Latest / Baba ji Vijay Vats / 13 Apr 26 - काम वासना से ऊर्जा तक: काम वासना त्याग नहीं, आत्म-विजय का मार्ग
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- 0:13कुमारी शालिनी बाबाजी प्रणब क्या काम वासना क्या जी है?
- 0:43शालिनी, इंडोनेशिया इस संसार में ईश्वर द्वारा बनाई गई कोई भी चीज़
- 1:00त्याग नहीं होती, बस उसका सदुपयोग और दुरुपयोग होता है।
- 1:17कामवासना क्या चिन्ह, कामवासना का सदुपयोग और दुरुपयोग हो सकता है।
- 1:37मैंने एक शब्द दिया आपको जियो और जे ने दो जीस दिन मेरे शिष्यों ने
- 1:51इसे स्वीकार कर लिया अंतसमन से उस दिन दुनिया।
- 2:00तानाशाह बनना नहीं हुक्म करने के लिए मनुष्य के पास बेकार है अभी
- 2:19तुमने विचारों पे तो भी जपाई नहीं।
- 2:24ना काम पे, ना क्रोध पे, ना लोभ, ना मोह, न कार, ना मद, ना मच्छर
- 2:32ना भै और तुम चले हो दुनिया के ऊपर राजकर नहीं मैं इससे बिलकुल
- 2:48उलट समझाता। मैं कहता हूँ तानाशाही प्रवृत्ति
- 2:56अगर तुमने अपनानी है तो अपने विचारों के ऊपर अपनाओ दुनिया को
- 3:06मत निचाओ। अपने वेकारो को अपनी उंगलियों के
- 3:12इशारों पे निजाओ आज वेकारो की उंगलियां तुम्हें निजा रही।
- 3:26तुम्हारा मनोविकार कहता है। काम चाहिए तो तुम काम को भोगने
- 3:33लगते हो तुम्हारा मनोविकार कहता है, क्रोध चाहिए लोभ चाहिए घना सा
- 3:40धन, उसके पीछे तुम सारी जिंदगी खराब कर देते हो।
- 3:53अगर तानाशाही बना है तो दूसरों को परेशान करने की कोई जरूरत नहीं।
- 4:05हकूमत करने के लिए तुम्हारे पास बहुत कुछ है।
- 4:11जीस पर हकूमत करते करते ऋषि मनी हार गए।
- 4:16और उसी का सवाल तुमने पूछा है, पुत्र शाले ने यह त्याग नहीं है
- 4:26पुत्र यह तुम्हारे अधिकार क्षेत्र में है।
- 4:38यह विश्व की उत्पत्ति में सहायक है, क्योंकि जब पुराने टीकु से मर
- 4:47जाते हैं तो नए काम करते हैं। एक न 1 दिन हम सभी बूढ़े हो
- 4:53जाएंगे। हो ही गए हर रोज़ मुराफा लेके आता
- 5:01है हर रोज़ मृत्यु को लेके आता है।
- 5:09जीस दिन बच्चे का जन्म होता है उस दिन तुम जन्मदिन मनाते हो वस्तु
- 5:14तो वह उसकी मृत्यु का पहला दिन होता है।
- 5:20बस 1 दिन मर गया उसकी ज़िन्दगी का 1 दिन कम हुआ है तो बड़ा सीता
- 5:31सीता सवाल ऐसे ही प्यारे सवाल पूछने चाहिए।
- 5:42इन सवालों को पूछना तुम्हारी गुत्थियां भी बोल देगा और मेरा
- 5:50अनुभव भी तुम जान पाओगे। यह सवाल ऐसे हैं मूढ़ तब हैं।
- 6:07क्या पंछी भी अमर हो जाते हैं? क्या जल में भी चेतना होती है?
- 6:17यह व्यर्थ के सवाल है, चेतना सब में होती।
- 6:20है। पंचतत्वों में भी चेतना होती है
- 6:29लेकिन नेगलिजबल बहुत कम। काम वासना बेकार है और जो व्यक्ति
- 6:48काम वासना के नियंत्रण नहीं कर सकता जीत नहीं सकता वह व्यक्ति
- 6:55लोगों को तानाशाह बनकर। वश में करना चाहता है नकली नकली
- 7:05यही दिखावा है जो मैंने कल के प्रवचन में कहा तुम जीत तो पाए
- 7:12नहीं इसलिए तुमने दिखावा करना शुरू।
- 7:18कर दिया। अपने भीतर से तुम उतर नहीं सकते
- 7:28इसलिए केदारनाथ की गुफाओं में बैठकर ध्यान करने का नाटक करते हो
- 7:37जीसको ध्यान करने का रस आ गया। वह दिखावा करना बंद कर देगा।
- 7:43वह तो दरवाजा मूंद लेगा। काम वासना से जो काम लिया जा सकता
- 8:03है वो है बड़ा महत्त्व का इससे बढ़िया काम और कोई है।
- 8:16अब मैंने कर ली। कुछ दिन पहले मुझे कहा गया कि
- 8:21यहाँ एक बंधु बाबा है, उसने बहुत सीआइए एसआइपीएस ब्यूरोक्रेट
- 8:36वगैरह। और यहाँ तक के हमारे चुने गए हुए
- 8:42मंत्री महोदय उनकी घरवाली अवश्य में कर रखे थे।
- 8:53कुशन का बाबा आपका क्या मत है? मैंने कहा कोई मत नहीं।
- 8:59इसमें बिलकुल सपर्श सी बात है। तुम अभी बात की तह तक गए।
- 9:12नहीं। दाने इकट्ठा करने से फुर्सत मिले
- 9:20प्रमोशन करने से फुर्सत मिले दूसरों के ऊपर तानाशाह।
- 9:29बनने से फुर्सत मिले तो तुम अपने घर के अंदर भी ख्याल कर सको।
- 9:39ये हमारे बुजुर्ग, हमारे दादा, परदा मूर्ख नहीं थे जो हर शादी के
- 9:47घर में ठहरा देते थे। पता है कुदरतन क्योंकि प्रकृति
- 10:04मेरी ही बनाई हुई है। स्त्री में काम बसना चल रही होती
- 10:12है और पुरुष उसकी काम बसना। नहीं कर सकता।
- 10:20विषय की कहानी को तुम ठीक से समझो तो फिर उन्होंने एक रास्ता चुना
- 10:27है हर 2 साल में एक बच्चा इतने में स्त्री बुरी हो जाए।
- 10:44भोंदू ना से पैदा होने बंद हो जायेगा आज यह स्त्री समाज के
- 10:56नैतिकता के उपर कल्प यह क्या बोलती है?
- 11:04वह नहीं सुनना चाहिए। इसका दृश्य क्या रिकॉर्ड हुआ वो
- 11:10देखना चाहिए। आँखों देखी बात ही मानते हैं संत
- 11:18मैं कहता आंखें देखें। तो भोंधू नाचों की जरूरतें तब
- 11:28पड़ती हैं जब तुम लोगों की जेबें काट रहे हो तो और तुम्हारी जेब
- 11:36कोई और काट रहा होता है। तुम्हारा कमाया हुआ पैसा तुम जीस
- 11:44तिजोरी में रखते हो? उस तिजोरी की चाबी ये श्रीमती के
- 11:49पास होती है और श्रीमती वहाँ से पैसा लेकर भोंदूनाथ के पास पहुंचा
- 11:54देती है तुम्हें सारा विज्ञान समझ नहीं आया।
- 12:04काम वासना बहुत ही जरूरी है। अगर मैं कहता हूँ जिन्हें तुम
- 12:11वासना कहते हो, मैं उन्हें ऊर्जा कहता हूँ, बेकार कहते हो, मैं
- 12:15उन्हें ऊर्जा करता हूँ, फर्ज करो ईश्वर कम वासना को न बनाएं।
- 12:25तो यह धरती कितनी देर तक चिंता रखेगी?
- 12:29बताओ अगर सिर्फ पशु पंछियों में कामवासियों को बना दिया जाए,
- 12:45मनुष्यों में न बनाया जाए। तुम रोज़ कहते हो, मुझे काम पास
- 12:49नहीं तंग करते तो जहाँ सांप, बिच्छू, बग्यार शेर बेड़ी के हाथी
- 13:06को रे यह नजर आई। आधुनिक हो जाएगा।
- 13:15यह वरदान है जीसको तुम इतनी ही भावना से देखते रहो, लेकिन
- 13:23क्योंकि तुम्हारे विचार संतुलित नहीं।
- 13:28इसलिए तुम असंतुलन की भाषा बोलते हैं तो काम वासना व्याध्य नहीं
- 13:40है, बस इसकी मात्रा आपने तय करनी है जैसे कृष्ण ने किया।
- 13:53कृष्ण के वक्त 40,00,000 लोग महाभारत के युद्ध में मारे गए और
- 14:06कुल संख्या थी 300 3,00,000 3,00,00,000।
- 14:1340,00,000 मर गए, पुरुषों की संख्या घट गई और कृष्ण के पास
- 14:21फॉर्मूला था। कृष्ण ने अपनी स्त्रियों से भी
- 14:27101001006 व्यक्त किया। वो भी पुरुष क्योंकि पुरुष ही
- 14:34मरते हैं। आज वाला ज़माना तब नहीं था।
- 14:41सब के लोग बड़े समझदार थे। माना साधन सीमित थे।
- 14:52लुभावने दृश्य, नाच लेकिन उनका विचार उनका मस्तिष्क परिपक्व था।
- 15:04माना एयर कंडीशन्ड रूम नहीं था। लेकिन जब वट वृक्ष की छाये के
- 15:11नीचे बैठते थे तो एयर कंडीशनर फेल हो जाते थे।
- 15:18हमने वो गुजारें हैं। देन वट वृक्ष की छाये तले बैठते।
- 15:27जो आनंद है, जो नेचर की गोद में बैठने का आनंद है और तुम्हारी एयर
- 15:38कंडीशन्ड रूम्स में नहीं, मैंने दोनों चीजों को देखा है या।
- 15:47और मैंने पाया कहीं ज्यादा शुभ से बोधन जब मैं वट वृक्ष की छाया तले
- 15:54बैठता था, क्रिया योग करके आता और वट वृक्ष की छाया तले बैठ जाता
- 16:02ध्यान मगाने। आज मनुष्यता इतनी पागल हो गई है
- 16:21आज मनुष्यता इतनी पागल हो गई है की उसे यह नहीं पता कौन से अंग से
- 16:28क्या काम लेना? है।
- 16:36और कितना काम लेना है और कोण से अंग से कब काम लेना है क्योंकि
- 16:43इंद्रिया उसके बस से बाहर होते हैं।
- 16:51जीस इंद्र की बात करते हैं। ऋगवेद ऋषि वह इन्द्र कोई और नहीं
- 17:03वह इन्द्र तुम ही हो जो अपनी इन्द्रियों पर कंट्रोल कर सकता है
- 17:15और जैसे चाहो वैसे तुम्हारी इन्द्रियां नाचेंगे तुम्हारे समय।
- 17:25तुम चाहो कि खाना खाओ तो खाओगे तुम मार को तुम चाहो कि नहीं
- 17:33खाओगे तो नहीं खाओगे इंद्रिया तुम्हे तंग नहीं करेंगे इंद्रिया
- 17:40तुम्हारे हुक्म में रहकर। विश्राम करण वो वही संत सच्चा संत
- 17:51है जिसका अपनी इंद्रों पर कंट्रोल होता है।
- 18:01आज लोग नकली नकली भगवान बनना चाहते हैं और बन भी जाते हैं
- 18:08क्योंकि भक्त बड़े मूड हैं आज लेकिन वो ये नहीं जानते हैं कि
- 18:18भगवान का एक लक्षण भी होता है। वह लक्षण होता है, ठहरा और आनंद
- 18:26का रस पीता हुआ झूमता हुआ वो मन वो मन नहीं इकट्ठा करते फिरते हैं
- 18:35श्रेय। जब उनके जाने के बाद समाप्त हो
- 18:42जाएगा और जिनके सामने उसने कुछ इतिहास रचा वो इतिहास भी जला दिया
- 18:49जाएगा। नालंदा में जो इतिहास या जो खोजें
- 18:55जला दी गईं बाजगांव। उन महारथियों का उन तीर्थंकरों का
- 19:15उन भगवान तक पहुँच हुए लोगों का कोई नाम अता पता है।
- 19:24खोरे कागजों के ऊपर काले अक्षरों में लिखे हुए नाम कितनी देर तक
- 19:28टिका करते हैं। यह भारत में बड़ी लज्जा की बात
- 19:43है। क्या हम इतने दीनहीन हो गए के एक
- 19:54मूर्ख व्यक्ति को सिंघासियों के ऊपर आसीन कर दें?
- 19:58और फिर माने भी न की यह मूर्ख क्योंकि मूर्ख तो सदा ही कहेगा
- 20:07मेरे से बड़ा विद्वान को कभी पागल खाना हो, मैं चले जाना।
- 20:17वहाँ कोई पागल तुम्हें नहीं कहेगा कि मैं पागल हूँ और जीस पागल को
- 20:22पता चल गया कि मैं पागल हूँ वह तत क्षण पागलखाने से बाहर आ जाएगा
- 20:29क्योंकि उसकी प्रज्ञा काम करने लगी।
- 20:33जब प्रज्ञा खो देता है, व्यक्ति तो पागल हो जाती है।
- 20:38उसे अपने व्यवहार पर कंट्रोल नहीं रहता है।
- 20:44आज हमारे तथाकथित देशों पर राज्य करने वाले राजाओं में प्रज्ञा है।
- 20:55ज़रा बताओ की प्रज्ञा है आज सबसे ज्यादा धनी और सबसे ज्यादा
- 21:07प्रज्ञावान मुल्क अमेरिका है। और उसने देखो जो खिलौना चुना है
- 21:15राज़ करने के लिए, वह बोलता है कल सुबह हो अमेरिका में आठ बजेंगे
- 21:27दिन। और एक सभ्यता पाषणकाल में चली जा
- 21:43मैं अपने भीतर गया जाके देखा क्या ऐसा है, मैंने पाया नहीं।
- 21:52मैंने बाबा से पूछा कहते नहीं ऐसा कुछ नहीं।
- 21:56मैंने भ्रमण में उस रिकॉर्डर को खंगाला, पाया भी कुछ नहीं।
- 22:01मैंने आपसे पहले भी कहा, मैं बातों को बोलते वक्त तीन जगहों से
- 22:06खंगालता। हूँ।
- 22:08फिर बोला करता हूँ फिर उसको कोई मायका लाल गलत करार नहीं दे सकता
- 22:19क्योंकि वही होगा जो मैं कह दूंगा और वो मेरा कहा हुआ मेरा अपना
- 22:28नहीं होगा। तीन जगहों से सूचनाएं इकट्ठी की
- 22:37तो देखा ऐसा कुछ नहीं है। यह सबसे ज्यादा बड़ी देश का राजा
- 22:48तो है। सबसे ज्यादा अमीर भी है।
- 22:52धन संपन्न भी लोग इसकी कदर भी करते हैं और जालिम इतना कि किसी
- 22:59देश का गरीब मादुरो को सोए पड़े उठा के ले आता है।
- 23:04उसकी घरवाली को भी ले आता है। क्या बात भाई एपिस्टीन के आइसलैंड
- 23:12पे मन नहीं भरा तुम्हारा वासनाओं के गुलाम ऐसे व्यक्ति क्या शासन
- 23:25करने की होते हैं? मैं क्यों कहता हूँ कि शासन करने
- 23:31के योग्य होता है संत और वह शासन करता है?
- 23:38महावीर जैसे लोग होते हैं शासन करने के योग्य और वह शासन को
- 23:44त्याग कर प्रकृति के गौत में बैठ जाते हैं।
- 23:49बुद्ध जैसे लोग होते हैं शासन करने की रोकें और कपिलवस्तु के
- 23:55राज्य को ठुकरा कर गली, गली, कूचे, कूचे, गांव, गांव उपदेश
- 24:03देते हैं। के आदमी सुखी करते हो, सुख
- 24:12प्रत्येक की तमन्ना है, लेकिन काश यह सभी को मिल पाता।
- 24:28तो मैंने देखा तो मैंने फ़ौरन वीडियो बनाया।
- 24:32आज फिर यूट्यूब पर पड़ी हुई मेरी वीडियो वो आप सुन सकते हो ना खंजर
- 24:41उठेगा ना तलवार इनसे ये कार मेरे आजमाज़ हुए।
- 24:53और एक सभ्यता को नष्ट करने चले थे 250 साल प्राणी सभ्यता 5000 साल
- 25:01प्राणी सभ्यता को नष्ट करने चले। यह बिल्कुल ऐसा है जैसे 2 साल का
- 25:09बच्चा 100 साल के बूढ़े को। नष्ट करने की बात कही।
- 25:16अरे मूरख, 5000 साल में इन्होंने कुछ ऐसा अज्ञात कमाया है जिसकी
- 25:25तुम्हें भनक भी नहीं। शालीनता कब है?
- 25:36ये परिपक्व हुए हैं। समय की मार झेल झेल कर ये परिपक्व
- 25:46हुई सभ्यता है। इन्होंने बड़े तूफान झेले।
- 25:51बड़े कष्ट क्लेशियले तुम कल के जाए, अमीरी में उत्पन्न हुए तुम
- 25:59इन्हें दोस्त। और सच पूछो तो पश्चिम ने पूर्व का
- 26:14भी नष्ट कर दिया। पश्चिम ने पूर्व का बेड़ा बीड़ा
- 26:22बो दिया। हम सारे शरीर को नगद दिखा के।
- 26:35हम कुछ नहीं जानते हुए इतिहास पढ़ा नियम और हम कहते हैं कि
- 26:42आजादी हिंदुस्तान को 2014 में मिले थे।
- 26:54अब देखिए इनके भीतर कितनी प्रज्ञा होगी जो इतिहास तग को जो मृदा हो
- 27:04गया। आज किताबों में लिखा हुआ है उस तग
- 27:08को सही से नहीं पढ़ सकी जो। और जो खुद कहती हैं कि मैंने
- 27:16फिल्मों पाने के लिए प्रोड्यूसर्स डायरेक्टर्स के बिस्तर गर्म किया,
- 27:28भला तुम कब तक बर्दाश्त करोगे ऐसे लोगों को?
- 27:34देश को चलाने के लिए बड़े शालीन इंद्रु के प्रजन का कंट्रोल हो जो
- 27:45अपने मन को और इंद्रियों को अपने अनुसार डाल सके तभी तो तरक्की
- 27:50होगी अन्यथा तुम जाओगे। अटैच करने ईरान पर रास्ते में कोई
- 28:04सुन्दर स्त्री मिल जाये कि तुम भूल ही जाओ कोई कि हम ईरान पर
- 28:07अटैक करने गए नहीं है सर। तुम उसी के साथ जश्न मनाना शुरू
- 28:19कर दो, इस पश्चिम में इस पश्चिम की समझने पूर्व की एक्जिस्टेंस
- 28:33को। वहाँ से निकली हुई प्रज्ञा को
- 28:37विवेक को खत्म कर डाल रहा है और मैं हैरान हूँ और दुखी भी।
- 28:52वह आनंद का सागर मनुष्य आज किस कगार पे पहुँच गया?
- 29:01के जर्रे जर्रे के आनंद को तरस गया।
- 29:04उसे आज आनंद का स्वाद भी नहीं होता।
- 29:07सुख का स्वाद वो जानता है। खाने के लिए अच्छे भोजन चाहिए,
- 29:17पौष्टिक भोजन चाहिए। स्वादिष्ट भोजन चाहिए, कोई बात
- 29:20नहीं सोने के लिए बड़े, बढ़िया गद्देदार पुलंग से ठीक है कौन
- 29:35रोकता है। लेकिन बात तो ये है कि जब तिलक
- 29:46तुम आनंद के रस की एक बूंद नहीं पीओगे मैं रोज़ बोलती।
- 29:51हूँ। तब तक तुम सच में बुद्धिमान नहीं
- 30:02होते। प्रज्ञावान नहीं होते तुम तुम
- 30:10सिर्फ तेज बुद्धि वाले हो सकते हो, बुद्धिमान नहीं हो सकते।
- 30:17विवेक भान नहीं हो सकते तुम विवेक कुछ और छि छ विवेक तो दूध को पहले
- 30:25ज्याग देकर ज़माना होता। है।
- 30:30फिर उस दूध को बिलौना होता है, फिर उसमें से माखन निकलता है,
- 30:34माखन को बिघलाना होता है, उसमें से घी निकलता है, उस घी को विवेक
- 30:39करते हैं और बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है इस काम में।
- 30:50ओशो से मुझे ज़रा भी असहमति नहीं है मनभेद नहीं है।
- 30:56मेरा आपने मेरी वीडियो सुनी होगी। मैं ओशो को एनलाइटन परसों का
- 31:08सम्मान देता हूँ। कब मिलने का मैंने पहुंचा नहीं
- 31:11था, क्योंकि शब्द बदला देते हैं कि ये आते कहाँ से हैं।
- 31:24शब्दों के साथ रचा वचा? गच्छ हुआ जो आनंद आता है वो संत
- 31:31की वाणी में झलकता है और संत दूसरे संत की भाषा बस एक शब्द में
- 31:42ही गा जान लेगा। यह बादशाह के साथ कुछ और भी आए
- 31:49हैं या तोथे शब्द आए हैं। उसे ज्यादा विस्तार नहीं चाहिए,
- 31:56शास्त्रार्थ नहीं चाहिए, संत अगर सह से मिलेगा।
- 32:05तो दूर बैठा संत समझ जाएगा कि यह संत संत अगर मौन भी बैठ जाएगा तो
- 32:18दूर बैठा संत समझ जाएगा उसके मौन की भाषा को अक्सर जब आप दूसरे
- 32:27ग्रहों पे जाओगे। मौन भाषण में संवाद होगा क्योंकि
- 32:32बोलने वाला यंत्र तो आप धरती पे छोड़ आए।
- 32:38हमारी जीवा तीन प्रकार से काम करती है।
- 32:46एक तो बोलने में सहायक। है।
- 32:55दूसरे, जब हम जीवा पर कोई पदार्थ रखते हैं, सिर्फ टेस्ट बड्स होते
- 33:01हैं। बताती है ये मीठी है, नमकीन है,
- 33:05कड़वी है उसका स्वाद। बताती।
- 33:09है ये टेस्ट बड्स। और तीसरा काम जीवा।
- 33:13का होता है जब हम खाना खाते हैं। तो इधर का खाना उधर।
- 33:18उधर का खाना इधर उधर करती है उल्टा।
- 33:23उल्टी करती है ये? तीन काम है जीवा।
- 33:30के एक जीवा के तीन काम। और आप तीनों ही काम लेते हो जबकि
- 33:46अगर आप ने बोलो मौन रह जाओ तो वह जो बोलने में शक्ति व्यर्थ की, वह
- 33:56आपकी शक्ति बच जाएगी। और वह बची हुई शक्ति तुम्हें अपने
- 34:02अंत समय ले जाने में सहायक होगी। रोज़ मुझे 10 पांच।
- 34:07प्रश्न ऐसे आ जाते हैं बाबा मैं अपने भीतर नहीं उतर रहा, मैं अपने
- 34:13भीतर नहीं उतर रही। मैं उनका कोई जवाब नहीं देता
- 34:22क्योंकि अपने 3000 के करीब लंबे प्रवचन में मैं बोला हुआ हूँ।
- 34:29कि वृहद शक्ति? की जरूरत बढ़ेगी भीतर जाने के
- 34:33लिए। रात को ही तुमने इस शक्ति को खर्च
- 34:40किया है। और सुबह तुम क्रिया योग।
- 34:44करके जान में बैठना चाहती हो नहीं रखो।
- 34:50क्योंकि ध्यान में जाने के लिए। वृहद शक्ति की जरूरत होती है।
- 34:55बड़ा अखंड ब्रह्मचर्य साधारण होता है।
- 35:03लेकिन फिर भी लोग मुझसे पूछते हैं यह वलीम काम क्या है?
- 35:11बा मुश्किल इसको साधते हैं, इसका पता ही नहीं चलता ये कहाँ से आ
- 35:18जाता है। तुम तो 10 5 दिन का ब्रह्मचर्य
- 35:25साधकर गुरुर से भर जाते हैं। हमें तो यही था गुरु हमें तो यही
- 35:45था गुरु। कमे यार हमसे दो वो ही गम जैसे हम
- 36:02किस किस यत्न से? निकाला था इस दिल से दो उछल कर
- 36:20उछल कर कयामत। कि चला गया, वो चल कर गया कि चला
- 36:36गया विश्राम उनका। खाया गया वो ही ज़िन्दगी का सवाल
- 36:55गया फिर शाम उनका। जैसे तैसे तुम इंद्रियों।
- 37:06को निचोड़ के सिकोड़ के डिप्रेस करते हो, ब्रह्मचर्य का पालन करते
- 37:11हो, लेकिन वो टूट जाता है। और तुम्हारे गुरुर क्षण।
- 37:16भर में टूट जाता है। और इसी के ऊपर तुम्हे गुरुर।
- 37:20था। नारद की तरह मैंने कामदेव को जीत
- 37:24लिया नहीं ऐसे नहीं जीता जाता। इसके लिए तीन तरीके अजमाने हो गए।
- 37:35सुबह उठो। ऑक्सीजेनेटेड।
- 37:41वातावरण में चले जाओ, हल्के हल्के पांव कदमकाल करते हुए लंबे, लंबे
- 37:52सांस लो जैसे हम क्रियाएं कहते हैं।
- 37:56नाक से सांस लो, लंबे पूरे फेफड़े भर जाएं।
- 38:01तुम पेट तो पूरा भर लेते हो। पेटूराम से फेफड़ा पूरा नहीं
- 38:12करते। भगवान ने इतना फेफड़ा बना तो तुम
- 38:18इतना सा इस्तेमाल क्यों करते हो पूरे?
- 38:21फेफड़े का इस्तेमाल कर। नाक से पूरा सांस।
- 38:26खींचो फेफड़ों को भर लो और उसको मुँह से छोड़ दो।
- 38:35इतनी सी क्रिया। है।
- 38:37स्वास्थ तो तुम पहले भी लेते हो लेकिन मरे मरे से।
- 38:42मैं तुम्हें जीवत। जीवन से स्वास्थ लेने को कहता
- 38:46हूँ। लंबे लंबे सोच लो क्योंकि यह
- 38:48स्वास्थ्य पुराण भाइयों है। देखो इसके बिना कितने लोग कोरोना
- 38:52में मर गए, इसको ज्यादा से ज्यादा ग्रहण करो।
- 38:59तुम्हारे रक्त में मिलेगा। तुम्हारी हीमोग्लोबिन इस ऑक्सीजन
- 39:04को सारी शरीर में संचरित करेगी और तुम्हारा रोमा रोमा शक्ति संपन्न
- 39:11हो जाएगा पहला सुबह उठो। ऑक्सीजनेटर हो जाओ फुल ऑक्सीजनेटर
- 39:23सारे दिन भर के गए, फिर आराम से बैठ जाओ, जल्दी मत करो भीतर जाने
- 39:36के बरसों लग जाते हैं। शान्ति रखो, धैर्य रखो ज़ोर
- 39:47जबरदस्ती से ध्यान कभी होता नहीं, एकाग्रता हो जाती है।
- 39:54एंड देर इज़ ए लॉट ऑफ। डिफरेंस बिटवीन दैट टू।
- 39:58ध्यान और एकाग्रता कॉन्सेंट्रेशन इनमें जमीन आये सामान का फर्क
- 40:08कॉन्सेंट्रेशन तुम सज सकते हो, ध्यान नहीं सज सकते।
- 40:16सबसे पहले सुबह उठ कर क्रिया। जो करोड़ लंबे विश्वास परमात्मा
- 40:21ने जीतने फेफड़े दिए नहीं तो वो इतने से फेफड़े दे देता।
- 40:27उसने हर चीज़ ढंग से बना उठ की है सजन की।
- 40:41छोटा सांस तो तुम्हे रात को। आ ही जाएगा दिन में तुम लंबे सांस
- 40:45ले लो। और फिर जैसे ही तुम दिन में।
- 40:50लंबे सांस लेने का तुम्हारे भीतर सहकार पैदा हो गया तो रात को
- 40:56सोएसोए भी तुम लंबे सांस लेना शुरू कर दोगे?
- 41:01उसके बाद आराम से बैठ जाओ, बैठ जाओ सिर्फ।
- 41:07सिर्फ। बैठ जाओ ना कोई जप, ना कोई तप, ना
- 41:13कोई माला, ना कोई नाम, कुछ नहीं। जैसे तुम रात को सोते वक्त थे,
- 41:22मूक मौन शान। इस जीवा को तुम खेचरे लगाने का
- 41:32यही मतलब था, अभी तो तुम्हारे भीतर रस नहीं पैदा हुआ।
- 41:36और तुम पहले ही खिचड़ी लगा लेते हो।
- 41:42रस से पैदा होने तो। खिचड़ी न भी लगाओगे तो भी चलेगा।
- 41:50खिचड़ी मद्रा लगाने का। एक दूसरा प्रयोजन है जो ज्यादा
- 41:53बढ़िया है। वो है तो नो।
- 41:58जीवा की उलटी पुलटी नहीं करोगे तो आवाज़ भी नहीं निकलेगी, फिर क्या
- 42:04होगा तुम्हारा मन बोलेंगे, उसको तुम नहीं रोकना है।
- 42:13मन के भीतर से विचार पैदा होंगे, विकार पैदा होंगे, विषय पैदा
- 42:18होंगे। यहाँ बात संभल।
- 42:23के यहाँ तिलक मत जाना, बाबू जी धीरे चलना।
- 42:33प्यार में। ज़रा संभलना।
- 42:41बड़े धोखे हैं बड़े धोखे हैं इस राग में बाबू जी धीरे चलना।
- 42:53आराम से धरे से बर। जाओ।
- 42:56नथिंग टू डू। कुछ नहीं करना है हमें।
- 43:02कुछ नहीं करने का। प्रयास भी नहीं करना है।
- 43:07बस छोड़ दे सारी। दुनिया किसी के लिए है।
- 43:14उस अज्ञात के लिए। सारी दुनिया को छोड़ दो, वह जो
- 43:23अज्ञात है उसके। लिए सारी दुनिया।
- 43:27को छोड़ दो। हमारे गुरुओं ने।
- 43:33हमें इतनी मूढ़ताएँ दे दी हैं, उससे लोग पूछ लेते हैं बाबा ध्यान
- 43:41करें किसका करें? मैंने कहा किसका?
- 43:45किसका का मतलब है कॉन्सन्ट्रेशन किसी का भी ध्यान नहीं करना?
- 43:56रिलैक्स, कंप्लीट्ली, थ्रूआउट, मेंटली एंड वर्ड तमाम परिपूर्ण
- 44:06रूप से रिलैक्स हो जाओ, छोड़ दो सब कुछ।
- 44:11छोड़ने का मतलब तुम? चिपटे हुए थे।
- 44:14शरीर के साथ जैसे ही तुम छोड़ोगे अपने आपको रिलैक्स करोगे उसे ही
- 44:24चपकाहट कहता हूँ मैं। फिर तुम्हारे भीतर से जो।
- 44:30चिपका हुआ था वो बाहर आएगा चेतन मन?
- 44:35हो सकता है पहले दिन न। हो सकता है उसी वक्त न आए दिन के
- 44:40किसी कालखंड में आए तुम ग्राहक के साथ बात कर रहे हो।
- 44:46और तुम्हारे भीतर से, कैथोड से सा जाये, तुम्हें गर्मी आने लगे, समझ
- 44:50जाना थोड़ा सा जागरूक पहुंचाना, यह कैथोड से से लड़ मत पढ़ना,
- 44:57विनम्रता को साधे रखना ग्राहक कोई चीज़ लेने आ गया।
- 45:06तुमने कहा ये तो ₹20 की है, ग्राहक कहता है मैं तो ₹14 दूंगा।
- 45:12तुम उसके चप्प मत मार। देना मुँह के ऊपर तुम उनसे कहना
- 45:17भाई नहीं मैं 19 लगा दूंगा, मैं 18 लगा दूंगा।
- 45:24अपने व्यापार के हिसाब से बता देना, लड़ाई झगड़ा मत करना, गाली
- 45:30की रोज़ मत करना क्योंकि। यह केथर्स से।
- 45:34है दिन के किसी भी परिभाग में जा सकता है जरूरी नहीं कि जब तुम
- 45:39शांत अकेले बैठे हो। तभी वह बाहर आए।
- 45:44ये। जरूरी नहीं वो तुम्हें बता के
- 45:46नहीं आएगा। तुम वासनाओं के गुलाम हैं।
- 45:51वासना तुम्हारी गुलाम नहीं हैं। जब वो गुलाम हो जाएँगी।
- 46:01तब तुम्हें नचाने के योग्य हो जाओगे।
- 46:08ऑक्सीजनेटेड हो जाना। प्राण वायु को इकट्ठा करना।
- 46:13कोरोना काल में जो आपने। वैक्सीनेशन लगवाई है उसके बड़े
- 46:19दोष पर हैं। इसलिए मैंने जब वैक्सीनेशन।
- 46:23लगवाने लगे। मैंने बाबा से पूछा लगवा ली बाबा
- 46:27कहते नो इट्स पॉइज़नअस तो मैं अपने परिवार वालों को तो किसी को
- 46:37लगने ही नहीं दी वरना मेरे दायरे में जो भी आया।
- 46:43और जिसने पूछ लिया। मैंने उसे कहा बिलकुल भूल के मत
- 46:46लगवाना। विकास इट इस्पा जेनेस।
- 46:51अब दो ₹400,00,00,000 देगा, पूना वाला है, उसके दिमाग में फरक है।
- 46:57क्या वह व्यापारी है? व्यापारी बड़ा समझदार होता है।
- 47:00इस मसले में धन के मसले में वह कुछ कमाने के लिए 400,00,00,000
- 47:05दे रहा है। और मोदी जी हैं के हिसाब?
- 47:09भी नहीं दे रहे हैं। भला ऐसा खजांची।
- 47:13किसी बैंक में तुमने देखा है? जो दिन भर ग्राहक आए और।
- 47:18पैसे जमा कराते हैं और शाम को खिरजानची कहे कि हम तो हिसाब
- 47:27नहीं, लेकिन तुम उसको छाती के ऊपर फिर भी 12 साल से बिठाए रहते हो।
- 47:42अजब तेरी दुनिया। अजब तेरे खैर।
- 47:47चुकंदर के सिर में? चमेली का तेल अरे वाह बा कमाल बात
- 47:54है। तो आराम से वर्शन नथ्थिंग।
- 48:03टु टु रिलैक्स कंप्लीट्ली यूरसेल्फ़ बॉडी एंड माइंड इसका
- 48:13मतलब है मैं तुम्हें चपकाहटें छोड़ने के लिए कहता हूँ।
- 48:17रिलैक्सेशन मीन्स? टू लीव दी क्लिंगिंग नेसेस सभी
- 48:27चपकाहटों को छोड़ देना और यह रिलैक्स होने से हो पाएगा।
- 48:38अब रात को जब तुम्हें नींद आ। जाती है।
- 48:44अब क्लिंगनसेस तो होती। हैं लेकिन टेम्परेरली टेम्परेरली
- 48:51सुबह होते ही फिर वो जग जाएंगे अभी तुमने।
- 48:58उन विचारों के तरफ ध्यान नहीं किया।
- 49:02तुम चुपके से पास से गुजर गए। वे वहीं पड़ी हैं और तुम सोने चले
- 49:09गए। रात को निद्रा में ऐसा होता है।
- 49:15सब चीजें वहीं पड़ी। और तुम उनसे अलग।
- 49:20हो गए क्योंकि तुम वास्तव में उनसे अलग हो गई।
- 49:25हाँ, सर्कल मित्र। रात को तुम।
- 49:30सोने जाते हो तुम्हारी स्मृति। तुम्हारी क्वालिफिकेशन तुम्हारी
- 49:37डिग्री तुम्हारा रुस्तबा तुम्हारी गदियां तुम्हारा मान सम्मान सब
- 49:45कुछ छोड़कर जैसे मुर्दा चला जाता है, वैसे तुम भी उनको छोड़कर अपने
- 49:52भीतर उतर जाते हो। इसे ही कहते हैं निद्रावस्ता वो
- 50:00चीजें वहीं पड़ी हैं ऊँचा है थोड़ा सा बीच में जवाब ले के
- 50:07मृत्यु में क्या होता है मृत्यु में तुम सारा कुछ।
- 50:12लपेट लेते हो। एक पोटली में यह जो तुम छोड़ के
- 50:17गए थे, वह एक पोटली में लपेटकर सिर पर रखकर बाहर निकल जाते हो।
- 50:23इस गर्ज। यह मृत्यु में होता है।
- 50:27नींद में होता है कि तुम इनको उपेक्षित करते हो।
- 50:33इससे दूर निकल जाती रहो, थोड़ा बार बार समझना, बार बार चलाना
- 50:40रीवाइंड करके सुन दिया करो। इन शब्दों को ये बड़े कीमती हैं
- 50:48जो उस से आए हैं। जहाँ तुमने 1 दिन पहुंचना जितना
- 51:00जा सको उतना ठीक जबरदस्ती तुम भीतर नहीं जा सकोगे समझना इट इज़
- 51:05कॉन्सेंट्रेशन बलपूर्वक दमन हुआ करते हैं, जाने।
- 51:14और बलपूर्वक जो तुम। ध्यान करते हो वह एकाग्रता होती
- 51:18है, ध्यान नहीं ध्यान। नींद नथ्थिंग टू।
- 51:22डू न दबाना है, न इकट्ठा करना है, कुछ नहीं करना या नथ्थिंग टू डू
- 51:32का मतलब क्या होता है? यही मतलब होता है फिर तुम बैठ
- 51:39जाओ, अगर तुम्हारा मन चलता है तो चलने दो क्योंकि मन तुम नहीं हो
- 51:48चलता। हुआ मन तुम्हें?
- 51:49दिखेगा और जो तुम। देखोगे वो तुम नहीं हो इस।
- 51:55नियम को पहले मैं। सर्कल में दे चुका हूँ फिर से इसे
- 51:59सर्कल में। जो तुम देख सकते।
- 52:03हो वो तुम नहीं हो जैसे तुम मुझे अब बोलते हुए देखते हो तो पक्का।
- 52:10है कि मैं। तुम नहीं हो।
- 52:14यह पक्का है। मेरा हाथ हिल रहा है तुम हाथ नहीं
- 52:19मुझे मैं अपने हाथ को देख रहा हूँ, मैं जानता हूँ कि मैं हाथ
- 52:25नहीं हूँ। और तुम भी ऐसे ही जानो।
- 52:30जैसे मैं जान रहा हूँ जो मैं बोल रहा हूँ मैं जानता हूँ कि ये मैं
- 52:36नहीं बोल रहा हूँ ये कांठ से आई हुई आवाज इसमें।
- 52:462324 यंत्र इकट्ठे हो गए फिर आवाज़ निकलती है।
- 52:56फिर दिन भर में आप अपने काम। काज करना ऑफिस में किसी।
- 53:01दुकान में किसी। फैक्टरी में जहाँ भी आप काम कर।
- 53:07और इस बात का ध्यान। रखना तुम्हें क्रोध भी आ सकता है।
- 53:12और वह। भीतर से आता है, वैसे भी तुम इतना
- 53:18भर गए हो गले तक। कि जब इतना भर जाएगा।
- 53:25गग्गर या तो वह झलके, इसलिए तुम्हें पता ही नहीं चलता।
- 53:30कब क्रोध आ जाता है, कब काम आ जाता है, कब ये?
- 53:34विकार तुम्हें घेर। लेते हैं और तुम बाद में कहते हो
- 53:37सॉरी। सॉरी मुझे पता नहीं।
- 53:45आई वास् अब्सेंट यह क्या हुआ? ये तुम्हारी गागर भर गई, भर गई तो
- 54:00झलक गई। छलक गई तो वह क्रोध दूसरे को
- 54:06क्रोधित करेगा और यही तो सिलसिला चलता है।
- 54:10ईरान ने बम फेंक दिया इजराइल पर, इजराइल ने ही रन पे फेंक दिया।
- 54:16ये कुछ तो चलता है उसने। एक टन का फेंका वो।
- 54:20कहता मैं चार्ट। ऐसे तुम दोनों ही बर्बाद।
- 54:26होने की कगार पे चलो यह राह बर्बादी की है।
- 54:32इस राह पे बुध नहीं। चलती कभी बुद्धि चलती है।
- 54:39हाँ चलो। इस राह पे बुध नहीं चलते बुद्धि
- 54:44चलते बुद्धि एक ऐसा यंत्र है बिगड़ैल।
- 54:49जो सिर्फ गणित की। भाषा जानता है प्यार की भाषा नहीं
- 54:52जानता। इसलिए सभी संतों ने।
- 54:57कहा परमात्मा की तरफ चले हो। इस शैतान को छोड़ दो।
- 55:02शैतान बुद्धि शैतान को छोड़ दोगे तो तुम अपने भीतर जो दूसरा तल
- 55:10पाओगे वो होगा हृदय का और हृदय में प्रेम।
- 55:22हृदय में हल का आनंद होगा क्योंकि वह तुम्हारे अस्तित्व के ज्यादा
- 55:28करीब है। हृदय में चिपकाहटें नहीं होंगी
- 55:38इमोशन्स पहले ऑक्सीजेनेटेड हो जाओ फिर कुछ
- 55:54न करने में टोटली आराम से बैठ जाओ, रिलैक्स हो जाओ।
- 56:03तीसरा, अगर दिन। में।
- 56:07यह कैथोरशिश हो जो। कि हर व्यक्ति भरा पड़ा है।
- 56:10आज कैथोरशिश उसने किया नहीं और पहले जमाने में कैथोरश करने के
- 56:19लिए अलग से राजा लोग को प्रभवन बना दिया करते थे।
- 56:24जैसे के के जब नाराज हुई तो खूब भवन चले गई।
- 56:28अगर कोई भी नाराज होता है, शत्रु का नाराज होता है, बर्तन राज़
- 56:31होता है तो वो किसी से कुछ कहता नहीं।
- 56:34वह कोप भवन चला जाता है। कोप भवन का मतलब?
- 56:39है कि मुझे तुम्हारे बनाए हुए इन सिद्धांतों से या कानूनों से
- 56:46नियमों से। कुछ घटना हो रही है तो केक चली गई
- 56:53को भवन में दशरथ पूछती है मेरी सबसे प्यारी रानी के के कहाँ है
- 57:03के के को सुन जाता है। केक कहती है मैं को भवन में हूँ
- 57:11बड़े प्यारे जमाने थे सहज सहज जमाने थे केक कहते हैं मैं को भवन
- 57:25में। तुरंत दशर जाते हैं मेरी प्यारी
- 57:32रानी तुम को भवन में क्यों? आज तो बड़ा शुभ दिन है राम का
- 57:38राज़ तिलक होना है मेरे पुत्र का इसलिए को भवन में।
- 57:44तो फिर क्या बात है बताओ? उसके आगे रामायण आपने सुने ही
- 57:49होंगे तो जब ये चीजें निकली तो तुम किसी घरों में पूजारा मत
- 58:00बनाना क्योंकि पूजा। ऋण की कोई आवश्यकता नहीं।
- 58:06परमात्मा ने ऑलरेडी तुम्हारे भीतर हृदय स्थल को पूजा रूम बनाया, वह
- 58:12तुम्हारे हृदय के भीतर सदा विराजमान है।
- 58:21मस्जिद टा दे भूले शाह ई कहता भर के से दा दिल न टाइम।
- 58:40इसे दिल बेच। दिल भर रहता दिल में है बस ही
- 58:51मेरे तस्वीरें यार। दिल के आईने में थी।
- 58:56तस्वीरें यार। जब चारा कर तन झुकाई देख ले इसलिए
- 59:06मैं कहता हूँ जब मेरी सरकार बन मैं मंदिर मस्जिद, गुरुद्वारा
- 59:14टेरा सब पुल डोजर फिराना है वहाँ पर।
- 59:20इनकी कोई जरूरत नहीं। इनसे अन्नोपार्जन करना।
- 59:27ये व्यर्थ के सफल बनाए। तुमने और इनकी लोभ वासनाएँ बढ़ती
- 59:31ही जाएंगी। ये सारी दुनिया को बादल बना देना
- 59:35चाहती हैं। ये बीके शीके सबड़।
- 59:38जाएंगे। थोड़ा सा मेरे हाथ में सस्ता
- 59:41लेने, मुझे पता है आप मुझे वोट नहीं, लेकिन मैं वोट लेने के लिए
- 59:47पावर रखता हूँ तो जब मेरी सरकार आये मैं करेन्सी को समाप्त कर
- 1:00:00दूंगा। क्योंकि करेन्सी सब।
- 1:00:04भ्रष्टाचार की जड़ है। पहले मैं बोलता था।
- 1:00:10कि भ्रष्टाचार को समाप्त कर दूंगा, लेकिन मैंने डांगा नहीं
- 1:00:13बताया था, आज मैं ढंग भी बताती हूँ बाढ़ में जाए दुनिया।
- 1:00:24हमने अपने मुल्क? को आनंद में ले जाना है।
- 1:00:29करेन्सी की कोई आवश्यकता। नहीं।
- 1:00:35करेन्सी विल बी वनिश्ड। फिनिश्ड।
- 1:00:41और क्या करोगे? हमारे हिंदुस्तान में हर चीज़
- 1:00:48जैसा है वो हमें जीवन देने के लिए काफी।
- 1:00:54कोई वक्त था जब दूध। दही की नदिया पहन देते हैं।
- 1:00:58आज शराब की नदियां बहती हैं। अरे नहीं शराबी पूछता के ठेके बंद
- 1:01:05करा दोगे? नहीं ठेके नहीं बंद ठेके पे शराब
- 1:01:12वैसे मिला करेगी जैसे आज तुम्हें भी मिलते हैं।
- 1:01:17फिर तो ठीक है, ठीक है, और अगर तुम्हें बहुत से शराब को तो मैं
- 1:01:24छुड़वाऊंगा उसे। जबरदस्ती नहीं तुम्हें बड़ी।
- 1:01:29शराब लाके? तुम्हें पता है मुझे एक डेटा।
- 1:01:34शराब का भी चढ़ जाता है एक डेटा शराब का।
- 1:01:37ऊपर का एक ढक्कन होते है वो मैंने गलती से एक बार पी लिया।
- 1:01:43सर्दी का दिन था मेरा मित्र रहने लगा भैया ये बरांडी है, वह फौज
- 1:01:54में थी। यह है थोड़ी सी एक ढक्कन ले लो यह
- 1:01:58जुकाम वगैरह ठीक हो जाएगा सर दिल्ली से ओह मैंने एक ढक्कन पी
- 1:02:03लिया। अब क्या हुआ कि आधा घंटा के बाद
- 1:02:07मेरे से दुख था नहीं? मैंने कहा भाई मुझसे तो नहीं
- 1:02:12उठाया। जाता।
- 1:02:14उसने मुझे हाथ पकड़ के घर तक छोड़ के गया।
- 1:02:18अब ऊपर वाले कमरे में तीसरी मंजिल पे मेरा घर था।
- 1:02:25तो वह घर तक तो ले आया। तो पोडियों के पास हो कहता चलो
- 1:02:29भैया ये पोड़ियां हैं। मैंने कहा पोड़ियाँ है लेकिन ये
- 1:02:34ऊपर क्यों जा रही है? उसने कहा ये तो ज्यादा चढ़ गयी।
- 1:02:39इससे एक डाटा इतना चढ़ गया। हाँ ऐसा होता है जिसने मदहोशी का
- 1:02:48वो बैग पी लिया। उसको तुम्हारी जगह की शराब
- 1:02:53रिएक्शन करेगी। तो मैंने कहा भैया मैं पांव।
- 1:03:00ऊपर कैसे रखूं? जैसे ही मैं पांव ऊपर रखता हूँ ये
- 1:03:03पूरी और ऊपर हो जाती है। तो उसने मुझे उठाया।
- 1:03:09तगड़ा था। वो अशोक कुमार नाम था उसका तो
- 1:03:12बेचारा गुजर गया। बहुत जवान अवस्था में गुजर गए,
- 1:03:18उसने मुझे उठाया और उठाकर तीसरी मंजिल पर मेरे बेड पर पुटक दिया।
- 1:03:29वहाँ मुझे कोई पता नहीं था। ये तो कहने की बात है कि मैं
- 1:03:4525,00,00,000 की अप्पर लिमिट रख दूंगा।
- 1:03:47नौ मैं। करेन्सी को ही।
- 1:03:51समाप्त कर दूंगा, बाढ़ में जाए तो नहीं।
- 1:03:55उसने हमारी नकल करनी हो कर ली। नकल नहीं करनी हो।
- 1:04:01अपने मौज करे हम तो अपनी मस्ती में आग लगे बस्ती में।
- 1:04:10तुम कहते हो भ्रष्टाचार। सब बापू की जननी है, मैं कहता
- 1:04:14हूँ, करंसी सब भ्रष्टाचार की चलो। तुम गेहूं के स्टोर कर सकते।
- 1:04:24हो, लेकिन पता चल जाएगा। कोई कुछ नहीं होगा और तुम्हारे
- 1:04:38जीवन यापन की सारी सुविधाएँ। सरकार ओटेक अहंतु हम सर्बपापे भव
- 1:04:47मोक्ष श्यामि माशूच मैं तुम्हारी सभी आवश्यकताओं तो पूरा करूँगा
- 1:04:57वासनय तो अपूर्वत वासनय कभी किसी की पूरी नहीं होती।
- 1:05:02सिकंदर मर जाता है कितने राजा महाराजा चक्रवर्ती महाराजा यहाँ
- 1:05:09से वासना को समेटे समेटे रवाना हो जाते है।
- 1:05:14किसी की वासनी कभी परिपूर्ण होती है।
- 1:05:17मैं अच्छी तरह जानता हूँ, फिर वासना को परिपूर्ण करने का।
- 1:05:24काम भी क्यों करना? वासनाओं को परिपूर्ण करने का
- 1:05:31प्रयोजन भी क्या है? जब होती नहीं हो मैं, तुम्हारी
- 1:05:36जरूरतों का इंतजाम करूँगा प्रत्येक व्यक्ति को।
- 1:05:41और ध्यान रखना मैं कोई सरकार का मोदी मस्त?
- 1:05:48मैं संत हूँ और। संत जो जोगान से कह देता है वह
- 1:05:52कहता है। तुम कहते हो हम तुम्हें वोट।
- 1:06:00नहीं देंगे बिलकुल मत देना। एक बात ध्यान में रखना, मैं वोट
- 1:06:04मांगने आऊंगा, लेकिन तुम मुझे वोट दोगे, मैं ज्ञानीश कुमार को भी
- 1:06:12नहीं खरीदूंगा। मैं सीजीआई को भी नहीं खरीदूंगा,
- 1:06:18ततक्षण जो बैठा हूँ। मैं किसी से वोट नहीं मांगूंगा
- 1:06:27लेकिन फिर भी मैं ये तू और मेरी सरकार बनी और तीन महीने के लिए
- 1:06:34मैं सारण। अच्छा सेट करके।
- 1:06:38ईमानदार लोगों को मेहनती परिश्रमीय लोगों को सौंप जाऊंगा
- 1:06:46मेरे लिए ना डॉलर ए मित रखेगा ना रुक गया सब।
- 1:06:55करसियाँ बेकार में। सब करेंसियाँ जला दी जाएं हम अपने
- 1:07:04दम पे जिए इसे कहते हैं स्वावलंबन जितना हमारी धरती माँ।
- 1:07:17पैदावार करते हैं। वह हमें जीवन देने।
- 1:07:21के लिए पर्याप्त अन्न पैदा करते हैं।
- 1:07:26जितनी हमें प्रोटीन की फैट की आवश्यकता होती है उतना हमारी गऊ
- 1:07:32माता हमें दूध देती है। और यह एक संपूर्ण।
- 1:07:43डाइट होगी जो मिनेरल्स विटामिन बगैरा की तुम बात करते हो वो तो
- 1:07:50डेफिशियेंसी के लिए होते हैं। उनके तो हम अपने।
- 1:07:55लैबोरेटरीज में कैप्सूल वगैरह तैयार कर देंगे।
- 1:07:59सुबह उठो। एक कैप्सूल खो।
- 1:08:04उनकी फिक्र मत करो बात तो। जीवन को चलानी ही है और मैं।
- 1:08:09अच्छी तरह से जानता। हूँ जीवन कैसे चलता है 14 वर्षों
- 1:08:13से इता इता दो तीन बार पिया है। और आज ये बोल रहा हूँ।
- 1:08:21तुम्हें हैरानी होगी डॉक्टर्स। को हैरानी होगी।
- 1:08:27बहुत से लोगों ने यहाँ परीक्षण। करने की चेष्टा की।
- 1:08:30यहाँ मेरे पास लोग 1515 दिन रुक जाते हैं।
- 1:08:36वो देखते होंगे चाहे इस। नियत से नान हो।
- 1:08:40वो देखते होंगे के बाबा रोटी तो कहते हैं।
- 1:08:45न कोई जूस पीते हैं न। कोई फर्ज़ कहते हैं, बस इनके कमरे
- 1:08:49में चाय जाती जो दिखे। चाय चाय के अंदर भी बहुत शानदार।
- 1:08:57गुण होता है वो कभी बाद में। तो जिंदा हूँ जिंदा हूँ और इसलिए
- 1:09:08बोल रहा हूँ और इतने गहरे गहरे सब्जेक्ट बोल रहा हूँ जो तुमने
- 1:09:12कभी स्वपन में भी सोचा नहीं था। और प्रभु की इच्छा में रहता है उस
- 1:09:26सम्प्रभु की इच्छा में जीस सम्प्रभु को मैंने अपनी नगर आँखों
- 1:09:30से देखा है धन्य भाभी हैं या जिन आँखों में उस सर्जन हारे का दर्शन
- 1:09:41किया है। तुम ढूंढ से फिरते हो उसको?
- 1:09:53लेकिन इतनी अज्ञात लम्हों में वह खुद प्रकट हुआ।
- 1:09:56मुझे पता भी नहीं था। अगले ही पल यह।
- 1:10:01बर्ष पड़ेगा और वह बरस गया। इस तीसरा अंग में है।
- 1:10:07भोजन पौष्टिक भोजन। पौष्टिक भोजन में।
- 1:10:13आप पौष्टिक भोजन में गेंहू की रोटी खाओ, सब्जी लो, दाल लो जैसी
- 1:10:21आपकी इच्छा है, लेकिन मांसाहारी भोजन?
- 1:10:25जानवर जीने के लिए बने। हैं उनकी अपनी स्वतंत्र जिंदगी
- 1:10:30उनको जीने दो तुम। यह मत समझना।
- 1:10:34कि मेरे राज़ काज में किसी मनुष्य की हत्या के लिए ही दंड दिया
- 1:10:41जाएगा नहीं। जैसे आज काले हिरण के लिए दंड
- 1:10:46दिया जाता है। वैसे अगर तुम बकरे को भी काटोगे
- 1:10:49तो दंड दिया जायेगा। मुर्गे को भी काटोगे तो?
- 1:10:55दंड दिया जायेगा क्योंकि सभी को अपना जीवन प्रिय।
- 1:11:03और तुम्हारा काटा हुआ। मुर्गा तुम्हें पता नहीं, सारे
- 1:11:06संसार को दुखित कर जाता है, क्योंकि सारा ब्रमांड सारा विश्व
- 1:11:13सारी एक्सिस्टेंस इस इंटरमिंगल्ड आपस में गुत्थी हुई है अगर ये
- 1:11:22हाथ। आज टूट गया तो सारा शरीर परेशान
- 1:11:28है लेकिन मैं परेशान हूँ, मैं इसका दृष्ट हूँ यह घोर दर्द कर
- 1:11:38रहा है, लेकिन। मैं जान रहा हूँ तुम्हें तुम्हारी
- 1:11:51जरूरतें, बिलकुल तुम्हारी जरूरतें तुम नाकों नाकों हो जाओगे, तुम
- 1:11:57कहोगे बस और जैसे लंगर में बैठा हुआ पंकज में बैठा हुआ व्यक्ति
- 1:12:02कहता बस सी और। तुम्हें मुफ्त।
- 1:12:09खाना मिलेगा, वस्त्र मिलेगा, रहने के लिए मकान मिलेगा।
- 1:12:23सोने के लिए बिस्तर मिलेगा। अलग से डेरों वगैरह की कोई जरूरत
- 1:12:31नहीं है। वहाँ आप लोगों के बिस्तरे लगेंगे
- 1:12:35जो बाहर सड़कों पर सोते हैं। और यह होगा तुम जो चाहे कर सकते
- 1:12:53हो। मुझे कोई उससे लेना देना नहीं,
- 1:12:56तुम राम राम करो, तुम राधे राधे करो यह तुम्हारी श्रद्धा का जो भी
- 1:13:01कारण है उसे मैं नहीं खेचुंगा मुझे पता है।
- 1:13:05जब तुम आसपास बैठे हुए लोगों को आनंद की मस्ती में झूमते देखोगे
- 1:13:10तो तुम्हारे भीतर करंट लगेगा। 440 का।
- 1:13:15और धीरे धीरे तुम भी उनकी। रेंज में फंसते चले जाओगे।
- 1:13:19तुम भी अपने भीतर उतरते चले जाओगे तो फिर आपने।
- 1:13:24प्रचुर मात्रा में पौष्टिक भोजन लेना जिसमें प्रोटीन,
- 1:13:35कार्बोहाइड्रेट, फैट्स, विटामिन, मिनरल्स सभी चीजें।
- 1:13:43तो सुबह सैर हो गई, सुबह ऑक्सीजीनेटेड बॉडी हो गई।
- 1:13:50सारे दिन तुमने काम किया। जो भी जिसका काम है सभी को रोजगार
- 1:13:58मिलेगा। सभी को काम मिलेगा।
- 1:14:02और अगर कुछ हाथ। हमारे पास खाली रह गए तो और बड़े
- 1:14:06काम हैं। हम तुमसे पेड़ लगाने को कहेंगे जो
- 1:14:10इन दुष्टों ने बर्बाद कर दिया है उनकी रक्षा करने को कहेंगे और यह
- 1:14:18तुम काम समझ के नहीं करोगे। वरना इससे तुम बड़े प्रेम पुरख और
- 1:14:25श्रद्धापूर्वक करोगे जैसे तुम भक्ति करते हो।
- 1:14:32फिर भी जो लोग बच गए, उनको हम हॉस्पिटल्स में भेजेंगे।
- 1:14:38वहाँ कोई गरीब है, कोई बीमार है, गरीब, कम पर्व शरीर से गरीब वृद्ध
- 1:14:43हो गया है चला नहीं जाता, कोई अंधा है, दिखता नहीं उसकी सेवा
- 1:14:50करो, तुम्हें नहीं पता। लाचार अवस्था में।
- 1:14:55जीस व्यक्ति की तुम सेवा करोगे। के भीतर से परमात्मा में आशीष
- 1:15:00देखा और वह आशीष बड़ी कीमती है। उसका कोई मूल्य नहीं होता।
- 1:15:13ये सारे दिन की दिनचर्या हो गयी। फिर तुम जब पौष्टिक भोजन।
- 1:15:23खाओगे? आराम करना है, आराम।
- 1:15:27कर लो दोपहर में रात को गहन नींद सो अगर कोई बीमार है उसके लिए।
- 1:15:38हर 100 घर के पीछे एक डॉक्टर हो भाई 100 घर के विषय ताकि ना
- 1:15:48डॉक्टर को परेशानी हो ना आपको परेशानी हो।
- 1:15:51अभी तो आपकी लाइन ही नहीं आती शाम तक।
- 1:16:01फिर आप में शक्ति आएगी, आपको अच्छे अच्छे इतिहास पढ़ाए जाएंगे,
- 1:16:10हमारे वीरों की गाथा सुनाई जाएगी, जो मातृभूमि पर न्योछावर हो गए,
- 1:16:17उनका भी इतिहास बताया जाएगा। और जो मातृभूमि पर न्योछावर होने
- 1:16:23के बिना माफीनामा मांगते रहे, उनका भी इतिहास बताया जाएगा और
- 1:16:28तुम्हें सिखाया जाएगा कि यह करो और यह मत करो उलट बातें तुम्हें
- 1:16:36नहीं सिखाई जाएंगी। जो तुम्हारी ज़िन्दगी को।
- 1:16:41सूखी और खुशहाल बनाने वो तुम्हें सिखाई जाएगी।
- 1:16:50हर 20 व्यक्ति के विषय एक टीचर होगा, हर 100 घरों के विषय एक
- 1:16:55डॉक्टर होगा। जरूरत है इन लोगों की तुम खुला
- 1:17:02रहे हो मंदिर घंटे खड़काए जाओ, पेट भूख तो लगेंगी फिर भूख को
- 1:17:10शांत करने के लिए तुम ठगियाँ मारो।
- 1:17:14सारी दुनिया दुखी है वो तुम्हारे पास आएगी।
- 1:17:17तुम कहोगे ऐसा करो ये साढ़ सती चढ़ गई ये राहु पे केतु बैठ गया
- 1:17:23है, इसका हवन करा दो क्योंकि उसने अपने बच्चों का पेट भी भरना है,
- 1:17:30उसने तुमको लूटना दिया बड़े डाकू तुम्हें लूटते रहेंगे छोटे डाकू।
- 1:17:37तुम्हारी जेब काटते रहेंगे वो चोर है बड़े डाकू दिल्ली में बैठे है
- 1:17:44पार्लियामेंट हॉउस। छोटे डाकू तुम्हारी जेबें।
- 1:17:49काटनी है ये पंडित ये चोर है लेकिन ये गुंडागर्दी चलेगी?
- 1:17:58क्योंकि दक्षिणा में तुम जो। करेन्सी देते हो वो करणसी खत्म कर
- 1:18:03दूंगा मैं। कैसे तुम शक्ति को।
- 1:18:09कमाओगे पौष्टिक भोजन करके आराम करो।
- 1:18:15जो तुम्हें काम मिला है? मैं जानता हूँ कि।
- 1:18:19ऐसे माहौल में तुम श्रद्धापूर्व काम करोगे।
- 1:18:24जब। व्यक्ति बोझ हीन।
- 1:18:26अवस्था में होता है तो उसके काम करने की क्षमता और उसके काम करने
- 1:18:31का। जो ढंग है वो ज्यादा अच्छा होता
- 1:18:39है। आपकी सारी जरूरतें पूरी करने के
- 1:18:48लिए आप दिन भर रात एक कर देते हो। कितना पाप झड़ाते हो और आखिर में
- 1:18:53सब छोड़ के विदा हो जाते हो। मैं इकट्ठा ही नहीं करने।
- 1:18:59दूंगा ये बात मैं तुम्हे करना ही नहीं, तुम अपने आप तो छोड़ते नहीं
- 1:19:07लेकिन मैं ये तुमसे छुड़वा दूंगा, तुम चिंता मत करो, तुम सही ढंग से
- 1:19:15चलोगे जो ढांगा अपनाना चाहते? हम किसी को कोई दंड नहीं।
- 1:19:22देंगे क्योंकि वह उनका। वह खुद ही बहक गए हैं।
- 1:19:30उनको उनके गुरुओं ने बहका दिया। उनको उनके गुरुओं ने आदिकाल से
- 1:19:35बहकाने वाले लोग। पैदा होते रहे हैं।
- 1:19:39चारवाक जैसे। जो कहते हैं छीन लो काट।
- 1:19:43लो लूट लो, डाका मार लो ऋणम कृतवा प्रीतम जीवेद यदा जीवेद सुखी
- 1:19:49जीवेद भस्मभूत से देह से पुनः आगमनम कुथा।
- 1:19:55ना ऋण लेने वाला ना? ऋण देने वाला दोनों में कोई नहीं
- 1:19:59बचेगा। इसलिए तुम ऋण उठाओ, ठगी मारो,
- 1:20:03चोरी करो डाकक और तुम घी पीओ। खैर, उस वक्त शराब में होती थी।
- 1:20:13आज अगर चार बाग आ जाएं। वो कहेंगे ऋण मुख्तवा मदन पी वैत
- 1:20:20शराब पियो, कर्ज उठे। शराब।
- 1:20:26पी मिलेंगे। रेकमेंडेड डोस 65 एमएल।
- 1:20:33जीसको डॉक्टर कहेगा उसको यहाँ कोई मेरे कारण दुखी नहीं होगा, समझ
- 1:20:42लेना बात को व्यवस्था के कारण दुखी नहीं होगा।
- 1:20:49पिछली बार। यह एक संयोग ही।
- 1:20:54समझो। जब जब साहेब।
- 1:20:58पश्चिमी बंगाल में वोट मांगने जाते हैं तब तब।
- 1:21:02भारत भूमि पर। कोई न कोई उपद्रव आता है।
- 1:21:10पिछली बार कोरोना फैल किया। हमने जीस से गंगा को साफ करने के
- 1:21:15लिए नमामि गंगे 20,000 करोड़ का प्रावधान रखा था।
- 1:21:21वो गंगा साफ तो नहीं हुई वरन उसमें तैरती हुई लाशें हमने देखी,
- 1:21:26तुमने वो देखी? उसके किनारों पर दबी हुई लाशें भी
- 1:21:30हमने देखीं और कुत्ते नोच रहे थे। ये भी हमने देखा और।
- 1:21:34बिना कफन के। पड़ी थी लाशें ये भी हमने देखा और
- 1:21:39तुम अपने लिए पारदिया में हाउस बना रहे थे नया जबकि पुराना किरा
- 1:21:44नहीं था। ये भी हमने देखा और साहब दीदी ओह
- 1:21:54दीदी, आज भी वही संयोग है चारों तरफ बम्बारी हो रही है अस्त
- 1:22:06व्यस्त है दुनिया। और साहेब वो ही पश्चिमी बंगाल में
- 1:22:10जाके वोट और एक बात सुन लो ज्ञानेश ज्ञानचंद जी महाराज हो के
- 1:22:17ज्ञान कुमार हो मुझे नहीं पता नाम नुम मैं अक्सर भूल जाया करता हूँ।
- 1:22:26अगर। ईमानदारी से वोटिंग हुई।
- 1:22:32तो तुम्हारा कर्तव्य बनता। है तुम।
- 1:22:36पगार ही इस चीज़। की लेते हो वो पगार हम देते हैं?
- 1:22:41एक साबुन की टिकिया भी। खरीदते हैं तो उसके लिए।
- 1:22:45टैक्स हम देते हैं जिसे तुम जीएसटी कहते हो।
- 1:22:50अगर कुछ बनता है। इनकम टैक्स वो भी देते हैं।
- 1:22:57जो पगार तुम लेते हो? ना ज्ञानचंद जी महाराज वो।
- 1:23:01हमारे से जाती है। हम मालिक है, आप हमारे सेवकों।
- 1:23:07गुस्सा मत होना अगर। गुस्सा हो भी जाओगे तो मेरा क्या
- 1:23:10लोगे? खुद ही खराब हो अगर एक भी वोट का
- 1:23:20हमें पता चल गया इवन ए सिंगल वोट। कि तुमने शैतानिय से काटी यह
- 1:23:30शैतानिय से भुगतने नहीं दी या शैतानिय से तुमने गिनती में
- 1:23:35हेराफेरी कर या तुमने किसी ईवीएम मशीन को हैक कर लिया तो याद रखो।
- 1:23:44मैं ये बात किसी आवेश में नहीं कह रहा है।
- 1:23:52सत्य। की शक्ति को।
- 1:23:53स्रंध लेकर बोल रहा हूँ अगर मिस्टर ज्ञानेश कमार।
- 1:24:01तुमने अपना रेफरी का। रोल अदा नहीं किया।
- 1:24:06तुमने किसी पक्ष की? तरफ झुकाव रखा तो समझ लेना जिनके
- 1:24:11लिए। लेकिन मैंने एक शब्द।
- 1:24:15है। अगर।
- 1:24:20ऐसी कुताही तुमने जो कर। दी उसका तो हम हिसाब लेंगे बाद
- 1:24:23में। लेकिन अगर इन पांच।
- 1:24:31चुनावों में मेरी यह वीडियो ज्ञानी कुमार तक जरूर पहुँच जाए।
- 1:24:38ऐसा काम करें, इसे शॉट बना के भेजो।
- 1:24:43इसे एस इट इस भेजो। मुझे कोई बात नहीं।
- 1:24:49लेकिन अगर तुमने। अपनी शैलानियों से, अपनी पदवी पर,
- 1:24:57जिसे हमने तो नहीं बताया? हमने चुना।
- 1:25:03हम चुनने जा रहे हैं जिन लोगों को क्योंकि लोग स्वतंत्र हैं और
- 1:25:0710,00,000 लोगों की गर्दनें उड़ा के यह अधिकार हमें मिला है।
- 1:25:13आप एक व्यक्ति? 10,00,000 लोगों की कुर्बानियत को
- 1:25:18कुएं में नहीं डाल सकते। वो वक्त हमें जाते हैं।
- 1:25:24भरी ठंडी के अंदर एक चादर दिए। 178 साल।
- 1:25:32का बूढ़ा कैसे नवाखली में पश्चिम बंगाल में चल रहा था लठ लिए।
- 1:25:39तुम तो तब जन्मे भी नहीं थे। अगर इस स्वतंत्रता को लेने के लिए
- 1:25:48हमारे। वीरों का शहीद।
- 1:25:50आजम, भक्त सिंह, राजगुरु, सुखदेव, सुभाष चंद्र बोस।
- 1:25:56और सभी सूरमाओं का अगर तुमने अपमान कर दिया।
- 1:26:00और यह अपमान होगा अगर तुमने एक वोट भी निष्पक्षता से नहीं
- 1:26:10डलवाया। फिर इसका मतलब?
- 1:26:15तन चाहते। हो?
- 1:26:17और सी जीआइ साहब मेरी। बात को ध्यान से समझ लो, मैं
- 1:26:21कानून से बाहर की कोई बात नहीं कर रहा।
- 1:26:27जब हम इनको पगार देते। हैं।
- 1:26:29हम तुमको भी बिगाड़ देते हैं। सी जी साहब हाँ, आप भी हमारे सेव
- 1:26:33करो। प्रत्येक व्यक्ति किसी भी हंकार
- 1:26:38में मत आए। वह हमारा सेवक है सेवा करने के
- 1:26:43लिए आया है हमारी। गर्दनें कटवाने के।
- 1:26:46लिए नहीं आया है। हम पर हुक्मरान बनने के लिए नहीं
- 1:26:50आया है, हमारी सेवा करने के लिए आया है मैनेजमेंट करने के लिए आया
- 1:26:54हम जब दुख दर्द में हों। तो उसका इंतजामात करें।
- 1:26:58पिछली बार करोना में आपने क्या इंतजाम किया?
- 1:27:03और आपके फिर साहब कहते? हैं कि करोना काल की तरह ही आपको
- 1:27:07करना होगा। यानी प्राइम मिनिस्टर रिलीफ फंड
- 1:27:09के अंदर पैसा जमाना होगा और हम उसका हिसाब नहीं देंगे।
- 1:27:15कोरोना काल तो आपके। लिए शुभकाल हुआ क्योंकि जो पैसा
- 1:27:20इकट्ठा हुआ वो आपकी तिजोरियों में अडानी, अंबानी जैसे सेतों के पास
- 1:27:26गया और तुम देखो मैं करेंसी की वैल्यू भी खत्म कर दूंगा।
- 1:27:34तो ज्ञानेश कुमार जी तुम्हें विशेष कहता हूँ क्योंकि यहाँ से
- 1:27:37चलती है प्रथम स्टेप यह है अगर तुमने प्रथम स्टेप ही टेढ़ा बिंगा
- 1:27:44कर दिया तो सब खुराफात हो जाएगा। फिर इसका दोष।
- 1:27:53जनता को मत देना। जनता तो सर पे।
- 1:27:59कसन बांध लिया है ये कत लोग और महाभारत की तरह अगर फिर से धरती
- 1:28:08लाल होगी। तो उसके मुख्य मुख्य।
- 1:28:12कारण तुम होगे गणेश कुमार। राजीव कुमार, सुलटेंगे।
- 1:28:19तुम्हें भी मैं बहुत बार कह चुका हूँ सुलटेंगे उन्हें भी जिन लोगों
- 1:28:26ने गंध से लाये थे। शहीदों की चिताओं पर।
- 1:28:31लगेंगे हर वर्ष मेले, वतन पे मरने वालों का यही वाकई निशान होगा
- 1:28:38तुमने उनकी लाशों का सौदा कर लिया तुम्हारी?
- 1:28:43ज़मीरें बिल्कुल मर। गई।
- 1:28:47शिजय साहब, वक्त। रहते इस पर पाबंदी।
- 1:28:53जो गलत हो रहा है उस पर। पाबंदी लगा दो यू कैन डू?
- 1:28:59और अगर आपने भी नहीं। किया तो कलंकित इतिहास में आपका
- 1:29:05नाम भी। काले अक्षरों में लिखा जाना तय
- 1:29:08है। अरे इलेक्टोरल वोल्ट तो हुआ।
- 1:29:20लेकिन दंड तो किसी को मिला नहीं। ये तो वो बात हुई के हत्या तो हुई
- 1:29:28कतल तो हुआ। लेकिन अपराधी कौन?
- 1:29:32था, यह पता नहीं दंड किसी को मिला नहीं।
- 1:29:36फिर यह बात खंगालने का इतनी शक्ति लगाने का अर्थ क्या हुआ।
- 1:29:42तुम क्यों कुर्सी पर बैठे रहे थे? तुमसे भी पूछा जाएगा।
- 1:29:46चन्द्रचूड़, महुदय जन जन ने भी हमारे वीरों की कुरबानियों को धूल
- 1:30:01फंकवा दी, उनके बच्चे धूल फांकेंगे।
- 1:30:09बड़ी देर। भाई नद लाला तेरी राह तके ब्रजवा।
- 1:30:20कॉल बाल। इक एक से पूछ।
- 1:30:25कहा है मुरली हवाला रे बड़ी देह, कोई नंदलाला, तेरी राह के ब्रज
- 1:30:39बाला गाल बाल। इक इक से पूछे कहाँ है मुरली वाला
- 1:30:50रे बढ़ दे भाई नन्द लाला तेरी राह तके ब्रज बाला।
- 1:31:01कोई न जाए कुंज कलिन में तुझे बिन कलियाँ चुनने को तुझे बिन कलियाँ
- 1:31:15चुनने को कोई न जाए। कुंज गलिन में तुझे बिन कलियाँ
- 1:31:25चुनने को तुझे बिन कलियाँ चुनने को तरस रहे हैं।
- 1:31:44तरस रहे हैं यमुना के तट मुरली की धुन सुनने को, मुरली की धुन सुनने
- 1:31:57को। अब तो दरस दिखा जा नटखट क्यों
- 1:32:05दुविधा में डाला रे बड़ी देर भाई नंदला तेरी राह तो के।
- 1:32:18बृजभाला जदा जदा ही धर्मस्य गला निर्भवती भारत अब्दुथानम अधर्मस्य
- 1:32:29तदामानम शिरजा में हम पृत्रनाय साधुना।
- 1:32:36विनाशाई से दुष्कृताम धर्म संस्थापना।
- 1:32:55जुगे युगे। धन्यवाद।