Latest / Baba ji Vijay Vats / 10 May 26 - सर्वव्यापी सदा अलेपा: शरीर और विचारों से परे उस 'निर्लेप' तत्व को पहचानने की रूहानी तकनीक
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- 0:10योगेश पाठक, जर्मनी से बाबा कबीर की उलट बांसी का अर्थ क्या है?
- 0:32यह जो शांत उल्टी पुल्टी बातें करते हैं मरो ही जोगी मरो मरो मरण
- 0:43है मिठा यह संतों की बातें। समझ में नहीं आती और आपने कहा था
- 1:02कि बुद्ध चुक गए? बुद्ध से आगे भी मार गया है।
- 1:17शिव सूत्र में लिखा है ऐसे अनुभव में उतर जाओ सब कुछ बीत जाए और
- 1:32तुम अन्यर्लिप बने रहो। गुरु महाराज का गीत आप अक्सर गाय
- 1:47करते हो, काहे रे बन खोजन जाय सर्वव्यापी सदा अले पा तोहे संग
- 2:11समा है? अगर वह सर्व व्यापक है तो अलेप
- 2:23कैसे रह गया, यह प्रश्न मेरी खोपड़ी में गूंजता ही रहता है।
- 2:32सर्वव्यापी जो सर्वव्यापी होता है वह निर्लिप्त कैसे रह पायेगा?
- 2:41सदा अलीबा तो ही संग समाई, तेरे भीतर भी समाया हुआ है और
- 2:47निर्लिप्त। क्या आप इन दुविधाओं का रहस्यत्मक
- 2:56विवेचना करके हमें इस दुराहे से बाहर निकालने का कष्ट करेंगे?
- 3:09परमात्मा की सृजना का? वृहद हिस्सा शब्दों में समर्थन
- 3:22बहुत हिस्सा ऐसा है जो अनुभव में आता है।
- 3:29और तुम्हें जानकर हैरानी होगी बहुत हिस्सा ऐसा भी बच जाता है जो
- 3:36अनुभव में भी नहीं आता। वह इतना विराट है, तुम इसका फैलाब
- 3:46देखो तुम्हारे पास आंखें हैं। मौन की भाषा तुम समझ नहीं सकता और
- 3:59जो भाषा आदमी ने इजाद की थी, वह आपसी कन्वर्सेशन के लिए इजाद की
- 4:08थी। गलती तुमसे ये हो गई के आपसी
- 4:16कन्वर्सेशन की भाषा को तुमने सर्व व्यापक को समझने में लगा दिया तो
- 4:26तुम्हारे समय व्यर्थ होना ही है। जब कोई व्यक्ति उठबटांग की बातें
- 4:34करेगा और कहेगा यह परमात्मा की बातें तो वह ईमानदार नहीं है।
- 4:49बेईमान। क्योंकि किसी भी भाषा से उसका
- 4:55प्रगटीकर नहीं होता। बियॉन्ड ऑल दी लैंग्वेजेस एंड
- 5:01वर्ड्स शब्दातीत है और भाषातीत है।
- 5:08इशारों में भी तो समझ नहीं आता। तुम्हारा भूषण लेकिन मैं सुलझाने
- 5:18की पूरी चेष्टा करूँगा योगेश पाठक अगर तुम आज ये सवाल न पूछते।
- 5:29तो शायद मैं इसका जवाब बिल्कुल आखिर में जाके देता हूँ और शायद
- 5:40मेरे पास इसके बाद बोलने के लिए कुछ न रहे तो न भी रहे।
- 5:52आइए इसका जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा जो उनकी तमन्ना।
- 6:11हे बर्बाद हो जा तू ए दिल मोहब्बत के किस्मत बना दे तड़पूर, तड़पकर
- 6:26अभी ही जान दे दे। जो मरते हैं मर जाने वाले दिखा दे
- 6:41जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा। जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा
- 6:53तू ए दिल मोहब्बत की किस्मत बना दे तड़पोर तड़प कर अभी जान दे दे
- 7:04यू मरते हैं मर जाने वाले दिखा दे।
- 7:11जो उनकी तमन्ना है, बर्बाद ऊँचा गहरा विषय है तुम्हें शांत होना
- 7:26होगा, इतना शांत होना होगा। कि हवाएं थपेड़ों के पत्तों में
- 7:39सरसराहट पैदा न करें, इतना शांत हो जा के मन में विचारों की दंग
- 7:54थम जाए। हीता शांत होजा सांसों की लह ठहर
- 8:01जाए हीता शांत होजा हृदय का धड़कन मालूम न पड़े।
- 8:16ऐसा समझो कि तुम किसी मूवी को देखने गए सिनेमा हॉल में बैठो,
- 8:28सिनेमा हॉल में तुम बड़े आराम से अपने सीट पर बैठो हो।
- 8:38फ़िल्म चल रही है। सकरीन के ऊपर फ़िल्म चल रही है और
- 8:51फ़िल्म बड़ी इंटरेस्टिंग। इतनी इंटरेस्टिंग है कि तुम कभी
- 9:01हँसते हो, कभी रोते हो, कभी बिरहा का दर्द तुम्हारे हृदय में टीस
- 9:09जगा देता है कभी मिलने की खुशी। तुम्हारी भीतर जीने की उमंग पैदा
- 9:18कर देती है। पर्दे पर आग लगती है, पर्दे पर आग
- 9:30को बुझाने के लिए पानी की बुझारें और आग बुझती है।
- 9:38तड़कते हुए दो दिल प्रेम से तुम देखते हो और बिरहा के आंसू
- 9:44तुम्हारे थमते नहीं विलेन की मारकाट तुम देखते हो?
- 9:54कतलो गारक के दृश्य तुम देखते हो धरती लाल हो जाती है, इतनी हिंसा
- 10:07और तुम बड़े मगन हो। तुम उसमें मर्ज हो जाते हो।
- 10:21जब हीरो दुखी होता है, हीरोइन दुखी होती है तो तुम्हारे आंसू
- 10:29निकल आते हैं, हृदय पीड़ा से तड़प जाता है।
- 10:37और जब विलीन पड़ता है तो तुम चेयर से ऊपर उठते हो, खुशी मनाते हो,
- 10:45तारियाँ बजाते हो, मोक्के घुसे चलते हैं और मार और मार।
- 10:57तुम इन में इन 60 तुम नहीं ये सारा दृश्य देखा तो ढ़ाई घंटे की
- 11:12फिर हम चल। तुम्हें बड़ा मज़ा आया फ़िल्म
- 11:20चक्कर एक अंत ही अनसुनी कहानी तुमने प्रथम बार देखी, भावुक हुए,
- 11:35क्रोधित हुए। लोभ आया विकार आया सब कुछ
- 11:43तुम्हारी आँखों के सामने गुजरता चला गया आग लगी तो तुम घबराए सब
- 11:59दिन शेर आया तो तुम डरे। यह खा जाएगा ये सभी भावनाओं
- 12:10तुम्हारे भीतर उठी दृश्यों को देखकर और अंत में फ़िल्म समाप्त
- 12:25हुई है। दो तरीके हैं फ़िल्म को देखने के
- 12:39एक तो फ़िल्म को साक्षी भाव से देखना, एक फ़िल्म को मर जोके
- 12:47देखना उसमें। बहुत से लोग हैं जो फ़िल्म के
- 12:56भीतर मर्ज हो जाते हैं, इन्सर्ट कर देते हैं।
- 12:59अपने आप तो हीरो दुखी होता है, हीरोइन दुखी होता है तो तुम्हें
- 13:06भी दुख होता है? पीड़ा।
- 13:11तुमने हीरो के साथ हीरोइन के साथ तादाद में साथ दिया, विलेन के साथ
- 13:20भी तुमने तादाद में साथ दिया, लेकिन विलेन को दिक्कत तुम्हारे
- 13:26भीतर। रोज़ उत्पन्न होता है, बदले की
- 13:29भावना उत्पन्न होती है और जो पीड़ित है, जो दुखी है उसको देख
- 13:40कर तुम्हारे भीतर दया उत्पन्न होती है उसकी दशा देख कर तुम्हें।
- 13:50असुधारा रुकती नहीं तुम्हारी तुम रोती भी हवा पीड़ा से ग्रस्त भी
- 13:57होते, खुशी के लम्हे भी आते है, किसी गरीब की झोपड़ी जलाती जाती
- 14:09है। किसी का घर गिरा दिया जाता है,
- 14:19किसी बेकसूर की हत्या हो जाती है और तुम सारे दृश्यों को निहारते
- 14:29हो। फिर मूवी समाप्त हो जाती है।
- 14:40एग्ज़िट के गेट खुल जाते हैं। तुम बाहर जाने के लिए उदैत हो
- 14:50जाते हो, लेकिन ठहरों अभी बैठे रहो।
- 14:59मुझे ये बताओ सारी फ़िल्म चली, कभी आग लगी, कभी पानी बरसा, कभी
- 15:11मिलन हुआ, कभी जुदाई हुई। कभी इच्छा वर्षी, कभी बदले की
- 15:22भावनाई तुम मुझे एक बात बताओ। कई प्रश्नों को इसमें सॉल्व कर
- 15:41रहा हूँ अपने अपने प्रश्नों को चूक लेना।
- 15:46तुम सब को उनके उत्तर में जाए सर्वव्यापी सदा अली प तोहे संग
- 16:00समय भगवान कृष्ण भी कहते हैं नैनं चिदं ती शस्त्र नैनं दाहती भावका।
- 16:11नै चयनम के लिए धनता को न शो से अति मारता शायद तुमने कभी सोचा
- 16:19नहीं होगा आज मैं तुम्हें वो अध्याय सिखाने जा रहा हूँ जो
- 16:25अध्यात्म का आखिरी अध्याय। जो अध्यात्म का आखिरी दृश्य है और
- 16:34जिसकी तुमने कभी कल्पना नहीं की होगी।
- 16:38तुम्हारा अंतःष कैसा है जिसकी ये बात करते हैं संत?
- 16:50सब जगह मौजूद है ही इज़ प्रेसेंट ओमनी प्रेसेंट लेकिन फिर भी नरलीप
- 17:04तुमने कुछ समझाया कि इस सारी फ़िल्म में।
- 17:10आंसू भी थे, दर्द भी था, बिरहा भी था, मेन भी था, एरश भी थी,
- 17:16द्वीश्वी था, आग भी लगी, आग बुझाई भी गई।
- 17:21लेकिन ऐसा कौन सा तत्व जिसके ऊपर ये सारी घटनाएं घटीं?
- 17:31और वह निर्लिप्त रह गया। आखिर में तुमने पाया फ़िल्म खत्म
- 17:41होने के बाद थोड़ी देर बैठे रहा होगा?
- 17:48तो तुम्हें संतो के इस वचन का मर्म समझाया जाएगा।
- 17:53कृष्ण क्यों कहते हैं? वह काटा नहीं जाता शास्त्र से।
- 18:06और कृष्ण ये भी कहते हैं कि यह मेरी रीला है।
- 18:15आग लगी तुमने देखी ना बिरहा के पर आए तुमने अपनी नग्न आँखों से
- 18:24निहारे। हाँ, मिलन के बल आए तुमने अपनी
- 18:29नग्न आँखों से निहार बिल्कुल निहार झोंपड़ी को आग लगी तुमने
- 18:35देखी हाँ देखी शेर आया तो तुम डरे हाँ डरे।
- 18:46ऐसा कौनसा तत्व था? सारी फ़िल्म में तो सारी घटनाएं
- 18:53घटने के बाद सारी घटनाएं भी घटी। उसी के ऊपर घटी लेकिन फिर भी वह
- 19:03निर्लिप्त बना रहा। शायद कुछ लोग समझ गए होंगे जो
- 19:13नहीं समझे मैं अभी बहुत क्लियर करूँगा, तुम चिंता मत करो।
- 19:27वह तत्व है सक्रीन का पर्दा, जिसके ऊपर सारी फ़िल्म चली।
- 19:39सक्रीन का पर्दा निर्लिप्त है। उस पर्दे के ऊपर आग भी लग गया।
- 19:48तुमने देखी ना? बुझी भी, वो भी तुमने देख झोंपड़ी
- 19:59जल गई, मकान गिर गया, ये भी तुमने देखा बिरहा के आंसू भी निकले।
- 20:09निकले प्रीत भी हुई और मिलन भी हुआ।
- 20:16जुदाई भी हुई ये सब तुमने अपनी आँखों से देखा और तुम?
- 20:28प्रभावित भी हुए। लेकिन ऐसा कौन सा तत्व था?
- 20:40तुम्हारे आंसू निकल आए तुम्हारे भीतर भय आया शेर को देखकर।
- 20:48तुम्हारे भीतर इर्शाई विलेन को देखकर तुम्हारे भीतर विरह के आंसू
- 20:55पी आए और मिलन का तृप्ति भी आया तो भी मिलन के आंसू भी निकलते
- 21:03हैं। थोड़ी गुणवत्ता बदल जाती है।
- 21:10ये सारी घटनाएं एक ही पर्दे पर गटी और तुमने देखी?
- 21:20फिर ये संत किस तत्व की बात करते हैं?
- 21:24जिसके ऊपर सारी घटनाएं भी घटती हैं, सर्वव्यापक भी है और नरले भी
- 21:29है। फ़िल्म का पर्दा सक्रें आग लगी
- 21:43पर्दा नहीं जला बारिश हुई। पर्दा गिला नहीं हुआ शीर दहर
- 21:57पर्दा नहीं कपा, जुदाई हुई पर्दे ने आंसू नहीं बिखेरे, मिलन हुआ है
- 22:11परदे ने खुशी के आंसू नहीं बिखेरे।
- 22:16घटनाएं सभी उसी के ऊपर हुई। जी नहीं देखकर तुम रोए भी तुम डरे
- 22:24भी तुम छिलके भी बिरहा के दर्द भी तुम्हें हुए मिलन के आंसू भी
- 22:29तुम्हें पहले। तुमने क्रोध भी आया विलन के ऊपर,
- 22:35लेकिन परदे को ये कुछ भी नहीं हुआ और सारी घटनाएं परदे के ऊपर ही घट
- 22:43और सारी घटनाएं तुमने अपनी नगणकों से देखी?
- 22:54जीस दिन तुम मैंने अगर कहा कि बुध चूक गए थोड़ा और आगे चले जाते तो
- 23:01भेद खुल जाता इसलिए कहना पड़ा कि बर्मात्मा ने।
- 23:11ईमानदार थे तो ठीक कह गए। बेईमान होते तो बिना देखे आपको
- 23:17पांच इनाम दे देते हैं। ईमानदार थे, घटनाएं घटित हूँ।
- 23:33तुम रोए तुम भय आक्रांत हुए बिरहा के आंसू पर मिलन के आंसू भी बहे
- 23:48सिर ने दहाड़ मारी तुम्हारा हृदय। करी जा बैठ गया सारी घटनाएं तो
- 24:00मैं तो हूँ लेकिन पर्चे कौन है और तुमने तो मात्र देखी परते का तो
- 24:10ऊपर घटी जिसके ऊपर घटी। वह तो डस से मस भी नहीं हुआ और
- 24:20जिसने मात्र देखी वह थर्रा भी गया।
- 24:24उसको क्रोध भी आया, उसको जेलसी भी हुई, उसको प्रेम भी हुआ।
- 24:31उसे बिरहा का दर्द भी हुआ। सिर दहाड़ा तो उसका कलेजा बैठ
- 24:42गया। आग लगी तो उसे फिकर हुआ, अब क्या
- 24:51होगा? आग बुझी?
- 24:56तो उसे कुछ शांति भी मिली। अच्छा है मुसीबत टलक है जब तलक
- 25:08तुम घटनाओं को मर जो हो गए देखते रहोगे साक्षी बनकर।
- 25:19तुम उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता।
- 25:28यही है बुद्ध की सदस्य बुध के अनाफान से विपश्यना से श्वास आई
- 25:46श्वास गई। मातृ साक्षी होने से उस पर्दे की
- 25:58निर्लिप्तता का अहसास नहीं होता है।
- 26:03एहसास क्या होता है यह थोड़ा सा शांति से सुन।
- 26:09तुम्हें भेद पता चलता है यह जो सांस ले रहा यंत्र है, यह मैं
- 26:16नहीं यह जो धड़कता हुआ दिल है, यह मैं नहीं यह जो उठते हुए विचार
- 26:25हैं, क्योंकि मैं इन्हें देख रहा हूँ मैं।
- 26:33लेकिन बुद्ध से आगे नहीं जा पाते। बुद्ध कृष्ण की तरह मैं नहीं कह
- 26:40पाते हैं। बुद्ध कहते हैं अप दीपो भव अपने
- 26:50दीपक के सैंपल। और यह सुंदर स्टेज है।
- 26:55यह आपको दुखों से पार लेता है। जब तुम्हें पता चलेगा मैं शरीर
- 27:01नहीं हूँ, ये उठती हुई विचारों की तरंग, भावनाओं की उमंग मैंने।
- 27:13तो फासला क्रियेट होगा, लेकिन फासला क्रियेट होने से तुम्हारे
- 27:19दुख दर्द संताप तो मिट जाएंगे निश्चित।
- 27:28अगर सिर्फ तुमने दुख दर्द मिटाने कष्ट क्लेक चिंता चिन्तना इसको ही
- 27:38मिटाना है जो कि 99% लोगों का 99.99% लोगों का।
- 27:47लक्ष्य है देख तो 99.99% लोग बुद्धि से संतुष्ट हो जाएंगे।
- 28:00हो भी जाना चाहिए, प्रसन्न रहेंगे।
- 28:05अपने जीवन को खुशी खुशी गुजार देंगे।
- 28:11बुध तुम्हारा जिम्मा तुम पर डाल देंगे।
- 28:15अब दीपो भब अपना रास्ता स्वयं प्रशस्त करो, लेकिन कृष्ण तुम पर
- 28:24नहीं डालेंगे। कृष्ण कहेंगे मेरी शरण में आजाओ
- 28:31सर्वधर्माण प्रतज्ञा माँमिकम शरण दो स्थितियां मैंने तुम्हें बताई।
- 28:44एक स्थिति दर्शक की तरह है। जो तुम आती जाती, सांस को देखते
- 28:50हो, जो तुम विपक्षणा में करते हो और आज विपक्षणा को सिखाने वाले
- 28:56बहुत सेंटर्स शुगर लगते हैं। तुम ये मत सोच लेना कि बुद्ध तृप
- 29:05हो के मरे नहीं। ना बुद्ध तृप्त हो के मरे, ना
- 29:10उषा, तृप्त हो के मरे इसलिए थोड़ी सी वासनाएँ फिश रह जाती हैं।
- 29:20ओशो को आखिर में बार बार बैचुलेट का इंजेक्शन ले के।
- 29:27प्राण त्याग नहीं पड़े और बार बार बैचुरेट हो जो हम मरने के लिए
- 29:35किसी पशुओं को देते हैं, जो दर्द से कराहरण है।
- 29:46जो चीखें मर रहा है अंतिम समय में ओशो ऐसी शारीरिक, मानसिक स्थिति
- 29:56में तो जब वह बर्दाश्त ना कर सके तो मैं एक और बात बताता हूँ।
- 30:10ओशो शरीर से बाहर होने की कला नहीं डालते थे।
- 30:17उन्होंने एस्ट्रोलॉजी के भीतर क्षमा करनी उन्होंने।
- 30:27ऐस्ट्रिल ट्रैवलिंग नहीं इसलिए अपने शरीर को ना भी क्षेत्र से
- 30:38छोड़ते ना उस सिल्वर कॉर्ड को साथ लेकर।
- 30:45इसका अभ्यास उन्होंने की। अनिहिता कर सकते थे बड़े आराम
- 30:53इसलिए आसानी से शरीर त्याग नहीं कर सके फिर क्या करना पड़ा?
- 31:02फिर आखिर में जब दर्द। हद को पार कर गया।
- 31:10सीमाओं को लॉन्च किया असीम हो गया तो उन्होंने डॉक्टर से कहा आप
- 31:17मुझे बार वेज रेट्स दे दो। उससे पहले उनसे कुछ अलफाज़ बुलाए
- 31:24गए जो आपके पास। आज ये रिकॉर्ड है, मैं तो रहूँगा
- 31:31बिल्कुल ठीक है, मैं तो रहूँगा और उनकी आवाज में दर्द छलकेगा, अब गो
- 31:43से सुनना उस आवाज को। पता चलेगा वो बहुत वृहद कस्टम है।
- 31:51जब ये शब्द बोल रहे हैं तो बारबैचूरेट्स का इंजेक्शन मरने के
- 32:00लिए दे देना विथाउट एनी परमिशन? और गवर्नमेंट एक एकरा है, इसलिए
- 32:12उन्हें आनन फानन में अग्नि देनी पड़ी, पेट्रोल उपलब्ध नहीं था,
- 32:23मिट्टी का तेल छिड़क दिया गया। शिष्यों की जान पर बनाएं कैसे?
- 32:31इस मु्द्दे को जल्दी से समाप्त करें?
- 32:34पता न चल बुद्धा हाल में भी बहुत कम समय के लिए डेड बॉडी रखी गई।
- 32:46लेकिन उनकी तो ये तमन्ना थी कि जल्दी जल्दी इसका मुद्दा खत्म
- 32:50किया जाए ताकि ऊपर वाले ना फंस जाएं कि तुमने जहर का टीका दे के
- 32:56यह मार दिया। अगर पोस्ट मार्टम हो जाता तो पता
- 33:00नहीं कितने लोग फंसते। इससे बचने के लिए ओशो की डेड बॉडी
- 33:10का संस्कार जल्दी जल्दी में कर दिया गया।
- 33:14घड़ियाँ थोड़ी गीली थीं। पेट्रोल उपलब्ध नहीं था दूर पर।
- 33:24जल्दी जल्दी से मिट्टी का तेल छिड़का गया, आग लगा दी गई।
- 33:31धू धू करके चिता जल जब सारी चिता जल गई तो उन्हें चैन आया।
- 33:40मुद्दा खत्म। शायद किसी भी संत का ऐसा दुःख दाई
- 33:52अंत नहीं हुआ जो ओशो का। मरे तो बुद्ध लेकिन पीड़ा को
- 34:07झेलें और पीड़ा इतनी थी और सुबह पीड़ा, बड़ी वृहद।
- 34:19उसका कारण मुझे नहीं पता। वह न्यूयॉर्क की जेल थी जहाँ
- 34:26थैलियम नाम का जहर इंजेक्शन दिया गया।
- 34:29यह कोई और कारण था यह मैं नहीं जानता, मैं इतना जानता हूँ कि
- 34:38घोर। दर्द के क्षणों में उनसे बर्दाश्त
- 34:42नहीं हुआ और वो शरीर से अलग नहीं हो पाया।
- 34:50आखिर में ये सुझाव दिया गया क्या ऐसा नहीं हो सकता?
- 35:00कि उस बार वेचुरेट्स का इंजेक्शन दे दिया जाए और एक आदमी तीन
- 35:07इंजेक्शन दिए गए। लगातार जल्दी से काम खत्म हो जाए।
- 35:16ओशो ने फिलॉसोफी में एमए के थे, तर्कशास्त्री थे, बड़े शानदार बाल
- 35:22की खाल निकाल लेते थे और तुम्हारी बुद्धि ऐसे ही व्यक्तियों से
- 35:28इम्प्रेस होती है? तुम इन्हें ही समझ लेते हो
- 35:34सम्पूर्ण। और यहीं धोखा खा जाते हो।
- 35:40बुद्ध भी संपूर्णता की बात नहीं करता है।
- 35:44कुछ भी नहीं करता है यह समानता पीड़ा से झुग्ध होकर बुद्ध भी
- 35:52मरते हैं। उनको भी किसी लोहार ने गलती से
- 36:03जहरीले मशरूम खिलवा दिया था। उसे पता भी नहीं था।
- 36:14तो दर्द से प्राण त्याग दोनों का अंत करीब क्रीब समान हुआ।
- 36:23लेकिन तुम जो रहस्यत्मक बातें वो सोने की।
- 36:29विज्ञान भैरव तंत्र की और मैंने पढ़ी ठीक नहीं व्याख्यान की।
- 36:40इसलिए मैं रोज़ कहता हूँ, जहाँ तक तुम जानते हो वहीं तक बोलो
- 36:46निष्णात हो। बड़ी सुंदरता से बोल पाओगे अगर उस
- 36:52स्थल से आगे जाकर, बुद्धि का सहारा लेकर, तर्क का सहारा लेकर
- 37:00फिलॉसफी का सहारा लेकर बाल की खाल निकालकर लोग प्रभावित हो जाएंगे।
- 37:06और सारे संसार से लोग प्रभावित हुए हैं।
- 37:11बोलने की सेल्फ और जो जानता नहीं, खुद अनुभव नहीं है, वह काटेगा
- 37:19कैसे काटेगा तो वही जो उससे ज्यादा।
- 37:24अनुभवी है तो वो बताएगा नहीं। राम राम करने से नहीं मिलता
- 37:28प्रमाण क्योंकि उसने परमात्मा राम राम करने से विश्राम पाकर राम राम
- 37:38छोड़ के पाया। फिर वह मज़े से कह सकेगा।
- 37:46के राम राम छोड़कर मिलता है, राम राम करने से नहीं मिलता, राधे
- 37:52राधे करने से नहीं मिलता, पांच नाम करने से नहीं मिलता।
- 37:57पांच नाम छोड़ के मिला करता है नथिंग टू टू।
- 38:04टोटली रीलैक्स होकर फिर मिलता है अपने अंत में जाकर, क्योंकि वह
- 38:11सर्वव्यापी सदा अलेपा तोहे संग समाए तुम्हारे ही भीतर है।
- 38:20कहीं जाना नहीं, ट्रैवेल नहीं करना किसी व्हीकल की जरूरत नहीं,
- 38:29बस कोई मिसहैपनिंग हो गई, बस कोई इल्यूश़न हो गया।
- 38:35तुम भ्रम में पड़ गए कि मैं बहुत दूर निकल गया।
- 38:40लेकिन तुम भूल गए कि सपने में दूर निकलना सत्य में दूर निकला नहीं
- 38:46होता। सपने में दूर चले आए थे बिना शक
- 38:53लेकिन इक ख्वाब सादे का। था।
- 39:00हमने इक ख्वाब सा देखा था हम जब आंख खोली तो टूट गया जब।
- 39:18आँख खुली तो टूट गया, मरने की खबर है, जाने जिगर मरने की खबर है,
- 39:35जाने जिगर। मिल जाए कभी तो मत रोना, हम छोड़
- 39:44चले हैं महफिल को याद आई कभी तो मत रोना।
- 39:56ये ख्वाब सा देखा था हमने ख्वाब में तुम कहीं भी चले जाओ विदेशों
- 40:03में चले जाओ अमेरिका यहाँ से बड़ी जो है लेकिन तुम जा सकते हो ख्वाब
- 40:10में लेकिन याद रखना। ख्वाब में गया हुआ व्यक्ति वापस
- 40:19लौटने के लिए किसी एरोप्लेन के साधन की आवश्यकता नहीं होती।
- 40:25बस यही तुम्हारे गुरु तुम्हें दे रहा है।
- 40:31तुम तो अमेरिका निकल गए। तुमको तो एरोप्लेन से वापस आना
- 40:38पड़ेगा। 22 घंटे का सफर है अपनी वाक जातुर
- 40:47से ये तुम्हें उलझा देता है। और इनमें बाघ का है क्योंकि
- 40:59फिलॉसोफी के मास्टर बाघ की खाल निकाल लेते हैं।
- 41:06इसीलिए मैं कहता हूँ ये मात्र चिंतक है, एक दार्शनिक नहीं।
- 41:12दार्शनिक शब्द का अर्थ तुमने गलत कर दिया।
- 41:15दार्शनिक शब्द का अर्थज्ञ होता है जिसने नग्न आँखों से दर्शन कर
- 41:21लिया। दर्शन करने से संशय समाप्त होता
- 41:27है। पुत्र गयो।
- 41:30मेरे मन का संस है जब्त दर्शन पायो ठाकुर तुम शरनाई आई बिना
- 41:40दर्शन किये मात्र बातों की। कहाबतों से तुम बाहर नहीं
- 41:51पहुँचते, तुम सच में कहीं नहीं गए हो, मात्र स्वप्न में कहीं गए हो
- 42:02और इतनी दूर निकल गए हो। कितनी भी दूर निकल गए हो लेकिन
- 42:07ध्यान रखना। सपने में गए हो, सच में नहीं गए
- 42:13हो दादू दूजा को नहीं दो जीवन की दौड़ यह मन की दौड़ है सपने में
- 42:24विदेश में चले जाना। दौड़ मिट्टी संशय गया।
- 42:30लेकिन लोग तुम्हारी दौड़ मिटाने के लिए विधियों का इस्तेमाल करते
- 42:38हैं। विधियों का कोई कहता राते राते
- 42:42शपलो राम राम जपलो कृष्ण कृष्ण जपलो कोई पांच इनाम दे देता कोई
- 42:51कोई विधि बता देता लेकिन ध्यान रखना सपने में गया हुआ व्यक्ति
- 42:57किसी विधि से वापस नहीं होता क्योंकि वह शक्ति में गया नहीं
- 43:02होता। कहीं वह वही होता।
- 43:08इसलिए बाबा ने बड़ा सुंदर शब्द कहा ज़ोर न जोगती छोटे संसार
- 43:18मुक्ति के लिए किसी युक्ति में कोई ज़ोर न।
- 43:22किसी युक्ति की कोई आवश्यकता नहीं क्योंकि तुम भटकते हो, तुम कहीं
- 43:29जाते ही नहीं वर्ण अगर बहुत गहरे से कहूं, तुम कहीं जा सकते ही
- 43:35नहीं। इसलिए आत्मा न कहीं जाति, न कहीं
- 43:46आत्म शित्र है। आत्मा जहाँ है वहीं पे सदा
- 43:53रहेंगी। फिर कौन भटका फिर भटका मन?
- 43:59फिर भटका देखी यात्रा सारी यात्रा देही की यात्रा है, आत्मा तो
- 44:08हिलती नहीं, मैंने कहा था तुम अमेरिका जाते हो, तुम कोई किताब
- 44:14पढ़ रहे हो, वो किताब जिसकी लाइट में पढ़ रहे हो।
- 44:19क्या तुम वो लाइट भी साथ लेके जाते हो?
- 44:23तुम कहोगे नहीं, लाइट तो वहाँ है ही, बस ऐसे ही आत्मा तो सभी जगह
- 44:28है। सभी जगह का अर्थ मैं शास्त्र से
- 44:33पढ़ के नहीं बोल रहा। ऐसा मैंने 28 अक्तूबर ही रात्रि
- 44:38को अनुभव किया कि मेरा कोई और शोर ना रहा।
- 44:43श्वेत व्हाइट पार्टिकल्स से सारा यह असीम अखंड अस्तित्व गुथा हुआ।
- 44:53और वह सारा आदम से भरपूर था झलक रहा था अमृत और सब मिट गए
- 45:03आकृतियाँ अब बहुत से लोग पूछते हैं वे निराकार हैं या साकार हैं?
- 45:09अब यह तुम्हें जवाब मिल जाएगा। सब आकृतियां मिट गई, पेड़पौधे मिट
- 45:17गए, पास के गोदाम मिट गए, सामने टॉम मिट गयी, बाबा धर्मदास की
- 45:28बाईं गौशाला मंत्र था वो मिट गया। बोना वृक्ष मिट गया, पास खड़े हुए
- 45:37घास मिट गई, पेड़ पौधे मिट गए सब खत्म ट्रांसपेरेंट होता चला गया।
- 45:47धीरे धीरे एक वक्त ऐसा आया। जब कोई पता न चला इगोलेसनेस एंड
- 45:55टाइमलेसनेस न आकार बचा नक्श में बचा, ध्यान रखना, आकार वही होता
- 46:08है। जहाँ ईगो होती है।
- 46:11ईगो का सीधा संबंध आकार और समय के साथ है।
- 46:16अगर ईगो मिट गया तो आकार भी मिट जाएगा और समय भी मिट जाएगा।
- 46:24इसलिए जो व्यक्ति पूजा में संलग्न है।
- 46:29वह कहेगा परमात्मा साकार है, ठीक भी है क्योंकि उसने ऐसा ही अनुभव
- 46:35किया है, वह कहेगा परमात्मा की समय पर पूजा करें, त्रिकाल संध्या
- 46:46करें, बिल्कुल ठीक है। क्योंकि उसने ऐसा ही अनुभव किया।
- 46:51वह कहेगा खाने से पहले परमात्मा को भोग लगाओ बिलकुल ठीक है
- 47:00क्योंकि वह समझता है कि परमात्मा को भूख लगती है।
- 47:07और तुम जैसा समझते हो वैसी ही तुम्हारी समृद्धि हो जाती है।
- 47:18यथादृष्टि तथा सृष्टि तुम बहुत दूर निकल गए।
- 47:27लेकिन सपने में निकल गया। सपने में निकला हुआ व्यक्ति वापस
- 47:35आने के लिए किसी वाहन का सहारा नहीं लिया करता।
- 47:41फिर क्या करना होता है? तुम जो करते हो रोज़ सपना रोज़
- 47:48देखते हो सपना रोज़ ही टूटता है कैसे टूटता है बताओ कुछ तुम मेरे
- 48:00प्रश्न का जवाब बड़ी आसानी से दे दोगे क्योंकि तुम्हारा अनुभव है
- 48:04रोज़ का। तुम कहोगे सपना टूट गया क्योंकि
- 48:08मैं जाग गया, मैं जाग गयी, बिल्कुल सही जवाब है जब तुम जाग
- 48:16जाते हो तो न्यूयॉर्क से यहाँ आने में किसी विमान की आवश्यकता नहीं
- 48:24होगी। मात्र जागना होता है।
- 48:28ऐसे ही तुम सपने में जहाँ पे गए हो सपना है और सपना टूटेगा।
- 48:36किसी विधि से ध्यान रखना, ना कोई नाम से, ना कोई जप से, ना कोई पाठ
- 48:42से, ना कोई पूजा से। किसी कारण से किसी जुगती से जुगती
- 48:50जुगती जुगती जुगती विज्ञान भैरव तंत्र में 112 युक्तियाँ हैं।
- 48:57मैं सब आजमाई एक भी उस स्थल पर नहीं पहुंचाते।
- 49:05तुम आजमा के देखना तुम पाओगे। ओशो ने जितना भी प्रवचन किया सब
- 49:15खोपड़ी की। व्याख्या से किया, जो समझ आया उसे
- 49:25और वह समझा नहीं जा सकता, लेकिन उसने व्याख्या की उसोने समझ की
- 49:32विज्ञान भैरवतंत्र की एक भी विद्युत में उसो की ऐसी नहीं
- 49:36मिलेंगे जो उन्होंने व्याख्याहित की।
- 49:41और तुम उस तल को छू लो जिसे परमात्मा कहते हैं या जिसे आत्मा
- 49:46कहते हैं आओ हम उन्हीं बातों पर फिर आ जाएं।
- 49:56सिनेमा हॉल में तुम बैठे हो? फ़िल्म खत्म स्क्रीन के ऊपर मूवी
- 50:10चलनी बंद हो गयी द एंड दिखा। अब क्या होगा?
- 50:17तुम उठोगे चुप कैसे चले जाओगे या कोई जहाज की आवश्यकता पड़ेगी
- 50:27नहीं, तुम मात्र जा कर तुम्हें पता चल गया फ़िल्म खत्म हो गया।
- 50:36अगर तुम साक्षी बन के देखोगे तो मात्र भेद तक पहुँच जाओगे।
- 50:46मैंने तुम्हें एक सूत्र दिया था। 121।
- 50:51पहले तुम एक होते हो, तुम्हें कोई भेद पता नहीं होता, बस मैं हूँ
- 50:59मैं हूँ और मैं ही हूँ वह पर मूर्खता की बात है नेपोलियन कहता
- 51:07है इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन मैं।
- 51:12असंभव शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं ठीक करता है क्योंकि उसने ऐसा ही
- 51:20जाना है, लेकिन अंतिम समय वाटरलू में हार जाता है।
- 51:29और वीरान स्थानों पर उसको फेंक दिया जाता है।
- 51:36फिर उसको शेर नहीं खाया कि उसकी मौत कैसे हुई?
- 51:40कोई पता नहीं न उसको किसी ने खाना दिया, न उसको किसी ने पानी दिया।
- 51:47वह मर गया, तड़पता मर गया, भदकता मर गया, पता नहीं कैसे मर गया,
- 51:52लेकिन मर गया वही व्यक्ति जो कहता था इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड
- 51:57इन माइ डिक्शनरी पता नहीं कैसे मर गया रोज़ शतरंज की चालें चलने
- 52:05वाला गनानंद के। राज्य को जड़ मूल से उखाड़ देने
- 52:11वाला जानने का शतरंज की विशाख बचाता तो रहा उसका राज्य भी उसने
- 52:22छिर लिया। चन्द्रगुप्त मौर्या को दे दिया।
- 52:29लेकिन सुबंधु ने उसको देश निकाला दिला दिया।
- 52:35वह दूर जाकर किसी झोंपड़ी में बैठ गया, सुबंधु जान गया कि वहाँ गया।
- 52:43उसने मिट्टी का तेज छिड़का की आग लगा दी।
- 52:47सोया बड़ा थरक वह करीब 60% जल गया और अंतिम छः महीने उसने जीस कराहट
- 52:58से गुजारे। वह उसकी जान ही जानती है।
- 53:03वह न जिया, न मरा। प्यास लगी तो राहगीर से पानी भाग
- 53:08लेता है। पर अपने ही मल मूत्र में लिपटा
- 53:13हुआ वह छह महीने पढ़ा। तुम कहते हो तानाशाहों का असर ऐसा
- 53:20ही होता है। और चाणक्यों का हश्र भी ऐसा है।
- 53:26अपने ही मल मूत्र में यह लोग चाणक्य आखिरी छह महीने पड़ा रहा।
- 53:32उठ नहीं सकता। 60% हिस्सा जल गया था।
- 53:41वीरता की कहानियों सुनाने में लक्ष्य हो इसलिए तुमने दुनिया को
- 53:49पागल कर दिया है। दूसरा पहलू तुम बताते हैं,
- 53:55तुम्हारी फ़िल्म प्रेमी प्रेमिता मिल गई।
- 54:02और सैकरीन पे आ गया दी। उसके बाद जो जूत फटांग हुआ वो तो
- 54:10तुम्हें पता ही है। असर तो फ़िल्म अब शुरू होगी जब
- 54:17तकरार होगी। तब पता चलेगा और इसलिए तुम भद्दी
- 54:28भद्दी चीज़ ढक लेते हो, अच्छी अच्छी चीज़ उगाड़ देते हो, यही
- 54:40सीखा है तुमने। सब कुछ सीखा हमने सब कुछ सीखा
- 54:55हमने ना सीखी होशयारी सच है दुनिया वालों कि हम हैं अनाड़ी।
- 55:08तुम आगे की बात नहीं बोलते व्हाट हैपन नेक्स्ट मत हँसो असली फ़िल्म
- 55:22अभी शुरू होगी। इससे पहले तो बलेखा था।
- 55:28इससे पहले तो सिर्फ मात्र भ्रम थे।
- 55:33असली कहानी बाद में शुरू होती है और वो तुम दिखाते नहीं, यह
- 55:41तुम्हारी फितरत हो गई तुम दिखाते हो कि आस्था?
- 55:47आज इस चाणक्य की नीती पास हुई। आज ये झूठ बोलने वाले गद्दी निशी
- 55:53हो गए। बिल्कुल हो गए।
- 55:59अक्सर दोहराया जाता है शब्द और बहुत से शब्द दोहराए जाते हैं।
- 56:10नेपोलियन बोनापार्ट तुम अच्छी अच्छी चीजें तो खाती तुम
- 56:21इम्पॉसिबल वर्ड इस नॉट फाउंड इन वैड एक्शन फिर।
- 56:26कैसे हार गया फिर बाद की ज़िन्दगी में उसको क्या तसीह सहने पड़े कोई
- 56:35बता सकता है? मैं जानता हूँ इसलिए बता सकता हूँ
- 56:40नर्क था, वृहद नर्क था। और ब्राह्मणों ने ठीक किया।
- 56:47कुंभ पा के नरक का निर्माण करके यद्यपि यह कोई भौगोलिक स्थान नहीं
- 56:53है, यह स्टेट समाई है। चाणक्य जीता घना अनंत का गुरुर
- 57:00उसने तोड़ा लेकिन गुरुर तो खुद का भी टूट गया।
- 57:12अब रिएक्शन दर्जनकर एंड अपोज़िट रिएक्शन प्रत्येक क्रिया की बराबर
- 57:19और विपरीत प्रतिक्रिया होती याद रखो, भला कीजिए भला होगा।
- 57:30बुरा की जे बुरा होगा भला की जे भला होगा बुरा की जे बुरा होगा ई
- 57:42लिख लिख के क्या होगा? वहीं।
- 57:47लिख लिख के क्या होगा? यही सब कुछ चुकाना है सजन रे झूठ
- 58:01मत बोलो, खुदा के पास जाना। न हाथी है, न घोड़ा है, वहाँ पैदल
- 58:12ही जाना है, सजन रे झूठ मत हो, अब देखिये।
- 58:26भटके हुए धर्म से भटके हुए लोग मुरली सुनाते हैं, तुम्हे शब्दों
- 58:39और याद रखना मुरली शब्दों में नहीं आती, मुरली धुन की होती।
- 58:46वो तुम्हारे भीतर गूंज रहे कोई सौभाग्यशाली व्यक्ति उस गूंजती
- 58:53हुई मुरली के पास जाता है जा ठाकुर दे डेरे वडे आ जिससे वज दे
- 58:59नाग 1000 वह मुरली की धुन भी तुम्हें सुनाई पड़े।
- 59:04इश्क दी नमियो नमी बहाव बही लिख लिख कर क्या होगा यही सब कुछ
- 59:13चुकाना है सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना ये झूठ है और
- 59:20देखो। एक बदमाश दो 250 सुंदर स्त्रियों
- 59:26को लेकर कराची से निकला था। पिछले जन्म में जा के शाह मेरे
- 59:30पास आया था, बहस सनातन को विखंड करने पर तुला हुआ, मैंने कहा
- 59:42देखो। जब बड़ी विपत्ति सामने हो तो छोटी
- 59:47विपत्तियों को बोलना ही श्रेष्ठकर है।
- 59:50अभी तो हम बोला है, अभी तो हमारी सारी शक भारत माता की जंजीरों को
- 59:58तोड़ने में लगने चाहिए, उससे बाद में निपोट लेंगे।
- 1:00:02और उससे बाद में निपटने के योगी श्री श्री नाथूराम गोडसे ने छोड़ा
- 1:00:16ही है। तो मुरली सुनाती हैं, सुबह शब्दों
- 1:00:27की और मुरली के शब्द नहीं होते, मुरली के धन होती है, यह जो शब्द
- 1:00:33और श्रुति का मिलान है, आज थोड़ा सा इसके ऊपर भी हल्का सा विवेचन
- 1:00:39कर ले। यह शब्द भीतर बजती हुई धुन जो
- 1:00:50अनहद में उभरती है अनहद में उसी दिन का धुन का उभरना है।
- 1:01:02अपने उदगम स्रोत से यह धुन उठती है और तुम्हारे गगन मंडल में
- 1:01:07गूंजती है। सहस्रार में तुम्हें कानों से
- 1:01:11लगता है सुनाई पड़ती है। कोई कहता है दाईं कोई कहता है
- 1:01:16पाएं किसी भी कान से तुम्हें सुनती नहीं है।
- 1:01:21यह कोई बिमारी नहीं है। यह तो उदगम स्रोत से उठती है नाभि
- 1:01:28के पास से जिससे अनंतनाथ कहार्शियों ने और यह हमारे गगन
- 1:01:33मंडल पे जा के गूंजती है सहसरा दलकमल में उसको खोलने में सहायक
- 1:01:39है बिना प्रयास के। तुम्हारा सहस्त्र दल कमल खिल जाता
- 1:01:44है, तुम्हारा दशम केंद्र खुल जाता है, तुम्हारे मंत्रों से नहीं
- 1:01:50खुलेगा। यह धुन से खुलेगा शब्द और सुरती
- 1:01:57का मिलान, यह शब्द ही गलत है। धुन और सुरती का मिला।
- 1:02:02ये तुम जब अनदनाथ में अपनी सुरती को जमा देते हो, तो ज़रा देखना
- 1:02:10कितनी मीठी सुगंध आती है। कितना खो जाते हो तुम?
- 1:02:16अपने आप को भुला देते हो तुम वही होता है समाधि का पर्व ईगोलेसनेस
- 1:02:23तुम्हें अपना देह वाहन समाप्त हो जाता है टाइमलैसनेस तुम्हें वक्त
- 1:02:29का पता नहीं चलता मेरे पास रोज़ मैसेज जाते हैं बाबा 4 घंटे।
- 1:02:36मैंने क्रिया योग किया दबा के दो घंटा उसके बाद योग निद्रा में चला
- 1:02:43गया आधा घंटा और वो आधा घंटा की योग निद्रा जो संतों ने कहा
- 1:02:49तुम्हारे नकली संतो ने थोड़ी सी नींद ले ले।
- 1:02:56उसी से तुम फ्रेश हो जाओगी। ये तुम्हारी साधारण नींद की बात
- 1:03:00थी ही नहीं, वो जानते ही नहीं। वो योग निद्रा की बात थी।
- 1:03:06अगर तुम योग निद्रा आधे घंटे की ले लो तो वह 4 घंटे की नींद के
- 1:03:12बराबर काम करे। लेकिन योग निद्रा का तुम्हें पता
- 1:03:17है कोई योग निद्रा सिखाने वाले हिप्नोटाइज करके तुम्हें कोशिश तो
- 1:03:22बहुत करते हैं। लेकिन एक बड़ा सरल फॉर्मूला बाबा
- 1:03:26ने बताया, मुझे और ध्यान रखना जो कीमती चीजें हैं उनका मूल्य नहीं
- 1:03:31होता। श्री श्री श्री श्री।
- 1:03:35रवि शंकर ने सुदर्शन क्रिया जो उस तथ तक पहुंचाती भी नहीं, उसके
- 1:03:46कोर्स के पैसे लिए जाते हैं। मैं तुम्हें कहता हूँ बाँट दो
- 1:03:51सारे जहाँ नहीं। क्योंकि परमात्मा ने हर बहुमूल्य
- 1:03:57चीज़ आपको मुफ्त में माही आती है। ये ऑक्सीजन जिसके बिना तुम क्षण
- 1:04:04भर नहीं जी सकते हो, पानी, धरती इसके बिना तुम ज्यादा दिन जी नहीं
- 1:04:11सकते। और परमात्मा ने कोई कीमत नहीं दी।
- 1:04:14यद्यपि तुम कीमत मांगते हो, इतना लाख रुपए एकड़, इतना करोड़ रुपए
- 1:04:20एकड़ तुम कीमत मांगते हो। परमात्मा से कोई कीमत नहीं मांगता
- 1:04:25और फिर भी तुम नई गालियाँ निकालते हो?
- 1:04:33शब्द और श्रुति का मिलान शब्द ही गलत है।
- 1:04:40शब्द तो तुम्हारे बनाए हुए हैं, शब्द लिपियों से आते हैं,
- 1:04:47लैंग्वेजेज से और लैंग्वेजेज खो खो जाती है।
- 1:04:55जो मोहनजोदड़ो हड़प्पा के वक्त लैंगुएज थी, उनको आज कोई पढ़
- 1:05:00पाएगा? लेकिन मज़े से बोली जाती थी, समझी
- 1:05:04जाती थी तो तुम्हारी लैंग्वेजेज भाषाएं खो जाएंगे, लेकिन दो नहीं
- 1:05:11खोएंगे। चौबीसों घंटे इसलिए निरंतर बजता
- 1:05:15है अनंतनाथ और तुम इसे बंद करके दिखा दो नहीं बंद होगा और बंद तुम
- 1:05:23करना भी क्यों चाहोगे इतना प्यारा नाथ मिठास से लिए हुए।
- 1:05:32यही तो कहा गोरख ने मरो है जो की मरो मरो मरण है मीठा यह नाद भी है
- 1:05:41का उस स्थान पे पहुँच जाओगे जहाँ उदगम सतल है अनंतनाथ का और बड़ा
- 1:05:48मीठा है। रसधार बहती है।
- 1:05:50शहद किसी अमृत किसी जो तुम्हें अमर भी कर जाती है और एक विलक्षण
- 1:05:59सुगंध और रसास्वादन भी करा देती है उसका स्वाद।
- 1:06:06वर्ण नहीं किया जा सकता ताकि यहाँ गला कतिया ना जाए तो ध्यान रखना।
- 1:06:14जिनके आनंद नाद शुरू हो गया वो आनंद नाद को सुन्न सुरती ज़माना
- 1:06:22उसमें बस। इसे ही धुन और सुरती का मिलन कहा
- 1:06:29जाए। शब्द शब्द को बाहर निकाल दो, भूल
- 1:06:32जा वैसे यह तुम्हें भ्रमित करता है शब्द सुरती का मिलान कभी हो ही
- 1:06:37नहीं सकता शब्द सुरती का मिलान होता है चीजों की स्मृति के लिए
- 1:06:43जैसे। तुम कहो अमरूद तो तुम्हें फौरन
- 1:06:48अमरूद की शक्ल याद आई तुम कहो अनार तुम्हें फौरन अनार की स्मृति
- 1:06:55आई। शब्दों में तो चीजों की स्मृति आ
- 1:07:00सकती है। उस अज्ञात की नहीं तुमने समृद्धि
- 1:07:08करनी है रिमेम्बर, करना है उस अज्ञात का, जिससे तुम भूल गए हो।
- 1:07:16दुर्भाग्यवश शब्द तुम्हें चीजों को याद करने में सहायता दे सकते
- 1:07:23हैं। जैसे तुम मलमूत्र को शब्दों में
- 1:07:26कहोगे तो तुम्हें मलमूत्र की याद आ जाएगी, वह साकार रूप में आ
- 1:07:31जायेगा। तुम्हारे सामने जैसे तुम अशिष्ट
- 1:07:35भाषा का इस्तेमाल करोगे तो वह तुम्हारे सामने एक आकार लेकर खड़ी
- 1:07:40होगी। शब्द आकारित चीजों को समृति में
- 1:07:48ला सकता है निराकार को समृति में नहीं ला सकता निराकार को कौन
- 1:07:56लाएगा धुन तो याद रखना शब्द शक्ति को भूल जाओ।
- 1:08:05हमें वो सभी शब्द मिटाने होंगे जो किसी कालखंड में समझे जाते थे,
- 1:08:12लेकिन आज उनका मतलब समझ नहीं आता। आज हम सूख जाते हैं, भ्रमित हो
- 1:08:20जाते हैं। शब्द सुस्ती का बना नहीं शब्द तो
- 1:08:25लिपियों का एक वर्णमाला है। ए आइई, ई, ए, बीसी, डी कखा, खखा,
- 1:08:36गग्गा कग्गा या है ना? वह तुम्हें किस चीज़ का याद करता
- 1:08:43है? तुम कहो सेब सेब की आकृति तुम कहो
- 1:08:49परमात्मा बताओ किसकी याद आएगी बताओ एक ही चीज़ की याद नहीं है।
- 1:08:59जो परमात्मा दुर्गा को मानता है वो उसकी आये जो परमात्मा किसी
- 1:09:04विष्णु को मानता है उसकी आयेगी लेकिन ये तो तुम्हारे बनाए हुए
- 1:09:08हैं, शब्द भी तुम्हारे बनाए हुए हैं।
- 1:09:12शीतला माता को अब देख किसी ने सही शीतला माता को गधे पे बिठाया।
- 1:09:20मैं कहता हूँ चित्रों की माला वोट डाल दो, यह बेईमानी के पखंड के
- 1:09:30लोभ के तुम्हारी बुद्धियों को भ्रमित करने के लिए लूटने के
- 1:09:37तंत्र हैं। ये लूटेरे हैं?
- 1:09:41मेरी माता कैसी है? गुड़गांव वाली माता के जाके बाल
- 1:09:50देख आओ, मैंने कहा क्यों उसने क्या योगदान दिया बच्चों को पैदा
- 1:09:55करने में योगदान तो हमारा मियाँ बीबी का?
- 1:10:01अब गुर्गा में आली माता का लगती है तो मैं थोड़ा सा रुका, बोला
- 1:10:08माँ कहती ना ना माफी मांग लूँ, मैं किस्से मांग लूँ जो है ही
- 1:10:12नहीं उससे मांग लूँ तू 76,00,000 के दे मैं भगो के मारूंगा उसकी
- 1:10:20टाट में। तो मत त की वस्तु और मत बोल वो
- 1:10:25डरती थी बिलकुल डृत्य हो तुम अज्ञान डर का जन्मदाता है उलट मैं
- 1:10:36बोलता हूँ तुम्हारे पित्रों के उलट मैं बोलता हूँ तुम्हारे।
- 1:10:43तथाकथित पीरों के टाँगें तुम्हारी कब बती हैं?
- 1:10:55तुमने तो थपेड़ों तक को नहीं बख्शा।
- 1:10:58तुम तो कहते हो यह तो दंड देवता है, इसकी पूजा करो, दंडवत हो जाओ
- 1:11:06यह तो खेतपाल जी महाराज है, मैंने कहा फिर लाओ खितर और कुण्डी लेकर
- 1:11:16आओ। इसको तो आज सुल्झ ही लें तो फिर
- 1:11:23हाथ जोड़ लेते हैं। अरे बाबा तुमसे कौन जीते?
- 1:11:28मैंने कहा वो ही जीते जीसको तुम पूछते हो उसी को भुलाओ न जीस देश
- 1:11:34में विद्या को सरस्वती माता के रूप में।
- 1:11:38पूजा जाता है और धन को लक्ष्मी माता के रूप में पूजा जाता है।
- 1:11:44वह देश ना तो पढ़ पाएगा ना ही कभी समृद्ध हो पाएगा।
- 1:11:49क्यों? क्योंकि तुम वक्त गुजारते होगे,
- 1:11:53पढ़ाई में नहीं। सरस्वती की पूजा करता।
- 1:11:58पढ़ाई में नहीं लक्ष्मी की पूजा करने नहीं, सुनूंगा नहीं, सुनूंगा
- 1:12:13नहीं सुनूंगा जो उनकी। तमन्ना है बरबादु होजा जिसने
- 1:12:27फ़िल्म देखी वह हर पर भावनाओं के उद्वेग में घिरता रहा।
- 1:12:39ऐसे ही तुम अगर आना पान करोगे अगर तुम विपश्यना करोगे, तुम हर पल
- 1:12:51कपते हुए देखोगे अपने आप। सौभाग्यशाली होगे।
- 1:12:56अगर तुम यह भेद पहचान गए 121 पहले तो बस तुम ही होते हो सब कुछ मैं
- 1:13:04हूँ तो मुमकिन है फिर तुम दो हो जाते हो, वो विपश्यना से दो हो
- 1:13:10जाओगे, फिर तुम्हें दिखेगा नहीं। मैं कुछ और हूँ।
- 1:13:16सब्जेक्ट और दिखने वाला ऑब्जेक्ट इस समथिंग एल्स कबीर की उल्टबांसी
- 1:13:25क्या है? कबीर की उल्टबांसी यही?
- 1:13:33सभी संतों की उलट बासी होती है क्योंकि सीधे सीधे शब्दों से वह
- 1:13:39बोला नहीं जा सकता। ही कैनट बी एक्सप्रेस्ड इन वर्ड्स
- 1:13:45हिज़ बियॉन्ड वर्ड्स, तो फिर। फिर अन्य स्त्री के प्रयोग करने
- 1:13:53पड़ते हैं उसको उल्टवासी कहते हैं कबीर एक अजूबा हमने देखा जल में
- 1:14:02रहकर मेन हैं पैसे उल्टवासी। तुम सारा कुछ देख लेते हो, सारा
- 1:14:12दृश्य फ़िल्म देख लेते हो दी एंड आ जाती है लेकिन मुझे एक बात
- 1:14:17बताओ। आग लगी थी ना लगी थी परता क्यों
- 1:14:22नहीं जला शेर गरजा था ना गरजा। पर्दा क्यों नहीं बहकाया पर्दे को
- 1:14:31फट जाना चाहिए। इतना कर्जा था सारा जंगल कर्ज
- 1:14:38क्या था तू? फंग आया भयंकर बड़े बड़े पेड़
- 1:14:45उखड़ गए सब। वक्त फ़िल्म देखी आपने देखना
- 1:14:51कितना भयंकर तूफान सब उजड़ गया लेकिन जीस पर्दे पे वो फ़िल्म
- 1:14:58दिखाई गई। वह समूचा वैसे ही निकला।
- 1:15:04श्वेत सक्रीन सिल्वर सक्रीन सब घटना घटने के बाद ही जो यथास्थिति
- 1:15:13बना रहे, वह तुम्हारा अस्तित्व है, जिसकी संत बात करते हैं।
- 1:15:20इस पर्दे के ऊपर सारी घटनाएं घटती हैं और जो घटनाएं घटती हैं।
- 1:15:26वो तुम्हारी इछिता के बुद्धि के पटर पर घट अगर तुम कोना में होते
- 1:15:36हो तो तुम्हें नहीं पता चलता। अगर तुम जागृत होते हो तो तुम्हें
- 1:15:44पता चलता है हर घटना का। लेकिन सारी घटनाओं को घट जाने के
- 1:15:52बाद जो शेष बच जाता है और जिसे पता भी होता है कि यह कुछ हुआ
- 1:16:01लेकिन उसके ऊपर ज़रा भी आंच नहीं आती।
- 1:16:07नैनम दाहती पावका वह कटता नहीं नैनम छिदंती शास्त्रण।
- 1:16:24कोई तूफान उसे उड़ा के नहीं ले जाता, कोई बार उसको बहा के नहीं
- 1:16:31ले के जाता ना चैनम कलेदन त्यापो ना सोस्रति मरोता कौन है वो
- 1:16:40फ़िल्म में सब कुछ नटा हाथ भी लगी, तूफान भी आया, बाढ़ भी आई,
- 1:16:47सब आया लूट उठ गया सब कुछ ढय ढेरी हो गई बड़ी बड़ी मंजलें भूकंप भी
- 1:16:55आई लेकिन क्या था वो जो इन सब के बावजूद?
- 1:17:02बचा रह गया। समूचा वो वही था जिसके ऊपर सारी
- 1:17:11घटनाएं घटीं और वो तुम हो तुम्हारा अस्तित्व है।
- 1:17:19जो सब घटनाओं के घटने के बाद समूचा बच जाता है।
- 1:17:24शीश इसे ही कहा गया पूर्णमदह पूर्णमदम पूर्णमद पूर्णमदचते
- 1:17:32पूर्णस्य पूर्णमयवा विशिष्यते। वह पूर्ण ही बच जाता।
- 1:17:38तुम कितना ही निकाल लो उसमें अवसार रूप में सुनो जिसने देखा
- 1:17:48सारा दृश्य वह थी तुम्हारी बुद्धि वह प्रभावित हुई उसने वह भी खाया।
- 1:17:59उसने विनाश के वो दृश्य भी देखे, मिलन के बिछुड़ने के के सब दृश्य
- 1:18:10देखे और भाभी उत्पन्न हुए इमोशन्स भी आये।
- 1:18:14लेकिन एक तत्व ऐसा था जिसके ऊपर सभी कुछ चल रहा था और वह सब चीजों
- 1:18:22का साक्षी था, निहार रहा था और सब उसके ऊपर ही चल रहा था।
- 1:18:29लेकिन फ़िल्म दी एंड वी। तो तुमने देखा ना तो आग लगी, ना
- 1:18:36तूफान का कोई असर हुआ ना बाढ़ का कोई असर हुआ ना ही शस्त्र उसे काट
- 1:18:45सका। तलवारें बहुत ही चली।
- 1:18:47महाभारत के युद्ध बहुत हुए उस स्क्रीन के ऊपर।
- 1:18:51लेकिन परदे को ज़रा भी खरोंच नहीं आती आती है।
- 1:18:55नहीं आती इसे ही कहा। कृष्ण ने हे अर्जुन सतिप्रज्ञ हो
- 1:19:05जा उस पर्दे में छाजा। उसमें स्थित हो जा वो पर्दा ही
- 1:19:13तुम्हारी प्रज्ञा बस तू पर्दा ही हो जा सब घटनाओं को घट जाने दे,
- 1:19:26ठहर जाने दे ठहरेगी। जब तक मूवी जलेगी।
- 1:19:31और तुम अपने आप में स्तिप्रज्ञ हो जाओ तो युद्ध साढ़े सतारा दिन चला
- 1:19:39और अर्जुन स्तिप्रज्ञ रहा कोई मर गया, उसने आंसू नहीं बहाया कोई जी
- 1:19:46गया उसने खुशी नहीं मनाई। वह स्थिति प्रज्ञाता में ही रहा।
- 1:20:00वह कौन सा तत्व है जिसकी बात कृष्ण करते हैं?
- 1:20:04कबीर के उलट वासी। नानक, मीरा किसकी बात करते हैं,
- 1:20:13उसी की बात करता है जो सबका साक्षी होता हुआ भी निर्लिप्त है।
- 1:20:23सब उसके ऊपर घटता है। और असर नहीं होता।
- 1:20:31मनरेह तू काहे न धीरूझ? मोह न जाने जिनका मोह करे मनारे
- 1:21:05तू काहे ना भी। रधर उतना ही उपकार समझ कोई जितना।
- 1:21:25साथ निभा दे जन्म मरण का खेल है सपना।
- 1:21:40ये सपना बिसरा दे कोई न संग मर मनरे तू का है न?
- 1:22:00दीरधर जिर निरमही मोह न जाने जिनका मोह कर।
- 1:22:20इसे कोई मोह नहीं सकता। इस पर्दे को इस पर्दे को कोई
- 1:22:27ईर्ष्या नहीं होती। इस पर्दे को कोई भय नहीं होता।
- 1:22:33इस पर्दे में कोई वैर नहीं होता। इस पर्दे में कोई भेद नहीं होता,
- 1:22:44ये जलता नहीं, ये गलता नहीं, यह सूखता नहीं, यह भीगता नहीं, यह
- 1:22:52उड़ता नहीं। यह यथास्थिति में बना रहता है, हर
- 1:22:57हाल में बना रहता है तो इस स्थिति में क्या करें?
- 1:23:02वहाँ तक कैसे पहुंचे? आइए हम लास्ट पहलू पे चर्चा कर
- 1:23:09रहे हैं। जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा,
- 1:23:22जो वह चाहता है तो बर्बाद हो जा क्योंकि बर्बाद होकर भी तेरा कुछ
- 1:23:30गधेगा। जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जा
- 1:23:39और तू अगर उससे लड़ेगा तो तू जीत नहीं पाएगा, क्योंकि तू क्षुद्र
- 1:23:45है वह विराट तू। ए दिल मोहब्बत की किस्मत बना दे
- 1:23:57तड़कपुर तड़प कर अभी ही जान दे दे।
- 1:24:06मरो हे जोगी मरो। मरो मरण है मीठा ऐसी मरनी मरो जीस
- 1:24:13मरनी मरगोर। कढ़ी ट तड़पुके तड़पुके अभी जान
- 1:24:23देते। तड़प तड़प के अभी जान दे दे जो
- 1:24:33मरते हैं मर जाने वाले दिखा दे जो उनकी।
- 1:24:44तमन्ना है बरबाद हो जा जो उनकी तमन्ना है बरबाद हो जा तू ए दिल
- 1:24:59मोहोबत। के किस्मत बना दे फिर तेरी किस्मत
- 1:25:05बन जाएगी तो अगर उसकी रजा में रहेगा फिर तेरी किस्मत बन जाएगी
- 1:25:17यही तरीका बनाने को। छंद की कसाथ निभाता चला गया।
- 1:25:29जो भी कुछ होता है उसको मंजूर कर लो फ्रम दी इन्नर कोर ऑफ युअर
- 1:25:35हार्ट। बस यही है तरीका तुम्हारे सब
- 1:25:47तरीके विज्ञान भैरव तंत्र पे सब बेकार है।
- 1:25:58मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया।
- 1:26:05मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया।
- 1:26:12हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला गया।
- 1:26:22बर्बादियों का शो मनाना फिजूल था, बर्बादियों का शो मनाना फिजूल था,
- 1:26:39मनाना फिजूल था। बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया
- 1:26:49बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया।
- 1:26:57मैं जिंदगी का साथ निभाता। चला गया जिंदगी तुम्हें जो भी
- 1:27:05दिखला है व्हाटएवर सर्कमस्टैंसेस इस आर उसका साथ निभाओ, उसे मान लो
- 1:27:18फ्रॉम दी एनर। और ऑफ युअर हार्ट अपने दिल के
- 1:27:27आंतरिक छोर से मान लो खोपड़ी खोपड़ी से मत मानो वो तो पराजय
- 1:27:33होती है, वो तो तसल्ली होती है सिर्फ।
- 1:27:40लेकिन तुम मान लो ऐसा ही था। ऐसा ही होना था और ऐसा ही होना था
- 1:27:49या मैं देख के बोलता हूँ तो बर्बादियों का शोक मनाना फजूल था।
- 1:28:00बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया जब तुम इस मरहले पे आके के
- 1:28:07बर्बादी के भीतर ही तुम आबादी चुन लो कि हम तो आबाद हुए आज ही तो
- 1:28:17फिर तुम सही जगह पे हो। इसे ही कहते हैं स्थिति प्रगति
- 1:28:25जैसे कृष्ण ने कहा हे अर्जुन, हे पार्थ तू कांप मत, तू कांप ना तू
- 1:28:35डर के मारे जो कांप रहा है। कार्यपंड्य दोषों पर स्वभाव
- 1:28:40परिक्षामितवाम धर्म समूह विजेता जश्निश्चितमरो हितमय शिष्य से अहम
- 1:28:48शादीमामतुम पर पनमा तो मुझसे पूछा है रिश्ता?
- 1:28:55तो रस्सा यही है कि तुम अपनी प्रज्ञा में स्थित हो जा, ये ले
- 1:29:00मैं तेरे ऊपर शक्ति बात करता हूँ और शक्ति बात को तू स्वीकार कर
- 1:29:06लेना। तू कोई हील हुजत मत करना और
- 1:29:11अर्जुन चलाए नहीं विवेकानंद की तरह।
- 1:29:16विवेकानंद चलाया, अर्जुन नहीं चलाया, यद्यपि उसी जगह पे गया
- 1:29:21जहाँ विवेकानंद गए थे। अर्जुन ने कहा मेरे भाई हैं, मेरी
- 1:29:27माता है नहीं कहा उसने अर्जुन ने शहर से स्वीकार कर लिया उसे।
- 1:29:34और स्थिति प्रज्ञता में ठहर गया जाग यद्यपि यह दशा क्षणिक होती है
- 1:29:42यानी थोड़े दिन के लिए 17.5 दिन तक रोकी युद्ध का अंत होते ही
- 1:29:50भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी वह शक्ति खेंची।
- 1:29:57जो संजय को दिव्यदृष्टि दी थी, वेध व्यासी, वह अधूरा था, वह
- 1:30:06तुम्हारा उपार्जन नहीं था, वो उधार किसी ने तुम्हें दिया था।
- 1:30:15फिर कृष्ण अर्जुन से खींच लेते हैं।
- 1:30:19साढ़े सारे दिन बाद जब युद्ध समाप्त हो जाता है, 2 दिन की
- 1:30:23मृत्यु हो जाती है, फिर अर्जुन उसी रूप में आ जाता है जैसा वो
- 1:30:30था। अगर तुमने उसकी रजा में रहना सीख
- 1:30:37लिया तो फिर तुम्हारी ज़िन्दगी बन गई अन्यथा बिगड़ गई जो उनकी
- 1:30:46तमन्ना है। बर्बाद हो जा जो उनकी तमन्ना है
- 1:30:57बर्बाद हो जा तू ए दिल मोहब्बत की किस्मत तू बना दे।
- 1:31:08नहीं तो बदकिस्मती रह जाएगा जो उनकी तमन्ना है बर्बाद हो जाए।