो नहीं बोलेंगे, आग में डाल
- 22:49देते हैं, सी नहीं करता क्योंकि जड़ हो गया है जब जड़ और चेतन का
- 22:59संबंध जुड़ता है, इसे योग कहते हैं।
- 23:07इसकी विस्तृत व्याख्या में फिर तुमको जब तुम सारे संसार के साथ
- 23:14जड़ और चेतन रूप में एकाकार हो जाते हो, सारा अस्तित्व चाहे जड़
- 23:21हो, चाहे चेतन हो, तुम ही हो जाते हो।
- 23:28वही तुम्हारा असली स्वरूप है ये जो तुम देख रहे हो ये तुम्हारा
- 23:35टूटा हुआ स्वरूप है जैसे एक शीशे में दरारें पड़ गई।
- 23:43और उसमें तुम अपना मुखरा देख रहे हो मुखरा नजर तो आएगा, लेकिन वो
- 23:50तरेहड़ी वह दरारें ऐसा लगे कि जैसे तुम्हारे मुँह के ऊपर है।
- 24:02तुम्हारी सभी मान्यताएँ तुम्हारी अपनी उधार है।
- 24:10दूसरे ने जो कह दिया दूसरे ग्रंथ ने जो कह दिया तुमने मान लिया।
- 24:18किसी व्यक्ति ने किसी गुरु ने तुम्हें कुछ कह दिया, वो तुमने
- 24:21मान लिया मेरे पास बहुत सी आस्तिक आ जाते हैं, बड़ी प्रशंसा करते
- 24:34हैं, भगवान की जब बोल लेते हैं, थक जाते हैं थकोगे ही।
- 24:41कब तक राधे राधे करोगे? मैं उनसे पूछता हूँ एक बुनियादी
- 24:51प्रश्न क्या परमात्मा है? मुझसे ऐसी उम्मीद नहीं होती।
- 25:07तो वो मुझसे पूछ लेते हैं, आप पूछ रहे हो?
- 25:10मैंने कहा बिलकुल तुम्हे कोई शक है, फिर पूछ लेता हूँ क्या
- 25:17परमात्मा है बाबा, आप ही तो कहते हो?
- 25:25तो मैंने कहा मैंने कहा और तुमने मान लिया, मैं झूठा भी तो हो सकता
- 25:34हूँ पखंडी भी तो हो सकता हूँ, मैं गलत भी तो बोल सकता हूँ, गुमराह
- 25:43भी तो कर सकता हूँ। मेरा कोई निहित स्वार्थ भी तो हो
- 25:47सकता है। मैं तुमसे पूछता हूँ परमात्मा है,
- 25:59तुम मुझे कहते हो कि तुम ही कहते हो पापा के है तो वो मेरे लिए है,
- 26:11इसलिए मैं भूखा नहीं क्योंकि मैंने भोजन खा लिया।
- 26:17इस फ़िल्म में कहीं जाता नहीं आपने कभी बाजार की सड़कों पर मजे
- 26:22जाते देख किसी गुरुद्वारा, किसी मंदिर, किसी मस्जिद, किसी चर्च,
- 26:32धार्मिक फसल, किसी तीर्थ आज। कहीं जाते थे।
- 26:40मैं तरफ हूँ और मैं आशा करता हूँ कि तुम भी तरफ तो हो जाओ मैं
- 26:51इसलिए तुम्हें ये कहता हूँ कि मैंने तो खा लिया।
- 26:56मैं तृप्त हो गया, तुम भी तृप्त हो जाओ, लेकिन तुमने तृप्त नहीं
- 27:07हुआ था तुम मान लेते हो की ठीक है।
- 27:14परमात्मा है ये तो मेरे से जान लिया, अब वो मिलेगा कैसे?
- 27:22वो प्रेमानंद जी से पूछो और रात रात तुम एक ही व्यक्ति से सब
- 27:30चीजें क्यों नहीं पूछते हो? जो कहता है कि परमात्मा है, उसी
- 27:36से पूछ लो कैसे मिलेगा जो कहता राजनीति करो, उससे पूछो कि
- 27:45परमात्मा है, तुम मुझे उलटे बुलटे काम करते हो।
- 27:52राधे राधे करते रहो उससे पूछो तुमने देखा अगर वो कहे की हाँ
- 27:59परमात्मा मैंने देखा तो वो झूठ बोलता है क्योंकि परमात्मा देखने
- 28:07वाली चीज़ ही नहीं। इतना व्याट, इतनी व्याट आँख कहाँ
- 28:15से लेके आओ तुम्हारी आँख शूद्र चीजों को देख सकती है, शूद्र
- 28:23दायरे तक देख सकती है। उस विराट को कैसे देखें जो कहता
- 28:38है कि परमात्मा है, उसी से पूछो के हैं तो कैसे मिलेगा बताओ हमें
- 28:50भी चाहिए, हमने भी देखना है। जो कहता राधे राधे करते हो, राम
- 29:02राम करते रहो, काली गोरी करते रहो, उससे पूछो परमात्मा है।
- 29:1310 महा विद्याओं को सिद्ध करने वाले लोगों से पूछो।
- 29:21ये दर्श महाविद्या जिसने बनाई वो है परमात्मा है।
- 29:27क्या तुमने देखा है उसे क्या तुमने अनुभव किया है उसे?
- 29:43ये दुनिया उलटी पुलटी नहीं है, तुम उलटे पुलटे हो, तुम सूचना
- 29:52इकट्ठी कर रहे हो, एक शर्त से पूछ लिया वो कहता परमात्मा है नहीं?
- 29:59दूसरा शर्त तुम्हें बता रहा है परमात्मा को पानी के ढांग क्या
- 30:03है? ये जुड़ेगा कैसे?
- 30:06आपसी संवाद इसलिए मैं सदा कहता हूँ, एक नाव पे स्मार हो जाओ।
- 30:16अगर वो नाव सही है तो किनारे से लग जाओ।
- 30:22अगर वो नाव सही नहीं तो डूब जाओगे, लेकिन एक अनुभव तो साथ आ
- 30:26जाएगा और तुम्हें पता नहीं ये अनुभव तुम अगले जन्मों में ले के
- 30:30जाओगे। इसे ही संस्कार कहते हैं।
- 30:37अगर तुमने गलत राह पे चलकर कागज़ की नाव पर बैठ गए, अब वो डूबे के
- 30:46ये नाव नाम की नाव, कागज़ के नाम, नाम का जहाज, कागज़ का जहाज।
- 30:55ना तुम्हे अमेरिका पहुंचाएगा ना तुम्हे भव्य सागर पार्क आएगा।
- 31:02यह तुम्हे मात्र डुबाएगा यह दुर्घटना करवाएगा लेकिन तुम
- 31:14दुर्घटना के शिकार हो जाओ। चलो एक जन्म हमने प्रयोग में लगा
- 31:21दिया बहुत से ढेरों में बैठने वाले 40404545 साल मुझे पूछ लेते
- 31:28हैं बाबा फिर अब तो बात तो समझा गई चुप कैसे चोरी चोरी मेरी
- 31:35वीडियो सुनते। तो बाबा आपके पास आ जाए।
- 31:39मैंने कहा यहाँ तो कोई डेरा में रखते हैं ना?
- 31:44क्योंकि मैं बाकू भी जानता हूँ। समूह के अंदर तरंगों का आदान
- 31:53प्रदान होता रहेगा और कोई भी व्यक्ति कभी भी नहीं पहुंचेगा।
- 31:59समूह की आपसी तरंगें आदान प्रदान आपको छेड़छाड़ करती रहेंगी, आपको
- 32:04पता भी नहीं चलेगा इसलिए आय तक धरती पे कभी कोई व्यक्ति समूह के
- 32:16अंदर बैठा हुआ प्रबुद्ध नहीं हुआ। जो भी कोई प्रबुद्ध हुआ, बिल्कुल
- 32:24एकांत समय में एकांत में बैठा था, एकांत स्थान पे बैठा था आज तलक
- 32:33कोई भी प्रबुद्ध हुआ। वह अकेला होकर हुआ।
- 32:43जब मुझे बोलने का आदेश हुआ तो उस आदेश के साथ एक अहम आदेश और भी
- 32:49आया। कम्युन मत बना लेना।
- 32:56मुझे उस वक्त तो समझ नहीं आया, लेकिन आज समझाता है, जीस उद्देश्य
- 33:03से मैं बोलेंगे क्या में बैठ के तुम सुन तो सकोगे लेकिन पहुँच
- 33:14नहीं सकोगे। फिर मैंने यही तरीका कुछ व्यवस्था
- 33:22नहीं थी बैठने की, लेकिन व्यवस्था बहुत थी।
- 33:25बहुत लोगों ने कहा बाबा यहाँ आ जाओ यहाँ बहुत अच्छे पेड़ बगीचे
- 33:30हैं, आम के फल के यहाँ आ जाओ, बड़ा सुंदर जलेगा।
- 33:39चिंगारियों से माहौल है। आनंद की चिंगारियां फुलगाड़ियां
- 33:45मारेंगी आओ यहाँ जाओ स्थान तो था, लेकिन मैं एक चीज़ जानता था।
- 33:57कम्यून में इकट्ठे में भीड़ में बुक अभी मिलता है, क्योंकि
- 34:06प्रत्येक व्यक्ति के भीतर से तरंगे निकलती है।
- 34:09सूक्ष्म? तुमने देखा नहीं कोई व्यक्ति के
- 34:18पास से गुजर जाते हो, तुम्हें तरंगों का आवाज तो नहीं होता
- 34:23लेकिन अगर कोई 1020 5 दिन से नहाए नहीं उसके शरीर में से बदबू जरूर
- 34:27आती। दुर्गन्ध आती है।
- 34:33वैसे ही तरंगे भी निकलते हैं। वह तरंगों को तुम्हारा शरीर पहचान
- 34:38लेता है और ये सब बदबू को तुम्हारी नासिक का पहचान लेती है।
- 34:49यह व्यक्ति 5 दिन से नहाया नहीं। प्रत्येक तंत्र परमात्मा ने
- 35:00परिपूर्ण बनाया है। तुम्हारे पास जो कुछ है तुम्हारा
- 35:11अपना कुछ है कहीं की ईंट कहीं कर उड़ा भानुमती ने कुनबा जोड़ा।
- 35:25इसलिए मैं तुम्हें कहता हूँ अपने अंदर जाओ, तुम पाओगे जो आज तक
- 35:31इकट्ठा किया उस समय मेरा अपना तो कुछ भी नहीं कोई किसी ग्रंथ ने दे
- 35:41दिया। कोई किसी ज्ञानी ने दे दिया, कोई
- 35:44किसी राह को दिखाने वाले ने गुरु ने दे दिया कोई किसी स्थान ने दे
- 35:50दिया कोई तुम्हारे अपने ही मानने दे दिया।
- 35:58ये भानुमति का कुनबा है। और तुम हर वक्त संशय की स्थिति
- 36:06में हो और यह संशय ही पीड़ा जाएगा।
- 36:20तुम भूखे हो, तुम प्यासे हो, तुम्हे भूख लगी है, तुम्हे प्यास
- 36:28लगी है, तुम्हे पानी चाहिए, तुम्हे भोजन चाहिए।
- 36:38मेरे भोजन करने से तुम्हारा पेट नहीं भरेगा, तुम्हारे शरीर के
- 36:47फैक्टरीज़ ने जो एसिड बनाए, एंजाइम जो बनाए हार्मोन जो बनाए
- 36:53वो तुम्हारी कहानी को ही पचा पाएंगे।
- 36:57मेरा शरीर मेरे खाने को बचाव है। मेरे तृप्त होने से तुम तृप्त
- 37:05नहीं होते, मात्र तृप्तता का आभास हो सकता है।
- 37:11मेरी रेंज की छत्रछाया में बैठकर तुम आनन्दित के लिए होते हो।
- 37:17क्योंकि मैं आनंद से भर गया, मैं तृप्त हो गया मेरा मन खो गया अगर
- 37:28सुनाएं, खो गईं भीतर से तृप्ति का आभास।
- 37:36और उससे आई हुई तिरंगे तो मैं भी तृप्त कर जाती हूँ।
- 37:39पल भर के लिए इतना ही वक्त होता है और मैं अच्छी तरह से जानता
- 37:45हूँ। इसलिए संख्या ज्यादा बढ़ाता है।
- 37:51अगर मेरा एक शिष्य होगा तो मैं सारा वक्त उसी के ऊपर एक्सपेंड
- 37:56करूँगा और अगर करोड़ों शिष्य होंगे तो मैं प्रत्येक शिष्य की
- 38:03बात सुन भी न पाऊंगा। गुरुकुलों में बड़े सुंदर
- 38:08इंतेजामात होते थे। बस एक गुरु उतने ही बच्चे पढ़ाने
- 38:14के लिए रखता था। जीतने उसकी समर्ता होती थी।
- 38:19इतने बच्चों को मैं पढ़ा सकता हूँ, तुम जैसा बनना चाहोगे,
- 38:30ब्राह्मण तुम्हें वैसा ही बना लेगा।
- 38:39यो यो यम यम तनु भक्तः श्रद्धार चितम इक्षिती यो जो भक्त जीस, जीस
- 38:54स्वभाव से। जीस जीस इच्छा को लेकर मेरा स्मरण
- 39:00करते हैं, मुझे याद करते हैं, तश्य तश्य अजलान श्रद्धाम उस वक्त
- 39:09की श्रद्धा भावना। मैं उसी प्रकार से सिद्ध कर देता
- 39:18हूँ, इसलिए मैंने तुमसे बहुत बार कहा ब्राह्मण से गलत चीज़ मत मांग
- 39:25लेना और एक बात को अब ध्यान से सुन लो।
- 39:36विखंडित मन संशय चित, बहुआयामी मन चित।
- 39:50कभी ठीक मांग नहीं करेगा क्यों? क्योंकि वह खुद ही खंडित है।
- 40:04एक छोटी सी कहानी कहानी चार व्यक्ति नाव में सफर कर रहे थे।
- 40:20तूफान आया थंडरस्टॉर्म सब हिलने लगा और वो जहाज डूब गया।
- 40:35संयोग से चारों व्यक्ति अलग अलग धर्मों से संबंधित।
- 40:47हिंदू धर्म इसी कारण से पिछड़ गया क्योंकि हिंदू धर्म का भगवान ही
- 40:54मल्टीडायमेंशनल हो गया। यह जो मैंने कहानी सुनाई, छः
- 41:01नमस्ता ने पूरा किया कि बगलामुखी ने पूरा किया कि।
- 41:04सिक्के ने पूरा किया कि गुरु ने पूरा किया कि काली ने पूरा किया
- 41:08कि पीली ने पूरा किया ये तुम्हारे भी भक्त होने के निशान हैं और
- 41:16जिसका भगवान तक एक नहीं है। तुम्हारे भगवान ही 33,00,00,000
- 41:24तो देवी देव तुम करीब करीब और पागलपन की हालत में हो जैसे हम
- 41:32हिंदू कहते तुम चारों में से एक डूब गए।
- 41:41कौन जो हिंदू था? मुसलमान ने कहा, या अल्लाह तुम तो
- 41:56विखंडित हो, बिखंडित मन विखंडित परमात्मा को बना लेता है, ऐसा ही
- 42:03तुमने परमात्मा को बना लिया? जबकि परमात्मा विखंडित है,
- 42:10परमात्मा तो आपस में गुंथा हुआ, सूत्र की तरह जैसे माला पिरोई
- 42:20होती है, ऐसा अविछिन्न। ला इलाहा इलल्लाहा मोहम्मद उल
- 42:30रसूल अल्लाह और मुसलमान बच गए खुदा एक।
- 42:48सिख भी बच गया। सिख निकाह एकुंकार सतगुरु एकुंकार
- 42:58सतनाम हे मेरे एक परमात्मा, मुझे बचा लो।
- 43:10ईसाई भी बच गया। उसने कहा ओह गॉड पुलिस से डूब गया
- 43:17हिंदू हिंदू ने जा के शिकायत के यमराज के पास मैंने भगवान का नाम
- 43:33लिया लेकिन बच नहीं हो सका। वो तीनो बच गए।
- 43:40चार ही बंदे थे, हम तूफ़ान आया, जहाज ड्रग मंगाया, तीन बच गए, मैं
- 43:50मर गया। उसने भगवान को समनिंग किया, कहा
- 43:57नहीं तो भगवान प्रकट हुए अपने गरुड़ के ऊपर बैठकर।
- 44:14उसने कहा आपकी कंप्लेंट है भगवान जी ये बंदा कहता है कि मैं हिंदू
- 44:22हूँ, बाकी बच गए। आपका यह बच्चा क्यों डूब गया?
- 44:35भगवान कहते हुए देखो मुसलमान ने कहा या इलाहा इलल्लाह मोहम्मद और
- 44:46रसूलल्लाह उसका परमात्मा एक था। ओह गॉड सेफ्टी कृष्ण का उसका
- 44:59परमात्मा भी एक था एकोंकार सतनाम। उसका भी परमात्मा एक था।
- 45:19इसने मुझे आवाज तो लगाई, किशन का हे भगवान राम मुझे बचा लो।
- 45:32मैंने जल्दी से धनुष उठाया, मुक्त लगाया और चला अभी आधे रास्ते
- 45:40पहुंचा था। इसने कहा, मुरली मनोहर, राधे शान।
- 45:50डूब गया बचाओ, मैं जल्दी से वापस गया, धनुष फेंका, मुरली उठाई
- 45:58पीताम्बर बहने और मॉकिटर लगाया। चल पड़ा, जल्दी से डूब जाएगा आधे
- 46:12रास्ते पहुंचा था इसने कहा हनुमान हनुमान जी गयो बेचारो मैंने फेंका
- 46:24सब कुछ गॉड न उठाया। लंगोट मान तैयार हुआ।
- 46:34लाल दे लाली से लाल लिपा बौते के फिर चला जल्दी से डूबेगा मेरा
- 46:45वक्त आधे रास्ते ही पहुंचा था। इसने का माता सीता गयो माता
- 47:01बिचालो मैं जल्दी से आया पेटी कोट पहनो।
- 47:08ब्लाउज पहना सब शृंगार जल्दी जल्दी अब स्त्रियों का शृंगार कोई
- 47:12थोड़ी थोड़ा होता है। मैंने अभी साड़ी बांधी थी, ये डूब
- 47:20गया, मैं क्या करूँ? शायद बहुत से व्यक्तियों ने यह
- 47:31कहानी सुनी होगी, लेकिन कहानी यहाँ तक नहीं, इससे आगे है तो
- 47:37यमराज ने कहा इसका मतलब सीता माता ने देर लगा दी जाओ दूत सीता माता
- 47:47के संबंध ले जाओ। सीता माता कहीं मिले भंक भौंक के
- 47:54आ गया, सीता माता तो तुम ही लेने गए, विष्णु बोले हे यमराज तुम्हें
- 48:06पता नहीं तुम भी एक ज्ञानी हो। तुम्हारे हाथ में सिर्फ मृत्यु है
- 48:16तुम्हें इस संसार का कुछ पता नहीं इस संसार का दृष्टा तुम्हें पालक
- 48:21में। मैं ही हूँ अल्लाह मैं ही हूँ गॉड
- 48:33मैं ही हूँ सतनाम, वह गुरु, मैं ही राम, मैं ही कृष्ण और मैं ही
- 48:39सीता आएगा कौन तुम्हारे सामने ही तो खड़ा है सीता?
- 48:46बस तुम्हें मालूम नहीं है, तुम भी तो एक है जिसने भी देखा जिसने
- 48:57देखा, जिसने माना उसका तो अनेक है।
- 49:03तो हिंदू धर्म ये सिद्ध करता है मान्यता है और मान्यता है भी सब
- 49:07कल्पनाएं उसी मूर्ति को पूजा करते हैं गणेश को उसी को दरिया में
- 49:17फेंक देते हैं। गंदे नाले में बह जाती मूर्तियां
- 49:20मैंने देखी हैं। सरस्वती पूजा कितनी श्रृंगार करते
- 49:28हो, आप भोग लगाते हो, अच्छी से अच्छी मिठाई खिलाते हो और कूड़े
- 49:32में फेंक देते हो? ऐसा व्यवहार है आपका अपने
- 49:37परमात्माओं के प्रति? इसलिए तुम डूबे हुए हो जो अपने
- 49:44परमात्मा से ऐसा व्यवहार करता है। बेहद तरीका कैसा?
- 49:51तुम अपने परमात्माओं तक को गंदे नाले में बहा देता।
- 49:59वह तुम्हें गंदगी घृणा के भीतर नफरत के बीच तुम्हारे भीतर डाल
- 50:03देता है। तुम अपने परमात्मा तक को भी बक्सा
- 50:11नहीं है तुमने तुमने अपने परमात्माओं तक को भी जलील कर दिया
- 50:17है। यही कहा गया है सात में धय के 21
- 50:23में श्लोक में तस्य तस्य अचलाम श्रद्धां जो मुझसे जैसा व्यवहार
- 50:33करता है, जैसा मांगता है मैं उसको वैसा ही दे देता हूँ।
- 50:38अब देखना तुम्हारे मोबाइल में जो सूचना तुम मांगते हो ए आज सूचना
- 50:45दे देता है अगर तुम कहते हो कि हमने तो कार्टून देखना वो तुम्हें
- 50:50कार्टून दिखा देता है। परमात्मा की बात छोड़ो।
- 50:57तुम्हारा मोबाइल तक तुम्हारी मनोवांछित चीजों को दखला देता है।
- 51:03तुम चाहती हो कार्टून देखले कार्टून तुम चाहोगे चुटकरे सुनना
- 51:10चुटकरे सुनाते की शेरो शायरी सुनना, शेरो शायरी सुनाते।
- 51:17पूछो आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स है तुम्हें वैसा ही जवाब मिलेगा और
- 51:23तुम कहोगे अपने कंप्यूटर से अपने मोबाइल से की हमने तो पूरन देखना
- 51:28है, वो पूरन देखला देगा तस से तस से अचलाम सर धाम।
- 51:37तुम्हारी श्रद्धा को विखंडित नहीं करेगा, वो तुम्हारी श्रद्धा को
- 51:41परिपूर्ण करेगा वो मैं इसलिए कहता हूँ गलत चीज़ मत मांग लेना, गलत
- 51:47श्रद्धा मत कर लेना, आज तुम डूबे तो इसलिए डूबे?
- 51:54तुम्हारा रखवाला एक है ही नहीं पता नहीं सिक्का पता नहीं काली
- 52:01पता नहीं छिन नमस्ता पता नहीं बगलामुखी तुम्हें पता ही नहीं
- 52:07तुम्हारा रखवाला है कौन? तो फिर डूबोगे नहीं तो क्या करोगे
- 52:21एक को सुमरिए नान का जो जलथल लरे असमाज इसा वस में हम सर्बम ज्यत
- 52:36कीन चीजें करते हम ज्य जो जमते मरता है उसको सिमरो न जन्म लेता
- 52:48है, न मरता है तुम जैसा ब्राह्मण से मांगोगे, ब्राह्मण तुम्हारी
- 52:58इच्छा पूरी कर देगा। उसके पास सब है, वह कल्पवृक्ष है,
- 53:03जो मांगोगे। वही मेले का और उत्तर दक्षिण
- 53:05मिलेगा तुमने मांगा तुम्हारे भीतर बीज बढ़ गया।
- 53:12अब बीज के प्रस्फुटन में और प्रोसेसिंग में जितनी देर लगेंगी,
- 53:18जब तक फल आएगा, तुम भूल ही जाओगी तो मैंने नहीं मांगा था ये तो।
- 53:26वह जो तुम कहते हो भगवान के कर देर है वह देर प्रोसेसिंग की होती
- 53:32बीज तो तुमने बो दिया अभी तुमने घृणा की नफरत की।
- 53:40हिंदू, मुस्लिम की आग फैलाई। यह बीज बहुत दिया गया।
- 53:46बारिश होगी, अंकुर फूटेगा, धूप निकलेगी, खाद दोगे।
- 53:56हवाएं आएंगी, अंकुरित होंगी। तुम्हारा बूटा बाहर निकलेगा, धीरे
- 54:03धीरे छोटा पेड़ बन जाएगा, बड़ा पेड़ बन जाएगा, फिर फल लगेगा और
- 54:12फल वही लगेंगे जो तुमने बोया बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से
- 54:18खाये? तो बबूल चाह तो बबूल मिलेगा।
- 54:25यह सृष्टि में सृजना में भ्रमण में कोई कमी नहीं रखी।
- 54:29परमात्मा ने यह परिपूर्ण है और इतना परिपूर्ण है कि इसमें से
- 54:33परिपूर्ण ही निकाल लो तो परिपूर्ण ही बच जाता है।
- 54:38पूर्णमदाह पूर्णमदम पुराण पूर्णमदक्षकते पूर्णस्य
- 54:44पूर्णमादाय पूर्णमेबावशीषकते। इतना पूर्ण केस में से पूर्ण भी
- 54:50निकाल लो तो पूर्ण ही बचता है कभी।
- 54:58कबीर ने अपने ढंग से कहा है सीढ़ी चोंच भर ले गई, नदी न काटी और
- 55:03नहीं तुमने भी आनंद पिया। भगत कबीर ने भी पिया, गुरुनानक ने
- 55:10भी पिया, कृष्ण ने भी पिया, मीरा ने भी पिया लेकिन वो गठन।
- 55:20दान दिए धन न कटे कह के भक्त, कभी तो एक दुख है असल सार ऊपर है
- 55:31चिढ़ी चोंच भर ले गई तुम बस इतना सही ले पाती हो चोंच।
- 55:47मेरी बातों को सारे रूप में समझ रहो तुम मांगोगे का खाक तुम्हें
- 55:56पता ही नहीं मांगना कुछ रोने वाले तुझे रोने का सिलिका ही नहीं अस्क
- 56:07पीने के लिए है। याकी बहाने के लिए तुम्हें यही
- 56:16नहीं पता जिससे मांग रहे हो वो है भी कि नहीं?
- 56:23बस अगर पूछो के हम में कमी क्या है?
- 56:26मात्र यही कमी है तुमने देखा? न तुमने छिन्नमस्ता देखी, न तुमने
- 56:36दक्ष महाविध्यालय की धृष्टात्री देवियां देखीं, न तुमने काली
- 56:42देखीं, न तुमने गौरी देखीं और मान लिया और मानी हुई।
- 56:50कष्टियां कागज़ की हुआ करती हैं, कल्पनाएं ढेर हो जाया करती हैं
- 56:55इसलिए मैं सदैव कहता हूँ। मेरी बातें तुम्हारी मान्यताओं को
- 56:59तोड़ेंगे और मैं करुणा वश बोलता हूँ कि तुम्हारी मान्यताएँ टूटे
- 57:06क्योंकि ये गलत है। ये भार है।
- 57:12मैं तुम्हारे बाहर को कम करता हूँ और अगर तुम कहते हो, मेरी भावनाओं
- 57:16टूट गईं, बाबा ने तोड़ दीं और तुमने टूटने जैसी भावना बनाई
- 57:21क्यों? यू अरे रिस्पांसिबल फॉर दैट?
- 57:27तुम ही हो जिम्मेदार तुमने ऐसी भावनाओं बनाई जो टूट सकें।
- 57:36दर्शन से जो भावना उत्पन्न होती है वो कभी टूटते नहीं।
- 57:47इसलिए बाबा ने कहा दर्शन के बाद जो माना जाता है, दर्शन के बाद भी
- 57:55माना जाता है कि दर्शन से पहले माना जाता है जो हिंदू धर्म ने
- 57:59मान लिया है। आज सभी धर्मों की मान्यताएँ मात्र
- 58:04मान्यताएँ हैं। क्योंकि खो गए जिन्होंने देखा
- 58:08मोहम्मद खो गए, ईसा खो गए, नानक चले गए, जिन्होंने देखा वो चले
- 58:18गए, कबीर चले गए, कृष्ण चले गए। आगे आगे उनके शिष्य और फिर शिष्य
- 58:26तो तुम्हें बताइए, शिष्य तो बात का बतंगड़ बनाएंगे ही।
- 58:33शिष्य तो कहेंगे जब बाबा विजय वत्स का जन्म हुआ तो गंगा जल के
- 58:38उनके घर पे आ गए। ऐसा कपोट शंख चलेगा मान मत लेना
- 58:49निश्चित ही मेरी बातें तुम्हारे हृदय को छूएंगे हृदय से पार
- 58:53तुम्हारे उस अंतःस्थल को भी छुएंगे वो अछूता नहीं रहेगा।
- 58:59क्योंकि मैं वहीं से बोलता हूँ जिसका भगवान तक एक नहीं है और
- 59:11तुमने तो इतना विखंडित कर लिया, अपना भगवान, तुम एक कैसे हो सकते
- 59:17हो तुम्हें बड़ा परिश्रम करना होगा एक होने के लिए।
- 59:21इसलिए रोज़ मेरे पास है, सिख भी आते हैं, हिंदू भी आते हैं,
- 59:25मुसलमान भी आते हैं। अभी इस बार पांच तारीख को एक
- 59:30मुसलमान मुझसे दीक्षा लेते हैं। क्या सिख अक्सर हिंदू अक्सर।
- 59:39इशाई भी आते हैं, क्रिश्चियन भी आते हैं।
- 59:46मैं तुमसे कहूं वो बहुत जल्दी पहुँच जाएंगे।
- 59:53तुम कुरान के बेइज्जती करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ता।
- 59:59लेकिन तुम हो क्या? तुम अपनी तरफ से तो थोड़ा निहार
- 1:00:02लो, तुम्हारा परमात्मा ही विच्छ्ण है।
- 1:00:09उनका परमत्ता अविछ्ण है एक इसलिए वो तो एक को पुकारेंगे और बच
- 1:00:16जाएंगे। तुम्हारे तो 33,00,00,000 है, कौन
- 1:00:27आएगा तुम्हें बचाने? मेरे पास रोज़ यहाँ लोग आते हैं।
- 1:00:37हमारा सनातन बड़ा महान है। मैंने कहा सनातन तो महान था,
- 1:00:42निश्चित गुरु तो महान ही होते है सनातन गुरु लेकिन सनातन से जो
- 1:00:51शिष्य निकला हिंदू वह विक्रय हो गया।
- 1:00:56वह विछिन्न हो गया। सनातन और विछिन्न।
- 1:01:01मिलाशक गुरु नानक तो पहुंचे शिष्य डूब गए ना के अब सिखों की हालत
- 1:01:08देखो गुरु गणना साहब को दातून करवातें हैं ये लोग।
- 1:01:17तो फर्क क्या हुआ? तुम गुरु ग्रंथ साहब को भोग लगाते
- 1:01:20हो और हिंदू मूर्तियों को भोग लगा देते हैं।
- 1:01:26अब कल ही दुर्गा मुझे कह रहे थे और नवरात्रों में बाबा इतना
- 1:01:30सुंघाए उन्होंने नाक ही पक गया। सूंघने की शक्ति ही जाती रहे।
- 1:01:43ऐसा हर बार होता है। बाबा दो बार नवरात्र आते हैं और
- 1:01:48ये दुष्ट ऐसे ही तंग करते हैं। मुझे इधर मा पकौड़े खा ले, बल्ले
- 1:01:53खा ले कोई कैसा गाजर पाक खाले। कोई गंदा बर्फी खा ले, रसगुल्ला
- 1:02:02खा ले गुलाब जामुन खा ले मार दिया हिंदुस्तान ने मेरे घर के सामने
- 1:02:13हर सप्ताह। एक बहुत बड़ी भक्त मंडली हुआ करती
- 1:02:18थी रात्रि को जागती और यह संयोग ही था कि हमारे उस मोहल्ले में
- 1:02:24बीमार बूढ़े, वृद्ध बच्चे बहुत ही ज्यादा थे और बिचारे रात भर
- 1:02:33खांसते रहते। नींद तो वैसे भी नाक ऊपर से कभी
- 1:02:39कभी आंख लगती तो जागरण करने वाले चिल्ला चिल्ला के जगा देते।
- 1:02:49शेरांवालिया पहाड़ांवालिया मिरांवालिया।
- 1:02:55ऐसे ऊंचे ऊंचे चिल्लाते गाते नहीं चिल्लाते, देखो वृद्ध व्यक्ति
- 1:03:06हमारे सामने बड़ा प्रसिद्ध व्यक्ति चाचू कुंदन वो कहते हैं
- 1:03:13ना दुष्टोण बड़ा। मैं रात को वैसे ही खांसी नहीं
- 1:03:17सोने देती। कब सिरप बहुत पीता हूँ लेकिन फिर
- 1:03:20भी थोड़ी सी आँख लगती है जगा ये चीख मरते हैं।
- 1:03:24मैंने कहा पता नहीं क्या हो गया ये कहते हैं शीरा बारी है पहाड़ा
- 1:03:28बारी है। मैंने कहा इनका इंतजाम नहीं करता।
- 1:03:34मैंने कहा दुष्ट मंडली बना दी, इन्होंने मंडली बना दी तो उस पर
- 1:03:41वो बैठे। इस पर हम बैठ के बीच में झड़कते
- 1:03:45हमने अपना पंडाल मार लिया तो यूनिट उसे बढ़ा लिया है।
- 1:03:52जीतने एमपी का वो था उससे ज्यादा ले आए दुगना वो जितना चलाएंगे, हम
- 1:03:57ज्यादा चलाएंगे तब तक मौन बैठे रहेंगे, आराम से अपने सो लेंगे।
- 1:04:06अपने बिस्तरे वहीं ले आए। यही तो जागरण होता है और क्या
- 1:04:11होता है? तुम शराब पीके जागरण करते हो, हम
- 1:04:18आराम से सो तो जाते थे तो जब आंधी रात आई, इन्हें पता लगा कि अब
- 1:04:27बूढ़े सो गए होंगे, बीमार सो गए होंगे।
- 1:04:31अब खांसी कुशियानी बंद हो गई तो चलाने लगते है सेरा वालिए पहाड़ा
- 1:04:37वालिए। हमने इधर से शुरू कर दिया, हमने
- 1:04:43कहा गदिया वालिए उलुआ वालिए। बड़े, ऊंचे ऊंचे जीतने हमारे
- 1:04:51यूनिट ऊंचा था, गदिया वालिये, उलुआ वालिये, सारी रात कॉम्पिटिशन
- 1:05:00चलता रहे। सुबह थाने में हमारी कंप्लेंट
- 1:05:07बुलाया क्या प्रधान कौन है? मैंने कहा प्रधान तो मैं तो आपने
- 1:05:14इनका जागरण क्यों खराब किया? मैंने कहा हमने कहा इन्होंने
- 1:05:18हमारा जागरण खराब कैसे? ये तो कहते हैं हम तो महामाई का
- 1:05:26गुणगान कर रहे थे। शेरां वालिये, पहाड़म वालिये।
- 1:05:29मैंने कहा हम भी महामाई का गुणगान कर रहे थे।
- 1:05:32गदियाँ वालिये उल्लियाँ वालिये। ये कौन सी महामाई हो गई।
- 1:05:39मैंने कहा सरदार जी तुम्हें पता नहीं गदियाँ वालिया तो शीत नाम
- 1:05:43आता है? पूछो इनसे सवारी क्या है?
- 1:05:47गधे गधे शीतला माता की सवारी क्या है?
- 1:05:51गधा बस एक चित्रों की माला डालनी बाकी रह गई, बाकी तो सब डाल दिया
- 1:05:58था अरे जीसको बेइज्जत करना हो उसको गधे पे वो डालो।
- 1:06:08और उल्लुओं वाली है बहन का, वो भी है रात को ही आती है वो वो कौन वो
- 1:06:13लक्ष्मी बताओ उल्लू की सवारी लक्ष्मी ही तो है रात को धन
- 1:06:20बांटते। हम तभी उसी को बुलाएंगे ना जो रात
- 1:06:24को जागती है लक्ष्मी जागती है क्योंकि उल्लू रात को जागती है
- 1:06:32इनकी पहाड़ा बारी और शेरां बारी तो रात को सो जाती है हमारी उल्लू
- 1:06:38वाली रात को जागती है। हमारी गधों वाली भी रात को जागती
- 1:06:42तुम गधों को भी देखता नी गधे कुत्ते बिल्ले रात को जागते हैं
- 1:06:53उल्लू कक चिष्ठा स्वांझ्नित्रा। भगवान कृष्ण निद्रा होनी चाहिए
- 1:07:06कुत्ते जैसे चेष्टा चाँद चाहिए काक जैसी कौवे जस यह लक्षण है
- 1:07:23किसके? जो साधक है, जो साधना करता है उसे
- 1:07:41वो तो हँसा उसे तो मुँह में अपनी रुमाल दे दी और खूब हँसा।
- 1:07:51और खांसी करने लगा जान की क्योंकि हँसी रोक नहीं पा रहा था दूसरे
- 1:08:00कमरे में चला गया मुझे बुला लिया कहता है आपने बड़ी झंड और।
- 1:08:09मैंने कहा क्या करें ये ये तंग बड़े करते हैं इनको साल भर हो
- 1:08:12गया। हर सप्ताह आ जाता है तो ने ऑर्डर
- 1:08:22किया। आगे से यहाँ पर जागरण नहीं होगा।
- 1:08:26जागरण करना है तो वहाँ करो, जहाँ किसी की नींद में दुविधा न आए,
- 1:08:30व्यवधान न आए। जहाँ बिचारे बूढ़े बीमार बच्चे इन
- 1:08:38सोमनिया के मरीज रात को नींद वैसे नहीं आते, बा मुश्किल गोली ले लू
- 1:08:46के सोते हैं कब सिरप ले के क्लोर फेनिम मैली ऐट।
- 1:08:51थोड़ी सुस्ती ला देता है और तुम चीखने लगते हो, शेरावाली है, ऐसा
- 1:09:01चिल्लाते मैं तो ठीक भी नहीं सकता।
- 1:09:04इनका चिल्लाना ही बड़ा अजीब है जो जो भक्त।
- 1:09:08जीस जीस, देवता की श्रद्धा पूर्वक आराधना करता है मैं उस उस वक्त की
- 1:09:15श्रद्धा उस उस देवता में अविसल कर देता हूँ स्थिर कर देता हूँ।
- 1:09:28इसका सरल अर्थ ये है मैं वही प्रदान करता हूँ जो तुम उससे
- 1:09:33मांगते हो। मैं वो कल्पवृक्ष हूँ, जो मांगोगे
- 1:09:38वही मैं तुम चोरी की आकाक्षा करोगे तुम्हें चोर बना देगा।
- 1:09:51तुम झूठ की आकाक्षा करोगे, तुम झूठ बोलना सिखाते हो, तुम ठगी की
- 1:09:57आकाक्षा करोगे, राजनीतिक देखो, ठगी की आकाक्षा करते और जो जो
- 1:10:02जितना बड़ा राजनीतिक उतना बड़ा ठग।
- 1:10:11माया तो ठगनी भाई, ठग तो फिरत सब देश बस यहाँ तक देखा है।
- 1:10:17उन्होंने आगे का दोहा गोरखनाथ का इन्होंने पढ़ा जा ठगने ठगनी ठगी
- 1:10:27बा ठग को आदेश। वो हमने सीखा है, जीस से ठगने से
- 1:10:36ठगने को ठग लिया उसको आदेश सलाम। अवक्षण हो जा अखंड हो जा तुम इतने
- 1:11:05टूट गए हो। इसलिए आम तौर से मैं भक्तों के
- 1:11:13प्रश्न लेता हूँ। कोई कितना भी नदी की भक्त हो मेरा
- 1:11:21जब ऐसे वैसे सवाल पूछेगा तो मैं उसको ब्लॉक कर देता हूँ तो मैं
- 1:11:27जानता हूँ हिंदू से बड़ा। विछिन्न कोई हो नहीं सकता, वह
- 1:11:34इतना टूटा हुआ है बेचारा रह कर दिशाओं में हरम मेरे इश्क का।
- 1:11:49सितार रह के दिशा में हज मेरे इश्क का सितारा।
- 1:12:09कभी डगमगाई कस्ती कभी खो गया किनारा रहा रहा घर दिशाओं में हर
- 1:12:26दम। यह हमारी बदनसीबी, जो नहीं तोर
- 1:12:38क्या है यह हमारी बदनसीबी। जो नहीं और क्या है के उसी के हो
- 1:12:56गए हम के उसी के हो गए हम। जो न हो सका हमारा रहा घर दिशा
- 1:13:15में हर दम, ये हमारी बदनसीबी, जो नहीं और क्या?
- 1:13:23ये जंजीरें मैंने तोड़ दी, साहस था लेकिन तुमने कोई कोर कसर बाकी
- 1:13:30न छोड़ी थी तुमने शीशे को इतना विच्छन्न कर दिया था, ये तो हमारा
- 1:13:43साहस था कि हमने किस तरह? अपनी किश्ती को किनारे से लगा के
- 1:13:52हमारी बदनसीबी थी कि हिंदू धर्म में पैदा हुए हिंदू धर्म जितना
- 1:13:59खंडित करता है, उतना कोई धर्म खंडित नहीं करता।
- 1:14:03बौद्ध धर्म युनाइक करता है। इस्लाम यूनाइटेड करता, सिख
- 1:14:11यूनाइटेड करता ईसाई यूनाइटेड करता एक अकेला हिंदू धर्म है जो विछर्ण
- 1:14:17करता डिवाइड करता इसलिए मारा गया सदा ही लोग मुझसे पूछते हैं देश
- 1:14:24गुलाम क्यों रहा? मैंने कहा ये हमारी बदनसीबी, जो
- 1:14:30नहीं और क्या है के उसी के हो गए हम जो ना हो सका हमारा जो था नहीं
- 1:14:38वह हमने कल्पना कर। अभी गबई साहब के ऊपर जूता फेंका,
- 1:14:47मैं सनातन का मान बर्दाश्त मैंने कहा विष्णु होता है, जो चीज़ नहीं
- 1:14:58होती वो तुमने मानी क्यों? पर मैं तो नास्तकों को भी कहता
- 1:15:03हूँ। जो तुम जानते नहीं कि वो है कि
- 1:15:06नहीं है तो तुम घोषणा क्यों करते हो?
- 1:15:09मार्कर्स ये परमात्मा नहीं है, धर्म एका भीम का नशा है, पर मैं
- 1:15:17इन तथा कथित भक्तों से भी कहता हूँ।
- 1:15:20कि तुमने भी इस सृष्टि को नरक बनाने में कोई कोर कसर वाक्य नहीं
- 1:15:24छोड़ी। तुमने इतने भेद पैदा करती है।
- 1:15:32हर घर में जीतने प्राणी उतने भेद हो गए।
- 1:15:45जीतने तुम डिवाइड होगे उतने तुम दुखी हो जाओगे जीतने तुम यूनाइट
- 1:15:54होगे उतने तुम सूखी हो जाओगे अब यहाँ फर्क समझ लेना।
- 1:15:59यूनाइट का मतलब मैं यह नहीं कहता कि पांच भाई इकट्ठे हो जाओ नहीं?
- 1:16:03कोई इकट्ठे नहीं हो सके। अलग सीज़न में डिवाइड का मतलब मैं
- 1:16:09ये नहीं कहता कि पांच भाइयों तो अलग अलग हो जाओ, न तुम्हारी
- 1:16:14वृत्तियाँ समरूप होनी चाहिए जैसे तुम हो वैसे हो जाओ।
- 1:16:22कोई कुछ कहता, कोई कुछ कहता कोई कुछ कहता कुछ मत मानो वही मानो जो
- 1:16:27तुम जानते हो अपने भीतर उतरो और जानो में हूँ कौन?
- 1:16:33बस यही एक मात्र ऊपर है इसलिए हिंदू हिंदू कोई पहुँच जाएगा कभी?
- 1:16:45यह चमत्कार से कम नहीं होगा, क्योंकि इतनी जंजीरें तोड़ के
- 1:16:53जाना होगा, उसे बेइंतहा जंजीरें तुमने लगा दी, जैसे चित्रकार को
- 1:16:59चित्र बनाए। एक चित्रकार ने चित्र बनाया,
- 1:17:07गाँधी चौक के अंदर खम्भे के ऊपर चिपका दिया, जो व्यक्ति इस चित्र
- 1:17:14में जो गलती देखे वहाँ पर क्रॉस का निशान लगा दिया साँझ को आकर
- 1:17:22देखा। देखा तो मूर्ति गायब थी।
- 1:17:28बस क्रॉस के चिन्ह चिन्ह थे। मूर्ति का तो पता ही नहीं था कहाँ
- 1:17:32गया तो उसने अपने गुरु से कहा गुरु जी, मैंने आपके हिसाब से
- 1:17:39मूर्ति बनाई। और मूर्ति गायब थी, क्रॉस के
- 1:17:43चिन्ह थे, कांटे लगे हुए थे तो गुरूजी कहने लगे ऐसे तुमने नीचे
- 1:17:51क्या लिखा? मैंने लिखा जो सुधार नजर आए वो
- 1:17:56देखो करो तो सुधार कर दिया उन्हें।
- 1:18:00किसने नाक सुधार दिया, किसने बाल सुधार दिए, किसने हाथ सुधार दिए
- 1:18:09तो ऐसा करो, वही मूर्ति फिर बना लो, नीचे लिख देना जीसको कोई कमी
- 1:18:18नजर आए? जीसको कोई कमी नजर आए और क्रॉस न
- 1:18:26लगाए नीचे लिखें कि यह कमी है। इसको ऐसे ठीक करना है।
- 1:18:36साँझ गवाया नीचे कोई कमेंट नहीं था।
- 1:18:38कैसे ठीक कर रहे है और मूर्ति बरकरार थी।
- 1:18:41वैसे। तुम दक्ष हो गलतियाँ निकाले,
- 1:18:50लेकिन ठीक क्या है ये तुम्हें पता है गलतियाँ निकालने में दक्ष और
- 1:18:56सक्षम ही व्यक्ति होता है। यह जो यह जान गया कि सही है क्या
- 1:19:02और सही कौन जानता है संत जो सही मुकाम पे पहुँच गया, जिसने देख
- 1:19:08लिया सही? क्या वह गलती निकालने में सक्षम
- 1:19:15हो गया? फिर वह जो बताएगा वह करुणावश
- 1:19:25उपदेशों का तुम्हें रूपांतरण करने का तुम यहाँ गलत हो यहाँ ठीक कर
- 1:19:31लो, वह गलती भी बताएगा। और ठीक होने का ढंग भी बताएगा।
- 1:19:37ये दोनों चीजें बताएगा निंतक सिर्फ तुम्हारी गलतियाँ निकालेगा,
- 1:19:44गलतियों को सुधारें कैसे ये नहीं बताएगा।
- 1:19:47निंतक के बस की बात है शांत तुम कहाँ गलत हो ये भी बताएगा।
- 1:19:53और इस गलती को कैसे ठीक करेंगे ये बताइए जैसे तुम्हारा प्रोफेसर
- 1:19:59तुम्हें बताता है मैथ का प्रोफेसर तुम्हें बताता है यहाँ भाई
- 1:20:03फॉर्मूला तुम्हें यहाँ गलत लगा है, इसको यहाँ करेक्ट करो तो ठीक
- 1:20:09ऑसर आएगा। तुम्हें पता ही नहीं तुम्हें चला
- 1:20:21कौन रहा है ये हमारी पद नसीब भी जो नहीं और क्या है के उसी के हो
- 1:20:32गए हम जो ना हो सका हमारा कल्पनाओं की तुमने कष्टियां बना
- 1:20:36ली। भला सोचो तो कागज़ की कस्तियाँ
- 1:20:43कभी बाउ सागर से पार किया करती तुमने कागज़ के जहाज बना लिया भला
- 1:20:52सोचो तो कभी कागज़ के जहाज अमेरिका पहुंचा बाइक।
- 1:20:57दूसरे देश पहुंचा पाएंगे जो जो भक्त जीस जीस मनो इच्छा से मेरी
- 1:21:11आस्तुति करता है मैं उसी भक्त की उसी उसी के अनुरूप।
- 1:21:20श्रद्धा को अविचल कर देता हूँ, स्थिर कर देता हूँ, तुम हत्यारे
- 1:21:25बनना चाहते हो, परमात्मा को कोई गर्व नहीं तुम्हे हत्यारा बनाते
- 1:21:30हो। बस शक्ति चाहिए, शक्ति को मोड़
- 1:21:35देगा। तुम हत्यारे हो जाओगे, बड़े
- 1:21:37हत्यारे हो जाओगे, तुमने देखा जेलों में अगर कभी जेल जाओ तो
- 1:21:50देखना हंसो, मैं नहीं कहूंगा ईश्वर ना करे।
- 1:21:58स्वाद चख लेना चाहिए। भाभी दादा है जिसमें चार कतल की
- 1:22:06है। वो दादा है जब मामूली चोरी वगैरह
- 1:22:09करके आया। वो पूछेगा रे किस अपराध में?
- 1:22:13वहाँ भी दादागिरी चलती है तो कहेगा मैंने तो कुछ भी नहीं किया
- 1:22:20था, मैंने तो बस भूखा था और ब्रेड चुराया था, चोरी की थी तो
- 1:22:29तुम्हारी चार झापट मरेगा। अरे उल्लू के पट्ठे आता तो पांच
- 1:22:33चार कतल करके तो आता हमारा दादा बन जाता तो पुलिस वाले भी पीटेंगे
- 1:22:42और ये भी पीटेंगे भीतर जो कतल करके आये हत्यारा बनना चाहते हो?
- 1:22:50अचारा बना देंगे, चोर बनना चाहते हो, चोर बना देंगे, लोगों से पैसे
- 1:22:57ले के वापस कर दूंगा, फिर उस पर दावा करना चाहते हो तो वैसा ही
- 1:23:01बना देगा। वह कोई आपकी इच्छा को अपूर्ण नहीं
- 1:23:07रखता। ये शब्द गांठ बांध रहे।
- 1:23:13वह तुम्हारी किसी इच्छा को अपूर्ण नहीं रखता।
- 1:23:18तुम जैसा होना चाहते हो वैसा ही वो कर देता है क्योंकि वह है
- 1:23:24शक्तिमान है सर्वशक्तिमान् है सारी शक्ति उसकी।
- 1:23:30तुम ज़रा मांगने का दुस्साहस करो इसलिए संत कहते हैं मंगल मगो तेरा
- 1:23:39मंगल मेरा मंगल सबका मंगल हो ही रहा है तेरा मंगल मेरा मंगल।
- 1:23:49सबका मंगल होवे धन्यवाद।