Latest / Baba ji Vijay Vats / 16 Mar 25 - क्या अंतिम क्रियाओं से आत्मा को मुक्ति मिलती है? जानें पुराणों की सच्चाई!
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- 0:03बाबा जी, प्रणब मेरी माता की मृत्यु के बाद 10 और 13 की
- 0:16विधियों मैं करना नहीं चाहता। ब्राह्मण से बीवी को समझाने में
- 0:26समर्थ हूँ, मुझे सिर्फ कर्मकांडी ब्राह्मण से तकलीफ है उनकी पागल
- 0:36जैसी बातों से। मैं अपने शांत हुआ मन को उनकी
- 0:43खामी लोभी और मूर्खता भरी दिमागी साजिश वाली बातों से भरना नहीं
- 0:51चाहता। बाबा के पितृ दोष काल सर्पदोष।
- 0:58नारायण बाली प्राणों की रचना का क्या तथ्य है?
- 1:14अब मैंने बोलना शुरू कर दिया है पुत्र।
- 1:19कोई ज्यादा जरूरी हो तो मुझसे प्रसंग के बीच में भी पूछा जा
- 1:26सकता है। प्रसंग के बीच में का बात प्रश्न
- 1:36भेज सकते हो मुझे? बहुत सी प्रथाएँ बहुत शब्द मैंने
- 1:46तो लगाया सभी नहीं लगाया बेकार और इन लोभी ब्राह्मणों के प्रखंड के
- 1:56कारण। मैं ये भी कह सकता था कि जलेबी को
- 2:09ही फेंक दो, कह सकता था लेकिन मैं जानता था जलेबी के भीतर रस बड़ा
- 2:19है। अब एकएक करके आपको समझाऊंगा किसी
- 2:30भी दिमाग के ऊपर प्रबंधन नहीं है की मेरी बातों को मानें।
- 2:38ठीक लगे मानो नहीं ठीक लगे। ये चैतन्य का कमेंट है, माता जी
- 2:56की मृत्यु हो चुकी है यही दो 4 दिन पहले।
- 3:03उनकी दसवीं या तेरहवीं मैं नहीं करना चाहता तो मैं करनी भी नहीं
- 3:09चाहिए। स्पष्टता मैंने अपने पुराने
- 3:14प्रवचनों में बता दिया यह काम प्राकृतिक है।
- 3:24मेरे पास लोग आ जाते हैं बाबा अच्छा सा मुहूर्त निकाल दो सर्जरी
- 3:30करवानी बच्चे के लिए तो मैंने कहा निकाल दो मैं दूंगा।
- 3:42लग्न भी वृक्ष निकाल दूंगा। सारे ग्रह जो कृष्णा से मिलते
- 3:47होंगे वह भी निकाल दूंगा, आराम से मिलते होंगे तो नहीं निकालूंगा
- 3:52बेचारा सारी उम्र परेशान रहा और आखिर में।
- 4:00हैड टु कॉमेंट सुसाइड कॉमेंट सुसाइड ऐसी रही जिंदगी उसकी और
- 4:09अकेले राम की नहीं, सीता को भी सुसाइड करना पड़ा।
- 4:15ऐसी जिंदगी तो मत जीना, इसलिए मैं अक्सर।
- 4:25जो बच्चा कर्क लगन में पैदा हो जाता है, मैं शंकित हो जाता हूँ।
- 4:33कहीं ऐसा न हो वही सारे स्टार राम वाले आ जाएं।
- 4:42मैं यह नहीं चाहता कहता कि राम ने हूँ, राम तो होने चाहिए, उनकी
- 4:53मर्यादा अनिर्वचनीय है। लेकिन जीस तरह का दुनिया ने उसे
- 5:07धोखा दिया पहले सुतेली माता कहते। भाई के प्रेम में उलझा रहा सौतेली
- 5:21पिता अपने काम कर गई और देखिए ये लोग ही रोग अपनी छोटी सी लाभ के
- 5:31कारण दूसरे का जीवन बर्बाद कर देते हैं।
- 5:38अब भला महारानी कहला गई के गई यह तो भरत बड़े अच्छे नहीं थे, तो
- 5:44क्या मिल गया उसको? लेकिन भरत ने कहा, माँ यह आखिरी
- 5:50बार तुझे कह रहा हूँ। तुने ये जो दुष्कर्म किया है,
- 5:57तुने मुझसे मेरा पिता समान भगवान समान बाई छीन लिया है, बस मैं
- 6:06तुझे और कोई दंड नहीं दे सकता और इससे बड़ा दंड हो भी नहीं सकता कि
- 6:11बेटा माँ को माँ न कहे। मैं जीऊंगा लेकिन तू मेरे मुख से
- 6:20कभी मातें नहीं सुन सकेगी तू मर जाएगी कड़कती हुई बस यही तुझे दंड
- 6:29है सब मिलेगा महारानियों जैसा। आदर मिलेगा, रहन सहन, खाना, दाना,
- 6:40मान सत्कार सब मिलेगा। लेकिन मेरी ये जुबान तुझे मान
- 6:45नहीं। और इससे बड़ा दंड कोई हो भी नहीं
- 6:52सकता। भारत तो बड़े ही समझदार थे तो
- 6:58मेरे पास लोग आ जाते हैं। बाबा कोई निकाल दो मुहूर्त मैं
- 7:04निकाल देता हूँ। मुझे पता है।
- 7:12ये पागलपन की इंतहा है, तुम प्रकृति से ज्यादा होशियार बन रहे
- 7:21हो, कच्चा फल तोड़ लोगे, पका लोगे?
- 7:32कैल्शियम कार्बाइड के द्वारा लेकिन क्या वो पका हुआ फर्ज, उतने
- 7:39ही एलिमेंट दे पाएगा उतने मिनेरल दे पाएगा?
- 7:48बड़ी जल्दबाजी में होता। आज सारी दुनिया दौड़ रही है,
- 8:00निपटा दे या चेस्ती किसी हिसाब से निपटा दे, सभी कामों को जीवन हो
- 8:06या मौत हो। प्रकृति के हिसाब से एक बच्चा
- 8:14करीब 40 सप्ताह तक गर्भ में रहता है।
- 8:25पहला दिन गिना जाता है। आखिरी पीरियड्स जब आए थे उसके बाद
- 8:32से शुरू हो जाता है करीब 40 सप्ताह और तुमसे ज्यादा होशियार
- 8:38है प्रकृति जब बच्चा बिल्कुल भर फ़िल्म हो गया, सब कुछ उसका
- 8:50संपूर्ण विकसित हो गया। अब भीतर के अंग तुम तो भला नहीं
- 8:55सकते। तुम्हारी कोई भी फैक्टरी प्रकृति
- 9:04का बनाया हुआ जो अंग है भीतर का ऑर्गन लिवर हो, हार्ट हो।
- 9:11केडरिनिस हो, वो वो नहीं बना सकता तो तुम प्रकृति से ज्यादा समझदार
- 9:25हो गए और ये ब्राह्मण पंडे। मंत्र पढ़ने वाले, संस्कार करने
- 9:34वाले प्रकृति से ज्यादा समझदार अपने आपको दिखाने की चेष्टा करते
- 9:40हैं, है नहीं, जो महामूर्ख होता है।
- 9:47यह फिर करवाने लग जाता है। अब फेरो में जाता क्या है?
- 9:55फेरो में चाहे तुम संस्कृत में गालियां निकालते रहो, किसी को पता
- 9:58तो चलता है। हाँ बच्चा हुआ करता था।
- 10:06आपने देखे होंगे वो। शंकर की गाथा से पार्वती की शादी
- 10:13का बखान करने वाले लोग अब सभी तो ऐसे नहीं होते।
- 10:21कोई कोई ठग भी होता है तो यहाँ माथे पर मोर पंख।
- 10:29हाथ में टेली और उनकी भाषा समझ नहीं आती, लेकिन मैं पकड़ जाता
- 10:36हूँ और बीच बीच में गालियां निकाल देते हैं।
- 10:44जहाँ गालियां निकालनी होती वहाँ सारे मिल के हो कर देते हैं।
- 10:50भलेनाथ भंडार भरेंगे अग्नि मूतनी बंद करेंगे, मैं समझेगा मैंने कहा
- 10:57वाह सुन ये क्या कहा, तुने अगले घर चला गया, मैंने कहा ये क्या
- 11:09कहे सुन पीछे पीछे मैं गया निकल रही यहाँ से।
- 11:14राम को तुमने भी देखा होगा ये ब्राह्मण अगर गाली भी निकाल दे,
- 11:26तुम्हें पता चलता है पूछ न किसी ब्राह्मण से।
- 11:34अगर सचमुच वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रवाह निर्विघ्नम
- 11:40गुरु में देव सर्वकारी शु सर्वदा। तो यह विधवायी क्यों होते हैं?
- 11:49क्यों एक्सीडेंट हो जाते हैं? क्यों गर्भवती नहीं हो पाती?
- 11:53क्यों गर्व गिर जाते है, क्यों शादियाँ ना कामयाब हो जाती हैं
- 12:00कोई कोई तो कुछ महीने के बाद तलाक तक की नौबत आ जाती है।
- 12:08अदालतों में पहुँच जाती है। मेरे इस शहर में कहीं मेरे पड़ोस
- 12:14में कुरान था, कर्मकुंठ अब भी होगा, ये कितना भी टूट फूट जाएं,
- 12:25पागलपन बंद नहीं करेंगे। तो फेरे करा के आता जो साल भर में
- 12:35मनरेगा वाला व्यक्ति तुमसे कहता हूँ मनरेगा वाला ध्यान से सुन
- 12:44लेना तुम्हारे सुनने की बात। जो तुम साल भर में नहीं कमा सकते,
- 12:53हार्ड तोड़ मेहनत करके मुझे डेढ़ घंटे की 2 घंटे की गालियां निकाल
- 13:02के संस्कृत में इन्हें सही पता। संस्कृत आती भी नहीं कुछ लोग तो
- 13:10जो संस्कृत नहीं जानते वो टेली खिड़का के फेरे करवा देते हैं,
- 13:19क्योंकि मेरे करीब भी था जो फेरे करवा के आया था।
- 13:30तो गुरूजी 85 आर ले फेरे कर वाय थे हमें क्या है जाति रंडी हो जाए
- 13:40अब ये तो भाव नहीं है ये वहाँ भी गालियां निकल आया अच्छा माल, चक
- 13:51आया शादी। विवाह शादी में और क्या होता है?
- 13:54माल चकना होता है और आपको इनको शुगर और ब्लड प्रेशर आम बिमारी
- 14:01मिलेंगे। कोई शुगर से मरता है, कोई प्रेशर
- 14:04से मरता है? श्रद्धो की खीर खिला खिला के आप
- 14:11इनको शुगर बना देते हो और जो हराम का खायेगा ब्लड प्रेशर सिमरेगा और
- 14:19क्या करेगा तुमने देखी नहीं है ये राजनेता?
- 14:29इनके पेट देखे गोखड़े आजकल तो जैन मुनियों के भी होने लगे हैं जो
- 14:36अपने आप को त्याग मूर्ति कहलाते हैं।
- 14:38इनकी गोखड़े देख लूँ। प्रकृति से छलकी करते हो, रब न
- 14:51लुठगियाँ क्यों मारे बंदे परमात्मा से ठगी हो करता है लेकिन
- 15:03इन्हें पता नहीं। परमात्मा से ठगी हो नहीं सकती, वह
- 15:08बड़ा अवश्य है, उसने तुम्हें बनाया है, तुमने उसे नहीं बनाया,
- 15:19अब उससे पूछने वाला हूँ तू शुभ काम करा के आया है, ₹50,000 ले के
- 15:25आया है। और शब्द तेरे ये हैं कि जाति रंडी
- 15:28हो जाए। हमें क्या है?
- 15:31बात कोई ठीक है जब लड़ाई झगड़ा होता है तो आप ब्राह्मण को पकड़ते
- 15:38हो। बिचोलों को पकड़ते तो वो तुने
- 15:40शादी करवाई थी। बड़े मज़े की बात है।
- 15:44इसलिए ये बिचोल गिरी नहीं करते इसलिए आज बिचोल गिरी बंद हो गई।
- 15:49सारी उम्र का हम अब हमारी शादी गलत हो गई है और मेरी माता रोज़
- 15:58गालियां निकालती थी। गंगा राम ने शादी कराई।
- 16:03अरे गंगा राम तेरा बेड़ा घर खो जा मैं कहा क्यों माँ गंगा राम का
- 16:08बेड़ा के घर का? तो उसने ये शादी करवाई अरे उसका
- 16:13विचार क्या कर रहा है? बनी आपस में नहीं इनकी?
- 16:22वातावरण ही नहीं फूट बैठते, अनुकूल भी होते हैं, प्रतिकूल भी
- 16:26होते हैं। तुम बचोले को पकड़ लेते हो, तुमने
- 16:37कहा था यहाँ कर दो लेकिन ब्राह्मणों को नहीं पकड़ते हैं।
- 16:45यहाँ एक हनुमान मंत्र में एक ब्राह्मण हसा मत करो एक ब्राह्मण
- 16:50मंत्र में पुजारी था, हनुमान जी का मंत्र था, उसको गायत्री मंत्र
- 17:02ठीक से बोलना नहीं आता था। और उसका परिणाम क्या हुआ?
- 17:09भगवान तो सुनता है ना? अब बोलता ओम भुर वह से तितर बितर
- 17:16वहीं तितर बितर हो गया। सब कुछ रात को चोर आ गए, गल्ला ले
- 17:21गए। अब तितर बितर होना था आखिर में
- 17:26मेरे पास आए, मैंने कहा इसको तितर बितर करो, तुम नहीं तुम तितर बितर
- 17:32करते हो जब तुम कहते हो वकर तुम ठे माह का है, तुम्हें पता है।
- 17:43उसमें कितनी शक्ति है? ऐसे ही वो अग्रणी नहीं हो गया।
- 17:50ऐसे ही सबसे पहले उसकी पूजा नहीं होती।
- 17:54सबसे ज्यादा शक्तिमान और बुद्धिमान वही है जिसकी हम पूजा
- 18:00करते हैं। लेकिन पूजा करने का तरीका नहीं
- 18:04तुम्हें अब मैंने शस्त्र खोल लिए हैं पुराण तो धीरे रखो, थोड़ा
- 18:16ज्यादा चुलबुली है तो प्रश्न पूछ लिया करो।
- 18:20पहले तुम्हारा जवाब दे दूंगा, मैं तो बोलने के लिए हूँ।
- 18:31कहा कि 10 में और 13 में मैं नहीं करना चाहता करना भी नहीं चाहिए।
- 18:42न मरना तुम्हारे हाथ में था और न ही मरने के बाद उस आत्मा की पुनः
- 18:52स्थापना करना तुम्हारे हाथ में यह प्रकृति का काम है।
- 18:57मैंने अपने प्रवचनों में बताया। तुम्हें यू शुड नॉट इंटरफेयर इन
- 19:05हिज़ एक्शन खुद कर लेगी प्रकृति तुम्हें उसमें व्यवधान नहीं डालना
- 19:14चाहिए। ये प्रकृति का काम है।
- 19:20प्रकृति तुम्हें गर्व तब उपलब्ध कराएगी जब तुम अपनी क्लिंगिंग नेट
- 19:28से मुक्त हो जाओगे। अब मैंने कल परसों ही उदाहरण दी
- 19:35थी कि मेरे परदादर एक आना लेकर। वो क्लिंग हो गई।
- 19:41बातों को गर्व प्रकृति नहीं दी जाने इसलिए संत कहते हैं लीव दी
- 19:51क्लिंग अगनेस इन पकड़ो को छोड़ो। तो प्रकृति अपना काम शुद्ध रूप से
- 20:00करेगी ये मत समझना कि अगर बृक का चंद्रमा, कर्क का बृहस्पति आह
- 20:14शुक्र हो मीन का। राहू केतु हो मिथ नो जान के उच्च
- 20:26हो, सारे तो गर्व को पुरवा दें, बच्चे को निकाल दें।
- 20:34लेकिन याद रखना वो कृष्ण नहीं होगा।
- 20:46लग्न हो सकता है ब्रेकफाव प्रकृति ने ये जो 40 हफ्ते लिए है,
- 21:00प्रत्येक की अवधि अलग अलग होती है।
- 21:04किसी जानवर के छः हफ्ते भी लगते हैं, कम भी लगते हैं ज्यादा भी
- 21:09लगते हैं जब गर्व पूर्ण हो गया परिपक्व हो गया एक क्षण भी
- 21:15प्रकृति नहीं रखती चलो काम पूरा हुआ तुम चलो।
- 21:23उसे हम कहते हैं पेन से शुरू हो गया है।
- 21:28प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है, लेकिन हम प्रकृति से ज्यादा गुस्सा
- 21:33इसलिए मार खा जाते हैं। कहाँ तक नाम गिनवाएं सभी ने हम को
- 21:44लूटा है शुद्ध मुहूर्त के नाम पर पहले तुम लग्न बढ़िया निकाल के दे
- 21:55कर जाते हो, फिर तुम उपाय बढ़िया पूछते हो।
- 22:04फिर जीवन में हिसाब दो कर्मों से होगा।
- 22:06प्रारब तो तुम्हारे बने हुए हैं, ऐसे तो कोई जन्म नहीं लेता हूँ।
- 22:13मानस का जन्म ऐसे तो नहीं मिलता बहुत कुछ होता है उसकी बेक में।
- 22:19स्मृतियां होती हैं वासनाएं कल्पनाएं अलकांक्ष सोपन होते हैं।
- 22:27कुछ योजनाएं धरी की धरी रह गईं। वो तुम्हारे अचेतन वन में बसी हुई
- 22:33हैं। उनको साथ लेकर पोटली की तरह तुम
- 22:36चलते हो। और नए घर में प्रवेश कर जाते हो
- 22:40जैसे तुम गर्व करते हो। ये काम तुम्हारा तो है और अफसोस
- 22:48की बात है कि प्रकृति का सारा काम मालूम ने अपने हाथ में ले लिया।
- 22:53बड़ा शोक है। लोग मुझे पूछते है आज दुनिया दुखी
- 23:00कम है? प्रकृति के ऊपर विजय प्राप्त करने
- 23:03की चेष्टा उसको दुख में दकेल देते है।
- 23:12प्रकृति के नियमों का उपयोग करो, सुखी हो जाओ।
- 23:20प्रकृति के नियमों का उपयोग करो लाफ ग्रैविटेशन को देखो उसके
- 23:26हिसाब से करो बहुत कुछ मिल जायेगा ग्रैविटेशन फोर्स कहाँ तक काम
- 23:32करती है? और सभी सिद्धांतों को देखो खोजो
- 23:39उनके अनुसार काम करो उनके विपरीत मत करो तो तुम्हें सुख के साधन
- 23:45मिल जाएंगे प्रकृति को जीतने की चिष्ट मत करो जीते तो नहीं जाएगी
- 23:52वह कभी? प्रकृति का उपयोग कर लो नियमों का
- 23:57अपनी खुशहाली के लिए हम जन्म में व्यवधान डालते हैं,
- 24:13निकालो शुभ व्रत यहाँ काम क्या आएगा?
- 24:17आग्रह आग्रह ब्राह्मण है, ब्राह्मण के पास जाओ मुहूर्त
- 24:21निकालो। सर्जन से ज्यादा गाइरोकोलॉजिस्ट
- 24:27से ज्यादा हम तरजीह देते हैं उस मूड़ ब्राह्मण को जो ठीक से लिखना
- 24:35भी नहीं आता, जिससे टर्ली बजाना जानता है।
- 24:48हिंदुस्तान जब तक इन पंडितों से आजाद नहीं होगा, मेरे को ऐसे ही
- 25:01दूसरे दिन लोग मारने नहीं आ जाते। पता है धंधा चौपट करते हुए।
- 25:07ये आज प्रतिक्रिया आ गयी। तुम्हारे सामने पता नहीं कितनी
- 25:11प्रतिक्रियाएं मेरे पास आई और मैं उन्हें बाहर की वह सुलटाकर मैं
- 25:23तुम्हें मूढ़ मान्यताओं से मुक्त करना चाहता हूँ।
- 25:27ये मूढ़ मान्यताएँ। जब तुम्हें बड़ा दुख देती हैं,
- 25:31बड़ा दर्द देती हैं, इनसे मुक्त हो जाओ, खुशहाल हो जाओ ये
- 25:37ज़ंजीरें हैं तुम्हारे लिए, तुमने पूछा पुत्र माता की मृत्यु हो गई।
- 25:51दश्म या तेरस जो भी तुम्हारी है, कइयों की रस्म चौथा होता है,
- 25:59लेकिन ये रिवाज़ इनकी साइंटिफिक वैदिग्न को पता नहीं मुझे पता है
- 26:08तो मैं तुम्हें बोल रहा हूँ। शायद 100 में से कोई एक व्यक्ति
- 26:13सुन ले और सुन ले तो भला खुद का ही उसका ही भला न सुन ले।
- 26:22तो भला अगर ब्राह्मण के वेद मंत्रों में।
- 26:29फेरों में इतना दम होता जो तलाक क्यों होते हैं?
- 26:36क्यों? विवाह दुख का कारण बनता?
- 26:41फिर ठीक से साइंस को पढ़ा नहीं था क्या?
- 26:50एक कुंडलियों का मिलान, होरोस्कोप लहर विज्ञान सभी चीजों का मिलान
- 27:00गण मिलते हैं हम कितने गुण मिलते हैं बकोट योणी नाड़ी यह सब कितने
- 27:06मिलते हैं यह सब एक साइंस से। है आज भी लेकिन है तो लेकिन
- 27:15बिल्कुल वैसे जैसे मोहनजोदड़ो रप्पाकाल में लिखे गए शिलालेखियों
- 27:23के ऊपर की लिपी तुम पढ़ो नहीं पता।
- 27:28फिर ऐसी लिपियों को क्या करें? जब तुम पढ़ नहीं सकते अगर तितर
- 27:34वितर ऋणी में ही करना है तो वो तो हो ही जाएगा।
- 27:48मैं इन पंडितों की बकवास को सुनना नहीं चाहता, बिल्कुल ठीक सभी
- 27:56देवताओं को स्मरण करके साक्षी करके सभी प्रकार के कर्मकांडों को
- 28:03निभाकर। अगणी को सक्षी करके, जल को साक्षी
- 28:07करके सभी तत्वों को साक्षी करके जरूर फेरे करवातें हैं।
- 28:13फिर वो क्यों फैल हो जाते हैं? इस साइंस को ठीक से पढ़ाने क्या?
- 28:25नीम हकीम खत्राई जान नाम नहीं लूँगा यहाँ मेरी एक बहन, धर्म,
- 28:34बहन मेरे रकड़ी बनते थे, राखी के दिन आ गई मैंने कहा बहना।
- 28:43आपके राखी मत बा कहते क्यों भैया, मैंने कहा बस मत बा, वो तो रोने
- 28:55लगी बता तू एक बहना। ये कच्चा धागा हाथ से तो टूट
- 29:05जाएगा लेकिन इस कच्चे धागे को प्रकृति नहीं तोड़ पाएगा।
- 29:17ये धागा देखने में सूक्ष्म है। लेकिन इसके भीतर के तंतु बड़े
- 29:23गज़ब के हैं। ये एक वचन है मेरा तुम्हें जब मैं
- 29:29अबकी ना निभा पाऊं कहती हैं मतलब मैंने कहा मतलब ये है कि बस मैं
- 29:37तुम्हारी रिक्शा नहीं कर पाऊंगा। अब तू समझ ले रोती चलाती चली गई
- 29:48अब आज तो सिर्फ रिवाज रीती निभाए जाते हैं।
- 29:59और मैं मुझे ज्यादा ना भला हो तो ज्यादा अच्छा है तो वो बेचारी चली
- 30:07गई और उसके थोड़े महीने बाद उसकी मृत्यु हो गई।
- 30:18और मुझे पता है मैं प्रकृति से नहीं लड़ सकता, लड़ भी सकता हूँ
- 30:25तो लड़ता नहीं क्योंकि प्रकृति बहुत वाली है।
- 30:30प्रकृति से लड़ने का अर्थ उसके विधान से लड़ना है।
- 30:34इसलिए जो जैसे होता है उसको होने देता हूँ स्वीकार करना।
- 30:40यही बाबा नानक ने कहा जो तुद पाबय स्विपलिकर तू सदा सलामत नरंकार।
- 30:50बस गनीमत इसी में है तुमने कुछ बनाया नहीं, तुम कुछ बना सकते
- 30:55नहीं, सिर्फ दाबा ठोक सकते हो, वो तुमने ठोक दिया ये घर मेरा ये
- 31:02परिवार, मेरा ये चमचमाती कार मेरी।
- 31:06ये 10 बिल्डिंग मंजिला बिल्डिंग मेरी ये अकूत धन संपत्ति मेरी ये
- 31:15बलिष्ठ शरीर, मेरा ये पुत्र पोतरा दी मेरे तुम सिर्फ दावा कर सकते
- 31:20हो है तुम्हारा कुछ भी नहीं। यहाँ एक घड़ी जो बाप होता है,
- 31:28पुत्र बन जाता है यहाँ हुआ है मेरे घर में मेरा पिता मेरा पुत्र
- 31:36बन के आ गया और मेरा पुत्र मेरा पौत्र बन के आ गया।
- 31:40अब क्या करोगे उसको बस तुम्हें पता नहीं चलता, आँखों वाली देख
- 31:45लेते हैं। दशम और तेरा ये तुम्हारा काम भी
- 31:58नहीं है पुत्र तुम्हें पता नहीं किसकी गति करानी तुमने आत्मा देखी
- 32:08तुम कहते हो घर वाले नहीं मानते? तो तुम तो समझदार हो तो विद्रोह
- 32:18करें नहीं, प्रेम से समझाओ, नहीं समझे तो ठीक।
- 32:29झगड़ा क्यों नहीं करना है? एक तो जीव घर से ही चला गया।
- 32:34दूसरा तुम झगड़ा हो, प्रेम से समझाओ, अगर समझ में आता है तो ठीक
- 32:42है तो मैं कह रहा हूँ। अगर ब्राह्मणों के मंत्रों में
- 32:51इतना बल होता तो कितनी बार विष्णु का नाम लेते हैं?
- 32:59पुंडरी काक्षम कितनी बार शंकर का नाम लेता है?
- 33:11कितनी बार देवी देवताओं का नाम लेते हैं?
- 33:13याद करते हैं, लेकिन याद करना ही गलत है।
- 33:23ये लेपियां इनसे पढ़ी नहीं जातीं। इनके बस की बात नहीं है वो फिर जब
- 33:29ध्यान। दक्षिण में रहता है।
- 33:37एक ब्राह्मण मेरे पास आया करते थे।
- 33:39कहते थे बाबा थोड़ी दक्षिणा ज्यादा देख कर मैं समय अवधि बता
- 33:44देता हूँ। कहते हैं जितना लम्बा खेचूंगा।
- 33:51उतना किसी न किसी गपोड़ के नाम के ऊपर यहाँ रख दो इतना ये गोदाम के
- 34:04लिए संकल्प मस्त हो। अब गौ दान के लिए ₹100 रख देता
- 34:12है, गौ ₹100 में आती है, भला गहू की पूंछ का बाल नहीं आता है?
- 34:17₹100 आगे रसम वो करवा रहा है। आगे तुम रसम निभा रहे हो।
- 34:30और फिर अगर कोई झगड़ा हो जाए व्यवस्था तो ये है संविधान में।
- 34:46तो कानून तुम्हें पूछेगा, तुम शादी शुदा हो?
- 34:49किसका प्रमाण देखे हो पहले तुम्हें प्रमाण दिखाना पड़ेगा ये
- 34:54देखो जी हमने शादी करवाई, फेरे लेने के बाद भी यू विल हैव टु
- 35:03रजिस्टर योरसेल्फ। एस ए कपल हम सहभागी हैं, हम पति
- 35:13पत्नी हैं। इसके लिए तुम्हें रजिस्ट्रेशन
- 35:15करवाना होगा अन्यथा तुम पति पत्नी नहीं।
- 35:23तो फिर तुम्हारे फेरों की औकात क्या है?
- 35:25तुम्हारे ब्राह्मणों की औकात क्या है?
- 35:28और तुम्हें पता है कि जीस गणेश को तुम बताते हुए छोटी सी पटियाँ
- 35:32होती है उस पे बता देते हो लकड़ी की लकड़ी की पटियाँ और वह 1200
- 35:42क्विंटल का है। अब तुम उसको बैठाओगे कहाँ
- 35:56तुमने देखा नहीं जीस शंकर को तुम बुलाते हो, तुम्हें पता नहीं
- 36:01तुम्हारा पंडाल कम पड़ जाता है तुमने तो छोटी सी पंडाल।
- 36:13और उस पंडाल के अंदर ही फेरे करवा ली।
- 36:19ये सब प्रतीक हैं। वास्तविकता में कुछ भी नहीं है,
- 36:25निभाना छोड़ दो। 16 संस्कार इनके बारे में बोलना
- 36:30शुरू कर दिया है तो बोलेंगे इनमें से कोई संस्कार ना निभाओ,
- 36:38क्रियाएं करो बच्चा जन्मा डॉक्टर के पास ले जाओ।
- 36:47वह एक्स्पर्ट है, उसने पढ़ाई की है।
- 36:51जरूरत के हिसाब से इसको दवाई देगा।
- 36:58वह सब जानता है। इसको एनलजसिक देना है, नहीं देना
- 37:03है, इसको ऑक्सीडोसिन देना है, नहीं देना है।
- 37:08जब प्रकृति स्वयं अपना काम करती है।
- 37:1140 हफ्ते में तुमने क्या किया? अब मैं कहूंगा तो तुम्हें बुरा
- 37:17लगेगा। इस 40 हफ्ते में तुमने जो कुछ
- 37:22किया वो तुम्हें जानता हूँ। बच्चा हो जाता है।
- 37:40तुम कहते हो ये मेरा है चार इस हफ्तों में तुमने किया क्या?
- 37:49बस एक मज़ा ही लिया है। इससे ज़्यादा ना बोलूं तो अच्छा
- 37:54रहूँगा मैं भी और आप? क्योंकि कमेंट तो मैं कर ही नहीं
- 38:02देता। आपको पता ही है बस एक बार कमेंट
- 38:06कर पाओगे। उसके बाद ब्लॉक इन सड़ी हुई
- 38:10खोपड़ियों को मैं ज्यादा अवसर नहीं दिया।
- 38:18मुझे पूछ लेते हैं लोग बाबा आपके इतने सुन्दर वाणी, इतने सुन्दर
- 38:27गीत इतना तार्किक, इतना गागर, मिस सागर?
- 38:36लेकिन श्रोता कम क्यों? मैंने कहा वो मेरी इच्छा है।
- 38:43बाबा कहा करते थे जब शुरू किया कम्यून मत बनाना, कम्यून का मतलब
- 38:48भीड़ मत करना। मैं गिनती नहीं इकट्ठे करता, मैं
- 38:54मोमोक्ष इकट्ठे करता हूँ, जो मेरा काम यहाँ मैं थोड़ा सा भी देखता
- 39:00हूँ। इसने मोमोक्ष खोदी, मैं इसको
- 39:06प्रणाम कर लेता हूँ आप कोई और ढूंढ लो भाई?
- 39:14मुक्त तुमने होना है मेरी सरदर्द दी नहीं इसलिए कम है पर मैं कोई
- 39:25ऐड नहीं लगाता, मैं कोई बड़ा सा पांडाल नहीं।
- 39:31कोई नाव वाली टोपी नहीं पहनता, मैं कोई जुलुस नहीं निकालता अपना
- 39:40मैं कोई रात को डेढ़ बजे लोगों को जला जगाता नहीं, मेरा उल्लू वाला
- 39:47कम थोड़ी है। मैं कहता हूँ आराम से सो जाओ, रात
- 39:52सोने के लिए है मज़े से सो जाओ और जब तुम्हारी नींद पूरी हो जाए,
- 39:58उसे ब्रह्म मुहूर्त वह 2:00 बजे हो, वह 4:00 बजे हो, वह 6:00 बजे
- 40:02हो 10:00 बजे हो कोई बात नहीं तुम्हारा ब्रह्म मुहूर्त तब?
- 40:09जब तुम्हारी नींद पूरी हो जाए, कच्ची नींद से अगर उठ गए तो
- 40:16तुम्हें पता नहीं तुमने क्या क्या गंवा दिया नींद पूरी होने के बाद?
- 40:26आँखें खुल जाएंगी खुद को खुद ये प्रकृति का काम है, तुम इसमें भी
- 40:31खुद को झोंक देते हो, अलार्म लगा देते हो, इतने बजे जागते है क्यों
- 40:37ब्रह्ममूर्त अच्छा होता है, 3:40 और मूर्खों है मूर्खों का जम है।
- 40:47इसका बड़ा गुण गान किया है पर अमृत बरस्ता है आह तुमने देखा है
- 40:56अमृत बरस्ता शुद्ध हमारी ऑक्सीजनेटेड माहौल तो हमने भी
- 41:01देखा। लेकिन वो अमृत का बरसता हुआ किसने
- 41:06देखा? कोई बरसता नहीं है।
- 41:09अमृत और थोड़ा सा लेट उठ जाओगे तो कोई फर्क नहीं पड़ता।
- 41:16उस जगह चले जाना जहाँ धुल धामा से न हो।
- 41:18मुझे लोग कह देते है क्रिया योग करने बाबा।
- 41:22फिर क्या 3:00 बजे उठी नहीं, नहीं नहीं, फिर तो तुमने एक की कीमत पर
- 41:30दूसरे को पाने की चेष्टा की। नींद की कीमत पर कुछ भी गवारा
- 41:35नहीं नींद सबसे पहले। नींद पूरी हो जाए कल बात में सब
- 41:50के यहाँ आस पास आजकल ग्रीनरी कुछ ज्यादा होने लगी है।
- 41:56लोग सचेत होने लगे है। अच्छा है पेड़ लगाया करो, खूब
- 42:00लगाया करो जब कोई बच्चा जन्म जाए तो पेड़ लगाओ।
- 42:07जब किसी की मृत्यु हो जाए तो पेड़ लगाओ कोई भी संस्कार 16 संस्कार
- 42:16शादी करा के आओ, पेड़ लगाओ ये तुम्हें जीवन देंगे।
- 42:25जीवन दायिनी ऑक्सीजन देंगे। जिसके अभाव में कोरोना में कितने
- 42:30लोग हमने मरते देखे? दम गुटके मरते देखे तुम सभी ने
- 42:39देखा होगा कैसे बिना ऑक्सीजन के लोग मर गए?
- 42:48सुबह सुबह धमा से नहीं होती। वातावरण में थोड़ी गर्माइश नहीं
- 42:56होती क्योंकि सूरज नहीं निकला होता अन्यथा ऑक्सीजन तो वो ही 21%
- 43:02होती है। तो घबराना मत, किसी पार्क में चले
- 43:11जाना सब जगह पार्क होते हैं। कहीं एकांत स्थान में चले जाना,
- 43:18क्रिया योग तो कहीं भी कर लेना जाके बस इन बातों का ख्याल रखना।
- 43:23नींद की कीमत पर वो तो फिर तुम गंवाओगे कमाओगे और सब जगह भाग
- 43:33बगीचे होते हैं सब जगह लोग आज जागरूक हो चूके हैं वहाँ चले
- 43:40जाना, ऊंचे ऊंचे श्वास लेना। ऊंचे श्वास लेना जैसे मैंने
- 43:45समझाया पेट तक को भर लेना, सारे फेफड़े भर लेना, तुम्हें जीतने
- 43:52परमात्मा ने फेफड़े दिए हैं, तुम उनका एक चौथाई भी प्रयोग नहीं
- 43:57करते, फिर कोई क्या करेगा? परमात्मा ने इतने फेफड़े तुम्हें
- 44:05इसलिए तो नहीं दिए कि तुम एक चौथाई ही भरो, सारे भरो, पूरा
- 44:11सांस लो, ज़ोर से सांस लो और ऑक्सीजनेटेड माहौल में सांस लो और
- 44:18पेड़ तक को भर लो। वह थोड़ी सी साइंटिफिक प्रक्रिया
- 44:24है। पेट को क्यों भरना?
- 44:27क्योंकि यहाँ नाभि के पास कुंडलनी शक्ति होती है उसपे थोड़ी सी चोट
- 44:32लग जाएगी और ये कुंडलनी चेतना से भरी होती है।
- 44:42तुम्हारे भीतर दया जगेगी, करुणा जगेगी, आनंद जगेगा और जीवन का पता
- 44:49चलेगा। फिर तुम ये नहीं पूछोगे।
- 44:53परमात्मा ने सृष्टि बनाई। अभी लोग पूछ लेते हैं मुझे मैं
- 45:01गौर से उनकी तरफ देखता हूँ। समझ गया ये जो माथे पर 12 बजकर
- 45:083.75 मिनट हो गए ना यह बताती हैं कि तुम दुखी हो।
- 45:16अगर सुबह उठ के क्रियाएं किया होता लंबे लंबे श्वास परमात्मा ने
- 45:20दिए हैं। भाई इसका फायदा क्यों नहीं उठाते?
- 45:26तो फिर ऐसे ही विचार आएँगे। क्यों बनाएं?
- 45:33फिर ऐसे विचार नहीं आएँगे। अगर तुमने खुल के सांस लिया, खुल
- 45:37के सांस छोड़ा, सांस को छोड़ो, सहस्रार पे चोट पड़ेगी और ये दो
- 45:46ही बिंदु हैं जहाँ चोट पड़नी चाहिए।
- 45:52कुंडलिनी मूलाधार। और सहस्त्र टॉप और बॉटम इन दोनों
- 46:04पर स्ट्राइक करना है। हमें और क्रिया योग से बेहतर ढंग
- 46:08से हो पाएगा। ये बाबा की बताई हुई तकनीक।
- 46:16मैंने छत्तर से शुरू किया, छत्तर से पहले मैंने करता था 1900 छत्तर
- 46:21में शंकर मंदिर के भीतर बैठा। मैं मुझे यह बाबा बता के गए थे यह
- 46:25कल तुम मोक्ष हो तुम्हारी मोक्ष शांत हो जाएगी।
- 46:33तो तुम पूछते हो परमात्मा ने सृष्टि क्यों बनाई?
- 46:36मैं समझता हूँ कि तुम पूछते क्यों हो तुम मुझसे यह पूछते हो क्यों
- 46:41मनाई और मैं जानता हूँ कि तुम पूछते क्यों हो क्योंकि तुम दुखी
- 46:46हो, खुश होते तो तुम शुक्रिया न करते।
- 46:53शिकायत नहीं, ये एक प्रकार की शिकायत है।
- 46:59अगर तुम्हारा रोम रोम खेला होता तो तुम अहो भाव से भरवे मेरे पास
- 47:06आद्य है के परमात्मा ने बड़ी सुंदर शिष्य बनाई।
- 47:13ये खेलते हुए मोर ये गाती हुई कोयल ये चलती हुई भीनी भीनी सुगंध
- 47:19लिए हवाएं फिज़ाएं ये बागों में खिलती हुई कलियाँ ये मैकती हुई
- 47:28हवाएं फिज़ाएं। बड़ा सुन्दर है और तुम इनमें से
- 47:36कुछ भी तो नहीं बना सकते। जो यह पूछता है सृष्टि को बनाई वह
- 47:43इस योग्य नहीं कि एक जरिया खुद बना दे।
- 47:50बस सवाल क्यों पूछता है ये मैं अच्छी तरह से जानता हूँ, काश तुम
- 47:56सुखी हो जाते, फिर तुम ये सवाल नहीं पूछोगे, संत कभी नहीं कहेगा
- 48:05क्यों? इतनी सुंदर सृष्टि अगर बनाई तो
- 48:09तेरा धन्यवाद तू बना सकता था तो बना दी हम तो नहीं बना सकते पर
- 48:19फिर जीसको नहीं, अच्छी लगती भाई मैं तो अक्सर ही करता हूँ।
- 48:24पिछला दरवाजा भी है। हाँ, वहाँ से निकल सकते हो पर
- 48:32महात्मा ने दो दरवाजे रखे नहीं अच्छी लगती तो कौन रोकता है?
- 48:43लेकिन कमाल की बात है। ये कानून तुम्हें मरने भी नहीं
- 48:46देता। मैंने जब पढ़ा कि तुम्हें मरने का
- 48:52अधिकार भी नहीं है, धारा 309 लग जाए।
- 48:55मैंने कहा पागल दिमाग है, अरे जीवन मेरा है।
- 49:05अगर नहीं मेरा जीवन सुखी, तो क्या मैं भर नहीं सकता?
- 49:11इस कानून को फौरन हटा लेना चाहिए। यह कानून तुम्हें तुम्हारा मालिक
- 49:19भी होने नहीं देता। इतना भी अधिकार नहीं है।
- 49:25और कानून तुम बनाते हो अगडम बगडम ये काम का कानून तुम्हें तुम्हारे
- 49:34शरीर के ऊपर अधिकार नहीं है, तुम अगर चाहो तो मर नहीं सकते और फिर
- 49:40रोकेगा। तुम्हें पता नहीं है इसकी गड़बड़ी
- 49:46कितनी हो सकती है। अगर तुमने ज्यादा नकेल कसती, मेरे
- 49:50पास एक आदमी आता था बाबा मैं मरना चाहता हूँ।
- 49:54मैंने कहा धारा 309 अगर न कामयाब हो गए वो कहते हैं, मैं न कामयाब
- 50:00होता ही नहीं। तब चटकनी लगा लूँगा, भीतर से कौन
- 50:05आएगा और बाहर से चार दरवाजे हैं, सब लोग हैं, कौन आएगा, जो आएगा वो
- 50:11ज़ोर कह लाएगा और मुझे कौन रोक पाएगा?
- 50:16ये मैं कहता हूँ जिन्होंने ये नियम बनाया।
- 50:20सोच समझ के नहीं बनाया, कम से कम ये नियम नहीं सोच के बनाया जो
- 50:27मरना ही चाहता है उसको तुम बचाओगे कैसे?
- 50:31वह तो वीडियो बना देगा और डाल देगा ये ले रोक कैसे रोकेगा?
- 50:39मैंने कहा धारा तीन सुनो कहता फिर बाबा मैं दूसरा तरीका अपनाऊंगा
- 50:44मैंने कहा क्या मरेगा? फिर ये लोगों को मारना पड़ेगा
- 50:48मुझे, मैंने कहा वह कैसे कहता मैं 1020 कतल कर दूंगा, मैं तो मरा ही
- 50:55मरा। अगर ये मेरे मरने में व्यवधान
- 50:59उत्पन्न करेंगे तो मैं 1020 आदमी को मर के मर जाऊंगा।
- 51:04मैंने कहा भाई ये तो मत करना, ये तो कानून मुझे तब समझा है ये
- 51:10कानून ही गलत बनाया है ये कानून के ऊपर।
- 51:17प्रबुद्धजन पुनर्विचार करे अरे जिसने मरना वो तुम्हारे कानून से
- 51:24डरेगा, वो तुम्हारे कानून की भी धज्जियां उड़ा देगा।
- 51:29अगर तुम रोकोगे तो ठीक कहा उसने मैं 1020 लोगों को मार के मर
- 51:34जाऊंगा। फिर तो ये मारेंगे मुझे आज रोकते
- 51:37हैं दंडत ही होना है तो फिर ढंग से क्यों ना मैं मैंने कहा नहीं
- 51:47भाई ऐसा काम नहीं करना पुत्र वजह बता मैं तेरे कोई काम आ सकता हूँ।
- 51:55तेरी कोई जरूरत पूरी कर सकता हूँ, तुझे कोई तकलीफ है, कोई दर्द है,
- 52:00दुआ दे सकता हूँ कोई कमी है बता दे जहाँ तक मैं कर सकता हूँ मैं
- 52:06कर दूंगा, ये काम नहीं करना, जो जीना चाहता है उसको मार दे।
- 52:12तू खुद मरना चाहता है देख वो तुम्हारी मोज़ है, वो मैं नहीं
- 52:18रोक सकता, मुझे पता है मैं रोक भी नहीं सकता, तुम अपने घर में सोए
- 52:22होगे मैं अपने कमरे में हूँगा मैं तो बाहर भी नहीं निकलता, कैसे
- 52:28रोकूंगा तुम्हें? ये पाखंड अपन तो 50,000 ले लिए
- 52:48जाति रंडी हो जाए। मुझे कोई कुछ शब्द मुझे आज भी याद
- 52:52है। और मैं एक नहीं मैं सभी
- 52:58ब्राह्मणों को कहता हूँ, ये धोखेबाज हैं।
- 53:06ये चोर हैं, हरामखोर हैं, इन्हें पता ही नहीं कौन शंकर कौन गणेश,
- 53:14इन्हें सिर्फ पता है। लक्ष्मी माता का अपूर्ण तो 50,000
- 53:24मिल गया, जाति ऋण्डी हो जाए फिर तुमने कहा खाक मंत्र बड़े होंगे।
- 53:33तुमने कहा खाक दुआ की होगी भगवान से किस जोड़ी को सलामत रखना भर मत
- 53:39में इनके ऊपर कोई आंच न आए। इनके गृहस्थ जीवन में कोई दुविधा
- 53:48न आए, कोई बाधा न बने, मज़े से जिएं।
- 53:53तुमने तो पीसा देखा होगा ऐसे ही सभी संस्कार हैं यह मृत्यु का
- 54:04संस्कार अब जो चला गया वो तो चला गया जो कर्मकांड करवाने आए उससे
- 54:12पूछ लेना। माता कहाँ है यही बता दे तू उसकी
- 54:21मुक्ति कराएगा तो उसके लिए मंत्र पड़ेगा, उसकी आत्मा को शांति
- 54:27देगा। तुझे पता है आत्मा होती कहाँ है?
- 54:30क्या है आत्मा? आत्मा का पूरा विज्ञान तू जानता
- 54:33है। इन मूर्ख पंडितों को विरासत में
- 54:43मिला है ये काम नीम हकीम खतरा ए जान ये कुछ नहीं जानते।
- 54:56जो मानेंगे तो शोभ उनके लिए मेरे लिए नहीं।
- 55:04मैंने तो अपनी मृत्यु के लिए बोला।
- 55:06किसी भ्रमण को मत बुलाना। प्रकृति अपना काम करेगा।
- 55:13जीस ढंग से मुझे उतारना हो मैं सारा विज्ञान जानता हूँ उस ढंग से
- 55:20उतार लेना पत्थर में उतर जाऊंगा पदार्थ में उतर जाऊंगा फिर वो ही
- 55:28फिर वो ही आज इस शरीर में हूँ कल उसमें होगा।
- 55:35वो ही सुनूंगा। तुम्हारी बात वो ही समझूंगा, वो
- 55:39ही तुम्हारे दुखों का आहरण करूँगा।
- 55:48लेकिन तुमने कहा पुत्र के घरवाले नहीं मानते, देखिये संस्कार बड़े
- 55:55गहरे हैं। तुम इनकी बात तो छोड़ो ये तो
- 56:01पंडितों ने अपनी चाल चली है और मैं भी ब्राह्मण हूँ, लेकिन मुझे
- 56:10इस बात का थोड़ा सा गर्व है। कि मेरे पित्र पिता दादा पढ़ दादा
- 56:22मुझे ठगी नहीं मारते रहे। किसी ने मंत्र नहीं पढ़ा, किसी ने
- 56:30किसी को मुक्त नहीं करवाया। सब ने मेहनत की।
- 56:35मेरे पिताजी हलवाई थे, मिठाई की दुकान थी, सुबह से शाम तक काम
- 56:42करते हैं, 3:00 बजे उठते है। सुबह 11:00 बजे सोते रात सभी ने
- 56:50काम किया। दादा खेती करते थे, बड़े दादा
- 56:53खेती करते थे। कारी में हमारी जमीन थी, अभी तो
- 56:58शायद बेइज्जती होगी न हरियाणा का गांव कारी वहाँ 25 किला जमीन
- 57:08एकड़। सब काम करते थे।
- 57:22मंत्र पढ़कर ठगी मारकर किसी ने आपकी जेबें नहीं काटी और मैं आने
- 57:29वाले अपने वंशजों से भी कहता हूँ, ये काम मत करना।
- 57:36विद्या का सहारा लेना ठगी का नहीं, पाखंड का नहीं।
- 57:42एस्ट्रोलॉजी एक विद्या है जो भृगु ने बनाई कहानी है है कहानी ला
- 57:53तुम्हारी विष्णु के। और लक्ष्मी नाराज हो गई।
- 57:59मेरे सामने मेरे पति का अपमान किया।
- 58:02मैं तुझे श्राप देती हूँ कि मैं तुम्हारे वंशीजों के पास नहीं
- 58:06जाउंगी। देखिये ये भी आएगा।
- 58:14अब शुरू कर लिया है तो जो बोल पाऊंगा बोल पाऊंगा है तो बहुत
- 58:201800 पुराण हैं। मुख्य मुख एक पुराण की भागवत
- 58:26पुराण की कसा कहने की। ये मोरू का पंडित 50,00,000 ले
- 58:32लेते हैं। हेलिकॉप्टर पर उठ के चले जाते
- 58:35हैं। तुम ये समझाते हैं के साथ कुछ
- 58:38नहीं जाएगा, तुम ऐसा मत कर करो और फीस लिखी होती है घर में जाओ
- 58:49ज़रा। मत बेवकूफ बनो और अगर बनना है तो
- 58:54बनो मेरा, मैं सिर्फ समझा सकता हूँ नहीं समझोगे प्रकृति की चोट
- 59:05प्रकृति की मार तुम्हें समझा देगी।
- 59:12कुछ लोग शब्दों से नहीं समझते, कोड़ों से समझते हैं, होश में आता
- 59:23है। बंदा ठोकरे खाने के बाद रंग लाती
- 59:28है। हे ना पत्थर पर घिसने के बाद?
- 59:33ठोकरे खाके सुमन जाओ या बातों से समझ जाओ तुम्हारी मर्जी मैं कोई
- 59:40डिक्टेटर तो हूँ मैंने जैसा जाना तुम्हें बता दिया मैं मानूं या
- 59:48मानूं तुम्हारी इच्छा? देखिए ये नया गर्व जलाने की
- 59:58जिम्मेदारी पंडित करनी होती है ये तो बेचारा अपने पूर्वजों को या
- 1:00:03अपने आपको नया जन्म नहीं दिला सकता।
- 1:00:07जब ये मरेगा तुम देख। जो भी पंडित आएगा, जहाँ के भी हो,
- 1:00:15मुझे पता नहीं कहाँ के बड़ोदरा के हो, शायद हाँ बड़ोदरा के हो जानता
- 1:00:26वानता कुछ नहीं तो मैं क्या क्या बताऊँ?
- 1:00:41ये सब ठगी ठोरी है। मैं सदा ही बोलता हूँ, पापी पेट
- 1:00:46का सवाल है, लेकिन अगर पापी पेट का सवाल होता तो बहुत कुछ मिल
- 1:00:53जाता है। पेट भर जाता है, वासनाएँ नहीं
- 1:00:58भरती वासनाएँ दुष्पूर हैं और ये वासनाओं को भरने में लग जाती हैं।
- 1:01:06पहले पेट को भरते हैं। शुरुआत ठीक थी, इनकी जैसे
- 1:01:12किशोरियां हैं। ये तुम्हारे तथाकथित बाबा हैं।
- 1:01:17ये टोपी नमा रोटी नहीं हैं। इनके पास पहले पापी पेट का सवाल
- 1:01:22था, आज वासना को पूरी करने का सवाल है, व्यक्ति जब थोड़ा सा
- 1:01:33कामयाब होते हो। तो फिर वासनाय सिर उठाती है वो
- 1:01:37गलत है, जरूरतें तो सिर उठाएंगी, उनको पूरा करना तुम्हारा फर्ज है
- 1:01:44लेकिन वासनाय सिर उठाएँगे, उनसे कैसे बचोगे यही संत बताता है।
- 1:01:59और बहुत से लोग मण्डे राजनीति जब थोड़ा सा कामयाब हो जाते हैं तो
- 1:02:05जरूरतें पूरी होती हैं तो फिर वासनाएँ पूरी करने में लग जाती
- 1:02:09हैं जो के दुष्पूर्ण है। वासनाएँ कभी पूरी नहीं होती, जो
- 1:02:15भी ब्राह्मण आएगा। घर में क्लेश क्यों करते हो?
- 1:02:21करवा लो भाई वो जो चार बड़ी बड़ी बातें कहीं मत सुनना तुम मेरी
- 1:02:35माता का देहांत हुआ, मैं राम जी का रोल किया करता था।
- 1:02:38शृुपना काकी नायड थे उस दिन। पर्दा गिरा दिया गया।
- 1:02:46मुझे पता नहीं था। मैं अपने रोल में मस्त होता था तो
- 1:02:52मेरे पास मेरे एक मित्र आये। मुझे कहते राम जी बीमार थी, क्या
- 1:02:59मतलब? मैंने कहा क्या हुआ कहते बुरी खबर
- 1:03:06है। माता का देहांत हो गया जो मंच के
- 1:03:17ऊपर थे। वो कहते हैं, हम पर्दा गिरा
- 1:03:19देंगे, घोषणा करते हैं नाइट ही चल रही थी, मैंने कहा देखो व्रत औरत
- 1:03:27थी करीब सौवे साल में चल रही थी, 90 से ऊपर थी, 1 दिन तो जाना ही
- 1:03:35होता है। अब हजारों लोग बैठे हैं, नाइट का
- 1:03:41आनंद ले रहे हैं। मैं अपने स्वार्थ के लिए इनका
- 1:03:48मज़ाक क्रित नहीं कर सकता। तुम ये बात बाद में कर लेना, हम
- 1:03:56एक डॉय लाख पहले। इसको रोक देंगे और फिर आप खबर
- 1:04:01सुना देना जनता चली जाएगी वैसा ही किया।
- 1:04:10तू चला गया उसको वापस बुलवाने का हमारे पास।
- 1:04:18ना तो तरीका है और बुलाए भी क्यों?
- 1:04:21जर जर सीरीज था चली गई। नया शरीर मिल जाएगा।
- 1:04:26हाँ इसके ऊपर हम काम कर सकते हैं, जो कर सकते हैं वो करेंगे।
- 1:04:33जिसके करने का कोई फायदा नहीं है। उसको हो जाने दो।
- 1:04:40यह घर है टूट गया, नए घर में इनको प्रस्थापित कर देंगे।
- 1:04:50अगर कोई मानता है तो अच्छी बात है।
- 1:04:56बात ये नहीं कि ब्राह्मण तुमसे कुछ फीस ले जाएंगे, धन ले जाएंगे,
- 1:05:04वो तो ले जाएंगे। मैं इन किशोरियों से श्रद्धा कहता
- 1:05:07हूँ कि तुम मांग लिया करो लेकिन ये जो कचरा भर के जाते है ना
- 1:05:12दिमाग में ये मत किया करो। ये कचरा इनके चेतन मन में चला
- 1:05:18जाएगा। तुम तो मुर्ख हो, तुम्हें तो पता
- 1:05:21नहीं है ना चेतन का, ना अवचेतन का, ना अचेतन का, ना सामूहिक
- 1:05:29कलेक्टिव अनकॉन्शियस का ना कलेक्टिव कॉन्शस का तुम्हें कुछ
- 1:05:33पता नहीं तुम भीतर गई नहीं। तो तुम्हें पता नहीं तो तुम लोगों
- 1:05:41को पागल मत बनवाओ, ये इनके भीतर संस्कार जम जाएंगे।
- 1:05:51जैसे तुमने जन्मो जन्मो से ये संस्कार बना लिया कि मैं शरीर आज
- 1:05:55भुगत रहे हो। पत्थर से चले थे, मैं शरीर चेतनता
- 1:06:03आती गई, थोड़ी थोड़ी आती गई और आज मानस का शरीर मिल गया।
- 1:06:12इनमें से तुमने कुछ नहीं किया एक कजररा कभी बनाया हो तो बता दो न
- 1:06:20तुम बिगाड़ सकते हो न तुम बना सकते हो।
- 1:06:23उसकी सृष्टि अवध गति से चलती रहेंगी, चलती रही है।
- 1:06:29मैटर कैन नीदर बी क्रिएटेड नॉर कैन बी डिस्ट्रॉइड उसकी सृष्टि
- 1:06:35में ना कुछ कम हो सकता है ना कुछ ज्यादा हो सकता है।
- 1:06:40वो बड़ा समझदार है सेस से अपना लक होवे ना चले ना।
- 1:06:49तुम हजारों पे कर लो, लाख पे कर लो क्या करोगे?
- 1:06:54बस तुम्हारी मान्यताएँ हैं, ये तुम्हें तंग करेंगे।
- 1:07:01इन मान्यता को तुम सही करने की फिराक में इतना हौसला नहीं
- 1:07:04तुम्हें की इन मान्यता को तोड़ दो।
- 1:07:08कोई नहीं मूर्खों ने ऐसा जाल बिछाया है तुम्हारे भीतर कूट कूट
- 1:07:14के बिठा दिया है तुम्हारे चेतन में अब ये तुम्हारे अचेतन में
- 1:07:19बैठा है ना कि मैं शरीर हूँ, मैं मन हूँ ये कूट कूट के बैठ गया अब
- 1:07:26कौन निकाले इसको? अब तुम कहाँ पते हो?
- 1:07:32जब गुरु कहता वही नहीं, मेरे ऊपर विश्वास कर लो, तुम भाग जाते हो
- 1:07:36तेरे ऊपर क्या विश्वास करो तू तो कल गुफाओं के अंदर पकड़ा गया था।
- 1:07:41छोरियों के साथ विश्वास करना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
- 1:07:52विश्वास दिलाना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
- 1:07:57कोई एक सूरमा होता है जो तुम्हारी सभी कसौटियों पर खरा उतर जाता है
- 1:08:03या फिर इतना प्यारा होता है कि तुम्हें उसकी कसौटियों पर खरा
- 1:08:07उतरना पड़ता है। कृष्ण कहता है।
- 1:08:10वह रास भी रचाएगा वह नग्न नहाती हुई युवतियों के वस्त्र भी
- 1:08:16चुराएगा। वह उसके गुप्त अंगों को भी देखेगा
- 1:08:21और फिर भी पूजा जाएगा। वह कोई अति प्यारा व्यक्ति होता
- 1:08:26है। आज भी तुम गीत गाते हो उसके कुकृत
- 1:08:35तुमने कहा याद रखा है उसके कुकृत भी तुमने अलंकारों में डाल दिए।
- 1:08:45तुम उसको चोर भी कहते हो तो बड़े खुश होते हो।
- 1:08:49मखन चोर वो नन्द किशोर जो मखन चोर वो नन्द किशोर जो।
- 1:09:06कर गयो मन की चोरी रे सुध विसरा मोर।
- 1:09:25वो काला वो काला इक भा सुरीवाला कर गयो, मन की चोरी रहे तुम उसे
- 1:09:44चोर कहते हो। वैसे तो अगर गाली निकाल लो तुम
- 1:09:48चोर किसी को कह दो, वो झपट मरेगा तुम्हारे लेकिन तुम बड़े प्यार से
- 1:09:55चोर कहते हो उसको और उसको पूछते हो है ना कमर?
- 1:10:04करामत हैं तो हम बोलते हैं सत्य बोलते हैं, हमारा कोई लोक नहीं
- 1:10:14है। हमने कोई मंत्र बोल के आपसे
- 1:10:17दक्षिण नहीं लेनी है। हम सिर्फ कहते हैं कि इस ब्राह्मण
- 1:10:22को दक्षिण दे देना है क्या आप जाओ भाई।
- 1:10:27तुम्हें दक्षिणा ही चाहिए जाती, रंडी हो जाए तुम असा मत करो।
- 1:10:35खी खी कर ले जातो बस थोड़ी। तो इसको जो चाहिए चारपाई चाहिए,
- 1:10:46बिस्तर चाहिए और जो कुछ चाहिए और दे दे उसको इसका घर बार चल जाएगा।
- 1:10:53इसको और कुछ नहीं आता। यह मूर्ख पण्डे हैं।
- 1:10:58इनके बाप दादू ने एक कुछ सीखा दिया पढ़ाया लिखवाना है नहीं।
- 1:11:02इन्हें पता है लोगों को मुर्ख बनाओ तो तुम्हें खाने पीने को मिल
- 1:11:04जाएगा। पक्का करके गए हैं पक्का ठूंस
- 1:11:08ठूंस के जैसे तुम छोड़ नहीं पाते कि मैं शरीर हूँ, वैसे ही ये
- 1:11:13मान्यताएँ तुम्हारे भीतर कूट कूट के बिठाती हैं।
- 1:11:16देखो 16 संस्कार पर अंतिम संस्कार ये है।
- 1:11:23और अग्रय अग्रय ब्राह्मण है। सब संस्कारों को ब्राह्मण कराएगा।
- 1:11:34मुझसे पूछा है पुत्र कोई आवश्यकता नहीं है तुम सरदार को?
- 1:11:45उसके फूलों को गंगा जी में प्रवाहित करो, पूरी श्रद्धा से
- 1:11:51पूरे आनंद से ये कर्मकांड आखिरी बस इसके बाद कुछ नहीं करना होगा।
- 1:11:59फिर बाकी तो फिर ब्राह्मणों का है।
- 1:12:02कि फिर श्राद्ध करो फिर वो करो फिर वो करो लेकिन ब्राह्मण करो,
- 1:12:06मुझसे लोग पूछ लेते हैं बाबा ये श्राद्ध अगर ब्राह्मण ना मिले तो
- 1:12:11मैंने कहा वो तो मिलेंगे नहीं, उनको तो शुगर हो गई खिला खिला के
- 1:12:16मार दिया आपने। और ब्राह्मण हो, ब्राह्मण की
- 1:12:22घरवाली हो या उनके पास बैठने वाले हो, सब शुगर से मर जाते हैं या
- 1:12:29ब्लड प्रेशर से मर जाते हैं। दंड भी मिलता है ना तुम्हें बुधु
- 1:12:40बनाने का तुम्हें मुर्खबराने का। और पहले खोपड़ी इनकी खराब होती
- 1:12:46है। बहुत से लोग भराती हैं पड़े पड़े
- 1:12:50मेरे पास आ जाते हैं बाबा क्या ये बातें सत्य होती हैं?
- 1:12:55मैंने कहा तुम तो लोगों को को सत्य होती हैं।
- 1:12:58अरे बाबा वो तो हमारा कारोबार है, पापी पेट का सवाल है।
- 1:13:03लेकिन वैसे अब सत्य तो तुम से ही पूछेंगे ना?
- 1:13:08मैंने कहा नहीं सब गड़बड़ घोटाला है, मत किया करो बस कारोबार के
- 1:13:13लिए तुम्हें करना पड़ता है कर अब तुम्हारी रोटी तो नहीं ना छीन
- 1:13:19सकता। इसलिए मैं कहता हूँ इनको पीसे,
- 1:13:24टके दे दो चारपाई वगैरह दे दो, बेच देंगे इतनी चारपाईयों ने क्या
- 1:13:29करना? इनकी जो इच्छा है ईशना है वो पूरी
- 1:13:39कर दो और इन्हें को कृपा कर दो, एक हमारी खोपड़ियाँ मत भरो।
- 1:13:45हमारे यह चेतन मत भरो इन बकवासों से इन बकवासों में कोई तत्व नहीं
- 1:13:50है कोई तत्व न है फिर अगर कुछ भी न बने पुत्र तो फिर जब ये गरुड़
- 1:14:03प्राण की कथा सुनाएँ मैं बताऊँगा गरुड़ प्राण पर भी आऊंगा।
- 1:14:13अगर ईश्वर ने मुझे श्वास दिया तो सब बोलेंगे 5 साल से बोल रहा हूँ
- 1:14:19लगातार और भी और फिर अगर कुछ भी ना हो।
- 1:14:31मेरी माताएं मर गए थे तो यहाँ पर लोग आते मुझे मिलने असल में तो
- 1:14:37मुझे मिलने आते मैं नदारत हूँ मुझे बता मुझे मुँह दिखाने हैं
- 1:14:47भाई वो आते बैठते आसपास देखते मैं कहीं दिखता नहीं।
- 1:14:54मैं तो पुत्र की मृत्यु पे भी नहीं देखा और तुम्हें बड़ी हैरानी
- 1:14:59होगी। मेरे पुत्र की अंतिम शोक सभा में
- 1:15:06मैं नहीं था। मेरे पुत्र की शादी एकलौते पुत्र
- 1:15:14की शादी में मैं नहीं था, क्योंकि लोग मुझे आएँगे मूत दिखाने में और
- 1:15:24मैं जे कर्मकांड कर रहा हूँ मैंने छोटे भाई को कह दिया।
- 1:15:31क्योंकि वह मानता है इन बातों को और मैं किसी की श्रद्धा के ऊपर
- 1:15:35ठेस नहीं पहुंचाता। भाई तुम मानते हो फेरों को तुम
- 1:15:39करवा देना तुम चलो, मैंने कहा मैं तो नहीं जाऊंगा।
- 1:15:49वैसे हैरानी की बात है। ना खुशी में ना शोक में तो भगवान
- 1:15:56कृष्ण ने यही तो कहा है सम्र हो ना खुशी तुम पे इतनी हावी हो जाए
- 1:16:04कि तुम नाचने लग जाओ, यहाँ तो कोई परिषद बन जाता है तो नाचने लग
- 1:16:09जाते हो। क्या मिल गया भाई?
- 1:16:14अरे उस दिन नाचना नाचने का एक ही मौका होता है तुम्हें मैं समझा
- 1:16:18दूंगा जीस दिन सारा अस्तित्व नाचेगा जीस दिन तुम्हें तुम मिल
- 1:16:22जाओगे वो होता है नाचने का अवसर तो तुम्हारे भीतर नाचेगा।
- 1:16:29और पूरा अस्तित्व नाचेगा। दुनिया नाचे ना नाचे वो नाचने का
- 1:16:37वक्त है, हम मौका उससे पहले नाचना बेकार सिर्फ ये नागिन डांस जैसा
- 1:16:44होगा जैसे तुम करते हो। तुमने देखा और माल लेते हैं वही
- 1:16:50गली सड़ी में कोई खुशी चेहरे पर नहीं इनके मैं इन करमकांडों को
- 1:17:05निभाता ही नहीं। मैं जानता हूँ व्यस्त काहे सिर
- 1:17:12खपना। तो फिर तुम ऐसा करना मैं खींच के
- 1:17:22आता हूँ पंडित आता है पंडित जी को तो पता था वो तो जब मैं रोल करता
- 1:17:33तो वो रावण जी का रोल करते थे। पहले वो पर्दे के पीछे मेरे पांव
- 1:17:39के हाथ से लगाता, फिर रोल करता वही कथा पर नहीं आता घर मैं उससे
- 1:17:45बाहर कहता, तू बकवास करा है, बकवास कहता चलो ठीक है तुमने अपना
- 1:17:53काम करना है भाई। परिवार पालना है।
- 1:17:57पापी पेट का सवाल है तो मैं खसके जाता तो तुम भी खसक जाते मत सुनो
- 1:18:09कौन कहता है तुम्हें पकड़ के नहीं बचाएगा?
- 1:18:12उसको मतलब सिर्फ इससे है। उसको कहते देख तू ₹10 ज्यादा ले
- 1:18:18लेना, तो मेरा दिमाग मत खराब कर, मुझे और भी बड़े काम जो जरूरी है,
- 1:18:25ध्यान करना है, मैंने क्रिया योग करना मैंने योग निद्रा में जाना,
- 1:18:31मैंने मस्ती मनानी है ये जरूरी है।
- 1:18:36ये जीवन के लिए जरूरी है। तुम्हारे कर्मकांड कोई जरूरी नहीं
- 1:18:40है, जिनका पता ही नहीं चलता कहाँ गए?
- 1:18:45उनका कर्मकांड कौन करता है? कभी पक्षियों का कर्मकांड किया
- 1:18:50तुमने मर जाते हैं बेचारे। इनकी कोई आवश्यकता नहीं।
- 1:18:57यह ब्राह्मणों के बनाए हुए हैं, लोग वश बनाए हुए हैं, कोशिश करो।
- 1:19:07इन प्रखंडों को खुद बचने की खुद बचोगे।
- 1:19:10सबसे पहले फिर दूसरों को बचाओ। मैंने खुद नकारा।
- 1:19:18पहले मैं अपने भाई की शादी में नहीं गया।
- 1:19:22पुत्र की शादी में माता को, पिता को अग्नि मेरा कर्तव्य था वो मैं
- 1:19:33दे के आया मैंने खुद। वो मेरा करतब अब उनकी चिंता तो
- 1:19:40समेटनी है ना वो काम मैंने किया लेकिन वो बकवास नहीं मैंने सुनी
- 1:19:52जो पंडित सुनाते हैं तुम भी ऐसा करना अगर कुछ ना हो।
- 1:19:59तो चुप चाप पंडित बकवास करता रहेगा तुम उठ के आ जाना नो मैं
- 1:20:08अपने मज़े से बैठ जाना। कहीं कोका कोला पी लेना ठंडक आ
- 1:20:17जाए। पूछा है।
- 1:20:24चैतन्य ने उसका जवाब मैंने दे दिया।
- 1:20:29क्योंकि यह भी प्राणों से संबंधित है।
- 1:20:34तुम भी प्रश्न पूछ सकते हो पुरानो से।
- 1:20:38सब कुछ प्राणों में गलत नहीं है। अगर सब कुछ गलत होता तो मैं जलेबी
- 1:20:44को ही गिरा देता हूँ। इसमें बड़ा रस भरा हुआ है।
- 1:20:49जहाँ रस भरा है वहाँ भी बताऊँगा तो।
- 1:20:58श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हेनाथ नारायण।
- 1:21:16वा सुदेव श्री कृष्ण गोविन्दु हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव।
- 1:21:32श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी हिनाथ नारायण वासुदेव पितुमात
- 1:21:47स्वामी सगा हमार। हे नाथ नारायण यन वासुदेव पितवात
- 1:22:03स्वामी सका हमारे हे ना? हे नाथ नारा यन वासुदेव श्री
- 1:22:35कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारा यन वासुदेव।
- 1:22:52धन्यवाद।