Latest / Baba ji Vijay Vats / 2 Mar 25 - असली मैं और नकली मैं में क्या फर्क है? क्या धार्मिक होना भी दुख देता है?
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- 0:03भरत प्रसाद बाबा जी चरन स्पर्श आपने दो मय का जिक्र किया एक असली
- 0:20में। और एक बनावटी में थोड़ा विस्तार
- 0:28करने का कष्ट करेंगे। नकली में तो तुमने बनाया असली
- 0:45में। जो शुरू से है आध सच जुगाद सच है
- 0:52भी सच नानक होश भी सच जो सर्दा से है, जिसे हम सनातन कहते हैं।
- 1:07सनातन कोई धर्म नहीं है। सनातन उस अस्तित्व का नाम है जो
- 1:16सदाशिव है। हमने धर्म बना लिया, यह बात अलग
- 1:27है। सनात्मक धर्म से उस असली में का
- 1:34कुछ लेना देना नहीं ये जो आपने धर्म बनाए, ये संप्रदाय कह सकते
- 1:44हैं जैसे पार्टी? बस ये पार्टियां हैं हिंदू,
- 1:51मुसलमान, सिख, साईं योग राजनीतिक पार्टी हैं।
- 1:57सच में रंगत दे देते हो तुम धर्म के?
- 2:13एक लक्षण सुन लेना जब तक नकली में है, तब तक तुम दुखी रहोगे।
- 2:29नकली में एक विजातीय द्रव्य की तरह है फॉरन मडिर्ग।
- 2:36और डॉक्टर रोग अच्छी तरह से जानते हैं के फॉरेन मटेरियल विजाती अदरक
- 2:42व्यय हमेशा दुख देता है। तुम सवस्थ हो, बिलकुल सही चल रहे
- 2:51हो। पैर में काँटा चुप गया।
- 2:55वह काँटा बिजाती अद्रव्य है। फौरन मटेरियल वह जब तक निकलेगा
- 3:04नहीं तो में चैन नहीं आएगा। बस ऐसे ही नकली में बिजाती
- 3:11अद्रव्य है, फौरन मटेरियल है। तो कृष्ण भगवान कहते हैं कि जब तक
- 3:19यह फौरन मटेरियल निकलेगा नहीं तो मैं चैन कहाँ हूँ?
- 3:27तुम दुखी रहोगे, नकली में की पहचान है।
- 3:35नकली मैं के रहते रहते तुम सत्य में जो सुख होता है, जिसे संत
- 3:45कहते हैं आनंद वो नहीं मिलेगा आपको।
- 3:53यह नकली में कुछ भी जुटा लें। विद्या, कलाएं, धन, संपत्ति,
- 4:03पदवी, प्रतिष्ठा, सौंदर्य कुछ भी जुटा लें द्रव्य।
- 4:12सुख सुविधा के साधन जब तक नकली में है तुम पूछते हो ना कि मैं
- 4:26दुखी क्यों हूँ रहस्य प्रश्नों का जवाब।
- 4:33अरे, प्रत्येक प्रसंग में आपको मिल जाएगा एक प्रसंग के ऊपर शायद
- 4:41मैं कभी बोला हूँ बहुत से प्रसंग को इकट्ठा करके मैं बोलता हूँ।
- 4:50इसलिए वीडियो लंबी हो जाती है। आप समते हो एक ही एक ही प्रसंग पे
- 4:55बोला मैंने बहुत प्रसंगों पे बोला और जितनी आपने सुनी बाकी आप चुक
- 5:02गए बाकी भी प्रसंग थे उनके फिर आप सवाल करोगे फिर फिर से?
- 5:10जिन प्रश्नों के जवाब मैंने दे दिए उस वक्त में जो आपने सुने हैं
- 5:15वो प्रश्न आपके करेंगे नहीं, वो गुंडियां उलझी की उलझी रह जाएंगे।
- 5:28फिर फिर से इसलिए तो लोग सवाल पूछते हैं और मैं अच्छी तरह से
- 5:37जानता हूँ कि मैं इनके जवाब दे चुका हूँ।
- 5:43कई बार मुझको खुद भ्रम हो जाता है, ये बात अलग है।
- 5:49क्योंकि बातें इतनी इंटरमिंगल हैं कि किस बात का कैसे जवाब में
- 5:55घूमा, फिरा के दे गया, वह सब ओल्ड हो जाता है, सब पता नहीं चलता
- 6:01मेरे को मैं किस बात का जवाब कैसे दे गया?
- 6:09नकली में जब तक रहेगा इसका लक्षण है तो तुम दुखी रहोगे।
- 6:17सुखी कैसे हो गए? जब नकली में मिट जाएगा तब जो शेष
- 6:26रह जाएगा। वह मिटता नहीं और उसी को भगवान
- 6:34कृष्ण कहते हैं कि जो मिटता नहीं वह असली में है और उसी को भगवान
- 6:41कहते हैं कि तू मेरी शरण में आजा। असली में नकली में से बोल रहा है
- 6:51कि तू आत्मसमर्पण कर दे, तू हार जाएगा आखिर, क्योंकि तेरा होना ही
- 6:58दुख देगा और दुख कोई भी प्राणी चाहता।
- 7:07दुख और दर्द कौन चाहता है? सुख और संपत्ति सभी चाहते हैं सुख
- 7:16और ऐश सभी चाहते हैं कृष्ण कहते हैं।
- 7:25इस दुख देने वाले मैं को तू अर्पण कर दे, मुझे अब मजबूरी है।
- 7:35बादशाह की समझाएं भी तो समझाएं कैसे?
- 7:43भाषा को ही लेना पड़ेगा समझाने के लिए और भाषा के अलग अलग अर्थ होते
- 7:52हैं और कई बार तो विपरीत अर्थ होते हैं।
- 8:01इसलिए आपकी समझ में नहीं आता यह स्भाविक है, आपका कसूर नहीं है
- 8:07इसमें क्योंकि आप भाषा के द्वारा समझने का प्रयास करते हो और भाषा
- 8:17का अलग अलग अर्थ है। कृष्ण कहते हैं कि तुम नकली मैं
- 8:25को मेरे अर्पित कर दे। कृष्ण कहती हैं, अपने दुख मुझे दे
- 8:31दे, मैं तुम्हें असली सुख दे दूंगा।
- 8:39तू असली दुख मुझे दे दे, मैं तुम्हें असली सुख दे दूंगा
- 8:46सर्वधर्मणा प्रताज और दुःख क्या है?
- 8:49धर्म दुख है, चौंक मत इस धर्म ने। बड़े बड़े वीर वीर गति को
- 9:02पहुंचाती है। जमाने निमा रे जवान कैसे कैसे?
- 9:22जमी खा गई आसमान कैसे कैसे जमाने ने मारे।
- 9:38जमा कैसे कर जमीन खा गई आसमान कैसे कैसे ये तुम्हें जमीन तो
- 9:55दिखती है। आसमान तो तुम्हें दिखता नहीं कहाँ
- 10:00दिखता है आसमान ढूँढोगे तो पाओगे नहीं तुम्हें लगता है थोड़ी दूर
- 10:08जब गाड़ी में बैठे होते हो कहीं दूर धरती से आसमान मिल रहा है,
- 10:16लेकिन मिलता कहीं भी नहीं। आप आगेआगे चले जाओगे, धरती से
- 10:21आसमान कहीं नहीं मिलता, बस ऐसा ही नजारा है नकली मैं का और सुख का
- 10:32नकली मैं सुख कभी नहीं देता। सुख मिलता है।
- 10:38असली मेस कृष्ण के कहने का एक्सट्रैक्ट क्या है, रस क्या है?
- 10:50जिसे उपनिषद ने कहा रसो वैसा उसका रस पीरो रस क्या है?
- 11:00तुम वह हो जाओ, वह मैं हो जाओ जैसे कृष्ण कहते हैं कि जिसके
- 11:10अर्पण हो जाओ। नकली मैं दुख दका नकली मैं को
- 11:22अहंकार कहते हैं हमारी भाषा में इलूशन कहते हैं, नकली मैं मिथ्या
- 11:29है, वो है नहीं ब्रह्म है। असली में सत्य है नकली में कभी
- 11:41पैदा हुआ था। यह भ्रम कभी पैदा हुआ था?
- 11:44मैंने पत्थर से भगवान तक की यात्रा में बताया।
- 11:47कैसे पैदा हुआ? नकली में कभी पैदा हुआ था और कभी
- 11:58विलीन हो जाएगा नकली में बढ़ता गया बढ़ता गया बढ़ता गया देही का
- 12:04रूप में गया और 1 दिन देही विनष्ट हो गया भ्रष्ट हो गया फूट गया
- 12:13गुब्बारा। जो नकली हवा थी वो निकल गई है
- 12:17टाइम टाइम फिश नकली में का ये हाल है नकली में दिखावा है असली में
- 12:30दिखावा नहीं है। असली में होना है ये फर्क है नकली
- 12:39में और असली में नकली में को तुम बनाते हो भूल से बनाते हो, ये बात
- 12:50अलग है। लेकिन नकली में के निर्माता तुम
- 12:57हो और असली में का निर्माता वो सर जीना है और अच्छा हीता है।
- 13:10परमेश्वर है पर वर्दीगार है, वह असली में है और यही कहते हैं
- 13:21भगवान कि तू नकली मैं को छोड़ दे मेरे चरणों में छोड़ दे।
- 13:31और मैं तुम्हे असली मैं को उपलब्ध करवा दूंगा अहम तो आम सर्व पापि
- 13:39भव मोक्ष श्यामि मासूच नकली मैं पाप है तू जब नकली मैं को।
- 13:51देखिये भाषा की मजबूरी है, समझने की चेष्टा करना न समझाये बार बार
- 13:56समझना नकली मैं को असली मैं के चरणों में समर्पित करता है।
- 14:09नकली में की पहचान वह दुख देगा जैसे जब तक काँटा बड़ा रहेगा, चस
- 14:17चस करता रहेगा और अगर तुमने जल्दी नहीं निकाला तो मबाद बढ़ जाएगी।
- 14:25और अगर तुमने और देर कर दी तो मवाद गहरी हो जाएगी और अगर तुमने
- 14:31और देर कर दी तो हो सकता है आपका वो अंग काटना पड़ जाए।
- 14:41बस यही है कहानी। अध्यात्म की और संसार के कांटा
- 14:49चुभा था। इन्फेक्शन दे गया, मबाद पड़ गई
- 14:58बैक्टीरियल इन्फेक्शन बढ़ता गया, मबाद बढ़ती गई।
- 15:05तुमने वो कांटा निकाला नहीं और आज वो बढ़कर मेहत फोड़ा बन गया।
- 15:21कैन्सराइज्ड हो गया, गैंगरेीन हो गया।
- 15:27अब ये अंग काटना पड़ेगा, अहंकार बढ़ गया।
- 15:32कृष्ण कहते हैं इसको काट दो, ये अहंकार का है जिससे तुम धर्म कहते
- 15:40हो। बड़े मज़े की बात है, मैं रोज़
- 15:44बोलता हूँ। धर्म को कोई नहीं छोड़ता, धर्म को
- 15:52नहीं छोड़ने का अर्थ अधर्म में ही जीते रहना और 5000 साल पहले कृष्ण
- 16:02बोले। तो धर्मों की बनावट में मत फंस और
- 16:12राजनीतिज्ञ इसका बड़ा सुन्दर इस्तेमाल करते हैं।
- 16:15धर्मों का, झूठ के बल पर धर्म खुद एक झूठ।
- 16:29दुःख है, काँटा है विजाति या द्रव्य है फोर इन मटेरियल है इसको
- 16:36निकालना ही सो टेढ़े मेढ़े अर्थ कर लेते हो ये तथाकथित ज्ञानी
- 16:46लोग? जिनको आनंद का दर्शन भी नहीं हुआ।
- 16:52विलीन होना तो बहुत दूर की बात है।
- 16:57वह गीता के रहस्यों का पदार्पण करते हैं।
- 17:02उजागर करते हैं। और इनके चेहरों पर कोई खुशी का
- 17:08लक्षण दिखाई नहीं पड़ता। इनके चेहरे पर साहस का लक्षण
- 17:13दिखाई नहीं पड़ता। ये डरपोक लोग हैं, बात करते हैं
- 17:20कृष्ण की जो परम साहस के प्रणेता है।
- 17:27जो कहते हैं काट दे इनको नकली में तुम्हें दुख देखा है अगर रस रूप
- 17:46में देखा जाए तो तुम भी दुखों से उकता गए हो।
- 17:58तुम भी इस दुख से मुक्त होना चाहते हो?
- 18:03रोज़ मुझे सवाल आते हैं, बाबा दुखी, मुक्त होना चाहता हूँ,
- 18:12मुक्त होना चाहती हैं। मैंने कहा क्यों दुखी क्यों हो
- 18:27बाबा ये मेरी लड़की बीमार है, ये मेरा लड़का बीमार है, मेरे कहे
- 18:33में नहीं चल रहा। शाम को दारु पी किया जाता है,
- 18:44झगड़ा करता है। मैंने लाख समझाने की चेष्टा की,
- 18:49तुम्हारे पास ले आऊं। मैंने कहा ले तो आओ, कोई बात नहीं
- 18:54है, लेकिन दारु पीना। उसका एक संस्कार बन के आया है।
- 19:08इतने वर्षों से पी रहा है। एक बार मेरे पास आने से क्या
- 19:12होगा? कोई योग तो लगा हो दारु छुड़ा दो
- 19:18इसकी धीरे धीरे और जश्न ये उकता गया उस सन खुद ही छोड़ देगा यही
- 19:33तो अष्टावकर कहते हैं। अगर तुम्हें संसार में सुख नज़र
- 19:41आता है तो भाई अच्छी तरह से जप ही डाल लो इसको संसार को भोग ही तो
- 19:51क्या होगा? परिणाम बहु परिणाम जो बुद्ध को
- 19:56हुआ। तुम्हें हो जाएगा।
- 20:04बुद्ध ने अच्छी तरह से भोग लिया। 29 वर्ष की उम्र तक वो बोर हो गए
- 20:11थे। हैरानी होगी तुम्हें दुख से बोर
- 20:17नहीं हुए थे, सुख से बोर हो गया। और तुम्हें आज भी अजूबा लगता होगा
- 20:25जीस सिंहासन की फिराक में हम पड़ते हैं जनता से झूठे वायदे
- 20:32करते हैं पूरा नहीं होता 2,00,00,000 रोज़गार देंगे।
- 20:38अच्छे दिन आएँगे। तुम्हें पता नहीं हम क्यों करते
- 20:44हैं? ये मुर्शीत लोग हैं।
- 20:59तुम वायदा करते कहाँ हो? तुम खुद दुखी लोग हो, सुखी
- 21:11व्यक्ति। ऐसे ऊंट पटांग काम नहीं किया
- 21:17करता। राजनीति जैसा है।
- 21:22सुखी व्यक्ति सिर्फ एक काम करता है।
- 21:25सुखी व्यक्ति एक मंत्र जानता है, जियो और जी ने दो।
- 21:35लेकिन क्योंकि तुम सुखी नहीं, इसलिए तुम 1000 रास्ते खोजते हो।
- 21:43एक झूठ 1000 झूठों को जन्म देता हूँ, क्योंकि झूठ तो झूठ ही होता
- 21:50है। उबड़ जाएगा पक्का पता है और कोई
- 21:56नहीं जानता। तुम तो जानते हो और अगर तुम
- 22:03नास्तिक हो तो ठीक अगर आस्तिक हो तो इतना तो सोचो कि दो आँखें
- 22:08तुम्हें लगातार निहार रही हैं। तुम कर क्या रहे हो?
- 22:16आस्तिक को भी न आरती है, आस्तिक को भी न आरती है, तुम्हारे
- 22:21प्रत्येक कृत्य का वह साक्षी है, हर पल हर क्षण तुम्हारी खोपड़ी
- 22:30आस्तिक है। कोई नास्तिक है उससे कुछ लेना
- 22:33देना नहीं। वह बहुत गहरे में बैठा हुआ
- 22:37तुम्हारा हर पर निरीक्षण करता है। वह कभी सोता नहीं, यही कृष्ण कहते
- 22:44हैं, जब तुम्हारा संसार सोता है तो मेरा योगी।
- 22:50जो मेरे में युक्त हो गया। योगी जो योग हो गया मेरे साथ मिल
- 22:57गया, वह जागता रहता है, उस तत्व की तरफ इशारा है।
- 23:09एक दिया मेरे प्राण जलत है जो जगत दिन रेन एक दिया मेरे प्राण जलत
- 23:18है जो जगत दिन रेन दिन भर रात उसका ईंधन कभी खत्म नहीं होता।
- 23:28तुम क्या समते हो, इस सृष्टि का इंजन खत्म हो जाएगा।
- 23:36कहाँ से आया, किसने बनाया और तुम्हारी छोटी सी खोपड़ी जवाब दे
- 23:46देती है। और तुम उकता के कह देते हो तुम है
- 23:50ही नहीं। यह उसकी विशालता का प्रतीक है कि
- 24:01तुम उसकी विशालता को विराटता को देखकर।
- 24:05इतने शुद्ध हो जाते हो कि तुम कहते तो है ही नहीं।
- 24:11भला ऐसा कारीगर कहाँ होगा, किसने बनाया होगा?
- 24:16इतना सटीक इतना मटेरियल कहाँ से लेके आया होगा बस यही?
- 24:27यही मुश्किल है जो तुम्हारे मन में अटकी रहती है यही काँटा है
- 24:34लेकिन भक्त कहता है तू है या नहीं है?
- 24:41हम तो तुझे दिल दे बैठे सनम अब तो जान ही जाएंगे मेरी है तमन्ना।
- 24:59तेरे घर के सामने मेरी जान जाए, मेरी जान जाए।
- 25:18मेरी है तमन्ना, तेरे घर के सामने मेरी जान जाए, मेरी जान जाए।
- 25:37हाय मेरी है तमन्ना वह है के नहीं है, तुम कभी पार नहीं पा सको कर
- 25:53इतना ही सोच लिया होता इस अशुद्र बुद्धि से।
- 26:00उस विराटतम को जीसको मापता ही नहीं जा सकता।
- 26:06वो कितना है उसका आगाज उसका अंत उसका मत तो नहीं जान सकते।
- 26:18इतना ही जब तुम नहीं जान सकते तो वह कैसे बना?
- 26:22उसने बनाया कैसे? ये कैसे जान सकोगे तो कृष्ण कहते
- 26:30हैं तू हार जाएगा। कृष्ण कहते हैं भगत तू हार जाएगा।
- 26:40और तुम दुखी क्यों हो? बहुत से महापुरुषों ने तुम्हें
- 26:45बहुत से कारण बताये हैं, लेकिन सत्य कारण बताते हैं कृष्ण।
- 26:53वो कहते हैं, तुम दुखी हो। क्योंकि तुम धार्मिक हो, यह बड़ी
- 27:02चोट देगा। यह शब्द ही चोटिल करने वाला है।
- 27:08तुम दुखी हो क्योंकि तुम धार्मिक हो, धर्म ही तुम्हारे दुख का
- 27:15कारण। इसको छोड़ दो, कहाँ छोड़ दो मेरे
- 27:21चरणों में छोड़ दो सर्व दरबान और तट बिल्कुल स्पष्ट, कहीं कोई हेरा
- 27:31फेरी है, कहीं कोई दोगलापन। माँ एकम शरण वृक्ष वह जो एक है
- 27:38एकों कार अहं ब्रह्मस्व एकों अहम द्वितीय नृत्य वह जो एक है माँ
- 27:46एकम जो मैं हूँ, शरण वृक्ष उसकी शरण में आ जाऊंगा।
- 27:59इस दुख के कारण मैं को जीसको तुम नकली मैं कहते हो, शुद्र मैं कह
- 28:05लो नकली मैं कह लो, मैंने शुद्र और ब्राह्मण का यही फर्क बताया।
- 28:12शूद्र वह जो अपने आप को। शरीर समझता है वह शूद्र ब्राह्मण
- 28:22वह जो अपने आप को लिमिटेड नहीं रखता है, किसी सीमा रेखा में बंदा
- 28:29नहीं है। मंत्रों का निर्माण करने वाले और
- 28:33खुद मंदिर। शुध रहे हैं क्योंकि बाउंड्रीज़
- 28:38में जो सीमा रेखा में बंध गया वो शुध हो गया।
- 28:46जो एक सीमंत दायरे में बंध गया वो शुध रहे हैं।
- 28:53कुआं भी शुद्र है और सागर भी समुद्र है।
- 28:56समुद्र भी शुद्र है। बेराट चाहे कितना पियो लेकिन
- 29:04शुद्र है क्योंकि सीमा रेखा में भरा हुआ है।
- 29:08उसकी सीमा रेखा कम है। कुवें की।
- 29:12सागर की जाता है नकली में क्वेश्चन कहते हैं तुम नहीं
- 29:29छोड़ना ही अच्छा है दुःख का कर और तुम ऊ बजाते हो।
- 29:36क्यों ऊब जाते हो? क्योंकि यह दुख देता है?
- 29:42अब थोड़ा सा आगे की बात भी कर लो दुख से तो तुम ऊबते ही हो, तुम
- 29:49सुख से भी ऊब जाते हो अब ये बातें?
- 29:54बड़े ध्यान से सुनने वाले दुख से तो तुम उबते ही हो दुख से तो तुम
- 30:02परेशान हो जाते हो हे भगवान रोज़ वही दाल रोटी, वो ही मूंग की दाल।
- 30:14हे भगवान वो ही छुपाते सुख से भी तुम होक जाते हो?
- 30:23तुम्हें पता नहीं चलता इसीलिए तुम सुख के खिलौने बदलते रहते हो?
- 30:37धर्म में नहीं मिला पथबी में मिल जाएगा पथबी में नहीं मिला पूजा
- 30:41में मिल जाएगा। अब जो उच्च पदस्थ हो गए वो अवतार
- 30:48बनना चाहते हैं। क्या कारण होगा बला तुम उच्च
- 30:57पदस्थ होना चाहते हो? उच्च पदस्थ बड़े करले मारते हैं
- 31:03कि मैं अवतार बन जाऊं, अपने आप को नौन बालाजकल कहते हैं और नौन
- 31:09बालाजकल का अर्थ आप समझते हो? पता है नॉन बायोलॉजिकल का अर्थ
- 31:17असल में अगर देखा जाए तो जो बायोलॉजिकल पैदा नहीं हुआ, यानी
- 31:25जिसके माँ बाप ने जो हरामी है और नॉन बायोलॉजिकल है।
- 31:31इसके यह अर्थ तो तुमने कभी सोंची। ही नहीं होगा।
- 31:36नॉन बायोलॉजिकल का मतलब जो हरामी है, जो हराम का है और हम कैसे मान
- 31:42लें कैसे मान लें अभी अभी माँ मरी है नॉन बायोलॉजिकल हम कैसे मानें?
- 31:53यह कागजी फूल थोड़ी है, यह तुम्हारी बनावट ब्राह्मणों के
- 32:05फैलाये हुए झूठ ब्राह्मण मुख से पैदा हुआ है, मेरा मुख से भी कोई
- 32:12पैदा होता है? हैं, होता है ये कंधों से पैदा
- 32:20हुआ है। कंधे कब से जन्म देने लगे भाई फिर
- 32:26कोई जांघों से पैदा होता है, वैसे जांघों से पैदा हुए हैं।
- 32:33और पांवों से पैदा होते हैं। सुद्र अब तथा कथित आचार्य इसका
- 32:41अर्थ समझाने में ज़िन्दगी गवा देंगे।
- 32:45इस चीज़ का खंडन नहीं करेंगे कि यह बात गलत है।
- 32:51जो पैदा होता है वह पूजनीय है जहाँ से पैदा होता है और सनातन
- 32:59बड़ा समझदार था। असल में जो सनातन है, जो तुमने
- 33:03बना लिया कुरूप बोन। जो असल में सनातन है, बड़ा सुंदर
- 33:10है जहाँ से तुमने जन्म लिया उसने उसकी आकृति बना ली।
- 33:15यह जो शिवलिंग है, लिंग किसको कहते हैं?
- 33:19तुम्हारे गुप्तांगों को लिंग कहते हैं, लिंग चिन्ह को भी कहते हैं,
- 33:25लेकिन उसकी मूर्ति देखिए। शिवलिंग को तो अपने कभी गोर से
- 33:31देख वह है योनी और योनी के बीच में लिंग आप गोर से देख फोटो खींच
- 33:38के ले आओ, मैं तुम्हें दिखा देता हूँ यहाँ से तुम।
- 33:46कोई मुँह से नहीं पैदा होता, ना मुँह से कोई व्यवस्था है जन्म
- 33:52देने की, यहाँ कोई गर्भाशय नहीं है, यह मुँह है, खाने के लिए है,
- 33:57बोलने के लिए, बच्चे पैदा करने के लिए नहीं है और जांघों में कहाँ
- 34:04है। कोई यूटरेस है, इसमें कोई परम
- 34:09जाने आने की जगह है, कोई अंडाणु यहाँ बनते हैं क्यों मूर्ख हुए हो
- 34:15कोई जांघों में ऐसा कुछ धरा पड़ा है तुम आज के पागल नहीं हो तुम
- 34:26सदियों सदियों से ऐन मूर्खों पागलपन के तहें लगा दी हैं,
- 34:32उन्हें ही मैं संस्कार कहता हूँ। संस्कार तो तुम्हारे समीरू पर्वत
- 34:36जीतने हो गए और तुम बजाए इनको तोड़ने के रोज़ बढ़ाते जाते हो।
- 34:42अगर कोई तोड़ता है उससे बहसबाजी करते हो।
- 34:47तो मैंने सीधा सा रास्ता अपना लिया है।
- 34:53भाई देखो मेरा कोई निजी स्वार्थ नहीं है।
- 34:58मैं ग्राहकों को अट्रैक्ट करने के लिए नहीं बैठा हूँ।
- 35:03कोई मेकअप नहीं किया है। कोई दाढ़ी के लिए नहीं किया जैसा
- 35:11है तुमने सुना है, सुनना है, तो सुन लो, तुम स्वतंत्र हो अच्छा
- 35:29लगता है। भाता है तो सुन लो नहीं भाता है
- 35:36तो जो भाता है उसको सुन लो मैंने कब रोका है?
- 35:44तो सीधी सी बात जो व्यक्ति कमेंट करता है, प्रश्न करता है।
- 35:49उसका जवाब तो मैं दे देता हूँ और अटपटे प्रश्न करता है।
- 35:54उसका जवाब मैं नहीं देता। प्रश्नों के जवाब देने के लिए मैं
- 36:02हूँ अगर गांठ वाकया ही लग गया मुझे चाहे मुँह से खोलनी पड़े।
- 36:08गांठ खोल देता हूँ जैसी तैसी मैं तुम्हारी गांठों को खोलने के लिए
- 36:14बैठा हूँ क्योंकि गांठें टूटेंगी, खुलेंगी तो तुम मुक्त होगे।
- 36:22वो जंजीरें हैं तुम्हारी। और अगर तुम नहीं खुलवाना चाहते तो
- 36:31तुम स्वतंत्र रहो तो मैं खून लेकर आता है, इसलिए मेरे ज्यादा फॉलोवर
- 36:39बनने वाले नहीं हैं। मैं जानता हूँ और मैं चाहता भी
- 36:44हूँ और बाबा ने भी कहा है। कि तुम बोलो कमी मत बनाना भाई
- 36:54इकट्ठे मत करना उनके कहने का मतलब यह था मैं यहाँ कोई ऐसा काम नहीं
- 37:02करता। कि दीक्षा देते वक्त नाबालिग
- 37:06लड़कियों को कह दूँ कि सतन भाई डक के मत आया करो, ऐसा कुछ मेरे यहाँ
- 37:12नहीं होता। होगा भी नहीं, क्योंकि सिंपल वे
- 37:18से मैं 202530 लोगों को बताता हूँ।
- 37:22महीने दो महीनों में एक बार जो बाबा हुकुम कर देते हैं, उनको मैं
- 37:27भुला लेता हूँ और जो बाबा हुकुम नहीं करते वो आते ही नहीं, चाहने
- 37:37पर भी नहीं आते। अब ये तो उसकी इच्छा है जिसने
- 37:41दीक्षित करना है। जिसने तुम्हारा भार जीवन का उठाना
- 37:45है, वो बुलाएगा तो मैंने कुछ नहीं करना है।
- 37:51मैंने सिर्फ आपको दीक्षा दे देनी है, उससे शक्ति देकर आप में
- 37:56प्रविष्ट करवा देना है। वो अपने आप काम करेगी।
- 37:59आगे वह जाने। आप या 1 दिन मैं तो न रहूँगा
- 38:07लेकिन वो जिसने दीक्षा दी वो तो सजना से रहेगा।
- 38:12आपका गुरु कभी मरने वाला नहीं हूँ।
- 38:15नैनम् छिद्दंती शास्त्र में नैनाम।
- 38:20नए चैनम क्लिज़न त्यापुर नशो सती मारू ता लाग तूफान आ जाए लाग
- 38:25भूकंप आज़न लाख परमाणु बम चल जाएं, आग लग जाए, बाढ़ आ जाए,
- 38:37तूफान आ जाए। शस्त्र चल जाए वह नहीं मरेगा।
- 38:45जिसने आपको दीक्षा दी और कबीर कहते हैं मैं न मरूँगा उसी तल से
- 38:55बोल रहे हैं। कबीर जीस तल से बोल रहे हैं।
- 38:59कृष्ण मैं ना मरूँ, मरे संसार मोहे मिला जिला बनवारा मुझे
- 39:08भूतत्व मिल गया, कभी मरता नहीं और उसी तल पर आप पहुंचाओ।
- 39:20ऐसी मेरी इच्छा है क्यों क्योंकि उस स्तर पर बड़ा आनंद है बड़ा
- 39:26मज़ा है सुख और दुख। इनसे बहुत ऊंचे एक अवस्था है आनंद
- 39:44और वह आनंद तुम्हें खुमारी में ले जाएगा, वह उसकी कृपा से आता है।
- 39:52तुम्हारे करने से नहीं आता तुमने अब तक क्या किया?
- 40:02तुम इतने बड़े हो गए शरीर के एक बाल भी तुमने खुद बनाया है, बाकी
- 40:09तो छोड़ो। तुम इतने बड़े हो गए सुन्दर हो
- 40:15सुडोल हो एक बार भी तुमने अपने शरीर का बनाया तो तुमने क्या
- 40:26किया? फिर तुम दावा काहे करते हो कि मैं
- 40:31हूँ? तुम हो कहाँ मुझे लोग कह देते हैं
- 40:38पापा जब तुम कहते हो कि मैं अकेला सुखी हूँ, हमें आग लग जाती है, जब
- 40:52तुम कहते हो कि मैं अकेला सुखी हूँ, सच कहते हैं, हमें आग लग
- 40:59जाती है। वो आग लगती है।
- 41:02तुम्हें कॉम्पिटिशन का ज़माना है भाई और कॉम्पिटिटिव मन सोचता है
- 41:11कि यह मेरे से पहले ना पहुंचे जाए।
- 41:15इसे ही कॉम्पिटिशन कहते हैं। मैं दो नंबर पर नहीं रहना चाहता।
- 41:20एक नंबर का अमीर बनु तो एक नंबर गद्दी नसीन बनु तो एक नंबर और
- 41:28यहाँ तक तो यहाँ तक दुष्ट बनु तो एक नंबर तुम जेलों में भी जाते
- 41:34हो, वहाँ भी कोई छोटी मोटी अपराध करके आता है, उसको पीटते हो?
- 41:40अरे हरामी, तू यही आना था तो कोई कतल वतल करके आता है मुझे बताया
- 41:47एक व्यक्ति जेल में गया, बहुत पिटाई हुई बाबा, मैंने कहा क्यों
- 41:52तुमने तो कोई खास किया नहीं था, चोरी की थी?
- 41:55अरे बाबा ये तो मैं कहता हूँ अगर कोई कत लोग अर्ध करके जाता तो
- 41:59शायद मुझे पूछते और 102050 लोगों को मारता तो लोग मुझे पूछते मैं
- 42:07चोरी करके गया, बड़ा पीटा उन्होंने अरे हरामी के हरामी तू
- 42:12करके भी क्या चोरी? तो फिर तो तुम एक नंबर के दाने भी
- 42:20होना चाहते हो, तुम एक नंबर होना चाहते हो अपराधी भी तुम एक नंबर
- 42:29होना चाहते हो। यहाँ दो नंबर वालों की कोई गति
- 42:33जून नहीं होती। दो नंबर वाले बचा रे जैसे तैसे
- 42:38ज़िन्दगी को व्यतीत कर लेते हैं। तुम दुष्ट भी होना चाहती हो तो एक
- 42:43नंबर दो नंबर नहीं चलेगा बस तुम्हें इसी बात का।
- 42:53दुख होता है मैं तुमसे पहले कैसे पहुँच गया पर कोई कारण मैं कैसे
- 43:03पहुँच गया? यह अदनान साइन सा हूँ।
- 43:06गरीब घर में जन्मा मुझसे पहले कैसे पहुँच गया?
- 43:13ये तुम्हारे अहंकार को ठेस दे देता है।
- 43:18वह जिसे नकली मैं कहता हूँ, वह ठेस खाये ही रहता है।
- 43:27इश्क में हम तुम्हें क्या? बताए हैं।
- 43:38किस कदर चोट खाये हुए हैं इश्क में हम तुम्हें क्या?
- 43:51बताए किस कदर चोट खाये हुए हैं मौत ने हम को मारा है और हम?
- 44:09मौत ने हमको मारा है और हम ज़िन्दगी के सताए हुए हैं।
- 44:24इस में हम तुम्हें क्या? बताये किस कदर चोट खाये हुए हैं
- 44:37मौत? ने हमको मारा है और हम ज़िन्दगी
- 44:42के सताए हुए हैं तो मैं दुखी सिर्फ परेशान नहीं करता।
- 44:48तुम्हें सुख भी परेशान करते हैं तो फिर तलाश काहे की है?
- 44:57सिर्फ मौत ही परेशान नहीं करते हैं, तुम्हें ज़िन्दगी भी सताती
- 45:03है सुख? और दुख दोनों सताते हैं, तुम्हें
- 45:11संत कहते हैं इन दोनों से। पार हो जाओ।
- 45:19जो दुख देता है वह नकली में और अब दूसरी बात बोलेंगे।
- 45:29जो सुख देता वो भी नकली में नकली में ही तुम्हें सुख देता है और इस
- 45:38सिक्के के दो पहलू हैं वो ही तुम्हें दुख में देता है।
- 45:45जहाँ दुख है वहाँ सुख है। और तुम दोनों से ऊब जाते हो, तुम
- 45:51नरक से भी ऊब जाते हो और ये भ्रम मत रखना कि हम स्वर्क के आशिक
- 45:59हैं। गलती में हैं स्वर्क के आशिक
- 46:05इन्द्र। अहिल्या पर मोहित हो जाते हैं।
- 46:12ये किस चीज़ की खबर है? वह सुनाये तुम्हारा पीछा नहीं
- 46:17छोड़ते, चाहे तुम कितना ही स्वर्ग भोग लो।
- 46:24समुद्र मंथन से निकली हुई रंभा अप्सरा इंद्र के पास कल्पवृक्ष
- 46:31उसके पास तमन्ना फिर भी नहीं पड़ती।
- 46:40गौतम की पत्नी अहिल्या से जबरदस्ती करते हैं।
- 46:47और आगे मुँह रखो। गौतम सत्य जाने बिना अहिल्या को
- 46:51श्राप दे देता है। ये कहानियों हैं तुम्हें समझाने
- 46:57के लिए तुम इसके गहन अर्थ नहीं समझ सकोगे इसलिए मैं कहता हूँ
- 47:04इनको आग लगा दो। तुम सीधीसीधी बात को समझने की
- 47:08कोशिश करो, ये ऊंट पटांग बातें तुम्हें समझ में नहीं आएंगी।
- 47:17इसलिए कृष्ण कहते हैं राजनीति ही नहीं छोड़ने, धर्म को भी छोड़ दो।
- 47:25और धर्म को ही छोड़ दो। मुख्य तो धर्म है जो तुम्हें सभी
- 47:32प्रकार के दुष्कर्म देता है। तुम अगर चोटिल होते हो जब मैं
- 47:41कहता हूँ मैं सुखी हूँ। तुम्हें चोट लगती है उस नकली मैं
- 47:48को और नकली मैं चाहता है सबसे पहले मैं होना चाहिए बदमाश हुए एक
- 47:55नम्बर कम में मेरे से बड़ा बदमाश को नहीं हो सकता कोई।
- 48:01ये मेरे से पहले बड़ा बदमाश कैसे बन गया?
- 48:06तुम्हारे अहंकार को चोट लगती है, वह है अहंकार जो प्रथम आना चाहता
- 48:12है और हम तो बच्चों को सताते ही प्रथम आना है, कक्षा में चले हो,
- 48:18देखो दूसरे नंबर पर माता जन। और तीसरे नंबर पे तो बिल्कुल ही
- 48:25मत आया। एक बच्चा घर आया पिताजी से कहने
- 48:32लगा पिताजी खुशखबरी है क्या पुत्र?
- 48:40आज हमारी दौड़ लगी थी। रनिंग में मेरा तीसरा नंबर आया है
- 48:47अच्छा शाबाश पेट शब्द ब्य खूब ज़ोर से पेट शब्द ब्य शाबाश बैठे
- 48:56किसी दिन एक नंबर पर भी आ जाना ज़रा बता दो।
- 48:59कितने भागीदार थे इस दौड़ में भागीदार?
- 49:08कितने थे? कहता पापा?
- 49:09तीन तो जीस ज़ोर से पीठ थपथपाई थी, गाल थपथपा थी।
- 49:20ऐसा झंडाटेदार मारा तुम चाहते ही नहीं कोई तीन ही थे, तीन नंबर पे
- 49:30आ गया और क्या चाहिए आखिर में तो तुम आना ही नहीं चाहते तुम्हारे
- 49:35माँ बाप नहीं अलाउ करते? और तुम्हारे दुख ऐसे ऐसे हैं जो
- 49:47कि तुम्हारे अपने ही बनाए हुए हैं, मुझे रोज़ आ जाते हैं।
- 49:52प्रश्न बाबा इसको ठीक कर दो ना, मैंने कह क्यूँ?
- 49:56यह है स्वतंत्र नहीं है, क्या मैं क्यों रोकूं?
- 50:01इसको शराब पीने से शराब पीना इसका जन्मसिद्ध अधिकार है।
- 50:09बदमाश बनना इसका जन्मसिद्ध अधिकार है, जैसे जन्मसिद्ध अधिकार है
- 50:15राजनीतिक बनना। हालांकि राजनीतिक से बड़ा बदमाश
- 50:18कोई होता ही नहीं है। तुम समझ सकते हो राजनीतिक डराता
- 50:24है, राजनीतिक का समझौता करता है और राजनीतिक तुम्हें खरीदता है।
- 50:34साम, दान, दंड, भैर राजनीतिक तुम्हें दंड देता है देखो जेल में
- 50:38डाल दूँ एडीए सी बना लूँगा आओ गंगा पार कर जाओ शुद्ध होरो फिर
- 50:48मेरे पास आ जाओ, हम तो हम सर्पो पापे भी मोक्ष श्याम ही माँ सोचा।
- 50:54मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, चाहे 70,000 की किया
- 50:58जाए 70,00,000 करोड़ की की। ऐसे राजनीतिज्ञों के भ्रष्ट साए
- 51:07में हम पल रहे हैं। फिर तुम कहते हो की हम सूखे नहीं
- 51:11हैं। तुम कहते हो कि भोगो, ये भोग ने
- 51:17कहाँ देते हैं? दुष्ट ये तो पांच किलो अनाज देते
- 51:21हैं, पांच किलो अनाज तो कोई भोग में नहीं आता।
- 51:24मैंने कहा नहीं पांच किलो अनाज तो नहीं भोग में आता भाई?
- 51:29बस इतना ही देते हैं हाँ इतना ही देते तो फिर क्या किया जाए भाई
- 51:38फिर बंदे पलटे तो और क्या हो सकता है?
- 51:42अरे भाई कहाँ पलट दे इनको चुनने वाले तो कोई और है हम थोड़ी।
- 51:49हाँ, मैं समझा समझा समझा तो फिर उनको पलट दो, उनको भी हम कहाँ
- 51:55चुनते हैं बाबा हम तो चुनते ही नहीं किसी को, तो फिर इनको कौन
- 52:01चुनता है? ये खुद ही चुन लेते हैं अपने आप
- 52:03को। अरे राम।
- 52:16मौत ने हमको मारा है और हम जिंदगी के सताए।
- 52:27वे हैं, जाएं तो जाएं कहाँ? इस दरदीली जुबान को कौन सुने, कौन
- 52:44सुने का जीसको दुख हरण के लिए बुलाया था जो।
- 52:50छाती पिट के कहता था मैं कर लूँगा कहाँ है वो ढूंढो उसे कहाँ खो गया
- 53:05भीड़ में? वायदा किया था तो में भी रोज़गार
- 53:17नहीं मिला। 11 वर्ष हो गए 11 तो 22
- 53:2322,00,00,000 रोज़गार तो पक्के थे, ज्यादा कर देता।
- 53:27मेहरबानी क्यों नहीं गया? अच्छे दिन तो आ ही गए।
- 53:33जो कहते हैं उनके तो आ गए इन भक्तों की भीड़ होती है समझ लेना
- 53:42कल मेरे पास किसी मित्र ने द्रोव राठी के एक छोटे से क्रिप भेजते,
- 53:49ऐसे नहीं भेजते मुझे कोई काम की बात होती है तो भेजते हैं।
- 53:57तूफानों से जो टकराए उसे इंसान कहते हैं ऐसे इंसान हैं बिकाऊ माल
- 54:07भी बहुत है। देखिये चरनार बिंद तो सदा ही होते
- 54:13हैं, मैंने तो देखे हैं। चरनार बिंद पूरी कोशिश करेंगे।
- 54:21तुम आजाद ना हो जाओ और जब तुम आजाद हो जाओगे तो गद्दी के ऊपर
- 54:26छलांग मारने में मिनट लगाएंगे। तुम्हें कैसे गद्दी से उतार दें,
- 54:31इसकी कोशिश करेंगे और उतार देंगे एक धन सांप दान दंड बह तुम कैसे
- 54:42राजनीति में जी रहे हो? तुम कैसे मुल्क में जी रहे हो?
- 54:47एक मुल्क का यह हाल नहीं है। ये परंपरा बदलनी चाहिए।
- 54:54शक्ति किसी एक हाथ में केन्द्रित नहीं होनी चाहिए।
- 55:00तो क्या करें बाबा शक्ति पांच। पंचे पामेई दरगाह मान पांच
- 55:16व्यक्तियों के हाथ में शक्ति होनी चाहिए।
- 55:20केन्द्रीयकरण नहीं होना चाहिए, शक्ति का भी केन्द्रीयकरण होना
- 55:24चाहिए। अगर हमने किसी एक के हाथ में
- 55:28केंद्रित कर दी तो वह इंसान है, इंसान से भूल चूक भी होती है,
- 55:40इंसान से गलती भी होती है, इंसान से पाप भी होता है।
- 55:48और यह सत्ता का गुरुर ही ऐसा है। अब ये माधव पांडे का जवाब दे रहा
- 55:54हूँ। मैं तो कहते हैं बाबा आज देशभक्ति
- 55:58की जरूरत नहीं है, जो भक्ति की बात आप सीखा रहे हो हो कृष्ण की।
- 56:05आज उसकी जितनी जरूरत नहीं है, उतना आप बोल रहे हो।
- 56:11आज जरूरत है देश को बचाने की। मैंने कहा भाई वो तो आपका काम है
- 56:16देखो हमसे तो चला फिर अभी नहीं जाता।
- 56:22हमें तो अगर आज आप कह दें कि इस गद्दी पर बैठ जाओ तो हम तो न बैठ
- 56:27सकेंगे हमसे जो आदमी यहाँ से बाहर तक नहीं जा सकता वो किसी गद्दी को
- 56:39संभालेगा कैसे? मैनेजमेंट करने का हमारे पास
- 56:45शक्ति नहीं है। हमें हम सिर्फ तुम्हें राय दे
- 56:50सकते हैं। गद्दी नशीनों को बदलो।
- 56:58क्योंकि ये झूठे हैं। अब तो देख लिया ना।
- 57:02जब आए थे तो शायद यह सच्ची लेकिन जब सत्ता सत्ता हाथ में आ जाती है
- 57:10और तुम देख लेते हो परख लेते हो अपने अरमान पूरे करने के लिए।
- 57:18इतने लोगों का बलिदान थोड़ी ही करना पड़ता होता है।
- 57:23सिर्फ अपने अरमान पूरे करने के लिए हम तीन बार प्राइम मिनिस्टर
- 57:27बनेंगे, हम चार बार प्राइम मिनिस्टर बनेंगे, हम पांच बार
- 57:30बनेंगे, अभी तो 15 साल राज़ करेंगे करो भाई।
- 57:36लेकिन भूखे तो मत मारो लोगों को धरती उपज भी करती है और तुम भी
- 57:46सजा के लिए नहीं रहने वाले हो। तेरे जैसे लाखों आय लाखों इस मा
- 58:05दिने का? तेरे जैसे लाखों इस माटीने का रहा
- 58:26न नाम। निशान रे बंदे झूठी तेरे शान रे
- 58:40मत कर तू अभिमान मत कर तू। अभिमान रे बंदे मत कर दो अभिमान
- 59:00तो मैंने दो राठी का वीडियो सुना। गोडसे ने गाँधी को मारा, कुछ तथ्य
- 59:10दिए गए थे, अब गोडसे भी मर गया, गाँधी भी मर गया, ये बातें फिजूल
- 59:16हैं अब राजनीति के योग्य ही रह गई हैं ये बातें।
- 59:22इसके अलावा इनमें कोई तंत्र नहीं। गाँधी मर गया, गाँधी को मार दिया
- 59:30गॉड से ने मार दिया गॉड से लटक गया दोनों गए मैं तो सदा ही कहा
- 59:37करता हूँ बहुत बार बोला कह रे पगले, ये बूढ़ा तो मर ही जाता है।
- 59:45तुने तो अपनी जवानी खराब की 39 साल के तुमसे दुगनी 78 साल 39 और
- 59:523978 तुमने क्यों जवानी खराब की और खंड भारत बना फिर हाँ नहीं बन
- 1:00:01पायेगा। कभी नहीं बन पाएगा भाई तेरा
- 1:00:08वरिदान व्यर्थ और एक विचारे बूढ़े को जिसके पास लंगोटी के अलावा कुछ
- 1:00:18भी नहीं। उसको मारने की निर्बल, अशक्त को
- 1:00:24मारने की तो शास्त्र भी आज्ञा नहीं देता।
- 1:00:28जिन शास्त्रों को तुम पढ़ते हो, रामराज जलाना चाहते हो बूढ़े
- 1:00:34अशक्त को तो मारने की, अपला को मारने की निर्बल को मारने की तो
- 1:00:39वह भी आज्ञा नहीं देता। पर वह तो ऐसा बूढ़ा बेचारा लट्ठ
- 1:00:46लेके चलता है और भगवान का नाम ले रहा है।
- 1:00:51सत्संग सभा में मारा है तो हमें कोई और जगह नहीं मिले।
- 1:00:56कोई और जगह चुन लेते हैं। लेकिन अब तो गया बीता वापस नहीं
- 1:01:08आता तो उसने सारे तथ्य कहे। मैंने सुने हैं तो बातें लेकिन
- 1:01:20बातों में सचाई। इस चलते तूफान में सुमेरु पर्वत
- 1:01:27की तरह छाती तान के खड़े होना भी किसी शूरवीर का काम है और ऐसे
- 1:01:33सुरवेश हैं अभी इनको सुना करो। लाभ बात तो मैं भी बहुत कर देता
- 1:01:44हूँ लेकिन देखो भाई झूठ नहीं है इसमें कोई ऐसे वृद्ध हो गया
- 1:01:52बूढ़ा। जब मैंने शुरू किया काम पिछले
- 1:01:58जन्म में तो मैं जवान था जैसा भी मुझसे हुआ भाई क्योंकि छोटा तो
- 1:02:07चरण चुम्बक बन गया मैं क्या करूँ मेरे साथ होता मेरा भाई था।
- 1:02:13एक और 111 होते हैं। लेकिन क्या करूँ?
- 1:02:20जब वो भीषण निकल गया तो मैं क्या करूँ?
- 1:02:25तो फिर भाई रावण तो मरा ही करते हैं, जब भीषण साथ छोड़ दिया करते
- 1:02:32हैं। खैर, इस बात के ऊपर मैं चर्चा कभी
- 1:02:37फिर करूँगा आपको बहुत बार बात कि ठीक राम थे या रावण थे?
- 1:02:43मैं किसी का पक्ष नहीं लेता। रावण मेरे लिए आदर्श भी हैं और
- 1:02:52पूज्य भी हैं। लेकिन रावण भी मेरे लिए कम नहीं
- 1:02:56है, सिर्फ ब्राह्मण होने के नाते नहीं, वह भी मेरा आदर्श है।
- 1:03:02किसी मायनों में ये बड़ा नंबर चौड़ा प्रसंग है।
- 1:03:05किसी दिन शायद जीता रहा तो बोलेंगे।
- 1:03:14तो नीचे कमेंट पढ़े, मैंने क्या राय है लोगों की?
- 1:03:20मुझे पता है जिन्होंने राय इस वक्त नहीं थे हमारे पास तो आज ऐसे
- 1:03:27आदमी हैं जो इस बात का फख्र करते हैं।
- 1:03:31कि हमें फख्र है कि हम आजाद हिंदुस्तान में पैदा हुए हैं और
- 1:03:38हमारे माँ बाप ने हिंदुस्तान को आजाद कराने में चरण चुंबकों के
- 1:03:43दावा और कोई अरोड़ा दान नहीं किया।
- 1:03:47ऐसे जुग में हम जी रहे हैं। लेकिन जीना पड़ता है, क्या करें
- 1:03:56आपके लिए? अभी 1015 दिन पहले मेरा मन चला,
- 1:04:03मुझे फ़ोन आया बाबा फ़ोन बंद मत कर देना, हम आपको मारने आए हैं।
- 1:04:12मुझे रोज़ ऐसी धमकियों मिलती हैं। क्यों भाई दुकानदारियाँ बंद होती
- 1:04:19हैं कुशों की छवि बिगड़ती है सत्य बोलने से छवि बिगड़ जाया करते
- 1:04:25हैं। बहुत से सुर में हैं आज।
- 1:04:33जो इन तूफानों से टकराने के बावजूद खड़े हैं बिकेंगे उन सुरों
- 1:04:39को आप भी जानते हैं बिकाऊ माल को भी आप जानते हैं?
- 1:04:42मैं इनको बिकाऊ माल कहता हूँ ये किशोरियां हूँ ये पंडित हूँ।
- 1:04:50खिताब मिल जाते हैं। इनको पद्मश्री, पद्मभूषण के लेकिन
- 1:04:54हैं ये बकाओ मार लाखों में खरीद लो कहानी सुन है।
- 1:05:01कहान मर्म नहीं पता इनको किशोरियों से सुन लो बच्चे कैसे
- 1:05:07पैदा होते हैं? ऐसा मत करता हूँ तो ऐसी कहानी
- 1:05:15आपको सुनाके माया मुख को छोड़ दो पि से पहले रह लेते हैं और
- 1:05:24हेलिकॉप्टर पे बैठे और फर हो जाते हैं।
- 1:05:31देखो भाई मैं ऐसा आदमी तो हूँ, मैं तो एक कमरे में बंद हूँ, मेरे
- 1:05:38लिए तो ये जेल है, किसी और भी जेल में डाल दोगे तो कुछ फर्क नहीं
- 1:05:43पड़ता। मैं खुद ही जेल में हूँ।
- 1:05:49मैंने मेरी जेल खुद निर्मित की है, किसी ने मुझे सजा नहीं दी,
- 1:05:57अपनी इच्छा से छोड़ा, जो कुछ छोड़ा।
- 1:06:02अब तो इच्छा जीने की भी नहीं है। तुम गद्दियों की बात करते हो,
- 1:06:08बाबा माधव पाण्डेय कहते हैं, तुम ही बैठ जाओ बाबा अरे भाई जीसको
- 1:06:19खुद की सुध न रहती हो, वो गद्दीयों की सुध कैसे लेगा?
- 1:06:31नहीं, मैं इतना बेज़मान नहीं हूँ, मैं इस दिशा में प्रयास ही नहीं
- 1:06:37करूँगा। तुम्हें मैं रास्ता जरूर दिखा
- 1:06:41सकता हूँ। कमेंट किया भक्तों ने भक्तों होते
- 1:06:45हैं, ऐसा देखो। अगर तुम्हारे घर का कोई आदमी कतल
- 1:06:49भी कराएगा। नहीं।
- 1:06:53तो तुम्हारे घरवालों को पता होगा लेकिन वो कभी नहीं कहेंगे।
- 1:06:58हमारा बच्चा गलत है, मैंने देखे हैं ऐसे बच्चों।
- 1:07:03जो सब तरह के विचार करते हैं लेकिन उसका बाप माँ कहते हैं कि
- 1:07:07नहीं नहीं ये देवता पुरुष तो घर वाले तो सदा ही वो बागित होते
- 1:07:16हैं, सदा वह नहीं, कभी कहेंगे भी इन्होंने कुछ किया है ऐसे कुछ
- 1:07:23बागित होते हैं। वो घर के मेंबर ही होते हैं, वह
- 1:07:27आप कुछ भी कर लो, सब ठीक है चंगासी सब चंगासी और उस परिवार
- 1:07:35में जो मिल जाए तो सब चंगासी हो जाता है, जो उस परिवार से निकल
- 1:07:40जाए तो भाई शाम को एडीओवर। आई टी भेजते चाहते हैं जिन मलंगों
- 1:07:49के पास कुछ होता है उसका ये कुछ फगाट नहीं सोते तो मैंने कमेंट
- 1:08:01पढ़े और कमेंट बहुत बढ़िया थे। लाजवाब कमेंट थे।
- 1:08:09लिखा था नाथूराम गोडसे जिंदाबाद। मैंने कहा तुम जिंदा रहोगे?
- 1:08:15नाथूराम गोडसे बन के एक से प्रश्न किया मैंने सच में एक गोडसे का
- 1:08:25भक्त मिल गया। उसकी माता सात थी।
- 1:08:27कहते गोट से बहुत अच्छा था। अगर वोट से ना होता तो महात्मा
- 1:08:33गाँधी, सारा हिंदुस्तान पाकिस्तान को दे देता और उसका बाप का रास्ता
- 1:08:42वो बेचारा कुछ करोड़ देने के लिए तो अनसिंघ पर बैठा है।
- 1:08:47हिंदुस्तान उसके हाथ में है क्या ऐसे कैसे दे देता?
- 1:08:55वे सिर प्यार की बातें करते हैं। ये लोग तो मुझे कहने लगी नाथूराम
- 1:09:03गोडसे बहुत अच्छा आदमी था। कुर्बान हो गया हमारे हर्दों में
- 1:09:08जिंदा है, मैंने कहा माँ तुम्हारे हर्दों में जिंदा है, हाँ
- 1:09:14तुम्हारा बेटा तुम्हारे साथ है, मैंने बेटे से कहा पुत्र तुम
- 1:09:21नाथूराम गोड से बढ़ना चाहोगे हाँ? तो तुम लटकना भी चाहोगे कि मैं
- 1:09:27क्यों लटकूंगा? मैंने कहा फिर नाथूराम गोडसे को
- 1:09:31तो लटकना पड़ता है? अगर नाथूराम गोडसे लटकने की इमत
- 1:09:38नहीं रखता तो फिर नाथूराम गोडसे क्या हुआ?
- 1:09:43फिर तो गोडसे न होगा। पर मैंने उस माँ से पूछा, माँ तुम
- 1:09:50इसको लटकता देख देख सको की लटकता हुआ मैं को देखूंगा बस तुम सब से
- 1:09:57यही चाहते हो के भगत सिंह तो पैदा हो लेकिन पड़ोसियों को पैदा हो।
- 1:10:04हमारी पैदल ऐसे ही लोगों को मैं भक्त कहता हूँ तुम बनो नाथूराम
- 1:10:14गोडसे मुझे मरो गोली मैं हूँ गाँधी मारो गोली।
- 1:10:25कोई नहीं आता। कितनी बार कह चुका है नाथूराम
- 1:10:30गोडसे कितने और भगत, कितने और जिंदाबाद नारे लग रहे हैं।
- 1:10:35सब खरीदे हुए लोग हैं। कायर बस दिल नपुंसक न मर्द।
- 1:10:42तुम्हें किसी में कोई ताकत नहीं, कोई तो एक आज्ञा होता, कोई नहीं
- 1:10:50आया एक नंबर के नाम हो। इतना तुम्हारा खून खोलाने के बाद
- 1:11:02वे तुम मिलते नहीं डरते हो डटकने से नाथूराम गोडसे ने इतनी हिम्मत
- 1:11:12तो करती और मैं खुद कहता हूँ अरे बुढ़ऊ तो मर जाता।
- 1:11:19दो 3 साल में तुने क्यों अपनी जवानी बर्बाद किया?
- 1:11:23जब तुम्हें पता था मैं ऐसे देश में रहता हूँ जहाँ लोग भाग जाते
- 1:11:28हैं छोड़कर तुम जानते नहीं थे क्या आज क्या है तुम देख रहे हो।
- 1:11:40नाथूराम गोडसे की माँ जो जिंदाबाद कहती है, खुद नहीं देखना चाहती
- 1:11:47है, अपने बेटे को लटकते हुए तो क्या खाक नाथूराम गोडसे की पूजा
- 1:11:52करेगी? ये खाक जी पूजा है।
- 1:11:55इसको मैं कागज़ी शेर कहता हूँ और यह जो नाथूराम गोडसे जिंदाबाद
- 1:12:01कहता है, आओ गोली मारो मेरे इससे ज्यादा मैं कब इन में लटकने का
- 1:12:14हौसला नहीं हिजड़े हैं। एक नंबर के।
- 1:12:23सब कागजी बकवास है, किस में कोई तंत्र नहीं है तो मैंने बड़े
- 1:12:31कमेंट देखे, सिर्फ कमेंट करने वाले लोग हैं।
- 1:12:34कमेंट करने वाले लोग मैं सदा ही देखता हूँ।
- 1:12:37जब उनको थोड़ी सी झाड़ पड़ती है तो माफी मांगने लग जाते हैं।
- 1:12:40ये चरण चुम्बक भी जल्दी बन जाते हैं।
- 1:12:44मैंने देखे हैं मैं ऐसे लोगों की पुत्र रूप में प्रशंसा करूँगा।
- 1:12:55बढ़ते ही चलो पुत्र हमारा आशिष हमारे साथ है।
- 1:13:03तुम कभी हार मत मानना और तुम ऐसे ही चलते रहो तो प्रकृति तुम्हें
- 1:13:09हारने देगी भी नहीं। प्रकृति से बड़ा संघर्ष कोई नहीं
- 1:13:13होता तो ये जीतने भी व्यक्ति हैं, जो आज।
- 1:13:19सही प्रचार को बचाए रख रहे हैं। बने रहो बिकाऊ माल से मैं कहता
- 1:13:24हूँ तुम भी बने रहो, क्योंकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाना
- 1:13:29चाहिए एक नकली में एक असली में। मैं कह रहा था कि 1015 दिन पहले
- 1:13:43मेरे पास आया है। बाबा तुझे मारने आए हैं, भीतर आने
- 1:13:50दोगे, मैंने कहा अगर मारने आए हो तो आ जाओ।
- 1:13:56अगर दीक्षा लेने आए हो तो उन्हें आज नहीं है।
- 1:14:00वो तबियत आज नहीं है वो कुमार आज कुछ तबियत नासाज है मारने आए हो
- 1:14:13तो आ जाओ आ गया। मैंने कहा कोई क्या ले के आया?
- 1:14:26पेस्टल है तो फिर तू दस्ताना ले के आया, वो काहे दस्ताना ले के आ
- 1:14:34तू मुझे मारना चाहता है ना, मैं तुझे मारना नहीं चाहता, फिर क्या
- 1:14:40करोगे बाबा? मैं वो दस्ताना पहन के अपनी कनपटी
- 1:14:45पे लगा लूँगा, खुद मर जाऊंगा, तेरे फिंगर प्रिंट्स से नहीं
- 1:14:50आएँगे, मेरे फिंगर प्रिंट्स से आएँगे तो मुझे।
- 1:15:00तू मुझे मारना चाहता है, तेरी इच्छा पूर्ण हो गई और मैं तुझे
- 1:15:05मारना नहीं चाहता, मैं तुझे नाथूराम की तरह लटकना नहीं चाहता,
- 1:15:11मैं था नहीं, नहीं नाथूराम को लटकने नहीं देता, मैं उसे कहता तू
- 1:15:18सुधर जा। तू गलतफहमी में आ गया, गलत संगत
- 1:15:25में पड़ गया, कोई बात नहीं मैंने तो वैसे भी मरना था जितना हो सका
- 1:15:31कर चला फिर मैं क्या कहूंगा बाबा? तुम कह देना इसने मेरे से
- 1:15:39रिवाल्वर छीन लिया और खुद मर गया गणपति प्रार्थ वह व्यक्ति तो बुरी
- 1:15:46तरह रोने लगाएं बाबा। तुम थोड़ा अकड़ वकड़ दिखाते हैं
- 1:15:58तो हाथ चढ़ जाते हैं ये तो रुलाने से ऐसा काम करती है।
- 1:16:11मेरे तो हाथ कम रहे हैं, मैंने कहा तू ऐसे कर।
- 1:16:17यह भी नहीं कर सकता बाहर कार खड़ी बैठ के उसमें बैठा ले ड्राइव करके
- 1:16:21मुझे ड्राइव तो नहीं करना होता। ये नहर से छोड़ता है ज्यादा दूर
- 1:16:28नहीं है पांच छः किलोमीटर है वहाँ छोड़ के भाग जा।
- 1:16:35मैं बड़ी नहर में छलांग लगा दूंगा।
- 1:16:38कोई नहीं निकालेगा वहाँ से और कुछ लोगों का भ्रम भी मिट जाएगा के 9
- 1:16:45साल पहले उन्होंने मुझे बचाया। भ्रम भी टूट जाएगा।
- 1:16:53तेरी भी इच्छा पूरी हो जाएगी और भी लोगों की इच्छा पूरी हो जाएगी।
- 1:17:00आई तो गुमान लिए फिरते हैं। लोग के हमने बजाया और रस्सी के
- 1:17:09बिना उनकी हिम्मत नहीं थी, छलांग लगा देता है।
- 1:17:14रस्सी भेजी और गुमान आज तक है, क्या हम बचाएं?
- 1:17:25कमाल है जो आदमी के वश में भी नहीं होता उसका सेहरा अपने सिर पर
- 1:17:31बांधने की चेष्टा करता है। और पूरा परिवार इसी पे बड़ी तल्खी
- 1:17:35में क्या हमारे बेटे ने तो बचाया? इसे अरे भाई अकेला तो बचा भी नहीं
- 1:17:42सकता था रस्सी के बिना और चार लोग और ना होते तो फिर निकाल भी नहीं
- 1:17:46पाता था और मरे हुए को निकालो। जब किसी राहगीर ने कह दिया इसमें
- 1:17:55कुछ नहीं है भाई निकाल लो फिर लाश भी नहीं मिलेंगे।
- 1:17:58फिर निकाला तुमने बजाया किसने बजाया भी उसने रस्सी भी उसने?
- 1:18:10और मैंने तो उसके चमत्कार बहुत देखे।
- 1:18:13अब तो बस आखिरी फंक्शन जो बाबा ने कहा बोल लिए वो भी कह दिए कि बोल
- 1:18:20लिए तुम बस अब तुम आ जाओ, तीनों की इच्छा पूरी हो जाती है
- 1:18:27तुम्हारी भी। वह जो दिमाग में गंध लिए फिरता के
- 1:18:34मैंने बचाया था, उसकी फिर और बाबा जो कहते हैं कि तुम मेरे पास आ
- 1:18:39जाओ, तीनों की इच्छा पूरी हो जाएगी।
- 1:18:42तुम चलो ना वह पैरों से ऐसा छिपटा मैं कहा थोड़ा सा धीरे रहो मैं
- 1:18:52ऐसी बातें घरवालों को नहीं बताता हूँ ऐसे ऐसे लोग आ जाते हैं नकली
- 1:19:01में जब वो मर जा रहे हैं। तो असली में इतना आनंददायक है और
- 1:19:10कृष्ण हर हाल में तुम्हें असली में तक पहुंचाना चाहता हूँ कि तुम
- 1:19:15कैसे उस असली में तक पहुंचाओ जहाँ स्वर्ग ही स्वर्ग है जहाँ जाकर
- 1:19:22तुम्हारी कामना शेष नहीं रहती। उससे पहले तुम्हारी सभी कामनाएं
- 1:19:27पूरी भी हो जाती हैं। अगर तुम चाहते हो तो जो मांगोगे
- 1:19:32वही मिलेगा। मिलेगा उस स्तर पर इन व्यूस
- 1:19:36इकट्ठे करने वाले लोगों के भर में मत आया करो।
- 1:19:40ये सच नहीं बोलते, झूठ बोलते हैं। ना पास्ट लाइफ रिग्रेशन ये कर
- 1:19:45सकते हैं, क्योंकि सूर्य विधान को मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, कुछ
- 1:19:51नहीं जानते। पापी पेट का सवाल है, इनको सुन
- 1:19:57लिया करो पांच 4 मिनट इनका व्यूज आ जाएगा और छोड़ दिया करो।
- 1:20:04महंगाई है, भाई रोज़गार है नहीं तो बेचारे करें भी तो क्या करें?
- 1:20:13ऐसा चमन है, कृष्ण कहते हैं, तुम असली में तक आ जाओ।
- 1:20:19फिर तुम्हें किसी की चाकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- 1:20:25तुम सहिंसा के सहिंसा हो जाओगे जीसको कछु ना चाहिए वही शहंशाह।
- 1:20:37वहाँ जाकर तमन्नाएं ही खत्म हो जाती हैं।
- 1:20:40तमन्नाएं पूरी नहीं होती, तमन्नाएं ही खत्म हो जाती हैं
- 1:20:45वहाँ जा के जीसको कुछ होना चाहिए, वो भी शहंशाह तुम शहंशाह हो के
- 1:20:51शहंशाह हो जाते हो वो असली में है।
- 1:20:57नकली में तुम्हें दुख देता है और संतो की भगवान कृष्ण की यही इच्छा
- 1:21:04है कि तुम अपने असली स्वरूप में आ जाओ जो तुम वास्तव में हो बड़ा
- 1:21:10आनंददायक है, ठंडी, ठंडी मीठी, मीठी, सुगन्धित हवाएं बहती हैं।
- 1:21:16सुबह के लोरी के समय तुम्हारा इंतजार करनी है।
- 1:21:21चलो आओ जो तुम को सितारों पे ले चलो।
- 1:21:38दिल जो मज़ा है ऐसी बाहरों में ले चलो आओ।
- 1:21:58श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव श्री कृष्ण
- 1:22:13गोविंद। हरे मुरारी नाथ नारायण वासुदेव
- 1:22:25पितु मात स्वामी सखा हमार। भितुमात स्वामी सखा हमारे हे नाथ
- 1:22:41नारा यन वासुदेव श्री कृष्ण गोविंद।
- 1:22:50अरे मुरारी एम् नाथ नारायण वासुदेववा धरती हूँ मैं और तू है
- 1:23:08गगन? धरती हूँ मैं और तू हैगगन होगा
- 1:23:19कहाँ तेरा मेरा मिलन धरती है तू? और मैं हूँ गगन होगा कहाँ तेरा
- 1:23:36मेरा मिलन लाख पहरे यहाँ। लाख पहरे यहाँ प्यार दिल में पले
- 1:23:54भी तो क्या है एक तू ना मिला सारी दुनिया।
- 1:24:06मिले भी तो क्या है? एक तू ना मिला मेरा दिल ना खिला
- 1:24:21सारी बगिया। खिले भी तो क्या है?
- 1:24:29एक दूना मिला धन्यवाद।